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  • हाईकोर्ट की सख्ती के बावजूद सड़कों पर घुमाए गए TMC नेता जहांगीर खान, बंगाल पुलिस की कार्रवाई पर उठा विवाद

    हाईकोर्ट की सख्ती के बावजूद सड़कों पर घुमाए गए TMC नेता जहांगीर खान, बंगाल पुलिस की कार्रवाई पर उठा विवाद


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था और राजनीतिक घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता जहांगीर खान से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। हाल ही में गिरफ्तार किए गए जहांगीर खान को पुलिस द्वारा दक्षिण 24 परगना जिले के फालता क्षेत्र में सार्वजनिक रूप से पैदल ले जाने के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कुछ दिन पहले ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में आरोपियों को सार्वजनिक रूप से घुमाने की प्रथा पर कड़ी टिप्पणी की थी।

    जानकारी के अनुसार, जहांगीर खान को सोमवार को भारत-नेपाल सीमा के निकट उत्तर बंगाल के पानीटंकी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ जबरन वसूली सहित कई गंभीर आरोपों में सात एफआईआर दर्ज होने की बात कही जा रही है। गिरफ्तारी के बाद अदालत ने उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। गुरुवार को सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मी उन्हें फालता और आसपास के इलाकों में पैदल ले जाते दिखाई दे रहे हैं, जिसके बाद इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    जहांगीर खान पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक चर्चित नाम रहे हैं। उन्हें टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee का करीबी माना जाता है। विधानसभा उपचुनाव के दौरान भी उनका नाम लगातार चर्चा में रहा था। बताया जाता है कि मतदान से पहले वह क्षेत्र से गायब हो गए थे और उसके बाद से उनके खिलाफ विभिन्न मामलों की जांच जारी थी।

    इस मामले ने इसलिए भी ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने आरोपियों को सार्वजनिक रूप से घुमाने के मामलों पर पश्चिम बंगाल पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा था कि पुलिस को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार अवश्य है, लेकिन उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित या बदनाम करने का अधिकार नहीं है। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया था कि ऐसी कार्रवाइयों को संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में परखा जाना चाहिए।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में पुलिस को कुछ विशेष परिस्थितियों में ही कड़े नियंत्रण या हथकड़ी के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। कानून का उद्देश्य सुरक्षा और जांच सुनिश्चित करना है, न कि किसी आरोपी को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना। यही कारण है कि आरोपी को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की घटनाएं अक्सर न्यायिक समीक्षा और मानवाधिकार संबंधी बहस का विषय बन जाती हैं।

    देश के अन्य राज्यों में भी इस तरह के मामलों पर अदालतें सख्त रुख अपना चुकी हैं। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय और राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी पूर्व में ऐसी घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि किसी भी आरोपी के सम्मान और गरिमा के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए, चाहे उसके खिलाफ आरोप कितने भी गंभीर क्यों न हों।

    फिलहाल जहांगीर खान का मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति और पुलिस प्रशासन दोनों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच जारी है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की कार्रवाई को लेकर कानूनी और संवैधानिक प्रश्न भी उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में अदालत और प्रशासन की प्रतिक्रिया इस मामले की दिशा तय कर सकती है।

  • TMC में बगावत और गहराई: काकोली घोष ने ऋतब्रत बनर्जी से बनाई दूरी, NDA समर्थन के दावे से बढ़ी सियासी हलचल

    TMC में बगावत और गहराई: काकोली घोष ने ऋतब्रत बनर्जी से बनाई दूरी, NDA समर्थन के दावे से बढ़ी सियासी हलचल


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। पार्टी के भीतर उभरे बागी नेताओं के बीच भी रणनीतिक मतभेद सामने आने लगे हैं। लोकसभा में बागी सांसदों के कथित गुट का नेतृत्व करने का दावा कर रहीं टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका बंगाल विधानसभा में बागी गुट का नेतृत्व कर रहे ऋतब्रत बनर्जी से कोई संबंध नहीं है।

