Category: National

  • जंतर मंतर से संसद तक गूंजा आंदोलन, राहुल गांधी के प्रदर्शन के बाद सरकार ने वांगचुक से की मुलाकात

    जंतर मंतर से संसद तक गूंजा आंदोलन, राहुल गांधी के प्रदर्शन के बाद सरकार ने वांगचुक से की मुलाकात


    नई दिल्ली । जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन ने देश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। लंबे समय तक आंदोलन को सीमित मानकर चल रही केंद्र सरकार ने अब अपना रुख बदलते हुए सक्रिय पहल शुरू कर दी है। राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और सरकार ने न केवल अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से संपर्क किया बल्कि आंदोलन में घायल छात्रों से मिलने के लिए केंद्रीय मंत्रियों को अस्पताल भी भेजा। इसके साथ ही संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कराने की विपक्ष की मांग को भी सरकार ने स्वीकार कर लिया।

    नीट पेपर लीक और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ आंदोलन शुरुआती दिनों में सीमित दायरे में दिखाई दे रहा था। जंतर मंतर पर कम संख्या में प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी को देखते हुए माना जा रहा था कि यह आंदोलन ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पाएगा। लेकिन जैसे जैसे छात्रों का समर्थन बढ़ा और संसद मार्च के बाद आंदोलन ने नया स्वरूप लिया वैसे वैसे राजनीतिक माहौल भी बदलने लगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी के धरने ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी। इसके बाद सरकार ने तेजी से अपनी रणनीति में बदलाव किया। कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मिलने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह पहुंचे और उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की। इससे पहले आंदोलन के प्रतिनिधियों को सरकार से मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था लेकिन बाद में परिस्थितियां तेजी से बदल गईं।

    सरकार ने संसद में इस पूरे मुद्दे पर चर्चा के लिए भी सहमति जताई। हालांकि विपक्ष ने इस पर नई शर्त रखते हुए कहा कि चर्चा तभी सार्थक होगी जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

    इस बीच सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा करते हुए बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर या व्यक्तिगत रूप से मिलकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने लिखा कि सभी ने उन्हें याद दिलाया है कि देश और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अभी बाकी है। वांगचुक ने कहा कि वह भी जीना चाहते हैं और अपने छात्रों तथा शिक्षा से जुड़े कार्यों में जल्द लौटना चाहते हैं लेकिन आंदोलन के उद्देश्यों को लेकर उनकी प्रतिबद्धता बनी हुई है।

    विश्लेषकों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर युवाओं में पहले से ही असंतोष था। यही कारण है कि आंदोलन धीरे धीरे व्यापक समर्थन हासिल करता गया और सरकार को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    फिलहाल सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है लेकिन आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि संसद में होने वाली चर्चा और सरकार के अगले कदम इस पूरे विवाद का क्या समाधान निकालते हैं।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन: महिला प्रदर्शनकारी से कथित अभद्रता पर एडीसीपी संदीप लांबा हटाए गए, पुलिस ने RAF जवानों पर हमले का मामला दर्ज

    जंतर-मंतर प्रदर्शन: महिला प्रदर्शनकारी से कथित अभद्रता पर एडीसीपी संदीप लांबा हटाए गए, पुलिस ने RAF जवानों पर हमले का मामला दर्ज


    नई दिल्ली।
    दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान एक महिला प्रदर्शनकारी को कथित तौर पर थप्पड़ मारने के आरोप में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) संदीप लांबा को प्रदर्शन स्थल की ड्यूटी से हटा दिया गया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। दूसरी ओर, प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के दो जवानों पर कथित हमले के मामले में दिल्ली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, दिल्ली, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा (DANIPS) के अधिकारी एवं उत्तर-पूर्वी जिले में अतिरिक्त डीसीपी के पद पर तैनात संदीप लांबा को जंतर-मंतर पर चल रही ड्यूटी से हटाकर उनकी मूल तैनाती पर वापस भेज दिया गया है।

