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  • पराक्रम दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अर्पित की श्रद्धांजलि, उनके साहस और विरासत को किया नमन

    पराक्रम दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अर्पित की श्रद्धांजलि, उनके साहस और विरासत को किया नमन


    नई दिल्ली । पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाने वाली नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अडिग साहस अटल संकल्प और राष्ट्र के प्रति अद्वितीय योगदान का भावपूर्ण स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का निडर नेतृत्व और अटूट देशभक्ति भारत को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नेताजी बोस का जीवन उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी हमेशा प्रेरणा देता रहा है। उन्होंने वर्ष 2009 को स्मरण करते हुए बताया कि 23 जनवरी को गुजरात के आईटी क्षेत्र को रूपांतरित करने वाली अग्रणी ई-ग्राम विश्वग्राम योजना की शुरुआत की गई थी। यह योजना हरिपुरा से लॉन्च की गई थी, जिसका नेताजी बोस के जीवन में विशेष महत्व रहा है। प्रधानमंत्री ने हरिपुरा के लोगों द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत और उसी ऐतिहासिक मार्ग पर आयोजित शोभायात्रा को भी याद किया, जिस पर कभी नेताजी सुभाष चंद्र बोस चले थे।

    प्रधानमंत्री ने वर्ष 2012 में अहमदाबाद में आयोजित आज़ाद हिंद फौज दिवस समारोह को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इस भव्य आयोजन में नेताजी बोस से प्रेरित अनेक लोग उपस्थित थे, जिनमें पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्री पी. ए. संगमा भी शामिल थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आयोजन नेताजी की विचारधारा और उनके संघर्ष की जीवंत अभिव्यक्ति था।

    बीते दशकों पर चिंतन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के गौरवपूर्ण योगदान को लंबे समय तक उचित सम्मान नहीं मिला और उन्हें भुलाने के प्रयास किए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान दृष्टिकोण भिन्न है और उनकी सरकार ने हर संभव अवसर पर नेताजी के जीवन, संघर्ष और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम नेताजी बोस से जुड़ी फाइलों और दस्तावेजों को सार्वजनिक करना रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 ऐतिहासिक रहा, जब लाल किले पर आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मनाई गई और उन्हें तिरंगा फहराने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने आईएनए के वरिष्ठ नेता ललती राम जी के साथ हुई बातचीत को भी याद किया। इसी वर्ष अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के श्रीविजयपुरम में नेताजी द्वारा तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ पर ध्वजारोहण किया गया और रॉस द्वीप सहित तीन द्वीपों के नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप रखे गए।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि लाल किले स्थित क्रांति मंदिर संग्रहालय में नेताजी बोस और इंडियन नेशनल आर्मी से जुड़ी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सामग्री संजोई गई है, जिसमें नेताजी द्वारा पहनी गई टोपी भी शामिल है। उन्होंने कहा कि नेताजी के सम्मान में उनकी जयंती को पराक्रम दिवस घोषित किया गया है और 2021 में उन्होंने कोलकाता स्थित नेताजी भवन का दौरा भी किया, जहाँ से नेताजी ने अपनी ऐतिहासिक यात्रा प्रारंभ की थी। औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति के संकल्प का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने इंडिया गेट के समीप राष्ट्रीय राजधानी के केंद्र में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा स्थापित करने के निर्णय को उनकी विरासत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

  • 2026 की पहली छमाही में 76 प्रतिशत भारतीय नियोक्ता करेंगे नई नौकरियों का सृजन

    2026 की पहली छमाही में 76 प्रतिशत भारतीय नियोक्ता करेंगे नई नौकरियों का सृजन


    नई दिल्ली भारत में रोजगार के क्षेत्र में 2026 की पहली छमाही के लिए सकारात्मक संकेत मिले हैं नौकरी इंडिया के द्विवार्षिक सर्वेक्षण के अनुसार 1250 से अधिक रोजगार प्रदाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर 76 प्रतिशत नियोक्ता इस अवधि में नई नौकरियों का सृजन करेंगे

    रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र 88 प्रतिशत नई नौकरियों के साथ अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है इस क्षेत्र में अधिकतर शुरुआती स्तर की भूमिकाओं पर ध्यान दिया जाएगा जिससे नए पेशेवरों को अवसर मिलेंगे वहीं मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में आने वाली नौकरियों में 79 प्रतिशत नई भूमिकाएं होंगी बैंकिंग फाइनेंस सर्विसेज और इंश्योरेंस क्षेत्र में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत और आईटी सेक्टर में 76 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है

