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  • CJI सूर्यकांत के सामने ही गुहार लगने लगीं ममता बनर्जी, बोली-संविधान, लोकतंत्र को बचा लीजिए

    CJI सूर्यकांत के सामने ही गुहार लगने लगीं ममता बनर्जी, बोली-संविधान, लोकतंत्र को बचा लीजिए


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने CJI सूर्यकांत से देश के संविधान, लोकतंत्र और न्यायपालिका की रक्षा करने का शनिवार को आग्रह किया। कलकत्ता हाई कोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच के भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में बनर्जी ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत से देश के लोगों को ‘‘एजेंसियों’’ द्वारा गलत तरीके से निशाना बनाये जाने से बचाने का भी आह्वान किया।
    बिना विस्तृत जानकारी दिए उन्होंने कहा, ‘कृपया देश के संविधान, लोकतंत्र, न्यायपालिका, इतिहास और भूगोल को विनाश से बचाएं।’ बनर्जी ने कहा, ‘‘आप (प्रधान न्यायाधीश) हमारे संविधान के संरक्षक हैं, हम आपके कानूनी संरक्षण में हैं। कृपया जनता की रक्षा करें।’’
    न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
    मीडिया ट्रायल को रोकना होगा

    बनर्जी ने कहा, ‘आजकल मामलों के निपटारे से पहले ही ‘मीडिया ट्रायल’ का चलन है; इसे भी रोकना होगा।’ एक जनसभा के बाद अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक पोस्ट में, श्री बनर्जी ने पश्चिम मेदिनीपुर को एक ऐसी भूमि के रूप में चित्रित किया जिसने औपनिवेशिक विरोधी संघर्ष से लेकर 2011 के राजनीतिक उथल-पुथल तक बार-बार दमन के खिलाफ आवाज उठायी है। गौरतलब है कि वर्ष 2011 में टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे के 34 साल के शासन को समाप्त किया था।

    उन्होंने पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के लंबे राजनीतिक प्रतिरोध के इतिहास का भी इस मौके पर जिक्र किया। बनर्जी ने लिखा, “अविभाजित मेदिनीपुर की धरती ने ब्रिटिश साम्राज्य की कठोर पकड़ को चुनौती देते हुए अत्याचार, शोषण और अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध की गर्जना की थी। उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए, पश्चिम मेदिनीपुर के लोग 2011 में लोकतंत्र की बहाली के लिए अग्रणी भूमिका में खड़े हुए।”

    राणा संकल्प सभा में भारी जनसमूह की उपस्थिति का जिक्र करते हुए, तृणमूल नेता ने जोर देकर कहा कि यह भीड़ जनता के उस संकल्प को दर्शाती है जो विभाजन और भेदभाव की उन ताकतों को हराना चाहती है, जिन्हें उन्होंने ‘बंगाल-विरोधी विभाजनकारी ताकतें’ बताया।

  • तमिलनाडु चुनाव : तमिलनाडु कांग्रेस ने आलाकमान पर छोड़ दिया फाइनल फैसला

    तमिलनाडु चुनाव : तमिलनाडु कांग्रेस ने आलाकमान पर छोड़ दिया फाइनल फैसला

    नई दिल्‍ली। कांग्रेस ने शनिवार देर रात चली मैराथन बैठक के बाद घोषणा करते हुए कहा कि तमिलनाडु में पार्टी की चुनावी रणनीति और संभावित सत्ता-साझाकरण गठबंधनों पर अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने की। इसमें तमिलनाडु और पुडुचेरी के 40 से अधिक वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।

    चर्चा के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पार्टी के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने इन वार्ताओं को “रचनात्मक और पार्टी को मजबूत करने पर केंद्रित” बताया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व ने सामूहिक और व्यक्तिगत, दोनों तरह के सत्र आयोजित किए ताकि राज्य के नेता “स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त कर सकें।”

    हालांकि गठबंधन या सत्ता-साझाकरण की मांगों के विशिष्ट विवरण स्पष्ट नहीं किए गए, लेकिन श्री वेणुगोपाल ने पुष्टि की कि राज्य इकाई की चिंताओं को विस्तार से सुना गया है। उन्होंने कहा, “बैठक ने सर्वसम्मति से माननीय कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता को चुनावी रणनीति से संबंधित मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार दिया है।

    पार्टी हाई कमान पार्टी की विचारधारा और तमिलनाडु के लोगों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उचित समय पर निर्णय लेगा।”

    पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और सार्वजनिक अटकलों को रोकने के लिए हाई कमान ने बयानों को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। श्री वेणुगोपाल ने जोर देकर कहा कि सभी नेताओं को अनुशासित रहना चाहिए और सोशल मीडिया सहित किसी भी मंच पर व्यक्तिगत शिकायतों या अटकलों को साझा करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, “नेताओं को एक सुर में बोलने की सलाह दी गई है।”

    पुडुचेरी के संबंध में नेतृत्व ने घोषणा की कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी 21 जनवरी से एक बड़ी ‘पदयात्रा’ शुरू करेगी। यह मार्च पूरे राज्य को कवर करेगा, जिसमें वरिष्ठ राष्ट्रीय नेतृत्व के भी शामिल होने की संभावना है। यह बैठक तमिलनाडु में द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के भीतर कांग्रेस की भूमिका को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच हुई है, जहां स्थानीय इकाइयां कथित तौर पर शासन और सीटों के बंटवारे में बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर रही हैं।

  • असम में पीएम मोदी के दौरे का उत्साह, लोग बोले-काजीरंगा कॉरिडोर से विकास को मिलेगा नया रास्ता

    असम में पीएम मोदी के दौरे का उत्साह, लोग बोले-काजीरंगा कॉरिडोर से विकास को मिलेगा नया रास्ता

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को असम के नगांव जिले में 6,950 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट का भूमि पूजन करेंगे और दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएंगे। इस कार्यक्रम को लेकर असम में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

    भाजपा विधायक दिप्लू रंजन शर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “आज के समय में ‘मोदी मतलब बिजनेस’ और ‘मोदी मतलब विकास’ है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में असम में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का काम तेजी से हो रहा है, जिससे ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प भी साकार होता है।”

    विधायक ने बताया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम को देश के टॉप-5 राज्यों में शामिल करना हमारा लक्ष्य है और प्रधानमंत्री लगातार इसमें मदद कर रहे हैं। शर्मा ने कहा, “पीएम मोदी ने अब तक करीब 36 बार असम का दौरा किया है और पूर्वोत्तर में लगभग 75 बार आए हैं। उनका दृष्टिकोण हमेशा दीर्घकालिक और विकासोन्मुखी होता है।”

    स्थानीय लोगों का कहना है कि काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर न केवल आने-जाने में सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा। “यह प्रोजेक्ट असम के लिए एक नया युग लेकर आएगा और यातायात को बेहतर बनाएगा,” स्थानीय व्यवसायी ने कहा।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग प्रधानमंत्री का स्वागत करने पहुंचे। एक महिला ने कहा, “यह गर्व की बात है कि इतने सालों बाद पीएम मोदी असम आ रहे हैं। उनके काम और असम के प्रति उनके प्रेम के लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं।”

    भाजपा विधायक दिप्लू रंजन शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विज़न असली विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार पर केंद्रित है। उनका यह कार्यक्रम न केवल असम के लोगों के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी मजबूती देगा।

    प्रधानमंत्री मोदी असम में 6,950 करोड़ रुपये के काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का भूमि पूजन करेंगे और दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर राज्य में विकास और रोजगार को बढ़ावा देंगे।

  • ED का दावा… अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने बिना वैरिफिकेशन के नियुक्त किए थे दिल्ली धमाके से जुड़े तीनों डॉक्टर

    ED का दावा… अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने बिना वैरिफिकेशन के नियुक्त किए थे दिल्ली धमाके से जुड़े तीनों डॉक्टर


    नई दिल्ली।
    फरीदाबाद (Faridabad) के अल फलाह विश्वविद्यालय (Al Falah University) ने अन्य विशेषज्ञों के साथ तीन डॉक्टरों की नियुक्ति (Appointment Three Doctors) बिना किसी पुलिस जांच या वेरिफिकेशन के की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) (Enforcement Directorate – ED) की जांच में यह बात सामने आई है कि इन 3 डॉक्टरों में से दो को एनआईए ने गिरफ्तार किया है जबकी तीसरा डॉक्टर उमर उन नबी नवंबर 2025 में दिल्ली के लालकिला के पास हुए धमाके में कथित तौर पर आत्मघाती हमलावर के रूप में शामिल था।


