Category: National

  • Merry Christmas 2025: इन 10 खास संदेशों से अपनों को दें क्रिसमस की बधाई, दिल छू लेंगे ये मैसेज

    Merry Christmas 2025: इन 10 खास संदेशों से अपनों को दें क्रिसमस की बधाई, दिल छू लेंगे ये मैसेज


    नई दिल्‍ली । क्रिसमस का त्योहार खुशियों और उत्साह से भरा रहता है। इसे दुनिया भर में 25 दिसंबर को मनाया जाता है। ईसाई धर्म में इसे प्रभु यीशु  जीसस क्राइस्ट के जन्मदिन के रूप में याद किया जाता है। इस अवसर पर लोग अपने दोस्तों, परिवार और अपनों को प्यार और शुभकामनाएं भेजते हैं। चाहे सोशल मीडिया के जरिए हो या मैसेज के माध्यम से, बधाई देना इस पर्व का एक अहम हिस्सा है। यदि आप भी अपने प्रियजनों को इस क्रिसमस खास महसूस कराना चाहते हैं, तो यहां 10 चुनिंदा और दिल छू लेने वाले मैसेज हैं, जिन्हें आप भेजकर क्रिसमस की बधाई दे सकते हैं।

    1.आया क्रिसमस का त्योहार
    चलो मनाएं सबके के साथ
    देते हैं सभी को ढेर सारी बधाई
    खत्म करो आज सभी पुरानी लड़ाई
    मेरी क्रिसमस 2025

    2. जिंगल बेल्स, जिंगल बेल्स
    जिंगल ऑल द वे
    व्हॉट फन इट इस टू राइड
    इन अ होर्स ओपन स्लेज
    मेरी क्रिसमस 2025

    3. हंसते खिलखिलाते हुए केक तुम खाना
    जीवन में नई खुशियां लाना
    हर दुख को भूलकर खुशियों को गले लगाना
    बहुत प्यार से क्रिसमस मनाना
    मेरी क्रिसमस 2025

    4. क्रिसमस पर फरिश्ता बनकर कोई आएगा
    आपकी सारी उम्मीदें पूरी कर जाएगा
    क्रिसमस के इस खास मौके पर
    आपको झोली भर कर गिफ्ट देकर जाएगा
    मेरी क्रिसमस 2025

    5. क्रिसमस में खुशियों का उजाला आपके घर आए
    खुल जाए आपकी बंद किस्मत का ताला
    प्रभु यीशु जीवन पर अपनी कृपा बनाए रखें
    यही है मेरी इस क्रिसमस पर मनोकामना
    मेरी क्रिसममस 2025

    6. क्रिसमस का यह प्यारा त्योहार जीवन में
    लाए आपके जीवन में खुशियां अपार
    सांता क्लॉज आए आपके द्वार
    पूरी हो जाए आपकी हर कामना
    मेरी क्रिसमस 2025

    7. क्रिसमस लाया सबके लिए उम्मीदें
    खुशियों से भर जाए दामन हर किसी का
    प्रभु यीशु की कृपा से पूरी हो सभी की कामना
    मेरी क्रिसमस 2025

    8. क्रिसमस के सीजन में
    आपके दिल को मिले सुकून और खुशियां
    आपकी जिंदगी का हर पल बने खास
    क्रिसमस की आपको ढेर सारी बधाई
    मेरी क्रिसमस 2025

    9. सांता क्लॉज आपके घर को चुने
    खुशियों का लाए पिटारा
    मेरी तरफ से आपको मिल खूब सारा प्यार
    क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएं

    10. क्रिसमस ट्री की तरह हरा भरा रहे आपका जीवन
    तारों की तरह चमचमाता रहे आपका भविष्य
    मेरी क्रिसमस 2025

  • इंडिगो एयरलाइन को DGCA की दो टूक, तुर्की से लीज पर लिए विमान मार्च 2026 के बाद नहीं उड़ेंगे

    इंडिगो एयरलाइन को DGCA की दो टूक, तुर्की से लीज पर लिए विमान मार्च 2026 के बाद नहीं उड़ेंगे


    नई दिल्‍ली / ।इंडिगो एयरलाइन की हालिया फ्लाइट रद्दीकरण की घटनाओं ने देशभर में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। हालाँकि अब एयरलाइन का परिचालन आंशिक रूप से सामान्य हो गया है, लेकिन विमानन नियामक DGCA की नजर अभी भी इंडिगो पर कड़ी है। सोमवार को इंडिगो ने तुर्की से लीज पर लिए गए अपने एयरक्राफ्ट्स की अवधि को लेकर स्पष्टीकरण दिया। DGCA ने इन विमानों के उपयोग के लिए एयरलाइन को मार्च 2026 तक का समय दिया, लेकिन साफ कर दिया कि इसके बाद कोई एक्सटेंशन नहीं होगा। इसका मतलब है कि एयरलाइन को निर्धारित समय में इन विमानों का परिचालन समाप्त करना होगा।

