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  • टीएमसी में बगावत गहराई, बागी गुट में शामिल होने के बाद मदन मित्रा बोले- ममता बनर्जी के प्रति सम्मान कायम, लेकिन पार्टी की दिशा पर उठाए गंभीर सवाल

    टीएमसी में बगावत गहराई, बागी गुट में शामिल होने के बाद मदन मित्रा बोले- ममता बनर्जी के प्रति सम्मान कायम, लेकिन पार्टी की दिशा पर उठाए गंभीर सवाल


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी उठापटक के बीच वरिष्ठ नेता और विधायक मदन मित्रा के बागी गुट में शामिल होने से राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। बागी खेमे में जाने के बाद मदन मित्रा ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ममता बनर्जी के प्रति उनका सम्मान पहले की तरह कायम है, लेकिन पार्टी की वर्तमान स्थिति और नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर उनके मन में गंभीर असहमति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने संगठन से जुड़े सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, हालांकि विधायक के रूप में अपनी सदस्यता बरकरार रखेंगे।

    मदन मित्रा ने कहा कि ममता बनर्जी उनके लिए हमेशा सम्माननीय नेता रही हैं और उनका स्थान उनके दिल में है। इसके बावजूद उन्होंने दावा किया कि पार्टी की वर्तमान परिस्थितियों ने उन्हें अलग रास्ता चुनने के लिए मजबूर किया। उनका कहना था कि संगठन के भीतर कई नेताओं ने समय रहते पार्टी को संभालने और आंतरिक मतभेद दूर करने के सुझाव दिए थे, लेकिन उन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।

    उन्होंने अपने बयान में पार्टी नेतृत्व के कुछ फैसलों पर भी सवाल उठाए। मदन मित्रा का आरोप था कि संगठन के भीतर संवाद की कमी और निर्णय प्रक्रिया में असंतुलन के कारण पार्टी लगातार कमजोर होती गई। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सभी नेताओं को साथ लेकर निर्णय लिए जाते तो मौजूदा स्थिति से बचा जा सकता था। उनके अनुसार, व्यक्तिगत नेतृत्व को प्राथमिकता दिए जाने से संगठनात्मक ढांचा प्रभावित हुआ।

    बागी गुट में शामिल होने के बाद मदन मित्रा ने कहा कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से जुड़े सभी संगठनात्मक दायित्वों को छोड़ दिया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह फिलहाल विधायक बने रहेंगे। उनका कहना था कि संगठनात्मक पदों से हटने का फैसला सोच-समझकर लिया गया है और इसका उद्देश्य अपनी राजनीतिक सोच के अनुरूप आगे की भूमिका तय करना है।

    उन्होंने ममता बनर्जी से अपील करते हुए कहा कि राजनीति को लंबी दौड़ की तरह देखा जाना चाहिए, जहां समय के साथ परिस्थितियां बदलती रहती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में राजनीतिक घटनाक्रम नई दिशा ले सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और राजनीतिक शिष्टाचार बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की आवश्यकता है।

    पश्चिम बंगाल में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं के अलग रुख अपनाने से राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेद आने वाले समय में राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि इन घटनाक्रमों पर पार्टी की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

    मदन मित्रा के इस फैसले और उनके बयानों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व इन घटनाक्रमों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है और आगे संगठनात्मक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में नए घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।

  • एक्सपायर्ड नूडल्स बेचने पर विशाल मेगा मार्ट पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 2.80 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश

    एक्सपायर्ड नूडल्स बेचने पर विशाल मेगा मार्ट पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 2.80 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश


    नई दिल्ली ।
    आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में एक ग्राहक को एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद बेचना एक रिटेल स्टोर को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक्सपायर्ड नूडल्स बेचने के मामले में विशाल मेगा मार्ट के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए मुआवजे और जनहित राशि सहित कुल 2.80 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने इसे उपभोक्ता सेवा में गंभीर कमी और सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही माना है।

    मामला 20 मार्च 2025 का है, जब कुरनूल जिले के येमिगनूर निवासी पी. श्रवण कुमार ने विशाल मेगा मार्ट से दो पैकेट आटा नूडल्स खरीदे थे। घर पहुंचने के बाद उन्होंने उसी रात एक पैकेट तैयार कर उसका सेवन किया। कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तेज बुखार, उल्टी और पेट दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में उपचार कराना पड़ा। चिकित्सकीय जांच में इसे फूड पॉइजनिंग का मामला बताया गया।

    स्वास्थ्य खराब होने के बाद श्रवण कुमार ने घर में रखे दूसरे नूडल्स पैकेट की जांच की। इस दौरान उन्हें पता चला कि उस उत्पाद की एक्सपायरी तिथि 18 मार्च 2025 थी, जबकि खरीदारी 20 मार्च को की गई थी। यानी संबंधित उत्पाद की वैध अवधि समाप्त होने के दो दिन बाद भी उसे बिक्री के लिए रखा गया था। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले को कानूनी रूप से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

