Category: National

  • 27 मार्च को JDU राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए होगा चुनाव, जानिए किसके नाम पर लग सकती है मुहर

    27 मार्च को JDU राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए होगा चुनाव, जानिए किसके नाम पर लग सकती है मुहर


    नई दिल्ली। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। पार्टी के भीतर इसको लेकर हलचल तेज हो गई है और सभी की नजर इस बात पर है कि अगला अध्यक्ष कौन बनेगा। पार्टी द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 22 मार्च को नामांकन दाखिल किए जाएंगे। इसके बाद 23 मार्च को नामांकन की जांच होगी और 24 मार्च को नाम वापसी की अंतिम तारीख तय की गई है। अगर एक से ज्यादा उम्मीदवार होते हैं, तो 27 मार्च को मतदान कराया जाएगा। अगर सिर्फ एक ही नामांकन आता है, तो 24 मार्च को ही नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर दी जाएगी।

    नीतीश कुमार के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा
    सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। इससे पहले भी वह 29 दिसंबर 2023 को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए थे। हाल ही में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों ने बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि उन्होंने साफ कहा है कि वह बिहार से दूर नहीं जाएंगे और राज्य के लिए काम करते रहेंगे।

    कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी आई सामने
    नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर सामने आने के बाद पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली थी। कई जगहों पर विरोध की खबरें भी सामने आई थीं। इन दिनों नीतीश कुमार के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि उन्हें पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से हटते हैं, तो उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में बनाए रखना एक रणनीतिक फैसला हो सकता है। इससे पार्टी में संतुलन बना रहेगा। फिलहाल JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तस्वीर जल्द साफ हो जाएगी। आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • छात्राओं के गर्भवती होने के मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट; सरकार पर आरोपों की बौछार

    छात्राओं के गर्भवती होने के मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट; सरकार पर आरोपों की बौछार


    रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को बीजापुर जिले के एक पोर्टा केबिन स्कूल हॉस्टल से जुड़ा मामला सियासी तूफान बन गया। तीन छात्राओं के गर्भवती होने के आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जो अंततः हंगामे और वॉकआउट में बदल गई।

    विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
    कांग्रेस विधायकों ने सदन में आरोप लगाया कि बीजापुर के हॉस्टल में रहने वाली तीन छात्राएं गर्भवती पाई गई हैं। इस मुद्दे पर जवाब की मांग करते हुए विक्रम मंडावी, चरण दास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को घेरा।

    शिक्षा मंत्री का जवाब, लेकिन विवाद बरकरार
    राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिन तीन छात्राओं की बात की जा रही है, उनमें से दो हॉस्टल में रहती ही नहीं हैं, जबकि एक छात्रा दिवाली की छुट्टियों के बाद से वापस नहीं लौटी है।

    हालांकि मंत्री के इस जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

    ‘मामला दबाने की कोशिश’ का आरोप
    ‘शून्य काल’ के दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार इस गंभीर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि जैसे ही छात्राओं के गर्भवती होने की बात सामने आई, उन्हें घर भेज दिया गया और अब प्रशासन यह कहकर मामले को कमजोर करने में जुटा है कि वे हॉस्टल में रह ही नहीं रही थीं।

    विपक्ष ने यह भी कहा कि मामला आदिवासी क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।

    आरोपियों को बचाने का आरोप
    विपक्षी विधायकों का आरोप है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाया जा रहा है। इसी कारण सदन में इस विषय पर विस्तृत चर्चा की अनुमति भी नहीं दी जा रही।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने जताई चिंता
    पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि आवासीय स्कूल से जुड़ी ऐसी खबर बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि तीन में से दो छात्राएं नाबालिग हैं और मामले की पूरी जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • लोकसभा में टकराव खत्म करने पर सहमति: 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन हो सकता है रद्द

    लोकसभा में टकराव खत्म करने पर सहमति: 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन हो सकता है रद्द


    नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के बीच सियासी गतिरोध खत्म होने के संकेत मिले हैं। लोकसभा के आठ निलंबित विपक्षी सांसदों का निलंबन मंगलवार को वापस लिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति बन गई है।
    सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति
    बताया जा रहा है कि ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई, जिसमें निलंबन खत्म करने पर सकारात्मक चर्चा हुई। बैठक में यह भी तय हुआ कि भविष्य में सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए सभी दल जिम्मेदारी से व्यवहार करेंगे।

