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  • साइबर खतरों को लेकर गंभीर आरोप: डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया

    साइबर खतरों को लेकर गंभीर आरोप: डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया


    नई दिल्ली । डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों और निजता के उल्लंघन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जब पीपल फोरम ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने अपने परिवार को कथित रूप से निशाना बनाए जाने और मोबाइल टैपिंग जैसी गतिविधियों के आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यह मामला न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़ा बताया जा रहा है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते असुरक्षित वातावरण की ओर भी इशारा करता है, जहां आम नागरिकों की निजता खतरे में पड़ती दिख रही है।

    डॉ. मल्लप्पा ने अपने आरोपों में कहा है कि उनके परिवार के सदस्यों को संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों के जरिए निशाना बनाया गया, जिसमें अज्ञात व्यक्ति द्वारा टेलीग्राम जैसे माध्यम से संदिग्ध लिंक भेजे जाने की घटना शामिल है। यह लिंक केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी और भाई को भी भेजा गया, जिससे यह आशंका और गहरी हो गई कि यह कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि सुनियोजित डिजिटल हमला हो सकता है। इन घटनाओं को लेकर उन्होंने संबंधित शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग व्यवस्था में दर्ज कराई थी, जिसके बाद मामला जांच की प्रक्रिया में बताया जा रहा है।

    इस शिकायत में 13 अप्रैल को दर्ज की गई ऑनलाइन अपराध संबंधी प्रविष्टि का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें डिजिटल साक्ष्य और संबंधित रिकॉर्ड जांच एजेंसियों को सौंपे जाने की बात कही गई है। डॉ. मल्लप्पा का कहना है कि इस तरह की घटनाएं केवल व्यक्तिगत उत्पीड़न तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह नागरिकों की मौलिक स्वतंत्रता, निजता और सुरक्षा पर सीधा हमला हैं।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोबाइल टैपिंग, साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल माध्यमों से डराने-धमकाने जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिन्हें अब अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, यह एक व्यापक पैटर्न की ओर संकेत करता है, जिसे रोकने के लिए संस्थागत स्तर पर सख्त और त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।

    डॉ. मल्लप्पा ने मानवाधिकार आयोग से अपील की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए, जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए देश के साइबर सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि आम नागरिक सुरक्षित वातावरण में डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकें।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि जागरूकता की कमी और तकनीकी सुरक्षा में खामियां ऐसे मामलों को और बढ़ावा देती हैं, इसलिए सरकार और संबंधित संस्थानों को मिलकर एक मजबूत रणनीति तैयार करनी चाहिए। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मौजूदा डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था नागरिकों की निजता की रक्षा करने में पर्याप्त है या नहीं, और क्या भविष्य में ऐसे मामलों पर और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता होगी।

  • भारत-यूरोप संबंधों को नई दिशा, पीएम मोदी की पांच देशों की यात्रा से खुल सकते हैं विकास के नए रास्ते

    भारत-यूरोप संबंधों को नई दिशा, पीएम मोदी की पांच देशों की यात्रा से खुल सकते हैं विकास के नए रास्ते


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों की लंबी और महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पूरी करने के बाद गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली लौट आए। इस यात्रा को भारत की विदेश नीति और वैश्विक संबंधों के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया, जहां विभिन्न देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ व्यापक चर्चा हुई।

    यात्रा के अंतिम चरण में इटली में प्रधानमंत्री मोदी और वहां की प्रधानमंत्री के बीच हुई बैठक विशेष रूप से चर्चा में रही। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति जताते हुए उन्हें ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने का फैसला किया। यह कदम आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई गति देने वाला माना जा रहा है।

    इस मुलाकात के दौरान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विस्तार से बातचीत हुई, जिनमें रक्षा, ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, विज्ञान और प्रौद्योगिकी शामिल रहे। दोनों देशों ने आगामी वर्षों में व्यापारिक संबंधों को कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। इसके साथ ही शिक्षा, संस्कृति और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।

    इस यात्रा के दौरान वैश्विक परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श हुआ, जिसमें पश्चिम एशिया की स्थिति और रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसे विषय प्रमुख रहे। इन चर्चाओं के जरिए भारत ने अपने संतुलित और स्पष्ट कूटनीतिक दृष्टिकोण को एक बार फिर दुनिया के सामने रखा है। यह दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर केवल दर्शक नहीं बल्कि एक सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

    दिल्ली लौटने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम भी काफी व्यस्त रहा। राजधानी पहुंचते ही उन्होंने शाम को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें सरकार के कामकाज की समीक्षा और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई। इस बैठक को नीति निर्माण और प्रशासनिक सुधारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस पांच देशों की यात्रा से भारत को कई स्तरों पर लाभ मिल सकता है। एक ओर जहां विदेशी निवेश और व्यापारिक अवसरों में बढ़ोतरी की संभावना है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी सहयोग और ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल सकती हैं। यूरोपीय देशों और पश्चिम एशिया के साथ मजबूत होते संबंध भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।

    इसके अलावा, इस यात्रा से भारतीय उद्योगों और स्टार्टअप्स के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ने से रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है और देश की आर्थिक वृद्धि को भी गति मिल सकती है।

  • पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर दिल्ली में श्रद्धांजलि सभा, कांग्रेस नेताओं ने किया नमन

    पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर दिल्ली में श्रद्धांजलि सभा, कांग्रेस नेताओं ने किया नमन

    नई दिल्ली । पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 35वीं पुण्यतिथि के अवसर पर राजधानी दिल्ली स्थित वीरभूमि में बुधवार सुबह श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पहुंचे। सुबह से ही परिसर में श्रद्धा और भावनाओं का माहौल देखने को मिला, जहां लोग शांत वातावरण में पूर्व प्रधानमंत्री को नमन करते नजर आए। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वीरभूमि पहुंचकर राजीव गांधी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान पूरा वातावरण गंभीर और भावुक बना रहा, जबकि कार्यकर्ताओं की भी भारी मौजूदगी देखने को मिली।

    कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पूरे क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को मजबूत रखा गया था। श्रद्धांजलि समारोह में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित कई वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे और सभी ने राजीव गांधी के राजनीतिक जीवन और देश के प्रति उनके योगदान को याद किया। नेताओं ने उन्हें आधुनिक भारत की सोच रखने वाला दूरदर्शी नेता बताया और उनके कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों को भी स्मरण किया।

    इस अवसर पर पार्टी की ओर से देशभर में भी अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें कई जगह सामाजिक गतिविधियां जैसे रक्तदान शिविर और पौधारोपण कार्यक्रम भी शामिल रहे। राजधानी दिल्ली में वीरभूमि के बाहर सुबह से ही कार्यकर्ताओं और समर्थकों की आवाजाही बनी रही। लोग फूल लेकर पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की।

    राजीव गांधी का निधन 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बुदुर में एक चुनावी सभा के दौरान हुआ था। उस दौरान एक आत्मघाती हमलावर ने माला पहनाने के बहाने उनके करीब आकर विस्फोट कर दिया था, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई थी। यह घटना देश के इतिहास में एक अत्यंत दुखद अध्याय के रूप में दर्ज है, जिसने पूरे राष्ट्र को शोक में डुबो दिया था।

    तब से हर वर्ष 21 मई को कांग्रेस पार्टी और उनके समर्थक राजीव गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके योगदान को याद करते हैं। 35 वर्ष बाद भी यह दिन उनके राजनीतिक जीवन, विचारों और देश के लिए किए गए कार्यों को स्मरण करने का अवसर बन गया है, जहां नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर उन्हें नमन करते हैं।

  • कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए एक खुशखबरी आई है। भारतीय दवाई नियामक बोर्ड ने कैंसर के लिए 7 मिनट टेंकेट्रिक इंजेक्शन को मंजूरी दे दी है।

    कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए एक खुशखबरी आई है। भारतीय दवाई नियामक बोर्ड ने कैंसर के लिए 7 मिनट टेंकेट्रिक इंजेक्शन को मंजूरी दे दी है।


    नई दिल्ली । भारत में हर वर्ष हजारों की संख्या में लोग कैंसर की चपेट में आकर मौत के मुंह में समा जाते हैं। लाखों भारतीय हर समय इस जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं। इतना ही नहीं जितनी भी रिपोर्ट्स इस बीमारी को लेकर सामने आती हैं, उसमें भारतीयों के ऊपर सबसे बड़ा खतरा कैंसर को ही बताया जाता है। कैंसर को लेकर कई लोगों की आम धारणा है कि बीमारी से पहले इंसान इसके इलाज से ज्यादा कमजोर हो जाता है। अब इस परेशानी को दूर करने के लिए कैंसर की एक नई ‘7 मिनट कैंसर इंजेक्शन’ को मंजूरी मिली है। इससे कैंसर का इलाज काफी आसान और सरल होने की संभावना है।
    मेडीकल के क्षेत्र की बड़ी कंपनी रोश की कैंसर दवा के नए टेंकेट्रिक इंजेक्शन को भारत दवा नियामक संस्था CDSCO ने मंजूरी दे दी है। मुंबई के कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर रमन नारंग के मुताबिक सामान्य तौर पर इम्यूनोथेरेपी में दवाईयां नसों के जरिए दी जाती है, जिसमें 30 मिनट से एक घंटे का वक्त लगता है। लेकिन इस नए इंजेक्शन में सिर्फ सात मिनट का वक्त लगता है। दूसरी बात इसे ड्रिप के जरिए नहीं बल्कि त्वचा के जरिए भी दिया जा सकता है।
    कैसे काम करती है नया 7 मिनट टेकेंट्रिक इंजेक्शन
    सामान्य रूप से कैंसर का इलाज कीमोथैरेपी के जरिए किया जाता है। इस इलाज प्रक्रिया में थैरेपी सीधा कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती हैं। इसकी वजह से शरीर की जो स्वस्थ कोशिकाओं होती हैं, वह भी प्रभावित होती हैं, जिसकी वजह से मरीजों को बाल झड़ना, कमजोरी, उल्टी और थकान जैसी समस्या महसूस होती है। कीमोथैरपी की प्रक्रिया में इंसान बहुत ही ज्यादा कमजोर भी हो जाता है।
    विशेषज्ञों के मुताबिक नई 7 मिनट टेकेंट्रिक इंजेक्शन की इम्यूनोथेरेपी अलग तरीके से काम करती है। डॉक्टर्स के मुताबिक यह इंजेक्शन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में मदद करती है। इस इंजेक्शन की दवा शरीर में मौजूद कैंसर कोशिकाओं को छिपने नहीं देती बल्कि प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करके सीधा उस पर हमला करती है। दूसरी बात कैंसर की दवाई को सामान्य तौर पर नसों के जरिए शरीर में भेजा जाता है, लेकिन इस इंजेक्शन को त्वचा के नीचे से सीधा प्रवेशित कराया जा सकता है। इसकी वजह से यह जल्दी काम करती है।
    इस मामले के जानकार लोगों के मुताबिक, 7 मिनट इंजेक्शन भारत में बढ़ते कैंसर मरीजों के लिए एक चमत्कार साबित हो सकता है। इससे लंबी दूरी से अस्पताल आने वाले मरीजों को राहत मिलेगी, दूसरी तरफ अस्पताल में भी उनको कम समय लगेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में हर साल 14 से 15 लाख नए कैंसर मरीज सामने आते हैं। अगर यह दवाई कारगर सिद्द होती है तो इससे इन मरीजों के लिए इलाज थोड़ा आसान साबित होगा।
    दवाई अपने साथ कुछ समस्याएं लेकर भी आई
    हर दवाई के अपने कुछ साइड इफेक्ट भी होते हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक यह इंजेक्शन हर कैंसर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके अलावा इसके कुछ साइड इफेक्ट जैसे- बुखार, कमजोरी, सांस लेने में दिक्कत, स्किन की दिक्कत या फेंफड़ों में सूजन भी आ सकती है। ऐसे में किसी भी तरह के इलाज के लिए डॉक्टर्स की निगरानी बहुत जरूरी है।
    भले ही कंपनी और डॉक्टर्स इस इलाज को कैंसर मरीजों के लिए चमत्कार बता रहे हैं। लेकिन इसकी सबसे बड़ी परेशानी इसकी कीमत है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक कैंसर मरीज को अपना इलाज पूरा करवाने के लिए इस इंजेक्शन के कम से कम 6 डोज की जरूरत होती है। वर्तमान में इस इंजेक्शन के एक डोज की कीमत 3.7 लाख रुपए है। ऐसे में अगर कोई पूरा इलाज लेता है, तो केवल दवाई का खर्च ही 22 लाख रुपए के आसपास पहुंच जाएगा। भारत जैसे मध्यम आय वाली जनता के लिए यह रकम बहुत ज्यादा है।
    भले ही कंपनी और रिपोर्ट्स इस इलाज को बेहतर बता रही हों। लेकिन डॉक्टर्स ने इसको लेकर अपना दूसरा नजरिया भी रखा है। डॉक्टर्स का कहना है कि यह कोई जादुई इलाज नहीं है। लेकिन वर्तमान में कैंसर मरीजों को लंबे इलाज और परेशानी का सामना करना पड़ता है, उससे राहत देने के लिए यह पर्याप्त है।
  • रोम से स्वदेश रवाना हुए PM मोदी…. अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करेगा 5 देशों का दौरा

    रोम से स्वदेश रवाना हुए PM मोदी…. अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करेगा 5 देशों का दौरा


    रोम (इटली)।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने अपने पांच देशों के आधिकारिक दौरे को पूरा करते हुए बुधवार को इटली (Italy) के रोम (Rome) से भारत के लिए प्रस्थान किया। यह दौरा भारत की वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


    इटली यात्रा में रिश्तों को मिली नई मजबूती

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इटली यात्रा को बेहद सफल बताते हुए कहा कि उनकी चर्चा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित रही। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भारत और इटली ने अपने संबंधों को स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक पहुंचाने का निर्णय लिया है, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों के सहयोग को नई गति मिलेगी। पीएम मोदी ने इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से मुलाकात कर व्यापार, निवेश, संस्कृति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की।


    आतंक के वित्तपोषण के खिलाफ भारत इटली की पहल वैश्विक नजीर: मोदी

    पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती है और भारत-इटली दोनों इस बात पर एकमत हैं। आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ हमारी पहल ने पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। पीएम मोदी ने कहा, भारत और इटली ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जिम्मेदार लोकतंत्र न केवल आतंकवाद की निंदा करते हैं, बल्कि इसके वित्तीय नेटवर्क को बाधित करने के लिए ठोस कदम भी उठाते हैं। पीएम ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया संकट के बारे में कहा कि हम यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अन्य तनावों के संबंध में लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं। भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि सभी समस्याओं का समाधान संवाद और कूटनीति से होना चाहिए। इटली की पीएम जियोर्जिया मेलनी के साथ वार्ता के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी ने कहा, दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के साथ-साथ हमारी सेनाओं में भी सहयोग बढ़ रहा है।


    इटली दौरे की बड़ी उपलब्धियां

    – दोनों देशों के संबंध को विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदलने से द्विपक्षीय संबंध तेजी से आगे बढ़ेगा।
    – भारत-इटली रक्षा औद्योगिक रोडमैप: रक्षा सहयोग और रक्षा उत्पादन तंत्र मजबूत होगा।
    – दुर्लभ खजिनों के क्षेत्र में सहयोग का एमओयू से खोज-खनन-उत्पादन में तेजी। आधुनिक तकनीक और निवेश में सहयोग बढ़ेगा।
    – ईडी-इटली के वित्तीय निगरानी विभाग में सहयोग से टैक्स संबंधी अपराधों, धनशोधन और आतंकवाद के खिलाफ फंडिंग पर मिलकर काम होगा।
    – भारत-इटली में 2027 को संस्कृति और पर्यटन वर्ष के रूप में मनाने का समझौता: दोनों देशों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
    – भारतीय नर्सों को काम के लिए इटली भेजने का समझौता: इससे भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा। दुनिया में भारतीय कार्यबल की गुणवत्ता को मान्यता।
    – गुजरात के लोथल में नेशनल मेरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स निर्माण के एमओयू से भारतीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा।
    – उच्च शिक्षा और शोध में सहयोग का रोडमैप: शोध की गुणवत्ता, औद्योगिक संपर्क और आधुनिक शिक्षण का तंत्र विकसित होगा। क्षमता निर्माण होगा।
    – समुद्री परिवहन क्षेत्र में सहयोग के लिए एमओयू से समुद्री बुनियादी ढांचा मजबूत होगा।


    रणनीतिक साझेदारी को मिला नया आयाम

    दोनों देशों ने संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 की प्रगति की समीक्षा की और व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा, ब्लू इकोनॉमी, कनेक्टिविटी, शिक्षा और जन-से-जन संबंधों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। इटली सरकार ने भी इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि भारत और इटली के संबंध अब अपने सबसे उच्च स्तर पर पहुंच चुके हैं।


    MEA ने बताया यात्रा को सफल

    विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस दौरे को बेहद सफल बताया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा के अंतिम चरण में इटली में कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं। पीएम मोदी ने 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया। इस दौरान भारत ने कई देशों के साथ अपने आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी संबंधों को मजबूत किया।


    भारत और इटली के बीच का द्विपक्षीय व्यापार

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले जून 2024 में ग्रुप ऑफ सेवन (G7) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इटली गए थे। अब उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देश संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029 को सक्रिय रूप से लागू कर रहे हैं। इस व्यापक रोडमैप के तहत व्यापार, निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है।

    मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2025 में भारत-इटली द्विपक्षीय व्यापार 16.77 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं अप्रैल 2000 से सितंबर 2025 के बीच इटली से भारत में 3.66 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) दर्ज किया गया। दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।


    यात्रा के दौरान मिले कई सम्मान

    इसी यात्रा क्रम में नॉर्वे दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया गया, जो उनका 32वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। नॉर्वे में उन्होंने भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया। इसके अलावा स्वीडन में उन्हें ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ से सम्मानित किया गया और दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करते हुए रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर सहमति जताई।

  • ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री से सियासत गरम, 2029 चुनाव और केजरीवाल संग गठजोड़ पर अभिजीत ने दिया बयान

    ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री से सियासत गरम, 2029 चुनाव और केजरीवाल संग गठजोड़ पर अभिजीत ने दिया बयान


    नई दिल्ली।
    सोशल मीडिया पर अचानक उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ इन दिनों राजनीतिक और डिजिटल दोनों मंचों पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस आंदोलन के पीछे 30 वर्षीय अभिजीत दीपके हैं, जिन्होंने हाल ही में बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स किया है। उनका दावा है कि यह सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि देश के युवाओं की नाराजगी और हताशा की आवाज है।

    अभिजीत ने बताया कि कुछ दिन पहले तक वह अमेरिका में नौकरी के लिए आवेदन कर रहे थे, लेकिन चीफ जस्टिस की उस टिप्पणी ने उन्हें झकझोर दिया जिसमें सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ से की गई थी। इसी के बाद उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि अगर यही बयान किसी राजनीतिक नेता ने दिया होता तो शायद इतना असर नहीं होता, लेकिन जब संविधान की रक्षा करने वाले पद पर बैठा व्यक्ति ऐसी टिप्पणी करे तो युवाओं को चोट पहुंचना स्वाभाविक है।

    अभिजीत के मुताबिक, पार्टी को शुरू हुए महज कुछ ही दिनों में लाखों लोग इससे जुड़ गए। इंस्टाग्राम पर पार्टी के 33 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं, जबकि वेबसाइट पर लाखों युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। उनका कहना है कि यह किसी प्रायोजित अभियान का नतीजा नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर जमा गुस्से का विस्फोट है।

    अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी से रिश्तों को लेकर भी अभिजीत ने खुलकर बात की। उन्होंने माना कि वह 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी के कम्युनिकेशन विभाग से जुड़े थे और शिक्षा-स्वास्थ्य मॉडल से प्रभावित होकर काम किया था। हालांकि उन्होंने साफ किया कि फिलहाल उनकी नई मुहिम किसी भी पारंपरिक राजनीतिक दल से दूरी बनाए रखना चाहती है।

    केजरीवाल के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि कोई भी समर्थन दे सकता है, लेकिन ‘जेन-जी’ के युवा नहीं चाहते कि इस आंदोलन पर किसी स्थापित पार्टी की छाया पड़े। 2029 के चुनाव लड़ने के सवाल पर अभिजीत ने कहा कि अभी इस पर फैसला लेना जल्दबाजी होगी। पहले युवाओं की राय ली जाएगी और उसी आधार पर आगे की रणनीति तय होगी। उनका कहना है कि मौजूदा राजनीति युवाओं की असली समस्याओं से दूर हो चुकी है और अब राजनीतिक विमर्श बदलने की जरूरत है।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी वेबसाइट पर पांच सूत्रीय एजेंडा भी जारी किया है। इसमें न्यायपालिका और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, महिलाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व, मीडिया स्वामित्व पर सवाल और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दे शामिल हैं। अभिजीत का कहना है कि यह एक आदर्श लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा में सोच है।

    उन्होंने मौजूदा राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में वर्षों से हिंदू-मुस्लिम जैसे मुद्दों पर राजनीति हो रही है, जबकि युवाओं के सामने रोजगार, शिक्षा, तकनीक और भविष्य जैसे बड़े सवाल खड़े हैं। उन्होंने ‘नीट पेपर लीक’ मामले का जिक्र करते हुए कहा कि सिस्टम की विफलता ने कई युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है।

    अभिजीत ने दावा किया कि यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा। उनका कहना है कि देश के युवा अब अपनी आवाज लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाने के लिए तैयार हैं। फंडिंग और संगठनात्मक ढांचे को लेकर उन्होंने कहा कि फिलहाल टीम रणनीति तैयार कर रही है और जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। उनका उद्देश्य एक स्वतंत्र और लंबे समय तक चलने वाला युवा आंदोलन खड़ा करना है।

  • PM मोदी आज लेंगे कैबिनेट मीटिंग, फेरबदल की अटकलों के बीच लिए जा सकते हैं बड़े फैसले

    PM मोदी आज लेंगे कैबिनेट मीटिंग, फेरबदल की अटकलों के बीच लिए जा सकते हैं बड़े फैसले


    नई दिल्ली।
    पांच देशों के दौरे से वापस आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) गुरुवार को कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) करेंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, लिए गए प्रमुख निर्णयों और उनके नतीजों तथा भविष्य की योजनाओं सहित अन्य विषयों पर चर्चा होगी। पीएम मोदी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्रियों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के बीच, यह इस वर्ष कैबिनेट की पहली पूर्ण बैठक होगी।

    सूत्रों ने बताया कि बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के कामकाज, हाल के दिनों में लिए गए प्रमुख निर्णयों और उनके परिणामों, तथा भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के अलग-अलग पहलुओं, उन्हें अधिकतम सफलता के लिए कैसे लागू किया जाए और अन्य विषयों की भी समीक्षा किए जाने की उम्मीद है।


    क्या होगा बैठक का एजेंडा?

    पीएम मोदी के पश्चिम एशिया में जारी संकट और उसके आर्थिक प्रभावों का जिक्र करने की संभावना है और वह मंत्रालयों तथा विभागों को निर्देश दे सकते हैं कि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए किस तरह से आगे बढ़ा जाए। सूत्रों ने बताया कि बैठक में ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, विमानन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।

    पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के कुछ ही समय बाद, मोदी ने सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया था कि वे नागरिकों और इससे प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को कम करने के लिए हर संभव कदम उठाएं।


    आमजन को फायदा पहुंचाने पर होगी चर्चा

    बैठक में आम लोगों के फायदे के लिए सभी क्षेत्रों में सुधार लाने की सरकार की प्राथमिकता पर भी चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री ने इससे पहले अगले 10 वर्षों के लिए सुधार की प्राथमिकताओं की रूपरेखा पेश करते हुए कहा था कि उनकी सरकार की रिफॉर्म एक्सप्रेस ने व्यवस्थागत बदलाव लाए हैं और आम नागरिकों को काफी हद तक लाभ पहुंचाया है। यह बैठक प.बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की जबर्दस्त जीत के बाद हो रही है।

  • NEET UG: री-एग्जाम से पहले अलर्ट मोड पर सरकार…. अफवाहों पर नकेल कसने की तैयारी

    NEET UG: री-एग्जाम से पहले अलर्ट मोड पर सरकार…. अफवाहों पर नकेल कसने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    मेडिकल (Medical) की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) के री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार (Central government) पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गई है। 3 मई को हुई परीक्षा में पेपर लीक (Paper leak) और ग्रेस मार्क्स जैसे विवादों के बाद, अब सरकार सोशल मीडिया पर फैलने वाली झूठी अफवाहों और पैनिक फैलाने वाले पोस्ट्स पर सख्त नकेल कसने की तैयारी में है। छात्रों का भरोसा फिर से बहाल करने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने टेक जगत के दिग्गजों- गूगल (Google), मेटा (Meta) और टेलीग्राम (Telegram) को भी अपने साथ जोड़ लिया है, ताकि किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी को इंटरनेट पर फैलने से पहले ही रोका जा सके। बता दें कि आज 21 जून को NEET-UG का दोबारा एग्जाम हो रहा है।


    शिक्षा मंत्री ने लिया मोर्चा, दिए ‘फोकस्ड क्रैकडाउन’ के निर्देश

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को एक हाई-लेवल मीटिंग की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रतिनिधियों के अलावा केंद्रीय खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी भी मौजूद रहे। शिक्षा मंत्री ने सख्त हिदायत दी है कि परीक्षा से पहले ऑनलाइन एक्टिव होने वाले उन नेटवर्क्स पर सीधा और ‘फोकस्ड क्रैकडाउन’ किया जाए, जो एक सोची-समझी साजिश के तहत गलत जानकारी फैलाते हैं।


    टेलीग्राम और सीक्रेट ग्रुप्स पर खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर

    शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी चिंता टेलीग्राम चैनल्स, अनजान ग्रुप्स और बॉट्स को लेकर है, जो बड़े एग्जाम्स से ठीक पहले अचानक बहुत एक्टिव हो जाते हैं। ये ग्रुप्स व्यूज और पैसों के लालच में ‘पेपर लीक’ के झूठे दावे, क्लिकबेट मैसेज और बिना सिर-पैर की जानकारी सर्कुलेट करते हैं। इससे छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच दहशत का माहौल बन जाता है।

    खुफिया इनपुट्स से यह भी खुलासा हुआ है कि कुछ चुनिंदा फोन नंबर्स का इस्तेमाल करके दर्जनों संदिग्ध चैनल ऑपरेट किए जा रहे हैं, जो इनकी संगठित गतिविधि की ओर इशारा करता है। इसके बाद एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल सर्विलांस और कड़ी कर दी गई है। उन ग्रुप्स पर खास नजर है जो छात्रों को एग्जाम से पहले “अंदर की जानकारी” या एडवांस में पेपर देने का दावा करते हैं।


    टेक कंपनियों ने दिया पूरा सहयोग का भरोसा

    राहत की बात यह है कि सरकार की इस सख्ती पर मेटा, गूगल और टेलीग्राम जैसी कंपनियों ने सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि परीक्षा से जुड़ी किसी भी भ्रामक या फेक जानकारी की पहचान करके उसे तेजी से ब्लॉक और रिमूव किया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने कंपनियों से कहा है कि वे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और पुलिस एजेंसियों के साथ मिलकर काम करें, ताकि प्रोपेगेंडा और खौफ फैलाने वाले चैनल्स को तुरंत बंद किया जा सके।

    अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को भी परीक्षा से पहले डिजिटल सर्विलांस मजबूत करने को कहा गया है। उन एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स और तेजी से बढ़ रहे ग्रुप्स पर खास नजर रखी जा रही है, जो परीक्षार्थियों को परीक्षा से जुड़ी सामग्री एडवांस में देने या ‘इनसाइड इंफॉर्मेशन’ मुहैया कराने का दावा करते हैं।


    एग्जाम सेंटर पर कैसी होगी व्यवस्था?

    मंगलवार को री-एग्जाम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए शिक्षा मंत्री ने साफ कर दिया था कि पिछली परीक्षा की सभी खामियों को पूरी तरह दूर किया जाना चाहिए। सभी राज्यों के जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ को-ऑर्डिनेशन मीटिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मकसद परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और मॉनिटरिंग के प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करना है। इसके साथ ही, अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि री-एग्जाम के दिन छात्रों के लिए ट्रांसपोर्टेशन (आवाजाही), पीने के पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं का खास ख्याल रखा जाए ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।


    क्यों हो रहा है नीट री-एग्जाम?

    आपको बता दें कि 3 मई को आयोजित की गई नीट-यूजी परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। इसके बाद ही री-एग्जाम की घोषणा की गई थी। इस पूरे विवाद (पेपर लीक के आरोप, ग्रेस मार्क्स विवाद और संगठित नकल) ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद सरकार अब हर स्तर पर सख्ती बरत रही है।

  • प्रेमानंद जी महाराज का जवाब: विदेश में नॉनवेज खाने के बाद भी लोग तरक्की कैसे करते हैं? जानिए गहरी सीख

    प्रेमानंद जी महाराज का जवाब: विदेश में नॉनवेज खाने के बाद भी लोग तरक्की कैसे करते हैं? जानिए गहरी सीख




    नई दिल्ली। प्रेमानंद जी महाराज  के एकांतिक वार्ता में दिए गए विचारों पर आधारित एक सवाल ने लोगों का ध्यान खींचा है। भक्त ने पूछा कि विदेशों में लोग मांसाहार करते हैं, फिर भी वे तरक्की कैसे कर लेते हैं? इस पर महाराज जी ने जीवन, धर्म और “सच्ची उन्नति” को लेकर गहरी बात समझाई।

    महाराज जी के अनुसार, केवल भौतिक सफलता या पैसा कमाना ही असली उन्नति नहीं है। उन्होंने कहा कि असली उन्नति वह है जिसमें मन की शांति, संस्कार और आध्यात्मिक संतुलन भी शामिल हो। उनके अनुसार, बाहरी सफलता को ही पूरी उन्नति मान लेना एक अधूरी सोच है।

    शाकाहार और कर्म का संदेश
    प्रेमानंद जी महाराज ने यह भी कहा कि हर जीव के जीवन का मूल्य है और कर्म का प्रभाव व्यक्ति पर जरूर पड़ता है। उन्होंने समझाया कि व्यक्ति के कर्म ही उसके जीवन के परिणाम तय करते हैं, और समय के साथ हर चीज का फल मिलता है।

    विदेश और “उन्नति” पर विचार
    भक्त के सवाल पर महाराज जी ने कहा कि केवल धन और भोग-विलास को उन्नति मानना सही नहीं है। उनके अनुसार, सच्ची शांति और संतोष केवल बाहरी सुविधाओं से नहीं मिलता, बल्कि आंतरिक संस्कारों और आध्यात्मिक जीवन से मिलता है।

    आधुनिकता और अध्यात्म का संतुलन
    महाराज जी ने यह भी कहा कि आधुनिक शिक्षा जरूरी है, लेकिन उसके साथ अध्यात्म का संतुलन भी होना चाहिए। उनके अनुसार, यदि दोनों साथ चलें तो समाज अधिक संतुलित और शांतिपूर्ण बन सकता है।

  • तेलंगाना ने केंद्र से मांगी 5,000 करोड़ की विशेष वित्तीय सहायता, यंग इंडिया स्कूल परियोजना के लिए दी मांग

    तेलंगाना ने केंद्र से मांगी 5,000 करोड़ की विशेष वित्तीय सहायता, यंग इंडिया स्कूल परियोजना के लिए दी मांग


    नई दिल्ली।
    तेलंगाना सरकार ने केंद्र से विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की मांग की है, ताकि राज्य में पूंजीगत निवेश और विकास परियोजनाओं को गति दी जा सके। उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री से नई दिल्ली में मुलाकात की और राज्य की आर्थिक, शैक्षणिक और मानव संसाधन विकास संबंधी जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में वित्तीय सहायता की आवश्यकता, विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में किए जा रहे बड़े निवेशों की व्याख्या की गई।

    उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को बताया कि तेलंगाना में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे निवेश, विशेषकर यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल्स (वाईआईआईआरएस) परियोजना, राज्य की सामाजिक और शैक्षणिक संरचना में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। इस परियोजना का कुल बजट 30,000 करोड़ रुपए है और यह लाखों बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण संबंधी सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। उन्होंने आर्थिक मामलों के विभाग से इस परियोजना को एफआरबीएम सीमा से छूट देने की अपील भी की, ताकि दीर्घकालिक मानव पूंजी निवेश पर वित्तीय प्रतिबंध न आए।

    विक्रमार्क ने कहा कि इस पहल से राज्य के वंचित और पिछड़े वर्गों के बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और पौष्टिक भोजन मिलेगा, जो उन्हें सशक्त बनाएगा और राज्य की जनसांख्यिकीय क्षमता को मजबूत करेगा। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय वित्त मंत्री को ज्ञापन सौंपकर एसएएससीआई योजना के तहत अतिरिक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता और इसके महत्व को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। उन्होंने यह भी बताया कि तेलंगाना की आबादी में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग बहुसंख्यक हैं, और उनके सशक्तिकरण के लिए यह योजना निर्णायक साबित होगी।

    केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ हुई इस बैठक में राज्य के कृषि और मानव संसाधन विकास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कृषि मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव और अन्य प्रतिनिधियों ने राज्य में कृषि, ग्रामीण विकास और शिक्षा से जुड़े बड़े निवेशों के महत्व को रेखांकित करते हुए वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत छूट की मांग की। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त वित्तीय सहायता के बिना राज्य की दीर्घकालिक विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं और मानव पूंजी में निवेश की गति धीमी पड़ सकती है।

    पिछले वर्ष भी इसी प्रकार की बैठक में मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने यंग इंडिया प्रोजेक्ट के लिए विशेष वित्तीय सहायता और एफआरबीएम छूट की मांग की थी, और अब इस मांग को दोबारा केंद्र के समक्ष रखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस योजना के कार्यान्वयन से तेलंगाना के पिछड़े और वंचित वर्गों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में स्थायी लाभ मिलेगा। इसके साथ ही राज्य की आर्थिक क्षमता बढ़ेगी और दीर्घकालिक मानव संसाधन विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

    इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री को यह स्पष्ट किया गया कि तेलंगाना की अधिकांश आबादी सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों से आती है। इस आंकड़े के अनुसार, राज्य की आबादी का 56.33 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग, 17.43 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 10.45 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति से संबंधित है। इस सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने एसएएससीआई योजना के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की मांग की है, ताकि शैक्षणिक और सामाजिक सुधारों को समय पर लागू किया जा सके और राज्य में समग्र विकास को बढ़ावा दिया जा सके।