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  • स्लीपर कोच बसों के हादसों में 6 माह में 145 मौतें… केन्द्र ने जारी की जरूरी सुरक्षा गाइडलाइन

    स्लीपर कोच बसों के हादसों में 6 माह में 145 मौतें… केन्द्र ने जारी की जरूरी सुरक्षा गाइडलाइन


    नई दिल्ली।
    पिछले 6 महीनों में देश भर में स्लीपर कोच बसों (Sleeper coach Bus) की अलग-अलग दुर्घटनाओं में तकरीबन 145 लोगों की जान चली गई. स्लीपर कोच बसों (Sleeper coach Bus) में लगातार हो रही आग की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने यात्री सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है. जिसके तहत अब स्लीपर कोच बसों का निर्माण केवल मान्यता प्राप्त कंपनियां ही करेंगी. इसके अलावा मौजूदा बसों में भी सुरक्षा व्यवस्था (Security arrangements) को मजबूत करने के लिए जरूरी गाइडलाइन (Safety Guideline) जारी की गई है.

    पिछले छह महीनों में स्लीपर बसों में होने वाल भयानक एक्सीडेंट में 145 लोगों की मौत के बाद सरकार ने सुरक्षा नियमों को और मजबूत कर दिया है. इसका मकसद लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को सुरक्षित रखना है. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने नए नियमों की घोषणा करते हुए कहा कि, “अब स्लीपर बसों का निर्माण केवल वही ऑटोमोबाइल कंपनियां या निर्माता कर सकेंगे, जिन्हें केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त हो.

    नए नियम के तहत स्थानीय और मैनुअल बॉडी बिल्डर्स को स्लीपर बस बनाने की अनुमति नहीं होगी. सरकार का मानना है कि इससे मैन्युफैक्चरिंग क्वॉलिटी और सेफ्टी लेवल में बड़ा सुधार होगा. ऐसा देखा जाता है कि, ट्रैवेल एजेंसियां लोकल बॉडी मेकर्स से अपने मन माफिक बसों का निर्माण कराती हैं, जिसमें सेफ्टी स्टैंडर्ड पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता है।


    मौजूदा स्लीपर बसों में लगेंगे जरूरी सेफ्टी फीचर्स

    सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि देश में चल रही सभी मौजूदा स्लीपर बसों को अनिवार्य रूप से नए सेफ्टी डिवाइसेज से लैस किया जाए. इनमें फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग, ड्राइवर को नींद का अलर्ट देने वाला सिस्टम यानी ADAS, इमरजेंसी एग्जिट और सेफ्टी हैमर शामिल हैं. सरकार का मानना है कि, ये सेफ्टी फीचर्स और डिवाइसेज किसी भी आपात स्थिति में बड़े मददगार साबित होंगे।

    AIS-052 और नए बस बॉडी कोड का पालन जरूरी
    नए नियमों के अनुसार सभी स्लीपर बसों को AIS-052 बस बॉडी कोड और मॉडिफाइड बस बॉडी कोड का पालन करना अनिवार्य होगा. यह मॉडिफाइड कोड 1 सितंबर 2025 से लागू हो चुका है. इसके बिना किसी भी स्लीपर बस को ऑपरेट नहीं किया जा सकेगा. यानी ऐसी बसें जो इस कोड का पालन नहीं करती हैं वो सड़कों पर नहीं दिखेंगी।


    क्या है AIS-052 बस बॉडी कोड

    AIS-052 यानी ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड-052 भारत का आधिकारिक बस बॉडी सेफ़्टी और डिजाइन कोड है. इसमें बस के मैन्युफैक्चरिंग, स्ट्रक्चर और सेफ्टी से जुड़े जरूरी स्टैंडर्ड तय किए गए हैं. चाहे बस फैक्ट्री में बनी हो या कोच बिल्ट हो, रजिस्ट्रेशन और सड़क पर चलने से पहले इन नियमों का पालन जरूरी होता है. यह स्टैंडर्ड केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है।

    सरकार का कहना है कि इन कड़े कदमों का उद्देश्य भविष्य में होने वाली दुखद घटनाओं को रोकना और लंबी दूरी की स्लीपर कोच सेवाओं में यात्रियों की सुरक्षा को काफी बेहतर बनाना है. नए नियमों से स्लीपर बसों की क्वॉलिटी और भरोसे में भी इजाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • तुर्कमान गेट घटनाओं के बाद, जुमे की नमाज में हाई अलर्ट मोड, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई

    तुर्कमान गेट घटनाओं के बाद, जुमे की नमाज में हाई अलर्ट मोड, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई

    नई दिल्‍ली । तुर्कमान गेट इलाके में बीते दिनों पत्थरबाजी और हिंसा की घटना के बाद आज दिल्ली की ऐतिहासिक फैज-ए-इलाही मस्जिद में जुमे की नमाज को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए इलाके में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। दिल्ली पुलिस के साथ पैरामिलिट्री फोर्स की भारी तैनाती, ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी तथा कड़े प्रतिबंधों के बीच नमाज अदा कराई जा रही है। प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन दोनों ने लोगों से शांति, संयम और सहयोग बनाए रखने की अपील की है।

