Category: National

  • मध्‍य प्रदेश में 22-23 जनवरी के बाद हल्की बारिश के संकेत

    मध्‍य प्रदेश में 22-23 जनवरी के बाद हल्की बारिश के संकेत

    भोपाल। मध्य प्रदेश के आसपास सक्रिय दो साइक्लोनिक
    सर्कुलेशन के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। इसके असर से प्रदेश
    के पूर्वी जिलों में बादल छाए हुए हैं। आने वाने दिनों में प्रदेश के कुछ
    इलाकों में हल्की बारिश की संभावना है।

    बीते रविवार को भोपाल,
    नर्मदापुरम सहित कई इलाकों में आसमान में बादलों की मौजूदगी रही। मौसम
    विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक कड़ाके की ठंड से राहत मिलने की संभावना
    है, हालांकि इसके बाद बूंदाबांदी हो सकती है। सुबह के समय कोहरे का असर भी
    बना रहेगा। आज सोमवार सुबह ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़,
    छतरपुर, पन्ना और सतना में मध्यम स्तर का कोहरा देखा गया। वहीं भोपाल,
    इंदौर, उज्जैन समेत एक दर्जन से अधिक जिलों में हल्का कोहरा छाया रहा। इस
    बीच, तापमान में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग के
    मुताबिक, प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाए रहने से तापमान में उतार-चढ़ाव
    देखा जा रहा है। रविवार को दिन के तापमान में बढ़ोतरी हुई। इसकी मुख्य वजह
    प्रदेश के ऊपरी हिस्से से गुजर रहे दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन हैं। इसके
    अलावा पाकिस्तान के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी मौसम को प्रभावित कर रहा
    है। 19 जनवरी और 21 जनवरी की रात से दो पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत
    में असर दिखा सकते हैं, जिसका प्रभाव मध्य प्रदेश में भी पड़ने की संभावना
    है। इसके चलते 22 और 23 जनवरी के बाद प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की
    बारिश हो सकती है।

    प्रदेश में सबसे कम तापमान शहडोल के कल्याणपुर में
    दर्ज किया गया, जहां न्यूनतम तापमान 3.7 डिग्री सेल्सियस रहा। खजुराहो में
    5.8 डिग्री, नौगांव और उमरिया में 6 डिग्री, रीवा में 6.4 डिग्री, पचमढ़ी
    में 6.8 डिग्री, मंडला में 7.2 डिग्री और मलाजखंड में 7.6 डिग्री सेल्सियस
    तापमान रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के पांच बड़े शहरों में न्यूनतम तापमान 10
    डिग्री से ऊपर रहा। भोपाल में 11 डिग्री, इंदौर में 12 डिग्री, ग्वालियर
    में 10 डिग्री, उज्जैन में 13 डिग्री और जबलपुर में 10.5 डिग्री सेल्सियस
    तापमान दर्ज हुआ।

  • PM मोदी 23 जनवरी को तमिलनाडु में NDA के चुनावी अभियान की करेंगे शुरुआत, नए दलों के जुड़ने के आसार

    PM मोदी 23 जनवरी को तमिलनाडु में NDA के चुनावी अभियान की करेंगे शुरुआत, नए दलों के जुड़ने के आसार


    नई दिल्‍ली । तमिलनाडु विधानसभा चुनाव अब चार महीने दूर हैं और इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 जनवरी को मदुरान्दगम में एक विशाल जनसभा के माध्यम से एनडीए (NDA) के चुनाव अभियान का बिगुल फूकेंगे। मदुरान्दगम चेन्नई से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। राज्य के भाजपा नेता इस जनसभा की तैयारियों में जुट गए हैं। मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि इस कार्यक्रम में NDA से जुड़ रहे कुछ राजनीतिक दलों के साथ चुनावी गठबंधन की घोषणा भी की जा सकती है।

