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  • कृषि को उत्पादन से प्रॉस्पेरिटी तक ले जाने की दिशा में उत्तर प्रदेश अग्रणी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोर

    कृषि को उत्पादन से प्रॉस्पेरिटी तक ले जाने की दिशा में उत्तर प्रदेश अग्रणी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोर


    नई दिल्ली।उत्तर प्रदेश की राजधानी में आयोजित छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि क्षेत्र के समग्र और दूरदर्शी विकास के लिए स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कृषि को केवल उत्पादन से आगे बढ़ाकर प्रोडक्टिविटी, प्रॉफिटेबिलिटी और अंततः प्रॉस्पेरिटी तक ले जाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे लाभप्रद, टिकाऊ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संचालित करना आवश्यक है। इस दृष्टि से उत्तर प्रदेश राज्य किसानों के हित और समग्र कृषि विकास में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन दिवसीय इस आयोजन में कृषि के विभिन्न आयामों पर गंभीर विचार-विमर्श होगा, जिसमें जमीनी स्तर के अनुभव, सफल प्रयोग और नवाचार साझा किए जाएंगे। यह मंच केवल चर्चा के लिए नहीं, बल्कि ठोस क्रियान्वयन योजना तैयार करने का माध्यम होना चाहिए, जिससे किसान सीधे लाभान्वित हों। उन्होंने राज्य के कृषि आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश देश की लगभग 16-17 प्रतिशत आबादी का घर है, जबकि यहां केवल 11 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि उपलब्ध है, फिर भी राज्य कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21 प्रतिशत का योगदान देता है। योजनाबद्ध प्रयासों और प्रभावी नीतियों के माध्यम से कृषि विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंचाना उल्लेखनीय उपलब्धि है।

    मुख्यमंत्री ने भारत की ऐतिहासिक आर्थिक शक्ति का आधार कृषि बताया और कहा कि एक समय में भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी 44-45 प्रतिशत तक थी, जिसमें सशक्त कृषि तंत्र का योगदान महत्वपूर्ण था। उन्होंने बताया कि पहले किसान सिर्फ उत्पादक नहीं था, बल्कि कारीगर और उद्यमी भी था। समय के साथ यह व्यवस्था कमजोर हुई और किसान केवल कच्चा माल उत्पादक बन गया, जिससे आर्थिक असंतुलन उत्पन्न हुआ।

    उन्होंने आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक कृषि को नई दिशा दे सकते हैं। सेंसर आधारित तकनीक से मिट्टी की नमी और पोषण का डेटा प्राप्त कर किसान सटीक निर्णय ले सकते हैं। एआई के माध्यम से फसलों का वास्तविक समय विश्लेषण, रोग पहचान और उत्पादन का पूर्वानुमान संभव है। ड्रोन द्वारा उर्वरक और कीटनाशकों का सटीक छिड़काव तथा सैटेलाइट के माध्यम से मौसम और भूमि की निगरानी कृषि को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बना रही है। बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग बदलते मौसम के अनुकूल बीज विकसित करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है।

    मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती को दीर्घकालिक समाधान बताते हुए कहा कि यह लागत कम करने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण संतुलन भी बनाए रखती है। डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म, वन नेशन-वन मंडी प्रणाली, मंडी शुल्क में कमी और डिजिटल सॉयल हेल्थ कार्ड किसानों को सीधे बाजार, मौसम और मूल्य की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

    उन्होंने पारंपरिक ‘लैब टू लैंड’ मॉडल की जगह ‘लैंड इज लैब’ पर जोर देते हुए कहा कि अब खेतों को ही प्रयोगशाला बनाना होगा, जहां किसान और वैज्ञानिक मिलकर नवाचार स्थापित करें। कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।

    मुख्यमंत्री ने गन्ना क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब अधिकांश मिलें 6-7 दिनों में भुगतान करती हैं। प्रदेश गन्ना उत्पादन में 55 प्रतिशत का योगदान देता है और एथेनॉल उत्पादन में देश में नंबर वन है। सिंचाई के लिए नलकूप और सोलर पैनल आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना और अर्ली वार्निंग सिस्टम जैसे उपाय सुनिश्चित किए गए हैं। 89 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और कृषि विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहे हैं।

  • मोम्बासा में भारतीय युद्धपोत ‘त्रिकंद’ का आगमन, सौंपे 100 राइफल और 50,000 गोलियां, रक्षा सहयोग को सशक्त किया गया