    दरअसल तुर्कमान गेट इलाके में हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस के साथ सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों की तैनाती की गई है। मस्जिद परिसर और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग कर दी गई है, वहीं हर आने-जाने वाले पर कड़ी नजर रखी जा रही है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार जुमे की नमाज के बाद भी सुरक्षा बल इलाके में तैनात रहेंगे। ड्रोन कैमरों और अतिरिक्त सीसीटीवी की मदद से पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    तुर्कमान गेट हिंसा की पृष्ठभूमि

    गौरतलब है कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की टीम तुर्कमान गेट इलाके में अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास पहुंची थी। इस कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। आरोप है कि बड़ी संख्या में लोगों ने पुलिस और एमसीडी कर्मियों पर पथराव किया, जिसमें 10 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग, आंसू गैस और लाठीचार्ज करना पड़ा था। घटना के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा के मद्देनजर सील कर दिया गया था और बीएनएस की धारा 163 लागू कर दी गई थी, जिसके तहत चार या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई। पुलिस ने इस मामले में दंगा, सरकारी काम में बाधा और हिंसा से जुड़ी धाराओं में कई एफआईआर दर्ज की हैं।

    जांच और कानूनी कार्रवाई

    दिल्ली पुलिस ने हिंसा की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक और तकनीकी जांच शुरू की है। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह भी जांच की जा रही है कि कहीं हिंसा किसी संगठित साजिश का हिस्सा तो नहीं थी। अब तक कई लोगों को हिरासत में लिया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शांति भंग करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही यह भी दोहराया गया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई थी और इसका उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था और यातायात को सुचारु बनाना था।

    जुमे की नमाज को लेकर मस्जिद की अपील आई सामने

    फैज-ए-इलाही मस्जिद के मुख संरक्षक नजमुद्दीन चौधरी ने हालात की नजाकत को देखते हुए लोगों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी तरह की अफवाह या उकसावे से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि संभव हो तो लोग अपने घर या नजदीकी मस्जिद में नमाज अदा करें, ताकि अनावश्यक भीड़ न जुटे। वहीं, दिल्ली पुलिस ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें। अफवाहों पर रोक लगाने के लिए साइबर सेल को विशेष रूप से सक्रिय किया गया है।

    राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

    तुर्कमान गेट हिंसा और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलकों में भी बहस तेज है। कुछ विपक्षी नेताओं ने कार्रवाई के समय और तरीके पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन और सत्तापक्ष का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि तुर्कमान गेट और फैज-ए-इलाही मस्जिद क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था में कोई ढील नहीं दी जा रही। जुमे की नमाज को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। अधिकारियों ने दोहराया कि शांति और सौहार्द बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसी सहयोग से इलाके में सामान्य स्थिति बहाल कराए जाने का प्रयास जारी रहेगा।

  • Magh Mela 2026: मकर संक्रांति पर शुभ स्नान का महासंयोग! नोट करें शुभ समय और महत्व

    Magh Mela 2026: मकर संक्रांति पर शुभ स्नान का महासंयोग! नोट करें शुभ समय और महत्व

    Magh Mela 2026 Snan: माघ मेले का दूसरा प्रमुख स्नान 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर किया जाएगा. मकर संक्रांति साल की सभी संक्रांतियों में खास स्थान रखती है, क्योंकि इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं और इसे देवताओं का समय, अत्यंत शुभ और मंगलकारी काल माना जाता है. इस दिन प्रयागराज के माघ मेले के दौरान गंगा में स्नान करना बेहद पुण्यकारी माना जाता है और इसे हजारों यज्ञ करने के समान फल मिलता है. मकर संक्रांति के इस शुभ और महापुण्य काल में दान, त्याग और साधना करने का फल भी अत्यधिक बढ़ जाता है. यही कारण है कि माघ मेले में मकर संक्रांति का स्नान और दान लोगों के लिए विशेष महत्व रखते हैं.

    माघ मेले का दूसरा स्नान

    प्रयागराज का माघ मेला इस बार 45 दिनों तक चलेगा. मकर संक्रांति इस वर्ष 14 जनवरी को है, और इसी दिन षटतिला एकादशी भी है, जिससे स्नान का पुण्य और दोगुना हो जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, पौष पूर्णिमा पर संगम में 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया था. मकर संक्रांति पर लगभग 1 करोड़ श्रद्धालु स्नान करने का अनुमान है.मकर संक्रांति उत्तरायण सूर्य के आगमन का प्रतीक है और इसे अत्यंत शुभ और पुण्यकारी माना जाता है. इस दिन गंगा में स्नान और दान करने से आत्मा की शुद्धि, मानसिक शांति और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है.

    मकर संक्रांति स्नान का शुभ मुहूर्त

    इस वर्ष मकर संक्रांति पर विशेष पुण्यकाल दोपहर 3:13 बजे से शुरू होकर शाम 5:20 बजे तक रहेगा. इसी समय को महापुण्यकाल भी माना गया है, जब किए गए धार्मिक कर्म और दान अत्यधिक फलदायी माने जाते हैं.
    ब्रह्म मुहूर्त स्नान

    शास्त्रों के अनुसार माघ मेले के दौरान ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इस बार मकर संक्रांति पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 बजे से लेकर 5:44 बजे तक रहेगा, जो भक्तों के लिए स्नान और ध्यान का सर्वोत्तम समय है.

