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  • समान नागरिक संहिता की ओर बड़ा कदम, असम में शादी, तलाक और लिव-इन नियमों में सख्त प्रावधान मंजूर

    समान नागरिक संहिता की ओर बड़ा कदम, असम में शादी, तलाक और लिव-इन नियमों में सख्त प्रावधान मंजूर


    नई दिल्ली ।
    असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी बिल के पास होने के साथ ही राज्य में पारिवारिक और विवाह संबंधी कानूनों में बड़े बदलाव का रास्ता साफ हो गया है। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य सभी धर्मों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक नियमों को एक समान कानूनी ढांचे में लाना बताया गया है, हालांकि अनुसूचित जनजाति समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इस कदम को राज्य में सामाजिक और कानूनी व्यवस्था में एक बड़े परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर अलग-अलग वर्गों की तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।

    नए प्रावधानों के अनुसार बहुविवाह और द्विविवाह को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक विवाह करता है, तो उसे सात साल तक की कैद का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही विवाह को कानूनी रूप से एकविवाही व्यवस्था के तहत अनिवार्य किया गया है, जिससे एक से अधिक विवाह पर रोक सुनिश्चित की जा सके। शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किए गए हैं, जिसके तहत पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष की सीमा निर्धारित की गई है।

    कानून के अनुसार सभी विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। यदि कोई दंपति 60 दिनों के भीतर अपने विवाह या तलाक का पंजीकरण नहीं कराता है, तो उस पर जुर्माने का प्रावधान होगा। इसके अलावा गलत या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर सख्त दंड और कारावास की सजा का भी उल्लेख किया गया है।

    लिव-इन रिलेशनशिप को भी इस कानून के दायरे में लाया गया है, जिसके तहत ऐसे संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। पंजीकरण न कराने या जानकारी छिपाने की स्थिति में जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान रखा गया है। वहीं तलाक के लिए भी समान आधार तय किए गए हैं, जिसमें क्रूरता, परित्याग और आपसी सहमति जैसे कारण शामिल हैं। छोटे बच्चों की कस्टडी को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है, जिसके तहत पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की अभिरक्षा सामान्यतः माता को दी जाएगी।

    उत्तराधिकार और संपत्ति बंटवारे को लेकर भी समान नियम लागू करने का प्रस्ताव है, जिसमें पति, पत्नी, बच्चे और माता-पिता को बराबरी का अधिकार देने की बात कही गई है। वसीयत बनाने के लिए किसी भी वयस्क व्यक्ति को गवाहों की उपस्थिति में लिखित रूप से संपत्ति का बंटवारा करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक परंपराओं को बनाए रखते हुए विवाह विभिन्न रीति-रिवाजों जैसे वैदिक, निकाह और अन्य पारंपरिक तरीकों से किए जा सकते हैं।

    सरकार का दावा है कि यह कानून महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा, जबकि कुछ वर्ग इसे धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में इसके प्रभाव को लेकर और चर्चाएं होने की संभावना है।

  • मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्णय, SIR को कानूनी दायरे में माना, आगे की लड़ाई लगभग समाप्त

    मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्णय, SIR को कानूनी दायरे में माना, आगे की लड़ाई लगभग समाप्त

    नई दिल्ली ।सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दायर याचिकाओं पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और अधिकार क्षेत्र को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के शुद्धिकरण और पुनरीक्षण की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है और इसे किसी भी तरह से उसकी शक्तियों से बाहर का कदम नहीं माना जा सकता। इस निर्णय के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में चल रही बहस को एक स्पष्ट दिशा मिलती दिखाई दे रही है। अदालत ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण को मनमाना या असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता, बशर्ते वह निर्धारित कानूनी ढांचे के भीतर किया गया हो।

    अदालत ने अपने विस्तृत रुख में यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया का उद्देश्य किसी भी नागरिक को मतदाता सूची से अनुचित रूप से बाहर करना नहीं है, बल्कि सूची में केवल पात्र और वैध मतदाताओं को शामिल करना है। यह भी कहा गया कि दस्तावेजों की जांच और उनकी विश्वसनीयता के आधार पर नाम जोड़ने या हटाने का निर्णय लेना आयोग की प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। अदालत ने यह भी माना कि इस प्रक्रिया को नागरिकता तय करने के प्रयास के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि यह अधिकार संविधान और कानून के तहत किसी अन्य प्राधिकरण के पास होता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया किसी भी मौजूदा कानून का उल्लंघन नहीं करती है। अदालत ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व से जुड़े कानून और संविधान के प्रावधानों के तहत चुनाव आयोग को मतदाता सूची को अद्यतन और सही करने का पूरा अधिकार प्राप्त है। इस निर्णय के माध्यम से अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि विशेष परिस्थितियों में व्यापक स्तर पर पुनरीक्षण की आवश्यकता पड़ सकती है और इसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि यह प्रक्रिया कानूनी सीमाओं के भीतर हो।

    इस फैसले के बाद याचिकाकर्ताओं के सामने कानूनी रूप से सीमित विकल्प बचे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अब इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर की जा सकती है, जिसमें अदालत से अपने ही निर्णय पर पुनः विचार करने की मांग की जाती है। इसके अलावा एक अंतिम विकल्प के रूप में क्यूरेटिव याचिका भी दायर की जा सकती है, जो बेहद सीमित परिस्थितियों में स्वीकार की जाती है। हालांकि इन दोनों विकल्पों में सफलता की संभावना को लेकर कानूनी जानकार बहुत अधिक उम्मीद नहीं जताते।

    कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने चुनाव आयोग की भूमिका को और स्पष्ट कर दिया है तथा मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को संवैधानिक वैधता प्रदान कर दी है। अब यह मामला लगभग अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ता दिख रहा है, जहां आगे की कानूनी लड़ाई केवल सीमित दायरों में ही संभव रह गई है।

  • यमुना एक्सप्रेसवे बनेगा यूपी के 5 बड़े एक्सप्रेसवे का मुख्य कनेक्टिंग हब, नोएडा-ग्रेटर नोएडा को मिलेगा सीधा नेटवर्क

    यमुना एक्सप्रेसवे बनेगा यूपी के 5 बड़े एक्सप्रेसवे का मुख्य कनेक्टिंग हब, नोएडा-ग्रेटर नोएडा को मिलेगा सीधा नेटवर्क

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विस्तार को नई दिशा देते हुए यमुना एक्सप्रेसवे को राज्य के पांच प्रमुख एक्सप्रेसवे से जोड़ने की व्यापक योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य पूरे क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना और औद्योगिक विकास को नई गति देना है। प्रस्तावित नेटवर्क के पूरा होने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र देश के सबसे महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी हब के रूप में उभर सकते हैं, जहां सड़क, उद्योग और लॉजिस्टिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र विकसित होगा।

    ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने ग्रेटर नोएडा को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए 37 किलोमीटर लंबे सड़क विस्तार को मंजूरी दी है। यह परियोजना आठ लेन कॉरिडोर के रूप में विकसित की जाएगी, जो हापुड़ तक सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। इस मार्ग के बनने से यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और क्षेत्र में आवागमन अधिक सुगम हो जाएगा। साथ ही यह कॉरिडोर स्थानीय और अंतरराज्यीय यातायात के दबाव को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे विकास की गति और तेज होगी।

    योजना के तहत यमुना एक्सप्रेसवे को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधे जोड़ा जाएगा। इस विस्तृत नेटवर्क से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा, जिससे न केवल यात्रा आसान होगी बल्कि व्यापार, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी। इस तरह का मजबूत कनेक्टिविटी ढांचा उत्तर प्रदेश को देश के सबसे विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर राज्यों में शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    इस पूरे प्रोजेक्ट की समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास का क्षेत्र आने वाले समय में बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित हो सकता है। विशेष रूप से जेवर एयरपोर्ट के संचालन के बाद इस पूरे क्षेत्र की रणनीतिक और आर्थिक महत्ता और बढ़ जाएगी। एयरपोर्ट के साथ बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कार्गो संचालन को भी नया विस्तार मिलेगा।

