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  • दिल्ली में IAS और दानिक्स अफसरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर, प्रशासनिक हलचल..

    दिल्ली में IAS और दानिक्स अफसरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर, प्रशासनिक हलचल..

    नई दिल्ली:दिल्ली में बुधवार देर रात बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल हुआ, जिसमें आईएएस और दानिक्स अफसरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर किए गए। राजधानी के विभिन्न विभागों में 20 से अधिक अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं, जिससे सरकारी गलियारों में हलचल मच गई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने इसे प्रशासनिक कामकाज में सुधार के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया है।

    इस फेरबदल में सीनियर अफसरों को प्रमुख जिम्मेदारी दी गई। डॉ. नरेंद्र कुमार को फाइनेंस कमिश्नर नियुक्त किया गया, जबकि प्रशांत गोयल को फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाया गया। उनके पास डीएफसी और डीएससीएससी के सीएमडी की जिम्मेदारी भी होगी। उत्तर पश्चिम जिले के डीएम सौम्या सौरभ को उद्योग विभाग में तैनात किया गया है। नवलेंद्र कुमार सिंह को जीएसटी एडिशनल कमिश्नर और सोनिका सिंह को डीडीए में कमिश्नर बनाया गया है।

    संसदीय कार्यों में हर्षित जैन को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि मंगल सैनी केंद्रीय कारागार के सुपरिटेंडेंट बनाए गए। ओम प्रकाश सैनी को डीएसएसएसबी में उप सचिव के पद पर तैनात किया गया। इसके अलावा मुकेश कुमार, आशीष शौकीन, मनोज कुमार, भूप सिंह और अश्विनी कुमार को नई तैनाती मिली। कुछ नियुक्तियों में बदलाव किया गया, जैसे कि अमित कुमार की नियुक्ति का आदेश बाद में रद्द कर दिया गया।

    इस व्यापक ट्रांसफर ने प्रशासनिक स्तर पर नई दिशा और जिम्मेदारियों का वितरण स्पष्ट किया। अधिकारियों का कहना है कि इससे विभागों की कार्यक्षमता और जवाबदेही में सुधार की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे बड़े पैमाने पर ट्रांसफर यह दर्शाते हैं कि सरकार अधिकारियों की क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर नई तैनाती कर रही है।

    इस कदम का असर न केवल विभागीय कामकाज पर पड़ेगा, बल्कि जनता तक सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद है। प्रशासनिक बदलाव के साथ, अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिलने से विभागों में नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आने की संभावना है। इस तरह के फेरबदल से सरकारी कामकाज और उत्तरदायित्व के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।

  • पुणे में ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले में वरिष्ठ डॉक्टर ने गंवाई 12 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी

    पुणे में ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले में वरिष्ठ डॉक्टर ने गंवाई 12 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी

    नई दिल्ली: पुणे में एक सनसनीखेज ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें 75 वर्षीय एक वरिष्ठ डॉक्टर ने 12 करोड़ रुपये से अधिक की अपनी जमा पूंजी गंवा दी। मामला जनवरी के आखिरी सप्ताह से शुरू हुआ, जब डॉक्टर को एक अननोन नंबर से मैसेज आया, जिसमें कई शेयरों की सूची और निवेश पर भारी मुनाफे का दावा किया गया। लिंक पर क्लिक करते ही डॉक्टर को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां धोखेबाजों ने खुद को एक ग्लोबल फाइनेंसियल मैनेजमेंट फर्म के सीनियर अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया।

    ग्रुप में आरोपी सदस्य निवेश के दौरान होने वाले मुनाफे की झूठी जानकारी साझा करते थे, जिससे डॉक्टर का भरोसा जीतना आसान हो गया। डॉक्टर को एक फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन पर भेजा गया, जिसका नाम एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी के नाम से मिलता जुलता था। इसके माध्यम से जालसाजों ने डॉक्टर से बैंक अकाउंट और अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्हें कई बैंक खातों में निवेश के नाम पर धन ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।

