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  • कूटनीतिक सफलता…. ईरान युद्ध के बीच होर्मुज से अब तक निकले तेल-गैस से भरे भारत के 9 जहाज

    कूटनीतिक सफलता…. ईरान युद्ध के बीच होर्मुज से अब तक निकले तेल-गैस से भरे भारत के 9 जहाज


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष (West Asia Crisis) के बीच ईरान (Iran) ने समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लगभग बंद कर दिया है। इससे खाड़ी देशों से गैस और तेल की आपूर्ति बाधित हो गई है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में तेल की कीमतों में आग लगी है। लेकिन, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिन्होंने इस जोखिम भरे रास्ते से तेल और गैस से भरे सबसे अधिक जहाज सुरक्षित निकाले हैं। होर्मुज फारस और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा समुद्री मार्ग है। ओमान और ईरान के बीच स्थित होर्मुज जलमार्ग एक जगह मात्र 33 किलोमीटर चौड़ा है। यह फारस की खाड़ी को शेष दुनिया से जोड़ता है।

    इस रास्ते से दुनिया का लगभग 20 फीसदी कच्चे तेल का नौवहन होता है। 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल की ओर से हमला किए जाने के बाद ईरान ने इस मार्ग की नाकेबंदी कर दी है। कुछ तेल टैंकरों को ईरान ने निशाना भी बनाया है। लेकिन ईरान से अपने ऐतिहासिक संबंधों और मजबूत कूटनीति के जरिये भारत होर्मुज के रास्ते अब तक तेल और गैस से भरे 9 जहाज सुरक्षित निकाल लाने में सफल रहा है। इनमें से 8 जहाज भारतीय तट पर पहुंच गए हैं, जबकि एक पहुंचने वाला है।


    सबसे पहले जहाज पार कराया था

    पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच भारत ने सबसे पहले घरेलू लिक्विफाइड पेट्रोलिमय गैस (एलपीजी) से भरे दो जहाजों को होर्मुज पार कराया था। शिवालिक और नंदा देवी नामक इन दोनों टैंकरों को ईरान की नौसेना ने ही अपनी सुरक्षा में होर्मुज को पार कराा था। हालांकि, भारत ने भी अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में पोत तैनात कर रखे हैं। शिवालिक और एमटी नंदा देवी 92,712 टन एलपीजी लेकर आए थे। शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह और नंदा देवी उसके अगले दिन 17 मार्च को गुजरात के ही कांडला बंदरगाह पहुंचा था।


    जग लाडकी से जगत वसंत तक, भारत पहुंचे कई जहाज

    जग लाडकी संयुक्त अरब अमीरात से 80,886 टन कच्चा तेल लेकर 18 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था। इसके बाद पाइन गैस और जग वसंत 92,612 टन एलपीजी लेकर 26 और 28 मार्च को भारत पहुंचे थे। 94,000 टन एलपीजी लेकर बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम भी आए हैं। बीडब्ल्यू टीवाई 31 मार्च को मुंबई और बीडब्ल्यू ईएलएम 1 अप्रैल को मंगलोर बंदरगाह पहुंचा था। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि लगभग 44,000 टन एलपीजी लेकर सी बर्ड 2 अप्रैल को मंगलोर बंदरगाह पहुंचा था। यह ईरान से एलपीजी लेकर आया है। सात साल में पहली बार भारत ने ईरान से गैस खरीदा है।


    ईरान के साथ भुगतान की समस्या नहीं कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित

    केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि ईरान से कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान संबंधी कोई समस्या नहीं है और रिफाइनरियां तेहरान के साथ दुनियाभर के विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं से तेल हासिल कर रही हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन खबरों को खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि ईरानी कच्चा तेल ले जा रहा एक तेल टैंकर अपने पहले से संकेतित गंतव्य भारत के बजाय चीन की ओर मुड़ गया है।

    मंत्रालय ने कहा कि ये दावे उद्योग के उस सामान्य अभ्यास की अनदेखी करते हैं, जहां परिचालन लचीलेपन के आधार पर यात्रा के दौरान कार्गो अपना गंतव्य बदल सकते हैं। यदि यह खेप भारत आती, तो लगभग सात वर्षों में ऐसी पहली खेप होती। मंत्रालय ने इन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया कि भुगतान बाधाओं के कारण कार्गो को गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन की ओर मोड़ा गया था। मंत्रालय ने कहा कि ईरानी कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान की कोई बाधा नहीं है।