    सदन के आचरण को लेकर भी तय हुए नियम
    दोनों पक्षों के बीच इस बात पर भी सहमति बनी कि—

    कोई भी सदस्य नारेबाजी करते हुए दूसरे पक्ष की सीटों तक नहीं जाएगा

    सदन में कागज फाड़कर नहीं फेंके जाएंगे

    अधिकारियों की मेजों पर चढ़ने जैसी घटनाएं नहीं होंगी

    कांग्रेस ने उठाया था मुद्दा
    सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए स्पीकर से निलंबन रद्द करने की मांग की थी।

    विपक्षी दल पिछले सप्ताह से ही इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे थे।

    क्यों हुआ था निलंबन?
    बजट सत्र के पहले चरण में 3 फरवरी को सदन में हंगामे के दौरान आसन की ओर कागज फेंकने और अवमानना के आरोप में आठ सांसदों को शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था।

    इन सांसदों में मणिकम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, प्रशांत पडोले, किरण कुमार रेड्डी और एस. वेंकटेशन शामिल हैं।

    धरने पर बैठे थे सांसद
    निलंबन के बाद से ये सभी सांसद संसद परिसर के मकर द्वार पर धरना दे रहे थे और कार्रवाई को वापस लेने की मांग कर रहे थे।

    अगर मंगलवार को औपचारिक घोषणा होती है, तो इससे संसद के कामकाज में जारी गतिरोध खत्म होने और बजट सत्र के सुचारु संचालन की राह साफ हो सकती है।

  • बारामती में रिश्तों की राजनीति ,सुप्रिया सुले ने भाभी सुनेत्रा पवार को दिया वॉकओवर

    बारामती में रिश्तों की राजनीति ,सुप्रिया सुले ने भाभी सुनेत्रा पवार को दिया वॉकओवर


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की सियासत में बारामती उपचुनाव ने एक अलग ही मिसाल पेश की है जहां राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच पारिवारिक रिश्तों को प्राथमिकता देते हुए सुप्रिया सुले ने बड़ा फैसला लिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरदचंद्र पवार की कार्यकारी अध्यक्ष सुले ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी आगामी बारामती विधानसभा उपचुनाव में अपनी ही भाभी सुनेत्रा पवार के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है क्योंकि आमतौर पर ऐसे चुनावों में कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है।

    निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार पुणे जिले के बारामती और अहिल्यानगर के राहुरी विधानसभा क्षेत्रों में 23 अप्रैल को उपचुनाव होने हैं। बारामती सीट पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के कारण खाली हुई है जबकि राहुरी सीट भाजपा विधायक शिवाजी कर्डिले के निधन के चलते रिक्त हुई। बारामती से सुनेत्रा पवार के चुनाव लड़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है जिससे यह सीट पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनी हुई थी लेकिन अब मुकाबला एकतरफा होने की संभावना बढ़ गई है।

    दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सुले ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी बारामती उपचुनाव नहीं लड़ेगी और वह अपनी वहिनी के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेंगी। इस बयान के साथ उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राजनीति से ऊपर परिवार को रखा जाना चाहिए। हालांकि राहुरी सीट को लेकर महा विकास आघाडी के सहयोगी दलों के बीच अभी चर्चा जारी है और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

    इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कहा है कि बारामती और राहुरी उपचुनाव को निर्विरोध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि चुनावी मुकाबला होता है तो भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह तैयार है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक स्तर पर सहमति बनाने की कोशिशें जारी हैं लेकिन स्थिति पूरी तरह एकमत नहीं है।

    गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सुप्रिया सुले ने बारामती सीट पर सुनेत्रा पवार को हराकर अपनी पकड़ बरकरार रखी थी। उस समय सुनेत्रा पवार पहली बार चुनाव मैदान में उतरी थीं। बाद में उन्हें राज्यसभा भेजा गया। इसी वर्ष 28 जनवरी को बारामती के पास एक विमान दुर्घटना में अजित पवार और अन्य लोगों की मौत के बाद राजनीतिक हालात तेजी से बदले और सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ पार्टी की कमान भी सौंपी गई।