    पीड़ित ने दिसंबर 2025 में स्टोर प्रबंधन को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन निर्धारित समय में कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने मामले की सुनवाई के लिए स्टोर को नोटिस जारी किया, लेकिन सुनवाई के दौरान स्टोर का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। शिकायतकर्ता ने खरीद का बिल, मेडिकल रिपोर्ट और एक्सपायर्ड उत्पाद का पैकेट आयोग के समक्ष साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया, जिन्हें आयोग ने महत्वपूर्ण प्रमाण माना।

    आयोग ने अपने फैसले में कहा कि एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री की बिक्री उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है और यह सेवा में स्पष्ट कमी की श्रेणी में आता है। आयोग का मानना था कि ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि इससे आम लोगों के जीवन और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। आयोग ने यह भी कहा कि व्यवसायिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे बिक्री से पहले प्रत्येक खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता और वैधता सुनिश्चित करें।

    अपने आदेश में आयोग ने विशाल मेगा मार्ट को शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा के लिए 25 हजार रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 5 हजार रुपये देने का निर्देश दिया। इसके अलावा जनहित को ध्यान में रखते हुए 2.50 लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराने का भी आदेश दिया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह पूरी राशि 45 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं होने पर संबंधित राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

    यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही यह सभी खुदरा दुकानों और सुपरमार्केट के लिए स्पष्ट संदेश है कि खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और एक्सपायरी तिथि की अनदेखी गंभीर कानूनी परिणाम ला सकती है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि उपभोक्ताओं को किसी भी खाद्य उत्पाद की खरीदारी से पहले उसकी निर्माण और एक्सपायरी तिथि अवश्य जांचनी चाहिए, ताकि इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके।

  • रेलवे के हरित भविष्य की ओर ऐतिहासिक कदम, 17 जुलाई को हरियाणा से दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, पीएम मोदी ने साझा की तस्वीरें

    रेलवे के हरित भविष्य की ओर ऐतिहासिक कदम, 17 जुलाई को हरियाणा से दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, पीएम मोदी ने साझा की तस्वीरें


    नई दिल्ली ।
    भारतीय रेलवे हरित परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से संचालित ट्रेन हरियाणा के जींद से अपनी पहली यात्रा शुरू करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसके साथ ही भारतीय रेलवे स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाएगा। यह ट्रेन शुरुआती चरण में जींद और सोनीपत के बीच संचालित होगी और इसे भारतीय रेलवे की भविष्य की पर्यावरण-अनुकूल परिवहन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना की तस्वीरें साझा करते हुए इसे भारतीय रेलवे के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा से अपनी यात्रा शुरू करने जा रही है। इस घोषणा के बाद देशभर में इस परियोजना को लेकर उत्साह बढ़ गया है। रेलवे का मानना है कि हाइड्रोजन आधारित तकनीक भविष्य में परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    यह ट्रेन भारतीय रेलवे की ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल के तहत विकसित की गई है। इस योजना का उद्देश्य उन रेल मार्गों पर डीजल इंजनों का विकल्प तैयार करना है, जहां विद्युतीकरण करना कठिन या अत्यधिक खर्चीला है। रेलवे आने वाले समय में देशभर में 35 और हाइड्रोजन ट्रेनों को शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इन ट्रेनों के माध्यम से विरासत और ग्रामीण रेल मार्गों पर स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ परिचालन लागत में भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

    नई हाइड्रोजन ट्रेन को 10 कोच वाले डीईएमयू सेट के रूप में तैयार किया गया है। इसमें 682 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है, जबकि कुल लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है। नियमित परिचालन के दौरान इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। परीक्षण के दौरान ट्रेन ने इससे अधिक गति हासिल की थी, लेकिन सुरक्षा और परिचालन मानकों को ध्यान में रखते हुए शुरुआती चरण में नियंत्रित गति पर संचालन किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना फिलहाल पायलट आधार पर शुरू की जा रही है, जिसके अनुभव के आधार पर भविष्य में इसका विस्तार किया जाएगा।

    हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्वच्छ ऊर्जा तकनीक है। इसमें हाइड्रोजन गैस और वातावरण से प्राप्त ऑक्सीजन को फ्यूल सेल में रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से मिलाया जाता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है। यही बिजली ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटरों को संचालित करती है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार का धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। इसके स्थान पर केवल जलवाष्प और ऊष्मा निकलती है, जिससे यह तकनीक पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण-अनुकूल मानी जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनें भारतीय रेलवे को कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त देंगी। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां ओवरहेड बिजली लाइनें बिछाना व्यावहारिक नहीं है, वहां यह तकनीक प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है। कम समय में ईंधन भरने की सुविधा, स्वच्छ संचालन और बेहतर ऊर्जा दक्षता जैसी विशेषताएं इसे भविष्य के रेल परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम बना सकती हैं। भारतीय रेलवे की यह पहल देश में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ टिकाऊ विकास की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

  • कम सीटों के बावजूद संसद में सरकार को घेरने की तैयारी, INDIA गठबंधन ने बनाई आक्रामक रणनीति