    मंत्रालय ने स्पष्ट किया, भारत 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात करता है, और कंपनियों के पास विभिन्न स्रोतों और भौगोलिक क्षेत्रों से तेल प्राप्त करने का पूर्ण लचीलापन है। मंत्रालय के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान सहित अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं को सुरक्षित कर लिया है। जहाजों पर नजर रखने वाली फर्म केपलर ने शुक्रवार को कहा था कि 2002 में निर्मित और 2025 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित टैंकर पिंग शुन अब गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन के डोंगयिंग को अपना गंतव्य बता रहा है।

  • सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री विवाद पर SC की 9 जजों की पीठ करेगी सुनवाई… अन्य धर्मों पर भी होगा असर….

    सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री विवाद पर SC की 9 जजों की पीठ करेगी सुनवाई… अन्य धर्मों पर भी होगा असर….


    नई दिल्ली।
    सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) में महिलाओं के प्रवेश (Women’s entry) से शुरू हुआ विवाद अब एक ऐतिहासिक संवैधानिक मोड़ पर खड़ा है। 7 अप्रैल 2026 से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 9 जजों की संविधान पीठ उन व्यापक कानूनी सवालों पर सुनवाई शुरू करने जा रही है। यह न केवल हिंदू धर्म, बल्कि मुस्लिम, पारसी और दाऊदी बोहरा समुदायों की धार्मिक प्रथाओं को भी प्रभावित करेंगे।

    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की यह पीठ केवल सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर विचार नहीं कर रही है। अदालत के सामने असल चुनौती यह तय करना है कि क्या व्यक्तिगत मौलिक अधिकार किसी समुदाय के धार्मिक अधिकारों से ऊपर हैं। इस फैसले का असर मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, पारसी महिलाओं के अधिकारों और दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित प्रथाओं पर भी पड़ेगा।

    2018 में तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा की बेंच ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कहा था कि भक्ति को लैंगिक भेदभाव का शिकार नहीं बनाया जा सकता। एकमात्र महिला जज, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने तब असहमति जताते हुए कहा था कि धार्मिक प्रथाओं की तर्कसंगतता की जांच करना अदालतों का काम नहीं है। नवंबर 2019 में पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि यह मुद्दा बहुत व्यापक है और इसे बड़ी बेंच (9 जजों) को भेज दिया गया।


    सुप्रीम कोर्ट के सामने कई सवाल

    संविधान पीठ कुछ मुद्दों पर स्पष्टता लाने की कोशिश कर सकती है। धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का दायरा और सीमा क्या है? अनुच्छेद 25 (व्यक्तिगत अधिकार) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक संप्रदाय के अधिकार) के बीच तालमेल कैसे बैठेगा? क्या धार्मिक संप्रदाय के अधिकार संविधान के ‘भाग-III’ (मौलिक अधिकार) के अधीन हैं? अनुच्छेद 25 और 26 में प्रयुक्त ‘नैतिकता’ शब्द का अर्थ क्या है? क्या इसमें संवैधानिक नैतिकता शामिल है? क्या अदालतें यह तय कर सकती हैं कि कोई धार्मिक प्रथा उस धर्म का अनिवार्य हिस्सा है या नहीं? अनुच्छेद 25(2)(b) में हिंदुओं के वर्गों का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या कोई व्यक्ति जो उस विशेष धार्मिक संप्रदाय का हिस्सा नहीं है, उसकी प्रथाओं को कोर्ट में चुनौती दे सकता है?


    अन्य धर्मों पर भी होगा असर

    यह सुनवाई इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इसमें कई अन्य विवादों को जोड़ दिया गया है। मुस्लिम महिलाओं के मस्जिदों में प्रवेश का अधिकार। दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित ‘बहिष्कार’ और अन्य प्रथाओं की वैधता। गैर-पारसी से शादी करने वाली पारसी महिलाओं के ‘अग्नि मंदिर’ में प्रवेश का अधिकार। आपको बता दें कि अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कई जैन संगठनों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है, क्योंकि कोर्ट का फैसला उनके व्यक्तिगत कानूनों को प्रभावित कर सकता है।


    नई बेंच का गठन

    CJI सूर्य कांत के नेतृत्व वाली इस बेंच में विविधता का ध्यान रखा गया है। इसमें जस्टिस बीवी नागरत्ना सहित देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों से आए अनुभवी जज शामिल हैं। 7 अप्रैल से होने वाली यह दैनिक सुनवाई भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक व्याख्याओं में से एक साबित होगी। अदालत के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि संविधान का अनुच्छेद 25 धर्म मानने की आजादी देता है, लेकिन साथ ही यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है।

    याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कोई भी प्रथा जो महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है, वह धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं हो सकती। धार्मिक संस्थाओं का तर्क है कि धर्म की अपनी आंतरिक स्वायत्तता होती है और अदालतों को सदियों पुरानी परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

  • Weather: गर्मी के मौसम में तेज बारिश.. ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान… कई राज्यों में आज भी अलर्ट

    Weather: गर्मी के मौसम में तेज बारिश.. ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान… कई राज्यों में आज भी अलर्ट


    नई दिल्ली।
    पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और ऊपरी हवा में बने चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से देशभर के मौसम (Weather) में बड़ा बदलाव दर्ज किया जा रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर उत्तर भारत (North India.) में दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग के अनुसार जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों में भारी बारिश (Heavy Rain), तेज आंधी, तूफान और ओलावृष्टि (Hailstorm) की चेतावनी जारी की गई है। 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं, जबकि किसानों को फसलों के नुकसान का खतरा बढ़ गया है।

    देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जहां 64.5 से 115.5 मिमी तक वर्षा होने का अनुमान है। इन इलाकों में ऑरेंज अलर्ट लागू है और कई स्थानों पर पहले से ही बादल छाए हुए हैं तथा बारिश का दौर जारी है। पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के चलते भूस्खलन जैसी घटनाओं की आशंका भी जताई गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय है। इसके साथ ही ऊपरी हवा में चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है और पश्चिमी भारत के ऊपर उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम लगातार सक्रिय है। इन सभी मौसमीय प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से देश के विभिन्न हिस्सों में अस्थिर मौसम की स्थिति बनी हुई है, जिसमें बारिश, तूफान और ओलावृष्टि शामिल हैं।


    राजस्थान के कई जिलों में खेतों में बिछी सफेद चादर

    राजस्थान में शनिवार को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से दोपहर बाद मौसम में बदलाव आया। जयपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर सहित कई जिलों में गरज के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और हल्की से मध्यम बारिश के साथ छिटपुट ओलावृष्टि भी हुई। बीकानेर में शुक्रवार को खेतों में ओले बिछे नजर आए थे। मौसम विभाग ने बताया कि एक नया और शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ 6 अप्रैल की दोपहर से जोधपुर और बीकानेर के कुछ हिस्सों में सक्रिय होने की संभावना है।

    इसके प्रभाव से जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, जयपुर, भरतपुर और कोटा डिवीजनों के कई हिस्सों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने, कुछ जगहों पर भारी बारिश होने और छिटपुट ओलावृष्टि होने की संभावना है।


    बंगाल में उमस भरी गर्मी जारी

    जहां एक ओर उत्तर और पश्चिम भारत में मौसम ठंडा और अस्थिर हो रहा है, वहीं पश्चिम बंगाल के गंगा तटीय क्षेत्रों में गर्म और उमस भरा मौसम बना हुआ है। इस तरह की उमस शरीर को थकाने वाली होती है और स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती है।


    पिछले 24 घंटों में बारिश का असर

    पिछले 24 घंटों के दौरान देश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई है। जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और कर्नाटक के कुछ इलाकों में अच्छी वर्षा हुई है। जम्मू-कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में 50 मिमी तक बारिश दर्ज की गई, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों, केरल और माहे में 20 मिमी तक हल्की से मध्यम वर्षा हुई।


    अस्थिर रहेगा मौसम, कुछ दिन और जारी रहेगा असर

    आने वाले कुछ दिनों तक बारिश, आंधी, तूफान और ओलावृष्टि की आशंका को देखते हुए मौसम विभाग ने उत्तर भारत के लोगों और किसानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके। मौसम विभाग ने लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। आंधी और बिजली के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचें और पेड़ों के नीचे खड़े न हों। घर की छत पर रखी ढीली वस्तुओं को सुरक्षित करें और वाहनों को छत के नीचे पार्क करें ताकि ओलों से नुकसान न हो। बिजली गिरने के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सीमित उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।