    काकोली घोष दस्तीदार का यह बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी के भीतर असंतोष और संभावित टूट की चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। हाल ही में राज्यसभा के कुछ सदस्यों के इस्तीफों और पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों ने राजनीतिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दिया है। इसी बीच काकोली ने दावा किया कि लोकसभा में उनके साथ कई सांसद खड़े हैं और वे बंगाल के हितों के लिए एक अलग राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    मीडिया से बातचीत में काकोली ने कहा कि जब उन्होंने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाई थी, तब वे अकेली थीं, लेकिन अब कई सांसद उनके साथ आ चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऋतब्रत बनर्जी विधानसभा की राजनीति में सक्रिय हैं, जबकि उनका संघर्ष संसद के स्तर पर है। इस कारण दोनों की राजनीतिक रणनीति और प्राथमिकताएं अलग हैं।

    टीएमसी के भीतर जारी इस घटनाक्रम में एक बड़ा विरोधाभास भी सामने आया है। जहां ऋतब्रत बनर्जी खुद को राज्य में भाजपा के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं काकोली घोष का दावा है कि उनका गुट केंद्र की एनडीए सरकार को समर्थन देने के पक्ष में है। यही कारण है कि दोनों नेताओं के बीच दूरी और अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगी है।

    काकोली घोष ने लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर कल्याण बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उनके अनुसार संसद के भीतर महिलाओं के प्रति कथित व्यवहार को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई है। काकोली ने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में कल्याण बनर्जी के साथ राजनीतिक रूप से नहीं जुड़ सकतीं।

    दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी ने काकोली के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है और वे इस तरह के विवादों में पड़ने से बचना चाहते हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि दोनों गुट फिलहाल अपने-अपने राजनीतिक रास्तों पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

    सबसे बड़ा विवाद काकोली घोष के उस दावे को लेकर है जिसमें उन्होंने कहा कि टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग गुट को मान्यता दिलाने और एनडीए सरकार को समर्थन देने के लिए पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, स्पीकर कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।

    इतना ही नहीं, जिन सांसदों के नाम कथित रूप से बागी गुट में शामिल बताए जा रहे हैं, उनमें से कुछ ने सार्वजनिक रूप से इन दावों का खंडन भी किया है। आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वे पूरी तरह टीएमसी और ममता बनर्जी के साथ हैं। वहीं जयनगर से सांसद प्रतिमा मंडल ने भी ऐसी खबरों को अफवाह बताते हुए चुनौती दी कि यदि कोई पत्र मौजूद है तो उसे सार्वजनिक किया जाए।

    इस बीच दिल्ली में केंद्रीय मंत्री के आवास पर कथित रूप से हुई एक बैठक की चर्चाओं ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। हालांकि बैठक में शामिल नेताओं और वहां हुई चर्चाओं को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी काकोली घोष का दावा है कि उनके साथ सांसदों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कई अन्य नेता भी संपर्क में हैं।

    पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के भीतर बढ़ती यह हलचल आने वाले दिनों में राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर असर डाल सकती है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व इस चुनौती का सामना किस तरह करता है और बागी गुट अपने दावों को किस हद तक साबित कर पाता है।

  • UP: फिरोजाबाद में स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव… RSS चीफ मोहन भागवत भी ट्रेन में थे

    UP: फिरोजाबाद में स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव… RSS चीफ मोहन भागवत भी ट्रेन में थे


    नई दिल्ली।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फिरोजाबाद जिले (Firozabad district) में गुरुवार की देर शाम लखनऊ-नई दिल्ली स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस (Lucknow-New Delhi Swarna Shatabdi Express) पर कुछ अज्ञात असामाजिक तत्वों ने ताबड़तोड़ पथराव कर दिया। यह घटना उस समय बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल हो गई जब सुरक्षा एजेंसियों को पता चला कि इसी ट्रेन के प्रभावित कोच में आरएसएस प्रमुख (सरसंघचालक) मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) भी सफर कर रहे थे। राहत की बात यह है कि इस घटना में मोहन भागवत पूरी तरह सुरक्षित हैं और ट्रेन में सवार किसी अन्य यात्री को भी कोई चोट नहीं आई है। सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) और उत्तर प्रदेश पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना गुरुवार शाम करीब 7.15 से 7.20 बजे के बीच हुई।

    ट्रेन जब कानपुर से दिल्ली की ओर जा रही थी, तब फिरोजाबाद रेल खंड के मक्खनपुर स्टेशन को पार करने के बाद रसूलपुर और दक्षिण थाना क्षेत्र की सीमा पर पेमेश्वर गेट के पास अचानक ट्रेन पर पत्थर फेंके गए। एक भारी पत्थर सीधे एग्जीक्यूटिव क्लास के E-1 कोच की खिड़की से टकराया। पत्थर लगने से सीट संख्या 50 के पास का बाहरी शीशा पूरी तरह चटक गया। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, मोहन भागवत इसी कोच की सीट नंबर 39 और 40 पर सवार थे। वे बोगी के दूसरी तरफ बैठे होने के कारण मलबे और सीधे प्रहार से पूरी तरह सुरक्षित रहे।


    टूंडला जंक्शन पर हाई-अलर्ट, 7 मिनट रुकी ट्रेन

    हमले के तुरंत बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल को देखते हुए ट्रेन को बीच रास्ते में कहीं भी नहीं रोका गया और सीधे अगले बड़े स्टेशन टूंडला जंक्शन के लिए रवाना किया गया। शाम 7.34 बजे जैसे ही शताब्दी एक्सप्रेस टूंडला जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर पहुंची, वहां पहले से मौजूद रेलवे सुरक्षा बल (RPF), GRP और स्थानीय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रेन को चारों तरफ से सुरक्षा घेरे में ले लिया। कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण संघ प्रमुख को ट्रेन से नीचे नहीं उतारा गया, बल्कि अधिकारियों ने बोगी के भीतर जाकर ही उनका हालचाल जाना। सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ट्रेन को शाम 7.41 बजे दिल्ली के लिए रवाना कर दिया गया, जो रात 10.13 बजे सुरक्षित नई दिल्ली पहुंची।


    सीसीटीवी से 3 किशोर चिह्नित, एक संदिग्ध हिरासत में

    घटना की गंभीरता को देखते हुए आगरा जोन के ADG एस.के. भगत, आगरा रेंज के DIG शैलेंद्र पांडे और फिरोजाबाद के SSP आदित्य लांग्हे भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। SSP आदित्य लांग्हे ने बताया कि इस मामले में RPF की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ रसूलपुर थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। रेलवे ट्रैक के आसपास के करीब 150 सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद रात करीब 12 बजे तीन किशोरों को चिह्नित किया गया है। फिलहाल पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ जारी है।


    पथराव के लिए बदनाम है यह इलाका

    पुलिस अधिकारियों ने स्वीकार किया कि फिरोजाबाद का यह विशेष रेल खंड पहले भी ट्रेनों पर पथराव की घटनाओं के लिए बदनाम रहा है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि SOG, सर्विलांस और चार थानों की संयुक्त टीमें आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं और इस तरह की हरकतों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

  • राज्यसभा चुनावः 27 सीटों में से 24 का फैसला निर्विरोध… 19 पर NDA और 5 पर कांग्रेस की जीत

    राज्यसभा चुनावः 27 सीटों में से 24 का फैसला निर्विरोध… 19 पर NDA और 5 पर कांग्रेस की जीत


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) और पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा (Pawan Khera) के अलावा भाजपा नेता सतीश पूनिया (Satish Poonia) और तरुण चुघ (Tarun Chugh) सहित 24 उम्मीदवार गुरुवार को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। राज्यसभा की 27 सीटों में से 24 सीटों का फैसला निर्विरोध हो गया। इनमें 19 सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए, जबकि शेष पांच सीटें कांग्रेस के खाते में गईं।


    इन सीटों पर होगा चुनाव

    झारखंड की दो सीटों पर, जहां कड़ा मुकाबला होने की संभावना है, तथा मिजोरम की एक सीट पर चुनाव 18 जून को कराया जाएगा। दस राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के चुनाव तथा महाराष्ट्र, ओडिशा और तमिलनाडु की एक-एक सीट पर उपचुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच गुरुवार को की गई। निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए सभी उम्मीदवारों को संबंधित निर्वाचन अधिकारियों ने जीत का प्रमाण-पत्र सौंप दिया।


    रोमांचक होगा मुकाबला

    झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव कराया जाएगा, जहां तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें झामुमो के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी शामिल हैं। नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के निदेशक हैं और उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है। झारखंड विधानसभा में INDIA गठबंधन के 56 विधायक हैं और जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 28 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी।

    वहीं, भाजपा के पास 21 विधायक हैं। इसके अलावा नीतीश कुमार की पार्टी जद(यू), लोजपा (रामविलास) और ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन का एक-एक विधायक है। मिजोरम से एकमात्र राज्यसभा सीट के चुनाव के लिए, सत्तारूढ़ ज़ोरम पीपल्स मूवमेंट (JPM) के प्रवक्ता के लालतलुआंगकिमा और मुख्य विपक्षी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) से ज़ोथानसांगी हमार चुनावी मैदान में हैं।

