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  • भारत-उज्बेकिस्तान के बीच यूरेनियम को लेकर बड़ी डील, UPI- वीजा फ्री एंट्री समेत हुए 16 अहम समझौते

    भारत-उज्बेकिस्तान के बीच यूरेनियम को लेकर बड़ी डील, UPI- वीजा फ्री एंट्री समेत हुए 16 अहम समझौते


    ताशकंद।
    भारत (India) और उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) ने रविवार को असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हुए लंबे समय के लिए यूरेनियम आपूर्ति (Uranium supply) की व्यवस्था बनाने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव (President Shavkat Mirziyoyev) के बीच रविवार को हुई वार्ता में यह अहम फैसला हुआ। दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने की घोषणा भी की। साथ ही, वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को पांच अरब डॉलर सालाना तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया।


    2030 तक 5 अरब डॉलर करना है व्यापार

    मोदी और मिर्जियोयेव की वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में यूरेनियम आपूर्ति की प्रस्तावित मात्रा और समयसीमा का खुलासा नहीं किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार एक अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। अब इसे 2030 तक पांच अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक साझेदारी की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर पर ले जाना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।


    विदेश मंत्रियों की समन्वय परिषद बनेगी

    मोदी ने कहा कि द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं को दिशा देने के लिए विदेश मंत्रियों के स्तर पर समन्वय परिषद स्थापित की जाएगी। संयुक्त आयोग का स्तर भी सचिवों से बढ़ाकर मंत्रिस्तरीय किया जाएगा। दोनों देश कारोबारी नेताओं की भागीदारी वाला संयुक्त व्यापार सम्मेलन आयोजित करेंगे। दोनों देशों ने आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर प्रतिबद्धता जताई। मोदी ने कहा कि ये चुनौतियां पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।


    बौद्ध स्थलों के संरक्षण पर सहमति

    भारत और उज्बेकिस्तान ने प्राचीन बौद्ध स्थलों फयाज तेपा और कारा तेपा के संरक्षण एवं पुनरुद्धार के लिए आशय पत्र पर सहमति जताई। दोनों स्थल सिल्क रोड के जरिए मध्य एशिया में बौद्ध धर्म के प्रसार के महत्वपूर्ण प्रमाण माने जाते हैं।


    52 योग साधकों का विशेष सत्र

    मोदी ने ताशकंद में 52 योग साधकों की भागीदारी वाला विशेष योग सत्र भी देखा। उन्होंने कहा, ‘उज्बेकिस्तान योग से प्यार करता है।’ दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचा, महत्वपूर्ण खनिज, खनन, रक्षा एवं सुरक्षा, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, यूपीआई और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। रक्षा उद्योगों को सैन्य उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन की दिशा में काम करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। व्यापार विस्तार पर जोर दिया जाएगा।


    भारतीयों के लिए 30 दिन तक वीजा फ्री एंट्री

    प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों के लोगों के बीच आवाजाही आसान करने की दिशा में बड़ा फैसला हुआ। उज्बेकिस्तान ने भारतीय नागरिकों के लिए 30 दिन की वीजा-मुक्त यात्रा व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है। राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच जन-जन के संपर्क, पर्यटन और कारोबारी आदान-प्रदान को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।


    उज्बेकिस्तान में चलेगा यूपीआई

    डिजिटल सहयोग के तहत एनपीसीआई और उज्बेकिस्तान के नेशनल इंटरबैंक प्रोसेसिंग सेंटर के बीच वाणिज्यिक समझौता हुआ। इसके लागू होने के बाद भारतीय यात्री यूपीआई ऐप के जरिए उज्बेकिस्तान में कोड स्कैन कर दुकानों पर भुगतान कर सकेंगे।

    प्रधानमंत्री मोदी उज्बेकिस्तान की यात्रा के बाद रविवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए किर्गिस्तान पहुंचे। किर्गिस्तान के मंत्रिपरिषद के अध्यक्ष अदेलबेक कासिमालियेव ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक किर्गिज नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई। होटल पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष से हुआ। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने ‘एक्स’ पर कहा कि सम्मेलन में 10 सदस्य देश, 15 साझेदार देश और दो पर्यवेक्षक देश क्षेत्रीय एवं सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एकत्र होंगे।

  • केरल के इस्लामिक स्कॉलर का विवादित बयान, ‘महिलाओं के मंच पर आने से मचेगी तबाही, घरों में रहें’

    केरल के इस्लामिक स्कॉलर का विवादित बयान, ‘महिलाओं के मंच पर आने से मचेगी तबाही, घरों में रहें’


    नई दिल्ली। केरल में महिलाओं के सार्वजनिक मंचों पर पुरुषों के साथ मौजूद रहने को लेकर जारी विवाद अब और बढ़ गया है। इस बीच इस्लामिक स्कॉलर कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने महिलाओं को घरों तक सीमित रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से ‘बड़ी तबाही’ हो सकती है और इसी वजह से इस्लाम में महिलाओं के लिए पर्दे का प्रावधान किया गया है।

    कंथापुरम ने रविवार को कोच्चि में आयोजित एक इस्लामिक सम्मेलन में यह बयान दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब समस्थ केरल जमीयतुल उलेमा के कंथापुरम गुट के एक सर्कुलर को लेकर पहले ही विवाद चल रहा है।

