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  • 10वीं के बाद High Salary Courses: डिजिटल मार्केटिंग से AI तक ये कोर्स कराएंगे मोटी कमाई

    10वीं के बाद High Salary Courses: डिजिटल मार्केटिंग से AI तक ये कोर्स कराएंगे मोटी कमाई


    नई दिल्ली। 10वीं पास करने के बाद ज्यादातर छात्र 11वीं की पढ़ाई पर फोकस करते हैं, लेकिन आज के समय में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि स्किल्स (High Salary Courses) सीखना भी उतना ही जरूरी हो गया है। बढ़ते कॉम्पिटिशन के दौर में अगर आप जल्दी करियर बनाना चाहते हैं तो पढ़ाई के साथ-साथ कुछ प्रोफेशनल कोर्स करना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

    आज के समय में ऐसे कई कोर्स उपलब्ध हैं जिन्हें आप स्कूल के साथ-साथ कर सकते हैं और उनसे कमाई भी शुरू कर सकते हैं। ये कोर्स न सिर्फ आपको स्किल्ड बनाते हैं बल्कि भविष्य में हाई सैलरी जॉब (High Salary Courses) के रास्ते भी खोलते हैं।

    डिजिटल मार्केटिंग और AI सबसे ज्यादा डिमांड में
    डिजिटल मार्केटिंग आज के दौर की सबसे लोकप्रिय स्किल्स में से एक बन चुकी है। इसमें SEO, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्रमोशन जैसे काम सिखाए जाते हैं। इस स्किल को सीखकर आप फ्रीलांसिंग, पार्ट टाइम जॉब या खुद का बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं।

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    वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र है। AI की मदद से कंटेंट क्रिएशन, इमेज और वीडियो जनरेशन जैसे कई काम किए जा सकते हैं। इसके साथ ही “प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग” जैसी नई स्किल्स की भी काफी डिमांड है, जिसमें एक्सपर्ट्स अच्छी सैलरी कमा रहे हैं।

    कंप्यूटर स्किल्स से भी बन सकता है मजबूत करियर
    एडवांस्ड कंप्यूटर स्किल्स जैसे ग्राफिक डिजाइनिंग और वीडियो एडिटिंग भी आज के समय में काफी डिमांड में हैं। सोशल मीडिया और कंटेंट क्रिएशन के बढ़ते ट्रेंड के कारण इन स्किल्स की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

    इन स्किल्स को सीखकर आप फ्रीलांसिंग कर सकते हैं, पार्ट टाइम जॉब पा सकते हैं या खुद का काम शुरू कर सकते हैं। अच्छी बात यह है कि ये सभी कोर्स 3 से 6 महीने में पूरे किए जा सकते हैं और जल्दी कमाई का मौका देते हैं।

  • पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच अभिनेत्री रुपाली गांगुली के बयान से राज्य में नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

    पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच अभिनेत्री रुपाली गांगुली के बयान से राज्य में नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।


    नई दिल्ली:पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों चुनावी गतिविधियों के बीच लगातार चर्चा में बनी हुई है। जैसे जैसे राज्य में मतदान की प्रक्रिया नजदीक आ रही है, वैसे वैसे राजनीतिक बयान और प्रतिक्रियाएं भी तेज होती जा रही हैं। इसी क्रम में अभिनेत्री Rupali Ganguly के हालिया राजनीतिक बयान ने राज्य के चुनावी माहौल में नई बहस को जन्म दे दिया है। उनके विचारों ने न केवल राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ाई है बल्कि आम जनता के बीच भी इस विषय पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर चिंता जाहिर की और अपने व्यक्तिगत अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि समय के साथ परिस्थितियों में बदलाव आया है। उनके अनुसार, यह बदलाव उनके दृष्टिकोण से पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहा और इसी कारण वे राज्य में एक अलग राजनीतिक दिशा की उम्मीद रखती हैं। उनके इस बयान को लेकर समर्थक और विरोधी दोनों पक्षों में अलग अलग राय सामने आ रही है।

    इसी बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे आगामी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रति समर्थन रखती हैं। उनके अनुसार, यह समर्थन राज्य में परिवर्तन की आवश्यकता को देखते हुए है। उन्होंने यह भी कहा कि वे चाहती हैं कि राज्य में स्थिरता और विकास के नए अवसर सामने आएं, जिससे जनता को बेहतर भविष्य मिल सके।

    उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में चर्चा और तेज हो गई है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी समय में सार्वजनिक हस्तियों के ऐसे बयान मतदाताओं की सोच पर प्रभाव डाल सकते हैं। वहीं कुछ लोग इसे व्यक्तिगत राय मानते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बता रहे हैं, जिसमें हर व्यक्ति को अपने विचार रखने का अधिकार है।

    राज्य की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को लेकर दिए गए अप्रत्यक्ष संदर्भों ने भी राजनीतिक बहस को और अधिक तीव्र कर दिया है। उनके नेतृत्व और नीतियों पर पहले भी विभिन्न स्तरों पर चर्चा होती रही है और चुनावी समय में यह मुद्दा और अधिक केंद्र में आ जाता है। इस बार भी राजनीतिक दल अपने अपने दृष्टिकोण से स्थिति को जनता के सामने रख रहे हैं।

    चुनावी माहौल को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने अभियान को मजबूत करने में जुटे हैं। रैलियों, जनसभाओं और प्रचार अभियानों के बीच बयानबाजी का स्तर भी बढ़ गया है। ऐसे में सार्वजनिक हस्तियों के विचार इस माहौल को और अधिक प्रभावित कर रहे हैं और चर्चा को नई दिशा दे रहे हैं।

    राज्य में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पहले से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है और राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। विभिन्न वर्गों के मतदाता अपने निर्णय को लेकर विचार कर रहे हैं और राजनीतिक दल उन्हें अपने पक्ष में लाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति केवल दलों की प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे वैसे राज्य का राजनीतिक वातावरण और अधिक सक्रिय और संवेदनशील होता जा रहा है।

  • राहुल गांधी ने अंबेडकर मैराथन से BJP-RSS पर साधा निशाना, बताया संविधान पर खतरा

    राहुल गांधी ने अंबेडकर मैराथन से BJP-RSS पर साधा निशाना, बताया संविधान पर खतरा


    नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में आयोजित रन फॉर अंबेडकर और रन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन मैराथन 2026 को हरी झंडी दिखाकर शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला।

    राहुल गांधी ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का सबसे बड़ा संदेश देश का संविधान है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से जुड़े लोग अंबेडकर के सिद्धांतों और संविधान को खत्‍म करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये ताकतें देश में सभी को समान अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं। राहुल गांधी के मुताबिक भाजपा के नेता अंबेडकर की प्रतिमा के सामने सम्मान जताते जरूर हैं लेकिन असल में उनका उद्देश्य संविधान को नुकसान पहुंचाना है।

    इस कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार संविधान पर प्रहार कर रही है और उसके नेता आक्रामक रवैया अपना रहे हैं। उनके अनुसार सरकार परोक्ष रूप से संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी कर रही है। पुनिया ने कहा कि यह मैराथन लोगों को जागरूक करने के लिए आयोजित की गई है ताकि सभी मिलकर अंबेडकर की विचारधारा और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हो सकें।

    महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा इसके समर्थन में रही है लेकिन भाजपा के लागू करने के तरीके पर सवाल उठते हैं। उनका कहना था कि बिना नई जनगणना और परिसीमन के इस बिल को लागू करना उचित नहीं है। कांग्रेस की मांग है कि इसे नई जनगणना के आधार पर ही लागू किया जाना चाहिए न कि 2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर।

  • J&K के डोडा क्षेत्र में सुबह-सुबह कांपी धरती, आया 4.6 तीव्रता का भूकंप

    J&K के डोडा क्षेत्र में सुबह-सुबह कांपी धरती, आया 4.6 तीव्रता का भूकंप


    जम्मू।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के डोडा (Doda) क्षेत्र में रविवार की सुबह भूकंप (Earthquake) के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.6 मापी गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismolog) के अनुसार, यह भूकंप सुबह 4 बजकर 32 मिनट पर आया। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।


    महाराष्ट्र के हिंगोली में भूकंप के झटके

    इससे पहले शनिवार सुबह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के हिंगोली जिले में 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके झटके नांदेड और परभणी जिलों के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए। अधिकारियों के अनुसार अभी तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की तत्काल सूचना नहीं है। हालांकि, पांगरा शिंदे गांव में कुछ घरों और सामुदायिक भवनों में दरारें आने की खबर है। हिंगोली के कलेक्टर राहुल गुप्ता ने बताया कि भूकंप सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इसका केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर हिंगोली जिले के वसमत तालुका के शिरली गांव के पास था।


    क्यों आता है भूकंप?

    पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।


    जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?

    भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।


    कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?

    भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

  • नए गठबंधन के मोह से अखिलेश ने मोड़ा मुख, 'पीडीए' के दम पर भाजपा के शुद्धिकरण का किया शंखनाद

    नए गठबंधन के मोह से अखिलेश ने मोड़ा मुख, 'पीडीए' के दम पर भाजपा के शुद्धिकरण का किया शंखनाद

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति के फलक पर आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछा दी है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी किसी भी नए राजनीतिक दल के साथ गठबंधन का प्रयोग नहीं करेगी। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि वर्तमान में जो गठबंधन (इंडिया अलायंस) अस्तित्व में है, वही 2027 की चुनावी जंग में भी पार्टी का आधार बनेगा। अखिलेश के इस बयान ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है, जिनमें छोटे दलों के साथ नए तालमेल की संभावना जताई जा रही थी।

    अनुभवों से ली सीख, पुराने साथियों पर भरोसा
    अखिलेश यादव ने गठबंधन के अपने पुराने और खट्टे-मीठे अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने अलग-अलग समय में कई प्रयोग किए हैं। हमारे पास गठबंधन का लंबा अनुभव है और इसी आधार पर हमने तय किया है कि जो साथी वर्तमान में हमारे साथ खड़े हैं, हम उन्हीं के साथ मजबूती से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बार भाजपा का मुकाबला केवल किसी राजनीतिक गठबंधन से नहीं, बल्कि एक ‘समुदाय’ से होगा। यह समुदाय ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) है, जो भाजपा की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर मतदान करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा की नजर फिलहाल केवल उत्तर प्रदेश पर है और राजस्थान में चुनाव लड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है।

    वोटर लिस्ट में ‘शुद्धिकरण’ पर छिड़ा वाकयुद्ध
    मतदाता सूची में धांधली के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्रों के बजाय शहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर वोट काटने की साजिश रची थी, क्योंकि वहां उसे हार का डर सता रहा था। सपा प्रमुख ने दावा किया कि उनके ‘पीडीए प्रहरियों’ ने हर बूथ पर पैनी नजर रखी, जिससे सत्ता पक्ष की गणित फेल हो गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “भाजपा मतदाता सूची के शुद्धिकरण का दावा कर रही है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि प्रदेश की जनता आने वाले चुनाव में उनकी सरकार का ही पूर्ण शुद्धिकरण कर देगी।” उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे जिला स्तर पर मतदाता सूची का सूक्ष्म विश्लेषण जारी रखें।

    ‘नकली संतों’ की राजनीति पर प्रहार
    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में उतरते हुए अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद उन ‘नकली संतों’ से संघर्ष कर रहे हैं जिन्होंने धर्म का चोला पहनकर राजनीति को दूषित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरों से प्रमाण मांग रहे हैं, उनके पास खुद कोई प्रामाणिक आधार नहीं है। समाजवादी पार्टी वास्तविक संतों का सम्मान करती है और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आशीर्वाद पार्टी के साथ हमेशा रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही इन ‘नकली संतों’ की वास्तविकता पर भी कोई वेब सीरीज सामने आ सकती है।

    सिनेमाई एजेंडे और पड़ोसी राज्यों पर कटाक्ष
    हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए काल्पनिक बातों को फिल्मों के जरिए वास्तविकता बनाकर पेश कर रही है। हालांकि, जनता ने ‘धुरंधर’ का जवाब ‘धुआंधार’ तरीके से देकर यह बता दिया है कि वह अब बहकावे में आने वाली नहीं है। पड़ोसी राज्य बिहार की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ‘डिमोशन’ करते हुए उन्हें धीरे-धीरे रिटायरमेंट की राह दिखा दी है। अखिलेश के इन तेवरों से साफ है कि वे आने वाले समय में केवल चुनावी मैदान में ही नहीं, बल्कि वैचारिक और सामाजिक मोर्चे पर भी भाजपा की घेराबंदी करने के लिए तैयार हैं।

