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  • देश में फिर बदला मौसम… उत्तर-पश्चिम के कई हिस्सों में हुई बारिश-बर्फबारी… आज इन क्षेत्रों में अलर्ट

    देश में फिर बदला मौसम… उत्तर-पश्चिम के कई हिस्सों में हुई बारिश-बर्फबारी… आज इन क्षेत्रों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India) में मौसम (Weather) में अचानक बदलाव आया है। दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR.) समेत उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में जहां बारिश हुई है, वहीं पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में बारिश (Rain) के साथ बर्फबारी (Snowfall) भी दर्ज की गई है। इससे बढ़ते तापमान में गिरावट आई है और मौसम सुहावना हो गया है। देश के पूर्वी, पूर्वोत्तर और दक्षिणी हिस्से में भी आंधी-तूफान के साथ बारिश हुई है। अगले दो दिन मौसम के ऐसे ही बने रहने के आसार हैं और मैदानी राज्यों में कुछ जगहों पर ओलावृष्टि की भी संभावना है।

    दिल्ली-एनसीआर में सुबह से ही बादल छाए रहे और शाम होते-होते झमाझम बौछारें पड़ने लगीं। कई हिस्सों में तेज हवाएं भी चलीं और भारी बारिश दर्ज की गई। इससे बढ़ते तापमान और उमस भरे मौसम से काफी राहत मिली। दिल्ली समेत एनसीआर के शहरों नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में 20 मार्च तक गरज और चमक के साथ हल्की बारिश होने और 50 किमी प्रति घंटा तक की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम विभाग ने इसको लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई है और मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों के बाद पारा 4-6 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है।


    खराब मौसम से 22 उड़ानों का मार्ग बदला

    दिल्ली-एनसीआर में खराब मौसम का असर यातायात पर पड़ा। शाम के वक्त बारिश होने से कुछ इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया और लोगों को जाम का सामना करना पड़ा। दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उड़ानें प्रभावित हुईं। बारिश के साथ तेज हवा चलने से कई 22 उड़ानों की लैंडिंग नहीं हो सकी और उन्हें दूसरे शहरों में भेजना पड़ा।

    अरुणाचल से तमिलनाडु तक भारी बारिश…अरुणाचल, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु में छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई। ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मराठवाड़ा में ओलावृष्टि हुई। असम और मेघालय, झारखंड, ओडिशा, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा, मराठवाड़ा और अरुणाचल में छिटपुट स्थानों पर 50-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ गरज के साथ बारिश हुई।विदर्भ, गुजरात, कोंकण, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में छिटपुट स्थानों पर 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं।


    हिमाचल-कश्मीर में चोटियों पर हिमपात

    हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के ऊंडाई वाले इलाकों में हिमपात और मैदानी इलाकों में बारिश हुई। हिमाचल में कुल्लू, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई। हिमपात के चलते अटल टनल के लिए यातायात बंद कर दिया गया। जम्मू संभाग में हिमपात के चलते किश्तवाड़ से कश्मीर को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण सिंथन टॉप मार्ग यातायात के लिए बंद कर दिया है। श्रीनगर सहित कई मैदानी इलाकों में बारिश हुई। गुलमर्ग समेत कश्मीर घाटी के अन्य ऊपरी इलाकों में ताजा बर्फबारी हुई। खराब मौसम के कारण मां वैष्णो देवी के लिए हेलिकॉप्टर सेवा दिनभर बंद रही। लेकिन बैटरी कार और रोपवे सेवाएं सामान्य रहीं।


    पंजाब-हरियाणा में भी बारिश

    पंजाब और हरियाणा के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई, जिससे अधिकतम तापमान सामान्य से कुछ डिग्री नीचे गिर गया। पंजाब के अमृतसर, पठानकोट, पटियाला, लुधियाना और हरियाणा के हिसार, नारनौल, भिवानी और चरखी दादरी में बारिश हुई। अमृतसर में अधिकतम तापमान 19.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से आठ डिग्री कम है। हरियाणा में अंबाला, हिसार, करनाल और नारनौल में अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। चंडीगढ़ का अधिकतम तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री कम है।

