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  • नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर से हट सकती है 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद, वक्फ बोर्ड में चिंता की लहर

    नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर से हट सकती है 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद, वक्फ बोर्ड में चिंता की लहर


    नई दिल्ली। केंद्रीय सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर में मौजूद 100 साल पुरानी ‘कदीमी मस्जिद’ के भविष्य को लेकर संशय बढ़ गया है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज किए जाने और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा हाल ही में जारी टेंडर के बाद मस्जिद को हटाए जाने की आशंका उठ रही है। इससे पहले केंद्र सरकार ने मस्जिद की सुरक्षा का भरोसा दिया था।

    अदालत में पिछली स्थिति
    2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि बोर्ड पुनः तब कोर्ट आ सकता है जब उसे सेंट्रल विस्टा परियोजना में अपनी संपत्ति पर खतरा महसूस हो। याचिका में कृषि भवन परिसर की मस्जिद सहित छह धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की मांग की गई थी। 1 दिसंबर 2021 की सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया था कि सरकार इन स्थलों के साथ कोई बदलाव नहीं कर रही है।

    टेंडर ने बढ़ाई अनिश्चितता
    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, CPWD ने 19 जनवरी 2026 को कृषि भवन और शास्त्री भवन के पुनर्विकास के लिए नया टेंडर जारी किया। हालांकि मस्जिद का नाम हटाने वाली सूची में नहीं है, लेकिन टेंडर के ड्रॉइंग्स में मस्जिद को नए प्रस्तावित भवन में उसके मौजूदा स्थान पर नहीं दिखाया गया है।

    वक्फ बोर्ड और इमाम की प्रतिक्रिया
    कदीमी मस्जिद कृषि भवन के खुले प्रांगण में स्थित है और मुख्य रूप से केंद्रीय कर्मचारियों द्वारा नमाज अदा करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षित स्मारक नहीं है, लेकिन 1970 के दिल्ली प्रशासन के राजपत्र में वक्फ संपत्तियों की सूची में दर्ज है।

    वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अमानतुल्ला खान ने कहा, “सरकार ने अदालत में स्पष्ट कहा था कि मस्जिदों को कोई नुकसान नहीं होगा। अगर इसे हटाने का प्रयास किया गया, तो यह उचित नहीं होगा।”

    परियोजना और लागत
    CPWD ने कृषि भवन और शास्त्री भवन के स्थान पर ‘कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट’ (CCS) की इमारतों 4 और 5 के निर्माण के लिए 19 जनवरी को टेंडर जारी किया। बोली लगाने की अंतिम तिथि 13 फरवरी है। CCS 4 और 5 परियोजनाओं की अनुमानित लागत 3,006.07 करोड़ रुपये है और इसे 24 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत पहले उपराष्ट्रपति के पूर्व आधिकारिक निवास परिसर में स्थित एक मस्जिद और एक मंदिर को हटाया जा चुका है, जिससे कदीमी मस्जिद के भविष्य को लेकर वक्फ बोर्ड की चिंता और बढ़ गई है।

  • विश्व रेडियो दिवस पर पीएम मोदी ने रेडियो को बताया भरोसेमंद साथी, ‘मन की बात’ के लिए जनता से मांगे सुझाव

    विश्व रेडियो दिवस पर पीएम मोदी ने रेडियो को बताया भरोसेमंद साथी, ‘मन की बात’ के लिए जनता से मांगे सुझाव


    नई दिल्ली।विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो को एक सशक्त और भरोसेमंद माध्यम बताते हुए इसकी अहमियत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रेडियो ने दशकों से देश के कोने-कोने में लोगों को जोड़ने का काम किया है और आज भी यह सूचना, प्रेरणा और संवाद का एक मजबूत जरिया बना हुआ है। साथ ही उन्होंने नागरिकों से अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात के आगामी संस्करण के लिए सुझाव देने की अपील भी की।

