Category: National

  • संसद से सड़क तक छिड़ी अश्लीलता के विरुद्ध जंग: हरभजन सिंह के विचारों से सहमत हुए बिजनेसमैन राज कुंद्रा, कड़े सरकारी एक्शन की अपील

    संसद से सड़क तक छिड़ी अश्लीलता के विरुद्ध जंग: हरभजन सिंह के विचारों से सहमत हुए बिजनेसमैन राज कुंद्रा, कड़े सरकारी एक्शन की अपील

    नई दिल्ली। आज के डिजिटल युग में इंटरनेट की सुलभता ने जहाँ विकास के नए द्वार खोले हैं, वहीं बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसके नकारात्मक प्रभावों ने समाज के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। इसी कड़ी में बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और जाने-माने बिजनेसमैन राज कुंद्रा ने इंटरनेट पर परोसे जा रहे अश्लील कंटेंट और अनियंत्रित वेबसाइट्स के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है। राज कुंद्रा का यह बयान पूर्व क्रिकेटर और ‘आम आदमी पार्टी’ के सांसद हरभजन सिंह द्वारा हाल ही में संसद में उठाए गए उस मुद्दे के समर्थन में आया है, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर बच्चों के बढ़ते एक्सपोजर पर चिंता जताई थी।

    हरभजन सिंह ने संसद सत्र के दौरान यह मुद्दा प्रभावी ढंग से रखा था कि इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के अत्यधिक उपयोग से बच्चों की सामाजिक और मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। उन्होंने मांग की थी कि ऐसे कंटेंट तक बच्चों की पहुंच सीमित होनी चाहिए ताकि उनके कोमल मन को दूषित होने से बचाया जा सके। हरभजन के इस विचार का समर्थन करते हुए राज कुंद्रा ने स्पष्ट कहा कि आज इंटरनेट पर मौजूद “फ्री और बिना किसी कंट्रोल” वाले कंटेंट ने समाज के लिए संकट पैदा कर दिया है। कुंद्रा के अनुसार, अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री बहुत ही आसानी से कम उम्र के बच्चों तक पहुंच रही है, जिसे रोकने के लिए ऐसी वेबसाइट्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना अनिवार्य है।

    राज कुंद्रा ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलावों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई अन्य देशों में इस तरह के सख्त बैन पहले से ही लागू हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का एक्सेस पूरी तरह से लिमिटेड यानी सीमित कर दिया जाना चाहिए। कुंद्रा ने जोर देकर कहा कि यद्यपि उनके पास प्रतिक्रिया देने के लिए और भी कई मुद्दे हैं, लेकिन वर्तमान में बच्चों का भविष्य और समाज की सुरक्षा सबसे अधिक महत्वपूर्ण है, जिस पर तुरंत कड़े नियमों की आवश्यकता है।

    दिलचस्प बात यह है कि राज कुंद्रा का यह बयान उनके अपने अतीत के कारण भी चर्चा का विषय बना हुआ है। साल 2021 में राज कुंद्रा पर एडल्ट कंटेंट बनाने और उसे ऐप के जरिए प्रसारित करने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके चलते उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। हालांकि, बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। इसके अतिरिक्त, आईपीएल के दौरान सट्टेबाजी जैसे विवादों में भी उनका नाम उछला था। इन तमाम विवादों के बीच, राज कुंद्रा ने अब जिस तरह से अश्लील कंटेंट के खिलाफ मोर्चा संभाला है, वह सोशल मीडिया और पब्लिक डोमेन में नई बहस को जन्म दे रहा है। उन्होंने समाज के व्यापक हित को सर्वोपरि रखते हुए इंटरनेट सुरक्षा और बच्चों के डिजिटल संरक्षण पर सरकार से सख्त नीति बनाने की अपील की है।

  • Assam: प्रद्युत बोरदोलोई ने इस्तीफे की बताई वजह, बोले- कांग्रेस में अकेलापन और अपमानित महसूस किया

    Assam: प्रद्युत बोरदोलोई ने इस्तीफे की बताई वजह, बोले- कांग्रेस में अकेलापन और अपमानित महसूस किया


