Category: National

  • शहीद दिवस रैली से ठीक पहले कामरहाटी के कद्दावर विधायक ने छोड़ी पार्टी, भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगा कर दी खुली चुनौती

    शहीद दिवस रैली से ठीक पहले कामरहाटी के कद्दावर विधायक ने छोड़ी पार्टी, भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगा कर दी खुली चुनौती

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस में आगामी 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली से ठीक पहले एक बहुत बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सपरिवार समन जारी किए जाने के बाद कामरहाटी विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ और कद्दावर विधायक मदन मित्रा ने मंगलवार रात को ही पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व से दूरी बना ली और सुबह होते ही ममता बनर्जी के आधिकारिक कालीघाट गुट को औपचारिक रूप से अलविदा कह दिया। तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने के तुरंत बाद मदन मित्रा ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कई सनसनीखेज और गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे राज्य का सियासी पारा पूरी तरह से गरमा गया है।

    एक प्रमुख बांग्ला समाचार चैनल को दिए गए अपने विस्तृत साक्षात्कार में पूर्व तृणमूल नेता ने पार्टी के भीतर व्याप्त सांगठनिक ढांचे और नेतृत्व की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में खुले मंच से यह दावा किया कि वह इस तथ्य को पूरी तरह साबित कर सकते हैं कि वर्तमान सत्ता पक्ष की टीम में शामिल प्रत्येक दस में से आठ लोग भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। उन्होंने स्वयं को पूरी तरह से पाक-साफ बताते हुए नेतृत्व को खुली चुनौती दी कि यदि कोई भी व्यक्ति उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमाणित कर देता है, तो वह राजनीति छोड़ने के साथ-साथ अत्यंत कठोर कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने विपक्ष के खेमे में जाने और वहां मौजूद अन्य नेताओं के संदर्भ में पूछे गए सवालों पर स्पष्ट किया कि परिस्थितिजन्य राजनीति के तहत बड़े सांगठनिक बदलाव अब अवश्यंभावी हो चुके हैं।

    अभिषेक बनर्जी के पार्टी में तेजी से बढ़ते प्रभाव और उनके काम करने के तौर-तरीकों को मुख्य निशाना बनाते हुए मदन मित्रा ने भूतकाल की राजनीतिक घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अभिषेक बनर्जी ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था, तब उनके सामने संगठन में पार्थ चटर्जी, मुकुल रॉय और सुब्रत बख्शी जैसे अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ चेहरे मौजूद थे। आरोप के अनुसार, इन वरिष्ठ चेहरों को आगे रखकर पृष्ठभूमि से पूरी तरह से समानांतर सत्ता चलाने का प्रयास किया गया। मित्रा ने वर्तमान सांगठनिक गतिविधियों को बेहद नकारात्मक बताते हुए आरोप लगाया कि समकालीन राजनीति में इतनी जटिल और रणनीतिक प्रवृत्तियां किसी अन्य नेता में नहीं हैं और उनके सामने विरोधी राजनीतिक दल जैसे माकपा और भाजपा के नेता भी काफी पीछे नजर आते हैं।

    राजनीतिक हलकों में इस प्रकार के तीखे बयानों के बाद संभावित सुरक्षा खतरों और पार्टी की ओर से होने वाली किसी भी जवाबी कार्रवाई के डर के संबंध में पूछे गए प्रश्नों का मदन मित्रा ने बेहद बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब उनके मन से किसी भी प्रकार का राजनीतिक या प्रशासनिक भय पूरी तरह समाप्त हो चुका है और वह मानसिक रूप से पूरी तरह शांत हैं। उन्होंने आगे पलटवार करते हुए कहा कि उनके ऊपर किसी भी प्रकार का दबाव बनाने या संगठनात्मक हमला करने का साहस विरोधियों में नहीं है। अभिषेक बनर्जी के क्षेत्रीय जनाधार पर गंभीर सवालिया निशान लगाते हुए उन्होंने दावा किया कि उनके स्थानीय क्षेत्र के नागरिक भी उनके साथ खड़े नहीं हैं, जिसके संबंध में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंकड़ों का हवाला दिया गया है, जिसका आज तक संगठन की ओर से कोई आधिकारिक खंडन जारी नहीं किया जा सका है।

  • मंदिर समिति के अध्यक्ष के पूर्व निजी सहायक प्रमोद नौटियाल पर कसा शिकंजा, चोरी की रकम की बरामदगी के लिए रिमांड की तैयारी में जुटी पुलिस