    सुले ने इस दौरान अजित पवार की मौत से जुड़े विमान हादसे की पारदर्शी जांच की मांग भी दोहराई है। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच एलपीजी संकट पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए और सरकार को इसे नजरअंदाज करने के बजाय ठोस कार्ययोजना बनानी चाहिए क्योंकि इसका असर आम जनता से लेकर उद्योग जगत तक पर पड़ रहा है। कुल मिलाकर बारामती उपचुनाव में सुप्रिया सुले का यह फैसला न सिर्फ राजनीतिक रणनीति को दर्शाता है बल्कि यह भी दिखाता है कि भारतीय राजनीति में कभी-कभी रिश्ते भी चुनावी गणित पर भारी पड़ जाते हैं।

  • चैत्र नवरात्रि: वैष्णो देवी यात्रा में उमड़ेगी भीड़…श्राइन बोर्ड ने कसी कमर, ID के बिना No एंट्री

    चैत्र नवरात्रि: वैष्णो देवी यात्रा में उमड़ेगी भीड़…श्राइन बोर्ड ने कसी कमर, ID के बिना No एंट्री


    कटड़ा।
    आगामी 19 मार्च से शुरू होने जा रहे चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri) के दौरान वैष्णो देवी (Vaishno Devi ) आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (Shri Mata Vaishno Devi Shrine Board) ने कमर कस ली है। उपराज्यपाल के निर्देशों के बाद सीईओ सचिन कुमार वैश्य की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन की समीक्षा की गई।

    सोमवार को बैठक में निर्णय लिया गया कि यात्रा मार्ग पर आरएफआईडी कार्ड प्रणाली का सख्ती से पालन किया जाएगा। केवल वैध कार्ड धारकों को ही भवन की ओर जाने की अनुमति मिलेगी। प्रमुख चौकियों पर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती होगी ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। रियासी पुलिस, सीआरपीएफ और सेना के समन्वय से मजबूत सुरक्षा ग्रिड तैयार किया गया है, जिसमें त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) भी शामिल होगा।

    इस बार तीर्थस्थल की सजावट में प्राकृतिक सामग्रियों के उपयोग पर जोर दिया गया है ताकि आग के खतरे को कम किया जा सके। अग्निशमन विभाग को पूरे ट्रैक का फायर ऑडिट करने और रणनीतिक स्थानों पर दमकल वाहनों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।


    भीड़ प्रबंधन पर वैकल्पिक व्यवस्था

    अधिक भीड़ होने की स्थिति में श्रद्धालुओं को वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जाएगा। शहर में यातायात सुचारू रखने के लिए अवैध रूप से पार्क किए गए वाहनों को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र के माध्यम से आधुनिक वायरलेस उपकरणों द्वारा पूरे मार्ग की रियल टाइम निगरानी की जाएगी।


    सेवा प्रदाताओं का होगा सत्यापन

    श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए यात्रा मार्ग पर चलने वाले पिठू,पालकी और पोनीवालों का सत्यापन किया जाएगा। फर्जीवाड़े को रोकने के लिए दस्तावेजों की नियमित जांच होगी, ताकि केवल अधिकृत व्यक्ति ही सेवा दे सकें। सीईओ ने कहा कि हमारा लक्ष्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित और आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करना है। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं ताकि नवरात्र के दौरान यात्रा निर्बाध रूप से चले।


    देसी-विदेशी फूलों से महकेगा भवन, स्वर्ग सा दिखेगा नजारा

    आगामी 19 मार्च से शुरू होने वाले पावन चैत्र नवरात्रके लिए विश्व प्रसिद्ध श्री माता वैष्णो देवी भवन को अलौकिक रूप दिया जा रहा है। श्राइन बोर्ड के मार्गदर्शन में पूरे भवन परिसर, प्राचीन गुफा और अटका स्थल की सजावट का काम युद्धस्तर पर जारी है। इस बार की सजावट में करीब 30 से 40 ट्रक देसी-विदेशी फूलों और 4 से 5 ट्रक फलों का उपयोग किया जा रहा है, जिसे 300 से अधिक विशेष कारीगर अंतिम रूप दे रहे हैं। इस बार की सजावट केवल फूलों तक सीमित नहीं है। यात्रियों के लिए भव्य पंडाल और झांकियां सजाई जा रही हैं, जिनमें शिव परिवार, राम दरबार, मां वैष्णो देवी के नौ रूप और विष्णु-लक्ष्मी के पंडाल शामिल हैं। अयोध्या के रामलला के दर्शन की झलक भी आकर्षित करेगी। माता की स्वर्ण जड़ित प्राचीन गुफा और अटका स्थल को विशेष रोशनी और सुगंधित पुष्पों से सजाया जा रहा है।

