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  • सुनेत्रा पवार के NCP अध्यक्ष पद पर उठे सवाल, पार्टी नेता ने चुनाव प्रक्रिया को दी चुनौती

    सुनेत्रा पवार के NCP अध्यक्ष पद पर उठे सवाल, पार्टी नेता ने चुनाव प्रक्रिया को दी चुनौती


    मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में एक बार फिर आंतरिक विवाद सामने आता दिखाई दे रहा है। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और NCP अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के नेतृत्व को लेकर पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि अध्यक्ष पद के लिए कराया गया चुनाव पार्टी संविधान के नियमों के अनुसार नहीं हुआ।

    पार्टी नेता की ओर से सुनेत्रा पवार के अध्यक्ष पद के चुनाव को चुनौती देते हुए कानूनी नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, इस मामले पर अभी तक उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    26 फरवरी के चुनाव पर उठाई गई आपत्ति
    दिल्ली स्थित विधि फर्म एआरएस एसोसिएट्स ने NCP के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह की ओर से 9 जुलाई को यह कानूनी नोटिस जारी किया। इसमें दावा किया गया है कि 26 फरवरी को हुआ पार्टी अध्यक्ष का चुनाव असंवैधानिक था और इसे अमान्य घोषित किया जाना चाहिए। यह नोटिस सुनेत्रा पवार, NCP के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजा गया है।

    चुनाव प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन का आरोप
    नोटिस में आरोप लगाया गया है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू करने से पहले पार्टी संविधान में तय अनिवार्य नियमों का पालन नहीं किया गया। इसमें दावा किया गया कि पार्टी प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को चुनाव की जानकारी भी विधिवत नहीं दी गई।

    नोटिस के अनुसार, तत्कालीन NCP अध्यक्ष अजित पवार के 28 जनवरी को निधन के बाद पार्टी ने निर्वाचन आयोग को जानकारी दी थी कि नए अध्यक्ष के चुनाव तक प्रफुल्ल पटेल कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका निभाएंगे। आरोप है कि इसके बावजूद महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव ने बिना संवैधानिक अधिकार के राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया और चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी।

    नामांकन और मतदान प्रक्रिया पर भी सवाल
    सच्चिदानंद सिंह की ओर से जारी नोटिस में दावा किया गया है कि पार्टी संविधान के मुताबिक न तो केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण का गठन किया गया, न ही निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया और न ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया। नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रतिनिधियों को उम्मीदवारों के नामांकन, चुनाव लड़ने और मतदान करने का उचित अवसर नहीं दिया गया।

    चुनाव आयोग को भेजे पत्र वापस लेने की मांग
    सिंह ने निर्वाचन आयोग को भेजे गए 28 फरवरी, 10 मार्च और 29 अप्रैल के पार्टी पत्रों को वापस लेने की मांग की है। इन पत्रों में चुनाव और पार्टी पदाधिकारियों से जुड़ी जानकारी दर्ज की गई थी।

    उन्होंने स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण की निगरानी में नए सिरे से संगठनात्मक चुनाव कराने की मांग की है। नोटिस में पार्टी नेतृत्व को मांगों पर कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। ऐसा नहीं होने पर आगे कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही गई है।

    NCP ने आरोपों को बताया गलत
    वहीं, NCP प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि सच्चिदानंद सिंह 26 फरवरी को आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में मौजूद थे और उन्होंने हाथ उठाकर सुनेत्रा पवार के पक्ष में मतदान किया था। चव्हाण ने दावा किया कि सुनेत्रा पवार का चुनाव सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कराया गया था। फिलहाल NCP में अध्यक्ष पद को लेकर उठे इस विवाद पर आगे की स्थिति कानूनी प्रक्रिया और पार्टी के रुख पर निर्भर करेगी।

  • आगरा में फ्रिज की बर्फ में दिखी शिवलिंग जैसी आकृति, दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, लोग कर रहे पूजा-अर्चना

    आगरा में फ्रिज की बर्फ में दिखी शिवलिंग जैसी आकृति, दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, लोग कर रहे पूजा-अर्चना


    आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में एक घर के फ्रिज के फ्रीजर में जमी बर्फ की शिवलिंग जैसी दिखाई देने वाली आकृति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। आकृति की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग घर पहुंचने लगे और कई श्रद्धालुओं ने इसे भगवान शिव का प्रतीक मानते हुए पूजा-अर्चना शुरू कर दी। घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं।

    यह मामला आगरा के खेरिया मोड़ स्थित नगला भुजा क्षेत्र का बताया जा रहा है। जहां एक ओर कई लोग इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे बर्फ के प्राकृतिक जमाव का परिणाम मान रहे हैं।

    फ्रीजर में नजर आई शिवलिंग जैसी आकृति
    परिवार के सदस्यों के अनुसार, जब उन्होंने फ्रिज खोला तो फ्रीजर में जमी बर्फ के बीच एक ऐसी आकृति दिखाई दी, जो देखने में शिवलिंग जैसी प्रतीत हो रही थी। इसकी सूचना पड़ोसियों और परिचितों तक पहुंची तो लोगों का वहां आना शुरू हो गया।

    देखते ही देखते घर के बाहर श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। कई लोगों ने हाथ जोड़कर भगवान शिव का स्मरण किया, जबकि कुछ श्रद्धालुओं ने जल, फूल और बेलपत्र अर्पित कर पूजा की। पूरे इलाके में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे भी सुनाई दिए। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते रहे।

    अमरनाथ हिमलिंग से की जा रही तुलना
    घटना के बाद कुछ श्रद्धालुओं ने इस आकृति की तुलना जम्मू-कश्मीर स्थित अमरनाथ गुफा में बनने वाले प्राकृतिक हिमलिंग से की। इसी दौरान मोहल्ले के एक बाबा भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने उपस्थित लोगों को अमरनाथ गुफा से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं तथा वहां रहने वाले कबूतरों के जोड़े की कथा सुनाई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग वहां मौजूद रहे।

    पूजा-अर्चना और चढ़ावा भी शुरू
    स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना की जानकारी फैलने के बाद श्रद्धालुओं ने मौके पर पूजा-पाठ शुरू कर दिया। कई लोगों ने जलाभिषेक किया, फूल और प्रसाद अर्पित किए। बताया जा रहा है कि श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावा भी चढ़ाया जा रहा है। हालांकि यह पूरी गतिविधि स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था के आधार पर हो रही है।

    वैज्ञानिक नजरिए से क्या है वजह?
    विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रिज या फ्रीजर के भीतर तापमान, नमी, हवा के प्रवाह और पानी के जमने की प्रक्रिया के कारण बर्फ कई तरह की आकृतियां बना सकती है। कई बार ये आकृतियां किसी परिचित वस्तु, चेहरे या धार्मिक प्रतीक जैसी दिखाई देती हैं।

    मनोविज्ञान में इस प्रवृत्ति को ‘पैरेडोलिया (Pareidolia)’ कहा जाता है, जिसमें मानव मस्तिष्क अनियमित आकृतियों में परिचित चेहरे, आकृतियां या धार्मिक प्रतीकों जैसी छवि पहचान लेता है। वैज्ञानिक दृष्टि से ऐसी आकृतियों का बनना असामान्य नहीं माना जाता।

    सोशल मीडिया पर दो राय
    घटना के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर बहस छिड़ गई है। एक वर्ग इसे भगवान शिव से जुड़ा चमत्कार मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम बता रहा है। कई लोगों ने धार्मिक आस्था का सम्मान करने की बात कही है, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी समझना जरूरी है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी सुझाव दिया कि यदि यह केवल बर्फ का प्राकृतिक जमाव है, तो समय के साथ उसके पिघलने से स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी।

  • 'वक्फ बोर्ड की जांच हो तो सामने आएगा बड़ा घोटाला', मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने सीएम योगी को लिखा पत्र

    'वक्फ बोर्ड की जांच हो तो सामने आएगा बड़ा घोटाला', मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने सीएम योगी को लिखा पत्र


    बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि वक्फ बोर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो अरबों-खरबों रुपये की कथित अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर विस्तृत जांच की मांग की है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौलाना रिजवी ने कहा कि केवल बरेली जिले में ही वक्फ की जमीनों से जुड़े करोड़ों और अरबों रुपये के कथित घोटाले हुए हैं। उनका आरोप है कि वक्फ संपत्तियों का उपयोग जनकल्याण के बजाय निजी हितों के लिए किया गया और सरकार को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।

    गरीबों के लिए बनी थी वक्फ संपत्ति
    मौलाना ने कहा कि वक्फ की जमीनें गरीब मुसलमानों, महिलाओं, बच्चों, जरूरतमंदों और बेसहारा लोगों की मदद के उद्देश्य से दान की गई थीं। इन संपत्तियों से होने वाली आय का उपयोग इन्हीं वर्गों के कल्याण पर होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उनका दावा है कि आज भी बड़ी संख्या में गरीब मुसलमान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, जबकि वक्फ की जमीनों से कुछ लोग करोड़ों रुपये का कारोबार कर रहे हैं।