    इन्हें बनाया मुख्य आरोपी

    विश्वविद्यालय के मालिक के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान ED ने कई वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षकों के बयानों को अदालत में दाखिल अपनी चार्जशीट में शामिल किया है। इस मामले में अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और सभी संस्थानों को चलाने वाले अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इन दोनों पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।


    जमीन और इमारत जब्त

    ईडी ने लगभग 260 पन्नों की चार्जशीट में सिद्दीकी और उनके ट्रस्ट पर छात्रों की फीस से अवैध तरीके से पैसा इकट्ठा करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन पर अपने संस्थानों की मान्यता और कागजों के बारे में गलत जानकारी देने के आरोप में केस चलाने की मांग की गई है। ईडी ने बताया कि उसने फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित विश्वविद्यालय की जमीन और इमारत को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है जिसकी कीमत लगभग 140 करोड़ रुपये है।


    नियमित शिक्षक दिखाकर ली एनएमसी से मंजूरी

    अदालत ने अभी तक ईडी की चार्जशीट का संज्ञान नहीं लिया है। अधिकारियों ने चार्जशीट के आधार पर जानकारी दी है कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर केवल कागजों पर तैनात थे। उन्हें 22 दिन पंच या हफ्ते में दो दिन अटेंडेंस जैसी शर्तों पर नियमित शिक्षक दिखाकर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) से जरूरी मंजूरी ली गई थी ताकि मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य सुविधा देखभाल इकाई बिना किसी बाधा के चलती रहे।


    बिना पुलिस सत्यापन आरोपी डॉक्टरों की नियुक्ति

    ईडी ने यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार का बयान दर्ज किया है। रजिस्ट्रार ने बयान में कहा है कि मेडिकल कॉलेज के आरोपी डॉक्टरों को बिना किसी पुलिस सत्यापन के नियुक्त किया गया था। वहीं विश्वविद्यालय की कुलपति और प्राचार्य ने कहा है कि जो डॉक्टर आतंक से जुड़े मामलों में शामिल बताए जा रहे हैं वे उनके कार्यकाल में नियुक्त किए गए। इनमें अक्टूबर 2021 से डॉ. मुजम्मिल गनई, अक्टूबर 2021 से डॉ. शाहीन सईद और मई 2024 से डॉ. उमर नबी शामिल हैं।


    जवाद अहमद सिद्दीकी ने नियुक्ति को दी मंजूरी

    कुलपति और प्राचार्य ने एजेंसी को बताया कि नियुक्तियों की सिफारिश विश्वविद्यालय के मानव संसाधन प्रमुख ने की थी। इन्हें चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी ने मंजूरी दी थी। धमाके की साजिश के आरोपी डॉक्टरों की नियुक्ति के समय पुलिस वेरिफिकेशन नहीं किया गया। चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी ने अपने बयान में कहा है कि उनका किसी आतंकवादी संगठन से कोई संबंध नहीं है।


    कई डॉक्टर अस्थायी नियुक्त

    ईडी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में कर्मचारियों की नियुक्ति पर सिद्धिकी का कंट्रोल था। कुछ को फेक एक्सपीरियंस लेटर भी दिए गए। सिद्धिकी ने जून 2025 में मेडिकल कॉलेज की अंतिम एनएमसी जांच के दौरान भी धोखा देना जारी रखा। ईडी ने निष्कर्ष निकाला कि कई डॉक्टर केवल नियामक निरीक्षण की जरूरत के लिए अस्थायी तौर पर नियुक्त किए गए थे। डॉक्टरों के रोजगार की शर्तें भी कई तरह से फर्जी थीं।


    फेक मरीज किए भर्ती

    आरोपपत्र में संलग्न कुछ दस्तावेज और वीडियो चैट से पता चलता है कि एनएमसी निरीक्षण से लगभग 3 हफ्ते पहले अस्पताल में मरीज, स्टाफ या डॉक्टर मौजूद नहीं थे। रिकॉर्ड से पता चला कि निरीक्षण से पहले फेक मरीज भर्ती किए गए। सिद्धिकी ने धनशोधन मामले में प्रमुख भूमिका निभायी। इस मामले में कथित अपराध से प्राप्त राशि के 493.24 करोड़ रुपये होने का पता चला है जो छात्रों से वार्षिक ट्यूशन और परीक्षा शुल्क के रूप में वसूल की गई।