    नवरात्र के दौरान यज्ञशाला में विशाल शतचंडी महायज्ञ का आयोजन होगा। पद्मश्री डॉ. विश्वमूर्ति शास्त्री के सानिध्य में 51 पंडित मंत्रोच्चारण के साथ हवन करेंगे। ऐसा ही धार्मिक अनुष्ठान अर्धकुंवारी मंदिर प्रांगण में भी आयोजित किया जाएगा।

    सुरक्षा के लिए पांच जोन और कंट्रोल सेंटर से निगरानी
    सुरक्षा की दृष्टि से कटड़ा से लेकर भवन तक इलाके को पांच जोन (कटड़ा, बाणगंगा, अर्धकुंवारी, ताराकोट-सांझीछत और भवन) में बांटा गया है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों और पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है। इंटीग्रेटेड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से पूरी यात्रा मार्ग पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। श्राइन बोर्ड के सभी भोजनालयों में श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलाहार की व्यवस्था रहेगी।


    ऑनलाइन बुकिंग फुल, चार लाख भक्तों की उम्मीद

    नवरात्र के लिए उत्साह ऐसा है कि हेलीकॉप्टर, बैटरी कार, रोपवे और भवन पर रुकने की ऑनलाइन बुकिंग अभी से फुल हो चुकी है। श्राइन बोर्ड को इस बार तीन से चार लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। दिव्यांग और बुजुर्ग यात्रियों के लिए निहारीका परिसर में विशेष सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं। सीईओ सचिन कुमार वैश्य ने बताया कि श्राइन बोर्ड श्रद्धालुओं की सेवा के लिए पूरी तरह तत्पर है। भक्त बिना किसी परेशानी के मां के दरबार आएं, सभी उचित इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं।

  • देश में फिर बदला मौसम…. कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि से गिरा पारा, आज भी अलर्ट…

    देश में फिर बदला मौसम…. कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि से गिरा पारा, आज भी अलर्ट…


    नई दिल्ली ।
    उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India.) में मौसम ने एक बार फिर करवट की है। हिमालयी क्षेत्रों में ऊंची चोटियों पर हिमपात और घाटियों व आसपास के मैदानी इलाकों में गरज के साथ बारिश (Rain), तेज हवाएं चलने और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि (Hailstorm) होने से तापमान में कुछ गिरावट दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और उससे सटे आसपास के मैदानी इलाकों में एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय (Western Disturbance Active) हो रहा है, जिसके चलते 18 से 20 मार्च के दौरान इन इलाकों में बारिश और तूफानी हवाओं के साथ कहीं-कहीं ओले गिरने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के सोमवार सुबह 8:30 बजे तक आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, पूर्वोत्तर के राज्यों और झारखंड में छिटपुट स्थानों पर ओलावृष्टि हुई।

    उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम और मेघालय में छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा (7-20 सेमी) दर्ज की गई है। अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा (7-11 सेमी) हुई। बंगाल के कोलकाता और मालद में कुछ जगहों पर 50-65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चलीं।


    जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी में फंसे 235 लोग निकाले

    जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ के सिंथन टॉप पर रविवार रात भारी बर्फबारी में फंसे 235 लोगों और 38 गाड़ियों को सेना ने सुरक्षित निकाला लिया है। व्हाइट नाइट कोर के जवानों ने लोगों को गर्म खाना, पीने का पानी और रहने की जगह भी दी। वहीं, डांगदुरु में भूस्खलन के बाद से लापता व्यक्ति का सुराग सोमवार को भी नहीं लग पाया है। बचाव कार्य जारी है।


