Category: National

  • नोएडा हिंसा में बड़ा खुलासा: साजिश के मिले संकेत, 300 लोग गिरफ्तार, 7 एफआईआर दर्ज

    नोएडा हिंसा में बड़ा खुलासा: साजिश के मिले संकेत, 300 लोग गिरफ्तार, 7 एफआईआर दर्ज

    नोएडा। दिल्ली से सटे नोएडा, फरीदाबाद और बुलंदशहर के औद्योगिक इलाकों में श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया। कई जगह आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन घटनास्थलों पर जली गाड़ियां, टूटे कांच और बिखरे पत्थर हालात की गंभीरता बयां कर रहे हैं।

    300 लोग गिरफ्तार
    पुलिस जांच में इस पूरे घटनाक्रम के पीछे साजिश के संकेत मिले हैं। अब तक करीब 300 लोगों को प्रिवेंटिव कार्रवाई में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। वहीं 7 एफआईआर दर्ज की गई हैं और साइबर टीम 7 व्हाट्सएप ग्रुप्स की जांच कर रही है, जिन पर माहौल भड़काने का शक है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार लोगों में कई बाहरी तत्व शामिल हैं, जो श्रमिकों के बीच घुसकर प्रदर्शन को उग्र बनाने की कोशिश कर रहे थे।

    नोएडा पुलिस कमिश्नर का बयान
    नोएडा पुलिस कमिश्नर ने बताया कि सोशल मीडिया पर फैली भ्रामक जानकारी ने भी हालात बिगाड़े। दो सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। एक फर्जी दावे में पुलिस फायरिंग में 14 लोगों की मौत की बात कही गई थी, जिसे पुलिस ने सिरे से खारिज कर दिया।

    अतिरिक्त बल तैनात
    स्थिति को देखते हुए नोएडा पुलिस के सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। आसपास के जिलों में भी अलर्ट जारी है और लगातार फ्लैग मार्च व चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस के अनुसार 83 स्थानों पर करीब 42 हजार श्रमिकों ने प्रदर्शन किया, जबकि 78 स्थानों पर लोगों को समझाकर शांत कराया गया। श्रमिकों की पांच मांगों में से चार को मान लिया गया है और बाकी मुद्दों पर सरकार ने हाई लेवल कमेटी बनाई है।

    क्‍या बोले मुख्यमंत्री आदित्यनाथ?
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की और श्रमिकों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा कि सरकार श्रमिकों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और साजिश रचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

    जांच में हुआ ये खुलासा
    पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ संदिग्ध संगठनों और बाहरी तत्वों ने प्रदर्शन को हाईजैक कर हिंसा को बढ़ावा दिया। करीब 150 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इस बीच सेक्टर-63 और अन्य इलाकों में फिर से माहौल बिगाड़ने की कोशिश हुई, लेकिन पुलिस ने तुरंत कार्रवाई कर स्थिति संभाल ली। कई उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। घटना के दौरान एक आईटी कंपनी में तोड़फोड़ और कर्मचारियों के साथ अभद्रता का मामला भी सामने आया, जिसका सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। वहीं एक स्कूल बस भी पथराव की चपेट में आ गई, जिसके बाद बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

    उद्योग जगत की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। मदरसन ग्रुप ने बयान जारी कर कहा कि यह विवाद वेतन से जुड़ी गलत सूचनाओं के कारण उत्पन्न हुआ है और कंपनी का संचालन सामान्य है। बुलंदशहर और गाजियाबाद में भी मजदूरों ने वेतन वृद्धि, PF-ESI और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। कुछ जगहों पर सड़क जाम से यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। डीजीपी ने स्पष्ट किया है कि हिंसा फैलाने, अफवाह फैलाने और कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  • देश में इस साल सामान्य से कम होगी मॉनसूनी बारिश….IMD ने जताई कई क्षेत्रों में सूखे की आशंका

    देश में इस साल सामान्य से कम होगी मॉनसूनी बारिश….IMD ने जताई कई क्षेत्रों में सूखे की आशंका