    मोम्बासा में भारतीय युद्धपोत ‘त्रिकंद’ का आगमन, सौंपे 100 राइफल और 50,000 गोलियां, रक्षा सहयोग को सशक्त किया गया


    नई दिल्ली। भारतीय नौसेना का फ्रंटलाइन गाइडेड प्रक्षेपास्त्र युद्धपोत ‘त्रिकंद’ केन्या के मोम्बासा बंदरगाह पर पहुंच चुका है। इस दौरान भारत ने केन्याई रक्षा बलों को 100 इंसास राइफल और करीब 50,000 गोलियां सौंपे। इसके अतिरिक्त, भारत ने केन्या को 1.5 टेस्ला क्षमता वाली एमआरआई मशीन भी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

    युद्धपोत ‘त्रिकंद’ दक्षिण-पश्चिम हिन्द महासागर क्षेत्र में अपनी ऑपरेशनल तैनाती के तहत मोम्बासा पहुंचा है। इस दौरे के दौरान भारतीय उप-नौसेनाध्यक्ष कृष्णा स्वामीनाथन केन्या में मौजूद हैं। पोत के मोम्बासा प्रवास के दौरान कई पेशेवर, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही भारतीय दल केन्या रक्षा बलों को आवश्यक सामग्रियां भी सौंप रहा है।

    इस यात्रा के दौरान भारत और केन्या के बीच उच्चस्तरीय रक्षा संवाद भी हुआ। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने केन्या के रक्षा अधिकारियों से मुलाकात की और सैन्य नेतृत्व के नियमित उच्चस्तरीय दौरों, संस्थागत बैठकों और बढ़ते रक्षा सहयोग की सराहना की। इसी क्रम में केन्या रक्षा बलों को 1.5 टेस्ला क्षमता वाली एमआरआई मशीन प्रदान करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

    मोम्बासा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उप-नौसेनाध्यक्ष कृष्णा स्वामीनाथन ने केन्या नौसेना के कमांडर मेजर जनरल पॉल ओटिएनो को 100 राइफल और 50,000 गोलियां सौंपकर दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और भरोसे को मजबूत किया। मोम्बासा से प्रस्थान के बाद युद्धपोत ‘त्रिकंद’ केन्या नौसेना के जहाजों के साथ समुद्री अभ्यास करेगा। इस अभ्यास के माध्यम से दोनों देशों की नौसेनाएं सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान करेंगी और संयुक्त संचालन क्षमता को और मजबूत करेंगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा भारत के ‘महासागर’ विजन के अनुरूप हिन्द महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस यात्रा के माध्यम से भारत और केन्या दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, समुद्री सहयोग और मानव सुरक्षा में सहयोग को और प्रगाढ़ किया जा रहा है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले में कहा कि धार्मिक प्रथाओं में अंधविश्वास की समीक्षा करना न्यायपालिका का अधिकार है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले में कहा कि धार्मिक प्रथाओं में अंधविश्वास की समीक्षा करना न्यायपालिका का अधिकार है।

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के विषय पर चल रही समीक्षा याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि धार्मिक प्रथाओं में अंधविश्वास और असंवैधानिक प्रथाओं की समीक्षा करना न्यायपालिका का अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा कि अदालत धर्म विशेषज्ञ नहीं है, लेकिन यदि कोई प्रथा मानवता, संविधान और न्याय की मूल भावना के खिलाफ जाती है, तो उस पर समीक्षा करना न्यायपालिका का संवैधानिक कर्तव्य है। सुप्रीम कोर्ट ने उदाहरण के तौर पर सती प्रथा, मानव बलि और नरभक्षण जैसी प्रथाओं का जिक्र किया और स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर अंधविश्वास को हमेशा अपरिवर्तनीय नहीं माना जा सकता।

    सुनवाई इस 2018 के निर्णय के पुनरीक्षण से जुड़ी है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 10 से 50 वर्ष आयु की महिलाओं का प्रवेश रोकना असंवैधानिक है। अब यह समीक्षा याचिका नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष है, जो व्यापक संवैधानिक सवालों पर विचार कर रही है कि धार्मिक अभ्यासों पर न्यायिक हस्तक्षेप किस हद तक संभव और उचित है। अदालत ने यह भी कहा कि केवल यह मान लेना कि सरकार का निर्णय अंतिम होगा, सही नहीं है और कोर्ट के पास यह देखने का अधिकार है कि कोई प्रथा अंधविश्वास पर आधारित है या नहीं।

