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  • सत्य की जीत हुई है, हाईकोर्ट के आदेश के बाद विपक्ष पर बरसे भाजपा नेता दुष्यंत गौतम

    सत्य की जीत हुई है, हाईकोर्ट के आदेश के बाद विपक्ष पर बरसे भाजपा नेता दुष्यंत गौतम


    नई दिल्ली । अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिलने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम ने कांग्रेसआम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद दुष्यंत गौतम ने इसे सत्य की जीत बताते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर हमेशा से पूरा भरोसा रहा है और अदालत के फैसले ने यह साबित कर दिया है कि झूठ कितनी भी जोर से फैलाया जाएअंततः टिक नहीं पाता।

    दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत करते हुए दुष्यंत गौतम ने कहा कि वे हमेशा संविधान और कानून के दायरे में रहकर काम करते आए हैं। उन्होंने कहा“सत्यमेव जयते। अंत में सच की ही जीत होती है। आज अदालत के आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि झूठ और दुष्प्रचार की एक सीमा होती है।उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। दुष्यंत गौतम ने कहा कि एक बेटी की निर्मम हत्या को कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हर छह महीने बाद एक नया नैरेटिव गढ़ा जाता हैकभी उनका नाम जोड़ा जाता हैतो कभी किसी और का। इससे न तो सच्चाई सामने आती है और न ही पीड़ित बेटी को न्याय मिलता है।

    भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेसआम आदमी पार्टी और उत्तराखंड क्रांति दल मिलकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे थे।मेरी मानहानि की गईमेरी छवि को नुकसान पहुंचाया गया और उस बेटी का बार-बार अपमान किया गया। सोशल मीडिया पर जो वीडियो और पोस्ट डाली गईंवे पूरी तरह झूठी थीं और उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए, उन्होंने कहदुष्यंत गौतम ने स्पष्ट किया कि घटना के समय वे उत्तराखंड गए ही नहीं थे। उन्होंने कहा कि उनकी लोकेशनकार्यक्रम और आधिकारिक रिकॉर्ड यह साफ दिखाते हैं कि उनके खिलाफ फैलाया गया प्रचार पूरी तरह झूठा और द्वेषपूर्ण था। इसके बावजूद उन्होंने लंबे समय तक चुप रहना उचित समझाक्योंकि वे सत्य के साथ खड़े थे।

    उन्होंने यह भी बताया कि लगातार आरोपों और सोशल मीडिया ट्रायल के कारण उन्हें मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी।मैं विचलित भी हुआदुखी भी। मेरी छवि को नुकसान पहुंचा। लेकिन जब झूठ पूरे देश में फैलाया जाने लगा और पानी सिर के ऊपर चला गयातब मुझे मानहानि का मुकदमा दर्ज कराना पड़ा, उन्होंने कहा।इस बीचदिल्ली हाईकोर्ट ने दुष्यंत कुमार गौतम की मानहानि याचिका पर सुनवाई करते हुए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को निर्देश दिया कि वे 24 घंटे के भीतर सभी सोशल मीडिया पोस्ट हटाएंजिनमें उन्हें अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ा गया है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने अंतरिम आदेश में दोनों दलों को भविष्य में भी ऐसी कोई सामग्री पोस्ट करने से रोक दिया है।

  • JNU नारेबाजी पर उमर खालिद के पिता का बड़ा हमला: बोले-विरोध अब अपराध बन गया, कन्हैया कुमार राजनीतिक दबाव में चुप

    JNU नारेबाजी पर उमर खालिद के पिता का बड़ा हमला: बोले-विरोध अब अपराध बन गया, कन्हैया कुमार राजनीतिक दबाव में चुप


    नई दिल्ली।  जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हाल ही में हुई नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन को लेकर उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मौजूदा हालात पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में अब विरोध करना अपराध बनता जा रहा है, जबकि गंभीर अपराधों के दोषियों को आसानी से जमानत मिल जाती है। उनका कहना है कि यह स्थिति लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए बेहद चिंताजनक है।
    सैयद कासिम रसूल इलियास ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि उमर खालिद और शरजील इमाम को मिली जमानत के खिलाफ कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान कुछ नारे जरूर लगाए गए, लेकिन कोई आधिकारिक बयान या भड़काऊ भाषण नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, “यह विरोध न तो हिंसक था और न ही किसी कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने वाला, फिर भी एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट तैयार कर दी गई। यह दर्शाता है कि असहमति को दबाने का एक चलन बन चुका है।”

    उमर खालिद के पिता ने आरोप लगाया कि उनके बेटे के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं होने के बावजूद उसे लंबे समय तक जेल में रखा गया।

    उन्होंने कहा कि दंगों के समय उमर खालिद की मौजूदगी तक साबित नहीं हो पाई, इसके बावजूद उसे जमानत नहीं दी गई, जबकि उसी एफआईआर में नामजद कुछ अन्य आरोपियों को राहत मिल चुकी है। उन्होंने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया और कहा कि यह सब एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।

