Category: National

  • आईएनएस तरंगिनी ने श्रीलंका के त्रिंकोमाली पत्तन पर किया स्वागत

    आईएनएस तरंगिनी ने श्रीलंका के त्रिंकोमाली पत्तन पर किया स्वागत


    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना का प्रतिष्ठित प्रशिक्षण पोत आईएनएस तरंगिनी 27 फरवरी 2026 को श्रीलंका के त्रिंकोमाली पत्तन पर पहुंचा। श्रीलंका नौसेना के पूर्वी नौसेना क्षेत्र के अधिकारियों ने पोत का स्वागत करते हुए इस दौरे को दोनों देशों के बीच समुद्री संबंधों और सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। यह दौरा विशेष रूप से उस समय आया जब आईएनएस तरंगिनी ने हाल ही में विशाखापत्तनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026 में भाग लेकर अपनी दक्षता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया था।

    पत्तन पर रुकने के दौरान तरंगिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने श्रीलंका नौसेना के पूर्वी क्षेत्र के डिप्टी कमांडर कमोडोर हरिथा जयदेवथे से भेंट की। दोनों पक्षों ने नौकायन प्रशिक्षण और पेशेवर कौशल आदान-प्रदान के क्षेत्र में संभावित सहयोग के अवसरों पर चर्चा की। इस अवसर पर पोत ने श्रीलंकाई रक्षा कर्मियों उनके परिवारों और प्रशिक्षु अधिकारियों को पोत पर परिचयात्मक दौरे के लिए आमंत्रित किया ताकि वे पोत के संचालन प्रशिक्षण गतिविधियों और तकनीकी क्षमताओं से परिचित हो सकें।

    आईएनएस तरंगिनी का पत्तन पर ठहराव केवल औपचारिक स्वागत तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान सामुदायिक सहभागिता गतिविधियों की योजना बनाई गई और विभिन्न प्रशिक्षण आदान-प्रदान कार्यक्रम आयोजित किए गए। ये पहल द्विपक्षीय समुद्री सहयोग को और गहरा करने और भविष्य में साझा नौकायन प्रशिक्षण के अवसरों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई।

    विशेष रूप से श्रीलंका नौसेना और श्रीलंका समुद्री अकादमी से चयनित प्रशिक्षु अधिकारी इस दौरे के दौरान तरंगिनी पोत से कोलंबो की यात्रा पर रवाना होंगे। इस यात्रा के दौरान उन्हें नौकायन प्रशिक्षण के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया जाएगा। प्रशिक्षु अधिकारी पोत पर रहने के दौरान समुद्री सुरक्षा नाव संचालन टीम वर्क और अन्य पेशेवर कौशल सीखेंगे जो उनके करियर विकास और द्विपक्षीय सहयोग के लिए महत्वपूर्ण हैं।

    आईएनएस तरंगिनी का यह दौरा भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना के बीच लंबे समय से चले आ रहे समन्वित समुद्री संबंधों और सहयोग को उजागर करता है। दोनों नौसेनाओं के बीच नियमित प्रशिक्षण तकनीकी सहयोग और सामुदायिक सहभागिता की पहल न केवल पेशेवर क्षमताओं को बढ़ाती है बल्कि क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और आपसी समझ को भी मजबूत करती है।

    इस प्रकार तरंगिनी का त्रिंकोमाली दौरा द्विपक्षीय मित्रता नौकायन प्रशिक्षण और सामुदायिक सहभागिता का एक प्रतीक बनकर उभरा है जो भारतीय और श्रीलंकाई नौसेना के साझा भविष्य के लिए एक मजबूत नींव रखता है।

  • NH-72A पर आपत्तिजनक नारेबाजी से तनाव, पुलिस ने दर्ज किया केस; नफरती एजेंडे के खिलाफ सहारनपुर पुलिस का एक्शन

    NH-72A पर आपत्तिजनक नारेबाजी से तनाव, पुलिस ने दर्ज किया केस; नफरती एजेंडे के खिलाफ सहारनपुर पुलिस का एक्शन