    महिलाओं के पुरुषों के साथ मंच साझा करने पर रोक
    समस्थ केरल जमीयतुल उलेमा के कंथापुरम गुट ने पिछले सप्ताह धार्मिक समारोहों और कार्यक्रमों को निर्धारित सीमाओं के भीतर आयोजित करने की बात कही थी। संगठन के अध्यक्ष ई. सुलेमान मुसलियार और महासचिव कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार की ओर से जारी निर्देश में कहा गया था कि महिलाएं पुरुषों के साथ मंच साझा न करें और सार्वजनिक स्थानों पर पुरुषों के साथ नजर न आएं। इस निर्देश के बाद विवाद शुरू हो गया था। कई महिला राजनीतिक नेताओं ने भी इसका विरोध किया था।

    ‘महिलाओं को घरों तक सीमित रहना चाहिए’
    रविवार को सम्मेलन में कंथापुरम ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि महिलाओं के सार्वजनिक मंचों पर आने से बड़ी तबाही हो सकती है। उन्होंने कहा कि इसी को ध्यान में रखते हुए इस्लाम में महिलाओं के लिए पर्दे का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा, ‘पवित्र कुरान में कहा गया है कि महिलाओं को अपने घरों तक सीमित रहना चाहिए और सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आना चाहिए।’ कंथापुरम ने दावा किया कि इस तरह की शिक्षा पिछले 100 वर्षों से धार्मिक विद्वानों, विशेष रूप से समस्थ के नेताओं की ओर से दी जाती रही है।

    ‘विरोध के बावजूद बोलते रहेंगे’
    कंथापुरम ने कहा कि धार्मिक मामलों का अध्ययन करने वाले विद्वानों की इस विषय पर अपनी बात रखने की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विरोध या सवाल उठाए जाने के बावजूद वे अपने विचार व्यक्त करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि अगर किसी अन्य संगठन या समस्थ के नेता उनके रुख का विरोध करते हैं, तब भी वे अपनी बात कहेंगे। कंथापुरम ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘हम इसे कहेंगे और कहते रहेंगे। कोई हमें रोक नहीं सकता।’ उनके इस बयान के बाद महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी और धार्मिक संगठनों के निर्देशों को लेकर केरल में बहस और तेज होने की संभावना है।

  • अंकित बालियान हत्याकांड के दो शूटर एनकाउंटर में ढेर, शामली में पुलिस से मुठभेड़

    अंकित बालियान हत्याकांड के दो शूटर एनकाउंटर में ढेर, शामली में पुलिस से मुठभेड़


    लखनऊ। हरियाणवी सिंगर और यूट्यूबर अंकित बालियान हत्याकांड में उत्तर प्रदेश पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। शामली में पुलिस और एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में हत्याकांड में शामिल बताए जा रहे दो कथित शूटर मोहित और सुमित मारे गए। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था और पुलिस के मुताबिक वे गोगी गैंग से जुड़े हुए थे।

    पुलिस के मुताबिक, अंकित बालियान की हत्या को अंजाम देने के लिए कुल चार शूटर शामली पहुंचे थे। इनमें से दो का एनकाउंटर हो चुका है। जांच में दो अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है, जो रेकी और दूसरी मदद में शामिल बताए जा रहे हैं। इस तरह अब तक हत्याकांड से जुड़े छह लोगों की भूमिका सामने आई है।

    CCTV से मिली शूटरों की पहचान

    वारदात के बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके आधार पर चारों कथित शूटरों की पहचान की गई। पुलिस के मुताबिक, गोली चलाने वाले आरोपी हरियाणा के हिसार और रोहतक के रहने वाले हैं।

    जांच में सामने आया कि इनमें से एक आरोपी पहले भी हत्या के मामले में जेल जा चुका था, जबकि अन्य तीन के खिलाफ छोटे-मोटे आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी मिली थी।

    आरोपियों की पहचान सामने आने के बाद हरियाणा पुलिस ने उनके घरों और रिश्तेदारों के ठिकानों पर दबिश दी। परिवार और करीबियों से पूछताछ शुरू होने के बाद आरोपियों ने मोबाइल फोन बंद कर दिए और फरार हो गए। इसके बाद यूपी एसटीएफ ने उनकी तलाश तेज कर दी।

    पुलिस ने अंकित बालियान की कॉल डिटेल और व्हाट्सऐप मैसेजिंग हिस्ट्री भी खंगाली। इसके जरिए हत्याकांड में मददगारों और साजिश में शामिल लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही थी।

    सात जिलों की पुलिस की 8 टीमें जांच में जुटीं

    हत्याकांड के खुलासे के लिए मेरठ जोन के सात जिलों की पुलिस की आठ टीमें लगाई गई थीं। हरियाणा और दिल्ली में लगातार दबिश दी जा रही थी। इससे पहले मेरठ जोन के ADG भानु भास्कर ने शामली पहुंचकर अधिकारियों के साथ करीब दो घंटे बैठक की थी। उन्होंने कहा था कि पुलिस आरोपियों और वारदात में इस्तेमाल हथियारों के बेहद करीब पहुंच चुकी है।