    तापमान में गिरावट मौसम रहेगा ठंडा

    मौसम के इस बदलाव का असर तापमान पर भी साफ दिखाई देगा। उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है। आने वाले कुछ दिनों तक मौसम ठंडा और अस्थिर बना रह सकता है, हालांकि बाद में तापमान में हल्की बढ़ोतरी के संकेत भी हैं। देश में ओडिशा के झारसुगुड़ा में अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर में 16.2 डिग्री सेल्सियस रहा।


    दक्षिण भारत भी अछूता नहीं, केरल में भारी बारिश के आसार

    उत्तर भारत के साथ-साथ दक्षिण भारत में भी मौसम का असर देखा जा रहा है। केरल और माहे में भी 64.5 से 115.5 मिमी तक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। यहां गरज के साथ तेज बारिश का पूर्वानुमान है, जिससे स्थानीय स्तर पर जलभराव और यातायात प्रभावित हो सकता है।

  • वोटिंग से पहले विवाद गहराया! भवानीपुर सीट पर TMC की सख्त मांग, चुनाव प्रक्रिया पर उठे सवाल

    वोटिंग से पहले विवाद गहराया! भवानीपुर सीट पर TMC की सख्त मांग, चुनाव प्रक्रिया पर उठे सवाल

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव से पहले नया विवाद खड़ा हो गया है। सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस सीट के रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) को हटाने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि यह अधिकारी भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के काफी करीबी हैं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।

    टीएमसी ने शिकायत पत्र में उठाए गंभीर सवाल
    टीएमसी ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को शिकायत पत्र भेजकर कहा कि भवानीपुर के लिए नियुक्त आरओ की नियुक्ति पर गंभीर आपत्ति है। पार्टी का दावा है कि यह अधिकारी पहले से ही शुभेंदु अधिकारी के करीब हैं। खासकर जब यह अधिकारी नंदीग्राम-2 में ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर थे, तब दोनों की नजदीकी सार्वजनिक तौर पर देखी गई थी।

    चुनाव की निष्पक्षता पर खतरा- टीएमसी
    टीएमसी का कहना है कि ऐसे संबंध चुनाव प्रक्रिया पर पक्षपात का खतरा बढ़ाते हैं और चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। रिटर्निंग ऑफिसर का काम बेहद संवेदनशील होता है, जैसे नामांकन की जांच, मतदान प्रक्रिया की निगरानी और नतीजों की घोषणा। पार्टी ने अधिकारी की वर्तमान पोस्टिंग पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अधिकारी अब भूमि अभिलेख विभाग में अतिरिक्त निदेशक हैं, जो वरिष्ठ अधिकारियों का पद है, और इसकी नियुक्ति संदिग्ध और पक्षपाती लग रही है।

    आचार संहिता और संवैधानिक जिम्मेदारी का हवाला
    टीएमसी ने संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व कानून का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करे। साथ ही पार्टी ने आचार संहिता का भी हवाला दिया, जिसमें प्रशासनिक निष्पक्षता अनिवार्य बताई गई है।
    टीएमसी ने संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व कानून का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करे। साथ ही पार्टी ने आचार संहिता का भी हवाला दिया, जिसमें प्रशासनिक निष्पक्षता अनिवार्य बताई गई है।

    पार्टी ने बताया कि 24 मार्च को शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से तीन वैकल्पिक अधिकारियों के नाम मांगे थे, जिन्हें राज्य सरकार ने भेज दिया। लेकिन अब तक आरओ को हटाने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। टीएमसी ने इसे संवैधानिक दृष्टि से गलत और चुनाव के लिए खतरनाक बताया और चुनाव आयोग से तुरंत कार्रवाई की मांग की है, ताकि चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

  • आप में गहराया विवाद, राघव चड्ढा के बयान से बढ़ा पार्टी में टकराव, अपने ही नेताओं ने उठाए सवाल

    आप में गहराया विवाद, राघव चड्ढा के बयान से बढ़ा पार्टी में टकराव, अपने ही नेताओं ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के भीतर मतभेद अब सार्वजनिक टकराव का रूप ले चुके हैं। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद उनका वीडियो संदेश पार्टी में चर्चा का केंद्र बन गया। राघव ने खुद को जनता की आवाज बताते हुए पार्टी की नीतियों और निर्णयों पर गंभीर सवाल उठाए। जवाब में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके राजनीतिक रुख और भूमिका पर सवाल खड़े किए। इस विवाद ने विरोधी दलों को भी सक्रिय कर दिया है।

