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  • चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी और शिवराज सिंह सहित नेताओं ने किया बलिदान दिवस पर याद

    चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी और शिवराज सिंह सहित नेताओं ने किया बलिदान दिवस पर याद


    नई दिल्ली । देश के महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि आज 27 फरवरी को बलिदान दिवस के रूप में मनाई जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आजाद का बलिदान और त्याग हमेशा देशवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया जिसके लिए वे सदैव स्मरणीय रहेंगे।

    पीएम मोदी के अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा मां भारती के अमर सपूत महान क्रांतिकारी वीर हुतात्मा चंद्रशेखर आजाद जी के बलिदान दिवस पर उनके चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उनके ओजस्वी विचार और तेजस्वी जीवन जन जन को राष्ट्र और समाज की उन्नति एवं सेवा के लिए सदैव प्रेरित करते रहेंगे। मातृभूमि का कण कण आपका अनंत काल तक ऋणी रहेगा।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में चंद्रशेखर आजाद को याद करते हुए कहा दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे आजाद ही रहे हैं आजाद ही रहेंगे। मातृभूमि की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। उनका त्याग और तेजस्वी व्यक्तित्व युगों युगों तक राष्ट्र सेवा एवं मां भारती के प्रति बलिदान की प्रेरणा देता रहेगा।

    इतिहास में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद अब प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में चंद्रशेखर आजाद और अंग्रेजों के बीच लंबी मुठभेड़ हुई। जब उनकी गोलियों का स्टॉक समाप्त हो गया तो उन्होंने अंतिम गोली खुद को मारकर अपना बलिदान दे दिया। उनके इस अदम्य साहस और देशभक्ति के कारण हर साल इस दिन को बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

    चंद्रशेखर आजाद का जीवन स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा का प्रतीक है। उनके त्याग और साहस ने आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए प्रेरित किया। उनके बलिदान को याद कर देशवासियों में आज भी देशभक्ति की भावना जागृत होती है। नेता और नागरिक समान रूप से उन्हें याद करते हुए उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश देते हैं।

    आजाद की पुण्यतिथि पर सभी नेताओं ने यह संदेश दिया कि मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर करना सर्वोच्च बलिदान है। उनका जीवन यह सिखाता है कि स्वतंत्रता और देशभक्ति केवल शब्द नहीं बल्कि कर्म और समर्पण का नाम है। चंद्रशेखर आजाद हमेशा स्मरणीय रहेंगे और उनके बलिदान की कहानी हर दिल में जीवित रहेगी।

  • आबकारी नीति केस: केजरीवाल-सिसोदिया को मिली राहत पर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी सीबीआई

    आबकारी नीति केस: केजरीवाल-सिसोदिया को मिली राहत पर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी सीबीआई


    नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को निचली अदालत द्वारा आरोपमुक्त किए जाने के फैसले को चुनौती देने का निर्णय लिया है। एजेंसी इस आदेश के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दायर करेगी।

    यह कदम राउज एवेन्यू कोर्ट के उस फैसले के बाद उठाया गया है जिसमें केजरीवाल सिसोदिया सहित 21 अन्य आरोपियों को आबकारी नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में आरोपों से मुक्त कर दिया गया था। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने चार्जशीट में नामित किसी भी आरोपी के विरुद्ध आरोप तय करने से इनकार कर दिया था।

    सीबीआई के प्रवक्ता का कहना है कि निचली अदालत ने जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया। इसी आधार पर एजेंसी ने उच्च न्यायालय में अपील करने का फैसला लिया है।

    अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की थी कि सीबीआई ने वरिष्ठ नेताओं को बिना किसी ठोस सामग्री के आरोपी बनाया। न्यायालय ने आरोपपत्र में कई खामियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि सिसोदिया के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता। साथ ही केजरीवाल को भी पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में इस प्रकरण में शामिल किया गया। अदालत ने जांच प्रक्रिया में कमियों को लेकर एजेंसी को फटकार भी लगाई।

    फैसले के बाद केजरीवाल ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए इसे उनकी पार्टी को कमजोर करने की राजनीतिक साजिश बताया। वहीं सिसोदिया ने कहा कि अदालत का निर्णय संविधान और कानून के शासन में उनके विश्वास को मजबूत करता है।

  • इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: एआई और लैंगिक सशक्तिकरण पर केसबुक जारी

    इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: एआई और लैंगिक सशक्तिकरण पर केसबुक जारी


    नई दिल्ली। 17 फरवरी 2026 को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में एआई और लैंगिक सशक्तिकरण पर केंद्रित केसबुक का विमोचन किया गया। यह पहल इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और यूएन वीमेन की संयुक्त पहल है जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इसका समर्थन किया। इस केसबुक में ग्लोबल साउथ के 23 चुनिंदा एआई समाधानों को शामिल किया गया है जो महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण में ठोस प्रभाव दिखाते हैं।

    विमोचन समारोह में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव श्री एस. कृष्णन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव श्री अनिल मलिक और यूएन वीमेन की एशिया पैसिफिक क्षेत्रीय निदेशक सुश्री क्रिस्टीन अरब उपस्थित थीं।

    इस केसबुक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता भी मिली। 20 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने जनएआई एक्सपो में यूएन वीमेन के स्टॉल का दौरा किया। इस अवसर पर महासचिव ने वी एसटीईएम परियोजना के तहत ग्रामीण युवाओं को एसटीईएम करियर में प्रशिक्षित करने वाली महिलाओं से बातचीत की। यह परियोजना मध्य प्रदेश गुजरात और महाराष्ट्र की सरकारों यूरोपीय संघ माइक्रोन नोकिया और हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन के सहयोग से संचालित की जा रही है।

    महिलाओं ने बताया कि वे एआई का उपयोग करके नए कौशल सीख रही हैं शिक्षा को अधिक सुलभ बना रही हैं और रोजगार के अवसर तलाश रही हैं। केसबुक की एक प्रति यूएन वीमेन की एआई कंट्री रिप्रेजेंटेटिव कांता सिंह ने महासचिव को भेंट की। अवर महासचिव और प्रौद्योगिकी मामलों पर महासचिव के दूत अमनदीप सिंह गिल भी उपस्थित थे।

    यह केसबुक 50 से अधिक देशों से प्राप्त 233 आवेदनों में से चयनित 23 एआई समाधानों को शामिल करती है। चयन प्रक्रिया बहु स्तरीय मूल्यांकन पर आधारित थी जिसमें उपयोगिता लैंगिक प्रभाव और साक्ष्य आधारित परिणामों को परखा गया। इसमें स्वास्थ्य आर्थिक सशक्तिकरण डिजिटल सुरक्षा जलवायु लचीलापन न्याय शिक्षा और नीति निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

    केसबुक नीति निर्माताओं शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी विकासकर्ताओं के लिए व्यापक ज्ञान संसाधन के रूप में कार्य करती है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि एआई सिस्टम नैतिक समावेशी और महिलाओं की वास्तविकताओं के प्रति उत्तरदायी हों। यह प्रकाशन भारत के लोकतांत्रिक एआई प्रसार दृष्टिकोण और इंडियाएआई मिशन के लिंग संवेदनशील सिद्धांतों को भी सुदृढ़ करता है।

    इस पहल में भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों की प्रभावी साझेदारी दिखाई देती है। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने रणनीतिक दिशा प्रदान की यूएन वीमेन ने वैश्विक समन्वय और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने लैंगिक संवेदनशीलता सुनिश्चित की।

    इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन 16 से 20 फरवरी के बीच हुआ। इसका उद्देश्य जिम्मेदार समावेशी और प्रभावशाली एआई को प्रोत्साहित करना था जिससे भारत वैश्विक एआई शासन ढांचे के सह निर्माता के रूप में स्थापित हो सके।

  • दिल्ली शराब नीति केस में बड़ा फैसला, केजरीवाल–सिसोदिया को मिली राहत

    दिल्ली शराब नीति केस में बड़ा फैसला, केजरीवाल–सिसोदिया को मिली राहत

    नई दिल्ली।  दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति मामले में शुक्रवार को बड़ा मोड़ आया। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को सीबीआई केस में राऊज एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया। अदालत ने इस मामले में नामजद सभी 23 आरोपियों को भी राहत देते हुए अभियोजन पक्ष की दलीलों को पर्याप्त आधारहीन माना। फैसले के दौरान दोनों नेता अदालत में मौजूद थे, जबकि कुछ अन्य आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए।

    कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: जांच में कमियां
    राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सीबीआई की चार्जशीट में गंभीर खामियां हैं और कथित साजिश के समर्थन में ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए गए। अदालत ने टिप्पणी की कि अभियोजन पक्ष अनुमान के आधार पर कहानी गढ़ता नजर आया, जो न्यायिक कसौटी पर टिक नहीं सकी।

    जज जीतेंद्र सिंह ने सीबीआई द्वारा कथित कबूलनामे की कॉपी दाखिल न करने पर नाराजगी जताई। साथ ही चार्जशीट में ‘साउथ लॉबी’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति दर्ज की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि आबकारी नीति के निर्माण में किसी बड़ी आपराधिक साजिश या दुर्भावनापूर्ण इरादे के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले।

    क्या था पूरा मामला?
    यह केस दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा था, जिस पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगे थे। दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद Central Bureau of Investigation ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

    26 फरवरी 2023 को मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया था, जबकि 21 मार्च 2024 को प्रवर्तन निदेशालय ने अरविंद केजरीवाल को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया। बाद में सीबीआई ने भी उन्हें हिरासत में लिया था।

    राजनीतिक असर और आगे की राह
    इस फैसले को आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। हालांकि यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना रहेगा। अदालत के फैसले के बाद अब निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या जांच एजेंसियां ऊपरी अदालत में चुनौती देती हैं या नहीं।

  • बजट के बाद वेबिनार में पीएम का विजन: ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की रफ्तार और तेज करने का आह्वान

    बजट के बाद वेबिनार में पीएम का विजन: ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की रफ्तार और तेज करने का आह्वान

    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट के बाद आयोजित वेबिनार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार और वित्त” विषय पर देश को स्पष्ट संदेश दिया-बजट कोई तात्कालिक लाभ का दस्तावेज नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय रोडमैप है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधन में उन्होंने कहा कि बजट के बाद वेबिनार की परंपरा अब मजबूत हो चुकी है और इससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में गति मिलती है।

    शॉर्ट टर्म नहीं, लॉन्ग टर्म विजन का दस्तावेज
    प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट को शेयर बाजार की चाल या आयकर प्रस्तावों के चश्मे से देखना अधूरा आकलन है। असल मायने में बजट इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, क्रेडिट की सुगमता, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, पारदर्शिता और जीवन को आसान बनाने वाली नीतियों का समग्र खाका होता है। उन्होंने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि हर बजट उसी लंबी यात्रा का एक चरण है।

    टेक्नोलॉजी आधारित गवर्नेंस पर जोर
    पीएम ने कहा कि बीते दशक में भारत ने जो लचीलापन दिखाया है, वह सुधारों का परिणाम है। प्रक्रियाओं का सरलीकरण, टेक्नोलॉजी आधारित शासन और संस्थागत मजबूती ने अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। उन्होंने एआई, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से पारदर्शिता, जवाबदेही और गति बढ़ाने की बात कही। साथ ही शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत कर जमीनी असर सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

    इंफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश, निजी क्षेत्र को संकेत
    प्रधानमंत्री ने बताया कि 11 वर्ष पहले सार्वजनिक पूंजीगत व्यय लगभग 2 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि यह विशाल निवेश निजी क्षेत्र के लिए स्पष्ट संकेत है कि वह भी नई ऊर्जा के साथ आगे आए। परियोजना स्वीकृति, लागत-लाभ विश्लेषण और लाइफ साइकल कॉस्टिंग को मजबूत कर देरी और अपव्यय रोकने की आवश्यकता बताई।

