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  • अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए 15 अप्रैल से शुरू होगा पंजीकरण अभियान…

    अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए 15 अप्रैल से शुरू होगा पंजीकरण अभियान…


    नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। बाबा बर्फानी के पवित्र दर्शन के लिए हर वर्ष लाखों भक्त कठिन लेकिन आस्था से भरी इस यात्रा का हिस्सा बनते हैं। आगामी यात्रा के लिए प्रशासनिक तैयारियां तेज हो चुकी हैं और पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण दिशा निर्देश सामने आ गए हैं। इस बार भी यात्रा को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

    पंजीकरण प्रक्रिया की शुरुआत और व्यवस्था
    अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए पंजीकरण 15 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 20 मई 2026 तक चलेगा। देशभर में निर्धारित बैंक शाखाओं के माध्यम से श्रद्धालु अपना एडवांस रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इसके लिए बड़ी संख्या में बैंक शाखाओं को अधिकृत किया गया है ताकि देश के अलग अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को आसानी से सुविधा मिल सके। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर के कई जिलों में भी पंजीकरण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

    इस बार पंजीकरण प्रक्रिया को आधार आधारित बायोमैट्रिक प्रणाली से जोड़ा गया है ताकि पहचान और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके। व्यक्तिगत और समूह दोनों प्रकार के पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। समूह पंजीकरण में निर्धारित संख्या के अनुसार श्रद्धालु एक साथ आवेदन कर सकते हैं और इसके लिए एक जिम्मेदार समूह लीडर की नियुक्ति अनिवार्य होगी जो सभी औपचारिकताओं को पूरा करेगा।

    आयु सीमा और स्वास्थ्य संबंधी सख्त नियम

    यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए इस बार भी आयु सीमा से जुड़े नियम लागू किए गए हैं। 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी जबकि 70 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालु भी इस यात्रा में शामिल नहीं हो सकेंगे। यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    हर श्रद्धालु के लिए स्वास्थ्य प्रमाणपत्र अनिवार्य किया गया है। यह प्रमाणपत्र केवल अधिकृत चिकित्सक या मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य संस्थान से ही जारी होना चाहिए। बिना वैध स्वास्थ्य प्रमाणपत्र के किसी भी प्रकार का पंजीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा के दौरान संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना है।

    यात्रा परमिट और मार्ग व्यवस्था
    पंजीकरण पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को यात्रा परमिट जारी किया जाएगा जिसमें उनके यात्रा मार्ग और तारीख की पूरी जानकारी होगी। अमरनाथ यात्रा दो प्रमुख मार्गों से संचालित होती है जिनमें पहलगाम मार्ग और बालटाल मार्ग शामिल हैं। श्रद्धालु अपनी सुविधा और शारीरिक क्षमता के अनुसार किसी भी मार्ग का चयन कर सकते हैं।

    इस बार RFID आधारित पहचान प्रणाली को अनिवार्य किया गया है। बिना RFID कार्ड के किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह प्रणाली यात्रा के दौरान सुरक्षा और निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी।

    विदेशी श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रावधान
    विदेशी श्रद्धालुओं के लिए अलग पंजीकरण व्यवस्था लागू की गई है। उन्हें निर्धारित बैंकिंग और प्रशासनिक माध्यमों के जरिए आवेदन करना होगा और आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें पासपोर्ट और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं।

    विदेशी श्रद्धालुओं के लिए अलग शुल्क निर्धारित किया गया है और समूह में आवेदन करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। यह प्रक्रिया भी पहले आओ पहले पाओ के आधार पर लागू होगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

    यात्रा अवधि और प्रशासनिक तैयारी

    परंपरागत रूप से यह यात्रा जून के अंत में प्रारंभ होकर अगस्त में रक्षा बंधन के आसपास समाप्त होती है। इस दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा, चिकित्सा और आपातकालीन सेवाओं को और मजबूत किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति की पूरी जांच अवश्य कराएं और ऊंचाई वाले क्षेत्रों की जलवायु को ध्यान में रखते हुए उचित तैयारी के साथ यात्रा पर निकलें। समय पर पंजीकरण, सही दस्तावेज और नियमों का पालन इस पवित्र यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • जेन-Z पार्टी की अटकलें: AAP के राघव चड्ढा के इंस्टा पोस्ट से बढ़ी चर्चाएं

