Category: National

  • ISRO का निसार उपग्रह करेगा किसानों की बड़ी मदद… मिलेगी मिट्टी की नमी की सटीक जानकारी

    ISRO का निसार उपग्रह करेगा किसानों की बड़ी मदद… मिलेगी मिट्टी की नमी की सटीक जानकारी


    नई दिल्ली।
    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organization- ISRO) ने निसार (NISAR) उपग्रह के बारे में अहम जानकारी साझा की है। यह उपग्रह भारत (India) और अमेरिका (NASA) का संयुक्त प्रोजेक्ट है, जो एस-बैंड और एल-बैंड रडार की मदद से पृथ्वी की सतह की निगरानी करता है। निसार का मुख्य उद्देश्य मिट्टी में नमी का सटीक और नियमित आकलन करना है। इसरो के अनुसार, यह उपग्रह हर 12 दिनों में भारत के पूरे भू-भाग का उच्च रिजॉल्यूशन (100 मीटर) डेटा प्रदान करेगा। इससे किसानों, वैज्ञानिकों और सरकार को मिट्टी की नमी की लगभग वास्तविक समय की जानकारी मिल सकेगी।

    मिट्टी में नमी की जानकारी कृषि के लिए बहुत उपयोगी है। यह फसलों की सेहत, सिंचाई की कितनी जरूरत है, सूखे का खतरा कितना है और जल प्रबंधन जैसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत में अलग-अलग इलाकों जैसे सिंचित मैदान, वर्षा पर निर्भर खेत, अर्ध-शुष्क क्षेत्र और ज्यादा बारिश वाले इलाकों में मिट्टी की नमी अलग-अलग होती है। निसार का डेटा इन सभी क्षेत्रों में एकसमान और भरोसेमंद अनुमान देगा। इसरो ने एक भौतिकी-आधारित एल्गोरिदम विकसित किया है, जो इस डेटा को और अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाता है।


    NISAR के पास क्या है टारगेट

    निसार हर 12 दिनों में दो बार (दो अलग-अलग दिशाओं से) अवलोकन करेगा, जिससे मिट्टी की नमी में होने वाले बदलावों की निगरानी आसान हो जाएगी। इससे किसान सिंचाई की बेहतर योजना बना सकेंगे, सूखे से पहले तैयारी कर सकेंगे, मौसम आधारित कृषि सलाह ले सकेंगे और पानी के संसाधनों का सही प्रबंधन कर सकेंगे। यह डेटा जिलों, कृषि समुदायों और योजनाकारों के लिए बहुत मददगार साबित होगा।


    किस तरह की मिलेगी मदद

    इसरो ने बताया कि 100 मीटर रिजॉल्यूशन वाला यह लेवल-4 मिट्टी नमी डेटा राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र में तैयार किया जाएगा। फिर इसे भूनिधि पोर्टल के जरिए पूरे देश के किसानों, शोधकर्ताओं, सरकारी विभागों और गैर-सरकारी संगठनों को आसानी से उपलब्ध कराया जाएगा। इस तरह निसार उपग्रह भारत की कृषि और जल संसाधन प्रबंधन को मजबूत बनाने में बड़ा योगदान देगा। इस तरह इसरो लगातार बड़े-बड़े कारनामे कर रहा है।

  • केंद्र सरकार का बड़ा प्रशासनिक बदलाव: साउथ ब्लॉक में अंतिम कैबिनेट बैठक के साथ नए युग की शुरुआत

    केंद्र सरकार का बड़ा प्रशासनिक बदलाव: साउथ ब्लॉक में अंतिम कैबिनेट बैठक के साथ नए युग की शुरुआत


    नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों में स्थानांतरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि साउथ ब्लॉक में केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक संपन्न हुई और यह क्षण केवल भवन परिवर्तन का नहीं बल्कि इतिहास और भविष्य के संगम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह परिसर गुलामी से आजादी और स्वतंत्र भारत की नीतिगत यात्रा का साक्षी रहा है।

    मंत्री ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नए प्रधानमंत्री कार्यालय को सेवा तीर्थ के रूप में राष्ट्र को समर्पित किया गया है। ब्रिटिश काल में निर्मित नॉर्थ और साउथ ब्लॉक लंबे समय तक देश के प्रशासनिक संचालन के केंद्र रहे। स्वतंत्रता के बाद भी इन्हीं भवनों से शासन व्यवस्था संचालित होती रही और प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से कार्य करता रहा।

    अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों को देखा है। इसकी सीढ़ियों पर जवाहरलाल नेहरू से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री तक के कदम पड़े हैं। यहां संविधान की भावना और जनता के जनादेश से प्रेरित होकर अनेक बड़े फैसले लिए गए। भारत की सफलताओं का उत्सव भी यहीं मनाया गया और चुनौतियों से निपटने की रणनीतियां भी यहीं बनीं।

    उन्होंने कहा कि साउथ ब्लॉक ने विभाजन की त्रासदी युद्धकालीन परिस्थितियां आपातकाल की चुनौतियां और शांति काल की नीतिगत चर्चाएं देखीं। टाइपराइटर के दौर से डिजिटल गवर्नेंस तक की प्रशासनिक यात्रा का साक्षी यही भवन रहा। अधिकारियों की कई पीढ़ियों ने यहां बैठकर ऐसे निर्णय लिए जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद की अनिश्चितता से देश को स्थिरता और विकास की राह पर अग्रसर किया।

    बीते एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह परिसर अनेक ऐतिहासिक फैसलों का केंद्र बना। स्वच्छ भारत अभियान डिजिटल इंडिया और जीएसटी जैसे सुधारों को यहीं से दिशा मिली। अनुच्छेद 370 से जुड़े निर्णय और तीन तलाक के विरुद्ध कानून जैसे कदमों ने सामाजिक परिवर्तन का संदेश दिया। सुरक्षा नीति के संदर्भ में सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे निर्णयों ने वैश्विक मंच पर भारत की दृढ़ता को प्रदर्शित किया।

    मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए एक आधुनिक तकनीकी और पर्यावरण अनुकूल कार्यक्षेत्र की आवश्यकता थी। सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन उसी सोच का परिणाम हैं जहां सेवाभाव और उत्पादकता को केंद्र में रखा गया है। उन्होंने बताया कि साउथ ब्लॉक के उद्घाटन के लगभग 95 वर्ष बाद अब सरकार इन भवनों को खाली कर नए परिसरों में स्थानांतरित हो गई है जो गुलामी के अतीत से आत्मविश्वासी भविष्य की ओर बढ़ने का प्रतीक है।

    साथ ही मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय का हिस्सा बनाया जाएगा ताकि देश की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत नई पीढ़ियों को प्रेरित करती रहे। यह कदम प्रशासनिक परिवर्तन के साथ साथ सांस्कृतिक पुनर्स्मरण का भी संदेश देता है।

  • राजस्थान विधानसभा में 'अमर्यादित' आचरण: कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा पर अभद्र इशारे का आरोप, स्पीकर ने दिए वीडियो जांच के आदेश!

    राजस्थान विधानसभा में 'अमर्यादित' आचरण: कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा पर अभद्र इशारे का आरोप, स्पीकर ने दिए वीडियो जांच के आदेश!


    जयपुर। राजस्थान विधानसभा की गरिमा शुक्रवार को उस समय तार-तार होती दिखी, जब शून्यकाल के दौरान सदन का माहौल अचानक गरमा गया। आरोप है कि कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा ने सदन की कार्यवाही के दौरान कुछ ऐसे ‘अभद्र इशारे’ किए, जो लोकतांत्रिक संस्थान की मर्यादा के बिल्कुल विपरीत थे। भाजपा विधायकों ने इस मुद्दे को लेकर सदन में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया और संबंधित विधायक के खिलाफ निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।

    कैसे शुरू हुआ विवाद?
    मामले की जड़ें गुरुवार की घटना से जुड़ी बताई जा रही हैं, लेकिन शुक्रवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, भाजपा के वरिष्ठ विधायक श्रीचंद कृपलानी ने इस मुद्दे को पूरी प्रखरता के साथ उठाया। कृपलानी ने सीधे तौर पर रोहित बोहरा पर उंगली उठाते हुए कहा कि सदन की मर्यादा को ठेस पहुँचाने वाला ऐसा व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि विधायक को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और उन पर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सदन की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है और पद की गरिमा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।

    स्पीकर वासुदेव देवनानी का सख्त रुख
    मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि एक विधायक लाखों मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करता है और उसे बड़ी संख्या में लोग देखते हैं, इसलिए उसका आचरण आदर्श होना चाहिए। देवनानी ने आश्वासन दिया कि, “पूरे घटनाक्रम की वीडियो फुटेज देखी जाएगी। यदि वीडियो में विधायक का आचरण सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं पाया गया, तो नियमानुसार कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

    कांग्रेस का बचाव: ‘मुद्दे को तूल न दें’

    वहीं, कांग्रेस विधायक दल के सचेतक रफीक खान ने भाजपा के आरोपों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि रोहित बोहरा अपनी सीट पर बैठे हुए थे और मामले को राजनीतिक द्वेष के चलते अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है। खान ने पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी ऐसे विवादों को आपसी संवाद और बैठकों से सुलझाया जाता रहा है, इसलिए इस पर ‘मीडिया ट्रायल’ के बजाय संयम बरतना चाहिए।

    अब जांच पर टिकी निगाहें
    फिलहाल राजस्थान की सियासत में पारा चढ़ा हुआ है। अब सारा दारोमदार विधानसभा अध्यक्ष की जांच पर है। वीडियो समीक्षा के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि रोहित बोहरा पर लगे आरोप कितने सटीक हैं। क्या विधायक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी या कांग्रेस इसे केवल राजनीतिक हमला करार देकर बचाव कर पाएगी, यह आने वाले वक्त में साफ हो जाएगा।

  • योगी का सपा पर तंज: मंत्री को नहीं पता था बिस्मिल और बिस्मिल्लाह खां का अंतर, अधिकारी भी नहीं पहचानते थे अपना चेहरा!

    योगी का सपा पर तंज: मंत्री को नहीं पता था बिस्मिल और बिस्मिल्लाह खां का अंतर, अधिकारी भी नहीं पहचानते थे अपना चेहरा!


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पुराने ‘तेवर’ में नजर आए। विपक्ष पर प्रहार करते हुए सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान शिक्षा विभाग की प्रशासनिक अव्यवस्था और मंत्रियों की गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े किए। मुख्यमंत्री ने एक बेहद चौंकाने वाला किस्सा साझा किया जिसमें सपा सरकार के एक पूर्व माध्यमिक शिक्षा मंत्री की ऐतिहासिक और सामान्य ज्ञान की कमी उजागर हुई।

    बिस्मिल और बिस्मिल्लाह खां में भ्रम

    मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि स्वतंत्रता सेनानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में सपा सरकार के शिक्षा मंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था। जब उन्हें बताया गया कि आज पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का शहीदी दिवस है तो मंत्री जी बुरी तरह भ्रमित हो गए। उन्होंने क्रांतिकारी बिस्मिल को भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां समझ लिया।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा मंत्री जी कहने लगे कि बिस्मिल्लाह खां को तो हाल ही में अवॉर्ड मिला है उन्हें फांसी कैसे दी जा सकती है? जब वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने उन्हें टोकते हुए बताया कि बात पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की हो रही है तो मंत्री जी ने अपनी गलती सुधारने के बजाय उस व्यक्ति को ही ‘भारतीय जनता पार्टी का समर्थक’ करार दे दिया। सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि जिस सरकार के शिक्षा मंत्री को इन दो महान विभूतियों का अंतर न पता हो वहां अंधेर नगरी चौपट राजा वाली स्थिति थी। ऐसे में अगर बच्चे नकल नहीं करते तो क्या करते?

    मंत्री को नहीं पहचानते थे अधिकारी

    मुख्यमंत्री ने एक और संस्मरण सुनाया जब वह गोरखपुर के सांसद थे। उन्होंने बताया कि एक बार रेलवे स्टेशन पर कुछ अधिकारियों के बीच सपा सरकार के शिक्षा मंत्री भी मौजूद थे लेकिन कोई अधिकारी उनके सम्मान में खड़ा तक नहीं हुआ। जब योगी ने एक अधिकारी से पूछा कि क्या वे मंत्री के साथ आए हैं तो अधिकारी ने उल्टा सवाल किया- कौन से मंत्री? बाद में खुद मंत्री ने स्वीकार किया कि वे पिछले छह महीने से दफ्तर ही नहीं गए इसलिए अधिकारी उन्हें पहचानते ही नहीं।

    कानून से ऊपर कोई नहीं

    कानून-व्यवस्था और धार्मिक मर्यादा पर बात करते हुए सीएम योगी ने प्रयागराज कुंभ का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता। आदि जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों और वेदों की एक गरिमा है जिसका पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
  • भारतीय पासपोर्ट 10 पायदान ऊपर, पर ईरान और बोलिविया ने बंद कर दी वीजा फ्री एंट्री

    भारतीय पासपोर्ट 10 पायदान ऊपर, पर ईरान और बोलिविया ने बंद कर दी वीजा फ्री एंट्री

    नई दिल्ली । भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक रैंकिंग में सुधार हुआ है, लेकिन इसके साथ ही दो देशों ने भारतीयों के लिए वीजा फ्री एंट्री बंद कर दी है। हेनले एंड पार्टनर्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अब भारतीय पासपोर्ट वैश्विक सूची में 75वें स्थान पर पहुंच गया है। 2025 में यह रैंक 85वीं थी, और साल की शुरुआत में 80वीं थी। हालांकि भारत की रैंकिंग में सुधार आया है, लेकिन वीजा फ्री सुविधा वाले देशों की संख्या घटकर 56 रह गई है। 2025 में भारतीय पासपोर्ट धारक 57 देशों में बिना वीजा या वीजा ऑन अराइवल यात्रा कर सकते थे।

    वीजा फ्री सुविधा बंद करने वाले देश
    ईरान ने नवंबर 2025 में भारतीय सामान्य पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा फ्री सुविधा निलंबित कर दी। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस कदम के पीछे वहां हुई अपहरण और फिरौती की घटनाएं थीं। इसी तरह, बोलिविया ने भी भारतीयों के लिए वीजा ऑन अराइवल सुविधा बंद कर दी। इसके बजाय इस देश ने ई-वीजा प्रणाली लागू की, जिसके तहत भारतीयों को ऑनलाइन आवेदन करना जरूरी हो गया। फिलहाल, गाम्बिया ने फरवरी 2026 में भारतीयों के लिए वीजा ऑन अराइवल सुविधा शुरू की है, जिससे यह संख्या 56 देशों तक पहुंची।

    रैंकिंग में सुधार का कारण
    हालांकि दो देशों की वीजा सुविधा घटने से भारत की पहुंच घट गई, फिर भी हेनले इंडेक्स के रिलेटिव सिस्टम के कारण रैंकिंग में सुधार देखा गया। हेनले इंडेक्स में देशों की रैंकिंग अन्य देशों के मुकाबले निर्धारित होती है। अगर अन्य देशों ने अपनी पहुंच खोई है, तो भारत की रैंकिंग में सुधार दिखाई देता है। इस बार भारत 75वीं रैंक पर है, जो अल्जीरिया और नाइजर के साथ साझा की जा रही है।

    पासपोर्ट रैंकिंग कैसे तय होती है
    हेनले इंडेक्स 199 देशों के पासपोर्ट को विभिन्न आधारों पर रैंक करता है। इसमें देखा जाता है कि किसी देश के पासपोर्ट धारक कितने देशों में वीजा फ्री एंट्री या वीजा ऑन अराइवल का लाभ ले सकते हैं। इसके अलावा बॉर्डर पर जारी विजिटर परमिट और बेसिक इलेक्ट्रॉनिक ट्रेवल ऑथराइजेशन (ETA) के अंक भी जोड़े जाते हैं। अगर किसी देश में प्रवेश के लिए पहले से वीजा या ई-वीजा जरूरी हो, तो उस पर अंक नहीं मिलते।

  • CBSE का बड़ा निर्णय… 12वीं के रिजल्ट के बाद नहीं होगा Mark Verification… अब पूरी तरह डिजिटल जांची जाएंगी कॉपियां

    CBSE का बड़ा निर्णय… 12वीं के रिजल्ट के बाद नहीं होगा Mark Verification… अब पूरी तरह डिजिटल जांची जाएंगी कॉपियां


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) (Central Board of Secondary Education (CBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 (12th Board Exam 2026) को लेकर अहम निर्णय लिया है। इस बार 12वीं के परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद छात्रों को अंक सत्यापन (मार्क वेरिफिकेशन) (Mark Verification) की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। बोर्ड ने तय किया है कि 2026 से 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल प्रणाली ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ के जरिए किया जाएगा।

    दरअसल, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) इस बार 12वीं के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ के साथ पूरी तरह डिजिटल तरीके से कराने जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इसके बाद अंकों के सत्यापन की जरूरत नहीं रहेगी। शुक्रवार को सीबीएसई अधिकारियों ने संबद्ध स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के लिए आयोजित एक कार्यशाला में यह जानकारी दी। परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बताया कि 2026 में 12वीं की परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में ऑन स्क्रीन मार्किंग की जाएगी। डिजिटल मूल्यांकन की इस प्रक्रिया के बाद अंकों की गिनती में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रह जाएगी। ऐसे में छात्रों के लिए परिणाम घोषित होने के बाद अंकों के सत्यापन की जरूरत नहीं रह जाएगी।


    10वीं का मूल्यांकन मैनुअल ही होगा

    परीक्षा नियंत्रक भारद्वाज ने बताया कि बोर्ड इस बार सिर्फ 12वीं की परीक्षा के लिए यह सुविधा लागू कर रहा है। इस बार होने वाली दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में कॉपियों का मूल्यांकन ‘मैनुअल’ यानी शिक्षकों के द्वारा ही किया जाएगा।


    इसलिए कराया जाता था अंक सत्यापन

    पुरानी व्यवस्था में कई बार मानवीय भूलों के चलते अंक जुड़ने से रह जाते थे। परिणाम के बाद छात्र अंक सत्यापन को आवेदन करते थे, जिसके बाद कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन होता था।


    क्या होती है ऑन स्क्रीन मार्किंग

    ऑन स्क्रीन मार्किंग डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है। इसमें उत्तर पुस्तिका को हाथों से चेक नहीं किया जाता। शिक्षक स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका को कंप्यूटर पर चेक करेंगे। छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं पहले स्कैन की जाती हैं। इसके बाद ये कॉपियां सुरक्षित ऑनलाइन सिस्टम पर अपलोड होती हैं और शिक्षक कंप्यूटर पर उन्हें देखकर अंक देते हैं। इस सिस्टम में सॉफ्टवेयर खुद ही कुल अंक जोड़ देता है, जिससे टोटलिंग की गलती की संभावना खत्म हो जाती है। अभी तक कई बार हाथ से जोड़ने में गलती हो जाती थी, जिससे छात्रों को बाद में वेरिफिकेशन के लिए आवेदन करना पड़ता था।


    शिक्षक अब अपने स्कूल से ही जांच सकेंगे कॉपियां

    इस नए सिस्टम की एक खास बात यह है कि शिक्षकों को अब कॉपी जांचने के लिए किसी मूल्यांकन केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं होगी। वे अपने ही स्कूल में बैठकर, नियमित काम करते हुए कॉपियों का मूल्यांकन कर सकेंगे। इससे समय और यात्रा खर्च दोनों की बचत होगी और ज्यादा शिक्षक इस प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।