    बॉन्ड मार्केट और विदेशी निवेश को बढ़ावा
    उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक वित्त को मजबूत करने के लिए बॉन्ड बाजार को अधिक सक्रिय और तरल बनाना जरूरी है। बॉन्ड की खरीद-बिक्री प्रक्रिया को सरल किया जा रहा है और निवेशक-अनुकूल ढांचा तैयार किया जा रहा है। वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाकर वित्तीय तंत्र को अधिक पूर्वानुमेय बनाने पर भी बल दिया गया।

    ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ का प्रस्ताव
    प्रधानमंत्री ने सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और अकादमिक जगत के बीच एक स्पष्ट ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि नीति की सफलता घोषणाओं से नहीं, बल्कि उत्कृष्ट क्रियान्वयन से तय होती है। अब चर्चा का समय नहीं, बल्कि बजट को जमीन पर तेजी से लागू करने का समय है।

  • केरल अब केरलम: जानिए नाम बदलने पीछे किसका था आइडिया, ये है पूरी कहानी

    केरल अब केरलम: जानिए नाम बदलने पीछे किसका था आइडिया, ये है पूरी कहानी


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हाल ही में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए केरल राज्य का नाम बदलकर आधिकारिक तौर पर केरलम करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही अब सरकारी दस्तावेजों रिपोर्टों और आम बोलचाल में राज्य को उसके पारंपरिक और भाषाई रूप में पहचान मिलेगी।

    नाम बदलने का आइडिया और सूत्रधार
    इस बदलाव के सबसे बड़े सूत्रधार के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री और केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर का नाम सामने आया है। सूत्रों के अनुसार चंद्रशेखर ने कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य का नाम बदलकर केरलम करने का आग्रह किया था। कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद उन्होंने न केवल खुद इस नए नाम का इस्तेमाल शुरू कर दिया है बल्कि दूसरों को भी केरल की जगह केरलम कहने के लिए टोकते और सही करते हैं। चंद्रशेखर का तर्क है कि केरलम शब्द राज्य की मलयाली पहचान संस्कृति और इतिहास को अधिक सटीक रूप से दर्शाता है। उनका कहना है कि यह केवल नाम का बदलाव नहीं है बल्कि क्षेत्रीय गौरव को सम्मान देने का प्रयास है।

    रेल मंत्री के कार्यक्रम में केरलम का जश्न

    कैबिनेट के इस फैसले का असर दिल्ली के गलियारों में भी दिखा। गुरुवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे सुधारों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की लेकिन वहां का सबका ध्यान केरलम लंच ने खींचा। अधिकारियों और मीडियाकर्मियों के लिए केरलम की पारंपरिक रसोई सजाई गई थी। दोपहर के भोजन में अप्पम इडियप्पम वेजिटेबल स्टू और लाल चावल के साथ केरल शैली का वरथु अर्चा सांभर और रसम परोसा गया। इसके अलावा मेन्यू में थोर्न एरीसेरी पापड़म दही और तीन तरह के अचार भी शामिल थे।

    क्यों बदला गया नाम
    राज्य का नाम बदलने की मांग लंबे समय से लंबित थी। मलयालम भाषा में राज्य को हमेशा से केरलम कहा जाता रहा है जबकि अंग्रेजी और हिंदी में इसे केरल के रूप में जाना जाता था। संविधान की पहली अनुसूची में बदलाव के जरिए अब इसे हर भाषा में केरलम के रूप में स्थापित किया जा रहा है। नाम बदलने की इस प्रक्रिया को सांस्कृतिक पुनरुद्धार के रूप में देखा जा रहा है। राजीव चंद्रशेखर जैसे नेताओं का मानना है कि यह कदम मलयाली गौरव को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान देगा। अब केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद आने वाले समय में सभी आधिकारिक संचार और महत्वपूर्ण मील के पत्थरों पर यह बदलाव नजर आएगा।

  • दुश्मन की पनडुब्बियों का शिकारी ‘अंजदीप’ नौसेना में शामिल, बढ़ी समुद्री ताकत

    दुश्मन की पनडुब्बियों का शिकारी ‘अंजदीप’ नौसेना में शामिल, बढ़ी समुद्री ताकत

    नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की ताकत में शुक्रवार को बड़ा इजाफा हुआ जब स्वदेशी रूप से निर्मित पनडुब्बी रोधी उथले जल का युद्धपोत ‘अंजदीप’ औपचारिक रूप से बेड़े में शामिल किया गया। चेन्नई के ऐतिहासिक कोरोमंडल तट पर आयोजित समारोह में नौसेना प्रमुख दिनेश के त्रिपाठी ने इसे गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक पोत का शामिल होना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की समुद्री शक्ति का प्रतीक है।

