Category: National

  • अमित शाह का राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार, बोले- नक्सलियों के साथ रहते-रहते खुद बन गए नक्सलवादी

    अमित शाह का राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार, बोले- नक्सलियों के साथ रहते-रहते खुद बन गए नक्सलवादी


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) ने सोमवार को लोकसभा (Lok Sabha) में कांग्रेस और सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर करार प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि नक्सलियों के साथ रहते-रहते एक पार्टी के नेता खुद नक्सलवादी बन गए। शाह ने देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त किए जाने के मुद्दे पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए राहुल गांधी पर नक्सलियों का समर्थन करने का आरोप लगाया। गृह मंत्री ने कहाकि राहुल गांधी जी अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई बार नक्सलियों और उनके हमर्ददों के साथ देखे गए हैं। भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सल फ्रंटल संगठन ने हिस्सा लिया, जिसका रिकॉर्ड भी है।


    राहुल गांधी कैसे बच सकते हैं

    अमित शाह ने दावा किया कि 2010 में ओडिशा में लाडो शिकोका के साथ राहुल ने मंच साझा किया। शिकोका ने उसी मंच से भड़काऊ भाषण दिया और उन्हें माला भी पहनाई। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2018 में हैदराबाद में, राहुल ने जीवी राव से मुलाकात की, जो (नक्सल) विचाराधारा के करीब थे। मई 2025 में शांति समन्वय समिति (सीसीपी) के सदस्यों से मुलाकात की। विपक्षी सदस्यों के शोरगुल के बीच शाह ने कहाकि 172 जवानों को मारने वाला (माड़वी) हिडमा जब मारा गया, तो इंडिया गेट पर नारे लगे कि कितने हिडमा मारेगो, हर घर से हिडमा निकलेगा। उन्होंने कहा कि इससे संबंधित वीडियो को राहुल गांधी ने स्वयं ट्वीट किया था और ऐसे में वह कैसे बच सकते हैं।


    कांग्रेस की वामपंथी विचारधारा दोषी

    शाह ने कांगेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने 1970 से लेकर मार्च 2026 तक नक्सलाद और नरसंहार का समर्थन किया है। उन्होंने कहाकि जो 20 हजार लोग मारे गए, उसका कोई दोषी है तो वह कांग्रेस की वामपंथी विचारधारा है…। गृह मंत्री ने राहुल पर निशाना साधते हुए कहाकि नक्सलियों के साथ रहते-रहते एक पार्टी और उसके नेता खुद नक्सलवादी बन गए। इसका जवाब इस देश की जनता को उन्हें चुनाव में देना पड़ेगा। यह बात रुकेगी नहीं। जनता की अदालत में उन्हें जवाब देना पड़ेगा। उन्होंने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के दौरान राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) का गठन किया गया और इस तरह एक संविधानेत्तर मंच बनाया गया, जिसकी अध्यक्ष सोनिया गांधी थीं।


    जयराम रमेश पर भी आरोप

    शाह ने यह दावा भी किया कि कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने महेश राउत नाम के एक नक्सली की रिहाई के लिए अपनी पार्टी शासित एक राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। उन्होंने सवाल किया कि जब केंद्र सरकार का एक संविधानेत्तर प्राधिकरण, जो प्रधानमंत्री से भी ऊपर था, के सदस्य यदि नक्सलवाद के समर्थक हों तो किस तरह से नक्सलियों का हौसला टूटेगा? और यह कांग्रेस पार्टी ने किया था। उन्होंने यह दावा भी किया कि 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जब प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास फेलोशिप शुरू की, तो उसका एक लाभार्थी नक्सलवादी बना।

    शाह ने कांग्रेस नेता पी चिदंबरम पर भी प्रहार करते हुए दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ के 76 जवानों के मारे जाने के बाद कांग्रेस नेता ने कहा था कि हम आपसे हथियार डालने को नहीं कह सकते। हम जानते हैं कि आप ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि आप हथियारबंद आजादी की लड़ाई में विश्वास करते हैं।

  • PM मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री से की बात… ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर पर जोर

    PM मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री से की बात… ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर पर जोर