    बताया गया कि संसद मार्च के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। इसी दौरान वायरल हुए एक वीडियो में संदीप लांबा एक महिला प्रदर्शनकारी को कथित तौर पर थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद इस घटना को लेकर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली।

    दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती का मुद्दा उठाया। उन्होंने अदालत से कहा कि वीडियो में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बिना किसी उकसावे के महिला प्रदर्शनकारी के साथ अभद्र व्यवहार करते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारी से जवाब तलब करने की मांग भी की।

    उधर, दिल्ली पुलिस ने मंगलवार रात टॉल्स्टॉय मार्ग और संसद मार्ग चौराहे पर दो आरएएफ जवानों पर कथित हमले के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग नारेबाजी कर रहे थे। इसी बीच सड़क पार कर रहे आरएएफ जवानों पर भीड़ ने कथित रूप से हमला कर दिया, जिससे दोनों जवान घायल हो गए।

    घायल जवानों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दोनों घटनाओं की जांच जारी है।

  • Ayodhya: चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद राम मंदिर की व्यवस्था में बदलाव… संत समाज को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

    Ayodhya: चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद राम मंदिर की व्यवस्था में बदलाव… संत समाज को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी


    अयोध्या।
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) ने राम मंदिर (Ram Temple) की धार्मिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों की पूरी निगरानी अब अयोध्या के संत समाज को सौंप दी है। ट्रस्ट ने धार्मिक समिति का पुनर्गठन करते हुए स्पष्ट किया है कि अब राम मंदिर (Ram Temple ) की सभी धार्मिक गतिविधियां वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुरूप संचालित होंगी और इस संबंध में समिति का निर्णय सर्वोपरि माना जाएगा।

    समिति के अध्यक्ष ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि (Swami Govind Dev Giri) होंगे, जबकि इसमें अयोध्या के पांच प्रमुख संत राम मंदिर के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास (निर्मोही अखाड़ा), महंत कमलनयन दास (मणिराम दास छावनी), महंत डॉक्टर रामानंद दास (रामकथा कुंज), अधिकारी राजकुमार दास (रामबल्लबा कुंज) और महंत मिथिलेशनंदिनी शरणको शामिल किया गया है। इनके अलावा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ और राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि समिति में रहेंगे। नौ सदस्यीय समिति में अयोध्या के संतों का बहुमत रहेगा।

    स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि यह भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है और यहां सेवा-पूजा रामानंदी वैदिक परंपरा के अनुसार ही होती रहे, यह सुनिश्चित करना समिति का सबसे बड़ा दायित्व होगा। अब मंदिर अयोध्या के संतों की निगरानी में चलेगा और वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुसार ही संचालित होगा। ट्रस्ट के इस फैसले को राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा संस्थागत बदलाव माना जा रहा है।


    समिति को मिले पांच बड़े अधिकार

    – मंदिर में नित्य पूजा और सभी धार्मिक अनुष्ठान वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुरूप हो रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी।
    -रामनवमी, विवाह पंचमी, सीता नवमी जैसे सभी वार्षिक पर्वों की तिथि का अंतिम निर्धारण और आयोजन।
    – विशेष वैदिक अनुष्ठानों, यज्ञ, रामार्चा और वेद पारायण जैसे धार्मिक आयोजनों की योजना और संचालन।
    – अर्चकों (पुजारियों) के प्रशिक्षण, नियुक्ति, आचरण, ड्रेस कोड और पूजा-पद्धति की निगरानी तथा स्थायी अर्चक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना।
    – अयोध्या के मठों, मंदिरों, संत समाज और गुरुकुलों के साथ नियमित संवाद और समन्वय स्थापित करना।


