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  • आज से इस कोड के बिना नहीं मिलेगा LPG सिलेंडर…. बुकिंग के नियमों में हुए कई बदलाव

    आज से इस कोड के बिना नहीं मिलेगा LPG सिलेंडर…. बुकिंग के नियमों में हुए कई बदलाव


    नई दिल्ली।
    एलपीजी सिलेंडर (LPG Cylinder) को लेकर लोगों के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आज 1 मई से नियमों में कई बदलाव (Many changes Rules) हो गए हैं। जिसकी वजह से अब एलपीजी सिलेंडर बिना डॉक्यूमेंट के लेना और कठिन हो जाएगा। बता दें, इस बीच कॉमर्शियल गैस सिलेंडर (Commercial gas cylinder) की कीमतों में आज भारी इजाफा किया गया है।

    1 मई से एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियमों में हुआ बदलाव? (LPG Booking rules changed)
    अभी तक आप अपना एलपीजी बुकिंग पासबुक के जरिए भी सिलेंडर पा जाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। बिना ओटीपी के एक भी सिलेंडर नहीं मिल पाएगा। डिस्ट्रीब्यूटर्स DAC नंबर के बिना एलपीजी सिलेंडर नहीं दे पाएंगे। इस नियम को आज से और कड़ा कर दिया गया है।


    एलपीजी बुकिंग कितने दिन में? (LPG booking time)

    1 मई यानी आज से शहरी क्षेत्रों में 21 दिन की जगह 25 दिन पर एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग करवाई जा सकती है। वहीं, गांव में पहले से ही 45 दिन के अंतराल पर एलपीजी सिलेंडर बुक किया जा सकता है। सप्लाई को बेहतर बनाने और गलत उपयोग को रोकने के लिए सरकार ने यह नियम बनाए हैं।


    98% बुकिंग हो रही है ऑनलाइन

    मौजूदा समय में 98% सिलेंडर की बुकिंग ऑनलाइन ही हो रही है। जबकि 94 प्रतिशत डिलीवरी कोड्स के जरिए हो रहा है। इससे कालाबाजारी पर नकेल कसी गई है।


    eKYC हुई एलपीजी सिलेंडर के लिए जरूरी (LPG booking ekyc details)

    अगर आपने अपने एलपीजी पासबुक का eKYC नहीं करवाया है तो ऐसी स्थिति में सिलेंडर नहीं मिलेगा। अब आधार आधारित eKYC करवाना जरूरी हो गया है। बता दें, जिन ग्राहकों ने eKYC नहीं करवाई है उन्हें एलपीजी सिलेंडर बुक करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


    1 मई को बढ़ गए कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के रेट (LPG price today)

    आज दिल्ली में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का रेट 993 रुपये बढ़ गया है। जिसके बाद 19 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर का रेट 3071.50 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, कंपनियों ने घरेलू सिलेंडर की कीमतों में आज कोई भी इजाफा नहीं किया है। आखिरी बार घरेलू एलपीजी सिलेंडर का रेट मार्च में बढ़ाया गया था। उसके बाद से ही दाम स्थिर है।

    युद्ध के बाद एलपीजी की शुरू हुई किल्लत (LPG latest News)
    भारत अपनी एलपीजी जरूरत के लिए पूरी तरह से खाड़ी देशों पर निर्भर था। लेकिन युद्ध ने आपूर्ति पर बुरा असर डाला है। जिसकी वजह से सप्लाई लगभग रुक गई है। सरकार ने घरेलू कंपनियों को एलपीजी प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कहा है। इसके अलावा यूनाइटेड स्टेट से भी एलपीजी मंगवाया जा रहा है। हालांकि, भारत को इसके लिए और पैसे खर्च करने होंगे।

  • पांच राज्यों में चुनाव के बाद काउंटिंग की तैयारी…. केन्द्रों पर त्रिस्तरीय सुरक्षा… QR आधारित फोटो ID होंगे जारी