    नौकरी डॉट कॉम के चीफ बिजनेस ऑफिसर डॉ पवर गोयल ने कहा कि 2026 की पहली छमाही में अधिकांश रोजगार प्रदाताओं का फोकस नए रोजगार सृजन पर होगा उन्होंने यह भी बताया कि एआई के प्रभाव को लेकर 87 प्रतिशत नियोक्ताओं का मानना है कि इससे नौकरियों पर कोई खास असर नहीं होगा जबकि 18 प्रतिशत नियोक्ता मानते हैं कि एआई से नई नौकरियों के अवसर पैदा हो रहे हैं विशेष रूप से आईटी एनालिटिक्स और मार्केटिंग क्षेत्र मेंगोयल ने कहा कि एआई इन क्षेत्रों में नई भूमिकाओं के सृजन के लिए उत्प्रेरक के रूप में उभर रहा है और यह कार्यबल परिवर्तन की तैयारी के दौरान कौशल विकास के महत्व को दर्शाता है रिपोर्ट में कहा गया है कि भर्ती की मांग में शुरुआती और मध्य स्तर के पेशेवरों की मांग बढ़ने की संभावना है आईटी और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र मध्य स्तर की भर्ती में अग्रणी होंगे जबकि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र शुरुआती स्तर की भूमिकाओं को प्राथमिकता देगा

    रिपोर्ट के अनुसार आईटी रोजगार प्रदाताओं में 69 प्रतिशत मध्य स्तर के पेशेवरों जिनके पास 4 से 7 वर्ष का अनुभव है की सबसे अधिक मांग की उम्मीद कर रहे हैं वहीं स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के 65 प्रतिशत रोजगार प्रदाता 0 से 3 वर्ष के अनुभव वाले उम्मीदवारों को भर्ती करने की योजना बना रहे हैं यह संकेत है कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नए प्रतिभाओं को अवसर मिलने की संभावनाएं अधिक हैं

  • बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्पित की श्रद्धांजलि, उनके दूरदर्शी नेतृत्व और योगदान को किया स्मरण

    बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्पित की श्रद्धांजलि, उनके दूरदर्शी नेतृत्व और योगदान को किया स्मरण


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और महाराष्ट्र के सामाजिक-राजनीतिक जीवन में दिए गए अमूल्य योगदान को भावपूर्ण स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे ऐसी महान हस्ती थे जिन्होंने अपने विचारों, कार्यशैली और जनसंवाद के माध्यम से महाराष्ट्र के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को गहराई से आकार दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने बालासाहेब ठाकरे को कुशाग्र बुद्धि, दमदार भाषण कला और अडिग विश्वास का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनका जनमानस से जुड़ाव असाधारण था। वे जिस स्पष्टता और दृढ़ता के साथ अपने विचार रखते थे, वह उन्हें जननेता के रूप में विशिष्ट बनाती थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि बालासाहेब केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि वे जनता की भावनाओं को समझने और उन्हें स्वर देने वाले विचारक भी थे।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी उल्लेख किया कि राजनीति से इतर बालासाहेब ठाकरे की संस्कृति, साहित्य और पत्रकारिता में गहरी रुचि थी। एक कार्टूनिस्ट के रूप में उनका करियर समाज के प्रति उनके सूक्ष्म अवलोकन, तीक्ष्ण दृष्टि और विभिन्न मुद्दों पर उनकी निडर टिप्पणी को दर्शाता है। उनके कार्टून सामाजिक सच्चाइयों को सरल, किंतु प्रभावशाली ढंग से सामने रखते थे और आम जन को सोचने के लिए प्रेरित करते थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे का जीवन साहस, स्पष्ट विचार और सांस्कृतिक चेतना का संगम था। उनका दृष्टिकोण केवल समकालीन राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि वे महाराष्ट्र के दीर्घकालीन विकास और गौरव को लेकर स्पष्ट विजन रखते थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे स्वयं महाराष्ट्र की प्रगति के लिए बालासाहेब ठाकरे के विजन से अत्यंत प्रेरित हैं और उस विजन को साकार करने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।

    प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी बालासाहेब ठाकरे को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि बालासाहेब का जीवन और कार्य हमें निडरता, आत्मविश्वास और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की सीख देता है।बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर देशभर में उनके योगदान को स्मरण करते हुए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रधानमंत्री का यह संदेश न केवल एक महान नेता को श्रद्धांजलि है, बल्कि उनके विचारों और विजन को आगे बढ़ाने के संकल्प की भी अभिव्यक्ति है।

  • सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और टीएमसी को इतिहास पर घेरा..

    सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और टीएमसी को इतिहास पर घेरा..


    नई दिल्ली: भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कांग्रेस तथा तृणमूल कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस के कारण अंग्रेजों का भारत पर कब्जा करने का सपना चकनाचूर हो गया

    सुधांशु त्रिवेदी ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कटाक्ष किया उन्होंने कहा कि आपकी पार्टी भी कांग्रेस से निकली है आप भी कांग्रेस में थीं इतने सालों तक क्यों नहीं याद आया कि नेताजी को सम्मान और उचित स्थान मिलना चाहिए अगर टीएमसी के मन में नेताजी के प्रति सम्मान है तो उन्हें अपने नाम से कांग्रेस हटा देना चाहिए अन्यथा बंगाल की प्रबुद्ध जनता उन्हें जड़-मूल से खत्म कर देगीउन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सबसे सच्चा सम्मान दिया 2018 में आजाद हिंद की निर्वासित सरकार के 75 वर्ष पूरे होने पर सभी जीवित सेनानियों को गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल किया गया और उनका सम्मान किया गया किसी भी राजनीतिक दल ने इससे पहले ऐसा सम्मान नहीं दिया इंडिया गेट पर 1968 तक जॉर्ज पंचम की मूर्ति रही थी वहां नेताजी की मूर्ति पुनर्स्थापित की गई

    सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा कि भारत की स्वतंत्रता में कई लोगों ने योगदान दिया लेकिन सुभाष चंद्र बोस का योगदान अग्रणी और अविस्मरणीय है इसे भुलाने के अनेक कुत्सित प्रयास हुए हैं उन्होंने डॉ भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि 1955 में दिए साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना की निष्ठा अंग्रेजों के प्रति बदल चुकी थी और नेताजी के नेतृत्व ने ब्रिटिश शासन की धारणा को तोड़ दिया

    त्रिवेदी ने 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत के बाद नेताजी द्वारा इसे ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाने का अवसर बताया और सवाल उठाया कि उस समय कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन पर दबाव क्यों नहीं बनाया उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी के 14 जुलाई 1942 के रेजोल्यूशन का हवाला दिया जिसमें कहा गया कि ब्रिटिश सरकार के खिलाफ नकारात्मक भाव को सहयोग और सकारात्मक में बदला जाएगा और कांग्रेस पूरी स्वेच्छा से ब्रिटिश फौजों के समर्थन के लिए तैयार थी यही कारण था कि कांग्रेस ने 1931 से 1947 तक 1942 को छोड़कर कोई आंदोलन नहीं किया

    सुधांशु त्रिवेदी का कहना है कि इतिहास में नेताजी के योगदान को सही रूप में प्रस्तुत करना और उनका सम्मान करना आवश्यक है यह केवल भारत के गौरव के लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है

  • बसंत पंचमी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी देशवासियों को शुभकामनाएँ, माँ सरस्वती से किया आशीर्वाद की कामना

    बसंत पंचमी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी देशवासियों को शुभकामनाएँ, माँ सरस्वती से किया आशीर्वाद की कामना


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बसंत पंचमी के पावन और उल्लासपूर्ण अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने इस पर्व को प्रकृति की सुंदरता, दिव्यता और नवचेतना से जुड़ा हुआ बताते हुए इसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने ज्ञान, विद्या और कला की देवी माँ सरस्वती से समस्त नागरिकों पर अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बसंत पंचमी का पर्व जीवन में सकारात्मक ऊर्जा नवीन आरंभ और बौद्धिक चेतना का प्रतीक है। यह दिन विद्या विवेक और सृजनशीलता के महत्व को स्मरण कराने वाला होता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि माँ सरस्वती के आशीर्वाद से प्रत्येक नागरिक का जीवन ज्ञान के प्रकाश से आलोकित हो और समाज में विवेक, सद्भाव तथा रचनात्मकता का विस्तार हो।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि बसंत पंचमी न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत देती है, बल्कि यह मन, विचार और कर्म में नई ऊर्जा का संचार करती है। यह पर्व हमें शिक्षा, कला और संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव विकसित करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कामना की कि देवी सरस्वती की कृपा से देश निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े और युवा पीढ़ी ज्ञान व बुद्धि के बल पर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी बसंत पंचमी के अवसर पर अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। अपने पोस्ट में उन्होंने कहा आप सभी को प्रकृति की सुंदरता और दिव्यता को समर्पित पावन पर्व बसंत पंचमी की अनेकानेक शुभकामनाएं। ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का आशीर्वाद हर किसी को प्राप्त हो। उनकी कृपा से सबका जीवन विद्या, विवेक और बुद्धि से सदैव आलोकित रहे, यही कामना है।