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि धार्मिक स्वतंत्रता संवैधानिक रूप से सुरक्षित है और अदालत को केवल धार्मिक विश्वास के आधार पर समीक्षा नहीं करनी चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि धार्मिक स्वतंत्रता को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 25 आदि के तहत संतुलित रूप से देखा जाएगा और यदि कोई प्रथा मूलभूत अधिकारों के खिलाफ है तो न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।

    विशेष सुनवाई में कुछ न्यायाधीशों ने कहा कि यदि कोई प्रथा केवल धार्मिक मान्यता पर आधारित है और संवैधानिक मूल्यों को चुनौती देती है, तो उसकी समीक्षा अवश्य होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान जरूरी है, लेकिन यह असीमित नहीं है, और अदालत के पास यह शक्ति सुरक्षित है कि वह सामाजिक और नैतिक मूल्यों के अनुरूप न्याय सुनिश्चित करे।

    सबरीमाला मामला लंबे समय से महिलाओं के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संवेदनशील संतुलन से जुड़ा हुआ है। समीक्षा सुनवाई के निर्णायक चरण में सुप्रीम कोर्ट का यह रुख न्यायिक परंपरा, मूल्यों और संविधान की व्याख्या की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के लिए सात सीटों पर उम्मीदवार बदले।

    कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के लिए सात सीटों पर उम्मीदवार बदले।


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारी अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है और सियासी गतिविधियाँ तेज हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस ने दूसरे चरण के चुनाव के लिए अपनी उम्मीदवार सूची में फेरबदल किया है। महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी नई सूची में कुल आठ उम्मीदवारों के नाम शामिल किए गए हैं, जिनमें से सात पुराने उम्मीदवारों की जगह ले रहे हैं। हावड़ा सीट पर पार्टी ने प्रणब भट्टाचार्य को नया उम्मीदवार घोषित किया है।

    कांग्रेस ने नाकाशिपारा से गोलाम किबरिया मंडल की जगह ताहिर एसके को, छपरा से रहीदुल मंडल की जगह आसिफ खान को और मिनाखां (एससी) से बरनाली नस्कर की जगह आसिफ खान को टिकट दिया है। मंदिर बाजार (एससी) से कौशिक बैद्य के स्थान पर चांद सरदार, रैना (एससी) से अनिक साहा के स्थान पर पम्पा मलिक, केतुग्राम से मोफिरुल कासिम के स्थान पर एसके अबू बक्कर और औसग्राम (एससी) से निशा बराल के स्थान पर तापस बराल को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने इस बदलाव को चुनावी रणनीति के तहत किया है और सभी नए उम्मीदवारों को विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए मैदान में उतारा गया है।

    इस बीच, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे। पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर वोटिंग होगी। चुनाव नतीजों की घोषणा 4 मई को की जाएगी। चुनाव के मद्देनजर राज्य सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। इस बार अब तक की सबसे बड़ी अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। लगभग 2,400 अर्धसैनिक कंपनियों के 2,40,000 जवानों को तैनात किया गया है।

    महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी इस चुनाव में रिकॉर्ड स्तर पर की गई है। करीब 20,000 महिला अर्धसैनिक जवानों को चुनाव ड्यूटी में लगाया गया है, ताकि मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके। चुनाव के दौरान संवेदनशील और संवेदनशील जिलों में विशेष निगरानी रखी जाएगी, और सभी दलों की निष्पक्ष भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

    पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 की यह स्थिति दर्शाती है कि राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने के साथ-साथ सुरक्षा और निर्वाचन प्रक्रिया की तैयारी में भी पूरी गंभीरता दिखा रहे हैं। कांग्रेस का यह उम्मीदवार फेरबदल उसके चुनावी अभियान को तेज करने और राज्य के मतदाताओं तक प्रभावी संदेश पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • 94 वर्ष की आयु में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई का निधन, नोएडा स्थित आवास में अंतिम दर्शन।

    94 वर्ष की आयु में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई का निधन, नोएडा स्थित आवास में अंतिम दर्शन।


    नई दिल्ली। भारतीय राजनीति की वरिष्ठ और सम्मानित नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का आज सुबह 4 बजे निधन हो गया। 94 वर्ष की आयु में उनकी यह विदाई स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण हुई। उन्हें 8 अप्रैल को दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। उनका पार्थिव शरीर नोएडा स्थित उनके आवास में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जिसके बाद आज शाम 5 बजे उन्हें निजामुद्दीन स्थित शवदाह गृह में सुपर्द-ए-खाक किया जाएगा।

    मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में ही राजनीति में कदम रखा और राज्य स्तर से राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने कई बार लोकसभा सदस्य के रूप में उत्तर प्रदेश के मेरठ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और बाद में 2004 से 2016 तक छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की सदस्य रहीं। अपने राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई और नीति निर्माण में योगदान दिया।

    मोहसिना किदवई ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में कई केंद्रीय मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उनके मंत्रालयों में ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, परिवहन और शहरी विकास शामिल थे। उनके नेतृत्व में इन क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण योजनाओं और नीतियों का कार्यान्वयन हुआ।

    कांग्रेस पार्टी में उनका योगदान भी उल्लेखनीय रहा। वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सदस्य रहीं और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव के रूप में पार्टी संगठन और रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने युवा नेताओं को मार्गदर्शन दिया और पार्टी के निर्णयों एवं नीतियों के निर्माण में सक्रिय योगदान दिया।

    मोहसिना किदवई की राजनीतिक यात्रा लंबी और प्रभावशाली रही। उन्होंने हमेशा महिला और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दी। उनकी नीति और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें पार्टी और संसद में एक विशिष्ट स्थान दिलाया। उनकी अचानक विदाई से भारतीय राजनीति और कांग्रेस पार्टी एक सम्मानित नेता को खो चुकी है।

  • महिला ने पुलिस को कहा कि पर्यटक स्थानीय रोज़ी‑रोटी का स्रोत हैं, लेकिन स्थिति प्रशासन द्वारा नियंत्रण में लाई गई।

    महिला ने पुलिस को कहा कि पर्यटक स्थानीय रोज़ी‑रोटी का स्रोत हैं, लेकिन स्थिति प्रशासन द्वारा नियंत्रण में लाई गई।


    नई दिल्ली। ऋषिकेश के गंगा किनारे एक हरियाणा की महिला पर्यटक और स्थानीय पुलिस के बीच तीखी बहस का वीडियो वायरल हो गया है। यह घटना 6 अप्रैल को नीलकंठ मार्ग के फूलचट्टी क्षेत्र के पास हुई, जहां महिला को सार्वजनिक और पवित्र क्षेत्र में शराब पीते हुए रोका गया।

    वीडियो में दिखाई देता है कि जब पुलिसकर्मियों ने महिला को स्थानीय नियमों और पवित्रता बनाए रखने के आधार पर टोका, तो महिला ने नाराजगी जताई और पुलिस पर चिल्लाते हुए कहा कि ‘तुम्हारी रोज़ी‑रोटी हम पर्यटकों से चलती है।’ महिला ने यह भी कहा कि वह अपने पैसों से शराब पी रही है और पर्यटकों को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है। महिला का यह तर्क था कि पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देता है और इसलिए उन्हें ऐसा करने से रोका नहीं जाना चाहिए।

    मामला तब और बढ़ गया जब महिला का रवैया आक्रामक होता चला गया। इस दौरान उसके पति ने बीच‑बचाव किया और महिला को वहां से ले गए, जिससे स्थिति शांत हुई। इस घटना के वीडियो ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छेड़ दी है। कई लोगों ने महिला के व्यवहार की आलोचना की और कहा कि पर्यटन से रोजगार मिलता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि धार्मिक और पवित्र स्थलों पर मर्यादा का उल्लंघन किया जाए।

    ऋषिकेश एक आध्यात्मिक केंद्र है, जहां गंगा नदी की पवित्रता बनाए रखने के लिए कई इलाकों में शराब और मांसाहार पर सख्त पाबंदी है। घाटों और नदी किनारे प्रशासन और पुलिस द्वारा नियमित निगरानी की जाती है, ताकि धार्मिक और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। सोशल मीडिया पर इस घटना पर लोगों ने टिप्पणियों में कहा कि पर्यटक का पैसा स्वागत योग्य है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गंगा जैसे पवित्र स्थल को बार काउंटर समझा जाए। कई ने यह भी लिखा कि यात्रा के दौरान वहां की संस्कृति और भावनाओं का सम्मान करना अनिवार्य है।

  • मुख्यमंत्री भगवंत मान की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अभियान लगातार जारी, राज्य में सुरक्षा और निवारक संदेश मजबूत।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अभियान लगातार जारी, राज्य में सुरक्षा और निवारक संदेश मजबूत।


