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  • US में लोकप्रियता की तुलना… एक्सपर्ट बोले- मोदी 10 साल से सत्ता में… ट्रंप 3 साल में हो जाएंगे बाहर

    US में लोकप्रियता की तुलना… एक्सपर्ट बोले- मोदी 10 साल से सत्ता में… ट्रंप 3 साल में हो जाएंगे बाहर


    वाशिंगटन।
    वेनेजुएला (Venezuela) के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की निगाहें दूसरे देशों पर भी हैं। वहीं, इसी बीच वह भारत (India) को टैरिफ को लेकर फिर से धमकाते नजर आ रहे हैं। अब जानकारों का मानना है कि वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद थोड़े समय के लिए मिल रहे ये फायदे ट्रंप के पद छोड़ने के बाद खत्म हो सकते हैं। साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की लोकप्रियता की तुलना की जा रही है।

    जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट इयान ब्रेमर को अमेरिका को होने वाले लॉन्ग टर्म फायदों पर संदेह है। उन्होंने कहा कि जब ट्रंप 2029 में दफ्तर छोड़ेंगे, तो ये थोड़े समय के फायदों पर विराम लग सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की तरह नहीं है, जहां प्रधानमंत्री मोदी लोकप्रियता के कारण 10 सालों से ज्यादा सत्ता में है। वहीं, ओवल ऑफिस में ट्रंप का कार्यकाल सीमित है।

    उन्होंने कहा कि चीन, रूस और भारत के विपरीत अमेरिका में हर चार साल में नेतृत्व बदलता है। उन्होंने कहा कि इसके चलते अमेरिका में सरकारी उपायों में निरंतरता नहीं रह जाती है और नतीजों में समय लगता है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगला राष्ट्रपति ट्रंप के किए कई कामों को पलट सकता है, ठीक वैसे ही जैसे ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति के कामों के साथ किया।

    ब्रेमर ने कहा, ‘ट्रंप ने जो किया उसे अगला राष्ट्रपति बदल भी सकता है। यह शी जिनपिंग नहीं है, यह मोदी भी नहीं है जो 10 साल से ज्यादा समय से देश चला रहे हैं और लोकतंत्र में लोकप्रिय बने हुए हैं। यह ट्रंप हैं, जो 80 साल के हैं और अलोकप्रिय हैं और 3 साल में पद छोड़ देंगे।’

    तेल पर बोले
    ब्रेमर ने कहा कि तेल की वैश्विक दरें, वेनेजुएला में राजनीतिक स्थिरता और ट्रंप के बाद क्या होगा, ये सब तय करेंगे कि काराकास के तेल भंडार का अमेरिका को फायदा हो रहा है या नहीं। उन्होंने कहा, ‘और तेल। आप जानते हैं कि वेनेजुएला अभी सिर्फ 8 लाख बैरल रोज बना रहा है। यह आंकड़ा 30 लाख बैरल हुआ करता था। इसे बढ़ाने के लिए आपको राजनीतिक स्थिरता चाहिए।’

    उन्होंने कहा, ‘आपको एक ऐसे आर्थिक पर्यावरण की जरूरत है, जिसमें तेल कंपनियां भरोसा कर सकें। आपको उस भरोसे की जरूरत है कि वो बैरल फायदेमंद होंगी और अभी एनर्जी की कीमतें काफी कम हैं।’

    उन्होंने वेनेजुएला से तेल निकाले जाने को लेकर कहा कि तेल कंपनियों का निवेश चक्र, दफ्तर में अमेरिकी राष्ट्रपतियों के रहने से ज्यादा होता है। उन्होंने कहा, ‘आपको इस भरोसे की भी जरूरत होगी कि जिस राजनीतिक व्यवस्था का समर्थन ट्रंप कर रहे हैं, वो 2029 में उनके जाने के बाद भी बनी रहेगी।’

  • देशभर में ठंड का कहर: दिल्ली में साल का पहला कोल्ड डे, 13 राज्यों में शीतलहर का अलर्ट

    देशभर में ठंड का कहर: दिल्ली में साल का पहला कोल्ड डे, 13 राज्यों में शीतलहर का अलर्ट

    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली और एनसीआर में सर्दी ने अब पूरी तरह अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है। मंगलवार को दिल्ली में इस सीजन का पहला कोल्ड डे रिकॉर्ड किया गया, जब अधिकतम तापमान में अचानक गिरावट आई और दिनभर ठंडी हवाओं ने लोगों को कंपकंपाने पर मजबूर कर दिया। धूप के बावजूद सर्द हवाओं के चलते ठिठुरन बनी रही। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को भी मौसम का मिजाज कुछ ऐसा ही रह सकता है।

    13 राज्यों में शीतलहर का अलर्ट

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटों के दौरान देश के 13 राज्यों में शीतलहर को लेकर चेतावनी जारी की है। उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड और सिक्किम में ठंड का प्रकोप बढ़ने की संभावना जताई गई है।

    झारखंड के गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, गुमला और चतरा जिलों में शीतलहर को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में खासकर सुबह और रात के समय ठंड का असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है।

    कोलकाता में टूटा सर्दी का रिकॉर्ड

    उधर, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। शहर में न्यूनतम तापमान 10.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो जनवरी महीने का अब तक का सबसे ठंडा दिन रहा। मौसम विभाग का अनुमान है कि दक्षिणी पश्चिम बंगाल में आने वाले दिनों में ठंड और तेज हो सकती है।

    कोहरे की चादर से ढकेंगे कई राज्य

    मौसम विभाग ने उत्तर भारत के कई हिस्सों में घने कोहरे को लेकर भी चेतावनी दी है। 7 से 9 जनवरी के बीच उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा-चंडीगढ़ के कई इलाकों में सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। इसके अलावा पश्चिमी राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में भी 7 जनवरी को सुबह घना कोहरा देखने को मिल सकता है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है।

    देशभर में गिरता पारा

    जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद के कई इलाकों में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे पहुंच गया है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में पारा 0 से 5 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और ओडिशा के कई इलाकों में न्यूनतम तापमान 5 से 10 डिग्री तक गिर चुका है। मैदानी इलाकों में सबसे कम तापमान पश्चिमी मध्य प्रदेश के राजगढ़ में 2.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    पहाड़ों में बारिश-बर्फबारी का अलर्ट

    7 जनवरी 2026 को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद के साथ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड और बढ़ेगी, जबकि मैदानी इलाकों में ठंडी हवाओं का असर और तेज हो सकता है।

  • JNU नारेबाजी विवाद: ‘शरजील इमाम की औलादों के इरादों को कुचलेंगे’ CM फडणवीस का तीखा हमला

    JNU नारेबाजी विवाद: ‘शरजील इमाम की औलादों के इरादों को कुचलेंगे’ CM फडणवीस का तीखा हमला

    नई दिल्ली। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर लगाए गए विवादित नारों ने एक बार फिर देश की राजनीति को गरमा दिया है। इस घटना के बाद जहां JNU प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए FIR दर्ज कराई, वहीं अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान ने इस विवाद को और तीखा बना दिया है।

    JNU प्रशासन ने इस नारेबाजी को लोकतंत्र और राष्ट्रीय मूल्यों पर हमला करार देते हुए साफ कहा है कि विश्वविद्यालय किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का मंच नहीं बन सकता। प्रशासन की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और पूरे मामले की जांच जारी है।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा है पूरा मामला

    दरअसल, यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद शुरू हुआ। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में जेल में बंद आरोपियों शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद JNU कैंपस में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।

    प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए गए, जिससे देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली। इस घटना को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

    CM देवेंद्र फडणवीस का तीखा बयान

    JNU में हुई नारेबाजी पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ा और विवादित बयान दिया है। नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि JNU में लगाए गए नारे देशविरोधी मानसिकता को दर्शाते हैं।

    फडणवीस ने कहा, “ये शरजील इमाम की औलादें हैं, जो JNU में पैदा हुई हैं। देशद्रोहियों और देश को तोड़ने की भाषा बोलने वालों के इरादों को कुचलने का काम किया जाएगा।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है।

    उन्होंने यह भी साफ किया कि देश की एकता और अखंडता के खिलाफ किसी भी सोच को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    शिवाजी महाराज पर भी दिया बयान

    इसी दौरान देवेंद्र फडणवीस ने छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर भी अहम टिप्पणी की। केंद्रीय मंत्री सीआर पाटील के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि महापुरुष किसी एक समाज या जाति के नहीं होते।

    फडणवीस ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज पूरे देश के थे। उन्हें किसी एक समाज से जोड़ना गलत है। महापुरुषों को बांटना देश के हित में नहीं है।”

