Category: National

  • संत प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश सुन श्रद्धालु हुए भावुक, बोले– मैं रहूं या न रहूं, आपका साथ कभी नहीं छोड़ूंगा

    संत प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश सुन श्रद्धालु हुए भावुक, बोले– मैं रहूं या न रहूं, आपका साथ कभी नहीं छोड़ूंगा

    नई दिल्ली । देश-दुनिया में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने संत प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य को लेकर इन दिनों भक्तों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। पिछले कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे महाराज जी की नियमित धार्मिक गतिविधियां स्थगित हैं, जिसके बाद उनके अनुयायियों के बीच लगातार बेचैनी बढ़ रही थी। इसी बीच संत प्रेमानंद महाराज ने अपने भक्तों के लिए एक बेहद भावुक और आध्यात्मिक संदेश जारी किया है, जिसने लाखों श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया है।

    काफी समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे संत प्रेमानंद महाराज ने अपने संदेश में भक्तों से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि उन्हें लेकर किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह शरीर नश्वर है और जीवन का नियम परिवर्तन है, लेकिन आत्मिक संबंध कभी समाप्त नहीं होते। उन्होंने अपने श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि चाहे वह इस शरीर में रहें या न रहें, उनका स्नेह, आशीर्वाद और आध्यात्मिक उपस्थिति हमेशा उनके साथ बनी रहेगी। उन्होंने भक्तों से अपनी चिंता छोड़कर पूरी श्रद्धा के साथ श्रीजी के नाम का स्मरण और भजन करने की अपील की।

    बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत ठीक नहीं चल रही है, जिसके कारण उनकी प्रसिद्ध पदयात्रा और नियमित दर्शन कार्यक्रम अस्थायी रूप से स्थगित कर दिए गए हैं। यह निर्णय उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया। उनके दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते रहे हैं और उनकी एक झलक पाने के लिए लोग घंटों इंतजार किया करते हैं। लेकिन स्वास्थ्य में आई गिरावट के बाद परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिला है।

    गौरतलब है कि संत प्रेमानंद महाराज लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कठिन शारीरिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी धार्मिक दिनचर्या और भक्तों से जुड़ाव को कभी कम नहीं होने दिया। शारीरिक कष्ट के बावजूद उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तों के प्रति समर्पण हमेशा लोगों के लिए प्रेरणा का विषय रहा है। यही कारण है कि उनके स्वास्थ्य को लेकर भक्तों की चिंता स्वाभाविक रूप से लगातार बढ़ती रही।

    अपने संदेश में उन्होंने एकांतवास को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनका यह एकांत किसी निजी कारण या व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह उनके आश्रितों और भक्तों के कल्याण से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अब उनका जीवन पूरी तरह अपने अनुयायियों की आध्यात्मिक उन्नति और कल्याण के लिए समर्पित है। साथ ही उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से निर्भय और निश्चिंत रहने की अपील की।

    संत प्रेमानंद महाराज का यह भावुक संदेश केवल स्वास्थ्य अपडेट नहीं बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक संदेश भी माना जा रहा है। उनके शब्दों ने एक बार फिर यह दिखाया कि संतों का रिश्ता केवल शारीरिक उपस्थिति तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह श्रद्धा, विश्वास और आत्मिक जुड़ाव से जुड़ा होता है। यही कारण है कि उनके इस संदेश ने भक्तों के मन को भावुक भी किया और उन्हें आध्यात्मिक रूप से मजबूत होने का संदेश भी दिया।

  • पीएम मोदी की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, बेंगलुरु में विस्फोटक मिलने के बाद प्रशासन का बड़ा कदम

    पीएम मोदी की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, बेंगलुरु में विस्फोटक मिलने के बाद प्रशासन का बड़ा कदम