    भाजपा का तीखा हमला
    प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने पार्टी नेतृत्व और अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर असंतोष चरम पर है और नेतृत्व केवल बाहर से एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है। राघव चड्ढा का वीडियो इस बात का प्रमाण है कि पार्टी के अंदर संवाद और लोकतंत्र खत्म हो चुके हैं।

    सचदेवा ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेताओं को अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ता है, जो पार्टी की आंतरिक स्थिति को उजागर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी अब एक व्यक्ति केंद्रित संगठन बन गई है, जहां स्वतंत्र राय रखने वाले नेताओं को किनारे कर दिया जाता है या दबाया जाता है।

    राघव पर आप नेताओं ने उठाए सवाल
    पार्टी ने चड्ढा के बयान पर पलटवार करते हुए इसे सामान्य संगठनात्मक निर्णय बताया। आरोप लगाया गया कि चड्ढा लंबे समय से पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे थे और जनहित के मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी सरकार को चुनौती देने से बच रहे हैं।

    भगवंत सिंह मान ने कहा कि किसी भी पार्टी में नेतृत्व और पदों में बदलाव सामान्य प्रक्रिया है। अगर कोई सदस्य पार्टी के सामूहिक निर्णयों का समर्थन नहीं करता या व्हिप के खिलाफ जाता है, तो कार्रवाई स्वाभाविक है।

    राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि राघव चड्ढा पार्टी की कसौटी पर खरे नहीं उतर रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव, पंजाब के अधिकारों और गुजरात में कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई जैसे मुद्दों पर चुप्पी साधी। प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी निशाना साधते हुए कहा कि राघव न तो प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछ रहे हैं और न ही बड़े राष्ट्रीय मुद्दों को उठाने में सक्रिय हैं।

    पार्टी के भीतर फूट और विपक्षी दलों की सक्रियता
    इस विवाद ने पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और भाजपा सहित अन्य विपक्षी दल इसे पार्टी में लोकतंत्र की कमी और नेतृत्व की कमजोरी के रूप में पेश कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी के लिए यह समय अपने भीतर उठ रहे असंतोष को संभालने और रणनीति तय करने का चुनौतीपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

  • लंबी कानूनी जंग खत्म, 61 मामलों का निपटारा कर दंपती को अलग होने की अनुमति

    लंबी कानूनी जंग खत्म, 61 मामलों का निपटारा कर दंपती को अलग होने की अनुमति


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश में 1994 से चल रहे वैवाहिक विवाद को समाप्त करते हुए दंपती को तलाक की मंजूरी दे दी। कोर्ट ने देशभर की विभिन्न अदालतों में लंबित 61 मुकदमों को एक साथ खत्म कर दिया।

    जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने अनुच्छेद 142 के विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए लंबे समय से अलग रह रहे पति-पत्नी के विवाह को समाप्त करने का आदेश दिया। मामला अवमानना याचिका के रूप में शीर्ष अदालत पहुंचा था, लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत ने इसे स्थायी समाधान तक पहुंचाने का फैसला किया।

    आपसी सहमति से हुआ निपटारा

    सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित किया। इसके बाद आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया तय की गई। कोर्ट ने आदेश में कहा कि एलिमनी पर सहमति बन चुकी है और पति पत्नी को एकमुश्त 1 करोड़ रुपये देगा। इसके साथ ही लोनावला स्थित संपत्ति में पत्नी को हिस्सा देने पर भी सहमति बनी।

    अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के खाते में संपत्ति हिस्सेदारी के रूप में 90 लाख रुपये जमा किए जाएं। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सभी विवाद समाप्त माने जाएंगे।

    61 केस एक साथ खत्म

    शीर्ष अदालत ने विभिन्न अदालतों—ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट—में चल रहे कुल 61 मामलों को रद्द कर दिया। इनमें घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद और अन्य आपराधिक व दीवानी मुकदमे शामिल थे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इसी विवाद से जुड़े किसी भी नए मामले की सुनवाई नहीं होगी।

    अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल

    अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष आदेश देने का अधिकार है। इसी प्रावधान का उपयोग करते हुए अदालत ने कहा कि इस लंबे विवाद का स्थायी समाधान जरूरी है और अब किसी भी तरह की कानूनी बाधा नहीं रहनी चाहिए।