    दिनेंद्र दास की भूमिका हुई और मजबूत

    धार्मिक समिति में ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास को शामिल किया जाना भी अहम माना जा रहा है। पिछले कई महीनों से वह लगातार राम मंदिर की पूजा व्यवस्था को पूरी तरह शास्त्रोक्त और परंपरागत बनाए जाने की मांग उठा रहे थे। हाल के दिनों में वह लगभग प्रतिदिन मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की व्यवस्था का निरीक्षण भी कर रहे थे और धार्मिक परंपराओं के पालन पर जोर देते रहे। ऐसे में उन्हें समिति में प्रमुख भूमिका मिलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ट्रस्ट ने पूजा व्यवस्था से जुड़े मामलों में उनके सुझावों और संत समाज की भूमिका को औपचारिक मान्यता दे दी है।

    बनेगी अर्चकों की स्थायी पाठशाला, तैयार होंगे प्रशिक्षित पुजारी
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के लिए प्रशिक्षित अर्चकों (पुजारियों) की स्थायी व्यवस्था करने का फैसला किया है। धार्मिक समिति को अर्चकों के प्रशिक्षण, नियुक्ति और उनके आचरण की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि राम मंदिर परिसर में वर्तमान में 14 मंदिर हैं, जिनके लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित अर्चकों की आवश्यकता है। पहले ट्रस्ट ने एक वर्ष का अर्चक प्रशिक्षण केंद्र संचालित किया था, जिसमें करीब 30 प्रशिक्षित अर्चक तैयार किए गए थे। बाद में यह व्यवस्था बाधित हो गई। अब ट्रस्ट स्थायी अर्चक प्रशिक्षण पाठशाला स्थापित करेगा, जहां पूजा-पद्धति, वैदिक मंत्रों का शुद्ध उच्चारण, कर्मकांड, मंदिर प्रबंधन और रामानंदी परंपरा के अनुरूप सेवा-पूजा का प्रशिक्षण दिया जाएगा।


    राम मंदिर की पूजन व्यवस्था : पहले क्या था, अब क्या बदलेगा

    – पूजा व्यवस्था की निगरानी ट्रस्ट और प्रशासनिक स्तर पर होती थी। अब धार्मिक समिति सीधे पूजा-पद्धति और धार्मिक कार्यों की निगरानी करेगी।
    – पूजा शास्त्रोक्त परंपरा के अनुसार होती थी, लेकिन निगरानी के लिए अलग धार्मिक समिति सक्रिय नहीं थी। अब वैदिक रामानंदी परंपरा के पालन की जिम्मेदारी नौ सदस्यीय धार्मिक समिति को दी गई है।
    – पर्व-उत्सवों की तिथि और आयोजन ट्रस्ट तय करता था। अब रामनवमी, सीता नवमी, विवाह पंचमी जैसे सभी पर्वों की तिथि और आयोजन धार्मिक समिति तय करेगी।
    – विशेष धार्मिक अनुष्ठानों पर अलग-अलग निर्णय लिए जाते थे। अब वेद पारायण, रामार्चा, यज्ञ और अन्य नित्य-अनुष्ठानों की रूपरेखा समिति तय करेगी।
    – पुजारियों की कार्यप्रणाली पर सामान्य निगरानी थी। अब अर्चकों के ड्रेस कोड, पूजा-विधि, आचरण और शास्त्रीय नियमों के पालन की नियमित समीक्षा होगी।
    – अयोध्या के संतों की भूमिका परामर्श तक सीमित मानी जाती थी। अब अयोध्या के पांच संत समिति में बहुमत के साथ धर्म व्यवस्था का नेतृत्व करेंगे।
    – धार्मिक निर्णय ट्रस्ट स्तर पर लिए जाते थे। अब पूजा-पद्धति और धार्मिक विषयों पर समिति का निर्णय सर्वोपरि माना जाएगा।


    चोरी में किसी ट्रस्टी का हाथ नहीं, बैंक कर्मी थे जिम्मेदार : दिनेंद्र दास

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक के बाद निर्मोही अखाड़े के महंत एवं ट्रस्ट सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के मामले पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी ट्रस्टी की संलिप्तता नहीं थी, बल्कि बैंक कर्मियों की भूमिका सामने आई है।

