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  • बिहार में सत्ता परिवर्तन की आहट: 14 अप्रैल को नए सीएम का ऐलान, 15 को शपथ ग्रहण संभव

    बिहार में सत्ता परिवर्तन की आहट: 14 अप्रैल को नए सीएम का ऐलान, 15 को शपथ ग्रहण संभव

    पटना। बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पहली बार राज्य में अपना मुख्यमंत्री बनाने की दिशा में सक्रिय नजर आ रही है। इसी कड़ी में पार्टी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को विधायक दल के नेता के चयन के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।

    14 अप्रैल को होगा नेता का चयन

    शिवराज सिंह चौहान 14 अप्रैल को पटना पहुंचेंगे। उनकी मौजूदगी में भाजपा विधायक दल की बैठक में नए नेता के नाम पर मुहर लगेगी। इसके बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी दल—जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा—की बैठकों के बाद संयुक्त बैठक में मुख्यमंत्री के नाम का औपचारिक ऐलान किया जाएगा।

    15 अप्रैल को शपथ ग्रहण की तैयारी

    सूत्रों के मुताबिक, नई सरकार का शपथ ग्रहण 15 अप्रैल को संभावित है। कार्यक्रम के लिए लोकभवन के साथ-साथ बापू सभागार को भी तैयार रखा गया है। पहले चरण में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और कुछ वरिष्ठ मंत्री शपथ लेंगे, जबकि बाद में मंत्रिमंडल विस्तार किया जाएगा। समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना है।

    राज्यपाल को सौंपा जाएगा दावा

    एनडीए विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद 14 अप्रैल की शाम को ही राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा।

    नीतीश सरकार की आखिरी कैबिनेट

    वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 14 अप्रैल को सुबह 11 बजे कैबिनेट की अंतिम बैठक की अध्यक्षता करेंगे। यह बैठक उनके लंबे कार्यकाल की आखिरी कैबिनेट मानी जा रही है। बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है। इसके बाद वे डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित कर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा सौंपेंगे।

    ‘हर जिम्मेदारी निभाऊंगा’—शिवराज

    पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वह पार्टी के एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएंगे।

    सीएम आवास पर बढ़ी हलचल

    इधर, पटना में मुख्यमंत्री आवास पर नेताओं की आवाजाही भी तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई नेताओं ने नीतीश कुमार से मुलाकात कर आगे की रणनीति पर चर्चा की।

    बिहार की राजनीति अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां 14 और 15 अप्रैल की तारीखें सत्ता परिवर्तन की दिशा तय करेंगी।

  • असम चुनाव में गरमाया माहौल: कुनकी चौधरी को पुलिस का समन

    असम चुनाव में गरमाया माहौल: कुनकी चौधरी को पुलिस का समन

    गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव के बीच सियासी माहौल और गरमा गया है। गुवाहाटी सेंट्रल सीट से चुनाव लड़ रहीं युवा उम्मीदवार कुनकी चौधरी को पुलिस ने आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन के मामले में पूछताछ के लिए समन जारी किया है।

    उन्हें पान बाजार थाने में तलब किया गया, जहां उन्होंने अपना पक्ष रखा।

    कैंपेन टीम पर कार्रवाई, तीन सदस्य हिरासत में

    मतदान खत्म होने के कुछ घंटों बाद पुलिस ने इस मामले में उनकी कैंपेन टीम के तीन सदस्यों को हिरासत में लिया था। पुलिस के अनुसार, ये तीनों सदस्य हरियाणा के रहने वाले हैं और चुनाव नियमों का उल्लंघन करते हुए मतदान से 48 घंटे पहले भी क्षेत्र में मौजूद थे।

    सबसे युवा उम्मीदवार पर सियासी घमासान

    27 वर्षीय कुनकी चौधरी इस चुनाव की सबसे युवा उम्मीदवार हैं और असम जातीय परिषद (AJP) के टिकट पर मैदान में हैं। उनका मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार विजय गुप्ता से है।

    इस बीच मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने चौधरी और उनके परिवार पर तीखे आरोप लगाए, जिससे यह मुकाबला और ज्यादा चर्चा में आ गया।

    सरमा ने सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर उनके परिवार पर सवाल उठाए थे।

    किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

    पुलिस ने यह केस लोक सेवक के आदेश में बाधा डालने, चुनाव के दौरान अनुचित प्रभाव डालने और जनप्रतिनिधित्व कानून के उल्लंघन से जुड़ी धाराओं के तहत दर्ज किया है। आरोप यह भी है कि मतदान के दिन भी प्रचार जारी था और सुरक्षा कर्मियों को मतदान केंद्रों के पास ले जाया गया।

    चौधरी ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

    पूछताछ के बाद कुनकी चौधरी ने कहा कि उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि मुझे अपना पक्ष रखने का मौका मिला। मुझे सिस्टम पर भरोसा है और जांच निष्पक्ष होगी।”

    विपक्ष का आरोप—प्रशासन का दुरुपयोग

    वहीं, लुरिंज्योति गोगोई ने इसे राजनीतिक दबाव बताते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल प्रशासन और पुलिस का इस्तेमाल कर विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है।

    क्यों अहम है यह मामला?

    गुवाहाटी सेंट्रल सीट पर मुकाबला इस बार खासा दिलचस्प हो गया है। एक तरफ युवा चेहरा और उभरती राजनीति, तो दूसरी तरफ सत्ताधारी दल की मजबूत पकड़—ऐसे में यह विवाद चुनावी परिणामों पर भी असर डाल सकता है।

  • सऊदी भागा आकिब, एटीएस जांच में बड़ा खुलासा; 2025 से लापता, लुकआउट नोटिस जारी

    सऊदी भागा आकिब, एटीएस जांच में बड़ा खुलासा; 2025 से लापता, लुकआउट नोटिस जारी


    लखनऊ। संदिग्ध आतंकी कनेक्शन की जांच में घिरे आकिब के खिलाफ अब एजेंसियों ने शिकंजा कसना तेज कर दिया है। एटीएस की पड़ताल में सामने आया है कि वह चार बार सऊदी अरब जा चुका है और अगस्त 2025 में चौथी बार विदेश जाने के बाद से अब तक भारत नहीं लौटा है। उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया गया है, वहीं पासपोर्ट निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

    जांच में सामने आई ट्रैवल हिस्ट्री के मुताबिक, आकिब का पासपोर्ट 9 अप्रैल 2018 को बना था। वह पहली बार 4 अगस्त 2019 को सऊदी अरब गया और 8 फरवरी 2022 को भारत लौटा। इसके बाद 8 अप्रैल 2022 को दोबारा सऊदी गया और 11 अप्रैल 2023 को वापस आया। तीसरी बार वह 20 जून 2023 को गया और 22 जुलाई 2025 को भारत लौटा। हालांकि, महज 10 दिन बाद ही 1 अगस्त 2025 को वह फिर सऊदी चला गया और तब से वहीं पर है।

    एटीएस ने उसकी पूरी यात्रा का ब्योरा खंगाल लिया है और अब उसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आकिब के हिरासत में आने के बाद आतंकी मॉड्यूल और संभावित साजिश से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।

    वीडियो जारी कर दी सफाई, कहा—अगर गलत हूं तो गोली मार देना

    इधर, मामले में तीन दिन पहले मॉड्यूल से जुड़े उवैद और जलाल हैदर की गिरफ्तारी के बाद यह प्रकरण और चर्चा में आया। इसी बीच आकिब ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी है।

    वीडियो में उसने पुलिस अधिकारियों के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि वह देश की सुरक्षा करने वालों की इज्जत करता है। उसने यह भी दावा किया कि उसने अपने साथी को पुलिस के सामने सरेंडर कर सच्चाई बताने की सलाह दी थी। आकिब ने अपने ऊपर लगे आतंकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने कोई आपराधिक गतिविधि नहीं की, केवल गुस्से में अपशब्द कहे थे।

    वीडियो के अंत में उसने भावुक अपील करते हुए कहा, “मैं अपने ऊपर आतंकवादी का ठप्पा नहीं लगने दूंगा। अगर मैं गलत हूं, तो मेरे माथे पर गोली मार देना।”

    फिलहाल, एजेंसियां उसके ठिकाने और नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हैं।

  • भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा ईरान युद्ध का असर… महंगे तेल ने बिगाड़ी हालत


    नई दिल्ली।
    ग्लोबल स्तर (Global Level) पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में तेज उछाल अब भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) पर भी असर दिखाने लगा है। हाल ही में आई मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) की रिपोर्ट में भी इसका संकेत साफ दिखाई देता है। रिपोर्ट के मुताबिक, महंगे तेल की वजह से भारत की आर्थिक ग्रोथ पर दबाव बढ़ गया है। यही वजह है कि FY2027 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान घटाकर 6.2% कर दिया गया है। आइए जरा विस्तार से समझते हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का सीधा असर भारत पर कैसा पड़ेगा?