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से एक बेहद गंभीर और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने वाला मामला सामने आया है, जहाँ दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवेNH-72Aकी रेलिंग पर मुस्लिम विरोधी आपत्तिजनक नारे लिखे पाए गए। इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और सोशल मीडिया पर इस कृत्य का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दो युवतियां स्प्रे पेंट के जरिए हाईवे के एक ऊंचे हिस्से पर लगी रेलिंग की दीवार पर नफरती भाषा का इस्तेमाल करते हुए लिख रही हैं कि “यह सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है।

    इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया NHAIके एक कर्मचारी ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर सहारनपुर की बिहारीगढ़ पुलिस ने ‘हिंदू रक्षा दल’ नामक संगठन के अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता BNSकी धारा 353(2के तहत मामला दर्ज कर लिया है। यह धारा मुख्य रूप से ऐसे बयानों या कृत्यों पर लगाई जाती है जो समाज के विभिन्न वर्गों के बीच गलतफहमी, नफरत या वैमनस्य पैदा करने की क्षमता रखते हैं।

    पुलिस अधीक्षकग्रामीणसागर जैन ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस वायरल वीडियो की सत्यता की गहनता से जांच कर रही है। वीडियो फुटेज में एक कार भी दिखाई दे रही है, जिसकी नंबर प्लेट उत्तराखंड में पंजीकृत है। पुलिस अब इस वाहन के मालिक और वीडियो में दिख रही युवतियों की पहचान करने में जुटी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक संपत्ति पर इस तरह की नफरती बयानबाजी और सांप्रदायिक तनाव भड़काने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    फिलहाल, पुलिस सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय इंटेलिजेंस की मदद से आरोपियों की तलाश कर रही है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने भी स्पष्ट किया है कि हाईवे किसी एक समुदाय विशेष का नहीं, बल्कि देश की साझा संपत्ति है। इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए फैलाई जा रही नफरत और कट्टरपंथी संगठनों की सक्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और नागरिक समाज ने भी इस घटना की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • Char Dham Yatra की तैयारियां अंतिम दौर में…. 6 मार्च से शुरू हो रहे हैं ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन

    Char Dham Yatra की तैयारियां अंतिम दौर में…. 6 मार्च से शुरू हो रहे हैं ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में आस्था और अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा मानी जाने वाली चार धाम यात्रा (Char Dham Yatra) को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। चार धाम यात्रा (Char Dham Yatra) के लिए इस बार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन (Online Registration) 6 मार्च से शुरू होने जा रहा है। टूरिज्म सेक्रेटरी गरब्याल रजिस्ट्रेशन और ट्रैवल से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। तैयारिया अंतिम चरण में हैं और 6 मार्च से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू होने जा रहा है। फिलहाल ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए कोई फीस नहीं लगेगी, हालांकि इस पर अभी आखिरी फैसला लेना बाकी है।’


    ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन वालों के लिए भी व्यवस्था

    एक खबर के मुताबिक, टूरिज्म सेक्रेटरी ने बताया है कि ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन यात्रा शुरू होने से कुछ दिन पहले शुरू किया जाएगा। इसके लिए 20 टीमें गठित की गई हैं जो क होटलों आश्रमों और धर्मशालाओं में जाकर ग्रुप में आने वाले भक्तों की बुकिंग में मदद करेंगी।’आपको बता दें कि हर साल लगभग 50 लाख तीर्थयात्री चारों धामों के दर्शन करते हैं। सरकार को उम्मीद है कि इसबार ये संख्या और भी ज्यादा बढ़ सकती है।


    कब खुलेंगे कपाट?