    मंदिर समिति के अध्यक्ष के पूर्व निजी सहायक प्रमोद नौटियाल पर कसा शिकंजा, चोरी की रकम की बरामदगी के लिए रिमांड की तैयारी में जुटी पुलिस

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध और पवित्र बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की राशि की चोरी के मामले में चमोली पुलिस की विशेष जांच टीम ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस की ओर से आधिकारिक तौर पर दावा किया गया है कि गिरफ्तार किया गया मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल मंदिर परिसर में दान की गई धनराशि की गिनती के दौरान एक या दो बार नहीं, बल्कि कम से कम चार अलग-अलग अवसरों पर नकदी की हेराफेरी करते हुए सीसीटीवी कैमरों में कैद हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस की विंग लगातार तकनीकी साक्ष्यों को जुटाने में लगी हुई है। पुलिस अब अदालत के माध्यम से आरोपी की हिरासत प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है ताकि चोरी की गई वास्तविक धनराशि और अन्य कीमती सामान को बरामद किया जा सके।

    चमोली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, जांच दल ने अब तक मंदिर परिसर में हुई दान की गिनती से संबंधित कई महत्वपूर्ण तिथियों की सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया है। इनमें मुख्य रूप से जून और जुलाई महीने के शुरुआती हफ्तों की रिकॉर्डिंग शामिल हैं, जहां आरोपी प्रमोद नौटियाल कथित तौर पर बड़ी ही चालाकी से नकदी को छिपाकर अपने पास रखते हुए दिखाई दे रहा है। हालांकि, तकनीकी सीमाओं के कारण जांच टीम के सामने एक बड़ी चुनौती भी खड़ी हो गई है। वर्तमान यात्रा सीजन के दौरान अब तक दर्जनों बार दान की गिनती की जा चुकी है, परंतु सीसीटीवी कैमरों का डिजिटल स्टोरेज फुल हो जाने की वजह से पुरानी फुटेज स्वतः ही डिलीट हो चुकी हैं। ऐसी स्थिति में पुलिस को अंदेशा है कि आरोपी पूर्व में भी इस तरह की वारदातों को अंजाम देता आ रहा होगा, जिसके साक्ष्य मिट चुके हैं।

    गौरतलब है कि इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के शीर्ष नेतृत्व का बेहद करीबी और पूर्व निजी सहायक रह चुका है। वह लंबे समय से इस प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थान से जुड़ा हुआ था और उसके पास वीआईपी प्रोटोकॉल के साथ-साथ मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती की प्रत्यक्ष निगरानी करने की अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी थी। इस ऊंचे और जिम्मेदार पद पर रहने के कारण ही उसे नकदी की गिनती वाले संवेदनशील क्षेत्र में निर्बाध प्रवेश की अनुमति मिली हुई थी, जिसका उसने कथित तौर पर दुरुपयोग किया। आरोपी को पुलिस ने उसके देहरादून स्थित आवास से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद अदालत ने उसे चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

    पुलिस और विशेष जांच दल की अब तक की पूछताछ में आरोपी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और वह लगातार जांच अधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। वर्तमान में पुलिस के हाथ केवल एक शालिग्राम शिला लगी है, जबकि चोरी की गई नकद राशि अथवा सोने-चांदी के सिक्कों की बरामदगी अभी भी शेष है। इसी वजह से पुलिस अब उच्च न्यायालय अथवा सत्र अदालत के समक्ष दोबारा रिमांड का आवेदन प्रस्तुत करने की रणनीति बना रही है। इस प्रशासनिक विफलता और सुरक्षा में चूक के बाद मंदिर समिति ने भी कड़ा रुख अख्तियार करते हुए आंतरिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं, जिसके तहत दान प्रबंधन से जुड़े कुछ अन्य अधिकारियों को भी उनके पदों से हटा दिया गया है। वर्तमान में इस पूरे प्रकरण की समानांतर जांच पुलिस की एसआईटी, मंदिर समिति की आंतरिक जांच कमेटी और राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा अत्यंत गंभीरता से की जा रही है।

  • छत्रपति शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक स्थल पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास, वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर हटाया बोर्ड

    छत्रपति शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक स्थल पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास, वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर हटाया बोर्ड

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पुणे में स्थित ऐतिहासिक और प्रमुख पर्यटन स्थल सिंहगढ़ किले में सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित करने की एक गंभीर कोशिश का मामला सामने आया है। कुछ अज्ञात शरारती तत्वों द्वारा किले के मुख्य प्रवेश मार्ग के समीप एक बेहद संवेदनशील और विवादित पोस्टर लगा दिया गया, जिसमें एक विशेष समुदाय के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी। जैसे ही यह मामला स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के संज्ञान में आया, तुरंत त्वरित कार्रवाई की गई। राज्य के वन विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए उस विवादित पोस्टर को तत्काल प्रभाव से वहां से हटा दिया। हालांकि इस घटना के संबंध में पुलिस को अभी तक कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने स्वतः ही इस पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।

