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  • एयर इंडिया की बड़ी भूल… आठ घंटे हवा में उड़ा विमान…. U-टर्न लेकर वापस लौटना पड़ा दिल्ली

    एयर इंडिया की बड़ी भूल… आठ घंटे हवा में उड़ा विमान…. U-टर्न लेकर वापस लौटना पड़ा दिल्ली


    नई दिल्ली।
    एयर इंडिया (Air India) की वैंकूवर (Vancouver) जाने वाली फ्लाइट AI185 से एक बड़ी गलती हो गई। इसने उड़ान के लगभग चार घंटे बाद यू-टर्न (U-turn after Four Hours) लिया और दिल्ली वापस लौट आई। यह घटना तब हुई जब विमान को गलती से बोइंग 777-200LR मॉडल का इस्तेमाल किया गया, जबकि एयर इंडिया को कनाडाई हवाई क्षेत्र में केवल बोइंग 777-300ER फ्लीट को ही ऑपरेट करने की मंजूरी है। दिल्ली से दोपहर 11:34 बजे उड़ान भरने के बाद प्लेन पूर्व दिशा में आगे बढ़ा, लेकिन चीनी हवाई क्षेत्र में कुन्मिंग के पास पहुंचने पर एयरलाइन को यह गलती का एहसास हुआ। इस कारण विमान को वापस बुला लिया गया और कुल 7 घंटे 54 मिनट की उड़ान के बाद यह सुरक्षित रूप से दिल्ली में उतर गया।

    यह ऑपरेशनल चूक काफी महंगी साबित हुई क्योंकि बोइंग 777 जैसे बड़े विमान प्रति घंटे 8-9 टन ईंधन जलाते हैं, जिससे लाखों रुपये का नुकसान हुआ। एविएशन नियमों में विभिन्न एयरलाइंस के लिए अलग-अलग एयरक्राफ्ट टाइप की मंजूरी होती है और यहां यह नियमित चेक न होने से समस्या पैदा हुई। गनीमत रही कि यात्रियों और क्रू मेंबर्स को कोई चोट नहीं आई और सभी सुरक्षित उतरे। एयर इंडिया ने इसे ऑपरेशनल इश्यू बताते हुए स्टैंडर्ड प्रोसीजर के अनुसार फैसला लिया।


    यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद

    एयरलाइन ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद जताया है। इसकी ओर से कहा गया, ‘विमान सुरक्षित उतर आया। सभी यात्री और क्रू मेंबर्स उतर गए। हम अपने मेहमानों को हुई परेशानी के लिए खेद व्यक्त करते हैं।’ दिल्ली में ग्राउंड टीम ने तुरंत सहायता मुहैया कराई, जिसमें होटल में ठहरने की व्यवस्था शामिल थी। प्रभावित यात्रियों को अगले दिन सुबह एक रिप्लेसमेंट फ्लाइट से उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया, जिसमें सभी पैसेंजर शामिल थे।

    यह घटना एयर इंडिया की ऑपरेशनल प्लानिंग और एयरक्राफ्ट असाइनमेंट में सख्ती की जरूरत को दर्शाती है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में ऐसे छोटे-छोटे नियमों की अनदेखी से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि यात्रियों का समय और विश्वास भी प्रभावित होता है। एयरलाइन को भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए बेहतर सिस्टम और चेकलिस्ट लागू करने की सलाह दी गई है।

  • बिना UPSC पास किए भी बन पाएंगे IAS अधिकारी, जानिए कैसे होगा ये संभव?

    बिना UPSC पास किए भी बन पाएंगे IAS अधिकारी, जानिए कैसे होगा ये संभव?

    नई दिल्ली देश में बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं जो देश सेवा के लिए UPSC का रास्ता चुनते हैं और दिन रात एक करने पढ़ने के बाद IAS नियुक्त होते हैं। हालांकि बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि बिना UPSC पास किए भी IAS की पदवी हासिल की जा सकती है। कई सरकारी अधिकारी अपने अनुभव और काम के आधार पर प्रमोशन के जरिए भी IAS कैडर में शामिल हो सकते हैं। हालांकि यह सुनने में जितना आसान लग रहा है उससे कहीं ज्यादा मुश्किल काम है। इसके लिए कई शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं।
    बिना UPSC कैसे बनें IAS?
    बहुत सीमित मात्रा में लोग जानते हैं कि स्टेट सिविल सर्विस के अधिकारी भी बिना यूपीएससी पास किए IAS बनने का सपना पूरा कर सकते हैं। यह सफर PCS से शुरु होता है जो IAS तक पहुंचती है। उत्तर प्रदेश में UP PCS,मध्य प्रदेश में State Administrative Service,अन्य राज्यों में भी इसी तरह की प्रशासनिक सेवाएं होती हैं, इन सेवाओं में चयनित अधिकारी शुरुआत में SDM, डिप्टी कलेक्टर जैसे पदों पर काम करते हैं और जिलों में प्रशासनिक अनुभव हासिल करते हैं।