    होटल में रुककर की थी रेकी

    पुलिस के मुताबिक, 20 अगस्त को अंकित बालियान की रेकी की गई थी। दो शूटर शामली पहुंचे और अंकित की गतिविधियों पर नजर रखी। दोनों सूर्या होटल में रुके थे और होटल में आधार कार्ड समेत जरूरी दस्तावेज जमा किए थे।

    पुलिस ने होटल की सीसीटीवी फुटेज खंगाली, जिससे जांच में अहम सुराग मिला। पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद दो शूटर बाइक से करनाल की तरफ भागे, जबकि मोहित और सुमित बागपत की ओर फरार हुए।

    कैराना रोड पर मुठभेड़, दोनों की मौत

    पुलिस के मुताबिक, मोहित और सुमित को ट्रैक करने के बाद कैराना रोड स्थित इंडियन गैस गोदाम के पास घेराबंदी की गई। दोनों की पुलिस से मुठभेड़ हुई। जवाबी फायरिंग में दोनों को गोली लगी। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    मुठभेड़ में SWAT टीम के हेड कांस्टेबल हरविंदर और प्रदीप भी घायल हुए हैं। पुलिस ने मौके से दो पिस्टल, जिंदा और खोखा कारतूस, स्प्लेंडर बाइक, बैग, मोबाइल फोन और 5 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस अब हत्याकांड में शामिल बताए जा रहे अन्य आरोपियों और कथित मददगारों की तलाश में जुटी है।

  • क्लर्क से महान साहित्यकार बनने तक का सफर: कर्ण के दर्द को शब्द देकर शिवाजी सावंत ने रचा मृत्युंजय और कहलाए मृत्युंजयकार

    क्लर्क से महान साहित्यकार बनने तक का सफर: कर्ण के दर्द को शब्द देकर शिवाजी सावंत ने रचा मृत्युंजय और कहलाए मृत्युंजयकार


    नई दिल्ली। शिवाजी गोविंदराव सावंत का नाम मराठी साहित्य में उन रचनाकारों के बीच लिया जाता है जिन्होंने इतिहास और पौराणिक पात्रों को केवल कथाओं तक सीमित नहीं रखा बल्कि उनके भीतर छिपे संघर्ष संवेदनाओं और मानवीय पक्ष को अपनी लेखनी से जीवंत कर दिया। 31 अगस्त 1940 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के आजरा गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे शिवाजी सावंत का शुरुआती जीवन आर्थिक कठिनाइयों से भरा रहा। बचपन में मां से सुनी कथा कीर्तन और पौराणिक कहानियों ने उनके भीतर साहित्य के प्रति गहरी रुचि पैदा की। युवावस्था में वे कबड्डी के बेहतरीन खिलाड़ी रहे और उन्होंने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत अदालत में एक साधारण क्लर्क के रूप में की।

    साहित्य के प्रति बढ़ती रुचि और पुस्तकालयों के करीब रहने की इच्छा उन्हें कोल्हापुर की राजाराम प्रशाला तक ले गई जहां उन्होंने 1962 से 1974 तक शिक्षक के रूप में काम किया। इसके बाद वे पुणे पहुंचे और महाराष्ट्र सरकार के शिक्षा विभाग की पत्रिका लोकशिक्षण से जुड़े। पहले उन्होंने सह संपादक और बाद में संपादक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। लेकिन उनकी असली पहचान उस रचना से बनी जिसने उन्हें मराठी साहित्य में अमर कर दिया।

    उनका उपन्यास मृत्युंजय 1967 में प्रकाशित हुआ और देखते ही देखते साहित्य जगत में चर्चा का विषय बन गया। महाभारत के महान लेकिन उपेक्षित योद्धा कर्ण के जीवन पर आधारित इस उपन्यास को पूरा करने में शिवाजी सावंत ने सात वर्षों तक अथक मेहनत की। कर्ण के व्यक्तित्व को समझने की उनकी जिज्ञासा उस समय और गहरी हुई जब एफवाईबीए की पढ़ाई के दौरान उन्होंने कवि केदारनाथ मिश्र प्रभात का हिंदी खंडकाव्य कर्ण पढ़ा। इसके बाद उन्होंने कर्ण के जीवन और कुरुक्षेत्र से जुड़े संदर्भों को गहराई से खंगालना शुरू किया।

    उनकी शोध और लेखन के प्रति समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब उन्होंने कुरुक्षेत्र की यात्रा करने का फैसला किया तब उनकी जेब में केवल 50 रुपए थे। इसके बावजूद उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को आड़े नहीं आने दिया और कुरुक्षेत्र पहुंचकर वहां की भौगोलिक परिस्थितियों को करीब से समझा। उस समय कोल्हापुर की एक पुलिस चॉल में बड़े भाई विश्वासराव के साथ रहते हुए वे इस रचना को लिख रहे थे और अपने लेखन को लंबे समय तक गुप्त रखा।

    मृत्युंजय की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनोखी शैली रही। सावंत ने कहानी को केवल कर्ण की नजर से नहीं देखा बल्कि कर्ण के साथ कुंती दुर्योधन वृषाली शोण और श्रीकृष्ण के दृष्टिकोण को भी शामिल किया। अलग अलग पात्रों के स्वगत कथनों के जरिए उन्होंने कर्ण के व्यक्तित्व के कई आयाम सामने रखे। इस रचना में भाग्य और स्वतंत्र इच्छा के बीच संघर्ष के साथ कर्ण की पीड़ा उसकी महत्वाकांक्षा उसकी वफादारी और उसके भीतर चलने वाला द्वंद्व बेहद प्रभावशाली तरीके से सामने आता है। इसी अद्भुत कृति ने शिवाजी सावंत को मृत्युंजयकार की उपाधि दिलाई।

