Category: National

  • राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर शेयर की खास रील, अब राजनीतिक भविष्य को लेकर लग रही ये नई अटकलें

    राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर शेयर की खास रील, अब राजनीतिक भविष्य को लेकर लग रही ये नई अटकलें


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और पार्टी के बीच चल रहे विवाद के बीच अब सबकी निगाहें उनके अगले कदम पर लगी हैं। हाल ही में चड्ढा ने सोशल मीडिया पर शेयर की गई एक रील ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर नई अटकलों को जन्म दिया है।

    सोशल मीडिया पर की रील शेयर


    चड्ढा ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक रील शेयर की जिसे seedhathok नाम के यूजर रिहान ने बनाया था। रील में सुझाव दिया गया कि चड्ढा को अपनी खुद की पार्टी बनानी चाहिए जिससे उन्हें व्यापक जनसमर्थन मिल सकता है। वीडियो में सीधे चड्ढा को संबोधित करते हुए कहा गया कि जेन-जी पार्टी या कोई अन्य उपयुक्त नाम से नई पार्टी शुरू करना युवाओं का समर्थन पाने का सही तरीका होगा।

    दूसरी पार्टी में शामिल होने का खतरा

    वीडियो में यह भी कहा गया कि अगर चड्ढा किसी अन्य पार्टी में शामिल होते हैं तो उन्हें वर्तमान समर्थन नहीं मिलेगा और जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि चड्ढा ने रील शेयर की लेकिन अभी तक उन्होंने आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की कि वे क्या कदम उठाएंगे।

    AAP ने उठाए कठोर कदम
    करीब एक हफ्ते पहले AAP ने चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया और उनकी जगह अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त किया। इसके साथ ही उन्हें संसद में पार्टी के कोटे से बोलने की अनुमति भी नहीं मिली।

    पार्टी के आरोपों की लंबी सूची

    AAP ने चड्ढा पर कई आरोप लगाए हैं:- बीजेपी के प्रति नरम रुख: पार्टी का कहना है कि चड्ढा ने संसद में पार्टी का समय हवाई अड्डों पर समोसे की कीमत जैसे मामूली मुद्दों के लिए इस्तेमाल किया।
    मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग: चड्ढा ने महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया।
    अतिशी के सवाल: AAP नेता अतिशी ने चड्ढा से पूछा कि वे पीएम नरेंद्र मोदी या लोकतंत्र पर हो रहे सवालों पर बोलने में क्यों डरते हैं।
    केजरीवाल की गिरफ्तारी पर गैरमौजूदगी: ED द्वारा अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान चड्ढा की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए गए।

    चड्ढा का जवाब और किताब के जरिए संदेश

    चड्ढा ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी उन्हें चुप कर रही है। उन्होंने बताया कि संसद में जब भी उन्हें बोलने का मौका मिलता है वे जनता के मुद्दों को उठाते हैं। साथ ही सोमवार को उन्होंने अमेरिकी लेखक रॉबर्ट ग्रीन की किताब The 48 Laws of Power पढ़ते हुए अपनी एक तस्वीर साझा की। उन्होंने लिखा किसी ने मुझे इस हफ्ते एक किताब गिफ्ट की मैंने चैप्टर 1 पलटा नेवर आउटशाइन द मास्टर’। कुछ किताबें उसी समय पर आती हैं जब उन्हें आना होता है।

  • विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की पूर्ण भागीदारी को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर..

    विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की पूर्ण भागीदारी को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर..


    नई दिल्ली:विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए मातृशक्ति की भागीदारी को अनिवार्य बताते हुए Narendra Modi ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाना है तो महिलाओं को उनके पूर्ण सामर्थ के साथ राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में शामिल करना होगा।

    अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने माताओं, बहनों और बेटियों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि भारत ने आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लिया है। उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति तब तक अधूरी रहती है जब तक उसकी आधी आबादी को समान अवसर और प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ही इस लक्ष्य को वास्तविक रूप दे सकती है।

    प्रधानमंत्री ने हाल ही में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए बताया कि यह विधेयक देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक समावेशी और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने इस विषय पर सहमति दिखाई है और व्यापक स्तर पर सकारात्मक माहौल बनता हुआ दिखाई दे रहा है। उनका मानना है कि वर्ष 2029 के चुनावों तक लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जिससे नीति निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।

    उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ समय से विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ इस मुद्दे पर निरंतर संवाद जारी है और अधिकांश दलों ने इसका समर्थन किया है। इस सहयोगात्मक दृष्टिकोण को लोकतंत्र की मजबूती का संकेत बताते हुए उन्होंने कहा कि जब सभी दल एकजुट होकर किसी महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन के लिए आगे आते हैं तो उसका प्रभाव व्यापक और स्थायी होता है।

    देशवासियों से अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विषय पर जनजागरूकता बढ़ाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर विचार करें, चर्चा करें और समाज में सकारात्मक माहौल बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने राजनीतिक दलों को भी प्रेरित करने की बात कही ताकि वे पूरे उत्साह के साथ संसद में इस विधेयक को पारित कराने की दिशा में आगे बढ़ें।

    प्रधानमंत्री ने अपने विचारों में यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए विधायी संस्थाओं में आरक्षण केवल एक नीति नहीं, बल्कि समय की आवश्यकता है। उनका मानना है कि इससे लोकतंत्र अधिक जीवंत, सहभागी और संतुलित बनेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस दिशा में किसी भी प्रकार की देरी देश के समग्र विकास के लिए बाधक सिद्ध हो सकती है।

  • हिन्दी का साउथ में भी दबदबा…. कर्नाटक में 93% छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में किया चयन

    हिन्दी का साउथ में भी दबदबा…. कर्नाटक में 93% छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में किया चयन


    नई दिल्ली।
    हिंदी भाषा (Hindi Language) को लेकर अकसर ही देश में एक वर्ग नॉर्थ बनाम साउथ की डिबेट (North vs. South debate) चलाता रहा है। तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (Chief Minister MK Stalin) तो कई बार केंद्र सरकार पर आरोप लगा चुके हैं कि हिंदी थोपने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन यह भी सच है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंदी स्वाभाविक रूप से बड़ी आबादी द्वारा ना सिर्फ स्वीकार की जा रही है बल्कि उसके महत्व को समझते हुए सीखने के प्रयास भी हो रहे हैं। इसका उदाहरण कर्नाटक स्टेट बोर्ड के नतीजों ने भी प्रस्तुत किया है। कर्नाटक स्कूल बोर्ड के छात्रों में से कुल 93 फीसदी ऐसे रहे हैं, जिन्होंने तीसरी भाषा के रूप में हिंदी का चयन किया।

    नई शिक्षा नीति के तहत त्रिभाषा फॉर्मूला लागू किया है। इसके अनुसार छात्र अंग्रेजी सीखेंगे। इसके अलावा एक स्थानीय भाषा वे अपने अनुसार चुन सकते हैं। फिर वे तीसरी भाषा के तौर पर अन्य किसी भी भाषा को स्वीकार कर सकते हैं। कर्नाटक में 93 फीसदी छात्रों ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में चुना है। कर्नाटक बोर्ड में कुल 8.1 लाख छात्रों ने तीसरी भाषा को चुना है और इनमें से 7.5 लाख लोगों ने हिंदी का ही विकल्प पसंद किया है। कोंकणी, मराठी, उर्दू, अरबी जैसी भाषाओं को भी कुछ छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में चुना है। इस आंकड़े ने हिंदी भाषा की लोकप्रियता को स्थापित किया है।

    हिंदी को लेकर अमित शाह ने जब कहा था कि यह देश की संपर्क भाषा है और इसका विस्तार जरूरी है तो तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने विरोध किया था। उनका कहना था कि हिंदी को थोपा जा रहा है, जबकि देश में तमिल सबसे पुरानी भाषा है। तमिलनाडु के लोगों का मानना है कि उनकी भाषा दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है।