    जेन-Z पार्टी की अटकलें: AAP के राघव चड्ढा के इंस्टा पोस्ट से बढ़ी चर्चाएं

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) में कथित मतभेदों के बीच राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर नई राजनीतिक संभावनाओं की चर्चा तेज हो गई है। खासकर उनके इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो और उस पर की गई टिप्पणी ने यह अटकलें पैदा कर दी हैं कि वह युवाओं, खासकर जेन-Z को केंद्र में रखकर नई पार्टी बनाने पर विचार कर सकते हैं।

    दरअसल, राज्यसभा में AAP के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने तीन वीडियो जारी किए हैं। इन वीडियो में उन्होंने संकेत दिया कि वह इस बदलाव को सहज रूप से स्वीकार करने वाले नहीं हैं और सार्वजनिक मुद्दों को उठाते रहेंगे। इसी बीच इंस्टाग्राम पर साझा की गई एक रील ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

    इंस्टाग्राम रील से शुरू हुई चर्चा
    चड्ढा ने “Seedhathok” नाम के एक क्रिएटर की रील शेयर की, जिसमें समर्थक ने सुझाव दिया कि उन्हें युवाओं के लिए “Gen-Z” आधारित नई राजनीतिक पार्टी बनानी चाहिए। इस रील पर चड्ढा ने “दिलचस्प विचार” लिखकर प्रतिक्रिया दी। बस इसी टिप्पणी के बाद नई पार्टी को लेकर अटकलें तेज हो गईं।

    समर्थक ने क्या कहा?
    रील में क्रिएटर रिहान ने कहा कि कई युवा चाहते हैं कि चड्ढा मौजूदा मतभेदों के बावजूद अपनी पार्टी बनाएं। उनका मानना है कि किसी दूसरी पार्टी में जाने की बजाय नई पार्टी बनाना उनके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि युवा वर्ग उन्हें व्यापक समर्थन दे सकता है।

    पद से हटाए जाने के बाद बढ़ी हलचल
    पिछले सप्ताह AAP ने चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाकर उनकी जगह सांसद अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त किया। यह फैसला कथित तौर पर चड्ढा और पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के बीच मतभेदों की खबरों के बीच लिया गया।

    ‘पिक्चर अभी बाकी है’ वाला संदेश
    AAP द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में चड्ढा ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने पंजाब से जुड़े मुद्दों—भूजल संकट, भगत सिंह से जुड़े संदर्भ और अन्य क्षेत्रीय विषय—उठाए। वीडियो को उन्होंने “छोटा सा ट्रेलर” बताते हुए कहा, “पिक्चर अभी बाकी है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब उनके लिए केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि उनका घर और कर्तव्य है।

    फिलहाल, चड्ढा ने नई पार्टी बनाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सोशल मीडिया संकेतों और हालिया घटनाक्रमों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है।

  • आईपीएल सट्टेबाजी का भंडाफोड़: भाजपा मंडल उपाध्यक्ष समेत छह गिरफ्तार, नकदी व उपकरण बरामद

    आईपीएल सट्टेबाजी का भंडाफोड़: भाजपा मंडल उपाध्यक्ष समेत छह गिरफ्तार, नकदी व उपकरण बरामद

    मथुरा। आईपीएल मैचों पर सट्टेबाजी के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक मंडल उपाध्यक्ष भी शामिल है। पुलिस ने मौके से नकदी, मोबाइल फोन और सट्टेबाजी से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं।
    थाना सदर बाजार पुलिस और एसओजी टीम ने संयुक्त छापेमारी करते हुए शिवधाम कॉलोनी, औरंगाबाद स्थित एक मकान से आईपीएल सट्टेबाजी गिरोह का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके पास से 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, चार्जर, कैलकुलेटर, एक्सटेंशन बोर्ड, तीन नोटबुक (सट्टा डायरी), दो पेन, चेकबुक और 1,63,530 रुपये नकद बरामद किए।

    शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई
    पुलिस को पिछले कुछ समय से शहर में आईपीएल सट्टेबाजी संचालित होने की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद एसएसपी श्लोक कुमार ने क्राइम ब्रांच को कार्रवाई के निर्देश दिए।

    बुधवार रात सीओ सिटी आशना चौधरी के नेतृत्व में एसओजी और थाना सदर बाजार टीम ने संयुक्त रूप से छापा मारा।

    भाजपा नेता समेत ये आरोपी गिरफ्तार
    पुलिस के अनुसार आदिल, रिजवान, किशोर, मुकेश, बांके बिहारी और बॉबी को मौके से गिरफ्तार किया गया। इनमें बांके बिहारी भाजपा सदर मंडल के उपाध्यक्ष बताए जा रहे हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर चालान किया गया है।

    राजनीतिक हलकों में चर्चा
    भाजपा महानगर अध्यक्ष हरिशंकर राजू यादव से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

    हाल ही में मंडल कार्यकारिणी के गठन के बाद इस गिरफ्तारी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।

    कार्रवाई में शामिल टीम
    छापेमारी में प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार, एसओजी प्रभारी संदीप कुमार सहित थाना सदर और एसओजी की संयुक्त टीम शामिल रही।

    पुलिस का कहना है कि आईपीएल सट्टेबाजी में शामिल अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है और जांच जारी है।

  • ज्योतिराव फुले ने शिक्षा को बनाया सामाजिक क्रांति का सबसे बड़ा हथियार..

    ज्योतिराव फुले ने शिक्षा को बनाया सामाजिक क्रांति का सबसे बड़ा हथियार..


    नई दिल्ली। भारत के सामाजिक इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे रहे हैं जिन्होंने परंपराओं और रूढ़ियों की जड़ों को चुनौती देकर एक नए युग की नींव रखी। ज्योतिराव गोविंदराव फुले ऐसे ही एक क्रांतिकारी विचारक और समाज सुधारक थे, जिन्होंने शिक्षा को हथियार बनाकर जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़ी। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि परिवर्तन केवल विचारों से नहीं बल्कि साहसिक कदमों से भी आता है।

    एक घटना जिसने बदल दिया जीवन का उद्देश्य
    साल 1848 के आसपास की एक घटना ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। एक पारिवारिक विवाह समारोह में शामिल होने के दौरान उन्हें जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा और अपमानजनक व्यवहार के कारण उन्हें वहां से बाहर कर दिया गया। यह अनुभव उनके लिए केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं था बल्कि एक गहरी सामाजिक सच्चाई का सामना था। इसी क्षण उन्होंने तय किया कि उनका जीवन अब इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था को चुनौती देने के लिए समर्पित होगा।

    शिक्षा को बनाया परिवर्तन का सबसे बड़ा साधन

    ज्योतिराव फुले ने यह समझ लिया था कि समाज में फैली अज्ञानता ही असमानता की जड़ है। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक मुक्ति का सबसे शक्तिशाली माध्यम माना और इसे तृतीय नेत्र की संज्ञा दी, जो व्यक्ति को सोचने और समझने की क्षमता प्रदान करता है। इसी सोच के तहत उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले को पढ़ाना शुरू किया और जल्द ही शिक्षा आंदोलन की शुरुआत की नींव रखी।

    भारत में पहली लड़कियों की शिक्षा की शुरुआत

    उस दौर में जब महिलाओं और निम्न वर्गों के लिए शिक्षा की कल्पना भी असंभव मानी जाती थी, फुले दंपति ने पुणे में लड़कियों के लिए पहला विद्यालय स्थापित किया। यह कदम सामाजिक परंपराओं के खिलाफ एक बड़ा विद्रोह था। सावित्रीबाई फुले जब स्कूल पढ़ाने जाती थीं, तो उन्हें सामाजिक विरोध और हिंसा का सामना करना पड़ता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और शिक्षा के मिशन को आगे बढ़ाया।

    सामाजिक सुधार की व्यापक पहल
    फुले का कार्य केवल शिक्षा तक सीमित नहीं था। उन्होंने बाल विवाह जैसी कुप्रथा का विरोध किया और विधवा महिलाओं की सुरक्षा के लिए अपने घर को एक आश्रय स्थल में बदल दिया। यहां उन्होंने परित्यक्त महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा देने की पहल की, जो उस समय के समाज के लिए एक असाधारण कदम था।

    सत्यशोधक समाज और सामाजिक समानता का आंदोलन
    साल 1873 में उन्होंने सत्यशोधक समाज की स्थापना की, जिसका उद्देश्य समाज में धार्मिक और सामाजिक बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना था। उनका मानना था कि मनुष्य और ईश्वर के बीच किसी मध्यस्थ की आवश्यकता नहीं है। इस आंदोलन ने विवाह और सामाजिक अनुष्ठानों को सरल और समानता आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    लेखन और वैचारिक क्रांति

    फुले ने अपने लेखन के माध्यम से भी समाज को जागरूक किया। उनकी कृतियों में समाज की असमानता, किसानों की स्थिति और प्रशासनिक व्यवस्था की कमियों को उजागर किया गया। उन्होंने केवल समस्याएं नहीं बताईं बल्कि समाधान की दिशा भी दिखाई, जिसमें शिक्षा, कृषि सुधार और सामाजिक न्याय प्रमुख थे।

    जीवन का अंतिम पड़ाव और अमर विरासत
    उनके विचारों और योगदान को देखते हुए उन्हें समाज ने महात्मा की उपाधि दी। उनका जीवन संघर्ष, विचार और सेवा का प्रतीक बन गया। जीवन के अंतिम वर्षों में भी उनका उद्देश्य समाज में समानता और न्याय की स्थापना ही रहा। उनका योगदान आज भी सामाजिक सुधार आंदोलनों के लिए प्रेरणा स्रोत बना हुआ है।

  • मंदिर से बहिष्कार समाज को बांटेगा, हिंदू धर्म पर पड़ेगा असर: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

    मंदिर से बहिष्कार समाज को बांटेगा, हिंदू धर्म पर पड़ेगा असर: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिरों और मठों में प्रवेश को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी वर्ग विशेष को बाहर रखना समाज को विभाजित कर सकता है और इसका नकारात्मक प्रभाव हिंदू धर्म पर पड़ सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सभी मंदिरों और मठों में जाने का अधिकार होना चाहिए।

    यह टिप्पणी नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने शबरिमला मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान की। पीठ धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे और उसके विस्तार पर भी विचार कर रही है।

    पीठ में शामिल न्यायाधीश

    संविधान पीठ की अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे हैं। उनके साथ न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी. वराले, आर. महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं।

    अदालत ने क्या कहा

    सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि यदि परंपरा के नाम पर किसी वर्ग को मंदिर प्रवेश से रोका जाता है, तो इससे हिंदू धर्म पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को मंदिर और मठ में प्रवेश का अधिकार होना चाहिए।

    इससे सहमति जताते हुए न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने कहा कि इस तरह का निष्कासन समाज को बांट देगा।

    संगठनों की दलील

    सुनवाई के दौरान नायर सर्विस सोसाइटी, अयप्पा सेवा समाजम और क्षेत्र संरक्षण समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने दलील दी कि कुछ मंदिर विशेष वर्ग तक सीमित हो सकते हैं।

    ‘वेंकटरमण देवरू’ मामले का जिक्र

    अदालत ने वेंकटरमण देवरू मामला का हवाला देते हुए कहा कि प्रवेश पर रोक लगाने की परंपरा का व्यापक असर धर्म पर पड़ सकता है।

    शबरिमला विवाद की पृष्ठभूमि

    2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के शबरिमला अयप्पा मंदिर में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाया था। बाद में 2019 में इस मुद्दे को व्यापक विचार के लिए बड़ी पीठ को भेज दिया गया।

    अदालत फिलहाल धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सात प्रमुख सवालों पर विचार कर रही है और सुनवाई जारी है।

  • कस्तूरबा गांधी ने जीवनभर महात्मा गांधी के संघर्षों में निभाई महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक भूमिका..

    कस्तूरबा गांधी ने जीवनभर महात्मा गांधी के संघर्षों में निभाई महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक भूमिका..