    NDA में गठबंधन की तस्वीर 23 जनवरी को हो सकती है साफ
    तमिलनाडु में NDA का नेतृत्व AIADMK के पास है और पार्टी ने संकेत दे दिया है कि वह DMDK एक्टर विजयकांत की पार्टी) के साथ चुनावी गठबंधन को अंतिम रूप देने के करीब है। वहीं, BJP चाहती है कि O. पन्नीरसेल्वम और AMMK के नेता T.T.V. दिनकरण को भी NDA में शामिल किया जाए, लेकिन अभी तक AIADMK महासचिव E. पलनिस्वामी से इस पर सहमति नहीं बनी है।सूत्रों के अनुसार, TTV दिनकरण की पार्टी को NDA के घटक दल के रूप में शामिल किया जा सकता है और इसका ऐलान 23 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में हो सकता है। हालांकि, O. पन्नीरसेल्वम के साथ निजी रंजिश के कारण पलनिस्वामी उन्हें NDA में शामिल करने के लिए तैयार नहीं हैं।

    इस बीचAIADMK ने पहले ही PMK के एक धड़े के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया है। PMK के मुखिया डॉ. रामदोस ने अपने बेटे अंबु मणि रामदोस की बगावत के बावजूद चुनावी गठबंधन को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। वहीं, उनके बेटे अंबुमणि ने AIADMK के साथ मिलकर NDA का हिस्सा बनने का फैसला किया है। इस तरह तमिलनाडु में NDA के गठबंधन की पूरी तस्वीर 23 जनवरी की पीएम मोदी की जनसभा में स्पष्ट होने की संभावना है।

    मजबूत NDA गठबंधन बनाने की कोशिश
    AIADMK और BJP इस बार तमिलनाडु में सत्तारूढ़ DMK-कांग्रेस गठबंधन को चुनौती देने के लिए मजबूत NDA गठबंधन बनाने में जुटी हैं। इस गठबंधन में एक्टर विजय की पार्टी DMDK TVK को भी शामिल किया जा सकता है, जिसे इस चुनाव का X फैक्टर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विजय का राजनीतिक असर रजनीकांत और कमल हासन की तुलना में ज्यादा है, क्योंकि उन्होंने अपनी फिल्मी लोकप्रियता के चरम पर रहते हुए राजनीति में कदम रखा। यही वजह है कि NDA इस बार चुनावी रणनीति में उनके योगदान को अहम मान रही है। NDA के लिए यह गठबंधन न सिर्फ चुनावी ताकत बढ़ाने का मौका है, बल्कि राज्य में सत्तारूढ़ DMK-कांग्रेस गठबंधन को चुनौती देने का भी प्रमुख हथियार बन सकता है।

    तमिलनाडु चुनाव में विजय की दिशा तय नहीं
    एक्टर विजय और उनकी पार्टी TVK ने स्पष्ट किया है कि वे DMK और BJP दोनों से समान दूरी बनाकर चलेंगे। हालांकि, AIADMK के कुछ नेता उनके साथ गठबंधन को लेकर बैकडोर बातचीत में लगे हुए हैं। इस बीच राजनीतिक हलकों में यह अटकलें भी लग रही हैं कि अगर TVK और AIADMK के बीच समझौता होता है, तो BJP की स्थिति क्या होगी। तमिलनाडु में यह भी चर्चा है कि विजय की फिल्म जन नायक को सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिलने और करूर भगड़ग मामले में CBI से पूछताछ को भाजपा की साजिश के रूप में पेश किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में विजय और उनकी पार्टी की दिशा NDA और DMK-कांग्रेस गठबंधन दोनों के लिए अहम हो सकती है।

    स्टालिन सरकार के खिलाफ गुस्से को भुनाने की रणनीति
    BJP का मानना है कि लॉ एंड आर्डर और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर तमिलनाडु में लोगों के मन में स्टालिन सरकार के खिलाफ नाराजगी है, जिससे उनके लिए सत्ता में बने रहना मुश्किल हो सकता है। इसी कारण पार्टी ने अपने सबसे बड़े ट्रम्प कार्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनावी कैंपेन की शुरूआत के लिए बुलाने का फैसला किया है। 23 जनवरी को PM मोदी मदुरान्दगम में विशाल जनसभा के साथ NDA अभियान की शुरुआत करेंगे, ताकि उनकी लोकप्रियता का लाभ पार्टी को मिल सके। विश्लेषकों का कहना है कि जिस तरह पीएम मोदी ने चुनाव से चार महीने पहले ही दौरा शुरू करने वाले हैं उससे लगता है कि आने वाले दिनों में उनके कई दौरे तमिलनाडु में होने की संभावना है।