  • उद्धव ठाकरे का दावा : BMC में अब भी हो सकता है उलटफेर

    उद्धव ठाकरे का दावा : BMC में अब भी हो सकता है उलटफेर


    मुंबई। बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) चुनाव में बीजेपी और शिवसेना शिेंदे गुट की बड़ी जीत के बाद उद्धव ठाकरे को करारा झटका लगा है। हालांकि वह अब भी हार स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं और कह रहे हैं कि मेयर उनका ही बनेगा। उनके इस बयान के बाद शिंदे गुट के पार्षदों को रिजॉर्ट भेज दिया गया।
    देश की सबसे अमीर महानगरपालिका की 89 सीटों पर अकेले बीजेपी ने ही कब्जा किया है। ऐसे में पूरी संभावना है कि मेयर बीजेपी का होगा। लेकिन उद्धव ठाकरे के दावे ने गहमा-गहमी बढ़ा दी है।

    पिछले 25 साल से बीएमसी में अविभाजित शिवसेना का कब्जा था। हालांकि शिवसेना के दो फाड़ होने के बाद समीकरण बदल गए. इस बार के चुनाव में उद्धव सेना को कुल 65 सीटें मिली हैं। वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। अगर दोनों की सीटें जोड़ दी जाएं तो उनकी 94 सीटें हो जाती हैं। वहीं बीजेपी की 89 ही सीटें हैं। ऐसे में अगर शिवसेना बंटी ना होती तो बीजेपी उससे पीछे रह जाती।

    शिवसेना (UBT) नेता सुनील प्रभु ने कहा कि शिवसेना के बंटने की वजह से ही बीजेपी की जीत हो सकती है। पू्र्व कांग्रेस नेता संजय झा ने कहा कि अब भी शिवसेना की ताकत का लोहा सबको मानना चाहिए। अगर शिवसेना एक होती तो बीएमसी में बीजेपी का दांव ही ना लग पाता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर दोनों शिवसेना सम्मान बचाना चाहती हैं तो साथ आएं और बीजेपी को विपक्ष में बैठा दें।

    उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी का मेयर अब भी बन सकता है। इसके बाद शिंदे ने अपने पार्षदों को रिजॉर्ट में शिफ्ट कर दिया। बीजेपी और शिंदे सेना की कुल सीटें 118 हैं। वहीं 227 सीटों वाली महानगरपालिका में बहुमत का जादुई आंकड़ा 114 है। इस बार अजित पवार ने अकेले ही चुनाव लड़ा था।

    उन्होंने कुल तीन सीटें जीती हैं। अगर उनका समर्थन मिलता है तो यह संख्या 121 हो जाएगी।

    दूसरी ओर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की कुल सीटें 71 हैं। इसके अलावा एक सीट एनसीपी (शरद पवार) ने जीती है। कांग्रेस अगर उनके साथ आती है तो 24 सीटें और जुड़ जाएंगी। अगर बीजेपी विरोधी बाकी दल जैसे कि ऐआईएमआईएम और समाजवादी पार्टी का भी साथ मिलता है तो यह संख्या 106 हो जाएगी। अब बहुमत में केवल 8 सीटों की कमी रह जाती है।

    बतादें कि दो दशकों के बाद बाल ठाकरे के बेटे उद्धव और भतीजे राज ठाकरे साथ आए थे। इसके बाद भी उनके साथ आने का फायदा नहीं मिल पाया। ऐसे में कहा जा रहा है कि यह ठाकरे परिवार की बड़ी हार है। हालांकि एकनाथ शिंदे की पार्टी से तुलना करें तो उद्धव की पार्टी काफी आगे है। उद्धव ठाकरे ने 65 सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में बीएमसी में उद्धव ठाकरे मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • PM मोदी ने मालदा रैली में की TMC सांसद के पिता की तारीफ, भाषण के दौरान दी श्रद्धांजलि

    PM मोदी ने मालदा रैली में की TMC सांसद के पिता की तारीफ, भाषण के दौरान दी श्रद्धांजलि


    कोलकाता।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने विभाजन के दौरान मालदा (Malda) को भारत (India) में शामिल कराने में भूमिका निभाने को लेकर अनुभवी वकील और हिंदू महासभा के नेता शिवेंदु शेखर राय (Shivendu Shekhar Rai) को अपने भाषण के दौरान श्रद्धांजलि दी। इसके बाद राय को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई। शिवेंदु के बेटे एवं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के राज्यसभा सदस्य सुखेन्दु शेखर राय (Sukhendu Shekhar Roy) ने संयमित प्रतिक्रिया व्यक्त की है।