    मणिराम दास छावनी में मंगलवार को ट्रस्ट की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि चोरी की घटना के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार कर दिए गए हैं। अब मंदिर में सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि चोरी की घटना का श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। रामलला के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु लगातार दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं।

  • पटना SP का वीडियो वायरल, बोले- ‘पीछे हटे तो नौकरी करने लायक नहीं छोडूंगा’, यह कहकर खुद सबसे आगे दौड़े

    पटना SP का वीडियो वायरल, बोले- ‘पीछे हटे तो नौकरी करने लायक नहीं छोडूंगा’, यह कहकर खुद सबसे आगे दौड़े


    पटना। बिहार की राजधानी पटना में छात्रों के उग्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधीक्षक (SP) संकेत कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। वीडियो में वह पुलिसकर्मियों को सख्त लहजे में निर्देश देते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं, ‘पीछे हटे तो नौकरी करने लायक नहीं छोड़ूंगा।’ इसके कुछ ही सेकंड बाद वह खुद सबसे आगे बढ़कर प्रदर्शनकारियों की ओर दौड़ते दिखाई देते हैं।

    यही वीडियो पूरे दिन सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना रहा। कुछ लोगों ने इसे पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने वाला नेतृत्व बताया, जबकि कई लोगों ने उनके शब्दों और शैली पर सवाल भी उठाए। फिलहाल इस वायरल वीडियो को लेकर पटना पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    वीडियो में क्या दिखा?
    वायरल वीडियो में जेपी गोलंबर के पास का तनावपूर्ण माहौल दिखाई देता है। छात्र प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग की ओर तेजी से बढ़ते नजर आते हैं, जबकि पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश करती है। इसी दौरान SP संकेत कुमार अपने जवानों के बीच पहुंचकर ऊंची आवाज में चेतावनी देते हैं। इसके बाद वह खुद पुलिस टीम के साथ आगे बढ़ते हुए प्रदर्शनकारियों की दिशा में दौड़ पड़ते हैं। वीडियो के यही कुछ सेकंड सबसे ज्यादा साझा किए जा रहे हैं।

    क्यों कर रहे थे छात्र प्रदर्शन?
    गुरुवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) सहित कई छात्र संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पटना के जेपी गोलंबर पर प्रदर्शन किया। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण बताया गया, लेकिन बाद में स्थिति बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। भीड़ के आगे बढ़ने पर पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की हुई और देखते ही देखते हालात तनावपूर्ण हो गए।

    लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस
    स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की। इसके बाद लाठीचार्ज किया गया, फिर वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों की तरफ से पथराव की भी सूचना सामने आई। इस झड़प में गांधी मैदान थाना प्रभारी और एक महिला पुलिसकर्मी घायल हो गईं। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। काफी देर तक जेपी गोलंबर और आसपास का इलाका तनावपूर्ण बना रहा।

    मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ी भीड़
    छात्रों का एक बड़ा समूह मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगा था। पुलिस पहले से अलर्ट थी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मुख्यमंत्री आवास से पहले ही प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया। जब भीड़ पीछे नहीं हटी, तो पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें वहां से हटाया। इसके बाद धीरे-धीरे हालात सामान्य हुए, हालांकि राजधानी के कई हिस्सों में भारी पुलिस बल तैनात रहा।

    राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
    पटना की घटना के बाद बिहार में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। इसी दिन पटना में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प को लेकर दरभंगा में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। लहेरियासराय टावर चौक पर भाजपा कार्यकर्ता पार्टी के झंडे के साथ सड़क पर उतरे और कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की।

    भाजपा जिला अध्यक्ष ने लगाए आरोप
    दरभंगा भाजपा जिला अध्यक्ष आदित्य नारायण मन्ना ने आरोप लगाया कि पटना में भाजपा कार्यकर्ताओं पर पथराव किया गया। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक विरोध की सीमा से बाहर की घटना है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ हुई मारपीट लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसकी निंदा की जानी चाहिए।

  • मप्र के मुख्य सचिव अनुराग जैन को केंद्र में मिली बड़ी जिम्मेदारी, नीति आयोग के सीईओ नियुक्त

    मप्र के मुख्य सचिव अनुराग जैन को केंद्र में मिली बड़ी जिम्मेदारी, नीति आयोग के सीईओ नियुक्त


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और वर्तमान मुख्य सचिव अनुराग जैन को केन्द्र में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। उन्हें नीति आयोग का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया गया है।

    इस संबंध में केन्द्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की अपॉइंटमेंट कमेटी ऑफ द कैबिनेट (एसीसी) ने बुधवार शाम आदेश जारी किया है। जारी आदेश के अनुराग जैन का कार्यकाल नीति आयोग में पदभार ग्रहण करने की तारीख से दो वर्ष तक रहेंगा।

    नीति आयोग केंद्र सरकार का शीर्ष सार्वजनिक नीति थिंक टैंक है, जो देश की विकास योजनाओं, आर्थिक नीतियों और राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अनुराम जैन नीति आयोग के डेवलपमेंट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिस की महानिदेशक निधि छिब्बर की जगह लेंगे। आईएएस अधिकारी सुब्रह्मण्यम के शुरुआती दो साल के कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ाया गया था, जो इस साल 24 फरवरी में खत्म हुआ। इसके बाद निधि छिब्बर अतिरिक्त प्रभार के तौर पर यह पद संभाल रही थीं।

    गौरतलब है कि 1989 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी अनुराग जैन को 3 अक्टूबर 2024 को मध्य प्रदेश का मुख्य सचिव बनाया गया था। साल 2025 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया गया था। उनका कार्यकाल 31 अगस्त 2026 को समाप्त हो रहा है।

  • पेपर लीक पर न हो राजनीति, संसद में चर्चा करने के लिए सरकार तैयार: भाजपा

    पेपर लीक पर न हो राजनीति, संसद में चर्चा करने के लिए सरकार तैयार: भाजपा


    नई दिल्ली।
    पेपर लीक के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह विषय देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का माध्यम बनाने के बजाय संसद में गंभीरता से चर्चा का विषय बनाया जाना चाहिए। पार्टी ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और चाहती है कि सदन में इसकी हर बारीकी पर विचार हो, ताकि छात्रों के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो।

    भाजपा मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। पार्टी के अनुसार, देश के बच्चे ही भारत का भविष्य हैं और उनकी मेहनत तथा सपनों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी कारण सरकार इस विषय पर गंभीर है और हर पहलू पर चर्चा के लिए तैयार है।

    उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने अपने आरोपों में केवल कुछ राज्यों का जिक्र क्यों किया, जबकि कांग्रेस और इंडी गठबंधन शासित राज्यों में भी कई बार पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि छात्रों के हित की बात की जा रही है, तो फिर सभी राज्यों की घटनाओं पर समान रूप से चर्चा क्यों नहीं हो रही है।

    नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का रवैया चयनात्मक है और उनका उद्देश्य छात्रों को न्याय दिलाना नहीं, बल्कि इस मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेना है। पार्टी ने कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के भविष्य को लेकर चिंतित है, तो उसे सभी राज्यों में हुई घटनाओं पर समान दृष्टि रखनी चाहिए।

    भाजपा ने उदाहरण देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में सर्विस सेलेक्शन बोर्ड की परीक्षा का पेपर लीक हुआ, जहां कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार है। हिमाचल प्रदेश में स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षा का पेपर लीक होने का मामला सामने आया, जहां कांग्रेस की सरकार है। झारखंड में झारखंड एकेडमिक काउंसिल की हिंदी और विज्ञान परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जहां कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार है।

    इसी तरह तेलंगाना में इंटरमीडिएट भाषा परीक्षा तथा एसएससी भाषा परीक्षा में पेपर लीक के मामले सामने आए। भाजपा ने कहा कि वहां कांग्रेस की सरकार है, जिसे सीपीआई का समर्थन प्राप्त है। तमिलनाडु में बी.एड. पाठ्यक्रम की परीक्षा का पेपर लीक हुआ। पश्चिम बंगाल में पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आया, जहां तृणमूल कांग्रेस की सरकार थी। पंजाब में पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड की ग्रुप-डी भर्ती परीक्षा में भी पेपर लीक की घटना हुई, जबकि केरल में लोक सेवा आयोग (पीएससी) की 26 परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप लगे। उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक में, जहां कांग्रेस की सरकार है, वहां भी परीक्षा का पेपर लीक होने का मामला सामने आया।

    नड्डा ने कहा कि ये केवल कुछ उदाहरण हैं और देश के विभिन्न राज्यों में ऐसी घटनाओं की सूची काफी लंबी है। इसलिए किसी एक सरकार या एक राजनीतिक दल को निशाना बनाने के बजाय पूरे देश में परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने पर चर्चा होनी चाहिए।

    भाजपा ने कहा कि छात्रों की मांगों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। यह एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या है, जिस पर संसद में गहन और सार्थक चर्चा की आवश्यकता है। पार्टी ने कहा कि वह इस विषय पर सभी तथ्यों के साथ चर्चा करने और समाधान निकालने के लिए तैयार है।

    उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने शाम चार बजे अपने प्रस्तुतीकरण में लगभग 150 पेपर लीक मामलों का उल्लेख किया। पार्टी के अनुसार, इन सभी दावों की जांच की जाएगी और सरकार हर तथ्य तथा हर सवाल का जवाब जनता के सामने रखने के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा ने दोहराया कि इस विषय पर राजनीति के बजाय तथ्यों और समाधान पर आधारित चर्चा होनी चाहिए, ताकि देश के छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

  • मेदांता में वांगचुक से मिलने पहुंचे 15 सांसद, पुलिस ने रोका तो धरने पर बैठे

    मेदांता में वांगचुक से मिलने पहुंचे 15 सांसद, पुलिस ने रोका तो धरने पर बैठे


    गुरुग्राम।
    देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों के समर्थन में पिछले 25 दिनों से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक से मिलने बुधवार शाम को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के साथ 15 विपक्षी सांसद वांगचुक से मिलने मेदांता पहुंचे। पुलिस ने उन्हें अस्पताल गेट पर ही रोक लिया।

    सांसद संजय सिंह की पुलिस से इसको लेकर तीखी बहस हुई। अंदर प्रवेश न मिलने पर सभी सांसद अस्पताल के गेट पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान वांगचुक की पत्नी गीतांजलि भी वहां पहुंचीं। गीतांजलि ने कहा कि सोनम ने सरकार को चिट्ठी लिखी है, जिसमें अपनी शर्तें और मांगें बताई हैं। सरकार को ये मांगें मान लेनी चाहिए।

    करीब एक घंटे तक हंगामा चलने के बाद वांगचुक की निगरानी कर रही मेडिकल टीम मौके पर पहुंची। टीम ने हेल्थ अपडेट दिया और मेडिकल कारणों का हवाला देते हुए कहा कि सिर्फ ब्लड रिलेशन वाले ही मरीज से मिल सकते हैं। इसके बाद सांसद वहां से चले गए। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार वांगचुक को अनशन तोड़ने नहीं देना चाहती, उन्हें मारना चाहती है।

    वांगचुक ने सरकार के सामने रखीं ये शर्तें

    वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में उन्होंने सरकार की पहल का आभार जताया और कहा कि उनकी तीन मुख्य मांगें हैं। पहली यह कि पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। दूसरी मांग जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा हो। तीसरी मांग है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार किया जाए।

    वांगचुक ने अनशन तोड़ने की शर्त भी रखी। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई 2026 को हुआ ‘चलो संसद’ मार्च पुलिस की कार्रवाई के बावजूद शांतिपूर्ण रहा। प्रदर्शनकारियों पर कोई कानूनी केस या उत्पीड़न जैसी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, इस आश्वासन के बाद वे अनशन खत्म कर देंगे।

    मेदांता ने जारी किया हेल्थ बुलेटिन

    मेदांता अस्पताल प्रबंधन ने बुधवार शाम हेल्थ बुलेटिन जारी किया। इसमें बताया गया कि वांगचुक को आईसीयू में रखा गया है।
    उनका इलाज मल्टी-डिसिप्लिनरी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही है। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है और वे पूरी तरह होश में हैं। उनका हर इलाज उनकी सहमति से किया जा रहा है।

  • धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, छात्रों पर कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री माफी मांगें : राहुल गांधी

    धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, छात्रों पर कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री माफी मांगें : राहुल गांधी


    नई दिल्ली।
    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने, पेपर लीक मामलों पर जवाबदेही तय न करने और छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 152 से अधिक प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, जिससे 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों पर बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से छात्रों से माफी की मांग की।

    राहुल गांधी ने यहां कांग्रेस नए मुख्यालय इंदिरा भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में 20 जुलाई को छात्रों के ‘संसद चलो’ मार्च और जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े वीडियो और प्रस्तुति दिखाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस और सुरक्षाबलों ने बर्बर कार्रवाई की। छात्रों को पीटा गया, घसीटा गया और उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय दमन का रास्ता अपनाया गया।

    राहुल गांधी ने कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और सरकार छात्रों की समस्याओं के प्रति बिल्कुल संवेदनशील नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक, परीक्षाओं में अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी ने करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा दिया है। इसके बावजूद किसी भी बड़े मामले में दोषियों को सजा नहीं मिली।

    राहुल गांधी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में 152 से अधिक प्रश्नपत्र लीक हुए हैं। इन घटनाओं का सीधा असर 7.5 करोड़ छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में भी अब तक किसी को प्रभावी सजा नहीं मिली और सरकार लगातार जवाबदेही से बच रही है।

    उन्होंने कहा कि देश के परिवार अपने बच्चों की शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं पर भारी आर्थिक बोझ उठा रहे हैं। राहुल गांधी के अनुसार, भारत सरकार का वार्षिक शिक्षा बजट लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये है, जबकि भारतीय परिवार केवल नीट परीक्षा की तैयारी और उससे जुड़े खर्चों पर लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में विफल रही है।

    राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया गया है। शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं ने युवाओं का भरोसा तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि देश के छात्रों को न्याय दिलाने के लिए धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना चाहिए।

    राहुल गांधी ने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों पर बल प्रयोग और कथित बर्बरता के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

    राहुल गांधी ने 20 और 21 जुलाई को छात्रों के समर्थन में हुए विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र केवल निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली और अपने भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। सरकार उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च के दौरान जब पुलिस उन्हें हटाने आई तो उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। उन्हें घसीटा गया, जिससे उनके मुंह से खून निकला और उन्हें चोटें आईं। व्यक्तिगत चोट का मुद्दा महत्वपूर्ण नहीं है लेकिन छात्रों के भविष्य का सवाल सबसे बड़ा मुद्दा है।

    राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी छात्रों के मुद्दों को देशभर में उठाती रहेगी और पेपर लीक, भर्ती घोटालों, शिक्षा की बढ़ती लागत तथा युवाओं की बेरोजगारी जैसे विषयों पर सरकार को जवाबदेह बनाने का अभियान जारी रखेगी।

  • जंतर-मंतर पर देर रात बवाल: प्रदर्शनकारियों और पुलिस में झड़प, हालात काबू करने के लिए छोड़े गए आंसू गैस के गोले

    जंतर-मंतर पर देर रात बवाल: प्रदर्शनकारियों और पुलिस में झड़प, हालात काबू करने के लिए छोड़े गए आंसू गैस के गोले


    नई दिल्ली।
    राजधानी के जंतर-मंतर पर देर रात प्रदर्शन के दौरान हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प के बाद स्थिति बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को मोर्चा संभालना पड़ा। हालात नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस बैरिकेडिंग पार करने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जो देखते ही देखते झड़प में बदल गई।

    पुलिस पर डंडे छीनने की कोशिश का आरोप

    स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस और आरएएफ के जवान मौके पर पहुंच गए। पुलिस का आरोप है कि उग्र प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों से डंडे छीनने का प्रयास किया, जिसके बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए।

    आंसू गैस छोड़कर भीड़ को हटाया गया

    बढ़ते तनाव को देखते हुए आरएएफ ने आंसू गैस के गोले दागकर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल की मदद से इलाके में स्थिति को नियंत्रित किया गया।

    एसीपी घायल, सुरक्षा बढ़ाई गई

    झड़प के दौरान एक एसीपी के घायल होने की जानकारी सामने आई है। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

    फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

  • कार्य परिषद का सख्त फैसला, उत्पीड़न मामले में डॉ. नईम पर गिरी गाज; प्रशासनिक अधिकारी की वेतनवृद्धि भी रोकी गई

    कार्य परिषद का सख्त फैसला, उत्पीड़न मामले में डॉ. नईम पर गिरी गाज; प्रशासनिक अधिकारी की वेतनवृद्धि भी रोकी गई


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शोधार्थियों के उत्पीड़न के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने जांच रिपोर्ट पर विचार करने के बाद समाज कार्य विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद नईम की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को मंजूरी दे दी। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार जांच में लगाए गए आरोप सही पाए गए, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने के मामले में एक प्रशासनिक अधिकारी के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

    विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आयोजित कार्य परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान महिला और पुरुष शोधार्थियों द्वारा डॉ. मोहम्मद नईम के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित जांच रिपोर्ट परिषद के समक्ष प्रस्तुत की गई। इसके अलावा शिक्षक आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़े मामले की रिपोर्ट पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    कार्य परिषद ने उपलब्ध तथ्यों और जांच समिति की रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद मामले को गंभीर मानते हुए डॉ. नईम की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को स्वीकृति प्रदान की। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि संस्थान में सुरक्षित, पारदर्शी और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या उत्पीड़न के मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    बैठक में विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से संबंधित एक अन्य जांच रिपोर्ट भी रखी गई। इस मामले में प्रशासनिक अधिकारी पुष्पा गौतम के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनकी एक वर्ष की वेतनवृद्धि पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। परिषद ने माना कि संस्थान की गरिमा और प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाना जरूरी है।

    कार्य परिषद की बैठक में आगामी दीक्षांत समारोह से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। परिषद ने 13 अगस्त को आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में प्रसिद्ध चित्रकार दिनेश सोनी को मानद डी.लिट. उपाधि प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए कुलाधिपति के पास भेजा जाएगा।

    विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी निर्णय निर्धारित प्रक्रिया और जांच रिपोर्ट के आधार पर लिए गए हैं। कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने बताया कि कार्य परिषद के समक्ष प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में डॉ. मोहम्मद नईम के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर विचार करने के बाद उनकी सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को स्वीकार किया गया। वहीं प्रशासनिक अधिकारी के मामले में भी जांच रिपोर्ट के आधार पर वेतनवृद्धि रोकने का निर्णय लिया गया।

    विश्वविद्यालय का कहना है कि संस्थान में छात्रों और शोधार्थियों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन ने संकेत दिया कि भविष्य में भी किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच कर नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। इस निर्णय को विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासन, जवाबदेही और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।