  • मुंबई में बीजेपी के मेयर के लिए तैयार हो गए एकनाथ शिंदे? बोले- 'महायुति को मिले जनादेश का…'

    मुंबई में बीजेपी के मेयर के लिए तैयार हो गए एकनाथ शिंदे? बोले- 'महायुति को मिले जनादेश का…'


    नई दिल्ली।बृहन्मुंबई महानगरपालिका बीएमसी चुनावों के नतीजों के बाद मुंबई में महापौर पद को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट कर दिया है कि शिवसेना बीएमसी में बीजेपी-नेतृत्व वाली महायुति को मिले जनादेश का पूरा सम्मान करेगी।

    हालांकि मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर यह खबर उछली कि शिवसेना के 29 निर्वाचित पार्षदों को फाइव स्टार होटल में शिफ्ट किया गया है लेकिन सूत्रों के अनुसार इसे अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। दरअसल हाल ही में हुए चुनावों में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को मामूली बहुमत मिला और इसी के चलते इन नवनिर्वाचित पार्षदों को अस्थायी सुरक्षा और सुविधाओं के लिए होटल में रखा गया था।राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह कदम किसी षड्यंत्र या नाटकीयता के बजाय पार्षदों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए उठाया गया था। इस बीच महापौर पद की सीट को लेकर चर्चा और चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं और सभी की नजरें अब शिवसेना और बीजेपी के आगामी सामंजस्य पर टिकी हुई हैं।

    शिंदे ने अभी तक बीजेपी नेतृत्व से महापौर पद पर चर्चा नहीं कीबीएमसी महापौर पद को लेकर जारी अटकलों में कहा जा रहा है कि एकनाथ शिंदे कम से कम पहले ढाई साल के लिए शिवसेना को यह पद दिलाना चाहते हैं खासकर इस साल दिवंगत बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी का वर्ष होने के कारण।हालांकि शिवसेना सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि शिंदे जानते हैं कि इस बार पार्टी को महापौर पद नहीं मिलेगा और इस मुद्दे पर उन्होंने बीजेपी नेतृत्व से अब तक कोई बातचीत नहीं की है। इसके बावजूद शिंदे यह संदेश देने से भी बच रहे हैं कि उन्होंने पीछे हटने का मन बना लिया है। उनके इस कदम से राजनीतिक हलचल और भी तेज हो गई है और सभी की नजरें अब आगामी रणनीति पर टिक गई हैं।
    महत्वपूर्ण समितियों में शिवसेना को मिलेगी हिस्सेदारी

    डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के करीबी सहयोगी ने कहा कि शिवसैनिक चाहते हैं कि बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर पार्टी का अपना महापौर हो। हालांकि शिंदे भी जानते हैं कि बीजेपी इस मांग को स्वीकार नहीं करेगी फिर भी उन्होंने इसे सार्वजनिक चर्चा में लाने में कोई हर्ज नहीं समझा।साथ ही शिंदे यह संदेश देने से बच रहे हैं कि वह पीछे हट गए हैं। उनके मुताबिक पार्टी को कम से कम महत्वपूर्ण समितियों में हिस्सेदारी तो मिलेगी जिससे शिवसेना के निर्वाचित नेताओं की उपस्थिति और प्रभाव बरकरार रहे। इस कदम से राजनीतिक रणनीति और दबाव दोनों बनाए रखने का प्रयास नजर आता है।

    शिंदे का स्पष्ट संदेश: जनादेश का उल्लंघन नहीं होगा

    शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने साफ किया है कि मुंबई में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को मिले जनादेश का उल्लंघन करने का उनका कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि 29 निर्वाचित शिवसेना पार्षदों को होटल में शिफ्ट करने की चर्चा बेवजह फैलाई जा रही है और इसका उद्देश्य किसी तरह का पाला बदलने से रोकना नहीं है।सूत्रों के अनुसार यह कदम नव निर्वाचित पार्षदों के लिए एक ट्रेनिंग वर्कशॉप का हिस्सा है। शिंदे इस मौके का इस्तेमाल पार्षदों से परिचित होने और उन्हें यह स्पष्ट करने के लिए कर रहे हैं कि पार्टी उनसे क्या अपेक्षा करती है ताकि आगामी जिम्मेदारियों और महापौर पद के कामकाज को समझा जा सके।

  • कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को फटकारा मंत्री विजय शाह की माफी पर उठाए सवाल

    कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को फटकारा मंत्री विजय शाह की माफी पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने नाराजगी जताई कि एसआईटी ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन राज्य सरकार ने 19 अगस्त 2025 से अब तक कोई निर्णय नहीं लिया।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का सख्त रुख

    CJI सूर्यकांत ने कहा कि एसआईटी ने पूरी जांच कर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश राज्य सरकार को भेजी थी।

    अब तक लंबित निर्णय के चलते कानून के अनुसार कार्रवाई नहीं हो सकी।

    खुफिया विभाग के डीआईजी डी. कल्याण चक्रवर्ती से कोर्ट ने मामले के अन्य पहलुओं पर ध्यान रखने के निर्देश दिए।

    विजय शाह की माफी पर सवाल

    मंत्री की ओर से माफी पेश करने का दावा किया गया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में कोई माफीनामा मौजूद नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट ने उनकी माफी को मगरमच्छ के आंसू बताते हुए इसे कानूनी राहत से अलग करार दिया।

    ऑनलाइन माफी पर भी कोर्ट ने असंतोष जताया और स्पष्ट किया कि ऐसे कदमों से कार्रवाई से राहत नहीं मिल सकती।

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश

    मध्य प्रदेश सरकार को अभी तुरंत कार्रवाई करने और एसआईटी की सिफारिशों के मुताबिक मंजूरी देने का निर्देश।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब लंबित मामलों में विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने NDRF के स्थापना दिवस पर जवानों को सराहा; बोले– चुनौतीपूर्ण समय में 'आशा का संचार' है यह बल

    प्रधानमंत्री मोदी ने NDRF के स्थापना दिवस पर जवानों को सराहा; बोले– चुनौतीपूर्ण समय में 'आशा का संचार' है यह बल


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज राष्ट्रीय आपदा मोचन बल NDRF के स्थापना दिवस के अवसर पर बल के वीर कर्मियों को नमन किया। प्रधानमंत्री ने संकट की घड़ियों में NDRF के जवानों द्वारा दिखाए जाने वाले अदम्य साहस पेशेवर दक्षता और निस्वार्थ सेवा भाव की सराहना करते हुए उन्हें राष्ट्र का सच्चा रक्षक बताया।

    संकट में अग्रिम पंक्ति के योद्धा प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में लिखा कि NDRF के पुरुष और महिला कर्मियों का दृढ़ संकल्प विपरीत परिस्थितियों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय ये जवान सदैव अग्रिम पंक्ति में तैनात रहकर अपने परिश्रम से न केवल मानव जीवन की रक्षा करते हैं और राहत कार्य संचालित करते हैं, बल्कि अत्यंत चुनौतीपूर्ण और निराशाजनक परिस्थितियों में भी आम जनमानस के बीच ‘आशा का संचार’ करते हैं।

    वैश्विक स्तर पर अर्जित किया सम्मान प्रधानमंत्री ने बल की कार्यप्रणाली को सेवा के सर्वोच्च मानकों का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों के दौरान NDRF ने न केवल देश के भीतर आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और तैयारी के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है, बल्कि अपनी कार्यकुशलता के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक सम्मान और ख्याति अर्जित की है। चाहे भूकंप हो चक्रवात हो या कोई अन्य प्राकृतिक विपदा, NDRF के जवानों ने हमेशा अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा परमो धर्म के मंत्र को सिद्ध किया है।

    साहस और कर्तव्यनिष्ठा को नमन स्थापना दिवस पर दी गई इस बधाई में प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से जवानों के कौशल और कर्तव्यनिष्ठा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश को अपने इस बल पर गर्व है जो हर विषम परिस्थिति में नागरिकों के लिए सुरक्षा कवच बनकर खड़ा रहता है।उल्लेखनीय है कि NDRF आज अपना स्थापना दिवस मना रहा है। 2006 में गठित इस बल ने अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से देश के आपदा प्रबंधन तंत्र को एक नई शक्ति प्रदान की है।

  • नोएडा बेसमेंट हादसा: SDRF-NDRF के सामने डूबता रहा युवराज, पिता बोले– मेरा बेटा तड़पता रहा कोई नहीं बचा पाया

    नोएडा बेसमेंट हादसा: SDRF-NDRF के सामने डूबता रहा युवराज, पिता बोले– मेरा बेटा तड़पता रहा कोई नहीं बचा पाया


    नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में हुआ बेसमेंट हादसा पूरे शहर को झकझोर कर रख देने वाला है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद उनके पिता राजकुमार मेहता का दर्द छलक पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर SDRF और NDRF की टीमें मौजूद थीं, लेकिन उनके बेटे को समय रहते नहीं बचाया गया। राजकुमार मेहता का कहना है कि उनके सामने ही युवराज पानी में तड़पता रहा और मदद के इंतजार में उसकी जान चली गई।

    हादसे की रात करीब 12 बजे युवराज ने अपने पिता को फोन कर बताया कि उसकी कार गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिर गई है। सूचना मिलते ही राजकुमार मेहता रात 12:40 बजे मौके पर पहुंचे, लेकिन घना कोहरा और अंधेरा रास्ता बन गया। युवराज ने फोन की टॉर्च जलाकर यह संकेत दिया कि वह पानी में फंसा है और लगातार मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन कोई ठोस रेस्क्यू शुरू नहीं हो सका।पिता का आरोप है कि पुलिस दमकल विभाग SDRF और NDRF मौके पर तो पहुंचे लेकिन उनके पास न तो गोताखोर थे और न ही पर्याप्त उपकरण। बचाव दल ने पानी के अंदर सरिया और अत्यधिक ठंड का हवाला देकर अंदर जाने से मना कर दिया। इसी देरी में युवराज की हालत बिगड़ती चली गई और वह कार समेत डूब गया।

    राजकुमार मेहता ने बताया कि हादसा जिस जगह हुआ, वहां करीब 50 फीट गहरा गड्ढा था, जिसमें पहले से पानी भरा हुआ था। न तो वहां कोई बैरिकेडिंग थी, न रिफ्लेक्टर और न ही चेतावनी बोर्ड। यह इलाका एमजेड विशटाउन प्लानर्स और लोटस ग्रीन से जुड़ा बताया जा रहा है। पिता ने आरोप लगाया कि बिल्डरों और प्राधिकरण की घोर लापरवाही की वजह से उनके बेटे की जान गई।बचाव के दौरान पहले रस्सी फेंकी गई लेकिन वह कार तक नहीं पहुंची। इसके बाद क्रेन मंगाई गई मगर वह भी नाकाम साबित हुई। कई घंटे बाद SDRF और NDRF ने सर्च ऑपरेशन चलाया और युवराज को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

    इस मामले में नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने दोनों बिल्डर कंपनियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से जुड़े धाराओं में FIR दर्ज कर ली है। वहीं, इलाके के लोगों और सोसाइटी निवासियों ने कैंडल मार्च निकालकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हादसे की जांच जारी है और जो भी दोषी पाया जाएगा- उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन युवराज के पिता का सवाल अब भी कायम है-अगर समय पर सही इंतजाम होते तो क्या उनका बेटा आज जिंदा होता?