    नई दिल्ली। असम से कांग्रेस के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उनके लिए बेहद कठिन था, लेकिन पार्टी के भीतर लगातार अपमान और नेतृत्व से सहानुभूति न मिलने के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

    बोरदोलोई ने स्पष्ट किया कि असम कांग्रेस में कई लोग उनसे संपर्क करने के बावजूद बार-बार अपमानजनक व्यवहार कर रहे थे, और इस स्थिति ने उनके लिए पार्टी में अकेलापन बढ़ा दिया। उन्होंने कहा, “मैंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक को छोड़ दिया है और इसके लिए खुश नहीं हूं, लेकिन हालात ने मुझे यह निर्णय लेने पर मजबूर किया।”

    इस्तीफा और पार्टी के भीतर मतभेद

    प्रद्युत बोरदोलोई ने यह भी बताया कि वे जीवनभर कांग्रेस से जुड़े रहे, लेकिन हाल ही में उनकी स्थिति इतनी कठिन हो गई थी कि इस्तीफा देना अनिवार्य हो गया। उनका इस्तीफा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) अध्यक्ष को सौंप दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे असम कांग्रेस में आंतरिक मतभेद और नेताओं के बीच बढ़ते तनाव का संकेत मान रहे हैं।

    सीएम सरमा की प्रतिक्रिया

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि फिलहाल उनका सांसद प्रद्युत बोरदोलोई से कोई संपर्क नहीं है, लेकिन भविष्य में बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राजधानी में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यदि बोरदोलोई ने केंद्रीय गृह मंत्री से संपर्क किया होता, तो उन्हें इसकी जानकारी जरूर होती। फिलहाल ऐसा प्रतीत नहीं होता कि उन्होंने किसी भाजपा नेता से बात की हो।

    विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियां

    असम विधानसभा की कुल 126 सीटों में से बहुमत पाने के लिए 64 सीटें आवश्यक हैं। चुनाव अधिसूचना 16 मार्च को जारी की गई, जबकि नामांकन की अंतिम तारीख 23 मार्च है। नामांकन पत्रों की जांच 24 मार्च को होगी और नाम वापसी की आखिरी तारीख 26 मार्च निर्धारित की गई है। मतदान 9 अप्रैल को होगा और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

    पिछला चुनाव परिणाम

    2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने असम की 126 सीटों में से 60 सीटें जीती थीं। कांग्रेस के खाते में 29 सीटें आईं जबकि एआईयूडीएफ ने 16 सीटें हासिल कीं। असम गढ़ परिषद को नौ, यूपीपीएल को छह, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट को चार, माकपा को एक और सिबसागर सीट पर निर्दलीय उम्मीदार अखिल गोगोई ने जीत दर्ज की थी।

  • कौन हैं सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी, भारत की पहली LGBTQ+ सांसद बनीं

    कौन हैं सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी, भारत की पहली LGBTQ+ सांसद बनीं


    नई दिल्ली। सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने इतिहास रच दिया है। वह LGBTQ+ समुदाय से आने वाली पहली सांसद बन गईं हैं। 37 सीटों पर 26 नेता राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए थे और इनमें गुरुस्वामी का नाम भी शामिल है। TMC यानी पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें उम्मीदवार बनाया था। सोमवार और मंगलवार को बची हुईं 11 सीटों पर भी चुनाव संपन्न हुए।

    कौन हैं मेनका गुरुस्वामी
    51 वर्षीय गुरुस्वामी एक संवैधानिक वकील हैं, जिन्होंने अपनी शिक्षा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड लॉ स्कूल और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी जैसे प्रसिद्ध संस्थानों से प्राप्त की हैं। वह काफी समय से संविधान, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और नागरिक अधिकारों का समर्थन करने वाली जानी-मानी आवाज रही हैं।

    गुरुस्वामी और उनकी साथी अरुंधती काटजू उस अहम मुकदमे का हिस्सा थे, जिसने सुप्रीम कोर्ट को 2018 में 158 साल पुराना कानून रद्द करने को राजी किया। यह कानून सहमति से बने समलैंगिक रिश्तों को अपराध बताता था। इस कानून का रद्द होना एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के लिए ऐतिहासिक जीत थी।