    हालांकि उनकी साहित्यिक यात्रा केवल पौराणिक कथाओं तक सीमित नहीं रही। वर्ष 1980 में प्रकाशित छावा में उन्होंने छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन और संघर्ष को केंद्र में रखा। इस रचना ने मराठा इतिहास के एक वीर योद्धा के मानवीय पक्ष को पाठकों के सामने रखा। बाद में इसी कथा पर आधारित हिंदी फिल्म भी बनी जिसने व्यापक व्यावसायिक सफलता हासिल की। वर्ष 2000 में प्रकाशित युगंधर में उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को एक अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया और उनके व्यक्तित्व में रणनीतिक सोच के साथ मानवीय संवेदनाओं को भी उभारा।

    मराठी साहित्य में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। वर्ष 1994 में उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ के प्रतिष्ठित मूर्तिदेवी पुरस्कार से सम्मानित किया गया और वे यह सम्मान पाने वाले पहले मराठी लेखक बने। उनकी रचनाओं का कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ। परिवार की ओर से पत्नी मृणालिनी पुत्र अमिताभ और पुत्री कादंबिनी ने भी उनकी साहित्यिक यात्रा को मजबूती दी।

    18 सितंबर 2002 को गोवा में 76वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष पद के लिए प्रचार के दौरान हृदय गति रुकने से शिवाजी सावंत का आकस्मिक निधन हो गया। लेकिन उनकी रचनाएं आज भी पाठकों के बीच जीवित हैं। मृत्युंजय ने उन्हें केवल एक महान लेखक नहीं बनाया बल्कि कर्ण की पीड़ा और संघर्ष को पीढ़ियों तक पहुंचाने वाला वह साहित्यकार बना दिया जिसे दुनिया मृत्युंजयकार के नाम से याद करती है।

  • पुरानी गलियों से स्मार्ट रोड तक बदला लखनऊ! सीएम योगी बोले- विरासत और आधुनिकता का अनोखा संगम

    पुरानी गलियों से स्मार्ट रोड तक बदला लखनऊ! सीएम योगी बोले- विरासत और आधुनिकता का अनोखा संगम


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को विकास की नई सौगात देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने रविवार को लखनऊ छावनी को मॉडल छावनी के रूप में विकसित करने की दिशा में 101 करोड़ रुपये की 12 विकास परियोजनाओं का भूमिपूजन और शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सुरक्षा सुशासन और विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज प्रदेश देश के ग्रोथ इंजन के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है और लखनऊ इसका प्रमुख उदाहरण है।

    मुख्यमंत्री ने लखनऊ के बदलते स्वरूप का जिक्र करते हुए कहा कि करीब दो दशक पहले रेलवे स्टेशन पर मुस्कुराइए आप लखनऊ में हैं का संदेश दिखाई देता था लेकिन शहर की जाम से भरी सड़कों संकरी गलियों और अव्यवस्थित हालात के कारण लोगों के लिए मुस्कुराना मुश्किल होता था। आज वही लखनऊ अपनी ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक और स्मार्ट शहर के रूप में आगे बढ़ रहा है। शहर में पुरानी गलियों के साथ स्मार्ट रोड और सीएम ग्रिड की आधुनिक सड़कें हैं तो दूसरी ओर किसान पथ जैसे बड़े आउटर रिंग रोड भी यातायात को नई दिशा दे रहे हैं।

    सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ की खासियत उसकी विरासत और आधुनिकता का अनोखा मेल है। एक ओर ऊदा देवी पासी और महाराजा बिजली पासी जैसी महान विभूतियों का इतिहास शहर की पहचान से जुड़ा है तो दूसरी ओर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइलों के निर्माण का केंद्र भी लखनऊ बन रहा है। उन्होंने कहा कि चिकनकारी हस्तशिल्प खानपान और सांस्कृतिक विरासत के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध लखनऊ अब आधुनिक बुनियादी ढांचे के कारण भी अपनी अलग पहचान बना रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रयासों से लखनऊ छावनी में भी आधुनिक सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। छावनी परिषद में ठोस कचरा प्रबंधन के लिए एआई आधारित व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके साथ ही छावनी क्षेत्र के स्कूलों में मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग जैसी पहल शुरू की जा रही है। इन प्रयासों का सीधा लाभ सैन्यकर्मियों पूर्व सैनिकों उनके परिवारों और छावनी क्षेत्र में रहने वाले आम नागरिकों को मिलेगा।

    गोमती नदी की सफाई का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी को स्वच्छ बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और भरोसा जताया कि इस वर्ष के अंत तक गोमती को पूरी तरह स्वच्छ बनाने में सफलता मिलेगी। उन्होंने इस अभियान में सेंट्रल कमांड की ओर से मिल रहे सहयोग की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के सामने पहचान का संकट था और प्रदेश अभाव अराजकता तथा उपद्रव की स्थिति से गुजर रहा था लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर एक्सप्रेसवे रेलवे मेट्रो और एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। लखनऊ मेट्रो के दूसरे चरण को केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद इसके काम को भी जल्द गति दी जाएगी। प्रदेश में वर्तमान में 17 घरेलू और पांच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट संचालित हैं। वहीं सैनिक स्कूलों के माध्यम से युवाओं को देश की सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