    इसके अलावा इस क्षेत्र को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर भी काम चल रहा है, जिससे दिल्ली और एयरपोर्ट के बीच यात्रा का समय और कम हो सकेगा। औद्योगिक क्षेत्रों और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के एकीकृत विकास से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

    योजना के तहत हाथरस और आसपास के क्षेत्रों में भी शहरी विकास की बड़ी रूपरेखा तैयार की जा रही है, जहां लगभग 4700 एकड़ भूमि पर एक आधुनिक अर्बन सिटी विकसित करने का प्रस्ताव है। इस शहर में आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक सुविधाओं का संतुलित विकास किया जाएगा, जिससे यह क्षेत्र भविष्य में एक नए आर्थिक केंद्र के रूप में पहचान बना सके। यमुना एक्सप्रेसवे का यह विस्तारित नेटवर्क आगरा तक सीधी कनेक्टिविटी स्थापित करेगा और पूरे क्षेत्र के समग्र विकास को गति देगा।

    कुल मिलाकर यह पूरा एक्सप्रेसवे नेटवर्क उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे को एक नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है, जिससे राज्य न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक निवेश और व्यापार के केंद्र के रूप में भी अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा।

  • बकरीद 2026 की छुट्टी को लेकर बड़ा अपडेट, दिल्ली से यूपी तक 28 मई को बंद रहेंगे सरकारी दफ्तर, स्कूल और बैंक

    बकरीद 2026 की छुट्टी को लेकर बड़ा अपडेट, दिल्ली से यूपी तक 28 मई को बंद रहेंगे सरकारी दफ्तर, स्कूल और बैंक

    नई दिल्ली । देश में बकरीद 2026 के अवसर पर सरकारी अवकाश की तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। पहले यह अवकाश कई राज्यों में 27 मई को निर्धारित किया गया था, लेकिन चांद दिखने में देरी और इस्लामी कैलेंडर में बदलाव के कारण अब इसे संशोधित कर 28 मई 2026 कर दिया गया है। इस बदलाव के बाद दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और अन्य कई राज्यों में ईद-उल-अजहा का सार्वजनिक अवकाश 28 मई को ही लागू रहेगा।

    सरकारी निर्देशों के अनुसार दिल्ली स्थित सभी केंद्रीय प्रशासनिक कार्यालय 28 मई को बंद रहेंगे। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों के सरकारी दफ्तर, स्कूल और कॉलेज भी इस दिन अवकाश पर रहेंगे। इस बदलाव के बाद कर्मचारियों और छात्रों के लिए छुट्टी की तारीख एक समान हो गई है, जिससे पूरे देश में त्योहार की तैयारियां अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेंगी।

    उत्तर प्रदेश सरकार ने भी पहले घोषित 27 मई की छुट्टी को संशोधित करते हुए 28 मई को बकरीद का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। राज्य के सभी सरकारी विभाग इस दिन बंद रहेंगे और प्रशासनिक स्तर पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। लखनऊ सहित प्रमुख शहरों में त्योहार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

    देशभर में ईद-उल-अजहा को लेकर धार्मिक तैयारियां भी जोर पकड़ रही हैं। लखनऊ की प्रमुख ईदगाह में 28 मई की सुबह नमाज अदा की जाएगी। धार्मिक नेताओं ने लोगों से अपील की है कि कुर्बानी केवल निर्धारित स्थानों पर ही की जाए और सभी नियमों का पालन किया जाए। त्योहार को शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से मनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    बैंकों की छुट्टियों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो गई है। संशोधित अवकाश सूची के अनुसार कई राज्यों में 28 मई को बैंक बंद रहेंगे, जिनमें प्रमुख महानगर और राज्यीय राजधानी शामिल हैं। इस दिन बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहेंगी, हालांकि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी, जिससे आम जनता को आंशिक राहत मिलेगी।