    कासिम रसूल इलियास ने इस पूरे मामले में कन्हैया कुमार का जिक्र करते हुए भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कन्हैया कुमार और उमर खालिद दोनों जेएनयू में सहपाठी रहे हैं और 2016 के मामले में दोनों को आरोपी बनाया गया था। इसके बावजूद कन्हैया कुमार इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं।

    उन्होंने कहा, “कन्हैया कुमार अब एक राजनेता हैं और किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं। पार्टी और राजनीति से जुड़े दबावों के कारण वे उमर खालिद के मुद्दे पर सवाल उठाने से पीछे हट रहे हैं। यह स्थिति अजीब जरूर है, लेकिन उनकी राजनीतिक मजबूरियां उनके पैरों में बेड़ियों की तरह हैं।”

    सैयद कासिम का मानना है कि मौजूदा दौर में छात्रों और युवा वर्ग के लिए शांतिपूर्ण विरोध करना बेहद मुश्किल होता जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि जब देश में बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के आरोपी भी जमानत पा जाते हैं, तो केवल नारे लगाने या विरोध दर्ज कराने वालों को निशाना बनाना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

    उन्होंने आगे कहा कि राजनीति और निजी स्वार्थों के चलते असल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। यदि राजनीतिक हस्तक्षेप न हो, तो उमर खालिद जैसे मामलों में निष्पक्ष और त्वरित न्याय संभव हो सकता है। उनके अनुसार, प्रशासन और न्यायपालिका को राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर काम करना चाहिए।

    सैयद कासिम रसूल इलियास ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति की आवाज़ को दबाना समाज के लिए खतरनाक संकेत है।

    उन्होंने उम्मीद जताई कि समाज, न्यायपालिका और संस्थाएं मिलकर यह सुनिश्चित करेंगी कि छात्रों और नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित रहे।

    इस बयान से साफ है कि उमर खालिद के परिवार के लिए न्याय की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनके पिता का मानना है कि न्याय और राजनीति के बीच संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है, और यदि इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो लोकतांत्रिक मूल्यों को गहरी चोट पहुंच सकती है।

  • राजस्थान ने क्षेत्रीय एआई प्रभाव सम्मेलन की मेजबानी की जो समावेशी और जिम्मेदार एआई के लिए भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहा है

    राजस्थान ने क्षेत्रीय एआई प्रभाव सम्मेलन की मेजबानी की जो समावेशी और जिम्मेदार एआई के लिए भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहा है


    नई दिल्ली । राजस्थान क्षेत्रीय एआई प्रभाव सम्मेलन मंगलवार6 जनवरी 2026 को आयोजित किया गयाजिसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तर के नेतृत्वनीति निर्माताओंउद्योगपतियोंस्टार्टअप्स और शिक्षाविदों को एक मंच उपलब्‍ध कराया गया ताकि शासनबुनियादी ढ़ांचेनवाचार और कार्यबल विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ताएआईकी परिवर्तनकारी भूमिका पर विचार-विमर्श किया जा सके। यह सम्मेलन 15-20 फरवरी 2026 को आयोजित होने वाले इंडिया एआई प्रभाव सम्‍मेलन का पूर्वाभ्यास है।

    इस सम्मेलन में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्माभारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णवजो वर्चुअल रूप से उपस्थित थेभारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद और राजस्थान सरकार के सूचना एवं संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौर सहित एमईआईटीवाई और राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। उनकी भागीदारी ने भारत की एआई-आधारित विकास यात्रा में राजस्थान को एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करने में केंद्र और राज्य के मजबूत सहयोग को रेखांकित किया।सभा को संबोधित करते हुए भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहाऔद्योगिक क्रांतिबिजलीकंप्यूटरसेमीकंडक्टरइंटरनेट और मोबाइल प्रौद्योगिकी के माध्यम से जिस प्रकार का परिवर्तन आया हैवैसा ही परिवर्तन अब एआई के माध्यम से होने वाला है। प्रधानमंत्री का स्पष्ट लक्ष्य प्रौद्योगिकी का लोकतांत्रिकरण करना है ताकि एआई से संचालित ज्ञान कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित न रहकर प्रत्येक व्यक्तिप्रत्येक घर और प्रत्येक उद्यमी तक पहुंचे। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आज एक कार्यक्रम शुरू किया गया है जिसके तहत दस लाख युवाओं को एआई कौशल में प्रशिक्षित किया जाएगाजिससे भारत के युवा इस नए तकनीकी युग के लिए पूरी तरह से तैयार हो सकें।

    भारत सरकार में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृढ़ विश्वास है कि प्रौद्योगिकी का लोकतांत्रिकरण होना चाहिए। इसी सोच से प्रेरित होकर सरकार ने कृषिस्वास्थ्य सेवाशिक्षा और पर्यावरण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में एआई का लाभ उठाने के लिए इंडिया एआई मिशन के तहत 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसका उद्देश्य नागरिकों की आय बढ़ानाजीवन स्तर में सुधार करना और एआई के जिम्मेदार और समावेशी उपयोग के माध्यम से राष्ट्र की समग्र उत्पादकता को बढ़ावा देना है।

    राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा आज राजस्थान ई-गवर्नेंस और समावेशन से आगे बढ़कर एआई और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में अग्रणी बनने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है। एआई हमारे देश की प्रगति का अगला महत्वपूर्ण चरण है। इस दिशा में और आगे बढ़ते हुए हमने एक एआई और मशीन लर्निंग नीति लागू की है। यह नीति सुनिश्चित करेगी कि एआई प्रणालियां अधिक पारदर्शीनिष्पक्ष और सत्यनिष्ठा के सिद्धांतों के प्रति जवाबदेह बनें। एआई और मशीन लर्निंग के उपयोग से सार्वजनिक सेवाओं का वितरण तेजअधिक पारदर्शी और अधिक नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। इससे प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि होगी और नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय कई एआई पहलों की घोषणा और शुभारंभ थाजिसने एआई-आधारित नवाचार और शासन के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में राजस्थान की भूमिका को मजबूत किया। ये कार्यक्रम और पहलें इस प्रकार हैं:

    सभी के लिए युवा एआई – राष्ट्रीय एआई साक्षरता कार्यक्रमभारत सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसका नेतृत्व एमईआईटीवाई के अंतर्गत इंडियाएआई मिशन कर रहा है। इसका उद्देश्य देशभर के छात्रों और युवाओं में एआई की बुनियादी जानकारी का विकास करना है। राष्ट्रीय युवा दिवस12 जनवरीके उपलक्ष्य में शुरू किया गया यह अभियान लाखों शिक्षार्थियों को एक संक्षिप्तस्व-गति से संचालित बुनियादी एआईएआई 101पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए प्रेरित करना चाहता हैजिससे विकसित भारत की परिकल्पना और समावेशीलोकतांत्रिक एआई अपनाने के अनुरूप सामूहिक एआई शिक्षण का एक राष्ट्रव्यापी माहौल तैयार हो सके।

    राजस्थान एआई/एमएल नीति 2026 का शुभारंभ किया गया हैजिसका उद्देश्य शासन को सुदृढ़ करनाआर्थिक विकास को गति देनाअनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना और उच्च मूल्य वाले रोजगार सृजित करना है। इस नीति के शुभारंभ के साथ ही राजस्थान के एआई पोर्टल का भी शुभारंभ किया गया।राज्यभर में कौशल विकासउद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आईस्टार्ट लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टमएलएमएसका उपयोग किया जाएगा।

    राजस्थान एवीजीसी-एक्‍सआर पोर्टल का उद्देश्य राज्य में एनिमेशनवीएफएक्‍सगेमिंगकॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी इकोसिस्टम को मजबूत करना है। भारत और राजस्थान के एआई विजन को प्रदर्शित करने वाला एक एआई -थीम वाला वीडियो भी जारी किया गया।संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में गूगलआईआईटी दिल्लीनेशनल लॉ यूनिवर्सिटीजोधपुर और स्किल डेवलपमेंट नेटवर्कवाधवानी फाउंडेशनके साथ एआई अनुसंधानकौशल विकासनैतिक ढांचे और नवाचार संस्‍कृति को आगे बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापनएमओयूपर हस्ताक्षर किए गए।

    भारत में आयोजित एक उच्च स्तरीय रणनीतिक सत्र में एमईआईटीवाई के अतिरिक्त सचिवइंडियाएआई मिशन के सीईओ और एनआईसी के महानिदेशक श्री अभिषेक सिंह ने एनवीडिया के दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक श्री विशाल धूपर के साथ वार्तालाप किया। इस सत्र का संचालन प्राइमस पार्टनर्स के प्रबंध निदेशक श्री समीर जैन ने किया। चर्चा में एआई अवसंरचना के लोकतांत्रिकरणसार्वजनिक-निजी सहयोग को बढ़ानेबड़े पैमाने पर नवाचार को सक्षम बनाने और जिम्मेदार एवं विश्वसनीय एआई के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की क्षमता निर्माण के साथ-साथ वैश्विक एआई सुरक्षा कॉमन के निर्माण को आगे बढ़ाने की भारत की रणनीति का विश्लेषण किया गया।

    श्रीमती कविता भाटियावैज्ञानिक ‘जी’समूह समन्वयकएमईआईटीवाई भारत एआई मिशन की सीओओ ने भारत एआई मिशन का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया और इंडिया एआई प्रभाव समिट 2026 के विजन और प्राथमिकताओं की रूपरेखा बताई।सम्मेलन में आईआईटी जोधपुर के प्रोफेसर श्री अविनाश शर्मा द्वारा वैश्विक एआईराष्ट्रीय एआई और क्षेत्रीय एआई पर परिप्रेक्ष्य विषय पर एक सत्र भी आयोजित किया गयाजिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान वैश्विक स्तर पर प्रासंगिकसंदर्भ-जागरूक एआई समाधानों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    समानांतर विषयगत सत्रों में शासन बुनियादी ढ़ांचेनवाचारनैतिकता और रोजगार के क्षेत्रों में एआई के वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों की जांच की गई।राजस्थान क्षेत्रीय एआई प्रभाव सम्मेलन ने इंडिया एआई प्रभाव समिट 2026 की तैयारी में एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय उपलब्‍धि हासिल कियाजिससे सार्वजनिक भलाईसमावेशी विकास और क्षेत्रों में सतत विकास के लिए एआई का लाभ उठाने की भारत की प्रतिबद्धता को बल मिला।