    सीएम योगी ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा में सैनिक चौबीसों घंटे डटे रहते हैं इसलिए सैनिकों पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छावनी परिषदों में विकास कार्यों के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। लखनऊ छावनी को आदर्श और मॉडल छावनी बनाने के लिए सड़क स्वच्छता शिक्षा कचरा प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाओं को लगातार बेहतर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लखनऊ आज अपनी ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है और बदलते उत्तर प्रदेश की नई तस्वीर पेश कर रहा है।

  • विकसित भारत सिर्फ ऊंची इमारतों का नाम नहीं, हर घर पानी और युवाओं को अवसर मिलना जरूरी: राजनाथ सिंह

    विकसित भारत सिर्फ ऊंची इमारतों का नाम नहीं, हर घर पानी और युवाओं को अवसर मिलना जरूरी: राजनाथ सिंह


    नई दिल्ली। रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है और आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज को पूरी दुनिया गंभीरता से सुनती है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव भारत की बढ़ती वैश्विक हैसियत और मजबूत होते कद का स्पष्ट प्रमाण है। लखनऊ छावनी परिषद में करीब 101 करोड़ रुपये की लागत वाली 12 विकास परियोजनाओं के भूमिपूजन और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि इन परियोजनाओं को केवल निर्माण कार्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि ये लखनऊ छावनी के बेहतर भविष्य के लिए सरकार के 12 संकल्प हैं।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल बड़े प्रोजेक्ट बनाने और आधुनिक इमारतें खड़ी करने से पूरा नहीं होगा। वास्तविक विकास तब माना जाएगा जब प्रत्येक परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले युवाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें और समाज के प्रत्येक वर्ग को सम्मानजनक सुविधाएं हासिल हों। उन्होंने कहा कि विकास की रोशनी केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि हर मोहल्ले हर बस्ती और हर परिवार तक इसका लाभ पहुंचना चाहिए।

    भारत की वैश्विक स्थिति में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि करीब 10 से 12 वर्ष पहले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जब भारत अपनी बात रखता था तो उसे उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता था जितनी भारत की क्षमता और भूमिका को मिलनी चाहिए थी। आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अब जब भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात रखता है तो पूरी दुनिया ध्यान से सुनती है कि भारत क्या कह रहा है। उन्होंने इसे देश की बढ़ती ताकत और वैश्विक प्रभाव का परिणाम बताया।

    उन्होंने कहा कि विकसित भारत का मतलब यह भी है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलें। खेलकूद के क्षेत्र में आगे बढ़ने की सुविधाएं हों और दिव्यांग बच्चों को भी समाज की मुख्यधारा में बराबरी का स्थान मिले। राजनाथ सिंह ने कहा कि समय के साथ शहरों की जरूरतें बदलती हैं इसलिए विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए नियमों में भी बदलाव आवश्यक है।

    इसी दिशा में लखनऊ छावनी क्षेत्र में नए बिल्डिंग बायलॉज लागू किए गए हैं। पहले यहां जी प्लस-2 तक निर्माण की अनुमति थी जिसे बढ़ाकर जी प्लस-3 किया गया है। पार्किंग को शामिल करने पर अब पांच मंजिल तक निर्माण की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य लखनऊ छावनी को उसकी ऐतिहासिक विरासत के साथ आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है ताकि क्षेत्र का विकास तेज गति से हो सके।

    रक्षा मंत्री ने छावनी क्षेत्र में कई बाजारों के नाम बदले जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नामों में बदलाव केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है बल्कि इसके पीछे नई पीढ़ी को देश के इतिहास और महान विभूतियों से जोड़ने की भावना है। रॉयल आर्टिलरी बाजार का नाम एकता बाजार ब्रिटिश कैवलरी बाजार का नाम वीरांगना ऊदा देवी बाजार और ब्रिटिश इन्फैंट्री बाजार का नाम माता दीन वाल्मीकि बाजार किया गया है। एक अन्य बाजार का नाम मंगल पांडे बाजार जबकि कैनेडी मार्केट का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी मार्केट रखा गया है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि इन बदलावों के जरिए स्वतंत्रता संग्राम राष्ट्रसेवा और सामाजिक चेतना से जुड़े महान व्यक्तित्वों की स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने लखनऊ और उत्तर प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि बेहतर जलापूर्ति शिक्षा खेलकूद बाढ़ नियंत्रण और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की भी प्रशंसा की और कहा कि लखनऊ छावनी में सैन्यकर्मियों पूर्व सैनिकों और आम नागरिकों के लिए सुविधाओं का विस्तार करते हुए ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने के साथ आधुनिक विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • NEET-PG 2026 परीक्षा देशभर में संपन्न! 2.65 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा, जयपुर के 2445 उम्मीदवारों को फिर मिलेगा मौका

    NEET-PG 2026 परीक्षा देशभर में संपन्न! 2.65 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा, जयपुर के 2445 उम्मीदवारों को फिर मिलेगा मौका


    नई दिल्ली। देशभर में रविवार को नीट-पीजी 2026 की परीक्षा निर्धारित व्यवस्था के तहत संपन्न हो गई। मेडिकल पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आयोजित इस महत्वपूर्ण परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा के लिए कुल 2 लाख 73 हजार 096 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था जिनमें से 2 लाख 65 हजार 980 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। इनमें करीब 2 लाख 63 हजार 535 अभ्यर्थियों की परीक्षा सफलतापूर्वक पूरी हो गई। परीक्षा का आयोजन देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 339 शहरों में बनाए गए 1111 परीक्षा केंद्रों पर किया गया। हालांकि जयपुर के दो परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्या के कारण 2445 अभ्यर्थियों की परीक्षा पूरी नहीं हो सकी। इन सभी प्रभावित उम्मीदवारों के लिए अब 5 सितंबर 2026 को दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी।

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक नीट-पीजी परीक्षा को निष्पक्ष सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए व्यापक सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था लागू की गई थी। देशभर के परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों पर लगातार रियल टाइम निगरानी रखी गई। परीक्षा संचालन की निगरानी और मूल्यांकन के लिए 2527 संकाय सदस्यों को स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ता के रूप में तैनात किया गया था। इसके साथ ही डीन निदेशक चिकित्सा अधीक्षक और वरिष्ठ प्रोफेसरों सहित 700 से अधिक वरिष्ठ संकाय सदस्यों को फ्लाइंग स्क्वायड में शामिल किया गया था। इस व्यवस्था का उद्देश्य परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी को तत्काल पकड़ना और परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना था।

    राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड के अनुसार जयपुर के आईऑन डिजिटल जोन आईडीजेड सीतापुरा स्थित परीक्षा केंद्र संख्या 41682 और 41683 पर आंतरिक बिजली आपूर्ति से जुड़ी तकनीकी समस्या सामने आई। बिजली व्यवस्था में आई इस परेशानी के चलते इन दोनों केंद्रों पर परीक्षा दे रहे 2445 अभ्यर्थियों की परीक्षा पूरी नहीं हो पाई। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यह समस्या परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीसीएस लिमिटेड की आंतरिक बिजली आपूर्ति व्यवस्था से संबंधित थी। प्रभावित उम्मीदवारों को किसी तरह का नुकसान न हो इसलिए बोर्ड ने उन्हें दोबारा परीक्षा देने का समान अवसर देने का फैसला किया है।

    जयपुर के दोनों प्रभावित केंद्रों के सभी 2445 अभ्यर्थियों के लिए पुनर्परीक्षा 5 सितंबर 2026 शनिवार को दोपहर 3 बजे जयपुर में आयोजित की जाएगी। पुनर्परीक्षा के केंद्र और अन्य आवश्यक दिशा निर्देश संबंधित अभ्यर्थियों को अलग से उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे प्रभावित उम्मीदवारों को अपनी परीक्षा पूरी करने का अवसर मिलेगा और तकनीकी समस्या के कारण उनके मेडिकल करियर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    परीक्षा के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देशभर में 16 क्षेत्रीय कमान केंद्र सक्रिय किए गए थे। सभी परीक्षा केंद्रों को लाइव सीसीटीवी निगरानी से जोड़ा गया था जिसकी निगरानी द्वारका स्थित राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड के मुख्यालय में बनाए गए कमान केंद्र से की गई। रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए बोर्ड और टीसीएस के 190 कर्मचारियों की विशेष टीम भी तैनात रही। मुख्यालय में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और टीसीएस समेत संबंधित संस्थाओं के अधिकारी पूरे दिन परीक्षा की स्थिति पर नजर रखते रहे।

    नकल और दूसरे उम्मीदवार की जगह परीक्षा देने जैसी संभावित गड़बड़ियों को रोकने के लिए अभ्यर्थियों का आधार आधारित प्रमाणीकरण भी किया गया। विभिन्न सरकारी एजेंसियों ने भी परीक्षा के सुरक्षित संचालन में सहयोग दिया। बोर्ड ने कहा कि देशभर के 1111 केंद्रों और 339 शहरों में परीक्षा का सफल आयोजन परीक्षा अधिकारियों चिकित्सा संस्थानों संकाय सदस्यों सुरक्षा एजेंसियों तकनीकी टीमों और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम रहा। कुल मिलाकर नीट-पीजी 2026 की परीक्षा व्यापक सुरक्षा निगरानी और तकनीकी व्यवस्था के बीच संपन्न हुई जबकि जयपुर के प्रभावित 2445 अभ्यर्थियों को अब 5 सितंबर को परीक्षा पूरी करने का अवसर मिलेगा।

  • महुआ और तेंदू पत्ते बेचने से इको-टूरिज्म तक का सफर, मैथिली भुए की कहानी ने जीता पीएम मोदी का ध्यान; 50 महिलाओं को ट्रेनिंग

    महुआ और तेंदू पत्ते बेचने से इको-टूरिज्म तक का सफर, मैथिली भुए की कहानी ने जीता पीएम मोदी का ध्यान; 50 महिलाओं को ट्रेनिंग


    नई दिल्ली। ओडिशा के संबलपुर जिले के देबरीगढ़ की रहने वाली मैथिली भुए की मेहनत और हौसले को अब देशभर में पहचान मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 137वें एपिसोड में मैथिली भुए के काम का जिक्र करते हुए उनकी सराहना की। इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने जंगलों के संरक्षण में योगदान देने और स्थानीय महिलाओं को रोजगार से जोड़ने वाली मैथिली के लिए यह पल बेहद खास रहा। प्रधानमंत्री की ओर से अपने काम की तारीफ किए जाने पर उन्होंने खुशी जाहिर की और इसे उनके जैसे ग्रामीण क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए बड़ी प्रेरणा बताया।

    मैथिली भुए की कहानी आसान नहीं रही है। वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आती हैं और लंबे समय तक जंगल से मिलने वाले उत्पादों पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर रही हैं। तेंदू के पत्ते बांस महुआ कराडी और जलाऊ लकड़ी जैसे वन उत्पादों को इकट्ठा कर उन्हें बेचकर वह अपने परिवार का गुजारा करती थीं। सीमित संसाधनों के बीच जीवन आगे बढ़ रहा था लेकिन 2023 में देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी को एक नई दिशा मिली।

    इको-टूरिज्म ने न केवल मैथिली को रोजगार का नया जरिया दिया बल्कि उन्हें अपने आसपास की दूसरी महिलाओं के लिए भी अवसर पैदा करने की प्रेरणा दी। धीरे धीरे क्षेत्र की महिलाएं इस पहल से जुड़ने लगीं और अब मैथिली करीब 40 से 50 महिलाओं को इको-टूरिज्म तथा हॉस्पिटैलिटी से जुड़े अलग अलग कामों की ट्रेनिंग दे रही हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ महिलाओं को नौकरी दिलाना नहीं बल्कि उन्हें इतना सक्षम बनाना है कि वे अपने दम पर बेहतर आजीविका हासिल कर सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।

    मैथिली के मार्गदर्शन में महिलाएं पर्यटकों के साथ व्यवहार करने उनकी जरूरतों को समझने और उन्हें बेहतर सेवाएं देने की ट्रेनिंग ले रही हैं। देबरीगढ़ में इको-टूरिज्म से जुड़े कई क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। इनमें स्मारिका की दुकानें चाय की दुकानें रेस्तरां नेचर कैंप और होमस्टे जैसे काम शामिल हैं। महिलाओं को उनकी जिम्मेदारी और काम की प्रकृति के अनुसार अलग अलग प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे पर्यटकों को बेहतर अनुभव दे सकें।

    मैथिली का मानना है कि पर्यटन के साथ स्थानीय समुदाय को जोड़ना क्षेत्र के विकास का मजबूत माध्यम बन सकता है। जब स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलता है तो उन्हें बेहतर आय का अवसर मिलता है और साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना भी मजबूत होती है। खास तौर पर महिलाओं के लिए इको-टूरिज्म आत्मनिर्भर बनने का प्रभावी रास्ता साबित हो सकता है।

    मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नाम लिए जाने के बाद मैथिली की कहानी को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रयासों को पहचान मिलना बेहद खुशी की बात है। मैथिली चाहती हैं कि आने वाले समय में और अधिक महिलाएं इको-टूरिज्म से जुड़ें और अपनी आजीविका का मजबूत आधार तैयार करें।

    उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि बदलाव के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। स्थानीय अवसरों की पहचान मेहनत और दूसरों को साथ लेकर आगे बढ़ने की इच्छा किसी भी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकती है। जंगल से मिलने वाले उत्पादों पर निर्भर रहने वाली मैथिली भुए आज उसी प्राकृतिक विरासत को बचाने और उसके जरिए महिलाओं को रोजगार देने की मुहिम का हिस्सा बन चुकी हैं। मन की बात में मिली पहचान उनके इस सफर को नई ऊर्जा देने के साथ देबरीगढ़ के इको-टूरिज्म मॉडल को भी देश के सामने एक प्रेरक उदाहरण के रूप में पेश करती है।

  • उज्बेकिस्तान ने पीएम मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान, भारत के साथ रिश्तों को मिला नया मुकाम; अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी

    उज्बेकिस्तान ने पीएम मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान, भारत के साथ रिश्तों को मिला नया मुकाम; अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी


    नई दिल्ली। भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों ने रविवार को एक नई ऊंचाई हासिल की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताशकंद में ऐलान किया कि दोनों देशों के बीच संबंध अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान ओली दराजली दोस्तलिक से सम्मानित किए जाने के बाद यह घोषणा की गई। इस मौके पर पीएम मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के नेतृत्व और भारत के प्रति उनकी मित्रता की भावना की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं और अब यह साझेदारी नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंध केवल आधुनिक कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं हैं बल्कि दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी दोस्ती और साझा विरासत जुड़ी हुई है। उन्होंने उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर गर्व व्यक्त करते हुए इसे व्यक्तिगत सम्मान के बजाय भारत के 140 करोड़ लोगों का सम्मान बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोस्तलिक का अर्थ दोस्ती है और यही शब्द भारत तथा उज्बेकिस्तान के रिश्तों की वास्तविक भावना को सबसे बेहतर तरीके से व्यक्त करता है।