    राज्य के सिविल सर्विस अधिकारी कब बन सकते हैं IAS?
    राज्य के जो सिविल सर्विस अधिकारी 10 से 12 साल तक अपनी सेवा पूरी कर लेते हैं तो वह प्रमोशन के लिए पात्र हो जाते हैं। हालांकि इसके लिए एक कड़ी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके लिए कई जरूरी शर्तें होती हैं और पूरी प्रक्रिया नियमानुसार होती है। PCS से IAS बनने के लिए इस बिंदुओं को ध्यान में रखा जाता है।

    अधिकारी का काम और प्रदर्शन अच्छा होना चाहिए।
    सेवा रिकॉर्ड मजबूत होना चाहिए।
    IAS कैडर में खाली पद होना जरूरी है।
    राज्य सरकार की सिफारिश महत्वपूर्ण होती है।
    इन सभी चीजों के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया शुरू होती है।
    हालांकि, IAS प्रमोशन का फैसला चयन समिति करती है। इस समिति में आमतौर पर राज्य के मुख्य सचिव ,वरिष्ठ IAS अधिकारी,UPSC का प्रतिनिधि शामिल होते हैं।

  • नासिक में बाबा ने ‘ज्योतिष’ की आड़ में कई महिलाओं से किया दुष्‍कर्म, आरोपी गिरफ्तार

    नासिक में बाबा ने ‘ज्योतिष’ की आड़ में कई महिलाओं से किया दुष्‍कर्म, आरोपी गिरफ्तार


    नासिक
    । महाराष्ट्र के नासिक से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आध्यात्मिकता और ज्योतिष के नाम पर महिलाओं के साथ कथित यौन शोषण किए जाने का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में 67 वर्षीय ज्योतिषी अशोक खरात को गिरफ्तार किया है, जिस पर 35 वर्षीय महिला के साथ बार-बार दुष्कर्म करने का आरोप है।

    पीड़िता के मुताबिक, आरोपी ने अनुष्ठान के बहाने उसे अपने पास बुलाया, नशीला पदार्थ पिलाया और सम्मोहित कर उसकी आस्था का फायदा उठाते हुए यौन उत्पीड़न किया। जांच में यह भी सामने आया है कि यह मामला केवल एक महिला तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य महिलाओं के साथ भी इसी तरह की वारदातें की गईं।

    एफआईआर के अनुसार, अशोक खरात खुद को ‘कैप्टन’ बताता था और मर्चेंट नेवी से सेवानिवृत्त होने का दावा करता था। वह महिलाओं को उनकी व्यक्तिगत और पारिवारिक समस्याओं के समाधान का झांसा देकर अपने कार्यालय में बुलाता था। वहां पहुंचने के बाद उन्हें नशीला पदार्थ देकर काबू में कर लिया जाता था और फिर डर तथा अंधविश्वास का सहारा लेकर उनका शोषण किया जाता था। आरोपी महिलाओं को उनके पतियों की मौत या तंत्र-मंत्र से जुड़े भय दिखाकर चुप रहने के लिए मजबूर करता था।

    जांच एजेंसियों को आरोपी के ठिकाने से एक पेन ड्राइव बरामद हुई है, जिसमें कथित तौर पर 58 महिलाओं से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो क्लिप मिले हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह एक सुनियोजित और लंबे समय से चल रहा अपराध हो सकता है।

    आरोपी नासिक के पॉश कैनेडा कॉर्नर इलाके में ‘ओकस प्रॉपर्टी डीलर्स एंड डेवलपर्स’ के नाम से कार्यालय चलाता था, लेकिन पुलिस के अनुसार वहां असल में आपराधिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। उसने समाज में खुद को एक प्रभावशाली ज्योतिषी और ‘दैवीय शक्तियों’ के जानकार के रूप में स्थापित कर रखा था।