    MP में हुआ बड़ा खेला
    मध्यप्रदेश में राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में भाजपा के तीनों उम्मीदवारों तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्वाचन अधिकारी ने निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया।

    कांग्रेस अध्यक्ष खरगे समेत चार उम्मीदवारों को कर्नाटक से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। इनमें एक भाजपा उम्मीदवार है। खरगे के अलावा, अन्य नवनिर्वाचित सदस्यों में कांग्रेस सचिव मंसूर अली खान, खेड़ा और भाजपा के एम नागराज शामिल हैं। राज्य से मौजूदा चार राज्यसभा सदस्यों इरन्ना कडाडी और नारायण कोरागाप्पा (दोनों भाजपा से), कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खरगे और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी देवेगौड़ा का कार्यकाल 25 जून को खत्म हो रहा है और इन रिक्त पदों को भरने के लिए चुनाव की घोषणा की गई थी।


    अन्य राज्यों का हाल

    राज्यसभा चुनाव के इस दौर के साथ ही, संसद में देवेगौड़ा की पांच दशकों से ज्यादा लंबी पारी खत्म हो जाएगी। गुजरात से चार सीट के लिए सत्तारूढ़ भाजपा के सभी चारों उम्मीदवारों को निर्वाचित घोषित कर दिया गया। इनमें राजूभाई शुक्ला, मानसिंह परमार, मुकेशभाई राठवा और जितेंद्र कंजारिया शामिल हैं।

    आंध्र प्रदेश से NDA के चारों उम्मीदवार राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिए गए। निर्वाचित उम्मीदवारों में तीन तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और एक जनसेना से है। निर्वाचन अधिकारी आर वनिता रानी ने बश्याम रामकृष्ण, लिंगमनेनी रमेश, सी विजय और सना सतीश बाबू के उच्च सदन के लिए निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा की। रामकृष्ण, विजय और बाबू तेदेपा से हैं, जबकि रमेश जनसेना से हैं। विजय, आंध्र प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सी अय्यन्नापतरुदू के पुत्र हैं।

    राजस्थान से भाजपा के दो और कांग्रेस के एक उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। निर्वाचन अधिकारी ने भाजपा के सतीश पूनिया और अलका गुर्जर तथा कांग्रेस के नीरज डांगी को संसद के उच्च सदन के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया।

    नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जेम्स के संगमा मेघालय से राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के भाई जेम्स के संगमा को उच्च सदन के द्विवार्षिक चुनाव के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया, क्योंकि मुकाबले में कोई अन्य उम्मीदवार नहीं था। वानवेइरॉय खरलुखी का कार्यकाल पूरा होने के बाद राज्यसभा की सीट खाली हो गई थी।

    मणिपुर में, भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष अधिकारीमायुम शारदा देवी को राज्य से एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। भाजपा के वरिष्ठ नेता ताई तागाक अरुणाचल प्रदेश से एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के राजेंद्र जैन उपचुनाव में महाराष्ट्र से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।

    ओडिशा में, भाजपा उम्मीदवार देवाशीष सामंतराय को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। बीजू जनता दल (BJD) छोड़ने और संसद के उच्च सदन के सदस्य के रूप में इस्तीफा देने के बाद 26 मई को भाजपा में शामिल हुए सामंतराय इस उपचुनाव में एकमात्र उम्मीदवार थे। तमिलनाडु से कांग्रेस उम्मीदवार प्रवीण चक्रवर्ती को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।

    अन्नाद्रमुक नेता सी षणमुगम ने अपना छह वर्षीय कार्यकाल 2028 में समाप्त होने से पहले ही सात मई को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। वह वर्ष 2022 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के समर्थन से चक्रवर्ती ने नामांकन पत्र दाखिल किया था। नौ जून को अधिकारियों ने उनके नामांकन को वैध घोषित कर दिया, जबकि 12 निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए।

  • दिल्ली-NCR में तेज आंधी और झमाझम बारिश से कूल-कूल हुआ मौसम…. आज कई राज्यों में अलर्ट

    दिल्ली-NCR में तेज आंधी और झमाझम बारिश से कूल-कूल हुआ मौसम…. आज कई राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) और एनसीआर (NCR) में गुरुवार रात तेज आंधी, गरज-चमक और बारिश (Strong Winds, Thunderstorms Rain) के साथ मौसम ने अचानक करवट ले ली. दिनभर की भीषण गर्मी (Scorching heat) और उमस के बाद आई बारिश ने लोगों को राहत दी, लेकिन तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रेड अलर्ट जारी कर दिया।

    दिल्ली के कई इलाकों में देर रात तेज हवाएं चलीं, आसमान में घने बादल छा गए और बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों तक गरज-चमक के साथ बारिश जारी रह सकती है. इस दौरान 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और उनके झोंके 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है.