    पीएम मोदी ने सम्मान को स्वीकार करते हुए उज्बेकिस्तान की जनता सरकार और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों की ऐतिहासिक दोस्ती और साझा विरासत को समर्पित है। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में उनके योगदान के लिए देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा।

    भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी का नया स्तर दोनों देशों के लिए आर्थिक कूटनीतिक सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य एशिया में उज्बेकिस्तान की अहम भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति है और भारत के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ मजबूत संबंध लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के संबंधों को नई श्रेणी मिलना भविष्य में सहयोग के नए रास्ते खोल सकता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर भारत की प्रतिबद्धता भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान के साथ अपनी मित्रता को हमेशा मजबूत बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत अपनी जिम्मेदारियों से कभी पीछे नहीं हटेगा और दोनों देशों की दोस्ती को मजबूती से आगे बढ़ाता रहेगा।

    पीएम मोदी ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकी को ग्लोबल साउथ के व्यापक हितों से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर ग्लोबल साउथ की एकजुट आवाज बनने की दिशा में काम करेंगे। दोनों देशों का प्रयास होगा कि ग्लोबल साउथ के लोगों के कल्याण और पूरी मानवता के बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम किया जाए।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सम्मान अपने साथ जिम्मेदारी लेकर आता है। उज्बेकिस्तान की ऐतिहासिक धरती से उन्होंने दोनों देशों की दोस्ती को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया। भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों का व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलना इसी निरंतर सहयोग का परिणाम है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक जुड़ाव को आधुनिक रणनीतिक जरूरतों से जोड़ते हुए यह साझेदारी आने वाले समय में द्विपक्षीय संबंधों को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

  • खड़गे की रैली से शुरू हुआ विवाद फिर भड़का! शुद्धिकरण यज्ञ पर धामी ने साफ की तस्वीर बोले जाति नहीं धार्मिक नारों का हुआ शुद्धिकरण

    खड़गे की रैली से शुरू हुआ विवाद फिर भड़का! शुद्धिकरण यज्ञ पर धामी ने साफ की तस्वीर बोले जाति नहीं धार्मिक नारों का हुआ शुद्धिकरण


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद शुरू हुआ शुद्धिकरण यज्ञ का विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हमले के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पलटवार करते हुए इस पूरे मामले को अलग नजरिए से सामने रखा है। धामी ने कांग्रेस के उस आरोप को खारिज किया है जिसमें शुद्धिकरण यज्ञ को जातीय भेदभाव से जोड़कर सवाल उठाए गए थे। मुख्यमंत्री का कहना है कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में किसी व्यक्ति या जाति के शुद्धिकरण के लिए यज्ञ नहीं कराया गया बल्कि रैली के दौरान लगाए गए कथित धार्मिक नारों से आहत भावनाओं के बाद हिंदू सामाजिक संगठनों की ओर से यह आयोजन किया गया था।

    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि खड़गे के नाम पर जातीय शुद्धिकरण की बात करना ही गलत है। उनका तर्क है कि उत्तराखंड में बहुत कम लोग मल्लिकार्जुन खड़गे की जाति के बारे में जानते हैं। ऐसे में इस आयोजन को जातीय नजरिए से देखना उचित नहीं है। धामी ने स्पष्ट किया कि शुद्धिकरण किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि उस स्थान का किया गया था जहां कांग्रेस की रैली आयोजित हुई थी। उनके मुताबिक रैली के दौरान एक धर्म विशेष से जुड़े कथित नारे लगाए गए थे जिनसे हिंदू समाज की भावनाएं आहत हुईं और इसी के बाद धार्मिक संगठनों ने यज्ञ का आयोजन किया।

    धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आयोजन में बीजेपी के पदाधिकारी या कार्यकर्ता शामिल नहीं थे। उनके अनुसार हिंदू सामाजिक संगठनों ने अपने स्तर पर रामलीला मैदान में यज्ञ कराया। मुख्यमंत्री की इस सफाई के बाद विवाद खत्म होने के बजाय राजनीतिक रूप से और तेज होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस इस घटना को सामाजिक समानता और जातीय भेदभाव के सवाल से जोड़ रही है जबकि बीजेपी इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताते हुए कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है।

    राहुल गांधी के हमले के बाद मुख्यमंत्री धामी ने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है और उनकी सरकार के सख्त फैसलों से पार्टी असहज है। धामी ने समान नागरिक संहिता धर्मांतरण विरोधी कानून दंगा विरोधी कानून और जिहाद के खिलाफ सख्त कानून जैसे फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार उत्तराखंड में कानून व्यवस्था और सामाजिक हितों को प्राथमिकता दे रही है।

    हल्द्वानी का यह विवाद अब केवल एक यज्ञ या राजनीतिक रैली तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि इसके जरिए कांग्रेस और बीजेपी अपने अपने राजनीतिक मुद्दों को धार दे रहे हैं। कांग्रेस जहां इसे सामाजिक भेदभाव का प्रतीक बता रही है वहीं बीजेपी कथित धार्मिक नारों और आहत भावनाओं का मुद्दा उठा रही है। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही ऐसे विवादों का राजनीतिक असर बढ़ना तय माना जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों दल इस मुद्दे को लेकर एक दूसरे पर और तीखे हमले कर सकते हैं।