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  • “पत्नी नौकरानी नहीं, बराबर की साथी है” — सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

    “पत्नी नौकरानी नहीं, बराबर की साथी है” — सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी


    नई दिल्ली। वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पति को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ कहा कि शादी किसी नौकरानी से नहीं, बल्कि जीवनसाथी से की जाती है। अदालत ने दो टूक कहा कि घर के कामों में पति को भी बराबरी से हाथ बंटाना होगा।

    कोर्ट ने टिप्पणी की कि खाना बनाना, कपड़े धोना या घर संभालना सिर्फ पत्नी की जिम्मेदारी नहीं है। समय बदल चुका है और पति-पत्नी दोनों को मिलकर जिम्मेदारियां निभानी चाहिए।

    तलाक की मांग पर कोर्ट सख्त

    मामले में पति ने ‘क्रूरता’ के आधार पर तलाक की मांग की थी। उसका आरोप था कि पत्नी घर का काम नहीं करती और उसके साथ दुर्व्यवहार करती है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पत्नी घरेलू काम ठीक से नहीं करती, तो इसे क्रूरता नहीं माना जा सकता।

    अदालत ने कहा कि इस आधार पर तलाक देना उचित नहीं है और पति को अपने नजरिए में बदलाव लाना चाहिए।

    2017 में हुई थी शादी

    दोनों की शादी वर्ष 2017 में हुई थी और उनका एक आठ साल का बेटा भी है। पति का कहना था कि शादी के कुछ ही समय बाद पत्नी का व्यवहार बदल गया और वह उसके माता-पिता के प्रति भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करती है।

    हालांकि, कोर्ट ने इस विवाद को सुलझाने के लिए पहले मध्यस्थता (मेडिएशन) का रास्ता सुझाया था, लेकिन दोनों के बीच सहमति नहीं बन पाई। अब मामले की अगली सुनवाई तय की गई है।

    दूसरे मामले में भी दिलचस्प टिप्पणी

    इसी दिन एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक फरार जोड़े की सुरक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें सीधे राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वे इसके लिए संबंधित दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करें।

    बताया गया कि यह जोड़ा सोशल मीडिया से प्रभावित होकर इस गलतफहमी में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था कि वह परिसर में शादी कर सकता है और तुरंत सुरक्षा मिल जाएगी। अदालत ने इस पर अप्रत्यक्ष रूप से नाराजगी जताते हुए उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी।

  • अग्निपथ भर्ती में बड़ा बदलाव: नेपाली गोरखाओं की एंट्री बंद, केवल भारतीय गोरखा ही पात्र

    अग्निपथ भर्ती में बड़ा बदलाव: नेपाली गोरखाओं की एंट्री बंद, केवल भारतीय गोरखा ही पात्र

    आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जून से शुरू होने वाली भर्ती के लिए जारी नोटिफिकेशन में ‘गोरखा’ की जगह केवल ‘भारतीय गोरखा’ का उल्लेख किया गया है। इससे स्पष्ट है कि अब सिर्फ भारत में रहने वाले गोरखा युवा ही आवेदन कर सकेंगे।

    नेपाल के रुख का असर

    इस बदलाव के पीछे नेपाल का पहले से चला आ रहा विरोध अहम माना जा रहा है। जब अग्निपथ योजना लागू की गई थी, तब नेपाल ने इसे भारत, ब्रिटेन और नेपाल के बीच हुए पुराने त्रिपक्षीय समझौते के खिलाफ बताया था।

    नेपाल के विरोध के बाद वहां स्थित भारतीय सेना के दो भर्ती केंद्र भी बंद हो गए थे, जहां से लंबे समय से गोरखा सैनिकों की भर्ती होती थी। भारत ने कई बार बातचीत के जरिए स्थिति सुलझाने की कोशिश की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।

