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  • भारत के पास 8.5 मिलियन टन से अधिक दुर्लभ खनिज भंडार: डॉ. जितेंद्र सिंह

    भारत के पास 8.5 मिलियन टन से अधिक दुर्लभ खनिज भंडार: डॉ. जितेंद्र सिंह


    नई दिल्ली। भारत के पास कुल लगभग 8.52 मिलियन टन रेयर अर्थ (दुर्लभ खनिज) ऑक्साइड संसाधन मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद देश रेयर अर्थ मैग्नेट और उससे जुड़े उत्पादों के लिए आयात पर निर्भर है। यह जानकारी गुरुवार को संसद में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दी।

    खनिज भंडार और उनका वितरण
    केंद्रीय मंत्री ने बताया कि परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (एएमडीईआर) ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र में फैले मोनाजाइट भंडारों में करीब 7.23 मिलियन टन रेयर अर्थ ऑक्साइड के बराबर संसाधन की पहचान की है। इसके अलावा, गुजरात और राजस्थान के हार्ड रॉक क्षेत्रों में 1.29 मिलियन टन अतिरिक्त दुर्लभ खनिज संसाधन भी पाए गए हैं।

    आयात पर निर्भरता के कारण
    भारत में इतने बड़े भंडार होने के बावजूद आयात पर निर्भरता बनी हुई है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं: घरेलू अयस्क की गुणवत्ता बहुत कम है (0.056-0.058 प्रतिशत) और इसमें रेडियोएक्टिविटी भी होती है, जिससे खनन महंगा और कठिन है। तटीय विनियमन, जंगल और मैंग्रोव से जुड़े नियम खनन योग्य क्षेत्र को सीमित करते हैं। देश में रेयर अर्थ को प्रोसेस करके धातु, मिश्र धातु और मैग्नेट बनाने के लिए पर्याप्त इंडस्ट्री नहीं है।

    सरकार की पहल और योजनाएं
    इस कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 7,280 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट का उत्पादन बढ़ाना है। योजना के तहत भारत में हर साल 6,000 मीट्रिक टन मैग्नेट बनाने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। पांच साल में 6,450 करोड़ रुपए इंसेंटिव और 730 करोड़ रुपए पूंजी सब्सिडी दी जाएगी।

    विशेष प्लांट और कॉरिडोर
    आंध्र प्रदेश में एक रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट प्लांट स्थापित किया गया है, जहां हर साल 3 टन समेरियम-कोबाल्ट मैग्नेट बनाए जाएंगे, जो रक्षा और परमाणु ऊर्जा क्षेत्रों में उपयोग होंगे। केंद्रीय बजट 2026-27 में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में विशेष रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने की भी घोषणा की गई है।

    महत्व और उपयोग
    रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस उपकरण और रक्षा प्रणालियों में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।

  • छात्रों को राहत: अब किताबें और यूनिफॉर्म एक ही दुकान से खरीदना जरूरी नहीं

    छात्रों को राहत: अब किताबें और यूनिफॉर्म एक ही दुकान से खरीदना जरूरी नहीं


    नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा निर्देश जारी किया है। अब कोई भी प्राइवेट स्कूल छात्रों या अभिभावकों को किताबें, यूनिफॉर्म (Books-Uniform Purchase Rule) या अन्य शैक्षणिक सामग्री किसी एक तय दुकान से खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेगा। सरकार का यह कदम अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    किताब-यूनिफॉर्म खरीदने की जबरदस्ती पर रोक


    शिक्षा निदेशालय (DoE) को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल छात्रों को खास दुकानों से ही किताबें, कॉपी, बैग और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इससे अभिभावकों को महंगे दाम चुकाने पड़ रहे थे। Delhi Directorate of Education ने साफ निर्देश दिया है कि स्कूल किसी भी छात्र पर इस तरह का दबाव नहीं बना सकते।

    सरकार ने कहा है कि छात्रों और अभिभावकों को पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वे अपनी सुविधा और बजट के अनुसार किसी भी दुकान से सामान खरीद सकें। साथ ही स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे किताबों और यूनिफॉर्म की पूरी सूची पहले से वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर उपलब्ध कराएं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

    नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
    दिल्ली सरकार ने साफ कर दिया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट के तहत की जा सकती है।

    इसके अलावा सरकार ने अभिभावकों के लिए शिकायत दर्ज कराने की सुविधा भी दी है, ताकि किसी भी तरह की जबरदस्ती या गलत प्रथा को तुरंत रोका जा सके। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि बच्चों का विकास करना है।

    यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो रही है और स्कूलों में एडमिशन व खरीदारी का दौर तेज है। सरकार के इस कदम से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

  • वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की दोटूक, TMC की आपत्तियों पर कहा—‘ऐसा हर बार होता है’

    वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की दोटूक, TMC की आपत्तियों पर कहा—‘ऐसा हर बार होता है’

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में फॉर्म-6 जमा होना कोई नई बात नहीं है, यह प्रक्रिया पहले भी होती रही है। अदालत ने साथ ही कहा कि अगर किसी नाम को लेकर आपत्ति है तो चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

    फॉर्म-6 को लेकर TMC ने जताई थी आपत्ति

    तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश वकील कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि एक ही व्यक्ति ने 30 हजार फॉर्म-6 जमा किए हैं। फॉर्म-6 का उपयोग मतदाता सूची में नाम जोड़ने या संसदीय क्षेत्र बदलने के लिए किया जाता है। उनका कहना था कि पूरक सूची आने के बाद भी नए फॉर्म स्वीकार किए जा रहे हैं, जिससे प्रक्रिया पर सवाल उठता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा—पहली बार नहीं

    सुनवाई के दौरान बेंच ने टिप्पणी की कि “ऐसा हर बार होता है, इसमें कुछ असामान्य नहीं है।” अदालत ने कहा कि किसी भी नए नाम पर आपत्ति दर्ज करने का विकल्प उपलब्ध है और संबंधित पक्ष चुनाव आयोग से संपर्क कर सकता है।

    चुनाव आयोग ने रखा अपना पक्ष

    भारत निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वकील ने कहा कि नियमों के अनुसार उम्मीदवारों के नामांकन की अंतिम तिथि तक मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति हाल ही में 18 वर्ष का हुआ है तो उसे मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अधिकार है।

    अदालत ने प्रक्रिया समझने की दी नसीहत

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा और पूरी प्रक्रिया को समझना जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव उसी सूची के आधार पर होते हैं, जो तय तिथि तक अपडेट होती है।

    अदालत ने संकेत दिया कि सभी आपत्तियों पर निर्णय 7 अप्रैल तक लिया जाएगा।

  • बस यात्रा में ‘यमराज’ से मिले राहुल गांधी, मजेदार बातचीत का VIDEO वायरल; अनोखा प्रचार

    बस यात्रा में ‘यमराज’ से मिले राहुल गांधी, मजेदार बातचीत का VIDEO वायरल; अनोखा प्रचार


    नई दिल्ली। राहुल गांधी का चुनाव प्रचार के दौरान एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। केरल में बस यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात ‘यमराज’ के वेश में एक व्यक्ति से हुई, जिसने माहौल को हल्का-फुल्का बना दिया।
    इस दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि बेहतर इलाज मिलने से ‘यमराज’ अब बेरोजगार हो सकते हैं। उनका यह मजाकिया अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

    बताया जा रहा है कि यह घटना बालुस्सेरी में बस यात्रा के दौरान हुई। वीडियो में राहुल गांधी आम यात्रियों के बीच बैठे नजर आते हैं। तभी ‘यमराज’ की वेशभूषा में एक व्यक्ति गदा लेकर उनके पास पहुंचता है।

    दोनों के बीच हल्की-फुल्की बातचीत होती है, जिसने प्रचार अभियान को दिलचस्प बना दिया।