    नई दिल्ली।
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department- IMD) ने कहा है कि इस साल सामान्य से भी कम मॉनसूनी बारिश (Monsoon Rain) होगी। वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (Southwest Monsoon) को लेकर लंबी अवधि का पूर्वानुमान जारी करते हुए मौसम विभाग ने कहा कि इस साल देश में मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है, जिससे खेतीबाड़ी, पशुपालन और जल संसाधनों पर बुरा असर पड़ सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच होने वाली कुल मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम यानी 92% (±5%) रह सकती है। यह लंबी अवधि यानी 1971 से 2020 तक के औसत 87 सेंटीमीटर के अनुमान पर आधारित है। इसका मतलब है कि बारिश सामान्य से थोड़ी कम हो सकती है।

    मौसम विभाग ने पूर्वानुमानों में कहा है कि इस साल अल नीनो का प्रभाव रह सकता है, जिसकी वजह से न केवल प्रचंड गर्मी पड़ेगी बल्कि बारिश भी कम होगी। विभाग ने कहा है कि अप्रैल से जून 2026 के दौरान अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) की तटस्थ स्थितियाँ रहने की सबसे अधिक संभावना है। इसके बाद, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मौसम के दौरान अल नीनो की मजबूत स्थिति बनने की बहुत अधिक संभावना है। इस वजह से मॉनसून कमजोर रह सकता है और सामान्य से कम बारिश हो सकती है। IMD के मुताबिक, अप्रैल से जून तक स्थिति सामान्य रहेगी लेकिन इसके बाद मॉनसून के दौरान अल-नीनो बनने की संभावना अधिक है।


    किन इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD ने देश भर के लिए जारी लंबी अवधि के पूर्वामुमानों में कहा है कि भौगोलिक रूप से, देश के कई हिस्सों में मौसमी वर्षा सामान्य से कम रहने की अधिक संभावना है। हालांकि, IMD ने पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने ये भी बताया कि फिलहाल हिंद महासागर में तटस्थ हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) की स्थितियाँ बनी हुई हैं। यानी दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं और समयपर मॉनसून के दस्तक देने की संभावना है।


    कहां-कहां सूखे के आसार?

    IMD ने कहा कि जनवरी से मार्च 2026 के दौरान उत्तरी गोलार्ध का हिम आवरण (Snow Cover) और साथ ही यूरेशिया का हिम आवरण भी सामान्य से थोड़ा ही कम रहा है, जो दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के विकसित होने और मॉनसूनी मौसमी वर्षा के लिए अनुकूल है। IMD के दीर्घ अवधि वाले इस पूर्वानुमान के दस्तावेज में फिलहाल सूखा घोषित होने वाली जगहों की सूची नहीं दी गई है, लेकिन जिन क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश/सूखे जैसे हालात बनने की आशंका ज्यादा बताई गई है, उनमें उत्तर भारत के कई हिस्से, खासकर गंगा के मैदानी और आसपास के पठारी क्षेत्र शामिल हैं।


    कुछ इलाकों में बेहतर बारिश की उम्मीद

    इसके अलावा मध्य भारत के बड़े हिस्से के सूखा से प्रभावित रहने की आशंका जताई गई है। ये वैसे इलाके हैं, जहां सामान्य से कम बारिश के अनुमान जताए गए हैं। पश्चिम भारत के कुछ हिस्से और आंतरिक क्षेत्रों में भी कम बारिश के संकेत दिए गए हैं। IMD के मैप में दिखाया गया है कि देश के बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है, जबकि पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम के कुछ हिस्से और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्से जैसे कुछ इलाकों में बारिश इनके मुकाबले बेहतर स्थिति में रह सकता हैं।