    वन विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना मंगलवार सुबह की है जब पार्किंग क्षेत्र के बिल्कुल समीप किले के प्रवेश द्वार पर लगे एक पुराने लोहे के बोर्ड पर यह छपा हुआ पोस्टर चिपका हुआ देखा गया। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुबह के समय गश्त के दौरान जैसे ही यह आपत्तिजनक पोस्टर दिखाई दिया, उसे तुरंत हटाकर जब्त कर लिया गया। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, किसी अज्ञात असामाजिक तत्व ने तड़के अंधेरे का फायदा उठाकर इस कृत्य को अंजाम दिया और प्रिंटेड पोस्टर को वहां चिपकाकर मौके से फरार हो गया। मराठी भाषा में लिखे गए इस पोस्टर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हो गईं, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक बात यह रही कि पोस्टर के निचले हिस्से में आधिकारिक भाषा का प्रयोग करते हुए आदेशानुसार शब्द लिखा गया था। वन विभाग के अधिकारियों ने अंदेशा व्यक्त किया है कि शरारती तत्वों ने जानबूझकर इस शब्द का इस्तेमाल किया ताकि आम जनता और वहां आने वाले पर्यटकों के बीच यह गलत संदेश और भ्रम फैलाया जा सके कि यह प्रतिबंध सरकार या किसी अधिकृत सरकारी विभाग द्वारा लागू किया गया है। वर्तमान में सिंहगढ़ किला और उसके आसपास का पूरा विस्तृत वन क्षेत्र राज्य के वन विभाग के प्रशासनिक और कानूनी अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है और यहां किसी भी प्रकार का प्रतिबंध पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

    ऐतिहासिक दृष्टिकोण से सिंहगढ़ का किला मध्यकालीन भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवशाली पहाड़ी किला माना जाता है। यह स्थल छत्रपति शिवाजी महाराज के समृद्ध इतिहास और प्रसिद्ध सिंहगढ़ की ऐतिहासिक लड़ाई का गवाह रहा है, जिसके कारण महाराष्ट्र के सबसे प्रमुख और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में इसकी गिनती होती है। पुणे ग्रामीण पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भले ही किसी संगठन ने इस मामले में शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन सामाजिक शांति और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली इस हरकत को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। किले की तरफ जाने वाले सभी पहाड़ी रास्तों, चेकपोस्ट और मुख्य प्रवेश मार्गों पर स्थापित सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की गहनता से जांच की जा रही है ताकि संदिग्धों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।

  • केन्द्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विन्डफॉल टैक्स घटाया…. डीजल और ATF पर बढ़ाया

    केन्द्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विन्डफॉल टैक्स घटाया…. डीजल और ATF पर बढ़ाया


    नई दिल्ली।
    मोदी सरकार (Modi Government) ने बुधवार को डीजल (Diesel) और विमान में इस्तेमाल होने वाले ईंधन (Aviation fuel) ATF के निर्यात पर लगने वाले विन्डफॉल टैक्स (Windfall tax) को बढ़ा दिया है, जबकि पेट्रोल के निर्यात पर यह टैक्स घटा दिया। यह फैसला 16 जुलाई यानी आज से लागू हो गया है। यह हर 15 दिन पर होने वाली समीक्षा का हिस्सा है।

    वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर विन्डफॉल टैक्स घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यह पहले 4 रुपये था। वहीं, डीजल पर यह शुल्क 8.5 रुपये से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। जबकि, विन्डफॉल टैक्स एटीएफ पर 7.5 रुपये से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। बता दें इससे आम जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।


    क्यों किया टैक्स में बदलाव

    यह टैक्स में बदलाव ऐसे समय आया है, जब वैश्विक तेल बाजार काफी अस्थिर है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत करीब 2% बढ़कर 84.73 डॉलर प्रति बैरल के एक महीने के हाई पर पहुंच गई। इसकी वजह थी कि अमेरिका ने ईरान पर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू कर दी, जिससे होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई पर खतरा पैदा हो गया। इस रास्ते दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई होती थी।

    इसके अलावा, नए भू-राजनीतिक तनाव और तेल टैंकरों पर हमलों ने भी कीमतों को सहारा दिया, हालांकि महंगाई की चिंताओं और वैश्विक मांग में सुस्ती ने बढ़त को सीमित रखा। रूस के कम निर्यात जैसी सप्लाई की दिक्कतों से डीजल की रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ा है, जिससे ऑयल मार्केट पर दबाव बना हुआ है।


    थोक खरीद पर रोक और बाद में राहत

    केंद्र सरकार ने 11 जून को औद्योगिक, कमर्शियल और संस्थागत उपभोक्ताओं को खुदरा ईंधन पंपों से पेट्रोल-डीजल खरीदने से रोक दिया था और उन्हें थोक सप्लाई चैनलों से खरीदारी करने का निर्देश दिया था। यह अस्थायी आदेश ईंधन की उचित उपलब्धता सुनिश्चित करने, जमाखोरी और अवैध हेर-फेर रोकने तथा आम उपभोक्ताओं के लिए निर्बाध सप्लाई बनाए रखने के लिए जारी किया गया था।

    सरकार ने कहा था कि ग्लोबल सप्लाई चेन और शिपिंग पर भू-राजनीतिक स्थिति का बुरा असर पड़ रहा है, जिससे आपूर्ति असंतुलन का खतरा बढ़ गया है। दरअसल, थोक खरीदारों और खुदरा दरों के बीच बड़े अंतर के कारण बड़े उपभोक्ता अपनी खरीदारी नियमित थोक चैनलों से हटाकर खुदरा पंपों पर कर रहे थे, जिससे खुदरा बिक्री असामान्य रूप से बढ़ गई थी। उस समय दिल्ली में रिटेल डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर था, जबकि थोक खरीदारों को 134.50 रुपये प्रति लीटर चुकाना पड़ रहा था।

    यह अंतर इसलिए पैदा हुआ, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों ने पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से आम उपभोक्ताओं को ईंधन की महंगाई से बचाने के लिए रिटले रेट को नियंत्रित रखा। जबकि, थोक खरीदार बाजार-आधारित दरों का भुगतान करते रहे। इस आदेश के तहत, खुदरा पंपों से डीजल बिक्री केवल वाहन ईंधन टैंक या पीईएसओ अप्रूब्ड कंटेनरों तक सीमित कर दी गई।

    वहीं डीजल पर 200 लीटर की खरीद सीमा तय कर दी गई। यह प्रतिबंध 90 दिनों तक प्रभावी रह सकता था और नए आदेश से बढ़ाया भी जा सकता था। उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सजा का प्रावधान था। बाद में, 29 जून को ये पाबंदियां हटा ली गईं और 1 जुलाई से वापस सामान्य व्यवस्था लागू हो गई।

  • IDBI Bank को 53,000 करोड़ में खरीदेगी कनाडा के उद्योगपति प्रेम वत्स की कंपनी

    IDBI Bank को 53,000 करोड़ में खरीदेगी कनाडा के उद्योगपति प्रेम वत्स की कंपनी


    नई दिल्ली।
    आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) को बेचने की सरकार की वर्षों पुरानी जद्दोजहद अपने मुकाम पर पहुंचती दिख रही है। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) में मंगलवार को हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद सरकार और कनाडा के उद्योगपति प्रेम वत्स (Canadian Industrialist Prem Watsa) की कंपनी फेयरफैक्स होल्डिंग्स (Fairfax Holdings) के बीच इस बहुप्रतीक्षित सौदे पर सहमति बन गई है। इसके तहत, कंपनी 53,000 करोड़ रुपये में बैंक में बहुलांश हिस्सा खरीदेगी। यह सौदा न सिर्फ विनिवेश के मोर्चे पर सरकार की मदद करेगा, बल्कि भारतीय बैंकिंग के इतिहास में एक नया अध्याय भी लिखेगा।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) की अगुवाई वाले मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह को इस संशोधित बोली से अवगत करा दिया गया है। जल्द ही इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना और अभिरुचि पत्र जारी किया जाएगा, जिसके बाद शेयर-परचेज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर होंगे। चूंकि, फेयरफैक्स एक प्रवर्तक के रूप में हिस्सेदारी ले रही है, इसलिए कंपनी को आम शेयरधारकों के लिए एक ओपन ऑफर भी लाना होगा।

    नई कीमत पर, सरकार बैंक में अपनी 45.48 फीसदी में से 30.48 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर करीब 26,620 करोड़ रुपये जुटा सकती है। इसके अलावा, बैंक में 50 फीसदी से थोड़ी कम हिस्सेदारी रखने वाला भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) भी अपना 30.24 फीसदी हिस्सा बेचने की योजना बना रहा है।