  • दही-चूड़ा के बहाने सियासी संदेश: तेजप्रताप यादव मकर संक्रांति पर बुलाएंगे तेजस्वी-नीतीश को

    दही-चूड़ा के बहाने सियासी संदेश: तेजप्रताप यादव मकर संक्रांति पर बुलाएंगे तेजस्वी-नीतीश को


    नई दिल्‍ली । बिहार में दही-चूड़ा भोज के बहाने सियासत गरमाने लगी है। जनशक्ति जनता दल के मुखिया और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज का ऐलान किया है। तेजप्रताप यादव इस भोज में आने के लिए कई मेहमानों को लगातार आमंत्रित कर रहे हैं। खास बात यह है कि तेजप्रताप ने खुद कहा है कि वो इस भोज में अपने भाई तेजस्वी यादव को भी आमंत्रित करेंगे। इस भोज में सीएम नीतीश कुमार को भी बुलाने की बात तेजप्रताप यादव ने कही है।
    तेजप्रताप यादव ने बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात कर उन्हें दही-चूड़ा भोज में आने का न्योता दिया। मंत्री दीपक प्रकाश से मुलाकात की कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए तेजप्रताप यादव ने एक्स पर लिखा, ‘आज पंचायती राज विभाग के मंत्री श्री दीपक प्रकाश जी से उनके सरकारी आवास पर पहुंचकर आगामी 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर 26 M स्ट्रैंड रोड स्थित मेरे सरकारी आवास पर “दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम” हेतु आमंत्रण पत्र देकर आमंत्रित किया। साथ ही नए जिम्मेदारियों हेतु दीपक प्रकाश जी को बधाई दिया।

    मीडिया से बातचीत में तेजप्रताप यादव ने कहा कि दही-चूड़ा भोज में वो सभी को आमंत्रित करेंगे। उन्होंने कहा कि वो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राज्यपाल और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भी आमंत्रित करेंगे। तेजप्रताप यादव ने कहा कि इस भोज में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भी न्योता दिया जाएगा।

    राबड़ी आवास गए थे तेजप्रताप यादव
    इससे पहले तेजप्रताप यादव नए साल के पहले दिन अपनी मां से मिलने पटना स्थित उनके आवास पर भी गए थे। दरअसल इस दिन राबड़ी देवी का जन्मदिन था और तेजप्रताप अचानक 10 सर्कुलर रोड स्थित अपनी मां के आवास पर गए थे। तेजप्रताप यादव ने बाद में मां से मुलाकात की तस्वीर भी शेयर की थी। तेजप्रताप यादव ने घर से निकलने के बाद कहा था कि उनकी मां उन्हें बहुत मानती हैं। मां के जन्मदिन पर वो उनके घर गए थे और उनके साथ बैठकर केक काटा था।

    बिहार में दही-चूड़ा का भोज मकर संक्रांति के अवसर पर एक पारंपरिक आयोजन रहा है। तेजप्रताप यादव को पिछले ही साल उनके पिता लालू प्रसाद यादव ने पार्टी और घर से बाहर निकाल दिया था। इसके बाद तेजप्रताप यादव ने अपनी अलग JJD पार्टी बनाई थी। यह पार्टी बिहार विधानसभाा चुनाव के दंगल में भी उतरी थी। लेकिन खुद तेजप्रताप यादव भी चुनाव हार गए थे। अब दही-चूड़ा के बहाने तेजप्रताप यादव अपने परिवार के सदस्य, सरकार और विपक्ष के नेताओं को न्योता दे रहे हैं। 14 जनवरी को इस भोज का आयोजन किया गया है।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने ICGS ‘समुद्र प्रताप’ की कमीशनिंग को बताया भारत के समुद्री सुरक्षा में मील का पत्थर

    प्रधानमंत्री मोदी ने ICGS ‘समुद्र प्रताप’ की कमीशनिंग को बताया भारत के समुद्री सुरक्षा में मील का पत्थर


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय तटरक्षक पोत आईसीजीएस समुद्र प्रताप की कमीशनिंग को देश के समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा और क्षमताओं के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया। उन्होंने कहा कि इस उन्नत पोत का बेड़े में शामिल होना केवल रक्षा के दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि भारत के आत्मनिर्भरता और सतत विकास के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि समुद्र प्रताप की कमीशनिंग से तटरक्षक बल की आधुनिक तकनीक और तैयारियों को बल मिलेगा और भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा और निगरानी सशक्त होगी।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पोत तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ भारत के व्यापक समुद्री हितों की रक्षा सुनिश्चित करेगा। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि पोत में पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों का समावेश किया गया है जिससे यह समुद्री सततता और पारिस्थितिक सुरक्षा के लिए भी प्रतिबद्धता दिखाता है। इससे यह साफ होता है कि रक्षा और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की एक पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि ICGS समुद्र प्रताप की कमीशनिंग हमारे आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को मजबूती देने समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और स्थायित्व के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने के कई कारणों से उल्लेखनीय है। उन्होंने कहा कि इस पोत की क्षमता न केवल सुरक्षा और निगरानी में वृद्धि करेगी बल्कि समुद्री क्षेत्रों में तटीय आपात परिस्थितियों में तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार समुद्र प्रताप जैसे उन्नत पोत भारतीय तटरक्षक बल की ताकत और परिचालन क्षमता को बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इन पोतों की कमीशनिंग से न केवल समुद्री सुरक्षा और निगरानी में सुधार होता है बल्कि वे समुद्री मार्गों और आर्थिक क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण साबित होते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में यह कदम देश की रक्षा उत्पादन क्षमता और आधुनिक तकनीक में सुधार को भी दर्शाता है।इस प्रकार ICGS समुद्र प्रताप की कमीशनिंग केवल एक नई नाव के शामिल होने तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत की समुद्री सुरक्षा पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत के विज़न को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस पोत के माध्यम से तटरक्षक बल के कर्मियों की कार्यकुशलता और देश की समुद्री सुरक्षा की मजबूती सुनिश्चित होगी।

  • दिल्ली हिंसा तुर्कमान गेट में कर्फ्यू जैसे हालात पुलिस ने इलाके को छावनी में तब्दील किया

    दिल्ली हिंसा तुर्कमान गेट में कर्फ्यू जैसे हालात पुलिस ने इलाके को छावनी में तब्दील किया


    नई दिल्ली । दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में 6 जनवरी की रात को हुए हिंसक घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर दिया। एमसीडी द्वारा फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास चलाए गए अवैध अतिक्रमण हटाने केअभियान के दौरान उपद्रवियों ने पुलिस और नगर निगम कर्मचारियों पर पथराव किया जिससे पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया और पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी। फिलहाल तुर्कमान गेट के आस-पास कर्फ्यू जैसे हालात हैं सभी दुकानें बंद हैं और सड़कें सुनसान हैं। पुलिस ने इलाके को छावनी में बदल दिया है और गली-गली में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

    फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाईएमसीडी द्वारा यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर की गई थी जो लंबे समय से पेंडिंग था। फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास 36 400स्क्वायर फीट इलाके में अवैध रूप से दो मंजिला दीवार और उसके ऊपर एकमंजिला संरचना बनाई गई थी। पुलिस और नगर निगम की टीम ने 32 बुलडोजरों 4 एक्सकेवेटरों और कई ट्रकों का इस्तेमाल कर इस अतिक्रमण को हटाने की कोशिश की। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस बल की पूरी टीम मौके पर मौजूद थी और स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश की गई।

    पत्थरबाजी और हिंसा

    जैसे ही बुलडोजर अभियान शुरू हुआ कुछ शरारती तत्वों ने पुलिस और नगर निगम कर्मचारियों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस हमले में 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा और भीड़ को खदेड़ने के लिएअतिरिक्त बल तैनात किया गया। पुलिस ने इलाके में सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी है और मुख्य मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। ड्रोन कैमरों से इलाके की निगरानी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा को फैलने से रोकने के लिए उठाया गया है।

    एफआईआर और गिरफ्तारी

    दिल्ली पुलिस ने तुर्कमान गेट मस्जिद के पास हुई पत्थरबाजी के मामले में अज्ञात संदिग्धों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। दंगा सरकारी कर्मचारी पर हमला और ड्यूटी में रुकावट डालने जैसी धाराओं में केस दर्ज किया गया है। अब तक 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच जारी है और CCTV फुटेज के माध्यम से उपद्रवियों की पहचान की जाएगी।

    सीसीटीवी और बॉडी कैमरा फुटेज से आरोपियों की पहचान

    दिल्ली पुलिस ने बताया कि उपद्रवियों की पहचान के लिए पुलिस अधिकारियों के बॉडी कैमरा फुटेज और इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों का उपयोग किया जाएगा। जॉइंट पुलिस कमिश्नर सेंट्रल रेंज मधुर वर्मा ने कहा कि इस तरह के शरारती तत्वों को पकड़ने के लिए पुलिस को पूरी जानकारी उपलब्ध हो रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी कहा कि पत्थरबाजी के दौरान उन्होंने अत्यधिक बल का इस्तेमाल नहीं किया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए न्यूनतम बल का प्रयोग किया।

    तबाही की स्थिति और छावनी जैसा माहौल

    पथराव के बाद पुलिस ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया। तुर्कमान गेट क्षेत्र में सभी दुकानें और बाजार बंद हैं और सड़कें वीरान पड़ी हैं। दिल्ली पुलिस रैपिड एक्शन फोर्स और सीआरपीएफ के जवान गली-गली में पैट्रोलिंग कर रहे हैं। पुलिस और प्रशासन ने कर्फ्यू जैसी स्थिति बनाए रखने के लिए मुख्य मार्गों पर बैरिकेड्स लगाए हैं और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाया है।तुर्कमान गेट की यह हिंसक घटना दिल्ली में एक और विवादास्पद और संवेदनशील स्थिति का उदाहरण बन गई है। पुलिस और प्रशासन ने प्रभावी सुरक्षा कदम उठाए हैं और स्थिति पर नियंत्रण पा लिया है। हालांकि इस घटना से इलाके में असंतोष और तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि इस पूरे मामले की गहरी जांच की जाएगी और जिन लोगों ने हिंसा भड़काई उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
  • बीजेपी-कांग्रेस का अप्रत्याशित गठबंधन महाराष्ट्र में सत्ता के समीकरणों का हुआ बड़ा उलटफेर

    बीजेपी-कांग्रेस का अप्रत्याशित गठबंधन महाराष्ट्र में सत्ता के समीकरणों का हुआ बड़ा उलटफेर


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में एक अजीबोगरीब और अप्रत्याशित गठबंधन ने सभी को चौंका दिया है। भारतीय जनता पार्टी BJP और कांग्रेस जो आम तौर पर एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंदी माने जाते हैं ने यहां एक साथ हाथ मिलाया है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य शिवसेना शिंदे गुट को सत्ता से बाहर करना था। इस नए गठबंधन को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है और इससे कई पुराने समीकरण भी बदलते नजर आ रहे हैं।

    शिवसेना का विरोध और आरोप

    बीजेपी और कांग्रेस के इस गठबंधन के खिलाफ शिवसेना शिंदे गुट ने तीव्र विरोध दर्ज किया है। शिवसेना ने इस गठबंधन को विश्वासघात और अवसरवादी करार दिया है। पार्टी के विधायक बालाजी किनिकर ने कहा कि बीजेपी को कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता के लिए कोई भी समझौता करने में कोई झिझक नहीं है। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन केवल राजनीतिक नहीं बल्कि विचारधारा का भी था और इसे हमेशा के लिए मजबूत और अडिग रहना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि तुर्कमान गेट के पास शिवसेना ने हमेशा विकास की राजनीति की है और आगे भी वही रास्ता अपनाया जाएगा।

    बीजेपी का पलटवार

    वहीं बीजेपी ने शिवसेना शिंदे गुट के आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है। बीजेपी उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने कहा कि यदि बीजेपी शिंदे गुट के साथ अंबरनाथ नगर परिषद की सत्ता में बैठती तो यह असल में एक अभद्र गठबंधन होता। उन्होंने यह भी कहा कि अंबरनाथ नगर परिषद में महायुति गठबंधन से कई बार बातचीत करने की कोशिश की गई लेकिन शिंदे गुट ने सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। बीजेपी ने आरोप लगाया कि शिंदे गुट पिछले 25 वर्षों से भ्रष्टाचार में लिप्त है और उस गुट के साथ गठबंधन करना बीजेपी के लिए सही नहीं था।

    महायुति गठबंधन में दरार

    बीजेपी और कांग्रेस के बीच हुए इस गठबंधन ने महायुति के भीतर की दरारों को भी उजागर किया है। महायुति जो महाराष्ट्र की सत्ताधारी गठबंधन है अब एकजुट नहीं दिखाई दे रही है। 29 म्युनिसिपल कॉर्पोरेशनों में से महायुति के सहयोगी 24 कॉर्पोरेशनों में एक साथ चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। हालांकि बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट मुंबई ठाणे और कोल्हापुर में एकजुट होकर चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

    अंबरनाथ नगर परिषद का समीकरण

    अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी की तेजश्री करंजुले ने नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव में जीत हासिल की है। इस नगर परिषद में बीजेपी के 16 कांग्रेस के 12 और अजित पवार गुट के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 4 पार्षदों का समर्थन है। इस प्रकार सत्तापक्ष के पास कुल 32 पार्षदों का समर्थन है। हालांकि कांग्रेस के 12 पार्षदों को अलग कर देने के बाद बीजेपी के पास 20 पार्षदों का समर्थन था जो बहुमत के आंकड़े से बहुत कम था। अब बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत हो गया है जिससे नगर परिषद का कार्य संचालन सुचारू रूप से होने में मदद मिलेगी।

    यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ है जहां बीजेपी और कांग्रेस ने एक साथ आकर सत्ता की बागडोर संभालने की कोशिश की है। यह गठबंधन ना केवल अंबरनाथ नगर परिषद के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। शिवसेना शिंदे गुट द्वारा इस गठबंधन को विश्वासघात करार दिए जाने के बाद राज्य के सत्ताधारी गठबंधन के अंदर की दरारें और गहरी होती नजर आ रही हैं। अब यह देखना होगा कि आगामी नगर निगम चुनावों में इन नए समीकरणों का क्या असर पड़ता है और महाराष्ट्र की राजनीतिक जमीन में कितना बड़ा बदलाव आता है।

  • प्रधानमंत्री ने सुभाषितम के माध्यम से सद्गुण, चरित्र, ज्ञान और धन के शाश्वत मूल्यों को रेखांकित किया

    प्रधानमंत्री ने सुभाषितम के माध्यम से सद्गुण, चरित्र, ज्ञान और धन के शाश्वत मूल्यों को रेखांकित किया


     
    नई दिल्ली ।  प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज भारतीय परंपरा और शास्त्रीय ज्ञान के शाश्वत मूल्यों पर विचार करते हुए देशवासियों को जीवन में इनका पालन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने संदेश में बल दिया कि सच्ची सुंदरता सद्गुणों से निखरती है वंश गौरव चरित्र से परिलक्षित होता है ज्ञान का वास्तविक मूल्य सफलता में है और धन का अर्थ केवल भोग नहीं बल्कि जिम्मेदारीपूर्ण आनंद और समाज कल्याण में योगदान है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये मूल्य न केवल प्राचीन काल में महत्वपूर्ण रहे हैं बल्कि आधुनिक समाज और वर्तमान समय में भी ये उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने इसे देश की प्रगति सामूहिक जिम्मेदारी और समाज में सद्भाव कायम रखने की दिशा में एक मार्गदर्शक के रूप में बताया। उन्होंने अपने संदेश में एक संस्कृत श्लोक साझा किया जो सद्गुण चरित्र ज्ञान और धन के महत्व को संक्षेप में प्रस्तुत करता है:

    गुणो भूषयते रूपं शीलं भूषयते कुलम्।
    सिद्धिर्भूषयते विद्यां भोगो भूषयते धनम्॥

    प्रधानमंत्री ने इस श्लोक की व्याख्या करते हुए कहा कि व्यक्ति की वास्तविक सुंदरता उसके गुणों में होती है। शिष्टाचार नैतिकता और चरित्र ही किसी वंश या परिवार का गौरव बढ़ाते हैं। शिक्षा और ज्ञान जीवन को दिशा और उद्देश्य प्रदान करते हैं जबकि धन का उपयोग केवल भोग के लिए नहीं बल्कि सामाजिक और व्यक्तिगत जिम्मेदारी के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यही वे मूल्य हैं जो न केवल व्यक्तिगत जीवन में सफलता और सम्मान दिलाते हैं बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान करते हैं।प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा में ये मूल्य पीढ़ियों से संचित हैं और इन्हें जीवन में अपनाना न केवल नैतिक कर्तव्य है बल्कि आधुनिक जीवन में भी ये अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में इन मूल्यों को आत्मसात करें और दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करें।

    इस संदेश के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्पष्ट किया कि सद्गुण चरित्र ज्ञान और धन केवल व्यक्तिगत लाभ का साधन नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति और विकास का मार्गदर्शन करने वाले शाश्वत मूल्य हैं। उन्होंने कहा कि जब ये मूल्य समाज में व्यापक रूप से अपनाए जाएंगे तब ही भारत की सामूहिक शक्ति संस्कृति और नैतिकता का सही परिप्रेक्ष्य उजागर होगा।प्रधानमंत्री के इस संदेश को विशेषज्ञ और नागरिक दोनों ही प्रेरणादायक मान रहे हैं। यह न केवल भारतीय सांस्कृतिक धरोहर की याद दिलाता है बल्कि आधुनिक जीवन में नैतिक सामाजिक और व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाने के महत्व को भी रेखांकित करता है।

  • तुर्कमान गेट बवाल में सपा सांसद का नाम उछला, मोहिबुल्लाह नदवी बोले– हिंसा नहीं, शांति के लिए गया था

    तुर्कमान गेट बवाल में सपा सांसद का नाम उछला, मोहिबुल्लाह नदवी बोले– हिंसा नहीं, शांति के लिए गया था


    नई दिल्ली। बीतीरात दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में हुए बवाल मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का नाम आया है। पुलिस उनसे पत्थरबाजी के इस मामले में पूछताछ करेगी। मोहिबुल्लाह नदवी कहा कि मेरी जानकारी में हाईकोर्ट का ऐसा कोई ऑर्डर नहीं है, जिसमें अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया हो। अभी बात ही चल रही थी कि कितना मस्जिद का एरिया है और कितना अतिक्रमण हुआ है। या अतिक्रमण नहीं भी हुआ है।
    इसी दरमियान रात में मुझे खबर मिली कि मस्जिद को घेर लिया गया है।

    बवाल वाली जगह क्यों पहुंचे थे सपा सांसद?
    सपा सांसद ने आगे कहा, ‘इससे पहले महरौली में एक मस्जिद रातोंरात गायब कर दी गई थी। उसके लिए मैंने संसद में भी आवाज उठाई थी। तुर्कमान गेट वाली खबर मैंने सुनी तो सोचा कि लोग कहीं बेकाबू ना हो जाएं, इसलिए मैं मौके पर पहुंचा था। मैं जब वहां गया तो लोगों से अपील की कि अपने-अपने घरों में जाएं। एक वीडियो भी हैं, जिसमें मैं लोगों से शांत रहने के लिए कह रहा हूं।’

    फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास पत्थरबाजी क्यों?
    गौरतलब है कि मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात दिल्ली पुलिस और MCD की टीम, तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुए अवैध निर्माण को तोड़ने पहुंची थी।

    तभी मौके पर उन्मादियों की भीड़ पहुंच गई और उन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी।

    दिल्ली पुलिस ने 5 लोगों पर की FIR
    पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है। अबतक 5 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के जरिए दंगाइयों की पहचान करने में जुटी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि जब इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही थी, उस वक्त अफवाह फैला दी गई कि मस्जिद को तोड़ा जा रहा है।

    यही बोलकर लोगों को जमा किया गया और फिर बवाल हो गया।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। वहीं, सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का कहना है कि उन्होंने कोई कानून नहीं तोड़ा और न ही किसी को हिंसा के लिए उकसाया। उनका दावा है कि वे सिर्फ शांति बनाए रखने और हालात को काबू में रखने के उद्देश्य से वहां पहुंचे थे। इस मामले में आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी।

  • तुर्कमान गेट ऐतिहासिक दरवाजा संघर्षों का गवाह और विवादों का केंद्र

    तुर्कमान गेट ऐतिहासिक दरवाजा संघर्षों का गवाह और विवादों का केंद्र


    नई दिल्ली । दिल्ली का तुर्कमान गेट हाल ही में फिर सुर्खियों में है। 6 और 7 जनवरी 2025 की रात को यहां हुए हिंसक संघर्ष ने एक बार फिर इस इलाके को चर्चा का केंद्र बना दिया। घटना उस समय घटी जब दिल्ली पुलिस और MCD की टीम ने अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास बुलडोजर चलाया। इसके खिलाफ स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू किया और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। इस घटना ने तुर्कमान गेट के इतिहास सामाजिक संघर्षों और राजनीतिक विवादों के पुराने अध्यायों को फिर से जीवित कर दिया है।

    तुर्कमान गेट का ऐतिहासिक महत्व

    तुर्कमान गेट जिसे 17वीं शताब्दी में मुग़ल सम्राट शाहजहाँ के शासनकाल में बनाया गया था पुरानी दिल्ली का एक प्रमुख दरवाजा था। इसे शाहजहां बाद पुरानी दिल्ली के प्रमुख दरवाजों में से एक माना जाता है। यह दरवाजा प्रसिद्ध सूफी संत शाह तुर्कमान की दरगाह के पास स्थित होने के कारण इस दरवाजे का नाम तुर्कमान गेट पड़ा। शाह तुर्कमान की याद में हर साल उर्स का आयोजन भी किया जाता है जिससे इस इलाके की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान बनी रहती है।इसकी वास्तुकला में तीन मेहराबी प्रवेश द्वार और दो मंजिला बुर्ज शामिल हैं जो मुग़ल काल की शानदार निर्माण शैली का प्रतीक हैं। तुर्कमान गेट की संरचना और इतिहास इसे दिल्ली के अहम ऐतिहासिक धरोहरों में से एक बनाती है।

    1976 में पहली बार चला बुलडोजर

    तुर्कमान गेट का नाम पहली बार बड़े पैमाने पर 13 अप्रैल 1976 को चर्चा में आया जब संजय गांधी के नेतृत्व में आपातकाल के दौरान दिल्ली में झुग्गी हटाओ अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत तुर्कमान गेट क्षेत्र में झुग्गियां हटाई गईं जिसके बाद इलाके में असंतोष और गुस्सा फैल गया। शुरूआत में यह विरोध सीमित था लेकिन जब 19 अप्रैल 1976 को फिर से बुलडोजर चलने लगे तो स्थिति बेकाबू हो गई। जामा मस्जिद चांदनी चौक और तुर्कमान गेट जैसे इलाकों में जबरदस्त विरोध हुआ। इस विरोध ने हिंसक रूप ले लिया और पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। यही वह समय था जब तुर्कमान गेट इलाके में संघर्ष ने व्यापक रूप ले लिया।

    तुर्कमान गेट और औरंगजेब

    एक सवाल जो अक्सर उठता है वह है तुर्कमान गेट और औरंगजेब के बीच संबंध। हालांकि तुर्कमान गेट का निर्माण शाहजहां के शासनकाल में हुआ था और औरंगजेब शाहजहां का पुत्र था लेकिन इसका कोई सीधा ऐतिहासिक संबंध औरंगजेब से नहीं है। यह भ्रम अक्सर सोशल मीडिया और अधूरी जानकारी के कारण फैलता है जबकि तुर्कमान गेट की वास्तुकला और इतिहास सीधे तौर पर शाहजहां के समय से जुड़ी हुई है।

    2025 में फिर हुआ विवाद

    करीब 50 साल बाद तुर्कमान गेट फिर से चर्चा का विषय बना और इसका कारण था फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास का अतिक्रमण। सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण और कब्जे ने इस ऐतिहासिक स्थल को फिर से विवादों में घेर लिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि इस इलाके से अवैध कब्जे हटाए जाएं। इसके बाद 6 जनवरी 2025 को एक बार फिर से बुलडोजर तुर्कमान गेट के आसपास के क्षेत्र में चले जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय लोगों ने भारी विरोध शुरू कर दिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। तुर्कमान गेट का इतिहास सिर्फ एक दरवाजे का नहीं है बल्कि यह दिल्ली के सामाजिक राजनीतिक और प्रशासनिक संघर्षों का गवाह रहा है आपातकाल से लेकर आज तक इस स्थल ने कई आंदोलन और संघर्ष देखे हैं। 1976 में हुए झुग्गी हटाओ अभियान से लेकर आज तक तुर्कमान गेट एक बार फिर से यह दर्शाता है कि यह क्षेत्र न सिर्फ ऐतिहासिक महत्व रखता है बल्कि आज भी विवादों और संघर्षों का केंद्र है।