    प्रधानमंत्री ने विश्व रेडियो दिवस के मौके पर सोशल मीडिया मंच X पर संदेश साझा करते हुए कहा कि यह दिन उस माध्यम का उत्सव मनाने का अवसर है, जिसने समय की कसौटी पर खुद को हमेशा साबित किया है। उन्होंने रेडियो को एक ऐसी “भरोसेमंद आवाज़” बताया जो दूर-दराज के गांवों से लेकर बड़े शहरों तक लोगों को एक सूत्र में बांधे रखती है। उनके अनुसार, रेडियो ने वर्षों से लोगों तक समय पर जानकारी पहुंचाने, नई प्रतिभाओं को मंच देने और रचनात्मकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    उन्होंने कहा कि रेडियो केवल एक तकनीकी माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली एक सशक्त कड़ी है। यह उन लाखों लोगों के प्रयासों का परिणाम है जो इस माध्यम से जुड़े हैं और निरंतर लोगों तक सटीक जानकारी और मनोरंजन पहुंचाते हैं। प्रधानमंत्री ने इस दिन को उन सभी लोगों के योगदान को सम्मान देने का अवसर भी बताया, जिन्होंने रेडियो को आज भी प्रासंगिक बनाए रखा है।

    अपने व्यक्तिगत अनुभव का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने खुद महसूस किया है कि रेडियो किस तरह लोगों की सामाजिक ताकत और सकारात्मक पहलों को सामने लाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने आम नागरिकों, समाजसेवियों और नवाचार करने वाले लोगों की कहानियों को देशभर तक पहुंचाने का काम किया है, जिससे प्रेरणा और जागरूकता दोनों का विस्तार हुआ है।

    प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि वे 22 फरवरी को प्रसारित होने वाले ‘मन की बात’ के अगले एपिसोड के लिए अपने सुझाव और विचार साझा करें। उनका मानना है कि इस कार्यक्रम की असली ताकत जनता की भागीदारी में है और लोगों के सुझाव ही इसे और अधिक प्रभावी बनाते हैं।

    गौरतलब है कि ‘मन की बात’ एक मासिक रेडियो कार्यक्रम है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री देशवासियों से सीधे संवाद करते हैं और समाज में हो रहे सकारात्मक बदलावों, जमीनी स्तर की पहलों और प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाते हैं। इसमें स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक विकास जैसे कई विषयों पर चर्चा की जा चुकी है। साथ ही ऐसे लोगों के कार्यों को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाता है, जिन्होंने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव लाने में योगदान दिया है।

    हर साल 13 फरवरी को मनाया जाने वाला विश्व रेडियो दिवस इस बात की याद दिलाता है कि रेडियो आज भी संचार का एक सशक्त और सुलभ माध्यम है। खासतौर पर भारत जैसे विशाल देश में, जहां दूरदराज के इलाकों में अन्य संचार साधनों की पहुंच सीमित हो सकती है, वहां रेडियो सूचना और मनोरंजन का भरोसेमंद स्रोत बना हुआ है। यही कारण है कि बदलते समय और नई तकनीकों के बीच भी रेडियो की प्रासंगिकता आज तक बनी हुई है।

  • नागरिक देवो भव’ के मंत्र के साथ नए युग की शुरुआत, PM मोदी ने किया सेवा तीर्थ का उद्घाटन

    नागरिक देवो भव’ के मंत्र के साथ नए युग की शुरुआत, PM मोदी ने किया सेवा तीर्थ का उद्घाटन


    नई दिल्ली । प्रशासनिक ढांचे के एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अत्याधुनिक सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया। यह वही ऐतिहासिक क्षण था जब लगभग 80 वर्षों से सत्ता और शासन का केंद्र रहे साउथ ब्लॉक से प्रधानमंत्री कार्यालय ने औपचारिक रूप से नई इमारत में प्रवेश किया। उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री ने नागरिक देवो भव के आदर्श वाक्य को दोहराते हुए कहा कि यह परिसर सरकार की नागरिक केंद्रित सोच और आधुनिक प्रशासनिक दृष्टिकोण का प्रतीक है।