    उत्तराखंड में ठंड ने फिर दी दस्तक

    उत्तराखंड के सीमांत जनपदों में मौसम ने एक बार फिर करवट बदली है। रविवार रात ऊंची चोटियों पर जहां भारी हिमपात हुआ वहीं निचले इलाकों में बादलों के गरजने के साथ हुई झमाझम बारिश ने ठिठुरन बढ़ा दी है। मुनस्यारी के खलिया टॉप, पंचाचूली, हंसलिंग, नाग्निधुरा और छिपलाकेदार की पहाड़ियों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है।


    लाहौल से 10 हजार पर्यटक निकाले

    हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। मनाली-लेह मार्ग पर 1,500 वाहनों में फंसे 10 हजार सैलानी और स्थानीय लोग रोहतांग टनल होकर सुरक्षित निकाल लिए गए हैं। रविवार को रातभर कड़ाके की ठंड के बीच लोगों को गाड़ियों में ही रहना पड़ा।

  • इंदौर का 10वीं छात्र रुद्र उत्तराखंड से सुरक्षित बरामद, प्रेमानंद महाराज से मिलने निकला था

    इंदौर का 10वीं छात्र रुद्र उत्तराखंड से सुरक्षित बरामद, प्रेमानंद महाराज से मिलने निकला था

    नई दिल्ली।  खजराना क्षेत्र के 10वीं के छात्र रुद्र पांडेय को पुलिस ने चार दिन बाद उत्तराखंड के गुप्तकाशी से सुरक्षित बरामद कर लिया। छात्र घर छोड़ने से पहले पत्र लिख गया था, जिसमें उसने बताया कि वह संत प्रेमानंद महाराज से मिलने और “अपने असली परिवार” के पास जाने के लिए निकल पड़ा है।

    पुलिस के अनुसार, रुद्र 12 मार्च को घर से निकला था। उसने अपने पत्र में भावुक शब्दों में लिखा था: “मैं रुद्र पांडेय आ रहा हूं महाराज जी, आपके चरणों में। मैं अपने असली परिवार के पास जा रहा हूं। मम्मी-पापा मुझे ढूंढने की कोशिश मत करना। आपके साथ मेरा जीवन पूरा हो गया, अब मैं चलता हूं।”

    छात्र ने पुलिस को बताया कि वह सोशल मीडिया पर संतों के प्रवचन और रील्स देखता था और उन्हीं से प्रभावित होकर आध्यात्मिक खोज में घर छोड़कर निकला। रुद्र ने अपने परिवार को पत्र में यह भी लिखा कि उसके जाने का कारण आध्यात्मिक मार्ग की तलाश है और वे उसे ढूंढने की कोशिश न करें।

    रुद्र ने घर से निकलते समय लगभग ₹500 अपने साथ लिए थे। उसने पत्र में लिखा था कि पैसे उसके दोस्त के पास हैं और बाद में माता-पिता को लौटवा दिए जाएंगे। बेटे के अचानक गायब होने और पत्र मिलने से परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों ने तुरंत खजराना थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

    तलाश के दौरान पुलिस को शक था कि रुद्र वृंदावन की ओर गया होगा। इसी बीच, किशोर ने अपने पिता को फोन किया और आधार कार्ड की जरूरत बताई, जिससे पुलिस को उसकी लोकेशन पता चली। इसके बाद इंदौर पुलिस ने उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग पुलिस की मदद से उसे गुप्तकाशी क्षेत्र से बरामद किया।

    बरामदगी के बाद रुद्र को उसके माता-पिता को सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि किशोर पूरी तरह सुरक्षित है और अब उसे काउंसलिंग के माध्यम से समझाइश दी जा रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन वीडियो किशोरों पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। रुद्र के इस प्रकरण ने यह दिखाया कि माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों की मानसिक स्थिति और डिजिटल आदतों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

  • तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ीं, कांग्रेस ने राजद का गणित बिगाड़ा

    तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ीं, कांग्रेस ने राजद का गणित बिगाड़ा



    नई दिल्ली।  बिहार में राज्यसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन के लिए बड़ा झटका आया है। RJD के उम्मीदवार एडी सिंह के लिए वोट देने के लिए कांग्रेस के तीन और RJD के एक विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए। यह स्थिति RJD अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के लिए चिंता का विषय बन गई है।