    राहुल गांधी ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कहा कि उनकी मुलाकात बस में ‘यमराज’ से हुई, जो कुछ खास खुश नहीं दिखे। उन्होंने मजाक में कहा कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की ‘ओमान चांडी स्वास्थ्य बीमा योजना’ लागू होने पर लोगों को बेहतर इलाज मिलेगा और वे ज्यादा समय तक जीवित रहेंगे, जिससे ‘यमराज’ की नौकरी पर खतरा आ सकता है।

    दरअसल, यह पूरा दृश्य यूडीएफ की प्रस्तावित स्वास्थ्य बीमा योजना के प्रचार से जुड़ा था। इस योजना के तहत हर परिवार को 25 लाख रुपये तक का हेल्थ कवर देने का वादा किया गया है। इस अनोखे अंदाज में प्रचार ने लोगों का ध्यान खींचा और संदेश को प्रभावी ढंग से पहुंचाने का काम किया।

    यूडीएफ ने चुनावी अभियान के तहत ‘पांच इंदिरा गारंटी’ का भी ऐलान किया है। इसमें स्वास्थ्य बीमा के अलावा महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, छात्राओं को मासिक आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर 3,000 रुपये करने और छोटे व्यापारियों को 5 लाख रुपये तक ब्याज-मुक्त ऋण देने जैसे वादे शामिल हैं।

    चुनावी माहौल के बीच राहुल गांधी का यह हल्का-फुल्का अंदाज चर्चा का विषय बन गया है और इसे प्रचार की रचनात्मक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

  • बेटे को बचाने के अंधविश्वास में मां ने ली बेटी की जान, तांत्रिक के कहने पर दी बलि; तीन गिरफ्तार

    बेटे को बचाने के अंधविश्वास में मां ने ली बेटी की जान, तांत्रिक के कहने पर दी बलि; तीन गिरफ्तार


    हजारीबाग। झारखंड के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत कुसुंभा गांव में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। आरोप है कि एक मां ने बेटे की बीमारी ठीक कराने के लिए अंधविश्वास के चलते अपनी नाबालिग बेटी की बलि दे दी। एसआईटी जांच में खुलासा हुआ कि तांत्रिक के कहने पर 12–13 वर्षीय बच्ची की हत्या की गई।
    पुलिस ने मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

    तीन आरोपी गिरफ्तार

    पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला ने अपनी बेटी को तांत्रिक क्रिया के बहाने ले जाकर उसकी हत्या कर दी। इस मामले में मां समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में एक तांत्रिक महिला की भूमिका भी सामने आई है, जिसने अंधविश्वास फैलाकर वारदात को अंजाम देने के लिए उकसाया।

    अधिकारियों ने प्रेस वार्ता कर बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है, जिससे फैली अफवाहों पर विराम लग गया है।

    पुलिस ने साफ किया कि यह पूरा मामला अंधविश्वास से जुड़ा है और उसी के चलते बच्ची की हत्या की गई।

    जांच में नया एंगल

    पुलिस जांच में अवैध संबंध का एंगल भी सामने आया है, जिससे परिवार की संलिप्तता की बात कही जा रही है। इसी वजह से पीड़ित परिवार को मिलने वाले मुआवजे पर फिलहाल रोक लगा दी गई है और प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।

    यह घटना अंधविश्वास की भयावह तस्वीर पेश करती है। जागरूकता की कमी और अंधविश्वास आज भी समाज को ऐसे अमानवीय कृत्यों की ओर धकेल रहे हैं। मामले ने पूरे झारखंड में आक्रोश और चिंता दोनों बढ़ा दी है।

  • "मथुरा में भी बनेगा अयोध्या जैसा भव्य मंदिर" कृष्ण जन्मभूमि विवाद पर बोले गोविंद देव गिरी महाराज

    "मथुरा में भी बनेगा अयोध्या जैसा भव्य मंदिर" कृष्ण जन्मभूमि विवाद पर बोले गोविंद देव गिरी महाराज


    नई दिल्ली।
    अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद अब मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद सुर्खियों में है। स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने उम्मीद जताई कि अदालत में चल रहे मामले में हिंदू पक्ष की जीत होगी और मथुरा में भी अयोध्या की तरह भव्य कृष्ण मंदिर का निर्माण होगा।