    शिवेंदु शेखऱ के प्रयास से बचा मालदा

    मोदी ने शनिवार को मालदा में एक जनसभा में अपने भाषण की शुरुआत शिवेंदु शेखर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। उन्होंने 1947 में शिवेंदु शेखर के योगदान को याद किया जब मुस्लिम लीग द्वारा जिले को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में शामिल करने की मांगों के बीच मालदा का भविष्य अनिश्चित बना हुआ था। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मैं सर्वप्रथम मालदा के महान सपूत शिवेंदु शेखर राय को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं, जिनके प्रयासों से मालदा की पहचान बची रही।’’ उनके इस बयान से श्रोताओं में मौजूद कई लोग चकित हो गये।

    इससे पूर्व दिन में, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने कार्यक्रम में पहले स्मृति चिन्ह के रूप में मोदी को शिवेंदु शेखर राय की एक फ्रेम की हुई तस्वीर भेंट की। यह तस्वीर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने प्रधानमंत्री को दी, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया क्योंकि शिवेंदु शेखर राय के पुत्र तृणमूल सांसद हैं।


    श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सहयोगी थे शिवेंदु शेखर

    स्वतंत्रता-पूर्व मालदा के एक प्रख्यात दीवानी वकील और हिंदू महासभा के नेता शिवेंदु शेखर राय, राजनीतिक विचारधाराओं से परे अपनी व्यापक लोकप्रियता के लिए जाने जाते थे। वह विश्वविद्यालय के दिनों से ही शिक्षाविद और महासभा नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी के घनिष्ठ सहयोगी थे और विभाजन वार्ता के दौरान उन्होंने पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    उनके बेटे सुखेन्दु शेखर राय का कहना है कि जब मालदा को पूर्वी पाकिस्तान में शामिल किए जाने की संभावना आसन्न प्रतीत हुई, तो उनके पिता ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के पिता, प्रख्यात बैरिस्टर एन सी चटर्जी से संपर्क करके इस कदम को चुनौती देने के प्रयास शुरू किए।

    सुखेन्दु शेखर राय के अनुसार चूंकि एन सी चटर्जी दक्षिण बंगाल और कोलकाता को सुरक्षित रखने में व्यस्त थे, इसलिए शिवेंदु शेखर राय ने फिर श्यामा प्रसाद मुखर्जी से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें आगे की कार्रवाई के बारे में सलाह दी और उन्हें बंगाल सीमा आयोग के समक्ष मालदा का ऐतिहासिक, जनसांख्यिकीय और प्रशासनिक मामला व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत करने में सहयोग किया।

    राज्यसभा सदस्य ने बताया कि बिधु शेखर शास्त्री और इतिहासकार सर जदुनाथ सरकार जैसे विद्वानों ने भी आयोग के सामने प्रस्तुत किये गये ज्ञापन तैयार करने में सहायता की।लप्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए सुखेन्दु शेखर राय ने संयमित लेकिन भावुक स्वर में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘‘यह इतिहास है और इसे नकारने की कोई गुंजाइश नहीं है।’’

    उन्होंने कहा कि मालदा भारत में इसलिए बना हुआ है क्योंकि उनके पिता ने इसे भारत में बनाए रखने के आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा, ‘‘कोई राजनीतिक दल इतिहास को अपने हिसाब से ढालने या अस्वीकार करने की कोशिश कर सकता है, इससे मुझे कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन एक ऐसे व्यक्ति के पुत्र के रूप में, जिन्होंने मालदा को भारत में बनाए रखने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, अगर प्रधानमंत्री उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, तो क्या मुझे दुखी होना चाहिए? बिल्कुल नहीं।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि मेरे भाई-बहन, रिश्तेदार और परिवार के सभी सदस्य गर्व महसूस करते हैं। सिर्फ इसलिए कि मैं तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा हूं, क्या मुझे दुखी होना चाहिए? यह तो सरासर बेतुका होगा।’’ मोदी द्वारा भाजपा के मंच से तृणमूल सांसद के पिता का जिक्र करना राजनीतिक रूप से भले ही महत्वपूर्ण हो, लेकिन सुखेन्दु शेखर राय ने इसे समकालीन राजनीतिक संदेश के बजाय लंबे समय से प्रतीक्षित ऐतिहासिक मान्यता के रूप में प्रस्तुत करना बेहतर समझा। उन्होंने कहा, ‘‘यह मालदा के विभाजन काल के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है जिसे आज के राजनीतिक मतभेदों से परे याद रखा जाना चाहिए।’’

  • गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली समेत कई शहरों में आतंकी हमले की साजिश… सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली समेत कई शहरों में आतंकी हमले की साजिश… सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) में लालकिला ब्लास्ट (Red Fort blast) के बाद से सतर्क खुफिया एजेंसियों (Intelligence agencies.) ने गणतंत्र दिवस (गणतंत्र दिवस) से पहले दिल्ली समेत कई राज्यों में बांग्लादेशी आतंकियों (Bangladeshi terrorists) के हमले को लेकर अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों को सतर्क किया गया है कि बांग्लादेशी आतंकी संगठन और खालिस्तान समर्थित संगठन तबाही की साजिश रच रहे हैं।

    दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड में रहने की सलाह दी गई है। साथ ही इन आतंकी संगठनों पर पैनी नजर रखने को कहा गया है।


    एक साथ निशाना बनाने की साजिश

    खुफिया इनपुट के मुताबिक, आतंकी संगठन दिल्ली समेत देश के कई शहरों को एक साथ निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। अलर्ट में कहा गया कि गणतंत्र दिवस से ठीक पहले उत्तर भारत के कुछ शहरों में सक्रिय गैंगस्टरों की इसमें विशेष भूमिका हो सकती है।


    पंजाब के गिरोह मदद कर रहे

    सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क करते हुए कहा गया कि पंजाब में सक्रिय स्थानीय अपराधिक गिरोह और उनके सरगना पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से देश में तबाही मचाने की कोशिश कर रहे हैं।


    स्लीपर सेल भी सक्रिय

    खुफिया एजेंसियों के अनुसार, कुछ स्लीपर सेल और गैंगस्टरों के गुर्गे विदेश से संचालित खालिस्तान समर्थक और कट्टरपंथी संगठनों के आकाओं के इशारे पर काम कर रहे हैं। ये तत्व कट्टरपंथी युवाओं को खालिस्तान समर्थक संदिग्धों से जोड़ने की भी कोशिश कर रहे हैं।


    आईएसआई की भूमिका

    खालिस्तानी संगठनों, बांग्लादेशी आतंकी समूहों के एजेंडे को आगे बढ़ाने में आईएसआई सक्रिय है। आंतरिक सुरक्षा पर हमला करने के लिए आपराधिक नेटवर्क के इस्तेमाल की योजना है। ये संदिग्ध गैंगस्टर हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सक्रिय हैं और खालिस्तानी आतंकी तत्वों से संपर्क बढ़ा रहे हैं।


    दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, चार मॉक ड्रिल की गईं

    दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में मॉक ड्रिल कर सुरक्षा तैयारियों का आकलन किया। जनवरी के पहले पखवाड़े में चार मॉक ड्रिल आयोजित की गईं। इन मॉक ड्रिल में लाल किला, आईएसबीटी कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, खारी बावली, सदर बाजार और मेट्रो स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थान शामिल रहे। इसका उद्देश्य आतंकी घटनाओं से निपटने की तैयारी मजबूत करना और आम लोगों को सतर्क करना है।


    कार धमाके में 15 मरे थे

    दिल्ली में पिछले वर्ष 10 नवंबर को लालकिले के करीब मेट्रो स्टेशन के पास कार में आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी। इस मामलें में डॉक्टर समेत कई आरोपी गिरफ्तार किए गए थे।

  • BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव: आडवाणी और जोशी पहली बार नहीं कर पाएंगे वोटिंग,,, जानें वजह?

    BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव: आडवाणी और जोशी पहली बार नहीं कर पाएंगे वोटिंग,,, जानें वजह?