    तुर्की के 5 B737 विमान मार्च 2026 तक उड़ाने की अनुमति
    एविएशन रेगुलेटर DGCA ने IndiGo एयरलाइन को तुर्की की कोरेंडन एयरलाइंस से लीज पर लिए गए पांच नैरो-बॉडी बोइंग 737 विमानों का परिचालन केवल मार्च 2026 तक करने की अनुमति दी है। DGCA ने स्पष्ट किया है कि इन विमानों के लिए यह अंतिम एक्सटेंशन होगा और इसके बाद कोई भी अतिरिक्त अवधि नहीं दी जाएगी। एक वरिष्ठ DGCA अधिकारी के अनुसार, इंडिगो ने इस एक्सटेंशन के लिए अंडरटेकिंग प्रस्तुत की थी। इसके पीछे कारण यह था कि एयरलाइन के लॉन्ग-रेंज एयरक्राफ्ट A321-XLR फरवरी 2026 तक डिलीवर होने वाले हैं, इसलिए तब तक इन B737 विमानों की जरूरत बनी रहेगी। इसके साथ ही नियामक ने “सनसेट क्लॉज” के तहत साफ किया कि मार्च 2026 के बाद इन विमानों का संचालन बंद करना होगा।

    IndiGo के पास 15 विदेशी विमान, 7 तुर्की से

    IndiGo एयरलाइन वर्तमान में 15 विदेशी विमानों का परिचालन कर रही है, जिनमें से 7 तुर्की से लीज पर लिए गए हैं। अगस्त 2025 में DGCA ने टर्किश एयरलाइंस से लीज पर लिए गए दो बोइंग 777 विमानों के संचालन के लिए छह महीने का एक्सटेंशन दिया था, जो फरवरी 2026 तक वैध है। इससे पहले मई 2025 में DGCA ने इंडिगो को तीन महीने का सीमित एक्सटेंशन दिया था और स्पष्ट किया था कि आगे किसी अतिरिक्त एक्सटेंशन की अनुमति नहीं दी जाएगी। नियामक ने यह भी कहा था कि एयरलाइन को भविष्य में किसी भी तरह का विस्तार नहीं मांगना है। यह निर्णय ऐसे समय आया जब तुर्की ने पाकिस्तान के समर्थन में भारत द्वारा पड़ोसी देश में आतंकवादियों के ठिकानों पर किए गए हमलों की आलोचना की थी।

    गौरतलब है कि केवल IndiGo नहीं, बल्कि SpiceJet जैसी एयरलाइंस भी अपने परिचालन के लिए 17 विदेशी विमानों का इस्तेमाल कर रही हैं, जो वेट/डैम्प लीज पर लिए गए हैं। DGCA के अधिकारियों के अनुसार, वैश्विक एविएशन इंडस्ट्री में वेट लीजिंग आम प्रैक्टिस है। अधिकारियों ने बताया कि इंजन संबंधी तकनीकी दिक्कतों, ग्राउंडिंग और OEMs द्वारा एयरक्राफ्ट की डिलीवरी में देरी के कारण भारतीय एयरलाइंस यात्रियों को समय पर सेवा देने के लिए विदेशी एयरलाइंस से वेट लीज का सहारा लेती हैं। यह व्यवस्था उन्हें बाइलेटरल सर्विस एग्रीमेंट के तहत उपलब्ध अधिकारों का उपयोग करने में मदद करती है। वेट लीजिंग एयरलाइंस को अस्थायी अंतराल में विमान उपलब्ध कराने का तरीका है।

  • शशि थरूर ने क्यों की नीतीश सरकार की तारीफ, बिहार को लेकर कही ये बड़ी बात, कांग्रेस को फिर लगेगा बुरा!

    शशि थरूर ने क्यों की नीतीश सरकार की तारीफ, बिहार को लेकर कही ये बड़ी बात, कांग्रेस को फिर लगेगा बुरा!


    नई दिल्ली । कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने सोमवार 22 दिसंबर को नीतीश कुमार सरकार की तरफ से बिहार में बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे कार्यों की जमकर सराहना की, जबकि कांग्रेस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बीजेपी बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू के साथ गठबंधन में है.नालंदा साहित्य महोत्सव में भाग लेने के लिए बिहार आए शशि थरूर ने एक चैनल संग बातचीत में कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि बुनियादी ढांचा पहले की तुलना में कहीं बेहतर है. सड़कें बेहतर हैं. लोग देर रात तक सड़कों पर दिखते हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था. अब तक बिजली, पानी और बाकी सब कुछ ठीक चल रहा है.
    नीतीश के बारे में पूछे जाने पर क्या बोले
    उन्होंने कहा कि मेरा मतलब है, इसमें कोई शक नहीं कि हाल के वर्षों में बहुत सी अच्छी चीजें हुई हैं. नीतीश कुमार के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस सांसद ने टालमटोल करते हुए कहा कि मुझे यहां राजनीति में मत घसीटिए. मैं निश्चित रूप से इस प्रगति को देखकर बहुत खुश हूं. बिहार की जनता और उनके प्रतिनिधि इसके लिए श्रेय के पात्र हैं.