    त्योहार के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि सभी समुदायों के बीच शांति और सौहार्द बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    इस प्रकार बकरीद 2026 को लेकर देशभर में अवकाश की स्थिति अब स्पष्ट हो चुकी है और अधिकांश राज्यों में 28 मई को ही सार्वजनिक छुट्टी रहेगी। इससे लोगों को अपने पारिवारिक और धार्मिक कार्यक्रमों की योजना बनाने में सुविधा मिलेगी और पूरे देश में एक ही दिन ईद-उल-अजहा मनाई जाएगी।

  • बकरीद को लेकर सख्त हुए नियम, फ्लैट के अंदर कुर्बानी पर पूरी तरह रोक, नगर निगम और RWA ने तय किए कड़े दिशा-निर्देश

    बकरीद को लेकर सख्त हुए नियम, फ्लैट के अंदर कुर्बानी पर पूरी तरह रोक, नगर निगम और RWA ने तय किए कड़े दिशा-निर्देश

    नई दिल्ली । बकरीद के मौके पर देश के कई हिस्सों में कुर्बानी को लेकर हाउसिंग सोसायटी और नगर निगम स्तर पर सख्त नियम और दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं। मुंबई, दिल्ली और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में हाल के दिनों में सोसायटी परिसरों में कुर्बानी को लेकर विवाद की स्थिति सामने आने के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में फ्लैट के अंदर पशु की कुर्बानी की अनुमति नहीं दी जा सकती। नियमों के अनुसार घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य, सफाई और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह प्रतिबंध लागू किया गया है।

    प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के अनुसार फ्लैट या अपार्टमेंट के अंदर किसी भी प्रकार की कुर्बानी करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। नगर निगम और न्यायिक प्रावधानों के मुताबिक छोटे बंद स्थानों में इस प्रकार की गतिविधियों से स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी इस तरह की अनुमति नहीं दी जाती है।

    यदि किसी सोसायटी में सामूहिक रूप से कुर्बानी की व्यवस्था की जाती है तो इसके लिए सख्त प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। इसके तहत संबंधित हाउसिंग सोसायटी या आरडब्ल्यूए को नगर निगम और स्थानीय प्रशासन से अनुमति प्राप्त करनी होती है। साथ ही यह सुनिश्चित करना होता है कि परिसर के आसपास किसी भी धार्मिक स्थल या सार्वजनिक मार्ग के निकट यह गतिविधि न की जाए, जिससे किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी आवासीय सोसायटी के भीतर खुले स्थान या कॉमन एरिया में भी बिना अनुमति कुर्बानी नहीं की जा सकती। यदि किसी क्षेत्र में पहले से ही निर्धारित बूचड़खाना या अधिकृत सुविधा उपलब्ध है, तो उसी का उपयोग करना आवश्यक है। इससे न केवल नियमों का पालन सुनिश्चित होता है, बल्कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में अनावश्यक तनाव की स्थिति भी नहीं बनती।

    सफाई व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। कुर्बानी के बाद किसी भी प्रकार के अवशेष या खून को खुले नालों या सार्वजनिक स्थानों में बहाने की अनुमति नहीं है। सभी अपशिष्ट पदार्थों को सुरक्षित तरीके से पैक कर नगर निगम की निर्धारित गाड़ियों या डंपिंग साइट तक पहुंचाना अनिवार्य किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

    हाउसिंग सोसायटी स्तर पर भी आरडब्ल्यूए को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने परिसर में किसी भी धार्मिक या विशेष आयोजन के लिए नियम तय कर सकते हैं। यदि किसी सोसायटी में पशु लाने या अस्थायी ढांचा बनाने पर रोक है, तो सभी निवासियों को उसका पालन करना होगा। यह व्यवस्था सामुदायिक शांति और आपसी सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है।

    देश के विभिन्न हिस्सों में इस मुद्दे को लेकर समय-समय पर विवाद देखने को मिले हैं, जहां अलग-अलग समुदायों के बीच समझ और नियमों के पालन को लेकर मतभेद सामने आए हैं। प्रशासन का कहना है कि सभी नागरिकों को कानून और स्थानीय नियमों का सम्मान करते हुए धार्मिक गतिविधियां करनी चाहिए ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे।

    इस प्रकार बकरीद के अवसर पर कुर्बानी को लेकर लागू किए गए ये नियम सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तय दिशा-निर्देशों का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • शिवराज सिंह चौहान ने सुनाया दिलचस्प राजनीतिक किस्सा, मोदी की डिजिटल सोच और शुरुआती दौर की यादें फिर चर्चा में

    शिवराज सिंह चौहान ने सुनाया दिलचस्प राजनीतिक किस्सा, मोदी की डिजिटल सोच और शुरुआती दौर की यादें फिर चर्चा में

    नई दिल्ली । केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए कई दिलचस्प किस्से सुनाए। इस मौके पर उन्होंने अपनी संस्मरण पुस्तक ‘अपनापन, नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ का विमोचन किया, जिसमें उनके लंबे राजनीतिक जीवन और विभिन्न दौर की स्मृतियों का उल्लेख किया गया है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एक ऐसा किस्सा भी साझा किया जिसने पूरे सभागार में हल्का-फुल्का माहौल बना दिया और उपस्थित लोग मुस्कुराने लगे।

    शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 1998 के आसपास, जब मध्य प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं, उस समय एक बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी नेताओं से पूछा था कि किसके पास ईमेल आईडी है। उस समय डिजिटल तकनीक उतनी सामान्य नहीं थी, जिसके कारण कई नेता इस शब्द से परिचित नहीं थे और कुछ समय के लिए कमरे में सन्नाटा छा गया था।

    उन्होंने आगे बताया कि इसी दौरान एक वरिष्ठ नेता ने मजाकिया अंदाज में ईमेल को ‘फीमेल’ समझ लिया और सवाल पूछ दिया कि यह क्या होता है। इस छोटी सी गलतफहमी के बाद पूरे कमरे में हंसी का माहौल बन गया और गंभीर बैठक कुछ देर के लिए हल्के-फुल्के अंदाज में बदल गई। यह किस्सा उस दौर की तकनीकी जागरूकता और शुरुआती डिजिटल बदलावों की स्थिति को दर्शाता है।

    शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उस समय से ही नरेंद्र मोदी टेक्नोलॉजी को लेकर काफी सजग थे और नई व्यवस्थाओं को समझने में गहरी रुचि रखते थे। उन्होंने बताया कि युवा मोर्चा अध्यक्ष के रूप में मोदी अक्सर कंप्यूटर और आधुनिक तकनीक पर काम करते नजर आते थे और भविष्य की जरूरतों को लेकर पहले से ही सोच रखते थे।

    उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती दौर में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के महत्व को बहुत कम लोग समझ पाते थे, लेकिन मोदी ने इन माध्यमों की उपयोगिता को पहले ही पहचान लिया था। बाद में यही सोच प्रशासनिक और राजनीतिक कार्यशैली का अहम हिस्सा बन गई और समय के साथ इसका प्रभाव और भी बढ़ता गया।

    शिवराज ने अपने अनुभवों में यह भी साझा किया कि गुजरात के विकास मॉडल को समझने के दौरान उन्होंने देखा कि नरेंद्र मोदी हर विषय पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देते थे और बैठकों में योजनाओं की बारीकियों को विस्तार से समझते थे। यह उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, जिसने निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया।

