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  • कोलकाता में मेसी के दौरे का शर्मनाक अंत: सुरक्षा चूक के कारण 10 मिनट में मैदान छोड़ा, ममता ने मांगी माफी

    कोलकाता में मेसी के दौरे का शर्मनाक अंत: सुरक्षा चूक के कारण 10 मिनट में मैदान छोड़ा, ममता ने मांगी माफी


    कोलकाता । के साल्ट लेक स्टेडियम में शनिवार को फुटबॉल की एक ऐतिहासिक घटना की बजाय एक शर्मनाक कुप्रबंधन का दृश्य सामने आया। वैश्विक फुटबॉल सुपरस्टार लियोनेल मेसी को देखने के लिए आए हजारों दर्शकों को गहरा झटका तब लगा जब सुरक्षा कारणों से उन्हें महज 10 मिनट में मैदान छोड़ना पड़ा। इस अप्रत्याशित घटना के कारण फुटबॉल प्रेमियों में गुस्से की लहर दौड़ गई, और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।

    दर्शकों का गुस्सा और विरोध प्रदर्शन
    साल्ट लेक स्टेडियम, जिसे ‘भारतीय फुटबॉल का मक्का’ माना जाता है, पर यह घटना कोलकाता के फुटबॉल प्रेमियों के लिए सबसे बड़े झटके के रूप में आई। प्रीमियम टिकटों पर मोटी रकम खर्च कर स्टेडियम पहुंचे दर्शकों को जब मेसी का कार्यक्रम समय से पहले समाप्त होता दिखाई दिया, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। गुस्साए दर्शकों ने विरोध प्रदर्शन किया, बोतलें फेंकीं और आयोजकों के खिलाफ नारेबाजी की। कई होर्डिंग्स और कुर्सियों को नुकसान भी पहुँचाया गया।

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, “आज साल्ट लेक स्टेडियम में जो कुप्रबंधन देखने को मिला, उससे मैं अत्यधिक व्यथित हूं। मैं लियोनेल मेसी, सभी खेल प्रेमियों और उनके प्रशंसकों से दिल से माफी मांगती हूं।”

    जांच कमेटी का गठन
    इस शर्मनाक घटना के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तत्काल एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया। कमेटी की अध्यक्षता कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आशिम कुमार रे करेंगे। जांच का उद्देश्य घटना की पूरी जाँच करना, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना है।

    राजनीतिक हलचल और भाजपा का हमला
    यह घटना न केवल खेल जगत बल्कि राज्य की राजनीति में भी भूचाल ला गई है। भाजपा ने इस मामले को ममता सरकार के कुप्रबंधन का परिणाम बताया और राज्य के खेल मंत्री अरूप बिस्वास से इस्तीफे की मांग की। भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने इस घटना को “बड़ा अपमान” और “मेजर स्कैम” करार दिया। उनका आरोप था कि 70 फुट की प्रतिमा का अनावरण राजनीतिक उद्देश्य से किया गया और दर्शकों को गुमराह किया गया।

    मेसी का दौरा अधूरा
    यह घटना लियोनेल मेसी के ‘गोट इंडिया टूर 2025’ का पहला पड़ाव था, जो अब अधूरा रह गया है। सुरक्षा चिंताओं के कारण मेसी ने अपना दौरा समय से पहले ही समाप्त कर दिया। कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम, जैसे कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली से मुलाकात, अब अधूरे रह गए हैं। मेसी अब अपने अगले कार्यक्रम के लिए हैदराबाद के लिए रवाना हो गए हैं।

    साल्ट लेक स्टेडियम में हुआ कुप्रबंधन फुटबॉल के प्रति कोलकाता की दीवानगी और उसके ऐतिहासिक महत्त्व के लिए एक काला धब्बा बनकर उभरा है। यह घटना न केवल फुटबॉल प्रशंसकों के लिए निराशाजनक थी, बल्कि राज्य सरकार और आयोजकों के लिए भी एक बड़ा कड़ा सबक साबित हुई है।

  • केरल निकाय चुनाव: तिरुवनंतपुरम में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत, LDF का चार दशकों पुराना किला ढहा

    केरल निकाय चुनाव: तिरुवनंतपुरम में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत, LDF का चार दशकों पुराना किला ढहा


    नई दिल्ली। तिरुवनंतपुरम, जो न केवल केरल की प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक राजधानी भी मानी जाती है, ने राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव देखा है। बीजेपी ने स्थानीय निकाय चुनावों में तिरुवनंतपुरम नगर निगम में जबरदस्त जीत दर्ज की, और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) से सत्ता छीन ली। यह वही नगर निगम है जिस पर LDF ने पिछले चार दशकों से भी अधिक समय तक अपनी पकड़ बनाए रखी थी। इस सत्ता परिवर्तन को वाम मोर्चे के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

    तिरुवनंतपुरम की राजनीतिक अहमियत
    तिरुवनंतपुरम न सिर्फ केरल की प्रशासनिक राजधानी है, बल्कि यहां का राजनीतिक माहौल भी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर लगातार चार बार सांसद चुने गए हैं। यह क्षेत्र लंबे समय से कांग्रेस और वाम मोर्चे के प्रभाव वाला रहा है। ऐसे में नगर निगम में बीजेपी की जीत ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दिया है।

    BJP की जीत: बदलाव के संकेत
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत विधानसभा चुनावों में 2-3 सीटें जीतने से कहीं ज्यादा प्रभावशाली है। नगर निगम जैसे बड़े शहरी निकाय में बीजेपी की जीत यह संकेत देती है कि शहरी मतदाता पारंपरिक राजनीतिक ध्रुवीकरण से बाहर निकल कर नए विकल्प की तलाश में हैं। खासतौर पर, यह बदलाव उस राज्य में महत्वपूर्ण है, जहां चुनावी मुकाबला अब तक मुख्य रूप से LDF और UDF के बीच ही सीमित रहा है।

    स्थानीय चुनावी रुझान यह दर्शाते हैं कि शहरी इलाकों में LDF के खिलाफ नाराजगी और असंतोष बढ़ा है। प्रशासन, शहरी बुनियादी ढांचे, पारदर्शिता और स्थानीय मुद्दों को लेकर मतदाताओं का असंतोष इस चुनाव में खुलकर सामने आया। तिरुवनंतपुरम जैसे LDF के मजबूत गढ़ में हार ने वाम मोर्चे की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    BJP का उत्साह और भविष्य की उम्मीदें
    बीजेपी ने अपनी जीत को ऐतिहासिक और निर्णायक जनादेश बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह परिणाम केरल में बीजेपी के बढ़ते संगठनात्मक आधार और जनता के बदलते रुख का प्रमाण है। पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है, और इसे केरल में बीजेपी के लिए भविष्य की राजनीति का मजबूत आधार माना जा रहा है।

    वहीं, LDF ने नतीजों को गंभीरता से लिया है और आत्ममंथन की बात कही है। वाम नेताओं का कहना है कि चुनाव परिणामों का विश्लेषण किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

    प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई
    तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहर की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर उन्होंने लिखा, “Thank you Thiruvananthapuram!” पीएम मोदी ने इसे केरल की राजनीति में एक ‘वॉटरशेड मोमेंट’ करार देते हुए कहा कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी-एनडीए को मिले समर्थन से यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य के लोग मानते हैं कि केवल बीजेपी ही केरल की विकासात्मक आकांक्षाओं को पूरा कर सकती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी तिरुवनंतपुरम जैसे जीवंत शहर के विकास के लिए काम करेगी और आम लोगों के लिए ‘Ease of Living’ को और बेहतर बनाएगी।

    तिरुवनंतपुरम में बीजेपी की जीत ने न केवल राज्य की राजनीतिक स्थिति को हिलाया है, बल्कि एक नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत भी की है। इस ऐतिहासिक जीत ने केरल में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को उजागर किया है, और भविष्य में राज्य की राजनीति में इसका असर देखने को मिल सकता है।

  • दिल्ली में प्रदूषण का कहर: AQI 700 के पार, GRAP-3 लागू, आपातकाल जैसी स्थिति

    दिल्ली में प्रदूषण का कहर: AQI 700 के पार, GRAP-3 लागू, आपातकाल जैसी स्थिति


    नई दिल्ली। दिल्ली की हवा एक बार फिर ‘गंभीर’ से भी ऊपर पहुंच गई है, और इसके परिणामस्वरूप वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई इलाकों में 700 तक पहुंच चुका है। इस खतरनाक प्रदूषण को देखते हुए, प्रशासन ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज 3 को लागू कर दिया है, जिससे दिल्ली में आपातकाल जैसी स्थिति बन गई है।

    प्रदूषण की गंभीरता और GRAP-3 का इमरजेंसी ऐलर्ट
    दिल्ली में प्रदूषण का स्तर अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुँच चुका है। वायु गुणवत्ता में अचानक आई इस गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 13 दिसंबर की सुबह से तत्काल प्रभाव से GRAP-3 लागू कर दिया। इस स्थिति में दिल्ली के कई क्षेत्रों में AQI 400 से अधिक दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। कुछ इलाकों में तो AQI 700 तक पहुंच चुका है, जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक साबित हो सकता है।

    GRAP-3 के तहत कड़े प्रतिबंधों की शुरुआत
    GRAP-3 लागू होने के बाद, प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर सीधे और कड़ी रोक लगा दी गई है। इनमें शामिल हैं:

    निर्माण और विध्वंस पर रोक: गैर-आवश्यक निर्माण कार्यों और विध्वंस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही, पत्थर तोड़ने की मशीनों और ईंट भट्टों को भी बंद कर दिया गया है।

    डीजल जेनरेटर पर प्रतिबंध: डीजल जेनरेटर के उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है, सिवाय आवश्यक सेवाओं के।

    वाहनों और औद्योगिक गतिविधियों पर नियंत्रण: गैर-जरूरी वाहनों की संख्या कम करने और औद्योगिक उत्सर्जन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

    सशर्त छूट
    कुछ आवश्यक सेवाओं को इस कड़े प्रतिबंध से छूट दी गई है, जैसे कि मेट्रो, रेलवे, हवाई अड्डे, स्वास्थ्य और स्वच्छता सेवाएं। विकलांगों के लिए विशेष छूट प्राप्त वाहन और कक्षा 5 तक की हाइब्रिड पढ़ाई की व्यवस्था भी की जा सकती है। इसके साथ ही, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया गया है।

    किस प्रकार के क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए?
    दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि 21 प्रमुख निगरानी केंद्रों पर AQI 400 से अधिक दर्ज किया गया। इनमें से सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में वजीरपुर (AQI 445), विवेक विहार (AQI 444), जहाँगीरपुरी (AQI 442), आनंद विहार (AQI 439) और अशोक विहार तथा रोहिणी (AQI 437) शामिल हैं।

    प्रदूषण के प्रमुख कारण: मौसम का बदला मिजाज
    विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण पश्चिमी राज्यों में पराली जलाने से उठने वाला धुआं है, जो हवा के माध्यम से दिल्ली-NCR में पहुँच रहा है। इसके अलावा, बढ़ती हुई गाड़ियों की संख्या और लगातार चल रहे निर्माण कार्य भी PM 2.5 और PM 10 कणों की मात्रा को बढ़ा रहे हैं। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, क्लाइमेट चेंज के कारण मौसम का पैटर्न बदल चुका है, जिससे प्रदूषकों का शहर में जमाव अधिक हो रहा है।

    आगे की चुनौती: स्वास्थ्य पर ध्यान और सख्त उपाय
    दिल्ली में प्रदूषण की बढ़ती समस्या अब प्रशासन और नागरिकों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। अधिकारियों को सख्त प्रतिबंधों के साथ प्रदूषण पर काबू पाना है, ताकि आम जनजीवन और स्वास्थ्य को बचाया जा सके। प्रदूषण से बचने के लिए नागरिकों को घर के अंदर रहने, मास्क पहनने और बच्चों एवं बुजुर्गों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

  • कैप्टन अमरिंदर सिंह का बीजेपी और कांग्रेस पर 'दमदार' हमला, सिद्धू को दी क्रिकेट कमेंट्री की सलाह

    कैप्टन अमरिंदर सिंह का बीजेपी और कांग्रेस पर 'दमदार' हमला, सिद्धू को दी क्रिकेट कमेंट्री की सलाह


    नई दिल्‍ली । पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने बयानों से राजनीतिक हलचल मचा दी है। उन्होंने बीजेपी के कार्यशैली पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के फैसले दिल्ली से होते हैं और जमीनी नेताओं से कोई सलाह नहीं ली जाती। इसके साथ ही, उन्होंने कांग्रेस में वापसी की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने का दर्द अभी भी ताजा है, इसलिए कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं उठता।

    बीजेपी पर हमला:
    कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बीजेपी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में बड़े फैसले दिल्ली से होते हैं और जमीनी नेताओं की राय की कोई अहमियत नहीं है, हालांकि उनके पास 60 साल का राजनीतिक अनुभव है। इस बयान के साथ उन्होंने कांग्रेस में वापसी की संभावना को पूरी तरह से नकारा किया।

    प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ, सिद्धू पर प्रहार:
    हालांकि, अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की और कहा कि मोदी जी का पंजाब के प्रति विशेष स्नेह है। वहीं, नवजोत कौर सिद्धू पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धू को राजनीति छोड़कर क्रिकेट कमेंट्री पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अमरिंदर ने सिद्धू और उनकी पत्नी को ‘अस्थिर’ करार दिया।

    अकाली दल से गठबंधन की जरूरत पर जोर:
    पंजाब की राजनीतिक स्थिति पर बोलते हुए, अमरिंदर सिंह ने बीजेपी को मजबूत बनाने के लिए शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन करने की सलाह दी। उनका मानना था कि बिना गठबंधन के पंजाब में सरकार बनाना मुश्किल है।

    ‘आप’ सरकार पर तीखा हमला:
    आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी अमरिंदर सिंह ने करारा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब अब सबसे खराब दौर से गुजर रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान केवल टीवी पर चुटकुले सुनाते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में असली फैसले दिल्ली से किए जा रहे हैं और मान केवल नाममात्र के मुख्यमंत्री हैं। इसके अलावा, अमरिंदर ने पंजाब को ‘भिखारी राज्य’ करार दिया, जो मुफ्त योजनाओं की वजह से बर्बाद हो गया है।

    बीजेपी-अकाली गठबंधन पर प्रतिक्रिया:
    अमरिंदर सिंह के बीजेपी और अकाली दल के गठबंधन के सुझाव पर बीजेपी नेताओं ने खारिज कर दिया और कहा कि पार्टी अकेले पंजाब में चुनाव लड़ेगी। हालांकि, अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने इस सुझाव का समर्थन किया और कहा कि बीजेपी पंजाब में अकेले सरकार नहीं बना सकती।

    AAP का पलटवार:
    आम आदमी पार्टी ने अमरिंदर सिंह के ‘भिखारी राज्य’ वाले आरोपों पर तीखा पलटवार किया। ‘आप’ के नेताओं ने अमरिंदर सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कहा कि उनकी सरकार के दौरान खनन और केबल माफिया फल-फूल रहे थे। ‘आप’ ने यह भी कहा कि पंजाब की जनता ने पिछले भ्रष्ट शासन के खिलाफ खड़े होकर ‘आप’ को बहुमत दिया।

    कांग्रेस और ‘आप’ का तंज:
    कांग्रेस और ‘आप’ ने कैप्टन के बीजेपी और अकाली दल के गठबंधन सुझाव पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों दल अकेले ही इतने कमजोर हैं कि उनका गठबंधन भी किसी असरदार बदलाव का कारण नहीं बनेगा।

    इस तरह, कैप्टन अमरिंदर सिंह के हमले और उनके सुझावों पर विभिन्न दलों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। पंजाब की राजनीतिक स्थिति में यह बयान एक नई बहस का आगाज कर सकते हैं।

  • उत्तर भारत में ठंड का कहर: राजस्थान-MP के 37 शहरों में पारा 10° से नीचे, यूपी-बिहार में घना कोहरा, उत्तराखंड में झरने जमे

    उत्तर भारत में ठंड का कहर: राजस्थान-MP के 37 शहरों में पारा 10° से नीचे, यूपी-बिहार में घना कोहरा, उत्तराखंड में झरने जमे


    नई दिल्ली /उत्तर भारत इन दिनों कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे की चपेट में है। राजस्थान और मध्य प्रदेश के 37 शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। यूपी-बिहार में विजिबिलिटी 10 मीटर तक सिमट गई है जबकि उत्तराखंड में माइनस तापमान के कारण झरने और नाले जम गए हैं।उत्तर भारत में ठंड का कहर: राजस्थान-MP के 37 शहरों में पारा 10° से नीचे यूपी-बिहार में घना कोहरा उत्तराखंड में झरने जमे राजस्थान में सर्दी के बीच पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है। इसके असर से बीकानेर चूरू श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ और जैसलमेर सहित कई जिलों में बादल छाए रहे। इससे पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाएं कमजोर पड़ीं और दिन के तापमान में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि रात की ठंड अभी भी बरकरार है। शुक्रवार को राज्य के 18 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में पारा 3 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया जो इस सीजन के सबसे कम तापमान में से एक है। बीकानेर में दिन का अधिकतम तापमान बढ़कर 31 डिग्री तक पहुंच गया जिससे दिन में हल्की राहत जरूर मिली।

    मध्य प्रदेश: पचमढ़ी जितना ठंडा इंदौर

    मध्य प्रदेश में इस बार सर्दी रिकॉर्ड तोड़ साबित हो रही है। राज्य के 19 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। औद्योगिक शहर इंदौर में शुक्रवार रात तापमान 5.2 डिग्री रहा जो पिछले 10 वर्षों में सबसे कम है।हैरानी की बात यह रही कि यही तापमान प्रदेश के इकलौते हिल स्टेशन और सबसे ठंडी जगह माने जाने वाले पचमढ़ी में भी दर्ज हुआ। राजधानी भोपाल में पारा 7 डिग्री से नीचे बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों तक प्रदेश में शीतलहर की संभावना नहीं है लेकिन ठंड का असर बना रहेगा।

    उत्तर प्रदेश और बिहार: कोहरे ने रोकी रफ्तार
    उत्तर प्रदेश और बिहार में घना कोहरा सबसे बड़ी मुसीबत बनकर सामने आया है। यूपी के लखनऊ गोरखपुर सहित करीब 30 जिलों में विजिबिलिटी 10 मीटर तक सिमट गई। शनिवार सुबह सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर कोहरे के कारण कई वाहन आपस में भिड़ गए जिसमें एक महिला घायल हो गई। बिहार में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। समस्तीपुर में तापमान 7.9 डिग्री तक गिर गया जो इस सीजन का सबसे कम बताया जा रहा है। बेगूसराय और बक्सर में जीरो विजिबिलिटी दर्ज की गई जहां सड़कों पर 100 मीटर दूर देखना भी मुश्किल हो गया। पटना समेत 8 शहरों में शनिवार सुबह घना कोहरा छाया रहा।

    उत्तराखंड: माइनस तापमान झरने और नाले जमे
    पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में सर्दी ने सबसे कठोर रूप ले लिया है। चमोली जिले की नीती घाटी में तापमान माइनस 10 डिग्री तक पहुंच गया जिससे नदी-नाले और झरने जम गए हैं। मौसम विभाग ने रविवार से उत्तरकाशी चमोली और पिथौरागढ़ में बारिश के साथ हल्की बर्फबारी की संभावना जताई है।बर्फबारी के बाद इन इलाकों में तापमान 2 से 3 डिग्री और गिर सकता है। वहीं हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति चंबा और कुल्लू जिलों में भी बर्फबारी के आसार बने हुए हैं।उत्तर भारत में सर्दी कोहरा और बर्फबारी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। मौसम विभाग की चेतावनियों के बीच लोगों को सतर्क रहने अनावश्यक यात्रा से बचने और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।

  • रांची एयरपोर्ट पर टला बड़ा विमान हादसा, हार्ड लैंडिंग के दौरान इंडिगो विमान का पिछला हिस्सा रनवे से टकराया, 56 यात्री सुरक्षित

    रांची एयरपोर्ट पर टला बड़ा विमान हादसा, हार्ड लैंडिंग के दौरान इंडिगो विमान का पिछला हिस्सा रनवे से टकराया, 56 यात्री सुरक्षित


    नई दिल्ली/रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर शुक्रवार रात उस समय अफरातफरी मच गई, जब इंडिगो एयरलाइंस का एक विमान लैंडिंग के दौरान तकनीकी खराबी का शिकार हो गया। भुवनेश्वर से रांची आ रहा इंडिगो का विमान संख्या 6ई-7361 हार्ड लैंडिंग के दौरान रनवे से टकरा गया, जिससे विमान का पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि विमान में सवार सभी 56 यात्री सुरक्षित हैं।

    जानकारी के अनुसार, विमान ने भुवनेश्वर एयरपोर्ट से शाम 7:55 बजे उड़ान भरी थी और इसे रात 8:30 बजे रांची पहुंचना था। मौसम सामान्य था, लेकिन लैंडिंग के समय अचानक तकनीकी समस्या उत्पन्न हो गई। पायलट को मजबूरी में हार्ड लैंडिंग करानी पड़ी। इसी दौरान विमान का पिछला हिस्सा रनवे से रगड़ खा गया, जिससे जोरदार झटका महसूस हुआ। जैसे ही विमान रनवे से टकराया, यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें ऐसा लगा जैसे विमान नियंत्रण से बाहर हो गया हो। हालांकि पायलट की सूझबूझ और अनुभव के चलते विमान को संतुलित किया गया और उसे सुरक्षित रूप से एप्रन पर रोक दिया गया।

    विमान के रुकते ही एयरपोर्ट प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। सभी यात्रियों को एक-एक कर सुरक्षित विमान से बाहर निकाला गया। कुछ यात्रियों को हल्की चोटें आईं, जिनका मौके पर प्राथमिक उपचार किया गया।किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है। हादसे के बाद एयरपोर्ट परिसर में कुछ समय के लिए तनाव और भ्रम की स्थिति बनी रही। यात्रियों और उनके परिजनों में चिंता का माहौल था। बाद में एयरपोर्ट प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लिया और यात्रियों को आश्वस्त किया।

    इंडिगो एयरलाइंस के इंजीनियरों द्वारा विमान की तकनीकी जांच की गई। प्रारंभिक जांच में विमान को उड़ान के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विमान को ग्राउंडेड कर दिया गया, ताकि किसी भी तरह के जोखिम से बचा जा सके।इस घटना का असर रांची से भुवनेश्वर जाने वाली अगली इंडिगो उड़ान पर भी पड़ा। उस उड़ान को रद्द कर दिया गया, जिससे यात्रियों में नाराजगी देखी गई। यात्रियों का कहना था कि उन्हें देर रात तक एयरपोर्ट पर इंतजार कराया गया और एयरलाइंस की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

    पहले विमान को रात 9:40 बजे ग्राउंडेड घोषित किया गया। बाद में एयरलाइंस ने बताया कि 6 से 7 घंटे बाद वैकल्पिक विमान की व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन समय पर दूसरा विमान उपलब्ध नहीं हो सका। इसके बाद इंडिगो एयरलाइंस ने यात्रियों के लिए होटल में ठहरने और भोजन की व्यवस्था की। रांची से भुवनेश्वर जाने वाले 77 यात्रियों को रात में ही होटल में ठहराया गया। एयरपोर्ट प्रशासन और इंडिगो एयरलाइंस ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

  • अमरिंदर सिंह का बयान: कहा- भाजपा में मुझसे सलाह नहीं ली जाती, लेकिन कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं

    अमरिंदर सिंह का बयान: कहा- भाजपा में मुझसे सलाह नहीं ली जाती, लेकिन कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं


    ई दिल्‍ली । पंजाब(Punjab) के पूर्व मुख्यमंत्री (Chief Minister)और भारतीय जनता पार्टी(Bharatiya Janata Party) के नेता अमरिंदर सिंह(Amarinder Singh) ने शुक्रवार को बड़ा बयान दिया। भाजपा के कामकाज की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विपरीत, पार्टी उनसे परामर्श नहीं कर रही है। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस में लौटने की संभावना को पूरी तरह खारिज किया।

    मीडिया को दिए इंटरव्यू में अमरिंदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्हें जिस तरह से मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था, उससे वह अब भी आहत हैं, इसलिए कांग्रेस में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि भाजपा में सभी निर्णय दिल्ली में लिए जाते हैं और जमीनी नेताओं से परामर्श नहीं किया जाता। उन्होंने कहा, ‘मेरे पास 60 साल का राजनीतिक अनुभव है, लेकिन मैं खुद को उन पर थोप नहीं सकता।’

    हालांकि, अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मोदी का पंजाब के लिए विशेष स्नेह है और वह राज्य के लिए कुछ भी करेंगे। नवजोत कौर सिद्धू के इस बयान पर कि पंजाब में 500 करोड़ रुपये का सूटकेस देने वाला मुख्यमंत्री बनता है, सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी को अस्थिर बताया और सिद्धू को राजनीति छोड़कर क्रिकेट कमेंट्री पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। सिंह ने कहा कि भाजपा पंजाब में तभी मजबूत हो सकती है जब वह शिरोमणि अकाली दल के साथ हाथ मिलाए। उन्होंने दावा किया कि दोनों दल अंततः एक साथ आएंगे, क्योंकि पंजाब में गठबंधन के बिना कोई सरकार नहीं बन सकती।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तंज कसा
    वर्तमान आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पंजाब आतंकवाद के वर्षों के बाद सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तंज कसते हुए कहा कि वह केवल टीवी पर आते हैं और चुटकुले सुनाते हैं। सिंह ने आरोप लगाया कि मुफ्त की योजनाओं के कारण पंजाब भिखारी राज्य बन गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मान केवल नाममात्र के मुखिया हैं, जबकि पंजाब के असली फैसले अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ले रहे हैं। सिंह ने लोगों से स्थिरता के लिए भाजपा पर विचार करने का आग्रह किया, क्योंकि भारत की सुरक्षा पंजाब के हितों से जुड़ी हुई है।

  • बगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद स्थल पर जुटी भीड़, सैकड़ों लोगों ने अदा की जुमे की नमाज

    बगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद स्थल पर जुटी भीड़, सैकड़ों लोगों ने अदा की जुमे की नमाज


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल (West Bengal)के मुर्शिदाबाद (Murshidabad)जिले में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद शैली वाली मस्जिद के स्थल पर सैकड़ों लोगों ने शुक्रवार की नमाज अदा की। निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir)ने 6 दिसंबर को इस मस्जिद की नींव रखी थी। यह तारीख वही है जब 1992 में अयोध्या(Ayodhya) की बाबरी मस्जिद को ढहाया गया था। आज सुबह से ही आसपास के गांवों से लोग खेतों के रास्ते इस स्थल की ओर आने लगे थे। नमाज के समय नजदीक आने पर आयोजकों ने लाउडसर्स के जरिए भीड़ को निर्देश दिए। तस्वीरों में दिख रहा है कि नमाजियों की लंबी-लंबी कतारें खेतों से होते हुए खुले मैदान तक पहुंच रही थीं।

    पहले से क्षेत्र में तनाव को देखते हुए भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पिछले हफ्ते तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित किए गए हुमायूं कबीर भी नमाज में शामिल हुए। किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस बल बढ़ा दिया गया था। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। आयोजकों ने करीब 1 हजार लोगों के लिए खाने की व्यवस्था की थी, लेकिन भीड़ उससे कहीं अधिक थी। पड़ोस के प्लासी से आए लोगों ने करीब डेढ़ क्विंटल चावल से खिचड़ी बनाई। खाना बनाने वाली कमेटी के एक सदस्य ने कहा, ‘हम ये सवाब के लिए कर रहे हैं। पता नहीं कितने लोग आएंगे, लेकिन उन्हें खिलाना बड़ा पुण्य है।’

    राजनीतिक बयानबाजियां तेज
    नींव रखे जाने के बाद से बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बनने वाली इस मस्जिद के लिए भारी चंदा आ रहा है। स्थल पर रखे दान-पात्र तेजी से भरते दिखे और डिजिटल योगदान के लिए क्यूआर कोड भी लगाए गए थे। नींव समारोह ने तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं पैदा की थीं। भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सांप्रदायिक तुष्टिकरण का आरोप लगाया। तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि यह सारा मामला भाजपा के इशारे पर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्र को ध्रुवीकृत करने की साजिश है। हुमायूं कबीर ने कहा कि वे सिर्फ लोगों की मांग पर ऐसा कर रहे हैं।

  • सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश: याचिकाकर्ताओं और वकीलों को न्यायपालिका को बदनाम न करने की चेतावनी

    सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश: याचिकाकर्ताओं और वकीलों को न्यायपालिका को बदनाम न करने की चेतावनी


    नई दिल्‍ली । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)ने शुक्रवार को एक अर्जी पर नाराजगी जताते हुए याचिकाकर्ता (Petitioner)को फटकार लगाई और एक लाख रुपये का जुर्माना भी ठोक दिया। यह याचिका अल्पसंख्यक स्कूलों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रावधानों (Provisions)के तहत छूट देने के सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की याचिका दायर करके न्यायपालिका को बदनाम न करें।

    जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की पीठ यूनाइटेड वॉयस फॉर एजुकेशन फोरम एनजीओ द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया था कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को दी गई छूट असंवैधानिक है, क्योंकि यह उन्हें आरटीई दायित्वों से पूरी तरह से छूट देती है। पीठ ने कहा कि अगर वकील इस तरह की सलाह दे रहे हैं तो उन्हें भी दंडित करना होगा। कोर्ट ने जुर्माना लगाते हुए कहा कि सख्त संदेश देना जरूरी है। आप कानून के जानकार और पेशेवर हैं और आप अनुच्छेद 32 के तहत इस न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर करते हैं? आप कोर्ट के महत्व को समझते नहीं हैं। 2014 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में आरटीई एक्ट को आर्टिकल 30(1) के तहत अल्पसंख्यक स्कूलों पर लागू नहीं माना था।

    इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि ‘म्यूचुअल फंड सही है’ जैसे लोकप्रिय विज्ञापन अभियान निवेशकों को गुमराह करते हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ इस साल सितंबर में बॉम्बे हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया को निवेशक शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम चलाने के लिए दी गई छूट को रद्द करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

    साथ ही, देश में सभी इमारतों को भूकंप रोधी बनाने और भूकंप की स्थिति से निपटने के लिए समाधान की मांग करने वाली याचिका शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिकाकर्ता ने पीठ को बताया कि पहले यह माना जाता था कि दिल्ली सबसे ज्यादा भूकंप संभावित क्षेत्र है, लेकिन नई रिपोर्ट में पता चला है कि देश का 75 प्रतिशत क्षेत्र भूकंप संभावित है। इस पर जज ने कहा तो क्या सभी लोगों को चांद पर रहने भेज दिया जाए? इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि वह भूकंप से कम नुकसान के उपाय अपनाने की बात लेकर कोर्ट पहुंचे हैं। देश में भूकंप के खतरे को ध्यान में रखते हुए भवन और दूसरे निर्माण होने चाहिए।

    याचिकाकर्ता ने जापान में हाल ही में आए भूकंप का जिक्र किया। उन्होंने ऐसी स्थिति से निपटने के लिए वहां पर होने वाले विशेष किस्म के भवन निर्माण पर चर्चा करनी चाही, लेकिन पीठ ने उन्हें रोका। कोर्ट ने कहा कि मीडिया में कौन सी रिपोर्ट प्रकाशित हो रही है, उसके आधार पर कोर्ट में सुनवाई नहीं होती। यह विषय नीतिगत है।

  • अल्पसंख्यकों से जुड़े मामले पर भड़कीं जस्टिस नागरत्ना, याचिकाकर्ता पर लगाया 1 लाख का जुर्माना

    अल्पसंख्यकों से जुड़े मामले पर भड़कीं जस्टिस नागरत्ना, याचिकाकर्ता पर लगाया 1 लाख का जुर्माना


    नई दिल्‍ली । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)ने शुक्रवार (12 दिसंबर) को उस रिट याचिकाकर्ता(Petitioner) को कड़़ी फटकार लगाई, जिसने अल्पसंख्यक(minority) विद्यालयों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत छूट देने के शीर्ष न्यायालय के पूर्व के आदेश को चुनौती दी थी। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने इस रिट पिटीशन को देश की न्यायपालिका को नीचा दिखाने और उसे ध्वस्त करे की एक कोशिश करार दिया और याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया।

    जस्टिस नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी की, “आप सुप्रीम कोर्ट के साथ ऐसा नहीं कर सकते। हम गुस्से में हैं। अगर आप ऐसे मामले दायर करना शुरू कर देंगे तो यह इस देश की पूरी न्याय प्रणाली के खिलाफ होगा। आपको अपने मामले की गंभीरता का पता नहीं है। हम खुद को 1 लाख रुपये के जुर्माने तक ही सीमित रख रहे हैं। ऐसे मामले दायर करके इस देश की न्यायपालिका को नीचा न दिखाएं।”

    न्यायपालिका को बदनाम मत कीजिए
    कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि वकील सुप्रीम कोर्ट के अपने ही फैसलों के खिलाफ ऐसी याचिकाएं दायर करने की सलाह कैसे दे रहे हैं? याचिका दायर करने के लिए वकील को फटकार लगाते हुए पीठ ने कहा, ‘‘इस तरह के मामले दायर करके देश की न्यायपालिका को बदनाम मत कीजिए। यहां क्या हो रहा है? क्या वकील इस तरह की सलाह दे रहे हैं? हमें वकीलों को दंडित करना होगा।’’ पीठ ने कहा, “हम केवल एक लाख रुपये का जुर्माना ही लगा रहे हैं।’’

    आप देश की न्यायपालिका को ध्वस्त करना चाहते हैं
    न्यायालय ने कहा, ‘‘आप कानून के जानकार लोग और पेशेवर हैं और आप अनुच्छेद 32 के तहत इस न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर करते हैं? घोर दुरुपयोग। हम संयम बरत रहे हैं। हम अवमानना ​​का आदेश जारी नहीं कर रहे हैं। आप इस देश की न्यायपालिका को ध्वस्त करना चाहते हैं।’’

    किस NGO ने दायर की थी याचिका?
    उच्चतम न्यायालय गैर-सरकारी संगठन ‘यूनाइटेड वॉइस फॉर एजुकेशन फोरम’ द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को दी गई छूट असंवैधानिक है क्योंकि यह उन्हें शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के दायित्वों से पूर्ण रूप से छूट प्रदान करती है। न्यायालय ने 2014 में दिए फैसले में कहा था कि आरटीई अधिनियम अनुच्छेद 30(1) के तहत अल्पसंख्यक विद्यालयों पर लागू नहीं होता है, जो धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और शासन का अधिकार प्रदान करता है।