    सुरक्षा और अवसर भी वजह

    सूत्रों के अनुसार, नेपाल में बढ़ते भारत-विरोधी माहौल और बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इसके अलावा नेपाली गोरखाओं के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निजी सुरक्षा एजेंसियों और विदेशी सेनाओं में काम करने के बेहतर अवसर भी मौजूद हैं।

    बताया जाता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी कई गोरखा सैनिकों को रूसी सेना में काम करने के मौके मिले। वहीं, ब्रिटेन की सेना में गोरखाओं की भर्ती पहले से जारी है।

    भारतीय सेना में पहले से बड़ी मौजूदगी

    फिलहाल भारतीय सेना की गोरखा राइफल्स में करीब 30 हजार से अधिक नेपाली गोरखा सैनिक सेवा दे रहे हैं। इसके अलावा नेपाल में बड़ी संख्या में पूर्व गोरखा सैनिक भी हैं, जिन्हें भारत सरकार हर साल लगभग 500–600 करोड़ रुपये पेंशन के रूप में देती है।

    भारतीय गोरखा युवाओं को फायदा

    इस फैसले से भारत में रह रहे गोरखा युवाओं के लिए सेना में भर्ती के अवसर बढ़ने की संभावना है। अब वे सीमित प्रतिस्पर्धा के बीच ज्यादा मौके हासिल कर सकेंगे।

    कुल मिलाकर, अग्निपथ योजना के तहत यह बदलाव भारत-नेपाल सैन्य सहयोग के लंबे इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

  • गाजियाबाद में ISI जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, 5 नाबालिग समेत 9 और गिरफ्तार; 15 तक पहुंची संख्या

    गाजियाबाद में ISI जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, 5 नाबालिग समेत 9 और गिरफ्तार; 15 तक पहुंची संख्या


    गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा करते हुए पुलिस ने शुक्रवार को 9 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 5 नाबालिग भी शामिल हैं। इसके साथ ही इस मामले में अब तक कुल 15 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। नाबालिग आरोपियों को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया है।

    पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह आईएसआई के इशारे पर देश के सैन्य ठिकानों और संवेदनशील स्थानों की जानकारी पाकिस्तान भेज रहा था। इतना ही नहीं, आरोपियों ने देश के बड़े उद्योगपतियों जैसे गौतम अडानी और मुकेश अंबानी के घरों की लोकेशन और वीडियो भी साझा किए थे।

    नाबालिग भी साजिश में शामिल

    गिरफ्तार नाबालिगों की उम्र 15 से 17 वर्ष के बीच बताई जा रही है।

    इनमें एक 9वीं कक्षा का छात्र भी शामिल है, जो संवेदनशील जगहों की रेकी और कैमरे लगाने के काम में लगा था। पुलिस ने आरोपियों के पास से 9 मोबाइल फोन और 10 सिम कार्ड बरामद किए हैं।

    जांच में सामने आया है कि आरोपी पाकिस्तानी नंबरों के अलावा मलेशिया और यूके के वर्चुअल नंबर के जरिए अपने हैंडलर्स से संपर्क में थे।

    कई राज्यों से जुड़े साजिश के तार

    पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में मेरठ, कौशांबी और नवी मुंबई से जुड़े लोग शामिल हैं। वहीं, गिरोह के मुख्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। शुरुआती जांच में इस नेटवर्क के तार बिहार और अन्य राज्यों से भी जुड़े पाए गए हैं।

    बड़े आतंकी हमले की थी साजिश

    जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क देश के कई राज्यों—जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश—में सिलसिलेवार हमलों की साजिश रच रहा था। यह साजिश करीब दो साल से चल रही थी और दूसरे चरण में ही आरोपियों को पकड़ लिया गया।

    सूत्रों के मुताबिक, साजिश के तहत 50 से ज्यादा जगहों पर सौर ऊर्जा से चलने वाले कैमरे लगाने की योजना थी, ताकि संवेदनशील गतिविधियों की निगरानी की जा सके।

