Category: National

  • जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता, गोरखपुर में CM योगी ने जनता दर्शन में सुनीं 200 फरियादियों की शिकायतें

    जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता, गोरखपुर में CM योगी ने जनता दर्शन में सुनीं 200 फरियादियों की शिकायतें

    गोरखपुर । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने तीन दिवसीय गोरखपुर प्रवास के दौरान शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे करीब 200 फरियादियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को उनका प्रभावी तथा समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक शिकायत को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना जाए और उसका ऐसा समाधान किया जाए जिससे शिकायतकर्ता पूरी तरह संतुष्ट हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसमस्याओं के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी मामलों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाए।

    मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन में पहुंचे लोगों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक की समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जनसेवा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और लोगों को न्याय तथा राहत दिलाने में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी।

    जनता दर्शन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग अपनी व्यक्तिगत, सामाजिक, राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य और अन्य प्रशासनिक समस्याएं लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को कई मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

    जनता दर्शन में शामिल होने के लिए किसी विशेष पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती। कोई भी नागरिक सीधे कार्यक्रम में पहुंचकर अपनी शिकायत मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों के सामने रख सकता है। हालांकि प्रशासन नागरिकों को सलाह देता है कि वे अपनी शिकायत पहले से ही जनसुनवाई पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करा दें, ताकि उसका रिकॉर्ड उपलब्ध रहे और सुनवाई के दौरान प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जा सके।

    सरकार की ओर से यह भी बताया गया है कि जनता दर्शन के समय और स्थान में प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार बदलाव संभव है। इसलिए नागरिकों को किसी भी आधिकारिक सूचना के लिए राज्य सरकार के अधिकृत पोर्टल या जनसुनवाई पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

  • पूर्वांचल के विकास को रफ्तार, देवरिया में 106 परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे CM योगी, गोरखपुर में अस्पताल का उद्घाटन भी

    पूर्वांचल के विकास को रफ्तार, देवरिया में 106 परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे CM योगी, गोरखपुर में अस्पताल का उद्घाटन भी


    लखनऊ।  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को पूर्वांचल के दो महत्वपूर्ण जिलों देवरिया और गोरखपुर के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह देवरिया में 456 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 106 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इसके साथ ही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित करेंगे।

    मुख्यमंत्री का कार्यक्रम देवरिया के बरहज और रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित होगा। इस अवसर पर सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बुनियादी ढांचा और अन्य विकास कार्यों से जुड़ी परियोजनाओं की शुरुआत की जाएगी। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    मुख्यमंत्री लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रमाण-पत्र भी सौंपेंगे। इन योजनाओं का उद्देश्य पात्र परिवारों तक सरकारी सुविधाओं का लाभ पहुंचाना और उन्हें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है।

    देवरिया कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री गोरखपुर पहुंचेंगे, जहां वह एस्ट्रोमेडिक्स मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। अस्पताल के शुरू होने से गोरखपुर और आसपास के जिलों के लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।

    अपने दौरे से पहले मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर संदेश जारी करते हुए कहा कि पूज्य देवरहा बाबा की पावन भूमि देवरिया में विकास और जनकल्याण के एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन विकास परियोजनाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं से क्षेत्र के लोगों के जीवन में नई आशा, नए अवसर और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।

    सरकार के अनुसार, पूर्वांचल में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और जनहित योजनाओं के विस्तार के उद्देश्य से लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह दौरा भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

  • अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला, बोले- संवेदनहीनता का चेहरा सामने आया, जनता सब समझ चुकी है

    अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला, बोले- संवेदनहीनता का चेहरा सामने आया, जनता सब समझ चुकी है


    लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश की जनता अब भाजपा नेताओं के भाषण सुनने के मूड में नहीं है, बल्कि जवाब चाहती है। अपने बयान में उन्होंने एक कथित वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि उससे भाजपा नेताओं की वास्तविक कार्यशैली और व्यवहार लोगों के सामने आ गया है।

    अखिलेश यादव ने कहा कि अहंकार इंसान का विवेक छीन लेता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने किसी नेता को ईमानदारी, सादगी और जनसेवा का प्रतीक मान रखा था, उनका भ्रम अब टूट चुका है। उनके अनुसार हाल ही में सामने आए एक कथित वीडियो ने उस बनाई गई छवि को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।

    सपा प्रमुख ने कहा कि किसी परिवार पर दुख का पहाड़ टूटने के समय संवेदना और सहानुभूति दिखाने के बजाय यदि कोई सार्वजनिक रूप से कठोर भाषा और व्यवहार अपनाता है, तो यह उसकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद लोगों के सामने उस नेता का वास्तविक चेहरा उजागर हो गया है और कथित नायकत्व का मायाजाल बिखर गया है।

    अखिलेश यादव ने दावा किया कि इस घटना से सबसे अधिक निराश वे समर्थक हुए हैं, जो अब तक संबंधित नेता की छवि का प्रचार करते रहे थे। उन्होंने कहा कि लोग अब यह सोचने को मजबूर हैं कि यदि ऐसी घटना उनके अपने परिवार के साथ होती, तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होती। उनके अनुसार इस घटना ने समाज में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के व्यवहार पर सवाल उठे हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी पत्रकारों और अधिकारियों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार के मामले सामने आ चुके हैं। उनका कहना था कि जिसके सार्वजनिक व्यवहार में संयम नहीं होता, उसके नेतृत्व पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

    सपा अध्यक्ष ने व्यंग्य करते हुए कहा कि अब यह भी कहा जा सकता है कि वायरल वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से बनाया गया है, लेकिन जनता सब समझती है। उन्होंने दावा किया कि लोग वास्तविकता और दिखावे के बीच का अंतर पहचान चुके हैं।

    अपने बयान के अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि महिलाओं के सम्मान से जुड़ी किसी भी घटना को समाज गंभीरता से लेता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण से भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचा है और महिलाओं के बीच इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा।

  • लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, ट्रेलर से टकराई डबल डेकर बस, 2 की मौत, 30 घायल

    लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, ट्रेलर से टकराई डबल डेकर बस, 2 की मौत, 30 घायल


    फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर सवारियों से भरी एक तेज रफ्तार डबल डेकर बस आगे चल रहे ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस में सवार यात्रियों के बीच चीख-पुकार मच गई। हादसे में दो लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि करीब 30 यात्री घायल हो गए।

    यह दुर्घटना नंगला खंगर थाना क्षेत्र में हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस में 60 से अधिक यात्री सवार थे। बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और बस सीधे आगे चल रहे ट्रेलर से जा भिड़ी। टक्कर के बाद बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और कई यात्री उसमें फंस गए।

    हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस और एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान दो यात्रियों ने दम तोड़ दिया। अन्य घायलों का इलाज जारी है, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    पुलिस ने बताया कि दुर्घटना के समय बस में क्षमता से अधिक नहीं, बल्कि 60 से ज्यादा यात्री सफर कर रहे थे। हादसे के कारण एक्सप्रेसवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस ने क्षतिग्रस्त बस और ट्रेलर को हटवाकर यातायात सामान्य कराया।

    प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और चालक का वाहन पर नियंत्रण खोना हादसे की प्रमुख वजह माना जा रहा है, हालांकि तकनीकी और अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा नियमों के पालन और नियंत्रित गति से वाहन चलाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। अधिकारियों ने वाहन चालकों से सावधानी बरतने और निर्धारित गति सीमा का पालन करने की अपील की है।

  • जमीन विवाद में रिश्तों का कत्ल, ससुर पर दामाद की हत्या का आरोप, सास-ससुर हिरासत में

    जमीन विवाद में रिश्तों का कत्ल, ससुर पर दामाद की हत्या का आरोप, सास-ससुर हिरासत में


    रायबरेली । उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में जमीन विवाद ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। नसीराबाद थाना क्षेत्र के कुंवरमऊ ग्राम सभा के पूरे दुर्गा सिंह मजरे में हुए खूनी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक की पहचान वीरेंद्र सिंह के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई, जबकि मृतक के परिवार में मातम पसरा हुआ है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि इस दौरान वीरेंद्र सिंह पर चाकू से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उपचार के दौरान उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    मृतक के परिजनों ने इस घटना के लिए उसके ससुर को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि जमीन विवाद के दौरान ससुर ने चाकू से हमला किया, जिसके कारण वीरेंद्र सिंह की मौत हुई। हालांकि पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    घटना की सूचना मिलते ही नसीराबाद थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ साक्ष्य भी जुटाए हैं। मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    पुलिस ने मृतक के सास और ससुर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    इस दर्दनाक घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। एहतियात के तौर पर पुलिस क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

  • कौशांबी में बड़ा धमाका, टोल प्लाजा से टकराया गैस टैंकर, आग की लपटों में घिरे कर्मचारी, राहत कार्य जारी

    कौशांबी में बड़ा धमाका, टोल प्लाजा से टकराया गैस टैंकर, आग की लपटों में घिरे कर्मचारी, राहत कार्य जारी


    कौशांबी। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में शुक्रवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। कोखराज टोल प्लाजा के पास एलपीजी से भरा एक टैंकर अनियंत्रित होकर टोल प्लाजा से टकरा गया। टक्कर के तुरंत बाद जोरदार धमाका हुआ और टैंकर में भीषण आग लग गई। कुछ ही पलों में आग की ऊंची लपटों और घने धुएं ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसा सुबह करीब छह बजे हुआ। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि टोल प्लाजा पर मौजूद कर्मचारी इसकी चपेट में आ गए। इस दुर्घटना में कुल 10 लोग झुलस गए हैं, जिनमें पांच टोल कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। घायलों में पांच लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

    हादसे के दौरान टैंकर के चालक और परिचालक ने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते वाहन से छलांग लगा दी, जिससे उनकी जान बच गई। दूसरी ओर आग की चपेट में आए कई कर्मचारी सड़क पर दर्द से तड़पते दिखाई दिए। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी।

    आग इतनी भीषण थी कि उसकी लपटें और धुएं का गुबार करीब दो किलोमीटर दूर से भी दिखाई दे रहा था। सुरक्षा के मद्देनजर टोल प्लाजा के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र को खाली कराते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।

    सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। दमकलकर्मी आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, जबकि राहत एवं बचाव अभियान भी जारी है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के क्षेत्र में लोगों की आवाजाही सीमित कर दी है।

    पुलिस ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक आशंका है कि टैंकर के अनियंत्रित होने के कारण यह दुर्घटना हुई, हालांकि वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

  • अयोध्या विवाद पर सीएम योगी का बड़ा बयान, बोले- प्रमाण हैं तो SIT को दें, बेबुनियाद आरोप लगाना बंद करें

    अयोध्या विवाद पर सीएम योगी का बड़ा बयान, बोले- प्रमाण हैं तो SIT को दें, बेबुनियाद आरोप लगाना बंद करें


    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया में आयोजित एक जनसभा के दौरान विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और जय श्रीराम का उद्घोष करने वालों पर कार्रवाई करते थे, वही आज आस्था की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आरोप जनता स्वीकार नहीं करेगी।

    सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय ऐसा था जब कुछ राजनीतिक दल और उनके समर्थक यह कहते थे कि भगवान राम का अस्तित्व ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का विरोध करने के लिए अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ी गई और मंदिर निर्माण रोकने के प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर वे लोग थे जो जय श्रीराम का नारा लगाने वालों पर लाठीचार्ज और गोली चलाने तक से पीछे नहीं हटते थे, लेकिन आज वही लोग आस्था के साथ खिलवाड़ होने का आरोप लगा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग राम नवमी, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, कांवड़ यात्रा और दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान कानून व्यवस्था बिगड़ने का आरोप झेलते रहे, वे अब अयोध्या को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह जनता को स्वीकार नहीं है।

    योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर भी हमला बोला और आरोप लगाया कि उसने देश में भ्रष्टाचार और बेईमानी को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि देश को केवल लूटा ही नहीं गया बल्कि उसकी व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया गया। ऐसे लोग अब अयोध्या और धार्मिक आस्था पर सवाल उठा रहे हैं, जो उचित नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि पूरे मामले में निष्पक्ष जांच होगी और सच सभी के सामने लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

    अपने संबोधन के अंत में सीएम योगी ने विपक्ष से अपील की कि यदि उनके पास किसी भी आरोप से जुड़े तथ्य या प्रमाण हैं तो उन्हें विशेष जांच दल यानी एसआईटी के सामने प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि यदि कोई ठोस सबूत नहीं है तो बेबुनियाद आरोप लगाने से बचना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राम भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

  • अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: रातभर पूछताछ में कई राज बेनकाब, 8 आरोपी गिरफ्तार, 60 लाख रुपये बरामद

    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: रातभर पूछताछ में कई राज बेनकाब, 8 आरोपी गिरफ्तार, 60 लाख रुपये बरामद


    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम के कथित गबन मामले ने नया मोड़ ले लिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे पूरी रात पूछताछ की। शुरुआती जांच में ऐसे कई तथ्य सामने आए हैं जिनसे संकेत मिलता है कि चढ़ावे की रकम में हेराफेरी का यह कथित खेल पिछले दो से तीन वर्षों से लगातार चल रहा था।

    पुलिस के अनुसार अब तक करीब 60 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी की गई कुल रकम कितनी है और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही। पूछताछ के दौरान कुछ आरोपियों ने कथित तौर पर ऐसे लोगों के नाम भी बताए हैं जिनकी भूमिका की अब जांच की जा रही है।

    जांच में सामने आया कि चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित रूप से नकदी की गड्डियां अलग कर दी जाती थीं। इसके बाद उन्हें अस्थायी रूप से बाथरूम में छिपाया जाता था ताकि किसी को शक न हो। मौका मिलने पर यह रकम मंदिर परिसर से बाहर पहुंचाई जाती थी और बाद में एक तय स्थान पर उसका बंटवारा किया जाता था। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।

    एफआईआर में जिन आठ लोगों को नामजद किया गया है उनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। सभी आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे मामले की परतें खोली जा सकें।

    जांच के अनुसार रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू मंदिर की गणना व्यवस्था में प्रभावशाली भूमिका निभाता था और गणना कक्ष की चाबी भी उसके पास रहती थी। सुभाष श्रीवास्तव गणना प्रक्रिया का प्रभारी बताया जा रहा है। वहीं अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा चढ़ावे की गिनती से जुड़े कार्यों में तैनात थे। पुलिस का दावा है कि इन दोनों के ठिकानों से चोरी की रकम भी बरामद हुई है। मनीष यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा और अविनाश शुक्ला की भूमिका की भी विस्तार से जांच की जा रही है।

    पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित गबन की राशि को किस तरह ठिकाने लगाया गया और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भी संलिप्तता रही है। बरामद नकदी के अलावा बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • मुहर्रम केवल मातम नहीं, इंसाफ और मानवता का संदेश भी, कर्बला की शहादत से जुड़ी है इसकी सबसे बड़ी पहचान

    मुहर्रम केवल मातम नहीं, इंसाफ और मानवता का संदेश भी, कर्बला की शहादत से जुड़ी है इसकी सबसे बड़ी पहचान


    नई दिल्ली ।
    इस्लामिक हिजरी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह नया इस्लामिक वर्ष शुरू होने का संकेत जरूर देता है, लेकिन इसकी पहचान उत्सव से अधिक आत्मचिंतन, शहादत और त्याग से जुड़ी हुई है। दुनिया भर के करोड़ों मुसलमान इस महीने में कर्बला की उस ऐतिहासिक घटना को याद करते हैं, जिसने सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान का संदेश दिया। इसी कारण मुहर्रम केवल एक धार्मिक अवसर नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों पर अडिग रहने की प्रेरणा का प्रतीक भी माना जाता है।

    मुहर्रम की 10वीं तारीख, जिसे अशूरा कहा जाता है, इस महीने का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने कर्बला की धरती पर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहादत प्राप्त की थी। इस घटना को इस्लामिक इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक घटनाओं में गिना जाता है। समय बीतने के बावजूद कर्बला की यह शहादत आज भी सत्य और न्याय के लिए संघर्ष की सबसे बड़ी मिसाल मानी जाती है।

    ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, पैगंबर हजरत मोहम्मद के इंतकाल के बाद मुस्लिम समाज में नेतृत्व को लेकर मतभेद उत्पन्न हुए। बाद में जब यजीद सत्ता में आया तो उसने अपने शासन के प्रति निष्ठा स्वीकार करने की मांग की। हजरत इमाम हुसैन ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका मानना था कि सत्ता का आधार न्याय, ईमानदारी और नैतिक सिद्धांत होने चाहिए तथा अन्यायपूर्ण शासन का समर्थन नहीं किया जा सकता। यही सिद्धांत आगे चलकर कर्बला की ऐतिहासिक घटना का कारण बने।

    वर्ष 680 ईस्वी में वर्तमान इराक स्थित कर्बला में इमाम हुसैन, उनके परिवार और साथियों को घेर लिया गया। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, उन्हें कई दिनों तक पानी और आवश्यक संसाधनों से वंचित रखा गया। इसके बाद हुए संघर्ष में इमाम हुसैन सहित उनके परिवार और साथियों ने शहादत प्राप्त की। यह बलिदान केवल धार्मिक इतिहास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और नैतिक मूल्यों की रक्षा के प्रतीक के रूप में पूरी दुनिया में याद किया जाता है।

    मुहर्रम के दौरान मनाया जाने वाला मातम केवल शोक व्यक्त करने की परंपरा नहीं है। इसका उद्देश्य कर्बला के बलिदान को याद करते हुए सत्य, न्याय और मानवता के मूल्यों को जीवित रखना भी है। विशेष रूप से शिया समुदाय इस अवसर पर मजलिसों का आयोजन करता है, काले वस्त्र धारण करता है और कर्बला की घटना का स्मरण करता है। कई स्थानों पर ताजिया जुलूस भी निकाले जाते हैं, जिन्हें इमाम हुसैन की शहादत के प्रति श्रद्धांजलि का प्रतीक माना जाता है।

    भारत सहित अनेक देशों में ताजिया मुहर्रम की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। बांस, कागज और सजावटी सामग्री से तैयार किए जाने वाले ताजिए कर्बला स्थित इमाम हुसैन के रौजे का प्रतीक माने जाते हैं। धार्मिक विद्वान इस अवसर पर केवल शोक तक सीमित रहने के बजाय समाज सेवा, जरूरतमंदों की सहायता, रक्तदान और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने जैसे कार्यों को भी इमाम हुसैन की शिक्षाओं के अनुरूप बताते हैं।

    मुहर्रम का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों पहले था। यह अवसर सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य, न्याय और नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए। कर्बला की शहादत केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि साहस, धैर्य, त्याग और मानवता की रक्षा के लिए प्रेरित करने वाली ऐसी अमर विरासत है, जो हर पीढ़ी को अपने सिद्धांतों पर दृढ़ रहने का संदेश देती है।

    संक्षिप्त सार:
    मुहर्रम इस्लामिक वर्ष का पहला महीना है, जिसकी सबसे बड़ी पहचान कर्बला में हजरत इमाम हुसैन की शहादत से जुड़ी है। यह महीना सत्य, न्याय, त्याग और मानवता के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है।

    English Keywords:
    Muharram, Karbala, ImamHussain, Ashura, Sacrifice

    नई दिल्ली । इस्लामिक हिजरी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह नया इस्लामिक वर्ष शुरू होने का संकेत जरूर देता है, लेकिन इसकी पहचान उत्सव से अधिक आत्मचिंतन, शहादत और त्याग से जुड़ी हुई है। दुनिया भर के करोड़ों मुसलमान इस महीने में कर्बला की उस ऐतिहासिक घटना को याद करते हैं, जिसने सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान का संदेश दिया। इसी कारण मुहर्रम केवल एक धार्मिक अवसर नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों पर अडिग रहने की प्रेरणा का प्रतीक भी माना जाता है।

    मुहर्रम की 10वीं तारीख, जिसे अशूरा कहा जाता है, इस महीने का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने कर्बला की धरती पर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहादत प्राप्त की थी। इस घटना को इस्लामिक इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक घटनाओं में गिना जाता है। समय बीतने के बावजूद कर्बला की यह शहादत आज भी सत्य और न्याय के लिए संघर्ष की सबसे बड़ी मिसाल मानी जाती है।

    ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, पैगंबर हजरत मोहम्मद के इंतकाल के बाद मुस्लिम समाज में नेतृत्व को लेकर मतभेद उत्पन्न हुए। बाद में जब यजीद सत्ता में आया तो उसने अपने शासन के प्रति निष्ठा स्वीकार करने की मांग की। हजरत इमाम हुसैन ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका मानना था कि सत्ता का आधार न्याय, ईमानदारी और नैतिक सिद्धांत होने चाहिए तथा अन्यायपूर्ण शासन का समर्थन नहीं किया जा सकता। यही सिद्धांत आगे चलकर कर्बला की ऐतिहासिक घटना का कारण बने।

    वर्ष 680 ईस्वी में वर्तमान इराक स्थित कर्बला में इमाम हुसैन, उनके परिवार और साथियों को घेर लिया गया। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, उन्हें कई दिनों तक पानी और आवश्यक संसाधनों से वंचित रखा गया। इसके बाद हुए संघर्ष में इमाम हुसैन सहित उनके परिवार और साथियों ने शहादत प्राप्त की। यह बलिदान केवल धार्मिक इतिहास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और नैतिक मूल्यों की रक्षा के प्रतीक के रूप में पूरी दुनिया में याद किया जाता है।

    मुहर्रम के दौरान मनाया जाने वाला मातम केवल शोक व्यक्त करने की परंपरा नहीं है। इसका उद्देश्य कर्बला के बलिदान को याद करते हुए सत्य, न्याय और मानवता के मूल्यों को जीवित रखना भी है। विशेष रूप से शिया समुदाय इस अवसर पर मजलिसों का आयोजन करता है, काले वस्त्र धारण करता है और कर्बला की घटना का स्मरण करता है। कई स्थानों पर ताजिया जुलूस भी निकाले जाते हैं, जिन्हें इमाम हुसैन की शहादत के प्रति श्रद्धांजलि का प्रतीक माना जाता है।

    भारत सहित अनेक देशों में ताजिया मुहर्रम की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। बांस, कागज और सजावटी सामग्री से तैयार किए जाने वाले ताजिए कर्बला स्थित इमाम हुसैन के रौजे का प्रतीक माने जाते हैं। धार्मिक विद्वान इस अवसर पर केवल शोक तक सीमित रहने के बजाय समाज सेवा, जरूरतमंदों की सहायता, रक्तदान और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने जैसे कार्यों को भी इमाम हुसैन की शिक्षाओं के अनुरूप बताते हैं।

    मुहर्रम का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों पहले था। यह अवसर सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य, न्याय और नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए। कर्बला की शहादत केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि साहस, धैर्य, त्याग और मानवता की रक्षा के लिए प्रेरित करने वाली ऐसी अमर विरासत है, जो हर पीढ़ी को अपने सिद्धांतों पर दृढ़ रहने का संदेश देती है।

  • सीनियरिटी से नहीं मिलता हाईकोर्ट जज बनने का अधिकार कॉलेजियम विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

    सीनियरिटी से नहीं मिलता हाईकोर्ट जज बनने का अधिकार कॉलेजियम विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी


    नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कॉलेजियम की सिफारिशों में सामान्य परिस्थितियों में न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि संवैधानिक अदालतों में न्यायाधीशों की नियुक्ति पूरी तरह कॉलेजियम के स्वतंत्र आकलन और गोपनीय प्रक्रिया पर आधारित होती है। ऐसे मामलों की गहन न्यायिक जांच केवल असाधारण परिस्थितियों में ही संभव है।

    मामला हिमाचल प्रदेश के एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी अरविंद मल्होत्रा की याचिका से जुड़ा था। उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की उस सिफारिश को चुनौती दी थी जिसमें उनसे जूनियर तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में आगे बढ़ाए गए थे। याचिकाकर्ता का कहना था कि पहले उनके नाम पर पुनर्विचार के निर्देश दिए गए थे लेकिन बाद में उनसे कनिष्ठ अधिकारियों की सिफारिश कर दी गई।

    सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब हाईकोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम पहले ही मंजूरी दे चुका है तब इस स्तर पर उस प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा का कोई ठोस आधार नहीं बनता। अदालत ने यह भी कहा कि कॉलेजियम की कार्यवाही पूरी तरह गोपनीय होती है और उसकी जांच पड़ताल शुरू करना पूरी व्यवस्था के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।

    पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में गोपनीयता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। यदि हर सिफारिश की न्यायिक जांच शुरू कर दी जाए तो यह पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को प्रभावित करेगा और अनावश्यक विवादों का रास्ता खुल जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस स्तर पर कॉलेजियम के फैसलों की पड़ताल कर किसी नए विवाद या मुसीबतों का पिटारा नहीं खोलना चाहती।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए उन्हें यह स्वतंत्रता दी कि यदि आवश्यक समझें तो हाईकोर्ट के सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत रखें अथवा उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा लें।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल वरिष्ठता के आधार पर किसी न्यायिक अधिकारी को हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाए जाने का अधिकार नहीं मिल जाता। कॉलेजियम नियुक्ति के समय योग्यता अनुभव कार्यशैली ईमानदारी और समग्र मूल्यांकन जैसे कई पहलुओं पर विचार करता है। इसलिए केवल वरिष्ठ होने के आधार पर नियुक्ति का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    पीठ ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य मौजूद नहीं है जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी को औपचारिक रूप से खारिज किया गया है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने संकेत दिया कि उनकी सेवा अवधि अभी लंबी है और भविष्य में रिक्तियां आने पर उनके नाम पर फिर विचार किया जा सकता है।

    इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायपालिका में नियुक्तियों की पारदर्शिता जितनी महत्वपूर्ण है उतनी ही आवश्यक उसकी गोपनीयता भी है। कॉलेजियम प्रणाली में अदालत का हस्तक्षेप सीमित रहेगा ताकि संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और गरिमा बनी रहे।