    गुरुस्वामी ने कहा कि संविधान के ‘समानता, भाईचारा और भेदभाव रहित व्यवहार’ जैसे मूल्य उनके काम का आधार रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह राज्यसभा में भी पश्चिम बंगाल के लोगों का प्रतिनिधित्व करते हुए इन्हीं आदर्शों को आगे बढ़ाना चाहती हैं।

    टीएमसी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने डीडब्ल्यू को बताया कि ‘गुरुस्वामी के चुने जाने के बाद राज्यसभा में पार्टी के कुल 13 में से पांच सदस्य अब महिलाएं हैं।’ उन्होंने यह भी बताया कि गुरुस्वामी का चुनाव टीएमसी की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। इस रणनीति के अनुसार वह पढ़े-लिखे और संविधान को समझने वाली आवाजों को उच्च सदन में भेजना चाहते हैं, ताकी वे देश भर में विपक्ष की दलीलें स्पष्ट रूप से रख सकें।

    TMC के सांसद
    तृणमूल कांग्रेस की ओर से राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री बाबुल सुप्रियो, अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी, पूर्व राज्य पुलिस प्रमुख राजीव कुमार और अभिनेत्री कोयल मलिक राज्यसभा के लिए चुने गए। खबर है कि चुने जाने के समय एडवोकेट गुरुस्वामी दिल्ली में थीं और इस वजह से विधानसभा नहीं पहुंच सकी थीं। तृणमूल नेता अरूप बिस्वास ने उनकी ओर से प्रमाण-पत्र हासिल किया था।

  • मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच अब तक स्वदेश लौटे 2.44 लाख भारतीय, 5 नागरिकों की हुई मौत

    मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच अब तक स्वदेश लौटे 2.44 लाख भारतीय, 5 नागरिकों की हुई मौत


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते संघर्ष के बीच केंद्र सरकार (Central Government) ने मंगलवार को कहा कि 28 फरवरी से अब तक लगभग 2.44 लाख लोग क्षेत्र से भारत लौट (Return to India) चुके हैं। पश्चिम एशिया की स्थिति पर विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर महाजन ने बताया कि इस संघर्ष में अब तक पांच भारतीय नागरिकों की मौत हुई है, जबकि एक व्यक्ति लापता है। उन्होंने कहा कि हाल में ओमान के सोहार शहर में हुई एक घटना में मारे गए दो भारतीयों के पार्थिव शरीर मंगलवार को भारत लाए गए और ये जयपुर में उनके परिजनों को सौंप दिए गए।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि कल मैंने बताया था कि छात्रों समेत लगभग 650 भारतीय नागरिक ईरान से आर्मेनिया और अजरबैजान पहुंचे थे, ताकि वहां से स्वदेश लौट सकें। अब लगभग 50 और भारतीय आर्मेनिया पहुंचे हैं तथा कुछ अन्य अजरबैजान गए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान गए 284 तीर्थयात्री भी सफलतापूर्वक आर्मेनिया पहुंच गए हैं। इनमें से 130 तीर्थयात्री आज दिल्ली पहुंचेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसका नियंत्रण कक्ष पूरी तरह सक्रिय है और भारतीय नागरिकों की सहायता कर रहा है।

    जायसवाल ने बताया कि फोन और ईमेल की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। ‘ब्रिक्स’ के रुख पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह समूह आम सहमति के आधार पर काम करता है। ब्रिक्स दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया का एक प्रभावशाली समूह है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में भारत अध्यक्ष है। इस संघर्ष में ब्रिक्स के कई सदस्य देश सीधे तौर पर जुड़े हैं, इसलिए विभिन्न देशों के रुख में अंतर को पाटना चुनौतीपूर्ण रहा है। फिर भी हम सभी पक्षों के संपर्क में हैं।’

    अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला शुरू किया था तथा जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले कुछ खाड़ी देशों पर हमले किए और अमेरिका व इजरायल पर दबाव बनाने के लिए रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया। यूरोपीय संघ की विदेश और सुरक्षा नीति प्रमुख काजा कालास के निमंत्रण पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की ब्रसेल्स यात्रा के बारे में जायसवाल ने कहा कि उन्होंने यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ उच्चस्तरीय वार्ता की।

    जायसवाल ने कहा कि संघर्ष की शुरुआत से ही भारत का रुख रहा है कि संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाया जाए। हमने सभी देशों से संयम बरतने तथा संघर्ष को और न बढ़ाने की अपील की है। वहीं, महाजन ने कहा कि विदेश मंत्रालय पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है तथा वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय किया जा रहा है तथा क्षेत्र में भारतीय मिशन चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। महाजन ने बताया कि 16 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात से भारत के लिए लगभग 65 उड़ानें संचालित हुईं, जबकि मंगलवार को करीब 70 उड़ानों के संचालन की उम्मीद है। ओमान से भी भारत के विभिन्न गंतव्यों के लिए उड़ानें जारी हैं।

  • Report: भारत में 40% युवाओं को नहीं मिल पाती नौकरी… 1.1 करोड़ स्तानक हैं बेरोजगार

    Report: भारत में 40% युवाओं को नहीं मिल पाती नौकरी… 1.1 करोड़ स्तानक हैं बेरोजगार


    नई दिल्ली ।
    देश (India) में 20 से 29 साल के 6.3 करोड़ स्नातकों में से 1.1 करोड़ बेरोजगार (Graduate Unemployment) हैं। चिंता की बात यह है कि बेरोजगार के रूप में पंजीकरण कराने के एक वर्ष के भीतर सिर्फ सात फीसदी स्नातकों को स्थायी वेतन वाली नौकरी (Job) मिल पाती है। हाल के वर्षों में स्नातकों की बढ़ती संख्या के कारण यह समस्या और बढ़ गई है।

    अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय (Azim Premji University) की ओर से जारी रिपोर्ट ‘भारत में कामकाज की स्थिति-2026’ के मुताबिक, देश में युवाओं (15-29 वर्ष) की उच्च शिक्षा तक पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि, रोजगार से जुड़ी चुनौतियां अब भी कायम हैं। स्नातकों में बेरोजगारी दर उच्च बनी हुई है। 15 से 25 वर्ष के स्नातकों में बेरोजगारी दर करीब 40 फीसदी और 25 से 29 वर्ष की आयु वर्ग में 20 फीसदी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्नातक युवाओं को आय के मामले में लाभ मिलता है और उनकी शुरुआती कमाई गैर-स्नातकों के मुकाबले लगभग दोगुनी होती है। इसके बावजूद 2011 के बाद युवा पुरुष स्नातकों के वेतन में वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ी है। रिपोर्ट की मुख्य लेखिका प्रोफेसर रोजा अब्राहम ने कहा, यह अध्ययन शिक्षा से रोजगार तक युवाओं की यात्रा और उसमें आए बदलावों को दर्शाता है।


    पुरुषों की नामांकन दर में गिरावट

    पिछले चार दशक में उच्च शिक्षा में नामांकन दर 28 फीसदी तक पहुंच गई है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी खासतौर पर बढ़ी है। हालांकि, पुरुषों के नामांकन में गिरावट आई है। यह 2017 के 38 फीसदी से घटकर 2024 के अंत तक 34 फीसदी रह गई है। इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि पुरुष परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए कमाने के मौके तलाशने लगते हैं। उच्च शिक्षण संस्थानों का दायरा भी बढ़ा है। प्रति लाख युवाओं पर कॉलेज की संख्या 2010 के 29 से बढ़कर 2021 में 45 पहुंच गईं, जिसमें निजी संस्थानों की बड़ी भूमिका रही है।


    गरीब परिवारों की उच्च शिक्षा में बढ़ी भागीदारी

    रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च शिक्षा में गरीब परिवारों की भागीदारी बढ़ी है, जो 2007 के आठ फीसदी से बढ़कर 2017 में 15 फीसदी हो गई है। लेकिन, आर्थिक बाधाएं अब भी बनी हुई हैं। महंगे पेशेवर पाठ्यक्रमों मसलन इंजीनियरिंग और मेडिकल में अपेक्षाकृत संपन्न वर्ग के छात्र-छात्राओं की भागीदारी अधिक है। युवा तेजी से कृषि से हटकर सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2010 के बाद औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) की संख्या में करीब 300 फीसदी की वृद्धि हुई है। साथ ही, निजी संस्थानों में गुणवत्ता को लेकर चिंताएं भी सामने आई हैं।

  • भारत से पश्चिम एशिया के लिए आज संचालित होंगी 50 उड़ानें

    भारत से पश्चिम एशिया के लिए आज संचालित होंगी 50 उड़ानें


    नई दिल्ली।
    भारत से पश्चिम एशिया के लिए कल, 18 मार्च को कुल 50 उड़ानें संचालित की जाएंगी। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की ये उड़ानें वेस्ट एशिया के विभिन्न गंतव्यों को जोड़ेंगी।

    सूत्रों के अनुसार, इन उड़ानों में 14 शेड्यूल्ड फ्लाइट्स जेद्दा और 12 फ्लाइट्स मस्कट के लिए उड़ान भरेंगी। शेड्यूल्ड उड़ानों का संचालन दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, मैंगलोर, कोझिकोड, कन्नूर, कोच्चि, लखनऊ और तिरुवनंतपुरम जैसे प्रमुख शहरों से किया जाएगा।

    इसके अलावा, 24 नॉन-शेड्यूल्ड फ्लाइट्स यूएई और सऊदी अरब के लिए संचालित की जाएंगी। इन उड़ानों का उद्देश्य विशेष रूप से उन यात्रियों और भारतीय नागरिकों को सेवा देना है, जो मौजूदा तनावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद अपने गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचना चाहते हैं।

    एयरलाइनों ने यात्रियों से समय पर एयरपोर्ट पहुंचने और सभी सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की अतिरिक्त उड़ानों से मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीय नागरिकों की आवाजाही सुगम बनेगी।

    विशेष रूप से हाल के अंतरराष्ट्रीय तनाव और मध्य पूर्व में सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए, यह कदम भारतीय नागरिकों और व्यापारिक यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

  • पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति से की बातचीत, क्षेत्रीय तनाव पर जताई चिंता

    पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति से की बातचीत, क्षेत्रीय तनाव पर जताई चिंता


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार रात संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जाएद अल नाहयान से फोन पर बातचीत की और उन्हें ईद की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और मौजूदा सुरक्षा हालात पर भी चर्चा की।

    प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों की जान जाना और नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं और इनकी सख्त निंदा की जानी चाहिए।

    बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया और इस बात पर सहमति जताई कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया, क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।

    दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संवाद को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने मध्य पूर्व में तनाव कम करने और स्थायी शांति स्थापित करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हाल के वर्षों में रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग तेजी से मजबूत हुआ है। ऐसे में दोनों देशों के नेताओं के बीच यह बातचीत क्षेत्रीय परिस्थितियों और आपसी सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • 2033 तक देश के हर नागरिक को मिलेगा स्वास्थ्य बीमा का लाभ : निर्मला सीतारमण

    2033 तक देश के हर नागरिक को मिलेगा स्वास्थ्य बीमा का लाभ : निर्मला सीतारमण


    नई दिल्ली।
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2033 तक देश के सभी नागरिकों को बीमा कवर के दायरे में लाया जाएगा। मंगलवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय बीमा क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। यह एक मजबूत और समावेशी इकोसिस्टम के रूप में उभर रहा है, जहां सरकार की नीतियों के कारण समाज के सबसे निचले तबके को भी सुरक्षा कवच मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में बीमा क्षेत्र का आकार 1,17,505 करोड़ रुपये हो गया, जिसके तहत देश के 58 करोड़ लोगों को कवर किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने 42,420 करोड़ रुपये का प्रीमियम जुटाया है। निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 37,752 करोड़ रुपये है। स्टैंडअलोन स्वास्थ्य बीमा कंपनियों का योगदान 37,331 करोड़ रुपये है।

    उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में 2.51 करोड़ व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियां जारी हुईं, जिनसे 6.01 करोड़ लोगों को कवर मिला। इसके अतिरिक्त, 13.05 लाख ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों के जरिए 27.51 करोड़ सदस्य कवर किए गए हैं। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि वैश्विक स्तर पर औसत प्रति व्यक्ति प्रीमियम 943 डॉलर है, जबकि भारत में यह केवल 97 डॉलर है। इस अंतर को पाटने के लिए सरकार कई लक्षित सुधार कर रही है। व्यक्तिगत प्रीमियम पर जीएसटी छूट और ग्रामीण व सामाजिक क्षेत्रों में बीमा की पहुंच बढ़ाने के लिए नियामक संस्था इरडा द्वारा 2024 में अधिसूचित नए नियम इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। इसके अलावा, बाजार में गहराई लाने और पैठ बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार दिसंबर 2025 में बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए एक विधेयक लेकर आई।

    वित्त मंत्री ने कहा कि देश के सबसे गरीब नागरिकों को पीछे नहीं छोड़ा जा रहा है। पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत मात्र 436 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का लाइफ कवर देती है। इसमें अब तक 26.79 करोड़ नामांकन हो चुके हैं। आयुष्मान भारत (एबी-पीएमजेएवाई) देश की 40 प्रतिशत निचली आबादी (लगभग 12 करोड़ परिवार) को हर साल 5 लाख रुपये का अस्पताल खर्च कवर देती है। 28 फरवरी 2026 तक देश भर में 43.52 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।

  • राष्ट्रपति के दौरे से पहले वृंदावन में बंदरों पर सख्ती लंगूर कटआउट से लेकर गुलेल तक बना सुरक्षा कवच

    राष्ट्रपति के दौरे से पहले वृंदावन में बंदरों पर सख्ती लंगूर कटआउट से लेकर गुलेल तक बना सुरक्षा कवच

    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन में इन दिनों प्रशासन एक अनोखी चुनौती से जूझ रहा है। आमतौर पर धार्मिक और शांत वातावरण के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में बंदरों का बढ़ता आतंक अब बड़े स्तर की चिंता बन चुका है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब द्रौपदी मुर्मू के आगामी दौरे की घोषणा हुई।

    राष्ट्रपति का यह दौरा 19 मार्च से शुरू होकर तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें वे विभिन्न धार्मिक और सामाजिक स्थलों का भ्रमण करेंगी। इस दौरान उड़िया बाबा आश्रम, रामकृष्ण मिशन सेवा चैरिटेबल अस्पताल और गोवर्धन परिक्रमा जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। ऐसे में प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उनकी यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और व्यवधान रहित रहे।

    वृंदावन के बंदर खासतौर पर अपने अनोखे व्यवहार के लिए कुख्यात हैं। यहां के बंदर राह चलते लोगों के चश्मे छीन लेने के लिए जाने जाते हैं। वे अचानक झपट्टा मारकर चश्मा लेकर भाग जाते हैं और फिर उसे लौटाने के बदले खाने-पीने की चीजों की मांग करते हैं। फ्रूटी जैसे पेय पदार्थ उनके लिए मानो सौदेबाजी का जरिया बन चुके हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों ही अक्सर इस समस्या से जूझते नजर आते हैं।

    राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने इस बार पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ कुछ अनोखे उपाय भी अपनाए हैं। पहले ऐसे मौकों पर बंदरों को भगाने के लिए प्रशिक्षित लंगूरों की मदद ली जाती थी, लेकिन वन्यजीव संरक्षण कानूनों के चलते अब यह तरीका अपनाना संभव नहीं है। इसके विकल्प के रूप में अब लंगूरों के कटआउट लगाए जा रहे हैं ताकि बंदरों में डर का माहौल बनाया जा सके।

    इसके अलावा वन विभाग ने लगभग 30 सदस्यों की एक विशेष टीम भी तैनात की है। यह टीम गुलेल, लाठी-डंडों और लेजर लाइट जैसे उपकरणों से लैस है। जिन इलाकों में बंदरों की संख्या अधिक है, वहां अतिरिक्त कर्मियों को लगाया जा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासन की कोशिश है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कोई भी बंदर पास न भटके।

    यह पूरा घटनाक्रम न केवल सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाता है बल्कि यह भी दिखाता है कि शहरी और धार्मिक क्षेत्रों में वन्यजीवों के साथ संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है। बंदरों का यह व्यवहार एक लंबे समय से चली आ रही समस्या है, लेकिन अब जब मामला देश के सर्वोच्च पद से जुड़ा है, तो प्रशासन हर संभव कदम उठाने में जुटा है।

    वृंदावन में किए गए ये इंतजाम भले ही अस्थायी हों, लेकिन उन्होंने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भविष्य में इस समस्या का कोई स्थायी समाधान निकाला जा सकेगा। फिलहाल सभी की नजरें राष्ट्रपति के दौरे पर हैं और यह देखने पर कि ये अनोखे उपाय कितने कारगर साबित होते हैं।

  • राहुल गांधी के संसद व्यवहार पर बवाल, 204 पूर्व अधिकारियों ने लिखा ओपन लेटर

    राहुल गांधी के संसद व्यवहार पर बवाल, 204 पूर्व अधिकारियों ने लिखा ओपन लेटर


    नई दिल्ली। देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। 204 पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के संसद में कथित व्यवहार पर सवाल उठाते हुए एक खुला पत्र जारी किया है। इस पत्र में उनके आचरण को संसदीय परंपराओं के विपरीत बताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और आत्ममंथन करने की मांग की गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं में 116 सेवानिवृत्त सशस्त्र बल अधिकारी, 84 पूर्व नौकरशाह (जिनमें चार राजदूत शामिल हैं) और चार वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं, जिससे इस मुद्दे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य ने उठाया मुद्दा

    इस खुले पत्र का समन्वय जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी S. P. Vaid ने किया है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय गरिमा से जुड़ा हुआ है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संसद देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है, जहां कानून बनते हैं और जनता की आवाज को मंच मिलता है। ऐसे में यहां हर जनप्रतिनिधि से उच्चतम स्तर के आचरण की अपेक्षा की जाती है।

    12 मार्च की घटना पर जताई आपत्ति

    हस्ताक्षरकर्ताओं ने 12 मार्च की एक घटना को लेकर विशेष आपत्ति जताई है। उनके अनुसार, संसद परिसर में किसी भी प्रकार के प्रदर्शन या विरोध पर रोक के बावजूद विपक्ष ने निर्देशों का उल्लंघन किया। आरोप है कि Rahul Gandhi के नेतृत्व में सांसदों ने संसद की सीढ़ियों पर बैठकर विरोध जताया और चाय-बिस्कुट लेते हुए नजर आए। पत्र में कहा गया है कि यह आचरण न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि संसदीय गरिमा के प्रति अनादर भी दर्शाता है।

    ‘लोकतंत्र का मंदिर’ है संसद

    पत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि संसद को ‘लोकतंत्र का मंदिर’ माना जाता है, जहां गंभीर मुद्दों पर बहस और निर्णय लिए जाते हैं। ऐसे में संसद के हर हिस्से-चाहे वह सदन का कक्ष हो, गलियारा हो या सीढ़ियां-सभी स्थानों पर समान मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि इस तरह का व्यवहार संस्थागत मूल्यों को कमजोर करता है और जनता के बीच गलत संदेश भेजता है।

    ‘नाटकीय राजनीति’ का आरोप

    खुले पत्र में Rahul Gandhi पर यह आरोप भी लगाया गया है कि वे पहले भी संसद के भीतर और बाहर ‘नाटकीय’ तरीके से विरोध जताते रहे हैं, जिससे सार्वजनिक संवाद का स्तर प्रभावित होता है। हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां संसद की कार्यवाही में बाधा डालती हैं और जनता के समय व संसाधनों की बर्बादी का कारण बनती हैं।

    लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर जोर

    पत्र के अंत में कहा गया है कि सांसदों को अपने हर कदम के प्रतीकात्मक महत्व को समझना चाहिए। खासकर नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वे उदाहरण प्रस्तुत करें। हस्ताक्षरकर्ताओं ने इस व्यवहार को लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने वाला बताते हुए इसे गंभीरता से लेने की अपील की है।