    माघ मेले में मकर संक्रांति स्नान का महत्व

    मकर संक्रांति का स्नान आत्मा, आध्यात्म और गहरी आस्था का अद्वितीय महासंगम माना जाता है. इस दिन सूर्य अपने उत्तरायण पथ पर निकलता है. माघ मेले में गंगा में स्नान करने वाले श्रद्धालु भी अपने जीवन के अंधकार जैसे पाप, अशांति और बाधाओं को दूर करने की कामना करते हैं.

    स्नान के साथ दान, पूजा और भजन-कीर्तन भी पुण्य को बढ़ाते हैं. मकर संक्रांति पर माघ मेले में डुबकी लगाने से न केवल आत्मिक शुद्धि होती है, बल्कि मानसिक शांति, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है. यही कारण है कि माघ मेले का मकर संक्रांति स्नान लाखों श्रद्धालुओं के लिए जीवन में नए आरंभ और आध्यात्मिक पुनर्जन्म का प्रतीक बन जाता है.

    माघ मेंले में होते हैं ये स्नान

    1. पौष पूर्णिमा स्नान

    तिथि: 3 जनवरी 2026

    माघ मेले की शुरुआत इसी दिन होती है. संगम में स्नान किया जाता है . इससे पूर्वजों को तृप्ति मिलती है.
    2. माघी पूर्णिमा स्नान

    तिथि: 17 जनवरी 2026

    इस दिन स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है.

    3. मकर संक्रांति स्नान

    तिथि: 15 जनवरी 2026

    मकर संक्रांति के दिन सूर्य का उत्तरायण में प्रवेश होता है. इस दिन संगम में स्नान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है .

    4. मौनी अमावस्या स्नान

    तिथि: 18 जनवरी 2026

    मौनी अमावस्या माघ मेले का सबसे पवित्र दिन माना जाता है. मौन व्रत रखने और संगम में स्नान करने से आत्मिक शांति मिलती है.

    5. महाशिवरात्रि स्नान

    तिथि: 15 फरवरी 2026

    माघ मेले का समापन महाशिवरात्रि के दिन होता है. इस दिन संगम में स्नान करने से सभी पाप समाप्त होते हैं . इस स्नान से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

  • स्लीपर बस या चलता-फिरता खतरा? सैकड़ों मौतों के बाद सरकार ने कसे शिकंजे

    स्लीपर बस या चलता-फिरता खतरा? सैकड़ों मौतों के बाद सरकार ने कसे शिकंजे

    नई दिल्ली। पिछले छह महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में स्लीपर कोच बसों से जुड़े भीषण सड़क हादसों और आग की घटनाओं ने परिवहन व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया। इन दुर्घटनाओं में अब तक करीब 145 यात्रियों की जान जा चुकी है। खासतौर पर रात के समय लंबी दूरी की यात्रा करने वाली स्लीपर बसों में आग लगने और आपात निकास की कमी के चलते जान-माल का भारी नुकसान हुआ। बढ़ते हादसों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला किया है।
    मान्यता प्राप्त कंपनियां ही बनाएंगी स्लीपर बस
    केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नए नियमों की घोषणा करते हुए कहा कि अब स्लीपर कोच बसों का निर्माण केवल वही ऑटोमोबाइल कंपनियां या बॉडी बिल्डर्स कर सकेंगे, जिन्हें केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त होगी। स्थानीय और मैनुअल बॉडी बिल्डर्स को स्लीपर बस बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे निर्माण गुणवत्ता में सुधार होगा और सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा।
    मौजूदा बसों में भी अनिवार्य होंगे नए सेफ्टी फीचर्स
    सरकार ने केवल नई बसों ही नहीं, बल्कि सड़कों पर चल रही सभी मौजूदा स्लीपर बसों में भी अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया है। इनमें फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, सेफ्टी हैमर, ड्राइवर की नींद का अलर्ट देने वाला सिस्टम और एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) शामिल हैं। इन सुविधाओं से आपात स्थिति में यात्रियों की जान बचाने में मदद मिलेगी।
    AIS-052 बस बॉडी कोड का पालन जरूरी
    नए नियमों के तहत सभी स्लीपर बसों को AIS-052 बस बॉडी कोड और संशोधित बस बॉडी कोड का पालन करना अनिवार्य होगा। यह संशोधित कोड 1 सितंबर 2025 से प्रभावी हो चुका है। बिना इस मानक को पूरा किए किसी भी स्लीपर बस का रजिस्ट्रेशन या संचालन संभव नहीं होगा। जो बसें इन नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन्हें सड़कों से हटाया जा सकता है।
    यात्रियों की सुरक्षा होगी मजबूत
    AIS-052 भारत का आधिकारिक बस बॉडी सेफ्टी और डिजाइन मानक है, जिसमें बस की संरचना, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े जरूरी प्रावधान तय किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन सख्त कदमों का मकसद भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोकना और स्लीपर कोच सेवाओं को सुरक्षित, भरोसेमंद और आधुनिक बनाना है। नए नियमों से न सिर्फ यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि देश में सड़क सुरक्षा को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
  • बजट 2026 की उम्मीदें क्या मिडिल क्लास को मिलेगा राहत या फिर टैक्स की नई टेंशन