    कम सीटों के बावजूद संसद में सरकार को घेरने की तैयारी, INDIA गठबंधन ने बनाई आक्रामक रणनीति


    नई दिल्ली। संसद में विपक्ष की संख्या भले ही पहले के मुकाबले कम हो गई हो, लेकिन मॉनसून सत्र में INDIA गठबंधन सरकार को घेरने के लिए ज्यादा आक्रामक रणनीति के साथ उतरने की तैयारी कर रहा है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) में हुई टूट के साथ ही डीएमके की नाराजगी के बीच विपक्षी गठबंधन ने अपनी आगे की रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है।

    कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों से विपक्षी एकजुटता पर असर पड़ा है, लेकिन गठबंधन अपनी उपलब्ध ताकत के साथ सरकार की नीतियों का विरोध करेगा। विपक्ष का फोकस आम जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने और सरकार से जवाब मांगने पर रहेगा।

    खरगे की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक
    मॉनसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, बैठक में संसद सत्र की तैयारियों, विपक्षी दलों के बीच तालमेल और संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

    बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे को उठाते हुए इसे भ्रष्टाचार का बड़ा मामला बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि लोगों की आस्था से जुड़ा विषय भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में संघ और विश्व हिंदू परिषद की भूमिका है। विपक्ष इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है।

    डीएमके की नाराजगी के बावजूद एकजुटता की उम्मीद
    कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, INDIA गठबंधन के कई सहयोगी दल लगातार डीएमके के संपर्क में हैं। पार्टी को उम्मीद है कि तमिलनाडु की राजनीतिक नाराजगी के बावजूद डीएमके गठबंधन के सामूहिक फैसलों के खिलाफ नहीं जाएगी। विपक्षी नेताओं का मानना है कि संसद सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए सभी दलों के बीच समन्वय बनाए रखना जरूरी होगा।

    एक समय में एक मुद्दे पर रहेगा विपक्ष का फोकस
    मॉनसून सत्र में विपक्ष सभी मुद्दों को एक साथ उठाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से सरकार को घेरने की रणनीति अपना सकता है। विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि संसद में कई महत्वपूर्ण विषय उठाए जाने हैं, लेकिन उन्हें क्रमवार तरीके से रखा जाएगा। इससे पूरे सत्र के दौरान सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    इसके अलावा विपक्ष कई मुद्दों पर सदन में विस्तृत चर्चा की मांग भी करेगा। रणनीति यह है कि जनता से जुड़े विषयों को प्रमुखता देकर सरकार से जवाब मांगा जाए और संसद में विपक्ष की भूमिका को प्रभावी बनाया जाए।

  • UP: सावन में कांवड़ियों का होगा खास स्वागत, रूट पर नॉनवेज-अंडे की बिक्री पर रोक, प्रसाद में मिलेंगे पौधे

    UP: सावन में कांवड़ियों का होगा खास स्वागत, रूट पर नॉनवेज-अंडे की बिक्री पर रोक, प्रसाद में मिलेंगे पौधे


    बरेली। सावन महीने में होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर बरेली प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार कांवड़ियों के स्वागत के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रमुख शिव मंदिरों और कांवड़ यात्रा मार्गों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की जाएगी, वहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में पौधे भी बांटे जाएंगे।

    प्रशासन की ओर से पिछले वर्ष भी कांवड़ियों और नाथ नगरी के प्रमुख शिव मंदिरों पर हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश की गई थी। इस बार भी अलखनाथ मंदिर, त्रिवटीनाथ मंदिर, धोपेश्वरनाथ मंदिर, तपेश्वरनाथ मंदिर और वनखंडीनाथ मंदिर समेत अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पुष्पवर्षा की योजना बनाई गई है। इसके अलावा कांवड़ यात्रा के प्रमुख मार्गों, खासतौर पर रामगंगा पुल पर भी आसमान से फूल बरसाए जाएंगे।

    कांवड़ मार्गों पर मांसाहार और अंडे की बिक्री पर रोक
    कांवड़ यात्रा को देखते हुए प्रशासन ने यात्रा मार्गों पर खान-पान व्यवस्था को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जिला स्तरीय समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि कांवड़ मार्गों पर किसी भी तरह के मांसाहारी उत्पाद और अंडे की बिक्री नहीं की जाए। साथ ही सभी खाद्य प्रतिष्ठानों पर ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ एप के स्टीकर लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कांवड़ियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके।

    बैठक में लोगों को सुरक्षित खाद्य पदार्थ और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई। बिना औषधि लाइसेंस चल रहे प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

    खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस और पंजीकरण में एक सप्ताह के भीतर 20 प्रतिशत वृद्धि करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके अलावा दुकानों और प्रतिष्ठानों की अचानक जांच कर साफ-सफाई और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की निगरानी करने को कहा गया है।

    बरेली-बदायूं रोड पर जल्द सुधार के निर्देश
    सावन से पहले कांवड़ियों की सुविधा को देखते हुए बरेली-बदायूं राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। इस मार्ग पर चौड़ीकरण का काम चल रहा है, जिसके कारण कई जगह डायवर्जन और निर्माण सामग्री फैली हुई है।

    कमिश्नर ने हाल ही में सड़क का निरीक्षण कर एनएचएआई अधिकारियों को निर्देश दिए कि सावन शुरू होने से पहले सड़क को इस स्थिति में लाया जाए कि कांवड़ियों को परेशानी का सामना न करना पड़े। जहां यातायात अधिक प्रभावित हो रहा है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा गया है। प्रशासन के अनुसार, सावन शुरू होने से दो दिन पहले से डायवर्जन लागू कर दिया जाएगा। लोगों से अपील की गई है कि घर से निकलने से पहले रूट डायवर्जन की जानकारी जरूर ले लें।

    पुष्पवर्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
    कमिश्नर भूपेंद्र एस चौधरी ने बताया कि सावन के पवित्र महीने में कांवड़ियों का सम्मान विशेष तरीके से किया जाएगा। पुष्पवर्षा के साथ उन्हें प्रसाद के रूप में पौधे भी वितरित किए जाएंगे।

    इस पहल का उद्देश्य कांवड़ियों के स्वागत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के प्रति लोगों को जागरूक करना है। वन विभाग मंदिरों से संपर्क कर पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा और पौधरोपण से जुड़ी स्वयंसेवी संस्थाओं की भी मदद ली जाएगी।

  • सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम में हंगामा और मुख्य न्यायाधीश से अभद्रता करने वाले लॉ के दो छात्र गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी

    सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम में हंगामा और मुख्य न्यायाधीश से अभद्रता करने वाले लॉ के दो छात्र गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी

    नई दिल्ली । देश की सर्वोच्च अदालत के भीतर एक बेहद चौंकाने वाली घटना में न्यायिक कार्यवाही को बाधित करने, फाइलों को हवा में उछालने और देश के मुख्य न्यायाधीश के प्रति अत्यंत अभद्र व असंसदीय भाषा का प्रयोग करने वाले कानून के दो छात्रों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सुरक्षाकर्मियों के साथ हाथापाई और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में इन छात्रों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी के तिलक मार्ग थाने में एक आपराधिक प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की वैधानिक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

    सुरक्षा अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों की पहचान लखनऊ विश्वविद्यालय में विधि संकाय के छात्रों के रूप में की गई है। इनमें से एक आरोपी का नाम प्रबल प्रताप सिंह है, जो कानून के तीसरे वर्ष का छात्र है और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा का निवासी है। वहीं, दूसरे आरोपी की पहचान चंद्र भान के रूप में हुई है, जो इसी विश्वविद्यालय में विधि द्वितीय वर्ष का छात्र है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह पूरी कानूनी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट परिसर की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा स्टाफ के लिखित बयान और शिकायत के आधार पर अमल में लाई गई है।

    यह अभूतपूर्व घटना सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 13 के भीतर घटित हुई, जब अदालत में एक विशेष अनुमति याचिका पर नियमित सुनवाई चल रही थी। अदालत के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस याचिका का शीर्षक ‘प्रबल प्रताप व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार’ था। इस संवेदनशील मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी प्रबल प्रताप सिंह किसी अधिवक्ता के माध्यम से पेश होने के बजाय खुद ही याचिकाकर्ता-इन-पर्सन के रूप में न्यायाधीशों के समक्ष उपस्थित होकर अपनी दलीलें रख रहा था।

    दर्ज की गई प्राथमिकी के विवरण के मुताबिक, न्यायिक कार्यवाही के दौरान दलीलें खारिज होने या किसी अन्य कारण से आरोपी प्रबल प्रताप सिंह अचानक उग्र हो गया और उसने पूरी तरह से सोची-समझी रणनीति के तहत अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाना शुरू कर दिया। उसने जजों के सामने बेहद अमर्यादित, अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। अपना आपा खोते हुए उसने कोर्ट रूम के भीतर मौजूद महत्वपूर्ण अदालती कागजात और कानूनी फाइलों को हवा में उछाल दिया, जिससे वे पूरे कोर्ट रूम में बिखर गईं। इस हिंसक आचरण से अदालत कक्ष के भीतर पूरी तरह से अव्यवस्था और अशांति का माहौल पैदा हो गया।

    घटना के वक्त कोर्ट रूम में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षाकर्मियों के अनुसार, आरोपी छात्र यहीं नहीं रुका, बल्कि उसने देश के मुख्य न्यायाधीश के प्रति भी सीधे तौर पर अमर्यादित शब्दों और गालियों का प्रयोग किया। जब कोर्ट रूम की सुरक्षा में तैनात ऑन-ड्यूटी सुरक्षाकर्मियों और प्रशासनिक स्टाफ ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उसे पकड़ने तथा शांत करने का प्रयास किया, तो दोनों आरोपी छात्र और अधिक हिंसक हो गए। उन्होंने सुरक्षा स्टाफ के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू कर दी, जिससे ऑन-ड्यूटी कर्मचारियों को अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने में गंभीर बाधा का सामना करना पड़ा।

    न्यायालय परिसर के भीतर इस प्रकार के अप्रत्याशित हंगामे को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल को तुरंत मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों उपद्रवी छात्रों को काबू में किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट प्रशासन की लिखित शिकायत पर तिलक मार्ग थाना पुलिस ने विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर दोनों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने देश की सबसे बड़ी अदालत की सुरक्षा व्यवस्था और कोर्ट रूम के भीतर वकीलों व याचिकाकर्ताओं के आचरण को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिस पर आने वाले दिनों में और सख्त रुख अपनाए जाने की संभावना है।

  • कल से शुरू होगी जगन्नाथ रथ यात्रा…. सोने की झाड़ू से होती है यात्रा मार्ग की सफाई, जानें इसकी वजह

    कल से शुरू होगी जगन्नाथ रथ यात्रा…. सोने की झाड़ू से होती है यात्रा मार्ग की सफाई, जानें इसकी वजह


    पुरी।
    ‘जगन्नाथ रथ यात्रा 2026’ (Jagannath Rath Yatra 2026) का शुभारंभ 16 जुलाई से होने जा रहा है. हिंदू धर्म (Hinduism) में भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) की रथ यात्रा सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक आयोजनों में गिनी जाती है. इस रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ भव्य रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं. इस रथ यात्रा में एक बड़ी ही अनोखी और विशेष परंपरा निभाई जाती है, जो वहां मौजूद हर एक शख्स का ध्यान खींचती है।

    रथ यात्रा के दौरान गजपति महाराज या उनके राजवंश के उत्तराधिकारी झाड़ू लेकर रथ के मार्ग की सफाई करते हैं. ये झाड़ू बहुत ही खास होती है, जिसमें सोने का हत्था लगा होता है. इसी से रथ मार्ग की सफाई की जाती है. इसके बाद वैदिक मंत्रों और जयघोष के बीच रथ यात्रा का शुभारंभ होता है. आइए जानते हैं कि रथ यात्रा के मार्ग को साफ करने के लिए सोने की झाड़ू का प्रयोग क्यों किया जाता है।

    1. जगन्नाथ रथ यात्रा में सोने की झाड़ू से मार्ग की सफाई केवल एक औपचारिक रस्म नहीं, बल्कि गहरी आध्यात्मिक भावना का प्रतीक मानी जाती है. हिंदू परंपरा में सोने को शुद्धता, पवित्रता और दिव्यता का प्रतीक माना गया है. इसलिए भगवान के रथ के मार्ग को सोने के हत्थे वाली झाड़ू से साफ करना उनके स्वागत और सम्मान का विशेष तरीका माना जाता है।

    3. यह परंपरा यह संदेश भी देती है कि ईश्वर की दृष्टि में हर व्यक्ति समान है. क्या राजा और क्या प्रजा. गजपति महाराज स्वयं झाड़ू लगाकर यह दर्शाते हैं कि ईश्वर के सामने राजा और सामान्य व्यक्ति में कोई भेद नहीं होता है. यह विनम्रता, सेवा और समर्पण की सर्वोच्च प्रतीक है।

    3. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोना सौभाग्य, समृद्धि और शुभता का भी प्रतीक है. इसलिए इस पवित्र अनुष्ठान को सकारात्मक ऊर्जा और मंगलमय वातावरण का माध्यम माना जाता है. श्रद्धालु ऐसा मानते हैं कि इस परंपरा के दर्शन और सहभागिता से भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है. यह परंपरा कई पीढ़ियों से निरंतर निभाई जा रही है और आज भी रथ यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

  • मानसून सत्र में परिसीमन बिल पास कराने की तैयारी… इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाले दलों से समर्थन पर बातचीत जारी

    मानसून सत्र में परिसीमन बिल पास कराने की तैयारी… इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाले दलों से समर्थन पर बातचीत जारी


    नई दिल्ली।
    मानसून सत्र (Monsoon-Session) में परिसीमन (Delimitation) व महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment-Bill) को पारित कराने के लिए मोदी सरकार (Modi Government) ने अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसके लिए जरूरी दो तिहाई संख्या बल हासिल करने के लिए सरकार ने विपक्षी दलों की तीन श्रेणियां बनाई हैं। हाल ही में इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाली द्रमुक के अलावा एनसीपी (एसपी), जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस से विधेयक को प्रत्यक्ष समर्थन करने पर, जबकि दूसरे कई अन्य गैर कांग्रेसी दलों से परोक्ष समर्थन पर बातचीत का दौर जारी है।

    सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दलों की तीन श्रेणियों में पहली श्रेणी ऐसे दलों की है, जो विधेयक का समर्थन नहीं करेंगे। दूसरी श्रेणी समर्थन की संभावना वाले दलों की है। तीसरी श्रेणी मतदान से दूरी बनाने की संभावना वाले दलों की है। सूत्रों की माने तो प्रत्यक्ष समर्थन के लिए द्रमुक, वाईएसआर कांग्रेस की कुछ मांगों पर विचार किया जा रहा है। इसी श्रेणी में शरद पवार की एनसीपी भी शामिल है। सदन में अगर पुरानी स्थिति रही तो सरकार को दो तिहाई बहुमत के लिए अतिरिक्त 54 तो वर्तमान स्थिति के हिसाब से 60 मतों का जुगाड़ करना होगा।


    संसद में कैसे सधेगा नंबर गेम?

    इस बीच तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के 20 सांसदों का एनसीपीआई में विलय और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने के बाद सरकार को पुरानी स्थिति में 28 मतों और वर्तमान स्थिति में 36 अतिरिक्त मतों का जुगाड़ करना होगा। अगर द्रमुक के 22, एनसीपी (एसपी) के 8 और वाईएसआर कांग्रेस के 4 सांसदों ने विधेयक का समर्थन किया तो सरकार की परेशानी दूर हो जाएगी। मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर के वॉयस ऑफ पीपुल्स, यूपीपीएल और जेडपीएम (4 सांसद) को पहले ही साध लिया है।


    दूसरी स्थिति के लिए भी रणनीति

    द्रमुक, एनसीपी (एसपी) और वाईएसआर कांग्रेस में से एक या दो दल अगर समर्थन के लिए राजी नहीं हुए तो इन्हें मतदान से दूर रहने के लिए मनाया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि तृणमूल के कम से कम दो सांसद इस प्रस्ताव को स्वीकार कर सकते हैं। इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल, निर्दलीय सांसदों को भी समर्थन न देने की स्थिति में मतदान से दूर रहने के लिए मनाया जाएगा। फिर सरकार की विपक्षी दलों के उन सांसदों पर भी नजर है जो नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं।


    सत्र के दौरान बनेगी अंतिम रणनीति

    सरकार की योजना विपक्षी दलों से लगातार बातचीत जारी रखते हुए सत्र के दौरान अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने की है। सरकार के सूत्रों ने बताया कि विधेयक को अगले महीने के पहले सप्ताह में पेश करने की है। ऐसे में सत्र के दौरान विपक्षी दलों से मंथन का नया दौर शुरू होगा।

  • महाराष्ट्र में नए सियासी उलटफेर के संकेत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस संग एनसीपी के दोनों धड़ों की गोपनीय बैठक से गरमाया राजनीतिक माहौल

    महाराष्ट्र में नए सियासी उलटफेर के संकेत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस संग एनसीपी के दोनों धड़ों की गोपनीय बैठक से गरमाया राजनीतिक माहौल

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़े सियासी फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं, जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आधिकारिक आवास पर मंगलवार देर रात राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं की ताबड़तोड़ बैठकें हुईं। इन गोपनीय मुलाकातों के बाद से ही कयासों का बाजार बेहद गर्म है और विपक्षी खेमे में भारी बेचैनी देखी जा रही है। सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी गठबंधन को बड़ा झटका देकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के पाले में जाने की तैयारी कर रही है।

    प्राप्त विवरण के अनुसार, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पहले दक्षिण मुंबई स्थित शरद पवार के आवास ‘सिल्वर ओक’ पर जाकर उनसे बेहद लंबी मंत्रणा की। इसके तुरंत बाद वे देर शाम सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करने पहुंचे। इस दौरान राजनीतिक तापमान तब और बढ़ गया जब सत्ताधारी एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल भी अलग से मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। हालांकि बैठक में शामिल किसी भी नेता या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस चर्चा के मुख्य एजेंडे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन दोनों ही गुटों के सूत्रों ने इस बात को स्वीकार किया है कि पर्दे के पीछे किसी बड़े राजनीतिक समझौते की पटकथा लिखी जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जुलाई 2023 में पार्टी के विभाजन के बाद यह पहली बार है जब शरद पवार की पार्टी सबसे बड़े रणनीतिक संकट का सामना कर रही है। अंदरूनी सूत्रों की मानें तो शरद पवार गुट के कुल 10 विधायकों में से कम से कम आधे से अधिक विधायक भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में शामिल होने के प्रबल पक्ष में हैं। लंबे समय तक विपक्षी खेमे में रहने के कारण इन विधायकों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए आवश्यक विकास निधि जुटाने और प्रशासनिक मंजूरियां हासिल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, जिससे उनके जमीनी राजनीतिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे थे।

    पार्टी के प्रांतीय नेतृत्व ने हाल ही में अपने विधायकों की इस गंभीर भावना और चिंताओं से शीर्ष आलाकमान को विस्तार से अवगत कराया था। यद्यपि शरद पवार ने इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक अपनी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही पार्टी के अगले कदम को लेकर कोई सार्वजनिक घोषणा की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि वे अपने विधायकों के भारी दबाव के कारण इस नए विकल्प पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इस साल की शुरुआत में मुंबई महानगरपालिका चुनावों के बाद से ही दोनों धड़ों के एक होने या शरद गुट के कांग्रेस में विलय की खबरें आती रही हैं, लेकिन कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के कड़े विरोध के कारण अब बाजी पूरी तरह एनडीए की ओर मुड़ती हुई दिखाई दे रही है।

    संख्या बल के रणनीतिक गणित को देखें तो विधानसभा में शरद पवार गुट के पास वर्तमान में 10 विधायक और लोकसभा में 8 सांसद मौजूद हैं। हालांकि यह महाराष्ट्र के प्रमुख राजनीतिक दलों में संख्या के हिसाब से छोटा समूह प्रतीत हो सकता है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा नीत एनडीए के लिए इसकी उपयोगिता बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। केंद्र सरकार आगामी संसद सत्रों में सीमांकन विधेयक जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कानूनों को पारित कराने की योजना बना रही है, जिसके लिए उसे उच्च सदन और निम्न सदन दोनों में अतिरिक्त मतों की आवश्यकता है। ऐसे समय में एनडीए के शीर्ष रणनीतिकार शरद पवार गुट से मिलने वाले किसी भी संभावित वैधानिक समर्थन का खुले दिल से स्वागत करने के लिए तैयार दिख रहे हैं।

    यह राजनीतिक उथल-पुथल सिर्फ शरद पवार खेमे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अजित पवार गुट के भीतर भी भारी अंतर्विरोध और मंथन का दौर जारी है। इस साल जनवरी के अंत में एक दुखद विमान हादसे में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद से राज्य की राजनीति का पूरा परिदृश्य बदल चुका है। उनके निधन के बाद से दोनों गुटों के दोबारा एक होने की सुगबुगाहट तो तेज हुई थी, लेकिन नेतृत्व को लेकर बात नहीं बन सकी। अब सुनेत्रा पवार के नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर ही कानूनी आपत्तियां उठाई जा रही हैं, जिसने संगठन के आंतरिक असंतोष को उजागर कर दिया है। इन सभी बदलते हालातों के बीच दिल्ली से लेकर मुंबई तक की राजनीतिक नजरें अब शरद पवार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।

  • भारत समेत रूसी तेल खरीद वाले पांच देशों पर 100% टैरिफ…., US में कड़े प्रतिबंध वाला विधेयक पेश

    भारत समेत रूसी तेल खरीद वाले पांच देशों पर 100% टैरिफ…., US में कड़े प्रतिबंध वाला विधेयक पेश


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका (America) के दोनों प्रमुख दलों के सीनेटरों (Senators) ने रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाने वाला बहुप्रतीक्षित विधेयक (Bill) पेश किया है। इसमें भारत समेत पांच देशों का नाम शामिल है, जिन पर रूस से तेल की खरीद जारी रखने पर शुल्क लगाया जा सकता है। कुछ सांसद इस प्रस्ताव को “लिंडसे ग्राहम रूस अकाउंटेबिलिटी बिल” (Lindsey Graham Russia Accountability Bill) कह रहे हैं। इसे मंगलवार को कैपिटल हिल में डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल और जीन शाहीन के साथ रिपब्लिकन सीनेटर रोजर विकर, केटी ब्रिट और दोनों दलों के एक दर्जन से अधिक सांसदों ने पेश किया।

    यह विधेयक सीनेटर लिंडसे ग्राहम के निधन के तुरंत बाद पेश किया गया है। ग्राहम ने करीब दो वर्षों तक इस विधेयक पर काम किया था और उनके सहयोगियों ने उन्हें इसका प्रमुख सूत्रधार बताया। इस विधेयक में ग्राहम ने रूसी तेल खरीद करने वाले देशों पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने की सिफारिश की थी।


    अमेरिकी सांसदों ने क्यों पेश किया 100 फीसदी टैरिफ वाला बिल?

    मुख्य डेमोक्रेटिक प्रायोजक ब्लूमेंथल ने कहा कि यह विधेयक केवल शुल्क लगाने तक सीमित नहीं है। इसमें रूस की अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से, ऊर्जा और वित्तीय क्षेत्र, रक्षा उद्योग, रूसी उद्योगपतियों तथा राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। विधेयक में प्रशासन को यह अधिकार भी दिया गया है कि वह रूस से सबसे अधिक तेल खरीदने वाले देशों पर शून्य से अधिक दर पर शुल्क लगा सके। हालांकि, शुल्क की अधिकतम सीमा तय की गई है।

    विधेयक के अनुसार, अब शुल्क केवल रूस से तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले दुनिया के शीर्ष पांच देशों पर लागू होगा। विधेयक के प्रायोजकों ने कहा कि इस सूची में चीन और भारत सबसे ऊपर हैं। संशोधित मसौदे में पहले प्रस्तावित 500 फीसदी शुल्क को घटाकर अधिकतम 100 फीसदी कर दिया गया है।


    टैरिफ वाले देशों की सूची में भारत का भी नाम

    ब्लूमेंथल ने जिन पांच देशों का नाम लिया, उनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। विधेयक में रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों को भी दायरे में लाने का प्रावधान है। हालांकि, जो देश अपनी कुल गैस का 15 फीसदी से कम रूस से आयात करते हैं और इन आयातों को कम करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें इससे छूट मिलेगी। इस प्रावधान से अधिकांश यूरोपीय सहयोगी देशों को राहत मिलेगी।