    कार्यक्रम के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नेतृत्व केवल निर्णय लेने की क्षमता नहीं होता, बल्कि समय से पहले भविष्य की जरूरतों को समझने और उसके अनुसार तैयारी करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि उनकी पुस्तक इन्हीं अनुभवों और सीखों का संग्रह है, जिसे उन्होंने जनता के साथ साझा किया है।

  • बकरीद से पहले मुंबई में हंगामा ,सोसायटी में बकरे लाने पर भिड़े लोग

    बकरीद से पहले मुंबई में हंगामा ,सोसायटी में बकरे लाने पर भिड़े लोग


    नई दिल्ली । मुंबई के मीरा रोड इलाके में बकरीद से पहले एक सोसायटी में बकरों की मौजूदगी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला पूनम स्टेट क्लस्टर-1 सोसायटी का बताया जा रहा है जहां कथित रूप से कुर्बानी के लिए 25 बकरियां परिसर के अंदर लाई गई थीं और उन्हें एक अस्थायी टीन शेड में रखा गया था। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और स्थानीय निवासियों के बीच विरोध शुरू हो गया।

    सोसायटी में रहने वाले कई लोगों ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि बिना किसी सामूहिक बैठक और अनुमति के परिसर में टीन शेड बनाकर बकरों को रखना नियमों के खिलाफ है। निवासियों ने यह भी दावा किया कि रहवासी इलाके में इस तरह की गतिविधियों से असुविधा और माहौल खराब हो रहा है। इसके बाद मामला धीरे धीरे गरमाने लगा।

    स्थानीय विरोध के बाद भाजपा से जुड़े नेताओं और हिंदू संगठनों के साथ कुछ निवासियों ने प्रशासन से शिकायत की। शिकायत मिलने पर नगर निगम के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर अस्थायी टीन शेड को हटा दिया। हालांकि इसके बाद भी बकरों की मौजूदगी को लेकर विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

    स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब सोमवार रात फिर से तनाव बढ़ गया। बताया जाता है कि टीन शेड हटाने के बाद भी बकरे सोसायटी परिसर में ही मौजूद थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। झगड़े के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने ब्लेड से एक युवक पर हमला कर दिया जिसमें वह घायल हो गया।

    घटना के बाद पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही सोसायटी के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे और किसी तरह की और हिंसा न हो।सोसायटी के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि परिसर के अंदर कुर्बानी की कोई अनुमति नहीं ली गई थी। उनका कहना है कि टीन शेड केवल अस्थायी रूप से बकरों को रखने के लिए बनाया गया था लेकिन इस पर आपत्ति के बाद उसे हटा दिया गया।

    वहीं मंगलवार को स्थानीय निवासियों ने प्रदर्शन कर विरोध जताया। उनका कहना था कि हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार किसी भी रहवासी इलाके में बिना अनुमति कुर्बानी जैसी गतिविधियां नहीं की जा सकतीं। इसी आधार पर उन्होंने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

  • कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में उतरा वैष्णव किन्नर अखाड़ा, प्रमुख बोलीं- ‘सच से क्यों डरना?’

    कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में उतरा वैष्णव किन्नर अखाड़ा, प्रमुख बोलीं- ‘सच से क्यों डरना?’

    मथुरा। वृंदावन में वैष्णव किन्नर अखाड़ा की प्रमुख हिमांगी सखी ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थन में बयान देकर नई चर्चा छेड़ दी। पुरुषोत्तम मास के दौरान ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं हिमांगी सखी ने कहा कि यह ऑनलाइन समूह देश में फैले भ्रष्टाचार और सामाजिक अव्यवस्थाओं को उजागर करने का काम कर रहा है।

    मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि समाज को सच दिखाने वालों से घबराने की बजाय उनका सामना करना चाहिए। उनके मुताबिक, डर केवल उन्हीं लोगों को लगता है जिनके भीतर गलत काम छिपे होते हैं, जबकि ईमानदार व्यक्ति को किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए।

