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  • जंतर-मंतर प्रदर्शन का हवाला देकर अखिलेश यादव बोले, अब संविधान और चुनावी सुधार की लड़ाई भी होगी तेज

    जंतर-मंतर प्रदर्शन का हवाला देकर अखिलेश यादव बोले, अब संविधान और चुनावी सुधार की लड़ाई भी होगी तेज

    नई दिल्ली ।समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने देश में शिक्षा और परीक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद चुनाव सुधार और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन ने एक नई शुरुआत की है और भविष्य में यह अभियान चुनावी सुधार तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों तक भी पहुंचेगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।

    अखिलेश यादव ने छात्रों के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं की एकजुटता और संघर्ष ने महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं। उनके अनुसार, शिक्षा और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर उठी आवाज ने यह साबित किया है कि संगठित जनआंदोलन लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव का माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों और उनके समर्थन में खड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए इसे लोकतांत्रिक भागीदारी की मिसाल बताया।

    सपा प्रमुख ने कहा कि अब संविधान में निहित अधिकारों को आधार बनाकर चुनाव सुधार और ईवीएम जैसे मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा और जनभागीदारी देखने को मिल सकती है। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष भविष्य में इन विषयों को भी राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाएगा।

    अपने बयान में अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर भी कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया, जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना सभी संस्थाओं और राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    उन्होंने कानून व्यवस्था, किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, महिलाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष इन विषयों को लगातार उठाता रहेगा। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक अधिकारों की रक्षा और संवैधानिक मूल्यों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में जनता बदलाव की दिशा में अपनी भूमिका निभाएगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के घटनाक्रमों के बीच विपक्ष शिक्षा, रोजगार और चुनावी सुधार जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। वहीं सत्तापक्ष इन आरोपों को पहले भी खारिज करता रहा है और अपनी नीतियों तथा चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप बताता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

    लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी प्रक्रिया और सार्वजनिक संस्थाओं से जुड़े प्रश्न समय-समय पर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते रहे हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक संस्थाओं, न्यायिक प्रक्रियाओं और कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही होता है। फिलहाल अखिलेश यादव के इस बयान ने शिक्षा, चुनाव सुधार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पुरुषों की शिकायत पर कार्रवाई, दो युवतियां न्यायिक हिरासत में भेजी गईं

    कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पुरुषों की शिकायत पर कार्रवाई, दो युवतियां न्यायिक हिरासत में भेजी गईं


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई से जुड़ा एक अलग तरह का मामला सामने आया है। आमतौर पर महिलाओं और छात्राओं के साथ छेड़छाड़ या उत्पीड़न की शिकायतों पर कार्रवाई करने वाली एंटी रोमियो टीम ने इस बार दो युवतियों को पुरुषों से कथित छेड़छाड़, अभद्र टिप्पणियां और अश्लील इशारे करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    यह घटना वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र की बताई गई है। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब पांच बजे चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर के नीचे दो युवतियों के राह चलते पुरुषों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को मिली। शिकायत में आरोप लगाया गया कि दोनों राहगीरों की ओर अश्लील टिप्पणियां कर रही थीं और आपत्तिजनक इशारे कर रही थीं। सूचना मिलते ही एंटी रोमियो स्क्वॉड और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों महिलाओं को हिरासत में ले लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मौके पर पहुंचने पर दोनों युवतियों ने अपना चेहरा ढका हुआ था। प्रारंभिक पूछताछ और मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी लेने के बाद उन्हें थाने लाया गया, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर कथित अश्लील हरकतों और अभद्र व्यवहार से जुड़े आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।

    जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि गिरफ्तार की गई दोनों महिलाएं बिहार की रहने वाली हैं। हालांकि उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। मामले की आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एंटी रोमियो स्क्वॉड का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, अभद्रता या उत्पीड़न की घटनाओं को रोकना है। कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है और शिकायत मिलने पर आरोपी के महिला या पुरुष होने के आधार पर कार्रवाई में कोई भेदभाव नहीं किया जाता। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित व्यवहार या किसी व्यक्ति को असहज करने वाली गतिविधियों के मामलों में निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।