    सामान्य से कम बारिश का क्या असर

    मौसम विभाग का कहना है कि मॉनसून के कमजोर रहने और सामान्य से कम बारिश होने की दशा में खेती पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि कम बारिश से बुवाई, फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है खेती की बढ़ सकती है। मॉनसूनी बारिश का खेतीबाड़ी पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा करते हुए IMD के वैज्ञानिकों ने बताया कि कम बारिश की मार आम आदमी तक को परेशान कर सकता है। इसकी वजह से सब्जी-दाल महंगी हो सकती है और कमजोर मॉनसून का असर फूड सप्लाई पर पड़ सकता है, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं।


    खेतीबाड़ी से लेकर ऑटो सेक्टर तक असर

    मौसम विज्ञानियों ने बताया कि खेतीबाड़ी बाधित होने की दशा में ग्रामीण आमदनी पर भी असर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, खेती कमजोर होने से गांवों में नकदी कम आएगी, जिसका असर ग्रामीण खर्च और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। कम बारिश से ट्रैक्टर और टू-व्हीलर की बिक्री भी प्रभावित हो सकती है और ग्रामीण मांग कमजोर होने से ऑटो कंपनियों की बिक्री पर असर पड़ सकता है।

  • केंद्र सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 48 वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त सचिव स्तर पर नियुक्ति

    केंद्र सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 48 वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त सचिव स्तर पर नियुक्ति

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में संयुक्त सचिव (Joint Secretary) स्तर के अधिकारियों की नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) द्वारा लिया गया है।

    जारी आदेश के अनुसार, कुल 48 अधिकारियों को अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इन नियुक्तियों में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) सहित अन्य केंद्रीय सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।

    प्रमुख नियुक्तियां
    कपिल मीणा (IAS) को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है।
    प्रियंका दास (IAS, मध्य प्रदेश कैडर) को नागरिक उड्डयन मंत्रालय में संयुक्त सचिव बनाया गया है।
    प्रीति मीणा (IAS) और शैलेश कुमार चौरसिया (IAS) को रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है।
    विपुल अग्रवाल (IPS) को उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है।
    साक्षी मित्तल (IAS) और लया मद्दुरी (IAS) को आर्थिक मामलों के विभाग में संयुक्त सचिव बनाया गया है।

    गृह, स्वास्थ्य और अन्य मंत्रालयों में बदलाव
    गृह मंत्रालय में महात्मे संदीप नामदेव (IAS) और राकेश राठी (IPS) को संयुक्त सचिव बनाया गया है।
    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में एम. मुथुकुमार और प्रभाकर (IAS) को नई जिम्मेदारी दी गई है।
    श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में एस. तेजस्वी नाइक (IAS, एमपी कैडर) की नियुक्ति हुई है।

    अन्य अहम तैनातियां
    रोहन चंद ठाकुर (IAS) को नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉर्पोरेशन (NLMC) का CEO बनाया गया है।
    हार्दिक शाह (IAS) को प्रधानमंत्री कार्यालय में निजी सचिव (JS स्तर) नियुक्त किया गया है।
    राशी शर्मा को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया गया है।

    बता दें कि अधिकांश नियुक्तियां पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए की गई हैं या अगली आदेश तक लागू रहेंगी। कुछ पदों पर कार्यकाल संबंधित अधिकारी की सेवानिवृत्ति तिथि तक निर्धारित किया गया है।

  • अब खेतों में नहीं सताएगा सांपों का डर: ‘किसान मित्र छड़ी’ देगी पहले ही खतरे का अलर्ट

    अब खेतों में नहीं सताएगा सांपों का डर: ‘किसान मित्र छड़ी’ देगी पहले ही खतरे का अलर्ट

    नई दिल्‍ली । भारत के ग्रामीण इलाकों में सांपों का खतरा लंबे समय से किसानों के लिए एक बड़ी समस्या रहा है। खासकर रात के समय खेतों में काम करते हुए उन्हें हर पल इस अदृश्य खतरे का डर बना रहता है। हर साल सांप के काटने से कई लोगों की जान चली जाती है, जिनमें बड़ी संख्या किसानों की होती है। ऐसे हादसे न सिर्फ एक व्यक्ति की जिंदगी खत्म करते हैं, बल्कि पूरे परिवार को संकट में डाल देते हैं।