    अक्षय तृतीया के अवसर पर 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलेंगे। इसके बाद केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। आमतौर पर बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि बसंत पंचमी तथा केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि महाशिवरात्रि के पर्व पर घोषित की जाती है।


    मंदिर परिसरों में मोबाइल, कैमरे पर प्रतिबंध

    इस साल चार धाम के मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरे पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे। बीते वर्षों में मंदिर परिसरों में स्मार्टफोन और कैमरा ले जाने से दर्शन व्यवस्था में कई समस्याएं सामने आई थीं और इसे देखते हुए मंदिर परिसरों में स्मार्टफोन और कैमरों को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया गया है। बीते महीने ही इस संबंध में जिलों के जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों तथा विभागीय अधिकारियों की बैठक हुई थी।

  • Holi 2026: MP समेत देश के विभिन्न राज्यों में कब रहेगी होली की छुट्टी… 3 या 4 मार्च को? देखें लिस्ट

    Holi 2026: MP समेत देश के विभिन्न राज्यों में कब रहेगी होली की छुट्टी… 3 या 4 मार्च को? देखें लिस्ट


    भोपाल।
    रंगों का त्योहार होली (Holi) हर साल खुशियां लेकर आता है, लेकिन इस बार त्योहार की तारीख को लेकर अलग अलग राज्यों में अंतर होने से छात्रों और अभिभावकों के बीच थोड़ा भ्रम बन गया था। कहीं होली 3 मार्च को मनाई जा रही है तो कहीं 4 मार्च को। अब कई राज्य सरकारों (State Governments) और शैक्षणिक संस्थानों (Educational Establishments) ने स्थिति साफ कर दी है, जिसके बाद स्कूलों की छुट्टियों का कार्यक्रम भी सामने आने लगा है। होली भारत का ऐसा पर्व है जिसे पूरे देश में बेहद उत्साह और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं, घरों में मिठाइयां बनती हैं, खास तौर पर गुजिया और पारंपरिक पकवानों का स्वाद लिया जाता है। परिवार और रिश्तेदार एक साथ मिलकर त्योहार की खुशियां बांटते हैं।


    उत्तर प्रदेश में तीन दिन की छुट्टी का ऐलान

    उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) ने होली के मौके पर तीन दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के अनुसार 2 मार्च से 4 मार्च तक सरकारी दफ्तरों और शिक्षण संस्थानों में अवकाश रहेगा। साथ ही सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि फरवरी महीने का वेतन और पेंशन त्योहार से पहले जारी कर दिया जाए ताकि कर्मचारियों को किसी तरह की परेशानी न हो। प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए 28 फरवरी 2026, जो शनिवार है, उसे कार्य दिवस रखा गया है जबकि 3 मार्च को अवकाश रहेगा।


    दिल्ली में परीक्षा कार्यक्रम के कारण अलग व्यवस्था

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस समय अधिकतर स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं। इसलिए परीक्षा कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए होली के दिन कोई भी परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। सीबीएसई ने भी निर्णय लिया है कि 4 मार्च को कोई बोर्ड परीक्षा नहीं रखी जाएगी, ताकि विद्यार्थी बिना किसी तनाव के त्योहार मना सकें।


    किन राज्यों में 3 मार्च को मनाई जाएगी होली

    देश के कई राज्यों में होली 3 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इन राज्यों में उसी दिन स्कूलों के बंद रहने की संभावना है।
    महाराष्ट्र
    मध्य प्रदेश
    उत्तराखंड
    असम
    तेलंगाना
    राजस्थान
    पश्चिम बंगाल
    गोवा
    झारखंड
    केरल
    आंध्र प्रदेश

    इन राज्यों में स्थानीय प्रशासन और स्कूल प्रबंधन द्वारा अवकाश की औपचारिक सूचना जारी की जा रही है।


    बिहार में दो दिन बंद रहेंगे स्कूल

    बिहार शिक्षा विभाग के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार राज्य में 3 और 4 मार्च दोनों दिन स्कूल बंद रहेंगे। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि यहां होली का उत्सव दो दिनों तक अलग अलग परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है।


    इन राज्यों में 4 मार्च को मनाई जाएगी होली

    कुछ राज्यों में पंचांग और स्थानीय मान्यताओं के आधार पर होली 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इन क्षेत्रों में उसी दिन स्कूलों में अवकाश रहेगा।
    गुजरात
    मिजोरम
    ओडिशा
    चंडीगढ़
    मणिपुर
    अरुणाचल प्रदेश
    जम्मू और कश्मीर
    उत्तर प्रदेश
    दिल्ली
    बिहार
    छत्तीसगढ़
    मेघालय
    हिमाचल प्रदेश
    छुट्टी को लेकर स्कूल अलग से जारी करेंगे नोटिस

    हालांकि राज्य स्तर पर अवकाश घोषित किए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय संबंधित स्कूल प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचना पर निर्भर करेगा। कई निजी स्कूल अपने परीक्षा कार्यक्रम, वार्षिक गतिविधियों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार छुट्टी की तारीख तय करते हैं। इसलिए छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे अपने स्कूल से जारी नोटिस जरूर जांच लें और केवल सोशल मीडिया की जानकारी पर भरोसा न करें।


    क्यों अलग अलग तारीखों पर पड़ रही है होली

    दरअसल होली की तारीख फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि और स्थानीय पंचांग गणना पर आधारित होती है। देश के विभिन्न हिस्सों में सूर्योदय और तिथि परिवर्तन के समय में अंतर होने से त्योहार की तारीख में एक दिन का फर्क आ जाता है। यही कारण है कि हर साल कुछ राज्यों में होली अलग दिन मनाई जाती है।


    त्योहार के साथ परीक्षाओं का भी ध्यान

    मार्च का महीना स्कूलों के लिए परीक्षा का समय होता है। ऐसे में शिक्षा विभाग इस बात का विशेष ध्यान रख रहे हैं कि त्योहार और परीक्षा एक ही दिन न पड़ें। इसी वजह से कई बोर्ड और स्कूलों ने परीक्षा तिथियों में बदलाव किया है या उस दिन परीक्षा नहीं रखने का निर्णय लिया है।

  • मध्य पूर्व में संघर्ष के बीच एयरलाइंस को पश्चिम एशिया के 11 देशों में उड़ान न भरने की सलाह

    मध्य पूर्व में संघर्ष के बीच एयरलाइंस को पश्चिम एशिया के 11 देशों में उड़ान न भरने की सलाह


    नई दिल्ली।
    ईरान-इजरायल के बीच जारी संघर्ष और मध्य पूर्व में बढ़ते टकराव के मद्देनजर विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने बड़ा फैसला लिया है। डीजीसीए ने शनिवार को भारतीय एयरलाइंस कंपनियों को ईरान, सऊदी अरब और यूएई सहित 11 देशों के हवाई क्षेत्रों का उपयोग 2 मार्च तक न करने की सलाह दी है।

    डीजीसीए ने भारतीय एयरलाइंस कंपनियों को जारी निर्देश में कहा कि वे 11 देशों के ऊपर से उड़ान भरने से बचें। विमानन नियामक का जारी आदेश सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। डीजीसीए के निर्देश वाले इन 11 देशों में ईरान, इजराइल, लेबनान, यूएई, सऊदी अरब, बहरीन, ओमान, इराक, जॉर्डन, कुवैत और कतर शामिल हैं। यह नया सुरक्षा परामर्श (एडवायजरी) तुरंत लागू कर दिया गया है।

    फिलहाल यह रोक 2 मार्च तक प्रभावी रहेगी। इस पाबंदी के कारण भारतीय एयरलाइंस ने मध्य पूर्व जाने वाली अपनी कई उड़ानें कुछ समय के लिए निलंबित कर दी है। वहीं, कई फ्लाइट्स के रास्ते बदले गए हैं, जबकि कुछ को रद्द करना पड़ा है। सीधे रास्ते बंद होने से विमानों को घूमकर जाना होगा, जिससे सफर का समय बढ़ जाएगा। उड़ान के समय बढ़ने से तेल का खर्च बढ़ेगा, जिसका सीधा बोझ यात्रियों की जेब पर पड़ सकता है।