    नई दिल्ली। पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में गैंगस्टरों के खिलाफ जंग अभियान को और तेज कर दिया है। राज्य भर में चलाए जा रहे समन्वित ऑपरेशन का उद्देश्य संगठित अपराध, नार्को-सिंडिकेट और उनके सहयोगियों को पूरी तरह तोड़ना है। 20 जनवरी से 15 मार्च 2026 के बीच पंजाब पुलिस ने 44,787 छापे मारे, जिनके परिणामस्वरूप 14,894 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 14,561 वांछित अपराधी और गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े 333 सहयोगी शामिल हैं। साथ ही 714 ऐसे अपराधी भी पकड़े गए जो लंबे समय से गिरफ्तारी से बच रहे थे।

    इस अभियान के तहत 7,494 लोगों को प्रिवेंटिव हिरासत में रखा गया, जिनमें 7,210 वांछित और 284 सहयोगी शामिल हैं। पुलिस ने बड़ी संख्या में हथियार जब्त किए हैं, जिनमें 301 बंदूकें, 125 धारदार हथियार, 921 राउंड गोला-बारूद, 81 मैगज़ीन, 2.5 किलोग्राम विस्फोटक और छह हैंड ग्रेनेड शामिल हैं। इसके अलावा, आपराधिक नेटवर्क की लॉजिस्टिक क्षमताओं को कमजोर करने के लिए 4,070 मोबाइल फोन, 548 वाहन और 10 ड्रोन जब्त किए गए। नकदी और आभूषण के रूप में 45.6 लाख रुपये और 262 ग्राम सोना भी बरामद हुआ।

    सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभियान प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई से आगे बढ़कर सक्रिय और व्यवस्थित निवारक रणनीति का हिस्सा है। इसका लक्ष्य केवल गैंगस्टरों की गिरफ्तारी नहीं बल्कि उनके वित्तीय चैनल, संचार नेटवर्क और आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी निशाना बनाना है। इसके जरिए पंजाब में अपराध की जड़ तक पहुंच कर नेटवर्क को पूरी तरह कमजोर किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया है कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कोई भी आपराधिक नेटवर्क बिना दंड के काम नहीं करेगा। इस अभियान की निरंतरता और तीव्रता गैंगस्टरों और ड्रग सिंडिकेट को प्रभावी रूप से कमजोर कर रही है। पंजाब पुलिस इस अभियान को तब तक जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है जब तक कि राज्य से संगठित अपराध की जड़ पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती।

    अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन ने राज्य में अपराधियों के खिलाफ एक मजबूत निवारक संदेश भेजा है और आम जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इससे पंजाब में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और नागरिकों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है।

  • पंजाब और उत्तर प्रदेश में लगातार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसलें व्यापक स्तर पर भारी प्रभावित हुईं, जिससे किसानों की मेहनत पानी में चली गई।

    पंजाब और उत्तर प्रदेश में लगातार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसलें व्यापक स्तर पर भारी प्रभावित हुईं, जिससे किसानों की मेहनत पानी में चली गई।


    नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर रबी की मुख्य फसल गेहूं को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खेतों में जलभराव की स्थिति बन चुकी है, जिससे फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

    पंजाब के साहिबजादा अजीत सिंह नगर के खरड़ इलाके में लगातार हो रही बारिश से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थानीय किसानों ने बताया कि उनके खेतों में जलभराव की वजह से 10 से 12 एकड़ फसल प्रभावित हो चुकी है और यदि बारिश अगले कुछ दिनों तक जारी रही तो नुकसान और बढ़ सकता है। संगरूर के किसानों का कहना है कि तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण करीब 70 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। जमीन लीज पर लेने वाले किसानों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि फसल बर्बाद होने के बावजूद उन्हें जमीन का किराया देना पड़ रहा है।

    बरनाला में भी ओलावृष्टि और लगातार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसान हरदीप सिंह ने बताया कि बहुत बड़ा नुकसान हुआ है, वहीं लखबीर सिंह ने कहा कि फसलें पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं और स्थिति बेहद चिंताजनक है। किसानों का कहना है कि बिना किसी मदद के वे इस नुकसान की भरपाई नहीं कर पाएंगे और सरकार से त्वरित मुआवजे की आवश्यकता है।

    उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में भी बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने तबाही मचा दी है। यहां खड़ी फसलें गिर गई हैं और कट चुकी फसल भी पानी में भीगकर खराब हो गई है। एक किसान ने बताया कि उसकी गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, साथ ही सरसों की फसल भी नष्ट हो गई है। अन्य किसानों ने कहा कि सारी फसलें पानी में गिरकर खराब हो गई हैं और यदि सरकार से कोई सहायता मिलती है तो उन्हें कुछ राहत मिल सकती है।

    कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि रबी की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रही है। किसान आर्थिक दबाव में हैं और कई परिवार कर्ज में डूबने की स्थिति में हैं। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकारों से किसानों को त्वरित मुआवजा देने और राहत कार्यों को शीघ्र प्रभावी बनाने की अपील की जा रही है।

  • पंजाब और उत्तर प्रदेश में लगातार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसलें व्यापक स्तर पर भारी प्रभावित हुईं,

    पंजाब और उत्तर प्रदेश में लगातार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसलें व्यापक स्तर पर भारी प्रभावित हुईं,


    नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर रबी की मुख्य फसल गेहूं को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खेतों में जलभराव की स्थिति बन चुकी है, जिससे फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

    पंजाब के साहिबजादा अजीत सिंह नगर के खरड़ इलाके में लगातार हो रही बारिश से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थानीय किसानों ने बताया कि उनके खेतों में जलभराव की वजह से 10 से 12 एकड़ फसल प्रभावित हो चुकी है और यदि बारिश अगले कुछ दिनों तक जारी रही तो नुकसान और बढ़ सकता है। संगरूर के किसानों का कहना है कि तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण करीब 70 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। जमीन लीज पर लेने वाले किसानों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि फसल बर्बाद होने के बावजूद उन्हें जमीन का किराया देना पड़ रहा है।

    बरनाला में भी ओलावृष्टि और लगातार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसान हरदीप सिंह ने बताया कि बहुत बड़ा नुकसान हुआ है, वहीं लखबीर सिंह ने कहा कि फसलें पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं और स्थिति बेहद चिंताजनक है। किसानों का कहना है कि बिना किसी मदद के वे इस नुकसान की भरपाई नहीं कर पाएंगे और सरकार से त्वरित मुआवजे की आवश्यकता है।

    उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में भी बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने तबाही मचा दी है। यहां खड़ी फसलें गिर गई हैं और कट चुकी फसल भी पानी में भीगकर खराब हो गई है। एक किसान ने बताया कि उसकी गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, साथ ही सरसों की फसल भी नष्ट हो गई है। अन्य किसानों ने कहा कि सारी फसलें पानी में गिरकर खराब हो गई हैं और यदि सरकार से कोई सहायता मिलती है तो उन्हें कुछ राहत मिल सकती है।

    कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि रबी की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रही है। किसान आर्थिक दबाव में हैं और कई परिवार कर्ज में डूबने की स्थिति में हैं। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकारों से किसानों को त्वरित मुआवजा देने और राहत कार्यों को शीघ्र प्रभावी बनाने की अपील की जा रही है।

  • अल फलाह यूनिवर्सिटी मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, 39.45 करोड़ की संपत्ति कुर्क

    अल फलाह यूनिवर्सिटी मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, 39.45 करोड़ की संपत्ति कुर्क


    नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच में बड़ी कार्रवाई करते हुए अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी से जुड़ी 39.45 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर ली हैं। कार्रवाई में दिल्ली स्थित आवास, फरीदाबाद की जमीन और बैंक खातों को शामिल किया गया है।

    ईडी का आधिकारिक बयान

    ईडी ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि यह कार्रवाई छात्रों से कथित धोखाधड़ी और धनशोधन के मामले में की गई है।

    एजेंसी के अनुसार संपत्तियां धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अटैच की गई हैं, ताकि इनके लेन-देन पर रोक लगाई जा सके।

    किन संपत्तियों पर लगी रोक

    कुर्क की गई संपत्तियों में शामिल हैं:

    जामिया नगर, ओखला (दिल्ली) स्थित रिहायशी मकान
    फरीदाबाद के गांव धौज में यूनिवर्सिटी कैंपस से लगी कृषि भूमि
    जवाद अहमद सिद्दीकी और अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के बैंक खाते
    डीमैट होल्डिंग्स और फिक्स्ड डिपॉजिट
    कुल अटैचमेंट 183.54 करोड़ तक पहुंचा

    ईडी के मुताबिक इस मामले में अब तक कुल 183.54 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। एजेंसी ने कहा कि जांच जारी है और आगे भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।