    त्रिभाषा नीति से विरोध खत्म करने की कोशिश, सबको मिलेगा महत्व

    त्रिभाषा नीति के जरिए सरकार ने इसी विरोधाभास को खत्म करने का प्रयास किया है। इसके अलावा भाषा के चलते पैदा होने वाले विवादों में भी इससे कमी आएगी। इस नीति के तहत सरकार ने हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही स्थानीय भाषाओं को भी प्रोत्साहित करने का प्रयास किया है। ऐसे में यदि कर्नाटक में 93 फीसदी छात्रों ने हिंदी भाषा को तीसरे विकल्प के तौर पर चुना तो यह अच्छी खबर है। पहले जब होम मिनिस्टर अमित शाह ने हिंदी भाषा को लेकर बयान दिया था तो एमके स्टालिन ने आपत्ति जताई थी। हालांकि कुछ सर्वे दावा करते रहे हैं कि तमिलनाडु में भी हिंदी का तेजी से प्रसार हो रहा है।

  • भारत-बांग्लादेश वार्ता में उठी शेख हसीना की वापसी की मांग, भारत ने नहीं दिया कोई जवाब

    भारत-बांग्लादेश वार्ता में उठी शेख हसीना की वापसी की मांग, भारत ने नहीं दिया कोई जवाब

    नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले साल बढ़े तनाव के बाद अब दोनों देश संबंधों को पटरी पर लाने की दिशा में आगे बढ़ते दिख रहे हैं। इसी कड़ी में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान अपने पहले आधिकारिक दौरे पर भारत पहुंचे और उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की।

    ढाका की ओर से जारी बयान के मुताबिक, रहमान ने बैठक के दौरान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई। हालांकि, इस पर भारत की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    बांग्लादेशी पक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में सरकार ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति पर चलते हुए पारस्परिक विश्वास और सम्मान के आधार पर विदेश नीति संचालित करेगी। साथ ही छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी के हत्यारोपियों को पकड़ने में सहयोग के लिए भारत का आभार भी जताया गया।

    हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में शेख हसीना या हादी से जुड़े मुद्दों का कोई जिक्र नहीं किया गया। बांग्लादेशी बयान में यह जरूर कहा गया कि दोनों देश प्रत्यर्पण संधि के तहत कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे।

    गौरतलब है कि अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा और वे तब से नई दिल्ली में रह रही हैं। बांग्लादेश में उनके और पूर्व गृह मंत्री के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा मृत्युदंड का फैसला भी सुनाया जा चुका है। इससे पहले भी मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी थी, जिसे भारत ने स्वीकार नहीं किया।

    अब दोनों देशों ने इस मुद्दे को द्विपक्षीय संबंधों में बाधा न बनने देने पर सहमति जताई है। अधिकारियों के अनुसार, एस जयशंकर और खलीलुर रहमान के बीच बातचीत में यह बात सामने आई कि शेख हसीना का भारत में रहना संबंधों पर असर नहीं डालना चाहिए।

    तीन दिवसीय दौरे पर आए रहमान ने अजित डोभाल के अलावा पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी से भी मुलाकात की। बांग्लादेश में हालिया चुनावों के बाद यह नई सरकार के किसी वरिष्ठ नेता की पहली भारत यात्रा है।

    बैठक के बाद एस जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। वहीं भारत ने बांग्लादेश के साथ रचनात्मक सहयोग जारी रखने की इच्छा जताते हुए वीजा प्रक्रिया खासकर चिकित्सा और व्यावसायिक वीजा को और सरल बनाने का आश्वासन दिया।

  • अमरनाथ यात्राः 15 अप्रैल से शुरू होंगे रजिस्ट्रेशन…. पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिलेगा परमिट

    अमरनाथ यात्राः 15 अप्रैल से शुरू होंगे रजिस्ट्रेशन…. पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिलेगा परमिट


    जम्मू।
    अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) के लिए 15 अप्रैल से पंजीकरण (Registration) कराया जा सकेगा। श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (Shri Amarnathji Shrine Board) ने बुधवार को इसका एलान कर दिया। पंजीकरण देश भर के निर्धारित बैंक शाखाओं के माध्यम से होगा। यात्रा परमिट (Travel permit.) ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर जारी होगा। यात्रा की तारीख भी जल्द घोषित की जाएगी। देश भर की 554 बैंक शाखाओं में पंजीकरण होगा।

    पंजीकरण के दौरान प्रत्येक बैंक शाखा को प्रतिदिन, प्रति मार्ग एक निश्चित कोटा आवंटित किया गया है। 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों का पंजीकरण नहीं होगा। इसी तरह छह सप्ताह से अधिक की गर्भवती का भी पंजीकरण नहीं होगा।

    बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष यात्रा परमिट आधार-आधारित बायोमीट्रिक ई-केवाईसी प्रमाणीकरण के बाद सिस्टम से एनआईसी पोर्टल (https://jksasb.nic.in) पर जारी किया जाएगा। यदि प्रमाणीकरण में तकनीकी खराबी आती है तो बैंक शाखा मैनुअल फोटो और डेटा प्रविष्टि के माध्यम से पंजीकरण कर सकेगी।


    पंजीकरण के लिए आवश्यक जानकारियां

    – यात्रियों को पंजीकरण के लिए वैध अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जमा करना होगा। यह आठ अप्रैल या उसके बाद अधिकृत डॉक्टर/मेडिकल संस्थान की ओर से जारी किया गया हो। पंजीकरण शुल्क प्रति यात्रा परमिट 150 रुपये निर्धारित किया गया है।
    – यात्रा परमिट पर मार्ग (बालटाल या पहलगाम और यात्रा तिथि स्पष्ट रूप से अंकित होगी। बैंक शाखाओं में पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएंगे। शाखाओं के कर्मचारियों को यात्रियों के अग्रिम पंजीकरण के हर पहलू में प्रशिक्षित किया जाएगा।
    – यात्री सही मोबाइल और आधार नंबर का उपयोग करें। सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा कराएं।
    – यात्रियों को मौसम और ऊंचाई के अनुसार उचित स्वास्थ्य व सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रा की तारीख की घोषणा के साथ ही सभी आवश्यक दिशानिर्देश सार्वजनिक किए जाएंगे।

  • दिल्ली में बुधवार का दिन रहा अप्रैल का सबसे ठंडा दिन…. तोड़ा 11 साल का रिकॉर्ड

    दिल्ली में बुधवार का दिन रहा अप्रैल का सबसे ठंडा दिन…. तोड़ा 11 साल का रिकॉर्ड


    नई दिल्ली।
    दिल्लीवालों (Delhiites) के लिए बुधवार का दिन अप्रैल का सबसे ठंडा दिन (April Coldest day) रहा. तापमान में आई गिरावट ने 11 सालों का रिकॉर्ड तोड़ा. अप्रैल के महीने में बुधवार 11 सालों का सबसे ठंडा दिन रिकॉर्ड हुआ. कल सफदरजंग (Safdarjung) में अधिकतम तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 6.9 डिग्री कम है।

    इससे पहले अप्रैल में सबसे कम तापमान 23 अप्रैल, 2016 को 27.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. दिनभर बादलों की चादर, तेज हवाओं और हल्की, छिटपुट बारिश के कारण शहर में अप्रैल के मौसम के हिसाब से असामान्य ठंड महसूस हुई. इसी वजह से लोगों को गर्मी कम महसूस हुई और कई दिनों बाद वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ बनी रही।

    सफदरजंग मुख्य मौसम केंद्र के अनुसार, बुधवार सुबह 8:30 बजे तक पिछले 24 घंटे में 6.4 मिमी बारिश हुई, जो 4 अप्रैल, 2023 के बाद सबसे ज्यादा है. वहीं पालम में 0.6 मिमी, लोधी रोड में नाममात्र और सफदरजंग, रिज और आयानगर में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई।


    तापमान की बात करें तो

    – पालम में अधिकतम 27.2 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 8.3 डिग्री कम
    – लोधी रोड में 28.0 डिग्री, सामान्य से 6.0 डिग्री कम
    – रिज में 28.8 डिग्री, सामान्य से 6.3 डिग्री कम
    – आयानगर में 28.0 डिग्री, सामान्य से 6.9 डिग्री कम


    न्यूनतम तापमान भी सामान्य से कम रहा

    – सफदरजंग 16.8 डिग्री, सामान्य से 3.2 कम
    – पालम 15.5 डिग्री, सामान्य से 4.5 कम
    – लोधी रोड 16.2 डिग्री, सामान्य से 2.8 कम
    – रिज 15.3 डिग्री, सामान्य से 4.8 कम
    – आयानगर 16.4 डिग्री, सामान्य से 2.5 कम

    आईएमडी के वैज्ञानिक डॉ. अखिल श्रीवास्तव के अनुसार, यह ठंड मुख्य रूप से पश्चिमी विक्षोभ की वजह से हुई है. यह वर्तमान में उत्तरी पंजाब और जम्मू-कश्मीर के ऊपर सक्रिय है, जिससे उत्तर-पश्चिमी भारत में गरज और बारिश का दौर जारी है. उन्होंने कहा कि बुधवार के बाद से तापमान में वृद्धि होने की संभावना है. देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में अधिकतम तापमान में 6–8 डिग्री और पश्चिमी हिमालय में 8–10 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है. आज से आसमान साफ रहने की उम्मीद है।

    मौसम विभाग के अनुसार, 9 अप्रैल को न्यूनतम तापमान 15.0 डिग्री और अधिकतम 31.0 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. तापमान धीरे-धीरे गर्मियों जैसी स्थिति में लौट आएगा और आसमान ज्यादातर साफ रहेगा।

    शहर में मौसम के अनुकूल होने के कारण प्रदूषण का स्तर भी कम रहा. वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 93 दर्ज किया गया, जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आता है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 0–50 AQI ‘अच्छा’, 51–100 ‘संतोषजनक’, 101–200 ‘मध्यम’, 201–300 ‘खराब’, 301–400 ‘बहुत खराब’ और 401–500 ‘गंभीर’ माना जाता है।

  • आरबीआई ने रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर रखा स्थिर, होम लोन ब्याज दरों में राहत की उम्मीद

    आरबीआई ने रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर रखा स्थिर, होम लोन ब्याज दरों में राहत की उम्मीद


    नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने के निर्णय से होम लोन ब्याज दरों में फिलहाल स्थिरता बनी रहने की उम्मीद जताई जा रही है। इस फैसले को रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे घर खरीदने वालों और डेवलपर्स दोनों को राहत मिल सकती है। मौद्रिक नीति में यह स्थिरता ऐसे समय आई है, जब वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियां अनिश्चित बनी हुई हैं।

    रियल एस्टेट क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में स्थिरता से होम लोन की लागत नियंत्रित रहेगी, जिससे घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों को वित्तीय दबाव से कुछ राहत मिलेगी। साथ ही डेवलपर्स को भी परियोजनाओं की लागत और मांग के बीच संतुलन बनाने का अवसर मिलेगा। निर्माण लागत में लगातार हो रही वृद्धि के बावजूद स्थिर ब्याज दरें बाजार को सहारा देने में मददगार साबित हो सकती हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्रीय बैंक का यह कदम बाजार में विश्वास बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है। ब्याज दरों में बार-बार उतार-चढ़ाव से जहां खरीदारों की योजनाएं प्रभावित होती हैं, वहीं स्थिर दरें उन्हें दीर्घकालिक निवेश के लिए प्रेरित करती हैं। इससे हाउसिंग सेक्टर में मांग बनी रहने की संभावना बढ़ जाती है, जो पूरे रियल एस्टेट इकोसिस्टम के लिए जरूरी है।

    हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में ब्याज दरों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मौजूदा स्थिति को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने फिलहाल प्रतीक्षा और निगरानी की रणनीति अपनाई है, लेकिन वैश्विक घटनाक्रम और महंगाई के दबाव के आधार पर आगे की नीतियों में बदलाव हो सकता है।

    इस बीच, रियल एस्टेट सेक्टर को सप्लाई चेन में बाधाओं और बढ़ती निर्माण लागत जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन परिस्थितियों का असर विशेष रूप से किफायती और मिड-इनकम हाउसिंग सेगमेंट पर पड़ सकता है, जहां मांग और लागत के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। इसके बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी ढांचे को देखते हुए मध्यम अवधि में इस क्षेत्र में स्थिरता और विकास की उम्मीद बनी हुई है।

    केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई दर 4.6 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान भी जताया है। यह संकेत देता है कि अर्थव्यवस्था में संतुलित विकास की संभावना है, जिससे रियल एस्टेट क्षेत्र को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है।
  • दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन, CSAS पोर्टल पर आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया जानें

    दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन, CSAS पोर्टल पर आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया जानें


    नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में एडमिशन 2026 की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। इस साल भी अंडरग्रेजुएट एडमिशन CUET UG स्कोर के आधार पर होगा। छात्र अपनी कॉलेज और कोर्स प्रेफरेंस CSAS (Common Seat Allocation System) पोर्टल के जरिए भरेंगे और इसी के आधार पर सीट अलॉटमेंट होगा।

    DU Admission 2026 की प्रक्रिया कब शुरू होगी?