    वाराणसी की यह घटना इसलिए चर्चा में है क्योंकि एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई इस बार महिलाओं के खिलाफ हुई है। हालांकि पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले में लगाए गए आरोपों की जांच विधिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। प्रशासन ने लोगों से सार्वजनिक स्थानों पर मर्यादित व्यवहार बनाए रखने और किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील की है, ताकि सभी नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।

  • बाबा वैद्यनाथ धाम में श्रावणी मेले की तैयारियां तेज, सुरक्षा और सुविधाओं के लिए एआई आधारित निगरानी व्यवस्था होगी लागू

    बाबा वैद्यनाथ धाम में श्रावणी मेले की तैयारियां तेज, सुरक्षा और सुविधाओं के लिए एआई आधारित निगरानी व्यवस्था होगी लागू

    नई दिल्ली । झारखंड के विश्व प्रसिद्ध बाबा वैद्यनाथ धाम में आयोजित होने वाले राजकीय श्रावणी मेला 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस वर्ष मेला 30 जुलाई से 28 अगस्त तक आयोजित होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। सबसे अहम निर्णय यह है कि पूरे मेले के दौरान बाबा वैद्यनाथ मंदिर में वीआईपी और वीवीआईपी दर्शन की व्यवस्था पूरी तरह बंद रहेगी, जिससे सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर के साथ दर्शन की सुविधा मिल सके।

    श्रावणी मेले की तैयारियों की समीक्षा के दौरान संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि 28 जुलाई तक सभी आवश्यक व्यवस्थाएं हर हाल में पूरी कर ली जाएं। इसके बाद 29 जुलाई को देवघर और दुमका में उपलब्ध सुविधाओं की दोबारा समीक्षा की जाएगी, ताकि मेले के शुभारंभ से पहले किसी भी कमी को दूर किया जा सके। अधिकारियों से समयबद्ध तरीके से सभी कार्य पूरे करने पर विशेष जोर दिया गया।

    श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस बार आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। मेले में एआई आधारित इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा, जहां से सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और विभिन्न गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। इसके अलावा एआई कैमरे, फेस रिकॉग्निशन प्रणाली, ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली, ड्रोन निगरानी, वाहन पहचान कैमरे और हेड काउंटिंग तकनीक का उपयोग भी किया जाएगा। शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए क्यूआर आधारित शिकायत प्रणाली और डिजिटल सूचना व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।

    श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए टेंट सिटी की क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर आवास उपलब्ध कराया जा सके। इसके साथ ही पेयजल, शौचालय, स्नानगृह, साफ-सफाई, कूड़ेदान और कचरा उठाने की व्यवस्था चौबीसों घंटे सुचारु रखने पर विशेष जोर दिया गया है। गर्मी और उमस से राहत देने के लिए मिस्ट कूलिंग सिस्टम और अन्य शीतलन सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा।

    सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मेला क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस चौकियां, ट्रैफिक नियंत्रण केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, सूचना एवं सहायता केंद्र, विद्युत केंद्र और मातृत्व विश्राम गृह जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा। इसके अलावा पूरे क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, आकर्षक प्रवेश द्वार और वैकल्पिक बिजली आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।

    देवघर और बासुकीनाथ के बीच श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ यातायात व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। उद्देश्य यह है कि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान जाम या अन्य अव्यवस्थाओं का सामना न करना पड़े।

    प्रशासन का मानना है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था और बेहतर आधारभूत सुविधाओं के समन्वय से इस वर्ष का श्रावणी मेला अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालु-केंद्रित होगा। समान दर्शन व्यवस्था, डिजिटल सेवाओं और एआई आधारित निगरानी प्रणाली के माध्यम से श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है।

  • इंडोनेशिया के साथ रक्षा समझौतों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, वैश्विक स्तर पर बढ़ी भारतीय रक्षा तकनीक की साख

    इंडोनेशिया के साथ रक्षा समझौतों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, वैश्विक स्तर पर बढ़ी भारतीय रक्षा तकनीक की साख

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 136वें एपिसोड में भारत की बढ़ती रक्षा क्षमताओं और स्वदेशी रक्षा तकनीक पर दुनिया के बढ़ते विश्वास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन, रक्षा निर्यात और मित्र देशों के साथ रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में भारत लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में हुई अपनी इंडोनेशिया यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों से जुड़े महत्वपूर्ण समझौते भारत की रक्षा तकनीक पर वैश्विक भरोसे को दर्शाते हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र अब केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश स्वदेशी तकनीक के दम पर मित्र देशों के लिए भी एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक रक्षा उपकरणों के विकास और निर्यात में भारत की बढ़ती भागीदारी आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता को भी मजबूत कर रही है।

    इंडोनेशिया के साथ हुए समझौतों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल से जुड़े महत्वपूर्ण रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाया है। इसके अलावा समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए भी दोनों देशों ने साझा रूपरेखा तैयार की है। उन्होंने कहा कि इस तरह के समझौते भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक विश्वसनीयता को नई पहचान दे रहे हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वर्ष 1999 के युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। उन्होंने कहा कि 26 जुलाई हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है, क्योंकि इसी दिन भारतीय सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए कारगिल की चोटियों पर विजय प्राप्त की थी। उन्होंने कहा कि देश अपने वीर सैनिकों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता और नई पीढ़ी तक उनकी गाथाएं पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।

    उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से इस वर्ष विशेष ‘शौर्य विजय यात्रा’ का आयोजन किया गया है। यह मोटरसाइकिल अभियान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, नई दिल्ली से शुरू होकर कारगिल युद्ध स्मारक, द्रास तक पहुंचेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अभियान देशवासियों को सैनिकों के बलिदान और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण की याद दिलाने का माध्यम बनेगा।

    प्रधानमंत्री ने भारतीय नौसेना में शामिल आधुनिक युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह युद्धपोत भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है तथा इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है। उनके अनुसार यह भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण है।

    उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट प्रणाली और अन्य स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन उपलब्धियों के पीछे भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की वर्षों की मेहनत और नवाचार की भावना है। उन्होंने हाल में सफल रहे स्वदेशी मिसाइल परीक्षणों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत लगातार अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक और सशक्त बना रहा है।

    प्रधानमंत्री ने देशवासियों से कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने और सुरक्षित, सक्षम तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के संकल्प को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने सैनिकों के साहस और स्वदेशी तकनीक की शक्ति के बल पर वैश्विक मंच पर नई पहचान बना रहा है।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की तीन यूरोपीय देशों की राजकीय यात्रा संपन्न, भारत के कूटनीतिक रिश्तों को मिला नया विस्तार

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की तीन यूरोपीय देशों की राजकीय यात्रा संपन्न, भारत के कूटनीतिक रिश्तों को मिला नया विस्तार

    नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मोल्दोवा, उत्तरी मैसेडोनिया और रोमानिया की अपनी तीन देशों की राजकीय यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद रविवार को नई दिल्ली लौट आईं। यह यात्रा भारत और यूरोप के उभरते साझेदार देशों के साथ संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभिन्न स्तरों पर हुई बैठकों और समझौतों ने यह संकेत दिया कि भारत शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्रों में यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को और व्यापक बनाने की दिशा में सक्रिय है।

    यात्रा का अंतिम पड़ाव रोमानिया रहा, जहां राष्ट्रपति मुर्मु का राजधानी बुखारेस्ट में पूरे राजकीय सम्मान के साथ स्वागत किया गया। उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया और इसके बाद रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर डैन के साथ द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और बहुपक्षीय सहयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार साझा किए गए।

    रोमानिया प्रवास के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, खेल सहयोग और उच्च शिक्षा से जुड़े तीन महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें बुखारेस्ट विश्वविद्यालय में भारतीय अध्ययन की चेयर स्थापित करने का निर्णय भी शामिल रहा। इसे दोनों देशों के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। लगभग तीन दशक बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति की यह पहली राजकीय यात्रा भी रही, जिससे इस दौरे का महत्व और बढ़ गया।