    सीनेटरों ने स्पष्ट किया कि शुल्क की वास्तविक दर अभी तय नहीं की गई है। इसे विधेयक में निर्धारित नहीं किया गया है, बल्कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव) तय करेंगे। ब्लूमेंथल ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शुल्क की दर इतनी होगी कि “चीन, भारत और रूस से तेल तथा गैस खरीदने वाले अन्य बड़े देशों को इससे हतोत्साहित किया जा सके।” हालांकि, उन्होंने कोई निश्चित प्रतिशत बताने से इनकार कर दिया।


    ट्रंप के पास छूट देने का विशेषाधिकार

    विधेयक में राष्ट्रपति को विशेष परिस्थितियों में छूट देने का अधिकार भी दिया गया है। अगर बाद में शुल्क कम किया जाता है तो इसकी जानकारी कांग्रेस को देना भी अनिवार्य होगा। अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के अध्यक्ष सीनेटर जेम्स रिश ने कहा कि उन्होंने एक अलग प्रावधान जोड़ने पर जोर दिया, जिसके तहत रूस के तथाकथित “शैडो फ्लीट” यानी उन तेल टैंकरों पर कार्रवाई की जाएगी, जिनका इस्तेमाल मौजूदा प्रतिबंधों से बचकर तेल निर्यात के लिए किया जाता है।

    सांसदों ने कहा कि इस विधेयक को पहले के मसौदे की तुलना में काफी सीमित किया गया है। पहले के संस्करण में कथित तौर पर 63 देशों तक पर शुल्क लगाने का प्रावधान था। ब्लूमेंथल ने कहा कि मौजूदा मसौदा केवल रूस से तेल खरीदने वाले पांच और गैस खरीदने वाले पांच प्रमुख देशों पर केंद्रित है। इनमें कुछ देशों के नाम दोनों सूचियों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव ट्रंप प्रशासन के सुझाव पर किया गया है और प्रशासन ने लिखित रूप से इस विधेयक का समर्थन भी किया है।


    लिंडसे ग्राहम को लेकर क्या बोले अमेरिकी सांसद?

    सांसदों ने उम्मीद जताई कि संशोधित मसौदे को प्रतिनिधि सभा में भी व्यापक समर्थन मिलेगा, क्योंकि पहले के व्यापक प्रस्ताव पर कई सांसदों ने आपत्ति जताई थी। विधेयक की घोषणा के दौरान कई सीनेटरों ने लिंडसे ग्राहम को श्रद्धांजलि दी। सीनेटर रोजर विकर ने कहा कि ग्राहम के साथ तीन दशक से अधिक समय तक काम करने के दौरान उन्होंने कई उपलब्धियां देखीं, लेकिन “यह उनका सबसे बड़ा योगदान है।”

    सीनेटर टेड क्रूज ने कहा कि ग्राहम ने निधन से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ इस विधेयक की शर्तों पर सीधे बातचीत की थी। उन्होंने सांसदों से अपील की कि इसे भारी बहुमत से पारित कर ग्राहम को श्रद्धांजलि दी जाए। सांसदों ने कहा कि इस विधेयक को जल्द पारित करना जरूरी है। उन्होंने यूक्रेन की युद्धक्षेत्र में बढ़त और रूस की ओर से नागरिक इलाकों पर जारी हमलों का हवाला दिया।

    कई सीनेटरों ने उम्मीद जताई कि अगस्त के अंत तक सीनेट इस पर कार्रवाई कर सकती है। उनका कहना है कि पर्याप्त समर्थन मिलते ही इस पर मतदान कराया जाएगा। जब राष्ट्रपति ट्रंप के उस सुझाव के बारे में पूछा गया कि इस विधेयक में ईरान या हिजबुल्ला पर प्रतिबंधों को भी शामिल किया जा सकता है, तो ब्लूमेंथल ने कहा कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता मौजूदा विधेयक को आगे बढ़ाने की है। हालांकि, उन्होंने भविष्य में अलग विधेयक लाने की संभावना से इनकार नहीं किया।


    भारत पर क्यों गहराया संकट?

    भारत ने अब तक रियायती दर पर रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने के लिए पश्चिमी देशों के दबाव को स्वीकार नहीं किया है। 2022 के बाद से रूस से भारत का तेल आयात काफी बढ़ा है और अब यह भारत के कुल तेल आयात का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। नई दिल्ली पहले भी कह चुका है कि यह व्यापार देश की ऊर्जा सुरक्षा और उपभोक्ताओं के हित में है। भारत का यह भी कहना रहा है कि इससे वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलती है।

    यह विधेयक अभी सीनेट की प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद प्रतिनिधि सभा से भी पारित होना बाकी है। इसके बाद ही इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इससे पहले व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने एएनआई से कहा कि ट्रंप प्रशासन इस रूस प्रतिबंध विधेयक का समर्थन करता है। व्हाइट हाउस के अधिकारी ने कहा कि इस विधेयक के तहत राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों से आने वाले आयात पर 500 फीसदी तक शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस के ऊर्जा क्षेत्र के साथ कारोबार जारी रखते हैं।