    ‘डॉल्फिन हंटर’ की खासियत: पनडुब्बी ढूंढे, पीछा करे और करे निष्क्रिय
    ‘अंजदीप’ को खास तौर पर दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नाकाम करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे ‘डॉल्फिन हंटर’ की भूमिका के लिए तैयार किया गया है। इसमें अत्याधुनिक स्वदेशी पनडुब्बी रोधी हथियार और सेंसर पैकेज लगे हैं। पोत में हल माउंटेड सोनार ‘अभय’ भी लगाया गया है, जो समुद्र की गहराइयों में छिपे खतरों को पहचानने में सक्षम है। इसके अलावा यह हल्के टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेटों से लैस है।

    77 मीटर लंबा यह युद्धपोत उच्च गति वाली वाटर-जेट प्रोपल्शन प्रणाली से सुसज्जित है, जो इसे 25 समुद्री मील की अधिकतम गति प्रदान करती है। तेज प्रतिक्रिया और तटीय इलाकों में फुर्तीले संचालन के लिए इसे खास तौर पर तैयार किया गया है। पनडुब्बी रोधी भूमिका के अलावा यह तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान तथा खोज एवं बचाव कार्यों में भी सक्षम है।

    2026 तक 15 और पोत, 2035 तक 200+ का लक्ष्य
    नौसेना प्रमुख ने बताया कि वर्ष 2026 तक लगभग 15 और युद्धपोत शामिल किए जाने की योजना है, जो अब तक की सर्वाधिक सम्मिलन दर होगी। वर्ष 2035 तक भारतीय नौसेना को 200 से अधिक पोतों वाली ताकत बनाना लक्ष्य है। वर्तमान में 50 से अधिक पोत भारतीय शिपयार्डों में निर्माणाधीन हैं। 2047 तक पूर्णतः आत्मनिर्भर नौसैनिक शक्ति बनने का विजन रखा गया है।

    ऐतिहासिक विरासत और रणनीतिक संदेश
    ‘अंजदीप’ का नाम उस द्वीप पर रखा गया है जिसने 1961 में गोवा मुक्ति अभियान के दौरान निर्णायक भूमिका निभाई थी। यह अपने पूर्ववर्ती पेट्या श्रेणी के युद्धपोत का उत्तराधिकारी है, जिसने 1972 से 2003 तक राष्ट्र की सेवा की। उल्लेखनीय है कि दिनेश के त्रिपाठी स्वयं 1986-87 में इसी श्रेणी के पोत पर सब-लेफ्टिनेंट के रूप में तैनात रह चुके हैं।

    नौसेना प्रमुख ने हिंद महासागर क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि प्रतिवर्ष लगभग 1.2 लाख जहाज यहां से गुजरते हैं, जो विश्व के दो-तिहाई तेल परिवहन और आधे कंटेनर यातायात का वहन करते हैं। लाल सागर और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया तनाव ने समुद्री मार्गों की संवेदनशीलता को उजागर किया है। अक्टूबर 2023 से लाल सागर में भारतीय नौसेना की तैनाती ने करीब 400 व्यापारी जहाजों को सुरक्षित पारगमन सुनिश्चित किया, जिनमें 16.5 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल और अन्य माल शामिल था।

  • इस राज्य में गवर्नर-IAS से भी ज्यादा कर्मचारियों की सैलरी

    इस राज्य में गवर्नर-IAS से भी ज्यादा कर्मचारियों की सैलरी

    हैदराबाद। दक्षिणी राज्य तेलंगाना में सफाईकर्मियों की तन्ख्वाह जानकर आप दंग रह जाएंगे। बार-बार होने वाले वेतन बढ़ोत्तरी के बाद अब इस राज्य के सीनियर सफाईकर्मी दो लाख रुपये प्रति महीना वेतन उठा रहे हैं, जबकि चीफ इंजीनियर की सैलरी बढ़ते-बढ़ते 7 लाख प्रति माह हो चुकी है। राज्य के मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव ने खुलासा किया है कि तेलंगाना में पिछले एक दशक के दौरान सरकारी वेतन और पेंशन का बोझ तेजी से बढ़ा है। यह खर्च 2014 में राज्य गठन के समय लगभग 1,500 करोड़ रुपये प्रतिमाह था, जो अब बढ़कर करीब 6,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
    यानी यह खर्च 2014 के मुकाबले अब लगभग चार गुना हो गया है।

    राव ने सेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड सोशल स्टडीज द्वारा आयोजित 16वें फाइनेंस कमीशन की सिफारिशों पर एक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि जब 2014 में आंध्र प्रदेश से तेलंगाना अलग हुआ था, तब राज्य का खर्च 1,500 करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा कि तब से, सैलरी और पेंशन का खर्च 300% बढ़ गया है, क्योंकि चुनाव के समय लगातार पे रिवीजन हुए, जिससे फिक्स्ड खर्च में भारी उछाल आया है।
    गवर्नर से भी ज्यादा सैलरी

    बकौल राव, स्थिति यह है कि कुछ सार्वजनिक उपक्रमों में वेतन संरचना इतनी ऊंची हो गई है कि वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों और यहां तक कि राज्यपाल के वेतन से भी अधिक हो गई है।

    उदाहरण के तौर पर, बिजली विभाग के मुख्य अभियंता का वेतन 7 लाख रुपये तक पहुंच रहा है, जबकि लंबे समय से कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी करीब 2 लाख रुपये मासिक तक कमा रहे हैं। नगर निगम स्तर पर भी वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। जहां नए कर्मचारियों का शुरुआती वेतन लगभग 28,000 रुपये है, वहीं 30 वर्षों की सेवा के बाद ड्राइवर या सफाईकर्मी 1 लाख रुपये से अधिक मासिक वेतन पा सकते हैं।
    ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम में नियमित किए गए कुछ सफाईकर्मियों का औसत वेतन 70,000 रुपये प्रतिमाह से अधिक है।
    सरकारी नौकरी के लिए भीड़ बढ़ी

    TOI को मुख्य सचिव ने यह भी बताया कि वेतन निर्धारण सरकार द्वारा गठित वेतन संशोधन आयोगों के माध्यम से किया जाता है, जिसमें “फिटमेंट” प्रतिशत लागू कर मूल वेतन और महंगाई भत्ते में वृद्धि की जाती है। उच्च वेतन के कारण सरकारी नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा भी बेहद बढ़ गई है। हाल ही में ग्रुप-1 की 563 नौकरियों के लिए लगभग 799 उम्मीदवार प्रति पद के हिसाब से आवेदन आए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि युवाओं में सरकारी नौकरी को लेकर आकर्षण लगातार बढ़ रहा है।

    तेलंगाना की विकास दर लगभग 11%

    हालांकि, राज्य ने इस बढ़ते खर्च को अपनी मजबूत आर्थिक वृद्धि के बल पर संभाला है। तेलंगाना ने लगभग 11% की विकास दर दर्ज की है और राजस्व स्रोतों में भी स्थिर वृद्धि हुई है। सरकार ने डिजिटल सिस्टम के जरिए सब्सिडी वितरण को भी बेहतर बनाया है और ‘रायथु बंधु’ योजना के तहत 7,000 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। आंकड़ों के अनुसार, राज्य गठन के बाद पहले 10 वर्षों में कुल 15 लाख करोड़ रुपये का खर्च हुआ, जिसमें से करीब 12 लाख करोड़ रुपये वेतन, पेंशन और कर्ज चुकाने में खर्च हुए, जबकि केवल 3 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय पर खर्च किए गए। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य की वित्तीय प्राथमिकताएं मुख्यतः राजस्व खर्च पर केंद्रित रही हैं, जिससे भविष्य में वित्तीय संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

  • हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणी करने वाले यूट्यूबर अन्वेश के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी

    हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणी करने वाले यूट्यूबर अन्वेश के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी


    हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी में धार्मिक भावनाओं से जुड़े विवादित बयान के मामले में पुलिस ने सख्त कदम उठाया है। पंजागुट्टा थाना पुलिस ने यूट्यूबर अन्वेश के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई हिंदू देवी-देवताओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े मामले में की गई है।
    पुलिस के अनुसार, दिसंबर 2025 में अभिनेत्री और भाजपा नेता कराटे कल्याणी की शिकायत पर अन्वेश के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्होंने हिंदू समाज, धार्मिक मान्यताओं, पूजनीय देवी-देवताओं, संस्कृति और परंपराओं के खिलाफ अपमानजनक और भड़काऊ टिप्पणियां कीं, जिससे सांप्रदायिक तनाव फैलने की आशंका बनी।

    जांच अधिकारियों का कहना है कि यह विवाद एक वीडियो के बाद शुरू हुआ। वीडियो में अन्वेश ने अभिनेत्रियों के पहनावे को लेकर तेलुगु अभिनेता शिवाजी की आलोचना की थी।

    इसी दौरान उन्होंने पौराणिक पात्रों सीता और द्रौपदी को लेकर भी टिप्पणी की, जिस पर विभिन्न संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन किया।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। फिलहाल अन्वेश के देश से बाहर होने की जानकारी मिली है, जिसके चलते उनकी लोकेशन ट्रैक करने और भारत लौटने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।

    पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • संजय राउत को राहत, मानहानि मामले में कोर्ट ने किया बरी

    संजय राउत को राहत, मानहानि मामले में कोर्ट ने किया बरी

    मुंबई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत को मानहानि के एक मामले में बड़ी राहत मिली है। मुंबई की सत्र अदालत ने उनकी पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए भाजपा नेता किरिट सोमैया की पत्नी मेधा सोमैया द्वारा दायर शिकायत में उन्हें बरी कर दिया।

    इससे पहले पिछले वर्ष मजिस्ट्रेट अदालत ने राउत को भारतीय दंड संहिता की मानहानि से जुड़ी धारा के तहत दोषी ठहराते हुए 15 दिन के कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, सजा पर रोक लगा दी गई थी ताकि वे उच्च अदालत में आदेश को चुनौती दे सकें। इसके बाद राउत ने सत्र अदालत में अपील दायर की थी।

    मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी गईं। सुनवाई कर रहे न्यायाधीश महेश जाधव ने इस महीने की शुरुआत में अंतिम बहस पूरी होने के बाद राउत की याचिका मंजूर कर ली।

    राउत की ओर से अधिवक्ता मनोज पिंगले ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल ने किसी व्यक्ति विशेष की मानहानि करने का उद्देश्य नहीं रखा था। वहीं, मेधा सोमैया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता लक्ष्मण कनाल ने कहा कि जिस कथित घोटाले का आरोप लगाया गया, जांच में उसका कोई आधार नहीं मिला, इसलिए सार्वजनिक आरोप मानहानिकारक थे।
    दरअसल, विवाद उस समय शुरू हुआ जब राउत ने मीडिया से बातचीत में मीरा-भायंदर नगर निगम क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय निर्माण परियोजना में 100 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया था और इसमें सोमैया दंपत्ति के जुड़े होने की बात कही थी।

    शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, वर्ष 2007 में निविदा प्रक्रिया के जरिए यह काम पांच गैर-सरकारी संगठनों को सौंपा गया था, जिनमें से एक संस्था सोमैया परिवार से संबंधित थी।

    परियोजना की कुल लागत लगभग 22 करोड़ रुपये बताई गई, जिससे 100 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा तथ्यात्मक रूप से संभव नहीं बताया गया।

    मजिस्ट्रेट अदालत ने अपने पूर्व आदेश में कहा था कि मेधा सोमैया एक शिक्षित और प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं तथा आरोपों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा और मानसिक पीड़ा हुई। साथ ही यह भी टिप्पणी की गई थी कि एक सांसद होने के नाते सार्वजनिक बयान देते समय राउत पर उच्च स्तर की जिम्मेदारी होती है।
    अब सत्र अदालत के फैसले के बाद राउत को इस मामले में राहत मिल गई है।