    मीरगांव में उसके पास ईशान्येश्वर मंदिर और एक आलीशान विश्राम गृह भी है, जहां कथित तौर पर प्रभावशाली लोग आते-जाते थे। सिन्नर स्थित श्री ईशान्येश्वर मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में भी उसकी पहचान थी और कई राजनेताओं, व्यवसायियों तथा अन्य चर्चित लोगों से उसके संबंध होने की चर्चा है।

    गिरफ्तारी का नाटकीय घटनाक्रम
    पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए बेहद गोपनीय अभियान चलाया। जानकारी लीक न हो, इसके लिए टीम ने रात के अंधेरे में ‘चोर-चोर’ का शोर मचाकर उसके फार्महाउस के बाहर अफरा-तफरी पैदा की और इसी दौरान घर में घुसकर उसे शयनकक्ष से गिरफ्तार कर लिया।

    छापेमारी के दौरान फार्महाउस से एक पिस्तौल, जिंदा कारतूस और कई खाली खोखे बरामद हुए। इसके अलावा मंदिर और आश्रम में भी तलाशी ली गई, जहां से कई संदिग्ध दस्तावेज मिले हैं। पुलिस अब आरोपी की अन्य संपत्तियों और नेटवर्क की भी जांच कर रही है।

    एसआईटी गठित, जांच जारी
    मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने आईपीएस अधिकारी तेजस्विनी सतपुते के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। नासिक क्राइम ब्रांच की टीम बरामद वीडियो और दस्तावेजों की विस्तृत जांच में जुटी है।

    राजनीतिक बयानबाजी तेज
    घटना सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी शुरू हो गई है। उद्धव ठाकरे गुट की नेता सुषमा अंधारे ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिलाओं का शोषण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और सरकार को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।

    फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं तथा कितनी महिलाएं इसका शिकार बनीं।

  • Eid 2026: भारत में ईद-उल-फितर 21 मार्च को, पूरे 30 रोजे रखे गए

    Eid 2026: भारत में ईद-उल-फितर 21 मार्च को, पूरे 30 रोजे रखे गए


    नई दिल्ली। भारत में ईद उल फितर 2026 की तारीख तय हो गई है। इस बार रमजान के पूरे 30 रोजे रखे गए हैं। 20 मार्च को 30वां रोजा रखा गया और अगले दिन यानी 21 मार्च शनिवार को देशभर में ईद मनाई जाएगी। यह घोषणा धार्मिक कमेटी और जामा मस्जिद दिल्ली के नायब इमाम सैयद उसामा शाबान बुखारी ने की।

    भारत में ईद की तारीख चांद दिखने पर निर्भर करती है। इस बार 19 मार्च को शव्वाल का चांद नजर नहीं आया जिससे रमजान का आखिरी रोजा बढ़ गया। इसके बाद 20 मार्च को चांद देखने के बाद ईद 21 मार्च को मनाने का फैसला लिया गया। वहीं सऊदी अरब में 20 मार्च को ही ईद उल फितर मनाई जा रही है।

    ईद उल फितर का महत्व 

    ईद उल फितर इस्लाम धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। इसका मतलब है रोजा खोलने का त्योहार । यह रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद मनाया जाता है और अल्लाह का धन्यवाद अदा करने का अवसर होता है। यह पर्व खुशियों और भाईचारे का प्रतीक है।

    इतिहास में ईद उल फितर की शुरुआत 624 ईस्वी में पैगंबर हजरत मुहम्मद ने मदीना में की थी। हिजरत के बाद मुसलमानों ने पहला रमजान पूरा किया और तब ईद उल फितर और ईद उल अजहा दो पर्व तय किए गए। इस बार के ईद समारोह के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। मस्जिदों और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ की व्यवस्था की जा रही है। लोग अपने घरों में भी सजावट और ईद की मिठाइयों की तैयारी में जुटे हैं।

  • बांग्लादेश से यूनुस के जाते ही सुधरने लगे रिश्ते…. अगले महीने भारत आएंगे विदेश मंत्री रहमान

    बांग्लादेश से यूनुस के जाते ही सुधरने लगे रिश्ते…. अगले महीने भारत आएंगे विदेश मंत्री रहमान