    प्रधानमंत्री के इस संदेश को देशभर में लोगों ने सराहा और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भी एक-दूसरे को बसंत पंचमी की शुभकामनाएँ दीं। शैक्षणिक संस्थानों सांस्कृतिक संगठनों और धार्मिक स्थलों पर माँ सरस्वती की आराधना की गई और ज्ञान कला व संस्कृति के महत्व को स्मरण किया गया। प्रधानमंत्री का यह संदेश बसंत पंचमी के अवसर पर जनमानस में उत्साह, आस्था और सकारात्मकता का संचार करता नजर आया।

  • 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन, आंध्र प्रदेश में प्रस्ताव पर चर्चा..

    16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन, आंध्र प्रदेश में प्रस्ताव पर चर्चा..


    नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है। राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान बताया कि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा एक निश्चित उम्र से कम के बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स पर नहीं होना चाहिए। वे यह नहीं समझ पाते कि किस तरह का कंटेंट उनके संपर्क में आ रहा है। ऐसे में मजबूत कानूनी ढांचे की जरूरत है।

    सरकार का यह कदम ऑस्ट्रेलिया के अंडर-16 सोशल मीडिया कानून से प्रेरित है। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले महीने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए TikTok X (ट्विटर) फेसबुक इंस्टाग्राम यूट्यूब और स्नैपचैट जैसी प्रमुख सोशल मीडिया साइट्स पर प्रतिबंध लगाया था। इस कानून के तहत न तो बच्चे नए अकाउंट बना सकते हैं और न ही पुराने अकाउंट चालू रख सकते हैं। आंध्र प्रदेश सरकार इसी मॉडल का अध्ययन कर रही है। यदि यह लागू होता है तो यह भारत का पहला राज्य होगा जो बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कानूनी पाबंदी लगाएगा।

    तेलुगु देशम पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रेड्डी ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पिछली सरकार के दौरान सोशल मीडिया का दुरुपयोग हुआ था और विशेषकर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक हमले किए गए। उन्होंने कहा कम उम्र के बच्चे भावनात्मक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि वे ऑनलाइन नकारात्मक और नुकसानदायक कंटेंट को समझ सकें। इसलिए सरकार दुनिया के बेहतरीन उदाहरणों का अध्ययन कर रही है।दीपक रेड्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कदम को सेंसरशिप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि इसका उद्देश्य केवल बच्चों को जहरीले कंटेंट ऑनलाइन नफरत और मानसिक नुकसान से बचाना है।

    आंध्र प्रदेश सरकार फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार और अध्ययन के चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम ऐतिहासिक साबित हो सकता है। अगर इसे लागू किया गया तो राज्य के छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह नियंत्रित होगा और उन्हें मानसिक एवं भावनात्मक रूप से सुरक्षित रखा जा सकेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरे से बचाने और उनके स्वस्थ मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम बच्चों की सुरक्षा के लिए डिजिटल युग में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है।

  • चन्नी के बयान पर कांग्रेस हाईकमान सख्त, राहुल गांधी ने दी क्लास, पंजाब में कोई बदलाव नहीं

    चन्नी के बयान पर कांग्रेस हाईकमान सख्त, राहुल गांधी ने दी क्लास, पंजाब में कोई बदलाव नहीं


    नई दिल्ली: पंजाब में पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के बयान को लेकर मचा हंगामा आज नई दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की बैठक के बाद कुछ हद तक शांत हुआ। बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई जिसमें राहुल गांधी सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