    आपको बता दें कि जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। इससे ट्रांसपोर्ट, उत्पादन और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाती हैं। इसका नतीजा यह होता है कि लोगों की जेब पर दबाव बढ़ता है और खर्च कम हो जाता है, जिससे डिमांड भी कमजोर पड़ने लगती है।


    95 डॉलर प्रति बैरल होंगी तेल की कीमतें

    रिपोर्ट के अनुसार, अगर तेल की कीमतें औसतन 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती हैं, तो उद्योगों की लागत बढ़ेगी, कंपनियों का मुनाफा घटेगा और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा, जो बढ़कर करीब 5.1% तक पहुंचने का अनुमान है।

    85% कच्चा तेल आयात
    भारत की एक बड़ी चुनौती यह भी है कि वह अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिससे तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ जाता है और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) भी बढ़कर 2.5% तक जा सकता है। इससे रुपये पर भी दबाव बन सकता है।

    किस-किस पर होगा असर?
    इसका असर आम लोगों से लेकर कंपनियों और सरकार तक सभी पर पड़ता है, जहां आम आदमी की खरीदारी घटती है, वहीं कंपनियों के खर्च बढ़ जाते हैं और सरकार को सब्सिडी बढ़ानी पड़ सकती है। हालांकि, RBI (Reserve Bank of India) फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखते हुए स्थिति संभालने की कोशिश कर सकता है। अगर हालात और बिगड़ते हैं और तेल 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचता है, तो ग्रोथ 5.7% तक गिर सकती है और महंगाई 6% के पार जा सकती है। फिर भी मजबूत घरेलू मांग और सरकारी नीतियों की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था इस चुनौती का सामना करने में सक्षम मानी जा रही है।

  • हेल्थ इंश्योरेंस सिस्टम को ज्यादा सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की तैयारी…


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) ने हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) के क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत बीमा नियामक इरडा (Insurance Regulator IRDA) ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, जो हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) के पूरे ढांचे की गहराई से जांच करेगी और ऐसे सुझाव देगी, जिससे सिस्टम ज्यादा सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बन सके।

    इसका मकसद बीमा लेने वाले लोगों की परेशानियों को कम करना और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसकी पहुंच बनाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में पिछले कुछ वर्षों में हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही समस्याएं भी बढ़ी हैं। लोग लगातार बढ़ते प्रीमियम, अस्पतालों की मनमानी बिलिंग, क्लेम में देरी और पॉलिसी की जटिल शर्तों से परेशान हैं।


    कम हुआ आम लोगों का भरोसा

    कई बार बीमा होने के बावजूद मरीज को बड़ी रकम अपनी जेब से खर्च करनी पड़ती है। यही वजह है कि आम लोगों का भरोसा इंश्योरेंस सिस्टम पर कुछ हद तक कम हुआ है। इन समस्याओं को देखते हुए बीमा ढांचे में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।


    अस्पतालों की मनमानी बिलिंग सबसे बड़ी समस्या

    अस्पतालों की मनमानी बिलिंग सबसे बड़ी समस्या है। एक ही बीमारी के इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में अलग-अलग खर्च लिया जाता है। इस गड़बड़ी को दूर करने के लिए अस्पतालों की फीस और टैरिफ सिस्टम की समीक्षा की जाएगी, ताकि इलाज की कीमतों में पारदर्शिता लाई जा सके।


    क्या करेगी समिति

    हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े हर पहलू की समीक्षा करेगी। समिति यह भी देखेगी कि हेल्थ इंश्योरेंस कितने लोगों तक पहुंच रहा है, दावा निपटान की प्रक्रिया कैसी है, नए बीमा प्लान कैसे बनाए जाएं, लोगों की शिकायतों का समाधान कैसे तेज किया जाए। इसके अलावा फर्जी दावे, गलत बिलिंग और प्रशासनिक कमियों को दूर करने के उपाय भी सुझाएगी।

    इसके लिए बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश होगी। समिति यह भी देखेगी कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और निजी बीमा के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए। इससे लोगों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे और बीमा का फायदा ज्यादा लोगों तक पहुंच सकेगा। साथ ही पॉलिसी को एक कंपनी से दूसरी कंपनी में ले जाना भी आसान हो सकता है।