    इसी गंभीर समस्या के बीच अब एक नई तकनीक उम्मीद बनकर सामने आई है। ‘किसान मित्र छड़ी’ नाम का एक खास उपकरण विकसित किया गया है, जो सांपों के खतरे से पहले ही किसानों को सतर्क कर सकता है। यह छड़ी आसपास सांप की मौजूदगी का संकेत देकर किसान को समय रहते सावधान कर देती है, जिससे वे खुद को सुरक्षित रख सकें।

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस नवाचार की उपयोगिता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि यह किसानों के लिए बेहद मददगार साबित हो सकता है। खेतों में अंधेरे के बीच काम करने वाले किसानों के लिए यह उपकरण किसी सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।

    भारत में सांपों की करीब 350 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से लगभग 10 प्रतिशत जहरीली होती हैं। हालांकि यही जहरीले सांप सबसे ज्यादा खतरनाक साबित होते हैं और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकते हैं। यही वजह है कि सांप के काटने की घटनाएं आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

    ऐसे में ‘किसान मित्र छड़ी’ का यह नवाचार किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। यह न सिर्फ उनकी जान बचाने में मदद करेगा, बल्कि उनके मन में बसे डर को भी कम करेगा। अब किसान अधिक आत्मविश्वास के साथ खेतों में काम कर सकेंगे, क्योंकि उन्हें संभावित खतरे की जानकारी पहले ही मिल जाएगी।

  • कर्नाटक कांग्रेस में 30 विधायकों का दिल्ली दौरा, कैबिनेट फेरबदल की मांग तेज…

    कर्नाटक कांग्रेस में 30 विधायकों का दिल्ली दौरा, कैबिनेट फेरबदल की मांग तेज…


    नई दिल्ली। कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है, जहां सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर असंतोष के स्वर खुलकर सामने आने लगे हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार में संभावित कैबिनेट फेरबदल को लेकर पार्टी के भीतर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक कांग्रेस के लगभग 30 वरिष्ठ विधायकों का एक समूह दिल्ली पहुंच चुका है, जहां वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की तैयारी में हैं। इन विधायकों का उद्देश्य राज्य मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की मांग को मजबूती से रखना है। उनका कहना है कि सरकार को बने ढाई से तीन वर्ष हो चुके हैं और अब प्रशासन में नए चेहरों को अवसर देना आवश्यक है, ताकि सरकार में नई ऊर्जा और गति लाई जा सके।

    जानकारी के मुताबिक, यह असंतोष अचानक नहीं उभरा है, बल्कि लंबे समय से पार्टी के भीतर चल रही बैठकों और असंतोषपूर्ण चर्चाओं का परिणाम है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रम और उपचुनावों के बाद विधायकों के एक वर्ग में यह धारणा मजबूत हुई है कि संगठन और सरकार में अपेक्षित बदलाव नहीं किए गए हैं।

    विधायकों का कहना है कि कुछ मंत्री लंबे समय से अपने पदों पर बने हुए हैं, जिससे प्रशासनिक संतुलन और कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। उनका तर्क है कि अनुभवी और नए चेहरों को शामिल करने से सरकार की कार्यप्रणाली और जनता के बीच उसकी स्वीकार्यता और मजबूत होगी।

    इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने संतुलित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट फेरबदल की प्रक्रिया पहले से चल रही है और इसमें देरी का कारण विभिन्न राज्यों में चुनावी व्यस्तता और बजट सत्र है। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री पद की इच्छा रखने वाले विधायकों का दिल्ली जाना स्वाभाविक है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर सभी विषयों पर चर्चा जारी है और समय आने पर उचित निर्णय लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस आगामी चुनावों में मजबूत प्रदर्शन करेगी।

    इस घटनाक्रम के बीच अब सभी की नजरें पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या शीर्ष नेतृत्व विधायकों की मांग के अनुरूप कैबिनेट में बड़ा फेरबदल करता है या मौजूदा व्यवस्था को ही जारी रखने का निर्णय लिया जाता है।