    हिमांगी सखी ने कहा कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ युवाओं द्वारा बनाई गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार और सामाजिक गंदगी के खिलाफ आवाज उठाना है। उन्होंने कहा कि आज का युवा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर पहले से अधिक जागरूक है और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात प्रभावी ढंग से सामने रख रहा है।

    उन्होंने इस पहल को लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर बोलना जरूरी है। हिमांगी सखी ने सार्वजनिक रूप से इस संगठन का समर्थन करते हुए कहा कि वह किन्नर जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में इस मुहिम के साथ खड़ी हैं।

    उन्होंने यह भी दावा किया कि कम समय में इस संगठन ने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है, जो इस बात का संकेत है कि लोग बदलाव और नई सोच को स्वीकार कर रहे हैं।

    हिमांगी सखी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोगों ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ साहसिक पहल बताया, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक और सामाजिक विवादों से जोड़कर देखा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका समर्थन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और पारदर्शिता के समर्थन में है।

    वृंदावन में दिए गए इस बयान के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

  • अहमदाबाद प्लेन क्रैश साइट पर बनेगा नया हॉस्टल, पीड़ित परिवारों ने सरकार से की स्मारक बनाने की मांग

    अहमदाबाद प्लेन क्रैश साइट पर बनेगा नया हॉस्टल, पीड़ित परिवारों ने सरकार से की स्मारक बनाने की मांग

    अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में 12 जून 2025 को हुए एयर इंडिया विमान हादसे को एक वर्ष पूरा होने वाला है। इसी बीच राज्य सरकार ने उस स्थान पर नया मेडिकल हॉस्टल बनाने की मंजूरी दी है, जहां विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। सरकार के इस फैसले का पीड़ित परिवारों ने विरोध करते हुए उस जगह को स्मारक स्थल के रूप में संरक्षित करने की मांग उठाई है।

    मेघानीनगर इलाके में स्थित ‘अतुल्यम हॉस्टल’ भवन में विमान गिरने के बाद वहां भारी नुकसान हुआ था। इसी स्थान पर अब डॉक्टरों और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस 8+8 मंजिला नया छात्रावास बनाने की योजना तैयार की गई है। इस परियोजना के लिए टाटा एयरलाइंस की ओर से 53 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे।

    राज्य सरकार ने बताया कि असारवा स्थित सिविल अस्पताल के नए मेडिकल कैंपस में करीब 105 करोड़ रुपये की लागत से सुपर स्पेशलिटी हॉस्टल और कैंटीन ब्लॉक का निर्माण कराया जाएगा। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया के अनुसार विमान हादसे में क्षतिग्रस्त ‘अतुल्यम 1 से 4’ ब्लॉक, कैंटीन और सब-स्टेशन भवन के नुकसान की भरपाई के तौर पर स्वास्थ्य विभाग को 53.12 करोड़ रुपये की राशि मिलेगी।

    दुर्घटना के समय हॉस्टल में 92 छात्र मौजूद थे। हादसे के बाद कराए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट में भवन को असुरक्षित पाया गया, जिसके बाद उसे गिराने का फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने छात्रों की आवासीय सुविधाओं को प्रभावित न होने देने के उद्देश्य से नए हॉस्टल निर्माण का निर्णय लिया है।

    नया हॉस्टल मेघानीनगर स्थित आईजीपी परिसर में बनाया जाएगा। आने वाले तीन वर्षों में 48 अतिरिक्त सुपर स्पेशलिटी सीटों को ध्यान में रखते हुए कुल 236 डॉक्टरों के रहने की व्यवस्था की जाएगी। परियोजना के लिए सरकार ने पर्याप्त भूमि भी आवंटित कर दी है।

    वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस परियोजना के लिए 34.65 करोड़ रुपये का प्रावधान स्वीकृत किया गया है। प्रस्तावित ‘अतुल्यम 1 से 7’ पीजी हॉस्टल आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार होगा। प्रत्येक यूनिट को स्टूडियो अपार्टमेंट शैली में विकसित किया जाएगा, जिसमें सिटिंग एरिया, अटैच किचन, बेडरूम और शौचालय की व्यवस्था होगी। इसके अलावा भवन में फायर सेफ्टी सिस्टम, आरओ प्लांट, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम, बेसमेंट पार्किंग, आधुनिक मेस, जिम और मनोरंजन कक्ष जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

