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  • बांग्लादेश से यूनुस के जाते ही सुधरने लगे रिश्ते…. अगले महीने भारत आएंगे विदेश मंत्री रहमान

    बांग्लादेश से यूनुस के जाते ही सुधरने लगे रिश्ते…. अगले महीने भारत आएंगे विदेश मंत्री रहमान


    नई दिल्ली।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में मुहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का शासन खत्म होने ही भारत बांग्लादेश (India-Bangladesh) के रिश्ते पटरी पर लौटने लगे हैं। इसकी शुरुआत बांग्लादेश के विदेश मंत्री (Foreign Minister) की भारत यात्रा से हो सकती है। मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान (Foreign Minister Khalilur Rahman) अगले महीने भारतीय राजधानी की एक संक्षिप्त यात्रा पर आ सकते हैं। यह इसीलिए अहम है क्योंकि ढाका में तारिक रहमान की सरकार बनने के बाद बांग्लादेशी विदेश मंत्री की यह पहली विदेश यात्रा होगी।

    यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब दोनों ही देश संबंधों में आए भारी तनाव के बाद रिश्तों को दोबारा मजबूत बनाने की कोशिशें कर रही हैं। सूत्रों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि रहमान 8 अप्रैल को मॉरीशस में होने वाले हिंद महासागर सम्मेलन में जाते समय नई दिल्ली में रुक सकते हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि रहमान यूनुस सरकार का भी हिस्सा रह चुके हैं और वे तब पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इसके बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Prime Minister Tariq Rahman) के मंत्रिमंडल में उनका नाम काफी चौंकाने वाला कदम था।

    इससे पहले भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने पिछले महीने ढाका में रहमान से मुलाकात की थी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ओर से उन्हें जल्द से जल्द भारत आने का निमंत्रण दिया था। हालांकि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की पहली विदेश यात्रा के बारे में ढाका की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सूत्रों का मानना है कि इस बात की संभावना कम है कि तारिक रहमान पहले दौरे पर भारत या चीन जाएंगे।

    इसकी वजह यह है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार ने यह संकेत दिए हैं कि उसकी विदेश नीति किसी भी क्षेत्रीय शक्ति के पक्ष में नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक बांग्लादेशी प्रधानमंत्री भूटान या मालदीव की यात्रा कर सकते हैं। सूत्रों ने बताया, “प्रधानमंत्री रहमान इस क्षेत्र के भीतर मजबूत संबंध बनाना चाहते हैं और उन क्षेत्रीय नेताओं के प्रति अपना आभार भी व्यक्त करना चाहते हैं जो उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे।”

  • पश्चिम एशिया संकट के बीच रूस से भी LPG खरीदेगा भारत… सरकार ने दिए संकेत

    पश्चिम एशिया संकट के बीच रूस से भी LPG खरीदेगा भारत… सरकार ने दिए संकेत


    नई दिल्ली।
    ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US war) के बीच पूरी दुनिया में कच्चे तेल (Crude Oil) का संकट पैदा होने लगा है। एलपीजी (LPG) की भी दिक्कतें आने लगी हैं। इस बीच, एलपीजी को लेकर भारत सरकार (Government of India) ने गुरुवार को बड़े संकेत दिए हैं। विदेश मंत्रालय से सवाल पूछा गया कि क्या भारत रूस से एलपीजी खरीद रहा है, इस पर सरकार ने कहा कि अगर रूस में उपलब्ध होगी, तो वहां से खरीदी जाएगी।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पूछा गया कि क्या हम रूस से एलपीजी खरीद रहे हैं? इस पर उन्होंने जवाब दिया, ”एलपीजी हम सभी जगह से खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, जहां वह उपलब्ध है। अगर उसमें रूस भी होगा, तो वहां भी जाएंगे, क्योंकि स्थिति अभी इस प्रकार की है। हमें सुनिश्चित करना है कि हमारे लोगों का ईंधन की जरूरतें हैं, वह पूरा हो। कई देश हैं, जहां से एलपीजी खरीद रहे हैं। अभी इन देशों का ब्योरा नहीं है, यह सब पेट्रोलियम मंत्रालय ज्यादा जानकारी देगा, लेकिन हम चाहते हैं कि विकल्प हमारे पास कई हों।”


    ‘तेल और गैस के कुंओं तथा रिफाइनरियों पर हमले चिंताजनक’

    भारत ने खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस के कुंओं तथा तेल रिफाइनरियों पर हमलों को अत्यंत चिंताजनक बताया है। सरकार ने कहा है कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता और हमले तुरंत रोके जाने चाहिए। पिछले कुछ दिनों में ईरान-अमेरिका जंग और भीषण हुई है। ईरान ने कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों के कई तेल कुओं और रिफाइनरियों को निशाना बनाया है। अमेरिका-इजरायल ने भी ईरानी तेल सुविधाओं पर हमले किए हैं।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले कुछ दिनों में खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना पर हुए हमलों के संबंध में मीडिया के प्रश्नों के उत्तर में गुरुवार को कहा कि भारत ने यह संघर्ष शुरू होने पर ही कहा था कि नागरिक और ऊर्जा ठिकानों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा ,” भारत ने पहले ही पूरे क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना सहित नागरिक अवसंरचना को निशाना बनाने से बचने का आह्वान किया था। इस क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हालिया हमले अत्यंत चिंताजनक हैं और ये पूरे विश्व के पहले से ही अनिश्चित ऊर्जा परिदृश्य को और अस्थिर करते हैं। ऐसे हमले अस्वीकार्य हैं और इन्हें तुरंत बंद किया जाना चाहिए।”

  • राष्ट्रपति द्रौपदी तीन दिवसीय प्रवास पर पहुंचीं श्रीकृष्ण की नगरी, इस्कॉन-प्रेम मंदिर में किए दर्शन

    राष्ट्रपति द्रौपदी तीन दिवसीय प्रवास पर पहुंचीं श्रीकृष्ण की नगरी, इस्कॉन-प्रेम मंदिर में किए दर्शन


    मथुरा।
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु गुरुवार की शाम तीन दिवसीय प्रवास पर श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा पहुंचीं। यहां से सीधे वृंदावन गई, जहां उन्होंने इस्कॉन मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए ठाकुरजी के भव्य दर्शन किए तथा प्रेममंदिर के दर्शन किए। शुक्रवार की सुबह वह बांकेबिहारी जी महाराज के दर्शन पूजा-अर्चना के साथ अन्य कई कार्यक्रमों में भाग लेंगी। राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर मथुरा पुलिस प्रशासन ने कड़े प्रबंध किए हैं।

    राष्ट्रपति द्रौपदी का गुरुवार शाम को मथुरा में सेना के छावनी परिसर में बने हेलीपैड पर उनका हेलीकॉप्टर उतरा। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मंत्री गन्ना विकास एवं चीनी मिलें लक्ष्मी नारायण चौधरी, प्रभारी मंत्री/राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बेसिक शिक्षा विभाग संदीप सिंह, राज्यसभा सांसद तेजवीर सिंह ने बुके देकर उनकी अगवानी की। इस मौके पर मथुरा वृन्दावन नगर निगम के महापौर विनोद अग्रवाल, लेफ्टिनेंट जनरल वी हरिहरन, अपर पुलिस महानिदेशक आगरा अनुपम कुलश्रेष्ठ, मंडलायुक्त आगरा नगेन्द्र प्रताप, ग्रुप कैप्टन शिवम मनचंदा, जिलाधिकारी मथुरा चन्द्र प्रकाश सिंह तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा श्लोक कुमार भी मौजूद थे। इसके बाद राष्ट्रपति का काफिला वृंदावन के लिए रवाना हो गया।

    राष्ट्रपति ने किए इस्कॉन मंदिर दर्शनः राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वृंदावन स्थित इस्कॉन मंदिर (श्रीश्री कृष्ण बलराम मंदिर) के दर्शन किए। इस्कॉन मंदिर (श्री श्री कृष्ण बलराम मंदिर) में पंचगौड़ा दास, जनार्दन दास, विष्णुनाम दास, शुतकीर्ति दास, रवि लोचन दास एवं देवदत्त स्वामी ने भव्य स्वागत किया। इसके बाद राष्ट्रपति एवं राज्यपाल ने श्री अभयचरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी की समाधि स्थल के दर्शन किए तथा समाधि स्थल की परिक्रमा लगाई। परिक्रमा के बाद राष्ट्रपति मुर्मु एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने श्रीश्री कृष्ण बलराम मंदिर/मुख्य मंदिर के दर्शन किए तथा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। वैदिक मंत्रों के बीच राष्ट्रपति ने पूजन की सामग्री भगवान को अर्पण किया। पूरा मंदिर प्रांगण शुभ मंत्रों से गूंज उठा। यह नजारा देखने में बहुत ही अद्भुत रहा। उन्होंने मंदिर में हाथ जोड़कर प्रभु का स्मरण किया। राष्ट्रपति द्रौपदी एवं राज्यपाल आनंदीबेन ने मंदिर परिसर में बालिकाओं द्वारा किए जा रहे नृत्य(सांस्कृतिक कार्यक्रम) का अवलोकन किया तथा मंदिर में आयोजित कीर्तन को सुना। दर्शन कार्यक्रम में पंचगौड़ा दास, जनार्दन दास, विष्णुनाम दास, शुतकीर्ति दास, रवि लोचन दास, देवदत्त स्वामी, राधागोलोकानंद स्वामी, मुकुंदा दास, जादूनंदन दास, धर्मात्मा दास, पार्थ कृष्णा दास (गौ-सेवक) एवं गणपति दास उपस्थित रहे।

    तय कार्यक्रम के अनुसार 21 मार्च तक राष्ट्रपति तक ब्रज में प्रवास करेंगी। दो दिन वृंदावन में मंदिरों के दर्शन करेंगी। वह संत प्रेमानंद से आध्यात्मिक चर्चा करेंगी। 20 मार्च को वह वृंदावन के उड़िया बाबा आश्रम, नीव करौरी बाबा आश्रम, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, वात्सल्य ग्राम जाएंगी। रामकृष्ण मिशन चेरिटेबिल अस्पताल में कैंसर यूनिट का उद्घाटन करेंगी। 21 मार्च की सुबह आठ बजे गोवर्धन प्रस्थान करेंगी। सुबह 9 बजे दानघाटी मंदिर में पूजा अर्चरा करेंगी। इसके बाद गोल्फ कार्ट से परिक्रमा लगाएंगी। ब्रज की पावन धरती पर आध्यात्मिकता और गरिमा का अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु श्रीकृष्ण की मनोमयी लीला से प्रकट मानसी गंगा में श्रद्धा अर्पित करेंगी। महज 10 मिनट का यह कार्यक्रम भले ही समय में सीमित हो, लेकिन इसकी धार्मिक महत्ता और सांस्कृतिक संदेश दूर तक गूंजेंगे।

    मुकुट मुखारविंद मंदिर के रिसीवर कपिल चतुर्वेदी के अनुसार, राष्ट्रपति के आगमन पर श्रीजी पीठाचार्य मनीष बाबा उन्हें सबसे पहले मानसी गंगा की पूजा अर्चना कराएंगे। इसके बाद वह मुकुट मुखारविंद मंदिर में विराजमान गिरिराजजी का दूध व रबड़ी से अभिषेक कर विधिवत पूजन करेंगी। पूरे कार्यक्रम को अत्यंत व्यवस्थित ढंग से 10 मिनट में संपन्न कराने की योजना बनाई गई है। भागवत किंकर गोपाल प्रसाद उपाध्याय बताते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने गंगा को अपने मन से ब्रज में प्रकट किया, जिससे इसका नाम ‘मानसी गंगा’ पड़ा।


    राष्ट्रपति की सुरक्षा में आठ जिलों की फोर्स तैनात : एसएसपी

    इससे पहले बुधवार को वृंदावन से गोवर्धन तक प्रस्तावित राष्ट्रपति के दौरे को लेकर पूरे रूट पर फुल ड्रेस रिहर्सल किया गया। इसमें सुरक्षा, यातायात और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बारीकी से परखा गया। रिहर्सल के दौरान काफिले में शामिल वाहनों ने निर्धारित मार्ग पर चलकर हर संभावित स्थिति का अभ्यास किया। सुबह से ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी रूट पर तैनात हो गए थे। काफिला वृंदावन से शुरू होकर गोवर्धन तक पहुंचा और इस दौरान मार्ग में आने वाले प्रमुख चौराहों, संकरे रास्तों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों का विशेष रूप से निरीक्षण किया गया। राष्ट्रपति के काफिले के लिए ‘जीरो ट्रैफिक’ व्यवस्था लागू करने की तैयारियां भी रिहर्सल के दौरान देखी गईं। इसके तहत काफिले के गुजरने के समय पूरे रूट को आम यातायात के लिए पूरी तरह खाली रखा जाएगा। इसके लिए वैकल्पिक मार्गों और डायवर्जन की योजना पर भी अभ्यास किया गया। रिहर्सल के चलते कई स्थानों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किए गए। एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि राष्ट्रपति के दौरे के मद्देनजर आठ जिलों की फोर्स तैनात की गयी है। कई स्थानों पर रूट डायवर्जन लागू रहेगा।

  • बाल मृत्यु दर में बड़ी कमी भारत की वैश्विक सराहना संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट में मिला बड़ा सम्मान

    बाल मृत्यु दर में बड़ी कमी भारत की वैश्विक सराहना संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट में मिला बड़ा सम्मान


    नई दिल्ली :
    संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट ने भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि की पुष्टि की है। इस रिपोर्ट के अनुसार देश में बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिसे वैश्विक स्तर पर एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने भारत के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा है कि बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण और प्रभावशाली काम किया है।

    इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में भारत की इस उपलब्धि को सराहा गया है और बच्चों की मृत्यु दर में आई गिरावट देश के लिए गर्व का विषय है। पीएम मोदी ने इसे सरकार और देश के प्रयासों का परिणाम बताया।

    संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्यु दर अनुमान अंतर एजेंसी समूह यानी यूएनआईजीएमई की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने नवजात और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को कम करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर और निरंतर प्रयास किए हैं, जिनका सीधा असर जमीन पर दिखाई देता है।

    आंकड़ों के अनुसार 1990 में जहां नवजात शिशु मृत्यु दर 57 थी, वहीं 2024 में यह घटकर 17 रह गई है। यह लगभग 70 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है। इसी तरह पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 1990 में 127 थी, जो 2024 में घटकर 27 रह गई है। यह लगभग 79 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है, जो भारत की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का प्रमाण है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत ने दक्षिण एशिया क्षेत्र में भी बच्चों की मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले दो दशकों में भारत ने इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुधार के लिए कई पहलें की हैं, जिनमें टीकाकरण अभियान, संस्थागत प्रसव और नवजात देखभाल सेवाओं का विस्तार शामिल है।

    विशेष रूप से सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम और नवजात देखभाल से जुड़ी नीतियों ने बच्चों को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद की है। निमोनिया, डायरिया, मलेरिया और जन्म से जुड़ी जटिलताओं के कारण होने वाली मौतों में भी उल्लेखनीय कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार इन प्रयासों ने लाखों बच्चों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई है।

    रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिकांश बच्चों की मौतें रोकी जा सकती हैं या उनका इलाज संभव है। भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, बेहतर निगरानी और समय पर उपचार ने इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विशेष रूप से एनआईसीयू यानी नवजात गहन देखभाल इकाइयों के सुधार ने नवजात शिशुओं के जीवन को सुरक्षित बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

    हालांकि रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि दक्षिण एशिया में अभी भी दुनिया भर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु का एक बड़ा हिस्सा होता है, लेकिन इस क्षेत्र ने सबसे तेजी से सुधार दिखाया है। यह इस बात का संकेत है कि सही नीतियों और प्रयासों से बड़े स्तर पर बदलाव संभव है।
     

    यह रिपोर्ट भारत के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आई है, जो देश की स्वास्थ्य नीतियों और प्रयासों की सफलता को दर्शाती है। यह उपलब्धि न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण है
  • राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की नितिन गडकरी से मुलाकात बस ट्रक बॉडी उद्योग की समस्याओं पर मंथन तेज

    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की नितिन गडकरी से मुलाकात बस ट्रक बॉडी उद्योग की समस्याओं पर मंथन तेज

    नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी बहन और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब बस और ट्रक बॉडी निर्माण से जुड़ा उद्योग कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है और उद्योग जगत अपनी समस्याओं को लेकर सरकार से समाधान की उम्मीद लगाए बैठा है।

    इस बैठक में राजस्थान के बस और ट्रक बॉडी बिल्डर एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार इस मुलाकात में प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख समस्याओं को विस्तार से सामने रखा। उद्योग से जुड़े लोगों ने खासतौर पर नए तकनीकी मानकों, बढ़ती उत्पादन लागत और मंत्रालय के अनुपालन नियमों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उनका कहना था कि लगातार बदलते नियम और मानकों के चलते छोटे और मध्यम स्तर के निर्माताओं के लिए व्यवसाय चलाना कठिन होता जा रहा है।

    राहुल गांधी ने इस दौरान उद्योग प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना और इन मुद्दों को केंद्रीय मंत्री के सामने रखा। उन्होंने नितिन गडकरी से आग्रह किया कि इन समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द निकाला जाए ताकि इस उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका सुरक्षित रह सके। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि यदि नियमों और शुल्कों का बोझ इसी तरह बढ़ता रहा तो कई छोटे निर्माता बाजार से बाहर हो सकते हैं जिससे रोजगार पर भी असर पड़ेगा।

    सूत्रों के अनुसार गडकरी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यान से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगी और समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने उद्योग की चुनौतियों को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने की बात कही।

    बैठक से पहले भी इन प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी और उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। उस दौरान भी उन्होंने यह चिंता जताई थी कि लाइसेंस प्रक्रिया में अधिक खर्च और समय लगने के कारण छोटे निर्माताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसके साथ ही नए मानकों को पूरा करने में आ रही कठिनाइयों ने भी उनकी चिंता बढ़ा दी है।

    प्रियंका गांधी ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि प्रतिनिधियों ने लाइसेंस और अनुपालन से जुड़ी दिक्कतों को प्रमुख रूप से उठाया है। उन्होंने कहा कि नितिन गडकरी ने इन समस्याओं को समझते हुए जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। इस बयान से उद्योग जगत में थोड़ी राहत की उम्मीद जगी है।

    यह बैठक ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब देश में बुनियादी ढांचे और परिवहन क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। सरकार जहां नियमों को सख्त और आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है वहीं उद्योग जगत चाहता है कि इन नियमों को व्यावहारिक बनाया जाए ताकि छोटे और मध्यम उद्यम भी टिक सकें।

    कुल मिलाकर यह मुलाकात सिर्फ एक राजनीतिक बैठक नहीं बल्कि उद्योग और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन मुद्दों पर क्या ठोस कदम उठाती है और बस ट्रक बॉडी निर्माण उद्योग को किस तरह राहत मिलती है

  • उत्तराधिकारी की चर्चा के बीच नीतीश और सम्राट की बढ़ती नजदीकी ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

    उत्तराधिकारी की चर्चा के बीच नीतीश और सम्राट की बढ़ती नजदीकी ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

    नई दिल्ली/मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार की सियासत में संभावित उत्तराधिकार को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बीच दिखाई देने वाली नजदीकी ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। विभिन्न मंचों पर नीतीश कुमार का सम्राट चौधरी के प्रति भरोसा और उन्हें आगे की जिम्मेदारियों के संकेत के रूप में देखे जा रहे बयानों ने राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयासों को जन्म दिया है।

    सम्राट चौधरी को लेकर चर्चा तब और बढ़ गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान अलग अलग मंचों पर उनके साथ दिखे। जमुई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार ने यह संकेत दिया कि आगे की जिम्मेदारियां अब उन्हीं के नेतृत्व में आगे बढ़ेंगी। इस बयान को लेकर मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे संभावित उत्तराधिकारी के रूप में पेश किए जाने का संकेत माना।

    हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री और नीतीश कुमार के करीबी विजय चौधरी ने स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इसमें कुछ भी नया नहीं है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री का यह स्वभाव रहा है कि वह अपने सहयोगियों को प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए प्रेरित करते हैं। विजय चौधरी ने यह भी कहा कि जिस तरह की व्याख्या की जा रही है वह मीडिया की अपनी कल्पना है और इसका वास्तविकता से कोई सीधा संबंध नहीं है।

    उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सम्राट चौधरी उपमुख्यमंत्री के रूप में मुख्यमंत्री के साथ पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं और सरकार के कार्यों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि किसी को भी उत्तराधिकारी के रूप में पेश किए जाने की बात को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है।

    राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि नीतीश कुमार के बाद बिहार में सत्ता का स्वरूप कैसा होगा। कुछ लोग मानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी को मुख्यमंत्री पद मिल सकता है जबकि जनता दल यूनाइटेड के हिस्से से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि निशांत कुमार को भविष्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है।

    इन तमाम चर्चाओं के बीच जातीय समीकरण और बिहार की राजनीति की जमीनी हकीकत को भी ध्यान में रखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में सत्ता का भविष्य केवल संकेतों या बयानों पर निर्भर नहीं करता बल्कि जमीनी गठजोड़ और राजनीतिक समीकरण भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है और आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह अटकलें किस दिशा में जाती हैं और वास्तव में बिहार की सत्ता का अगला चेहरा कौन बनता है

  • कॉल स्कैम का किंग! FBI की लिस्ट में शामिल केनी पटेल, करोड़ों की ठगी का आरोप

    कॉल स्कैम का किंग! FBI की लिस्ट में शामिल केनी पटेल, करोड़ों की ठगी का आरोप


    नई दिल्ली।  अमेरिका में एक भारतीय युवक पर लोगों से ठगी का आरोप लगा है, जिसकी तलाश एफबीआई कर रही है। जानकारी क मुताबिक, वो एक ऐसे गिरोह का सदस्य है जो लोगों को फोन कर यह कहते थे कि उनकी पहचान या निजी जानकारी किसी अपराध से जुड़ी हुई है। डर और भ्रम पैदा करके लोगों को मजबूर किया जाता था कि वे बड़ी रकम भेजें।
    अमेरिका की जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) ने एक भारतीय नागरिक कल्पेशकुमार रसिकभाई पटेल की तलाश तेज कर दी है। कल्पेशकुमार पटेल पर आरोप है कि उसने 2017 से 2021 के बीच अमेरिका में कई लोगों के साथ धोखाधड़ी की बड़ी साजिश को अंजाम दिया।
    केनी पटेल के नाम से भी जाना जाता है आरोपी
    एफबीआई के मुताबिक, कल्पेशकुमार पटेल जिसे ‘केनी पटेल’ के नाम से भी जाना जाता है, करीब 35 साल का है और फिलहाल अमेरिका के इलिनॉय और पेंसिल्वेनिया के बीच कहीं रह रहा हो सकता है या वहां आ-जा रहा हो सकता है। वह पहले एक फ्यूल स्टेशन पर काम करता था, लेकिन उस पर आरोप है कि वह एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा था, जो लोगों को फोन करके ठगता था।

    फोन कॉल से करोड़ों की ठगी का आरोप
    इस गिरोह का तरीका काफी चालाक था। वे लोगों को फोन कर यह कहते थे कि उनकी पहचान या निजी जानकारी किसी अपराध से जुड़ी हुई है। डर और भ्रम पैदा करके लोगों को मजबूर किया जाता था कि वे बड़ी रकम भेजें। ज्यादातर मामलों में पीड़ितों से नकद पैसा या प्रीपेड डेबिट कार्ड के जरिए पैसे अलग-अलग पते पर भिजवाए जाते थे।

    FBI ने घोषित किया न्याय से भागा हुआ आरोपी
    इस मामले में 22 जून 2023 को अमेरिका की एक अदालत (केंटकी के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट) ने केनी पटेल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। उस पर ‘मेल और वायर फ्रॉड साजिश’ जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल वह फरार है और एफबीआई ने उसे ‘न्याय से भागा हुआ आरोपी’ घोषित किया है।

    आरोपी के बारे में आम लोगों से FBI की अपील
    एफबीआई ने आम लोगों से अपील की है कि अगर किसी को केनी पटेल के बारे में कोई जानकारी मिलती है, तो वह तुरंत एफबीआई के नजदीकी दफ्तर या अमेरिकी दूतावास/कॉन्सुलेट को सूचित करें। जांच एजेंसी का कहना है कि ऐसी कोई भी जानकारी जांच के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है।

  • चारधाम यात्रा में नए नियम: पंजीकरण से तय होगा प्रवेश, गैर-सनातन श्रद्धालुओं पर रोक

    चारधाम यात्रा में नए नियम: पंजीकरण से तय होगा प्रवेश, गैर-सनातन श्रद्धालुओं पर रोक

    देहरादून। 19 अप्रैल से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा से पहले श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (bktc) ने दर्शन व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत केवल सनातन आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं को ही मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा।

    पंजीकरण के आधार पर होगा प्रवेश
    बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा और इसी के आधार पर श्रद्धालुओं की एंट्री तय की जाएगी।

    रजिस्ट्रेशन के दौरान यात्रियों को अपनी पूरी जानकारी देनी होगी, जिसमें नाम, पता, धर्म और आस्था से जुड़ी जानकारी शामिल रहेगी। समिति का कहना है कि इसी प्रक्रिया से गैर-सनातन श्रद्धालुओं की पहचान की जाएगी।

    गैर-सनातन श्रद्धालुओं पर प्रतिबंध
    समिति ने स्पष्ट किया है कि मंदिर परिसर में गैर-सनातन श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। हालांकि, बौद्ध, जैन और सिख धर्म के अनुयायियों पर यह पाबंदी लागू नहीं होगी।

    इसके साथ ही सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को भी और सख्त किया जाएगा, ताकि यात्रा सुचारु और सुरक्षित बनी रहे।

    सारा अली खान को लेकर अलग रुख
    बीकेटीसी ने अभिनेत्री सारा अली खान के मामले को सामान्य नियमों से अलग बताया है। समिति के अनुसार, वह सनातन आस्था में विश्वास रखती हैं और इस आधार पर उनके लिए विशेष व्यवस्था (हलफनामा) का प्रावधान किया गया है।

    सभी यात्रियों के लिए नियम अनिवार्य
    समिति ने साफ कर दिया है कि चारधाम यात्रा पर आने वाले हर श्रद्धालु के लिए पंजीकरण जरूरी होगा। सही जानकारी देने के बाद ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

    अध्यक्ष ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें, ताकि यात्रा की व्यवस्था, सुरक्षा और धार्मिक गरिमा बनी रहे।

  • बिलासपुर नसबंदी कांड: 12 महिलाओं की मौत पर डॉक्टर दोषी, 2 साल की सजा और जुर्माना

    बिलासपुर नसबंदी कांड: 12 महिलाओं की मौत पर डॉक्टर दोषी, 2 साल की सजा और जुर्माना

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित बिलासपुर नसबंदी कांड में करीब 11 साल बाद अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर आर.के. गुप्ता को गैर-इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए दो साल की सजा और जुर्माना लगाया है।

    डॉक्टर को सजा और जुर्माना
    अदालत ने डॉ. आर.के. गुप्ता को दो साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 12 महिलाओं की मौत के लिए प्रत्येक मामले में 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा अन्य धाराओं में भी उन्हें छह महीने और एक महीने की अतिरिक्त सजा व जुर्माना दिया गया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

    2014 के नसबंदी कैंप से जुड़ा मामला
    यह मामला 8 नवंबर 2014 का है, जब बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक के पेंडारी स्थित एक अस्पताल में नसबंदी शिविर लगाया गया था। इस कैंप में 83 महिलाओं की सर्जरी की गई थी।

    सर्जरी के बाद उसी दिन महिलाओं को घर भेज दिया गया, लेकिन कुछ ही घंटों में 50 से अधिक महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई। बाद में इनमें से 12 महिलाओं की मौत हो गई।

    जल्दबाजी और लापरवाही बनी वजह
    अभियोजन पक्ष के अनुसार, डॉ. गुप्ता ने एक बंद पड़े निजी अस्पताल में महज छह घंटे के भीतर 80 से ज्यादा महिलाओं की नसबंदी कर दी थी।

    जांच में सामने आया कि:

    चिकित्सा मानकों का पालन नहीं किया गया

    घटिया और दूषित दवाओं का इस्तेमाल हुआ

    सर्जरी के बाद उचित देखभाल नहीं दी गई

    मौतों की वजह सेप्टीसीमिया (खून में संक्रमण) बताई गई, जो कथित लापरवाही और दूषित दवाओं के कारण हुआ।

    दवा कंपनियों से जुड़े आरोपी बरी
    इस मामले में दवा आपूर्ति से जुड़े पांच लोगों के खिलाफ भी आरोप तय किए गए थे, लेकिन अदालत ने सबूतों के अभाव में सभी को बरी कर दिया।

    जमानत भी मिली
    चूंकि डॉ. गुप्ता को सुनाई गई सजा तीन साल से कम है, इसलिए अदालत ने कानूनी प्रावधानों के तहत उन्हें जमानत भी दे दी है।

    लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के गंभीर परिणामों को उजागर किया है। यह मामला सिस्टम की जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल भी खड़े करता है।

  • ADR Report: केरल में 70% विधायकों पर आपराधिक केस, आधे से ज्यादा करोड़पति

    ADR Report: केरल में 70% विधायकों पर आपराधिक केस, आधे से ज्यादा करोड़पति

    नई दिल्ली । केरल के विधायकों की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के लगभग 70 प्रतिशत मौजूदा विधायकों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। इतना ही नहीं, आधे से ज्यादा विधायक करोड़पति भी हैं।
    आपराधिक मामलों का बढ़ता ग्राफ
    एडीआर और केरल इलेक्शन वॉच द्वारा किए गए विश्लेषण में 132 मौजूदा विधायकों के हलफनामों की जांच की गई।
    इस जांच में पाया गया कि 92 विधायकों पर आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें से 33 विधायकों, यानी 25 प्रतिशत पर हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दो विधायकों ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या से संबंधित मामले घोषित किए हैं, जबकि तीन विधायक धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास के आरोपों का सामना कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, तीन विधायकों ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित मामले घोषित किए हैं, जिनमें बलात्कार का एक मामला भी शामिल है।

    सभी प्रमुख दलों में आपराधिक छवि वाले विधायक
    यह प्रवृत्ति किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। विभिन्न राजनीतिक दलों में आपराधिक मामले घोषित करने वाले विधायकों का अनुपात काफी अधिक है।

    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी): 58 में से 43 विधायक (74%) आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।

    भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: 21 में से 19 विधायक (90%) आपराधिक मामलों में फंसे हैं।
    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी: 44% विधायक।
    इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग: 86% विधायकों ने ऐसे मामले घोषित किए हैं।

    आर्थिक स्थिति: करोड़पतियों की भरमार
    वित्तीय मोर्चे पर भी विधायकों की स्थिति काफी मजबूत है। 132 में से 72 विधायकों (55%) ने 1 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है। सभी 132 विधायकों की कुल संपत्ति 363.78 करोड़ रुपये है, जिसका औसत 2.75 करोड़ रुपये प्रति विधायक है।

    पार्टीवार संपत्ति का विवरण:
    पार्टी 1 करोड़ से अधिक संपत्ति वाले विधायकों का प्रतिशत
    केरल कांग्रेस (एम) 100%
    जद(एस) 100%
    राकांपा 100%
    केरल कांग्रेस 100%
    आईयूएमएल 86%
    कांग्रेस 62%
    सीपीआई (एम) 40%

    सबसे अमीर और सबसे गरीब विधायक
    कांग्रेस के विधायक मैथ्यू कुझलनंदन सबसे अमीर विधायक पाए गए हैं, जिनकी कुल संपत्ति 34 करोड़ रुपये से अधिक है।

    इसके बाद निर्दलीय विधायक मणि सी कप्पन हैं, जिनकी संपत्ति 27 करोड़ रुपये से अधिक है। केरल कांग्रेस (बी) के के बी गणेश कुमार की संपत्ति 19 करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं, दूसरी ओर, सीपीआई (एम) के विधायक पी पी सुमोद ने लगभग 9.9 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है, जो विश्लेषण किए गए विधायकों में सबसे कम है।

    शैक्षणिक योग्यता और जनसांख्यिकी
    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो 61% विधायकों ने स्नातक या उससे ऊपर की शिक्षा प्राप्त की है, जबकि 36% विधायकों ने कक्षा 5 से 12 तक की पढ़ाई की है। महिला विधायकों की संख्या काफी कम है, केवल 11 विधायक (8%) महिला हैं। आयु वर्ग के अनुसार, 70% विधायक 51 से 80 वर्ष के बीच हैं, जबकि 30% विधायक 25-50 वर्ष की आयु समूह में आते हैं।