    पीड़ित डॉक्टर ने 7 मार्च से 18 मार्च के बीच लगभग 12.3 करोड़ रुपये फर्जी प्लेटफॉर्म पर निवेश किए। इस दौरान निवेश पर मनगढ़ंत मुनाफे का प्रदर्शन कर डॉक्टर को और धन निवेश करने के लिए मजबूर किया गया। जब डॉक्टर ने और पैसा लगाने से इनकार किया, तो आरोपियों ने उनके खिलाफ संपत्ति जब्त करने की धमकी दी। इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर की सभी जमा पूंजी को जालसाजों ने अपने नियंत्रण में ले लिया।

    घोटाले का यह तरीका अत्यंत सुनियोजित था, जिसमें व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी एप्लिकेशन का प्रयोग कर पीड़ित को लगातार प्रभावित किया गया। आरोपियों ने निवेश पर झूठे लाभ दिखाकर डॉक्टर को विश्वास में लिया और अपनी संपत्ति गंवाने के लिए मजबूर किया। यह मामला ऑनलाइन निवेश में बढ़ती धोखाधड़ी और साइबर अपराध की गंभीरता को उजागर करता है।

    पुलिस और साइबर क्राइम विभाग ने अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सावधानी और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करना आवश्यक है। डॉक्टर की उम्र और अनुभव को देखते हुए यह घटना निवेशकों के लिए चेतावनी का विषय है।

  • विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में चार ठिकानों पर छापेमारी, सोना-चांदी और फ्लैट जब्त..

    विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में चार ठिकानों पर छापेमारी, सोना-चांदी और फ्लैट जब्त..


    नई दिल्ली:विजयवाड़ा/आंध्र प्रदेश में सरकारी अफसर की करोड़ों की संपत्ति का खुलासा होते ही प्रशासनिक और कानून व्यवस्था के हलकों में हड़कंप मच गया है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने एंडोमेंट्स विभाग की सहायक आयुक्त कलिंगीरी शांति को आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में गिरफ्तार किया। जांच में उनके खिलाफ स्पष्ट जानकारी मिलने के बाद 7 अप्रैल को विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में एक साथ छापेमारी की गई, जिसमें बड़ी संख्या में चल और अचल संपत्तियां जब्त की गईं।

    एसीबी की टीम ने अभियुक्त के आवास, उनकी मां की गारमेंट शॉप, बहन का घर और विशाखापत्तनम में स्थित अन्य संपत्ति पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान अधिकारियों को कई अहम दस्तावेज और संपत्ति का ब्यौरा मिला। जांच में विशाखापत्तनम में एक रिहायशी फ्लैट, विजयवाड़ा में जी+2 इमारत, लगभग 770 ग्राम सोने के आभूषण, 3 किलो चांदी, 1.15 लाख रुपये नकद और करीब 3 लाख रुपये बैंक जमा में पाए गए। इसके अलावा एक वोल्क्सवैगन पोलो कार, मोटरसाइकिल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और अन्य कीमती सामान भी जब्त किए गए।

    कलिंगीरी शांति को जुलाई 2024 से मार्च 2026 तक निलंबित रखा गया था। उन्होंने वर्ष 2020 में आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती प्राप्त की थी और विशाखापत्तनम तथा विजयवाड़ा में अपनी सेवाएं दी थीं। छापेमारी के समय वह नई पोस्टिंग का इंतजार कर रही थीं।

    एसीबी ने कलिंगीरी शांति के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(b) के तहत मामला दर्ज किया है, जो लोक सेवकों के पास आय से अधिक संपत्ति पाए जाने से संबंधित है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विजयवाड़ा स्थित विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से 21 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में उन्हें जिला जेल में स्थानांतरित किया गया।

    अधिकारियों ने बताया कि जब्त संपत्तियों का मूल्यांकन और तलाशी अभी जारी है और जांच बढ़ने के साथ संपत्तियों की कुल कीमत में वृद्धि की संभावना है। यह कार्रवाई राज्य में भ्रष्टाचार पर कड़ी निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही के संकेत के रूप में देखी जा रही है।

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मिली जान से मारने की चेतावनी, कहा- "अतीक अहमद जैसा करेंगे हाल"

    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मिली जान से मारने की चेतावनी, कहा- "अतीक अहमद जैसा करेंगे हाल"

    वाराणसी। वाराणसी में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को जान से मारने की धमकी दी गई है। उनके मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि ज्योतिर्मठ के आधिकारिक नंबर पर धमकी भरे मैसेज और ऑडियो भेजे गए हैं, जिससे उनके अनुयायियों में हड़कंप मच गया।