    कर्नाटक कांग्रेस में यह स्थिति एक बार फिर आंतरिक असंतुलन और नेतृत्व की चुनौती को उजागर कर रही है, जिससे राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों में और अधिक हलचल की संभावना बनी हुई है।

  • पंजाब विधानसभा में बेअदबी के खिलाफ ऐतिहासिक कानून पारित, सख्त सजा का प्रावधान लागू

    पंजाब विधानसभा में बेअदबी के खिलाफ ऐतिहासिक कानून पारित, सख्त सजा का प्रावधान लागू

    नई दिल्ली । पंजाब विधानसभा में बेअदबी पर सख्त कानून पारित, दोषियों के लिए आजीवन कारावास तक की कठोर सजा का प्रावधान लागू पंजाब में धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा और बेअदबी जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा के विशेष सत्र में जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन बिल 2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इस कानून के लागू होने के बाद अब बेअदबी जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकेगी। सरकार का कहना है कि यह कदम समाज में शांति, आस्था और धार्मिक सम्मान की रक्षा के लिए बेहद आवश्यक था।

    इस बिल को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा में पेश किया और इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कानून नहीं बल्कि सामाजिक और धार्मिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में लंबे समय से बेअदबी की घटनाएं चिंता का विषय रही हैं और अब इस नए कानून के माध्यम से ऐसी घटनाओं पर सख्त नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य किसी समुदाय को लक्षित करना नहीं बल्कि सभी नागरिकों की धार्मिक भावनाओं की रक्षा करना है।

    नए प्रावधानों के अनुसार अब बेअदबी के मामलों में दोषी पाए जाने पर कठोर सजा के साथ साथ आर्थिक दंड का भी प्रावधान रखा गया है। इसमें अधिकतम पच्चीस लाख रुपये तक का जुर्माना और आजीवन कारावास की सजा शामिल है। इसके अलावा जांच प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है ताकि मामलों की तेजी से जांच हो सके और न्याय में देरी न हो। पहले इन मामलों की जांच सामान्य स्तर के अधिकारियों द्वारा की जाती थी लेकिन अब इसे उच्च स्तर की निगरानी में लाने का निर्णय लिया गया है ताकि जांच प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सके।

    सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने से न केवल दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं में भी कमी आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में धार्मिक ग्रंथों और आस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और इस कानून का उद्देश्य इसी भावना को मजबूत करना है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि ऐसी घटनाओं को रोका जाए और जरूरत पड़ने पर कानूनी ढांचे को और मजबूत किया जाएगा।

    विधानसभा सत्र में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने इसे समय की आवश्यकता बताया और कहा कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में कठोर कानून होना जरूरी है। सरकार का कहना है कि इस नए कानून के बाद न केवल कानूनी कार्रवाई तेज होगी बल्कि लोगों में भी जागरूकता बढ़ेगी और समाज में जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी।

    इस निर्णय के साथ पंजाब सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि धार्मिक स्थलों और पवित्र ग्रंथों के प्रति किसी भी प्रकार की अनादरपूर्ण गतिविधि को अब किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कानून राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

  • पवन खेड़ा प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट पहुंची असम सरकार, राजनीतिक विवाद ने लिया बड़ा रूप..

    पवन खेड़ा प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट पहुंची असम सरकार, राजनीतिक विवाद ने लिया बड़ा रूप..



    नई दिल्ली:   कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से जुड़े एक कानूनी मामले को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। असम सरकार द्वारा उनकी अग्रिम जमानत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस और सत्ताधारी पक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है, जिससे राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।

    मामले में असम सरकार का कहना है कि पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत के लिए हैदराबाद का रुख किया था, जबकि उनके पास ऐसा कोई स्पष्ट कारण नहीं था कि वे असम जाकर संबंधित अदालत में आवेदन नहीं कर सकते थे। इसी आधार पर राज्य सरकार ने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें खेड़ा को राहत दी गई थी। सरकार का तर्क है कि न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया है और मामले की सुनवाई उचित क्षेत्राधिकार में होनी चाहिए।