    पांच राज्यों में चुनाव के बाद काउंटिंग की तैयारी…. केन्द्रों पर त्रिस्तरीय सुरक्षा… QR आधारित फोटो ID होंगे जारी


    नई दिल्ली।
    अभी हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections Five states) में मतों की गिनती के दिन यानी 4 मई को सभी मतगणना केंद्रों (Counting centres) पर चुनाव आयोग (Election Commission.) क्यूआर कोड आधारित फोटो पहचान पत्र (QR-Based Identity Cards) जारी करेगा ताकि किसी अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश को रोका जा सके। चुनाव आयोग की यह अनूठी पहल है और पहली बार व्यापक पैमाने पर लागू किया जाएगा। पांच राज्यों की सभी विधानसभा क्षेत्रों के काउंटिंग सेंटर के अलावा यह व्यवस्था पांच राज्यों की सात असेंबली सीटों पर हुए उपचुनाव में मतगणना केंद्रों पर भी की जाएगी।

    भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने गुरुवार को एक प्रेस नोट जारी कर घोषणा की कि काउंटिंग सेंटर्स पर सुरक्षा को मजबूत करने और अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने के लिए ECINET पर QR कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र प्रणाली शुरू की गई है। आयोग के अनुसार, “काउंटिंग सेंटर्स में किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश की संभावना को खत्म करने के लिए QR कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र मॉड्यूल शुरू किया गया है।”


    पिछले एक साल में 30 से अधिक पहलों का हिस्सा

    यह प्रणाली 4 मई, 2026 को होने वाली मतगणना से लागू की जाएगी। यह असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की विधानसभाओं के आम चुनावों के साथ-साथ पांच राज्यों के सात विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनावों के लिए होगी। ECI ने कहा कि इस प्रणाली का विस्तार भविष्य में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सभी आम चुनावों और उपचुनावों तक भी किया जाएगा। आयोग ने कहा कि यह कदम पिछले एक साल में की गई 30 से अधिक पहलों का हिस्सा है, जिसमें बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) के लिए मानकीकृत QR कोड-आधारित पहचान पत्र शामिल हैं।


    मतगणना केद्रों पर तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था

    आयोग के मुताबिक मतगणना केंद्रों पर पहचान सत्यापन के लिए तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी। पहले और दूसरे स्तर पर, संबंधित निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जारी किए गए फोटो पहचान पत्रों की व्यक्तिगत रूप से जांच की जाएगी। मतगणना कक्ष के पास स्थित तीसरे और सबसे भीतरी सुरक्षा घेरे में, क्यूआर कोड की सफल ‘स्कैनिंग’ के बाद ही कर्मी को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। क्यूआर आधारित पहचान पत्र मतगणना केंद्रों के भीतर प्रवेश करने की अनुमति प्राप्त सभी श्रेणियों के अधिकृत कर्मियों को जारी किए जाएंगे, जिनमें चुनाव अधिकारी, सहायक चुनाव अधिकारी, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी कर्मी, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट और मतगणना एजेंट शामिल हैं।

    केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही QR-आधारित पहचान पत्र
    आयोग ने कहा है कि QR-आधारित पहचान पत्र केवल अधिकृत व्यक्तियों को जारी किए जाएंगे। इनमें रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी कर्मी, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट, मतगणना एजेंट और आयोग द्वारा अनुमति प्राप्त अन्य व्यक्ति शामिल हैं। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि मौजूदा निर्देशों के अनुसार उसके द्वारा जारी किए गए प्राधिकार पत्रों के आधार पर मीडियाकर्मियों को प्रवेश की अनुमति जारी रहेगी। लोकसभा चुनाव-2024 में उस समय विवाद पैदा हो गया था, जब मुंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट पर मतगणना के दौरान एक उम्मीदवार के सहयोगी द्वारा एक ”अधिकृत व्यक्ति” के मोबाइल फोन का ”अनाधिकृत रूप से” उपयोग किया गया था।

  • AAP छोड़ BJP में शामिल हुए सांसद राजिंदर गुप्ता की फैक्ट्री पर छापा, कार्रवाई से मचा हड़कंप