    रोमानिया से पहले राष्ट्रपति मुर्मु ने उत्तरी मैसेडोनिया का दौरा किया। राजधानी स्कोप्जे में उनका औपचारिक स्वागत किया गया, जहां उन्होंने राष्ट्रपति गोर्दाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा और प्रधानमंत्री ह्रिस्टिजान मिकोस्की से अलग-अलग मुलाकात की। दोनों देशों के नेताओं ने आर्थिक सहयोग, शिक्षा, पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने आपसी विश्वास और साझा हितों के आधार पर दीर्घकालिक सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

    इस राजकीय यात्रा की शुरुआत मोल्दोवा से हुई, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु इस देश का दौरा करने वाली पहली भारतीय राष्ट्रपति बनीं। राजधानी चिसीनाउ में उन्होंने संसद का दौरा किया और संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों के साथ बैठक की। इस दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय सहयोग, आर्थिक साझेदारी और जन-से-जन संपर्क को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया। दोनों देशों ने भविष्य में सहयोग के नए अवसर तलाशने और पारस्परिक हितों पर आधारित संबंधों को आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की।

    पूरी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति के साथ भारतीय प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा, जिसने विभिन्न बैठकों और आधिकारिक कार्यक्रमों में भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा, कृषि, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में संवाद को आगे बढ़ाने के प्रयास किए। इससे भारत और इन तीनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग के नए अवसर विकसित होने की संभावना बढ़ी है।

    यह यात्रा ऐसे समय में संपन्न हुई है जब भारत यूरोप के विभिन्न देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को लगातार विस्तार दे रहा है। मोल्दोवा, उत्तरी मैसेडोनिया और रोमानिया के साथ हुए संवाद तथा समझौते भविष्य में शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, व्यापार और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को नई गति देने में सहायक माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह राजकीय यात्रा भारत की संतुलित और सक्रिय विदेश नीति को और मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ यूरोप में उसकी कूटनीतिक उपस्थिति को भी नया आयाम देगी।

  • क्रिकेट खेलते समय गहरे गड्ढे में गिरा मासूम, ग्रेटर नोएडा हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था कटघरे में.

    क्रिकेट खेलते समय गहरे गड्ढे में गिरा मासूम, ग्रेटर नोएडा हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था कटघरे में.

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक दर्दनाक हादसे ने निर्माण कार्यों के दौरान बरती जा रही सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नॉलेज पार्क क्षेत्र स्थित कलाधाम सोसायटी के पास बोरिंग कार्य के लिए खोदे गए खुले और पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिरने से छह वर्षीय अव्यान सूर्या की मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई जब मासूम अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल रहा था। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है, वहीं प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है।

    बताया गया कि अव्यान अपने साथियों के साथ सोसायटी के बाहर खेल रहा था। खेल के दौरान वह करीब 15 फीट गहरे गड्ढे के पास पहुंच गया और अचानक उसमें गिर गया। गड्ढे में बारिश का पानी भरा हुआ था, जिससे बच्चे को तुरंत बाहर निकालना संभव नहीं हो सका। अन्य बच्चों के शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और काफी प्रयास के बाद उसे बाहर निकाला। इसके बाद उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    घटना के बाद सड़क पर पड़े क्रिकेट बैट और विकेट उस दर्दनाक पल की गवाही देते नजर आए, जब खेलते-खेलते एक मासूम की जिंदगी हमेशा के लिए थम गई। अव्यान के पिता सीवान यादव, जो केंद्रीय विद्यालय में उपप्रधानाचार्य हैं, ने बेटे की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यदि संबंधित अधिकारियों ने समय रहते सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए होते तो यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने कहा कि उनका बेटा अभी दुनिया को ठीक से देख भी नहीं पाया था और अन्य बच्चों की तरह उसे भी बाहर खेलना बेहद पसंद था।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि बोरिंग कार्य के लिए यह गड्ढा कई दिन पहले खोदा गया था। लगातार बारिश के कारण उसमें पानी भर गया, लेकिन उसके चारों ओर न तो बैरिकेडिंग की गई और न ही किसी प्रकार का चेतावनी बोर्ड लगाया गया। लोगों का कहना है कि खुले गड्ढे के आसपास सुरक्षा घेरा बनाना और लोगों को सतर्क करना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी थी, लेकिन इस दिशा में आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई।

