Category: National

  • 15 अगस्त तक 100 नए शहरों में पहुंचेगा 10 किलो एलपीजी सिलेंडर, छोटे परिवारों और कम खपत वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    15 अगस्त तक 100 नए शहरों में पहुंचेगा 10 किलो एलपीजी सिलेंडर, छोटे परिवारों और कम खपत वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    नई दिल्ली । घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को उनकी जरूरत के अनुसार अधिक सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने बड़ा विस्तार कार्यक्रम शुरू किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 15 अगस्त तक देश के 24 राज्यों के 100 नए शहरों में 10 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य उन उपभोक्ताओं को राहत देना है, जिनकी गैस खपत अपेक्षाकृत कम होती है और जिन्हें 14.2 किलो के पारंपरिक घरेलू सिलेंडर की आवश्यकता नहीं पड़ती।

    कंपनी का मानना है कि छोटे आकार का सिलेंडर विशेष रूप से छोटे परिवारों, अकेले रहने वाले लोगों, किराए के मकानों में रहने वाले उपभोक्ताओं तथा सीमित गैस उपयोग करने वाले परिवारों के लिए अधिक उपयोगी साबित होगा। ऐसे उपभोक्ताओं को अब अपनी आवश्यकता के अनुसार सिलेंडर चुनने का विकल्प मिलेगा, जिससे घरेलू खर्च और उपयोग दोनों में बेहतर संतुलन बनाया जा सकेगा। साथ ही छोटे सिलेंडर का वजन कम होने से उसे उठाने और उपयोग करने में भी आसानी होगी।

    एलपीजी वितरण नेटवर्क के विस्तार के साथ कंपनी ऊर्जा सेवाओं को अधिक उपभोक्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर रही है। 100 नए शहरों में सुविधा शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में ऐसे परिवारों को लाभ मिलने की संभावना है, जो अब तक केवल बड़े घरेलू सिलेंडर पर निर्भर थे। इससे उपभोक्ताओं के पास अपनी जरूरत और खपत के अनुरूप विकल्प उपलब्ध होंगे, जिससे सुविधा और उपयोगिता दोनों में वृद्धि होगी।

    कंपनी ने अपने परिचालन से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की हैं। जून तिमाही के दौरान कच्चे तेल की खरीद में विविधता लाने पर विशेष ध्यान दिया गया। रूस के अलावा वेनेजुएला और अंगोला जैसे देशों से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई गई है। कंपनी के अनुसार, स्पॉट मार्केट से खरीद का हिस्सा भी बढ़ा है, जिससे वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप खरीद रणनीति को अधिक लचीला बनाया जा सका है।

    ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से कंपनी ने पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार भी बनाए रखा है। उपलब्ध भंडार लगभग 35 दिनों की आवश्यकता पूरी करने के लिए पर्याप्त बताया गया है। इससे वैश्विक बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव या आपूर्ति संबंधी चुनौतियों की स्थिति में परिचालन को स्थिर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। कंपनी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर भविष्य के वित्तीय प्रदर्शन पर पड़ सकता है, इसलिए खरीद और भंडारण रणनीति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि 10 किलो एलपीजी सिलेंडर का विस्तार उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया व्यावहारिक कदम है। इससे ऐसे परिवारों को आर्थिक और उपयोग संबंधी सुविधा मिलेगी, जिनकी मासिक गैस खपत कम रहती है। साथ ही यह पहल घरेलू एलपीजी वितरण व्यवस्था को अधिक लचीला और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    15 अगस्त तक विस्तार योजना पूरी होने के बाद जिन शहरों में यह सुविधा शुरू होगी, वहां के उपभोक्ताओं को पारंपरिक बड़े सिलेंडर के साथ एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होगा। इससे घरेलू एलपीजी सेवाओं का दायरा बढ़ने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार बेहतर और अधिक सुविधाजनक चयन करने का अवसर मिलेगा।