    AAP छोड़ BJP में शामिल हुए सांसद राजिंदर गुप्ता की फैक्ट्री पर छापा, कार्रवाई से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राजिंदर गुप्ता से जुड़ी कंपनी पर पंजाब में बड़ी कार्रवाई हुई है। उनकी कंपनी ट्राइडेंट ग्रुप की धौला स्थित फैक्ट्री पर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने छापेमारी की।

    जानकारी के अनुसार, दोपहर में प्रदूषण विभाग की टीम नौ वाहनों के काफिले के साथ फैक्ट्री परिसर में पहुंची। टीम में लगभग 10 अधिकारी शामिल थे, जो फैक्ट्री के अंदर मौजूद रहकर प्लांट और जरूरी दस्तावेजों की गहन जांच कर रहे हैं। यह कार्रवाई बिना किसी पूर्व सूचना के की गई, जिससे फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, विभाग की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह रूटीन निरीक्षण है या किसी विशेष शिकायत के आधार पर की गई जांच। इस कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। इसे राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

    उधर, राजिंदर गुप्ता के भाजपा में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। चंडीगढ़ में उनके आवास की दीवारों पर “गद्दार” तक लिखा गया था, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर सुरक्षा बढ़ा दी थी। राजिंदर गुप्ता पंजाब के प्रमुख उद्योगपतियों में गिने जाते हैं और पद्मश्री से सम्मानित भी रह चुके हैं। वे पहले आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद थे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए।

  • ओजोन परत की रिकवरी में आ रही बाधा, फीडस्टॉक रसायनों के रिसाव से सुधार में आ सकती है देरी

    ओजोन परत की रिकवरी में आ रही बाधा, फीडस्टॉक रसायनों के रिसाव से सुधार में आ सकती है देरी

    नई दिल्ली। ओजोन परत की सुधार प्रक्रिया को लेकर अब तक मिल रहे सकारात्मक संकेतों के बीच एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने चिंता बढ़ा दी है। Nature Communications में प्रकाशित शोध के अनुसार, औद्योगिक फीडस्टॉक रसायनों का छिपा हुआ रिसाव ओजोन परत की रिकवरी को धीमा कर सकता है। यह रिसाव पहले के अनुमान से कई गुना अधिक पाया गया है, जिससे 1980 के स्तर तक वापसी में अतिरिक्त समय लग सकता है।

    ओजोन परत पृथ्वी के वायुमंडल की एक अहम सुरक्षा परत है, जो सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है। 1980 के दशक में वैज्ञानिकों ने पाया था कि अंटार्कटिका के ऊपर यह परत तेजी से पतली हो रही है, जिसे ओजोन छिद्र के रूप में जाना गया। इसका मुख्य कारण क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसे रसायन थे, जिनका उपयोग रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और एयरोसोल उत्पादों में होता था।

    इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल लागू किया गया, जिसके तहत 197 देशों ने ओजोन को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का संकल्प लिया। वैज्ञानिकों के अनुसार इन प्रयासों का असर दिख रहा है और ओजोन परत धीरे-धीरे सुधर रही है। अनुमान है कि यह 2040 से 2060 के बीच 1980 के स्तर के करीब पहुंच सकती है, जिससे त्वचा कैंसर और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों में कमी आने की संभावना है।

    हालांकि, नए अध्ययन में एक अहम खामी सामने आई है। शोधकर्ताओं ने पाया कि फीडस्टॉक रसायन जिनका उपयोग प्लास्टिक, नॉन-स्टिक कोटिंग्स और अन्य उत्पादों के निर्माण में होता है वास्तव में अपेक्षा से अधिक मात्रा में वातावरण में रिस रहे हैं। पहले जहां इनसे लगभग 0.5 प्रतिशत उत्सर्जन का अनुमान था, वहीं अब यह तीन से चार प्रतिशत तक पाया गया है। यह अतिरिक्त रिसाव ओजोन परत के सुधार की गति को प्रभावित कर रहा है।

