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  • कुवैत से 20 भारतीयों के शव लेकर केरल पहुंचा विमान, अलग-अलग घटनाओं में हुई इनकी मौत

    कुवैत से 20 भारतीयों के शव लेकर केरल पहुंचा विमान, अलग-अलग घटनाओं में हुई इनकी मौत


    कोचीन।
    कुवैत (Kuwait) में अलग-अलग घटनाओं में जान गंवाने वाले 20 भारतीय नागरिकों (20 Indian citizens) के पार्थिव शरीर बुधवार को केरल (Kerala) के कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Cochin International Airport) पहुंचे.

    अधिकारियों के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के कारण इन शवों की स्वदेश वापसी में देरी हुई थी. इन मृतकों में तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के मुथुकुलाथुर निवासी 37 वर्षीय संतनसेल्वम कृष्णन भी शामिल हैं, जिनकी मौत कुवैत में एक पानी के डीसैलिनेशन प्लांट पर हुए ड्रोन हमले में हो गई थी. बाकी 19 भारतीय नागरिकों की मौत अलग-अलग हादसों और प्राकृतिक कारणों से हुई थी, लेकिन खाड़ी देशों पर ईरान के ताबड़तोड़ हमलों के चलते उनके पार्थिव शरीर भारत लाने में डेरी हुई.

    इस बीच, विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दूसरे महीने में प्रवेश करने के साथ ही अब तक कुल 8 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति अभी भी लापता है. खाड़ी मामलों को देखने वाले विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव असीम महाजन ने बताया कि कुवैत स्थित भारतीय मिशन स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि मृतकों के पार्थिव शरीर जल्द से जल्द उनके परिजनों तक पहुंचाए जा सकें.

    असीम महाजन ने कहा, ‘हाल ही में एक भारतीय नागरिक की हमले में मौत हो गई, जो बेहद दुखद है. हम शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं. भारतीय दूतावास परिवार के संपर्क में है और हर संभव मदद सुनिश्चित कर रहा है।

    कुवैत में भारतीय दूतावास ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया है. दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि डीसैलिनेशन सुविधा पर हुए हमले में भारतीय नागरिक की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त की जाती है और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर हर संभव सहायता दी जा रही है.

    उधर, कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि रविवार शाम हुए हमले में एक प्रमुख पावर और वाटर डीसैलिनेशन प्लांट को भारी नुकसान पहुंचा, जिसमें एक भारतीय कर्मचारी की जान चली गई. अधिकारियों ने इस हमले के पीछे ईरान की कार्रवाई होने की आशंका जताई है.

    गौरतलब है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है. भारतीय नागरिकों की मौत और लापता होने की घटनाओं ने भारत सरकार की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद देने की कोशिश कर रहे हैं.

  • बिहार: नालंदा के शीतला माता मंदिर में हुई भगदड़ हादसे में 9 की मौत, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

    बिहार: नालंदा के शीतला माता मंदिर में हुई भगदड़ हादसे में 9 की मौत, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल


    नालंदा । बिहार के नालंदा जिले में मंगलवार सुबह शीतला माता मंदिर में भगदड़ मचने से बड़ा हादसा हो गया। इस घटना में 9 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 8 महिलाएं शामिल हैं। महिलाओं की मौके पर ही भीड़ में दबने से मौत हो गई, जबकि एक पुरुष ने अस्पताल में दम तोड़ा।

    चैत्र के आखिरी मंगलवार पर उमड़ी भारी भीड़

    चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार के अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। मंदिर परिसर में मेला भी लगा हुआ था, जिससे भीड़ और अधिक बढ़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। दर्शन की जल्दी में लोगों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिससे अफरातफरी मच गई और कई लोग भीड़ में दब गए। हादसे में कई लोग घायल भी हुए हैं।

    सुरक्षा इंतजामों की भारी कमी

    हादसे के समय मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था न के बराबर थी। बताया गया कि लगभग 25 हजार श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद वहां पुलिस की पर्याप्त तैनाती नहीं थी। इसी दिन नालंदा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति के दौरे को लेकर 8 जिलों के करीब 2500 जवान तैनात किए गए थे, जबकि मंदिर परिसर में सुरक्षा के इंतजाम बेहद कमजोर रहे।