    कांग्रेस का क्या है रिएक्शन

    बिहार में थरूर के बीजेपी संग गठबंधन वाली सरकार की प्रशंसा करने वाली हालिया टिप्पणी पर कांग्रेस ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. पिछले महीने दुबई में एक मीडिया कार्यक्रम में थरूर ने राजनीतिक परिदृश्य पर खेद व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि हर किसी को वैचारिक रूप से कट्टरपंथी होना पड़ता है और वे दूसरे पक्ष की अच्छाई को नहीं देखते या दूसरे पक्ष के किसी भी व्यक्ति से बात नहीं करते.

    हिजाब विवाद को लेकर क्या कहा था
    बता दें कि 4 बार के सांसद शशि थरूर, प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ बीजेपी की प्रशंसा करने वाले कई बयानों के बाद कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के साथ अपने संबंध खराब होते देख रहे हैं. थरूर हमेशा से यह कहते रहे हैं कि उनकी टिप्पणियां केवल भारत की बेहतर सेवा करने की इच्छा को दर्शाती हैं. इससे पहले शशि थरूर ने हिजाब विवाद को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए कहा था कि यह घटना अनुचित थी.

  • आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी को मिलेगा वैश्विक मानक दर्जा WHO और आयुष मंत्रालय की बड़ी पहल

    आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी को मिलेगा वैश्विक मानक दर्जा WHO और आयुष मंत्रालय की बड़ी पहल


    नई दिल्ली । भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय ने एक बड़ी पहल की है। इस पहल के तहत आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अब अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के तहत एक समर्पित मॉड्यूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस कदम से इन प्रणालियों को वैश्विक पहचान और वैज्ञानिक आधार मिलेगा।

    इस संदर्भ में 20-21 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक अहम तकनीकी बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक WHO और आयुष मंत्रालय के बीच 24 मई 2025 को हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन एमओयू के अंतर्गत आयोजित की गई थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के लिए एक समान कोडिंग प्रणाली का विकास करना था जिससे उपचार की प्रभावशीलता को समझने शोध और नीति निर्माण में मदद मिल सके।

    प्रधानमंत्री मोदी का विजन और वैश्विक पहचान

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि आयुष प्रणालियों को वैज्ञानिक और मानकीकृत तरीके से अपनाने से ये चिकित्सा पद्धतियां दुनिया भर में प्रभावी रूप से फैल सकती हैं। यह कदम भारतीय पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में अहम साबित होगा।

    बैठक में वैश्विक प्रतिनिधित्व
    बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव कविता गर्ग ने की। इस बैठक में WHO के छह क्षेत्रों अफ्रीका अमेरिका पूर्वी भूमध्यसागर यूरोप दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत से प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा भारत भूटान ब्राजील ईरान मलेशिया नेपाल मॉरीशस दक्षिण अफ्रीका श्रीलंका फिलीपींस यूके और अमेरिका जैसे देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस बैठक में भारतीय आयुष प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए प्रमुख स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के कोड पर चर्चा की गई। साथ ही आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी चिकित्सा से जुड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड को भी विस्तृत रूप से परखा गया।

    वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को एकीकृत करना

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ जोड़ने में आसानी होगी। यह कदम सुरक्षित साक्ष्य आधारित और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देगा। विशेष रूप से आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का यह अवसर है।

    भारत की प्रमुख भूमिका

    भारत जो पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक अहम केंद्र है इस पहल में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस बैठक में भारतीय टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया जिसमें प्रो. रबिनारायण आचार्य महानिदेशक सीसीआरएएस प्रो. एनजे मुथुकुमार महानिदेशक सीसीआरएस और डॉ. जहीर अहमद महानिदेशक सीसीआरयूएम जैसे प्रमुख विशेषज्ञ शामिल थे।

    WHO के वैश्विक प्रयास

    इस पहल में डब्ल्यूएचओ के जानी-मानी शख्सियतों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। जिनेवा में डब्ल्यूएचओ मुख्यालय के प्रमुख प्रतिनिधि रॉबर्ट जैकब नेनाद कोस्टांजेक स्टीफन एस्पिनोसा और डॉ. प्रदीप दुआ ने वर्गीकरण चर्चाओं का नेतृत्व किया। साथ ही डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर जीटीएमसी और डब्ल्यूएचओ एसईएआरओ कार्यालय से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस पहल को प्रभावी बनाने में मदद की।

    पारंपरिक चिकित्सा के लिए समर्पित मॉड्यूल

    यह पहल पारंपरिक चिकित्सा उपचारों के लिए एक समर्पित वर्गीकरण प्रणाली को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दुनिया भर में पारंपरिक इलाज की जानकारी को सही तरीके से दर्ज किया जा सकेगा जिससे उपचार के परिणामों की बेहतर समझ हो सकेगी और स्वास्थ्य नीति बनाने में मदद मिलेगी। WHO और आयुष मंत्रालय की यह पहल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए वैश्विक पहचान प्राप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह कदम न केवल भारतीय आयुष प्रणालियों को विज्ञान आधारित बना सकेगा बल्कि यह अन्य देशों में भी इन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
    भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय ने एक बड़ी पहल की है। इस पहल के तहत आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अब अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के तहत एक समर्पित मॉड्यूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस कदम से इन प्रणालियों को वैश्विक पहचान और वैज्ञानिक आधार मिलेगा। इस संदर्भ में 20-21 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक अहम तकनीकी बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक WHO और आयुष मंत्रालय के बीच 24 मई 2025 को हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन एमओयू के अंतर्गत आयोजित की गई थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के लिए एक समान कोडिंग प्रणाली का विकास करना था जिससे उपचार की प्रभावशीलता को समझने शोध और नीति निर्माण में मदद मिल सके।