    नई दिल्ली।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में मुहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का शासन खत्म होने ही भारत बांग्लादेश (India-Bangladesh) के रिश्ते पटरी पर लौटने लगे हैं। इसकी शुरुआत बांग्लादेश के विदेश मंत्री (Foreign Minister) की भारत यात्रा से हो सकती है। मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान (Foreign Minister Khalilur Rahman) अगले महीने भारतीय राजधानी की एक संक्षिप्त यात्रा पर आ सकते हैं। यह इसीलिए अहम है क्योंकि ढाका में तारिक रहमान की सरकार बनने के बाद बांग्लादेशी विदेश मंत्री की यह पहली विदेश यात्रा होगी।

    यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब दोनों ही देश संबंधों में आए भारी तनाव के बाद रिश्तों को दोबारा मजबूत बनाने की कोशिशें कर रही हैं। सूत्रों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि रहमान 8 अप्रैल को मॉरीशस में होने वाले हिंद महासागर सम्मेलन में जाते समय नई दिल्ली में रुक सकते हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि रहमान यूनुस सरकार का भी हिस्सा रह चुके हैं और वे तब पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इसके बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Prime Minister Tariq Rahman) के मंत्रिमंडल में उनका नाम काफी चौंकाने वाला कदम था।

    इससे पहले भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने पिछले महीने ढाका में रहमान से मुलाकात की थी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ओर से उन्हें जल्द से जल्द भारत आने का निमंत्रण दिया था। हालांकि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की पहली विदेश यात्रा के बारे में ढाका की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सूत्रों का मानना है कि इस बात की संभावना कम है कि तारिक रहमान पहले दौरे पर भारत या चीन जाएंगे।

    इसकी वजह यह है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार ने यह संकेत दिए हैं कि उसकी विदेश नीति किसी भी क्षेत्रीय शक्ति के पक्ष में नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक बांग्लादेशी प्रधानमंत्री भूटान या मालदीव की यात्रा कर सकते हैं। सूत्रों ने बताया, “प्रधानमंत्री रहमान इस क्षेत्र के भीतर मजबूत संबंध बनाना चाहते हैं और उन क्षेत्रीय नेताओं के प्रति अपना आभार भी व्यक्त करना चाहते हैं जो उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे।”

  • पश्चिम एशिया संकट के बीच रूस से भी LPG खरीदेगा भारत… सरकार ने दिए संकेत

    पश्चिम एशिया संकट के बीच रूस से भी LPG खरीदेगा भारत… सरकार ने दिए संकेत


    नई दिल्ली।
    ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US war) के बीच पूरी दुनिया में कच्चे तेल (Crude Oil) का संकट पैदा होने लगा है। एलपीजी (LPG) की भी दिक्कतें आने लगी हैं। इस बीच, एलपीजी को लेकर भारत सरकार (Government of India) ने गुरुवार को बड़े संकेत दिए हैं। विदेश मंत्रालय से सवाल पूछा गया कि क्या भारत रूस से एलपीजी खरीद रहा है, इस पर सरकार ने कहा कि अगर रूस में उपलब्ध होगी, तो वहां से खरीदी जाएगी।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पूछा गया कि क्या हम रूस से एलपीजी खरीद रहे हैं? इस पर उन्होंने जवाब दिया, ”एलपीजी हम सभी जगह से खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, जहां वह उपलब्ध है। अगर उसमें रूस भी होगा, तो वहां भी जाएंगे, क्योंकि स्थिति अभी इस प्रकार की है। हमें सुनिश्चित करना है कि हमारे लोगों का ईंधन की जरूरतें हैं, वह पूरा हो। कई देश हैं, जहां से एलपीजी खरीद रहे हैं। अभी इन देशों का ब्योरा नहीं है, यह सब पेट्रोलियम मंत्रालय ज्यादा जानकारी देगा, लेकिन हम चाहते हैं कि विकल्प हमारे पास कई हों।”


    ‘तेल और गैस के कुंओं तथा रिफाइनरियों पर हमले चिंताजनक’