    गौ रक्षा अभियान के कारण धमकी
    संजय पांडेय के अनुसार शंकराचार्य के नेतृत्व में ‘गौ माता-राष्ट्रमाता’ अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारत में गौ हत्या को रोकना है। इसी अभियान के तहत 3 मई से उत्तर प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में गविष्ठी यात्रा शुरू होगी, जिसमें शंकराचार्य लोगों को गौ रक्षा के लिए प्रेरित करेंगे और हर विस क्षेत्र में रामा गौ धाम निर्माण पर जोर देंगे।

    धमकी का सिलसिला
    पहली अप्रैल को ज्योतिर्मठ के नंबर पर लगातार मैसेज भेजकर धमकाया गया। नंबर ब्लॉक करने के बाद 6 अप्रैल को दो ऑडियो संदेश भेजे गए, जिनमें अतीक अहमद की तरह मारने की चेतावनी दी गई। मीडिया प्रभारी ने कहा कि इस मामले में जल्द ही विधिक कार्रवाई की जाएगी।

    इससे पहले श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट (मथुरा) के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी और उनके अधिवक्ता को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। पुलिस जांच में धमकी देने वाले मोबाइल नंबर को पाकिस्तान का पाया गया, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय साजिश माना गया।

    सुप्रीम कोर्ट में पैरवी के दौरान डराने की कोशिश
    यह मामला स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े कानूनी विवाद से जुड़ा है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने उच्च न्यायालय द्वारा शंकराचार्य को दी गई अग्रिम जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की थी। आशुतोष के अनुसार, 25 मार्च को कोर्ट में पैरवी शुरू होते ही उन्हें धमकाने का सिलसिला शुरू हो गया।

  • डॉक्टर पति ने पत्नी की हत्या के लिए बनाई थी शातिर योजना, कोर्ट में पेश हुए डिजिटल सबूत..

    डॉक्टर पति ने पत्नी की हत्या के लिए बनाई थी शातिर योजना, कोर्ट में पेश हुए डिजिटल सबूत..


    नई दिल्ली:बेंगलुरु से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें एक डॉक्टर ने अपनी पत्नी, जो स्किन स्पेशलिस्ट थीं, को बेहोशी का इंजेक्शन देकर कथित तौर पर हत्या कर दी। आरोपी पति ने अपने मेडिकल ज्ञान का इस्तेमाल कर पूरी योजना तैयार की थी और सोचा कि वह पकड़ा नहीं जाएगा। लेकिन छोटी सी गलती ने उसके सारे राज खोल दिए। अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका ठोस सबूतों को देखते हुए खारिज कर दी।

    मृतक डॉक्टर कृतिका रेड्डी की उम्र 29 वर्ष थी और उनकी मौत रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई। आरोपी पति महेंद्र रेड्डी ने शुरू में दावा किया कि उनकी पत्नी की अचानक मौत पुरानी बीमारियों के कारण हुई। हालांकि जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उसने ऑपरेशन थिएटर में इस्तेमाल होने वाली शक्तिशाली दवा प्रोपोफोल का ओवरडोज देकर अपनी पत्नी की जान ले ली।

    जांच अधिकारियों ने अदालत में बताया कि यह हत्या बेहद सोची-समझी और शातिर योजना के तहत की गई। आरोपी ने अपनी पत्नी को बेहोश करने और उसकी मौत तक पहुंचाने के लिए अपने मेडिकल ज्ञान का इस्तेमाल किया। पुलिस को महेंद्र के मैसेज भी मिले, जिसमें उसने इस हत्या पर पछतावा व्यक्त किया और अपनी गर्लफ्रेंड को मर्डर को छिपाने के निर्देश दिए। उसने संदेश में स्पष्ट किया कि अगर पुलिस उसकी और गर्लफ्रेंड की बातचीत के बारे में पूछे तो उन्हें सिर्फ दोस्त बताना, ताकि संबंध का खुलासा न हो।