    IMD ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने, कमजोर ढांचों और पेड़ों से दूर रहने तथा खुले इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी है. विभाग के मुताबिक रेड अलर्ट का मतलब है कि मौसम की स्थिति जान-माल के लिए खतरा पैदा कर सकती है और तत्काल सावधानी बरतना जरूरी है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पाकिस्तान और उससे सटे क्षेत्रों में बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर वायुमंडलीय अस्थिरता बढ़ी है. इसी वजह से दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में मौसम तेजी से बदल रहा है.


    दिल्ली समेत इन राज्यों में आज भी बारिश

    शुक्रवार को भी उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम सक्रिय रहेगा. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तर राजस्थान में गरज-चमक, तेज हवाओं और धूल भरी आंधी की संभावना है. वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

    दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. केरल, तटीय कर्नाटक, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, सिक्किम और पश्चिमी असम में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है।

    हालांकि बारिश के बावजूद राजस्थान और विदर्भ के कुछ हिस्सों में लू का असर जारी रह सकता है. गुरुवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि उमस के कारण महसूस किया जाने वाला तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में बादल और बारिश के कारण तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।

  • उद्योग-व्यावसायिक यूजर्स अब पंपों से नहीं खरीद सकेंगे पेट्रोल-डीजल…. सरकार ने 90 दिन के लिए लगी रोक

    उद्योग-व्यावसायिक यूजर्स अब पंपों से नहीं खरीद सकेंगे पेट्रोल-डीजल…. सरकार ने 90 दिन के लिए लगी रोक


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब औद्योगिक और व्यावसायिक (Industrial and Commercial Users) संस्थान पेट्रोल पंपों (Petrol pumps) से पेट्रोल-डीजल (Petrol and Diesel ) नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें अपनी जरूरत का तेल थोक बिक्री केंद्रों से ही लेना होगा। यह पाबंदी 90 दिनों तक लागू रहेगी। सरकार ने यह कदम तेल की बढ़ती मांग को देखते हुए उठाया है।

    दरअसल, पेट्रोल पंप और थोक बाजार की कीमतों में बड़ा अंतर आ गया है। दिल्ली में पेट्रोल पंप पर डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं थोक ग्राहकों के लिए इसकी कीमत 134.50 रुपये है। इस भारी अंतर की वजह से बड़े ग्राहक पेट्रोल पंपों से तेल खरीदने लगे थे। इससे देश के कुछ हिस्सों में डीजल की मांग असामान्य रूप से बढ़ गई थी।

    सरकारी तेल कंपनियों ने आम लोगों को महंगाई से बचाने के लिए पेट्रोल पंपों पर दाम स्थिर रखे हैं। पश्चिम एशिया के संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हुआ है। टेलीकॉम टावर और बिजली बनाने वाली कंपनियों जैसे थोक ग्राहकों को बाजार की पूरी कीमत चुकानी पड़ती है। इसी वजह से वे सस्ता तेल लेने के लिए पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे थे।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 11 जून को नया आदेश जारी किया। इस आदेश का नाम ‘मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (रिटेल आउटलेट के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026’ है। सरकार ने कहा कि दुनिया के कुछ हिस्सों में जारी तनाव से तेल की सप्लाई और जहाजों के आने-जाने पर बुरा असर पड़ा है। इससे पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

    नए नियमों के मुताबिक, पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री केवल वाहनों की टंकी या मान्यता प्राप्त कंटेनरों में ही होगी। एक ग्राहक या वाहन एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही खरीद पाएगा। इस तेल को दोबारा बेचना पूरी तरह मना है। सरकार का मानना है कि बड़े ग्राहकों की भीड़ से आम जनता के लिए तेल की कमी हो सकती है। इससे जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