    स्वामी जी की भूमिका और बयान
    स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज, जो श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के उपाध्यक्ष हैं, ने इंदौर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जिस तरह राम मंदिर का सपना साकार हुआ, उसी तरह कृष्ण मंदिर भी बनेगा। महाराज इंदौर की सामाजिक संस्था ‘सार्थक’ द्वारा आयोजित ‘समर्पण के प्रतीक’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे। इस दौरान उन्होंने देश की वर्तमान परिस्थितियों पर भी अपनी राय साझा की।

    अदालती प्रक्रिया पर विश्वास
    मथुरा विवाद पर महाराज ने कहा, “राम मंदिर बन गया है। कृष्ण मंदिर भी बनेगा। इसका निर्माण वैसा ही होगा जैसा पूरा देश चाहता है। मामला अदालत में है, और इसमें कोई कठिनाई नहीं है।”

    देश को बांटने की साजिश
    स्वामी जी ने कहा कि पिछले 150-200 सालों से भारत को खान-पान, जाति, भाषा, क्षेत्र और संप्रदायों के आधार पर बांटने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की जनता आज भी इन साजिशों का सामना कर रही है।

    RSS की भूमिका की सराहना
    कार्यक्रम के दौरान महाराज ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के योगदान की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, “अगर RSS न होता तो देश का भूगोल बदल गया होता और देश टुकड़ों में बंट गया होता। संघ ने देश की एकता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।”

    स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने लोगों को भरोसा दिलाया कि भगवान जल्द ही उनकी मनोकामनाएं पूरी करेंगे। उन्होंने अयोध्या के उदाहरण का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे राम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण मिसाल है, मथुरा में भी वैसा ही भव्य मंदिर बनेगा।

  • SC ने अनावश्यक मुकदमेबाजी पर केंद्र सरकार को लगाई फटकार, ठोका 25 हजार जुर्माना

    SC ने अनावश्यक मुकदमेबाजी पर केंद्र सरकार को लगाई फटकार, ठोका 25 हजार जुर्माना


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) को अनावश्यक मुकदमेबाजी में पड़ने के लिए फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को उस पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश केंद्र की उस याचिका पर दिया है जिसमें पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab and Haryana High Court) द्वारा एक सीआईएसएफ अधिकारी की बर्खास्तगी को रद्द करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने सजा को असंगत पाते हुए अधिकारी को बकाया वेतन देने का भी आदेश दिया।

    जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “हमें समझ नहीं आ रहा कि भारत सरकार ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ के आदेश को चुनौती क्यों दी है। हम बातें सुनते हैं कि मामले लंबित हैं। आखिर सबसे बड़ा मुकदमेबाज कौन है? हर्जाना लगाया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा, “ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि अगर उच्च न्यायालय ने इसे अनुचित पाया और सभी आदेशों को रद्द करते हुए राहत प्रदान की, तो हम उच्चतम न्यायालय न जाएं?” उन्होंने कहा कि अधिकारी ने चिकित्सा अवकाश लिया था, लेकिन उन्हें उनके परिवार में एक अप्रिय घटना से भी निपटना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित एक हालिया सम्मेलन में उन्होंने कहा था कि मामलों के लंबित रहने के लिए सरकार जिम्मेदार है। इस बयान का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि अदालत ने एससीबीए सम्मेलन को बहुत गंभीरता से लिया है।

    उन्होंने कहा, “यह सिर्फ किसी रिसॉर्ट में जाकर वापस आने की बात नहीं थी। हमने तैयारियां कीं, हमने पूरी जानकारी जुटाई। हमने बात की। महज इसलिये नहीं कि हम भूल जाएं।” सीआईएसएफ अधिकारी के खिलाफ दो आरोप लगाए गए थे – पहला 11 दिनों तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और दूसरा, एक महिला, जोकि एक सीआईएसएफ कांस्टेबल की बेटी थी, के साथ मिलकर मुंबई से भागने और अपने छोटे भाई के साथ उसकी शादी में शामिल होने की साजिश रचकर अनुशासनहीनता का कार्य करने का।