    दोनों पक्षों ने लिखित रूप में अदालत के फैसले को स्वीकार किया और आगे कोई मुकदमा न लड़ने पर सहमति जताई। अदालत ने इस मामले में पहले से जारी विभिन्न न्यायिक आदेशों को भी निरस्त कर दिया, जिससे 32 साल पुराना विवाद पूरी तरह समाप्त हो गया।
  • ‘समोसा’ विवाद के पीछे सियासी दरार? AAP में खटपट की इनसाइड स्टोरी

    ‘समोसा’ विवाद के पीछे सियासी दरार? AAP में खटपट की इनसाइड स्टोरी


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी में उभरते युवा चेहरे माने जाने वाले राघव चड्ढा इन दिनों अपनी ही पार्टी के निशाने पर हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटाने के साथ-साथ संसद में उनकी भूमिका भी सीमित कर दी है। कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले चड्ढा अब पार्टी के भीतर अलग-थलग नजर आ रहे हैं।

    आतिशी और सौरभ भारद्वाज का हमला

    शुक्रवार को आतिशी और सौरभ भारद्वाज ने चड्ढा पर तीखा हमला बोला। आरोप है कि विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर चड्ढा ने हस्ताक्षर नहीं किए।

    आतिशी ने सवाल उठाया कि जब विपक्ष एकजुट था तो चड्ढा पीछे क्यों हटे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संसद में अहम मुद्दों पर वे चुप रहे।

    ‘समोसा’ टिप्पणी पर भी विवाद

    पार्टी नेताओं ने चड्ढा द्वारा संसद में उठाए गए मुद्दों पर भी तंज कसा। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि देश के बड़े मुद्दों की बजाय चड्ढा हवाई अड्डों पर समोसे की कीमत और जूस के पैकेट जैसे विषयों पर चर्चा कर रहे थे। हालांकि चड्ढा ने इन पर बने मीम्स का स्वागत किया था, लेकिन पार्टी ने इसे गंभीरता की कमी बताया।

    पुरानी नाराजगी भी बनी वजह

    आंतरिक असंतोष की जड़ें 2024 तक जाती बताई जा रही हैं, जब कथित आबकारी मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान चड्ढा आंख के ऑपरेशन के लिए लंदन में थे। इस पर अब सवाल उठाए जा रहे हैं कि उस समय वे पार्टी के साथ सक्रिय क्यों नहीं दिखे।

    पंजाब की राजनीति का असर

    2022 में पंजाब में जीत के बाद चड्ढा को ‘सुपर सीएम’ कहा जाने लगा था, जिससे स्थानीय नेताओं में असंतोष बढ़ा। बाद में पार्टी नेतृत्व ने पंजाब पर सीधा नियंत्रण मजबूत किया और चड्ढा की भूमिका सीमित होती चली गई।

    चड्ढा की सफाई

    पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने वीडियो जारी कर कहा कि जनता के मुद्दे उठाना गलत नहीं है और उनकी चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए। उन्होंने संकेत दिया कि उन्हें बोलने से रोका जा रहा है। उनकी जगह राज्यसभा में उप-नेता के तौर पर अशोक मित्तल को नियुक्त किया गया है।

    क्या BJP जॉइन करेंगे?

    राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चड्ढा भविष्य में भारतीय जनता पार्टी का रुख कर सकते हैं। भगवंत मान ने उन्हें ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ बताया, जबकि दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि चड्ढा को खुद तय करना होगा कि उनका राजनीतिक भविष्य क्या होगा।

    हालांकि फिलहाल चड्ढा की ओर से किसी पार्टी में जाने को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने सियासी हलकों में अटकलों को तेज कर दिया है।

  • LPG की किल्लत के बीच बढ़ी स्टोव की डिमांड… केरोसिन नहीं मिलने से मजदूर पलायन को मजबूर

    LPG की किल्लत के बीच बढ़ी स्टोव की डिमांड… केरोसिन नहीं मिलने से मजदूर पलायन को मजबूर


    नई दिल्ली।
    एलपीजी किल्लत (Gas Crisis) के कारण आम लोग खासकर मजदूर वर्ग खासे परेशान हैं। आसानी से सिलिंडर (Gas Cylinder) नहीं मिलने के कारण हालात ऐसे हो गए हैं कि साल पहले घरों से गायब केरोसिन स्टोव (Kerosene Stove) विकल्प के रूप में एक बार फिर जरूरत बनकर उभर रहा है।