    उल्लेखनीय है कि विमानन कंपनियां प्रभावित यात्रियों को टिकट के पैसे वापस करने यानी दूसरी तारीख पर यात्रा करने का विकल्प दे रही हैं। डीजीसीए ने एयरलाइंस को लगातार पल-पल की जानकारी (नोटम) पर नजर रखने को कहा है, ताकि किसी भी तरह के खतरे से बचा जा सके। इसके साथ ही यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी एयरलाइन की वेबसाइट पर उड़ान का स्टेटस जरूर चेक कर लें।

  • आंध्र प्रदेश में भीषण हादसा: पटाखा फैक्ट्री में धमाके से दहल उठा काकीनाडा, 20 की मौत, दूर-दूर तक बिखरे शव

    आंध्र प्रदेश में भीषण हादसा: पटाखा फैक्ट्री में धमाके से दहल उठा काकीनाडा, 20 की मौत, दूर-दूर तक बिखरे शव


    नई दिल्ली । काकीनाडा, आंध्र प्रदेश: शनिवार की दोपहर आंध्र प्रदेश का काकीनाडा जिला एक ऐसे हृदयविदारक हादसे का गवाह बना, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। जिले के वेटलापलेम गांव स्थित एक पटाखा निर्माण इकाई में हुए भीषण विस्फोट ने हंसते खेलते परिवारों की खुशियां पल भर में मातम में बदल दीं। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 6 अन्य कर्मचारी जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

    धमाका दोपहर करीब 2 बजे उस वक्त हुआ जब फैक्ट्री के भीतर 20 से अधिक कर्मचारी अपने काम में मशगूल थे। विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी गूंज 5 किलोमीटर के दायरे में सुनाई दी। स्थानीय निवासियों के अनुसार, धमाका इतना जोरदार था कि आसपास की धरती डोल गई और आसमान में धुएं का गुबार छा गया। जैसे ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे, वहां का मंजर किसी डरावने सपने जैसा था। फैक्ट्री का ढांचा पूरी तरह जमींदोज हो चुका था और चारों ओर चीख पुकार मची थी।

    पुलिस और चश्मदीदों ने बताया कि धमाके के दबाव के कारण कर्मचारियों के शव पास के धान के खेतों में जाकर गिरे। हरे भरे खेतों के बीच बिखरे हुए अंग और जली हुई लाशें सुरक्षा मानकों की अनदेखी की भयावह कहानी बयां कर रही थीं। स्थिति इतनी विकट थी कि स्थानीय लोगों को शवों को इकट्ठा करने के लिए ‘बाराकालू’ खाद की बोरियों से बनी चादरें का सहारा लेना पड़ा। पुलिस प्रशासन ने खेतों में दूर तक छिटके शरीर के हिस्सों को खोजने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों की मदद ली है, ताकि शिनाख्त की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

    काकीनाडा सरकारी अस्पताल के सुपरिटेंडेंट के अनुसार, अस्पताल लाए गए घायल 90 से 100 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं, जिससे उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम उन्हें बचाने का भरसक प्रयास कर रही है, लेकिन गृह मंत्री वंगालपुडी अनीता ने आशंका जताई है कि हताहतों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।

    मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने तत्काल संबंधित मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को घटनास्थल पर पहुंचने और राहत कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फैक्ट्री के पास आवश्यक लाइसेंस थे या नहीं और वहां सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। फिलहाल, पूरा गांव शोक में डूबा है और अपनों को खोने वाले परिवारों का रो रोकर बुरा हाल है।

  • समीर वानखेड़े की मुश्किलें बढ़ीं: दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉर्डेलिया क्रूज केस में अनुशासनात्मक कार्रवाई को दी हरी झंडी

    समीर वानखेड़े की मुश्किलें बढ़ीं: दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉर्डेलिया क्रूज केस में अनुशासनात्मक कार्रवाई को दी हरी झंडी


    नई दिल्ली। कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स केस के चर्चित और विवादित चेहरा रहे आईआरएस IRS अधिकारी समीर वानखेड़े की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2021 के इस हाई-प्रोफाइल मामले में वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रखने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण कैट के उस पुराने फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसने वानखेड़े को बड़ी राहत दी थी। कोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद अब केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड CBIC द्वारा जारी चार्जशीट के आधार पर जांच का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

    समीर वानखेड़े, जो 2008 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं, उस समय वैश्विक सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने मुंबई एनसीबी NCB के जोनल डायरेक्टर रहते हुए अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्य खान को ड्रग्स केस में गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में उन पर गंभीर आरोप लगे कि उन्होंने आर्यन खान को फंसाने की धमकी दी और मामले को रफा-दफा करने के बदले उनके परिवार से कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की मांग की थी। इसके अलावा, उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने जांच की दिशा मोड़ने की कोशिश की और एनसीबी से कार्यमुक्त होने के बावजूद विभाग के विधिक अनुभाग से गोपनीय जानकारियां हासिल करने का प्रयास किया था।

    गौरतलब है कि इससे पहले ‘कैट’ ने 18 अगस्त 2025 को वानखेड़े को जारी किए गए आरोपपत्र चार्जशीट को रद्द कर दिया था, जिसे केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार का तर्क था कि अधिकारी के आचरण की गहन जांच जरूरी है। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए माना कि अनुशासनात्मक कार्यवाही को रोकना उचित नहीं है। इस फैसले से साफ हो गया है कि सरकारी संस्थानों की शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए किसी भी स्तर के अधिकारी के खिलाफ आरोपों की जांच अनिवार्य है। अब वानखेड़े को इन गंभीर विभागीय आरोपों का सामना करना होगा, जो उनके करियर के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

  • नई दिल्ली दौरे पर CM मोहन यादव, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से की अहम मुलाकात

    नई दिल्ली दौरे पर CM मोहन यादव, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से की अहम मुलाकात


    नई दिल्ली। मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को राजधानी दिल्ली के दौरे पर हैं। इस यात्रा को प्रशासनिक और संगठनात्मक लिहाज़ से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शाम तक उनके भोपाल लौटने की संभावना है।

    दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट की। मुलाकात के दौरान प्रदेश के विकास कार्यों चल रही योजनाओं और केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई।

    बताया जा रहा है कि बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई और इसमें समसामयिक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से इस भेंट को अहम माना जा रहा है।
    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी सौजन्य भेंट की।

  • किन मुस्लिम देशों में नहीं खेली जाती होली? रंग दिखने पर मिलती है इतनी कड़ी सजा

    किन मुस्लिम देशों में नहीं खेली जाती होली? रंग दिखने पर मिलती है इतनी कड़ी सजा


    नई दिल्ली । होली भारत का वह त्योहार है जो खुशियों हंसी मजाक और रंगों से भरा होता है. यह त्योहार गिले शिकवे भूलकर आपसी रिश्तों में मिठास घोलने पुराने मतभेद मिटाने और जीवन में नए उत्साह को लाने का प्रतीक माना जाता है. भारत में होली को खुले मैदानों गलियों और सड़कों पर मनाया जाता है जहां बड़े बड़े जुलूस रंगों का उत्सव और पारंपरिक मिठाइयों के साथ धूमधाम होती है लेकिन जब हम सीमाओं के पार झांकते हैं खासकर उन देशों में जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं तो होली का रंग और उत्साह कई तरह से बदल जाता है.

    कई इस्लामिक देशों में धार्मिक और सामाजिक नियम इतने सख्त हैं कि होली को सार्वजनिक रूप से मनाना नामुमकिन है. कुछ जगहों पर यह पूरी तरह प्रतिबंधित है और अगर कोई खुले तौर पर रंग खेलता है तो उसे भारी सजा का सामना करना पड़ सकता है. तो आइए जानते हैं कि किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है और रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है.

    किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है

    अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद धार्मिक नियम बहुत सख्त हो गए हैं. हिंदू और सिख समुदाय की संख्या बहुत कम रह गई है इसलिए होली अब सार्वजनिक रूप से नहीं मनाई जाती है. रंग खेलना या जुलूस निकालना प्रतिबंधित है. त्योहार सिर्फ घर या मंदिर के भीतर ही सीमित है. प्रशासन ने सुरक्षा का आश्वासन तो दिया है लेकिन खुले मैदानों पर कोई उत्सव नहीं होता है. इसलिए अफगानिस्तान में होली का रंग फीका नहीं बल्कि दबा हुआ है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो कानूनी कार्रवाई का खतरा रहता है.

    इसके अलावा सऊदी अरब में गैर इस्लामी त्योहारों के सार्वजनिक आयोजन पर लंबे समय तक सख्ती रही है. भारतीय प्रवासी भी सिर्फ निजी परिसरों या दूतावास में ही होली मना सकते हैं. वहीं अन्य खाड़ी देश जैसे कतर और ओमान मे धार्मिक स्वतंत्रता सीमित है. सार्वजनिक रूप से रंग खेलना नहीं होता है सिर्फ प्रशासन की अनुमति से निजी कार्यक्रम हो सकते हैं. इन देशों में होली का उत्सव पूरी तरह प्रतिबंधित या बहुत सीमित है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो उसे कानूनी कार्रवाई या भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

    रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है

    कुछ इस्लामिक देशों में होली में रंग खेलना या सार्वजनिक रूप से मनाना कानूनी अपराध माना जाता है और इसके लिए सजा काफी कड़ी हो सकती है. सजा की सीमा देश के कानून और स्थानीय प्रशासन के नियमों पर निर्भर करती है. जैसे अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से होली के रंग खेलना या जुलूस निकालना गैरकानूनी है. उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है.

    विशेष रूप से तालिबानी शासन के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए कोई भी सार्वजनिक आयोजन कठोर रूप से रोका जाता है. वहीं सऊदी अरब में रंग खेलते पकड़े जाने पर अपराधी को गिरफ्तार किया जा सकता है और कुछ मामलों में जेल या प्रत्यर्पण तक हो सकता है. वहीं कतर और ओमान में सार्वजनिक रूप से होली मनाना भी प्रतिबंधित है. उल्लंघन करने पर जुर्माना प्रशासनिक कार्रवाई या अपवित्रता के आरोप लग सकते हैं.

    होली भारत का वह त्योहार है जो खुशियों हंसी मजाक और रंगों से भरा होता है. यह त्योहार गिले शिकवे भूलकर आपसी रिश्तों में मिठास घोलने पुराने मतभेद मिटाने और जीवन में नए उत्साह को लाने का प्रतीक माना जाता है. भारत में होली को खुले मैदानों गलियों और सड़कों पर मनाया जाता है जहां बड़े बड़े जुलूस रंगों का उत्सव और पारंपरिक मिठाइयों के साथ धूमधाम होती है लेकिन जब हम सीमाओं के पार झांकते हैं खासकर उन देशों में जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं तो होली का रंग और उत्साह कई तरह से बदल जाता है.

    कई इस्लामिक देशों में धार्मिक और सामाजिक नियम इतने सख्त हैं कि होली को सार्वजनिक रूप से मनाना नामुमकिन है. कुछ जगहों पर यह पूरी तरह प्रतिबंधित है और अगर कोई खुले तौर पर रंग खेलता है तो उसे भारी सजा का सामना करना पड़ सकता है. तो आइए जानते हैं कि किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है और रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है.

    किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है

    अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद धार्मिक नियम बहुत सख्त हो गए हैं. हिंदू और सिख समुदाय की संख्या बहुत कम रह गई है इसलिए होली अब सार्वजनिक रूप से नहीं मनाई जाती है. रंग खेलना या जुलूस निकालना प्रतिबंधित है. त्योहार सिर्फ घर या मंदिर के भीतर ही सीमित है. प्रशासन ने सुरक्षा का आश्वासन तो दिया है लेकिन खुले मैदानों पर कोई उत्सव नहीं होता है. इसलिए अफगानिस्तान में होली का रंग फीका नहीं बल्कि दबा हुआ है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो कानूनी कार्रवाई का खतरा रहता है.

    इसके अलावा सऊदी अरब में गैर इस्लामी त्योहारों के सार्वजनिक आयोजन पर लंबे समय तक सख्ती रही है. भारतीय प्रवासी भी सिर्फ निजी परिसरों या दूतावास में ही होली मना सकते हैं. वहीं अन्य खाड़ी देश जैसे कतर और ओमान मे धार्मिक स्वतंत्रता सीमित है. सार्वजनिक रूप से रंग खेलना नहीं होता है सिर्फ प्रशासन की अनुमति से निजी कार्यक्रम हो सकते हैं. इन देशों में होली का उत्सव पूरी तरह प्रतिबंधित या बहुत सीमित है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो उसे कानूनी कार्रवाई या भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

    रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है

    कुछ इस्लामिक देशों में होली में रंग खेलना या सार्वजनिक रूप से मनाना कानूनी अपराध माना जाता है और इसके लिए सजा काफी कड़ी हो सकती है. सजा की सीमा देश के कानून और स्थानीय प्रशासन के नियमों पर निर्भर करती है. जैसे अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से होली के रंग खेलना या जुलूस निकालना गैरकानूनी है. उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है.

    विशेष रूप से तालिबानी शासन के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए कोई भी सार्वजनिक आयोजन कठोर रूप से रोका जाता है. वहीं सऊदी अरब में रंग खेलते पकड़े जाने पर अपराधी को गिरफ्तार किया जा सकता है और कुछ मामलों में जेल या प्रत्यर्पण तक हो सकता है. वहीं कतर और ओमान में सार्वजनिक रूप से होली मनाना भी प्रतिबंधित है. उल्लंघन करने पर जुर्माना प्रशासनिक कार्रवाई या अपवित्रता के आरोप लग सकते हैं.

  • उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में 1.2 लाख विद्यार्थियों को दी उपाधियां, महिला शिक्षा और राष्ट्र सेवा पर दिया जोर

    उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में 1.2 लाख विद्यार्थियों को दी उपाधियां, महिला शिक्षा और राष्ट्र सेवा पर दिया जोर


    नई दिल्ली । दिल्ली उपराष्ट्रपति एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और 1.2 लाख से अधिक स्नातकों को उपाधियां प्रदान कीं। समारोह में उन्होंने विश्वविद्यालय की 104 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा की सराहना करते हुए इसे भारत के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक बताया।

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की शुरुआत मात्र तीन कॉलेजों दो संकायों आठ विभागों और 750 विद्यार्थियों से हुई थी वहीं आज यह 16 संकाय 86 विभाग 90 कॉलेज और छह लाख से अधिक विद्यार्थियों वाला एक विशाल शैक्षणिक संस्थान बन चुका है। उन्होंने विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार का भी उल्लेख किया और कहा कि यह शिक्षा में निरंतरता और उत्कृष्टता का प्रतीक है।

    उन्होंने स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि उपाधि केवल प्रमाण-पत्र नहीं है बल्कि समाज की सेवा राष्ट्र के कल्याण और राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत को निभाने की प्रतिबद्धता है। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि विकसित भारत @2047 को साकार करने की कुंजी युवाओं में निहित है और हर विद्यार्थी चाहे वह वैज्ञानिक शिक्षक कलाकार उद्यमी या नवोन्मेषक बने वह इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    विशेष रूप से उन्होंने महिला शिक्षा में हुई प्रगति की सराहना की। उपराष्ट्रपति ने बताया कि स्नातकों में 50 प्रतिशत से अधिक और स्वर्ण पदक विजेताओं में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं जो देश में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास का प्रतीक है।

    स्नातकों को सामाजिक जिम्मेदारी नवाचार और प्रौद्योगिकी अनुसंधान तथा उद्यमिता के माध्यम से देश के विकास में योगदान देने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने उन्हें नशीले पदार्थों से दूर रहने और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने की सलाह दी।