    हादसे के बाद पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए बोरिंग कार्य से जुड़े ठेकेदार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सुपरवाइजर और तकनीकी सुपरवाइजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। ठेकेदार मनोज जैन को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

    यह घटना सार्वजनिक स्थलों पर निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन की आवश्यकता को एक बार फिर सामने लेकर आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि खुले गड्ढों, निर्माण स्थलों और अन्य जोखिम वाले क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा घेरा, चेतावनी संकेत और नियमित निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके। स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में किसी भी निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिससे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • मैदानों से लेकर पहाड़ों तक झमाझम बारिश…. कई क्षेत्रों में बाढ़ के हालात, आज इन राज्यों में अलर्ट

    मैदानों से लेकर पहाड़ों तक झमाझम बारिश…. कई क्षेत्रों में बाढ़ के हालात, आज इन राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    देशभर में मानसून (Monsoon) अब पूरी तरह से एक्टिव हो चुका है. मैदानों से लेकर पहाड़ों तक में बरसात जमकर (Heavy rainfall) हो रही है. पहाड़ों में भूस्खलन (Landslide) से कई जगहें रास्ते ठप पड़े हैं. मैदानी इलाकों में कई जगह बाढ़ के हालात भी बन रहे हैं. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में आज भी हल्की से मध्यम और कुछ राज्यों में भारी बारिश का अनुमान है. जहां दिल्ली-एनसीआर में रुक-रुक कर बौछारें पड़ने से मौसम सुहावना रहेगा. वहीं पहाड़ी राज्यों और तटीय इलाकों में मानसूनी हवाओं की वजह से अलर्ट जारी किया गया है।

    दिल्ली-एनसीआर में आज कैसा रहेगा मौसम?
    सबसे पहले बात दिल्ली-एनसीआर की कर लेते हैं. मौसम विभाग के मुताबिक, इस क्षेत्र में बादलों का डेरा बना रहेगा और हल्की बारिश की संभावना है. दिन भर में एक या दो बार हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं. इस दौरान अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. आज बारिश के साथ-साथ 20 से 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चल सकती हैं. हालांकि, बारिश के बीच के उमस ज्यादा रहने की वजह से लोगों को हल्की चिपचिपाहट का सामना करना पड़ सकता है।


    पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा

    उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों खासकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में मानसून की रफ्तार तेज बनी हुई है. मौसम विभाग ने इन राज्यों के कई संवेदनशील इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी दी है. साथ ही, पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन होने और नदियां उफान पर रहने का खतरा जताया गया है. ऐसे में यात्रियों और स्थानीय निवासियों को पहाड़ों की अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

    मुंबई में रुक-रुक होती रहेगी तेज बारिश
    देश के मध्य, पश्चिम और पूर्वी भारत की बात की जाए तो यहां पर मानसून पूरी तरह मेहरबान है. कोंकण, गोवा और गुजरात के तटीय क्षेत्रों में मानसूनी बारिश पूरी तरह जारी है. अनुमान है कि मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में आज भी रुक-रुक कर तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है. गुजरात क्षेत्र में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के आसार जताए गए हैं. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार और झारखंड में भी तेज बारिश की उम्मीद है. बिहार और ओडिशा में बारिश के साथ गर्जन के साथ तेज हवाएं चलने की भी उम्मीद है।