    नई दिल्ली:महात्मा गांधी के जीवन और उनके विचारों की चर्चा जब भी होती है, तो अक्सर एक ऐसा नाम पृष्ठभूमि में रह जाता है, जिसने न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन को गहराई दी बल्कि उनके वैचारिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह कहानी कस्तूरबा गांधी की है, जिन्हें पूरे देश में प्यार से बा कहा जाता था। वह केवल एक पत्नी नहीं थीं, बल्कि एक ऐसी साथी थीं जिन्होंने गांधीजी के जीवन को संतुलन, साहस और दिशा देने का कार्य किया। उनके और बापू के बीच का संबंध केवल वैवाहिक बंधन नहीं था, बल्कि विचारों, संघर्षों और गहरे भावनात्मक जुड़ाव की एक ऐसी यात्रा थी जिसने इतिहास को प्रभावित किया।

    बचपन की सगाई से शुरू हुई जीवन की लंबी यात्रा

    कस्तूरबा गांधी का जन्म 11 अप्रैल 1869 को पोरबंदर में एक संपन्न व्यापारी परिवार में हुआ था। उनके पिता का व्यापारिक प्रभाव दूर दूर तक फैला हुआ था और परिवार समाज में सम्मानित स्थान रखता था। कस्तूरबा और मोहनदास करमचंद गांधी की सगाई बचपन में ही हो गई थी और बाद में मात्र किशोरावस्था में उनका विवाह संपन्न हुआ। यह विवाह दो परिवारों की मित्रता को और मजबूत करने के साथ साथ एक ऐसे रिश्ते की शुरुआत बना, जिसने आने वाले वर्षों में इतिहास की दिशा बदल दी।

    मतभेदों से भरा लेकिन गहरे प्रेम से जुड़ा रिश्ता
    कस्तूरबा गांधी केवल पारंपरिक भूमिका निभाने वाली पत्नी नहीं थीं। वह अपने विचारों में स्पष्ट और कई बार गांधीजी से असहमत होने का साहस रखने वाली महिला थीं। शुरुआती वर्षों में दोनों के बीच विचारों का टकराव भी हुआ, लेकिन यही टकराव धीरे धीरे एक ऐसे संबंध में बदल गया जहां सम्मान और समझदारी ने गहरी जगह बना ली। गांधीजी के नियंत्रणवादी स्वभाव के बावजूद कस्तूरबा ने अपनी स्वतंत्र सोच को बनाए रखा और समय के साथ उन्होंने सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी।

    संघर्षों की साथी और सत्याग्रह की पहली सहयात्री
    दक्षिण अफ्रीका और भारत में गांधीजी के आंदोलनों के दौरान कस्तूरबा ने हर कदम पर उनका साथ दिया। कठिन परिस्थितियों में जेल की यातनाएं सहना हो या सामाजिक संघर्षों का सामना करना हो, उन्होंने हर मोर्चे पर दृढ़ता दिखाई। इतिहासकारों के अनुसार, वह शुरुआती सत्याग्रहियों में से एक थीं जिन्होंने अहिंसक प्रतिरोध के विचार को व्यवहार में उतारने का साहस दिखाया। उनका जीवन केवल समर्थन तक सीमित नहीं था, बल्कि वह स्वयं संघर्ष का हिस्सा बन गई थीं।

    अहिंसा का पहला पाठ और बा का प्रभाव
    गांधीजी के जीवन पर कस्तूरबा का प्रभाव केवल भावनात्मक नहीं बल्कि वैचारिक भी था। कई मौकों पर उन्होंने अपने धैर्य, सहनशीलता और दृढ़ता से गांधीजी को जीवन के महत्वपूर्ण पाठ सिखाए। यही कारण था कि गांधीजी स्वयं उन्हें अपने अहिंसा के विचारों की पहली प्रेरणा मानते थे। कस्तूरबा का शांत लेकिन मजबूत व्यक्तित्व गांधीजी के सार्वजनिक जीवन को संतुलन प्रदान करता रहा।