    हालांकि इस योजना के सामने आने के बाद हादसे में प्रभावित परिवारों ने सरकार को ईमेल भेजकर निर्माण कार्य रोकने की अपील की है। परिवारों का कहना है कि यह सिर्फ एक इमारत या जमीन नहीं, बल्कि उन लोगों की यादों और अपूरणीय क्षति से जुड़ा स्थान है जिन्होंने इस हादसे में अपने प्रियजनों को खोया।

    पीड़ित परिवारों ने मांग की है कि इस जगह को स्मारक स्थल के रूप में सुरक्षित रखा जाए, ताकि यह हादसे में जान गंवाने वालों की स्थायी स्मृति बना रहे। उनका कहना है कि ऐसे स्थानों को जल्द मिटा देना मानवीय संवेदनाओं और जवाबदेही दोनों को कमजोर करता है। परिवारों ने सरकार से आग्रह किया है कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले प्रभावित लोगों से चर्चा की जाए।

  • भीषण गर्मी की चपेट में उत्तर भारत, बांदा बना देश का सबसे गर्म शहर, कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट

    भीषण गर्मी की चपेट में उत्तर भारत, बांदा बना देश का सबसे गर्म शहर, कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट

    नई दिल्ली। उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बढ़ते तापमान के बीच उत्तर प्रदेश का बांदा जिला मंगलवार को देश का सबसे गर्म इलाका दर्ज किया गया, जहां अधिकतम तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विभाग ने बांदा समेत कई शहरों में गंभीर लू की चेतावनी जारी की है।

    मौसम विभाग के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है, तो उसे हीटवेव की स्थिति माना जाता है। इसी कारण उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में लू का अलर्ट जारी किया गया है।

    उत्तर प्रदेश में बांदा के अलावा उरई में 45.8 डिग्री, झांसी में 45.5 डिग्री, प्रयागराज में 45.4 डिग्री, आगरा में 45.3 डिग्री और हमीरपुर में 45.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। राज्य के कई इलाकों में रात के समय भी गर्म हवाओं का असर बना रहा, जिससे लोगों को रात में भी राहत नहीं मिल सकी।

    राजस्थान में भी गर्मी का प्रकोप जारी है। श्रीगंगानगर राज्य का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 47 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीकानेर और फलोदी में 46 डिग्री, जैसलमेर में 45.6 डिग्री और कोटा में 45.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। राजधानी जयपुर में भी तेज गर्मी रही और अधिकतम तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।

    महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में भी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया है। ब्रह्मपुरी में तापमान 46.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 3.5 डिग्री अधिक रहा। चंद्रपुर में 46.4 डिग्री, वर्धा में 46 डिग्री, नागपुर के सोनेगांव क्षेत्र में 45.5 डिग्री और गोंदिया में 45.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।

    हरियाणा में सिरसा सबसे गर्म जिला रहा, जहां तापमान 46 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। रोहतक में पारा 45.6 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं पंजाब के बठिंडा में अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी भीषण गर्मी का असर देखने को मिला। सफदरजंग वेधशाला में अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 3.1 डिग्री अधिक था। मौसम विभाग के मुताबिक दिल्ली के आयानगर, रिज और लोधी रोड क्षेत्रों में तापमान हीटवेव के आधिकारिक मानक से मामूली कम रहा, अन्यथा पूरी राजधानी गंभीर लू की चपेट में आ सकती थी।

    हालांकि मौसम विभाग ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को जल्द राहत मिलने की संभावना जताई है। IMD के अनुसार 29 मई से राजधानी में आंधी और बारिश का दौर शुरू हो सकता है, जिससे तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है।