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  • दिल्ली-NCR में अचानक क्यों छाई धुंध? तेज गर्मी के बीच बदला मौसम का मिजाज, जानिए वजह

    दिल्ली-NCR में अचानक क्यों छाई धुंध? तेज गर्मी के बीच बदला मौसम का मिजाज, जानिए वजह


    नई दिल्ली। Delhi और आसपास के एनसीआर इलाकों में मार्च की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक 11 मार्च के आसपास राजधानी का अधिकतम तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। हालांकि आसमान में हल्के बादल दिखाई दे रहे हैं, लेकिन फिलहाल बारिश या ठंडी हवाओं से राहत मिलने की संभावना कम बताई जा रही है। सुबह से ही तेज धूप महसूस हो रही है, जिससे दोपहर के समय गर्मी ज्यादा लग रही है।

    सामान्य से पहले बढ़ा तापमान
    मौसम विभाग के अनुसार इस साल दिल्ली-एनसीआर में गर्मी ने सामान्य समय से पहले दस्तक दे दी है। आमतौर पर मार्च के आखिरी हफ्ते में तापमान 35 डिग्री के आसपास पहुंचता है, लेकिन इस बार महीने के पहले ही सप्ताह में यह स्तर पार हो चुका है। पिछले चार दिनों से राजधानी में अधिकतम तापमान लगातार 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है, जिससे लोगों को मार्च में ही मई-जून जैसी गर्मी महसूस होने लगी है।

    धुंध और धूल की वजह क्या है?
    10 मार्च की सुबह से देश के कई हिस्सों में धुंध जैसी स्थिति देखने को मिली। कई जगहों पर दिन तक आसमान में सफेद चादर जैसी परत नजर आई। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे Tehran में हुए तेल डिपो ब्लास्ट से जोड़कर देख रहे थे, लेकिन मौसम विशेषज्ञों ने इस दावे को गलत बताया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम भारत में उठ रही धूल और हवाओं की वजह से बनी है। इसके पीछे प्रमुख कारण Western Disturbance को माना जा रहा है, जिसकी वजह से हवा का रुख बदल रहा है और धूल के कण वातावरण में फैल रहे हैं।

    11 मार्च के बाद मौसम में बदलाव की उम्मीद
    मौसम विभाग का अनुमान है कि 11 मार्च के बाद मौसम में हल्के बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 12 से 16 मार्च के बीच Delhi NCR के कई इलाकों जैसे Ghaziabad, Noida, Gurugram और Faridabad में आंशिक बादल छाए रहने की संभावना है। हालांकि तापमान में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। 12 से 14 मार्च के बीच अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

    15 मार्च के बाद मिल सकती है थोड़ी राहत
    मौसम विभाग के अनुसार 15 मार्च के बाद तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक हल्की गिरावट आ सकती है। इसके साथ ही कुछ इलाकों में फिर से धुंध जैसी स्थिति और तेज हवाएं देखने को मिल सकती हैं। फिलहाल किसी भी जिले के लिए कोई गंभीर अलर्ट जारी नहीं किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों ने लोगों को बढ़ती गर्मी के बीच सावधानी बरतने और धूप से बचाव करने की सलाह दी है।

  • सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 13 साल से कोमा में युवक को इच्छामृत्यु की अनुमति

    सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 13 साल से कोमा में युवक को इच्छामृत्यु की अनुमति

    नई दिल्ली। भारत में इच्छामृत्यु से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में Supreme Court of India ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 13 साल से कोमा में पड़े युवक को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी है। अदालत ने गाजियाबाद के 31 वर्षीय Harish Rana के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से हटाने का निर्देश दिया है।

    यह फैसला जस्टिस J. B. Pardiwala और जस्टिस K. V. Viswanathan की पीठ ने सुनाया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि दिल्ली के All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) में मेडिकल प्रक्रिया इस तरह पूरी की जाए कि मरीज की गरिमा और मानवीय सम्मान बना रहे।

    दरअसल हरीश राणा 2013 में चंडीगढ़ स्थित Panjab University में बीटेक की पढ़ाई के दौरान हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। गंभीर चोटों के कारण वे कोमा में चले गए और डॉक्टरों ने उन्हें Quadriplegia से पीड़ित बताया। इस स्थिति में मरीज शरीर के लगभग सभी अंगों को नियंत्रित नहीं कर पाता और पूरी तरह वेंटिलेटर व फीडिंग ट्यूब पर निर्भर रहता है।

    करीब 13 साल से बिस्तर पर पड़े रहने के कारण उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और शरीर पर गहरे बेडसोर्स भी बन गए। परिवार लंबे समय से मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहा था। इसी वजह से हरीश के माता-पिता निर्मला राणा और अशोक राणा ने अदालत से पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति देने की गुहार लगाई थी।

    फैसला सुनाते समय अदालत ने कहा कि जब किसी मरीज के ठीक होने की कोई संभावना नहीं रह जाती और इलाज केवल जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखता है, तो ऐसे मामलों में मानवीय गरिमा को ध्यान में रखते हुए लाइफ सपोर्ट हटाने पर विचार किया जा सकता है। जस्टिस पारदीवाला ने अपने फैसले में साहित्यकार William Shakespeare के प्रसिद्ध कथन “To be or not to be” का भी उल्लेख किया।

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पैसिव यूथेनेशिया से जुड़े स्पष्ट कानून बनाने पर भी विचार करने को कहा है। फिलहाल भारत में यह प्रक्रिया अदालत द्वारा तय दिशानिर्देशों और मेडिकल बोर्ड की मंजूरी के आधार पर ही संभव है।

    गौरतलब है कि 2018 में Supreme Court of India ने ‘सम्मान के साथ मृत्यु के अधिकार’ को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मान्यता दी थी। हालांकि एक्टिव यूथेनेशिया यानी किसी दवा या इंजेक्शन से मौत देना भारत में अब भी गैरकानूनी है।

    इस फैसले को देश में इच्छामृत्यु से जुड़े कानून और मानवीय अधिकारों की बहस में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

  • संसद में तीखी टक्कर: राहुल गांधी का पीएम पर ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ आरोप, भाजपा ने किया जोरदार पलटवार

    संसद में तीखी टक्कर: राहुल गांधी का पीएम पर ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ आरोप, भाजपा ने किया जोरदार पलटवार


    नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में उस समय तीखी बहस देखने को मिली जब स्पीकर Om Birla के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बीच विपक्ष और सत्तापक्ष आमने-सामने आ गए। बहस के दौरान कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने आरोप लगाया कि उन्हें सदन में बोलने से बार-बार रोका जाता है और उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर “कॉम्प्रोमाइज्ड” होने का आरोप लगाया।

    राहुल गांधी ने कहा कि यह चर्चा केवल स्पीकर के पद तक सीमित नहीं है बल्कि यह लोकतंत्र और संसद की भूमिका से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने दावा किया कि कई मौकों पर उनका नाम लिया गया, लेकिन जब भी वह अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए तो उन्हें रोक दिया गया। राहुल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने का पूरा अवसर मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें लगातार टोकने की कोशिश की जाती है।

    राहुल के बयान पर भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad ने तुरंत पलटवार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का भारत कभी “कॉम्प्रोमाइज्ड” नहीं हो सकता। प्रसाद ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह सदन में अनावश्यक विवाद खड़ा कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करना चाहता है।

    दरअसल लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मंगलवार से चर्चा चल रही है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही में निष्पक्ष नहीं हैं और सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी को करीब 20 बार बोलने से रोका गया।

    वहीं संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ओम बिरला पूरी निष्पक्षता के साथ सदन का संचालन करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ सांसद पहले स्पीकर के चैंबर में घुस गए थे और यदि जरूरत पड़ी तो इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सार्वजनिक किया जा सकता है।

    बहस के दौरान कांग्रेस नेता K. C. Venugopal ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार देश की संस्थाओं का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री इस महत्वपूर्ण बहस के दौरान सदन में मौजूद क्यों नहीं हैं।

    स्पीकर के खिलाफ लाए गए इस अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में लंबी बहस जारी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक गर्मी पैदा कर सकता है।

    कीवर्ड: राहुल गांधी, ओम बिरला, लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव, रविशंकर प्रसाद, संसद बहस, नरेंद्र मोदी

  • ऑयल संकट: पहाड़ की गुफाओं से बना टैंकर, बुरे से बुरे वक्त के लिए है तैयारी, जानें भारत ने कहां छिपाया तेल भंडार?

    ऑयल संकट: पहाड़ की गुफाओं से बना टैंकर, बुरे से बुरे वक्त के लिए है तैयारी, जानें भारत ने कहां छिपाया तेल भंडार?


    नई दिल्‍ली। मिडिल ईस्ट में ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों पर खतरे की खबरों के बीच पूरी दुनिया की नजर तेल सप्लाई पर टिक गई है. ऐसे में भारत को लेकर भी एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि अगर वैश्विक सप्लाई अचानक रुक जाए तो देश कितने दिनों तक अपने भंडार के भरोसे चल सकता है. बहुत कम लोगों को पता है कि भारत ने इस तरह की आपात स्थिति के लिए बेहद खास इंतजाम कर रखे हैं.
    देश ने पहाड़ों की मजबूत चट्टानों के भीतर विशाल गुफाओं जैसी संरचनाओं में कच्चे तेल का भंडार छिपाकर रखा है. ये गुफाएं दरअसल भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व हैं. इन्हें युद्ध, आपदा या वैश्विक सप्लाई रुकने जैसी स्थिति में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है.
    दरअसल इस पूरी योजना की शुरुआत अचानक नहीं हुई थी. इसकी कहानी 1991 के उस आर्थिक संकट से जुड़ी है जब गल्फ वॉर के दौरान भारत के सामने गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा हो गया था. उस समय ऐसी खबरें सामने आई थीं कि देश के पास तेल का स्टॉक बेहद सीमित रह गया था. कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि भारत के पास सिर्फ तीन दिनों का तेल बचा था, जबकि कुछ में इसे एक सप्ताह या दस दिन बताया गया. असल समस्या यह थी कि तेल खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खत्म हो रहा था. उस संकट ने भारत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है.
    1991 के समय भारत के पास जो तेल स्टॉक था वह असल में तेल कंपनियों का कमर्शियल भंडार था. यानी वह रोजमर्रा की सप्लाई के लिए रखा जाता था. सरकार के पास अलग से ऐसा कोई रणनीतिक भंडार नहीं था जिसे सिर्फ आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सके. हालांकि उस समय भी तेल कंपनियां सरकारी नियंत्रण में ही थीं, लेकिन फिर भी संकट के समय अलग से सुरक्षित रिजर्व होना जरूरी समझा गया.
    दुनिया के कई बड़े देशों ने पहले से ही अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) बना रखे थे. इनका मकसद यही होता है कि अगर युद्ध, वैश्विक संकट या प्राकृतिक आपदा की वजह से तेल सप्लाई रुक जाए तो देश कुछ समय तक अपने भंडार के सहारे चल सके. इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे पुराने स्कूटरों में पेट्रोल टैंक में एक रिजर्व सिस्टम होता था. जब टैंक का पेट्रोल खत्म हो जाता था तो रिजर्व खोलकर नजदीकी पेट्रोल पंप तक पहुंचा जा सकता था. उसी तरह यह सरकारी रिजर्व होता है जिसे सिर्फ संकट की स्थिति में ही खोला जाता है.
    तेल कंपनियों के कमर्शियल भंडार आम तौर पर बड़े-बड़े तेल टैंकों या डिपो में रखे जाते हैं. लेकिन रणनीतिक भंडार के लिए ऐसी जगह चाहिए होती है जहां युद्ध या हमले का असर कम से कम हो.
    अगर कोई दुश्मन देश तेल डिपो को निशाना बना दे या किसी आपदा में डिपो नष्ट हो जाए तो संकट और बढ़ सकता है. इसलिए तय किया गया कि रणनीतिक भंडार जमीन के ऊपर नहीं बल्कि चट्टानों के भीतर बनाए जाएं.
    इसके लिए कई भौगोलिक मानकों पर विचार किया गया. पहली शर्त थी कि वहां मजबूत चट्टानें हों, जिनमें बड़ी गुफाएं बनाई जा सकें. दूसरी शर्त यह थी कि उन चट्टानों से तेल रिसना नहीं चाहिए. तीसरी शर्त थी कि उस इलाके में भूकंप का खतरा कम हो. चौथी शर्त यह थी कि समुद्री बंदरगाह पास हो, ताकि जहाजों से तेल आसानी से लाया जा सके. और पांचवीं शर्त यह थी कि रिफाइनरी भी ज्यादा दूर न हो, ताकि पाइपलाइन से तेल पहुंचाया जा सके
  • ईरान की जेल से रिहा हुए गाजियाबाद के मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता

    ईरान की जेल से रिहा हुए गाजियाबाद के मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता

    तेहरान। मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता को 57 दिन बाद ईरान की जेल से रिहा किया गया। फिलहाल वह भारतीय दूतावास की निगरानी में हैं और हालात सामान्य होने पर भारत लौटेंगे।
    मर्चेंट नेवी केतन मेहता खबर
    गाजियाबाद: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच शहर के लिए खुशखबरी आई है। डीएलएफ कॉलोनी में रहने वाले मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता को 57 दिन बाद ईरान की जेल से रिहा कर दिया गया।

    केतन फिलहाल ईरान में ही भारतीय दूतावास की निगरानी में एक होटल में रह रहे हैं। स्थिति सामान्य होने पर उन्हें भारत लाया जाएगा।

    उनके घर पर परिवार में जश्न का माहौल है।
    गिरफ्तारी का सिलसिला
    केतन मेहता को 6 जनवरी 2026 को ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट पर ईरानी कोस्ट गार्ड ने गिरफ्तार कर लिया था। तब से वह तेहरान की जेल में बंद थे। उनके पिता मुकेश मेहता ने विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री से उनके सुरक्षित भारत लाने की मदद की गुहार लगाई थी।

    केतन दुबई की तेल कंपनी में थर्ड इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने जून 2025 में मरीन इंजीनियर के रूप में कंपनी जॉइन की थी। इस कंपनी के जहाज ईरान से तेल लाने का कार्य करते हैं।

    परिवार से संपर्क और राहत की खबर
    भारतीय दूतावास के सहयोग से केतन मेहता को जेल से ही अपने परिवार से बात करने की अनुमति मिली थी।

    इस प्रक्रिया के जरिए मुकेश मेहता अक्सर अपने बेटे से संपर्क बनाए रखते थे।

    मुकेश मेहता ने बताया कि 31 दिसंबर को आखिरी बार फोन पर बात हुई थी। केतन ने कहा था कि तीन-चार दिन में वह दुबई लौटेंगे, लेकिन उसके बाद उसका फोन नहीं लगा। 16 जनवरी को पता चला कि उनके बेटे को ईरान कोस्ट गार्ड्स ने गिरफ्तार कर लिया है।

    होली पर मिली खुशी
    अब 4 मार्च, यानी होली वाले दिन फोन की घंटी बजी और बेटे की आवाज आई, पापा मैं छूट गया हूं। इस खबर ने परिवार को बहुत भावुक कर दिया। भारत सरकार की एंबेसी ने कोर्ट में पैरवी कर उन्हें रिहा कराया। केतन को फिलहाल एक होटल में दूतावास की निगरानी में रखा गया है। भारत लौटने के लिए सभी पेपर्स तैयार किए जा रहे हैं और जैसे ही फ्लाइट्स शुरू होंगी, केतन अपने देश लौट जाएंगे।

  • गोरखपुर में कपड़े की दुकान में भीषण आग, कार और दो बाइक भी जली

    गोरखपुर में कपड़े की दुकान में भीषण आग, कार और दो बाइक भी जली

    गोरखपुर। शहर के रायगंज गोरखपुर इलाके में मंगलवार शाम एक कपड़े की दुकान में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेजी से फैली कि दुकान के साथ-साथ गोदाम और पास में खड़ी एक कार व दो बाइक भी उसकी चपेट में आ गईं। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद दमकल टीम ने आग पर काबू पाया।
    राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।

    शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका

    घटना Kotwali Police Station, Gorakhpur क्षेत्र के घनी आबादी वाले रायगंज इलाके की है। यहां अमित गुप्ता की निष्ठा ट्रेडर्स नाम से कपड़े की दुकान है, जहां चुनरी, चादर और कपड़ों का थोक कारोबार होता है। बताया जा रहा है कि शाम करीब सात बजे दुकान में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ और आग लग गई।

    कुछ ही देर में आग दुकान से सटे गोदाम तक फैल गई। लपटें बढ़ने से गलियारे में खड़ी एक कार और दो मोटरसाइकिल भी जलने लगीं।

    परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया

    दुकान के ऊपर परिवार रहता था। आग लगते ही लोगों ने तुरंत परिवार के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। देखते ही देखते आसपास के लोग मौके पर जुट गए और इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    दमकल की 10 गाड़ियों ने पाया काबू

    सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। करीब 10 दमकल गाड़ियों की मदद से आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। मकान में सीढ़ियों और छत पर भी कपड़ा रखा होने की वजह से आग तेजी से फैलती चली गई।

    करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रात करीब 10 बजे आग पर काबू पा लिया गया।

    अधिकारी भी पहुंचे मौके पर

    घटना की सूचना मिलते ही Deepak Meena (डीएम) और Dr. Kaustubh (एसएसपी) भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

    मुख्य अग्निशमन अधिकारी Santosh Rai ने बताया कि सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां तुरंत भेजी गई थीं। आग अंदर तक फैल चुकी थी, लेकिन टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद उस पर काबू पा लिया।

    प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

  • केन्द्र की नई पहल, संसद से लेकर विधानसभाओं में महिलाओं को जल्द 33% आरक्षण देने की तैयारी

    केन्द्र की नई पहल, संसद से लेकर विधानसभाओं में महिलाओं को जल्द 33% आरक्षण देने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण (33 Percent Reservation Women) देने को लेकर केंद्र सरकार (Central Government) नई पहल की तैयारी में है। लंबे समय से चर्चा में रहे महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार अब ऐसा रास्ता तलाश रही है, जिससे इसका लाभ वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले ही लागू किया जा सके। इसके लिए कानून में संशोधन किया जा सकता है।

    वर्ष 2023 में संसद द्वारा पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (‘Women’s Empowerment Act’) के तहत महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। लेकिन इस कानून के अनुसार आरक्षण तभी लागू होना था जब अगली जनगणना पूरी हो जाए और उसके बाद नई परिसीमन प्रक्रिया लागू की जाए। चूंकि जनगणना और परिसीमन दोनों प्रक्रियाओं में काफी समय लग सकता है, इसलिए आशंका जताई जा रही थी कि महिलाओं को आरक्षण का वास्तविक लाभ मिलने में कई वर्ष लग सकते हैं।


    अनौपचारिक बातचीत शुरू

    सूत्रों का कहना है कि इस विषय पर विपक्षी दलों के साथ अनौपचारिक बातचीत भी शुरू कर दी गई है। सरकार का प्रयास है कि संसद में आवश्यक समर्थन जुटाकर महिला आरक्षण को जल्द लागू करने का रास्ता साफ किया जाए। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनती है, तो मौजूदा संसद सत्र में ही संविधान संशोधन विधेयक लाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


    वरिष्ठजनों को रेल किराये में छूट दें, संसद में मांग

    संसदीय समिति ने एक बार फिर वरिष्ठ नागरिकों को रेल किराये में छूट देने की पुरजोर वकालत की है। समिति ने रेलवे के पहले से सभी यात्रियों को छूट देने से होने वाले घाटे के तर्क को दरकिनार करते हुए कहा कि उक्त मद की धनराशि को रेलवे विज्ञापन अथवा अन्य तरीके से पूरा कर सकता है।

    विदित हो कि वरिष्ठ नागरिक सहित अन्य रेल किराये में छूट से रेलवे को सालाना 2,000 करोड़ से अधिक राजस्व का नुकसान होता है। रेलवे संबंधी स्थायी समिति मंगलवार को संसद में पेश अपनी आठवीं रिपोर्ट में भारतीय रेलवे के सामाजिक दायित्व और वित्तीय अनुशासन के बीच तालमेल बिठाने की सलाह दी है। सांसद डा. सीएम रमेश की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायत को फिर से शुरू किया जाता है, तो रेलवे पर सालाना लगभग 2,000 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।

    समिति ने मंत्रालय को सुझाव दिया है कि इसे केवल स्लीपर और थर्ड एसी (एसी-3) जैसी श्रेणियों तक सीमित रखकर इस बोझ को कम किया जा सकता है, ताकि जरूरतमंद बुजुर्गों को लाभ मिले और रेलवे की आर्थिक स्थिति भी न बिगड़े। वरिष्ठ नागरिक को रियायत देना केवल एक वित्तीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक कर्तव्य है। इसलिए मंत्रालय को मानवीय आधार पर रियायतें बहाल करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

  • Weather Update: राजस्थान में पारा 40°C पार, मध्य प्रदेश में 39°C; बिहार में बारिश का यलो अलर्ट, पहाड़ी राज्यों में बारिश-बर्फबारी की संभावना

    Weather Update: राजस्थान में पारा 40°C पार, मध्य प्रदेश में 39°C; बिहार में बारिश का यलो अलर्ट, पहाड़ी राज्यों में बारिश-बर्फबारी की संभावना


    नई दिल्ली। 11 मार्च 2026 मार्च की शुरुआत के साथ ही देश के कई हिस्सों में गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा समेत कई राज्यों में दिन का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। राजस्थान में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जबकि मध्य प्रदेश में भी पारा 39°C तक दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी और तेज हो सकती है।

    राजस्थान में 40°C पार पहुंचा तापमान
    राजस्थान में गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है। राज्य के बाड़मेर में सबसे अधिक 40.6°C तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने तेज गर्मी के साथ कुछ इलाकों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा राज्य के करीब 19 जिलों में ओलावृष्टि की संभावना भी जताई गई है।

    मध्य प्रदेश में भी बढ़ी गर्मी
    मध्य प्रदेश में मार्च के दूसरे सप्ताह से ही तापमान तेजी से बढ़ने लगा है। ग्वालियर-चंबल संभाग में तापमान सामान्य से 6°C ज्यादा दर्ज किया गया। मंगलवार को धार में सबसे अधिक 39°C तापमान रहा, जबकि राज्य के कई शहरों में तापमान 34°C से अधिक दर्ज किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि 15 मार्च के बाद गर्मी और तेज हो सकती है।

    बिहार में बारिश का यलो अलर्ट
    बिहार में मौसम का मिजाज थोड़ा बदला हुआ है। मौसम विभाग ने आज 8 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इनमें गोपालगंज, बेगूसराय और नालंदा समेत कई जिले शामिल हैं। मंगलवार को सबसे ज्यादा तापमान सुपौल में 32.1°C दर्ज किया गया, जबकि राजधानी पटना में तापमान 32°C रहा।

    पहाड़ी राज्यों में बारिश और बर्फबारी की संभावना
    उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मौसम विभाग ने बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई है। उत्तराखंड के देहरादून में मंगलवार को अधिकतम तापमान 31°C दर्ज किया गया। आने वाले दिनों में यहां तापमान 35°C तक पहुंच सकता है।

    क्यों बढ़ रही है इतनी जल्दी गर्मी?
    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक असामान्य गर्मी के पीछे कई कारण हैं। फरवरी में उत्तर और मध्य भारत में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) कम सक्रिय रहे, जिससे बादल और बारिश कम हुई। इसके कारण सूर्य की किरणें सीधे जमीन तक पहुंच रही हैं और सतह तेजी से गर्म हो रही है।

    इसके अलावा पश्चिम और मध्य भारत के ऊपर एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इस स्थिति में हवा नीचे की ओर दबती है, जिससे बादल कम बनते हैं और गर्म हवाएं चलती रहती हैं। यही कारण तापमान बढ़ने का मुख्य कारण बन रहा है।

    कब घोषित होती है हीटवेव?
    मौसम विभाग के अनुसार जब मैदानों में तापमान 40°C या उससे अधिक पहुंच जाता है और सामान्य तापमान से 4 से 6°C ज्यादा दर्ज होता है, तब हीटवेव की स्थिति मानी जाती है। इस दौरान लोगों को लू लगने का खतरा भी बढ़ जाता है।

    जून में अलनीनो का असर संभव
    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल ला-नीना कमजोर हो रहा है और अगले तीन महीने एनसो न्यूट्रल स्थिति रह सकती है। अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के अनुसार जून की शुरुआत में अलनीनो सक्रिय हो सकता है। इसी समय भारत में मानसून भी आता है।
    अलनीनो की स्थिति बनने पर न सिर्फ गर्मी बढ़ती है, बल्कि मानसून भी कमजोर हो सकता है।

    अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम
    12 मार्च: हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बारिश की संभावना है। पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और बिजली गिरने की आशंका है।

    13 मार्च: केरल और आंध्र प्रदेश में ज्यादातर जगहों पर मौसम शुष्क रहेगा, हालांकि कुछ तटीय इलाकों में हल्की बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

    निष्कर्ष:
    देश के कई हिस्सों में मार्च की शुरुआत से ही गर्मी बढ़ने लगी है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है, इसलिए लोगों को गर्मी और लू से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

  • भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को ईंधन की कोई कमी नहीं होगी : हरदीप सिंह पुरी

    भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को ईंधन की कोई कमी नहीं होगी : हरदीप सिंह पुरी


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को भरोसा दिलाया कि भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम पदार्थों (पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी) की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

    केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री ने ‘एक्स’ पोस्ट पर जारी एक बयान में ये भरोसा दिलाया कि भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को ईंधन की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और वैश्विक तनाव के बावजूद निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। हरदीप सिंह पुरी ने भरोसा दिलाया कि भारत में घरेलू कंज्यूमर्स के लिए एनर्जी की कोई कमी नहीं है और घबराने की कोई बात नहीं है। पेट्रोलियम मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत का ऊर्जा आयात अलग-अलग सोर्स और रास्तों से लगातार हो रहा है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने यह पक्का करने के लिए कई कदम उठाए हैं कि घरेलू उपभोक्ताओं को सीएनजी और पीएनजी की 100 फीसदी सप्लाई हो, और पश्चिम एशिया के मौजदा हालात के बावजूद दूसरी इंडस्ट्रीज़ को उनकी सप्लाई का 70 से 80 फीसदी मिलता रहे। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि सरकार देश के घरेलू उपभोक्तओं को सस्ती एनर्जी की बिना रुकावट सप्लाई पक्का करने के लिए कमिटेड है।

    हरदीप सिंह पुरी ने जारी बयान में कहा कि आज मीडिया के लोगों के साथ इनफॉर्मल बातचीत में हमने इस बात पर चर्चा की कि भारत में एनर्जी का इंपोर्ट अलग-अलग सोर्स और रास्तों से लगातार हो रहा है। उन्होंने कहा कि घरेलू कंज्यूमर्स के लिए कोई कमी नहीं है और घबराने की कोई बात नहीं है।

  • एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने हवाई टिकट पर बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज, हवाई यात्रा होगी महंगी

    एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने हवाई टिकट पर बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज, हवाई यात्रा होगी महंगी


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में तेजी आने पर एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस घरेलू उड़ानों के टिकट पर 399 रुपये का ईंधन अधिभार 12 मार्च से लागू करेंगी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी ईंधन अधिभार को बढ़ाया जाएगा। इससे हवाई यात्रा महंगी हो जाएगी।

    कंपनी ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते जेट फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज लगाने का फैसला किया है। एयरलाइन ने कहा कि 12 मार्च से घरेलू उड़ानों के टिकट पर 399 रुपये का ईंधन अधिभार और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकटों पर ईंधन अधिभार बढ़ाया जाएगा।


    जानें कितना लगेगा सरचार्ज

    एयरलाइन की ओर से जारी बयान के अनुसार 12 मार्च से घरेलू उड़ानों के हर टिकट पर 399 रुपये का फ्यूल सरचार्ज लगाया जाएगा। ये शुल्क सार्क देशों की उड़ानों पर भी लागू होगा। अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर भी सरचार्ज बढ़ाया गया है। पश्चिम एशिया के लिए उड़ानों पर 10 डॉलर का फ्यूल सरचार्ज लिया जाएगा। वहीं, अफ्रीका के लिए यह शुल्क 30 डॉलर से बढ़ाकर 90 डॉलर कर दिया गया है। दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए यह 20 डॉलर बढ़ाकर 60 डॉलर कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि ये सभी बदलाव 12 मार्च से लागू होंगे। सिंगापुर के लिए उड़ानों पर भी अब फ्यूल सरचार्ज लिया जाएगा, जबकि अभी तक इस रूट पर ऐसा कोई शुल्क नहीं था।