  • प्रधानमंत्री मोदी ने 'ओडिशा की मदर टेरेसा' पार्वती गिरि को दी श्रद्धांजलि; स्वतंत्रता संग्राम और समाज सेवा में उनके योगदान को सराहा

    प्रधानमंत्री मोदी ने 'ओडिशा की मदर टेरेसा' पार्वती गिरि को दी श्रद्धांजलि; स्वतंत्रता संग्राम और समाज सेवा में उनके योगदान को सराहा


    नई दिल्ली/भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक पार्वती गिरि जी की जन्म शताब्दी के अवसर पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी अदम्य साहसपूर्ण भूमिका और आजादी के बाद समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए उनके कार्यों को याद किया। स्वतंत्रता संग्राम की प्रखर नायिका प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पूर्व में ट्विटर पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि पार्वती गिरि जी ने विदेशी शासन के खिलाफ आंदोलन में बेहद सराहनीय भूमिका निभाई थी। मात्र 16 वर्ष की आयु में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में सक्रिय भागीदारी करने वाली पार्वती गिरि अपनी अटूट देशभक्ति के लिए जानी जाती हैं। उन्हें उनके सेवा भाव के कारण ‘ओडिशा की मदर टेरेसा’ के नाम से भी जाना जाता है।

    महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सेवा में उल्लेखनीय कार्य प्रधानमंत्री ने पार्वती गिरि के सामुदायिक सेवा के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण और संस्कृति के संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उनके कार्य आज भी प्रेरणा देते हैं। उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा को ही अपना धर्म माना। प्रधानमंत्री ने यह भी साझा किया कि उन्होंने पिछले महीने अपने प्रसिद्ध रेडियो कार्यक्रम मन की बात में भी पार्वती गिरि जी के जीवन संघर्ष और उनकी महानता का विशेष उल्लेख किया था।   एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व पार्वती गिरि जी का जन्म 19 जनवरी 1926 को हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन अनाथों की सेवा और जेल सुधार जैसे रचनात्मक कार्यों में समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि उनकी जन्म शताब्दी पर देशवासी उनके आदर्शों को अपनाकर एक समावेशी समाज के निर्माण का संकल्प लेंगे।

  • ससुराल वालों ने जमाई राजा का भव्य स्वागत किया, 1374 व्यंजन और 12 तोहफों के साथ वीडियो वायरल

    ससुराल वालों ने जमाई राजा का भव्य स्वागत किया, 1374 व्यंजन और 12 तोहफों के साथ वीडियो वायरल

    नई दिल्ली। भारत में दामाद का पहली बार ससुराल आना हमेशा एक उत्सव जैसा माना जाता है। पूरे परिवार को जमाई के स्वागत की तैयारी में जुटा देखा जा सकता है। लेकिन आंध्र प्रदेश के कोनसीमा जिले के एक गांव में हाल ही में हुई तैयारियां अपनी हदें पार कर गईं। यहां एक परिवार ने अपनी बेटी कीर्तिश्री और दामाद बोड्डू साई शरथ के पहले ससुराल आगमन पर 1374 व्यंजन तैयार किए। यह आयोजन न केवल परिवार के लिए यादगार था बल्कि सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया।परिवार ने मकर संक्रांति के अवसर पर इस आयोजन की योजना बनाई। पूरे कार्यक्रम को पारंपरिक और भव्य तरीके से सजाया गया। स्वागत स्थल पर सजे बोर्ड और संदेशों ने इसे और व्यक्तिगत और भावनात्मक रूप दिया। यह आयोजन गोदावरी डेल्टा की समृद्ध भोजन संस्कृति को भी दर्शाता है जो अपने उदार भोजन और त्योहारों की रसोई के लिए मशहूर है।

    सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में नवविवाहित जोड़े को भोजन के बीच बैठे हुए देखा जा सकता है। कैमरा धीरे-धीरे टेबलों पर सजी व्यंजन कतारों पर घूमता है। इस विशाल भोज में बिरयानी बर्गर तले हुए स्नैक्स छाछ ताजे जूस मिठाइयां फल और घर के बने नाश्ते शामिल थे। कुछ खास डिशेज आसपास के अलग-अलग इलाकों से मंगाई गई थीं।भोजन के अलावा परिवार ने 12 तोहफे भी दिए जो साल के 12 महीनों का प्रतीक थे। इन तोहफों के जरिए नवदंपति के वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई। इस भव्य आयोजन ने दामाद और बेटी को खास महसूस कराना सुनिश्चित किया।