    बजट 2026 की उम्मीदें क्या मिडिल क्लास को मिलेगा राहत या फिर टैक्स की नई टेंशन


    नई दिल्ली । जैसे-जैसे फरवरी का महीना नजदीक आता है, देश के करोड़ों नौकरीपेशा और मध्यम वर्गीय परिवारों की निगाहें वित्त मंत्री के बजट भाषण पर टिक जाती हैं। 1 फरवरी 2026 को मोदी सरकार का तीसरा पूर्ण बजट पेश किया जाएगा, जो केवल आंकड़ों का हिसाब-किताब नहीं बल्कि आम आदमी की जेब और उसकी बचत का भविष्य तय करेगा।

    मौजूदा टैक्स सिस्टम का अंतिम बजट

    इस बार का यूनियन बजट 2026-27 खास और ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि यह मौजूदा इनकम टैक्स कानून के तहत पेश होने वाला आखिरी पूर्ण बजट होगा। सरकार 1 अप्रैल 2026 से नए ‘Income Tax Act 2025’ को लागू करने की तैयारी कर रही है, जो करीब 60 साल पुराने टैक्स कानूनों को बदलने वाला है। ऐसे में, यह बजट न केवल वर्तमान टैक्स व्यवस्था को सुधारने की दिशा में अहम कदम होगा, बल्कि आने वाली टैक्स व्यवस्था की नींव भी रखेगा। आइए जानते हैं कि इस बार के बजट से टैक्सपेयर्स को किन प्रमुख राहतों की उम्मीद है

    पुराने टैक्स रिजीम का दर्द: क्या मिलेगा राहत

    पिछले साल, यानी बजट 2025 में, सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम को आकर्षक बना दिया था। इसमें 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स-फ्री करने और बेसिक छूट सीमा को 4 लाख रुपये तक बढ़ाने जैसे फैसले किए गए थे। हालांकि, इसका फायदा उन लोगों को कम हुआ जिन्होंने ‘ओल्ड टैक्स रिजीम पुराना टैक्स सिस्टम अपनाया है। पुराने सिस्टम में टैक्स देने वाले लोग पीएफ होम लोन और इंश्योरेंस जैसी योजनाओं के जरिए अपनी बचत पर जोर देते हैं।

    इन लोगों की सबसे बड़ी मांग है कि बेसिक छूट सीमा जो अभी 2.5 लाख रुपये पर अटकी हुई है उसे बढ़ाकर कम से कम 3 लाख रुपये किया जाए। इसके अलावा, धारा 80C के तहत मिलने वाली 1.5 लाख रुपये की छूट अब महंगाई के दौर में नाकाफी हो चुकी है। टैक्सपेयर्स की मांग है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 2 लाख रुपये किया जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई स्वास्थ्य बीमा और अन्य आवश्यक खर्चों को ध्यान में रखते हुए उन्हें राहत मिल सके।

    घर और इलाज पर राहत मिडिल क्लास की बड़ी जरूरत

    महंगाई के इस दौर में घर खरीदना और बीमारी का इलाज कराना मिडिल क्लास के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। टैक्सपेयर्स का मानना है कि राहत केवल टैक्स स्लैब बदलने से नहीं मिलेगी बल्कि जरूरी खर्चों पर छूट देने से ही असली फायदा होगा। खासतौर पर होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली 2 लाख रुपये की छूट अब घर की बढ़ती कीमतों को देखते हुए बहुत कम लगती है। ऐसे में उम्मीद है कि सरकार होम लोन ब्याज छूट को बढ़ाकर अधिक लाभकारी बनाएगी।इसके अलावा मिडिल क्लास की यह भी मांग है कि अगर सरकार न्यू टैक्स रिजीम को भविष्य के लिए स्थायी बनाना चाहती है तो इसमें स्वास्थ्य बीमा और होम लोन पर टैक्स छूट की सुविधा भी शामिल की जाए। इससे बचत और निवेश को बढ़ावा मिलेगा और मिडिल क्लास को राहत मिलेगी।

    आसान नियम और सरल टैक्स प्रक्रिया

    टैक्सपेयर्स केवल टैक्स कम करने की उम्मीद नहीं कर रहे, बल्कि वे जटिल प्रक्रियाओं से भी राहत चाहते हैं। कई बार इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद रिफंड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है या फिर टीडीएस मैचिंग में समस्याएं आती हैं। नए से सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि नियमों को सरल और स्पष्ट बनाया जाए।इसके अलावा ईयर की जगह टैक्स ईयर का कॉन्सेप्ट लाने की चर्चा भी हो रही है जो प्रक्रिया को और भी सरल बनाएगा। साथ ही टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि कैपिटल गेन टैक्स से जुड़ी जटिलताओं को दूर किया जाएगा। फिलहाल शेयर बाजार म्यूचुअल फंड और प्रॉपर्टी पर अलग-अलग टैक्स नियम लागू हैं जिससे भ्रम पैदा होता है। लोग चाहते हैं कि सभी एसेट्स के लिए एक जैसी और सरल टैक्स व्यवस्था लागू हो।