  • सफलता की ऊंचाइयों के बाद भी अधूरी रही ये ख्वाहिश, Asha Bhosle की भावुक कहानी

    सफलता की ऊंचाइयों के बाद भी अधूरी रही ये ख्वाहिश, Asha Bhosle की भावुक कहानी


    नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत की महान हस्ती Asha Bhosle के निधन ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके जाने से न सिर्फ बॉलीवुड, बल्कि करोड़ों फैंस के दिलों में खालीपन आ गया है।

    रिकॉर्ड्स बनाए, लेकिन एक कमी रह गई

    अपने 70+ साल लंबे करियर में आशा ताई ने हजारों गाने गाकर अनगिनत रिकॉर्ड बनाए। हिंदी, मराठी, बंगाली से लेकर कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में गाकर उन्होंने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। लेकिन इतनी बड़ी सफलता के बावजूद उनके मन में एक अधूरा सपना हमेशा रहा।

    पढ़ाई और अंग्रेजी न सीख पाने का अफसोस

    Asha Bhosle को इस बात का जीवनभर अफसोस रहा कि उन्हें पढ़ाई का पूरा मौका नहीं मिला। उन्होंने खुद एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि अगर उन्होंने अच्छी शिक्षा ली होती और अंग्रेजी भाषा सीखी होती, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी पहचान बना सकती थीं। उन्होंने बताया था कि जब वे विदेश जाती थीं और अंग्रेजी गाने सुनती थीं, तो उन्हें यह महसूस होता था कि काश वे भी उस स्तर पर गा पातीं।

    उस दौर की सोच बनी रुकावट

    आशा ताई ने यह भी कहा था कि उनके समय में महिलाओं की शिक्षा को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। समाज की सोच के कारण उन्हें पढ़ाई का मौका नहीं मिला, जिसका असर उनके करियर के एक हिस्से पर पड़ा।

    युवाओं को दिया संदेश

    उन्होंने युवाओं को हमेशा यही संदेश दिया कि सफलता के लिए मेहनत और सीखना बेहद जरूरी है। उनका मानना था कि अगर उन्हें सही शिक्षा मिली होती, तो वे और भी ऊंचाइयों तक पहुंच सकती थीं।

  • अयोध्या में श्रद्धालुओं के लिए आज से खुल जाएंगे राम मंदिर परिसर के उप मंदिर…7 स्लॉट में होंगे दर्शन

    अयोध्या में श्रद्धालुओं के लिए आज से खुल जाएंगे राम मंदिर परिसर के उप मंदिर…7 स्लॉट में होंगे दर्शन


    अयोध्या।
    रामनगरी अयोध्या (Ramnagari Ayodhya) आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। सोमवार से राम मंदिर परिसर (Ram Temple complex) के उप मंदिरों (Sub-temples) के दर्शन आम भक्तों के लिए शुरू होने जा रहे हैं। दर्शन शुरू होने से पहले ही श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है और ऑनलाइन पास बनवाने की होड़ मच गई है। पहले ही दिन यानी 13 अप्रैल के लिए करीब 80 प्रतिशत पास बुक हो चुके हैं।

    जानकारी के अनुसार, पहले चरण में 13 अप्रैल से 27 अप्रैल तक दर्शन के लिए ऑनलाइन पास जारी किए जा रहे हैं। जैसे ही बुकिंग शुरू हुई, श्रद्धालुओं ने तेजी से स्लॉट आरक्षित कराने शुरू कर दिए। राम मंदिर ट्रस्ट के बेबसाइट पर 13 अप्रैल के सभी सात स्लॉटों के करीब 2600 पास शाम चार बजे तक बुक हो चुके थे। कुल सात स्लॉट (सुबह सात से नौ, नौ से 11, 11 से एक, एक से तीन, तीन से पांच, पांच से सात, सात से नौ) में रोजाना 3500 सामान्य पास जारी किए जाएंगे। हर स्लॉट में 500 पास जारी होंगे। पहले दिन के सुबह के पहले और दूसरे स्लॉट के सभी पास लगभग फुल हो चुके हैं, जबकि दिन के आखिरी दो स्लॉट के भी करीब 90 प्रतिशत पास बुक हो चुके हैं।

    एक पास पर अधिकतम पांच श्रद्धालु दर्शन कर पाएंगे। एक दिन में 17500 श्रद्धालुओं को दर्शन की सुविधा मिलेगी। उप मंदिरों के दर्शन को लेकर भक्तों में विशेष आकर्षण है। लंबे समय से श्रद्धालु इन मंदिरों के खुलने का इंतजार कर रहे थे। अब जैसे ही तिथि घोषित हुई, देशभर से रामभक्तों ने अयोध्या आने की तैयारी तेज कर दी है। मंदिर प्रशासन की ओर से दर्शन व्यवस्था को सुचारु और व्यवस्थित बनाने के लिए ऑनलाइन पास प्रणाली लागू की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को सुगम और सहज दर्शन का लाभ मिल सके।