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, DU में UG एडमिशन प्रक्रिया मई के तीसरे हफ्ते से शुरू हो सकती है। इसके साथ ही CSAS पोर्टल भी एक्टिव कर दिया जाएगा। छात्र CUET रिजल्ट आने के बाद इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे।

    CSAS पोर्टल क्या है?

    CSAS पोर्टल DU का ऑनलाइन एडमिशन सिस्टम है। इसमें छात्र CUET देने के बाद रजिस्ट्रेशन करेंगे। यही प्लेटफॉर्म कॉलेज और कोर्स अलॉटमेंट के लिए इस्तेमाल होता है।

    रजिस्ट्रेशन स्टेप्स:

    DU की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन करें।
    पर्सनल डिटेल्स और शैक्षणिक जानकारी भरें।
    जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें।
    नया इंटरफेस खुलेगा, जिसमें कॉलेज और कोर्स प्रेफरेंस भरनी होगी।
    अंतिम चरण में फीस ऑनलाइन जमा करनी होगी।
    DU Admission प्रक्रिया के मुख्य चरण

    DU में एडमिशन तीन मुख्य चरणों में होता है:

    रजिस्ट्रेशन: छात्र CSAS पोर्टल पर लॉगिन कर रजिस्ट्रेशन करेंगे।
    प्रेफरेंस फिलिंग: छात्र अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स का चयन करेंगे।
    सीट अलॉटमेंट: CUET स्कोर, मेरिट और भरी गई प्रेफरेंस के आधार पर सीट अलॉट की जाएगी। सीट मिलने के बाद छात्रों को सीट स्वीकार कर फीस जमा करनी होगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी है।

    महत्वपूर्ण बातें
    CUET स्कोर इस साल भी एडमिशन का आधार रहेगा।
    CSAS पोर्टल पर सही समय पर रजिस्ट्रेशन और प्रेफरेंस भरना जरूरी है।
    फीस जमा करना भी पूरी तरह ऑनलाइन होगा।
    सीट अलॉटमेंट पूरी तरह मेरिट और प्रेफरेंस आधारित होगी।

  • आर्टेमिस II मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों ने सुरक्षित तरीके से देखा सूर्य ग्रहण, सोलर ग्लासेज का उपयोग अनिवार्य बताया

    आर्टेमिस II मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों ने सुरक्षित तरीके से देखा सूर्य ग्रहण, सोलर ग्लासेज का उपयोग अनिवार्य बताया


    नई दिल्ली। अंतरिक्ष से सूर्य ग्रहण देखना जितना रोमांचक अनुभव है, उतना ही संवेदनशील भी है, क्योंकि इस दौरान आंखों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। हाल ही में आर्टेमिस II मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने सूर्य ग्रहण का अद्भुत दृश्य देखा, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने सोलर व्यूइंग ग्लासेज के उपयोग की आवश्यकता को भी स्पष्ट रूप से सामने रखा। यह घटना एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि चाहे पृथ्वी हो या अंतरिक्ष, सूर्य को सीधे देखना हमेशा सावधानी की मांग करता है।

    इस मिशन में शामिल अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच, जेरेमी हैनसन, रीड वाइजमैन और विक्टर ग्लोवर ने ओरियन स्पेसक्राफ्ट से सूर्य ग्रहण का अवलोकन किया। उन्होंने विशेष सोलर एक्लिप्स ग्लासेज पहनकर ग्रहण के आंशिक चरणों को देखा, ताकि आंखों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। वैज्ञानिकों के अनुसार, केवल पूर्ण सूर्य ग्रहण के कुछ क्षणों को छोड़कर बाकी समय सूर्य को सीधे देखना आंखों के लिए अत्यंत खतरनाक होता है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि सूर्य की तेज रोशनी और हानिकारक विकिरण आंखों की रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं। यही कारण है कि सामान्य धूप के चश्मे सूर्य ग्रहण देखने के लिए सुरक्षित नहीं माने जाते। सोलर व्यूइंग ग्लासेज विशेष रूप से इस उद्देश्य के लिए बनाए जाते हैं और ये अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होते हैं, जो आंखों को सुरक्षित रखते हैं।