    टैक्स स्लैब में बदलाव: क्या मिलेगा राहत

    मिडिल क्लास उम्मीद कर रहा है कि टैक्स स्लैब में भी कुछ बदलाव किए जाएं ताकि उनकी टैक्स भार को हल्का किया जा सके। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि आयकर स्लैब की सीमा को बढ़ाने से टैक्सपेयर्स को सीधा फायदा होगा। खासकर उन लोगों को जिनकी आय 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये के बीच है उन्हें राहत की जरूरत है। इस स्लैब को बढ़ाकर टैक्स रेट को कम किया जा सकता है।

    भविष्य की टैक्स व्यवस्था क्या है नई उम्मीदें

    वित्त मंत्री द्वारा पेश किए जाने वाले बजट 2026 में सबसे बड़ी उम्मीद यही होगी कि नए टैक्स कानूनों का खाका तैयार किया जाएगा ताकि टैक्सपेयर्स को आने वाले समय में सटीक और सही जानकारी मिल सके। नए टैक्स कानूनों का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को और अधिक पारदर्शी सटीक और आसान बनाना होगा ताकि आम नागरिक को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। बजट 2026 के जरिए मिडिल क्लास और नौकरीपेशा वर्ग को उम्मीद है कि सरकार उनके लिए टैक्स राहत, आसान नियम, और आवश्यक खर्चों पर छूट की सुविधाएं प्रदान करेगी। इस बजट का असर सीधे-सीधे लाखों लोगों की जेब और जीवनशैली पर पड़ेगा, इसलिए इस बार के बजट में टैक्सपेयर्स को खास राहत मिलने की उम्मीदें जताई जा रही हैं।

  • वंदे मातरम् के 150 साल भारतीय सेना का बैंड कार्यक्रम, इंडिया गेट से नैहाटी तक पूरे देश में धूम

    वंदे मातरम् के 150 साल भारतीय सेना का बैंड कार्यक्रम, इंडिया गेट से नैहाटी तक पूरे देश में धूम


    नई दिल्ली । भारतीय सेना वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने के अवसर पर देश भर में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। इसके तहत 19 से 26 जनवरी 2026 तक भारतीय सेना कई प्रमुख शहरों में मिलिट्री बैंड की परफॉर्मेंस पेश करेगी। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व को सम्मान देना है, बल्कि देशवासियों में देशभक्ति एकता और राष्ट्रीय गर्व की भावना को भी मजबूत करना है।

    कार्यक्रम का शेड्यूल

    इस विशेष कार्यक्रम का हिस्सा बनने वाले प्रमुख शहरों में बिहार के पटना और गया, झारखंड के रांची, उत्तर प्रदेश के लखनऊ और प्रयागराज, उत्तराखंड के देहरादून, छत्तीसगढ़ के रायपुर, ओडिशा के गोपालपुर कर्नाटक के बेंगलुरु, मध्य प्रदेश के जबलपुर ,महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे, तेलंगाना के हैदराबाद हिमाचल प्रदेश के शिमला, लद्दाख के कारगिल ,राजस्थान के जयपुर और दिल्ली के इंडिया गेट शामिल हैं। इन बैंड परफॉर्मेंस का उद्देश्य भारतीय सेना के संगीत और सेना के गौरव को प्रदर्शित करना है साथ ही लोगों में एकता और राष्ट्रीय गौरव का एहसास दिलाना है।

    वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जन्मस्थली पर कार्यक्रम

    विसेष महत्व रखने वाले कार्यक्रमों में से एक पश्चिम बंगाल के नैहाटी में आयोजित होगा, जो वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जन्मस्थली है। यहां सेना के बैंड द्वारा खास प्रस्तुति दी जाएगी। यह कार्यक्रम वंदे मातरम् के इतिहास को सम्मान देने और लोगों में देशभक्ति का भाव जागृत करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

    दिल्ली में इंडिया गेट पर आर्मी सिम्फनी बैंड की विशेष प्रस्तुति

    18 जनवरी 2026 को दिल्ली के इंडिया गेट पर आर्मी सिम्फनी बैंड का एक विशेष परफॉर्मेंस आयोजित होगा। इस कार्यक्रम का समय दोपहर 2 से 5 बजे के बीच होगा और यह आयोजन वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व को सम्मानित करने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय गर्व को प्रदर्शित करेगा। सभी कार्यक्रम करीब 45 मिनट के होंगे, जो दर्शकों को भारतीय सेना की संगीत कला और देशभक्ति की भावना से प्रेरित करेंगे। इस दौरान हर शहर में सेना के मिलिट्री बैंड की लयबद्ध धुनें गूंजेंगी जो ना केवल ऐतिहासिक दृष्टिकोण से बल्कि देशवासियों के दिलों में गहरी पैठ भी बनाएंगी।

    देशभर में एकता और गौरव की लहर

    इन कार्यक्रमों का उद्देश्य वंदे मातरम् की अनमोल धुन और उसके संदेश को जनता तक पहुंचाना है। इस आयोजन के माध्यम से भारतीय सेना ने देशभर में एकता और राष्ट्रीय गौरव की लहर को फैलाने का एक बड़ा कदम उठाया है। भारत के इतिहास और संस्कृति में वंदे मातरम् का जो स्थान है, उसे और भी मजबूत बनाने की दिशा में यह आयोजन अहम साबित हो सकता है।

  • बीजेपी ने नेहरू पर निशाना साधा, सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के विरोध में लिखे थे 17 पत्र