  • फार्मा सेक्टर के लिए नए नियम लागू, मार्केटिंग खर्च का खुलासा अनिवार्य; अनैतिक प्रचार पर कड़ी निगरानी

    फार्मा सेक्टर के लिए नए नियम लागू, मार्केटिंग खर्च का खुलासा अनिवार्य; अनैतिक प्रचार पर कड़ी निगरानी

    नई दिल्ली । दवा कंपनियों की मार्केटिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और नैतिक मानकों को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने नए सख्त नियम लागू किए हैं। इन प्रावधानों के तहत दवा कंपनियों के प्रचार-प्रसार के तरीकों पर निगरानी बढ़ाई गई है और डॉक्टरों को गिफ्ट, नकद लाभ या अन्य प्रकार के व्यक्तिगत प्रलोभन देने पर स्पष्ट रोक लगा दी गई है। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य दवाओं के प्रचार को जिम्मेदार, पारदर्शी और जनहित के अनुरूप बनाना है।

    सरकार के अनुसार, यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (यूसीपीएमपी) 2024 के तहत सभी दवा कंपनियों को अपनी आंतरिक नैतिक व्यवस्था को मजबूत करना होगा। इसके लिए प्रत्येक कंपनी को एथिक्स कमेटी का गठन करना, एथिक्स ऑफिसर नियुक्त करना और शिकायतों के निपटारे के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही नियमों के पालन से संबंधित स्व-घोषणा भी देनी होगी, जिससे कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

    नए नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि दवा कंपनियां अपने वार्षिक मार्केटिंग खर्च का विस्तृत विवरण निर्धारित पोर्टल पर उपलब्ध कराएं। विशेष रूप से डॉक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़ी प्रचार गतिविधियों, कॉन्फ्रेंस, सेमिनार, कार्यशालाओं तथा कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन और कंटीन्यूइंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट कार्यक्रमों पर किए गए खर्च का भी खुलासा करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे फार्मा उद्योग में वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक प्रभाव की संभावनाएं कम होंगी।

    नियमों के तहत मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और अन्य मार्केटिंग कर्मचारियों की गतिविधियों की जिम्मेदारी संबंधित दवा कंपनी की होगी। यदि किसी कर्मचारी द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उसकी जवाबदेही कंपनी पर भी तय की जाएगी। इसके अलावा स्वतंत्र, रैंडम अथवा जोखिम आधारित ऑडिट का भी प्रावधान रखा गया है, ताकि नियमों के अनुपालन की नियमित समीक्षा की जा सके।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी दवा कंपनी को डॉक्टरों या उनके परिवार के सदस्यों को उपहार, नकद लाभ, महंगे आतिथ्य या अन्य व्यक्तिगत सुविधाएं उपलब्ध कराने की अनुमति नहीं होगी। इस कदम का उद्देश्य चिकित्सकीय निर्णयों को व्यावसायिक प्रभाव से मुक्त रखना और मरीजों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। इसके साथ ही डॉक्टरों और दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों के बीच होने वाले संपर्क और प्रचार गतिविधियों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं।

    शिकायतों के निपटारे के लिए दो-स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है, जबकि अपीलों का अंतिम निपटारा संबंधित विभाग द्वारा किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन व्यवस्थाओं से शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगी। साथ ही कंपनियों को नियमों के पालन के लिए नियमित निगरानी और उत्तरदायित्व की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।

    स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन प्रावधानों का प्रभावी ढंग से पालन कराया जाता है तो फार्मास्युटिकल उद्योग में पारदर्शिता बढ़ेगी, चिकित्सकीय निर्णयों की निष्पक्षता मजबूत होगी और मरीजों का स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा भी और सुदृढ़ होगा। सरकार का यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में नैतिक आचरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

  • पेपर लीक विवाद के बीच AAP का राज्यपाल पर सवाल, दीक्षांत समारोह के बहिष्कार की अपील; उच्च शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

