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  • EC ने चुनाव की घोषणा के तत्काल बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और गृह सचिव बदले

    EC ने चुनाव की घोषणा के तत्काल बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और गृह सचिव बदले


    कोलकाता।
    विधानसभा चुनाव (Assembly Elections.) की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए चुनाव आयोग (Election Commission) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal ) के मुख्य सचिव (Bengal Chief Secretary) और गृह सचिव (Home Secretary) को बदलने का फैसला किया है। चुनाव की तारीखों के एलान के बाद रविवार रात आयोग ने यह आदेश जारी किया। आयोग के निर्देश के अनुसार राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह अब दुष्यंत नारियावाला को नया मुख्य सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही राज्य के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को भी उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह संघमित्रा घोष को नया गृह सचिव नियुक्त किया गया है।


    हटाए जा सकते हैं डीपीपी और सीपी भी

    इस बीच, सूत्रों से यह भी जानकारी मिल रही है कि पुलिस महानिदेशक और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर भी हटाए जा सकते हैं। चुनाव की घोषणा होते ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। इस दौरान चुनाव आयोग को प्रशासनिक स्तर पर कई विशेष अधिकार मिल जाते हैं। आयोग जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक पदों पर तैनात अफसरों के तबादले या बदलाव का आदेश दे सकता है।

    पिछले चुनावों में भी आयोग ने कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों और अन्य अधिकारियों को बदला था। कोलकाता पुलिस आयुक्त सहित कई वरिष्ठ पदों पर भी चुनाव से पहले तबादले के उदाहरण मिलते रहे हैं। हालांकि इस स्तर के शीर्ष पदों पर बदलाव हाल के वर्षों में बहुत कम देखने को मिला है।


    दुश्यंत नरियाला बने नए मुख्य सचिव

    नए मुख्य सचिव बनाए गए दुश्यंत नारियावाला वर्ष 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। इससे पहले वह राज्य सरकार के उत्तर बंगाल विकास विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे। इसके अलावा उन्होंने आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी संभाली है। अतिरिक्त प्रभार के रूप में वह पहले सिंचाई विभाग का कामकाज भी देख चुके हैं। अब नंदिनी चक्रवर्ती को पद से हटाकर आयोग ने दुष्यंत नारियावाला को ही राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। चुनाव आयोग ने उन्हें सोमवार दोपहर तीन बजे तक अपना पदभार ग्रहण करने का निर्देश दिया है।


    संघमित्रा घोष को मिली गृह सचिव की जिम्मेदारी

    वहीं राज्य के नए गृह सचिव के रूप में संघमित्रा घोष को नियुक्त किया गया है। गृह विभाग चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए यह पद काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।


    23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा मतदान

    गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनाव की तारीखों का एलान रविवार (15 मार्च) को चुनाव आयोग ने कर दिया। निर्वाचन आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य में चरणबद्ध तरीके से अधिसूचना जारी होने से लेकर नामांकन दाखिल करने और मतदान की तारीख से लेकर मतगणना की तारीख जारी कर दी। इसके मुताबिक, बंगाल में इस बार सिर्फ दो चरणों में ही चुनाव कराया जाएगा। 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को राज्य में मतदान होगा। वहीं, चार मई को मतगणना तय की गई है।

    चुनाव कार्यक्रम के तहत पहले चरण की अधिसूचना 30 मार्च को जारी की जाएगी, जबकि दूसरे चरण की अधिसूचना 2 अप्रैल को जारी होगी। पहले चरण के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अप्रैल तय की गई है, वहीं दूसरे चरण के लिए 9 अप्रैल तक नामांकन किया जा सकेगा। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच क्रमशः 7 अप्रैल और 10 अप्रैल को होगी। वहीं उम्मीदवार पहले चरण के लिए 9 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 13 अप्रैल तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं।


    आदर्श आचार संहिता क्या है?

    आदर्श आचार संहिता राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के मार्गदर्शन के लिए निर्धारित किए गए मानकों का एक ऐसा समूह है जिसे राजनैतिक दलों की सहमति से तैयार किया गया है। आदर्श आचार संहिता में चुनाव आयोग की भूमिका अहम होती है। संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन संसद और राज्य विधानमंडलों के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनावों का आयोजन चुनाव आयोग का सांविधानिक कर्तव्य है।


    आदर्श आचार संहिता कितने दिनों तक लागू रहती है?