    जांच के दौरान फोरेंसिक टीम ने आरोपी के कब्जे से 10 लाख से अधिक डिजिटल डेटा और मैसेज रिट्रीव किए। इसमें भुगतान एप और चैट रिकॉर्ड शामिल थे, जिनमें कई डिलीट किए गए संदेश भी बरामद हुए। इन डिजिटल सबूतों ने हत्या की गहन योजना और आरोपी के इरादों को स्पष्ट किया। महेंद्र को 14 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया।

    महेंद्र और कृतिका दोनों ही विक्टोरिया अस्पताल में कार्यरत थे। उनकी शादी 26 मई 2024 को हुई थी। शादी के एक साल से भी कम समय में, 23 अप्रैल 2025 को कृतिका अपने पिता के घर पर बेहोश पाई गईं। आरोपी पति ने ससुराल में उनके इलाज के बहाने इंजेक्शन देने का बहाना बनाया और परिवार को भरोसा दिलाया कि वह केवल उनकी देखभाल कर रहा है।

    कृतिका की बहन को अपने जीजा के हावभाव पर संदेह हुआ और उन्होंने गहन मेडिकल जांच की मांग की। फोरेंसिक रिपोर्ट में पाया गया कि उनके शरीर में प्रोपोफोल की मात्रा अधिक थी, जिससे उनकी मौत हुई। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया और महेंद्र को मणिपाल से गिरफ्तार किया।

    जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के परिवार का आपराधिक इतिहास रहा है। उसके भाई पर धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं और महेंद्र तथा एक अन्य भाई को धमकी देने के आरोप में पहले भी शामिल किया गया था। कृतिका के परिवार का आरोप है कि शादी के समय इन जानकारियों को छिपाया गया था।

    Keywords
    Doctor Murder, Proposfol Overdose, Bengaluru Crime, Forensic Evidence, Premeditated Killing

    संक्षिप्त विवरण
    बेंगलुरु में एक डॉक्टर ने अपनी पत्नी को प्रोपोफोल का ओवरडोज देकर हत्या कर दी। फोरेंसिक सबूत और डिजिटल मैसेज से हत्या की योजना उजागर हुई।

  • अतीक कांड जैसी घटना का हवाला देते हुए जान से मारने की चेतावनी दी गई..

    अतीक कांड जैसी घटना का हवाला देते हुए जान से मारने की चेतावनी दी गई..


    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को जान से मारने की गंभीर धमकियां मिलने से धार्मिक और सुरक्षा हलकों में तनाव बढ़ गया है। ज्योतिष्पीठ के प्रमुख को सीधे तौर पर अतीक अहमद कांड जैसा खतरनाक अंजाम भुगतने की चेतावनी दी गई है। इन धमकियों ने न केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को सवालों के घेरे में ला दिया है, बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था को भी पूरी तरह सतर्क कर दिया है।

    घटना की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 को हुई जब शंकराचार्य के आधिकारिक मोबाइल नंबर पर लगातार धमकी भरे संदेश भेजे गए। इन संदेशों में अपशब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें माफिया अतीक अहमद के समान परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई। नंबर ब्लॉक करने के बावजूद आरोपी ने 6 अप्रैल को दो वॉइस मैसेज भेजे, जिनमें हिंसक लहजे में उनकी हत्या की धमकी दी गई। पहला संदेश दोपहर 1:55 बजे और दूसरा 1:57 बजे प्राप्त हुआ। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी ने इसे गंभीर हमला करार देते हुए जल्द ही विधिक कार्रवाई और पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की बात कही।

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हाल ही में माघ मेले के दौरान प्रशासन के साथ विवाद में भी चर्चा में रहे। संगम स्नान के दौरान उनके काफिले और प्रशासन के बीच टकराव हुआ, जिसके बाद पदवी के उपयोग पर नोटिस जारी किया गया। इसके साथ ही आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा उनके आश्रमों में नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के आरोप लगाए गए, जिसके आधार पर POCSO एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हुई। हालांकि, उच्च न्यायालय ने शंकराचार्य को अग्रिम जमानत दे दी। समर्थकों का मानना है कि यह सब उनके ‘गौ माता-राष्ट्रमाता’ अभियान और हिंदू हितों की आवाज को दबाने की साजिश है।

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जीवन संघर्षपूर्ण और प्रेरक रहा है। उन्होंने वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की उपाधि प्राप्त की और छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे। 1994 में वे छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए और 2003 में दंड संन्यास की दीक्षा ली। राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा की शास्त्रीय विधि और सरकारी नीतियों पर उनके बेबाक बयानों के कारण वे अक्सर चर्चा में रहते हैं।