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि इस स्थिति पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो ओजोन परत को 1980 के स्तर तक पहुंचने में करीब सात साल की अतिरिक्त देरी हो सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि औद्योगिक रसायनों के उपयोग और उनके उत्सर्जन पर सख्त निगरानी जरूरी है। साथ ही, रासायनिक उद्योग के पास मौजूद कम हानिकारक विकल्पों को अपनाकर इस जोखिम को कम किया जा सकता है।

  • देहरादून कैबिनेट बैठक: विकास कार्यों और भर्तियों में बड़ा सुधार, कुंभ 2027 पर विशेष फोकस

    देहरादून कैबिनेट बैठक: विकास कार्यों और भर्तियों में बड़ा सुधार, कुंभ 2027 पर विशेष फोकस


    नई दिल्ली ।
    देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इस बैठक में कुंभ 2027 की तैयारियों को लेकर विशेष रूप से तेज़ी लाने पर जोर दिया गया, साथ ही विभिन्न विभागों की नीतियों और भर्ती प्रक्रियाओं में अहम बदलावों को मंजूरी दी गई।

    बैठक का सबसे प्रमुख फोकस आने वाले कुंभ मेले की तैयारियों पर रहा। सरकार ने निर्माण कार्यों और विकास परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाने का निर्णय लिया है, जिससे काम तेजी से आगे बढ़ सके। छोटे और बड़े कार्यों की स्वीकृति के लिए अलग-अलग स्तर तय किए गए हैं, ताकि समय की बचत हो और परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें।

    वन विभाग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। वन दरोगा पद के लिए अब शैक्षणिक योग्यता को बढ़ाकर स्नातक कर दिया गया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया और अधिक योग्य उम्मीदवारों पर केंद्रित होगी। इसके साथ ही आयु सीमा में भी संशोधन किया गया है। वन आरक्षी पदों के लिए भी नई आयु सीमा लागू की गई है, जिससे भर्ती मानकों को अपडेट किया जा सके।

    परिवहन विभाग में भी कई अहम निर्णय लिए गए हैं। राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई बसों की खरीद को मंजूरी दी गई है। पहले निर्धारित संख्या में बढ़ोतरी करते हुए अब अधिक बसें खरीदने का फैसला लिया गया है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

    शिक्षा क्षेत्र में विशेष शिक्षा शिक्षक भर्ती नियमों में संशोधन किया गया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके। इसके अलावा संस्कृत शिक्षा सेवा नियमावली को भी औपचारिक रूप दिया गया है, जिससे शिक्षकों की सेवा संरचना और पदोन्नति प्रक्रिया को स्पष्ट किया जा सके।

    खनन क्षेत्र से जुड़े नियमों में भी संशोधन करते हुए रॉयल्टी दरों में बदलाव किया गया है। इससे राज्य के राजस्व में वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया को सरल बनाते हुए कक्षा स्तर के आधार पर अलग-अलग व्यवस्था लागू की गई है।

    इसके साथ ही मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए मधुमक्खी पालन आधारित नई नीति को भी मंजूरी दी गई है। यह नीति वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए नई आजीविका के अवसर पैदा करेगी।

  • बैंकिंग में करियर का सुनहरा मौका, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने निकाली 1865 अप्रेंटिस वैकेंसी

    बैंकिंग में करियर का सुनहरा मौका, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने निकाली 1865 अप्रेंटिस वैकेंसी

    नई दिल्ली । बैंकिंग क्षेत्र में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर सामने आया है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने देशभर में अप्रेंटिस पदों पर बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इस भर्ती के तहत कुल 1865 पदों को भरा जाएगा, जिससे हजारों उम्मीदवारों को बैंकिंग सेक्टर में करियर शुरू करने का मौका मिलेगा।

    इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 19 मई तय की गई है, जिसके बाद कोई भी फॉर्म स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए इच्छुक उम्मीदवारों को समय रहते आवेदन पूरा करने की सलाह दी जा रही है।