    प्रधानमंत्री मोदी का विजन और वैश्विक पहचान

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि आयुष प्रणालियों को वैज्ञानिक और मानकीकृत तरीके से अपनाने से ये चिकित्सा पद्धतियां दुनिया भर में प्रभावी रूप से फैल सकती हैं। यह कदम भारतीय पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में अहम साबित होगा।

    बैठक में वैश्विक प्रतिनिधित्व

    बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव कविता गर्ग ने की। इस बैठक में WHO के छह क्षेत्रों अफ्रीका अमेरिका पूर्वी भूमध्यसागर यूरोप दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत से प्रतिनिधियों ने भाग लिया।इसके अलावा भारत भूटान ब्राजील ईरान मलेशिया नेपाल मॉरीशस दक्षिण अफ्रीका श्रीलंका फिलीपींस यूके और अमेरिका जैसे देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस बैठक में भारतीय आयुष प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए प्रमुख स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के कोड पर चर्चा की गई। साथ ही आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी चिकित्सा से जुड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड को भी विस्तृत रूप से परखा गया।

    वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को एकीकृत करना

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ जोड़ने में आसानी होगी। यह कदम सुरक्षित साक्ष्य-आधारित और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देगा। विशेष रूप से आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का यह अवसर है।

    भारत की प्रमुख भूमिका
    भारत जो पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक अहम केंद्र है इस पहल में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस बैठक में भारतीय टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया जिसमें प्रो. रबिनारायण आचार्य महानिदेश सीसीआरएएस प्रो. एनजे मुथुकुमार सीसीआरएसऔर डॉ. जहीर अहमद महानिदेशक सीसीआरयूएम जैसे प्रमुख विशेषज्ञ शामिल थे।

    WHO के वैश्विक प्रयास
    इस पहल में डब्ल्यूएचओ के जानी-मानी शख्सियतों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। जिनेवा में डब्ल्यूएचओ मुख्यालय के प्रमुख प्रतिनिधि रॉबर्ट जैकब नेनाद कोस्टांजेक स्टीफन एस्पिनोसा और डॉ. प्रदीप दुआ ने वर्गीकरण चर्चाओं का नेतृत्व किया। साथ ही डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर जीटीएमसी और डब्ल्यूएचओ एसईएआरओ कार्यालय से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस पहल को प्रभावी बनाने में मदद की।

    पारंपरिक चिकित्सा के लिए समर्पित मॉड्यूल

    यह पहल पारंपरिक चिकित्सा उपचारों के लिए एक समर्पित वर्गीकरण प्रणाली को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दुनिया भर में पारंपरिक इलाज की जानकारी को सही तरीके से दर्ज किया जा सकेगा जिससे उपचार के परिणामों की बेहतर समझ हो सकेगी और स्वास्थ्य नीति बनाने में मदद मिलेगी। WHO और आयुष मंत्रालय की यह पहल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए वैश्विक पहचान प्राप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह कदम न केवल भारतीय आयुष प्रणालियों को विज्ञान आधारित बना सकेगा बल्कि यह अन्य देशों में भी इन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।

  • दिल्ली के वजीराबाद फ्लाईओवर पर चलती कार में लगी आग पुलिस ने शीशा तोड़कर बचाई चालक की जान

    दिल्ली के वजीराबाद फ्लाईओवर पर चलती कार में लगी आग पुलिस ने शीशा तोड़कर बचाई चालक की जान


    नई दिल्ली । दिल्ली के वजीराबाद फ्लाईओवर पर रविवार शाम एक चलती कार में अचानक आग लग गई जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। आग लगने के कारण कार का सेंट्रल लॉक जाम हो गया और चालक अंदर फंस गया। हालांकि दिल्ली पुलिस के ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने अपनी बहादुरी से ड्राइवर की जान बचा ली। घटना रविवार शाम की है जब बुराड़ी से मजनू का टीला की तरफ जा रही कार में वजीराबाद फ्लाईओवर पर आग लग गई। आग लगते ही कार का सेंट्रल लॉक काम नहीं करने लगा और चालक अंदर फंस गया। इस स्थिति में ट्रैफिक पुलिस की बहादुरी की वजह से एक बड़ा हादसा टल गया।

    पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया ने बचाई जान
    टीम इंस्पेक्टर टीआई संतोष गुप्ता और उनके साथी पुलिसकर्मी वजीराबाद फ्लाईओवर के पास ड्यूटी पर तैनात थे जब उन्होंने देखा कि एक कार धू-धू कर जल रही है और उसके अंदर चालक फंसा हुआ है। तुरंत ही उन्होंने अपनी कार्रवाई शुरू की। संतोष गुप्ता ने बताया “कार में आग लगने के बाद ड्राइवर सेंट्रल लॉक की वजह से अंदर फंसा हुआ था। हम पहले तो दरवाजे को खोलने की कोशिश करते रहे लेकिन सफल नहीं हो सके। तब हमने शीशा तोड़कर चालक को बाहर निकाला।

    पानी से आग पर काबू पाया गया
    इसी दौरान पास ही खड़ा एमसीडी का पानी का टैंकर भी मौके पर पहुंच गया। ट्रैफिक पुलिस ने इसका इस्तेमाल कर कार की आग पर काबू पाया। पुलिसकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से आग को बढ़ने से रोका गया और चालक को किसी भी बड़ी चोट से बचा लिया गया।इस पूरी घटना के दौरान वजीराबाद फ्लाईओवर पर ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ। कार के जलने और पुलिस की कार्रवाई के कारण सड़क पर जाम लग गया था। हालांकि पुलिस ने तुरंत रास्ता खाली करने और ट्रैफिक की समस्या को हल करने के लिए काम किया।

    दमकल को देरी से सूचना
    घटना की जानकारी दमकल विभाग को दी गई थी लेकिन जाम के कारण उन्हें घटनास्थल पर पहुंचने में कुछ समय लग गया। इस बीच पुलिस ने अपनी तत्परता से चालक की जान बचाई और आग पर काबू पा लिया।

    टीआई संतोष गुप्ता ने दी प्रतिक्रिया
    टीआई संतोष गुप्ता ने कहा हमारा सबसे पहला उद्देश्य था कि चालक को सुरक्षित निकाला जाए। इसके बाद हमने पास ही खड़े पानी के टैंकर से आग को बुझाया। टीम की त्वरित कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया।इस घटना से यह साबित होता है कि आपातकालीन स्थिति में पुलिस और अन्य एजेंसियों की तत्परता और बहादुरी से जान बचाने में मदद मिल सकती है। दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को कई लोग सराह रहे हैं क्योंकि एक सामान्य घटना में यदि समय रहते सही कदम नहीं उठाए जाते तो परिणाम गंभीर हो सकते थे।

  • सूरत कोर्ट ने 7 साल की बच्ची की जैन साध्वी दीक्षा पर लगाई रोक

    सूरत कोर्ट ने 7 साल की बच्ची की जैन साध्वी दीक्षा पर लगाई रोक


    सूरत । गुजरात जिले की फैमिली कोर्ट ने 7 साल की एक बच्ची को जैन साध्वी बनने की दीक्षा लेने से रोक दिया है। यह फैसला बच्ची के पिता की याचिका पर लिया गया जिसमें उन्होंने दावा किया कि उनकी अलग रह रही पत्नी उनकी मर्जी के खिलाफ बच्ची को दीक्षा दिलाना चाहती थी। अदालत ने मां से हलफनामा देने को कहा है कि वह बच्ची को साध्वी बनने की दीक्षा में शामिल न होने दे।

    सूरत फैमिली कोर्ट की जज एसवी मंसूरी ने आदेश दिया कि 8 फरवरी 2026 को मुंबई में होने वाले दीक्षा समारोह पर फिलहाल रोक रहेगी। याचिकाकर्ता पिता के वकील समाप्ति मेहता ने बताया कि अदालत ने अंतरिम रोक लगाने की मांग मान ली है। अदालत ने मां से लिखित में जवाब मांगा है जिसमें उन्हें स्पष्ट करना होगा कि वह बच्ची को दीक्षा समारोह में शामिल नहीं होने देंगी। अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी।

    सुनवाई के दौरान यह जानकारी सामने आई कि मां ने यह विवाद लगभग एक साल पहले उत्पन्न होने के बाद पति का घर छोड़ दिया था। महिला अपने माता-पिता के साथ रहने लगी साथ ही उसने अपनी बेटी और बेटे को भी साथ रखा। पिता ने 10 दिसंबर को कोर्ट में याचिका दायर की जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी उनकी मर्जी के खिलाफ बच्ची को साध्वी बनाने का निर्णय ले रही है।

    पिता ने अदालत को बताया कि उन्होंने 2012 में शादी की थी और उनके दो बच्चे हैं। 2024 से पति-पत्नी अलग रह रहे हैं। पिता ने याचिका में कहा कि बच्ची के साध्वी बनने के मुद्दे पर दोनों ने पहले सहमति बनाई थी कि जब बच्ची बालिग हो जाएगी तभी वह साध्वी बनने का निर्णय लेगी। इसके बावजूद पत्नी चाहती थी कि बच्ची फरवरी 2026 में मुंबई में बड़े समारोह में साध्वी बने।

    पिता ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनकी पत्नी केवल तभी घर वापस आएगी जब वह बच्ची की दीक्षा के लिए रजामंद होगी। पिता ने अदालत से यह भी कहा कि वह गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट 1890 के तहत बच्ची के हितों की रक्षा के लिए उसका कानूनी अभिभावक बनाना चाहते हैं।

    अदालत ने पिता की याचिका पर मां को नोटिस जारी किया और 22 दिसंबर तक जवाब मांगा। जज मंसूरी ने स्पष्ट किया कि बच्ची की उम्र देखते हुए और उसके भविष्य के हित को ध्यान में रखते हुए दीक्षा पर रोक आवश्यक है। अदालत का यह निर्णय बच्चों के अधिकारों और उनकी इच्छाओं का सम्मान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    जैन समुदाय में दीक्षा एक धार्मिक प्रक्रिया है लेकिन इस मामले ने दिखाया कि कम उम्र के बच्चों को ऐसे बड़े निर्णय लेने के लिए मजबूर करना कानूनी और सामाजिक दृष्टि से विवादास्पद हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में बच्चों की भागीदारी तभी होनी चाहिए जब वे पूरी तरह से अपनी मर्जी से निर्णय ले सकें।

    अदालत का यह निर्णय न केवल इस परिवार के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है कि बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। फिलहाल बच्ची को साध्वी बनने की प्रक्रिया से रोक दिया गया है और मां से हलफनामा लेने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। अगली सुनवाई 2 जनवरी 2026 को होगी जिसमें अदालत पूरी स्थिति की समीक्षा करेगी।

  • यूपी में मायावती-अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ाएंगे रामदास आठवले? इस दावे से तेज हुई सियासी हलचल UP Politics: केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने यूपी में एंट्री की तैयारी कर ली है. सोमवार को उन्होंने यूपी पार्टी कार्यकर्ताओं

    यूपी में मायावती-अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ाएंगे रामदास आठवले? इस दावे से तेज हुई सियासी हलचल UP Politics: केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने यूपी में एंट्री की तैयारी कर ली है. सोमवार को उन्होंने यूपी पार्टी कार्यकर्ताओं


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार में एनडीए की सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी उत्तर प्रदेश में एंट्री करने की तैयारी कर रही हैं. जिससे आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने दावा किया कि वो यूपी में डीपीए यानी दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक के साथ मिलकर बदलाव लाएंगे. रामदास आठवले ने दावा किया कि यूपी के 75 जिलों में से 62 जिलों में रिपब्लिकन पार्टी की कार्यकारिणी बन चुकी है. पार्टी अगले साल 5 अप्रैल 2026 को लखनऊ में एक बड़ी रैली करेगी, जिसमें 1 लाख से लोगों के शामिल होने का अनुमान है. उन्होंने कहा कि अब बसपा की जगह रिपब्लिकन पार्टी ने ली है. दलितों और गरीब को न्याय दिलाने वाली पार्टी रिपब्लिकन पार्टी रहेगी.

    यूपी में सपा-बसपा की मुश्किल बढ़ाएंगे आठवले
    आठवले ने बसपा प्रमुख मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके सत्ता में इतने लंबे समय तक रहने के बावजूद दलितों, शोषितों, वंचितों, गरीबों और महिलाओं के लिए शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में कोई खास सुधार नहीं हुआ. अखिलेश यादव द्वारा दिया गया पीडीए पिछड़ा वर्ग, दलित, अल्पसंख्यक का नारा सिर्फ एक चुनावी वादा बनकर रह गया है.

    पीडीए के जवाब में यूपी डीपीए की लड़ाई!

    आरपीआई आठवले अब डीपीए दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक की अवधारणा को जमीन पर मजबूती से लागू करेगी और असली बदलाव लाएगी. आठवले ने सोमवार को इस संबंध में उत्तर प्रदेश कार्यकारी समिति की समीक्षा बैठक की. इस बैठक में प्रदेश की राजनीतिक स्थिति, दलित, शोषित और वंचित समुदायों की समस्याओं एवं पार्टी के संगठन के विस्तार पर विस्तार से चर्चा हुई. आठवले ने कहा कि आरपीआई इन मुद्दों पर सिर्फ नारे नहीं लगाती बल्कि जमीन पर प्रभावी ढंग से काम कर रही है. अखिलेश यादव द्वारा दिया गया पीडीए का नारा केवल चुनावी घोषणा बनकर रह गया. पार्टी अब डीपीए की अवधारणा को लेकर जमीन पर मजबूती से उतरेगी और वास्तविक बदलाव लाएगी.

  • भारत टैक्सी जो बदल देगी कैब बुकिंग की तस्वीर, जानें इसके बारे में वो सब कुछ जो आपके लिए है जरूरी

    भारत टैक्सी जो बदल देगी कैब बुकिंग की तस्वीर, जानें इसके बारे में वो सब कुछ जो आपके लिए है जरूरी

    नई दिल्ली
    ।भारत टैक्सी एक नई सहकारी राइड-हेलिंग सर्विस है जो 1 जनवरी, 2026 को भारत में आधिकारिक तौर पर लॉन्च होगी। उबर और ओला से उलट यह ड्राइवर-स्वामित्व वाले मॉडल के मुताबिक चलती है जो जीरो कमीशन, कोई सर्ज प्राइसिंग नहीं और ड्राइवरों के लिए उचित कमाई का वादा करती है।
    1 जनवरी से शुरू हो रही है सर्विस
    देश में भारत टैक्सी सर्विस 1 जनवरी, 2026 से शुरू होने की घोषणा की गई है। यह एक इनोवेटिव टैक्सी सर्विस है जिसमें ग्राहकों को कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी बुक करने का ऑप्शन मिलेगा और यह सब एक विशेष रूप से डेवलप किए गए एप्लिकेशन के माध्यम से किया जा सकेगा। हालांकि यह Uber, Ola या Rapido जैसी दिखती है, लेकिन यह उनसे पूरी तरह अलग है। यह सर्विस दिल्ली और गुजरात के कुछ क्षेत्रों में बीटा वर्जन में पहले ही शुरू हो चुकी है, जिससे यूजर्स को सर्विस का एक्जीक्यूशन कैसा रहने वाला है, इसका कुछ-कुछ अंदाजा मिल रहा है।

    भारत टैक्सी क्या है?

    भारत टैक्सी एक सहकारी टैक्सी सर्विस मॉडल पर काम करती है। इसका अर्थ है कि सर्विस का नियंत्रण ड्राइवरों के पास है ना कि किसी निजी कंपनी या निवेशक के पास। इसे ‘टैक्सी के लिए अमूल मॉडल’ भी कहा जा सकता है, जिसमें हजारों टैक्सियां मिलकर सर्विस ऑपरेट करती हैं। अन्य टैक्सी ऐप्स की तरह ही यह यूजर्स के लिए आसान राइड बुकिंग की सुविधा प्रदान करती है। यह ड्राइवरों को ज्यादा कंट्रोल और कमाई के मौके दिलाती है।

    भारत टैक्सी किसकी पहल है?

    यह सर्विस नई दिल्ली स्थित सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड की तरफ से सपोर्टेड है। सहकारी समिति के चेयरमैन जयेन मेहता अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं। इसके डेवलपमेंट और सर्विसेज में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय का भी सहयोग है। यह भारतीय परिवहन बाजार में अपनी तरह की एक बड़ी और पहली पहल है।

    भारत टैक्सी कैसे काम करती है?

    भारत टैक्सी कमीशन-फ्री बिजनेस मॉडल पर चलती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि ड्राइवरों को दिन के अंत में अपनी कमाई का 80 परसेंट से 100 परसेंट हिस्सा वापस मिल सके। यह ज्यादातर ऑनलाइन कैब सर्विसेज की तरफ से लिए जाने वाले कमीशन से उल्टा है। हालांकि ड्राइवरों को प्लेटफॉर्म का यूज करने के लिए एक छोटी सी फीस देनी होगी, लेकिन यह बहुत कम होगी और केवल ऑपरेशनल खर्चों के लिए उपयोग की जाएगी। यात्रियों के लिए इस मॉडल का अर्थ यह हो सकता है कि कोई सर्ज प्राइसिंग नहीं होगी, और घर या दफ्तर जैसे रूट्स के लिए किराया स्थिर रहेगा।

    भारत टैक्सी को डाउनलोड और इस्तेमाल कैसे करें?
    भारत टैक्सी एप्लिकेशन गूगल प्ले स्टोर एंड्रॉइड और एप्पल ऐप स्टोर (आईफोन) पर उपलब्ध है। फिलहाल ऐप की बीटा टेस्टिंग चल रही है इसलिए इसकी सर्विसेज लिमिटेड हैं। इसके देशव्यापी लॉन्च के बाद ऐप का अंतिम संस्करण अलग हो सकता है। इस ऐप में ONDC से सपोर्टेड Namma Yatri ऐप जैसी ही बैकएंड सपोर्ट तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

  • किसान दिवस 2025 जब मंत्री की पत्नी के हिस्से आई फटी धोतीचौधरी चरण सिंह की ईमानदारी का वो किस्सा जो आज मिसाल है

    किसान दिवस 2025 जब मंत्री की पत्नी के हिस्से आई फटी धोतीचौधरी चरण सिंह की ईमानदारी का वो किस्सा जो आज मिसाल है


    इंदौर । लखनऊ आज किसान दिवस है यह दिन देश के उन अन्नदाताओं को समर्पित है जिनकी मेहनत से हमारी थाली सजती है। लेकिन जब भी किसानों की बात होती हैदेश के पूर्व प्रधानमंत्री और ‘किसानों के मसीहा’ चौधरी चरण सिंह का नाम सबसे ऊपर आता है। साल 2025 में भी उनके जीवन के किस्से राजनीति में शुचिता और ईमानदारी की सबसे बड़ी मिसाल माने जाते हैं।

    1966 का वो दौर: मंत्री पद और सादा जीवन

    किस्सा साल 1966 का है। उस वक्त चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में वन मंत्री जैसे कद्दावर पद पर थे। सत्ता और सुविधाओं की कोई कमी नहीं थीलेकिन उनका रहन-सहन किसी साधारण किसान जैसा ही था। उनकी सादगी का आलम यह था कि उनके घर में सुबह की शुरुआत आज के नेताओं की तरह तामझाम से नहींबल्कि अनुशासन और सादगी से होती थी।

    जब बेटी वन विभाग की जीप से घर आई

    एक सुबह उनकी बड़ी बेटी सत्यवती अपने बच्चों के साथ आगरा से लखनऊ अपने पिता से मिलने पहुंचीं। बातचीत के दौरान जब चौधरी साहब को पता चला कि सत्यवती सरकारी कार्य के लिए आवंटित ‘वन विभाग की जीप’ से आई हैंतो वे बेहद आहत हुए। उन्होंने अपनी बेटी को स्पष्ट समझाया कि सरकारी सुविधाएं जनता की अमानत हैंपरिवार के निजी उपयोग के लिए नहीं। उन्होंने अपनी बेटी से उस यात्रा का किराया तक सरकारी कोष में जमा करवाया था।

    पत्नी की फटी धोती और अटूट ईमानदारी

    चौधरी चरण सिंह की ईमानदारी का सबसे भावुक कर देने वाला पहलू उनकी पत्नी गायत्री देवी से जुड़ा है। कहा जाता है कि जब वे मंत्री थेतब भी उनकी पत्नी फटी हुई धोती को टांका लगाकर पहनती थीं। एक बार किसी ने टोका कि “चौधरी साहब मंत्री हैंआप नई धोती क्यों नहीं ले लेतीं?” इस पर सादगी भरा जवाब मिला कि जो है उसी में संतोष है। चौधरी साहब का मानना था कि यदि वे अपनी मेहनत की कमाई से अधिक खर्च करेंगेतो उन्हें भ्रष्टाचार का सहारा लेना पड़ेगाजो उनके उसूलों के खिलाफ था।

    आज के दौर में प्रासंगिकता

    चौधरी चरण सिंह के ये किस्से आज के दौर के राजनेताओं के लिए एक आईना हैं। उन्होंने न केवल किसानों के हक की लड़ाई लड़ीबल्कि यह भी सिद्ध किया कि सत्ता में रहकर भी इंसान अपनी जड़ों और सादगी से जुड़ा रह सकता है। यही कारण है कि आज दशकों बाद भी किसान दिवस पर उनकी ईमानदारी की गाथाएं उतनी ही प्रासंगिक हैं। अवसर राष्ट्रीय किसान दिवस 2025। व्यक्तित्व पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह। आदर्श सरकारी जीप के उपयोग पर बेटी से वसूला था किराया। सादगी मंत्री पद पर रहते हुए भी पत्नी पहनती थीं फटी धोती।

  • उद्घाटन में देर से पहुंचे मेयर, ट्रेन उनके बिना ही हो गई रवाना; वायरल हुआ वीडियो

    उद्घाटन में देर से पहुंचे मेयर, ट्रेन उनके बिना ही हो गई रवाना; वायरल हुआ वीडियो


    नई दिल्ली । उद्घाटन में देर से पहुंचे मेयर ट्रेन उनके बिना ही हो गई रवाना; वायरल हुआ वीडियो मेयर प्लेटफॉर्म पर ही रह गए जबकि ट्रेन बिना रुके आगे बढ़ गई। इस घटना का वीडियो कैमरों में कैद हो गया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में मेयर को अपनी टीम के साथ दौड़ते और ट्रेन के जाते हुए देखा जा सकता है।मेक्सिको के जलिस्को में 15 दिसंबर को लाइट रेल लाइन 4 का उद्घाटन हुआ।
    यह 21 किलोमीटर लंबी लाइन 8 स्टेशनों को जोड़ती है और दक्षिणी क्षेत्र में यातायात की समस्याओं को कम करने के लिए बनाई गई है। हालांकि समारोह के दौरान एक मजेदार घटना हुई जिसने इसे खास बना दिया। पहली यात्रा के लिए ट्रेन में सवार होने का समय हो चुका था। मेयर क्विरिनो वेलाज्क्वेज थोड़ी देर से पहुंचे और अपनी टीम के साथ दौड़ते हुए ट्रेन तक पहुंचे। वे ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे लेकिन इससे पहले कि वे सवार हो पाते दरवाजे बंद हो गए और ट्रेन तय समय पर रवाना हो गई।
    मेयर प्लेटफॉर्म पर ही रह गए जबकि ट्रेन बिना रुके आगे बढ़ गई। इस घटना का वीडियो कैमरों में कैद हो गया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में मेयर को अपनी टीम के साथ दौड़ते और ट्रेन के जाते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो को एक्स लाखों बार देखा जा चुका है खासकर भारत में जहां लोगों ने इसे भारतीय वीआईपी कल्चर से तुलना की। कई यूजर्स ने ट्रेन की समय पालन की तारीफ की और कहा कि भारत में मंत्री के लिए ट्रेन रोक दी जाती।

    वायरल वीडियो पर क्या बोले मेयर
    मेयर ने खुद इस वीडियो को अपने अकाउंट पर शेयर किया। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में लिखा ‘चिंता मत कीजिए। अगली ट्रेन सिर्फ 9 मिनट में आएगी।’ बता दें कि उद्घाटन समारोह में मेयर पाब्लो लेमुस नवारो और नगर के मेयर गेरार्डो क्विरिनो वेलाज्क्वेज चावेज मौजूद थे। इस लाइन से रोजाना करीब 1.16 लाख यात्रियों को फायदा होने की उम्मीद है। शुरुआती दिनों में यात्रा मुफ्त रखी गई है। कुछ समय बाद इसका किराया तय किया जाएगा