    इस विवाद में आशुतोष ब्रह्मचारी भी प्रमुख भूमिका में हैं, जो शंकराचार्य के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। हाल ही में उन्हें भी धमकी मिली, जो जांच में पाकिस्तान से संबंधित पाई गई। शंकराचार्य को दी गई धमकी में ‘अतीक कांड’ का हवाला है, जो 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की सार्वजनिक हत्या से जुड़ा था। उस समय भारी पुलिस सुरक्षा और लाइव कैमरों के सामने हमलावरों ने उन्हें गोलियों से भून दिया था।

  • मल्लिकार्जुन खरगे के विवादित बयान पर BJP ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया..

    मल्लिकार्जुन खरगे के विवादित बयान पर BJP ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया..


    नई दिल्ली:कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हालिया ‘सांप’ बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस बयान को कांग्रेस की हताशा और राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया। नबीन ने स्पष्ट किया कि खरगे के शब्द दरअसल गांधी परिवार के निर्देशों के तहत आ रहे हैं और वे रिमोट कंट्रोल की तरह चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बयान पूरी तरह से लोगों को सांप्रदायिक रूप से भड़काने और राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश है।

    नितिन नबीन ने सीधे तौर पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा मर्यादा लांघती रही है और जब भी इस तरह के विवादास्पद बयान दिए जाते हैं, जनता भाजपा को मजबूत समर्थन देती है। उन्होंने दावा किया कि पहले ये शब्द सीधे गांधी परिवार से आते थे और अब मल्लिकार्जुन खरगे के माध्यम से जनता तक पहुँच रहे हैं। नबीन ने कहा कि कांग्रेस के इस तरह के बयान इतिहास में हमेशा जनता के दृष्टिकोण को प्रभावित करने में असफल रहे हैं।

    भाजपा अध्यक्ष ने पश्चिम बंगाल और केरल की आगामी विधानसभा चुनावों पर भी प्रकाश डाला। बंगाल में भाजपा के वोट शेयर में लगातार वृद्धि हुई है और पार्टी इस बार राज्य में सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। केरल में उन्होंने एलडीएफ और यूडीएफ के बीच ‘मैच फिक्सिंग’ का आरोप लगाया और कहा कि जनता इस फिक्सिंग से तंग आ चुकी है। नबीन ने कहा कि भाजपा का वोट बैंक लगातार बढ़ रहा है और लोग पार्टी को एक सशक्त विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

    राहुल गांधी द्वारा बीजेपी और एलडीएफ के बीच ‘सेटिंग’ के आरोपों पर नबीन ने पलटवार किया। उन्होंने राहुल गांधी को कमजोर ज्ञान वाला नेता करार देते हुए सवाल उठाया कि अगर सेटिंग होती, तो पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में कांग्रेस और कम्युनिस्ट गठबंधन क्यों हैं। उन्होंने सबरीमाला मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा और पूछा कि क्यों इस संवेदनशील विषय पर राहुल गांधी चुप्पी साध लेते हैं। नबीन ने स्पष्ट किया कि भाजपा का लक्ष्य ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ है और पार्टी देश में कम्युनिस्ट सिस्टम को पूरी तरह उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध है।

    असम चुनाव को लेकर भी भाजपा अध्यक्ष ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह निराश और हताश स्थिति में है, जबकि भाजपा पिछले प्रदर्शन से भी बेहतर परिणाम लाने के लिए तैयार है। दक्षिण भारत में सुपरस्टार और टीवीके प्रमुख विजय की राजनीति में एंट्री पर नबीन ने कहा कि राजनीति में पूर्ण समय और समर्पण जरूरी है, पार्ट-टाइम से कोई काम नहीं चलता। उन्होंने तमिलनाडु में भाजपा के AIADMK के साथ गठबंधन का उल्लेख करते हुए पार्टी की रणनीति का स्पष्ट संकेत दिया।

    नबीन ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर शब्दों की मर्यादा के साथ कड़ा रुख अपनाना भाजपा का कर्तव्य है और पार्टी जनता के विश्वास और समर्थन को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसकी रणनीतियों और बयानबाजी का लक्ष्य केवल भ्रम और विवाद फैलाना है, जबकि जनता भाजपा को एक सशक्त विकल्प के रूप में देख रही है।