    शैक्षणिक योग्यता के अनुसार, आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री होना आवश्यक है। यह डिग्री किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से प्राप्त होनी चाहिए। इसके साथ ही कुछ अन्य पात्रता शर्तें भी निर्धारित की गई हैं, जिन्हें पूरा करना अनिवार्य है।

    उम्र सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 28 वर्ष तय की गई है। आयु की गणना एक निर्धारित तिथि के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को नियमों के अनुसार आयु में छूट भी दी जाएगी।

    चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी। इसमें सबसे पहले ऑनलाइन परीक्षा होगी, इसके बाद स्थानीय भाषा की परीक्षा ली जाएगी और अंतिम चरण में दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इन सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले उम्मीदवारों को चयनित किया जाएगा।

    चयनित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण अवधि के दौरान मासिक स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा, जिसकी राशि कार्यस्थल और पद के अनुसार तय होगी। यह अवसर विशेष रूप से उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है जो बैंकिंग क्षेत्र में अनुभव हासिल करना चाहते हैं।

    आवेदन शुल्क भी श्रेणी के अनुसार अलग-अलग निर्धारित किया गया है। सामान्य और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए शुल्क अधिक रखा गया है, जबकि महिला उम्मीदवारों और आरक्षित वर्ग के लिए यह राशि कम है। भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा।

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है। उम्मीदवारों को पहले संबंधित पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा, इसके बाद बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन फॉर्म भरना होगा। सभी जरूरी जानकारी भरने के बाद आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे और शुल्क का भुगतान करके फॉर्म जमा करना होगा। अंत में भविष्य के उपयोग के लिए आवेदन की एक कॉपी सुरक्षित रखना जरूरी है।

  • हाईटेक सुरक्षा कवच में चलेगी कश्मीर की वंदे भारत ट्रेन, आरपीएफ कमांडो संभालेंगे मोर्चा

    हाईटेक सुरक्षा कवच में चलेगी कश्मीर की वंदे भारत ट्रेन, आरपीएफ कमांडो संभालेंगे मोर्चा

    नई दिल्ली । जम्मू-श्रीनगर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। इस रूट की संवेदनशीलता को देखते हुए अब ट्रेन की सुरक्षा में रेलवे सुरक्षा बल के विशेष कमांडो दस्ते को तैनात किया जाएगा, जो आधुनिक हथियारों और उन्नत सुरक्षा उपकरणों से लैस रहेंगे।

    यह पूरा फैसला इस बात को ध्यान में रखकर लिया गया है कि यह रेल मार्ग रणनीतिक और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जम्मू से कश्मीर घाटी को जोड़ने वाली यह ट्रेन न केवल यात्रियों के लिए तेज और आधुनिक यात्रा का साधन है, बल्कि क्षेत्रीय संपर्क के लिहाज से भी इसकी अहम भूमिका है। ऐसे में इसकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

    तैनात किए जाने वाले कमांडो विशेष रूप से प्रशिक्षित होंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति या खतरे से तुरंत निपटा जा सके। इन सुरक्षा बलों को अत्याधुनिक हथियारों के साथ-साथ निगरानी और संचार से जुड़े आधुनिक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे ट्रेन के भीतर और बाहर दोनों जगह मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार रहेगा।

    सुरक्षा योजना केवल ट्रेन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे रूट पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। खासकर सुरंगों, पुलों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी। स्टेशनों पर भी कड़ी जांच और सतर्कता बढ़ाई जाएगी ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।

    इसके साथ ही सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया गया है, जिससे किसी भी स्थिति में तुरंत और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके। यह समन्वय पूरे सिस्टम को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाता है।

    वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड और आधुनिक ट्रेन के लिए सुरक्षा का यह स्तर जरूरी माना जा रहा है, क्योंकि यात्रियों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल खतरे से बचाव करना नहीं, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा अनुभव देना भी है।

    जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन की सुरक्षा को लेकर उठाया गया यह कदम न केवल एक मजबूत सुरक्षा ढांचे की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि संवेदनशील क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित बलों के जरिए यात्रा को और सुरक्षित बनाया जा रहा है।

  • पीलीभीत में कृषि इतिहास का नया अध्याय: देश का पहला बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र तैयार होगा

    पीलीभीत में कृषि इतिहास का नया अध्याय: देश का पहला बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र तैयार होगा

    नई दिल्ली । पीलीभीत की धरती अब कृषि नवाचार के एक नए अध्याय की गवाह बनने जा रही है, जहां बासमती और जैविक खेती के लिए देश का पहला समर्पित प्रशिक्षण केंद्र विकसित किया जाएगा। यह पहल न केवल क्षेत्रीय किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि पूरे देश के कृषि क्षेत्र में आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में देखी जा रही है।

    इस परियोजना के लिए लगभग 7 एकड़ भूमि का चयन किया गया है, जिसे लंबे समय के लिए उपयोग में लेने की अनुमति दी गई है। इस केंद्र को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह केवल एक प्रशिक्षण स्थल न होकर कृषि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का एक व्यापक केंद्र बन सके। यहां किसानों को बासमती धान की पारंपरिक खेती से लेकर जैविक और उन्नत तकनीकों तक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    इस प्रस्तावित केंद्र में आधुनिक सुविधाओं का समावेश किया जाएगा, जिसमें प्रशिक्षण कक्ष, प्रयोगशालाएं, सम्मेलन स्थल, प्रदर्शन गैलरी और एक विशेष संग्रहालय शामिल होंगे। यहां बासमती की विभिन्न किस्मों और जैविक खेती के तरीकों को वैज्ञानिक तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे किसानों और विद्यार्थियों को वास्तविक अनुभव प्राप्त हो सकेगा।

    इस केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह भारत का पहला ऐसा संस्थान होगा जहां पारंपरिक और जैविक दोनों प्रकार की बासमती खेती को एक साथ सिखाया और समझाया जाएगा। इससे किसानों को न केवल उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि वे पर्यावरण के अनुकूल खेती की ओर भी प्रेरित होंगे।

    इसके अलावा, इस केंद्र को राष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान नेटवर्क से भी जोड़ा जा रहा है, जहां बासमती धान की नई किस्मों का परीक्षण और उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विभिन्न कृषि क्षेत्रों के अनुसार सर्वोत्तम बीजों का विकास किया जा सके, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर हो।

    कृषि क्षेत्र में तकनीक के बढ़ते उपयोग को ध्यान में रखते हुए एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित बासमती धान सर्वे परियोजना भी शुरू की गई है। इस परियोजना के जरिए बड़े पैमाने पर कृषि भूमि का अध्ययन किया जाएगा और लाखों किसानों से जुड़े डेटा का विश्लेषण कर फसल की स्थिति और उत्पादन क्षमता का आकलन किया जाएगा। इससे कृषि योजना और निर्यात रणनीति को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

    यह पूरी योजना भारतीय बासमती को वैश्विक बाजार में और मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। वर्तमान में बासमती चावल अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी खास पहचान रखता है और इसका निर्यात लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यह प्रशिक्षण केंद्र किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर न केवल उत्पादन बढ़ाएगा, बल्कि भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।

  • आईसीएसई-आईएससी परिणाम 2026: छात्राओं ने फिर मारी बाजी, दोनों कक्षाओं में रिकॉर्ड पास प्रतिशत दर्ज

    आईसीएसई-आईएससी परिणाम 2026: छात्राओं ने फिर मारी बाजी, दोनों कक्षाओं में रिकॉर्ड पास प्रतिशत दर्ज

    नई दिल्ली । देशभर के लाखों छात्रों के लिए इंतजार की घड़ी आखिरकार खत्म हो गई है, क्योंकि आईसीएसई और आईएससी बोर्ड के वर्ष 2026 के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। परिणाम जारी होते ही छात्रों और अभिभावकों के बीच उत्साह और राहत का माहौल देखने को मिला। इस बार के नतीजों में एक बार फिर छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सफलता का नया स्तर स्थापित किया है।

    10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं के परिणाम इस बार बेहद प्रभावशाली रहे हैं। 10वीं कक्षा में कुल 99.18 प्रतिशत छात्रों ने सफलता प्राप्त की, जबकि 12वीं कक्षा में 99.13 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। यह आंकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि इस वर्ष की परीक्षाओं में छात्रों ने पूरी मेहनत और तैयारी के साथ भाग लिया।

    लिंग आधारित प्रदर्शन की बात करें तो इस बार भी छात्राओं ने छात्रों की तुलना में बेहतर परिणाम हासिल किए हैं। 10वीं में छात्राओं का पास प्रतिशत 99.46 रहा, जबकि छात्रों का 98.93 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसी तरह 12वीं में भी छात्राओं ने 99.48 प्रतिशत के साथ बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि छात्रों का पास प्रतिशत 98.81 रहा। यह लगातार देखा जा रहा है कि शैक्षणिक प्रदर्शन में छात्राएं लगातार आगे निकल रही हैं।

    इस वर्ष दोनों कक्षाओं में मिलाकर चार लाख से अधिक छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें 10वीं कक्षा के लगभग डेढ़ लाख और 12वीं कक्षा के लगभग ढाई लाख से अधिक छात्र शामिल थे। परीक्षा का आयोजन निर्धारित केंद्रों पर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था, जिसमें छात्रों ने विभिन्न विषयों में अपनी योग्यता का प्रदर्शन किया।

    परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद छात्रों को अपना स्कोरकार्ड प्राप्त करने की सुविधा भी दी गई है। छात्र अपने यूनिक आईडी और अन्य आवश्यक विवरणों की मदद से अपना परिणाम देख सकते हैं और उसे डाउनलोड भी कर सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन माध्यम के साथ-साथ अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    इस बार के परिणामों ने एक बार फिर शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधार और छात्रों की बढ़ती क्षमता को उजागर किया है। शिक्षकों और अभिभावकों ने भी छात्रों की इस उपलब्धि पर खुशी जताई है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

  • बैंक फ्रॉड केस में नया मोड़-RCOM मामले पर कोर्ट में पेश हुई स्टेटस रिपोर्ट, सभी की नजर फैसले पर

    बैंक फ्रॉड केस में नया मोड़-RCOM मामले पर कोर्ट में पेश हुई स्टेटस रिपोर्ट, सभी की नजर फैसले पर

    नई दिल्ली । रिलायंस कम्युनिकेशन से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में कानूनी प्रक्रिया एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। इस केस में जांच कर रही एजेंसियों ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी है, जिसके बाद मामले पर फिर से गंभीर बहस शुरू हो गई है। यह मामला लंबे समय से जांच के दायरे में है और अब अदालत में इसकी सुनवाई तेज हो गई है।

    सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों ने अदालत को जानकारी दी कि उन्होंने अपनी-अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। हालांकि, गिरफ्तारी या आगे की कार्रवाई को लेकर कोई सीधा जवाब देने से बचा गया। एजेंसियों की ओर से यह भी कहा गया कि जांच की प्रक्रिया के तहत सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है और निर्णय तथ्यों के आधार पर ही लिया जाएगा।

    इसी बीच याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि मामले में जिन लोगों को प्रमुख भूमिका में बताया जा रहा है, उनके खिलाफ अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इस मुद्दे पर अदालत में चर्चा के दौरान कई कानूनी बिंदु सामने रखे गए।

    सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि रिपोर्ट को अदालत में औपचारिक रूप से रिकॉर्ड में लिया गया है और मामले को आगे की सुनवाई के लिए निर्धारित किया गया है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सभी पक्षों को सुनने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

    इस पूरे घटनाक्रम ने मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े इस केस पर अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां आगे की कानूनी दिशा तय होने की संभावना है।