    केंद्र सरकार ने आपात परिस्थितियों को देखते हुए केरोसिन तेल की बिक्री की अनुमति तो दे दी है, लेकिन बाजार में तेल उपलब्ध नहीं होने से लोग परेशान हैं। इस कारण मजदूर वर्ग पलायन करने को भी मजबूर हैं।

    सदर बाजार और चांदनी चौक जैसे थोक बाजारों में केरोसिन स्टोव की कमी देखी जा रही है। कभी इन बाजारों में स्टोव की भरमार होती थी, लेकिन बदलते समय के साथ इनकी मांग लगभग समाप्त हो गई थी। पहले सिलिंडर उसके बाद इंडक्शन उपयोग के कारण व्यापारियों ने धीरे-धीरे इसे बेचना छोड़ दिया। अब गैस संकट के चलते स्टोव की मांग अचानक बढ़ी है तो बाजार इसकी आपूर्ति करने में असमर्थ दिखाई दे रहा है।


    केरोसिन-डीजल स्टोव के दाम बढ़े

    जो साधारण स्टोव पहले 400 से 600 रुपये में आसानी से मिल जाते थे, उनकी कीमत अब 1500 से 1800 रुपये तक पहुंच गई है। बड़े स्तर पर उपयोग होने वाली केरोसिन-डीजल भट्टियों के दाम 30 हजार रुपये तक पहुंच गया है। बावजूद बाजार में आसानी से नहीं मिल रहा है। सदर बाजार के व्यापारी सुरेश ने बताया कि उनके परिवार का पुराना व्यवसाय स्टोव बेचना था, लेकिन केरोसिन के उपयोग में कमी आने के कारण उन्होंने यह काम छोड़ दिया।


    नई पीढ़ी के लिए केरोसिन स्टोव बना चुनौती

    नई पीढ़ी के अधिकांश लोग केरोसिन स्टोव का उपयोग करना नहीं जानते हैं। मुनिरका में काम करने वाली घरेलू सहायिका मीना ने बताया कि उनका सिलिंडर खत्म हो चुका है। वह कई बाजारों में स्टोव की तलाश कर चुकी हैं, लेकिन उन्हें कहीं नहीं मिला। वहीं, आरके पुरम में रहने वाली गृहिणी प्रेरणा ने बताया कि उनके घर में पिछले तीन दशकों से केवल गैस चूल्हे का उपयोग हो रहा है। उन्होंने कभी स्टोव पर खाना नहीं बनाया, अब यह स्थिति उनके लिए नई और चुनौतीपूर्ण बन गई है।


    बढ़ रहा पलायन, बस अड्डों-स्टेशनों पर लोगों की भीड़

    रोजी रोटी की तलाश में घर से हजारों किलोमीटर दूर पहुंचे मजदूर वर्ग के लिए एलपीजी संकट से पेट भरना भी मुश्किल हो गया है। इन संकटों से जूझ रहे खासकर मजदूर वर्ग के लोग अपने घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं।

    इस कारण बड़ी संख्या में पलायन कर रहे लोगों की भीड़ इन दिनों बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों पर देखी जा रही है। सिलेंडर न मिलने, बाहर खाने की महंगाई और काम की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग घर जाना ही मुनासिक समझ रहे हैं। आनंद विहार बस अड्डा और रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही यात्रियों की भीड़ देखने को मिली।

    कई लोग बैग और सामान के साथ बसों और ट्रेनों का इंतजार करते नजर आए। उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली बसों में भीड़ अधिक रही। यात्रियों का कहना है कि पिछले कई दिनों से गैस नहीं मिलने के कारण खाना बनाना मुश्किल हो गया है।

  • मध्य भारत से लेकर कश्मीर से तक तेज बारिश का अलर्ट… MP-महाराष्ट्र में होगी ओलावृष्टि!

    मध्य भारत से लेकर कश्मीर से तक तेज बारिश का अलर्ट… MP-महाराष्ट्र में होगी ओलावृष्टि!