    इस पूरे विवाद पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने असम के मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि असम के मुख्यमंत्री देश के सबसे भ्रष्ट नेताओं में से एक हैं और वे कानून की पकड़ से बच नहीं सकते। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए राज्य की सत्ता का दुरुपयोग किया जा रहा है, जो संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।

    राहुल गांधी ने आगे कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून का शासन सबसे महत्वपूर्ण है और इन मूल्यों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी पवन खेड़ा के साथ खड़ी है और किसी भी प्रकार के दबाव या भय से पीछे हटने वाली नहीं है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और अधिक तीव्र हो गई है।

    वहीं असम सरकार की याचिका में यह भी कहा गया है कि अग्रिम जमानत की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों की कानूनी जांच जरूरी है। सरकार का मानना है कि इस तरह के मामलों में सही न्यायिक क्षेत्राधिकार का पालन होना चाहिए ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे। इस मामले में पहले तेलंगाना हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा को सीमित अवधि की ट्रांजिट अग्रिम जमानत प्रदान की थी, जिसके बाद उन्हें अस्थायी राहत मिली थी।

    हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी भी व्यक्ति को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सक्षम अदालत तक पहुंचने का अवसर मिलना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने सीमित अवधि के लिए जमानत मंजूर की थी। हालांकि अब असम सरकार ने इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर मामले को एक नई कानूनी दिशा दे दी है।

    यह पूरा घटनाक्रम राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बन गया है, जिसमें एक ओर संवैधानिक अधिकारों की व्याख्या हो रही है तो दूसरी ओर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

  • मार्च में खुदरा महंगाई 3.4 प्रतिशत पर पहुंची, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अंतर देखा गया

    मार्च में खुदरा महंगाई 3.4 प्रतिशत पर पहुंची, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अंतर देखा गया

    नई दिल्ली। देश में खुदरा महंगाई दर मार्च महीने में सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो पिछले महीने फरवरी के 3.21 प्रतिशत की तुलना में मामूली बढ़ोतरी को दर्शाती है। इस वृद्धि के साथ उपभोक्ता मूल्य स्तर में हल्का दबाव देखा गया है, हालांकि कई आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में गिरावट ने कुछ हद तक राहत भी दी है।

    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में मार्च में खुदरा महंगाई दर 3.63 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.11 प्रतिशत रही। इसी अवधि में खाद्य महंगाई दर 3.87 प्रतिशत दर्ज की गई, जो फरवरी के 3.47 प्रतिशत से अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 3.96 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 3.71 प्रतिशत रही, जिससे यह स्पष्ट होता है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में मिला-जुला रुझान देखने को मिला है।

    आंकड़ों के अनुसार कुछ प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। प्याज की कीमतों में भारी कमी देखने को मिली है, जबकि आलू, लहसुन, अरहर दाल, मटर और चना जैसी आवश्यक वस्तुओं के दाम भी घटे हैं। इन वस्तुओं में सालाना आधार पर नकारात्मक महंगाई दर्ज की गई है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली है।

    वहीं दूसरी ओर कुछ वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि भी देखने को मिली है। सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं से जुड़े आभूषणों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा टमाटर और फूलगोभी जैसी सब्जियों के दाम भी पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक रहे, जिससे कुछ क्षेत्रों में महंगाई का दबाव बढ़ा है।

    राज्यों के स्तर पर तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और राजस्थान में खुदरा महंगाई दर राष्ट्रीय औसत से अधिक दर्ज की गई है, जिससे इन राज्यों में कीमतों का दबाव अपेक्षाकृत ज्यादा दिखाई देता है।

    सरकारी व्यवस्था के अनुसार देशभर में हजारों ग्रामीण और शहरी बाजारों से नियमित रूप से कीमतों का डेटा एकत्र किया जाता है, जिसमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी शामिल होते हैं। इस विस्तृत प्रणाली के माध्यम से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तैयार किया जाता है, जिससे महंगाई की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाता है।