    राम मंदिर परिसर के उप मंदिरों में सोमवार से दर्शन शुरू हो जाएगा। भक्त तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बेबसाइट srjbtkshetra.org पर जाकर जरूरी दिशा-निर्देशों का पालन कर पास बनवा सकते हैं। सामान्य पास पर श्रद्धालु सप्त मंडपम, शेषावतार, कुबेर टीला व राम परिवार का दर्शन कर सकेंगे। जबकि परकोटा के गणेश मंदिर का भी दर्शन होगा। अभी एक सप्ताह का ट्रायल किया जा रहा है। बाद में परकोटा के सभी मंदिरों में भी दर्शन शुरू हो जाएंगे। सुगम व विशिष्ट पासधारकों को भी उप मंदिरों में दर्शन की सुविधा प्रदान की जाएगी। – डॉ़ अनिल मिश्र, सदस्य, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट

  • महिलाओं को संसद-विधानसभाओं में तत्काल 33% आरक्षण देने की मांग… SC में आज होगी सुनवाई

    महिलाओं को संसद-विधानसभाओं में तत्काल 33% आरक्षण देने की मांग… SC में आज होगी सुनवाई


    नई दिल्ली।
    देशभर में जहां एक ओर महिलाओं को संसद और विधानसभा (Parliament and Legislative Assemblies) में 33% आरक्षण (33% Women Reservation ) देने के मुद्दे को लेकर सियासत तेज हो गई है। वहीं दूसरी ओर अब इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अहम सुनवाई होने जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) आज यानी सोमवार 13 अप्रैल को इस मामले पर सुनवाई करेगा। यह याचिका कांग्रेस नेता जया ठाकुर (Jaya Thakur) ने दाखिल की है। इसमें मांग की गई है कि महिलाओं को आरक्षण देने वाला कानून नारी शक्ति वंदन अधिनियम तुरंत लागू किया जाए और इसे जनगणना व परिसीमन से न जोड़ा जाए।

    फिलहाल इस कानून में यह प्रावधान है कि महिलाओं को 33% आरक्षण तभी मिलेगा, जब अगली जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। लेकिन याचिका में कहा गया है कि यह शर्त जरूरी नहीं है, क्योंकि सीटों की संख्या पहले से तय है और देश की लगभग आधी आबादी होने के बावजूद महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है।


    जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच करेगी सुनवाई

    इस मामले की सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच करेगी। इससे पहले 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कानून के इस प्रावधान को रद्द करना बहुत मुश्किल होगा। यह सुनवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र शुरू होने वाला है, जिसमें महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए संशोधन बिल लाया जा सकता है।


    पीएम मोदी ने सभी नेताओं से की है अपील

    बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर इस कानून को सर्वसम्मति से पास करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि देश को विकसित बनाने के लिए महिलाओं की ज्यादा भागीदारी जरूरी है। हालांकि, कांग्रेस ने इस विशेष सत्र का विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि यह कदम चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हो सकता है, क्योंकि इस समय तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। साथ ही कांग्रेस ने मांग की है कि पहले परिसीमन पर सभी दलों की बैठक होनी चाहिए, उसके बाद ही महिला आरक्षण पर आगे बढ़ना चाहिए।

  • सिलीगुड़ी में प्रधानमंत्री का TMC पर विकास और खर्च को लेकर हमला..

    सिलीगुड़ी में प्रधानमंत्री का TMC पर विकास और खर्च को लेकर हमला..