    भोपाल।
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी भारत (North-Western India.) इस समय दो शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभों (Strong Western Disturbances) के प्रभाव में है. इसका सीधा असर कश्मीर से लेकर मध्य भारत (Central India) तक देखने को मिलेगा. इस क्षेत्र में ओलावृष्टि होने की संभावना है. शुक्रवार और शनिवार को कश्मीर घाटी के कुछ हिस्सों में भारी बारिश (Heavy Rain) भी हो सकती है.

    IMD ने बताया कि मध्य भारत में 7 अप्रैल तक गरज और बिजली चमकने के साथ बारिश होने की संभावना है. इसके अलावा, 3 अप्रैल को मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और उससे सटे गुजरात क्षेत्र में और 4 अप्रैल को पूर्वी मध्य प्रदेश समेत छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर ओलावृष्टि हो सकती है. विभाग ने यह भी बताया कि इस हफ्ते देश के ज्यादातार हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से कम या सामान्य के आसपास रहने की संभावना है।

    पिछले 24 घंटों में अरुणाचल प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भारी बारिश दर्ज की गई. इस बीच, पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश और मध्य महाराष्ट्र में ओलावृष्टि होने की खबरें मिली हैं। मार्च महीने में, देश पर आठ पश्चिमी विक्षोभों का असर पड़ा, जबकि सामान्य तौर पर इनकी संख्या 5 या 6 होती है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बारिश लाने वाली हवाओं की एक प्रणाली है जो भूमध्य सागर और ईरान के ऊपर से पैदा होती है. यह ‘सबट्रॉपिकल पछुआ जेट स्ट्रीम’ के सहारे भारत पहुंचती है और हिमालय से टकराकर बारिश व बर्फबारी करती है। इस साल मार्च में सामान्य से कहीं अधिक सक्रिय रहे, जिसका असर अब अप्रैल की शुरुआत में भी दिख रहा है. पश्चिमी विक्षोभ आमतौर पर उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों के महीनों यानी दिसंबर से मार्च के दौरान सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं।

  • पीएम मोदी को ईरान पर हमले की पहले से कोई जानकारी नहीं थी, इजरायल दौरे के दौरान सरकार ने दी सफाई

    पीएम मोदी को ईरान पर हमले की पहले से कोई जानकारी नहीं थी, इजरायल दौरे के दौरान सरकार ने दी सफाई


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फरवरी में हुए इजरायल दौरे को लेकर संसद में बुधवार को अहम सवाल उठाए गए। सांसद अब्दुल वहाब ने विदेश मंत्रालय से पूछा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी को उनके इजरायल दौरे के तुरंत बाद ईरान पर होने वाले अमेरिकी और इजरायली हमले की पहले से जानकारी थी। सवाल में यह भी पूछा गया कि भारत और इजरायल के बीच उस दौरे के दौरान हुए समझौते, समझौता ज्ञापन और अन्य संधियों की जानकारी क्या थी।

    सरकार ने इस सवाल के जवाब में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी की 25-26 फरवरी की इजरायल यात्रा के दौरान ईरान पर हुए सैन्य हमले की कोई चर्चा नहीं हुई। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लिखित जवाब में कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर यह राजकीय दौरा किया। इस दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-इजरायल साझेदारी के सभी पहलुओं और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।

    उन्होंने आगे बताया कि इस दौरे के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, कृषि, मत्स्य पालन, जलीय कृषि, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, डिजिटल भुगतान और श्रमिकों की आवाजाही सहित कई क्षेत्रों में समझौते, समझौता ज्ञापन और आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए। लेकिन ईरान पर हुए सैन्य हमले से संबंधित कोई चर्चा इस दौरान नहीं हुई।

    प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के एक दिन बाद यानी 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला किया, जिसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज हो गया। हमले में ईरान के शीर्ष नेतृत्व के कई नेताओं को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए।

    इजरायल ने भी अटकलों को खारिज किया है। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी को उनकी यात्रा के दौरान इन हमलों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी क्योंकि यह निर्णय यात्रा के बाद लिया गया। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी और भारत के साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं और हमने इस यात्रा के दौरान 2026 के लिए व्यापक एजेंडा तय किया। अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता के विफल होने के बाद ही यह कार्रवाई की गई।

    इस तरह यह साफ हो गया कि प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरे और ईरान पर हमले के बीच कोई पूर्व जानकारी या संबंध नहीं था। भारत ने अपनी विदेश नीति में पारदर्शिता बनाए रखी और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया।