सोमनाथ का ऐतिहासिक महत्व
आक्रमण के बावजूद पुनर्निर्माण
सरदार पटेल का योगदान
सोमनाथ की प्रेरणा
भविष्य के लिए संदेश

सोमनाथ का ऐतिहासिक महत्व
आक्रमण के बावजूद पुनर्निर्माण
सरदार पटेल का योगदान
सोमनाथ की प्रेरणा
भविष्य के लिए संदेश

सोमनाथ मंदिर का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि “जय सोमनाथ! 2026 में हम उस पवित्र स्थल के पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने का स्मरण कर रहे हैं। बार-बार हुए हमलों के बावजूद हमारा सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है। यह मंदिर भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा है जिनके लिए अपनी संस्कृति और सभ्यता सर्वोपरि रही।”
गजनी के महमूद द्वारा आक्रमण
सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद से यह भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक बन गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस महत्वपूर्ण क्षण को याद करते हुए कहा कि यह गाथा केवल मंदिर के विध्वंस की नहीं बल्कि संघर्ष बलिदान और पुनर्निर्माण की कहानी है। यह मंदिर आज भी दुनिया को यह संदेश देता है कि आस्था को न तो समाप्त किया जा सकता है और न ही उसे झुकाया जा सकता है।
सोमनाथ का पुनर्निर्माण और वर्तमान स्थिति
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर के महत्व को एक नए दृष्टिकोण से पेश किया जो केवल आस्था का केंद्र नहीं है बल्कि यह भारत की ताकत सामर्थ्य और संघर्ष की भी गाथा है। मोदी ने यह संदेश दिया कि जैसे सोमनाथ का पुनर्निर्माण हुआ वैसे ही भारत अपनी गौरवशाली संस्कृति और सभ्यता के साथ पुनः उठ सकता है और दुनिया को मार्ग दिखा सकता है।

श्रद्धालुओं की आस्था और उनके अनुभव
अनेक श्रद्धालुओं ने प्रशासन के द्वारा किए गए व्यवस्थाओं की सराहना की। एक भक्त ने कहा “सरकार ने यहां भीड़ को बहुत अच्छे से मैनेज किया है। ट्रैफिक और पार्किंग के इंतजाम तारीफ के काबिल हैं। मैं लोगों को यहां आने के लिए प्रोत्साहित करना चाहूंगा। कोई दिक्कत नहीं होगी सभी व्यवस्थाएं बढ़िया हैं।
एक अन्य श्रद्धालु ने कहा “माघ मेला का अपना अलग आकर्षण है। यहां आकर बहुत अच्छा लगता है। पिछली बार भी प्रशासन ने अच्छे इंतजाम किए थे और इस साल भी वैसा ही है। यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। सरकार के इंतजाम तारीफ के काबिल हैं। पुलिस हर समय मौजूद है और श्रद्धालुओं की मदद के लिए तैयार रहती है। युवाओं में आस्था की भावना बहुत ज्यादा है। कुल मिलाकर इंतजाम बहुत अच्छे हैं। कई सुविधाएं उपलब्ध हैं और साफ-सुथरे चेंजिंग रूम भी दिए गए हैं।
सुरक्षा और सुविधाएं
कलपवास और धार्मिक आयोजन
माघ मेला का महत्व

सुप्रीम कोर्ट का फैसला 5 जनवरी 2026
क्यों नहीं मिली जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जमानत देने के मामले में अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार का हवाला केवल तभी दिया जा सकता है, जब इसका आधार ठोस साक्ष्य और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ा हो। यदि आरोप गंभीर हैं और साक्ष्य मजबूत हैं तो जीवन के अधिकार के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।
अतीत के फैसले का संदर्भ
उमर खालिद शरजील इमाम और अन्य आरोपियों के खिलाफ यह मामला काफी लंबा खींच चुका है। इन आरोपियों को 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश रचने का आरोप है और वे पांच साल से अधिक समय से जेल में हैं। 10 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने इस मामले में जमानत पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट ने भी इन आरोपियों को जमानत देने से मना कर दिया था। 2 सितंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी जिसके बाद इन आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अन्य आरोपियों की जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने बाकी 5 आरोपियों को जमानत देने का फैसला सुनाया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इन आरोपियों की जमानत से ट्रायल प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा और मामले की सुनवाई जारी रहेगी।
फैसले का महत्व
यह सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह दर्शाता है कि न्यायपालिका गंभीर साजिशों और सामूहिक हिंसा के मामलों में जमानत देने में बेहद सावधान रहती है, विशेष रूप से जब आरोप UAPA जैसे कड़े कानूनों के तहत होते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि संवैधानिक अधिकारों को हमेशा कानूनी ढांचे और साक्ष्यों के संदर्भ में समझा जाएगा न कि केवल व्यक्तिगत कठिनाई या जेल में लंबे समय तक रहने के आधार पर।
आगे क्या होगा
उमर खालिद और शरजील इमाम अब ट्रायल कोर्ट में फिर से जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। ट्रायल की प्रक्रिया अभी भी जारी रहेगी और अदालत भविष्य में साक्ष्यों और मामलों की गंभीरता के आधार पर निर्णय लेगी। यह मामला अब भी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और अदालत के फैसले ही इन आरोपियों के भविष्य का निर्धारण करेंगे।

ममता ने पत्र में लिखा, ‘‘यदि इसे वर्तमान स्वरूप में जारी रहने दिया गया, तो एसआईआर से अपूरणीय क्षति होगी, बड़े पैमाने पर मतदाताओं के मताधिकार का हनन होगा और लोकतंत्र की नींव पर हमला होगा।’’ मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग से तत्काल सुधारात्मक उपाय करने का आग्रह किया और कहा कि ऐसा न करने पर ‘मनमानी और अनियोजित प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए’। ममता ने सुनवाई प्रक्रिया के दौरान बूथ-स्तरीय एजेंटों (बीएलए) को कथित रूप से नियुक्त न किए जाने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इससे एसआईआर की ‘निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं’।
निर्वाचन आयोग को इस प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए बनर्जी ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग को उसकी देखरेख या निर्देश के तहत की गई किसी भी अवैध, मनमानी या पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के लिए पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने इस हफ्ते की शुरुआत में ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (सेंट्रल) रूल्स, 2025’ नाम से ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इनमें गिग वर्कर्स को अलग-अलग सोशल सिक्योरिटी बेनेफिट्स और सुरक्षा पाने के लिए योग्य होने के नियम गए हैं।
राघव चड्ढा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दी बधाई
राघव चड्ढा ने आज अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर लिखा, “सभी गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स को बधाई। आपके लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार के सोशल सिक्योरिटी नियमों का ड्राफ्ट आपके काम को मान्यता, सुरक्षा और सम्मान देने की दिशा में पहला कदम है। भले ही Zomato, Swiggy, Blinkit, आदि प्लैटफॉर्म्स ने आपकी बात नहीं सुनी, लेकिन इस देश के लोगों और सरकार ने सुनी। यह एक छोटी जीत है, लेकिन एक महत्वपूर्ण जीत है।”
‘आप’ सांसद ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए वीडियो में कहा, “ये ड्राफ्ट नियम सिर्फ इसलिए नहीं बनाए गए कि मैंने संसद में यह मुद्दा उठाया, बल्कि यह इसलिए हुआ क्योंकि आप सभी ने भी अपनी आवाज उठाई। कंपनियों और प्लैटफॉर्म्स ने आपकी बात नहीं सुनी, लेकिन सरकार ने सुनी, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए।”
राघव चड्ढा ने कहा कि नए नियमों के तहत, गिग वर्कर्स को कानूनी मान्यता मिलेगी और उन्हें एक यूनिक पहचान दी जाएगी। हाल ही में संसद सत्र में ‘आप’ के राज्यसभा सांसद ने भारत के गिग वर्कर्स के ‘दुख-दर्द” के बारे में बात की थी, जो बहुत ज्यादा दबाव में और कभी-कभी खराब मौसम की स्थिति में काम करते हैं।
राघव चड्ढा ने क्विक कॉमर्स और दूसरे ऐप-बेस्ड डिलीवरी और सर्विस बिजनेस पर रेगुलेशन की मांग की थी, खासकर गिग वर्कर्स के फायदों की जरूरत पर जोर दिया था।
उन्होंने संसद में अपने भाषण में गिग वर्कर्स के लिए सम्मान, सुरक्षा और सही वेतन की मांग की थी। पहली बार, ‘गिग वर्कर्स’ और ‘प्लैटफॉर्म वर्कर्स’ की परिभाषा और उनसे जुड़े प्रावधान सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 में दिए गए हैं, जो 21 नवंबर, 2025 को लागू हुआ है।
क्या होंगे फायदे
यह कोड गिग वर्कर्स और प्लैटफॉर्म वर्कर्स के लिए जीवन बीमा और विकलांगता कवर, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मैटरनिटी बेनिफिट्स, बुढ़ापा सुरक्षा वगैरह से जुड़े मामलों पर सही सोशल सिक्योरिटी उपायों को बनाने का प्रावधान करता है। यह कोड कल्याणकारी योजनाओं को फाइनेंस करने के लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड बनाने का भी प्रावधान करता है। यह कोड गिग वर्कर्स और प्लैटफॉर्म वर्कर्स के कल्याण के लिए एक नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड बनाने का भी प्रावधान करता है।
इसके अलावा, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 26.08.2021 को असंगठित श्रमिकों, जिसमें प्लैटफॉर्म वर्कर्स, प्रवासी श्रमिक आदि शामिल हैं, का एक व्यापक नेशल डेटाबेस बनाने के लिए ई-श्रम पोर्टल लॉन्च किया था। ई-श्रम पोर्टल का मकसद असंगठित श्रमिकों को सेल्फ-डिक्लेरेशन के आधार पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) देकर उन्हें रजिस्टर करना और सपोर्ट करना है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 21.10.2024 को ई-श्रम- ‘वन-स्टॉप-सॉल्यूशन’ भी लॉन्च किया है, जिसमें अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा/कल्याण योजनाओं को एक ही पोर्टल यानी ई-श्रम पर इंटीग्रेट किया गया है।

सरकारी स्तर पर इस बात पर सहमति बन रही है कि केवल चार्जिंग स्टेशन बनाना ही काफी नहीं है। जब तक इलेक्ट्रिक वाहनों को यात्रा के दौरान तकनीकी सहायता, आपात मदद और रियल-टाइम सपोर्ट नहीं मिलेगा, तब तक लंबी दूरी की ईवी यात्रा को लेकर लोगों का भरोसा पूरी तरह नहीं बन पाएगा। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे-आधारित ईवी सपोर्ट सिस्टम तैयार करने की योजना बनाई जा रही है।
संकट में आते ही तुरंत मदद मिलेगी
प्रस्तावित योजना के तहत एक्सप्रेसवे पर ईवी-आधारित कमांड और कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। ये सेंटर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल की तरह काम करेंगे। यहां से यात्रा कर रहे इलेक्ट्रिक वाहनों की स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जाएगी।
इन कमांड सेंटरों से तुरंत रास्ते में ही सहायता, बैटरी से जुड़ी समस्याओं में सहायता, चार्जिंग से संबंधित मार्गदर्शन और वाहन की बेसिक जांच जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे अगर कोई वाहन रास्ते में तकनीकी खराबी या बैटरी समस्या के कारण रुक जाता है, तो उसे तुरंत सहायता मिल सकेगी।
दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे होगा पहला ईवी कॉरिडोर
इस योजना के तहत दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। करीब 1,300 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर संपूर्ण सहायता प्रणाली तैयार की जी सकती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस पूरे मार्ग पर चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्जिंग के साथ-साथ तकनीकी और आपात सहायता भी मिलती रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे देश के अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी लागू किया जा सकता है।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर होगा जोर
सरकार इस पूरे ढांचे को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर विकसित करने पर विचार कर रही है। इसमें वाहन निर्माता कंपनियां, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता और निजी रोडसाइड असिस्टेंस कंपनियां शामिल हो सकती हैं। इससे सरकार पर वित्तीय बोझ कम होगा और सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होने की उम्मीद है।
ईवी अपनाने को मिलेगा बढ़ावा
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन यह बढ़त अभी मुख्य रूप से शहरों तक सीमित है। लंबी दूरी की यात्रा में भरोसे की कमी अब भी एक बड़ी बाधा है। एक्सप्रेसवे पर ईवी-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर और कमांड सेंटर की व्यवस्था होने से ईवी को पेट्रोल-डीजल वाहनों का व्यावहारिक विकल्प बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस पहल से न सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ेगा, बल्कि देश के स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।

साटम के सहयोगी और राज्य मंत्री आशीष शेलार ने भी ठाकरे पर उस मांग के लिए निशाना साधा जिसमें उन्होंने 68 नगरमहापालिका वार्डों के नतीजों को रद्द करने की मांग की, जहां सत्तारूढ़ ‘महायुति’ पार्टी के उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया है।
साटम की ये टिप्पणियां ठाकरे के इस दावे के बीच आई हैं कि अगर बृहन्मुंबई महानगरपालिका का व्यय बजट 15,000 करोड़ रुपये था, तो विभिन्न कार्यों के लिए ठेकेदारों को पेशगी के रूप में दी जाने वाली राशि तीन लाख करोड़ रुपये है, जो एक ‘घोटाला’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निकाय चुनावों के लिए रिश्वत की रकम का इस्तेमाल किया जा रहा है।
भाजपा की मुंबई इकाई के अध्यक्ष साटम ने संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि ठाकरे तीन लाख करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार थे। साटम ने ठाकरे के एक हालिया तंज की भी कड़ी निंदा की और कहा कि यह टिप्पणी व्यक्तिगत अपमान नहीं बल्कि हर मराठी व्यक्ति का अपमान है।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि ठाकरे के कार्यकाल के दौरान भारी खर्च के बावजूद मुंबई के बुनियादी ढांचे की स्थिति खराब हो गई थी। साटम ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में सड़कों पर 21,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन शहर की हालत ऐसी थी कि ‘यह बताना मुश्किल था कि सड़कों पर गड्ढे हैं या गड्ढों के अंदर सड़कें हैं’। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पर कोविड-19 महामारी के दौरान अनियमितताओं का भी आरोप लगाया और कहा कि महालक्ष्मी में कोविड-19 देखभाल केंद्र बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए स्थापित किया गया था।
कोरोना के दौरान जमकर हुई घोटालेबाजी- साटम
साटम ने आरोप लगाया, ‘हर चीज में भ्रष्टाचार था – शवों को ले जाने वाले बैग से लेकर पीपीई किट तक – किसी भी चीज को बख्शा नहीं गया। भाजपा नेता ने दावा किया कि ठाकरे ने मुख्यमंत्री रहते हुए लगभग 1,700 बार और रेस्तरां मालिकों से जबरन वसूली की थी। उन्होंने तटीय सड़क परियोजना के बारे में ठाकरे के दावों को भी खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान कोई ठोस समयसीमा तय नहीं की गई थी।
साटम ने जोर देकर कहा,‘तटीय सड़क परियोजना का सारा श्रेय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जाता है।’ उन्होंने ठाकरे पर तीन लाख करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार में संलिप्त होने के अपने आरोप को दोहराया। उन्होंने ठाकरे से पिछले 25 वर्षों में मराठी लोगों के लिए किए गए एक भी महत्वपूर्ण कार्य को दिखाने को कहा। यह उस अवधि का जिक्र करते हुए कहा जब अविभाजित शिवसेना का बीएमसी पर नियंत्रण था। उन्होंने बीएमसी पर ठाकरे की पार्टी के शासन का संदर्भ देते हुए उन्हें पिछले 25 वर्षों में मराठी लोगों के लिए किए गए एक भी महत्वपूर्ण काम को दिखाने की चुनौती दी।
साटम ने कहा कि भाजपा बीडीडी चॉल के निवासियों को घर उपलब्ध कराने सहित कम से कम 10 प्रमुख कार्यों की सूची दे सकती है, लेकिन ठाकरे परिवार ने इसके बजाय कई ‘मातोश्री’ आवासों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया।
उन्होंने कहा, ‘उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने के बाद 14 मई, 2020 को निर्विरोध विधान परिषद के सदस्य बन गए। उन्होंने इस पर कोई शिकायत नहीं की।’ शेलार ने कहा, ‘अगर ठाकरे को नगर निकाय चुनावों में कुछ उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने पर टिप्पणी करनी है, तो उन्हें पहले विधान परिषद सदस्य(एमएलसी) पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर आलोचना करनी चाहिए।’

डीजीसीए ने इसको लेकर पिछले साल नवंबर में एक एडइवाजरी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि पावर बैंक और स्पेयर बैटरी सिर्फ हैंड लगेज में ले जाने की इजाजत होगी। उसे ओवरहेड कपार्टमेंट में नहीं रख सकते हैं। इसके पीछे आग लगने की वजह बताई गई थी और कहा गया था कि आग लगने पर उसे कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।
लिथियम बैटरी से आग बहुत तेजी से पकड़ती है, क्योंकि इस बैटरी में एनर्जी बहुत अधिक होती है। इस आग को कंट्रोल करना भी मुश्किल हो जाता है। एविएशन सेफ्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि एयरक्राफ्ट के केबिन के अंदर छोटी सी बैटरी में लगी आग भी तेजी से फैल सकती है, इसलिए बचाव बहुत जरूरी है।
डीजीसीए के सर्कुलर में कहा गया है, “अलग-अलग रिचार्जेबल डिवाइस में लिथियम बैटरी के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से हवाई जहाज से लिथियम बैटरी ले जाने में बढ़ोतरी हुई है। पावर बैंक, पोर्टेबल चार्जर और लिथियम बैटरी वाले ऐसे ही डिवाइस आग लगने का कारण बन सकते हैं और जहाज में आग लगा सकते हैं।” आगे कहा गया है, “ओवरहेड स्टोरेज डिब्बे में या कैरी-ऑन बैगेज के अंदर रखी लिथियम बैटरी छिपी हो सकती हैं, उन तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है, या यात्री या क्रू मेंबर उन पर आसानी से नजर नहीं रख सकते। इससे धुआं या आग लगने का पता चलने और उस पर कार्रवाई करने में देरी हो सकती है, जिससे फ्लाइट की सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ सकता है।”
मौजूदा एविएशन सेफ्टी गाइडलाइंस के अनुसार, पावर बैंक सिर्फ केबिन बैगेज में ले जाने की इजाजत है, चेक-इन लगेज में नहीं। हालांकि, यात्रियों को फ्लाइट के दौरान पावर बैंक से डिवाइस चार्ज करने की इजाजत नहीं है। एयरलाइंस ने अब यात्रियों को इस पाबंदी के बारे में बताने के लिए बोर्डिंग अनाउंसमेंट और इनफ्लाइट ब्रीफिंग के जरिए याद दिलाना शुरू कर दिया है।