  • एनसीपी मंत्री वीडियो कांड: आरोपी पहुँचा हाईकोर्ट, ट्रांसजेंडर के खिलाफ वसूली और साजिश का लगाया आरोप

    एनसीपी मंत्री वीडियो कांड: आरोपी पहुँचा हाईकोर्ट, ट्रांसजेंडर के खिलाफ वसूली और साजिश का लगाया आरोप


    नई दिल्ली। राजनैतिक गलियारों में हलचल मचाने वाले एनसीपी मंत्री नरहरी जिरवाल से जुड़े कथित आपत्तिजनक वीडियो मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने की गुहार लगाई है। यह याचिका मुंबई के कफ परेड पुलिस स्टेशन में दर्ज उस मामले के विरोध में दायर की गई है, जिसमें आरोपी पर वीडियो लीक करने और छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

    आरोपी और ट्रांसजेंडर के बीच ‘वसूली’ की जंग
    इस पूरे विवाद की जड़ में एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति की शिकायत है, जिसने आरोपी को अपना भाई बताते हुए आरोप लगाया था कि उसने वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे धमकाने की कोशिश की। दूसरी ओर, आरोपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए ट्रांसजेंडर पर ही पलटवार किया है। आरोपी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उसे झूठे मामले में फंसाया जा रहा है और वास्तव में उसे ब्लैकमेल कर वसूली की कोशिश की जा रही थी। उसने अदालत से मांग की है कि ट्रांसजेंडर के खिलाफ आपराधिक साजिश और धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

    वीडियो लीक कांड और मंत्री की भूमिका
    मामले की गंभीरता तब बढ़ी जब एक ऐसा वीडियो सार्वजनिक हुआ जिसमें कथित तौर पर एनसीपी मंत्री एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह वीडियो वास्तविक है या इसके साथ तकनीकी रूप से छेड़छाड़ की गई है। आरोपी का कहना है कि उसे निशाना बनाया जा रहा है, जबकि शिकायतकर्ता का तर्क है कि उसकी निजता और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हुआ है।

    अदालती सुनवाई पर टिकी निगाहें
    फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई का इंतजार है, जिसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि एफआईआर रद्द होगी या जांच का दायरा और बढ़ेगा। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर अपनी प्रक्रिया जारी रखी है। यह मामला न केवल एक मंत्री की छवि से जुड़ा है, बल्कि इसमें साइबर अपराध, ब्लैकमेलिंग और आपसी रंजिश के कई पेचीदा पहलू शामिल हो गए हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला इस विवाद की दिशा तय करेगा।

  • UP Board Result 2026: 10वीं-12वीं का इंतजार खत्म, अप्रैल के आखिरी हफ्ते में आएगा रिजल्ट

    UP Board Result 2026: 10वीं-12वीं का इंतजार खत्म, अप्रैल के आखिरी हफ्ते में आएगा रिजल्ट


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) के लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर है। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 का रिजल्ट अब ज्यादा दूर नहीं है। बोर्ड अप्रैल के अंतिम सप्ताह में परिणाम घोषित करने की तैयारी में है।

    25 अप्रैल के बाद कभी भी आ सकता है रिजल्ट
    बोर्ड के अनुसार, 25 अप्रैल के बाद इसी महीने किसी भी दिन हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का रिजल्ट जारी किया जा सकता है। इससे छात्रों को अब लंबे इंतजार से राहत मिलेगी। जो छात्र पहले प्रैक्टिकल परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे, उनकी परीक्षाएं 9 अप्रैल से कराई जा रही हैं। साथ ही, जिन परीक्षकों ने अंक अपलोड नहीं किए थे, उन्हें दोबारा मौका दिया गया था। अब सभी अंकों को वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है।

    रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया तेज
    UP Board के सचिव भगवती सिंह ने रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। बोर्ड ने सभी परीक्षकों को निर्देश दिया है कि प्रैक्टिकल के अंक तुरंत अपलोड किए जाएं, ताकि रिजल्ट में देरी न हो। करीब 34,637 छात्रों के प्रैक्टिकल अंक समय बढ़ाकर अपलोड कराए गए हैं। पहले 652 परीक्षा केंद्रों पर आंतरिक परीक्षकों ने अंक अपलोड नहीं किए थे, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

    जल्द जारी होगा आधिकारिक नोटिस
    रिजल्ट जारी होने से पहले बोर्ड की ओर से आधिकारिक नोटिस जारी किया जाएगा, जिसमें तारीख और समय की जानकारी दी जाएगी। UP Board Result 2026 अब अंतिम चरण में है। सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अप्रैल के आखिरी सप्ताह में रिजल्ट जारी होने की पूरी संभावना है। ऐसे में छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें।

  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए बड़ी राहत, Vaya Vandana Yojana से मिलेगी गारंटीड इनकम

    वरिष्ठ नागरिकों के लिए बड़ी राहत, Vaya Vandana Yojana से मिलेगी गारंटीड इनकम


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसका उद्देश्य देश के वरिष्ठ नागरिकों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक स्थिरता और नियमित आय प्रदान करना है। इस योजना को भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के माध्यम से संचालित किया गया है और यह विशेष रूप से 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों के लिए बनाई गई है।
    वरिष्ठ नागरिकों को मिलती है गारंटीड आय

    इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश करने पर निश्चित दर से रिटर्न मिलता है। निवेशक को मासिक, तिमाही, छमाही या वार्षिक आधार पर पेंशन के रूप में नियमित आय प्राप्त होती है। यह उन बुजुर्गों के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है, जिनके पास रिटायरमेंट के बाद कोई स्थायी आय स्रोत नहीं होता। PMVVY के तहत मिलने वाला रिटर्न पूरी तरह गारंटीड होता है, यानी यह बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता। यही वजह है कि इसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में गिना जाता है।
    निवेश सीमा और अवधि

    इस योजना में अधिकतम निवेश सीमा तय होती है, जिससे पेंशन की राशि भी सीमित रहती है। निवेश करने पर निवेशक को लगभग 10 वर्षों तक निश्चित पेंशन मिलती है। यह अवधि पूरी होने पर मूल निवेश राशि भी वापस मिलने का प्रावधान होता है।
    लोन और निकासी की सुविधा

    PMVVY में निवेश करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को जरूरत पड़ने पर लोन की सुविधा भी मिलती है। इसके अलावा, किसी आपात स्थिति में आंशिक या समय से पहले निकासी का विकल्प भी उपलब्ध होता है, हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें और नियम लागू होते हैं।
    बुजुर्गों के लिए क्यों खास है यह योजना?

    विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती महंगाई और अनिश्चित आर्थिक परिस्थितियों के बीच यह योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक मजबूत आर्थिक सहारा साबित हो सकती है। यह न केवल उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाती है, बल्कि मानसिक रूप से भी सुरक्षा और स्थिरता का एहसास कराती है।
    PMVVY के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया
    यदि कोई पात्र व्यक्ति इस योजना का लाभ लेना चाहता है, तो वह LIC की आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन कर सकता है:
    स्टेप 1: LIC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं

    स्टेप 2: “PM Vaya Vandana Yojana” विकल्प चुनें

    स्टेप 3: “Buy Online” या “Apply Now” पर क्लिक करें

    स्टेप 4: आवश्यक विवरण भरें (नाम, उम्र, मोबाइल नंबर, आधार/PAN)

    स्टेप 5: पेंशन विकल्प चुनें (Monthly/Quarterly/Half-Yearly/Yearly)

    स्टेप 6: निवेश राशि दर्ज करें

    स्टेप 7: ऑनलाइन भुगतान करें (UPI/नेट बैंकिंग/कार्ड)

    स्टेप 8: पॉलिसी डॉक्यूमेंट डाउनलोड करें

    प्रधानमंत्री वय वंदना योजना रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना वरिष्ठ नागरिकों को निश्चित आय, सुरक्षित निवेश और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे उनका जीवन अधिक आत्मनिर्भर और सम्मानजनक बनता है।
  • मियांपुर का नाम बदलकर रविंद्र नगर किए जाने की घोषणा से प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बढ़ी

    मियांपुर का नाम बदलकर रविंद्र नगर किए जाने की घोषणा से प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बढ़ी


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आयोजित एक बड़े प्रशासनिक और विकास कार्यक्रम के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए विकास परियोजनाओं और जनकल्याण योजनाओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। इस अवसर पर जिले में चल रही विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    कार्यक्रम के दौरान सबसे प्रमुख पहल थारू जनजाति के सशक्तिकरण से जुड़ी रही, जिसमें हजारों परिवारों को भूमि का मालिकाना अधिकार प्रदान किया गया। इस कदम से उन परिवारों को कानूनी सुरक्षा और स्थायी आवास का अधिकार मिला है, जो लंबे समय से भूमि संबंधी अनिश्चितता का सामना कर रहे थे। इस प्रक्रिया के तहत हजारों हेक्टेयर भूमि का आवंटन किया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा मिलने की बात कही जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का लक्ष्य हर नागरिक तक उसका अधिकार पहुंचाना और समाज के हर वर्ग को समान अवसर देना है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास की प्रक्रिया में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा रहा है और सभी योजनाएं पारदर्शिता के साथ लागू की जा रही हैं।

    इसी कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए घोषणा की गई कि मियांपुर गांव का नाम बदलकर अब रविंद्र नगर रखा जाएगा। यह निर्णय क्षेत्रीय पहचान और सामाजिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर एक नई पहचान स्थापित करना बताया गया है।

    सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि राज्य में विकास कार्यों को गति देने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू की जा रही हैं और हर जिले को समान रूप से आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इस मौके पर लाभार्थियों को भूमि अधिकार पत्र सौंपे जाने के बाद ग्रामीणों में उत्साह का माहौल देखा गया।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि सरकार का फोकस अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचाने पर है। उन्होंने बताया कि अब योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंच रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों में सुधार हुआ है।

    इस घोषणा के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि नाम परिवर्तन और भूमि अधिकार जैसे फैसले सामाजिक और स्थानीय पहचान पर सीधा प्रभाव डालते हैं।

  • बंगाल चुनाव में भाजपा का बड़ा दांव, महिलाओं को ₹3000 मासिक सहायता और 33 प्रतिशत आरक्षण का वादा

    बंगाल चुनाव में भाजपा का बड़ा दांव, महिलाओं को ₹3000 मासिक सहायता और 33 प्रतिशत आरक्षण का वादा

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है, जहां भारतीय जनता पार्टी ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है। इस घोषणापत्र को ‘संकल्प पत्र’ नाम दिया गया है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कोलकाता में जारी किया। पार्टी ने इसे राज्य के विकास और बदलाव का रोडमैप बताते हुए कई बड़े वादों की घोषणा की है।

    इस घोषणापत्र में सबसे अधिक फोकस महिलाओं, युवाओं और सरकारी कर्मचारियों पर किया गया है। महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता योजना के तहत हर पात्र महिला को प्रतिमाह तीन हजार रुपये सीधे बैंक खाते में देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही महिलाओं को सरकारी नौकरियों में तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने का भी वादा किया गया है, जिससे उनकी भागीदारी को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

    युवाओं के लिए भी घोषणापत्र में बड़े वादे किए गए हैं। बेरोजगार युवाओं को प्रतिमाह तीन हजार रुपये का भत्ता देने की बात कही गई है, साथ ही आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने का दावा किया गया है। इसके जरिए राज्य में रोजगार संकट को कम करने की रणनीति प्रस्तुत की गई है।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। लड़कियों के लिए केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा की बात कही गई है, जिससे शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाया जा सके। पार्टी का कहना है कि इस कदम से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।

    सरकारी कर्मचारियों के लिए भी बड़ा वादा किया गया है, जिसके तहत सरकार बनने के बाद पैंतालीस दिनों के भीतर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और बकाया महंगाई भत्ते का भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इस घोषणा को कर्मचारियों को साधने की एक बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    इसके अलावा राज्य में समान नागरिक संहिता को लेकर भी बड़ा ऐलान किया गया है। पार्टी ने कहा है कि यदि उन्हें सत्ता मिलती है तो छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इस घोषणा ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

    घोषणापत्र में सीमा सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे को भी प्रमुखता दी गई है। पार्टी ने दावा किया है कि राज्य की सीमाओं को अधिक मजबूत बनाया जाएगा और अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाने का वादा किया गया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणापत्र चुनावी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें विभिन्न वर्गों को सीधे आर्थिक और सामाजिक लाभ का आश्वासन देकर समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई है। वहीं सत्तारूढ़ दल की ओर से इन वादों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है