    चुनाव आयोग द्वारा चुनाव तारीखों की घोषणा की तारीख से इसे लागू किया जाता है और यह चुनाव प्रक्रिया के पूर्ण होने तक लागू रहती है। लोकसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता पूरे देश में, जबकि विधानसभा चुनावों के दौरान पूरे राज्य में लागू होती है।

  • यूपी में LPG गैस की किल्लत का असर, 250 छोटे उद्योग बंद, 40% स्ट्रीट फूड ठेले ठप

    यूपी में LPG गैस की किल्लत का असर, 250 छोटे उद्योग बंद, 40% स्ट्रीट फूड ठेले ठप



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में लखनऊ समेत कई जिलों में एलपीजी गैस की किल्लत का असर साफ दिख रहा है। घरेलू सिलेंडरों के लिए गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं, जबकि कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति न होने से छोटे और मझोले उद्योग बंद होने की कगार पर हैं। स्ट्रीट फूड दुकानों का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा बंद हो गया है और गैस आधारित उद्योगों की उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हुई है।

    घरेलू गैस संकट

    लखनऊ में कई दिनों से लोग सिलेंडर बुक कराने के बाद भी गैस प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। मोबाइल बुकिंग से भी सिलेंडर नहीं मिल रहा। जिनके पास सिर्फ एक सिलेंडर बचा है, उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

    उद्योगों और स्ट्रीट फूड पर असर

    करीब 250 छोटे उद्योग पूरी तरह बंद हो गए हैं। प्लास्टिक, पैकेजिंग और दवा उद्योग भी प्रभावित हुए हैं। ब्रज मंडल के स्कूलों में अब मिड-डे मील लकड़ी के चूल्हों पर बनाना पड़ रहा है। फिरोजाबाद में बंद होने वाले चूड़ी कारखानों की संख्या 90 से बढ़कर 112 हो गई। एटा और कासगंज में सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लगी रहीं।

    वाराणसी और पूर्वांचल में औद्योगिक क्षेत्रों में गैस संकट के कारण लगभग 30 प्रतिशत उत्पादन ठप रहा। पैकेजिंग इकाइयों में एक सप्ताह से उत्पादन रुक चुका है। रेलवे स्टेशनों के बेस किचन, फूड प्लाजा और जन-आहार संचालन के लिए भी सिलेंडर की आपूर्ति जरूरी हो गई।

    प्रशासन की कार्रवाई और सुरक्षा

    जौनपुर में एक एजेंसी पर तोड़फोड़ की कोशिश की गई, बलिया में गैस गोदाम के मैनेजर को धमकी दी गई। मुरादाबाद में एजेंसी पर छापेमारी की गई और अमरोहा में चार दिन गैस न मिलने पर गजरौला मार्ग पर जाम लग गया। हमीरपुर में जिला पूर्ति विभाग ने सुमेरपुर ब्लॉक में छापेमारी कर चार जगहों से 18 सिलेंडर जब्त किए।

    होटल-रेस्टोरेंट भी प्रभावित

    गोरखपुर में कमर्शियल सिलेंडर की कमी से होटल और रेस्टोरेंट संचालक कोयला, लकड़ी और डीजल भट्ठी का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रशासन की सख्ती के बावजूद 87 एजेंसियों ने 25,000 से अधिक उपभोक्ताओं को सिलेंडर उपलब्ध कराया।

    राजनीतिक प्रतिक्रिया

    एलपीजी संकट को लेकर सपा और कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि नोटबंदी के बाद अब सिलेंडरों के लिए भी मारामारी हो रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि सिलेंडरों की कमी से कोविड-जैसे हालात बन रहे हैं और कारोबार प्रभावित हो रहा है।

  • बिहार राज्यसभा चुनाव: पटना में रातभर ‘होटल पॉलिटिक्स’, 4 कांग्रेस विधायक नॉट रीचेबल

    बिहार राज्यसभा चुनाव: पटना में रातभर ‘होटल पॉलिटिक्स’, 4 कांग्रेस विधायक नॉट रीचेबल


    नई दिल्ली। बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मतदान से पहले पटना के होटल पनाश में महागठबंधन के विधायकों को एकत्रित किया गया, जहां कांग्रेस के चार विधायकों के पहुंचने का देर रात तक इंतजार होता रहा। सूत्रों के मुताबिक इन चार विधायकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिससे राजनीतिक हलकों में सस्पेंस की स्थिति बन गई है।