    नई दिल्ली।
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) (Bharatiya Janata Party – BJP) के इतिहास में 20 जनवरी 2026 का दिन एक बड़े बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। 45 साल के नितिन नवीन (Nitin Naveen) का पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) के रूप में निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है। हालांकि, इस चुनाव में एक चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी के संस्थापक सदस्य लाल कृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) और मुरली मनोहर जोशी (Murali Manohar Joshi) पहली बार मतदान नहीं कर पाएंगे।

    दिसंबर 2025 से पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे नितिन नवीन अब पूर्णकालिक अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। बिहार के बांकीपुर से विधायक और पूर्व मंत्री नितिन नवीन भाजपा के दिग्गज नेता दिवंगत नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के पुत्र हैं। आरएसएस (RSS) की पृष्ठभूमि वाले नवीन को संगठन में गहरी पैठ और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में पार्टी की चुनावी जीत में बड़ी भूमिका के लिए जाना जाता है।

    19 जनवरी को उनका नामांकन होगा और 20 जनवरी को उनकी जीत की औपचारिक घोषणा की जाएगी। उनके नामांकन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह प्रस्तावक बनेंगे।


    आडवाणी और जोशी मतदाता सूची से बाहर क्यों?

    1980 में भाजपा की स्थापना के बाद यह पहला मौका है जब इन दोनों दिग्गजों का नाम अध्यक्ष चुनाव की मतदाता सूची में नहीं है। इसके पीछे कोई राजनीतिक नाराजगी नहीं, बल्कि तकनीकी कारण हैं। पार्टी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय परिषद का सदस्य बनने के लिए संबंधित राज्य में संगठनात्मक चुनाव पूरा होना अनिवार्य है। आडवाणी और जोशी फिलहाल दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य हैं, लेकिन दिल्ली प्रदेश भाजपा में चुनाव अभी लंबित हैं। जब तक दिल्ली में मंडल, जिला और प्रदेश स्तर के चुनाव नहीं हो जाते वहां से राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का चयन नहीं हो सकता। इसी कारण दोनों नेताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके।

    आपको बता दें कि इससे पहले आडवाणी गुजरात (गांधीनगर) और जोशी उत्तर प्रदेश (कानपुर) से परिषद सदस्य हुआ करते थे। सक्रिय राजनीति से हटने के बाद वे दिल्ली से सदस्य बने थे। भाजपा के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी के. लक्ष्मण ने चुनावी कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। 19 जनवरी को दोपहर 2 से 4 बजे तक नामांकन होगा। 19 जनवरी को ही शाम तक नामांकन पत्रों की जांच और वापसी का समय है। 20 जनवरी को यदि आवश्यक हुआ तो मतदान होगा, अन्यथा निर्विरोध चुनाव की घोषणा।

    जेपी नड्डा का स्थान लेने वाले नितिन नवीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए संगठन को तैयार करना और आगामी विधानसभा चुनावों (पश्चिम बंगाल, असम, केरल आदि) में पार्टी के प्रदर्शन को सुधारना होगी। युवा नेतृत्व के माध्यम से भाजपा अब अपनी अगली पीढ़ी की टीम तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

  • अमेरिका सांसदों ने ट्रंप से किया आग्रह… बोले- भारत से टैरिफ कम करवाने के लिए करें बात

    अमेरिका सांसदों ने ट्रंप से किया आग्रह… बोले- भारत से टैरिफ कम करवाने के लिए करें बात


    नई दिल्ली।
    पूरी दुनिया के देश जहां ट्रंप (Trump) से टैरिफ (Tariffs) कम करने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के सांसद (American MP) अपने राष्ट्रपति से आग्रह करते नजर आ रहे हैं कि वह भारत से बात करके टैरिफ कम करवाने की कोशिश करें। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के दो सांसद स्टीव डेंस (मोंटाना) और क्रेविन क्रेमर (नॉर्थ डकोटा) ने पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वह होने वाले समझौते में भारत को दलहन के ऊपर से टैरिफ कम करने का आग्रह करें।

    अमेरिकी राष्ट्रपति (American President Donald Trump) को लिखे अपने पत्र में सांसदों ने बताया कि उनके क्षेत्र मोंटाना और नॉर्थ डकोटा दलहन उत्पान में अग्रणी है। इन क्षेत्रों के दलहन उत्पादन का सबसे बड़ा उपभोक्ता भारत ही है। दलहन के क्षेत्र में भारत की कुल खपत वैश्विक खपत की 27 फीसदी है। लगातार चलते टैरिफ वॉर के बीच सांसदों ने कहा कि भारत ने अमेरिका से आने वाली पीली मटर पर 30 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की है। यह नवंबर 2025 से प्रभावी हो गया है। ऐसे में भारतीय बाजार में अमेरिकी निर्यातकों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

    सांसदों ने ट्रंप से आग्रह किया कि वह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी से बात करें और टैरिफ को कम करने के लिए मनाएं। अगर भारत ऐसा करने के लिए तैयार हो जाता है, तो इससे अमेरिकी निर्यातकों को फायदा होगा और एक हद तक भारत के उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिलेगा। आपको बता दें,अमेरिकी सांसदों द्वारा ट्रंप को लिखा गया यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका ने भारतीय आयात पर 50 फीसदी टैरिफ लागू किया हुआ है। इस 50 फीसदी में से 25 फीसदी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीद के लिए दंड के रूप में लगाया है।


    भारत ने अमेरिकी दलहनों पर क्यों लगाया 30 फीसदी टैरिफ?