    अंतिम क्षणों तक साथ निभाने की कहानी
    भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब राजनीतिक परिस्थितियां चरम पर थीं, तब कस्तूरबा गांधी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया और उन्हें आगा खान पैलेस में रखा गया, जहां गांधीजी भी नजरबंद थे। जीवन के अंतिम क्षणों में भी उनका साथ बना रहा और उन्होंने वहीं गांधीजी की उपस्थिति में अंतिम सांस ली। यह क्षण केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं था, बल्कि एक ऐसे जीवनसाथी के साथ की कहानी का अंत था जिसने दशकों तक संघर्ष, प्रेम और विचारों की साझेदारी निभाई थी।

  • उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट आस्था से अर्थव्यवस्था तक की मजबूत उड़ान भरते हुए वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर

    उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट आस्था से अर्थव्यवस्था तक की मजबूत उड़ान भरते हुए वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर


    नई दिल्ली। आस्था और अर्थव्यवस्था के संगम के रूप में उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट अब तेजी से वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर है। सारनाथ से कुशीनगर, श्रावस्ती से कपिलवस्तु तक फैले इस पवित्र धार्मिक मार्ग ने न केवल देश बल्कि दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया है। भगवान बुद्ध से जुड़े ये स्थल अब केवल आध्यात्मिक केंद्र नहीं रहे, बल्कि आर्थिक विकास और सांस्कृतिक विस्तार के मजबूत आधार के रूप में भी उभर रहे हैं। राज्य में बढ़ता धार्मिक पर्यटन स्थानीय विकास को नई दिशा दे रहा है और इसे एक बड़े परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से बढ़ी वैश्विक पहचान
    कुशीनगर में आयोजित एक बड़े बौद्ध सम्मेलन ने इस पूरे क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। इस आयोजन में विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं की भागीदारी ने यह साबित किया कि बौद्ध सर्किट अब वैश्विक धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। इस दौरान बड़े पैमाने पर निवेश और सहयोग के प्रस्ताव सामने आए, जिससे इस क्षेत्र की आर्थिक संभावनाओं को और मजबूती मिली है। इस तरह के आयोजनों ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने में भूमिका निभाई है।

    तेजी से बढ़ता पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था

    उत्तर प्रदेश के प्रमुख बौद्ध स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालु न केवल धार्मिक आस्था के लिए यहां पहुंचते हैं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करते हैं। होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है, जिससे स्थानीय समुदायों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।

    आधुनिक सुविधाओं से विकसित हो रहा बौद्ध सर्किट

    राज्य सरकार द्वारा बौद्ध सर्किट को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बेहतर सड़क संपर्क, हवाई सुविधा, डिजिटल गाइड सिस्टम और आधुनिक पर्यटन अवसंरचना पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों को एक सहज और समृद्ध अनुभव प्रदान करना है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है बल्कि क्षेत्रीय विकास की गति भी तेज हो रही है।

    निवेश और विकास का नया केंद्र बनता क्षेत्र
    बौद्ध सर्किट में बढ़ते निवेश प्रस्ताव इस बात का संकेत हैं कि यह क्षेत्र अब केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं रहा। पर्यटन और बुनियादी ढांचे से जुड़े निवेश इस क्षेत्र को आर्थिक गतिविधियों का नया केंद्र बना रहे हैं। इससे स्थानीय विकास को गति मिल रही है और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो रही है। यह क्षेत्र अब परंपरा और आधुनिक विकास के संगम के रूप में उभर रहा है।

    आध्यात्मिक राजधानी की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश
    दीर्घकालिक विकास योजनाओं के तहत उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक आध्यात्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। बौद्ध सर्किट इस लक्ष्य को साकार करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। धार्मिक विरासत, सांस्कृतिक महत्व और आर्थिक अवसरों का यह संगम राज्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान की ओर ले जा रहा है।

  • कश्मीर के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता, अब किसान 40 हजार रुपये किलो वाले दुर्लभ मशरूम की कर सकेंगे खेती

    कश्मीर के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता, अब किसान 40 हजार रुपये किलो वाले दुर्लभ मशरूम की कर सकेंगे खेती

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसके बाद अब किसान 15 हजार से 40 हजार रुपये प्रति किलो तक बिकने वाला दुर्लभ मशरूम अपने खेतों में भी उगा सकेंगे। श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) के वैज्ञानिकों ने पहली बार नियंत्रित वातावरण में इस मशरूम की सफल खेती कर दिखाई है।

    जंगलों पर निर्भरता से मिली मुक्ति

    यह मशरूम मोरल्स या मोरचेला (स्थानीय नाम कंगाच) है, जो अब तक सिर्फ ऊंचे पहाड़ी जंगलों में बारिश के मौसम में प्राकृतिक रूप से उगता था। इसकी उपलब्धता बेहद सीमित और मुश्किल होने के कारण बाजार में इसकी कीमत बेहद अधिक रहती है।

    वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि

    SKUAST के कुलपति प्रोफेसर नजीर अहमद गनई ने इस उपलब्धि को “गेम चेंजर” बताया है। उनके अनुसार, यह तकनीक जंगलों पर निर्भरता खत्म कर नियंत्रित उत्पादन का रास्ता खोलती है, जिससे किसानों, युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

    पांच साल की मेहनत से मिला परिणाम

    इस शोध में प्रोफेसर तारिक अहमद सोफी, उनके छात्र कमरान मुनीर और प्रोफेसर विकास गुप्ता शामिल रहे। टीम ने पिछले पांच वर्षों में 1000 से अधिक प्राकृतिक स्थलों से मोरचेला के नमूने एकत्र किए और उनके वातावरण, मिट्टी, नमी और पौधों का गहन अध्ययन किया।

    शोध के दौरान 10 किस्मों को चुना गया, जिनमें से 3 किस्मों में सफलतापूर्वक खेती संभव हो सकी।

    पॉलीहाउस से लेकर खुले खेत तक सफलता

    शुरुआत में इस मशरूम की खेती पॉलीहाउस में की गई, जबकि बाद में इसे खुले वातावरण में भी उगाने में सफलता मिली। वैज्ञानिकों के अनुसार इसके लिए पेटेंट प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह प्रयोग बारामूला, अनंतनाग और श्रीनगर सहित कई क्षेत्रों में किया गया है।

    खास पर्यावरण की जरूरत वाला मशरूम

    मोरचेला की खेती हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है क्योंकि इसे विशेष तापमान, नमी और मिट्टी की स्थिति की आवश्यकता होती है। साथ ही अलग-अलग किस्मों के लिए अलग पौधों और प्राकृतिक वातावरण का संतुलन भी जरूरी होता है।

    किसानों के लिए नई आर्थिक संभावना

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक से जम्मू-कश्मीर की कृषि अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग के चलते यह फसल किसानों की आय बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प बन सकती है और जैव-अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दे सकती है।

  • बिहार के बक्सर में PM मोदी पर हमले की साजिश….1 गिरफ्तार, दुश्मन देशों के संपर्क में था आरोपी

    बिहार के बक्सर में PM मोदी पर हमले की साजिश….1 गिरफ्तार, दुश्मन देशों के संपर्क में था आरोपी


    पटना।
    बिहार (Bihar) के बक्सर (Buxar) से पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सुरक्षा में सेंध पहुंचाने और हमले की साजिश में शामिल युवक अमन तिवारी (Aman Tiwari) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके लैपटॉप से विदेशी(दुश्मन देशों की) एजेंसियों को मैसेज भेजने का सबूत मिले हैं। उसकी गिरफ्तारी सिमरी थाना क्षेत्र के आशा पड़री गांव से हुई है। इस मामले में पुलिस ने तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। जिसमें सिमरी के युवक के लैपटॉप से मैसेज मिला।

    पुलिस के अनुसार रुपये की चाहत में सिमरी थाना क्षेत्र के आशा पड़री गांव निवासी अमन तिवारी ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को मैसेज भेजा था। गुप्त सूचना मिलते ही पुलिस एक्टिव हुई। पुलिस के अनुसार बुधवार की दोपहर अमन किसी के घर पूजा कराने के लिए अपने पिता को छोड़ घर लौटा था। जिस वक्त वह घर में खाना खा रहा था‌ ठीक उसी वक्त पुलिस पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। एसपी शुभम आर्य ने बताया कि अमन के साथ तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। पूछताछ के बाद दो को छोड़ दिया गया जबकि सबूत मिलने के बाद अमन को गिरफ्तार कर लिया गया।

    एसपी ने कहा कि पीएम से संबंधित कोई मैसेज हैक नहीं हुआ है। अमन काफी समय से विदेशी एजेंसियों के संपर्क में था। रुपये के डिमांड के साथ अंतराष्ट्रीय एजेंसी को मैसेज भेजा था कि वह पीएम की सुरक्षा को हानि पहुंचा सकता है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से संपर्क कर गोपनीय जानकारी के बदले रुपये की मांग कर रहा था। उसके मोबाइल और लैपटॉप को पुलिस ने जब्त कर खंगाला, तो रुपये के डिमांड से संबंधित मैसेज मिला।

    एसपी ने बताया कि अमन तिवारी ने वर्ष 2021 में कोलकाता एयरपोर्ट को उड़ाने की धमकी दी थी। इस मामले में कोलकाता और बक्सर पुलिस की संयुक्त टीम ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद गुरुवार को पुलिस की इस कार्रवाई के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस के अनुसार आरोपित के घर से लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है।

    अमन की गिरफ्तारी के बाद उसके गांव में गुरुवार को सन्नाटा पसरा रहा। युवक की करतूत से सभी ग्रामीण हैरान नजर आ रहे हैं। एसपी ने बताया कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अमन के संपर्क में और कौन कौन लोग हैं और उसका संपर्क किन एजेंसियों से हैं। अमन का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है। उसकी नजह में और कौन-कौन वीआईपी हैं, इसका भी पता लगाया जा रहा है।

  • होर्मुज से जहाजों पर 20 लाख डॉलर टोल की खबर पर मचा हड़कंप, भारत पर टैक्स को लेकर सरकार ने दिया जवाब

    होर्मुज से जहाजों पर 20 लाख डॉलर टोल की खबर पर मचा हड़कंप, भारत पर टैक्स को लेकर सरकार ने दिया जवाब


    नई दिल्ली।
    अमेरिका के साथ सीजफायर के बाद ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारी शुल्क वसूलने की संभावित योजना को लेकर वैश्विक हलचल तेज हो गई है। खबरों के अनुसार ईरान की संसद में मंगलवार को एक प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर 20 लाख डॉलर तक का टोल लगाया जा सकता है।

    भारत-ईरान टोल चर्चा पर सरकार का स्पष्ट बयान
    इस मुद्दे पर भारत सरकार ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि ईरान के साथ इस तरह के किसी टोल टैक्स को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत और ईरान के बीच इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई है।

    होर्मुज में आंशिक संचालन की तैयारी

    रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार को ईरानी अधिकारी ने संकेत दिए कि शुक्रवार से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सीमित स्तर पर जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकती है। यह मार्ग युद्ध के दौरान लगभग छह सप्ताह तक बाधित रहा था, हालांकि कुछ मित्र देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई थी, जिनमें भारत भी शामिल था।

    20 लाख डॉलर तक हो सकता है शुल्क

    सूत्रों के अनुसार ईरान स्थायी शांति व्यवस्था के तहत इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भारी शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। अनुमान है कि यह शुल्क लगभग 20 लाख डॉलर प्रति ट्रांजिट तक हो सकता है, जो मौजूदा शिपिंग लागत के बराबर माना जा रहा है।

    ईरान और ओमान दोनों की भूमिका
    रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान और ओमान दोनों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूलने का अधिकार मिल सकता है। इस आय का उपयोग क्षेत्रीय पुनर्निर्माण और आर्थिक जरूरतों के लिए किए जाने की बात कही जा रही है।

    भारत को पहले मिली थी राहत
    युद्ध के दौरान ईरान ने कुछ मित्र देशों को सुरक्षित मार्ग से गुजरने की अनुमति दी थी, जिनमें भारत का नाम भी शामिल रहा। उस समय कई भारतीय जहाज जैसे एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन आशा’ और अन्य वेसल्स सुरक्षित रूप से भारत पहुंचे थे।

    वैश्विक ऊर्जा व्यापार पर नजर
    होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में किसी भी तरह का नया शुल्क या नियंत्रण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर बड़ा असर डाल सकता है।