    बिहार विधानसभा में कांग्रेस के छह विधायक हैं। इनमें से अभी तक केवल दो विधायक किशनगंज से कमरूल होदा और चनपटिया से अभिषेक रंजन ही होटल पनाश पहुंचे हैं। कमरूल होदा ने दावा किया कि बाकी चार विधायक भी जल्द पहुंच जाएंगे और कांग्रेस के सभी विधायक महागठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं।

    जिन विधायकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है उनमें मनिहारी से मनोहर सिंह, फारबिसगंज से मनोज विश्वास, अररिया सदर से अब्दुर रहमान और वाल्मीकिनगर से सुरेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। महागठबंधन खासकर राजद के नेता इन विधायकों से संपर्क साधने में जुटे हुए हैं।

    राज्यसभा चुनाव से पहले विधायकों को एक जगह रोककर रखना महागठबंधन की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है, ताकि किसी संभावित क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक दबाव से बचा जा सके। इसी क्रम में राजद नेता तेजस्वी यादव भी होटल पनाश पहुंचे और विधायकों के साथ बैठक की।

    राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने दावा किया कि महागठबंधन के पक्ष में कुल 48 विधायक समर्थन में आ सकते हैं। उन्होंने विपक्ष के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पास कुछ नहीं है, लेकिन बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महागठबंधन का मौजूदा संख्या बल 41 है, जिसे बढ़ाकर 48 तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

    इस बीच पटना के एसएसपी कार्तिकेय कुमार शर्मा ने बताया कि राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। उन्होंने कहा कि मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    होटल पनाश में AIMIM के सभी पांच विधायक और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान भी मौजूद हैं, जो इस चुनाव में महागठबंधन का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में उनकी भूमिका भी अहम मानी जा रही है।

    आज होगा मतदान
    बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए आज मतदान कराया जा रहा है। वोटिंग सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगी और परिणाम भी आज ही घोषित किए जाएंगे।

    इस चुनाव के लिए कुल छह उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था, जिनके नामांकन वैध पाए गए हैं। जेडीयू की ओर से नीतीश कुमार के दो और रामनाथ ठाकुर के तीन नामांकन सेट दाखिल किए गए हैं, जबकि भाजपा ने नितिन नबीन को उम्मीदवार बनाया है।

    बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं और राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 वोट जरूरी होते हैं। वर्तमान स्थिति में एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जिससे उसके लिए चार सीटें जीतना आसान माना जा रहा है। वहीं महागठबंधन के पास कुल 41 विधायक हैं, जिसमें सबसे बड़ी भूमिका राजद की है और वह एक सीट पर मजबूत स्थिति में है।

    हालांकि पांचवीं सीट पर मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। इस सीट पर AIMIM और BSP जैसे छोटे दलों के विधायकों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। AIMIM के पास 5 और BSP के पास 1 विधायक है, जिससे इस सीट के नतीजे पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

  • दत्तात्रेय होसबाले बोले- ईरान युद्ध पर भारत का रुख सही, दुनिया में शांति चाहता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

    दत्तात्रेय होसबाले बोले- ईरान युद्ध पर भारत का रुख सही, दुनिया में शांति चाहता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ


    नई दिल्ली। हरियाणा में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के अंतिम दिन सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई अहम मुद्दों पर संघ का पक्ष रखा। उन्होंने मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और ईरान को लेकर भारत के रुख पर कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत सरकार देशहित में सही कदम उठा रही है।

    होसबाले ने कहा कि संघ हमेशा दुनिया में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान संवाद और संतुलित कूटनीति से होना चाहिए।

    पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध जरूरी
    होसबाले ने कहा कि संघ हमेशा पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंधों पर जोर देता है। उन्होंने बांग्लादेश और नेपाल में हाल के राजनीतिक बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि इन देशों में शांति और स्थिरता बनी रहना पूरे एशिया के विकास और सुरक्षा के लिए जरूरी है।

    हालांकि उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई और कहा कि वहां सामाजिक संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

    भारतीयता और हिंदुत्व पर क्या बोले
    होसबाले ने कहा कि भारतीयता और हिंदुत्व को लेकर स्पष्ट समझ होना जरूरी है। उनके अनुसार हिंदुत्व केवल एक विचार या मानसिकता नहीं बल्कि एक जीवनशैली है, जो समाज में समरसता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है।

    संघ में मुस्लिम और महिलाओं की भूमिका
    संघ में सदस्यता को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म का व्यक्ति संघ से जुड़ सकता है और भगवा ध्वज को प्रणाम कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि संघ में पहले से ही कई मुस्लिम कार्यकर्ता सक्रिय हैं।

