ठगी का तरीका और विदेशी कनेक्शन
नकली निवेश और पोंजी स्कीम मल्टी लेवल मार्केटिंग और पोंजी योजनाओं के झूठे वादे देकर लोगों से बड़ी पूंजी निवेश करवाना।
फर्जी कंपनियों का जाल

ठगी का तरीका और विदेशी कनेक्शन
फर्जी कंपनियों का जाल

513 नए 4G मोबाइल टावरों को मंजूरी
केंद्र सरकार ने डिजिटल भारत निधि (Digital Bharat Nidhi) के तहत अबूझमाड़ क्षेत्र में बीएसएनएल के माध्यम से 513 नए 4G मोबाइल टावर लगाने की स्वीकृति दी है। इस फैसले से न केवल संचार व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि यह माओवादी प्रभावित इलाकों में विकास की नई इबारत भी लिखेगा। राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला सुरक्षा और विकास—दोनों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
सुरक्षा बलों को मिलेगी तकनीकी बढ़त
अबूझमाड़ और आसपास के इलाकों में पहले से स्थापित 728 मोबाइल टावर बीते कुछ वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी ताकत साबित हुए हैं। मोबाइल नेटवर्क के विस्तार से सुरक्षा बलों को रियल टाइम कम्युनिकेशन, लोकेशन ट्रैकिंग और इंटेलिजेंस इनपुट साझा करने में मदद मिली है।अधिकारियों का कहना है कि अगस्त 2025 में रायपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद पड़ोसी राज्यों के साथ रियल टाइम सूचना साझा करने की प्रणाली लागू की गई थी। इसके बाद से माओवादियों की गतिविधियों पर नजर रखना और भी आसान हो गया है।
माओवादियों पर कसा शिकंजा
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, माओवादी आमतौर पर मोबाइल फोन के इस्तेमाल से बचते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि डिजिटल फुटप्रिंट के जरिए उनकी लोकेशन ट्रैक की जा सकती है। इसके बावजूद, नेटवर्क विस्तार के बाद किसी भी असामान्य सिग्नल पैटर्न या संदिग्ध गतिविधि को समय रहते पकड़ा जा रहा है।इससे माओवादी संगठनों की मूवमेंट की जानकारी पहले ही मिल जाती है और सुरक्षा बल उन्हें अपने रडार पर बनाए रखने में सफल हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बयान
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 513 मोबाइल टावरों को मिली मंजूरी का स्वागत करते हुए इसे राज्य के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला छत्तीसगढ़ को डिजिटल रूप से सशक्त, सुरक्षित और समावेशी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
दुर्गम इलाकों में भी बजेगी मोबाइल की घंटी
इन नए 4G मोबाइल टावरों की स्थापना से अबूझमाड़ जैसे सुदूर और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों को पहली बार भरोसेमंद मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं मिल सकेंगी। इससे-ऑनलाइन शिक्षा की पहुंच बढ़ेगी टेलीमेडिसिन और स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ होंगी रोजगार और स्किल डेवलपमेंट के नए अवसर मिलेंगे आपातकालीन संचार व्यवस्था मजबूत होगी विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल विस्तार वित्तीय समावेशन को भी गति देगा।
बैंकिंग और सरकारी सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा
मजबूत मोबाइल नेटवर्क के चलते ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में-बैंकिंग सेवाएं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) UPI और डिजिटल पेमेंट बीमा और पेंशन योजनाएं आम लोगों तक आसानी से पहुंच सकेंगी। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
सुरक्षा और विकास की संयुक्त रणनीति
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को साथ-साथ आगे बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है। सरकार गठन के बाद अब तक-
69 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए इनके आसपास के 403 गांवों में 9 विभागों की 18 सामुदायिक सेवाएं 11 विभागों की 25 व्यक्तिमूलक योजनाएं पहुंचाई जा रही हैं यह पहली बार है जब इन दुर्गम इलाकों में सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित हुई है।
साझा प्रयासों का प्रतिफल
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मोबाइल टावरों की स्वीकृति माओवादी हिंसा उन्मूलन और क्षेत्रीय विकास के साझा प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में स्थायित्व स्थापित हुआ है, वहां अब डिजिटल कनेक्टिविटी और विकास को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।

दुनिया के कई देशों में इस मॉडल पर प्रयोग हो रहे हैं। जापान, स्पेन और जर्मनी जैसे देशों में कई कंपनियां 4-Day वर्क वीक को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू कर चुकी हैं। इसी बीच भारत में नए लेबर कानूनों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या यहां भी 4-Day वर्क वीक को कानूनी मंजूरी मिल सकती है।
श्रम मंत्रालय ने क्या कहा?