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक संवेदनशील मामले में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। बेंगलुरु दौरे के दौरान प्रधानमंत्री के निर्धारित कार्यक्रम के आसपास संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिलने के मामले ने सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस महकमे की चिंता बढ़ा दी थी। अब इस पूरे प्रकरण में शुरुआती जांच के आधार पर छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई सुरक्षा में संभावित लापरवाही और चूक को गंभीरता से लेते हुए की गई है, जबकि मामले की जांच अभी भी जारी है।

    जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री 10 मई को बेंगलुरु दौरे पर पहुंचे थे। इसी दौरान शहर के बाहरी इलाके में ऐसी जगह पर दो जिलेटिन की छड़ें मिलने की सूचना सामने आई जो प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित बताई गई। जैसे ही इस घटना की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस प्रशासन तक पहुंची, पूरे विभाग में हलचल मच गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा शुरू कर दी गई और आंतरिक जांच बैठा दी गई।

    इस मामले में पुलिस विभाग ने शुरुआती स्तर पर कार्रवाई करते हुए छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है उनमें एक पुलिस सब इंस्पेक्टर, एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर और चार कांस्टेबल शामिल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों को जांच पूरी होने तक निलंबित रखने का फैसला लिया गया है। प्रशासनिक स्तर पर यह संदेश देने की कोशिश भी मानी जा रही है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

    घटना सामने आने के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप भी ले लिया था। इसे प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय मानते हुए सवाल उठाए गए कि इतने संवेदनशील दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी स्थिति कैसे उत्पन्न हुई। मामले को लेकर राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर भी चर्चा तेज हो गई थी। साथ ही इस घटना के पीछे की परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों की पहचान को लेकर भी जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई थीं।

    प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की सुरक्षा को देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में गिना जाता है। ऐसे में किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि या विस्फोटक सामग्री मिलने की सूचना को अत्यधिक गंभीरता से लिया जाता है। यही कारण है कि इस मामले में भी प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि यह रिपोर्ट तय करेगी कि सुरक्षा व्यवस्था में वास्तविक चूक कहां हुई और इसके पीछे किन परिस्थितियों ने भूमिका निभाई। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि यह केवल लापरवाही का मामला था या इसके पीछे कोई और गंभीर पहलू छिपा हुआ है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने सुरक्षा प्रबंधन को लेकर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • बकरीद से पहले यूपी सरकार सख्त, खुले में नहीं होगी कुर्बानी, सड़क पर नमाज पर रोक

    बकरीद से पहले यूपी सरकार सख्त, खुले में नहीं होगी कुर्बानी, सड़क पर नमाज पर रोक

    लखनऊ। बकरीद और अन्य आगामी त्योहारों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी हालत में सड़क जाम कर नमाज पढ़ने की अनुमति न दी जाए। सभी धार्मिक कार्यक्रम केवल तय और परंपरागत स्थलों पर ही आयोजित किए जाएं।

    बकरीद को लेकर प्रशासन अलर्ट
    मुख्यमंत्री ने संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखने और त्योहारों के दौरान शांति एवं सौहार्द बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने साफ किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    अवैध स्लॉटर हाउस पर कार्रवाई
    राज्य में अवैध स्लॉटर हाउस और खुले में मांस बेचने वालों के खिलाफ भी सख्त अभियान चलाने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन को तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    हर ब्लॉक में लगेगी साप्ताहिक चौपाल
    जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार अब विकास खंड स्तर पर साप्ताहिक चौपाल आयोजित करेगी। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, इन चौपालों में स्थानीय स्तर पर ही शिकायतों का निस्तारण किया जाएगा, ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

    शिकायतों में लापरवाही पर होगी कार्रवाई
    आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

    भू-माफियाओं और अवैध खनन पर विशेष अभियान
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अवैध खनन और भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि अवैध कब्जों और गैरकानूनी गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

  • TMC में बढ़ी अंदरूनी नाराजगी, सांसद काकोली घोष ने जिलाध्यक्ष पद छोड़ा, उठाए सवाल