    स्वीकृत चिकित्सा अवकाश पर थे अधिकारी

    उच्च न्यायालय ने इस बात पर संज्ञान लिया कि 11 दिनों की अनुपस्थिति की अवधि के दौरान अधिकारी स्वीकृत चिकित्सा अवकाश पर थे। अदालत ने कहा, “प्रतिवादी-याचिकाकर्ता के भाई के साथ भाग जाने के दूसरे आरोप के संबंध में, यह रिकॉर्ड पर आया है कि महिला स्वयं अनुशासनात्मक कार्यवाही के दौरान उपस्थित हुई और उसने कहा कि उसे प्रतिवादी-याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है।”

    उच्च न्यायालय ने कहा, “यह बात निर्विवाद है कि याचिकाकर्ता के भाई ने संबंधित महिला से विवाह किया था। अतः यह पाया गया है कि वास्तव में याचिकाकर्ता की ओर से ऐसा कोई कदाचार नहीं हुआ था जिसके लिए उसे सेवा से हटाया जा सके।”

  • Census 2027 : पहली बार डिजिटल डेटा कैप्चर के साथ स्व-गणना की सुविधा, PM ने दर्ज किए अपने विवरण

    Census 2027 : पहली बार डिजिटल डेटा कैप्चर के साथ स्व-गणना की सुविधा, PM ने दर्ज किए अपने विवरण


    नई दिल्ली।
    विश्व के सबसे बड़े जनगणना अभियान (World’s Largest Census Campaign) ‘जनगणना-2027’ (Census 2027 first Phase) के प्रथम चरण की 1 अप्रैल से शुरुआत हो गई। इस चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना हो रही है। यह पूरी तरह डिजिटल डेटा कैप्चर (Digital Data Capture) के साथ स्व-गणना (Self-calculation) की सुविधा वाली भारत की पहली जनगणना है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने अपने आवास पर अपने अपने विवरण दर्ज किए। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए फॉर्म में विवरण दर्ज करने के फोटो भी साझा किए।

    पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर फोटो साझा करते हुए लिखा, “मैंने अपनी स्व-गणना पूरी कर ली है। आज जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत हो रही है, जो मकानों की सूची बनाने और आवास संबंधी कार्यों से जुड़ा है। यह पहली बार है जब जनगणना के लिए डेटा संग्रह डिजिटल माध्यमों से किया जा रहा है। यह भारत के लोगों को अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करने का अधिकार भी देता है। मैं भारत के लोगों से अपील करता हूँ कि वे अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करें और जनगणना की प्रक्रिया में भाग लें।”


    राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति ने भी लिया हिस्सा

    प्रधानमंत्री के अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने भी जनगणना 2027 के लिए आज ‘स्व-गणना’ पहल में भाग लिया और अपने अपने आवास संबंधी जानकारी दर्ज की। बाद में मुर्मु ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में लिखा कि उन्होंने राष्ट्रपति भवन में जनगणना 2027 के लिए सरकार की ‘स्व-गणना’ पहल में भाग लिया। राष्ट्रपति ने गृह सचिव गोविंद मोहन, भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में पोर्टल पर अपने आवास का विवरण स्वयं दर्ज किया। उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी अपने आवास पर अपने अपने विवरण दर्ज किए। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए फॉर्म में विवरण दर्ज करने के फोटो भी साझा किए।


    आज से स्व-गणना प्रक्रिया 08 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में शुरू

    जनगणना की इस राष्ट्रीय प्रक्रिया में जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना की। बता दें कि प्रारंभिक चरण में आज से स्व-गणना प्रक्रिया 08 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में शुरू की गई है, जिनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और राजधानी दिल्ली के नई दिल्ली नगरपालिका परिषद एवं दिल्ली छावनी बोर्ड क्षेत्र शामिल हैं। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार पहले दिन इन स्थानों से लगभग 55,000 परिवारों ने पहले ही दिन इस सुविधा का लाभ उठाया।