  • नीतीश कुमार का दिल्ली रवाना होना और राज्यसभा सदस्य के रूप में नई पारी

    नीतीश कुमार का दिल्ली रवाना होना और राज्यसभा सदस्य के रूप में नई पारी


    नई दिल्ली:पटना /बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। करीब दो दशकों तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज रहे नीतीश कुमार अब राज्य की बागडोर छोड़ दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। सुशासन और विकास के लिए पहचाने जाने वाले नीतीश कुमार अब केंद्र में नई भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। उनका यह कदम न केवल बिहार बल्कि देश की राजनीति में भी महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।

    नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में अपनी नई पारी शुरू करेंगे। वह दिल्ली पहुंच चुके हैं और 10 अप्रैल को उच्च सदन में शपथ लेंगे। इसके बाद 11 अप्रैल को पटना लौटने की संभावना है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 14 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद 15 अप्रैल को नई सरकार का गठन और शपथ ग्रहण होने की संभावना प्रबल है।

    राज्य में सत्ता समीकरण अब पूरी तरह बदलने वाला है। जेडीयू ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि बिहार में अब नेतृत्व की भूमिका भारतीय जनता पार्टी के हाथ में होगी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने स्वीकार किया है कि राज्य की सत्ता अब भाजपा के प्रभुत्व में होगी। नीतीश कुमार के इस निर्णय के बाद राज्य में दो दशक तक उनके इर्द-गिर्द घूमने वाला सत्ता केंद्र बदलने वाला है।

    बिहार के नए मुख्यमंत्री के लिए कई नाम चर्चा में हैं। सूत्रों के अनुसार वर्तमान उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी इस रेस में सबसे आगे हैं। उनके नाम के पीछे जातीय समीकरण और राज्य के बड़े वोट बैंक को साधने की रणनीति काम कर रही है। अन्य वरिष्ठ नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं, लेकिन अंतिम निर्णय 10 अप्रैल को दिल्ली में प्रस्तावित केंद्रीय बैठक में तय हो सकता है।

    दिल्ली में प्रस्तावित बैठक में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की मौजूदगी संभव है। इस बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर के साथ ही नई सरकार के मंत्रिमंडल के स्वरूप पर भी रणनीति तय की जाएगी। इसके बाद राज्य में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज होगी और नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 14 या 15 अप्रैल को आयोजित होने की संभावना है।

    भव्य शपथ ग्रहण समारोह में केंद्र और राज्य के कई दिग्गज नेताओं की उपस्थिति की संभावना है। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री खुद भी इस ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बनने पटना आ सकते हैं। नीतीश कुमार के दिल्ली जाने और राज्य में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया ने बिहार की राजनीति को एक नए अध्याय की ओर धकेल दिया है।

  • न्यूनतम 20 वर्ष और अधिकतम 37 वर्ष आयु वाले योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं

    न्यूनतम 20 वर्ष और अधिकतम 37 वर्ष आयु वाले योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं


    नई दिल्ली/गांधीनगर:गुजरात लोक सेवा आयोग ने अकाउंट्स ऑफिसर (क्लास-2) के कुल 20 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 7 अप्रैल से शुरू हो गए हैं और इच्छुक उम्मीदवार 21 अप्रैल तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे योग्य अभ्यर्थी समय रहते अपने रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरकर आगामी अवसर का लाभ उठा सकते हैं।

    पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से कॉमर्स में स्नातक की डिग्री (बीकॉम), चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए), इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क्स अकाउंट्स (आईसीडब्ल्यूए)/कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट (सीएमए) या कंपनी सेक्रेटरी की योग्यता होनी चाहिए। इसके अलावा आयोग द्वारा निर्धारित अन्य पात्रता और कौशल की पूर्ति करना अनिवार्य है।

    उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम 37 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना 21 अप्रैल को आधार मानकर की जाएगी। आरक्षित श्रेणी से संबंधित अभ्यर्थियों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