    TMC में बढ़ी अंदरूनी नाराजगी, सांसद काकोली घोष ने जिलाध्यक्ष पद छोड़ा, उठाए सवाल

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने चुनावी हार की जिम्मेदारी लेते हुए संगठन की कार्यप्रणाली और चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए हैं।

    काकोली घोष दस्तीदार ने चुनाव के दौरान IPAC की भूमिका को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया के समय IPAC टीम की ओर से अनावश्यक दबाव बनाया गया, जिससे पार्टी के कामकाज पर असर पड़ा।

    उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान जिस तरह दबाव बनाने की कोशिश की गई, वह सही तरीका नहीं था। दस्तीदार ने कहा कि उनके क्षेत्र की सभी सीटों पर पार्टी को हार मिली है, इसलिए वह नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ रही हैं। उनके इस बयान के बाद TMC के भीतर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

    अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि बारासात जिले में पार्टी के खराब प्रदर्शन की पूरी जिम्मेदारी वह स्वीकार करती हैं। उन्होंने माना कि हाल के दिनों में भ्रष्टाचार और अपराध से जुड़ी घटनाओं ने जनता के बीच पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है।

    सांसद ने यह भी कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए पार्टी को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और ईमानदार बनने की जरूरत है। उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी से अपील की कि संगठन को मजबूत करने के लिए पुराने और अनुभवी नेताओं को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

    दस्तीदार ने परोक्ष रूप से नई एजेंसियों और खास तौर पर IPAC की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि उन्हें इस तरह की रणनीतिक एजेंसियों की भूमिका पर पूरा भरोसा नहीं है।

    यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस को कई राजनीतिक झटकों का सामना करना पड़ रहा है। कई सीटों पर हार के बाद पार्टी की रणनीति और नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। वहीं पार्टी नेतृत्व लगातार चुनावी अनियमितताओं और EVM गड़बड़ी जैसे मुद्दे उठा रहा है।

    राजनीतिक जानकार काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे को सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि TMC के भीतर बढ़ती नाराजगी और असंतोष के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला राज्य की राजनीति में और हलचल बढ़ा सकता है।

  • TTH प्रोपेगेंडा केस में बड़ा खुलासा, PAK गैंगस्टर शहजाद भट्टी और ISI नेटवर्क की भूमिका आई सामने

    TTH प्रोपेगेंडा केस में बड़ा खुलासा, PAK गैंगस्टर शहजाद भट्टी और ISI नेटवर्क की भूमिका आई सामने

    नई दिल्ली। तहरीके तालिबान हिंदुस्तान (TTH) नामक संगठन से जुड़े प्रोपेगेंडा मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे पाकिस्तानी गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी का नाम जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार शहजाद भट्टी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और अपने सहयोगियों आबिद जट्ट और अजमल गुज्जर के साथ मिलकर इस संगठन का प्रोपेगेंडा फैलाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

    कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने दिल्ली से सोहेल नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसे शहजाद भट्टी की ओर से दिल्ली और फरीदाबाद में TTH नाम की ग्राफिटी बनाने का टास्क दिया गया था। निर्देश के तहत उसे दीवारों और सार्वजनिक स्थानों पर TTH लिखने और उसके नीचे छोटा “S” जोड़ने को कहा गया था, ताकि इसे शहजाद भट्टी से जोड़कर देखा जा सके।

    पुलिस के मुताबिक सोहेल का आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है और उसे इस काम के बदले पैसे दिए गए थे। मामले की आगे जांच जारी है। जांच एजेंसियों ने यह भी दावा किया है कि शहजाद भट्टी और उसके सहयोगियों पर पुलिसकर्मियों की टारगेट किलिंग की साजिश रचने के आरोप भी सामने आए हैं। इसी सिलसिले में हाल ही में दिल्ली पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार किया था, जो कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े हुए थे।

    दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने बाद में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एजेंसियों का कहना है कि इस पूरे मामले से संकेत मिलता है कि TTH नाम के प्रोपेगेंडा नेटवर्क के पीछे संगठित अंतरराष्ट्रीय साजिश हो सकती है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं और भारत में इसके जरिए किस तरह से दुष्प्रचार और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश की जा रही थी।

  • आकाश में 31 मई की रात दिखेगा दुर्लभ नजारा…. Blue Moon होगा पूर्णिमा का चांद

    आकाश में 31 मई की रात दिखेगा दुर्लभ नजारा…. Blue Moon होगा पूर्णिमा का चांद


    नई दिल्ली।
    आसमान (Sky) में होने वाली खगोलीय घटनाएं (Astronomical Events) हमेशा लोगों को आकर्षित करती हैं और मई 2026 के अंत में ऐसा ही एक दुर्लभ नजारा (Rare sight) देखने को मिलने वाला है. इस महीने के दौरान दूसरी बार पूर्णिमा का चंद्रमा (Full Moon) दिखाई देगा, जिसे लोकप्रिय रूप से “ब्लू मून” (Blue Moon) कहा जाता है. यह घटना बहुत कम देखने को मिलती है, इसलिए खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह खास अवसर माना जा रहा है.

    मई 2026 की पहली पूर्णिमा 1 मई को दिखाई दी थी, जबकि दूसरी पूर्णिमा 31 मई को दिखाई देगी. एक ही कैलेंडर महीने में दो पूर्ण चंद्रमा दिखाई देने की वजह से इस दूसरे पूर्णिमा चंद्रमा को Blue Moon कहा जाता है. हालांकि इसके नाम से ऐसा लग सकता है कि चंद्रमा नीले रंग का दिखाई देगा, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता.


    क्या है Blue Moon?

    Blue Moon एक खगोलीय घटना है, जिसमें एक ही कैलेंडर महीने के भीतर दो बार पूर्णिमा आती है. आमतौर पर किसी महीने में केवल एक ही पूर्णिमा होती है, लेकिन कभी-कभी चंद्रमा के चक्र और कैलेंडर की गणना के बीच अंतर के कारण ऐसा अवसर बन जाता है जब एक महीने में दो पूर्णिमा दिखाई देती हैं.

    जब दूसरी पूर्णिमा उसी महीने में आती है, तो उसे Blue Moon कहा जाता है. यह घटना हर साल नहीं होती, इसलिए इसे दुर्लभ माना जाता है. यही कारण है कि दुनिया भर के स्काईवॉचर्स इस घटना का बेसब्री से इंतजार करते हैं.


    31 मई को कब और कहां दिखाई देगा Blue Moon?

    रिपोर्ट के अनुसार, 31 मई 2026 को Blue Moon पूर्वी दिशा के आसमान में उदय होगा. यह सामान्य पूर्णिमा की तुलना में क्षितिज के थोड़ा नीचे दिखाई देगा और कन्या राशि (Virgo Constellation) के दाईं ओर नजर आएगा.

    मौसम साफ रहने पर लोग इसे खुली जगहों से आसानी से देख सकेंगे. शहरों की तेज रोशनी से दूर क्षेत्रों में यह नजारा और भी शानदार दिखाई दे सकता है. चूंकि यह घटना महीने के अंतिम दिन हो रही है, इसलिए इसे वर्ष 2026 के सबसे चर्चित चंद्र घटनाओं में से एक माना जा रहा है.


    Blue Moon नाम क्यों पड़ा?

    कई लोगों को लगता है कि Blue Moon के दौरान चंद्रमा नीला दिखाई देता है, लेकिन वास्तव में इसका रंग सामान्य पूर्णिमा जैसा ही रहता है. “Blue Moon” केवल एक खगोलीय नाम है, जो एक महीने में दूसरी पूर्णिमा को दिया जाता है.

    इस नाम का उपयोग वर्षों से किया जाता रहा है और यह धीरे-धीरे लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा बन गया. हालांकि कुछ विशेष वायुमंडलीय परिस्थितियों में चंद्रमा हल्का नीला दिखाई दे सकता है, लेकिन इसका इस खगोलीय घटना से कोई सीधा संबंध नहीं होता.


    आखिर Blue Moon होता क्यों है?

    Blue Moon की वजह चंद्रमा और कैलेंडर के बीच मौजूद समय का अंतर है. पृथ्वी को अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में 24 घंटे लगते हैं, जिससे एक दिन बनता है. वहीं पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में लगभग 365 दिन लगते हैं, जिससे एक वर्ष बनता है.

    दूसरी ओर, चंद्रमा को पृथ्वी के चारों ओर एक पूरा चक्र पूरा करने में लगभग 29.5 दिन लगते हैं. यदि 12 चंद्र चक्रों को जोड़ा जाए, तो यह एक कैलेंडर वर्ष से लगभग 11 दिन कम होता है. यही अंतर समय के साथ बढ़ता जाता है और कभी-कभी किसी वर्ष में एक अतिरिक्त पूर्णिमा दिखाई देने लगती है. इसी वजह से मई 2026 में दो पूर्णिमा देखने को मिलेंगी.


    मई की पहली पूर्णिमा को क्या कहा गया?

    मई 2026 की पहली पूर्णिमा 1 मई को दिखाई दी थी, जिसे “फ्लावर मून” (Flower Moon) कहा जाता है. यह नाम वसंत ऋतु में फूलों के खिलने से जुड़ा हुआ है. उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में इस समय प्रकृति पूरी तरह खिल उठती है, इसलिए इस पूर्णिमा को Flower Moon का नाम दिया गया. पहली पूर्णिमा और दूसरी पूर्णिमा के बीच लगभग 29.5 दिनों का अंतर होता है. इसी कारण मई के अंत तक एक और पूर्णिमा दिखाई दे रही है, जो Blue Moon के रूप में जानी जाएगी.


    खगोल प्रेमियों के लिए खास मौका

    Blue Moon केवल एक सुंदर दृश्य ही नहीं, बल्कि यह हमें चंद्रमा और पृथ्वी की गति को बेहतर तरीके से समझने का अवसर भी देता है. खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह एक यादगार रात हो सकती है. यदि मौसम साफ रहा तो 31 मई की रात आसमान में चमकता हुआ पूर्ण चंद्रमा एक शानदार दृश्य पेश करेगा।

  • Chardham Yatra: एक माह में 8 लाख से अधिक भक्तों ने किए बाबा केदारनाथ के दर्शन….

    Chardham Yatra: एक माह में 8 लाख से अधिक भक्तों ने किए बाबा केदारनाथ के दर्शन….


    रुद्रप्रयाग।
    केदारनाथ यात्रा (Kedarnath Yatra) को एक माह पूरा हो गया है। इस अवधि में 8 लाख से अधिक तीर्थयात्री बाबा केदार (Baba Kedar) के दर्शन कर चुके हैं। जबकि इस बीच एक लाख से अधिक यात्री वाहन केदारघाटी में पहुंचे हैं। अभी तक की यात्रा में 65 फीसदी युवा एवं 35 फीसदी बुर्जुग एवं अन्य यात्री धाम पहुंचे हैं।

    बीती 22 अप्रैल को भगवान केदारनाथ (Lord Kedarnath) के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खोले गए। पहले ही दिन 38000 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। जबकि इसके बाद यात्री संख्या लगातार बढ़ती रही। अप्रैल माह से लेकर मई माह में निरंतर यात्रियों का सैलाब केदारधाम उमड़ रहा है।


    चारधामों में सबसे अधिक केदारनाथ पहुंचे

    चारधामों में केदारनाथ में सर्वाधिक यात्री पहुंच रहे हैं। 23 मई तक केदारनाथ धाम में 811923 तीर्थयात्रियों ने दर्शन कर लिए हैं। वहीं जून माह में स्कूलों में अवकाश होते ही यात्रियों की संख्या इससे भी अधिक होगी।

    इसके लिए प्रशासन, पुलिस और बीकेटीसी विशेष तैयारियों में लगी है। भीड़ नियंत्रण के लिए आला अधिकारी बैठकें कर योजना बना रहे हैं ताकि सभी यात्रियों को सुलभ दर्शन कराए जा सके। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि अभी तक रिकार्ड यात्री दर्शनों को पहुंचे हैं। अब स्कूलों में अवकाश होते ही यात्री संख्या बढ़ेगी इसके लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।


    39 यात्रियों की हो चुकी मौत

    केदारनाथ यात्रा में कई यात्रियों को मुश्किलें भी उठानी पड़ रही है। ऑक्सीजन की कमी और ठंड के चलते यहां यात्रियों का स्वास्थ्य भी खराब हो रहा है। अभी तक विभिन्न कारणों से 39 यात्रियों की मौत हो चुकी है।


    बीकेटीसी को हो चुकी 14.50 करोड़ की आय

    एक महीने की अवधि में बदरी-केदार मंदिर समिति को 14.50 करोड़ की आय हुई है। बदरी केदार मंदिर समिति बड़ी संख्या में आ रहे तीर्थयात्रियों को सुलभ दर्शन कराने के लिए दिन रात ड्यूटी पर तैनात है। दिनभर में केदारनाथ मंदिर महज 3-4 घंटे ही बंद हो रहा है। अन्य समय मंदिर दर्शनों के लिए खुला रखा गया है।


    30925 यात्री कर चुके हैं हेलीकॉप्टर से यात्रा

    केदारनाथ के लिए 8 हेलीकॉप्टर कम्पनियों से 30025 यात्री यात्रा कर चुके हैं। जबकि हेलीकॉप्टरों ने एक माह की अवधि में कुल 5362 उड़ाने की है। इस दौरान 30925 यात्री हेलीकॉप्टर से केदारनाथ गए जबकि 30822 तीर्थयात्री केदारनाथ से वापस आए।

    घोड़े-खच्चरों से 2 करोड़ 44 लाख की आय
    मुख्य विकास अधिकारी आरएस रावत ने बताया कि केदारनाथ यात्रा में इस साल 7744 घोड़े खच्चर पंजीकृत है जबकि इनसे अभी तक 2 करोड़ 44 लाख 91 हजार की आय प्राप्त हुई है। अभी लम्बी यात्रा शेष है। जिससे आय में भी रिकार्ड इजाफा होगा।

  • भीषण गर्मी के बीच जल्द दस्तक दे सकती है मॉनसून….. इस साल समय से पहले होगी एंट्री

    भीषण गर्मी के बीच जल्द दस्तक दे सकती है मॉनसून….. इस साल समय से पहले होगी एंट्री


    नई दिल्ली।
    केरल (Keral) में भारी बारिश (Heavy Rain) का दौर शुरू हो गया है। इससे संकेत मिलने लगे हैं कि भीषण गर्मी के बीच मॉनसून (Monsoon) की एंट्री जल्द ही हो सकती है। हालांकि, इसे लेकर IMD यानी भारत मौसम विज्ञान ने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा है। अनुमान लगाया जा रहा था कि केरल में मॉनसून (Monsoon) 26 मई तक दस्तक दे सकता है। इधर, राजधानी दिल्ली (Delhi) अभी तीन दिन तपने के लिए तैयार है।


    कहां पहुंचा मॉनसन

    IMD ने रविवार रात जानकारी दी है कि अगले 2 से 3 दिनों के दौरान दक्षिण पश्चिम मॉनसून के अरब सागर के दक्षिण पश्चिम और दक्षिण पूर्व, कोमोरिन इलाके, दक्षिण पूर्व और पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के बचे हुए हिस्सों में बढ़ने के लिए स्थिति अनुकूल है। हालांकि, केरल में मॉनसून पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है।


    केरल में येलो अलर्ट

    25 मई को पतनमतिट्टा, आलाप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्नाकुलम, त्रिशूर, मलप्पुरम, कोझिकोड और वायनाड में येलो अलर्ट जारी किया गया है। जबकि, इसके अगले दिन यानी 26 मई को तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, आलाप्पुझा और एर्नाकुलम में अलर्ट है। 27 मई को केवल तीन जिलों तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और आलाप्पुझा का नाम दिया गया है।

    अंत में 28 मई को तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पतनमतिट्टा, आलाप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम और इडुक्की को इस सूची में शामिल किया गया है। मौसम विभाग ने मानसून के 26 मई को राज्य में दस्तक देने का अनुमान जताया है। विभाग ने 28 मई से तीन जून के बीच केरल के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का भी अनुमान जताया है।


    देश की सबसे गर्म जगह

    कई राज्यों में रविवार को भीषण गर्मी पड़ी जिनमें से महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र का ब्रह्मपुरी 47.2 डिग्री सेल्सियस के साथ देश का सबसे गर्म स्थान रहा। हालांकि, मौसम विभाग ने 29 मई से गर्मी से धीरे-धीरे राहत मिलने का अनुमान लगाया है। आईएमडी ने अपने पूर्वानुमान में कहा, ‘अगले सात दिनों तक मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में तथा अगले 3-5 दिनों तक पूर्वी और उससे सटे प्रायद्वीपीय भारत में लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है।’


    भयंकर गर्मी के आसार

    जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र ने लू की चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले तीन से चार दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। यह भी अनुमान है कि 26 और 27 मई को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में पारा 46-47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

    हालांकि, आंध्र प्रदेश में मौसम की स्थिति इसके विपरीत है। कई जिलों में भीषण गर्मी पड़ रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में आने वाले दिनों में बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने रविवार को चेतावनी जारी की कि अगले तीन दिनों तक भीषण लू चलने की आशंका है।

  • हिंद महासागर में भारत की बढ़ेगी ताकत, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से रणनीतिक और आर्थिक शक्ति को मिलेगा नया आयाम

    हिंद महासागर में भारत की बढ़ेगी ताकत, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से रणनीतिक और आर्थिक शक्ति को मिलेगा नया आयाम

    नई दिल्ली । भारत अपनी समुद्री रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को नई दिशा देने की तैयारी में तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य और समुद्री मार्गों के बढ़ते महत्व के बीच अब हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति को और मजबूत करने की दिशा में बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। इसी क्रम में ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को देश की रणनीतिक सोच, आर्थिक विस्तार और सुरक्षा ढांचे के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञ इसे केवल एक अवसंरचना परियोजना नहीं बल्कि भारत के भविष्य के समुद्री विजन से जोड़कर देख रहे हैं।

    इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी रणनीतिक स्थिति मानी जा रही है। समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मार्गों के करीब स्थित होने के कारण यह क्षेत्र वैश्विक स्तर पर विशेष महत्व रखता है। लंबे समय से भारत अपने व्यापारिक ट्रांसशिपमेंट और समुद्री गतिविधियों के लिए कई विदेशी बंदरगाहों पर निर्भर रहा है, जिससे आर्थिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर चुनौतियां बनी रहती थीं। अब इस परियोजना के जरिए उस निर्भरता को कम करने और देश के भीतर मजबूत समुद्री ढांचा तैयार करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। ऐसे में भारत का इस क्षेत्र में प्रभावी और स्थायी आधार तैयार करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समुद्री मार्गों पर निगरानी, क्षेत्रीय गतिविधियों की जानकारी और रणनीतिक उपस्थिति किसी भी बड़े देश के लिए आज बेहद जरूरी मानी जाती है। इसी वजह से इस परियोजना को भविष्य की सुरक्षा जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    दूसरी ओर यह परियोजना केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। गहरे समुद्री बंदरगाह, आधुनिक बुनियादी ढांचे और बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। बड़े जहाजों की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय कार्गो प्रबंधन की सुविधाओं के विकास से भारत को लंबे समय में आर्थिक लाभ मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इससे व्यापारिक क्षमता बढ़ने के साथ रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिल सकता है।

    हालांकि इस तरह की बड़ी परियोजनाओं के साथ पर्यावरण और स्थानीय समुदायों से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण बन जाते हैं। इसलिए विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती माना जा रहा है। आने वाले समय में ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट केवल एक निर्माण परियोजना नहीं बल्कि भारत की रणनीतिक सोच, समुद्री शक्ति और वैश्विक भूमिका को नई पहचान देने वाला कदम साबित हो सकता है। यह परियोजना भविष्य में भारत की समुद्री ताकत और क्षेत्रीय प्रभाव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की क्षमता रखती है।

  • बैरकों से छत तक फैला हंगामा: कपूरथला जेल में कैदियों की भिड़ंत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    बैरकों से छत तक फैला हंगामा: कपूरथला जेल में कैदियों की भिड़ंत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


    नई दिल्ली। पंजाब की कपूरथला केंद्रीय जेल में हुई हिंसक घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार रात जेल परिसर में अचानक ऐसा माहौल बन गया जिसने पूरे इलाके में हलचल पैदा कर दी। कैदियों के दो गुटों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया और कुछ ही समय में हालात इतने बिगड़ गए कि पूरे जेल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को तत्काल सक्रिय होना पड़ा।

    बताया जा रहा है कि झड़प के दौरान कैदियों ने बैरकों में जमकर तोड़फोड़ की और स्थिति को और गंभीर बनाने की कोशिश की। कुछ स्थानों पर आग लगाने की भी कोशिश की गई, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए। घटना के दौरान कई कैदी बैरकों से बाहर निकलकर जेल परिसर की छतों तक पहुंच गए। अचानक बढ़े इस हंगामे ने जेल प्रशासन की चिंता बढ़ा दी क्योंकि स्थिति कुछ समय के लिए नियंत्रण से बाहर होती दिखाई दी।

    घटना के बाद की गई कार्रवाई में कई चौंकाने वाली चीजें बरामद होने की जानकारी सामने आई है। तलाशी अभियान के दौरान लोहे की छड़ें, लाठियां और मोबाइल फोन जैसी वस्तुएं बरामद की गईं। इन वस्तुओं के मिलने के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतनी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद ऐसी सामग्री जेल के भीतर कैसे पहुंची। जांच एजेंसियां इस पहलू को बेहद गंभीरता से देख रही हैं क्योंकि इससे जेल की आंतरिक सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है।

    घटना के दौरान कुछ कैदियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। हालात को नियंत्रण में लाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया और स्थिति को काबू में करने के लिए विशेष कदम उठाए गए। अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कैदियों को वापस बैरकों में पहुंचाया और पूरे परिसर की दोबारा जांच की गई। इसके बाद सभी कैदियों की गिनती भी की गई ताकि किसी प्रकार की अनहोनी की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

    इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी कई वीडियो सामने आने लगे, जिनमें जेल के भीतर तनावपूर्ण हालात दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। कुछ वीडियो में कैदी अपनी शिकायतें और आरोप भी रखते दिखाई दिए। हालांकि प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और वायरल सामग्री की भी सत्यता पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है और जेल परिसर की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

    फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने जेल प्रशासन के सामने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जेल जैसी संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की चूक गंभीर परिणाम ला सकती है। अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि यह केवल कैदियों के बीच विवाद था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश भी छिपी हुई थी। आने वाले दिनों में जांच के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।