Category: National

  • लोक परीक्षा संशोधन बिल पर लोकसभा में गतिरोध, छात्रों के मुद्दे पर चर्चा की मांग से कार्यवाही बार-बार बाधित

    लोक परीक्षा संशोधन बिल पर लोकसभा में गतिरोध, छात्रों के मुद्दे पर चर्चा की मांग से कार्यवाही बार-बार बाधित

    नई दिल्ली । सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाए गए लोक परीक्षा संशोधन बिल पर सोमवार को लोकसभा में चर्चा शुरू नहीं हो सकी। विपक्षी दलों के लगातार हंगामे और छात्रों की कथित पिटाई के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। स्थिति को सामान्य बनाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सरकार और विपक्ष दोनों से आपसी सहमति बनाकर सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की अपील की।

    दोपहर दो बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, विपक्षी सांसद सदन के वेल में पहुंच गए और छात्रों से जुड़े मामले पर चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे। लगातार शोर-शराबे के बीच सदन में निर्धारित कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्ष से कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे विधेयक पर चर्चा नहीं करना चाहते। लगभग पांच मिनट तक गतिरोध बने रहने के बाद उन्होंने शाम पांच बजे तक सभी पक्षों को सहमति बनाने का समय देने की घोषणा की।

    इससे पहले भी दिन के दौरान लोकसभा की कार्यवाही दोपहर बारह बजे और उसके बाद दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी थी। इसी तरह राज्यसभा में भी हंगामे के कारण कार्यवाही प्रभावित रही और वहां भी सदन को दो बार स्थगित करना पड़ा। संसद के दोनों सदनों में बने गतिरोध के कारण दिनभर निर्धारित विधायी कार्य प्रभावित रहा।

    सुबह केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन बिल पेश किया। यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में अनियमितताओं, पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

    संसद की कार्यवाही के दौरान एक अन्य राजनीतिक घटनाक्रम भी चर्चा में रहा। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे, जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सांसदों ने उनका स्वागत किया। उन्हें शॉल और मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया गया तथा कई सांसद उनके साथ संसद भवन के भीतर तक गए। इस दौरान समर्थन में नारे भी लगाए गए। धर्मेंद्र प्रधान ने नीट पेपर लीक विवाद के बाद 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दिया था।

    संसद में जारी गतिरोध समाप्त करने के लिए राजनीतिक स्तर पर भी प्रयास तेज किए गए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर सदन की कार्यवाही सामान्य बनाने पर चर्चा की। बैठक में विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया और गतिरोध समाप्त करने के संभावित विकल्पों पर विचार-विमर्श किया गया।

    इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि लोक परीक्षा संशोधन बिल देश के करोड़ों विद्यार्थियों और सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विधेयक है, इसलिए इसे सदन में चर्चा का अवसर मिलना चाहिए। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि छात्रों से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर पहले विस्तृत चर्चा कराई जाए। अब सभी की निगाहें आगामी संसदीय बैठकों पर हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि सहमति बनने के बाद विधेयक पर चर्चा आगे बढ़ पाती है या नहीं।

  • CJP ने सरकार को दिया नया अल्टीमेटम, प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई रोकने और रिहाई की दोहराई मांग

    CJP ने सरकार को दिया नया अल्टीमेटम, प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई रोकने और रिहाई की दोहराई मांग

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने देश के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार से एक बार फिर अपनी मांगें दोहराई हैं। पार्टी ने कहा है कि जिन आश्वासनों के आधार पर विरोध प्रदर्शन स्थगित किए गए थे, उनका समयबद्ध पालन किया जाना चाहिए। संगठन ने विशेष रूप से छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई रोकने और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।

    पार्टी के अनुसार उसे अलग-अलग राज्यों से ऐसी रिपोर्टें प्राप्त हो रही हैं जिनमें प्रदर्शन में शामिल छात्रों और अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया है। CJP ने विशेष रूप से असम, पश्चिम बंगाल और बिहार का उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों में प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाए जाने की खबरों पर गंभीर चिंता है। संगठन का कहना है कि यदि ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो संबंधित मामलों पर तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

    CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी अपने बयान में कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा तथा उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने की मांग पहले भी उठाई गई थी। उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन समाप्त करने का निर्णय सरकार की ओर से मिले आश्वासनों पर विश्वास करते हुए लिया गया था। ऐसे में अब उन आश्वासनों का पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

    पार्टी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों की शीघ्र रिहाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि देश के किसी भी हिस्से में शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना नागरिकों का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।

    CJP ने यह भी कहा कि उसकी कानूनी टीम हिरासत में लिए गए लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। पार्टी का दावा है कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को न्यायिक प्रक्रिया में हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। संगठन ने प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखने की भी अपील की है।

    अपने बयान में CJP ने केंद्रीय नेतृत्व से पूर्व में दिए गए आश्वासनों का सम्मान करने का आग्रह किया है। पार्टी का कहना है कि सरकार को 28 जुलाई तक इस संबंध में लिखित रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि प्रदर्शनकारियों और छात्रों के बीच उत्पन्न अनिश्चितता समाप्त हो सके। संगठन का मानना है कि स्पष्ट और औपचारिक आश्वासन से तनाव कम करने में मदद मिलेगी और संवाद का वातावरण मजबूत होगा।

    फिलहाल सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार का रुख और संभावित कदम महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद आगे बढ़ता है तो स्थिति सामान्य होने की संभावना बन सकती है। वहीं यदि मांगों और सरकारी रुख के बीच मतभेद बने रहते हैं तो यह विषय राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

  • रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ से प्रेरित आर्मी मेस का नया आकर्षण, राकेश बेदी ने किया उद्घाटन और कराया दौरा

    रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ से प्रेरित आर्मी मेस का नया आकर्षण, राकेश बेदी ने किया उद्घाटन और कराया दौरा

    नई दिल्ली । श्रीनगर स्थित एक आर्मी मेस में फिल्म ‘धुरंधर’ से प्रेरित विशेष थीम वाले ‘धुरंधर बार’ का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर फिल्म का हिस्सा रहे अभिनेता राकेश बेदी मौजूद रहे और उन्होंने इस विशेष कॉर्नर का उद्घाटन करने के साथ-साथ उसके अंदर की सजावट का परिचय भी कराया। सुरक्षा कारणों से मेस का सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन इस पहल ने फिल्म और भारतीय सेना के बीच बने सांस्कृतिक जुड़ाव को नई पहचान दी है।

    राकेश बेदी ने अपने सोशल मीडिया माध्यम से साझा किए गए वीडियो में बताया कि उन्हें श्रीनगर स्थित एक आर्मी मेस में आमंत्रित किया गया था, जहां सैनिक लंबे समय से ‘धुरंधर बार’ के उद्घाटन का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस विशेष अवसर का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है। उद्घाटन के दौरान उन्होंने रिबन काटकर इस थीम आधारित बार को औपचारिक रूप से शुरू किया।

    बार के अंदर की सजावट पूरी तरह फिल्म ‘धुरंधर’ की थीम पर तैयार की गई है। प्रवेश द्वार पर ‘धुरंधर बार, स्थापना 2026’ का साइन बोर्ड लगाया गया है, जो इस स्थान की अलग पहचान बनाता है। दीवारों पर फिल्म के प्रमुख किरदारों के पोस्टर और कलात्मक चित्र लगाए गए हैं, जिनमें कई लोकप्रिय संवाद भी शामिल किए गए हैं। इन कलाकृतियों को इस तरह तैयार किया गया है कि वे फिल्म के माहौल और उसके किरदारों की झलक प्रस्तुत करें।

    राकेश बेदी ने अपने वीडियो में बार का विस्तृत दौरा कराते हुए वहां मौजूद विभिन्न सजावटी तत्वों को भी दिखाया। उन्होंने बताया कि एक ओर फिल्म के कलाकार गौरव गेरा के किरदार का पोस्टर लगाया गया है, जिसमें उनका चर्चित दृश्य और संवाद दर्शाया गया है। वहीं दूसरी ओर स्वयं राकेश बेदी के किरदार से जुड़ा पोस्टर भी लगाया गया है। इसके अलावा मुख्य आकर्षण के रूप में अभिनेता रणवीर सिंह की बड़ी कलात्मक तस्वीर स्थापित की गई है, जिसे विशेष डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। सामने की दीवार पर फिल्म में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका निभाने वाले आर. माधवन के किरदार की आर्टवर्क भी लगाई गई है।

    राकेश बेदी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों से वह आर्मी मेस की सटीक लोकेशन साझा नहीं कर सकते। उन्होंने सैनिकों द्वारा फिल्म के प्रति दिखाई गई सराहना और इस विशेष थीम कॉर्नर के निर्माण को सम्मानजनक पहल बताया। उनके अनुसार सेना के जवानों ने फिल्म के कई किरदारों और दृश्यों को यादगार तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिससे यह स्थान उनके लिए भी एक अलग आकर्षण बन गया है।

    ‘धुरंधर’ फिल्म श्रृंखला अपनी कहानी और प्रस्तुतिकरण के कारण दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रही। फिल्म की कथा एक भारतीय जासूस के मिशन पर आधारित है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियान को प्रमुखता से दिखाया गया है। फिल्म में रणवीर सिंह के साथ अक्षय खन्ना, अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, सारा अर्जुन, गौरव गेरा और राकेश बेदी सहित कई कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। श्रृंखला की दोनों फिल्मों को दर्शकों का व्यापक समर्थन मिला और उन्होंने वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय व्यावसायिक सफलता भी हासिल की। अब श्रीनगर के इस आर्मी मेस में फिल्म की थीम पर तैयार किया गया ‘धुरंधर बार’ उस लोकप्रियता का एक नया उदाहरण माना जा रहा है, जिसने सैनिकों और फिल्म प्रेमियों के बीच विशेष चर्चा का विषय बना दिया है।

  • गडकरी ने कहा- E20 और एथेनॉल ब्लेंडिंग से मेरा कोई संबंध नहीं, फर्जी AI वीडियो पर मेटा, एक्स और गूगल के खिलाफ करेंगे मुकदमा

    गडकरी ने कहा- E20 और एथेनॉल ब्लेंडिंग से मेरा कोई संबंध नहीं, फर्जी AI वीडियो पर मेटा, एक्स और गूगल के खिलाफ करेंगे मुकदमा

    नई दिल्ली । केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे कथित एआई-जनित डीपफेक वीडियो से स्वयं को पूरी तरह अलग बताते हुए स्पष्ट किया है कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम और ई20 पहल से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र का विषय है और इस नीति के क्रियान्वयन में उनकी कोई भूमिका नहीं है।

    इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने गडकरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की अनुमति दे दी है। अदालत की मंजूरी के बाद अब वह मेटा, एक्स और गूगल के विरुद्ध सिविल मुकदमा दायर कर सकते हैं। गडकरी का आरोप है कि विभिन्न डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित कई वीडियो में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से उनकी छवि और आवाज का उपयोग कर भ्रामक सामग्री तैयार की गई, जिससे जनता के बीच गलत संदेश फैलाने का प्रयास किया गया।

    याचिका में कहा गया है कि वायरल किए गए वीडियो में यह झूठा दावा किया गया कि गडकरी और उनका परिवार एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम तथा ई20 पहल से किसी प्रकार का आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। मंत्री ने इन दावों को पूरी तरह निराधार, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की सामग्री उनकी व्यक्तिगत और सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

    मामले में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा दूरसंचार मंत्रालय को भी प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कथित फर्जी सामग्री के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई और उसे हटाने की मांग की गई है। गडकरी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी याचिका का उद्देश्य किसी सरकारी नीति पर होने वाली सार्वजनिक बहस, आलोचना या लोकतांत्रिक चर्चा को सीमित करना नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को सरकारी नीतियों पर अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति के नाम और पहचान का दुरुपयोग कर झूठी जानकारी फैलाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

    हाल के समय में देश में ई20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की चर्चाएं और दावे सामने आए हैं। विशेष रूप से वर्ष 2023 से पहले निर्मित कुछ पेट्रोल वाहनों के मालिकों ने माइलेज में कमी, रखरखाव लागत बढ़ने और इंजन के कुछ हिस्सों पर संभावित प्रभाव जैसी चिंताएं व्यक्त की हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर कई भ्रामक वीडियो और दावे भी तेजी से प्रसारित हुए, जिनमें एथेनॉल मिश्रण नीति को लेकर विभिन्न प्रकार की गलत जानकारियां साझा की गईं।

    गडकरी ने अपने पक्ष में दायर याचिका में दोहराया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से संबंधित नीति का संचालन और निर्णय केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन है। उन्होंने कहा कि उनके नाम का उपयोग कर तैयार किए गए एआई-जनित वीडियो तथ्यों से परे हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि डिजिटल माध्यमों पर फर्जी सामग्री के प्रसार से न केवल आम लोगों में भ्रम फैलता है, बल्कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।

    इस घटनाक्रम ने एक बार फिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डीपफेक सामग्री, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और ऑनलाइन भ्रामक सूचनाओं की निगरानी जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद संबंधित पक्षों का जवाब और अदालत की आगामी सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामला: SC ने SIT में CA और फोरेंसिक ऑडिटर जोड़ने के दिए निर्देश, दो हफ्ते में मांगी प्रगति रिपोर्ट

    राम मंदिर चढ़ावा मामला: SC ने SIT में CA और फोरेंसिक ऑडिटर जोड़ने के दिए निर्देश, दो हफ्ते में मांगी प्रगति रिपोर्ट


    लखनऊ। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने जांच को लेकर अहम निर्देश जारी किए। मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष जांच दल (SIT) में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाए।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकता फिलहाल मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित करना है। CJI ने कहा कि अभी ध्यान केवल जांच की गुणवत्ता पर है और अन्य मुद्दों पर बाद में विचार किया जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने विस्तारित SIT को जांच जारी रखने का निर्देश देते हुए तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा। अदालत का मानना है कि वित्तीय विशेषज्ञों के जुड़ने से चढ़ावे और उससे संबंधित लेनदेन की बारीकी से जांच हो सकेगी और यदि किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो उसके तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आएंगे।

    कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है। साथ ही निर्देश दिया है कि तब तक SIT जांच की प्रगति रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करे।

  • यूपी भाजपा में टिकट की दौड़ तेज, देहात सीट पर बढ़े दावेदार, अगस्त-सितंबर में होगा चौथा सर्वे

    यूपी भाजपा में टिकट की दौड़ तेज, देहात सीट पर बढ़े दावेदार, अगस्त-सितंबर में होगा चौथा सर्वे


    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी में टिकट की दावेदारी तेज होती जा रही है। पार्टी अब तक तीन चरणों का सर्वे पूरा कर चुकी है, जिसके बाद कई विधानसभा सीटों पर नए दावेदारों के नाम सामने आने लगे हैं। खासतौर पर मुरादाबाद देहात विधानसभा सीट पर दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पार्टी का अगला यानी चौथा सर्वे अगस्त-सितंबर में प्रस्तावित है।

    भाजपा ने प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के तहत जनवरी, मार्च और जून में तीन सर्वे कराए थे। इन सर्वेक्षणों के आधार पर जिले की छह विधानसभा सीटों पर करीब 20 नाम प्रमुख दावेदारों के रूप में चर्चा में रहे। नगर, देहात, कुंदरकी और ठाकुरद्वारा सीटों पर तीन-तीन, जबकि कांठ और बिलारी सीट पर चार-चार संभावित उम्मीदवारों के नाम सामने आए थे। इनमें मौजूदा विधायक, पूर्व पदाधिकारी और ब्लॉक प्रमुख जैसे कई नेता शामिल हैं।

    देहात सीट पर बढ़ी दावेदारों की संख्या
    तीन सर्वे में मुरादाबाद देहात सीट से डॉ. केके मिश्रा, पूर्व महानगर महामंत्री श्याम बिहारी मिश्रा और अनुसूचित मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष रजनीकांत जाटव के नाम प्रमुखता से सामने आए थे। अब इनके अलावा कई अन्य नेताओं ने भी दावेदारी की चर्चा तेज कर दी है।

    नए चर्चित नामों में पूर्व महानगर अध्यक्ष धर्मेंद्रनाथ मिश्रा, पूर्व महानगर मंत्री शशि किरण जाटव, महानगर मंत्री सुनीता शर्मा और वनीता मेहरोत्रा समेत कई अन्य भाजपा पदाधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

    अन्य सीटों पर भी नए चेहरे चर्चा में
    कांठ विधानसभा सीट से धर्मपाल सिंह और जयवर्द्धन सिंह, बिलारी सीट से विश्वास यादव लवली और नरेश यादव, जबकि ठाकुरद्वारा सीट से गौरव चौहान और भानु प्रताप सिंह के नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल होकर चर्चा में हैं। फिलहाल मुरादाबाद नगर और कुंदरकी सीटों पर कोई नया नाम प्रमुख रूप से सामने नहीं आया है।

    तीसरे सर्वे में इन नामों की रही थी चर्चा
    मुरादाबाद नगर: विधायक रितेश गुप्ता, पूर्व महानगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता, महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला।
    मुरादाबाद देहात: डॉ. केके मिश्रा, श्याम बिहारी मिश्रा, रजनीकांत जाटव।
    कांठ: पूर्व विधायक राजेश कुमार सिंह चुन्नू, ब्लॉक प्रमुख पूनम चौधरी, जिला पंचायत सदस्य विनोद सैनी और राजपाल सिंह।
    ठाकुरद्वारा: पूर्व जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह चौहान, अजय प्रताप सिंह और पूर्व सांसद सर्वेश सिंह की पत्नी साधना सिंह।
    बिलारी: परमेश्वर लाल सैनी, पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेश सैनी, नगर पालिका चेयरमैन रघुराज सिंह यादव और ऋषिपाल चौधरी।
    कुंदरकी: विधायक रामवीर सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह और किसान मोर्चा के क्षेत्रीय महामंत्री दिनेश ठाकुर।

    जिलाध्यक्ष ने क्या कहा?
    भाजपा जिलाध्यक्ष आकाश पाल ने कहा कि पार्टी में टिकट मांगने का अधिकार सभी कार्यकर्ताओं को है। फिलहाल संगठन स्तर पर दावेदारी के लिए आवेदन नहीं लिए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उम्मीदवारों के चयन का अंतिम निर्णय प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।

  • कांवड़ यात्रा के लिए ट्रैफिक प्लान तैयार, 29 जुलाई से दिल्ली-दून हाईवे पर भारी वाहनों की एंट्री बंद

    कांवड़ यात्रा के लिए ट्रैफिक प्लान तैयार, 29 जुलाई से दिल्ली-दून हाईवे पर भारी वाहनों की एंट्री बंद


    मेरठ। कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए मेरठ पुलिस ने व्यापक ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार किया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 29 जुलाई की रात 12 बजे से 12 अगस्त तक दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (गाजियाबाद से मेरठ दिशा) और चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग (नहर पटरी) पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। वहीं 5 अगस्त की रात से 12 अगस्त की रात तक हरिद्वार-मुजफ्फरनगर-मेरठ दिशा में दिल्ली-देहरादून हाईवे पर यातायात पूरी तरह रोका जा सकता है। गंगा एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों के लिए भी वैकल्पिक मार्ग तय किए गए हैं।

    मेरठ पुलिस ने यह ट्रैफिक प्लान आसपास के जिलों और मेरठ जोन के पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय के बाद तैयार किया है। 2 अगस्त की आधी रात से एनएच-58 पर हल्के और मध्यम वाहन मेरठ से हरिद्वार की ओर बाईं लेन से दो-तरफा संचालित होंगे, जबकि दाहिनी लेन केवल हरिद्वार से लौट रहे कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेगी। कांवड़ियों की संख्या और हालात के अनुसार इस व्यवस्था में जरूरत पड़ने पर बदलाव भी किया जा सकेगा। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कांवड़ यात्रा गंगा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर नहीं चलेगी, बल्कि पारंपरिक मार्गों से ही निकलेगी।

    भारी वाहनों के लिए यह रहेगा डायवर्जन
    29 जुलाई से लागू होने वाले प्लान के तहत अंबाला और यमुनानगर से उत्तराखंड जाने वाले वाहन एनएच-344 बाईपास, छुटमलपुर और मोहंड होते हुए देहरादून जाएंगे, जबकि हरिद्वार जाने वाले वाहनों को भगवानपुर और रुड़की के रास्ते भेजा जाएगा।

    राजस्थान, दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा से सहारनपुर व उत्तराखंड जाने वाले भारी वाहन डासना इंटरचेंज से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और खेकड़ा इंटरचेंज के जरिए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर डायवर्ट किए जाएंगे। वहीं दिल्ली से उत्तराखंड जाने वाले वाहनों को कुंडली, सोनीपत, पानीपत, करनाल और यमुनानगर के रास्ते भेजा जाएगा।

    मुरादाबाद, अमरोहा, बागपत, शामली और करनाल की ओर जाने वाले भारी वाहनों के लिए भी अलग-अलग वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं, ताकि कांवड़ मार्ग पर दबाव कम किया जा सके।

    हल्के और मध्यम वाहनों के लिए 2 अगस्त से नई व्यवस्था
    2 अगस्त की रात 12 बजे से हल्के और मध्यम वाहनों का भी रूट बदला जाएगा। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और राजस्थान से हरिद्वार, देहरादून, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जाने वाले वाहन डासना, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उपयोग करेंगे।

    कुछ मार्गों पर वाहनों को हापुड़, किठौर, परीक्षितगढ़, मवाना, बहसूमा, रामराज, मीरापुर, जानसठ, भोपा, रोहाना और देवबंद होते हुए आगे भेजा जाएगा। बिजनौर, बुलंदशहर, गढ़मुक्तेश्वर और मुरादाबाद की दिशा में जाने वाले वाहनों के लिए भी अलग डायवर्जन रूट निर्धारित किए गए हैं।

    गंगा एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों का भी बदलेगा रास्ता
    गंगा एक्सप्रेसवे से दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, हरियाणा, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, हरिद्वार और देहरादून की ओर जाने वाले सभी वाहनों को सिंभावली कट से उतारकर एनएच-9 और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के रास्ते भेजा जाएगा।

    वहीं मेरठ, बिजनौर और मुजफ्फरनगर की ओर जाने वाले वाहनों को सिंभावली कट से हापुड़, किठौर, परीक्षितगढ़, मवाना, बहसूमा, रामराज और मीरापुर के रास्ते गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा। बिजौली (खरखौदा) कट से उतरने वाले वाहनों के लिए भी अलग ट्रैफिक व्यवस्था लागू रहेगी।

    मेरठ पुलिस ने यात्रियों से अपील की है कि कांवड़ यात्रा के दौरान यात्रा शुरू करने से पहले निर्धारित रूट डायवर्जन की जानकारी अवश्य लें और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कर प्रशासन का सहयोग करें।

  • शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार, केवल विरोध के आधार पर लाठीचार्ज उचित नहीं: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

    शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार, केवल विरोध के आधार पर लाठीचार्ज उचित नहीं: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

    नई दिल्ली । नीट पेपर लीक से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है और केवल प्रदर्शन होने के आधार पर लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई को उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने संकेत दिए हैं कि ऐसे मामलों के लिए पूरे देश में लागू होने वाली एक समान गाइडलाइन तैयार करने की आवश्यकता है।

    मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह विवाद केवल किसी एक स्थान या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली से जुड़ा व्यापक मुद्दा है। अदालत ने कहा कि विभिन्न राज्यों में दर्ज याचिकाओं और संबंधित मामलों पर एक साथ विचार किया जाएगा ताकि एक समान कानूनी दृष्टिकोण विकसित किया जा सके। इस संबंध में विस्तृत सुनवाई मंगलवार को निर्धारित की गई है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन्हें संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। इसलिए प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई भी लोकतांत्रिक मूल्यों तथा कानून के दायरे में रहनी चाहिए। अदालत का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में स्पष्ट और एकरूप प्रोटोकॉल होने से पुलिस, प्रशासन और नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

    पीठ ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान यदि असामाजिक तत्व भीड़ में शामिल हो जाते हैं, तो उस स्थिति से निपटने के लिए अलग और प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि भविष्य में बनने वाली संभावित गाइडलाइन में ऐसे मामलों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश शामिल किए जा सकते हैं, ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों और कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों के बीच अंतर किया जा सके।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पुलिस व्यवस्था से जुड़े एक महत्वपूर्ण पहलू पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि बड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान पुलिसकर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और संसाधन क्यों उपलब्ध नहीं कराए जाते। अदालत ने माना कि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले कर्मियों की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है, जितनी प्रदर्शनकारियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान यदि किसी भी पक्ष की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग, हिंसा या अन्य प्रकार की ज्यादती के आरोप सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायसंगत प्रक्रिया तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों के आचरण की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

    शीर्ष अदालत की इन टिप्पणियों को प्रदर्शन संबंधी मामलों में भविष्य की न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि राष्ट्रीय स्तर पर एक समान दिशा-निर्देश तैयार किए जाते हैं, तो इससे शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार, कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी और पुलिस की कार्रवाई के मानकों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने में मदद मिल सकती है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत इस विषय पर विस्तृत विचार करेगी।

  • जंतर-मंतर आंदोलन के बाद होटल पार्टी का दावा चर्चा में, वायरल वीडियो पर राजनीतिक बहस तेज

    जंतर-मंतर आंदोलन के बाद होटल पार्टी का दावा चर्चा में, वायरल वीडियो पर राजनीतिक बहस तेज


    नई दिल्ली ।
    राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़ा एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोगों को एक होटल में नाच-गाने और जश्न के माहौल में देखा जा रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद संगठन की गतिविधियों, आंदोलन के दौरान हुए खर्च और उसकी फंडिंग को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान तथा घटना की परिस्थितियों पर कोई आधिकारिक पुष्टि भी सामने नहीं आई है।

    यह वीडियो सोशल मीडिया पर वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी द्वारा साझा किए जाने के बाद अधिक चर्चा में आया। वीडियो साझा करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वास्तव में CJP की नेतृत्व टीम दिल्ली के एक होटल में जश्न मना रही है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि राजधानी में कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान यात्रा, भोजन और ठहरने जैसी व्यवस्थाओं का खर्च किसने वहन किया और इसके लिए धन किस स्रोत से उपलब्ध कराया गया।

    वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर पक्ष और विपक्ष दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने आंदोलन के बाद जश्न मनाने को सामान्य बताया, जबकि अन्य ने प्रदर्शन से जुड़े आर्थिक पहलुओं पर पारदर्शिता की मांग उठाई। हालांकि, अब तक किसी सक्षम सरकारी एजेंसी या संबंधित संगठन की ओर से वीडियो में किए गए दावों की आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है।

    कॉकरोच जनता पार्टी पिछले कुछ समय से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन के कारण चर्चा में रही है। जंतर-मंतर पर कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। इस आंदोलन को समय के साथ विभिन्न सामाजिक समूहों और कुछ प्रमुख हस्तियों का भी समर्थन मिला, जिससे इसकी राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा हुई।

    हाल के घटनाक्रम में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन से जुड़े समर्थकों ने इसे अपनी मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। विरोध प्रदर्शन के समाप्त होने के बाद विभिन्न स्थानों पर समर्थकों के बीच खुशी का माहौल भी देखने को मिला। इसी बीच सामने आए इस कथित होटल वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को नई राजनीतिक दिशा दे दी है और आंदोलन की कार्यशैली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    उधर, शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन के बाद नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पदभार ग्रहण करते ही वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। मंत्रालय के विभिन्न लंबित मामलों के अलावा राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था और उससे जुड़े विषयों पर भी अधिकारियों के साथ चर्चा की गई। संबंधित संस्थानों के अधिकारियों से वर्तमान स्थिति और आगे की कार्ययोजना पर विस्तृत जानकारी ली गई।

    फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक जांच या निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में वीडियो से जुड़े दावों, उसमें दिखाई गई गतिविधियों और लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। आने वाले दिनों में यदि संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया या किसी जांच एजेंसी की रिपोर्ट सामने आती है, तो पूरे मामले की स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी। तब तक यह मामला मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों और उन पर उठ रहे सार्वजनिक व राजनीतिक सवालों के केंद्र में बना हुआ है।

  • जनआंदोलन से राजनीति तक का सफर कितना सफल, कई दलों ने बदली सत्ता तो कई उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे

    जनआंदोलन से राजनीति तक का सफर कितना सफल, कई दलों ने बदली सत्ता तो कई उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे

    नई दिल्ली । हाल के दिनों में चर्चा में रही कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर चल रहे अपने विरोध प्रदर्शन को समाप्त कर दिया है। आंदोलन का केंद्र पेपर लीक का मुद्दा था और इसकी प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से जुड़ी थी। मांग पूरी होने के बाद इस आंदोलन को समर्थकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा है। हालांकि अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या कोई आंदोलन राजनीतिक दल का रूप लेकर लंबे समय तक प्रभावी भूमिका निभा सकता है या उसकी सफलता केवल आंदोलन तक ही सीमित रह जाती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी आंदोलन की लोकप्रियता और राजनीतिक सफलता दो अलग-अलग चरण होते हैं। किसी मुद्दे पर जनता को एकजुट करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, लेकिन उसी समर्थन को स्थायी राजनीतिक आधार में बदलना चुनौतीपूर्ण होता है। इसके लिए मजबूत संगठन, स्पष्ट विचारधारा, सक्षम नेतृत्व और लगातार जनसंपर्क की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि सभी आंदोलन राजनीतिक सफलता में परिवर्तित नहीं हो पाते।

    भारत में आम आदमी पार्टी को आंदोलन से निकले सबसे प्रमुख राजनीतिक दलों में गिना जाता है। भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन से उभरे इस दल ने राजनीति में प्रवेश के बाद कम समय में दिल्ली में अपनी मजबूत पहचान बनाई। शुरुआती चुनाव में उल्लेखनीय प्रदर्शन के बाद पार्टी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई और लगातार कई वर्षों तक सत्ता में बनी रही। हालांकि समय के साथ उसे राजनीतिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन यह उदाहरण बताता है कि यदि आंदोलन को मजबूत संगठनात्मक ढांचे में बदला जाए तो दीर्घकालिक राजनीतिक सफलता संभव है।

    तेलंगाना आंदोलन भी इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। अलग राज्य की मांग को लेकर लंबे समय तक चले जन आंदोलन ने व्यापक जनसमर्थन हासिल किया। इसी आंदोलन के आधार पर गठित राजनीतिक नेतृत्व ने राज्य गठन के बाद सत्ता प्राप्त की और लंबे समय तक सरकार का नेतृत्व किया। इससे स्पष्ट होता है कि जब आंदोलन किसी व्यापक जनभावना से जुड़ा हो और उसे प्रभावी राजनीतिक दिशा मिले तो वह चुनावी सफलता में बदल सकता है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसे कई उदाहरण देखने को मिलते हैं। दक्षिण अफ्रीका में नस्लीय भेदभाव के खिलाफ लंबे संघर्ष से उभरे अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस ने लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित होने के बाद सत्ता संभाली और देश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाई। वहीं ब्राजील में मजदूरों और ट्रेड यूनियनों के आंदोलन से बनी वर्कर्स पार्टी ने भी समय के साथ राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाया और उसके नेतृत्व ने देश की सर्वोच्च कार्यकारी जिम्मेदारी संभाली।

    इसके विपरीत कई ऐसे आंदोलन भी रहे जिनसे राजनीतिक दल तो बने, लेकिन वे अपेक्षित जनसमर्थन या चुनावी सफलता हासिल नहीं कर सके। कुछ दल शुरुआती लोकप्रियता के बावजूद संगठनात्मक कमजोरी, नेतृत्व संकट, आंतरिक मतभेद या बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण सीमित प्रभाव तक सिमट गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल आंदोलन की सफलता किसी राजनीतिक दल की दीर्घकालिक सफलता की गारंटी नहीं होती।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए राजनीतिक दल का भविष्य उसके आंदोलन से अधिक इस बात पर निर्भर करता है कि वह जनता के भरोसे को कितनी निरंतरता के साथ बनाए रखता है। यदि संगठन मजबूत हो, नीतियां स्पष्ट हों और नेतृत्व विश्वसनीय बना रहे तो आंदोलन से निकला दल भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय राजनीति में स्थायी स्थान बना सकता है। वहीं इन तत्वों के अभाव में शुरुआती लोकप्रियता समय के साथ कमजोर पड़ सकती है।