    16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध

    स्व-गणना एक सुरक्षित और वेब आधारित सुविधा है, जो 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। पहली बार उत्तरदाताओं को प्रगणकों के आने से पहले अपनी सुविधानुसार ऑनलाइन विवरण भरने का विकल्प उपलब्ध है। प्रगणक पिछली जनगणनाओं की तरह सभी आवंटित हाउस लिस्टिंग ब्लॉकों में घर-घर जाएंगे, जबकि उसके पूर्व स्व-गणना एक अतिरिक्त सुविधा के रूप में काम करेगी। स्व-गणना में भाग लेने के लिए व्यक्ति अपने मोबाइल नंबर और बुनियादी क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके एसई.सीईएनएसयूएस.जीओवी.इन पोर्टल पर लॉग इन कर सकते हैं। सफलतापूर्वक फॉर्म सबमिट करने पर एक यूनीक सेल्फ-एनुमरेशन आईडी जनरेट हो जाती है, जिसे बाद में प्रगणक के फील्ड विजिट के दौरान उनसे पुष्टि करने के लिए साझा किया जाएगा।


    कुल 33 प्रश्न अधिसूचित किए गए

    मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के चरण के दौरान आवास की स्थिति, घरेलू सुविधाओं और उपलब्ध परिसंपत्तियों से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इन महत्वपूर्ण संकेतकों को दर्ज करने के लिए जनवरी 2026 में प्रथम चरण के लिए कुल 33 प्रश्न अधिसूचित किए गए हैं, जो साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण, नीति निर्धारण और लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार प्रदान करते हैं।


    01 अप्रैल से 30 सितंबर तक मकान गणना

    मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का चरण 01 अप्रैल से 30 सितंबर, 2026 के बीच पूरे देश में संचालित किया जाएगा। इस छह माह की अवधि में प्रत्येक राज्य और संघ राज्य क्षेत्र, राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकार द्वारा अधिसूचित 30 दिनों की अवधि में इस क्षेत्रीय कार्य को पूरा करेंगे। पहली बार, घर-घर सर्वेक्षण से पहले 15 दिनों की अतिरिक्त अवधि स्व-गणना के लिए प्रदान की गई है, जिससे लोग प्रगणक के आने से पहले अपने विवरण डिजिटल रूप से स्वयं दर्ज कर सकते हैं।

    जनगणना शासन के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है, जो अगले दशक के लिए भारत की विकास योजना का आधार प्रदान करती है। जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत एकत्रित सभी आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रखे जाते हैं। जनगणना 2027 के लिए उपयोग किए जा रहे डिजिटल उपकरण उच्च स्तरीय डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत एन्क्रिप्शन और बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण से युक्त हैं।

  • पश्चिम एशिया संकट के बीच LPG-PNG और पेट्रोलियम उत्पादों की समीक्षा, PM मोदी ने ली CCS की बैठक

    पश्चिम एशिया संकट के बीच LPG-PNG और पेट्रोलियम उत्पादों की समीक्षा, PM मोदी ने ली CCS की बैठक


    नई दिल्ली।
    ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US War) के बीच बुधवार शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) (Cabinet Committee on Security – CCS) की बैठक हुई। इस बैठक में एलपीजी, पीएनजी, पेट्रोलियम उत्पादों पर जानकारी दी गई। पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई यह दूसरी ऐसी बैठक थी, जिसमें ईरान युद्ध के बीच देश में उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की गई।

    पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और बिजली की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में अपडेट दिया गया। LPG की खरीद के लिए स्रोतों में विविधता लाई जा रही है, जिसके तहत विभिन्न देशों से नई आपूर्ति शुरू की गई है।

    पीएमओ के बयान के अनुसार, बैठक में बताया गया कि पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शनों का विस्तार करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। गर्मियों के चरम महीनों के दौरान बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए गए हैं। जैसे कि 7-8 GW क्षमता वाले गैस-आधारित बिजली संयंत्रों को ‘गैस पूलिंग मैकेनिज्म’ से छूट देना, और थर्मल पावर स्टेशनों पर अधिक कोयला पहुंचाने के लिए ‘रेक’ (मालगाड़ियों) की संख्या बढ़ाना आदि। यह भी बताया गया कि लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) भी विभिन्न देशों से मंगाई जा रही है। सचिव ने आगे बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, और इसकी जमाखोरी तथा कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए ‘एंटी-डायवर्जन’ (गलत इस्तेमाल रोकने वाले) उपायों को नियमित रूप से लागू किया जा रहा है।