    हादसे के बाद प्रशासनिक कार्रवाई

    घटना के बाद मंदिर और मेले को बंद करा दिया गया है। पटना कमिश्नर को बिहार शरीफ भेजा गया है और मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए हैं। दीपनगर थाने के SHO राजमणि को निलंबित कर दिया गया है।

    मुआवजे की घोषणा
    राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 6 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं केंद्र सरकार ने भी 2 लाख रुपए के मुआवजे का ऐलान किया है।

    DGP ने मानी व्यवस्था में कमी

    नालंदा पहुंचे DGP विनय कुमार ने स्वीकार किया कि मंदिर परिसर में कई कमियां थीं। उन्होंने कहा कि वहां पुलिस बल की तैनाती जरूरी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। भीड़ अधिक होने, मंदिर परिसर छोटा होने और लोगों में पहले दर्शन करने की होड़ के कारण हालात बिगड़ गए। लोग कतार में लगने के बजाय आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिससे भगदड़ मच गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई पूरी घटना
    महिला श्रद्धालुओं के अनुसार, चैत्र के आखिरी मंगलवार के कारण भीड़ काफी अधिक थी। मंदिर का गर्भगृह छोटा होने के चलते लोग जल्दी दर्शन के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रहे थे। एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि मंदिर में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए न तो पुलिस मौजूद थी और न ही कोई उचित व्यवस्था की गई थी। इसी दौरान एक महिला को चक्कर आया और वह गिर पड़ी, जिसके बाद भगदड़ की स्थिति बन गई।

    हादसे के पीछे तीन बड़ी लापरवाहियां

    1. प्रबंधन की तैयारी नहीं
    हर साल इस दिन भारी भीड़ उमड़ती है, इसके बावजूद मंदिर प्रबंधन ने भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए। बैरिकेडिंग तक नहीं की गई थी।

    2. पीछे के रास्ते से दर्शन

    कुछ लोगों को पैसे लेकर पीछे के दरवाजे से दर्शन कराए जा रहे थे, जिससे अव्यवस्था और नाराजगी बढ़ी।

    3. पुलिस-प्रशासन की गैरमौजूदगी

    करीब 25 हजार श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद पुलिस या प्रशासन की पर्याप्त मौजूदगी नहीं थी। मेले की पूर्व जानकारी के बावजूद कोई मजिस्ट्रेट तैनात नहीं किया गया था।

  • Punjab & Sind Bank में 1000 LBO पदों पर बंपर भर्ती, आज से आवेदन शुरू

    Punjab & Sind Bank में 1000 LBO पदों पर बंपर भर्ती, आज से आवेदन शुरू


    नई दिल्ली बैंकिंग क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए शानदार खबर है। Punjab & Sind Bank (पीएसबी) ने लोकल बैंक ऑफिसर (LBO) के 1000 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। यह भर्ती जूनियर मैनेजमेंट ग्रेड स्केल-I (JMGS-I) के तहत की जा रही है, जिससे उम्मीदवारों को बैंकिंग सेक्टर में स्थिर और आकर्षक करियर का मौका मिलेगा।

    आवेदन प्रक्रिया शुरू, जानें आखिरी तारीख

    इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 31 मार्च से शुरू हो चुकी है। इच्छुक उम्मीदवार 20 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते अपना फॉर्म भर लें।

    योग्यता और अनुभव जरूरी

    आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उम्मीदवार के पास अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में अधिकारी के रूप में कम से कम 18 महीने का अनुभव होना चाहिए।

    आयु सीमा और छूट

    इस भर्ती के लिए न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष तय की गई है। आयु की गणना 1 मार्च के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

    चयन प्रक्रिया कैसे होगी?

    उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में किया जाएगा, जिसमें लिखित परीक्षा, स्क्रीनिंग, पर्सनल इंटरव्यू, लोकल लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट, मेरिट लिस्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शामिल हैं। सभी चरणों में सफल होने वाले उम्मीदवारों को ही अंतिम रूप से नियुक्त किया जाएगा।

    सैलरी और सुविधाएं

    चयनित उम्मीदवारों को 48,480 रुपये से 85,920 रुपये प्रति माह तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा अन्य भत्ते और सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी, जिससे यह नौकरी और भी आकर्षक बन जाती है।

    आवेदन शुल्क


    जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस: ₹850
    एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी: ₹100
    ऐसे करें आवेदन

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले Punjab & Sind Bank की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
    होमपेज पर दिए गए भर्ती लिंक पर क्लिक करें और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करें। इसके बाद लॉगिन कर आवेदन फॉर्म में सभी जरूरी जानकारी भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें और ऑनलाइन शुल्क का भुगतान करें। अंत में फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।

    सुनहरा अवसर न गंवाएं

    यह भर्ती उन युवाओं के लिए बेहतरीन मौका है जो बैंकिंग सेक्टर में आगे बढ़ना चाहते हैं। बड़ी संख्या में पद, अच्छा वेतन और सरकारी नौकरी की सुरक्षा इसे बेहद खास बनाते हैं।

  • भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक, आपसी संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर हुई चर्चा

    भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक, आपसी संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर हुई चर्चा


    नई दिल्ली  भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 30 मार्च, 2026 को रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रे रुडेंको के साथ विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) किया। विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ रणनीतिक साझेदारी, आपसी हितों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।

    विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, बातचीत के दौरान, दोनों पक्षों ने आपसी संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार भी साझा किए।

    दोनों पक्षों ने दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में हुए 23वें सालाना समिट में लिए गए फैसलों को लागू करने में हुई प्रक्रिया की समीक्षा की। दिसंबर की इस यात्रा के दौरान, रुडेंको ने भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर से भी मुलाकात की। एफओसी का आखिरी राउंड मार्च 2025 में मॉस्को में हुआ था।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, “भारत-रूस विदेश कार्यालय परामर्श सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता विदेश सचिव विक्रम मिसरी और रूस के उप विदेश मंत्री एंड्रे रुडेन्को ने की।”

    उन्होंने कहा, “दोनों पक्षों ने विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा की और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर आपसी दृष्टिकोण साझा किए।”

    इसके अलावा, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के मई में भारत आने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, लावरोव 14-15 मई को ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आ सकते हैं।

    इससे पहले 17 मार्च को, भारत और रूस ने नई दिल्ली में 7वां संयुक्त राष्ट्र परामर्श आयोजित किया, जिसमें चर्चा का मुख्य केंद्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एजेंडे से जुड़े मुद्दे थे। विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी उपाय, शांति स्थापना, यूएनएससी सुधार और अन्य विषय।

    जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी प्राथमिकताओं का आदान-प्रदान किया। चर्चा का मुख्य केंद्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एजेंडे से जुड़े मुद्दे थे, विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी उपाय, शांति स्थापना, यूएनएससी सुधार और अन्य विषय।”

    इससे पहले 11 मार्च को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और पश्चिम एशिया संघर्ष तथा द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार पर चर्चा की

  • संसद में गूंजा ‘पैटरनिटी लीव’ का मुद्दा, राघव चड्ढा ने उठाई अहम मांग

    संसद में गूंजा ‘पैटरनिटी लीव’ का मुद्दा, राघव चड्ढा ने उठाई अहम मांग


    नई दिल्ली देश में पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को लेकर एक अहम बहस तेज होती नजर आ रही है। Raghav Chadha ने राज्यसभा में ‘पितृत्व अवकाश’ (Paternity Leave) को कानूनी अधिकार बनाने की जोरदार मांग उठाई। उन्होंने कहा कि भारत में बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी केवल मां तक सीमित कर देना एक बड़ी सामाजिक और कानूनी कमी है, जिसे अब बदलने की जरूरत है।

    “केयरगिविंग सिर्फ मां की नहीं”

    संसद में बोलते हुए Raghav Chadha ने कहा कि बच्चे के जन्म पर बधाई तो माता-पिता दोनों को मिलती है, लेकिन देखभाल की पूरी जिम्मेदारी मां पर डाल दी जाती है। उन्होंने इसे “समाज की विफलता” करार देते हुए कहा कि यह सोच अब बदलनी चाहिए।
    उनका कहना था कि मौजूदा व्यवस्था केवल मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) को महत्व देती है, जबकि पिता की भूमिका को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

    पितृत्व अवकाश को मिले कानूनी मान्यता

    राघव चड्ढा ने मांग की कि पितृत्व अवकाश को एक कानूनी अधिकार बनाया जाए, ताकि पिता को अपने परिवार और नौकरी के बीच चुनाव न करना पड़े। उन्होंने कहा कि बच्चे के जन्म के बाद मां को शारीरिक और मानसिक रूप से काफी सहारे की जरूरत होती है, जिसमें पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

    मां के साथ-साथ पत्नी की देखभाल भी जरूरी

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिता की जिम्मेदारी केवल बच्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि पत्नी की देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है। गर्भावस्था और डिलीवरी के बाद महिला को भावनात्मक और शारीरिक सहयोग की जरूरत होती है, और ऐसे समय में पति की मौजूदगी “लक्जरी नहीं, बल्कि आवश्यकता” है।

    निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को नहीं मिलती सुविधा

    राघव चड्ढा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि फिलहाल भारत में केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को ही 15 दिन का पितृत्व अवकाश मिलता है। जबकि देश की करीब 90 प्रतिशत कार्यबल निजी क्षेत्र में काम करती है, जहां इस तरह की कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। इसका मतलब है कि ज्यादातर पिता इस सुविधा से वंचित रह जाते हैं।

    दुनिया के कई देशों में बेहतर व्यवस्था

    उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि Sweden, Iceland और Japan जैसे देशों में पितृत्व अवकाश 90 दिनों से लेकर 52 हफ्तों तक कानूनी रूप से सुनिश्चित किया गया है। यह दर्शाता है कि विकसित देशों में माता-पिता दोनों की भूमिका को बराबरी से महत्व दिया जाता है।

    बदलते समाज के साथ कानून भी बदले

    राघव चड्ढा ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि कानून समाज का आईना होता है और इसमें यह साफ दिखना चाहिए कि बच्चे की परवरिश केवल मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि माता और पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

  • सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत की बड़ी छलांग, पीएम मोदी ने बताई मजबूत होती भूमिका

    सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत की बड़ी छलांग, पीएम मोदी ने बताई मजबूत होती भूमिका

    नई दिल्ली भारत ने वैश्विक टेक्नोलॉजी दुनिया में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। Sanand में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने केयन्स सेमीकॉन की आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (OSAT) सुविधा का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत अब तेजी से एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लायर के रूप में उभर रहा है और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।

    ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ बना गेमचेंजर

    प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि को India Semiconductor Mission की सफलता से जोड़ते हुए कहा कि 2021 में शुरू किया गया यह मिशन केवल एक नीति नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास और तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। इस मिशन के तहत देश के छह राज्यों में करीब 1.60 लाख करोड़ रुपये के 10 बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है, जो आने वाले समय में भारत को चिप निर्माण का बड़ा हब बना सकते हैं।

    तेजी से विकसित हो रहा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम

    पीएम मोदी ने हाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि 28 फरवरी को Micron Technology के प्लांट में उत्पादन शुरू हुआ और अब 31 मार्च को Kaynes Technology के सेमीकंडक्टर प्लांट ने भी काम शुरू कर दिया है। उन्होंने इसे संयोग नहीं, बल्कि भारत के तेजी से विकसित होते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का प्रमाण बताया।

    ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भूमिका

    प्रधानमंत्री ने कहा कि अब भारत की अपनी कंपनियां भी सेमीकंडक्टर निर्माण में आगे आ रही हैं और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं। Kaynes Technology का यह कदम भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ को मिल रही मजबूती

    पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा कि आज का दौर केवल आर्थिक प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों को दिशा देने का समय है। भारत अब सिर्फ बदलाव को देख नहीं रहा, बल्कि उसका नेतृत्व करने के लिए आगे बढ़ रहा है। ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ का विजन अब जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है।

    भविष्य की टेक्नोलॉजी में भारत की बड़ी भूमिका

    प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत की कई कंपनियां अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को और मजबूत करेंगी। इस दशक में उठाए गए कदम आने वाले दशकों में भारत को टेक्नोलॉजी लीडर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • सरकारी यूनिवर्सिटी में 64 पदों पर भर्ती, प्रोफेसर समेत कई पद खाली

    सरकारी यूनिवर्सिटी में 64 पदों पर भर्ती, प्रोफेसर समेत कई पद खाली


    नई दिल्ली सरकारी विश्वविद्यालय में करियर बनाने का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए शानदार अवसर आया है। Sri Dev Suman Uttarakhand University (एसडीएसयूवी) ने प्रोफेसर सहित विभिन्न शैक्षणिक पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। इस भर्ती के तहत कुल 64 पदों को भरा जाएगा, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक अभ्यर्थी 10 अप्रैल शाम 5 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    किन पदों पर होगी भर्ती?

    इस भर्ती अभियान के तहत अलग-अलग पदों पर वैकेंसी निकाली गई है। इसमें असिस्टेंट प्रोफेसर के 41 पद, असिस्टेंट लाइब्रेरियन का 1 पद, एसोसिएट प्रोफेसर के 11 पद और प्रोफेसर के 11 पद शामिल हैं। यह भर्ती उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने वालों के लिए एक बेहतरीन मौका है।

    आवेदन प्रक्रिया और जरूरी तारीखें

    ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 10 अप्रैल निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे तय समय से पहले अपना आवेदन पूरा कर लें। खास बात यह है कि ऑनलाइन आवेदन के बाद उम्मीदवारों को अपने फॉर्म की हार्ड कॉपी भी 24 अप्रैल शाम 5 बजे तक विश्वविद्यालय के पते पर भेजनी होगी।

    योग्यता और अनुभव

    इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन, एमफिल या पीएचडी की डिग्री होना जरूरी है। इसके अलावा पद के अनुसार निर्धारित अनुभव और अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करना भी अनिवार्य है।

    चयन प्रक्रिया कैसी होगी?

    उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में किया जाएगा। इसमें सबसे पहले स्क्रीनिंग और शॉर्टलिस्टिंग होगी, जिसके बाद पर्सनल इंटरव्यू लिया जाएगा। अंतिम चरण में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद ही चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी।

    सैलरी और आवेदन शुल्क

    चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार 57,700 रुपये से लेकर 2,18,200 रुपये तक का मासिक वेतन मिलेगा।
    वहीं आवेदन शुल्क की बात करें तो:

    प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए:
    जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस: ₹2000
    एससी/एसटी: ₹1000
    असिस्टेंट प्रोफेसर और असिस्टेंट लाइब्रेरियन पद के लिए:
    जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस: ₹1000
    एससी/एसटी: ₹500

    ऐसे करें आवेदन

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले Sri Dev Suman Uttarakhand University की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
    होमपेज पर दिए गए भर्ती लिंक पर क्लिक कर रजिस्ट्रेशन करें और लॉगिन करें। इसके बाद आवेदन फॉर्म में सभी जरूरी जानकारी भरें और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन शुल्क का भुगतान करने के बाद फॉर्म सबमिट करें और उसका प्रिंटआउट निकाल लें।

    ऑनलाइन आवेदन पूरा करने के बाद उम्मीदवारों को अपने आवेदन की हार्ड कॉपी 24 अप्रैल शाम 5 बजे तक रजिस्ट्रार, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, बादशाहीथौल, टिहरी गढ़वाल-249199 पते पर भेजना अनिवार्य है।

    करियर बनाने का सुनहरा मौका

    यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए खास अवसर है जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में स्थायी और प्रतिष्ठित नौकरी की तलाश में हैं। अच्छी सैलरी, सम्मानजनक पद और सरकारी सुविधाएं इसे और आकर्षक बनाती हैं।

  • बिहार हादसे पर देश के शीर्ष नेताओं का दुख, नालंदा भगदड़ ने झकझोरा

    बिहार हादसे पर देश के शीर्ष नेताओं का दुख, नालंदा भगदड़ ने झकझोरा


    नई दिल्ली Nalanda जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र स्थित शीतला माता मंदिर में मंगलवार को हुए दर्दनाक भगदड़ हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। पूजा-अर्चना के दौरान अचानक भीड़ बेकाबू हो गई, जिससे मची भगदड़ में 8 श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि 8 से 10 लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और मातम का माहौल है।

    राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने जताया गहरा शोक

    इस दुखद घटना पर Droupadi Murmu ने गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नालंदा में मंदिर भगदड़ में श्रद्धालुओं की मौत का समाचार अत्यंत दुखद है और शोक संतप्त परिवारों के प्रति उनकी संवेदनाएं हैं। साथ ही उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। वहीं, C. P. Radhakrishnan ने भी हादसे पर दुख जताते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की।

    🇮🇳 प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की मदद की घोषणा

    इससे पहले Narendra Modi ने भी हादसे पर गहरा दुख जताया और मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये तथा घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
    वहीं, Nitish Kumar ने मृतकों के परिवारों को 6 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया।

    कैसे हुआ हादसा?

    जानकारी के अनुसार, मंदिर में पूजा के दौरान अचानक अत्यधिक भीड़ जमा हो गई। भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण स्थिति तेजी से बिगड़ गई और भगदड़ मच गई। लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ।

    राहत और बचाव कार्य जारी

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में लाने और पीड़ितों की हर संभव मदद करने में जुटा है।

    लापरवाही पर कार्रवाई

    हादसे के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कर्तव्यहीनता के आरोप में दीपनगर थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है ताकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सके।

    सबक और सतर्कता की जरूरत

    यह हादसा एक बार फिर भीड़ प्रबंधन की कमजोरियों को उजागर करता है। धार्मिक आयोजनों में भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम बेहद जरूरी हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

  • पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए टेनिस दिग्गज लिएंडर पेस

    पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए टेनिस दिग्गज लिएंडर पेस

    नई दिल्ली. भारतीय टेनिस के दिग्गज खिलाड़ी लिएंडर पेस ने भाजपा का दामन थाम लिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले उनका यह कदम राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बन गया है। पेस, जो भारत के सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा नेता सुकांता मजुमादर भी मौजूद रहे। पेस का पार्टी में शामिल होना पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। फिलहाल पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गर्म होता जा रहा है और सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।
    किरण रिजिजू ने लिएंडर को लेकर क्या कहा?
    इस मौके पर रिजिजू ने कहा, ‘लिएंडर पेस का भाजपा परिवार में शामिल होना ऐतिहासिक है।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 वर्षों में खेल और खिलाड़ियों को लगातार बढ़ावा दिया है।’ वहीं लिएंडर ने इसे अपने जीवन का सबसे खास दिन बताया। उन्होंने कहा, ‘यह मेरे जीवन का बहुत बड़ा दिन है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह जी और नितिन नबीन जी का धन्यवाद करना चाहता हूं। यह मेरे लिए खेल और युवाओं की सेवा करने का बड़ा अवसर है।’

    ‘अब युवाओं के लिए काम करूंगा’
    लिएंडर पेस ने भारत के लिए ओलंपिक पदक और कई ग्रैंड स्लैम जीते हैं और अब राजनीति के मैदान में अपनी नई पारी खेलने जा रहे हैं। उनका भाजपा से जुड़ना यह दिखाता है कि पार्टी खेल जगत के बड़े चेहरों को अपने साथ जोड़कर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। पेस ने अपने करियर को याद करते हुए कहा कि अब वह नई जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने 40 साल देश के लिए खेला है, अब समय है युवाओं की सेवा करने का।’ लिएंडर पेस ने केंद्र सरकार की खेल योजनाओं की भी सराहना की।

    उन्होंने कहा, ‘खेलो इंडिया मूवमेंट और टॉप्स स्कीम बहुत शानदार पहल हैं। मैंने देखा है कि किरेन रिजिजू जी ने टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के लिए कितनी मेहनत की। प्रधानमंत्री जी ने उन्हें जो रोल दिया था, उसे बखूबी निभाया।’

    बंगाल में खेल सुविधाओं की कमी पर बोले पेस
    पेस ने बंगाल में खेल सुविधाओं की कमी पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, ‘ भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। हमें अगले 20-25 वर्षों में स्पोर्ट्स एजुकेशन पर ध्यान देना चाहिए। 1986 में पश्चिम बंगाल में खेल का ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था। आज भी बंगाल में इंडोर टेनिस कोर्ट की कमी है। बंगाल, तमिलनाडु और बिहार बेहतर कर सकते हैं, लेकिन हमें युवाओं को खेल शिक्षा के जरिए प्रेरित और सशक्त बनाने पर ध्यान देना होगा। मेरा सपना है कि भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए बराबरी के अवसर वाली स्कॉलरशिप प्रोग्राम शुरू किया जाए।’

    बंगाल चुनाव से पहले बड़ा संदेश
    भाजपा को उम्मीद है कि पेस की लोकप्रियता से खासकर युवा और खेल प्रेमी वोटर्स पर सकारात्मक असर पड़ेगा। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि पेस चुनाव लड़ेंगे या नहीं, लेकिन यह तय माना जा रहा है कि वह चुनाव प्रचार में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनकी छवि और अनुभव पार्टी के लिए एक मजबूत चेहरा साबित हो सकते हैं।

    लिएंडर के पिता का पिछले साल हुआ था निधन
    लिएंडर पेस का जन्म 17 जून 1973 को कोलकाता में हुआ था। उनके दिवंगत पिता वेस पेस ने 1972 म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था और उनकी मां जेनिफर पेस ने 1980 एशियन बास्केटबॉल टीम की अगुआई कर अपना लोहा मनवाया था। लिएंडर के पिता वेस पेस का पिछले साल ही 80 साल की उम्र में निधन हुआ था।

    अटलांटा ओलंपिक में लिएंडर ने जीता था कांस्य
    लिएंडर ने 1996 में अटलांटा ओलंपिक में पुरुष टेनिस के एकल वर्ग में ब्राजील के फर्नांडो मेलिगेनी को मात देकर कांस्य पदक अपने नाम किया था। साथ ही वह केडी जाधव के बाद पहले भारतीय खिलाड़ी बने, जिन्होंने व्यक्तिगत ओलंपिक मेडल जीता। उनकी सफलताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उन्हें 1996-97 में खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया था। इसके अलावा वह 1990 में अर्जुन अवॉर्ड, 2001 में पद्म श्री अवॉर्ड और जनवरी 2014 में पद्म भूषण अवॉर्ड से भी नवाजे जा चुके हैं।

    पुरुष और मिक्स्ड डबल्स के महारथी हैं लिएंडर
    वैसे तो पेस ने पुरुष एकल में कोई ग्रैंडस्लैम नहीं जीता, लेकिन पुरुष युगल में उनके नाम आठ ग्रैंडस्लैम ट्रॉफीज हैं। लिएंडर ने 2012 में एकमात्र ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीता था। इसके अलावा वह 1999, 2001 और 2009 में फ्रेंच ओपन, 1999 में विंबलडन और 2006, 2009 और 2013 में यूएस ओपन का खिताब भी जीत चुके हैं। वह मिक्स्ड डबल्स में 10 ग्रैंडस्लैम खिताब जीत चुके हैं। इनमें तीन ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब (2003, 2010, 2015), एक फ्रेंच ओपन खिताब (2016), चार विंबलडन खिताब (1999, 2003, 2010 और 2015) और दो यूएस ओपन खिताब (2008 और 2015) शामिल हैं।

  • संकट के बीच राहत की खबर…. 6000 PNG उपभोक्ताओं ने सरेंडर किए LPG कनेक्शन

    संकट के बीच राहत की खबर…. 6000 PNG उपभोक्ताओं ने सरेंडर किए LPG कनेक्शन


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) द्वारा पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) (PNG – Piped Natural Gas) को बढ़ावा देने और एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) (LPG – Liquefied Petroleum Gas) की सप्लाई को सुव्यवस्थित करने के प्रयासों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, शनिवार तक 6000 पीएनजी उपभोक्ताओं ने अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं।

    इस विषय पर मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इन उपभोक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा, ‘कल तक 6000 पीएनजी उपभोक्ताओं ने अपनी एलपीजी सरेंडर कर दी! उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद!!’ उन्होंने अन्य पीएनजी यूजर्स से भी अपील की कि वे उन लोगों की मदद के लिए अपना एलपीजी कनेक्शन छोड़ दें, जिनके पास अभी तक पीएनजी की सुविधा नहीं है।


    तीन महीने बाद बंद हो सकती है एलपीजी सप्लाई

    सरकार की योजना है कि जिन घरों में पीएनजी का एक्सेस यानी पाइपलाइन की पहुंच है, लेकिन उन्होंने अभी तक कनेक्शन नहीं लिया है तो वहां तीन महीने बाद एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई रोक दी जाएगी। यह नियम उन जगहों पर लागू नहीं होगा जहां पीएनजी की सप्लाई तकनीकी रूप से संभव नहीं है, बशर्ते किसी अधिकृत संस्था द्वारा ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) जारी किया गया हो।

    पश्चिमी एशिया से आयात में आ रही बाधाओं के कारण एलपीजी आपूर्ति पर दबाव है। सरकार का लक्ष्य पाइपलाइन वाले क्षेत्रों के लोगों को पीएनजी पर शिफ्ट करना है, ताकि वहां की एलपीजी को उन ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में भेजा जा सके जहां पाइपलाइन का बुनियादी ढांचा नहीं है।


    गैस आपूर्ति में घरेलू और परिवहन क्षेत्र को प्राथमिकता

    – मौजूदा स्थिति को देखते हुए गैस क्षेत्र में आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर बांटा गया है।
    – पीएनजी और सीएनजी: घरेलू पीएनजी और परिवहन के लिए सीएनजी को 100% (पूर्ण आवंटन) गैस दी जा रही है।
    – औद्योगिक और वाणिज्यिक: इन उपभोक्ताओं को उनके औसत उपयोग का लगभग 80% गैस मिल रही है।
    – उर्वरक संयंत्र: इन्हें 70-75% क्षमता पर गैस की आपूर्ति की जा रही है। कमी को पूरा करने के लिए अतिरिक्त एलएनजी कार्गो की व्यवस्था की जा रही है।

    एलपीजी की स्थिति और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई
    भू-राजनीतिक स्थितियों के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार डिलीवरी सामान्य है और कहीं से भी किसी कमी की सूचना नहीं है। प्रतिदिन 55 लाख से अधिक गैस सिलेंडरों की डिलीवरी की जा रही है। कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति को संकट-पूर्व के स्तर के लगभग 70% तक बहाल कर दिया गया है। इसमें हॉस्पिटैलिटी (होटल-रेस्तरां), खाद्य सेवाओं और प्रमुख उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है।

    छापेमारी और जब्ती: सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। हाल के दिनों में लगभग 2,900 छापेमारी की गई हैं और करीब 1,000 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। इसके अलावा राज्यों का केरोसिन आवंटन भी बढ़ाया गया है।

    पीएनजी को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों के इंसेंटिव्स
    पीएनजी नेटवर्क (सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन) के विस्तार को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। अकेले मार्च महीने में 2,90,000 से अधिक नए पीएनजी कनेक्शन जोड़े गए हैं। इंद्रप्रस्थ गैस (IGL), महानगर गैस (MGL), गेल गैस (GAIL Gas) और बीपीसीएल (BPCL) जैसी कंपनियां लोगों को एलपीजी से पीएनजी पर शिफ्ट होने के लिए कई तरह के इंसेंटिव्स (प्रोत्साहन/छूट) भी दे रही हैं।

    सरकार की अपील
    केंद्र सरकार ने राज्यों से निगरानी तेज करने, दैनिक ब्रीफिंग आयोजित करने और गैस बुनियादी ढांचे के लिए अप्रूवल में तेजी लाने को कहा है। सरकार ने जनता से यह भी अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।