    17 फरवरी से शुरू हो रही है परीक्षा

    सीबीएसई की 12वीं और दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू हो रही हैं। बोर्ड से भारत और दुनिया के 26 देशों में 31,000 से अधिक स्कूल संबद्ध हैं।

  • लिव-इन रिश्ते में दहेज उत्पीड़न का दावा…SC ने सरकार से मांगी कानूनी स्पष्टता

    लिव-इन रिश्ते में दहेज उत्पीड़न का दावा…SC ने सरकार से मांगी कानूनी स्पष्टता


    नई दिल्ली।
    क्या एक विवाहित व्यक्ति जो अपनी पत्नी के जीवित रहते हुए किसी अन्य महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) में है, उस महिला द्वारा दहेज प्रताड़ना (IPC की धारा 498A) का मामला दर्ज कराया जा सकता है? यह एक ऐसा सवाल है जिस पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court.) ने अब गंभीर कानूनी विचार करने का निर्णय लिया है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (अब भारतीय न्याय संहिता) स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करती है कि केवल एक पत्नी ही अपने पति या उसके रिश्तेदारों के खिलाफ दहेज या क्रूरता की शिकायत दर्ज करा सकती है।

    चूंकि हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत कानूनी रूप से एक व्यक्ति एक ही समय में दो महिलाओं का पति नहीं हो सकता है। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या लिव-इन पार्टनर को कानूनन पत्नी का दर्जा दिया जा सकता है?

    सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ ने एक डॉक्टर लोकेश बी.एच. द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। लोकेश ने फरवरी 2000 में नवीना से शादी की थी। आरोप है कि उन्होंने 2010 में तीर्थ नामक महिला से भी शादी की, जो कानूनी रूप से अवैध है। तीर्थ ने 2016 में लोकेश पर दहेज की मांग को लेकर उसे जलाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। बाद में उसने घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज कराया।

    लोकेश ने तर्क दिया कि तीर्थ के साथ उनका कोई कानूनी वैवाहिक संबंध नहीं है। उन्होंने इस आशय की घोषणा के लिए बेंगलुरु की एक पारिवारिक अदालत में मुकदमा भी दायर किया है, जो लंबित है। इसके अलावा लोकेश के नियोक्ता ने प्रमाणित किया है कि कथित घटना के दिन लोकेश अस्पताल में ड्यूटी पर थे।

    कर्नाटक उच्च न्यायालय ने लोकेश की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रही कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।

    सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को इस मामले में सहयोग करने के लिए कहा है। इसके अलावा, अदालत ने मामले की जटिलता को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता नीना नरिमन को ‘एमिकस क्यूरी’ (अदालत का मित्र) नियुक्त किया है, जो इस कानूनी मुद्दे पर निष्पक्ष राय प्रदान करेंगी।

    याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील संजय नुली ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय ने धारा 498A की व्याख्या करने में गलती की है। उनका तर्क है कि कानून की शब्दावली स्पष्ट रूप से पति और पत्नी का उल्लेख करती है। इसे एक लिव-इन रिलेशनशिप पर लागू नहीं किया जा सकता है। विशेषकर तब जब पुरुष पहले से ही विवाहित हो।

    यदि सुप्रीम कोर्ट लिव-इन पार्टनर को इस धारा के तहत पत्नी मानता है, तो यह वैवाहिक कानूनों की पारंपरिक व्याख्या में एक बड़ा बदलाव होगा।

  • PM मोदी ने बताया – प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम 'सेवा तीर्थ क्यों रखा…. क्या है इसके पीछे का गहरा संदेश?

    PM मोदी ने बताया – प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम 'सेवा तीर्थ क्यों रखा…. क्या है इसके पीछे का गहरा संदेश?


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शुक्रवार को नए ऑफिस का उद्धाटन किया। इसके बाद उन्होंने संबोधन भी दिया। इस दौरान पीएम मोदी ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (Prime Minister Office) का नाम सेवा तीर्थ (Seva Teerth) क्यों रखा गया। इसके साथ ही उन्होंने इसके पीछे के दर्शन और संकल्प के बारे में भी बताया। पीएम मोदी ने कहाकि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। सेवा की भावना ही भारत की आत्मा है। नाम बदलने के पीछे स्वतंत्र भारत की पहचान है। उन्होंने आगे कहाकि सेवा की भावना ही भारत की पहचान है। पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद साउथ ब्लॉक, नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से देश के लिए अनेक निर्णय, नीतियां बनी लेकिन यह भी सच है कि ये इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक के तौर पर बनाई गई थी। इन इमारतों को बनाने का मकसद भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखना था।


    मिलेगा नया आत्मविश्वास

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि आज जब भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है, आज जब भारत अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की नई गाथा लिख रहा है, आज जब भारत नए-नए ट्रेड समझौते कर संभावनाओं के नए दरवाजे खुल रहे हैं। जब देश संतृप्ति के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है तो सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों में आप सबके काम की नई गति और आपका नया आत्मविश्वास देश के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा।


    पुरानी इमारतों पर क्या बोले

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें जहां ब्रिटिश हुकूमत की सोच को लागू करने के लिए बनी थीं। वहीं, आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे नए परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं। यहां से जो फैसले होंगे वह किसी महाराजा की सोच को नहीं 140 करोड़ देशवासियों की सोच को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे। प्रधानमंत्री ने आगे कहाकि इस बदलाव के बीच निश्चित तौर पर पुराने भवन में बिताए गए वर्षों की स्मृतियां हमारे साथ रहेंगी। अलग-अलग समय पर वहां से कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए, वहां से देश को नई दिशा मिली है। वह परिसर, वह इमारत भारत के इतिहास का अमर हिस्सा है इसलिए हमने उस भवन को देश के लिए समर्पित म्यूजियम बनाने का फैसला किया है।


    हमने तय किया कि…

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि 2014 में देश ने तय किया कि गुलामी की मानसिकता अब और नहीं चलेगी। हमने गुलामी की इस मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया, हमने वीरों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया। हमने पुलिस की वीरता को सम्मान देने के लिए पुलिस स्मारक बनाया। रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया। यह सिर्फ नाम बदलना नहीं था, यह सत्ता के मिजाज़ को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास था।

  • एयर इंडिया की एयरबस ने बिना अनुमति भरी उड़ान, DGCA ने ठोका एक करोड़ का जुर्माना

    एयर इंडिया की एयरबस ने बिना अनुमति भरी उड़ान, DGCA ने ठोका एक करोड़ का जुर्माना


    नई दिल्ली।
    एयर इंडिया (Air India) पर डीजीसीए (DGCA) ने एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया (Air India) की एयरबस (Airbus) ने बिना जरूरी परमिशन के उड़ान भरी। ऐसा एक या दो नहीं, बल्कि आठ बार हुआ। डीजीसीए ने इसको बहुत गंभीर किस्म का उल्लंघन माना है। साथ ही लापरवाही के लिए टॉप लेवल मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहराया है। डीजीसीए ने जुर्माना लगाते हुए अपने आदेश में लिखा है कि एयरबस ए320 विमान ने कई सेक्टर्स में उड़ान भरी। इसमें नई दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद की कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी शामिल हैं।

    ऐसा पिछले साल 24 से 25 नवंबर के बीच हुआ। इन उड़ानों के लिए एयर इंडिया ने अनिवार्य एयरवर्दीनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (ARC) नहीं लिया था। एआरसी एक बेहद अहम सर्टिफिकेट है जो सालाना तौर पर डीजीसीए द्वारा जारी किया जाता है। इसके लिए विमान को सभी जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा करना होता है। बिना एआरसी के उड़ान भरना उड़ान के सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।


    डीजीसीए ने माना बेहद गंभीर

    डीजीसीए ने एयर इंडिया के इस उल्लंघन को बेहद गंभीर माना है। एक खबर के मुताबिक इसे एयरलाइन की कैजुअल अप्रोच बताया गया है। जानकारी के मुताबिक डीजीसीए ने कहाकि इस तरह के उल्लंघन को लेकर हम बहुत कड़ी कार्रवाई करते हैं। इसलिए जितनी ज्यादा संभव हो सकती थी, उतनी पेनाल्टी लगाई गई है। जब किसी संस्था पर जुर्माना लगाया जाता है तो जिम्मेदार मैनेजर को नोटिस दी जाती है। डीजीसीए ने शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय की है, और एयर इंडिया के सीईओ कैम्पबेल विल्सन को इस चूक के लिए जिम्मेदार ठहराया है।


    एयर इंडिया ने क्या कहा

    डीजीसीए के आदेश का जवाब देते हुए, एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहाकि एयर इंडिया ने 2025 में स्वेच्छा से रिपोर्ट किए गए एक घटना से संबंधित डीजीसीए आदेश की प्राप्ति को स्वीकार किया है। सभी पहचाने गए गैप्स को तब से संतोषजनक रूप से संबोधित किया गया है, साथ ही प्राधिकरण के साथ साझा किया गया है। एयर इंडिया अपने संचालन की निष्पक्षता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता में अडिग है।

  • पीयूष गोयल बोले… US डील किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित… राहुल गांधी ने झूठी कहानी गढ़ी

    पीयूष गोयल बोले… US डील किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित… राहुल गांधी ने झूठी कहानी गढ़ी


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के आरोपों को पूरी तरह झूठी कहानी करार देते हुए पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने एक बार फिर सुनियोजित तरीके से पूरी तरह बनावटी और झूठी कहानी गढ़ी है। भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के इशारों पर किसानों को गुमराह कर रहे हैं और उनका दावा बेबुनियाद है।

    गोयल ने कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं के इशारों पर चल रहे हैं, जो किसान नेता होने का ढोंग कर रहे हैं, जबकि यह पूरी तरह से बनावटी और बेबुनियादी बातचीत है। अब मैं राहुल गांधी के झूठे दावों की सच्चाई सामने लाता हूं और उन्हें और उनके मित्रों को बेनकाब करता हूं, जो हमारे भोले-भाले, मेहनती अन्नदाताओं को गुमराह कर रहे हैं। मंत्री ने आगे कहा, मोदी सरकार ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Agreement) में किसानों की हितों की पूरी तरह सुरक्षा की है। जब मैं कहता हूं कि पूरी सुरक्षा की गई है, तो मैं इसे रिकॉर्ड पर और पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं।

    उन्होंने कहा, हमने सभी किसानों के हितों की रक्षा की है और यह एक ऐसा समझौता है जो हमारे किसानों, मछुआरों, मेहनती युवाओं, एमएसएमई, स्टार्टअप्स को लाभ पहुंचाएगा। राहुल गांधी, आज आप एक नाटकबाज और झूठे, बेबुनियाद आरोपों और मनगढ़ंत कहानियों को लगातार फैलाने वाले के रूप में पूरी तरह बेनकाब हुए हैं।


    राहुल गांधी ने क्या कहा था?

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भारत के किसानों के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता किसानों की आजीविका के लिए सीधा खतरा है।

    रायबरेली सांसद ने पर लिखा, नरेंद्र सरेंडर मोदी ने भारत के किसानों को धोखा दिया है और किसानों ने इसे समझ लिया है। यह केवल एक व्यापार समझौता नहीं है। यह हमारे अन्नदाताओं की आजीविका पर सीधा हमला है। कांग्रेस नेता ने कहा कि संसद में किसानों के संगठनों के प्रतिनिधियों से हुई बैठक में यह चिंता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। उन्होंने लिखा, आज संसद में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में उनकी चिंताएं स्पष्ट रूप से सामने आईं। महंगाई, बढ़ती लागत और एमएसपी की अनिश्चितता से जूझ रहे किसान अब विदेशी फसलों का सामना करने के लिए तैयार नहीं हैं, जो बड़ी सब्सिडी और यांत्रिक ताकत के साथ आती हैं।