    जैसे ही वीडियो वायरल हुआ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए। एक यूजर ने लिखा इसका क्या फायदा… कम से कम कुछ मिठाइयां गरीब बच्चों में बांट देते। दूसरे ने टिप्पणी की मैं देखना चाहता हूं कि वो इतना सब कैसे खत्म करेगा। कुछ ने इसे दहेज और दिखावे से जोड़कर भी देखा। एक यूजर ने लिखा गोदावरी जिलों में हर साल ऐसा दिखावा आम है। समझ नहीं आता समाज को क्या संदेश देते हैं। वहीं एक अन्य ने कहा काश बहुओं को भी कभी ऐसा सम्मान मिले।यह आयोजन न केवल परिवार के लिए यादगार रहा बल्कि सोशल मीडिया पर इसे देखकर लोग इसकी भव्यता और अलग अंदाज की तारीफ कर रहे हैं। 1374 व्यंजन और 12 प्रतीकात्मक तोहफों के साथ इस स्वागत का वीडियो आने वाले समय में और भी चर्चा में रहेगा।

  • बजट 2026 को लेकर नई चर्चा… पति-पत्नी को मिल सकती है एक साथ ITR भरने की सुविधा

    बजट 2026 को लेकर नई चर्चा… पति-पत्नी को मिल सकती है एक साथ ITR भरने की सुविधा


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय बजट 2026 (Union Budget 2026) से पहले टैक्स को लेकर एक नई चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि सरकार शादीशुदा लोगों के लिए ‘संयुक्त कराधान’ यानी ज्वाइंट टैक्सेशन (Joint taxation) का विकल्प पेश कर सकती है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो पति और पत्नी (Husband and wife) मिलकर एक साथ आयकर रिटर्न (Income tax return) भर सकेंगे। इससे खासकर उन परिवारों को राहत मिल सकती है, जहां कमाई का जिम्मा एक ही व्यक्ति पर है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो खासकर एकल कमाई वाले परिवारों को Tax में लाखों रुपये की बचत हो सकती है।

    बजट से पहले इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने वित्त मंत्रालय को बजट को लेकर एक खास सलाह दी है। उसने पति-पत्नी को संयुक्त रिटर्न फाइल का विकल्प देने की सलाह दी है। अभी पति और पत्नी को अलग-अलग रिटर्न फाइल करना पड़ता है।

    फिलहाल नई कर व्यवस्था ही आयकर रिटर्न के लिए डिफॉल्ट व्यवस्था है। हालांकि, करदाता पुरानी कर व्यवस्था को भी चुन सकते हैं। दोनों में ही टैक्स की अलग-अलग स्लैब हैं जहां आमदनी बढ़ने के साथ-साथ कर की दर बढ़ती हैं। नई टैक्स व्यवस्था के तहत जहां तीन लाख रुपये सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं है, वहीं पुरानी टैक्स व्यवस्था में यह 2.5 लाख रुपये सालाना के लिए लागू है। दोनों में ही यह सीमा परिवार के हर एक सदस्य पर अलग-अलग लागू है।


    विवाहितों पर बढ़ता है बोझ

    बहुत से घर ऐसे होते हैं जहां एक ही व्यक्ति नौकरी या काम करता है। दूसरा जीवनसाथी घर, बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल करता है। यह काम भले ही बहुत अहम हो, लेकिन कर प्रणाली में इसकी कोई कीमत नहीं मानी जाती है। नतीजा यह होता है कि ऐसे परिवारों पर कर का बोझ ज्यादा पड़ता है।

    मौजूदा समय में भारत में हर व्यक्ति को अपनी आय पर अलग-अलग कर देना होता है। चाहे वह शादीशुदा ही क्यों न हो। पति-पत्नी दोनों को अलग-अलग बेसिक छूट, स्लैब और कटौतियां मिलते हैं। इस वजह से शादीशुदा होने के बावजूद दूसरे जीवनसाथी को कर छूट का पूरा फायदा नहीं मिल पाता है।


    क्या है ज्वाइंट टैक्सेशन सिस्टम

    इसका मतलब है कि शादीशुदा जोड़े अपनी कमाई को जोड़कर एक साथ आयकर रिटर्न फाइल करें। इसके लिए दोनों के पास पैन कार्ड होना जरूरी होगा। माना जा रहा है कि बुनियादी छूट सीमा को भी बढ़ाया जा सकता है।