  • जलियांवाला बाग शहीदों को राष्ट्रपति और पीएम ने दी श्रद्धांजलि, बताया अमर बलिदान

    जलियांवाला बाग शहीदों को राष्ट्रपति और पीएम ने दी श्रद्धांजलि, बताया अमर बलिदान

    नई दिल्ली। देशभर में आज जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और उनके अद्वितीय बलिदान को भावपूर्ण स्मरण के साथ नमन किया गया। इस अवसर पर द्रौपदी मुर्मू और नरेंद्र मोदी ने शहीदों को याद करते हुए कहा कि उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा को मजबूत करने वाला एक अमर अध्याय है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि जलियांवाला बाग में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों का बलिदान देश के इतिहास में सदैव अमर रहेगा। उन्होंने कहा कि इस दर्दनाक घटना ने स्वतंत्रता के प्रति देशवासियों में नई चेतना और दृढ़ संकल्प का संचार किया, जिसने पूरे राष्ट्र को एकजुट किया। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र सदैव इन शहीदों का ऋणी रहेगा और उनकी देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शहीदों का साहस और त्याग भारतीयों की अदम्य भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उन वीरों ने जिस दृढ़ता के साथ अत्याचार का सामना किया, वह आज भी देशवासियों को न्याय, स्वतंत्रता और गरिमा के मूल्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उस समय की क्रूर घटनाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी और देश में जागरूकता तथा संघर्ष की भावना को और मजबूत किया। उन्होंने समाज को एकजुट रहने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संदेश भी दिया।

    इस अवसर पर अमित शाह ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह घटना औपनिवेशिक शासन की क्रूरता का सबसे भयावह उदाहरण थी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। उन्होंने कहा कि इस घटना ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी और देश में क्रांतिकारी चेतना को बढ़ाया।

    उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के बाद देश में स्वतंत्रता की लौ और तेज हुई, जिसने भगत सिंह और ऊधम सिंह जैसे अनेक महान क्रांतिकारियों को प्रेरित किया।जलियांवाला बाग हत्याकांड भारतीय इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक है, जिसने देश कोएकजुट कर स्वतंत्रता संग्राम को नई गति दी। यह घटना आज भी साहस, बलिदान और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक मानी जाती है और हर पीढ़ी को प्रेरित करती है।

  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम को विकसित और समावेशी भारत की मजबूत नींव बताया गया

    नारी शक्ति वंदन अधिनियम को विकसित और समावेशी भारत की मजबूत नींव बताया गया


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में देशभर से आईं विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित महिलाओं ने भाग लेकर महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक नए युग की शुरुआत का संदेश दिया। सम्मेलन में महिलाओं ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जोरदार स्वागत करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताया तथा इसके लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

    सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करेगा और उन्हें राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज की महिला हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रही है और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

    कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से नीतियों में संवेदनशीलता और संतुलन आएगा, जिससे समाज के सभी वर्गों के हितों को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सकेगा। वक्ताओं का मानना था कि जब महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में आती हैं, तो निर्णय अधिक समावेशी और समाज के वास्तविक जरूरतों के अनुरूप होते हैं।

    प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि यह पहल लंबे समय से प्रतीक्षित थी और अब इसके लागू होने से महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सशक्त बनने का नया अवसर मिलेगा। इससे न केवल लोकतंत्र मजबूत होगा, बल्कि देश के समग्र विकास को भी गति मिलेगी।

    सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने महिला सशक्तीकरण को केवल एक नीति नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देकर ही विकसित भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सकता है।

    कार्यक्रम के दौरान यह भावना स्पष्ट रूप से सामने आई कि मातृशक्ति को सशक्त बनाकर ही राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी और समाज में समानता तथा न्याय का वातावरण स्थापित होगा।

    नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को महिला नेतृत्व के एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां देश की महिलाएं विकास की मुख्यधारा में और अधिक प्रभावी रूप से अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।