    आंशिक और वलयाकार सूर्य ग्रहण के दौरान सावधानी और भी आवश्यक हो जाती है, क्योंकि इन स्थितियों में सूर्य पूरी तरह ढका नहीं होता। ऐसे में पूरे समय सोलर ग्लासेज पहनना जरूरी होता है। यदि चश्मे में किसी प्रकार की खरोंच या क्षति हो, तो उनका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। बच्चों को ग्रहण दिखाते समय विशेष निगरानी की आवश्यकता होती है, ताकि वे बिना सुरक्षा के सूर्य की ओर न देखें।

    इसके अलावा, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि सोलर ग्लासेज पहनकर भी कैमरा, दूरबीन या टेलीस्कोप के माध्यम से सूर्य को नहीं देखना चाहिए। इन उपकरणों के जरिए सूर्य की किरणें और अधिक तीव्र होकर आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे उपकरणों के लिए अलग से विशेष सोलर फिल्टर का उपयोग करना अनिवार्य होता है।

    यदि सोलर व्यूइंग ग्लासेज उपलब्ध न हों, तो अप्रत्यक्ष तरीके से ग्रहण देखना एक सुरक्षित विकल्प है। पिनहोल प्रोजेक्टर जैसी सरल विधि के माध्यम से सूर्य की छवि को कागज या दीवार पर प्रोजेक्ट करके बिना किसी जोखिम के ग्रहण का आनंद लिया जा सकता है। इस तकनीक में सीधे सूर्य को देखने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे आंखों की सुरक्षा बनी रहती है।

  • पद अनुसार शैक्षणिक योग्यता और अनुभव आवश्यक, चयन शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर

    पद अनुसार शैक्षणिक योग्यता और अनुभव आवश्यक, चयन शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली ट्रस्ट (एनपीएस) में नौकरी करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए यह अवसर महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। नेशनल पेंशन सिस्टम ट्रस्ट ने सीनियर एग्जीक्यूटिव और अन्य विभिन्न 15 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 8 अप्रैल से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 29 अप्रैल निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि से पहले अपना आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।

    इस भर्ती प्रक्रिया में कुल 15 पद शामिल हैं। इन पदों में सीनियर एग्जीक्यूटिव (मार्केटिंग एवं संचार, आईटी एवं संचालन, नेटवर्क एवं संचालन, मानव संसाधन एवं प्रशासन, लीगल), सीनियर एनालिस्ट (पेंशन निधि अनुपालन और प्रदर्शन निगरानी, ट्रस्टी बैंक अनुपालन और योजना लेखापरीक्षा), एनालिस्ट (पेंशन निधि प्रदर्शन और अनुपालन), एग्जीक्यूटिव (निकास एवं निकासी, सोशल मीडिया एवं समन्वय, शिकायतें) आदि शामिल हैं। इन पदों के लिए उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता पद अनुसार ग्रेजुएशन या पोस्ट-ग्रेजुएशन, सीए (इंटर), एमबीए, पीजीडीएम, एमकॉम, लॉ, बीटेक, एमसीए, सीएफए या एफआरएम में होनी चाहिए। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्र में अनुभव होना अनिवार्य है।

    उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु पद अनुसार 23 से 25 वर्ष और अधिकतम आयु 35 से 40 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। चयन प्रक्रिया में शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शामिल है। चयनित उम्मीदवारों को पद अनुसार मासिक वेतन 70,000 से 1,50,000 रुपए तक प्रदान किया जाएगा।

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले एनपीएस ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और संबंधित पद के लिए जारी नोटिफिकेशन लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद एप्लीकेशन फॉर्म डाउनलोड कर उसका प्रिंट आउट निकालें। फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियों को सही ढंग से भरें और संबंधित सभी दस्तावेजों के साथ इसे आधिकारिक ईमेल आईडी पर भेज दें। इस प्रक्रिया के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।