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को नीदरलैंड (Netherlands) के अपने समकक्ष रॉब जेटेन (PM Rob Jetten) से फोन पर बात की, जिसमें सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, व्यापार और रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें पीएम मोदी ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता को शीघ्र बहाल किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में मोदी ने कहा कि उन्होंने और जेटेन ने भारत-नीदरलैंड संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमने सेमीकंडक्टर, वृहद जल परियोजनाएं, ग्रीन हाइड्रोजन समेत विभिन्न क्षेत्रों में हमारी साझेदारी की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। मोदी ने कहा कि हमने पश्चिम एशिया के हालात पर भी विचार-विमर्श किया और क्षेत्र में शांति और स्थिरता शीघ्र बहाल किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    वहीं, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत के साथ हमारे संबंध और भी मजबूत हो रहे हैं। इस साल की शुरुआत में यूरोपीय संघ और भारत ने एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, तथा नीदरलैंड और भारत रक्षा, जल प्रबंधन, नवाचार और व्यापार सहित एक रणनीतिक साझेदारी विकसित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है, उसे देखते हुए, अब हमारे सहयोग को मजबूत करने का समय है।

    जेटेन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मैंने आज फोन पर बातचीत में इस विषय पर चर्चा की। मैं जल्द ही नीदरलैंड में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हूं, ताकि हम इन मुद्दों पर आगे और चर्चा कर सकें। जनवरी में प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय संघ के नेतृत्व के बीच हुई शिखर वार्ता के बाद भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप दिया।

  • फारस की खड़ी में फंसे हैं भारत के लिए ईंधन ला रहे कुल 28 जहाज… इनमें 18 भारतीय और 10 विदेशी

    फारस की खड़ी में फंसे हैं भारत के लिए ईंधन ला रहे कुल 28 जहाज… इनमें 18 भारतीय और 10 विदेशी


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने सोमवार को एक अहम जानकारी देते हुए बताया कि ऊर्जा उत्पादों से लदे और भारत (India) आ रहे 10 विदेशी झंडे वाले जहाज (10 Foreign-Flagged Ships) इस समय फारस की खाड़ी (Persian Gulf ) में फंसे हुए हैं। इसके अलावा, 18 भारतीय जहाज भी वर्तमान में इसी क्षेत्र में मौजूद हैं। कुल मिलाकर 28 जहाजों पर संकट अभी भी मंडरा रहा है। जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा ने मौजूदा हालात पर सवालों के जवाब देते हुए स्थिति को स्पष्ट किया।


    फंसे हुए विदेशी जहाजों की डिटेल

    विशेष सचिव ने बताया कि भारत आ रहे इन 10 विदेशी जहाजों में महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पाद मौजूद हैं।
    3 जहाज: एलपीजी (LPG) से लदे हैं।
    4 जहाज: कच्चा तेल (Crude Oil) लेकर आ रहे हैं।
    3 जहाज: एलएनजी (LNG) से भरे हुए हैं।

    इनके अलावा, भारतीय ध्वज वाले जहाज भी हैं। इनमें एलपीजी के तीन टैंकर, एक एलएनजी वाहक और कच्चे तेल के चार टैंकर शामिल हैं। एक खाली टैंकर में एलपीजी भरी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच संकरे जलडमरूमध्य में फंसे लगभग 500 जहाजों में ये जहाज भी शामिल हैं। अब तक, भारतीय ध्वज वाले आठ जहाज सुरक्षित रूप से निकल चुके हैं।


    भारतीय ध्वज वाले 18 जहाज फंसे

    सिन्हा ने बताया कि जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में भारतीय ध्वज वाले 18 जहाज हैं, जिनमें 485 नाविक सवार हैं। दो अन्य जहाज पूर्वी हिस्से में फंसे हुए हैं। पश्चिमी हिस्से में मौजूद जहाजों में एलपीजी जहाज जग विक्रम, ग्रीन आशा और ग्रीन सानवी शामिल हैं। एक खाली जहाज में एलपीजी भरी जा रही है। इस क्षेत्र में मौजूद अन्य भारतीय ध्वज वाले जहाजों में एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक रासायनिक उत्पाद परिवहन करने वाला जहाज, तीन कंटेनर जहाज और दो ‘बल्क’ कैरियर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, एक जहाज ड्रेजर है और तीन जहाज नियमित रखरखाव के लिए बंदरगाह पर हैं। जब पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ा था, तब होर्मुज जलडमरूमध्य में मूल रूप से 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज थे। इनमें से 24 जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे। पिछले कुछ दिनों में, पश्चिमी हिस्से से छह और पूर्वी हिस्से से दो जहाज सुरक्षित स्थान पर पहुंचने में सफल रहे हैं।


    सरकार की प्राथमिकता

    राजेश सिन्हा ने जोर देकर कहा कि इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय झंडे वाले जहाज जो भारत के लिए माल ला रहे हैं, उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और बिना किसी बाधा के गुजरने दिया जाए। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले और ईरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई ने जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन को लगभग ठप कर दिया है। यह संकरा समुद्री मार्ग खाड़ी देशों से दुनिया भर में तेल और गैस के निर्यात का प्रमुख मार्ग है। हालांकि, ईरान ने पिछले सप्ताह कहा था कि ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय के बाद ‘गैर-शत्रु’ देशों के पोत जलमार्ग से गुजर सकते हैं।


    राहत की खबर: दो जहाज सुरक्षित निकले

    एक सकारात्मक अपडेट शेयर करते हुए बताया गया कि लगभग 94,000 टन रसोई गैस ले जाने वाले दो एलपीजी जहाजों ने शनिवार को सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया है। उम्मीद है कि ये दोनों जहाज अगले दो दिनों के भीतर मुंबई पोर्ट और न्यू मैंगलोर पोर्ट पर लंगर डालेंगे। इनमें दो एलपीजी वाहक पोत, बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम शामिल हैं, जिनमें लगभग 94,000 टन एलपीजी का संयुक्त कार्गो है। ये पोत पिछले कुछ दिनों में युद्धग्रस्त क्षेत्र से सुरक्षित रूप से निकल चुके हैं।


    खाली जहाजों की वापसी पर स्थिति

    जब यह सवाल पूछा गया कि नए सिरे से माल लादने के लिए कितने खाली जहाजों को वापस फारस की खाड़ी भेजा जाएगा, तो सिन्हा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान हालात को देखते हुए खाली जहाजों को वापस भेजने का समय अभी नहीं आया है। उन्होंने कहा- हम अभी उस चरण तक नहीं पहुंचे हैं जहां हम उन्हें (भारतीय झंडे वाले जहाजों को) वापस भेजना शुरू करें।


    बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी

    जहाजों के फंसे होने के अलावा, इस तनाव का सीधा असर व्यापारिक लागत पर भी पड़ रहा है। सिन्हा ने बताया कि खतरा केवल होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके आस-पास के बाहरी इलाके भी अब ‘हाई-रिस्क एरिया’ (HRA) की श्रेणी में आ गए हैं। युद्ध और तनाव से पहले कमर्शियल बीमा प्रीमियम बीमित राशि (Insured Value) का मात्र 0.04% हुआ करता था। लेकिन अब इसमें भारी वृद्धि हुई है। सिन्हा ने एक विशिष्ट मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि अब यह प्रीमियम बढ़कर बीमित राशि का 0.7% हो गया है, और आने वाले समय में इसके और भी अधिक बढ़ने की आशंका है।

  • पेट्रोल पंपों से मिलेगा केरोसिन, सरकार ने बनाया 2 महीने का बैकअप प्लान

    पेट्रोल पंपों से मिलेगा केरोसिन, सरकार ने बनाया 2 महीने का बैकअप प्लान


    नई दिल्ली!
     जैसे-जैसे मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है, केंद्र सरकार ने देश में खाना पकाने के फ्यूल की उपलब्धता पर दबाव कम करने के लिए एक अस्थायी तरीका निकाल लिया है. सोमवार को घोषित 60-दिन की आपातकालीन योजना के तहत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को घर के जरूरी कामों, जैसे खाना पकाने और रोशनी के लिए, अतिरिक्त केरोसिन दिया जाएगा. इस फैसले से यह भी संकेत मिलता है कि 21 ऐसे क्षेत्रों में केरोसिन को थोड़े समय के लिए फिर से शुरू किया जा रहा है, जहां इसे पहले ही चरणबद्ध तरीके से खत्म कर दिया गया था या PDS SKO-फ्री घोषित कर दिया गया था. इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जिन घरों में LPG की कमी हो रही है, उन्हें ऊर्जा का एक बुनियादी स्रोत मिलता रहे.

    इसे आसान बनाने के लिए, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने केरोसिन-फ्री इलाकों में चुने हुए फ्यूल स्टेशनों को घरेलू इस्तेमाल के लिए ‘सुपीरियर केरोसिन ऑयल’ (SKO) रखने और बेचने की मंजूरी दी है. नोटिफिकेशन के मुताबिक, हर जिले में ज्यादा से ज़्यादा दो फ्यूल स्टेशनों को-बेहतर होगा कि वे पब्लिक सेक्टर की तेल कंपनियों के अपने आउटलेट हों—पांच हजार लीटर तक केरोसिन रखने की इजाजत होगी. इस प्रोसेस को तेज करने के लिए, डीलर्स और ट्रांसपोर्टर्स के लिए लाइसेंस से जुड़ी कुछ शर्तों में ढील दी गई है, हालांकि सुरक्षा और निगरानी के नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे.

    मंत्रालय ने साफ किया है कि यह नियम सिर्फ उस केरोसिन के लिए है जिसका इस्तेमाल घरों में खाना पकाने और रोशनी के लिए किया जाता है. यह फैसला तब लिया गया जब सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए तय कोटे के अलावा 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन मंजूर किया. स्थानीय प्रशासन से कहा गया है कि वे जिला-स्तर पर केरोसिन बांटने के लिए जगहें तय करें. इससे पहले, 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को SKO बांटने के आदेश मिले थे, जबकि हिमाचल प्रदेश और लद्दाख ने कहा था कि उन्हें ऐसे किसी कोटे की जरूरत नहीं है. इनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे इलाके शामिल हैं.

    इसके साथ ही, एनर्जी सप्लाई चेन में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए निगरानी और सख्त कर दी गई है. अधिकारियों ने हाल के दिनों में लगभग 2,900 जगहों पर छापे मारे हैं और जमाखोरी व कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए लगभग 1,000 सिलेंडर जब्त किए हैं. राज्यों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे निगरानी बढ़ाएं, रोजाना मीटिंग करें, गलत जानकारियों का खंडन करें और गैस से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मंजूरी देने का काम तेज करें. बयान में कहा गया है कि सरकार जनता से एक बार फिर अपील करती है कि वे अफ़वाहों पर ध्यान न दें.

    इन सब बातों के बीच, कुछ कंज्यूमर्स ने LPG का इस्तेमाल छोड़कर दूसरे विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है. शनिवार तक, 6,000 ‘पाइप्ड नेचुरल गैस’ (PNG) इस्तेमाल करने वालों ने अपने LPG कनेक्शन वापस कर दिए थे. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने ‘X’ पर लिखा कि कल तक 6,000 PNG इस्तेमाल करने वालों ने अपने LPG कनेक्शन वापस कर दिए! उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद!!

    सप्लाई मैनेजमेंट के मामले में, सरकार ने घरेलू और ट्रांसपोर्ट की ज़रूरतों को सबसे ज़्यादा अहमियत दी है, और PNG व CNG सेक्टर के लिए पूरा कोटा सुनिश्चित किया है. फिलहाल, इंडस्ट्रियल और कमर्शियल इस्तेमाल करने वालों को उनकी औसत खपत का लगभग 80 फीसदी हिस्सा मिल रहा है, जबकि खाद बनाने वाले कारखाने 7075 फीसदी क्षमता पर काम कर रहे हैं. एक सरकारी बयान के अनुसार, ईंधन और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयासों के तहत अतिरिक्त LNG कार्गो की भी व्यवस्था की जा रही है.

  • डेडलाइन से पहले सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता, 5 लाख का इनामी नक्सली मुठभेड़ में ढेर

    डेडलाइन से पहले सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता, 5 लाख का इनामी नक्सली मुठभेड़ में ढेर


    रायपुर
    । छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 5 लाख रुपये के इनामी नक्सली को मार गिराया है। यह कार्रवाई देश से नक्सलवाद खत्म करने की तय समयसीमा 31 मार्च से दो दिन पहले हुई, जिसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार रविवार को सुकमा के पोलमपल्ली थाना क्षेत्र की एक पहाड़ी पर यह मुठभेड़ हुई। यहां जिला पुलिस की विशेष इकाई डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की टीम नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी। इसी दौरान माओवादियों से आमना-सामना हुआ और दोनों ओर से गोलीबारी शुरू हो गई।

    मुठभेड़ थमने के बाद घटनास्थल से एक नक्सली का शव और हथियार बरामद किया गया। अधिकारियों ने बताया कि मारा गया नक्सली मुचाकी कैलाश था, जो माओवादियों की प्लाटून नंबर 31 में सेक्शन कमांडर के पद पर सक्रिय था। उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था।

    पुलिस के मुताबिक कैलाश कई गंभीर घटनाओं में शामिल रहा था, जिनमें हत्या, आईईडी लगाने और सुरक्षाबलों पर हमले शामिल हैं।

    बस्तर रेंज के आईजी ने कहा कि माओवादी कैडरों के लिए आत्मसमर्पण और पुनर्वास का अवसर अब अंतिम चरण में है। उन्होंने अपील की कि नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें और शांतिपूर्ण जीवन अपनाएं।

    पुलिस के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अब तक छत्तीसगढ़ में अलग-अलग मुठभेड़ों में 27 माओवादी मारे जा चुके हैं। वहीं पिछले वर्ष राज्य में कुल 285 माओवादी सुरक्षाबलों की कार्रवाई में मारे गए थे।

  • अशोक खरात मामले में कांग्रेस नेता ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

    अशोक खरात मामले में कांग्रेस नेता ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप


    मुंबई।
     कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने अशोक खरात मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर इस मामले का खुलासा हुआ तो सरकार पर बड़ा असर पड़ सकता है। मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने दावा किया कि स्वयंभू बाबा अशोक खरात (Swayambhu Baba Ashok Kharat) को बड़े लोगों को बचाने के लिए बलि का बकरा बनाया जा सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि सबूतों को नष्ट करने की कोशिश हो सकती है और खरात को नुकसान पहुंचने का खतरा भी है, जिससे ‘एपस्टीन जैसा मामला’ सामने आ सकता है।

    39 विधायकों के संपर्क का दावा
    वडेट्टीवार ने कहाकि खरात को कानून के तहत कड़ी सजा मिलनी चाहिए, साथ ही उन लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने कथित तौर पर उसकी मदद की। उन्होंने मंत्री दीपक केसरकर के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें 39 विधायकों के खरात से संपर्क में होने की बात कही गई थी। उन्होंने मांग की कि इन सभी विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं और केसरकर से जुड़े नाम सार्वजनिक करने को कहा। वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश हो रही है और इसमें शामिल सभी लोगों, चाहे वे विधायक हों या मंत्री, की गहन जांच होनी चाहिए।

    पीएम मोदी पर भी निशाना

    इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश की समस्याओं की अनदेखी कर चुनावी राजनीति पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के बीच आवश्यक वस्तुओं, जैसे एलपीजी सिलेंडर, के लिए लंबी कतारों का जिक्र करते हुए सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए।

    बढ़ गई पुलिस हिरासत
    इस बीच महाराष्ट्र में नासिक की एक अदालत ने बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार स्वयंभू बाबा अशोक खरात की पुलिस हिरासत रविवार को एक अप्रैल तक बढ़ा दी। खरात को 18 मार्च को उस वक्त गिरफ्तार किया गया था, जब एक महिला ने उनपर तीन साल से अधिक समय तक बार-बार बलात्कार करने का आरोप लगाया। खरात नासिक जिले के मिरगांव में एक मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख हैं और वर्षों से उनसे महाराष्ट्र के कई प्रमुख राजनेता मिलते रहे हैं। शहर के सरकारवाड़ा पुलिस थाने में अब तक उनके खिलाफ 10 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिनमें से आठ कथित यौन उत्पीड़न या शोषण और दो धोखाधड़ी से संबंधित हैं।

    100 से अधिक शिकायतें
    पुलिस ने शनिवार को बताया था कि खरात के खिलाफ जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को पिछले कुछ दिनों में फोन पर 100 से अधिक शिकायतें मिली हैं, जिनमें से अधिकतर महिलाओं की हैं। खरात को पिछली पुलिस हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद रविवार को अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान, लोक अभियोजक शैलेंद्र बागडे ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी सहयोग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि आरोपी की संपत्तियों की जांच अभी बाकी है।

    पानी की जांच अभी बाकी
    बागडे ने कहाकि कई महिलाएं अब भी शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे आ रही हैं और उस तथाकथित ‘पानी या तरल पदार्थ’ की जांच अभी बाकी है, जिसे खरात यौन शोषण से पहले पीड़ितों को बहलाने-फुसलाने के लिए देते थे। उन्होंने कहाकि आरोपी के मोबाइल फोन डेटा की जांच की जा चुकी है और ‘क्लोन रिपोर्ट’ प्राप्त हो गई है।

    राजनीतिक संपर्कों के इस्तेमाल की जांच
    अभियोजक ने अदालत को बताया कि इस बात की जांच की जाएगी कि क्या खरात ने अपने संपर्कों-विशेष रूप से राजनीतिक नेताओं-के नाम फर्जी पहचान के साथ फोन में सेव किए थे और कई डिजिटल सबूतों की अभी जांच की जानी है। सरकारी वकील ने कहा कि विस्तृत पड़ताल के लिए तीन और दिन की हिरासत की जरूरत है। हालांकि, बचाव पक्ष के वकील सचिन भाटे ने कहा कि एसआईटी वही दलीलें दे रही है जो पिछली सुनवाई के दौरान पुलिस हिरासत के लिए दी गई थीं। उन्होंने दावा किया कि जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस हिरासत बढ़ाने का कोई कारण नहीं है।

    दूसरी ओर, एक पीड़ित का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील एम वाई काले ने खरात की पुलिस हिरासत बढ़ाने की अभियोजक की मांग का समर्थन किया। दलीलें सुनने के बाद, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एम वी भराडे ने खरात की पुलिस हिरासत एक अप्रैल तक बढ़ा दी।

  • LPG संकट के बीच कनेक्शन सरेंडर करने के लिए सरकार ने लॉन्च किया MyPNG-D पोर्टल

    LPG संकट के बीच कनेक्शन सरेंडर करने के लिए सरकार ने लॉन्च किया MyPNG-D पोर्टल


    नई दिल्ली।  देश में जारी एलपीजी किल्लत के बीच भारत सरकार ने एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म पेश कर दिया है जिसकी मदद से देश में सप्लाई संकट को मैनेज करने की कोशिश की जा रही है। 
    एलपीजी (LPG) को लेकर बनी स्थिति और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने के बीच सरकार ने MyPNG-D पोर्टल लॉन्च किया है। यह कदम उपभोक्ताओं को LPG से PNG में आसान ट्रांजिशन के लिए उठाया गया है।

    भारत में इस समय एलपीजी की ऊंची मांग और सीमित उपलब्धता के बीच संतुलन बिठाने के लिए केंद्र सरकार ने आदेश भी जारी किया कि जिन घरों के पास पीएनपी पाइपलाइन है उन घरों को तीन महीने के भीतर पीएनपी पर शिफ्ट होना होगा वर्ना उनकी एलपीजी सिलेंडर सप्लाई रोक दी जाएगी। इस आदेश की वजह से देश भर में कई घरों को पीएनजी पाइपलाइन कनेक्शन लेना होगा और अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा।

    इसी काम के लिए हाल ही में सरकार की तरफ से MyPNG-D पोर्टल लॉन्च किया गया है जो एलपीजी सिलेंडर और कनेक्शन सरेंडर करने के लिए उपयुक्त है। इसकी मदद से कस्टमर्स गैस एजेंसी के दफ्तर जाए बिना अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर सकेंगे।

    अब चूंकि पीएनजी और एलपीजी कनेक्शन एक साथ नहीं चल सकते तो पीएनजी कनेक्शन मिलते ही ग्राहकों को एलपीजी कनेक्शन लौटाना होगा। सरकार ने जो नया पोर्टल लॉन्च किया है वो एलपीजी यूजर्स के लिए बेहद आसानी से कनेक्शन सरेंडर करने की प्रक्रिया को को पूरा कर सकता है। mypngd.in के यूआरएल से इस पोर्टल तक पहुंचा जा सकता है। इस पोर्टल के जरिए कस्टमर्स बिना डीलर के पास जाए,अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या एलपीजी आईडी के जरिए सरेंडर प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं।

    आपके समय को बचाने के लिए और काम आसान बनाने के लिए ये पोर्टल लॉन्च किया गया है जिसपर आप अपने फोन नंबर या एलपीजी कनेक्शन की एलपीजी आईडी के जरिए अकाउंट बनाकर लॉगिन कर सकते हैं। इस पोर्टल की मदद से आप अपने एलपीजी कनेक्शन का स्टेटस भी जान सकते हैं। बताया जा रहा है कि इस पर Switch To PNG Connection पर क्लिक करने के बाद आपको इस ऑप्शन को चुनना होगा। इसके बाद अपने पुराने कनेक्शन के सरेंडर करने की प्रकिया पूरी करने के लिए इसी पोर्टल पर मौजूद डिजिटल फॉर्म भरना होगा। कहा जा रहा है कि इसके बाद गैस कंपनी आपसे कॉन्टेक्ट करेगी और सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपसे सिलेंडर कलेक्ट कर लिया जाएगा। 

  • लोकसभा ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक को दी मंजूरी, दिवालियापन प्रक्रिया में तेज़ी

    लोकसभा ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक को दी मंजूरी, दिवालियापन प्रक्रिया में तेज़ी


    नई दिल्ली। लोकसभा ने सोमवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। यह कदम दिवालियापन प्रक्रिया में तेजी से लाने और कंपनियों के दिवालियापन मामलों के शीघ्र निपटान के उद्देश्य से उठाया गया है।

    विधि के अनुसार, किसी कंपनी के डिफॉल्ट साबित होने के बाद दिवालियापन के आवेदन को 14 दिनों के भीतर स्वीकार करने की अनिवार्य समय सीमा तय की गई है। इससे जुड़े मामलों में देरी कम होगी और समाधान प्रक्रिया तेज होगी।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि विधेयक में 12 संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं ताकि दिवालियापन समाधान तंत्र और मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि आईबीसी (IBC) प्रक्रिया में देरी का मुख्य कारण व्यापक दिवालियापन है, और इस संशोधन में दंड का प्रावधान भी शामिल है ताकि प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोका जा सके।

    विधि ने सदन में स्पष्ट किया कि दिवालियापन संहिता का उद्देश्य कभी भी केवल ऋण वसूली तंत्र के रूप में काम करना नहीं था। उनका कहना था कि IBC ने बैंकिंग क्षेत्र के स्वास्थ्य में सुधार किया है और कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बेहतर बनाया है।

    मंत्री ने यह भी कहा कि दिवालियापन प्रक्रिया से बाहर आने वाली कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रहा है, और यह ढांचा संकटग्रस्त हितधारकों का समाधान करने और समझौतों फर्मों को बचाने के लिए है, न कि सिर्फ बकाया राशि वसूलने के लिए। निर्मला वादे ने जोर देते हुए कहा, “IBC का उद्देश्य कंपनियों के उद्यम मूल्य को संरक्षित करना और वित्तीय संकट का समाधान करना है, न कि ऋण वसूली का साधन।”
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  • कैश नहीं कूपन! M. K. Stalin का बड़ा ऐलान, महिलाओं को ₹8000 तक की खरीदारी की सुविधा

    कैश नहीं कूपन! M. K. Stalin का बड़ा ऐलान, महिलाओं को ₹8000 तक की खरीदारी की सुविधा


    नई दिल्ली। तमिलनाडु में चुनावी सरगर्मी के बीच सत्ताधारी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने महिलाओं को साधने के लिए बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने अपने घोषणापत्र में महिलाओं को ₹8,000 के कूपन देने की योजना पेश की है। इस घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और इसे महिला वोटरों को आकर्षित करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है।

    सरकार ने साफ किया है कि इस योजना के तहत महिलाओं को कैश राशि नहीं दी जाएगी, बल्कि कूपन दिए जाएंगे। इन कूपन का इस्तेमाल महिलाएं अपनी ज़रूरत के घरेलू सामान खरीदने में कर सकेंगी। इसमें वाशिंग मशीन, फ्रिज, टीवी, मिक्सी जैसे रोजमर्रा के उपयोगी उपकरण शामिल हो सकते हैं। सरकार का तर्क है कि इससे महिलाओं को अपनी ज़रूरत और पसंद के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलेगी, साथ ही पैसे का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।

    मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इस फैसले के पीछे की सोच स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर सीधे कैश दिया जाता है, तो वह रोजमर्रा के खर्चों में खत्म हो सकता है। लेकिन कूपन सिस्टम से महिलाएं घर के लिए टिकाऊ और उपयोगी चीजें खरीद सकेंगी। इस तरह यह योजना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि घरेलू जीवन स्तर सुधारने की दिशा में भी एक प्रयास है।

    राज्य में 23 अप्रैल को होने वाले चुनाव से पहले इस घोषणा को एक चुनावी कदम माना जा रहा है। सभी राजनीतिक दल जहां अपने-अपने वादों के माध्यम से लोकसभा को लुभाने में लगे हैं, वहीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का यह फैसला जरूरी पर महिला लोकसभा पर केंद्रित है। राजनीतिक विश्लेषकों का रुझान है कि यह योजना चुनावी समीकरण बदल सकती है और इसका असर वोटिंग नतीजों पर भी देखने को मिल सकता है।

    पार्टी की वरिष्ठ नेता कनिमोझी करुणानिधि ने बताया कि इस घोषणापत्र को तैयार करने से पहले राज्यभर में लोगों से सुझाव लिए गए थे। उनका कहना है कि यह योजना जनता की संस्थाओं और अनुभवों पर आधारित है, न कि केवल राजनीतिक वादों पर। इस पहल से महिलाओं को घरेलू निकायों में अधिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे महिलाओं की खरीदारी क्षमता जितनी और वे अपने परिवार की संपत्तियों को बेहतर तरीके से पूरा कर पाएंगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह योजना चुनावी मैदान में कितना असर पड़ेगा।

  • बिहार में सियासी भूचाल: Nitish Kumar ने MLC पद से दिया इस्तीफा, नए CM पर सस्पेंस

    बिहार में सियासी भूचाल: Nitish Kumar ने MLC पद से दिया इस्तीफा, नए CM पर सस्पेंस


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद यानी एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया। सोमवार की सुबह उन्होंने निर्वाची विधान परिषद के उपाध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह को निर्वासित कर दिया, जिसके बाद विपक्ष की गैलरियों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। असल में, हाल ही में, उन्हें 14 दिनों के भीतर संवैधानिक संविधान के तहत चुने जाने के लिए कहा गया था। ऐसे में उनके इस कदम को प्रभावी तो माना ही जा रहा है, लेकिन इसके पीछे बड़े राजनीतिक बदलावों के संकेत भी नजर आ रहे हैं।

    इस बंदी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री भी क्या छोड़ेंगे। बहुमत के अनुसार, मुख्यमंत्री को विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य होना जरूरी है। ऐसे में समाजवादी समाजवादी बनने के बाद उनका सीएम पद बनना मुश्किल हो जाता है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, वह 30 अप्रैल तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो बिहार में एक बार फिर से सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

    इधर, इस घटना के बीच राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है, क्योंकि नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कोई स्पष्टता सामने नहीं आई है। कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन अभी तक कोई भी आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। पार्टी और सहयोगी शास्त्र के बीच मठ जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा रिवर्सफर देखने को मिल सकता है।

    इस बीच एक और बड़ी घटना सामने आई है। बांकीपुर सीट से विधायक रहे नितिन नबीन ने भी अपना पद छोड़ दिया है, क्योंकि वे भी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। उनकी बर्खास्तगी के बाद यह सीट खाली हो गई और यहां नए अभ्यर्थियों की चर्चा तेजी से हुई। इस सीट के लिए संजय मयूख का नाम सबसे पहले बताया जा रहा है, हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    राजनीतिक सिद्धांतों का मानना ​​है कि नीतीश कुमार का यह कदम सिर्फ संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक बड़े राजनीतिक बदलाव की भी भूमिका हो सकती है। बिहार में गठबंधन की राजनीति और आगामी गठबंधन को देखते हुए इस फैसले से कई नए समीकरण पैदा हो सकते हैं। देखें, पूरे राज्य की नजर इस पर टिकी है कि अगले मुख्यमंत्री की बात कौन होगी और सत्ता की कमान उनके हाथों में होगी।