    पेपर लीक विवाद के बीच AAP का राज्यपाल पर सवाल, दीक्षांत समारोह के बहिष्कार की अपील; उच्च शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में पेपर लीक विवाद को लेकर सियासी बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी ने राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उच्च शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जब प्रदेश में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और छात्र लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं, तब ऐसे माहौल में विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह आयोजित करना नैतिक रूप से उचित नहीं माना जा सकता। पार्टी ने राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों का समाधान पहले होना चाहिए।

    आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश मुख्य प्रदेश प्रवक्ता और छात्र संघ प्रभारी वंशराज दुबे ने कहा कि सरकार एक ओर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं और छात्राओं के हितों की बात करती है, जबकि दूसरी ओर छात्रों के विरोध और उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उनका आरोप है कि परीक्षा से जुड़े विवादों और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है, लेकिन सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय विरोध करने वालों पर ही सवाल उठा रही है।

    पार्टी ने 27 से 29 जुलाई के बीच जौनपुर, वाराणसी और बलिया के विश्वविद्यालयों में प्रस्तावित दीक्षांत समारोहों को लेकर भी आपत्ति जताई है। आम आदमी पार्टी ने विश्वविद्यालयों के मेधावी छात्रों और गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से अपील की है कि वे इन कार्यक्रमों का बहिष्कार कर अपनी असहमति दर्ज कराएं। पार्टी का कहना है कि यह विरोध किसी डिग्री या उपलब्धि के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग के समर्थन में है।

    वंशराज दुबे ने कहा कि विद्यार्थियों की डिग्रियां उनके वर्षों की मेहनत, परिवार के त्याग और संघर्ष का परिणाम होती हैं। इसलिए सरकार को पहले उन परिस्थितियों का समाधान करना चाहिए, जिनके कारण परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि छात्रों की शिकायतों का समाधान नहीं किया जाता और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तो असंतोष और बढ़ सकता है।

    पार्टी ने उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि यदि छात्रों के लोकतांत्रिक विरोध को स्वीकार करने के बजाय उन पर आरोप लगाए जाते हैं, तो इससे शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि जिम्मेदारी तय करना और निष्पक्ष कार्रवाई करना सरकार का दायित्व है, ताकि युवाओं का विश्वास दोबारा स्थापित किया जा सके।

    प्रदेश में हाल के दिनों में पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन को लेकर लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं, जबकि सरकार परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कह रही है। इसी बीच आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के हितों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर उसका विरोध आगे भी जारी रहेगा। शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बीच अब सभी की नजर सरकार की अगली कार्रवाई और इस पूरे विवाद के समाधान पर टिकी हुई है।

  • राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, घायल छात्र को दिखाकर उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल

    राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, घायल छात्र को दिखाकर उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल


    नई दिल्ली । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को अपने आवास 10 जनपथ पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नीट पेपर लीक मामले और छात्रों के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए एक छात्र को मीडिया के सामने पेश किया और उसकी चोटें दिखाते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

    राहुल गांधी ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की स्थिति के लिए मंत्री जिम्मेदार हैं और इसी कारण हजारों छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं।

    घायल छात्र की चोटें दिखाईं
    प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने छात्र के हाथ, पीठ और छाती पर लगी चोटों की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहा था, तभी पैलेट गन से घायल हो गया।

    20 जुलाई की झड़प का मामला
    गौरतलब है कि 20 जुलाई को नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा निकाले गए संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इस घटना में 100 से अधिक छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

    छात्र की आंख की रोशनी पर संकट
    राहुल गांधी के साथ मौजूद छात्र की पहचान साहिल लोचाब (19) के रूप में हुई, जो दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ का निवासी है। परिवार के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पैलेट लगने से उसकी दाहिनी आंख गंभीर रूप से घायल हो गई। उसका उपचार एम्स के जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में हुआ, जहां सर्जरी भी की गई। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने बताया है कि घायल आंख की रोशनी लौटने की संभावना करीब एक प्रतिशत ही है, क्योंकि आंख की पुतली को गंभीर क्षति पहुंची है।

    पुलिस अधिकारी बनने का था सपना
    साहिल दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) का छात्र है। उसकी मां ज्योति ने बताया कि वह पहले भी CJP के प्रदर्शनों में शामिल हो चुका था। 20 जुलाई को भी वह यह कहकर घर से निकला था कि यह उसकी पढ़ाई और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने बताया कि साहिल का सपना पुलिस अधिकारी बनने का था।

  • कोर्ट की कार्यवाही नहीं बनेगी वायरल कंटेंट, सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर लगाई रोक

    कोर्ट की कार्यवाही नहीं बनेगी वायरल कंटेंट, सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर लगाई रोक


    नई दिल्ली । देश में अदालतों की कार्यवाही के वीडियो और ऑडियो क्लिप्स को सोशल मीडिया पर वायरल करने के बढ़ते चलन पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “अदालत कोई मनोरंजन चैनल नहीं है” और न्यायिक कार्यवाही के छोटे-छोटे हिस्सों को संदर्भ से अलग करके सोशल मीडिया पर प्रसारित करना न्यायपालिका की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया दोनों को प्रभावित करता है। इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी कर कोर्ट की कार्यवाही के ऑडियो-वीडियो क्लिप्स के प्रसारण पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार अब किसी भी अदालत की कार्यवाही का वीडियो या ऑडियो अंश सोशल मीडिया पर पोस्ट, रीपोस्ट, अपलोड, संपादित, स्टोर, प्रसारित या व्यावसायिक उपयोग करने से पहले संबंधित न्यायालय की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह निर्देश केवल सुप्रीम कोर्ट ही नहीं बल्कि देश के सभी हाई कोर्ट की कार्यवाहियों पर भी लागू रहेगा। सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के लिए सेक्रेटरी जनरल और हाई कोर्ट की कार्यवाही के लिए संबंधित रजिस्ट्रार जनरल की अनुमति आवश्यक होगी।

    मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ सेकंड के वीडियो क्लिप्स को संदर्भ से अलग प्रस्तुत किया जाता है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की गलत तस्वीर सामने आती है। कई बार ऐसे वीडियो भ्रामक कैप्शन, संपादित अंशों या मीम्स के रूप में वायरल किए जाते हैं, जिससे आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है और न्यायपालिका की निष्पक्षता पर अनावश्यक सवाल खड़े हो सकते हैं।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका में पारदर्शिता का उद्देश्य जनता को न्यायिक प्रक्रिया से अवगत कराना है, न कि उसे मनोरंजन या वायरल कंटेंट का माध्यम बनाना। लाइव स्ट्रीमिंग की सुविधा का दुरुपयोग कर अदालत की कार्यवाही को सनसनीखेज तरीके से पेश करना न्यायिक संस्थाओं की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

    हाल के महीनों में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग से लिए गए वीडियो क्लिप्स सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे। कई मामलों में इन क्लिप्स को संदर्भ से हटाकर साझा किया गया, जिससे न्यायालयों ने गंभीर चिंता व्यक्त की। इसी पृष्ठभूमि में शीर्ष अदालत ने यह अंतरिम आदेश जारी किया है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे।

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा और सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नए निर्देशों के बाद अदालत की कार्यवाही से जुड़े किसी भी ऑडियो या वीडियो अंश को साझा करने से पहले संबंधित न्यायालय की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

  • यूपी में सरकारी नौकरियों की बड़ी तैयारी, दिसंबर तक 62 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की संभावना

    यूपी में सरकारी नौकरियों की बड़ी तैयारी, दिसंबर तक 62 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की संभावना


    लखनऊ । उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) वर्ष 2026 के दौरान बड़े स्तर पर भर्ती अभियान चलाने जा रहे हैं। दिसंबर तक करीब 62 हजार पदों पर नियुक्तियां होने की संभावना है। चुनावी वर्ष को देखते हुए दोनों आयोगों ने अप्रैल से दिसंबर 2026 के बीच करीब एक लाख रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा है।

    प्राचार्य और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती
    शिक्षा सेवा चयन आयोग ने सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में 111 प्राचार्य पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी कर दिया है। वहीं 2107 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों का विज्ञापन जुलाई के अंतिम सप्ताह में जारी होने की तैयारी है। इसके अलावा सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 2643 प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य पदों का अधियाचन आयोग के पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है।

    TGT-PGT के 21 हजार से ज्यादा पद तैयार
    आयोग के पास टीजीटी, पीजीटी और संबद्ध प्राथमिक विद्यालयों के कुल 21,252 पदों का अधियाचन भी उपलब्ध है। हाल ही में आयोग ने 3539 टीजीटी और 624 पीजीटी पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी की है।

    लोक सेवा आयोग ने भी तेज की प्रक्रिया
    उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने 1518 प्रवक्ता पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसके अलावा राजकीय महाविद्यालयों में 1253 सहायक आचार्य तथा 7466 एलटी ग्रेड सहायक अध्यापक पदों पर भी चयन किया गया है। वहीं राजकीय इंटर कॉलेजों में 8905 पदों का अधियाचन आयोग को भेजा जा चुका है।

    अन्य विभागों में भी होगी नियुक्तियां
    बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र तिवारी के अनुसार, नगर क्षेत्र के 11 हजार शिक्षक पदों का अधियाचन ऑफलाइन आयोग को भेजा गया है। वहीं सहायता प्राप्त बेसिक विद्यालयों में वर्ष 2021 की भर्ती के तहत 65 प्रधानाध्यापक और करीब 450 सहायक अध्यापक नियुक्त किए जा चुके हैं। उधर, माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से शिक्षा निदेशालय प्रयागराज के लिए 131 कनिष्ठ लिपिक और 25 आशुलिपिक की भर्ती अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

    आगे और बढ़ेंगी भर्तियां
    मौजूदा 61,999 पदों के अलावा बेसिक शिक्षा परिषद ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 35 हजार शिक्षक पदों का अधियाचन भेजने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही दो हजार अनुदेशक पदों पर भी भर्ती प्रस्तावित है। अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में भी नियुक्तियों की तैयारी चल रही है। प्रस्ताव के अनुसार, अल्पसंख्यक महाविद्यालयों में लगभग 150 और माध्यमिक अल्पसंख्यक विद्यालयों में करीब 300 पदों का अधियाचन सितंबर-अक्टूबर तक भेजा जा सकता है।

  • पेपर लीक पर सरकार का बड़ा एक्शन, संशोधन बिल को कैबिनेट की मंजूरी; 27 जुलाई को संसद में पेश होने के आसार

    पेपर लीक पर सरकार का बड़ा एक्शन, संशोधन बिल को कैबिनेट की मंजूरी; 27 जुलाई को संसद में पेश होने के आसार


    नई दिल्ली। देशभर में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों और NEET-UG पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पेपर लीक संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी गई है। अब इस विधेयक को 27 जुलाई को संसद के मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

    इससे पहले गुरुवार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के नाम एक वीडियो संदेश जारी कर कहा था कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल परीक्षा प्रणाली पर नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य और उनके परिवारों की उम्मीदों पर भी चोट पहुंचाती हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए कठोर कानून ला रही है।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि प्रस्तावित कानून में पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही परीक्षा में धांधली, पेपर लीक और संगठित नकल जैसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए कड़ी सजा सुनिश्चित करने का प्रावधान भी रखा गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों द्वारा तैयार किए गए मसौदे पर कैबिनेट में चर्चा के बाद उसे मंजूरी दे दी गई है।

    सरकार के अनुसार, यह विधेयक परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। संसद से पारित होने के बाद नए कानून के जरिए पेपर लीक जैसे मामलों में तेजी से सुनवाई और कठोर दंड सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

    यह पूरा विवाद 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद सामने आया था। मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। जांच एजेंसी महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली सहित कई राज्यों में छानबीन कर चुकी है और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बताया जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता छात्रों का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित होने से बचाना थी। इसी उद्देश्य से सीमित समय में परीक्षा प्रक्रिया पूरी कराई गई और निर्धारित समय पर परिणाम भी घोषित किए गए।

    उधर, इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश को पर्याप्त नहीं बताते हुए परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की मांग की। वहीं, CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि जिम्मेदारी तय किए बिना केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।

    सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन कानून परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम साबित होगा।

  • जनता दर्शन में सीएम योगी ने सुनीं समस्‍याएं, बोले- भूमाफियाओं पर तुरंत FIR दर्ज कर भेजें जेल

    जनता दर्शन में सीएम योगी ने सुनीं समस्‍याएं, बोले- भूमाफियाओं पर तुरंत FIR दर्ज कर भेजें जेल


    गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने फरियादियों को भरोसा दिलाया कि हर शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई होगी और किसी भी पीड़ित के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

    जमीन कब्जाने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
    जनता दर्शन के दौरान जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ी शिकायतें सामने आने पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भूमाफियाओं के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए। साथ ही यह भी कहा कि जनता की शिकायतों के निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

    करीब 150 लोगों की सुनी समस्याएं
    गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने करीब 150 लोगों से मुलाकात की। वे स्वयं प्रत्येक फरियादी के पास पहुंचे, उनकी समस्याएं सुनीं और प्रार्थना पत्र लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

    अधिकारियों को दिया निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई का निर्देश
    मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से कहा कि सभी मामलों का निष्पक्ष, पारदर्शी और तय समय सीमा में निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। अपराध और भूमि कब्जे से जुड़े मामलों में उन्होंने पुलिस को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

    इलाज के लिए आर्थिक सहायता का दिया भरोसा
    चिकित्सा सहायता से जुड़े प्रार्थना पत्रों पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अस्पतालों का इस्टीमेट जल्द तैयार कराने को कहा। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस्टीमेट मिलते ही सरकार की ओर से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि मरीजों के इलाज में कोई देरी न हो।

    बच्चों को दिया आशीर्वाद और चॉकलेट
    जनता दर्शन में कुछ महिलाएं अपने बच्चों के साथ भी पहुंची थीं। मुख्यमंत्री ने बच्चों से स्नेहपूर्वक मुलाकात की, उन्हें चॉकलेट दी और आशीर्वाद भी दिया।

    गोशाला पहुंचकर की गोसेवा
    जनता दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर की गोशाला पहुंचे। यहां उन्होंने गोवंश को उनके नाम लेकर पुकारा। परिचित आवाज सुनते ही कई गायें उनके पास आ गईं। मुख्यमंत्री ने उन्हें स्नेहपूर्वक दुलार किया, अपने हाथों से गुड़ खिलाया और गोशाला में मौजूद अन्य गायों व नंदी की भी सेवा की। इस दौरान उन्होंने गोशाला के कर्मचारियों को पशुओं की बेहतर देखभाल के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए।

  • CJP और सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा नहीं, कई मुद्दों पर सहमति; इस्तीफे पर कल होगा फैसला

    CJP और सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा नहीं, कई मुद्दों पर सहमति; इस्तीफे पर कल होगा फैसला


    नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर जारी गतिरोध के बीच शुक्रवार को केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में अहम बैठक हुई। करीब 10 मिनट चली इस वार्ता में कुछ मुद्दों पर सहमति बनी, जबकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। सरकार ने इस विषय पर विचार के लिए शनिवार तक का समय मांगा है।

    बैठक में केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल हुए, जबकि CJP का प्रतिनिधित्व सौरभ दास और आशुतोष रांका ने किया। वार्ता के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और घायल छात्रों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी। हालांकि, CJP ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    बैठक के बाद जेपी नड्डा ने बताया कि CJP ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े पांच सुझाव रखे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन प्रस्तावों पर आंतरिक स्तर पर चर्चा करेगी और शनिवार दोपहर होने वाली अगली बैठक में अपना विस्तृत पक्ष रखेगी।

    इससे पहले 20 जुलाई को भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन वह किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। अब शुक्रवार की बैठक को समाधान की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    उधर, NEET पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अब तक किए गए सुधारों और जांच की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं।

    CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि सरकार आंदोलन के दबाव में है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देर रात जारी किया गया संदेश भी इसी दबाव का परिणाम है। उनका कहना है कि संगठन अपनी प्रमुख मांगों से पीछे नहीं हटेगा और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहेगा।

    इसी बीच, 26 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचकर उन्हें जूस पिलाया। हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वांगचुक और CJP के रुख में अंतर देखने को मिला।

    राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। एहतियात के तौर पर मध्य दिल्ली के कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं, कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर परिचालन प्रभावित होने की खबर है। प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों पर दिल्ली हाईकोर्ट में भी सुनवाई जारी है।

  • सरकार और CJP के बीच नहीं बनी सहमति, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी, कल होगी अगली बैठक

    सरकार और CJP के बीच नहीं बनी सहमति, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी, कल होगी अगली बैठक


    नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले तीन सप्ताह से आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच शुक्रवार को हुई दूसरे दौर की वार्ता किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। हालांकि CJP का दावा है कि सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों में से दो पर सकारात्मक रुख दिखाया है, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सहमति नहीं बन पाई। इस मुद्दे पर सरकार ने शनिवार तक का समय मांगा है। अब दोनों पक्षों के बीच अगली बैठक शनिवार दोपहर करीब 12 बजे होगी।

    करीब 50 मिनट चली बैठक
    दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में हुई बैठक लगभग 50 मिनट तक चली। CJP की ओर से प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रंका मौजूद रहे, जबकि सरकार का प्रतिनिधित्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने किया।

    इस्तीफे की मांग पर कायम CJP
    बैठक के बाद CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि मंत्रियों के साथ हुई चर्चा में सरकार उनकी तीन मांगों में से दो पर सकारात्मक नजर आई। उन्होंने कहा कि NEET की तैयारी के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने और आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के मुद्दे पर सरकार का रुख सकारात्मक रहा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर संगठन किसी तरह का समझौता करने के लिए तैयार नहीं है।

    दो मांगों पर मिली सैद्धांतिक सहमति
    CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि सरकार ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से जुड़े मुद्दे पर फैसला लेने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द इस पर निर्णय लेगी। रंका के मुताबिक, सरकार ने दो मांगों पर सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इनमें आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर व अन्य कानूनी कार्रवाई वापस लेने का प्रस्ताव शामिल है।

    20 जुलाई को भी हुई थी बातचीत
    इससे पहले 20 जुलाई को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के सरकारी आवास पर CJP प्रतिनिधियों और सरकार के बीच दो दौर की बैठक हुई थी, जिसमें भी सौरभ दास और आशुतोष रंका शामिल हुए थे। इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार की ओर से प्रमुख मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद 26 दिनों से जारी अपना अनशन समाप्त कर दिया था। इसके बाद शुक्रवार को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के विठ्ठलभाई पटेल हाउस में दोनों पक्षों के बीच यह नई बैठक आयोजित की गई।

    आंदोलन जारी रखने का ऐलान
    CJP ने पहले ही सरकार के मंत्रियों के आवास या कार्यालय में वार्ता करने से इनकार कर दिया था और किसी तटस्थ स्थान पर बातचीत की मांग की थी। संगठन का कहना है कि जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते।

    संगठन की प्रमुख मांगों में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय करना, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा तथा आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर और कानूनी कार्रवाई वापस लेना शामिल है।