    समाजवादी पार्टी के कार्यकाल पर लगाए आरोप
    मौलाना रिजवी ने आरोप लगाया कि वक्फ की जमीनों की कथित खरीद-फरोख्त समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौरान सबसे अधिक हुई। उनके अनुसार, जब-जब समाजवादी पार्टी की सरकार सत्ता में रही, तब सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड के जिम्मेदार लोगों ने सरकारी संरक्षण में वक्फ संपत्तियों के सौदे किए।

    उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव 1989-91, 1993-95 और 2003-07 तक मुख्यमंत्री रहे, जबकि अखिलेश यादव 2012 से 2017 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। मौलाना का दावा है कि इन चारों कार्यकालों में अधिकांश समय आजम खान के पास अल्पसंख्यक, वक्फ और हज मंत्रालय की जिम्मेदारी रही।

    चेयरमैनों की नियुक्ति और कार्यशैली पर भी सवाल
    मौलाना ने आरोप लगाया कि आजम खान की पसंद के लोगों को वक्फ बोर्ड में चेयरमैन और सदस्य बनाया गया। उन्होंने बताया कि जुफर अहमद फारूकी वर्ष 2000-01 तक, अमीर आलम 2001-03 तक, हाफिज उस्मान 2004-09 तक और इसके बाद जुफर अहमद फारूकी 2010 से 2026 तक सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन रहे। उनके अनुसार, इन कार्यकालों में बोर्ड के भीतर मनमाने ढंग से काम हुआ और कई कथित अनियमितताएं हुईं।

    ‘वक्फ की जमीनों का हुआ बंटवारा’
    मौलाना ने दावा किया कि सुन्नी और शिया दोनों वक्फ बोर्डों के कई जिम्मेदार पदाधिकारियों ने वक्फ की जमीनों का दुरुपयोग किया। उनका आरोप है कि जो भी व्यक्ति बोर्ड में सदस्य या पदाधिकारी बना, उसने अपने क्षेत्र में वक्फ की जमीनों का बंटवारा कराया। उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने वक्फ संपत्तियां इसलिए दान की थीं ताकि उनकी आय से गरीबों, यतीमों और जरूरतमंद लोगों की सहायता की जा सके, लेकिन इस उद्देश्य को पूरा नहीं किया गया।

    स्कूल, अस्पताल और मदरसे बनाने का उद्देश्य अधूरा
    मौलाना ने कहा कि वक्फ संपत्तियों पर स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और मदरसे विकसित किए जाने थे, लेकिन कथित वक्फ माफिया के कारण यह उद्देश्य पूरा नहीं हो सका। उनका आरोप है कि इन संपत्तियों का लाभ आम लोगों के बजाय सीमित लोगों तक ही पहुंचा।

    मुख्यमंत्री से की कार्रवाई की मांग
    मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि वक्फ बोर्ड द्वारा बेची गई सभी जमीनों की जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने दावा किया कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले से भी बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। उनका यह भी कहना है कि यदि वक्फ की आय का सही उपयोग गरीब मुसलमानों के कल्याण पर किया जाए तो उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार संभव है।

  • लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, कल से दौड़ेंगे वाहन, 35-45 मिनट में पूरा होगा सफर

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, कल से दौड़ेंगे वाहन, 35-45 मिनट में पूरा होगा सफर

    लखनऊ। लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए मंगलवार, 14 जुलाई से सफर आसान होने जा रहा है। करीब 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को आम वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा। लगभग 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह छह-लेन एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की प्रमुख हाई-स्पीड सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना का लोकार्पण सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में किया।

    उन्नाव में हुआ लोकार्पण, तकनीकी प्रदर्शनी भी देखी
    उन्नाव के झाऊखेड़ा गांव में आयोजित कार्यक्रम में एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया गया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। कार्यक्रम से पहले अतिथियों ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा लगाई गई तकनीकी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। एनएचएआई अधिकारियों ने एक्सप्रेसवे के निर्माण में उपयोग की गई आधुनिक तकनीक, सुरक्षा मानकों और भविष्य की विस्तार योजनाओं की जानकारी भी दी।

    टोल वसूली शुरू, इन वाहनों के प्रवेश पर रोक
    एक्सप्रेसवे पर मंगलवार से टोल वसूली भी शुरू हो गई है। चूंकि यह एक नियंत्रित (कंट्रोल्ड एक्सेस) हाई-स्पीड कॉरिडोर है, इसलिए सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केवल कार, जीप, बस, ट्रक और अन्य मोटर चालित वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई है। वहीं बाइक, स्कूटर, ऑटो, विक्रम, साइकिल, ट्रैक्टर, ई-रिक्शा, पशु चालित वाहन और अन्य धीमी गति वाले वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है।

    डेढ़-दो घंटे की जगह 35 से 45 मिनट में पहुंचेगा सफर
    अब तक लखनऊ और कानपुर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर ट्रैफिक और जाम के कारण यात्रा में करीब डेढ़ से दो घंटे का समय लग जाता था। नए एक्सप्रेसवे के शुरू होने से यही दूरी अब महज 35 से 45 मिनट में तय की जा सकेगी। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर यातायात का दबाव कम होगा और उन्नाव सहित आसपास के क्षेत्रों में लगने वाले जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है।

    उन्नाव को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
    एक्सप्रेसवे को उन्नाव-लालगंज मार्ग और कानपुर-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ा गया है। इसके अलावा गंगाघाट, करेर पतारी, कोरारी और अमरसस के पास इंटरचेंज बनाए गए हैं, जिससे उन्नाव, रायबरेली, कानपुर और लखनऊ के बीच आवागमन अधिक सुगम होगा।

    उद्योग और व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार
    यह एक्सप्रेसवे कानपुर के औद्योगिक क्षेत्र और लखनऊ के प्रशासनिक व आईटी केंद्र के बीच तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगा। इससे माल ढुलाई की लागत और समय दोनों में कमी आएगी, जिससे उद्योगों और व्यापार को लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही शिक्षा, चिकित्सा और नौकरी के लिए रोजाना आने-जाने वाले लोगों को भी समय और ईंधन की बचत का सीधा फायदा मिलेगा।

    एक्सप्रेसवे की प्रमुख विशेषताएं
    लंबाई: 63 किलोमीटर का छह-लेन एक्सप्रेसवे।
    लागत: लगभग 4,200 करोड़ रुपये।
    यात्रा समय: लखनऊ से कानपुर की दूरी अब 35 से 45 मिनट में पूरी होगी।
    बेहतर कनेक्टिविटी: उन्नाव, रायबरेली, कानपुर और लखनऊ को आधुनिक इंटरचेंज से जोड़ा गया।
    सुरक्षा नियम: बाइक, ऑटो, ट्रैक्टर, साइकिल और ई-रिक्शा सहित धीमी गति वाले वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध।

  • 24.90 लाख की लूट में तीन सिपाही गिरफ्तार, झांसी लाकर पूछताछ, छह लोगों पर दर्ज हुई FIR

    24.90 लाख की लूट में तीन सिपाही गिरफ्तार, झांसी लाकर पूछताछ, छह लोगों पर दर्ज हुई FIR


    झांसी। सूरत के एक ड्राई फ्रूट कारोबारी के मुंशी से 24.90 लाख रुपये की कथित लूट के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया है। शनिवार देर रात जालौन में दबिश देकर तीनों को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद रविवार शाम उन्हें पूछताछ के लिए झांसी लाया गया।

    कोतवाली थाना पुलिस ने इस मामले में तीन सिपाहियों समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप सामने आने के बाद जालौन के पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने तीनों सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

    झांसी के तीन युवकों की भी तलाश
    जांच में झांसी के तीन युवकों की कथित संलिप्तता भी सामने आई है। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, लूटी गई रकम का बड़ा हिस्सा इन्हीं के पास होने की आशंका जताई जा रही है।

    कारोबारी के मुंशी का किया था अपहरण
    पुलिस के मुताबिक, सूरत निवासी ड्राई फ्रूट कारोबारी जितेंद्र पटेल के मुंशी किशन पांचाल (30) का गुरुवार शाम काले रंग की क्रेटा कार में आए आरोपियों ने कथित रूप से अपहरण कर लिया था। आरोप है कि तीन सिपाहियों ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर रुपये से भरा बैग लूट लिया और बाद में किशन पांचाल को कानपुर बाईपास के पास छोड़कर फरार हो गए।

    CCTV फुटेज से हुई पहचान
    घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में तीन पुलिसकर्मी वर्दी में दिखाई दिए। उनकी पहचान राघवेंद्र राजपूत, नीरज राजपूत और मनोज के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद तीनों झांसी-कानपुर हाईवे से उरई की ओर भाग गए थे।

    लोकेशन ट्रैक कर हुई गिरफ्तारी
    मामले के खुलासे के लिए स्वॉट टीम सहित चार पुलिस टीमें गठित की गई थीं। तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने शनिवार देर रात उरई में दबिश देकर तीनों आरोपियों को हिरासत में लिया। रविवार शाम उन्हें झांसी लाकर क्राइम ब्रांच कार्यालय में पूछताछ की गई। पुलिस अब पूछताछ के आधार पर पूरी साजिश और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

    झांसी में हुई थी तीनों की दोस्ती
    जांच में सामने आया है कि मनोज, राघवेंद्र और नीरज पिछले तीन वर्षों से जालौन पुलिस लाइन में तैनात थे। इससे पहले तीनों पीएसी के माध्यम से झांसी पुलिस लाइन में साथ कार्य कर चुके थे, जहां उनकी आपस में दोस्ती हुई थी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को पहले से जानकारी थी कि मुंशी किशन पांचाल बड़ी नकदी लेकर आने वाला है। वारदात वाले दिन राघवेंद्र और मनोज बिना सूचना झांसी पहुंचे थे, जबकि नीरज छुट्टी लेकर आया था।

    लूटी गई रकम की बरामदगी के प्रयास जारी
    पुलिस झांसी के तीन अन्य संदिग्ध युवकों की तलाश के साथ-साथ 24.90 लाख रुपये की लूटी गई रकम बरामद करने का प्रयास भी कर रही है। झांसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि तीनों गिरफ्तार सिपाहियों से पूछताछ जारी है। साथ ही मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और लूटी गई राशि की बरामदगी के लिए पुलिस टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

  • बजट की कमी से थमी 'ड्रोन दीदी' योजना की रफ्तार, प्रशिक्षण के एक साल बाद भी नहीं मिले कृषि ड्रोन

    बजट की कमी से थमी 'ड्रोन दीदी' योजना की रफ्तार, प्रशिक्षण के एक साल बाद भी नहीं मिले कृषि ड्रोन

    झांसी। महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ड्रोन दीदी योजना झांसी में बजट के अभाव में आगे नहीं बढ़ पा रही है। बड़ागांव ब्लॉक की तीन महिला किसानों ने एक वर्ष पहले लखनऊ में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण पूरा किया था, लेकिन अब तक उन्हें कृषि ड्रोन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसे में प्रशिक्षण के बावजूद वे स्वरोजगार की शुरुआत नहीं कर सकी हैं।

    प्रशिक्षण पूरा, लेकिन संसाधनों का इंतजार
    योजना के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का चयन कर उन्हें ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद कृषि कार्यों के लिए ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है, ताकि महिलाएं खेतों में उर्वरक और कीटनाशक के छिड़काव जैसी सेवाएं देकर आय अर्जित कर सकें।

    पिछले वर्ष बड़ागांव ब्लॉक की तीन महिलाओं को लखनऊ में प्रशिक्षण दिलाया गया था। हालांकि, प्रशिक्षण पूरा हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन बजट जारी न होने के कारण उन्हें अब तक ड्रोन नहीं मिल पाए हैं। इससे वे सीखी गई तकनीक का व्यावहारिक उपयोग नहीं कर पा रही हैं।

    एक ड्रोन की लागत करीब 10 लाख रुपये
    एनआरएलएम के तहत चयनित महिलाओं को लगभग 10 लाख रुपये लागत का कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है। इन ड्रोन की मदद से वे किसानों के खेतों में उर्वरक, कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव कर नियमित आय अर्जित कर सकती हैं।

    पहले चयनित महिलाओं ने पेश की मिसाल
    योजना के सफल परिणाम भी सामने आ चुके हैं। करीब दो वर्ष पहले बड़ागांव क्षेत्र के गड़मऊ गांव की रानी देवी और हेमवती को हैदराबाद में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद दोनों को ड्रोन उपलब्ध कराए गए और वर्तमान में वे किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से छिड़काव कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि नई चयनित महिलाओं को भी समय पर ड्रोन उपलब्ध करा दिए जाएं तो वे भी इसी तरह अपना स्वरोजगार स्थापित कर सकेंगी।

    क्या है ड्रोन दीदी योजना?
    ड्रोन दीदी योजना का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ना है। इसके तहत महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता है और बाद में कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है। इन ड्रोन की मदद से कम समय में उर्वरक, कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव किया जा सकता है। इससे किसानों का समय और लागत दोनों बचते हैं, जबकि प्रशिक्षित महिलाओं के लिए आय का नया स्रोत तैयार होता है।

    बजट मिलते ही दिए जाएंगे ड्रोन
    एनआरएलएम, झांसी के प्रभारी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि बजट उपलब्ध होते ही ड्रोन दीदी योजना के तहत चयनित महिला किसानों को कृषि ड्रोन उपलब्ध करा दिए जाएंगे, ताकि वे जल्द से जल्द कृषि सेवाएं शुरू कर सकें।

  • राम मंदिर के नए CEO को क्‍या मिलेंगी सुविधाएं? नियुक्ति प्रक्रिया हुई तेज, 18 जुलाई तक मांगे गए आवेदन

    राम मंदिर के नए CEO को क्‍या मिलेंगी सुविधाएं? नियुक्ति प्रक्रिया हुई तेज, 18 जुलाई तक मांगे गए आवेदन


    अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया तेज कर दी है। ट्रस्ट की ओर से चयनित सीईओ को वेतन और आवास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह पद पूरी तरह ट्रस्ट के अधीन होगा और नियुक्त अधिकारी वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में मंदिर के प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    18 जुलाई तक किए जा सकेंगे आवेदन
    सीईओ चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने पात्रता के मानक तय कर दिए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 18 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। इस पद के लिए उम्मीदवार का स्नातक (Graduation) होना अनिवार्य है। साथ ही प्रशासन या वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में कम से कम 20 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। आवेदन करने वाले व्यक्ति का हिंदू धर्म का अनुयायी होना भी आवश्यक शर्त रखी गई है। चयनित उम्मीदवार की नियुक्ति तीन वर्ष के लिए की जाएगी।

    22 जुलाई की बैठक से पहले हो सकता है चयन
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। संभावना जताई जा रही है कि इस बैठक से पहले ही नए सीईओ के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। नई दिल्ली में आयोजित चयन समिति की बैठक में नियुक्ति प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हावरे शामिल हैं।

    चढ़ावा चोरी मामले के बाद तेज हुई प्रक्रिया
    राम मंदिर में चढ़ावे की राशि की चोरी का मामला सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने जांच की थी। जांच के आधार पर अयोध्या पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे चढ़ावे की रकम चुराकर पहले वॉशरूम में छिपाते थे और बाद में मौका मिलने पर उसे बाहर ले जाते थे।
    राम मंदिर में चढ़ावे की राशि की चोरी का मामला सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने जांच की थी। जांच के आधार पर अयोध्या पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे चढ़ावे की रकम चुराकर पहले वॉशरूम में छिपाते थे और बाद में मौका मिलने पर उसे बाहर ले जाते थे।

    जांच में सामने आए नए खुलासे
    एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला ने राम मंदिर में नौकरी के दौरान कथित तौर पर करीब 20 लाख रुपये खर्च कर मकान बनवाया। इसके अलावा उसने अपने भाई के नाम पर एक ब्रेज़ा कार खरीदी और अपनी गर्लफ्रेंड को एक आईफोन तथा दो लाख रुपये भी दिए। जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रतापगढ़ निवासी अविनाश शुक्ला राम मंदिर में नौकरी मिलने से पहले पीने का पानी बेचने का काम करता था। मामले की जांच अभी जारी है।

  • योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल 182 पीसीएस अधिकारियों के तबादले से यूपी की नौकरशाही में मचा हलचल

    योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल 182 पीसीएस अधिकारियों के तबादले से यूपी की नौकरशाही में मचा हलचल


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एक साथ 182 पीसीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। देर रात जारी तबादला सूची के साथ ही प्रदेश की नौकरशाही में व्यापक फेरबदल देखने को मिला। इस निर्णय के तहत कई जिलों में उप जिलाधिकारी बदले गए हैं जबकि विकास प्राधिकरणों नगर निगमों आवास एवं विकास परिषद और राजस्व परिषद सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में भी अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक गतिशील बनाना और जिलों में बेहतर प्रशासनिक समन्वय स्थापित करना बताया जा रहा है। व्यापक तबादला सूची में बड़ी संख्या में एसडीएम स्तर के अधिकारियों को नई तैनाती दी गई है जिससे कई जिलों में प्रशासनिक नेतृत्व पूरी तरह बदल गया है।

    जारी आदेश के अनुसार प्रशांत कुमार को उन्नाव से बहराइच भेजा गया है जबकि ध्रुव शुक्ला को गाजीपुर का नया एसडीएम बनाया गया है। कुमार संजय को जालौन अभय कुमार सिंह को राजस्व परिषद में विशेष कार्याधिकारी मनोज प्रकाश को जालौन अरविंद कुमार सिंह को मैनपुरी और पुष्पेंद्र पटेल को अंबेडकरनगर में नई जिम्मेदारी दी गई है। योगेश कुमार गौड़ को सहारनपुर तथा ज्योति शर्मा को कानपुर नगर में एसडीएम बनाया गया है।

    इसके अलावा कई महिला अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। दीपिका मेहर को शामली सुरभि शर्मा को बागपत प्रतिभा मिश्रा को कानपुर देहात प्रीति तिवारी को बांदा आकांक्षा सिंह को चंदौली मधुमिता सिंह को अंबेडकरनगर रत्निका श्रीवास्तव को रामपुर और वंदना पांडेय को अयोध्या में एसडीएम के रूप में तैनाती मिली है। वहीं कई अधिकारियों को नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में विशेष कार्याधिकारी तथा सहायक नगर आयुक्त के पदों पर नियुक्त किया गया है।

    सरकार ने प्रयागराज कानपुर नगर लखनऊ नोएडा ग्रेटर नोएडा अलीगढ़ और अन्य विकास प्राधिकरणों में भी प्रशासनिक बदलाव किए हैं। कई अधिकारियों को औद्योगिक विकास प्राधिकरणों नगर निगमों और स्थानीय निकाय निदेशालय में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं जिससे शहरी प्रशासन को और मजबूत बनाने की तैयारी दिखाई दे रही है।

    तबादला सूची में बहराइच मैनपुरी गाजीपुर बाराबंकी उन्नाव जौनपुर मथुरा प्रयागराज बांदा बागपत लखीमपुर खीरी रायबरेली गोरखपुर अयोध्या देवरिया बिजनौर हरदोई बुलंदशहर गोंडा झांसी वाराणसी कुशीनगर सोनभद्र चित्रकूट और फर्रुखाबाद सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों को शामिल किया गया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार ने सीमित फेरबदल के बजाय व्यापक प्रशासनिक पुनर्संरचना का फैसला किया है।

    प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर किए गए तबादलों का उद्देश्य शासन की योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारना और कानून व्यवस्था के साथ विकास कार्यों में नई गति लाना है। नए अधिकारियों के कार्यभार संभालने के बाद जिलों में प्रशासनिक कार्यशैली और योजनाओं के क्रियान्वयन में बदलाव देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में सभी अधिकारी अपनी नई तैनाती वाले जिलों और विभागों में कार्यभार ग्रहण करेंगे जिसके बाद प्रशासनिक गतिविधियां नए सिरे से गति पकड़ेंगी।

  • सेवा और निष्ठा की विरासत का उत्सव सीआरपीएफ स्थापना दिवस पर सरकार ने देशभर के नागरिकों को दिया भागीदारी का अवसर

    सेवा और निष्ठा की विरासत का उत्सव सीआरपीएफ स्थापना दिवस पर सरकार ने देशभर के नागरिकों को दिया भागीदारी का अवसर


    नई दिल्ली । भारत की आंतरिक सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल माने जाने वाले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सीआरपीएफ के 88वें स्थापना दिवस को इस वर्ष विशेष अंदाज में मनाया जाएगा। भारत सरकार ने इस अवसर पर देशभर के नागरिकों को सीआरपीएफ के शौर्य समर्पण और सेवा भावना को सम्मान देने के लिए विभिन्न ऑनलाइन प्रतियोगिताओं और जनभागीदारी अभियानों से जोड़ने का फैसला किया है। सरकार ने सभी आयु वर्ग के लोगों से अपील की है कि वे इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें और देश की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करें।

    भारत सरकार के नागरिक सहभागिता मंच माई जीओवी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस विशेष अभियान की घोषणा करते हुए नागरिकों को सेवा और निष्ठा की गौरवशाली विरासत विषय पर आधारित पेंटिंग प्रतियोगिता क्विज शॉर्ट वीडियो प्रतियोगिता और नागरिक प्रतिज्ञा अभियान में भाग लेने का निमंत्रण दिया है। इच्छुक प्रतिभागी माई जीओवी पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण कर इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकते हैं।

    सरकार ने अपने संदेश में कहा है कि सीआरपीएफ केवल भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ही नहीं बल्कि देश की एकता अखंडता और आंतरिक सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तंभ भी है। वर्ष 1939 में स्थापित इस बल ने सेवा और निष्ठा के अपने मूल मंत्र को निभाते हुए हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित की है। चाहे आतंकवाद के खिलाफ अभियान हो वामपंथी उग्रवाद से मुकाबला हो कानून व्यवस्था बनाए रखना हो शांतिपूर्ण चुनाव कराना हो या प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्य करना हो सीआरपीएफ ने हर मोर्चे पर अपनी दक्षता और बहादुरी का परिचय दिया है।

    सीआरपीएफ की विशेष इकाइयों रैपिड एक्शन फोर्स और कोबरा ने भी समय समय पर कठिन अभियानों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। देश के दुर्गम इलाकों से लेकर संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों तक बल के जवान दिन रात राष्ट्र की सुरक्षा में तैनात रहते हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करते हैं।

    इस गौरवशाली यात्रा के दौरान सीआरपीएफ के 2270 से अधिक वीर जवान देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। उनका साहस समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सरकार का मानना है कि स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिताएं केवल प्रतिभा प्रदर्शन का मंच नहीं बल्कि नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति सुरक्षा और सेवा के मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी बनेंगी।

    सरकार ने सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाकर सीआरपीएफ के वीर जवानों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें। साथ ही अपनी रचनात्मकता और ज्ञान के माध्यम से उस बल के प्रति सम्मान प्रकट करें जिसने दशकों से भारत की एकता संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

  • कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत में राष्ट्रीय शोक नई दिल्ली मुंबई और केरल में आधा झुका तिरंगा

    कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत में राष्ट्रीय शोक नई दिल्ली मुंबई और केरल में आधा झुका तिरंगा


    नई दिल्ली । कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर भारत ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए पूरे देश में एक दिन का राष्ट्रीय शोक मनाया। भारत सरकार के निर्देश पर सोमवार को नई दिल्ली मुंबई केरल सहित देशभर के उन सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया जहां नियमित रूप से तिरंगा फहराया जाता है। इसके साथ ही राष्ट्रीय शोक के सम्मान में सभी आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम भी स्थगित कर दिए गए। भारत और कतर के दशकों पुराने मजबूत संबंधों को देखते हुए इस निर्णय को दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और मित्रता का प्रतीक माना जा रहा है।

    कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का रविवार को निधन हो गया था। उनके निधन की सूचना मिलते ही भारत सरकार ने राष्ट्रीय शोक की घोषणा की। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन पर तिरंगा आधा झुका रहा जबकि मुंबई के मंत्रालय और केरल के विभिन्न सरकारी भवनों पर भी राष्ट्रीय ध्वज सम्मान स्वरूप आधा झुकाया गया। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार पूरे देश में ध्वज संहिता का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए।

    केरल में इस शोक का विशेष महत्व देखने को मिला क्योंकि राज्य का बड़ा प्रवासी समुदाय लंबे समय से कतर और अन्य खाड़ी देशों में कार्यरत है। कतर के साथ केरल के आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध काफी मजबूत माने जाते हैं। राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि अपने अधिकार क्षेत्र के प्रत्येक सरकारी कार्यालय और संस्थान में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें और राष्ट्रीय शोक से जुड़े सभी प्रोटोकॉल का पालन कराया जाए।

    विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शोक के दौरान पूरे भारत में उन सभी सरकारी और सार्वजनिक भवनों पर तिरंगा आधा झुका रहेगा जहां नियमित रूप से ध्वज फहराया जाता है। साथ ही इस दिन किसी भी प्रकार के आधिकारिक सांस्कृतिक या मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे ताकि दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त किया जा सके।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शेख हमद दूरदर्शी नेतृत्व वाले ऐसे शासक थे जिन्होंने कतर को विकास समृद्धि और वैश्विक पहचान की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत का सच्चा मित्र बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती मिली और सहयोग के अनेक नए रास्ते खुले।

    जानकारी के अनुसार केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भारत सरकार की ओर से शोक संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए जल्द ही कतर जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि शेख हमद बिन खलीफा अल थानी ने वर्ष 1995 से 2013 तक कतर का नेतृत्व किया और बाद में सत्ता अपने पुत्र शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सौंप दी। उनके कार्यकाल को कतर के आधुनिक विकास और वैश्विक प्रभाव के विस्तार का महत्वपूर्ण दौर माना जाता है।