    सूत्रों के मुताबिक चन्नी के उस बयान के बाद ही पंजाब कांग्रेस के कई नेताओं को दिल्ली तलब किया गया था। बैठक में राहुल गांधी ने नेताओं को अनुशासन और जिम्मेदारी के पाठ पढ़ाते हुए साफ कर दिया कि कांग्रेस में किसी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चन्नी के बयान पर नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि पंजाब कांग्रेस के प्रमुख पदों पर कोई बदलाव नहीं होगा। राज्य अध्यक्ष महासचिव नेता प्रतिपक्ष और महिला कांग्रेस अध्यक्ष जैसे पद ज्यों के त्यों बने रहेंगे।बैठक में शामिल नेताओं में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी महासचिव केसी वेणुगोपाल पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब प्रभारी भूपेश सिंह बघेल सुखजिंदर सिंह रंधावा पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी और अन्य नेता शामिल थे।

    चन्नी ने हाल ही में एक वीडियो में कहा था कि पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष महासचिव नेता प्रतिपक्ष और महिला विंग की अध्यक्ष सभी अपर कास्ट से हैं। उनका सवाल था कि बड़े पदों पर दलितों का प्रतिनिधित्व क्यों नहीं है जबकि पंजाब में दलित आबादी लगभग 38 प्रतिशत है। उनके इस बयान ने पार्टी में विभिन्न प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया। कुछ नेताओं ने इसे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया तो कुछ ने इसे जातीय राजनीति से जोड़ने की कोशिश करार दिया।विवाद बढ़ने पर चन्नी ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी के खिलाफ बात करना नहीं था। उन्होंने बताया कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और उन्हें जातीय राजनीति से जोड़ने की कोशिश की गई। चन्नी ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने हमेशा उन्हें सम्मान और जिम्मेदारी दी जिन्हें उन्होंने ईमानदारी से निभाया।

    पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और चन्नी के बयान ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और जातीय संतुलन के सवाल को फिर से ताजा कर दिया। हाईकमान ने स्थिति को संभालते हुए साफ किया कि पार्टी का ढांचा स्थिर रहेगा और किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।इस बैठक के बाद कांग्रेस ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि संगठन में अनुशासन सर्वोपरि है और सभी नेताओं से उम्मीद की जाती है कि वे पार्टी के हित में काम करें।

  • हिमंत सरमा का खुलासा: “राहुल और प्रियंका गांधी की आपसी लड़ाई का शिकार रहा”

    हिमंत सरमा का खुलासा: “राहुल और प्रियंका गांधी की आपसी लड़ाई का शिकार रहा”


    नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर तीखा हमला बोला है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान मीडिया से बातचीत में सरमा ने दावा किया कि भाजपा में शामिल होने से पहले वे राहुल और प्रियंका की अंदरूनी लड़ाई के शिकार रहे।

    सरमा ने कहा, “गांधी परिवार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। हाल के राजनीतिक फैसलों से यह साफ दिखता है कि राहुल गांधी नहीं चाहते कि प्रियंका गांधी केरल में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करें।

    उन्हें असम में भेजा गया, इसका यही मतलब है।”

    उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस में राहुल गांधी अपने करीबी नेताओं और गुट के जरिए सत्ता बनाए रखना चाहते हैं, जबकि प्रियंका उस गुट का हिस्सा नहीं हैं। सरमा ने बताया, “मैं 22 साल तक कांग्रेस में रहा हूं, मुझे अंदर की पूरी जानकारी है। यही वजह है कि प्रियंका को केरल की बजाय असम में जिम्मेदारी दी गई।”

    हिमंत सरमा बीजेपी में शामिल होने के बाद से लगातार कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमलावर रहे हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सियासी जानकार अब इस सवाल पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या वाकई राहुल और प्रियंका के बीच अंदरूनी मतभेद हैं, या यह विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

  • खरगे का मोदी पर हमला, कहा- "चायवाला सिर्फ नाटक, मनरेगा खत्म करना गरीबों पर वार"

    खरगे का मोदी पर हमला, कहा- "चायवाला सिर्फ नाटक, मनरेगा खत्म करना गरीबों पर वार"


    नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे वोट पाने के लिए खुद को “चाय वाला” बताते हैं, लेकिन वास्तविकता में यह सिर्फ राजनीति का नाटक है। उन्होंने केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ और मनरेगा (MGNAREGA) के संभावित बदलावों पर भी चिंता जताई।