    मौसम का पूर्वानुमान
    मौसम विभाग के अनुसार, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में 19 मार्च को, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में 19 और 20 मार्च को, पश्चिमी राजस्थान में 20 मार्च को और पूर्वी उत्तर प्रदेश में छिटपुट ओलावृष्टि की भी संभावना है। मध्य और पूर्वी भारत में 22 मार्च तक छिटपुट गरज के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है। मध्य प्रदेश, ओडिशा और झारखंड में 20 मार्च तक और पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 20 और 21 मार्च को छिटपुट बारिश होने और गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

  • भारत में बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी…. 30 साल में 79% तक घटी, UN ने की सराहना

    भारत में बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी…. 30 साल में 79% तक घटी, UN ने की सराहना


    नई दिल्ली।
    संयुक्त राष्ट्र (यूएन) (United Nations – UN) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत (India) ने बच्चों की मौतों को कम करने में बड़ी सफलता हासिल की है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत के लगातार प्रयासों से नवजात (जन्म के तुरंत बाद) और 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में काफी कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, 1990 में जहां हर 1000 बच्चों में से 127 बच्चों की 5 साल से पहले मौत हो जाती थी, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर सिर्फ 27 रह गई है। यानी लगभग 79% की कमी आई है। इसी तरह नवजात बच्चों की मौत भी 57 से घटकर 17 प्रति 1000 रह गई है, जो करीब 70% की गिरावट है।


    सरकार की योजनाओं से मिली सफलता- जेपी नड्डा

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि यह सफलता सरकार की योजनाओं और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की वजह से मिली है। जैसे कि जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) और टीकाकरण अभियान ने इसमें बड़ा योगदान दिया है।


    दक्षिण एशिया में 1990 से अब तक 76% की कमी

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दक्षिण एशिया में बच्चों की मौतों में 1990 से अब तक 76% की कमी आई है, जिसमें भारत का सबसे बड़ा योगदान रहा है। भारत में अस्पताल में सुरक्षित डिलीवरी, बेहतर इलाज और बच्चों के लिए मुफ्त टीकाकरण जैसी सुविधाओं ने हालात को काफी सुधारा है।


    बदलाव लाकर दूसरों के लिए उदाहरण बना भारत

    यूनिसेफ ने भी भारत की तारीफ करते हुए कहा कि सरकार और राज्यों के मिलकर काम करने से यह संभव हुआ है। साथ ही, यह भी बताया गया कि बच्चों की ज्यादातर मौतें रोकी जा सकती हैं अगर समय पर इलाज और सही देखभाल मिले। हालांकि, अभी भी दक्षिण एशिया में दुनिया के करीब 25% बच्चों की मौत होती है, लेकिन तेजी से सुधार हो रहा है। भारत अब उन देशों में शामिल हो गया है जो बड़े स्तर पर बदलाव लाकर दूसरों के लिए उदाहरण बन रहे हैं।

  • राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे 59 सांसदों को दी गई विदाई

    राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे 59 सांसदों को दी गई विदाई


    नई दिल्ली।
    राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे 59 सांसदों को बुधवार को विदाई दी गई। विदाई समारोह में 20 राज्यों के 59 सदस्य, जिनमें 9 महिलाएं भी शामिल हैं, ने सदन को अलविदा कहा।

    इस मौके पर उपसभापति हरिवंश ने कहा कि पहले लोग खुद नियम फॉलो करते थे, अब हमें कंट्रोल करके कराना पड़ते हैं।उन्होंने नीतीश कुमार, अमित शाह, वेंकैया नायडू और सभी दलों के सदस्यों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और उपसभापति के रूप में अपने कार्यकाल को “जीवन का सुनहरा अवसर” बताया।

    सांसद संजय सिंह ने कहा कि किसी को विदा करना पीड़ादायक व भावनात्मक पल होता है। हम जब कमेटी में काम करते तो दलों की दूरी कम रहती है, ज्यादा मिलना होता है। कई लोगों से रिश्ते बनते हैं। उन्होंने मांग की कि पहले सांसदों को सेवानिवृत्ति के बाद भी परिसर में दरवाजे तक आने की व्यवस्था थी, तो ऐसा ही फिर किया जाए।