    ‘छापेमारी और सख्त कार्रवाई करके रोकें कालाबाजारी’

    इसके अलावा, बैठक में कृषि, नागरिक उड्डयन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे विभिन्न अन्य क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए प्रस्तावित उपायों पर भी चर्चा की गई। उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। जैसे कि मांग को पूरा करने के लिए यूरिया का उत्पादन बनाए रखना, और डीएपी उर्वरकों की आपूर्ति के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करना। राज्य सरकारों से अनुरोध किया गया है कि वे निगरानी, ​​छापेमारी और सख्त कार्रवाई के माध्यम से उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और गलत इस्तेमाल पर अंकुश लगाएं।


    बुनियादी जरूरतों की उपलब्धता का लिया जायजा

    प्रधानमंत्री मोदी ने आम आदमी की बुनियादी जरूरतों की उपलब्धता का जायजा लिया। उन्होंने देश में उर्वरकों की उपलब्धता और खरीफ तथा रबी मौसमों में इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने गलत सूचना और अफवाहों को रोकने के लिए जनता तक सही जानकारी का सुचारू प्रवाह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे मौजूदा वैश्विक स्थिति से प्रभावित नागरिकों और विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं को कम करने के लिए हर संभव उपाय करें।


    पिछली बैठक में क्या हुआ था

    एक हफ्ते पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रस्तावित राहत उपायों की समीक्षा के लिए सीसीएस की एक बैठक की अध्यक्षता की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा अब तक उठाए गए तथा राहत उपायों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दी थी। कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली,निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला और सभी प्रभावित क्षेत्रों जैसे क्षेत्रों में इसके अपेक्षित प्रभाव और उससे निपटने के लिए उठाए गए उपायों पर चर्चा की गई थी।

  • निचली अदालत से मिली राहत, अब दिल्ली हाई कोर्ट में 29 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई; ED की याचिका पर अरविंद केजरीवाल की बढ़ीं मुश्किलें

    निचली अदालत से मिली राहत, अब दिल्ली हाई कोर्ट में 29 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई; ED की याचिका पर अरविंद केजरीवाल की बढ़ीं मुश्किलें


    नई दिल्ली।  दिल्ली की शराब नीति से जुड़े मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका पर जारी हुआ है, जिसमें निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई है।

    निचली अदालत ने क्यों किया था बरी?
    27 फरवरी को निचली अदालत ने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जांच एजेंसी यह साबित नहीं कर पाई कि समन की अवहेलना जानबूझकर की गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने केजरीवाल से जवाब मांगा है। कोर्ट ने ED की याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली तारीख 29 अप्रैल तय की है। कोर्ट ने कहा कि “प्रतिवादी को पहले से सूचना थी, फिर भी वे पेश नहीं हुए।”

    ED का क्या है आरोप?
    प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन का पालन नहीं किया जांच में शामिल होने से बचने के लिए बहाने बनाए मामले के अन्य आरोपियों से उनका संपर्क था ED का दावा है कि शराब नीति बनाते समय अनियमितताएं हुईं और इससे कुछ लोगों को फायदा पहुंचा।

    केजरीवाल की मौजूदा स्थिति
    अरविंद केजरीवाल इस समय मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में अंतरिम जमानत पर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के कुछ कानूनी पहलुओं को बड़ी बेंच के पास भेजा है, जिस पर अभी सुनवाई जारी है। अब सभी की नजर 29 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी है। यहीं तय होगा कि निचली अदालत का फैसला बरकरार रहेगा या मामले में नया मोड़ आएगा। दिल्ली शराब नीति मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। निचली अदालत से मिली राहत के बाद अब हाई कोर्ट में सुनवाई से इस केस की दिशा तय होगी।