    खरगे ने कांग्रेस के ‘रचनात्मक कांग्रेस’ प्रकोष्ठ के कार्यक्रम ‘मनरेगा बचाओ मोर्चा’ को संबोधित करते हुए कहा, “वोट पाने के लिए कहते हैं, मैं चायवाला हूँ। क्या उन्होंने कभी चाय बनाई? क्या उन्होंने कभी केतली उठाकर रेल के डिब्बों में लोगों को चाय पिलाई? यह सब सिर्फ नाटक है। गरीबों को सताना उनकी आदत बन चुकी है।”

    उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी चुनाव प्रचार में व्यस्त है और असल काम के मामले में पिछड़ रही है। खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी की उपलब्धियों की तुलना पंडित नेहरू के बड़े प्रोजेक्ट्स से करते हुए कहा, “देश को बताओ, मोदी जी ने ऐसा कौन सा काम किया जो इतिहास में याद रखा जाएगा?”

    कांग्रेस ने उनके भाषण के वीडियो और उद्धरण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए। पोस्ट में लिखा गया है कि मोदी और अमित शाह देश के लिए काम नहीं करते, सिर्फ चुनाव प्रचार में लगे रहते हैं। मनरेगा और मजदूरों के हितों के मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

    भाजपा का पलटवार:
    खरगे के बयान पर भाजपा नेता टॉम वडक्कन ने जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साधारण परिवार से आते हैं और इसे नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके नेता शाही परिवारों से हैं, और वे इस विशेषाधिकार को नकार नहीं सकते।

    बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले मोदी अक्सर कहते थे कि उनके पिता वडनगर स्टेशन पर चाय की दुकान चलाते थे और बचपन में उन्होंने पिता की मदद की। कांग्रेस नेताओं ने इस पर कई बार राजनीतिक विवाद खड़े किए हैं, जबकि भाजपा कांग्रेस को “वंशवादी” कहकर पलटवार करती रही है।

    खरगे ने चेतावनी दी कि कांग्रेस पूरे देश में मनरेगा बचाने के लिए आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा, “मनरेगा को खत्म करना सिर्फ कमजोर तबकों पर हमला नहीं है, बल्कि महात्मा गांधी की जन-स्मृति और ग्राम स्वराज की सोच पर हमला है। कोई दल इसका नाम बदलने की हिमाकत करे, देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।”

  • राजनांदगांव-कलमना सेक्शन पर 14 ट्रेनें रद्द, निर्माण कार्य के चलते यात्रियों को अलर्ट

    राजनांदगांव-कलमना सेक्शन पर 14 ट्रेनें रद्द, निर्माण कार्य के चलते यात्रियों को अलर्ट


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने राजनांदगांव-कलमना रेल सेक्शन में तीसरी लाइन जोड़ने के निर्माण कार्य के कारण 24 जनवरी से 31 जनवरी तक कुल 14 ट्रेनों को रद्द करने का फैसला किया है। यह कदम भविष्य में ट्रेन की रफ्तार बढ़ाने, भीड़ कम करने और ट्रैफिक सिस्टम बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है।

    रेलवे ने यात्रियों से आग्रह किया है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस जरूर चेक करें। कुछ डेमू और मेमू ट्रेनें अपने तय स्टेशन तक नहीं पहुंचेंगी और रास्ते में ही समाप्त हो जाएंगी। यह सलाह आखिरी मिनट की परेशानी और समय की बर्बादी से बचाने के लिए दी गई है।

    कौन सी ट्रेनें प्रभावित हैं:
    58817 तुमसर रोड–पैसेंजर
    58816 तिरोडी–तुमसर रोड पैसेंजर
    58815 इतवारी–तिरोडी पैसेंजर
    58818 तिरोडी–तुमसर रोड पैसेंजर
    68715 बालाघाट–इतवारी–तिरोडी मेमू
    68714 इतवारी–बालाघाट मेमू
    68741 दुर्ग–गोंदिया मेमू
    68742 गोंदिया–दुर्ग मेमू
    68743 गोंदिया–इतवारी मेमू
    68744 इतवारी–गोंदिया मेमू
    68711 डोंगरगढ़–गोंदिया मेमू
    68712 गोंदिया–डोंगरगढ़ मेमू
    68713 गोंदिया–इतवारी मेमू
    68716 इतवारी–गोंदिया मेमू

    रेलवे ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है ताकि भविष्य में ट्रैफिक सुचारू रहे और यात्रा का समय कम हो। विशेष रूप से छोटे कस्बों के यात्रियों, दफ्तर जाने वाले लोगों और छात्रों को अपने सफर की योजना पहले से बनाकर चलने की सलाह दी गई है।