    पूर्वोत्तर भारत झमाझम बरसेंगे बादल

    दक्षिण भारत के तटीय कर्नाटक और केरल में मध्यम से व्यापक बारिश की संभावना है. वहीं तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. पूर्वोत्तर भारत में आने वाले असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश में भी मानसूनी बादल छाए रहेंगे और कई स्थानों पर झमाझम बारिश होगी. तेज बरसात की वजह से कई जगहों पर बिजली गिरने और भूस्खलन होने का खतरा बना रहेगा।

  • पेपर लीक को लेकर सख्त कानून…. 10 साल कैद और 10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान, कल संसद में पेश होगा बिल

    पेपर लीक को लेकर सख्त कानून…. 10 साल कैद और 10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान, कल संसद में पेश होगा बिल


    नई दिल्ली।
    दो साल पुराने पेपर लीक रोधी कानून (Anti-paper leak law) में संशोधन करने के उद्देश्य से एक विधेयक सोमवार को लोकसभा (Lok Sabha) में पेश किया जायेगा। इस विधेयक में आरोपियों की त्वरित सुनवाई के लिए हर राज्य में त्वरित अदालतें स्थापित करने और सजा को और कड़ा करने का प्रस्ताव किया गया है। लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के अनुसार प्रश्नपत्र लीक मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।

    विधेयक को पेश किए जाने से पहले सदस्यों को वितरित की गई इसकी प्रति के अनुसार, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक या अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। संगठित अपराधों के लिए विधेयक में कम से कम सात वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।

    मौजूदा कानून में व्यक्तिगत रूप से शामिल लोगों के लिए तीन से पांच साल तक की कैद का प्रावधान है, जबकि संगठित रूप से धोखाधड़ी और प्रश्नपत्र लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए पांच से 10 साल तक की कैद और कम से कम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। यह विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश करने, उस पर विचार करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। आमतौर पर किसी विधेयक को एक ही दिन पेश करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जाता है।

    सरकार ने घोषणा की कि वह प्रस्तावित कानून लेकर आ रही है। यह घोषणा ऐसे समय में की गई, जब हाल के दिनों में नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों ने जोर पकड़ लिया था। नीट मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों के विरोध के कारण संसद के मानसून सत्र के पहले सप्ताह की कार्यवाही बाधित रही। नये विधेयक पर विपक्ष का रुख अभी स्पष्ट नहीं है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि वह आम सहमति के आधार पर कदम उठाएंगे।

    शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Education Minister Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे और सरकार द्वारा अन्य मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद कॉजपा ने शनिवार को 36 दिनों से जारी प्रदर्शन समाप्त कर दिया। इस विधेयक में 15 अवैध कृत्यों का उल्लेख किया गया है, जिनमें प्रश्नपत्र लीक करना, ओएमआर शीट से छेड़छाड़ करना, फर्जी वेबसाइट बनाना और फर्जी प्रवेश पत्र जारी करना शामिल हैं।

  • सरकार-CJP वार्ता के बाद दिखी सौहार्द की तस्वीर, JP नड्डा बोले- 'हाथ तो मिलाइए'; गर्मजोशी से हुआ हैंडशेक

    सरकार-CJP वार्ता के बाद दिखी सौहार्द की तस्वीर, JP नड्डा बोले- 'हाथ तो मिलाइए'; गर्मजोशी से हुआ हैंडशेक


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त करने पर सहमति बनी। समझौते के बाद दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के समापन पर एक आत्मीय दृश्य देखने को मिला, जब केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने CJP नेताओं से हाथ मिलाकर बातचीत के सकारात्मक माहौल का संदेश दिया।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त होने के बाद जब दोनों पक्ष उठने लगे, तभी जेपी नड्डा ने मुस्कुराते हुए CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका से कहा, “हाथ तो मिलाइए…”। इस पर रांका भी मुस्कुरा दिए और आगे बढ़कर उन्होंने नड्डा से हाथ मिलाया। इसके बाद CJP के दूसरे प्रवक्ता सौरव दास ने भी जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से हाथ मिलाया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है।

    20 जून से चल रहा था आंदोलन
    CJP के नेतृत्व में 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन जारी था। आंदोलन में देशभर के हजारों छात्रों ने हिस्सा लिया और कई विपक्षी दलों ने भी इसका समर्थन किया। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुए विवाद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अस्पताल पहुंचने के बाद आंदोलन ने और तूल पकड़ लिया था। इसी दिन केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर सरकार और CJP के बीच पहली औपचारिक वार्ता हुई थी। इसके बाद लगातार तीन दौर की बातचीत के जरिए दोनों पक्ष सहमति तक पहुंचे।

    आंदोलन समाप्त करने का ऐलान
    संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार की ओर से तय समयसीमा में सहमत बिंदुओं को लागू करने के आश्वासन के बाद संगठन आंदोलन वापस ले रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने 3 मई के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने पर सहमति जताई है। वहीं, प्रवक्ता आशुतोष रांका ने देशभर के छात्रों और समर्थकों से शांतिपूर्वक धरना समाप्त कर अपने-अपने घर लौटने की अपील की। उनका कहना था कि संगठन की सभी प्रमुख मांगों पर सहमति बन चुकी है।

    चार सप्ताह बाद होगी समीक्षा बैठक
    केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार आंदोलन से जुड़े छात्रों को उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर की प्रतियां उपलब्ध कराएगी और भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी या आयोजक के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और पांच सूत्रीय मांगों के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए सरकार और CJP के प्रतिनिधियों के बीच चार सप्ताह बाद फिर बैठक आयोजित की जाएगी।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले में नई SIT की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट में 3 IPS अधिकारियों का पैनल पेश करेगी यूपी सरकार

    राम मंदिर चढ़ावा मामले में नई SIT की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट में 3 IPS अधिकारियों का पैनल पेश करेगी यूपी सरकार


    लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन मामले की सुनवाई सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होगी। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार नई विशेष जांच टीम (SIT) के गठन के लिए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है।

    सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित एसआईटी में लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस, अयोध्या के डीआईजी सोमेन वर्मा और अयोध्या के एसएसपी गौरव ग्रोवर को शामिल करने का प्रस्ताव है। इन नामों पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट करेगा।

    इससे पहले गठित एसआईटी में लखनऊ मंडल के तत्कालीन कमिश्नर विजय विश्वास पंत और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार शामिल थे। अब उनकी जगह दो आईपीएस अधिकारियों को शामिल करने की तैयारी की गई है।

    पहले भी हुई थी कार्रवाई
    राम मंदिर में चढ़ावे के आभूषणों के कथित गबन की शिकायत के बाद यूपी सरकार ने एसआईटी से जांच कराई थी। जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई और मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया। इसी विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के एक अन्य पदाधिकारी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

    पुराने पहचान पत्रों से फिर मिलेगी एंट्री
    इस बीच मंदिर प्रशासन ने निर्माण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए एक अंतरिम फैसला लिया है। हाल ही में अमान्य किए गए चंपत राय के हस्ताक्षर वाले पुराने पहचान पत्र और प्रवेश पास फिलहाल दोबारा मान्य कर दिए गए हैं। नई पास व्यवस्था लागू होने तक अधिकृत कर्मचारी, इंजीनियर और तकनीकी अधिकारी इन्हीं पहचान पत्रों के आधार पर मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकेंगे।

    निर्माण कार्य प्रभावित होने के बाद लिया गया फैसला
    ट्रस्ट के नेतृत्व में बदलाव के बाद पुराने पहचान पत्रों पर रोक लगा दी गई थी, जिससे मंदिर निर्माण से जुड़ी एजेंसियों के कर्मचारियों को परिसर में प्रवेश में दिक्कतें आने लगी थीं। एलएंडटी, टाटा, इंडिया इंजीनियर्स लिमिटेड और उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम जैसी संस्थाओं के इंजीनियरों और कर्मचारियों के काम पर भी इसका असर पड़ा। मंदिर परिसर में चारदीवारी, संग्रहालय, ट्रस्ट कार्यालय और विश्राम गृह सहित कई परियोजनाओं का कार्य बाधित होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल पुराने पासों को अस्थायी रूप से फिर से वैध करने का निर्णय लिया है।