    महिलाओं की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि शाखा की कार्यप्रणाली में महिलाएं शामिल नहीं होतीं, लेकिन संघ की कई अन्य गतिविधियों और संगठनों में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्य कर रही हैं।

    बेसहारा गोवंश पर भी बोले
    बेसहारा गोवंश के मुद्दे पर होसबाले ने कहा कि सरकार और नगर निगम इस दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि गायों को केवल दूध के लिए उपयोगी न समझें, क्योंकि गोबर और गौमूत्र भी कई तरह से उपयोगी होते हैं, इसलिए उन्हें सड़कों पर छोड़ना उचित नहीं है।

    बीजेपी से संबंध पर दिया जवाब
    राजनीति में संघ की भूमिका पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि देश में कई विचारधाराएं हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने संघ की विचारधारा को अपनाया। इसी वजह से संघ से जुड़े कई लोग राजनीति में सक्रिय होकर देशहित के विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं।

    हरियाणा में बड़ा RSS केंद्र बनाने की तैयारी
    सभा के दौरान उत्तर भारत में संघ की गतिविधियों को मजबूत करने के लिए पानीपत (हरियाणा) में बड़ा केंद्र विकसित करने का प्रस्ताव भी सामने आया। यहां पट्टीकल्याणा स्थित माधव दृष्टि साधना केंद्र को नागपुर स्थित मुख्यालय की तर्ज पर विकसित करने की योजना है।

    करीब 25 एकड़ क्षेत्र में फैले इस केंद्र को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यहां से उत्तर भारत के कई राज्यों में संघ के कार्यों को समन्वित किया जा सकेगा।

    तीन दिवसीय सभा की प्रमुख बातें
    RSS की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संगठन के भविष्य की योजनाओं और गतिविधियों पर चर्चा हुई। रिपोर्ट के अनुसार देशभर में संघ की 88,949 शाखाएं संचालित हो रही हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5,820 अधिक हैं।

    सभा में दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में संगठन विस्तार की रणनीति पर भी चर्चा हुई। साथ ही अगले वर्षों में केरल, तमिलनाडु, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में संघ की गतिविधियों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

  • लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता और धैर्य की PM मोदी ने की सराहना, बिरला ने कहा- शुक्रिया

    लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता और धैर्य की PM मोदी ने की सराहना, बिरला ने कहा- शुक्रिया


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद उनके धैर्य, संयम और निष्पक्षता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सदन के संचालन के दौरान बिरला ने संसदीय मर्यादा और नियमों का पालन करते हुए संतुलित भूमिका निभाई। इस पत्र पर ओम बिरला ने प्रधानमंत्री का धन्यवाद दिया।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखकर कहा कि सदन ने अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकार करके लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और संसदीय परंपराओं के प्रति स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने बिरला के उस वक्तव्य की भी प्रशंसा की, जिसमें उन्होंने संसदीय इतिहास, अध्यक्ष की जिम्मेदारियों और नियमों की सर्वोच्चता पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री ने इसे संतुलित और धैर्यपूर्ण बताया।

    प्रधानमंत्री ने पत्र में कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन असहमति और असम्मान में अंतर होना चाहिए। संसद संवाद, तर्क और विचार-विमर्श का सर्वोच्च मंच है और यहां युवाओं, महिलाओं और सभी वर्गों की आवाज को स्थान मिलना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने बिरला की कार्यशैली और सार्वजनिक जीवन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की भी सराहना की। उन्होंने राजस्थान के कोटा में एयरपोर्ट परियोजना के शिलान्यास में उनकी सक्रिय भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि वह अपने संसदीय क्षेत्र और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर काम कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री के पत्र पर ओम बिरला ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी में संसदीय लोकतंत्र के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान है। यह पत्र सार्वजनिक जीवन में उच्च नैतिक मूल्यों का उदाहरण है और सभी सांसदों के लिए प्रेरणादायक है।

    उन्होंने कहा कि आपका यह संदेश दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर संसद, राज्य विधानमंडल तथा स्थानीय निकायों के सभी जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करेगा और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों तथा संविधान सभा के सदस्यों द्वारा स्थापित लोकतंत्र के सशक्त नैतिक आधार को और सुदृढ़ करेगा।