    भारत सरकार के राजस्व विभाग ने पीली मटर के आयात के ऊपर 30 प्रतिशत शुल्क की घोषणा पिछली साल अक्तूबर में कर दी थी। विभाग की तरफ से जारी आदेश में कहा गया था कि इस 30 फीसदी टैरिफ में से 10 प्रतिशत मानक दर और 20 फीसदी कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर के रूप में था। नवंबर से जारी हुआ यह आदेश मार्च 2026 तक जारी रहने वाला है। इस आदेश से पहले भारत में पीली मटर के आयात पर कोई शुल्क नहीं था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार की तरफ से उठाया गया यह कदम सस्ते आयात की वजह से घरेलू दालों की गिरती कीमत की वजह था।


    अमेरिकी सांसदों ने किया भारत के कदम का विरोध

    नॉर्थ डकोटा और मोंटाना के सांसदों ने भारत के इस कदम का विरोध किया। उन्होंने कहा कि भारत में पीली मटर के निर्यात को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए 2020 में प्रधानमंत्री मोदी को उन्होंने स्वयं यह पत्र दिया था। लेकिन इसका ज्यादा कोई फायदा नहीं हुआ। भारत ने फिर से वही कदम उठाया है।

  • CG: बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 4 नक्सलियों को किया ढेर, हथियार बरामद

    CG: बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 4 नक्सलियों को किया ढेर, हथियार बरामद


    बीजापुर।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बीजापुर जिले (Bijapur district) में सुरक्षाबलों ने शनिवार को हुई मुठभेड़ के बाद चार नक्सलियों (Four Naxalites) को मार गिराया। इनमें से एक की पहचान नेशनल पार्क एरिया कमेटी (National Park Area Committee) के डीवीसीएम दिलीप बेज्जा के रूप में हुई है, वहीं अन्य तीन नक्सलियों की पहचान की कोशिश की जा रही है। सुरक्षाबलों ने इस कार्रवाई को उस सूचना के बाद अंजाम दिया, जिसमें उसे इलाके में नक्सलियों के बड़े नेता पापाराव समेत अन्य चार माओवादियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। जिसके बाद डीआरजी, कोबरा और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया और कई बार हुई मुठभेड़ के बाद चार नक्सलियों को मार गिराया।

    इस मुठभेड़ की जानकारी देते हुए बस्तर रेंज के आईजी पी.सुंदरराज ने बताया कि ‘बस्तर संभाग के अंतर्गत प्रतिबंधित एवं गैरकानूनी माओवादी संगठन के विरुद्ध प्रभावी रूप से लगातार कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में 17 जनवरी शनिवार को जिला बीजापुर के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में माओवादी संगठन के पापाराव, DVCM दिलीप बेज्जा एवं अन्य माओवादियों की उपस्थिति की सूचना के आधार पर डीआरजी, कोबरा और एसटीएफ की संयुक्त टीम अभियान के लिए रवाना हुई।’

    आगे उन्होंने कहा, ‘इसके बाद तलाशी के दौरान दिन में कई बार माओवादियों एवं सुरक्षाबलों के बीच में मुठभेड़ हुई। फायरिंग खत्म होने के बाद जब इलाके की सर्चिंग की गई तो मौके से चार माओवादियों की डेडबॉडी, दो एके-47 राइफल, एक 303 राइफल और अन्य हथियार सुरक्षाबलों ने बरामद किए।’

    पुलिस अधिकारी ने बताया कि ‘मारे गए माओवादियों में से एक की पहचान डीवीसीएम दिलीप बेज्जा के रूप में हुई है, जो कि नेशनल पार्क एरिया कमेटी का इंचार्ज था, वहीं मुठभेड़ में मारे गए तीन अन्य माओवादियों की शिनाख्त की कोशिश जारी है।’