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 12 दिसंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय के अनुसार, नए लेबर कोड्स के तहत किसी भी कर्मचारी से हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जा सकता। हालांकि कंपनियों को यह विकल्प दिया गया है कि वे कर्मचारियों से दिन में 12 घंटे तक काम करवा सकती हैं। ऐसे में यदि कोई कंपनी 12 घंटे की शिफ्ट अपनाती है, तो कर्मचारी हफ्ते में चार दिन काम कर तीन दिन की पेड छुट्टी ले सकता है।
मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि 12 घंटे की शिफ्ट का मतलब लगातार 12 घंटे काम नहीं है। इसमें ब्रेक और स्प्रेड-ओवर टाइम भी शामिल रहेगा। अगर किसी कर्मचारी से तय सीमा से अधिक काम कराया जाता है, तो ओवरटाइम के लिए दोगुना भुगतान करना अनिवार्य होगा।
नए लेबर कोड्स क्या कहते हैं?
सरकार ने देश के 29 पुराने श्रम कानूनों को हटाकर चार नए लेबर कोड लागू किए हैं—
वेज कोड
इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड
सोशल सिक्योरिटी कोड
ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड
इनका उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल बनाना और कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करना है।
क्या भारत में लागू होगा 4-Day वर्क वीक?
हालांकि नए नियम 4-Day वर्क वीक की कानूनी गुंजाइश जरूर देते हैं, लेकिन इसे अपनाना पूरी तरह कंपनियों की नीति और काम की प्रकृति पर निर्भर करेगा। हर सेक्टर में 12 घंटे की शिफ्ट संभव हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए यह मॉडल कब और कितनी कंपनियों में लागू होगा, यह आने वाला वक्त ही तय करेगा।
कुल मिलाकर, सरकार ने भारत में 4-Day वर्क वीक का रास्ता खोला है, लेकिन इसका व्यापक रूप से लागू होना कंपनियों और कर्मचारियों की सहमति पर निर्भर करेगा।

पृथ्वीराज चव्हाण ने इसी महीने यह दावा दूसरी बार दोहराया है। इससे पहले सांगली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी उन्होंने इसी तरह की बात कही थी। चव्हाण का कहना है कि वे लंबे समय तक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में काम कर चुके हैं और दिल्ली की राजनीतिक गतिविधियों को गहराई से समझते हैं। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया, जिससे उनके बयान पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
अमेरिका की घटनाओं से जोड़ा भारत का राजनीतिक भविष्य
अपने बयान में चव्हाण ने अमेरिका की हालिया राजनीतिक घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में एक व्यक्ति द्वारा कई बड़े नेताओं के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन किए गए हैं, जिनके खुलासे जल्द होने वाले हैं। चव्हाण के अनुसार, अमेरिका में प्रस्तावित एक नए कानून के तहत 19 दिसंबर को कई बड़े नाम सार्वजनिक किए जा सकते हैं, जिसका असर वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं पता कि वे नेता कौन हैं, लेकिन इसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।
एपस्टीन फाइल्स का हवाला
पृथ्वीराज चव्हाण ने अमेरिका में जेफ्री एपस्टीन फाइल्स का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि इन फाइल्स के सामने आने से अमेरिका की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा हो गया है और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की स्थिति भी इससे प्रभावित हुई है। हाल ही में डेमोक्रेटिक समिति द्वारा ट्रंप और एपस्टीन से जुड़ी तस्वीरें सामने आने के बाद अमेरिका में राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।
भाजपा ने दावे को बताया अफवाह
पृथ्वीराज चव्हाण के बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका की किसी भी घटना का भारत की सरकार या प्रधानमंत्री से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर इस तरह की बातें जानबूझकर फैलाई जा रही अफवाहें हैं।
भाजपा का आरोप है कि मराठी प्रधानमंत्री बनने और सत्ता परिवर्तन के दावे देश में भ्रम और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश हैं। पार्टी ने साफ कहा है कि सरकार पूरी तरह स्थिर है और ऐसे बयानों का कोई आधार नहीं है।
फिलहाल, पृथ्वीराज चव्हाण के इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। जहां कांग्रेस समर्थक इसे संभावित बड़े बदलाव का संकेत बता रहे हैं, वहीं भाजपा इसे निराधार बयानबाजी मान रही है। अब सभी की निगाहें 19 दिसंबर पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि यह दावा महज राजनीतिक बयान था या इसके पीछे कोई बड़ा घटनाक्रम छिपा है।

जिन मतदाताओं के फॉर्म अधूरे हैं या जिनका सत्यापन नहीं हो पाया है, उनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं किए जाएंगे। ऐसे मामलों में मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है, जहां पासपोर्ट, डोमिसाइल सर्टिफिकेट और जन्म प्रमाणपत्र जैसे चुनाव आयोग द्वारा मान्य 12 दस्तावेजों के आधार पर जांच के बाद नाम जोड़ा जाएगा।
मतदाता ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम देख सकते हैं। ऑनलाइन जांच के लिए चुनाव आयोग की वेबसाइट eci.gov.in पर नाम या EPIC नंबर डालकर सर्च किया जा सकता है। वहीं ऑफलाइन जांच के लिए हर पोलिंग स्टेशन पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास ड्राफ्ट लिस्ट उपलब्ध होगी।
अगर किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, तो वह दावा या आपत्ति दर्ज कर सकता है। चुनाव आयोग ने इसके लिए एक महीने का समय दिया है। दावों की जांच और जरूरत पड़ने पर सुनवाई के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।

राजनीतिक सफर और प्रोफाइल
ओबीसी वर्ग की कुर्मी जाति से आने वाले पंकज चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पार्षद के रूप में की थी। इसके बाद वे गोरखपुर के डिप्टी मेयर बने और वर्ष 1991 में पहली बार लोकसभा पहुंचकर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा। अब तक वे सात बार सांसद चुने जा चुके हैं और दो बार केंद्र सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
पंकज चौधरी की कुल संपत्ति करीब 41 करोड़ रुपये बताई जाती है। वे राहत रूह तेल कंपनी के मालिक हैं और उनकी शैक्षणिक योग्यता 12वीं तक है।
यूपी बीजेपी अध्यक्ष को सैलरी मिलती है या नहीं?
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कोई सरकारी या संवैधानिक पद नहीं है। यह पूरी तरह पार्टी का संगठनात्मक पद होता है।
इस कारण इस पद के लिए सरकार की ओर से कोई तय वेतन, पे-स्केल या सैलरी स्लिप नहीं मिलती।
फिर कमाई कैसे होती है?
हालांकि औपचारिक सैलरी नहीं होती, लेकिन भाजपा अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों को मानदेय और प्रशासनिक सहयोग देती है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये मासिक मानदेय मिलने की चर्चा रही है।
राज्य अध्यक्षों के लिए कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार यूपी बीजेपी अध्यक्ष को भी करीब 1 से 1.5 लाख रुपये प्रति माह मानदेय मिल सकता है।
इसके अलावा पार्टी कार्यों के लिए अलग से भत्ते और खर्च की व्यवस्था होती है।
यूपी बीजेपी अध्यक्ष को मिलने वाली सुविधाएं
सैलरी तय न होने के बावजूद सुविधाओं के मामले में यह पद बेहद प्रभावशाली माना जाता है।
पूरी तरह फर्निश्ड ऑफिस
पर्सनल सेक्रेटरी, राजनीतिक सलाहकार और सपोर्ट स्टाफ
आधिकारिक यात्राओं का पूरा खर्च पार्टी वहन करती है
हवाई, रेल और सड़क यात्रा की सुविधा
ड्राइवर सहित वाहन, होटल और भोजन का खर्च
फर्निश्ड आवास की सुविधा
निजी स्टाफ की सैलरी भी पार्टी फंड से
मेडिकल सुविधाएं या तो पार्टी के माध्यम से मिलती हैं या फिर उनके मौजूदा सरकारी पद के नियमों के तहत।
सांसद और मंत्री के तौर पर अलग आय
पंकज चौधरी फिलहाल लोकसभा सांसद और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री हैं, इसलिए उन्हें इन पदों से मिलने वाली सैलरी और भत्ते अलग से मिलते रहेंगे।
सांसद के रूप में:
मासिक वेतन: 1,24,000 रुपये
निर्वाचन क्षेत्र भत्ता: 87,000 रुपये
कार्यालय खर्च: 75,000 रुपये
दैनिक भत्ता: 2,500 रुपये
दिल्ली में मुफ्त सरकारी आवास या 2 लाख रुपये HRA
इसके अलावा:
150 टेलीफोन कॉल
50,000 यूनिट बिजली
24,000 लीटर पानी
34 हवाई यात्राएं
एसी ट्रेन यात्रा की सुविधा
मंत्री पद का लाभ:
राज्य मंत्री के रूप में उन्हें लगभग 2.30 लाख रुपये प्रतिमाह का वेतन और भत्ता मिलता है।
पेंशन का क्या नियम है?
मंत्री पद छोड़ने पर अलग से कोई पेंशन नहीं मिलती
पेंशन केवल सांसद या विधायक के रूप में किए गए कार्यकाल पर आधारित होती है
पूर्व सांसदों को वर्तमान में 31,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है, जो लंबे कार्यकाल के साथ बढ़ती जाती है
पंकज चौधरी को भविष्य में पेंशन का लाभ उनके लंबे संसदीय अनुभव के आधार पर मिलेगा, न कि मंत्री या पार्टी अध्यक्ष पद के कारण।
कुल मिलाकर, यूपी बीजेपी अध्यक्ष का पद वेतन से ज्यादा ताकत, प्रभाव और राजनीतिक जिम्मेदारी का होता है। पंकज चौधरी के लिए यह भूमिका न सिर्फ संगठनात्मक रूप से अहम है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की रणनीति में भी निर्णायक मानी जा रही है।

अर्थी पर शव लेकर फिर अस्पताल पहुंचे परिजन
मामला सूरत के पांडेसरा इलाके के शिव नगर में रहने वाली 57 साल की सुनीता देवी बृजनंदन तांती से जुड़ा है. परिजनों के अनुसार, सुनीता देवी लंबे समय से बीमार थीं और उन्हें पैरालिसिस की समस्या थी. 13 दिसंबर की सुबह करीब 10 बजे उन्होंने अपने घर में अंतिम सांस ली. मौत के बाद परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए उमरा श्मशान घाट लेकर पहुंचे.
श्मशान घाट पहुंचने पर वहां के संचालकों ने मृतक महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे. परिजनों के पास ये कागजात मौजूद नहीं थे, जिसके कारण श्मशान घाट प्रशासन और परिजनों के बीच विवाद हो गया. नियमों के अनुसार कागजात के अभाव में अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया गया.
मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना अस्पताल पहुंचे थे परिजन
मामला बढ़ने पर पुलिस को भी सूचना दी गई. पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाया कि मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना अंतिम संस्कार संभव नहीं है. इसके बाद प्रशासन की सलाह पर परिजन शव को सूरत के न्यू सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां महिला की मौत हुई थी.
न्यू सिविल अस्पताल में अर्थी के रूप में सजे शव को स्ट्रेचर पर लाया गया. शव पर अंतिम संस्कार के वस्त्र और फूल माला देख अस्पताल का स्टाफ, डॉक्टर और नर्सिंग कर्मचारी भी चौंक गए. अस्पताल के इतिहास में यह शायद पहला मामला था जब शव श्मशान घाट से वापस जांच के लिए अस्पताल लाया गया.
शव की दोबारा जांच
अस्पताल में महिला डॉक्टर ने शव की दोबारा जांच की और औपचारिक रूप से मृत घोषित किया. इसके बाद मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी कागजात तैयार किए गए. इस पूरी प्रक्रिया में करीब 8 से 10 घंटे का समय लग गया.
दस्तावेज मिलने के बाद परिजन शव को फिर से उमरा श्मशान घाट लेकर पहुंचे, जहां विधिवत अंतिम संस्कार किया गया.. मृतका के पड़ोसी आनंद कुमार जायसवाल ने बताया कि नियमों और कागजी प्रक्रिया की जानकारी न होने के कारण यह स्थिति बनी.

शनिवार को रांची अंचल के विभिन्न आपूर्ति प्रमंडलों में बड़ी संख्या में बकायेदार उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काटे गए। रांची केंद्रीय आपूर्ति प्रमंडल में 1165, कोकर में 1331, डोरंडा में 853, रांची पश्चिमी में 921, रांची पूर्वी में 613 और न्यू कैपिटल क्षेत्र में 812 उपभोक्ताओं के कनेक्शन ऑटोमैटिक रूप से डिस्कनेक्ट किए गए।
इनमें कई व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं, जिनका स्मार्ट मीटर बैलेंस नेगेटिव पाया गया। बिजली विभाग के अनुसार, कनेक्शन डिस्कनेक्ट होने के बाद जैसे ही उपभोक्ता अपने पूरे बकाया बिजली बिल का भुगतान करते हैं, उनका कनेक्शन स्वतः चालू हो जाता है।
किश्त में भी कर सकते हैं भुगतान
जिन उपभोक्ताओं पर अधिक राशि बकाया है और वे एकमुश्त भुगतान करने में असमर्थ हैं, वे अपने क्षेत्र के विद्युत कार्यपालक अभियंता से संपर्क कर किश्त में भुगतान की सुविधा ले सकते हैं।
उपभोक्ता अपने बकाया बिजली बिल का भुगतान एटीपी काउंटर या ऑनलाइन माध्यम से कर सकते हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में कनेक्शन कटने के कारण एटीपी काउंटरों पर बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं की भीड़ बढ़ रही है।
विभाग ने की अपील
विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे भीड़ और लाइन से बचने के लिए झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान का उपयोग करें।
विद्युत आपूर्ति क्षेत्र रांची के महाप्रबंधक मनमोहन कुमार ने सभी बकायेदार उपभोक्ताओं से अपील करते हुए कहा है कि स्मार्ट मीटर के माध्यम से अब रोजाना बकायेदारों का कनेक्शन ऑटोमैटिक डिस्कनेक्ट हो रहा है। इसलिए जिन उपभोक्ताओं का बिजली बिल बकाया है, वे शीघ्र भुगतान कर अपने स्मार्ट मीटर का बैलेंस नेगेटिव से पॉजिटिव कर लें।
बैलेंस नेगेटिव रहने की स्थिति में कनेक्शन स्वतः कट जाएगा और बकाया राशि जमा करने के बाद ही दोबारा चालू होगा। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता कनेक्शन कटने का इंतजार न करें और समय रहते अपना बिजली बिल जमा कर दें।
बिजली विभाग ने यह भी बताया है कि जिन उपभोक्ताओं को बिजली बिल से संबंधित जानकारी नहीं मिल पा रही है, वे अपने बिजली कनेक्शन में मोबाइल नंबर अपडेट कराएं। अब उपभोक्ताओं को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप के माध्यम से बिजली बिल उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए हर उपभोक्ता के कनेक्शन में मोबाइल नंबर का अपडेट होना अनिवार्य है।
मोबाइल नंबर अपडेट कराने के लिए इन नंबरों पर करें संपर्क
रांची केंद्रीय – 9508021323
कोकर – 6201382424
न्यू कैपिटल – 7970802909
रांची पश्चिमी – 9341218831
रांची पूर्वी – 9279943544
डोरंडा – 8987716413

क्या है मामला
मामले को लेकर बनासकांठा कलेक्टर मिहिर पटेल ने बताया कि यह घटना तब हुई जब पुलिस, फॉरेस्ट और रेवेन्यू अधिकारियों की एक जॉइंट टीम फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के सर्वे नंबर 9 एरिया में नर्सरी और प्लांटेशन का काम कर रही थी. उन्होंने बताया कि अचानक करीब 500 लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया, पत्थर फेंके और तीर-कमान का इस्तेमाल किया. इस हमले की वजह से कई अधिकारी घायल हो गए हैं हालांकि उनकी हालत स्थिर है.
घायल हुए 36 अधिकारियों को अंबाजी सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जबकि 11 को आगे के इलाज के लिए पालनपुर सिविल हॉस्पिटल रेफर किया गया, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि हमला किस वजह से हुआ. यह जगह दांता तालुका में है, जो अंबाजी तीर्थस्थल से 14 km दूर है. इस वारदात के बाद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल है.

सीएए-एनआरसी और एसआईआर तक मुद्दे कई हैं…
बीजेपी 10 सालों से आक्रामक होकर ममता बनर्जी को घेर रही है. एंटी इनकमबेंसी से इतर वो टीएमसी पर सनातन और हिंदुओं की अपेक्षा करने का आरोप लगाती आई है. ऐसे कुछ सवालों का जवाब ममता बनर्जी ने अपनी चुनावी रणनीति से दे चुकी हैं. बंगाल में मुसलमानों पर करम और हिंदुओं पर सितम करने जैसे आरोपों से जूझ रही टीएमसी सुप्रीमों ने ऐसे आरोप खारिज करने के लिए दुर्गा माता के मंत्र पढ़कर सुना चुकी हैं.
सीएए, एनआरसी और बेटियों के बलात्कार और हत्या जैसे अपराधों यानी लॉ एंड ऑर्डर के मुद्दे पर भी बीजेपी टीएमसी को घेर रही है. कुल मिलाकर लाख टके का सवाल ये है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुखिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस नए ध्रुवीकरण वाले मुद्दे से कैसे निपटेंगी. बंगाल में 30 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं जो वामदलों की सफाए के बाद से टीएमसी को वोट करते आए हैं.
टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर अलग पार्टी बनाने का ऐलान कर चुके हैं. हुमायूं ओवीसी की पार्टी एआईएमआईएम और अन्य दलों संग अलायंस करके चुनाव लड़ना चाह रहे हैं. ताकि बंगाल में किंग मेकर की भूमिका में आ सकें.
पुराना कार्ड चलेगा?
ध्रुवीकरण की कथित खेल को ध्यान में रखते हुए बीजेपी इस बार हर हाल में बंगाल में भगवा लहराना चाहती है. ये मुद्दा किसे फायदा करेगा और किसे बैकफायर करेगा इसका जवाब अभी भविष्य के गर्भ में है. ममता बनर्जी और TMC हुमायूं कबीर को BJP की बी पार्टी बताकर काउंटर कर सकती हैं. वो पहले भी दावा करती रही हैं कि बीजेपी असदुद्दीन ओवैसी को मुसलमान वोटों का बंटवारा करने के लिए खड़ा करती है. ऐसे में चुनावी तारीखों का ऐलान होने से पहले ममता बनर्जी जनता से अपील कर रही हैं कि BJP को सत्ता से दूर रखने के लिए लोग केवल और केवल टीएमसी को चुने.
SIR, पहचान की राजनीति और ‘बंगाली अस्मिता’
TMC ध्रुवीकरण वाली चुनौती का सामना ‘बंगाली अस्मिता’ के कार्ड से कर सकती है. ये ‘ट्रंप’ कार्ड ‘दीदी’ का आजमाया हुआ नुस्खा है. 2019 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने बड़े प्रभावी ढंग से इसका इस्तेमाल किया. बंगाली बनाम बाहरी का मुद्दा उठाकर अपना किला बचा चुकीं ममता बनर्जी अब शाकाहार और मांसाहार की जंग के सहारे नया नैरेटिव देने की कोशिश कर रही हैं.
कुछ समय पहले भगवद्गीता पाठ के आयोजन स्थल के पास नॉनवेज बेचने पर एक शख्स के साथ मारपीट हुई थी. तब नैरेटिव गढ़ा गया कि बीजेपी देश को शाकाहार की ओर धकेल रही है, जो बहुलतावाद और बंगाल की पहचान के खिलाफ है. सूत्रों के मुताबिक एसआईआर और अन्य मुद्दों से मुस्लिम समुदाय में नाराजगी बढ़ी है, जिससे उनके वोट टीएमसी के पक्ष में लामबंद हो सकते हैं. ऐसी खबरों के बीच सियासत का ऊंट किस करवट बैठेगा इसे लेकर कुछ कहना जल्दबाजी होगा.