    उल्लेखनीय है कि विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने पेश किया। इसे 50 से अधिक विपक्षी सांसदों का समर्थन प्राप्त था। विपक्ष का आरोप था कि अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्षी सदस्यों को पर्याप्त अवसर नहीं दिया। 11 मार्च को लोकसभा में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने की। ओम बिरला ने नैतिक आधार पर स्वयं को चर्चा से अलग रखा था। अंत में ध्वनिमत से अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया गया और सदन स्थगित कर दिया गया। इसके अगले दिन ओम बिरला ने फिर से अध्यक्ष की कुर्सी संभाली और सदन को संबोधित किया।

  • पांच राज्यों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा, 6 राज्यों में 8 सीटों पर उपचुनाव भी, नतीजे 4 मई को

    पांच राज्यों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा, 6 राज्यों में 8 सीटों पर उपचुनाव भी, नतीजे 4 मई को


    Election
    नई दिल्ली।
    चुनाव आयोग ने रविवार को पांच राज्यों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की है। पुडुचेरी, केरल और असम में 09 अप्रैल को एक चरण में मतदान होगा। वहीं तमिलनाडु में एक चरण में 23 अप्रैल और पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। सभी के नतीजे 0 4 मई को आयेंगे।

    असम, पुडुचेरी और केरल की सभी 126, 30 और 140 सीटों पर 16 मार्च को अधिसूचना जारी होगी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 मार्च है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 24 मार्च को की जाएगी। उम्मीदवार 26 मार्च तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे।

    तमिलनाडु की सभी 234 सीटों और पश्चिम बंगाल में पहले चरण की 152 सीटो पर 30 मार्च को अधिसूचना जारी होगी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 06 अप्रैल है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 07 अप्रैल को की जाएगी। उम्मीदवार 09 अप्रैल तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे।

    पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की 142 सीटो पर 02 अप्रैल अधिसूचना जारी होगी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 09 अप्रैल है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 10 अप्रैल को की जाएगी। उम्मीदवार 13 अप्रैल तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे।

    इसके अलावा आयोग ने आज गोवा की पोंडा, गुजरात की उमरेठ, कर्नाटक की बागलकोट और दावणगेरे साउथ, महाराष्ट्र की राहुरी और बारामती, नगालैंड की कोरिडांग (एसटी) तथा त्रिपुरा की धर्मनगर पर उपचुनाव की घोषणा की है। इन सभी सीटों पर संबंधित विधायकों के निधन के कारण रिक्ति उत्पन्न हुई है, जिसके चलते निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव कराया जाएगा। इनमें से गुजरात और महाराष्ट्र की सीटों पर 23 अप्रैल और बाकी सभी सीटों पर 09 अप्रैल को मतदान होगा।

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ दिल्ली में आज चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से जुड़ी पत्रकार वार्ता की। इसमें कुमार ने कहा कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही इन सभी जगह पर आदर्श आचार संहिता लग गई है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग नियम और व्यवस्था के तहत काम करता है और आचार संहिता लगने से पूर्व लिए गए सरकारी फैसलों और राजनीतिक बयानों से उसका कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद दिए गए बयानों और प्रशासनिक निर्णय पर चुनाव आयोग कड़ी नजर रखेगा।

    चुनाव आयोग के अनुसार असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में लगभग 17.4 करोड़ मतदाता हैं। कुल 824 विधानसभा क्षेत्र में करीब 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं और लगभग 25 लाख चुनाव कर्मी चुनाव प्रक्रिया में भाग लेंगे।

    पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 07 मई तमिलनाडु का 10 मई, असम 20 मई और केरल 23 मई को समाप्त होगा। वहीं केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधानसभा का कार्यकाल 15 जून तक है।

    कुल 824 विधानसभा सीटों में असम में 126, केरल में 140, पुडुचेरी में 30, तमिलनाडु में 234 और पश्चिम बंगाल में 294 सीटें हैं। असम में 09 एससी और 19 एसटी सीटें, केरल में 14 एससी और 02 एसटी सीटें, पुडुचेरी में 05 एससी सीटें, तमिलनाडु में 44 एससी और 02 एसटी सीटें तथा पश्चिम बंगाल में 68 एससी और 16 एसटी सीटें आरक्षित हैं।

    आंकड़ों के अनुसार कुल मतदाता लगभग 17.4 करोड़ हैं। असम में लगभग 2.50 करोड़, केरल में 2.70 करोड़, पुडुचेरी में करीब 9.44 लाख, तमिलनाडु में लगभग 5.67 करोड़ और पश्चिम बंगाल में करीब 6.44 करोड़ मतदाता हैं।

  • मुंबई मेयर की गाड़ी से हटाईं लाल-नीली फ्लैश लाइट, वीआईपी कल्चर विवाद पर BMC ने दी कार्रवाई

    मुंबई मेयर की गाड़ी से हटाईं लाल-नीली फ्लैश लाइट, वीआईपी कल्चर विवाद पर BMC ने दी कार्रवाई


    नई दिल्ली। मुंबई में हाल ही में हुए विवाद के बाद मेयर ऋतु तावड़े की आधिकारिक गाड़ी और उनके साथ चलने वाली एस्कॉर्ट वाहन से लाल-नीली फ्लैश लाइटें हटा दी गई हैं। यह मामला सबसे पहले सोशल मीडिया पर तब सुर्खियों में आया जब एक पोस्ट में सवाल उठाया गया कि क्या मेयर की गाड़ी को पुलिस जैसी फ्लैश लाइट लगाने की अनुमति है। इस विवाद के बाद आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मेयर को पत्र लिखकर इस विषय पर आपत्ति जताई और केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार ऐसी लाइटों का उपयोग केवल आपातकालीन सेवाओं के लिए ही किया जा सकता है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए, यह स्पष्ट किया।

    विवाद का केंद्र मेयर की गाड़ी के बोनट पर लगी लाल-नीली फ्लैशिंग लाइट थी, जबकि उनके साथ चल रही एस्कॉर्ट स्कॉर्पियो वाहन में भी ऐसी लाइटें थीं। इस वाहन में मेयर के निजी सहायक और प्रोटोकॉल अधिकारी मौजूद थे। लाइटें देखकर लोगों ने यह सवाल उठाया कि क्या मेयर की गाड़ी को विशेष अधिकार दिया गया है।

    इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि उन्हें अपनी गाड़ी पर बीकन या फ्लैश लाइट लगाने में कोई रुचि नहीं है और यह प्रशासन की गलती थी। उन्होंने बताया कि जब उन्हें आधिकारिक वाहन दिया गया, तब प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि किन लाइटों का प्रयोग किया जा सकता है और किनका नहीं।

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस विवाद पर कहा कि जांच में पता चला कि लाल-नीली फ्लैश लाइट गाड़ी की छत पर नहीं बल्कि बोनट पर लगी थी। उन्होंने मेयर को दोषी नहीं ठहराया और कहा कि बिना वजह उन्हें निशाना बनाना उचित नहीं है।

    नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इसी तरह की फ्लैशिंग लाइटें मेयर, डिप्टी मेयर और हाउस लीडर की गाड़ियों पर भी लगी थीं, जिन्हें शनिवार को हटा दिया गया। इस विवाद के बाद विपक्ष की नेता और पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर ने सवाल उठाया कि यह कदम वीआईपी कल्चर के खिलाफ है और केंद्र सरकार ने 2017 में ही सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और विशेष प्रतीकों का उपयोग रोक दिया था।

    2017 में केंद्र सरकार ने सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और वीआईपी कल्चर के प्रतीकों के उपयोग पर रोक लगाई थी। तब से मुंबई की मेयर की गाड़ी से लाल बत्ती हटा दी गई थी। इस विवाद ने शहर में फिर से चर्चा छेड़ दी है कि क्या नए नियमों का सही पालन किया जा रहा है और क्या मेयर अपने पद का अनुचित लाभ उठा रही हैं।

    कुल मिलाकर, मुंबई मेयर की गाड़ी पर लगी लाल-नीली फ्लैश लाइट हटाने के बाद विवाद समाप्त हुआ, लेकिन यह मुद्दा वीआईपी कल्चर, प्रशासनिक नियमों और पारदर्शिता पर एक बार फिर ध्यान खींचता है।

  • बलरामपुर में विकास को रफ्तार: सड़क-पुल और डैम समेत कई परियोजनाओं पर खर्च होंगे 1.85 अरब रुपये

    बलरामपुर में विकास को रफ्तार: सड़क-पुल और डैम समेत कई परियोजनाओं पर खर्च होंगे 1.85 अरब रुपये



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में ग्रामीण विकास और रोजगार बढ़ाने के लिए बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया गया है। विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 1 अरब 85 करोड़ 93 लाख रुपये खर्च कर सड़क, पुल, डैम सहित कई विकास कार्य कराए जाएंगे। इस योजना से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलने के साथ-साथ हजारों मजदूरों को रोजगार भी मिलेगा।

    जिला प्रशासन द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना को युक्तधारा पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। इस योजना के माध्यम से करीब 44 लाख 26 हजार 910 मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण मजदूरों को काम मिल सकेगा और पलायन पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

    793 ग्राम पंचायतों में होगा विकास
    इस योजना के तहत जिले की 793 ग्राम पंचायतों में विभिन्न विकास कार्य कराए जाएंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे गांवों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

    इसके अलावा ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर आजीविका के साधन विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।

    मजदूरों को मिलेगा 125 दिन तक रोजगार
    योजना के तहत इस बार मजदूरों को एक वर्ष में 125 दिन तक रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जिले में करीब 1 लाख 49 हजार सक्रिय श्रमिकों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी और उन्हें गांव में ही रोजगार मिल सकेगा।

    इन कार्यों पर होगा विशेष फोकस
    कार्ययोजना के अनुसार कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम कराया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:

    जल संरक्षण और जल संग्रहण से जुड़े प्रोजेक्ट

    पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण अभियान

    पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कैटल शेड निर्माण

    जरूरतमंदों के लिए आवास संबंधी कार्य

    गांवों में सड़क, पुल और छोटे निर्माण कार्य

    कुछ योजनाएं सीधे लाभार्थियों को व्यक्तिगत लाभ देने के उद्देश्य से

    इन कार्यों के जरिए गांवों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    40% बजट निर्माण सामग्री पर
    कुल बजट का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा निर्माण सामग्री और अन्य जरूरी खरीद पर खर्च किया जाएगा, जबकि बाकी राशि मजदूरी के रूप में श्रमिकों को दी जाएगी।

    ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर प्रस्ताव तैयार कर उन्हें स्वीकृति दी जाएगी। इसके बाद 1 अप्रैल से ग्राम पंचायतों में विकास कार्य जमीन पर शुरू होने की तैयारी है।

    प्रशासन का मानना है कि इस योजना से न केवल ग्रामीण इलाकों में विकास की गति तेज होगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने से आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

    बलरामपुर में विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन के तहत 2026-27 में 1.85 अरब रुपये से सड़क, पुल और अन्य विकास कार्य कराए जाएंगे। योजना से 44 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित होंगे और हजारों ग्रामीण मजदूरों को रोजगार मिलेगा।

  • गैस सिलेंडर की किल्लत ने बदल दी रसोई, पहाड़ों में फिर जगा पारंपरिक चूल्हों का भरोसा

    गैस सिलेंडर की किल्लत ने बदल दी रसोई, पहाड़ों में फिर जगा पारंपरिक चूल्हों का भरोसा


    नई दिल्ली:  उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इन दिनों गैस सिलेंडर की किल्लत ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। सप्लाई में देरी और बढ़ती कीमतों के कारण कई परिवारों के सामने रसोई चलाना मुश्किल हो गया है। लेकिन इस संकट के बीच पहाड़ों के गांवों ने एक बार फिर अपने पुराने और भरोसेमंद तरीके को याद कर लिया है। कई घरों में अब पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे दोबारा जलने लगे हैं। यह दृश्य एक तरह से उस जीवनशैली की वापसी है, जो कभी पहाड़ों की पहचान हुआ करती थी।

    पहले के समय में पहाड़ों के लगभग हर घर में मिट्टी और पत्थर से बना चूल्हा होता था। यही चूल्हा रसोई का मुख्य साधन था और पूरे परिवार के मेलजोल का भी केंद्र माना जाता था। सुबह से लेकर शाम तक चूल्हे की आंच के आसपास ही घर की दिनचर्या चलती थी। धीरे-धीरे गैस सिलेंडर आने के बाद इन चूल्हों का इस्तेमाल कम हो गया, लेकिन आज गैस की किल्लत ने लोगों को फिर उसी पुराने रास्ते की ओर मोड़ दिया है।

    पहाड़ों में ईंधन के लिए लोगों को ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता था। जंगलों और खेतों के आसपास आसानी से मिलने वाली सूखी लकड़ियां, पिरूल यानी चीड़ के सूखे पत्ते और गोबर के उपले ही ईंधन का काम करते थे। गांव की महिलाएं रोजमर्रा के काम के साथ-साथ इन चीजों को इकट्ठा कर लेती थीं और घर की रसोई आसानी से चल जाती थी। इस व्यवस्था में जहां खर्च लगभग शून्य होता था, वहीं चूल्हे पर धीमी आंच में पकने वाले खाने का स्वाद भी अलग ही होता था। आज भी कई लोग मानते हैं कि लकड़ी के चूल्हे पर बने भोजन की खुशबू और स्वाद गैस पर बने खाने से कहीं ज्यादा अच्छा होता है।

    मौजूदा समय में कई परिवारों ने एक नया तरीका अपनाया है, जिसे गांवों में लोग डबल सिस्टम कह रहे हैं। यानी घर में गैस सिलेंडर भी है और साथ ही पारंपरिक चूल्हा भी जलाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर गैस का इस्तेमाल किया जाता है और बाकी समय चूल्हे पर खाना बनाकर गैस की बचत की जाती है। इससे एक फायदा यह भी है कि अगर सिलेंडर खत्म हो जाए या समय पर न मिले, तो घर की रसोई बंद नहीं होती। इस तरह यह तरीका पहाड़ों के लोगों के लिए सस्ता और सुरक्षित विकल्प बन गया है।

    गांव की बुजुर्ग महिला नर्वदा देवी बताती हैं कि पुराने समय के तरीके आज भी उतने ही कारगर हैं जितने पहले थे। उनका कहना है कि पहले गैस का कोई सवाल ही नहीं था। लोग जंगल से सूखी लकड़ी और पिरूल लेकर आते थे और उसी से खाना बनाते थे। अब जब गैस महंगी हो गई है और समय पर नहीं मिल रही है, तो फिर से चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। उनके अनुसार पहाड़ों में रहने वाले लोगों के लिए ये पुराने तरीके आज भी बेहद उपयोगी हैं।

    दरअसल पहाड़ों की पारंपरिक जीवनशैली सिर्फ पुरानी यादें नहीं हैं, बल्कि संकट के समय वही सबसे बड़ा सहारा बन जाती हैं। बदलते दौर में भले ही आधुनिक तकनीक ने लोगों की जिंदगी को आसान बनाया हो, लेकिन पहाड़ों में पूर्वजों की समझ और आत्मनिर्भरता आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। गैस सिलेंडर की इस समस्या ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति के साथ तालमेल ही पहाड़ी जीवन की असली ताकत है।

  • पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान आज, चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस थोड़ी देर में

    पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान आज, चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस थोड़ी देर में


    नई दिल्ली। देश के पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान आज किया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के लिए भारत निर्वाचन आयोग थोड़ी देर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा। इसके साथ ही इन सभी राज्यों में आचार संहिता भी लागू हो जाएगी।

    चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस **विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी। इस दौरान ज्ञानेश कुमार (मुख्य चुनाव आयुक्त), सुखबीर सिंह संधू और राजीव कुमार चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेंगे।

    संभावना जताई जा रही है कि पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु में चुनाव दो-दो चरणों में कराए जा सकते हैं, जबकि केरल और पुडुचेरी में एक चरण में मतदान हो सकता है। पांचों विधानसभाओं का कार्यकाल मई 2026 तक समाप्त हो रहा है, इसलिए उससे पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    पिछली बार कैसे हुए थे चुनाव
    साल 2021 के विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग ने 26 फरवरी को चुनाव कार्यक्रम घोषित किया था। उस समय पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में मतदान कराया गया था, जबकि असम में 3 चरण और तमिलनाडु, केरल तथा पुडुचेरी में एक ही चरण में मतदान हुआ था।

    मतदाता सूची में बदलाव
    इस बार चुनाव से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया है। इसमें तमिलनाडु में सबसे अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

    चुनाव आयोग के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू होने के समय राज्य में 6,41,14,587 मतदाता पंजीकृत थे। लगभग चार महीने चली इस प्रक्रिया के बाद 74,07,207 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जिसके बाद राज्य में अब 5,67,07,380 मतदाता रह गए हैं।

    इसके अलावा पश्चिम बंगाल में लगभग 58 लाख, केरल में करीब 8 लाख, असम में करीब 2 लाख और पुडुचेरी में लगभग 77 हजार मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।

    चुनाव से पहले सियासी हलचल
    चुनाव तारीखों की घोषणा से कुछ घंटे पहले ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में दो अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने पुरोहितों और मुअज्जिनों के मासिक मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया। इसके साथ ही राज्य सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) बकाया चुकाने की भी घोषणा की।

    राज्यों में राजनीतिक चुनौती
    पांचों राज्यों में चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल काफी सक्रिय है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के सामने भारतीय जनता पार्टी मुख्य चुनौती मानी जा रही है। अगर इस बार भी उनकी पार्टी जीतती है, तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने वाली पहली महिला नेता बन सकती हैं।

    भाषा, केंद्र की योजनाएं, विचारधारा और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई जैसे मुद्दे इन चुनावों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।