    समुद्री रास्तों की भी रेकी

    एक आरोपी ने मुंबई पोर्ट की रेकी कर वहां की फोटो और वीडियो पाकिस्तान भेजे थे। जांच एजेंसियां इसे बेहद गंभीर मान रही हैं, क्योंकि पहले भी 26/11 जैसे आतंकी हमलों में समुद्री रास्ते का इस्तेमाल किया जा चुका है।

    अगला निशाना जालंधर था

    पूछताछ में सामने आया है कि दिल्ली के बाद जालंधर को निशाना बनाने की तैयारी थी। हालांकि, एक आरोपी निजी कारणों से तय समय पर वहां नहीं पहुंच सका, जिससे संभावित बड़ा हमला टल गया।

    फिलहाल, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं और आरोपियों पर कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की तैयारी है।

  • 'सच दिखाया तो हो रही तकलीफ', 'धुरंधर 2' के विरोध पर पूर्व DGP एस.पी. वैद का पलटवार

    'सच दिखाया तो हो रही तकलीफ', 'धुरंधर 2' के विरोध पर पूर्व DGP एस.पी. वैद का पलटवार

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.पी. वैद ने फिल्म धुरंधर 2 का खुलकर समर्थन किया है और इसके आलोचकों पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि फिल्म में अतीक अहमद और दाऊद इब्राहिम जैसे गैंगस्टरों को लेकर जो दिखाया गया है, वह कड़वी लेकिन वास्तविक सच्चाई है।

    वैद ने कहा कि अतीक अहमद के पाकिस्तान से संबंध और अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े मामले किसी से छिपे नहीं हैं। उनके मुताबिक, “अतीक अहमद भले ही सांसद रहा हो, लेकिन वह एक कुख्यात गैंगस्टर था। उसके पास अवैध हथियार कैसे पहुंचते थे और पाकिस्तान से उसके क्या रिश्ते थे, यह जगजाहिर है। फिल्म इसी हकीकत को सामने लाती है।”

    पूर्व डीजीपी ने यह भी आरोप लगाया कि देश में कुछ नेता जाली नोटों के रैकेट में शामिल रहे हैं और पाकिस्तान तक मशीनें पहुंचाने में उनकी भूमिका रही। उन्होंने कहा कि ऐसे हालातों के चलते ही नोटबंदी जैसा कड़ा कदम उठाना पड़ा था।

    विपक्षी दलों द्वारा फिल्म को “सरकारी प्रोपेगेंडा” बताए जाने पर वैद ने पलटवार करते हुए कहा, “जब तक दाऊद इब्राहिम के पैसे से फिल्में बनती थीं, तब तक किसी को समस्या नहीं थी। अब जब सच्चाई दिखाई जा रही है, तो लोगों को मिर्ची लग रही है।” उन्होंने साफ किया कि इस फिल्म में किसी सरकारी फंड का इस्तेमाल नहीं हुआ है और यह वास्तविक घटनाओं से प्रेरित एक साहसिक प्रयास है।

    फिल्म को लेकर देश में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां एक तरफ इसे समर्थन मिल रहा है, वहीं कुछ राजनीतिक दल इसे प्रोपेगेंडा करार देकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, एस.पी. वैद का मानना है कि फिल्म की कहानी वास्तविक तथ्यों के काफी करीब है और इसे उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।

  • बिहार में सत्ता बदलाव के संकेत: BJP को CM पद, JDU के हिस्से दो डिप्टी CM की चर्चा तेज

    बिहार में सत्ता बदलाव के संकेत: BJP को CM पद, JDU के हिस्से दो डिप्टी CM की चर्चा तेज

    नई दिल्ली। बिहार की सियासत में बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) के बीच नई सत्ता व्यवस्था को लेकर सहमति बनती दिख रही है, जिसमें दोनों दलों की भूमिकाएं बदल सकती हैं।

    अब तक नीतीश कुमार के नेतृत्व में चल रही सरकार में BJP ‘बड़े भाई’ की भूमिका में आ सकती है और मुख्यमंत्री पद उसके खाते में जाने की चर्चा है। वहीं, JDU को दो उपमुख्यमंत्री पद मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    जल्‍द हो सकता है सत्ता परिवर्तन
    सूत्रों के अनुसार, इस सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है, जिससे राज्य की राजनीतिक संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल से राज्यसभा सदस्य के रूप में अपना नया कार्यकाल शुरू करेंगे। इससे पहले वे मुख्यमंत्री पद और विधान परिषद की सदस्यता छोड़ सकते हैं। JDU सूत्रों का कहना है कि वे केंद्र सरकार में शामिल होने के बजाय राज्यसभा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

    नई व्यवस्था के तहत मंत्रालयों का बंटवारा भी तय माना जा रहा है। BJP के पास मुख्यमंत्री पद के साथ 15 मंत्री पद होंगे, जबकि JDU को दो डिप्टी CM समेत 16 मंत्री पद मिल सकते हैं। गृह मंत्रालय और विधानसभा अध्यक्ष का पद BJP के पास रहेगा, जबकि विधान परिषद के सभापति का पद JDU को दिए जाने की संभावना है।

    निशांत कुमार की एंट्री
    इस राजनीतिक बदलाव में निशांत कुमार की एंट्री भी अहम मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि दूसरे डिप्टी CM के रूप में JDU के किसी वरिष्ठ नेता को जिम्मेदारी दी जाएगी।

    बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार सरकार को मार्गदर्शन देते रहेंगे और पार्टी संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने पर फोकस करेंगे। सहयोगी दलों के लिए भी पुराना फॉर्मूला जारी रहने की संभावना है, जिसमें लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दो मंत्री पद, जबकि अन्य सहयोगियों को एक-एक पद मिल सकता है।

    नीतीश का सम्राट चौधरी की ओर इशारा
    इसी बीच, हाल ही में जमुई और सहारसा में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी की ओर इशारा करते हुए कहा कि वे बिहार को आगे बढ़ाएंगे। इसके बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं कि सम्राट चौधरी को भविष्य के मुख्यमंत्री के तौर पर देखा जा रहा है।

    हालांकि, JDU की ओर से इन अटकलों को खारिज किया गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय चौधरी ने साफ कहा कि नीतीश कुमार ने किसी को अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है। इसके बावजूद बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं लगातार तेज बनी हुई हैं।

  • एलपीजी संकट: गुजरात के सूरत में प्रवासी मजदूर गांव लौटे, पलायन से कामगारों की बढ़ी कमी

    एलपीजी संकट: गुजरात के सूरत में प्रवासी मजदूर गांव लौटे, पलायन से कामगारों की बढ़ी कमी

    सूरत। गुजरात के सूरत में पश्चिम एशिया तनाव के असर से रसोई गैस (एलपीजी) की भारी किल्लत उत्पन्न हो गई है। इसके चलते बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने गांव लौटने को मजबूर हैं। उधना रेलवे स्टेशन से घर जाने की तैयारी कर रहे मजदूरों ने बताया कि काम होने के बावजूद गैस की कमी ने जीवन बेहद मुश्किल बना दिया है। कई दिनों से खाना बनाने के लिए गैस उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें भूखे रहने तक की स्थिति का सामना करना पड़ा।

    गैस की कीमत 500 रुपये प्रति किलो तक

    मजदूरों का आरोप है कि गैस की कीमत अब लगभग 500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो उनकी पहुंच से बाहर है। एक मजदूर सचिन ने कहा कि पैसों की कमी और गैस न मिलने के कारण वे गांव लौटने को मजबूर हैं। वहीं, एक महिला मजदूर ने बताया कि गैस खत्म हुए एक सप्ताह हो गया है और लगातार प्रयास करने के बावजूद सिलिंडर नहीं मिल रहा। आर्थिक तंगी के चलते वह अपनी बेटी के साथ गांव जा रही हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य सूरत में ही रहेंगे। मजदूरों ने स्पष्ट किया कि गैस आपूर्ति सामान्य होने पर वे काम पर लौटेंगे, लेकिन फिलहाल हालात ने उन्हें पलायन के लिए मजबूर कर दिया है।

    उद्योगों में श्रमिकों की कमी

    सूरत के टेक्सटाइल उद्योगों में मजदूरों के पलायन से कामगारों की कमी बढ़ गई है। मजदूर कमल पाल ने बताया कि मकान मालिकों ने लकड़ी से खाना बनाने पर भी रोक लगा दी है, जिससे हालात और कठिन हो गए हैं। मजदूरों का कहना है कि जैसे ही एलपीजी की आपूर्ति सामान्य होगी, वे वापस लौटेंगे। फिलहाल यह संकट उद्योगों और मजदूरों दोनों के लिए चुनौती बन चुका है।

  • मोदी जी कह देंगे तो पापा खा लेंगे दवा…. बेटे की भावुक अपील से इमोशनल हुए लोग….

    मोदी जी कह देंगे तो पापा खा लेंगे दवा…. बेटे की भावुक अपील से इमोशनल हुए लोग….


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की एक इंस्टाग्राम स्टोरी (Instagram story) सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस स्टोरी में एक युवक अपने पिता को लेकर ऐसी अपील करता नजर आता है, जिसने लोगों को मुस्कुराने के साथ-साथ भावुक भी कर दिया।

    वीडियो में युवक हल्के-फुल्के अंदाज में कहता है कि उसके पिता प्रधानमंत्री मोदी के ‘जबरदस्त फैन’ हैं और उनकी हर बात मानते हैं। इसी भरोसे के साथ वह पीएम मोदी से अनुरोध करता है कि वे अपने लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात में उसके पिता को खास तौर पर संदेश दें कि पापा, डायबिटीज की दवा समय पर लिया करें और अपनी सेहत का ध्यान रखें।

    युवक की इस अनोखी गुहार को पीएम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और उस पर लिखा कि युवराज के निवेदन पर मैं उनके पिता से कम चीनी खाने और सेहत का ध्यान रखने की अपील करूंगा। लोग इसे एक बेटे की चिंता और प्रधानमंत्री के प्रति आम लोगों के गहरे जुड़ाव के उदाहरण के रूप में देख रहे हैं। इस स्टोरी से पीएम मोदी का एक अलग, मानवीय पक्ष भी सामने आता है, जहां वे आम नागरिकों की छोटी-छोटी लेकिन दिल से जुड़ी बातों को भी मंच देते हैं।

    पीएम ने दिया मीठा कम योग ज्यादा का संदेश
    पीएम मोदी ने अगली स्टोरी में मीठा कम और योग ज्यादा का भी संदेश दिया। इस स्टोरी में पीएम ने लिखा, अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें, अच्छा खाएं, स्वस्थ भोजन करें। साथ ही ज्यादा चीनी के नुकसान, मोटापे के खतरे और योग को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह भी दी गई।

  • अलर्ट…. LPG गैस बुकिंग में जल्दबाजी कहीं पड़ न जाए भारी… एक्टिव हुए साइबर ठग..

    अलर्ट…. LPG गैस बुकिंग में जल्दबाजी कहीं पड़ न जाए भारी… एक्टिव हुए साइबर ठग..


    नई दिल्ली।
    देश (Country) के कई हिस्सों में LPG गैस को लेकर संकट की खबरें सामने आ रही हैं। कहीं सप्लाई में देरी हो रही है तो कहीं लोगों को सिलेंडर (Cylinder) पाने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे माहौल में लोग जल्दी-जल्दी गैस बुकिंग (Gas booking) करने की कोशिश कर रहे हैं, और यही जल्दबाजी अब उनके लिए खतरा बनती जा रही है। LPG इस कमी का फायदा उठाकर साइबर ठग एक्टिव (Cyber ​​Thugs Active) हो गए हैं और गैस सिलेंडर बुकिंग के नाम पर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हाल ही में “Gas Bill Update APK” नाम का एक नया स्कैम सामने आया है, जिसमें ठग WhatsApp या SMS के जरिए फर्जी मैसेज भेजते हैं और लोगों से एक ऐप डाउनलोड करने को कहते हैं।

    सरकार ने इसको लेकर हाई अलर्ट जारी किया है और साफ कहा है कि ऐसी किसी भी फाइल को डाउनलोड करना बेहद खतरनाक हो सकता है। एक छोटी सी गलती आपके मोबाइल को हैक कर सकती है और बैंक अकाउंट तक खाली हो सकता है। ऐसे में LPG संकट के इस समय में सतर्क रहना बेहद जरूरी है, ताकि आप ठगी का शिकार बनने से बच सकें। ऐसे में अगर आप भी LPG सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि एक छोटी सी गलती आपको बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है।


    क्या है पूरा मामला?

    यह नया साइबर फ्रॉड बेहद चालाकी से डिजाइन किया गया है। इसमें ठग खुद को गैस एजेंसी या किसी सरकारी अधिकारी के रूप में पेश करते हैं और लोगों को मैसेज भेजते हैं। मैसेज में लिखा होता है कि आपका गैस बिल अपडेट नहीं हुआ है या KYC अधूरा है, और इसे तुरंत पूरा करना जरूरी है। इसके साथ एक APK फाइल या लिंक दिया जाता है, जिसे डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। यही सबसे बड़ा जाल होता है। जैसे ही यूजर उस फाइल को डाउनलोड करता है, उसका फोन खतरे में आ जाता है।


    ऐसे काम करता है यह APK स्कैम

    इस फ्रॉड का तरीका बहुत ही स्मार्ट है। ठग पहले यूजर को डराते हैं कि अगर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो गैस सेवा बंद हो सकती है। फिर वे एक लिंक या APK फाइल भेजते हैं। जैसे ही यह ऐप इंस्टॉल होता है, यह फोन की कई जरूरी परमिशन ले लेता है। इसके बाद यह ऐप आपके फोन से OTP, मैसेज, पासवर्ड और बैंकिंग जानकारी तक एक्सेस कर सकता है। कई मामलों में यह स्क्रीन रिकॉर्डिंग और रिमोट एक्सेस भी हासिल कर लेता है।

    इस तरह के फ्रॉड में नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है। एक बार फोन हैक हो जाने के बाद ठग आपके बैंक अकाउंट, UPI और वॉलेट तक पहुंच बना सकते हैं। कई मामलों में लोगों के हजारों से लेकर लाखों रुपये तक गायब हो चुके हैं। इसलिए इसे हल्के में लेना बड़ी गलती हो सकती है।


    सरकार की क्या है चेतावनी

    सरकार ने साफ तौर पर लोगों को चेतावनी दी है कि किसी भी अनजान APK फाइल को डाउनलोड न करें। साथ ही यह भी कहा गया है कि LPG से जुड़ी कोई भी जानकारी या अपडेट केवल आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से ही लें। अगर आपको कोई संदिग्ध मैसेज या कॉल आता है, तो उस पर तुरंत भरोसा न करें।


    ऐसे रखें खुद को सुरक्षित

    इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए कुछ आसान बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे पहले, किसी भी अनजान लिंक या APK फाइल पर क्लिक या डाउनलोड न करें। दूसरा, गैस बुकिंग हमेशा आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से ही करें। तीसरा, OTP, बैंक डिटेल या UPI PIN किसी के साथ भी शेयर न करें, चाहे वह खुद को अधिकारी ही क्यों न बताए।

  • NCERT किताब विवाद सुलझा…. केन्द्र ने न्यायपालिका पर आधारित चैप्टर री-ड्राफ्ट करने के लिए गठित की कमेटी

    NCERT किताब विवाद सुलझा…. केन्द्र ने न्यायपालिका पर आधारित चैप्टर री-ड्राफ्ट करने के लिए गठित की कमेटी


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को सूचित किया कि उसने एनसीईआरटी (NCERT) की पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका पर आधारित चैप्टर को फिर से तैयार यानी री-ड्राफ्ट (Re-draft) करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा, पूर्व जज जस्टिस अनिरुद्ध बोस और पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल शामिल होंगे। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वीएम पंचोली की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने केंद्र की ओर से यह जानकारी दी।

    बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया, “हमने चैप्टर का मसौदा तैयार करने के लिए समिति बनाई है। वेणुगोपाल और जस्टिस इंदु मल्होत्रा समिति का हिस्सा होंगे। हमने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी से जस्टिस अनिरुद्ध बोस से भी अनुरोध किया है और वे भी इसमें शामिल होंगे। इस आश्वासन और समिति के गठन की जानकारी के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने विवादित चैप्टर पर दर्ज किए गए अपने स्वतः संज्ञान मामले का निपटारा कर दिया।


    क्या है पूरा विवाद?

    यह विवाद कक्षा 8 की किताब ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ (वॉल्यूम 2) से जुड़ा है। इसमें ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ नामक चैप्टर के तहत कथित तौर पर ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ पर एक हिस्सा शामिल किया गया था। इस मुद्दे को सबसे पहले 25 फरवरी को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने उठाया था, जिस पर कोर्ट ने बताया था कि उसने पहले ही इसका स्वतः संज्ञान ले लिया है। विवाद बढ़ने पर NCERT ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा था कि यह एक अनजाने में हुई गलती थी। उन्होंने विवादित हिस्से को किताब से वापस लेने और उचित परामर्श के बाद इसे फिर से लिखने की बात कही थी।


    सुप्रीम कोर्ट की पिछली कार्रवाइयां और नाराजगी

    किताब पर बैन: 26 फरवरी को हुई विस्तारपूर्ण सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस किताब के उत्पादन और वितरण पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। अवमानना का नोटिस: अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग और NCERT के निदेशक डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी को अवमानना अधिनियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि विवादित चैप्टर को लिखने या मंजूरी देने वालों के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई क्यों न की जाए।

    NCERT डायरेक्टर के जवाब पर आपत्ति: पिछली सुनवाई में कोर्ट ने NCERT निदेशक के उस जवाब पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसमें कहा गया था कि चैप्टर को फिर से लिख लिया गया है। कोर्ट ने इस जवाब को परेशान करने वाला बताया था क्योंकि इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि किन विशेषज्ञों ने इसे दोबारा लिखा है या किसने इसे मंजूरी दी है।

    इसके बाद अदालत ने केंद्र सरकार को एक सप्ताह के भीतर एक समिति बनाने का निर्देश दिया था, जिसमें एक सेवानिवृत्त जज, एक प्रसिद्ध शिक्षाविद और एक प्रख्यात वकील शामिल हों। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि कानूनी अध्ययन की सामग्री तैयार करने के लिए भोपाल स्थित राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी को भी भरोसे में लिया जाना चाहिए।


    पुराने लेखकों से दूर रहने का निर्देश

    अदालत ने यह भी कड़ा निर्देश दिया है कि केंद्र और राज्य सरकारें प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार के साथ भविष्य में कोई जुड़ाव न रखें। यह निर्देश तब आया जब NCERT निदेशक ने कोर्ट को बताया था कि पिछला विवादित चैप्टर मुख्य रूप से प्रोफेसर डैनिनो द्वारा तैयार किया गया था और दिवाकर व कुमार ने इस कार्य में उनकी सहायता की थी।