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के Siliguri में आयोजित एक विशाल जनसभा में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक नीतियों को लेकर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने कई मुद्दों को उठाते हुए राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए और आगामी चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया।

    प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य में शिक्षा से जुड़े मदरसों के विकास पर लगभग 6000 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि आम जनता के बुनियादी विकास कार्यों पर उतना ध्यान नहीं दिया गया जितना दिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब पिछले वर्षों के कामकाज का पूरा हिसाब मांग रही है और बदलाव की ओर देख रही है।

    अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने आने वाले चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में परिवर्तन की लहर दिखाई दे रही है। उन्होंने दावा किया कि जनसभाओं में उमड़ रही भीड़ इस बात का संकेत है कि जनता मौजूदा व्यवस्था से असंतुष्ट है और एक नए राजनीतिक विकल्प की ओर उम्मीद से देख रही है।

    प्रधानमंत्री ने नागरिकता संशोधन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने नागरिकता और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट और ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने अवैध घुसपैठ के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया और इसे राज्य के लिए गंभीर चुनौती बताया। साथ ही उन्होंने लोगों से इस विषय पर जागरूक रहने की अपील की।

    उन्होंने चाय बागान श्रमिकों की स्थिति का भी उल्लेख किया और कहा कि श्रमिकों के कल्याण के लिए बेहतर नीतियों की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पड़ोसी राज्यों में श्रमिकों के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं और भविष्य में इसी तरह के कदम यहां भी उठाए जाने चाहिए।

    इससे पहले भी प्रधानमंत्री ने उत्तर बंगाल के कई क्षेत्रों में जनसभाएं और रोड शो किए थे, जहां उन्होंने पार्टी उम्मीदवारों के समर्थन में जनता से अपील की थी। उत्तर बंगाल को चुनावी दृष्टि से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है, जहां सामाजिक और क्षेत्रीय विविधता चुनाव परिणामों को प्रभावित करती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस क्षेत्र में चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि विभिन्न राजनीतिक दल अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार सक्रिय हैं। आने वाले समय में यहां राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

  • रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू, 13 से 70 वर्ष पात्र के श्रद्धालु होंगे अमरनाथ यात्रा होगी अधिक सुरक्षित और सुगम

    रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू, 13 से 70 वर्ष पात्र के श्रद्धालु होंगे अमरनाथ यात्रा होगी अधिक सुरक्षित और सुगम


    नई दिल्ली:जम्मू-कश्मीर में हर वर्ष होने वाली पवित्र Amarnath Yatra की इस बार की आधिकारिक तारीखों की घोषणा कर दी गई है। इस वर्ष यह पवित्र तीर्थयात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी और कुल 57 दिनों तक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दिव्य दर्शन का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के इस धार्मिक आयोजन में शामिल होने की संभावना है।

    प्रशासन के अनुसार यात्रा का पहला जत्था जम्मू स्थित भगवती नगर बेस कैंप से रवाना होगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने यात्रा को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।

    इस वर्ष यात्रा के लिए पंजीकरण प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू की जाएगी। श्रद्धालु ऑनलाइन माध्यम के साथ साथ देशभर में निर्धारित बैंक शाखाओं के जरिए भी अपना पंजीकरण करा सकेंगे। रजिस्ट्रेशन व्यवस्था को सरल और सुलभ बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु बिना किसी कठिनाई के यात्रा में शामिल हो सकें।

    निर्धारित नियमों के अनुसार 13 से 70 वर्ष की आयु के श्रद्धालु इस यात्रा में भाग ले सकेंगे, बशर्ते वे निर्धारित स्वास्थ्य मानकों को पूरा करें। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए मेडिकल फिटनेस को अनिवार्य किया गया है ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    इस वर्ष यात्रा व्यवस्था में लगभग 25 प्रतिशत सुधार का दावा किया गया है। सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है और श्रद्धालुओं की निगरानी के लिए RFID कार्ड सिस्टम लागू किया गया है, जिससे यात्रा मार्ग पर उनकी ट्रैकिंग और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

    इसके अलावा बीमा सुरक्षा को भी बढ़ाया गया है और ग्रुप एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर को बढ़ाकर दस लाख रुपये कर दिया गया है। यह व्यवस्था किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है।

    यात्रा दो प्रमुख मार्गों से पूरी की जाएगी, जिनमें पहलगाम और बालटाल मार्ग शामिल हैं। पहलगाम मार्ग अपेक्षाकृत लंबा लेकिन आसान माना जाता है, जबकि बालटाल मार्ग छोटा होने के बावजूद अधिक कठिन और चुनौतीपूर्ण है। दोनों मार्गों पर सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं को पहले से अधिक मजबूत किया गया है।

    समुद्र तल से लगभग 3888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा में स्थित बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए हर वर्ष श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचती है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले पूरी तैयारी करें और आवश्यक दस्तावेज तथा स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करें।

    इस वर्ष की यात्रा को लेकर प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा, चिकित्सा और आधारभूत ढांचे को पहले से अधिक मजबूत किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित धार्मिक अनुभव मिल सके।