    बीजेपी ने नेहरू पर निशाना साधा, सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के विरोध में लिखे थे 17 पत्र


    गुजरात। गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर, जिसे महमूद ग़ज़नी और अलाउद्दीन खिलजी जैसे आक्रमणकारियों ने लूटा था अब 1000 साल का उत्सव मना रहा है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर से पंडित जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा है, जिनकी सरकार ने स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि पंडित नेहरू ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को 17 पत्र लिखे थे जिनमें उन्होंने सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के खिलाफ अपनी नापसंदगी व्यक्त की थी।

    सुधांशु त्रिवेदी ने 21 अप्रैल, 1951 को नेहरू द्वारा लियाकत अली खान को लिखे पत्र का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पंडित नेहरू ने मंदिर के पुनर्निर्माण के प्रयास को झूठा बताया और इसे लेकर किसी प्रकार की आस्था या राजनीति को अस्वीकार किया। त्रिवेदी ने कहा कि नेहरू ने लियाकत अली खान को प्रिय नवाबजादा कहकर संबोधित किया और सोमनाथ मंदिर के बारे में किसी भी पुनर्निर्माण के प्रयास की बात से इनकार किया।

    इस पत्र को बीजेपी ने तुष्टीकरण की राजनीति का उदाहरण बताते हुए कहा कि नेहरू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को खुश करने के लिए यह कदम उठाया। सुधांशु त्रिवेदी ने यह भी दावा किया कि पंडित नेहरू ने एक तरह से पाकिस्तान के प्रति आत्मसमर्पण करते हुए सोमनाथ मंदिर के निर्माण को नकार दिया था और यह दिखाता है कि स्वतंत्र भारत में नेहरू को भगवान सोमनाथ से सबसे ज्यादा नफरत थी।

    बीजेपी के प्रवक्ता ने यह सवाल भी उठाया कि अगर यह तुष्टीकरण की राजनीति और मुग़ल आक्रमणकारियों के महिमामंडन के अलावा कुछ और था तो पंडित नेहरू को लियाकत अली खान को पत्र क्यों लिखना पड़ा उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के बाद के दौर में पंडित नेहरू ने भारतीय संस्कृति धार्मिक आस्थाओं और इतिहास से दूर रहते हुए पाकिस्तान के साथ संबंधों को प्राथमिकता दी।

    सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के इस विवाद ने कई बार राजनीतिक हलकों में चर्चा पैदा की है, जहां एक तरफ बीजेपी इसे भारतीय संस्कृति और धार्मिक पुनर्निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानती है वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इस मुद्दे पर विभाजन और तुष्टीकरण की राजनीति के आरोप लगाता रहा है।

    वर्तमान में सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का यह उत्सव न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारतीय राजनीति और इतिहास को भी पुन परिभाषित करने का एक अवसर बन चुका है। सोमनाथ के पुनर्निर्माण की कहानी को लेकर न केवल हिंदू धर्म के अनुयायी बल्कि भारतीय राजनीति में भी एक गहरी बहस छिड़ चुकी है।

  • शुरू हुई जनगणना की प्रक्रिया, पहले चरण के लिए टाइमलाइन घोषित

    शुरू हुई जनगणना की प्रक्रिया, पहले चरण के लिए टाइमलाइन घोषित

    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को भारत की जनगणना 2027 के पहले चरण यानी हाउसिंग और हाउसलिस्टिंग की समय-सीमा को औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिया। इसके तहत मकान सूचीकरण और आवास गणना की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह प्रक्रिया इस साल 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच आयोजित की जाएगी। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस अवधि के दौरान अपनी सुविधानुसार 30 दिनों का समय तय करेंगे। इस अधिसूचना के साथ ही 7 जनवरी 2020 की पिछली अधिसूचना को निरस्त कर दिया गया है, हालांकि उससे पहले किए गए कार्यों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

    आत्म-गणना का विकल्प
    अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनगणना 2027 में नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन यानी स्वयं विवरण भरने का विकल्प मिलेगा। यह प्रक्रिया संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में 30 दिवसीय घर-घर जाकर होने वाली हाउसलिस्टिंग से ठीक पहले 15 दिनों की अवधि में पूरी की जाएगी।

    नागरिक इस दौरान जनगणना ऐप या पोर्टल के माध्यम से स्वयं जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
    दो चरणों में होगी जनगणना

    कोविड-19 महामारी के कारण टल गई जनगणना 2021 के बाद, अब 2027 की जनगणना करने की यह कवायद दो चरणों में संपन्न की जाएगी- अप्रैल से सितंबर 2026 तक घरों की सूची बनाना और आवास गणना, और फरवरी 2027 में आबादी की गणना।

    यह पूरी प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से 28 फरवरी 2027 तक चलेगी। जनगणना के लिए 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) को संदर्भ तिथि माना जाएगा। हालांकि, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश, बर्फीले क्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ गैर-समानांतर इलाकों के लिए अलग प्रावधान किए गए हैं।
    कैबिनेट की मंजूरी और लागत

    पिछले वर्ष 12 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना 2027 के आयोजन को मंजूरी दी थी। इस व्यापक अभियान पर कुल 11,718.2 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है। इस बार की जनगणना में जातिगत पहचान से संबंधित आंकड़े भी दर्ज किए जाएंगे।
    पहली डिजिटल जनगणना

    जनगणना 2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी। इसके तहत:

    डेटा कलेक्शन के लिए मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा
    निगरानी के लिए केंद्रीय पोर्टल विकसित किया गया है
    लगभग 30 लाख फील्ड फंक्शनरी इस प्रक्रिया में शामिल होंगे

    यह जनगणना दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास मानी जा रही है।
    बेहतर डेटा और ‘’सेंसस-एज-ए-सर्विस’

    सरकार ने हाल ही में कहा है कि इस बार जनगणना के आंकड़ों का प्रकाशन अधिक पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली होगा। नीति-निर्माण से जुड़े सभी आवश्यक आंकड़े एक क्लिक पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके तहत ‘सेंसस-एज-ए-सर्विस’ (CaaS) मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे विभिन्न मंत्रालयों को स्वच्छ, मशीन-रीडेबल और उपयोगी डेटा उपलब्ध कराया जा सकेगा।

    घर-घर जाकर होगी गणना

    जनगणना प्रक्रिया के तहत प्रत्येक परिवार से अलग-अलग प्रश्नावलियों के जरिए हाउसलिस्टिंग एवं हाउसिंग जनगणना तथा जनसंख्या गणना की जाएगी। आमतौर पर सरकारी शिक्षक और अन्य नामित कर्मचारी, जिन्हें राज्य सरकारें नियुक्त करती हैं, वे अपने नियमित कार्यों के साथ-साथ यह गणना कार्य करेंगे।
    रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और सुरक्षा

    पूरी प्रक्रिया के प्रबंधन और निगरानी के लिए जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS) नामक एक विशेष पोर्टल विकसित किया गया है। डिजिटल जनगणना को सुरक्षित बनाने के लिए उचित साइबर सुरक्षा प्रावधान भी किए गए हैं। कुल मिलाकर, जनगणना 2027 न केवल आंकड़ों के लिहाज से बल्कि तकनीक, पारदर्शिता और नीति निर्माण के स्तर पर भी भारत के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने जा रही है।

  • संक्रांति के बाद BJP संगठन में बड़े बदलाव के आसार… राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं नितिन नबीन

    संक्रांति के बाद BJP संगठन में बड़े बदलाव के आसार… राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं नितिन नबीन


    नई दिल्ली।
    भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) में परिवर्तन की प्रक्रिया जोरों पर है। दिसंबर 2025 में बिहार के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नितिन नबीन (Nitin Nabin) (45 वर्ष) को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (National Executive Chairman) नियुक्त किया गया है। वे भाजपा के इतिहास में सबसे युवा नेता हैं जो इस शीर्ष संगठनात्मक पद तक पहुंचे हैं। नितिन नबीन बिहार की राजधानी पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार के विधायक हैं और नीतीश कुमार सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वे पार्टी के युवा मोर्चा में लंबे समय तक सक्रिय रहे तथा छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जनवरी 2020 से इस पद पर हैं। अब जनवरी 2026 के मध्य तक नितिन नबीन को औपचारिक रूप से भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन के चुनाव को भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अनुमोदित किया जाएगा, जो इस महीने के अंत तक होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद नितिन नबीन द्वारा अपनी नई टीम बनाने के लिए संगठनात्मक फेरबदल किए जाने की उम्मीद है, जो एक ‘समावेशी’ प्रक्रिया होगी। भाजपा के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा कि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम भाजपा और संघ परिवार के बीच तालमेल और समन्वय को दर्शाएगी।


    मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की उम्मीद

    एक रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के संगठनात्मक स्तरों में व्यापक फेरबदल से जुड़ी इस प्रक्रिया के कारण केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी फेरबदल हो सकता है। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने यह भी बताया कि जून 2024 में इसके गठन के बाद से इसमें कोई फेरबदल नहीं हुआ है। भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की समीक्षा कर रही है। जल्द ही मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की उम्मीद है, जिसमें युवा नेतृत्व के साथ-साथ जाट समुदाय के चेहरों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। सरकार और संगठन दोनों में जाट समुदाय का घटता प्रतिनिधित्व भी हमारे उच्च कमान के विचार-विमर्श के बिंदुओं में से एक है।


    सरकार और संगठन में आएंगे संघ परिवार से जुड़े लोग

    पार्टी सूत्रों ने कहा कि नबीन ने भाजपा और उसके वैचारिक मार्गदर्शक आरएसएस के बीच संबंधों और समन्वय को बेहतर बनाने के लिए पहले ही कदम उठाए हैं, इससे यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे केंद्र सरकार और पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के बीच ‘सक्रिय समन्वय’ सुनिश्चित करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा और आरएसएस पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के कामकाज की समीक्षा करने जा रहे हैं और संगठन तथा सरकारी या अर्ध-सरकारी निकायों, जिनमें विभिन्न आयोग भी शामिल हैं, में कई नई नियुक्तियों पर चर्चा करेंगे। एक पार्टी नेता ने कहा कि इससे राज्य के कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं के लिए केंद्रीय स्तर पर संगठनात्मक या सरकारी भूमिकाएं निभाने का रास्ता खुल जाएगा, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय से संघ परिवार से जुड़े हुए हैं।

    भाजपा नेता ने कहा कि ऐसे कई नेताओं को समायोजित किए जाने की संभावना है, जिनमें वे नेता भी शामिल हैं जो अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में पार्टी के साथ रहे हैं। ये नेता बिहार जैसे राज्यों के साथ-साथ उन राज्यों से भी होंगे जहां आने वाले महीनों में चुनाव होने हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा और आरएसएस की हालिया समन्वय बैठकों के दौरान, आरएसएस ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे नेताओं की पहचान की जानी चाहिए जो तीन-चार दशकों से संघ परिवार से जुड़े हुए हैं लेकिन संगठन, सरकार या किसी अन्य सार्वजनिक संस्था में उन्हें स्थान नहीं मिला है। नितिन नबीन उन वरिष्ठ भाजपा नेताओं के समूह में शामिल हैं जो इस प्रक्रिया का समन्वय कर रहे हैं।


    मकर संक्रांति के बाद फेरबदल की संभावना

    भाजपा सूत्रों ने बताया कि हमारा ध्यान उन लोगों को महत्वपूर्ण भूमिकाएं देने पर है जिन्होंने अपना पूरा जीवन भाजपा और संघ के लिए समर्पित कर दिया है। यह प्रक्रिया जारी है, लेकिन घोषणाओं के लिए सीमित अवसर ही उपलब्ध होंगे। सूत्रों ने बताया कि अधिकांश महत्वपूर्ण नियुक्तियां मकर संक्रांति के बाद से लेकर बजट सत्र के प्रारंभ होने तक होने की उम्मीद है, जो फरवरी की शुरुआत से शुरू होगा। इस प्रक्रिया के लिए एक और समयसीमा आगामी राज्य चुनावों की घोषणा से पहले होने की संभावना है।

  • क्रिप्टोकरेंसी पर रोक जरूरी… आयकर विभाग ने किया RBI के रूख का समर्थन

    क्रिप्टोकरेंसी पर रोक जरूरी… आयकर विभाग ने किया RBI के रूख का समर्थन


    नई दिल्ली।
    आयकर विभाग (Income Tax Department) ने बुधवार को क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों (Virtual digital assets Cryptocurrencies) से जुड़े बड़े रिस्क की ओर ध्यान खींचा है। इसके साथ ही विभाग ने भारतीय रिजर्व बैंक के रुख का समर्थन करते हुए इन वित्तीय साधनों के प्रवेश का विरोध किया है। सूत्रों के मुताबिक, वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति के समक्ष एक प्रस्तुति में टैक्स अफसरों ने बताया कि कैसे गुमनाम, सीमा रहित और तत्काल धन हस्तांतरण की सुविधा से बिना किसी विनियमित वित्तीय मध्यस्थ के फंड्स को सिस्टम के जरिए भेजना संभव हो पाता है।

    इसके अलावा, विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंज, निजी वॉलेट और विकेंद्रीकृत प्लेटफॉर्म के कारण अधिकारियों के लिए टैक्सेबल इनकम का पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इनमें संपत्ति का असली मालिक भी आसानी से पता नहीं चल पाता।


    अंतरराष्ट्रीय पहलू और चुनौतियां

    विदेशों में होने वाली वर्चुअल डिजिटल संपत्ति की गतिविधियों में अधिकार क्षेत्र की सीमाओं को भी एक समस्या बताया गया। इसमें कई देशों के नियम शामिल हो सकते हैं, जिससे फंड फ्लो को जांचना, टैक्स लायबिलिटी की पुष्टि करना और वसूली करना लगभग असंभव हो जाता है। हाल के महीनों में सूचना साझा करने के प्रयास होने के बावजूद, यह प्रक्रिया अब भी कठिन बनी हुई है। इससे कर अधिकारियों को लेन-देन की श्रृंखला का सही आकलन और पुनर्निर्माण करने की क्षमता प्रभावित होती है।


    भारत की स्थिति और सुरक्षा उपाय

    भारत उन देशों में शामिल है जो जोरदार लॉबिंग और कुछ सरकारों के दबाव के बावजूद अब तक क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन को मंजूरी देने में हिचकिचा रहे हैं। इससे पहले, कई मौकों पर आरबीआई ने अपनी चिंताएं जताई हैं, जिनमें किसी भी अंतर्निहित परिसंपत्ति की कमी होना शामिल है, जो इसे निवेशकों के लिए जोखिम भरा बनाती है। यहां तक कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां भी खासतौर पर सावधान हैं क्योंकि वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण के लिए किया जा सकता है।

    आयकर विभाग ने कहा कि चूंकि क्रिप्टो प्लेटफॉर्म विदेशों में काम करते हैं, इसलिए समन जारी करना या टीडीएस वसूलना जैसी कानूनी कार्रवाई करना कठिन हो सकता है। कई एक्सचेंज फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट के साथ भी रजिस्टर्ड नहीं हैं और कर विभाग की पहुंच से बाहर हैं। भारतीय कर अधिकारियों ने लाभार्थियों को ट्रैक करने के लिए टीडीएस जैसे सुरक्षा उपाय बनाने की कोशिश की है और क्रिप्टो तथा अन्य वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों में कारोबार करने वाली इकाइयों के पंजीकरण को भी अनिवार्य किया है।