    सोशल मीडिया पर भी सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त

    इस मामले में अदालत ने सोशल मीडिया पर गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करने वाले कुछ तत्वों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। पीठ ने कड़े शब्दों में कहा: तथाकथित सोशल मीडिया पर कुछ तत्वों ने गैर-जिम्मेदाराना हरकतें की हैं। हम समस्याओं का डटकर सामना करने में विश्वास रखते हैं। हम भारत सरकार को निर्देश देते हैं कि वह ऐसे प्लेटफार्मों और उन लोगों की पहचान करे जो इसमें लिप्त हैं, ताकि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। कानून अपना काम करेगा। भले ही वे इस देश में कहीं भी छिपे हों, हम उन्हें नहीं छोड़ेंगे।

  • देशभर में आज ईद-उल-फितर की धूम…. समाजन एक दूसरे को दे रहे मुबारकबाद

    देशभर में आज ईद-उल-फितर की धूम…. समाजन एक दूसरे को दे रहे मुबारकबाद


    नई दिल्ली।
    आज पूरे देश में ईद-उल-फितर (Eid Ul Fitr 2026) का त्योहार पूरे उत्साह और भाईचारे के साथ मनाया जा रहा है। एक महीने के रोज़ों (Roza) के बाद मुस्लिम समाज (Muslim Brotherhood) में खुशी का माहौल है और ईदगाहों व मस्जिदों (Eidgahs and Mosques) में विशेष नमाज़ अदा की जा रही है। सभी जगह ईद का खास उत्साह देखने को मिल रहा है. सुबह फज्र की नमाज़ के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई।

    ईद-उल-फितर (Eid Ul Fitr 2026) इस्लाम धर्म का बेहद खास त्योहार माना जाता है. पूरे महीने रोजे रखने के बाद जब नया चांद दिखाई देता है, तब शव्वाल महीने की शुरुआत होती है और उसी के पहले दिन ईद मनाई जाती है. इस दिन सुबह लोग ईद की नमाज अदा करते हैं और इसके साथ ही रोजों का सिलसिला समाप्त हो जाता है. यह त्योहार खुशियां बांटने और आपसी भाईचारे को बढ़ाने का संदेश देता है।


    ईद-उल-फितर का महत्व (Eid ul Fitr 2026 significance)

    इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, रमजान का महीना बहुत पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान पहली बार कुरान शरीफ आई थी. माना जाता है कि इसी दिन से पैगंबर हजरत मुहम्मद के मक्का से मदीना आने के बाद ईद-उल-फितर मनाने की परंपरा शुरू हुई थी. तभी से यह दिन खुशियों के त्योहार के रूप में मनाया जाने लगा।

    ईद के मौके पर घरों में तरह-तरह के मीठे पकवान बनाए जाते हैं, खासकर सेवइयां. मेहमानों का स्वागत मिठाई से किया जाता है और बच्चों व अपनों को ईदी दी जाती है. लोग एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की बधाई देते हैं. इस दिन दान का भी खास महत्व होता है, इसलिए जरूरतमंदों की मदद करना बेहद शुभ माना जाता है.


    ईद-उल-फितर क्यों मनाई जाती है?

    इस्लाम धर्म में ईद-उल-फितर का खास महत्व होता है. रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद लोग अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने उन्हें इबादत करने की ताकत दी. मान्यता है कि सच्चे मन से रखे गए रोजों से अल्लाह खुश होते हैं और अपनी रहमत बरसाते हैं. इसी खुशी और आशीर्वाद को ईद-उल-फितर के रूप में मनाया जाता है.


    ईद-उल-फितर कैसे मनाई जाती है?

    ईद के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर साफ-सुथरे और नए कपड़े पहनते हैं और मस्जिद या ईदगाह में जाकर नमाज अदा करते हैं. इसके बाद परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर खुशियां बांटते हैं. घरों में सेवइयां और शीर खुरमा जैसे स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं और एक-दूसरे को मिठाई व तोहफे देकर ईद की मुबारकबाद दी जाती है. यह त्योहार प्यार, भाईचारे और खुशी का संदेश देता है।