    टूटेगा पिछला रिकॉर्ड

    भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश साल 2025 में देखा गया था, जब एमिरेट्स एनबीडी ने 2.75 अरब डॉलर में आरबीएल बैंक की 60 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। आईडीबीआई बैंक का यह सौदा उस रिकॉर्ड को लगभग दोगुना कर देगा।

    फेयरफैक्स के लिए आगे कुछ बैंकिंग नियमों का पालन करना होगा। फेयरफैक्स की भारतीय इकाई के पास पहले से ही सीएसबी बैंक में 40 फीसदी हिस्सेदारी है। बैंकिंग नियमों के मुताबिक, प्रवर्तक को सीएसबी और आईडीबीआई बैंक का आपस में विलय करना होगा, जिसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक कुछ अतिरिक्त समय दे सकता है। इसके अलावा, इस सौदे को अंतिम रूप देने से पहले आरबीआई की फिट एंड प्रॉपर जांच और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की मंजूरी भी जरूरी होगी।


    बजटीय लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार

    सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में परिसंपत्ति मुद्रीकरण के जरिये 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसमें से अब तक वह सिर्फ 20,272 करोड़ रुपये ही जुटा सकी है। आईडीबीआई बैंक से मिलने वाले 26,620 करोड़ रुपये के बाद सरकार इस लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच जाएगी। इसके बाद सरकार कोल इंडिया और एलआईसी जैसी कंपनियों में भी अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच सकती है।


    ये होगी सबसे लंबी विनिवेश प्रक्रिया

    आईडीबीआई बैंक की निजीकरण प्रक्रिया भारतीय बैंकिंग इतिहास के सबसे लंबे समय तक खिंचने वाले विनिवेश मामलों में एक है। इसकी शुरुआत 21 जनवरी, 2019 में हुई थी।

  • तेलंगाना में बेटियों की घट रही संख्या, 1000 बेटों पर सिर्फ 787 बेटियां, 14 जिलों में हालात गंभीर

    तेलंगाना में बेटियों की घट रही संख्या, 1000 बेटों पर सिर्फ 787 बेटियां, 14 जिलों में हालात गंभीर


    नई दिल्ली। तेलंगाना में जन्म के समय लिंगानुपात को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राज्य में बेटियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। साल 2024 के सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) के आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना के 33 जिलों में से 14 जिलों में प्रति 1,000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या 900 से भी नीचे पहुंच गई है।

    इन आंकड़ों में सबसे खराब स्थिति नलगोंडा जिले की सामने आई है, जहां साल 2024 में प्रति 1,000 लड़कों पर सिर्फ 787 लड़कियों का जन्म दर्ज किया गया। यह तेलंगाना में सबसे कम और देश के चिंताजनक आंकड़ों में शामिल है।

    नलगोंडा में लंबे समय से बनी हुई है समस्या
    नलगोंडा जिले में जन्म के समय लिंगानुपात की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय रही है। कई प्रयासों के बावजूद यहां बेटियों की संख्या में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। नए आंकड़ों ने एक बार फिर प्रशासन और सामाजिक संगठनों की चिंता बढ़ा दी है।

    कामारेड्डी ने पेश की सकारात्मक मिसाल
    जहां एक ओर कई जिलों में बेटियों की संख्या कम हो रही है, वहीं कामारेड्डी जिला उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है। यह तेलंगाना का एकमात्र जिला है जहां लड़कियों का जन्म लड़कों से अधिक दर्ज किया गया।

    कामारेड्डी में प्रति 1,000 लड़कों पर 1,060 लड़कियों का जन्म हुआ। इसके बाद मुलुगु (991) और सिद्दीपेट (951) जिलों का स्थान रहा। इन दोनों जिलों ने राज्य के औसत 910 से बेहतर प्रदर्शन किया है।

    कई अन्य जिलों में भी स्थिति चिंताजनक
    नलगोंडा के अलावा कई अन्य जिलों में भी जन्म के समय लिंगानुपात काफी कम दर्ज किया गया है।

    महबूबाबाद: 805 लड़कियां प्रति 1,000 लड़के
    नागरकुरनूल: 842
    वनपर्थी: 848

    इसके अलावा वारंगल, रंगारेड्डी और खम्मम जैसे बड़े जिलों में भी लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में कम दर्ज की गई है।

    साल 2024 में तेलंगाना में कुल 7.7 लाख बच्चों का जन्म दर्ज हुआ। देरी से होने वाले पंजीकरण की संख्या कम होने के कारण इन आंकड़ों को काफी सटीक माना जा रहा है।

    पुराने मामलों ने फिर बढ़ाई चिंता
    नलगोंडा के ताजा आंकड़ों ने साल 2017 की घटनाओं की याद भी ताजा कर दी है। उस समय लड़कियों की सुरक्षा के लिए गठित ‘रक्षिता’ कमेटी ने जिले में कन्या भ्रूण हत्या और शिशु हत्या के 14 मामले सामने लाए थे।

    जांच में सामने आया था कि कुछ मामलों में बेटियों के जन्म को छिपाया गया और उनके शवों को गुपचुप तरीके से ठिकाने लगाया गया। साल 2011 की जनगणना में भी कम उम्र के बच्चों में लड़कियों की घटती संख्या के संकेत मिले थे।

    बेटियों की संख्या घटने की वजह क्या है?
    विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे सामाजिक सोच और परंपरागत मान्यताएं बड़ी वजह हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बेटे को परिवार का वंश आगे बढ़ाने वाला और बुढ़ापे का सहारा माना जाता है।

    वहीं दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियों के कारण कुछ लोग बेटियों को आर्थिक बोझ के रूप में देखते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कम लिंगानुपात वाले जिलों में सरकार को निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।

    विशेषज्ञों ने अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित जांच और पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) कानून को सख्ती से लागू करने की मांग की है, ताकि भ्रूण लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

  • NEET-UG पेपर लीक केस में CBI का बड़ा खुलासा: NTA के पेपर-सेटर पर सवाल, आरोपी के फोन में मिले 111 मैचिंग प्रश्न

    NEET-UG पेपर लीक केस में CBI का बड़ा खुलासा: NTA के पेपर-सेटर पर सवाल, आरोपी के फोन में मिले 111 मैचिंग प्रश्न


    नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी ने विशेष अदालत को बताया कि पेपर लीक के तार कथित तौर पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के उस पैनल तक पहुंच रहे हैं, जो परीक्षा के प्रश्न तैयार करता है।

    CBI के अनुसार, लातूर के एक कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने NTA के पेपर-सेटर पैनल में शामिल पी वी कुलकर्णी से केमिस्ट्री के प्रश्न हासिल करने के लिए 5 लाख रुपये दिए थे। इस खुलासे के बाद परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

    आरोपी के मोबाइल से मिले 36 फोटो, 111 सवाल परीक्षा से मैच
    CBI ने आरोपी मोटेगांवकर की जमानत याचिका का विरोध करते हुए अदालत में डिजिटल सबूत पेश किए। जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन की जांच में गैलरी से केमिस्ट्री के हाथ से लिखे हुए प्रश्नों की 36 तस्वीरें मिलीं।

    इन तस्वीरों में कुल 132 सवाल लिखे हुए थे। CBI ने जब इन प्रश्नों का मिलान NTA के मास्टर क्वेश्चन बैंक से किया तो इनमें से 111 सवाल NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र से हूबहू मैच पाए गए। जांच एजेंसी के मुताबिक, मोबाइल फोन के मेटाडेटा विश्लेषण से पता चला कि ये तस्वीरें 3 मई को आयोजित परीक्षा से करीब 10 दिन पहले खींची गई थीं। CBI का कहना है कि ये हस्तलिखित नोट्स कथित तौर पर मोटेगांवकर की लिखावट में हैं।

    5 लाख रुपये की डील और रकम बरामद
    CBI ने अदालत को बताया कि कथित पेपर लीक की कड़ी मोटेगांवकर के बेटे के जरिए जुड़ी, जो आरोपी पेपर-सेटर पी वी कुलकर्णी की केमिस्ट्री ट्यूटोरियल क्लास में पढ़ता था। जांच के अनुसार, इसी दौरान गोपनीय प्रश्न उपलब्ध कराए गए।

    जांच एजेंसी ने बताया कि प्रश्न हासिल करने के लिए हुई 5 लाख रुपये की डील की रकम एक अन्य आरोपी मनोज भगवानराव शिरुरे की निशानदेही पर बरामद कर ली गई है। इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

    विवाद के बाद रद्द हुई थी परीक्षा
    NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद NTA ने 12 मई को 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा को रद्द कर दिया था। बाद में मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए 21 जून को दोबारा परीक्षा (Re-exam) आयोजित की गई थी। CBI की जांच में सामने आए इन नए तथ्यों के बाद परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है।

  • महाराष्ट्र: उल्हास नदी पर बन रहे बुलेट ट्रेन पुल के बहने की खबर वायरल, NHSRCL ने बताया क्या है सच्‍चाई

    महाराष्ट्र: उल्हास नदी पर बन रहे बुलेट ट्रेन पुल के बहने की खबर वायरल, NHSRCL ने बताया क्या है सच्‍चाई


    मुंबई। महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भारी बारिश के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुई उस खबर का नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया था कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत उल्हास नदी पर बन रहा पुल बह गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कोई भी स्थायी पुल क्षतिग्रस्त या बहा नहीं है।

    NHSRCL ने बुधवार को जारी बयान में बताया कि भारी बारिश और उल्हास नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण केवल निर्माण कार्य के लिए बनाया गया अस्थायी एक्सेस मार्ग प्रभावित हुआ है। यह मार्ग मजदूरों, मशीनरी और निर्माण सामग्री के आवागमन के लिए तैयार किया गया था और इसका मुख्य पुल की संरचना से कोई संबंध नहीं था।

    निर्माण कार्य पर नहीं पड़ा कोई असर
    अधिकारियों के अनुसार, इस घटना का पुल के डिजाइन, सुरक्षा या निर्माण कार्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। परियोजना का निर्माण कार्य तय योजना के अनुसार जारी है और सभी गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।

    भारी बारिश के बाद फैली थी भ्रम की स्थिति
    हाल ही में ठाणे जिले में हुई तेज बारिश के कारण उल्हास नदी उफान पर आ गई थी, जिससे आसपास के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। इसी दौरान कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि निर्माणाधीन पुल बह गया है। हालांकि, NHSRCL ने स्पष्ट किया कि प्रभावित हिस्सा केवल अस्थायी निर्माण मार्ग था, स्थायी पुल नहीं।

    1.08 लाख करोड़ रुपये की है परियोजना
    मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है और इसे करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जा रहा है।

    NHSRCL ने लोगों से अपील की है कि परियोजना से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक या अपुष्ट खबरों से बचें। निगम के अनुसार, ठाणे सहित सभी निर्माण स्थलों पर परियोजना का कार्य पारदर्शिता के साथ लगातार जारी है।

  • एलपीजी डिलीवरी में बड़ा बदलाव, अब ऐप से 10 मिनट में मिलेगा गैस सिलेंडर, देश की पहली ऑन-डिमांड सेवा शुरू

    एलपीजी डिलीवरी में बड़ा बदलाव, अब ऐप से 10 मिनट में मिलेगा गैस सिलेंडर, देश की पहली ऑन-डिमांड सेवा शुरू

    नई दिल्ली । देश में रसोई गैस की डिलीवरी व्यवस्था अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। पहली बार क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑन-डिमांड एलपीजी सिलेंडर डिलीवरी सेवा शुरू की गई है। इस नई सुविधा के तहत ग्राहक मोबाइल ऐप के जरिए गैस सिलेंडर ऑर्डर कर सकेंगे और निर्धारित क्षेत्र में कम समय के भीतर उसकी डिलीवरी प्राप्त कर सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य घरेलू एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को पहले से अधिक तेज, सुविधाजनक और आधुनिक बनाना है। फिलहाल इस सेवा की शुरुआत बेंगलुरु से की गई है और आने वाले समय में इसे देश के अन्य शहरों तक विस्तार देने की योजना बनाई गई है।

    नई सेवा के तहत क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के साथ साझेदारी की है। कंपनी का दावा है कि यह भारत की पहली ऐसी ऑन-डिमांड एलपीजी डिलीवरी सेवा है, जिसमें ग्राहक ऐप के माध्यम से सीधे गैस सिलेंडर मंगा सकते हैं। शुरुआती चरण में ग्राहकों को 10 किलोग्राम का एचपी नव्या कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर और 5 किलोग्राम का मेटल सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। कंपनी का कहना है कि भविष्य में सेवा का दायरा बढ़ने के साथ अधिक शहरों और उत्पादों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

    एचपीसीएल का एचपी नव्या कंपोजिट सिलेंडर पारंपरिक गैस सिलेंडरों की तुलना में कई मायनों में अलग है। यह वजन में हल्का होने के साथ जंग-रोधी भी है। इसकी पारदर्शी बाहरी संरचना के कारण उपभोक्ता आसानी से सिलेंडर में बची हुई गैस का स्तर देख सकते हैं। इससे गैस खत्म होने का अनुमान पहले से लगाया जा सकता है और समय पर नया सिलेंडर मंगाने में सुविधा मिलती है। इस सिलेंडर को विशेष रूप से छोटे परिवारों, छात्रों, अकेले रहने वाले लोगों और अपार्टमेंट में रहने वाले उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

    इस सेवा की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि नया सिलेंडर लेने के लिए पहले से घरेलू एलपीजी कनेक्शन होना अनिवार्य नहीं होगा। पहली बार ऑर्डर करने वाले ग्राहकों को इसे नए कनेक्शन की तरह उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद जब सिलेंडर खाली हो जाएगा तो उपभोक्ता उसे वापस देकर रिफिल सिलेंडर मंगा सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य गैस सिलेंडर खरीदने और दोबारा भरवाने की पूरी प्रक्रिया को सरल और अधिक सुविधाजनक बनाना है, ताकि उपभोक्ताओं को आवश्यकता के समय लंबा इंतजार न करना पड़े।

    कंपनी के अनुसार सभी सिलेंडरों की डिलीवरी एचपीसीएल के अधिकृत वितरकों और प्रशिक्षित कर्मचारियों के माध्यम से की जाएगी। इससे सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित होगा और उपभोक्ताओं को प्रमाणित सेवा मिलेगी। साथ ही डिलीवरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के कारण ऑर्डर ट्रैकिंग और समयबद्ध आपूर्ति जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। यह मॉडल पारंपरिक गैस वितरण व्यवस्था के साथ आधुनिक तकनीक का प्रभावी समन्वय प्रस्तुत करता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऑन-डिमांड एलपीजी डिलीवरी की यह पहल शहरी उपभोक्ताओं के लिए बड़ी सुविधा साबित हो सकती है। तेज डिलीवरी, हल्के कंपोजिट सिलेंडर और डिजिटल ऑर्डरिंग जैसी सुविधाएं गैस वितरण प्रणाली को अधिक आधुनिक और उपभोक्ता केंद्रित बनाएंगी। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले समय में देश के अन्य शहरों में भी इसी प्रकार की सेवाओं का विस्तार देखने को मिल सकता है, जिससे घरेलू एलपीजी वितरण व्यवस्था में व्यापक बदलाव आने की संभावना है।

  • सेमिकॉन 2.0 से लेकर वाराणसी एलिवेटेड कॉरिडोर तक, केंद्रीय कैबिनेट ने विकास की रफ्तार बढ़ाने वाले छह बड़े फैसलों को दी मंजूरी

    सेमिकॉन 2.0 से लेकर वाराणसी एलिवेटेड कॉरिडोर तक, केंद्रीय कैबिनेट ने विकास की रफ्तार बढ़ाने वाले छह बड़े फैसलों को दी मंजूरी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश के औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे, रेल नेटवर्क, उर्वरक उत्पादन और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। इन निर्णयों का उद्देश्य घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना, रोजगार के नए अवसर सृजित करना और भारत को रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी लाना है। कैबिनेट के फैसलों में वाराणसी के लिए नई आधारभूत परियोजनाएं, सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा चरण, मोबाइल निर्माण प्रोत्साहन योजना, रेलवे विस्तार और यूरिया उत्पादन क्षमता बढ़ाने जैसी प्रमुख घोषणाएं शामिल हैं।

    मंत्रिमंडल ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ को 1.27 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी है। इस योजना के तहत चिप डिजाइन, विनिर्माण, कच्चे माल की आपूर्ति और संपूर्ण वैल्यू चेन को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य घरेलू स्तर पर सेमीकंडक्टर उत्पादन को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और आने वाले वर्षों में देश को चिप निर्माण के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के माध्यम से बड़े निवेश और उच्च तकनीक आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है।

    मोबाइल विनिर्माण को गति देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के दूसरे चरण को भी मंजूरी दी गई है। इस योजना पर 62,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे अगले पांच वर्षों तक लागू किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य भारत में मोबाइल निर्माण क्षमता का विस्तार करना, निर्यात बढ़ाना, घरेलू ब्रांडों को प्रोत्साहित करना और बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराना है। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विकसित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    वाराणसी में बढ़ती आबादी और पर्यटन गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को भी स्वीकृति मिली है। राष्ट्रीय राजमार्गों और रिंग रोड को जोड़ने वाली इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर में यातायात दबाव कम करना, आवागमन को तेज बनाना और धार्मिक पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को आधुनिक स्वरूप देना है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहर में ट्रैफिक प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।

    उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत प्राकृतिक गैस आधारित आठ से नौ नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे देश में अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता विकसित होगी। सरकार का लक्ष्य आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना और कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं को घरेलू उत्पादन के माध्यम से पूरा करना है।

    रेलवे क्षेत्र में भी दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इनमें पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड का दोहरीकरण तथा राजखरसावां-डांगोआपोसी रेलखंड पर चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं से रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी, माल और यात्री ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी तथा भीड़भाड़ कम होने के साथ समयबद्ध संचालन को भी मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि इन सभी फैसलों से औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार, परिवहन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा तथा देश की आर्थिक प्रगति को नई गति प्राप्त होगी।