    तेजस्वी ने असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और मायावती की BSP से समर्थन जुटाकर छह अतिरिक्त वोट जोड़ने की कोशिश की थी। लेकिन महागठबंधन के अपने चार विधायकों के अनुपस्थित रहने से यह रणनीति कमजोर पड़ गई।

    कांग्रेस के वाल्मीकि नगर विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, फारबिसगंज के मनोज विश्वास, मनिहारी के मनोहर प्रसाद सिंह और RJD के ढाका के फैसल रहमान वोटिंग में शामिल नहीं हुए। कुल 243 में से 239 विधायकों ने वोट डाला।

    महागठबंधन की योजना थी कि ओवैसी और मायावती के समर्थन से संख्या 35 से बढ़ाकर 41 हो जाएगी। लेकिन चार विधायकों की अनुपस्थिति से यह घटकर 37 रह गई। इससे एनडीए के पांचवें उम्मीदवार शिवेश राम की जीत की संभावना मजबूत हो गई है।

    तेजस्वी यादव ने विधानसभा में मौजूद रहकर भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं दी। उन्होंने कहा कि मतदान शाम 4 बजे तक है और परिणाम आने के बाद ही वह इस पर कुछ कहेंगे।

    विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना महागठबंधन के भीतर तालमेल की कमी और कांग्रेस के अंदर मतभेदों को उजागर करती है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी महागठबंधन के सीट बंटवारे में देरी और किचकिच को पराजय के कारणों में गिना गया था, और यही माहौल अब राज्यसभा चुनाव में भी देखने को मिला।

    एनडीए के अन्य चार उम्मीदवार हैं: नीतीश कुमार (JDU अध्यक्ष और CM), नितिन नवीन (BJP अध्यक्ष), रामनाथ ठाकुर (JDU केंद्रीय मंत्री) और उपेंद्र कुशवाहा (RLM अध्यक्ष)। चार विधायकों के वोट न डालने से एनडीए की स्थिति मजबूत हुई है और उनके सभी उम्मीदवार दिल्ली पहुंच सकते हैं।

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह घटना महागठबंधन के लिए गंभीर चेतावनी है। कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक कमजोरी और मतभेद गठबंधन की सफलता पर असर डाल सकते हैं। तेजस्वी यादव और RJD को अब संगठन मजबूत करने, सहयोग सुनिश्चित करने और वोटिंग रणनीति पर नजर रखने की जरूरत है।

  • जंग के बीच भारत पहुंचा पहला LPG जहाज: शिवालिक में 32.4 लाख सिलेंडर के बराबर गैस, नंदा देवी और जग लाडकी कल मुंद्रा पोर्ट पर

    जंग के बीच भारत पहुंचा पहला LPG जहाज: शिवालिक में 32.4 लाख सिलेंडर के बराबर गैस, नंदा देवी और जग लाडकी कल मुंद्रा पोर्ट पर


    नई दिल्ली। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच भारत को राहत देने वाला पहला LPG कैरियर जहाज शिवालिक कतर से 46 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर सोमवार शाम पहुंच गया। यह मात्रा लगभग 32.4 लाख घरेलू सिलेंडरों के बराबर है। जहाज 14 मार्च को होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर रवाना हुआ था। शिपिंग मंत्रालय ने बताया कि कल नंदा देवी नामक जहाज भी लगभग 46 हजार टन LPG लेकर और जग लाडकी जहाज 81 हजार टन मुरबान कच्चा तेल लेकर भारत पहुंचेंगे।

    भारत सरकार ने फारस की खाड़ी में सभी भारतीय नाविकों की सुरक्षा की पुष्टि की। वर्तमान में 22 भारतीय झंडा वाले जहाज वहां सक्रिय हैं, जिन पर 611 भारतीय नाविक सवार हैं। अधिकारियों ने बताया कि मुंद्रा पोर्ट पर शिवालिक जहाज के लिए सभी दस्तावेजी और बर्थिंग व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान से जमीन मार्ग के जरिए 90 भारतीय नागरिक सुरक्षित अजरबैजान पहुंचे हैं। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने सभी नागरिकों को वीजा और इमिग्रेशन सहायता प्रदान की।

    वहीं, मिडिल-ईस्ट में सैन्य तनाव के बीच ब्रिटेन, जर्मनी और ग्रीस ने स्पष्ट कर दिया है कि वे होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े किसी भी सैन्य अभियान में भाग नहीं लेंगे। इजराइल ने ईरान के तेहरान में एयरस्ट्राइक कर एक विमान नष्ट करने का दावा किया है, जिसका इस्तेमाल ईरानी नेतृत्व और सीनियर अधिकारियों द्वारा किया जाता था।

    यह भारत के लिए जंग के बीच ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में पहला बड़ा कदम है, जिससे घरेलू LPG और कच्चा तेल की निरंतर आपूर्ति बनी रहेगी।

  • धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट करेगा निरीक्षण, ASI रिपोर्ट में 12वीं–20वीं सदी के शिलालेख मिले, 2 अप्रैल को निर्णायक सुनवाई

    धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट करेगा निरीक्षण, ASI रिपोर्ट में 12वीं–20वीं सदी के शिलालेख मिले, 2 अप्रैल को निर्णायक सुनवाई


    भोपाल। मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला मामले में हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई की। इस दौरान बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी और सुनवाई से पहले जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी भोजशाला का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण से पहले याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जाएंगी, उसके बाद पक्षकारों की सुनवाई होगी। मुस्लिम पक्ष ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है।

    सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन, राज्य की ओर से एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह और अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन वीडियो कांफ्रेंसिंग से उपस्थित रहे। वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन के साथ हिंदू फ्रंट की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल और अधिवक्ता विनय जोशी भी अदालत में मौजूद रहे।

    भोजशाला मामले में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें काजी जकुल्लाह, अंतर सिंह, मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी (धार) के अब्दुल समद खान, कुलदीप तिवारी और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री शामिल हैं। 23 फरवरी को हाईकोर्ट ने सभी पक्षकारों को एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां और सुझाव दो हफ्ते के भीतर दाखिल करने के निर्देश दिए थे।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हाईकोर्ट के आदेश पर 22 मार्च 2024 से लगभग 100 दिन तक परिसर और उससे 50 मीटर की परिधि में सर्वेक्षण, जांच और सीमित उत्खनन किया। टीम में पुरातत्वविद्, अभिलेखविद् और रसायनविद् समेत अन्य विशेषज्ञ शामिल थे। पहले ही रिपोर्ट की प्रतियां याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।

    एचएसआई रिपोर्ट में 12वीं से 20वीं सदी तक के शिलालेखों के प्रमाण मिले हैं। इनमें संस्कृत-प्राकृत शिलालेख, नागरी लिपि और अरबी-फारसी लेख शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार भोजशाला परिसर में 56 अरबी-फारसी शिलालेख मिले, जिनमें दुआएं, नाम और धार्मिक वाक्य लिखे हैं। साथ ही 12वीं–16वीं सदी के संस्कृत-प्राकृत शिलालेख मिले, जिनमें पारिजातमंजरी-नाटिका और अवनिकर्मसातम जैसे उल्लेख हैं। कुछ पत्थरों पर लिखावट मिटाकर दोबारा इस्तेमाल के संकेत भी देखे गए।

    रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि भोजशाला परिसर अलग-अलग कालखंडों में धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक कार्यों के लिए उपयोग में रहा। ब्रिटिश काल से अब तक इसके संरक्षण के प्रयासों का भी जिक्र किया गया है। कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देशित किया है कि वे 98 दिन तक चली वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट पर अपनी लिखित आपत्तियां और सुझाव अगली सुनवाई से पहले दाखिल करें।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जानी है। ट्रांसफर के कारण पहले जबलपुर प्रिंसिपल बेंच में चली सुनवाई अब फिर से इंदौर खंडपीठ पर आ गई है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विनय जोशी ने कहा कि दो सप्ताह के भीतर एएसआई रिपोर्ट पर आपत्तियां पेश कर दी जाएंगी।

    मुख्य बिंदु: 2 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी, जस्टिस भोजशाला का निरीक्षण करेंगे, मुस्लिम पक्ष ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताई, ASI ने 100 दिन तक सर्वे किया, 12वीं से 20वीं सदी के शिलालेख मिले।