    भारत ने खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस के कुंओं तथा तेल रिफाइनरियों पर हमलों को अत्यंत चिंताजनक बताया है। सरकार ने कहा है कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता और हमले तुरंत रोके जाने चाहिए। पिछले कुछ दिनों में ईरान-अमेरिका जंग और भीषण हुई है। ईरान ने कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों के कई तेल कुओं और रिफाइनरियों को निशाना बनाया है। अमेरिका-इजरायल ने भी ईरानी तेल सुविधाओं पर हमले किए हैं।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले कुछ दिनों में खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना पर हुए हमलों के संबंध में मीडिया के प्रश्नों के उत्तर में गुरुवार को कहा कि भारत ने यह संघर्ष शुरू होने पर ही कहा था कि नागरिक और ऊर्जा ठिकानों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा ,” भारत ने पहले ही पूरे क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना सहित नागरिक अवसंरचना को निशाना बनाने से बचने का आह्वान किया था। इस क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हालिया हमले अत्यंत चिंताजनक हैं और ये पूरे विश्व के पहले से ही अनिश्चित ऊर्जा परिदृश्य को और अस्थिर करते हैं। ऐसे हमले अस्वीकार्य हैं और इन्हें तुरंत बंद किया जाना चाहिए।”

  • राष्ट्रपति द्रौपदी तीन दिवसीय प्रवास पर पहुंचीं श्रीकृष्ण की नगरी, इस्कॉन-प्रेम मंदिर में किए दर्शन

    राष्ट्रपति द्रौपदी तीन दिवसीय प्रवास पर पहुंचीं श्रीकृष्ण की नगरी, इस्कॉन-प्रेम मंदिर में किए दर्शन


    मथुरा।
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु गुरुवार की शाम तीन दिवसीय प्रवास पर श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा पहुंचीं। यहां से सीधे वृंदावन गई, जहां उन्होंने इस्कॉन मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए ठाकुरजी के भव्य दर्शन किए तथा प्रेममंदिर के दर्शन किए। शुक्रवार की सुबह वह बांकेबिहारी जी महाराज के दर्शन पूजा-अर्चना के साथ अन्य कई कार्यक्रमों में भाग लेंगी। राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर मथुरा पुलिस प्रशासन ने कड़े प्रबंध किए हैं।

    राष्ट्रपति द्रौपदी का गुरुवार शाम को मथुरा में सेना के छावनी परिसर में बने हेलीपैड पर उनका हेलीकॉप्टर उतरा। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मंत्री गन्ना विकास एवं चीनी मिलें लक्ष्मी नारायण चौधरी, प्रभारी मंत्री/राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बेसिक शिक्षा विभाग संदीप सिंह, राज्यसभा सांसद तेजवीर सिंह ने बुके देकर उनकी अगवानी की। इस मौके पर मथुरा वृन्दावन नगर निगम के महापौर विनोद अग्रवाल, लेफ्टिनेंट जनरल वी हरिहरन, अपर पुलिस महानिदेशक आगरा अनुपम कुलश्रेष्ठ, मंडलायुक्त आगरा नगेन्द्र प्रताप, ग्रुप कैप्टन शिवम मनचंदा, जिलाधिकारी मथुरा चन्द्र प्रकाश सिंह तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा श्लोक कुमार भी मौजूद थे। इसके बाद राष्ट्रपति का काफिला वृंदावन के लिए रवाना हो गया।

    राष्ट्रपति ने किए इस्कॉन मंदिर दर्शनः राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वृंदावन स्थित इस्कॉन मंदिर (श्रीश्री कृष्ण बलराम मंदिर) के दर्शन किए। इस्कॉन मंदिर (श्री श्री कृष्ण बलराम मंदिर) में पंचगौड़ा दास, जनार्दन दास, विष्णुनाम दास, शुतकीर्ति दास, रवि लोचन दास एवं देवदत्त स्वामी ने भव्य स्वागत किया। इसके बाद राष्ट्रपति एवं राज्यपाल ने श्री अभयचरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी की समाधि स्थल के दर्शन किए तथा समाधि स्थल की परिक्रमा लगाई। परिक्रमा के बाद राष्ट्रपति मुर्मु एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने श्रीश्री कृष्ण बलराम मंदिर/मुख्य मंदिर के दर्शन किए तथा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। वैदिक मंत्रों के बीच राष्ट्रपति ने पूजन की सामग्री भगवान को अर्पण किया। पूरा मंदिर प्रांगण शुभ मंत्रों से गूंज उठा। यह नजारा देखने में बहुत ही अद्भुत रहा। उन्होंने मंदिर में हाथ जोड़कर प्रभु का स्मरण किया। राष्ट्रपति द्रौपदी एवं राज्यपाल आनंदीबेन ने मंदिर परिसर में बालिकाओं द्वारा किए जा रहे नृत्य(सांस्कृतिक कार्यक्रम) का अवलोकन किया तथा मंदिर में आयोजित कीर्तन को सुना। दर्शन कार्यक्रम में पंचगौड़ा दास, जनार्दन दास, विष्णुनाम दास, शुतकीर्ति दास, रवि लोचन दास, देवदत्त स्वामी, राधागोलोकानंद स्वामी, मुकुंदा दास, जादूनंदन दास, धर्मात्मा दास, पार्थ कृष्णा दास (गौ-सेवक) एवं गणपति दास उपस्थित रहे।