    तेल कंपनियों और राज्य सरकारों को इन नियमों को सख्ती से लागू करने को कहा गया है। जमाखोरी, कालाबाजारी और तेल की हेराफेरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। यह कार्रवाई ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ के तहत की जाएगी। सरकार जरूरत पड़ने पर किसी खास ग्राहक या क्षेत्र को इन नियमों से छूट दे सकती है। यह पाबंदी 90 दिनों के बाद फिर से बढ़ाई जा सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर में तेल की सही और बराबर सप्लाई सुनिश्चित करना है।

  • कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव….PM मोदी एक माह में दूसरी बार मिले CM विजय

    कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव….PM मोदी एक माह में दूसरी बार मिले CM विजय


    नई दिल्ली।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) की राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय (New Chief Minister C. Joseph Vijay) गुरुवार को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में शामिल हुए। सीएम विजय का यह कदम पूर्ववर्ती द्रमुक (DMK) सरकार के रुख से बिल्कुल अलग है जो अक्सर केंद्र सरकार के साथ टकराव की नीति अपनाती रही थी।

    नीति आयोग की इस अहम बैठक के बाद मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से अलग से मुलाकात भी की। एक महीने से भी कम समय में प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री की यह दूसरी मुलाकात है। पिछले महीने पदभार संभालने के तुरंत बाद विजय ने 27 मई को दिल्ली जाकर पीएम मोदी से मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने राज्य की कल्याणकारी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता, प्रमुख विकास पहलों को मंजूरी और संवेदनशील मेकेदातू जल विवाद में केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की थी। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिलकर तमिलनाडु के लिए अधिक बजटीय सहायता का भी अनुरोध किया था।


    नीति आयोग की बैठक में गूंजा NEET का मुद्दा

    बैठक में शामिल होने के साथ ही मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात मजबूती से रखी। उन्होंने चिकित्सा और दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा NEET का तमिलनाडु की ओर से विरोध दोहराया। विजय ने तर्क दिया कि इस परीक्षा ने ग्रामीण पृष्ठभूमि और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों के भविष्य पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव डाला है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि तमिलनाडु को एमबीबीएस (MBBS), बीडीएस (BDS) और आयुष (AYUSH) पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे की सभी सीटों को केवल कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर भरने की अनुमति दी जाए।

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने भले ही भाजपा को अपनी पार्टी का वैचारिक दुश्मन बताया था, लेकिन सत्ता संभालने के बाद उनके आचरण में केंद्र के प्रति एक व्यावहारिक और परिपक्व दृष्टिकोण दिखाई दे रहा है।


    BJP पर हमला करने से परहेज

    जहां कई विपक्षी नेताओं ने नीट-यूजी परीक्षा विवाद को लेकर सीधे तौर पर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को निशाना बनाया, वहीं विजय ने केंद्र पर सीधा हमला करने के बजाय खुद को परीक्षा प्रणाली की कमियों तक ही सीमित रखा। उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा प्रणाली में खामियों और संरचनात्मक कमियों का पुख्ता सबूत बताया। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री के रूप में तमिलनाडु विधानसभा में अपने पहले भाषण में भी विजय ने भाजपा या केंद्र सरकार की आलोचना करने से परहेज किया था।


    स्टालिन के रुख से बिल्कुल जुदा

    विजय का यह रुख उनके पूर्ववर्ती एमके स्टालिन से बिल्कुल उलट है। स्टालिन ने यह आरोप लगाते हुए लगातार तीन नीति आयोग की बैठकों का बहिष्कार किया था कि केंद्र सरकार द्वारा तमिलनाडु के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।

  • बिहार में शराबबंदी के बावजूद बढ़े शराब सेवन के मामले, NDPS मामलों में 150% उछाल ने बढ़ाई चिंता

    बिहार में शराबबंदी के बावजूद बढ़े शराब सेवन के मामले, NDPS मामलों में 150% उछाल ने बढ़ाई चिंता


    नई दिल्ली। बिहार में वर्ष 2016 में लागू की गई पूर्ण शराबबंदी को सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस पहल का विशेष रूप से महिलाओं ने स्वागत किया था, क्योंकि इससे घरेलू हिंसा, आर्थिक नुकसान और शराब की लत से जुड़ी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि, आठ वर्ष बाद सामने आए आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।

    शराबबंदी के बावजूद बढ़े शराब सेवन के मामले
    भारत सरकार के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में 15 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 16.5 प्रतिशत पुरुषों ने शराब सेवन की बात स्वीकार की है। यह आंकड़ा पिछले सर्वे NFHS-5 (2019-21) के 15.4 प्रतिशत की तुलना में अधिक है। इतना ही नहीं, 0.4 प्रतिशत महिलाओं ने भी शराब पीने की बात मानी है। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि शराबबंदी के बावजूद शराब सेवन पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाया है।

    ग्रामीण इलाकों में अधिक प्रभावहीन दिखी शराबबंदी
    सर्वे के मुताबिक ग्रामीण बिहार में 17.1 प्रतिशत पुरुष शराब का सेवन करते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 12.8 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का मानना है कि गांवों में अवैध शराब की उपलब्धता और निगरानी की सीमित व्यवस्था के कारण प्रतिबंध का असर अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है।

    शराब की जगह नशीली दवाओं की ओर बढ़ा रुझान
    विशेषज्ञों के अनुसार शराबबंदी के बाद नशे के आदी लोगों का एक वर्ग अन्य विकल्पों की ओर मुड़ गया। पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के चिकित्सकों ने भी नशीली दवाओं, नींद की गोलियों और फार्मास्यूटिकल उत्पादों के दुरुपयोग में वृद्धि की ओर संकेत किया है।

    हाल के वर्षों में पुलिस ने कोडीन युक्त कफ सिरप की बड़ी खेपें भी जब्त की हैं। कोडीन का अधिक मात्रा में सेवन नशे का प्रभाव पैदा करता है और इसे शराब के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

    चार साल में NDPS मामलों में 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी
    राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, नशीले पदार्थों और मन:प्रभावी दवाओं से जुड़े अपराधों के लिए लागू NDPS अधिनियम के तहत बिहार में दर्ज मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है।

    वर्ष 2020 में जहां ऐसे 964 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 2,411 तक पहुंच गई। यानी चार वर्षों में करीब 150 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    आंकड़े उठा रहे हैं बड़े सवाल
    शराबबंदी लागू होने के समय उम्मीद की गई थी कि इससे नशे की प्रवृत्ति में कमी आएगी, परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और सामाजिक समस्याओं पर नियंत्रण मिलेगा। लेकिन हालिया आंकड़े बताते हैं कि शराब सेवन पूरी तरह नहीं रुका और नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    NFHS और NCRB के आंकड़े मिलकर यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या केवल प्रतिबंध लगाने से नशे की समस्या का स्थायी समाधान संभव है, या इसके लिए जागरूकता, पुनर्वास और प्रभावी निगरानी जैसे व्यापक उपायों की भी आवश्यकता है।

  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ कानूनी जांच की मांग, चुनावी दस्तावेजों में वित्तीय जानकारी छिपाने का आरोप

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ कानूनी जांच की मांग, चुनावी दस्तावेजों में वित्तीय जानकारी छिपाने का आरोप

    नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मल्लिकार्जुन खरगे एक नए विवाद के केंद्र में आ गए हैं। उनके खिलाफ चुनावी हलफनामे में कथित रूप से महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारी का खुलासा नहीं करने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए चुनावी दस्तावेजों में एक ट्रस्ट से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्तियों का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे चुनावी पारदर्शिता और वैधानिक दायित्वों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

    शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश कल्लाहल्ली द्वारा दर्ज कराई गई है। उनका आरोप है कि कलबुर्गी स्थित सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट, जिसकी स्थापना मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा की गई थी, उससे संबंधित वित्तीय विवरण चुनावी हलफनामे में शामिल नहीं किए गए। शिकायत के अनुसार ट्रस्ट की कुल परिसंपत्तियां 31 मार्च 2023 तक लगभग 36.86 करोड़ रुपये आंकी गई थीं, लेकिन इनका उल्लेख चुनावी दस्तावेजों में नहीं किया गया।

    शिकायतकर्ता का कहना है कि चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अपनी वित्तीय स्थिति, संपत्तियों और संभावित हितों से जुड़ी जानकारियां स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। उनका आरोप है कि ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय हितों और उससे संबंधित अन्य महत्वपूर्ण विवरणों को सार्वजनिक न करना चुनावी पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत माना जा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने मामले की विस्तृत जांच की मांग की है।

    मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से कानूनी समीक्षा कराए जाने की मांग भी की गई है। शिकायत में ट्रस्ट के ट्रस्टी रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट, आयकर दस्तावेजों तथा अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच कराने का आग्रह किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन दस्तावेजों की पड़ताल से यह स्पष्ट हो सकेगा कि चुनावी हलफनामे में आवश्यक जानकारियां पूरी तरह प्रस्तुत की गई थीं या नहीं।

    शिकायत में चुनावी पारदर्शिता से जुड़े कानूनी प्रावधानों और विभिन्न न्यायिक निर्णयों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि यदि किसी उम्मीदवार द्वारा जानबूझकर अथवा अनजाने में भी महत्वपूर्ण जानकारी छूट जाती है, तो उसकी तथ्यात्मक जांच की जानी चाहिए। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए चुनावी घोषणाओं की सत्यता और पूर्णता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

    फिलहाल यह मामला शिकायत के स्तर पर है और संबंधित प्राधिकारियों द्वारा इसकी समीक्षा किए जाने की मांग की गई है। अभी तक इस संबंध में किसी प्रकार का आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, मल्लिकार्जुन खरगे या कांग्रेस पार्टी की ओर से भी इस विषय पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। ऐसे में आगे की प्रक्रिया और संभावित जांच के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

    राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चुनावी हलफनामों में दी जाने वाली जानकारी की पारदर्शिता लंबे समय से सार्वजनिक विमर्श का विषय रही है। यदि मामले में औपचारिक जांच आगे बढ़ती है तो संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर ही यह तय होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सत्यता है और क्या किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता बनती है।

  • एनडीए में शामिल होने की खबरों को किया खारिज, शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा- दीदी के साथ खड़ा हूं और रहूंगा

    एनडीए में शामिल होने की खबरों को किया खारिज, शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा- दीदी के साथ खड़ा हूं और रहूंगा

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसदों के संभावित राजनीतिक रुख को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पार्टी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने उन अटकलों को सिरे से खारिज किया है जिनमें उन्हें पार्टी के कथित बागी सांसदों की सूची में शामिल बताया जा रहा था। सिन्हा ने साफ कहा कि वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं और उनका साथ छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

    राजनीतिक गलियारों में पिछले कुछ दिनों से ऐसी चर्चाएं तेज थीं कि तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और वे अपना राजनीतिक भविष्य किसी नए समीकरण के साथ जोड़ सकते हैं। इसी बीच कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि पार्टी के कई सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अलग राजनीतिक रुख अपनाने की इच्छा जताई है। इन चर्चाओं में शत्रुघ्न सिन्हा का नाम भी सामने आया था।

    हालांकि शत्रुघ्न सिन्हा ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने उनके जीवन और राजनीतिक सफर के कठिन दौर में उनका साथ दिया था। ऐसे में उनके प्रति उनकी प्रतिबद्धता और सम्मान हमेशा बना रहेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी प्रकार की बगावत या दल बदल से जुड़े नहीं हैं और पार्टी नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं।

    सूत्रों के अनुसार भी ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है कि शत्रुघ्न सिन्हा ने किसी पत्र या प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हों। उनके करीबी लोगों का कहना है कि उनके नाम को लेकर जो दावे किए गए, वे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर काफी हद तक विराम लग गया है।

    दरअसल हाल के दिनों में शत्रुघ्न सिन्हा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक रूप से शुभकामनाएं देने के बाद राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला था। प्रधानमंत्री के लगातार लंबे कार्यकाल को लेकर दिए गए उनके संदेश को कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने अलग नजरिए से देखा था। हालांकि अब स्वयं सिन्हा ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी नेता को बधाई देना राजनीतिक निष्ठा बदलने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

    शत्रुघ्न सिन्हा वर्तमान में पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने हालिया लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी। फिल्म जगत से राजनीति में आए सिन्हा लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति का चर्चित चेहरा रहे हैं और विभिन्न दलों के नेताओं के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध भी रहे हैं।

    इस बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में राज्यसभा स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी देखने को मिले हैं। हाल के दिनों में कुछ नेताओं के इस्तीफों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज किया है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि संगठन मजबूत है और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है।

    शत्रुघ्न सिन्हा के ताजा बयान को तृणमूल कांग्रेस के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। उनके स्पष्ट रुख ने पार्टी के भीतर संभावित टूट या बड़े स्तर पर असंतोष की चर्चाओं को फिलहाल कमजोर कर दिया है। आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में घटनाक्रम किस दिशा में आगे बढ़ते हैं, इस पर राजनीतिक विश्लेषकों और दलों की नजर बनी रहेगी।