    केरल से सांसद जॉन ब्रिटास ने विदाई सम्बोधन के बीच सांसद जयराम रमेश को कहा कि हमने सहयोग करके आपको मंत्री बनाया, आपको सत्ता के समय सहयोग किया, लेकिन आप भूल गए। जयराम ने इस पर जवाब दिया, तो ब्रिटास ने कहा कि आप मुझे उकसाईयें मत।

    राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यदि मोह व आसक्ति हमें अपने गंतव्य तक जाने से रोके हैं। यदि भगवान राम वन नहीं जाते तो रावण का नाश कैसे होता। बहता पानी निर्मल होता है और रूका हुआ गंदा होता है। इसलिए हम हमारे साध्य और साधनों में पवित्रता रखते हुए आगे बढ़े।

    गुजरात के सांसद शक्ति सिंह ने कहा कि सदन में टोका-टोकी भी हुई, तारीफ भी मिली, लेकिन जनता और विचारधारा के लिए लड़ता रहा हूं और लड़ता रहूंगा। सामने विपक्ष वाले भी जनता से चुनकर आते हैं, उनको सुनने की परंपरा रही है, लेकिन गुजरात में यह परंपरा टूटी, इस पाप का हिस्सा कही मैं भी हूं, लेकिन मुझे खुशी है कि राज्यसभा में कुछ किस्सों को छोड़ दे तो आज भी सामने वालों को सुनने की वो परंपरा जीवित है।

    कांग्रेस सांसद दिग्विजय ने कहा कि छात्र जीवन में कभी राजनीति से कोई सम्पर्क नहीं था, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनी कि 22 साल की उम्र में नगर पालिका अध्यक्ष बन गया। फिर 30 साल में विधायक, 33 साल में मंत्री-सांसद और 40 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बन गया, लेकिन मैंने कभी अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया। मेरे मतभेद रहे हैं और आगे भी रहेंगे, लेकिन राजनीतिक जीवन में किसी से कटुता नहीं पाली। विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा में मेरे संंबंध उनसे भी अच्छे जिनकी विचारधारा से मैं सहमत नहीं। मैं सदन में व्यवधान के पक्ष में नहीं। सत्ता पक्ष पर समस्या का हल निकालने की जिम्मेदारी ज्यादा रहती, और रास्ता निकलता है। जिस प्रकार से साम्प्रदायिक कटुता बढ़ रही, वो देश के लिए उचित नहीं है। अटलजी की लाइनें याद आती है कि मैं टायर्ड हूं न रिटायर्ड हूं, आगे चलकर हम और काम करेंगे। दिग्विजय ने कबीर की लाइनों को भी दोहराया कि ना काहूं से दोस्ती और ना काहू से बैर।

    सभापति ने सभा को संबोधित करते हुए सदस्यों के द्विवार्षिक परिवर्तन की अनूठी संसदीय परंपरा पर प्रकाश डाला, यह बताते हुए कि यह निरंतरता और बदलाव दोनों को दर्शाती है—जहाँ अनुभव नए दृष्टिकोण के लिए मार्ग बनाता है और सदन की स्थायी भावना बनी रहती है। उन्होंने सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों के अमूल्य योगदान की सराहना की और कहा कि उनके ज्ञान, बहस और जन सेवा के प्रति प्रतिबद्धता ने सदन के कामकाज को समृद्ध किया और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत किया। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि उनका अनुभव आगे भी जन जीवन में मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करेगा।

    राज्य सभा सचिवालय के अनुसार 2025 में कुल 26 सदस्य सेवानिवृत्त हुए, जबकि 2026 में 73 सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं या होने वाले हैं, जिनमें उपसभापति, हरिवंश भी शामिल हैं। समारोह में, संसद कार्य मंत्री, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री और विदाई आयोजन समिति के संयोजक किरेन रिजिजू ने राज्य सभा के सभापति, सी. पी. राधाकृष्णन, और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया।

  • प्राकृतिक खेती से धरती मां की सेहत और किसान की आमदनी दोनों सुरक्षितः शिवराज सिंह चौहान

    प्राकृतिक खेती से धरती मां की सेहत और किसान की आमदनी दोनों सुरक्षितः शिवराज सिंह चौहान

    नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय पर हुई

    Shivraj Singh Chouhan

    विस्तृत चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नरेन्द्र मोदी की सरकार सिर्फ शासन नहीं चलाती, समाज बदलती है, जीवन बदलती है और राष्ट्र का भविष्य गढ़ती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चिंता है कि अत्यधिक केमिकल फर्टिलाइज़र से धरती मां की सेहत बिगड़ रही है और आने वाली पीढ़ियों के लिए भूमि उत्पादन से इनकार कर सकती है। उसी भाव से प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 1 करोड़ किसानों को जागरूक, 18 लाख किसानों को प्रशिक्षित करने और 75 लाख हेक्टेयर में चरणबद्ध रूप से प्राकृतिक खेती का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अभी लाखों किसान और लाखों हेक्टेयर भूमि जुड़ चुकी है।

    उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक रूप से ये सिद्ध है कि सही ढंग से प्राकृतिक खेती करने पर कई मामलों में उत्पादन घटता नहीं बल्कि बढ़ सकता है और लागत में भारी कमी आती है, इसीलिए मोदी सरकार इसे “भारत की आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी की अमानत” मानकर आगे बढ़ा रही है। किसानों के हितों, कृषि सुधारों, आधुनिक तकनीक, सिंचाई, बीमा, प्राकृतिक खेती और डिजिटल एग्रीकल्चर की चर्चा करते हुए उन्होंने विपक्ष के प्रश्नों के जवाब दिए।

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों के नाम पर सिर्फ सियासी नारे और अर्द्धसत्यों से काम नहीं चलेगा। खेत-खलिहान की हकीकत पर बात करनी होगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सवाल ये होना चाहिए कि किसान के लिए ज़मीन पर क्या काम हुआ, कितना पैसा सीधे उसके खाते में पहुंचा और कौन सी व्यवस्था बदली। चौहान ने याद दिलाया कि पिछली सरकार के समय 140 सिंचाई परियोजनाओं में से 99 परियोजनाएं दशकों से लटकी पड़ी थीं, जिनपर कोई काम आगे नहीं बढ़ रहा था। मोदी सरकार ने इन्हें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत प्राथमिकता दी और लगभग 27 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचित क्षेत्र सुनिश्चित करने की दिशा में तेज़ी से काम बढ़ाया।

    उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का “नदी जोड़ो” (रिवर लिंकिंग) ड्रीम प्रोजेक्ट भी वास्तव में मोदी सरकार के दौरान आगे बढ़ा, जहां कैन–बेतवा जैसी परियोजनाएं मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को जोड़ते हुए बाढ़-सूखे की समस्या का दीर्घकालिक समाधान देने के लिए शुरू की गईं। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सिर्फ 500 या 1000 रुपये की घोषणा से किसानों का भला नहीं होगा, असली सवाल है कि बीज, खाद और कीटनाशक की गुणवत्ता क्या है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार नया पेस्टिसाइड एक्ट और बीज एक्ट लाने जा रही है, जिसमें किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, मानक खाद, और सुरक्षित एवं प्रभावी कीटनाशक सुनिश्चित किए जाएंगे।

    चौहान ने बताया कि डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत अबतक लगभग 9 करोड़ किसानों के पहचान तैयार की जा चुकी हैं। किसान के पास किसान–आईडी होने पर बैंक में लोन स्वीकृत होने में “एक मिनट” से ज़्यादा नहीं लगना चाहिए क्योंकि उसकी पूरी प्रोफाइल, जमीन, फसल और लेनदेन का डेटा डिजिटल रूप से उपलब्ध होगा। पहले किसान को बैंक के चक्कर काटने पड़ते थे, फाइलों–कागज़ों में पैसा और समय दोनों खर्च होते थे; अब यह बाधा डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाई जा रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और एग्री–स्टैक डेटा के उपयोग से पीएम-किसान से लेकर एमएसपी खरीद तक हर योजना में किसानों को लक्षित और पारदर्शी लाभ मिलेगा। वित्त मंत्री की घोषणा का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने ‘भारत विस्तार’ नामक एआई प्लेटफॉर्म तैयार कर लिया है। किसान खेत से फसल की तस्वीर भेजकर या फोन करके पूछ सकेंगे कि “फसल में क्या बीमारी है, क्या दवा डालूं, मेरी मिट्टी के मुताबिक कौन सी फसल बोऊँ?” उसे उसकी अपनी भाषा में त्वरित सलाह मिलेगी। केंद्रीय मंत्री ने इसे किसान के हाथ में विशेषज्ञ-सलाह और तकनीक का नया हथियार बताया जो मोदी सरकार के “टेक–ड्रिवन किसान कल्याण” मॉडल का प्रतीक है।

  • सस्ती यात्रा सुरक्षित सफर रेलवे का बड़ा बदलाव बढ़े नॉन एसी कोच और रिकॉर्ड सब्सिडी

    सस्ती यात्रा सुरक्षित सफर रेलवे का बड़ा बदलाव बढ़े नॉन एसी कोच और रिकॉर्ड सब्सिडी


    नई दिल्ली। Indian Railways ने आम यात्रियों को किफायती यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाते हुए नॉन एसी कोचों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी की है। सरकार का फोकस इस बात पर है कि देश के करोड़ों लोग कम खर्च में आरामदायक और सुलभ यात्रा कर सकें। इसी दिशा में जनरल और स्लीपर श्रेणी के कोचों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को इसका लाभ मिल सके।

    रेल मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में कुल कोचों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा जनरल और स्लीपर क्लास का है जो इस बात को दर्शाता है कि रेलवे आम जनता की जरूरतों को केंद्र में रखकर काम कर रहा है। वर्ष 2024 25 में करीब 1250 नए जनरल कोच जोड़े गए हैं और 2025 26 में लगभग 860 और कोच जोड़ने की योजना है। इससे यात्रियों की भीड़ को कम करने और यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी।

    सरकार यात्रियों को राहत देने के लिए किराए पर औसतन लगभग 45 प्रतिशत तक की सब्सिडी दे रही है। हर साल करीब 60000 करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर रेलवे यह सुनिश्चित कर रहा है कि आम आदमी की यात्रा सस्ती बनी रहे। वहीं मुंबई जैसे उपनगरीय क्षेत्रों में अतिरिक्त 3000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही है जिससे रोजाना यात्रा करने वाले लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलता है।

    रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने बताया कि रेलवे केवल यात्री सेवाओं में ही नहीं बल्कि माल ढुलाई में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। फ्रेट परिवहन 2013 14 के 1055 मिलियन टन से बढ़कर अब लगभग 1650 मिलियन टन तक पहुंच गया है जिससे भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फ्रेट कैरियर बन चुका है।

    रेलवे के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। अब तक लगभग 47000 किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण हो चुका है जो कुल नेटवर्क का 99 प्रतिशत से अधिक है। इसके साथ ही ट्रैक निर्माण में भी बड़ी वृद्धि हुई है और यह 15000 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 35000 किलोमीटर तक पहुंच गया है।

    सुरक्षा के क्षेत्र में भी रेलवे ने उल्लेखनीय प्रगति की है। रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज की संख्या 4000 से बढ़कर 14000 हो गई है जबकि ऑटोमैटिक सिग्नलिंग 1500 किलोमीटर से बढ़कर 4000 किलोमीटर से अधिक हो गई है। इसके अलावा एलएचबी कोचों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है जो यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित माने जाते हैं।

    रेल मंत्री ने यह भी बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना में तेजी आई है और अब तक लगभग 2800 किलोमीटर कॉरिडोर तैयार हो चुका है जहां प्रतिदिन सैकड़ों मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं। सरकार नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के सहयोग से परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता को भी मजबूत कर रही है इस तरह भारतीय रेलवे सस्ती सुरक्षित और आधुनिक यात्रा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह बदलाव यात्रियों के अनुभव को और बेहतर बनाएगा।
  • यूपी में हर घर जल का सपना होगा और मजबूत, जल जीवन मिशन 2.0 की औपचारिक शुरुआत

    यूपी में हर घर जल का सपना होगा और मजबूत, जल जीवन मिशन 2.0 की औपचारिक शुरुआत

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पेयजल की पहुंच को और मजबूत बनाने के लिए एक बड़ी पहल की गई है जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केंद्र और राज्य सरकार के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं यह समझौता मिशन के अगले चरण की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है

    इस महत्वपूर्ण अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे और वर्चुअल माध्यम से इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया इस पहल का मुख्य उद्देश्य हर घर तक नल के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह समझौता हर घर नल से जल के लक्ष्य को तेजी से पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है इससे जलापूर्ति योजनाओं को बेहतर योजना और समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सकेगा उन्होंने यह भी कहा कि इसका सीधा लाभ ग्रामीण परिवारों को मिलेगा जिन्हें सुरक्षित और शुद्ध पानी उपलब्ध होगा

    उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय को इस योजना की सफलता का प्रमुख कारण बताया और कहा कि इससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि अंतिम व्यक्ति तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का सपना अब तेजी से साकार हो रहा है

    प्रदेश में पहले जहां सीमित गांवों तक ही पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचता था वहीं अब हजारों गांवों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है जिन इलाकों में दूषित पानी के कारण बीमारियां आम थीं वहां अब हालात में सुधार देखने को मिल रहा है खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी पर नियंत्रण में स्वच्छ पेयजल और बेहतर स्वच्छता की बड़ी भूमिका रही है

    सरकार अब केवल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं है बल्कि योजनाओं के लंबे समय तक संचालन और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दे रही है गांवों में जलापूर्ति के साथ-साथ अनुरक्षण व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है

    बुंदेलखंड और विंध्य जैसे क्षेत्र जो कभी पानी की कमी से जूझते थे वहां अब घर-घर नल से जल पहुंच रहा है जिससे लोगों के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आया है

    केंद्रीय मंत्री सी आर पाटिल ने भी इस मौके पर कहा कि जल जीवन मिशन के तहत गुणवत्ता पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए उन्होंने राज्यों से अपील की कि सभी परियोजनाओं को टिकाऊ और दीर्घकालिक उपयोग को ध्यान में रखकर लागू किया जा
  • NABFID Recruitment 2026: 29 सीनियर एनालिस्ट पदों के लिए आवेदन शुरू, जानें योग्यता

    NABFID Recruitment 2026: 29 सीनियर एनालिस्ट पदों के लिए आवेदन शुरू, जानें योग्यता

    नई दिल्ली। बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक शानदार अवसर सामने आया है National Bank for Financing Infrastructure and Development यानी NABFID ने सीनियर एनालिस्ट के 29 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है इस भर्ती के जरिए योग्य उम्मीदवारों को देश के एक महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थान में काम करने का मौका मिलेगा

    इस भर्ती में कुल 29 पद शामिल हैं जिनमें 25 पद रेगुलर और 4 पद कॉन्ट्रैक्ट बेसिस के हैं रेगुलर पदों में इंटरनल ऑडिट एडमिनिस्ट्रेशन कंपनी सेक्रेटेरिएट विजिलेंस इन्वेस्टमेंट एंड ट्रेजरी आईटी बिजनेस एनालिस्ट टेक्निकल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट और कंप्लायंस जैसे क्षेत्रों के पद शामिल हैं इसके अलावा लीगल इंटरनल ऑडिट आईएस ऑडिट और ह्यूमन रिसोर्स के 2-2 पद जबकि रिस्क मैनेजमेंट के 5 और लेंडिंग ऑपरेशन के 6 पद तय किए गए हैं

    वहीं कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पदों में कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी पार्टनरशिप एंड इकोसिस्टम डेवलपमेंट के 3 पद और इन्वेस्टमेंट एंड ट्रेजरी से जुड़ा 1 पद शामिल है

    ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 8 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा और सभी आवश्यक जानकारी भरनी होगी

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र के अनुसार बीई बीटेक एलएलबी पोस्ट ग्रेजुएशन सीए एमबीए एमसीए आईसीडब्ल्यूए या सीएफए जैसी डिग्री होना जरूरी है साथ ही संबंधित अनुभव और अन्य पात्रता शर्तों को भी पूरा करना होगा

    आयु सीमा 21 से 40 वर्ष निर्धारित की गई है जिसकी गणना 28 फरवरी के आधार पर होगी वहीं आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार छूट प्रदान की जाएगी

    चयन प्रक्रिया में शॉर्टलिस्टिंग ऑनलाइन लिखित परीक्षा पर्सनल इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शामिल होंगे लिखित परीक्षा मई में आयोजित होने की संभावना है

    आवेदन शुल्क जनरल ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के लिए 800 रुपए जबकि एससी एसटी और पीडब्ल्यूबीडी वर्ग के लिए 100 रुपए निर्धारित किया गया है जिसका भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा

    इस तरह NABFID की यह भर्ती न केवल बैंकिंग सेक्टर में करियर की शुरुआत करने का शानदार मौका है बल्कि यह उन उम्मीदवारों के लिए भी बेहतरीन अवसर है जो वित्तीय क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाना चाहते हैं

  • 9 साल में बदला उत्तर प्रदेश का चेहरा सीएम योगी बोले भयमुक्त माहौल में मन रहे सभी पर्व

    9 साल में बदला उत्तर प्रदेश का चेहरा सीएम योगी बोले भयमुक्त माहौल में मन रहे सभी पर्व


    नई दिल्ली। Yogi Adityanath ने उत्तर प्रदेश में सरकार के 9 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश की उपलब्धियों को विस्तार से सामने रखा और इसे 25 करोड़ जनता की सामूहिक शक्ति का परिणाम बताया। लोक भवन में नव निर्माण के 9 वर्ष पुस्तक का विमोचन करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के मार्गदर्शन और डबल इंजन सरकार की नीतियों ने प्रदेश को नई दिशा दी है।

    मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से प्रदेश के बदले माहौल पर जोर देते हुए कहा कि आज उत्तर प्रदेश में सभी धर्मों के त्योहार भयमुक्त वातावरण में मनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक ओर नवरात्र की शुरुआत हो रही है तो दूसरी ओर रमजान का पवित्र महीना भी जारी है और जल्द ही ईद का पर्व भी मनाया जाएगा लेकिन कहीं कोई तनाव या अव्यवस्था देखने को नहीं मिल रही है। यह स्थिति प्रदेश में मजबूत कानून व्यवस्था और प्रशासनिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

    सीएम योगी ने 2017 से पहले की परिस्थितियों को याद करते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश पहचान के संकट से जूझ रहा था। कृषि संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद किसान परेशान थे और आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर होते थे। कारीगर और युवा रोजगार के अभाव में पलायन कर रहे थे जबकि भर्ती प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार व्याप्त था। कानून व्यवस्था की स्थिति इतनी खराब थी कि महिलाएं व्यापारी और आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते थे।

    उन्होंने कहा कि पिछले 9 वर्षों में प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। सरकार ने सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश रोजगार सृजन किसान कल्याण महिला सशक्तीकरण और गरीबों के उत्थान पर व्यापक कार्य किए हैं। योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिला है। शिक्षा स्वास्थ्य और पर्यावरण के क्षेत्र में सुधार करते हुए सुशासन की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इन 9 वर्षों की उपलब्धियों को जन जन तक पहुंचाने के लिए 9 दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है जिसकी शुरुआत बसंत नवरात्र से हो रही है। इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को जोड़ने और विकास के विजन को साझा करने का प्रयास किया जाएगा।

    उन्होंने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए लगभग 9 लाख 12 हजार करोड़ रुपये के बजट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदेश के संतुलित और समग्र विकास को नई गति देगा। यह बजट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने रोजगार के अवसर बढ़ाने और प्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में सुरक्षा सुशासन और विकास के नए मानक स्थापित करता रहेगा।

  • मराठा आरक्षण पर फिर गरमाई राजनीति मुंबई मार्च की तैयारी साथ ही मालाड जमीन आवंटन पर

    मराठा आरक्षण पर फिर गरमाई राजनीति मुंबई मार्च की तैयारी साथ ही मालाड जमीन आवंटन पर


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है जहां एक ओर मराठा समाज ने आरक्षण को लेकर मुंबई मार्च की तैयारी शुरू कर दी है वहीं दूसरी ओर मुंबई के मालाड इलाके में जमीन आवंटन में कथित गड़बड़ी को लेकर सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं

    मराठा आंदोलन के प्रमुख चेहरा मनोज जरांगे पाटिल ने साफ कहा है कि समुदाय अब दोबारा मुंबई की ओर कूच करने के लिए तैयार है उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वादे पूरे नहीं किए गए तो इसके गंभीर परिणाम होंगे उनका कहना है कि अगर सरकार आरक्षण देने के पक्ष में नहीं थी तो पहले ही संबंधित आदेश जारी नहीं किए जाने चाहिए थे

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मराठा समाज अब पूरी तरह संगठित और जागरूक है और अपने अधिकारों के लिए पीछे हटने वाला नहीं है इससे साफ संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में राज्य में एक बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है

    इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के मालाड इलाके में प्रोजेक्ट प्रभावित व्यक्तियों के लिए जमीन आवंटन में कथित अनियमितताओं की जांच के आदेश दिए हैं यह मामला तब सामने आया जब विधानसभा में इसे लेकर गंभीर सवाल उठाए गए

    राज्य की शहरी विकास मंत्री माधुरी मिसाल ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच अतिरिक्त मुख्य सचिव के नेतृत्व में की जाएगी और जब तक जांच पूरी नहीं होती तब तक किसी भी तरह की आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी

    यह मुद्दा कांग्रेस नेता असलम शेख द्वारा उठाया गया था जिसके बाद भाजपा के योगेश सागर और मुर्जी पटेल ने भी इस पर सवाल खड़े किए

    विधानसभा में आरोप लगाया गया कि जमीन आवंटन के दौरान डेवलपर को ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स और प्रीमियम सामान्य दर से कहीं अधिक दिया गया जिससे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है

     महाराष्ट्र इस समय दो बड़े मुद्दों से जूझ रहा है एक तरफ मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन की आहट तेज हो रही है और दूसरी तरफ जमीन आवंटन में गड़बड़ी के आरोपों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं आने वाले दिनों में इन दोनों मामलों का राजनीतिक और सामाजिक असर और गहरा होने की संभावना है

  • होर्मुज संकट: 22 भारतीय जहाज अब भी खाड़ी में फंसे

    होर्मुज संकट: 22 भारतीय जहाज अब भी खाड़ी में फंसे


    तेहरान।
     युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य से राहत की कुछ खबरें आई हैं, लेकिन संकट पूरी तरह टला नहीं है। भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर नंदा देवी मंगलवार तड़के सुरक्षित भारत पहुंच गया, जबकि 22 भारतीय जहाज अब भी पश्चिमी खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं।

    पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि ‘नंदा देवी’ सुबह करीब 2:30 बजे कांडला पोर्ट पहुंचा। इससे पहले सोमवार को शिवालिक मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच चुका था। दोनों टैंकरों में कुल 92,712 टन एलपीजी था, जो देश की लगभग एक दिन की जरूरत के बराबर है।

    22 जहाज अब भी फंसे, 611 नाविक सवार
    फिलहाल पश्चिमी खाड़ी क्षेत्र में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज फंसे हैं, जिन पर 611 भारतीय नाविक सवार हैं। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग इनकी लगातार निगरानी कर रहा है और जहाज मालिकों व भारतीय मिशनों के साथ समन्वय बनाए हुए है।

    युद्ध शुरू होने के समय इस क्षेत्र में कुल 28 भारतीय जहाज मौजूद थे। अब तक कुछ जहाज सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं, लेकिन स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।

    पूर्वी हिस्से से भी राहत
    पूर्वी क्षेत्र से एक क्रूड ऑयल टैंकर यूएई के फुजैरा पोर्ट से सुरक्षित निकल चुका है और भारत पहुंचने वाला है। इसमें 80,800 टन कच्चा तेल लदा है।

    वहीं जग प्रकाश नामक एक अन्य जहाज ओमान से गैसोलीन लेकर अफ्रीका की ओर बढ़ चुका है और सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुका है।

    क्यों बना हुआ है खतरा?
    अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य व्यावहारिक रूप से बंद हो गया है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम रास्ता है, इसलिए यहां तनाव का असर सीधे शिपिंग और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ रहा है।

    हालांकि कुछ जहाज सुरक्षित लौट आए हैं, लेकिन 22 भारतीय जहाजों और सैकड़ों नाविकों की सुरक्षित वापसी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार और संबंधित एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं, ताकि सभी को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।