    चयन प्रक्रिया में योग्य उम्मीदवारों का मूल्यांकन प्रीलिमिनरी परीक्षा, मेंस लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और अंतिम मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को मासिक 44,900 से 1,42,400 रुपए वेतन मिलेगा। प्रारंभिक परीक्षा पेपर-1 7 जून को और पेपर-2 28 जून को आयोजित होने की संभावना है, जबकि मेंस परीक्षा 13 से 16 दिसंबर के बीच आयोजित होने की उम्मीद है।

    आवेदन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को अपने वर्ग के अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा। सामान्य और अन्य श्रेणी के लिए शुल्क 100 रुपए है, जबकि एससी/एसटी/एसईबीसी/ईडब्ल्यूएस, पीडब्ल्यूडी और गुजरात के पूर्व सैनिकों को शुल्क में छूट प्रदान की गई है।

    ऑनलाइन आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होमपेज पर दिए गए सक्रिय एप्लीकेशन लिंक पर क्लिक करके रजिस्ट्रेशन करें। फॉर्म में आवश्यक जानकारियां दर्ज करें और संबंधित सभी डॉक्यूमेंट्स सही साइज में अपलोड करें। इसके बाद निर्धारित शुल्क का भुगतान कर फॉर्म को सबमिट कर दें। अंत में आवेदन पत्र का प्रिंट आउट सुरक्षित स्थान पर रख लें, जो भविष्य के संदर्भ में आवश्यक होगा।

  • केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान जारी, मतदाता कतारों में दिखाई दिए

    केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान जारी, मतदाता कतारों में दिखाई दिए


    नई दिल्ली/केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान गुरुवार सुबह 7 बजे से शुरू हो गया है। असम में 126 सीटों, केरल में 140 सीटों और पुडुचेरी में 30 सीटों के लिए मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। मतदान शाम 5 बजे तक चलेगा और नतीजों की घोषणा 4 मई को होगी। इन चुनावों में कुल 1,899 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं और राज्य-केन्द्रीय स्तर पर राजनीतिक संतुलन पर बड़ा असर डालने की संभावना है।

    केरल में इस बार 883 उम्मीदवार मैदान में हैं, यानी प्रति सीट औसतन छह से सात प्रत्याशी चुनावी मुकाबले में हैं। हालांकि, बागी और निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या के कारण कई निर्वाचन क्षेत्र बेहद प्रतिस्पर्धी बन गए हैं। कुल 27 लाख मतदाता राज्य के 30,000 से अधिक मतदान केंद्रों में फैले हुए हैं। मतदाता सुबह से ही अपने मतदान केंद्रों पर कतारों में खड़े नजर आए। केरल में तीन मुख्य गठबंधन- लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ), यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) के बीच कड़ा मुकाबला है। एलडीएफ लगातार पांचवीं बार सत्ता में बने रहने का लक्ष्य लेकर चुनाव लड़ रहा है, जबकि यूडीएफ और एनडीए उसे चुनौती दे रहे हैं।

    पुडुचेरी में कुल 9.50 लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनमें 24,919 प्रथम बार वोट डालने वाले शामिल हैं। यहां कुल 294 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश चार क्षेत्रों- पुडुचेरी, कराईकल, माहे और यानम से मिलकर बना है। वर्तमान में ‘ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस’ (AINRC) के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में है, जिसकी कमान मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के हाथों में है और भाजपा का समर्थन उसे प्राप्त है।

    असम विधानसभा चुनाव में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 59 महिलाएं शामिल हैं। लगभग 2.5 करोड़ पंजीकृत मतदाता इन चुनावों में भाग लेने के लिए योग्य हैं। राज्य ने मतदान प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए 31,490 मतदान केंद्र स्थापित किए हैं। असम में यह चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा अपनी सत्ता बरकरार रखने का प्रयास कर रही है, जबकि कांग्रेस सरकार में वापसी की कोशिश कर रही है। यह चुनाव 2023 में हुए परिसीमन के बाद पहला चुनाव है, जिससे क्षेत्रीय राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव की संभावना है।

    मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता इस बार भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। तीनों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं, जो लोकतंत्र में नागरिकों की मजबूत भागीदारी को दर्शाती हैं। इस चुनाव का परिणाम न केवल राज्य सरकारों के भविष्य को तय करेगा बल्कि देश के राजनीतिक संतुलन पर भी प्रभाव डालेगा।