    तय कार्यक्रम के अनुसार 21 मार्च तक राष्ट्रपति तक ब्रज में प्रवास करेंगी। दो दिन वृंदावन में मंदिरों के दर्शन करेंगी। वह संत प्रेमानंद से आध्यात्मिक चर्चा करेंगी। 20 मार्च को वह वृंदावन के उड़िया बाबा आश्रम, नीव करौरी बाबा आश्रम, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, वात्सल्य ग्राम जाएंगी। रामकृष्ण मिशन चेरिटेबिल अस्पताल में कैंसर यूनिट का उद्घाटन करेंगी। 21 मार्च की सुबह आठ बजे गोवर्धन प्रस्थान करेंगी। सुबह 9 बजे दानघाटी मंदिर में पूजा अर्चरा करेंगी। इसके बाद गोल्फ कार्ट से परिक्रमा लगाएंगी। ब्रज की पावन धरती पर आध्यात्मिकता और गरिमा का अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु श्रीकृष्ण की मनोमयी लीला से प्रकट मानसी गंगा में श्रद्धा अर्पित करेंगी। महज 10 मिनट का यह कार्यक्रम भले ही समय में सीमित हो, लेकिन इसकी धार्मिक महत्ता और सांस्कृतिक संदेश दूर तक गूंजेंगे।

    मुकुट मुखारविंद मंदिर के रिसीवर कपिल चतुर्वेदी के अनुसार, राष्ट्रपति के आगमन पर श्रीजी पीठाचार्य मनीष बाबा उन्हें सबसे पहले मानसी गंगा की पूजा अर्चना कराएंगे। इसके बाद वह मुकुट मुखारविंद मंदिर में विराजमान गिरिराजजी का दूध व रबड़ी से अभिषेक कर विधिवत पूजन करेंगी। पूरे कार्यक्रम को अत्यंत व्यवस्थित ढंग से 10 मिनट में संपन्न कराने की योजना बनाई गई है। भागवत किंकर गोपाल प्रसाद उपाध्याय बताते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने गंगा को अपने मन से ब्रज में प्रकट किया, जिससे इसका नाम ‘मानसी गंगा’ पड़ा।


    राष्ट्रपति की सुरक्षा में आठ जिलों की फोर्स तैनात : एसएसपी

    इससे पहले बुधवार को वृंदावन से गोवर्धन तक प्रस्तावित राष्ट्रपति के दौरे को लेकर पूरे रूट पर फुल ड्रेस रिहर्सल किया गया। इसमें सुरक्षा, यातायात और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बारीकी से परखा गया। रिहर्सल के दौरान काफिले में शामिल वाहनों ने निर्धारित मार्ग पर चलकर हर संभावित स्थिति का अभ्यास किया। सुबह से ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी रूट पर तैनात हो गए थे। काफिला वृंदावन से शुरू होकर गोवर्धन तक पहुंचा और इस दौरान मार्ग में आने वाले प्रमुख चौराहों, संकरे रास्तों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों का विशेष रूप से निरीक्षण किया गया। राष्ट्रपति के काफिले के लिए ‘जीरो ट्रैफिक’ व्यवस्था लागू करने की तैयारियां भी रिहर्सल के दौरान देखी गईं। इसके तहत काफिले के गुजरने के समय पूरे रूट को आम यातायात के लिए पूरी तरह खाली रखा जाएगा। इसके लिए वैकल्पिक मार्गों और डायवर्जन की योजना पर भी अभ्यास किया गया। रिहर्सल के चलते कई स्थानों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किए गए। एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि राष्ट्रपति के दौरे के मद्देनजर आठ जिलों की फोर्स तैनात की गयी है। कई स्थानों पर रूट डायवर्जन लागू रहेगा।

  • बाल मृत्यु दर में बड़ी कमी भारत की वैश्विक सराहना संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट में मिला बड़ा सम्मान

    बाल मृत्यु दर में बड़ी कमी भारत की वैश्विक सराहना संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट में मिला बड़ा सम्मान


    नई दिल्ली :
    संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट ने भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि की पुष्टि की है। इस रिपोर्ट के अनुसार देश में बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिसे वैश्विक स्तर पर एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने भारत के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा है कि बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण और प्रभावशाली काम किया है।

    इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में भारत की इस उपलब्धि को सराहा गया है और बच्चों की मृत्यु दर में आई गिरावट देश के लिए गर्व का विषय है। पीएम मोदी ने इसे सरकार और देश के प्रयासों का परिणाम बताया।

    संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्यु दर अनुमान अंतर एजेंसी समूह यानी यूएनआईजीएमई की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने नवजात और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को कम करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर और निरंतर प्रयास किए हैं, जिनका सीधा असर जमीन पर दिखाई देता है।

    आंकड़ों के अनुसार 1990 में जहां नवजात शिशु मृत्यु दर 57 थी, वहीं 2024 में यह घटकर 17 रह गई है। यह लगभग 70 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है। इसी तरह पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 1990 में 127 थी, जो 2024 में घटकर 27 रह गई है। यह लगभग 79 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है, जो भारत की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का प्रमाण है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत ने दक्षिण एशिया क्षेत्र में भी बच्चों की मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले दो दशकों में भारत ने इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुधार के लिए कई पहलें की हैं, जिनमें टीकाकरण अभियान, संस्थागत प्रसव और नवजात देखभाल सेवाओं का विस्तार शामिल है।

    विशेष रूप से सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम और नवजात देखभाल से जुड़ी नीतियों ने बच्चों को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद की है। निमोनिया, डायरिया, मलेरिया और जन्म से जुड़ी जटिलताओं के कारण होने वाली मौतों में भी उल्लेखनीय कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार इन प्रयासों ने लाखों बच्चों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई है।

    रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिकांश बच्चों की मौतें रोकी जा सकती हैं या उनका इलाज संभव है। भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, बेहतर निगरानी और समय पर उपचार ने इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विशेष रूप से एनआईसीयू यानी नवजात गहन देखभाल इकाइयों के सुधार ने नवजात शिशुओं के जीवन को सुरक्षित बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

    हालांकि रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि दक्षिण एशिया में अभी भी दुनिया भर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु का एक बड़ा हिस्सा होता है, लेकिन इस क्षेत्र ने सबसे तेजी से सुधार दिखाया है। यह इस बात का संकेत है कि सही नीतियों और प्रयासों से बड़े स्तर पर बदलाव संभव है।
     

    यह रिपोर्ट भारत के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आई है, जो देश की स्वास्थ्य नीतियों और प्रयासों की सफलता को दर्शाती है। यह उपलब्धि न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण है
  • राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की नितिन गडकरी से मुलाकात बस ट्रक बॉडी उद्योग की समस्याओं पर मंथन तेज

    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की नितिन गडकरी से मुलाकात बस ट्रक बॉडी उद्योग की समस्याओं पर मंथन तेज

    नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी बहन और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब बस और ट्रक बॉडी निर्माण से जुड़ा उद्योग कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है और उद्योग जगत अपनी समस्याओं को लेकर सरकार से समाधान की उम्मीद लगाए बैठा है।

    इस बैठक में राजस्थान के बस और ट्रक बॉडी बिल्डर एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार इस मुलाकात में प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख समस्याओं को विस्तार से सामने रखा। उद्योग से जुड़े लोगों ने खासतौर पर नए तकनीकी मानकों, बढ़ती उत्पादन लागत और मंत्रालय के अनुपालन नियमों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उनका कहना था कि लगातार बदलते नियम और मानकों के चलते छोटे और मध्यम स्तर के निर्माताओं के लिए व्यवसाय चलाना कठिन होता जा रहा है।

    राहुल गांधी ने इस दौरान उद्योग प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना और इन मुद्दों को केंद्रीय मंत्री के सामने रखा। उन्होंने नितिन गडकरी से आग्रह किया कि इन समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द निकाला जाए ताकि इस उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका सुरक्षित रह सके। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि यदि नियमों और शुल्कों का बोझ इसी तरह बढ़ता रहा तो कई छोटे निर्माता बाजार से बाहर हो सकते हैं जिससे रोजगार पर भी असर पड़ेगा।

    सूत्रों के अनुसार गडकरी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यान से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगी और समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने उद्योग की चुनौतियों को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने की बात कही।

    बैठक से पहले भी इन प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी और उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। उस दौरान भी उन्होंने यह चिंता जताई थी कि लाइसेंस प्रक्रिया में अधिक खर्च और समय लगने के कारण छोटे निर्माताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसके साथ ही नए मानकों को पूरा करने में आ रही कठिनाइयों ने भी उनकी चिंता बढ़ा दी है।

    प्रियंका गांधी ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि प्रतिनिधियों ने लाइसेंस और अनुपालन से जुड़ी दिक्कतों को प्रमुख रूप से उठाया है। उन्होंने कहा कि नितिन गडकरी ने इन समस्याओं को समझते हुए जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। इस बयान से उद्योग जगत में थोड़ी राहत की उम्मीद जगी है।

    यह बैठक ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब देश में बुनियादी ढांचे और परिवहन क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। सरकार जहां नियमों को सख्त और आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है वहीं उद्योग जगत चाहता है कि इन नियमों को व्यावहारिक बनाया जाए ताकि छोटे और मध्यम उद्यम भी टिक सकें।

    कुल मिलाकर यह मुलाकात सिर्फ एक राजनीतिक बैठक नहीं बल्कि उद्योग और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन मुद्दों पर क्या ठोस कदम उठाती है और बस ट्रक बॉडी निर्माण उद्योग को किस तरह राहत मिलती है

  • उत्तराधिकारी की चर्चा के बीच नीतीश और सम्राट की बढ़ती नजदीकी ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

    उत्तराधिकारी की चर्चा के बीच नीतीश और सम्राट की बढ़ती नजदीकी ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

    नई दिल्ली/मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार की सियासत में संभावित उत्तराधिकार को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बीच दिखाई देने वाली नजदीकी ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। विभिन्न मंचों पर नीतीश कुमार का सम्राट चौधरी के प्रति भरोसा और उन्हें आगे की जिम्मेदारियों के संकेत के रूप में देखे जा रहे बयानों ने राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयासों को जन्म दिया है।

    सम्राट चौधरी को लेकर चर्चा तब और बढ़ गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान अलग अलग मंचों पर उनके साथ दिखे। जमुई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार ने यह संकेत दिया कि आगे की जिम्मेदारियां अब उन्हीं के नेतृत्व में आगे बढ़ेंगी। इस बयान को लेकर मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे संभावित उत्तराधिकारी के रूप में पेश किए जाने का संकेत माना।

    हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री और नीतीश कुमार के करीबी विजय चौधरी ने स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इसमें कुछ भी नया नहीं है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री का यह स्वभाव रहा है कि वह अपने सहयोगियों को प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए प्रेरित करते हैं। विजय चौधरी ने यह भी कहा कि जिस तरह की व्याख्या की जा रही है वह मीडिया की अपनी कल्पना है और इसका वास्तविकता से कोई सीधा संबंध नहीं है।

    उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सम्राट चौधरी उपमुख्यमंत्री के रूप में मुख्यमंत्री के साथ पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं और सरकार के कार्यों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि किसी को भी उत्तराधिकारी के रूप में पेश किए जाने की बात को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है।

    राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि नीतीश कुमार के बाद बिहार में सत्ता का स्वरूप कैसा होगा। कुछ लोग मानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी को मुख्यमंत्री पद मिल सकता है जबकि जनता दल यूनाइटेड के हिस्से से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि निशांत कुमार को भविष्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है।

    इन तमाम चर्चाओं के बीच जातीय समीकरण और बिहार की राजनीति की जमीनी हकीकत को भी ध्यान में रखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में सत्ता का भविष्य केवल संकेतों या बयानों पर निर्भर नहीं करता बल्कि जमीनी गठजोड़ और राजनीतिक समीकरण भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है और आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह अटकलें किस दिशा में जाती हैं और वास्तव में बिहार की सत्ता का अगला चेहरा कौन बनता है