    जैसे अभी अगर एक व्यक्ति को तीन लाख रुपये तक टैक्स छूट मिलती है, तो जॉइंट फाइलिंग में यह सीमा छह लाख रुपये या उससे ज्यादा हो सकती है। इससे मध्यम वर्गीय परिवार को सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा होम लोन ब्याज, हेल्थ इंश्योरेंस और दूसरी कटौतियों को भी बेहतर तरीके से समायोजित किया जा सकेगा। अगर दोनों पति-पत्नी कमाते हैं, तो भी उन्हें अलग-अलग मानक कटौती मिलने की बात कही जा रही है।


    सरचार्ज पर भी राहत संभव

    साथ ही, सरचार्ज को लेकर भी राहत मिल सकती है। अभी 50 लाख रुपये से ज्यादा आय पर सरचार्ज लगता है, लेकिन संयुक्त कराधान में इसकी सीमा 75 लाख रुपये या उससे ज्यादा की जा सकती है। इससे उच्च कर दायरे में आने वाले परिवारों को भी राहत मिलेगी। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह भारत के टैक्स सिस्टम में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव माना जाएगा। इससे कुल करयोग्य आय कम हो जाएगी और परिवार के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे बचेंगे।


    इन देशों में है ज्वाइंट टैक्सेशन सिस्टम

    अमेरिका, जर्मनी, स्पेन, पुर्तगाल जैसे कई देशों में शादीशुदा जोड़ों को संयुक्त कर रिटर्न दाखिल करने की सुविधा मिलती है। वहां परिवार को एक आर्थिक इकाई माना जाता है। भारत भी ऐसी प्रणाली अपनाकर अपने कर कानूनों को आसान और आधुनिक बना सकता है।

  • वसंत पंचमी शुक्रवार को, भोजशाला में पूजा होगा या फिर नमाज…. सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवाद

    वसंत पंचमी शुक्रवार को, भोजशाला में पूजा होगा या फिर नमाज…. सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवाद


    नई दिल्ली।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के धार (Dhar) स्थित भोजशाला (Bhojshala) से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंच गया है. इस बार विवाद की वजह यह है कि 23 जनवरी को वसंत पंचमी (Vasant Panchami) शुक्रवार के दिन पड़ रही है, जबकि भोजशाला परिसर में हर शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय की जुमे की नमाज अदा होती है

    इसको लेकर हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. याचिका में मांग की गई है कि 23 जनवरी को भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज पर रोक लगाई जाए और उस दिन केवल हिंदुओं को सरस्वती पूजा करने की अनुमति दी जाए. याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि याचिका में यह भी मांग की गई है कि वसंत पंचमी के दिन ASI और राज्य सरकार कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि किसी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बने.

    याचिका में समय की कमी का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई करने का आग्रह भी किया गया है. हिंदू पक्ष का कहना है कि वसंत पंचमी बेहद नजदीक है और स्थिति को लेकर पहले से स्पष्ट आदेश जरूरी है. हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दाखिल अर्जी में कहा गया है कि भोजशाला परिसर में मां वाग्देवी यानी ज्ञान, संगीत और कला की देवी सरस्वती का मंदिर है, जिसका निर्माण 11वीं सदी में परमार राजाओं ने करवाया था. ऐतिहासिक रूप से यहां हिंदू पूजा-अर्चना करते रहे हैं.

    याचिका में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश का जिक्र किया गया है. इस आदेश के तहत हिंदुओं को हर मंगलवार और वसंत पंचमी के दिन पूजा की अनुमति दी गई. मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे तक जुमे की नमाज़ अदा करने की अनुमति दी गई. हालांकि, याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि ASI का यह आदेश इस स्थिति पर पूरी तरह मौन है, जब वसंत पंचमी शुक्रवार को ही पड़ जाए.


    इस बार क्यों बढ़ा विवाद?

    हिंदू पक्ष का कहना है कि 23 जनवरी को वसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ रहे हैं, जिससे पूजा और नमाज़ दोनों के समय टकराव की स्थिति बन रही है. इसी कारण सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है, ताकि किसी तरह का विवाद या तनाव न हो.