    करीब 2.26 लाख वर्ग फुट में फैला यह आधुनिक परिसर सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत दारा शिकोह रोड पर लगभग 1,189 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। सेवा तीर्थ में तीन मुख्य भवन बनाए गए हैं सेवा तीर्थ 1 में प्रधानमंत्री कार्यालय, सेवा तीर्थ 2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ 3 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तथा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के कार्यालय स्थापित किए गए हैं। पहले ये सभी विभाग अलग अलग स्थानों पर संचालित होते थे, जिससे समन्वय और कार्यप्रणाली में जटिलताएँ आती थीं। अब एक ही छत के नीचे इन प्रमुख संस्थाओं के आने से प्रशासनिक फैसलों में तेजी और तालमेल की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री ने साउथ ब्लॉक में अंतिम कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की, जो ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रही। इसी भवन में 15 अगस्त 1947 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में पहली कैबिनेट बैठक हुई थी। अब इस विरासत को सहेजते हुए साउथ ब्लॉक को सार्वजनिक उपयोग के लिए संग्रहालय में बदलने की योजना है, जबकि नॉर्थ ब्लॉक में युगे युगीन संग्रहालय के निर्माण की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है।

    सेवा तीर्थ के साथ ही कर्तव्य भवन 1 और कर्तव्य भवन 2 का भी उद्घाटन किया गया, जहां वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा, संस्कृति, विधि एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण, कृषि एवं किसान कल्याण, रसायन एवं उर्वरक, कॉर्पोरेट कार्य और जनजातीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कार्यालय स्थापित किए गए हैं। इससे नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया अधिक समन्वित और प्रभावी होगी।

    हाईटेक सुविधाओं से सुसज्जित यह परिसर डिजिटल आर्काइव्स, हाई स्पीड इंटरनेट, पेपरलेस वर्क कल्चर और अत्याधुनिक कॉन्फ्रेंस रूम से लैस है। स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, व्यापक निगरानी नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र सुरक्षा को अभेद्य बनाते हैं। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह परिसर 4 स्टार GRIHA मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें ऊर्जा दक्ष प्रणालियाँ, जल संरक्षण उपाय और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन शामिल हैं।

    विजय चौक के समीप स्थित यह नया प्रशासनिक केंद्र न केवल प्रधानमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के आवागमन को सुगम बनाएगा, बल्कि आम नागरिकों को ट्रैफिक जाम से भी राहत दिलाने में सहायक होगा। सेवा तीर्थ केवल एक भवन नहीं, बल्कि आधुनिक, पारदर्शी और उत्तरदायी शासन व्यवस्था का प्रतीक बनकर उभरा है जहाँ परंपरा को सम्मान देते हुए भविष्य की ओर सशक्त कदम बढ़ाए गए हैं।

  • सेवा तीर्थ से चलेगा देश का शासन: PM मोदी ने नए PMO का किया उद्घाटन, साउथ ब्लॉक में 78 साल बाद आखिरी कैबिनेट बैठक

    सेवा तीर्थ से चलेगा देश का शासन: PM मोदी ने नए PMO का किया उद्घाटन, साउथ ब्लॉक में 78 साल बाद आखिरी कैबिनेट बैठक



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में बने अत्याधुनिक प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया। करीब 78 वर्षों तक रायसीना हिल स्थित साउथ ब्लॉक से संचालित होने के बाद अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) नए कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट हो गया है। पुराने दफ्तर में शुक्रवार शाम 4 बजे केंद्रीय कैबिनेट की विशेष बैठक आयोजित की जाएगी, जिसे इस ऐतिहासिक इमारत में आखिरी कैबिनेट बैठक माना जा रहा है।

    उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने ‘सेवा तीर्थ’ की पट्टिका का अनावरण किया। भवन पर देवनागरी लिपि में ‘सेवा तीर्थ’ और उसके नीचे ‘नागरिक देवो भव’ अंकित है, जो शासन की नागरिक-केंद्रित सोच को दर्शाता है। उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने नए कार्यालय में महिलाओं, युवाओं, किसानों और कमजोर वर्गों से जुड़े कई अहम प्रस्तावों की फाइलों पर हस्ताक्षर किए।

    इन फैसलों में पीएम राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा, ‘लखपति दीदी’ योजना का लक्ष्य 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करना, कृषि अवसंरचना कोष की राशि 1 लाख करोड़ से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ करना और 10,000 करोड़ के कोष के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी देना शामिल है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।

    नई दिल्ली के दारा शिकोह रोड स्थित एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव में बना ‘सेवा तीर्थ’ परिसर लगभग 2.26 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैला है और इसे करीब 1189 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। पहले इस परियोजना का नाम ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ था, जिसे दिसंबर 2025 में बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया गया। परिसर में तीन इमारतें हैंसेवा तीर्थ-1 में PMO, सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय (NSCS) तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कार्यालय स्थित है।

    यह पूरा कॉम्प्लेक्स केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है। इसी परियोजना के तहत नया संसद भवन और कर्तव्य पथ का निर्माण किया गया है। कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि सहित कई प्रमुख मंत्रालयों को स्थान दिया गया है। भवनों को 4-स्टार GRIHA ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है, जिनमें नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, वेस्ट मैनेजमेंट और स्मार्ट सुरक्षा प्रणालियां शामिल हैं।

    सरकार का कहना है कि पहले कई मंत्रालय अलग-अलग पुराने भवनों में फैले हुए थे, जिससे तालमेल की कमी, देरी और रखरखाव पर अधिक खर्च जैसी समस्याएं सामने आती थीं। नए एकीकृत परिसर से प्रशासनिक कार्यों में तेजी, समन्वय और पारदर्शिता बढ़ेगी।

    आने वाले समय में नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक की ऐतिहासिक इमारतों को ‘युगे-युगेन भारत नेशनल म्यूजियम’ में बदलने की योजना है, जहां भारत की सभ्यता और विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। इस बदलाव के साथ केंद्र सरकार का प्रशासनिक ढांचा एक नए और आधुनिक दौर में प्रवेश कर गया है।

  • भारतीय सेना आयोजित करेगी इंटरनेशनल मिलिट्री एडवेंचर चैलेंज कप 2026, 8 देशों की टीमें लेंगी भाग

    भारतीय सेना आयोजित करेगी इंटरनेशनल मिलिट्री एडवेंचर चैलेंज कप 2026, 8 देशों की टीमें लेंगी भाग


    नई दिल्ली: भारतीय सेना पहली बार इंटरनेशनल मिलिट्री एडवेंचर चैलेंज कप IMACC2026 का आयोजन करने जा रही है। यह प्रतियोगिता 18 से 23 फरवरी तक पूर्वी हिमालय की तलहटी में आयोजित होगी। इस एक सप्ताह के आयोजन में भारत और मित्र देशों की सैन्य टीमें साहसिक और सहनशक्ति से जुड़ी कठिन प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेंगी।

    प्रतियोगिता में सात मित्र देशों-भूटान, ब्राजील, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और सऊदी अरब-की सैन्य टीमें शामिल होंगी। इनके साथ भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, भारतीय तटरक्षक बल और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ITBPकी टीमें भी हिस्सा लेंगी। आयोजन में शामिल गतिविधियां सैनिकों की शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और दबाव में निर्णय लेने की योग्यता की परीक्षा लेंगी। यह गतिविधियां कठिन पहाड़ी और फील्ड इलाके में आयोजित होंगी, जिससे वास्तविक सैन्य अभियानों जैसी परिस्थितियों का अनुभव होगा।

    अंतरराष्ट्रीय सैन्य खेल लंबे समय से दुनिया भर की सेनाओं के बीच विश्वास और सहयोग बढ़ाने का माध्यम रहे हैं। ये प्रतियोगिताएं इंटरनेशनल मिलिट्री स्पोर्ट्स काउंसिल CISMके “खेल के माध्यम से मित्रता” के सिद्धांत के तहत आयोजित होती हैं। भारत इस परंपरा में लंबे समय से सक्रिय भागीदार रहा है। वर्ष 2007 में भारत ने चौथे CISM मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स की भी मेजबानी की थी।

    IMACC इस परंपरा में एक नया और अभिनव कदम है। पारंपरिक स्टेडियम खेलों के विपरीत, यह प्रतियोगिता साहसिक गतिविधियों, सहनशक्ति और फील्ड कौशल पर केंद्रित है। यह आधुनिक सैन्य प्रशिक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और सैनिकों में उच्च स्तरीय क्षमता, रणनीतिक सोच और आपसी भरोसा विकसित करने में मदद करेगी।

    प्रतियोगिता के दौरान भाग लेने वाले सैनिक कठिन पहाड़ी मार्ग, बाधा दौड़, जलवायु-संबंधी चुनौतियों और टीम आधारित मिशन में अपनी दक्षता का प्रदर्शन करेंगे। आयोजक अधिकारी बताते हैं कि यह आयोजन सिर्फ प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं है बल्कि रक्षा सहयोग, आपसी सम्मान और सैनिकों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देने का अवसर भी प्रदान करेगा।

    मुख्य समन्वयक अधिकारियों ने कहा कि IMACC 2026 भारतीय सेना के लिए मित्र देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और खेल के माध्यम से विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने का एक शानदार अवसर है। इस आयोजन के माध्यम से भारत न केवल आधुनिक सैन्य कौशल का प्रदर्शन करेगा, बल्कि एशिया और विश्व स्तर पर सैन्य प्रशिक्षण और सहयोग में अपनी भूमिका को भी और सुदृढ़ करेगा।

    इस पहले IMACC आयोजन की मेजबानी कर भारतीय सेना ने अपने सैन्य संबंधों को मजबूत करते हुए खेल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मित्रता और सामूहिक साहसिक कौशल के महत्व को उजागर किया है।

  • लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने श्रीमती सरोजिनी नायडू की जयंती पर दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में सम्मान और स्मरण

    लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने श्रीमती सरोजिनी नायडू की जयंती पर दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में सम्मान और स्मरण


    नई दिल्ली । आज 13 फरवरी 2026 को संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने हमारे देश की महान स्वतंत्रता सेनानी कवयित्री तथा समाज सुधारक श्रीमती सरोजिनी नायडू की जयंती के अवसर पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर गहरी श्रद्धा व्यक्त की। इस भावपूर्ण कार्यक्रम में राज्य सभा के उपसभापति श्री हरिवंश कई संसद सदस्य पूर्व सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे और उन्होंने भी सरोजिनी नायडू को याद करते हुए उनके योगदान को सम्मान दिया।

    लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि सरोजिनी नायडू ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रखर भूमिका निभाई बल्कि उन्होंने अपनी कविताओं वक्तृत्व और महिला सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य किया। उन्हें भारत कोकिला के नाम से भी संबोधित किया जाता है जो उनकी साहित्यिक प्रतिभा और देशभक्ति की भावना का प्रतीक है।

    उपस्थित गणमान्य लोगों की मौजूदगी से सजी संविधान सदन की केंद्रीय कक्ष में पुष्पांजलि अर्पण की यह रस्म बेहद गंभीर और सम्मानपूर्वक संपन्न हुई। लोक सभा महासचिव श्री उत्पल कुमार सिंह ने भी श्रीमती सरोजिनी नायडू के चित्र पर श्रद्धांजलि दी जबकि कई सांसदों ने उनके जीवन विचारों और सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला।

    सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। वे एक प्रतिभाशाली वक्ता सुप्रसिद्ध कवयित्री और प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थीं जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। उनके नेतृत्व लेखन और देशप्रेम ने महिलाओं के शिक्षा और सशक्तिकरण को एक नई दिशा प्रदान की। उन्होंने दिल्ली में लेडी इरविन कॉलेज फॉर विमेन की स्थापना की जिससे उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा मिला।

    स्वतंत्रता के बाद श्रीमती सरोजिनी नायडू ने संयुक्त प्रांत अब उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल के रूप में भी सेवा की। उनका जीवन देश की सेवा के प्रति समर्पण और समाज की भलाई के लिए निरंतर प्रयास का आदर्श रहा है। वे महिलाओं के अधिकारों और समानता की प्रबल समर्थक थीं जिनके विचार आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

    विशेष रूप से यह भी उल्लेखनीय है कि पहले भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 16 दिसंबर 1959 को संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में सरोजिनी नायडू के चित्र का अनावरण किया था जो उनके योगदान और स्मरण को स्थायी रूप से सम्मानित करता है।

    इस अनुष्ठान में सदन के नेताओं ने उनके साहित्यिक सामाजिक और राजनीतिक योगदान को याद करते हुए कहा कि सरोजिनी नायडू का जीवन और कार्य भारतीय जनता के लिए आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं। इस कार्यक्रम ने न केवल उनके स्मरण को सम्मान दिया बल्कि यह याद दिलाया कि स्वतंत्रता और सामाजिक समानता के प्रति उनके आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक और प्रेरणादायी हैं।

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 14 फरवरी को असम दौरे पर विकास परियोजनाओं का शुभारंभ, ईएलएफ पर ऐतिहासिक लैंडिंग और रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर को देंगे नई दिशा

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 14 फरवरी को असम दौरे पर विकास परियोजनाओं का शुभारंभ, ईएलएफ पर ऐतिहासिक लैंडिंग और रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर को देंगे नई दिशा


    नई दिल्ली । देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 14 फरवरी 2026 को असम के एक व्यापक और महत्वपूर्ण विकास दौरे पर रहेंगे जो पूरे पूर्वोत्तर भारत में रणनीतिक आर्थिक और सामाजिक प्रगति को नई गति देगा। प्रधानमंत्री का यह दौरा सुबह लगभग 10:30 बजे डिब्रूगढ़ के मोरान बाईपास पर स्थित आपातकालीन लैंडिंग सुविधा ईएलएफ पर उनके विमान के उतरने के साथ शुरू होगा जहाँ वे लड़ाकू विमानों परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों के एरियल डिस्प्ले का अवलोकन करेंगे।

    यह ईएलएफ पूर्वोत्तर भारत में अपनी तरह की पहली आपातकालीन लैंडिंग सुविधा है जिसे भारतीय वायुसेना के समन्वय से डिज़ाइन और निर्मित किया गया है। यह सुविधा न केवल सैन्य और नागरिक विमानों के उतार चढ़ाव को सक्षम करेगी बल्कि प्राकृतिक आपदाओं या रणनीतिक आवश्यकताओं के दौरान राहत और बचाव कार्यों की त्वरित तैनाती को भी सुनिश्चित करेगी। इस ड्यूल यूज़ इंफ्रास्ट्रक्चर में 40 टन तक के लड़ाकू विमान और 74 टन अधिकतम टेक ऑफ वजन वाले परिवहन विमान आसानी से संचालित हो सकते हैं जिससे क्षेत्र की सामरिक क्षमता और आपदा प्रतिक्रिया सुदृढ़ होगी।

    डिब्रूगढ़ कार्यक्रम के पश्चात् प्रधानमंत्री दोपहर लगभग 1 बजे ब्रह्मपुत्र नदी पर बने कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन और निरीक्षण करेंगे। लगभग 3,030 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह 6 लेन एक्स्ट्राडोज्ड प्रेस्ट्रेस्ड कंक्रीट पीएससी पुल गुवाहाटी को उत्तर गुवाहाटी से जोड़ता है और पूर्वोत्तर भारत का पहला ऐसा पुल है। यह पुल यात्रा समय को मात्र 7 मिनट तक घटाएगा और क्षेत्र की कनेक्टिविटी में एक बड़ी क्रांति लाएगा। भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए इसमें फ्रिक्शन पेंडुलम बियरिंग्स के साथ बेस आइसोलेशन तकनीक का प्रयोग किया गया है और ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम सुरक्षा तथा दीर्घकालिक विश्वसनीयता सुनिश्चित करेगा।

    तत्पश्चात् दोपहर लगभग 1:30 बजे प्रधानमंत्री गुवाहाटी के लचित घाट पर एक मुख्य समारोह में 5,450 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शुभारंभ करेंगे। इनमें प्रधानमंत्री ईबस सेवा योजना के अंतर्गत 225 इलेक्ट्रिक बसों का हरी झंडी दिखाकर रवाना करना शामिल है जिससे चार प्रमुख शहरों गुवाहाटी नागपुर भावनगर और चंडीगढ़ में स्वच्छ सुलभ और किफायती सार्वजनिक परिवहन सेवाएँ शुरू होंगी।

    प्रधानमंत्री मोदी असम के कामरूप जिले के अमिंगाँव में पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय डेटा केंद्र का भी उद्घाटन करेंगे जिसकी स्वीकृत क्षमता 8.5 मेगावॉट है और यह मिशन क्रिटिकल एप्लिकेशन होस्ट करेगा साथ ही डिजास्टर रिकवरी केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इससे पूर्वोत्तर की सरकारी और नागरिक डिजिटल सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

    डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के अनुरूप प्रधानमंत्री आईआईएम गुवाहाटी का भी उद्घाटन करेंगे जिससे उच्च शिक्षा और प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिलेगा। यह संस्थान पूर्वोत्तर के युवाओं को नेतृत्व और उद्यमिता के अवसर प्रदान करेगा।  इस व्यापक दौरे के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी न केवल पूर्वोत्तर को रणनीतिक रूप से मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर का उद्घाटन कर रहे हैं बल्कि क्षेत्र की सामाजिक आर्थिक और तकनीकी प्रगति को भी नई ऊँचाइयों तक ले जाने का संकल्प व्यक्त कर रहे हैं।

  • धार्मिक जगत में नया विवाद, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और आशुतोष ब्रह्मचारी के बीच आरोप-प्रत्यारोप

    धार्मिक जगत में नया विवाद, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और आशुतोष ब्रह्मचारी के बीच आरोप-प्रत्यारोप


    नई दिल्ली। वाराणसी में धार्मिक जगत में एक नया विवाद सामने आया है, जहां यौन शोषण और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए इसे “संगठित तरीके से किया जा रहा कॉकटेल प्रहार” करार दिया है। दूसरी ओर, आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत में शिकायत दर्ज कर गुरुकुल की आड़ में नाबालिगों के शोषण का आरोप लगाया है। अदालत ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर 20 फरवरी को पेश होने को कहा है।

    शिकायत में कहा गया है कि कथित घटनाएं माघ मेला और गुरुकुल परिसर से जुड़ी हैं। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि उनके पास दो नाबालिगों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं। प्रारंभिक शिकायत पुलिस को देने के बाद, न्यायालय की शरण ली गई।

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण पर मुखर रुख अपनाने के कारण “बदनाम करने का अभियान” चलाया जा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि अदालत में आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत कर दिए गए हैं और न्यायपालिका पर उनका पूरा विश्वास है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि यदि आरोप असत्य पाए जाते हैं, तो झूठी शिकायत के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    इस विवाद के पीछे धार्मिक नेतृत्व के बीच मतभेद भी एक महत्वपूर्ण पहलू बन गए हैं। शिकायतकर्ता, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं, जबकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पहले भी सार्वजनिक मंचों पर राज्य नीतियों और धार्मिक मुद्दों पर बयान दे चुके हैं, जिससे विवाद और गहराया है।

    कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो जैसे मामलों में नाबालिगों की पहचान की गोपनीयता और साक्ष्यों की विश्वसनीयता निर्णायक होती है। अदालत की निगरानी में जांच आगे बढ़ेगी और इसी दौरान आरोप और बचाव दोनों की कसौटी तय होगी। प्रशासनिक स्तर पर भी शिकायतों की समीक्षा और आवश्यक कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

    यह विवाद यह भी दर्शाता है कि धार्मिक संस्थाओं और गुरुकुलों में कानूनी निगरानी और पारदर्शिता की आवश्यकता कितनी महत्वपूर्ण है। समाज में धार्मिक नेताओं के व्यक्तित्व और उनके कार्यों के प्रति विश्वास और जवाबदेही दोनों की कसौटी अदालत और साक्ष्यों के सामने आएगी।

    आगे की सुनवाई 20 फरवरी को होने वाली है, जहां अदालत दोनों पक्षों के बयान सुनकर आगे की जांच और जवाबी कार्रवाई का रास्ता तय करेगी। इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्यों की पारदर्शिता ही तय करेगी कि आरोप कितने सत्य हैं और किस तरह की कार्रवाई की जानी चाहिए।

  • समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव गिरफ्तार, दो दिन से थे लापता, पत्नी ने की थी गुमशुदगी की रिपोर्ट

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव गिरफ्तार, दो दिन से थे लापता, पत्नी ने की थी गुमशुदगी की रिपोर्ट

    नई दिल्‍ली । समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव को बाराबंकी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले दो दिन तक उनकी कोई खबर नहीं थी और उनकी पत्नी ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। समाजवादी पार्टी ने शुक्रवार सुबह अपने एक्स हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए कहा था कि उनके टीवी पैनलिस्ट मनोज यादव पिछले रात से लापता हैं, जो कि बेहद गंभीर मामला है। अब बाराबंकी की पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

    मेडिकल के बाद लखनऊ भेजा गया
    इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद सियासी गलियारे में हलचल मच गई। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच मनोज यादव का मेडिकल परीक्षण बड़ागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया। परीक्षण के तुरंत बाद पुलिस की टीम उन्हें लखनऊ ले गई। बाराबंकी की सफदरगंज पुलिस ने बताया कि मनोज यादव उर्फ बबलू ने धमकी देने और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल में शामिल होने के मामले में गिरफ्तारी के बाद कानूनी कार्रवाई के तहत हिरासत में लिया गया। भगोलापुरवा निवासी मनोज यादव के खिलाफ 11 फरवरी को मामला दर्ज किया गया था।

    बता दें कि इससे पहले परिवार के लोगों ने बताया था कि मनोज यादव काकोरी में एक तिलक समारोह में शामिल होने गए थे, लेकिन वहां से लौटने के बाद उनका मोबाइल बंद हो गया। रात भर संपर्क न होने पर पत्‍नी ने लखनऊ के गोमती नगर विस्तार थाना में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। परिवार का दावा है कि मनोज बिना बताए कहीं नहीं जाते और किसी से उनकी कोई दुश्मनी भी नहीं थी। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और समारोह के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन को खंगाला। हालांकि, बाराबंकी पुलिस ने बाद में स्पष्ट किया कि मनोज यादव को धमकी देने और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के मामले में सफदरगंज क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही गोमती नगर विस्तार पुलिस ने परिजनों को पूरे मामले की जानकारी दी है।

  • राहुल गांधी के बयान पर सियासी संग्राम तेज, सदस्यता खत्म करने और चुनाव लड़ने पर रोक की मांग

    राहुल गांधी के बयान पर सियासी संग्राम तेज, सदस्यता खत्म करने और चुनाव लड़ने पर रोक की मांग


    नई दिल्ली ।लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हालिया बयान को लेकर संसद और सियासत दोनों में घमासान मच गया है। भारत अमेरिका व्यापार समझौते पर केंद्र सरकार को घेरते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने अमेरिका के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया है और देश के किसानों के हितों को कुचल दिया है। उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे देश को गुमराह करने वाला बताया है।

    भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ प्रस्ताव पेश करते हुए उनकी संसद सदस्यता समाप्त करने और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने की मांग की है। दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सोरोस जैसी विदेशी ताकतों के प्रभाव में आकर देश के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान न केवल संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं बल्कि देश की छवि को भी नुकसान पहुंचाते हैं। उनके अनुसार राहुल गांधी लगातार तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश कर रहे हैं और जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।

    इस विवाद पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक गंभीर संवैधानिक पद पर हैं और उन्हें अपनी जिम्मेदारियों तथा शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। पासवान ने कहा कि विशेषाधिकार प्रस्ताव लाना संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा है और यदि कोई सदस्य तथ्यहीन या आपत्तिजनक टिप्पणी करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय संसदीय प्रक्रियाओं के तहत ही होगा।

    दरअसल बुधवार को सदन में बोलते हुए राहुल गांधी ने भारत अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा कि इस समझौते में भारत के किसानों के हितों की अनदेखी की गई है जैसा पहले किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को शर्म आनी चाहिए कि उसने भारत माता को बेच दिया। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यदि इंडिया गठबंधन की सरकार होती तो अमेरिका के साथ बातचीत बराबरी के स्तर पर की जाती। उनके अनुसार भारतीय डेटा एक रणनीतिक संपत्ति है और अमेरिका के साथ किसी भी वार्ता में इसे केंद्र में रखा जाना चाहिए। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की रक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

    राहुल गांधी के इन बयानों ने संसद में तीखी बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर भाजपा इसे राष्ट्रविरोधी मानसिकता करार दे रही है तो दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना और नीतियों की आलोचना करना है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रस्ताव पर क्या कार्रवाई होती है और क्या यह मामला विशेषाधिकार समिति तक पहुंचता है या सियासी बयानबाजी तक ही सीमित रहता है। फिलहाल इस मुद्दे ने संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।