    JNU विवाद और नेताओं के बयानों के बाद यह मुद्दा अब केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा विषय बन गया है।

  • मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्री-परिषद सदस्यों को मिले टैबलेट

    मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्री-परिषद सदस्यों को मिले टैबलेट


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में एक नए नवाचार करते हुए आज मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्रि-परिषद के सभी सदस्यों को टैबलेट वितरण किया। उन्होंने बताया कि मंत्रि-परिषद से संबंधित संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी। मंत्रालय में मंगलवार को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में कैबिनेट के सदस्यों और मंत्रि-परिषद के भारसाधक सचिवों को टैबलेट प्रदाय करने की शुरूआत हुई। कैबिनेट के सदस्यों ने टैबलेट प्राप्त किए और प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैबिनेट सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत ई-कैबिनेट की पहल हुई है। ई-कैबिनेट एप्लीकेशन के संबंध में संबंधितों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह एप्लीकेशन आधुनिक तकनीक, पेपरलैस, सुरक्षित और ऐसी गोपनीय प्रणाली है, जिसे मंत्रि-परिषद सदस्य कभी भी और कहीं भी अपनी सुविधा के अनुसार अवलोकन कर सकते हैं। मुख्य रूप से मंत्रि-परिषद की कार्य सूची देखने, ई-कैबिनेट एप्लीकेशन द्वारा पूर्व की बैठकों में लिए गए निर्णयों का पालन-प्रतिवेदन देखने में सुविधा होगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पारदर्शिता और समय की बचत के लिए मंत्रि-परिषद सदस्य नई व्यवस्था का पूरा लाभ लेंगे। प्रारंभ में मंत्रि-परिषद बैठक का एजेण्डा भौतिक एवं डिजिटल रूप दोनों फार्मेट में भेजा जाएगा, बाद में यह पूर्णता डिजिटल रूप में भेजा जाएगा। इस पेपरलैस व्यवस्था अर्थात ई-कैबिनेट एप्लीकेशन प्रारंभ होने से भौतिक रूप से होने वाले फोल्डर वितरण, कागज एवं समय की बचत हो सकेगी।

    मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने बताया कि वर्ष 1960 से लेकर अब तक लिए गए मंत्रि-परिषद के निर्णयों को डिजिटलाइज किया गया है। गत 2 वर्ष के मंत्रि-परिषद के निर्णय एक क्लिक पर देखे जा सकते हैं। मंत्रि-परिषद की बैठक के अंत में एक प्रेजेंटेशन द्वारा मंत्रियों को टैबलेट के उपयोग को प्रारंभ करने के उद्देश्य, व्यापक उपयोगिता और टैबलेट के कार्य संचालन की बुनियादी जानकारी दी गई।

  • IPL में खेलने से इनकार करना पड़ सकता है भारी, नीलामी की रकम भी जा सकती है, दो साल का बैन भी संभव

    IPL में खेलने से इनकार करना पड़ सकता है भारी, नीलामी की रकम भी जा सकती है, दो साल का बैन भी संभव


    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) नीलामी किसी भी क्रिकेटर के करियर का बड़ा मोड़ होती है। करोड़ों की बोली लगना और रातों-रात स्टार बनना जितना आकर्षक है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आता है। अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर कोई खिलाड़ी नीलामी में बिकने के बाद अपनी मर्जी से IPL खेलने से इनकार कर दे, तो क्या उसे पूरी रकम मिलती है? IPL के नियम इस मामले में बेहद स्पष्ट हैं और काफी सख्त भी।

    IPL पूरी तरह BCCI द्वारा संचालित टूर्नामेंट है। नीलामी में भाग लेने वाला हर खिलाड़ी पहले से तय नियम और शर्तों को स्वीकार करता है।

    नीलामी में बिकने के बाद खिलाड़ी और फ्रेंचाइजी के बीच एक पेशेवर अनुबंध बन जाता है, जिसमें खिलाड़ी की यह जिम्मेदारी होती है कि वह टूर्नामेंट में उपलब्ध रहे और टीम के लिए खेले।

    अगर कोई खिलाड़ी बिना वैध और ठोस कारण के खेलने से इनकार करता है, तो उसे नीलामी में मिली पूरी रकम नहीं दी जाती। IPL में लागू नियम ‘नो प्ले, नो पे’ के तहत स्पष्ट करते हैं कि यदि खिलाड़ी मैदान पर नहीं उतरता, तो उसे भुगतान का पूरा हक नहीं मिलता। इसका मकसद यह भी है कि फ्रेंचाइजी पर किए गए खर्च का नुकसान न हो।

    नीलामी में बिकने के बाद अचानक नाम वापस लेना BCCI के नियमों के तहत गंभीर उल्लंघन माना जाता है। ऐसे मामलों में खिलाड़ी पर अगले दो IPL सीजन और नीलामी से प्रतिबंध लगाया जा सकता है। यह प्रतिबंध केवल सजा नहीं है, बल्कि संदेश भी देता है कि खिलाड़ी नीलामी में शामिल होने से पहले पूरी गंभीरता से निर्णय लें।

    हालांकि, हर स्थिति में सजा तय नहीं होती। अगर खिलाड़ी किसी गंभीर चोट से जूझ रहा हो या राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना जरूरी हो, तो उसे छूट दी जा सकती है। इसके लिए मेडिकल रिपोर्ट या संबंधित बोर्ड की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक होती है। बिना पुख्ता कारण या सबूत के इनकार मान्य नहीं होगा।

    फ्रेंचाइजी के लिए भी यह नियम बेहद महत्वपूर्ण हैं। नीलामी के दौरान टीम अपनी रणनीति खिलाड़ियों पर तैयार करती है। किसी खिलाड़ी पर बड़ी रकम खर्च करने के बाद यदि वह आखिरी वक्त पर खेलने से मना कर दे, तो टीम का संतुलन बिगड़ जाता है। इसलिए BCCI ने सख्त नियम बनाए हैं ताकि लीग की विश्वसनीयता और फ्रेंचाइजी के हित सुरक्षित रह सकें।

    विदेशी खिलाड़ियों के मामले में यह नियम और भी जरूरी हो जाता है। कई विदेशी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल या निजी कारणों से IPL से हटना चाहते हैं। BCCI यह सुनिश्चित करता है कि कोई खिलाड़ी बिना ठोस वजह के लीग को हल्के में न ले।
    यदि कोई खिलाड़ी पूरे टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लेता, तो आम तौर पर उसे पूरी रकम नहीं मिलती। हालांकि कुछ विशेष मामलों में फ्रेंचाइजी और खिलाड़ी के बीच आपसी सहमति से आंशिक भुगतान या अलग व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन यह पूरी तरह अनुबंध और नियमों पर निर्भर करता है।

    कुल मिलाकर, IPL नीलामी में बिकना केवल फायदे की बात नहीं है, बल्कि इसके साथ अनुशासन और जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। बिना ठोस कारण IPL खेलने से इनकार करना खिलाड़ी के करियर और छविदोनों के लिए भारी पड़ सकता है। नियमों का पालन करना और टीम के प्रति प्रतिबद्ध रहना हर खिलाड़ी की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

  • साबरमती हॉस्टल के बाहर लगे नारे हेट स्पीच में आए, छात्र संघ और ABVP के बीच जुबानी जंग, प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को शिकायत दी

    साबरमती हॉस्टल के बाहर लगे नारे हेट स्पीच में आए, छात्र संघ और ABVP के बीच जुबानी जंग, प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को शिकायत दी


    नई दिल्ली। जेएनयू के साबरमती हॉस्टल के बाहर कुछ छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की। यह घटना 5 जनवरी 2020 की हिंसक रात की छठी बरसी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई।

    जेएनयू प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना और विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन माना। सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट में कहा गया कि लगभग 30-35 छात्र इस नारेबाजी में शामिल थे, जिसमें प्रमुख नाम आदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद आजमी, मेहबूब इलाही, कनिष्क, पाकीजा खान और शुभम शामिल हैं।

    प्रशासन ने दिल्ली पुलिस के वसंत कुंज थाने को शिकायत पत्र भेजकर FIR दर्ज करने और मामले की गहन जांच की मांग की। पत्र में उल्लेख है कि सुरक्षा अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद थे और नारे जानबूझकर और दोहराए गए, जो सामान्य अभिव्यक्ति नहीं बल्कि सुनियोजित कदाचार दिखाते हैं।

    छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा कि यह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि 5 जनवरी की हिंसक रात और ABVP के कथित हमले को याद करने के लिए एक सभा थी। उन्होंने हिंसा और भड़काऊ विचारधारा की निंदा की और कहा कि नारों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    वहीं, ABVP ने कड़ा विरोध जताया। दिल्ली के अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि नारे लगाने वाले छात्रों की मानसिकता हिंदुओं और हिंदू धर्म के खिलाफ है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने बताया कि अब तक कोई औपचारिक शिकायत प्रशासन की ओर से प्राप्त नहीं हुई है।

    जेएनयू प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन और हेट स्पीच के बीच अंतर बहुत बारीक होता है। विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत इस तरह की नारेबाजी पूरी तरह से प्रतिबंधित है, क्योंकि यह शैक्षणिक माहौल और परिसर की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। प्रशासन ने सभी छात्रों से अपील की है कि वे परिसर में शांति बनाए रखें और विवादास्पद गतिविधियों से दूर रहें, ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
  • शालीमार गार्डन हिंसा: पिंकी चौधरी और बेटे सहित 12 आरोपियों पर कार्रवाई तेज

    शालीमार गार्डन हिंसा: पिंकी चौधरी और बेटे सहित 12 आरोपियों पर कार्रवाई तेज


    गाजियाबाद । उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां हिंदू रक्षा दल के लोगों द्वारा तलवारों का वितरण और शक्ति प्रदर्शन का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने सख्त कदम उठाया। शालीमार गार्डन थाने की पुलिस ने इस मामले में हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी और उनके बेटे हर्ष चौधरी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि कुछ दिन पहले दोनों ने स्थानीय लोगों में तलवारें बांटी और कहा कि “
    जिहादियों से सुरक्षा के लिए इसे अपने घर में रखें और अगर कोई बहन या बेटी पर बुरी नजर डाले तो इसका प्रयोग करें।

    यह मामला पहले भी चर्चा में रहा था। पुलिस ने इस घटना की सूचना मिलने के बाद जांच शुरू की और अब तक कुल 12 आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हथियार वितरण और शक्ति प्रदर्शन की यह घटना कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है, इसलिए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

    इस मामले पर विपक्ष भी सख्त है। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने प्रदेश सरकार को कानून व्यवस्था में चूक के लिए कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि आज देश में क्या हो रहा है, तलवारें बांटी जा रही हैं, एक संप्रदाय के खिलाफ भावनात्मक नारे लगाकर हिंसा की कोशिश की जा रही है, लेकिन सरकार को दिखाई नहीं दे रहा।

    उनका यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना।

    पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि शालीमार गार्डन और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। इस घटना ने यह सवाल उठाया है कि समाज में हथियारों का वितरण और युवा वर्ग को हिंसा के लिए उकसाना कितनी गंभीर समस्या बन सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे घटनाक्रम न केवल समाज में भय और असुरक्षा पैदा करते हैं, बल्कि कानून व्यवस्था और सामुदायिक शांति पर भी गंभीर असर डालते हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत स्थानीय थाने को दें और कानून का पालन सुनिश्चित करें।

    शालीमार गार्डन मामला यह भी दर्शाता है कि हथियारों का गलत तरीके से वितरण और सामूहिक शक्ति प्रदर्शन केवल राजनीतिक या सामाजिक तनाव ही नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। इसलिए अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी घटना को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    इस पूरे मामले ने राज्य में राजनीतिक हलकों और आम जनता के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। विपक्षी दलों के आरोपों और पुलिस की सक्रिय कार्रवाई ने इसे अब तक के सबसे बड़े हथियार वितरण मामलों में शामिल कर दिया है। स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी जारी की है कि किसी भी व्यक्ति को हथियार लेकर सार्वजनिक स्थानों पर इकट्ठा नहीं होने दिया जाएगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस प्रकार गाजियाबाद की शालीमार गार्डन घटना ने यह संदेश दिया है कि हथियारों का वितरण और सामूहिक हिंसा किसी भी समाज के लिए गंभीर खतरा है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्काल कार्रवाई अनिवार्य है।

  • दिल्ली त्रिलोकपुरी: इंस्टाग्राम विवाद में 11वीं के छात्र की नाबालिग साथियों ने की हत्या

    दिल्ली त्रिलोकपुरी: इंस्टाग्राम विवाद में 11वीं के छात्र की नाबालिग साथियों ने की हत्या


    नई दिल्ली।  दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें 11वीं कक्षा का 17 वर्षीय छात्र अपने नाबालिग साथियों द्वारा बेरहमी से पीट-पीट कर मारा गया। यह घटना सोशल मीडिया पर हुए मामूली विवाद के कारण घटी, जिसने पूरे इलाके में डर और हड़कंप मचा दिया। मृतक छात्र इंद्रा कैंप का निवासी था और अपने परिवार में सबसे छोटा था।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोमवार, 5 जनवरी की शाम को यह घटना हुई। छात्र ने एक नाबालिग आरोपी की इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर ‘तू तो मेरा छोटा भाई है’ कमेंट किया, जिसे आरोपी ने पसंद नहीं किया। इसी नाराज़गी में आरोपी ने अपने पांच अन्य नाबालिग साथियों के साथ मिलकर छात्र को घेर लिया और उसकी बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी।

    हिंसा इतनी गंभीर थी कि छात्र की हालत तुरंत बिगड़ गई। उसे जमीन पर गिराकर लात-घूंसों से मारा गया, जिससे शरीर पर गंभीर चोटें आईं। चश्मदीदों की मदद करने की कोशिश विफल रही क्योंकि आरोपी ने बीच-बचाव करने वालों पर भी हमला किया। छात्र को तत्काल लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर स्थिति के कारण उसे GTB अस्पताल रेफर किया गया। मंगलवार, 6 जनवरी की सुबह इलाज के दौरान छात्र ने दम तोड़ दिया।

    पुलिस ने छात्र के परिवार की शिकायत पर 6 नाबालिगों को हिरासत में लिया। ट्रिलोकपुरी पुलिस की क्राइम टीम और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज़ी से शुरू की जाएगी। इस घटना ने यह सवाल फिर से खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया पर छोटे विवाद भी नाबालिगों में जानलेवा हिंसा को जन्म दे सकते हैं।

    परिवार और पड़ोसियों ने बताया कि मृतक छात्र शांत और होशियार था, किसी से विवाद नहीं करता था।

    केवल एक साधारण इंस्टाग्राम कमेंट ने यह भयानक घटना जन्म दी, जो समाज और परिवार दोनों के लिए चेतावनी है। स्थानीय लोग घटना से स्तब्ध हैं और ऐसे हादसों की रोकथाम की मांग कर रहे हैं।

    दिल्ली पुलिस ने सभी छह नाबालिगों को बाल संरक्षण कानून और पॉक्सो एक्ट के तहत हिरासत में रखा है। उनकी मानसिक स्थिति, मामले में भूमिका और हिंसा के स्तर की पूरी जांच की जा रही है। पुलिस ने कहा कि बच्चों की उम्र और समझ को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी। केंद्रीय और राज्य बाल संरक्षण प्राधिकरण भी इस मामले की समीक्षा कर रहे हैं ताकि नाबालिगों द्वारा अपराध के मामलों में सख्त और उचित कार्रवाई सुनिश्चित हो।

    इस घटना ने सोशल मीडिया और युवा पीढ़ी के बीच साइबर एथिक्स और जिम्मेदारी पर गंभीर बहस शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर छोटे विवाद भी युवा मनोविज्ञान पर भारी असर डाल सकते हैं। यह घटना साबित करती है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया और वास्तविक जीवन में संवेदनशीलता, सहिष्णुता और हिंसा से बचाव की शिक्षा देना बेहद जरूरी है।

    दिल्ली पुलिस ने आसपास के स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई है। परिवार और समाज से अपील की गई है कि वे बच्चों के व्यवहार और सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखें, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों से बचा जा सके।

    त्रिलोकपुरी की यह घटना पूरे देश के लिए चेतावनी बन गई है। यह याद दिलाती है कि नाबालिगों के बीच छोटे विवाद भी जानलेवा साबित हो सकते हैं और बच्चों को मानसिक, नैतिक और डिजिटल सुरक्षा की शिक्षा देना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

  • राम विरोधी है कांग्रेस तेज प्रताप यादव ने तोड़ा चुप्पी, महिलाओं और धार्मिक प्रतीकों के सम्मान की उठाई मांग

    राम विरोधी है कांग्रेस तेज प्रताप यादव ने तोड़ा चुप्पी, महिलाओं और धार्मिक प्रतीकों के सम्मान की उठाई मांग


    नई दिल्ली । तेज प्रताप यादव ने यह बयान केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह के उस बयान के जवाब में दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा योजना का नाम बदलकर वीबी-जी राम जी अधिनियम’ करने का विरोध किया। तेज प्रताप ने पत्रकारों से कहा गिरिराज जी बिल्कुल सही कह रहे हैं। कांग्रेस राम विरोधी है। उनके नेता अपने माथे पर तिलक नहीं लगाते ऐसा करना चाहिए।

    हालांकि तेज प्रताप यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी जातियों समुदायों और धर्मों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा हिंदू मुस्लिम सिख और ईसाई सभी भाई हैं। किसी भी धर्म या जाति का अपमान नहीं होना चाहिए। मेरा आरोप केवल कांग्रेस के रवैये और उसके नेताओं के कार्यों पर है।

    बिहार महिलाओं के खिलाफ टिप्पणी पर कार्रवाई की मांग

    तेज प्रताप यादव ने उत्तराखंड की मंत्री के पति गिरधारी लाल साहू द्वारा बिहार की महिलाओं के खिलाफ की गई टिप्पणी पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसे अपमानजनक बयान देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। तेज प्रताप ने सवाल उठाया वे किससे माफी मांगेंगे? क्या बिहार की बेटियों ने उन्हें माफ कर दिया है उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल माफी पर्याप्त नहीं है बल्कि ऐसे व्यक्तियों को बिहार आकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी।

    तेज प्रताप यादव के इस बयान ने राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी है। कांग्रेस पार्टी के खिलाफ राम कृष्ण और महादेव के अपमान के आरोप और महिलाओं के सम्मान को लेकर उठाए गए मुद्दे आगामी राजनीतिक चर्चाओं में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनका कहना है कि धर्म और संस्कृति का सम्मान हर राजनीतिक दल और नागरिक की जिम्मेदारी है और इसे नजरअंदाज करना स्वीकार्य नहीं। तेज प्रताप का यह रुख न केवल कांग्रेस पर निशाना है बल्कि यह समाज और राजनीति में सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलता बनाए रखने की दिशा में भी एक संदेश है।

  • इंदौर पानी विवाद: हाईकोर्ट ने MP सरकार को घेरा, मौतों के आंकड़ों पर उठाए सवाल

    इंदौर पानी विवाद: हाईकोर्ट ने MP सरकार को घेरा, मौतों के आंकड़ों पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली। इंदौर में दूषित पेयजल से हो रही मौतों ने अब न्यायपालिका का ध्यान खींच लिया है। इस गंभीर मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जहां कुल 5 जनहित याचिकाओं पर एक साथ विचार किया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाते हुए सख्त रुख अपनाया।

    मौतों के आंकड़ों पर HC की नाराजगी
    पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई थी, जिसमें दूषित पानी से सिर्फ 4 मौतों की जानकारी दी गई। जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कोर्ट के संज्ञान में आया कि इस मामले में अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। इस विरोधाभास को लेकर हाई कोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई और रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने कहा कि इतने गंभीर मामले में गलत आंकड़े पेश करना बेहद चिंताजनक है।

    पूरे प्रदेश के पानी पर उठे सवाल
    हाई कोर्ट ने सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के पीने के पानी की गुणवत्ता पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि अगर लोगों को मिलने वाला पानी ही दूषित है, तो यह बेहद गंभीर स्थिति है। यह समस्या केवल एक इलाके तक सीमित नहीं मानी जा सकती।

    मुख्य सचिव को वर्चुअली पेश होने का आदेश
    मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को वर्चुअली पेश होने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई की तारीख 15 जनवरी तय की गई है। कोर्ट ने साफ किया कि वह इस मामले में किसी और अधिकारी की नहीं, बल्कि सीधे मुख्य सचिव की बात सुनना चाहता है।

    कोरोना की तरह मांगा मेडिकल बुलेटिन
    कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि जिस तरह कोरोना महामारी के दौरान रोजाना मेडिकल बुलेटिन जारी किया जाता था, उसी तरह दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों का भी नियमित अपडेट दिया जाए।

    अब तक 17 मौतें, 110 मरीज भर्ती
    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दूषित पानी से अब तक 421 लोग बीमार हुए, जिनमें से 311 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं। फिलहाल 110 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 15 मरीज आईसीयू में इलाजरत हैं।

    15 जनवरी की सुनवाई पर टिकी निगाहें
    अब पूरे प्रदेश की नजरें 15 जनवरी की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि सरकार इस गंभीर लापरवाही पर क्या जवाब देती है और आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं