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  • SIR को चुनौती…. SC बोला- वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर क्या आंखें मूंद ले चुनाव आयोग?

    SIR को चुनौती…. SC बोला- वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर क्या आंखें मूंद ले चुनाव आयोग?


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (Special in-depth review-SIR) को लेकर जारी अधिसूचना में ‘माइग्रेशन’ शब्द की व्याख्या केवल देश के भीतर के प्रवासन तक सीमित नहीं मानी जा सकती, बल्कि इसमें सीमा पार प्रवासन भी शामिल हो सकता है। अदालत ने यह टिप्पणी उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की जिनमें बिहार में SIR को चुनौती देते हुए आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग (Election Commission- ECI) नागरिकता पर संदेह के आधार पर लोगों को मतदाता सूची से हटाकर मताधिकार छीन रहा है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR कोई नियमित प्रक्रिया नहीं है और बिहार में यह 2003 के बाद पहली बार किया जा रहा है। कोर्ट ने पूछा, “क्या चुनाव आयोग मतदाता सूची की शुचिता बनाए रखने के लिए किसी ‘शुद्धिकरण और छंटनी’ की प्रक्रिया नहीं अपना सकता? यदि गड़बड़ियां मिलें तो क्या आयोग को आंख मूंद लेनी चाहिए?”

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, “माइग्रेशन ट्रांस-कंट्री भी हो सकता है। यह केवल देश के भीतर का प्रवासन नहीं है। आजीविका और अन्य कारणों से लोग विदेशी सीमाएं पार करते हैं। ‘ब्रेन ड्रेन’ भी प्रवासन ही है।”

    पीठ की यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन के उस तर्क के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि चुनाव आयोग नागरिकता की जांच करना चाहता था, तो उसे 24 जून के आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख करना चाहिए था। आदेश में SIR का आधार केवल “तेजी से शहरीकरण” और “शिक्षा व आजीविका के लिए बार-बार होने वाला जनसंख्या का स्थानांतरण” बताया गया था।


    BLO के संदेह पर नाम हटाना खतरनाक— याचिकाकर्ता

    रामचंद्रन ने दलील दी कि SIR को विदेशी नागरिकों की पहचान से जोड़ना असंवैधानिक है, क्योंकि नागरिकता की जांच के लिए पहले से वैधानिक प्रक्रिया मौजूद है। उन्होंने कहा, “सिर्फ बूथ लेवल ऑफिसर के संदेह पर किसी को मतदाता सूची से हटाना बेहद खतरनाक है।” कोर्ट ने जवाब दिया कि उनकी टिप्पणियां अंतिम निष्कर्ष नहीं हैं बल्कि मुद्दे पर बेहतर तर्कों के लिए एक प्रयास हैं।

    याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया ‘गलत संदेह’ पर आधारित है और बड़े पैमाने पर मतदाताओं को अयोग्य घोषित करने की कोशिश है। रामचंद्रन ने कहा, “ECI का कर्तव्य मतदाता को सक्षम बनाना है, निष्क्रिय करना नहीं।” उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के बाद नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में SIR को लागू करना “कॉपी-पेस्ट” जैसा है, जो चुनाव आयोग की “मस्तिष्क-प्रक्रिया की कमी” दर्शाता है।

    अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर के लिए तय की है, जब चुनाव आयोग अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया देगा। अगले सप्ताह उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, पुदुचेरी और पश्चिम बंगाल में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी।

  • कर्नाटक के बाद अब पंजाब कांग्रेस में घमासान…. सक्रिए हुए राहुल गांधी

    कर्नाटक के बाद अब पंजाब कांग्रेस में घमासान…. सक्रिए हुए राहुल गांधी


    चंडीगढ़।
    कांग्रेस (Congress) में आंतरिक कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। कर्नाटक (Karnataka) के बाद अब पंजाब इकाई (Punjab Congress) में नेताओं के बीच तनातनी जारी है। खबर है कि हालात संभालने के लिए कांग्रेस आलाकमान सक्रिय हो गया है। कहा जा रहा है कि सांसद राहुल गांधी (MP Rahul Gandhi) ने भी इस संबंध में बैठक बुलाई थी। हालांकि, इस संबंध में कांग्रेस की तरफ से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

    कांग्रेस की निलंबित नेता नवजोत कौर सिद्धू के बयान के बाद कांग्रेस की पंजाब इकाई में तनाव बढ़ गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि हालात काबू में करने के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। सूत्रों ने कहा है कि राहुल गांधी ने पंजाब मामलों के प्रभारी समेत कई बड़े नेताओं के साथ बैठक की है। उन्होंने बताया है कि कांग्रेस नेतृत्व जारी संसद सत्र के दौरान संकट बढ़ने नहीं देना चाहता।

    नवजोत कौर सिद्धू बनाम राजा अमरिंदर सिंह वडिंग
    नवजोत कौर ने बुधवार को कहा कि वह और उनके पति हमेशा पार्टी के साथ रहेंगे। कौर कांग्रेस की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी हैं। कौर ने कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग पर भी तीखा हमला करते हुए उन पर पार्टी को ‘बर्बाद’ करने का आरोप लगाया। कौर ने बुधवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘हम कांग्रेस के साथ हैं और हमेशा रहेंगे, और हम अपने पंजाब राज्य को जीतेंगे और इसे अपने विनम्र, प्रिय और त्याग के प्रतीक गांधी परिवार को उपहार स्वरूप देंगे।’

    कौर ने वडिंग पर निशाना साधते हुए कहा कि 70 ‘कुशल, ईमानदार और वफादार’ नेता उनके संपर्क में हैं, ‘जिन्हें आपने (वडिंग) कांग्रेस पार्टी से अलग कर दिया है और जो कांग्रेस टिकट के लिए योग्य विजयी उम्मीदवार हैं।’ उन्होंने अपने पोस्ट में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, ‘आप पंजाब की 70 प्रतिशत सीटों को बर्बाद करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जहां आपने पहले ही अप्रभावी लोगों को फर्जी टिकट दे दिए हैं, इसके बावजूद कांग्रेस पंजाब में जीत हासिल करेगी।’

    कौर ने वडिंग पर निशाना साधते हुए कहा, ‘टिकट बेचने के आरोप में आपको गुजरात से निकाल दिया गया था और आपने वहां महंगी गाड़ियां, जमीनें और मेट्रो खरीदीं। क्या आप आईटी की व्याख्या सुनने के लिए तैयार हैं? राजा वडिंग, अपने उन कुत्तों का इस्तेमाल मत करो जिन्हें आपकी वजह से टिकट मिले हैं।’ उन्होंने कहा, ‘आप लगातार कांग्रेस पार्टी के खिलाफ काम क्यों कर रहे हैं और उम्मीदवारों को हराकर उन्हें अन्य पार्टियों में शामिल होने के लिए मजबूर क्यों कर रहे हैं?’

    बड़े समर्थन का दावा
    नवजोत कौर ने मंगलवार को दावा किया कि उन्हें कांग्रेस की पंजाब इकाई के 70 प्रतिशत और AICC के 90 प्रतिशत लोगों का समर्थन प्राप्त है। अपने निलंबन को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कौर ने कहा कि नोटिस एक ऐसे व्यक्ति की ओर से आया है, जिनके पास कोई मान्यता नहीं है और ऐसे कई नोटिस जारी किए जाते रहे हैं।

    रंधावा बोले- कोर्ट में बात करेंगे
    500 करोड़ रुपए में सीएम की कुर्सी वाले बयान के बाद भी नवजोत कौर सिद्धू लगातार कांग्रेस नेताओं पर संगीन आरोप लगाती रही। उन्होंने पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा पर नशा तस्करों से संबंध होने और बेहिसाब प्रोपर्टी बनाने के आरोप लगाए हैं। रंधावा ने कहा कि अब हम कोर्ट में बात करेंगे। अब तो मेरी पगड़ी का सवाल है। राजनीति में ऐसी बातें होती रहती हैं, इसमें नया कुछ नहीं है। लेकिन यह सच है कि मेरे माता-पिता का नवजोत सिद्धू के माता-पिता से दोस्ताना रिश्ता था। इस तरह के आरोप लगाना शर्मनाक है। यह तो सिर्फ सिद्धू ही बता सकते हैं कि उन्होंने अपनी पत्नी से ऐसी बातें कही थीं या उनकी पत्नी खुद ही ऐसा कह रही हैं। उन्होंने कहा कि अब तो वो कोर्ट में ही सिद्धू को जवाब देंगे।

  • क्रिसमस की अनसुनी कहानी 25 दिसंबर को मसीह के जन्म का उत्सव सैंटा और क्रिसमस ट्री की परंपरा का रहस्य

    क्रिसमस की अनसुनी कहानी 25 दिसंबर को मसीह के जन्म का उत्सव सैंटा और क्रिसमस ट्री की परंपरा का रहस्य


    नई दिल्ली । क्रिसमस जो हर साल 25 दिसंबर को प्रभु यीशु मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है दुनिया भर में उत्साह और उल्लास के साथ एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार न केवल यीशु मसीह के जन्म का प्रतीक है बल्कि सैंटा क्लॉज और क्रिसमस ट्री जैसी सदियों पुरानी परंपराओं का भी संगम है। आइए जानते हैं कैसे 25 दिसंबर को यीशु के जन्म का दिन घोषित किया गया और क्रिसमस की इन परंपराओं की जड़ें कहाँ से जुड़ी हैं।

    25 दिसंबर ही क्यों इतिहास और रोमन कनेक्शन

    हालाँकि यीशु मसीह के जन्म की सटीक तारीख अज्ञात है लेकिन 25 दिसंबर को इसे मनाने की शुरुआत एक ऐतिहासिक निर्णय के तहत हुई थी। यह तारीख सबसे पहले इतिहासकार सेक्सटस जूलियस अफ्रीकानस ने 221 ईस्वी में यीशु के जन्मदिन के रूप में घोषित की थी। यह निर्णय आगे चलकर एक परंपरा बन गया जो आज तक कायम है।

    रोमन संस्कृति में 25 दिसंबर को ‘सूर्य के जन्म’ का दिन माना जाता था जब सर्दियों का मौसम समाप्त हो जाता और दिन फिर से लंबे होने लगते थे। शुरुआती ईसाईयों ने इस दिन को चुना ताकि यह मूर्तिपूजक त्योहारों से मेल खा सके और उनके धर्म का प्रचार करना आसान हो। इसके अलावा एक और मान्यता है कि माता मैरी 25 मार्च को गर्भवती हुई थीं और ठीक नौ महीने बाद 25 दिसंबर को यीशु का जन्म बैथलहम में हुआ था। इस तरह यह तारीख धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी गई।

    सैंटा क्लॉज का असली रूप तुर्की के संत निकोलस

    क्रिसमस पर बच्चों को उपहार देने वाले सैंटा क्लॉज की कहानी प्रभु यीशु के जन्म के लगभग 300 साल बाद शुरू हुई। सैंटा क्लॉज का असली नाम संत निकोलस था जो तुर्की के एक दयालु संत थे। संत निकोलस गरीबों जरूरतमंदों और बीमारों की गुप्त रूप से मदद करते थे और उन्हें उपहार देते थे। उनकी दयालुता और दान का प्रभाव इतना बढ़ा कि समय के साथ उनका रूप सफेद दाढ़ी वाले लाल कपड़े पहने उत्तरी ध्रुव में रहने वाले सैंटा क्लॉज के रूप में बदल गया। उनकी परंपरा से ही बच्चों को उपहार देने की परंपरा जुड़ी हुई है।

    क्रिसमस ट्री और घंटियाँ उत्सव की रौनक

    क्रिसमस पर क्रिसमस ट्री सजाना इस पर्व की सबसे खास परंपरा है। लोग घरों को रंग-बिरंगी रोशनियों से सजाते हैं और केक काटकर खुशियाँ बांटते हैं। चर्चों में विशेष प्रार्थनाएँ होती हैं और यीशु की माता मैरी और पिता जोसेफ के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। इसके साथ ही चर्च की घंटियाँ बजाकर त्योहार का उल्लास बढ़ाया जाता है। इस दौरान बच्चों के लिए यह त्योहार किसी जादू से कम नहीं होता क्योंकि वे बेसब्री से सैंटा क्लॉज का इंतजार करते हैं।

    मिडनाइट मास आधी रात की प्रार्थना की परंपरा

    क्रिसमस के सबसे पवित्र क्षणों में से एक है मिडनाइट मास जिसे आधी रात की प्रार्थना या पूजा भी कहा जाता है। यह परंपरा प्रभु यीशु के जन्म के समय को समर्पित है। मिडनाइट मास 24 दिसंबर की रात से शुरू होती है और 25 दिसंबर की मध्यरात्रि को समाप्त होती है। माना जाता है कि यीशु मसीह का जन्म ठीक मध्यरात्रि को बैथलहम में हुआ था और यह मास उसी पवित्र क्षण का जश्न मनाने के लिए आयोजित किया जाता है।

    मिडनाइट मास के दौरान विशेष क्रिसमस कैरल भजन गाए जाते हैं जिनमें सबसे प्रसिद्ध साइलेंट नाइट और ओ होली नाइट शामिल हैं। इस समय चर्च में रंग-बिरंगी मोमबत्तियाँ जलती हैं और वातावरण श्रद्धा से भरा होता है। कैथोलिक और कुछ अन्य ईसाई संप्रदायों में इस मास के दौरान पवित्र यूखरिस्त प्रभु भोज का आयोजन भी होता है।

    क्रिसमस झाँकी संत फ्रांसिस की परंपरा

    क्रिसमस झाँकी या गोशाला का दृश्य इस त्योहार की सबसे मार्मिक परंपराओं में से एक है जो प्रभु यीशु के साधारण और विनम्र जन्म को दर्शाती है। इसकी शुरुआत संत फ्रांसिस ऑफ असिसी ने 1223 में इटली के ग्रेसियो गांव में की थी। संत फ्रांसिस ने ‘जीवित झाँकी’ बनाई जिसमें असली लोग और जानवरों को शामिल किया। इस परंपरा ने समय के साथ दुनिया भर में जगह बनाई और आज घरों और चर्चों में छोटी-छोटी झाँकियाँ सजाई जाती हैं जिसमें मुख्य पात्रों के रूप में शिशु यीशु मैरी जोसेफ चरवाहे और तीन ज्ञानी पुरुष शामिल होते हैं।

    क्रिसमस केवल प्रभु यीशु मसीह के जन्म का उत्सव नहीं है बल्कि यह दया प्रेम और समर्पण की परंपराओं का प्रतीक भी है। सैंटा क्लॉज की कहानी क्रिसमस ट्री की सजावट मिडनाइट मास और क्रिसमस झाँकी जैसी परंपराएँ इस दिन को खास बनाती हैं। यह त्योहार हमें जीवन में खुशी बांटने प्यार फैलाने और एक दूसरे के प्रति सम्मान व्यक्त करने की प्रेरणा देता है।

  • कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की मुश्किलें बढ़ीं, महिलाओं पर विवादित टिप्पणी को लेकर दूसरा केस दर्ज

    कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की मुश्किलें बढ़ीं, महिलाओं पर विवादित टिप्पणी को लेकर दूसरा केस दर्ज


    नई दिल्ली/ कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की महिलाओं और लड़कियों पर विवादित टिप्पणियों के चलते कानूनी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मथुरा कोर्ट में उनके खिलाफ दूसरा केस दर्ज किया गया है।

    इस नए मामले की शिकायत हिंदूवादी नेता गुंजन शर्मा ने दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि आचार्य की विवादित टिप्पणियाँ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थीं और यह महिलाओं का अपमान करने वाला मामला है। उन्होंने कहा कि पहले प्रशासन और पुलिस से शिकायत की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए अदालत का सहारा लेना पड़ा।

    विवादित टिप्पणी का विषय
    शिकायत के अनुसार, अनिरुद्धाचार्य ने कथित तौर पर कहा था कि 14 साल की बेटियों की शादी कर देनी चाहिए, वरना उनका चरित्र प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी की, जिसमें घरेलू महिलाओं से लेकर बच्चियों तक का ज़िक्र था।

    पहला केस और मीरा राठौड़ की भूमिका
    यह पहला मौका नहीं है जब आचार्य को विवादित बयानों के लिए कानूनी चुनौती मिली है। इससे पहले हिंदूवादी नेता मीरा राठौड़ ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया था। मीरा राठौड़ ने आचार्य की टिप्पणियों को महिलाओं के सम्मान का उल्लंघन बताया था और कोर्ट में सुनवाई शुरू होने तक अपनी चोटी न बांधने की प्रतीकात्मक प्रतिज्ञा रखी थी।

    कोर्ट में कानूनी प्रक्रिया
    मथुरा स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने गुंजन शर्मा की याचिका पर 10 दिसंबर 2025 को आधिकारिक रूप से परिवाद दर्ज किया। अगली सुनवाई 1 जनवरी 2026 तय की गई है, जिसमें वादी के बयान दर्ज होंगे और मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू होगी।

    अनिरुद्धाचार्य का स्पष्टीकरण
    विवाद बढ़ने के बाद अनिरुद्धाचार्य ने वीडियो जारी कर माफी मांगी थी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और उनका इरादा कभी भी महिलाओं का अपमान करने का नहीं था। उनका दावा है कि उनकी टिप्पणियाँ केवल कुछ लड़कियों के संदर्भ में थीं, पूरे महिला समाज के लिए नहीं।

    इस नए केस के साथ, कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं, और अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है।

  • पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रणब मुखर्जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

    पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रणब मुखर्जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की


    नई दिल्‍ली ।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रणब मुखर्जी को आज उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने मुखर्जी को एक महान राजनेता और असाधारण विद्वत्तापूर्ण व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उन्होंने दशकों के सार्वजनिक जीवन में अटूट समर्पण के साथ देश की सेवा की।

    पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा “प्रणब मुखर्जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। वह एक महान राजनेता और असाधारण विद्वत्तापूर्ण व्यक्तित्व के धनी थे और उन्होंने दशकों के सार्वजनिक जीवन में अटूट समर्पण के साथ भारत की सेवा की। प्रणब बाबू की बुद्धिमत्ता और स्पष्ट विचार ने हर कदम पर हमारे लोकतंत्र को समृद्ध किया। यह मेरा सौभाग्य है कि इतने वर्षों तक उनके साथ संवाद करने के दौरान मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला।”

    https://twitter.com/narendramodi/status/1998967658382024940?s=20

    राष्ट्रपति ने प्रणब मुखर्जी की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।

  • दिल्ली में ईवी क्रांति! सरकार ने तैयार की EV पॉलिसी 2.0, चार्जिंग और बैटरी रीसाइक्लिंग में बड़े बदलाव

    दिल्ली में ईवी क्रांति! सरकार ने तैयार की EV पॉलिसी 2.0, चार्जिंग और बैटरी रीसाइक्लिंग में बड़े बदलाव


    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने EV पॉलिसी 2.0 का मसौदा तैयार कर लिया है। नई पॉलिसी का फोकस चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी रीसाइक्लिंग, और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर होगा।

    बैटरी रीसाइक्लिंग: पहली बार पूरी व्यवस्था

    नई पॉलिसी के तहत ईवी बैटरी की रीसाइक्लिंग पर खास जोर दिया गया है। ईवी बैटरी आमतौर पर 8 साल तक चलती है और उसके बाद सुरक्षित निपटान चुनौती बन जाता है। दिल्ली सरकार ने राजधानी में पहली बार बैटरी जमा करने और रीसाइक्लिंग की पूरी व्यवस्था बनाने की योजना बनाई है।

    चार्जिंग स्टेशन: हर कोने में सुविधा

    सरकार ने 2030 तक 5,000 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन लगाने का लक्ष्य रखा है। हर स्टेशन पर 4-5 चार्जिंग पॉइंट होंगे। स्टेशन शॉपिंग मार्केट, मल्टी लेवल पार्किंग, RWAs, सरकारी ऑफिस और मुख्य मार्गों के किनारे लगाए जाएंगे। इसका उद्देश्य दिल्ली के हर कोने में भरोसेमंद और आसान चार्जिंग नेटवर्क तैयार करना है।

    नई छोटी ईवी वैन: लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए

    संकरी गलियों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में चलाने के लिए नई छोटी ईवी वैन की योजना है, जो 7 यात्रियों और 1 ड्राइवर के साथ चलेगी। इसके साथ ही ई-रिक्शा संचालन के लिए तय रूट बनाए जाएंगे।

    पॉलिसी लागू होने के बाद बदलाव

    राजधानी में प्रदूषण में कमी

    सार्वजनिक परिवहन की सुविधा में सुधार

    ईवी सेक्टर में निवेश और रोजगार में वृद्धि

    चार्जिंग और बैटरी रीसाइक्लिंग नेटवर्क का विस्तार

    नई ईवी वैन से रोजमर्रा की यात्रा आसान और साफ-सुथरी

    नई पॉलिसी 31 दिसंबर के बाद लागू की जाएगी। पहली ईवी पॉलिसी 2020 में लागू हुई थी, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के कारण अब इसे अधिक व्यापक और प्रभावशाली बनाया गया है।

  • हुमायूं कबीर का ‘धमाका’: CM ममता पर सीधा हमला, बंगाल की राजनीति में भूचाल

    हुमायूं कबीर का ‘धमाका’: CM ममता पर सीधा हमला, बंगाल की राजनीति में भूचाल


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए घोषणा की कि वह 2026 विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी के सामने सीधी चुनौती पेश करेंगे।

    कबीर ने दावा किया कि न तो टीएमसी और न ही बीजेपी बहुमत पा पाएंगी। उन्होंने कहा कि उनकी नई पार्टी 135 सीटों पर चुनाव लड़कर किंगमेकर बनेगी और सत्ता की चाबी उनके हाथ में होगी। “अगला मुख्यमंत्री हमारी पार्टी के समर्थन के बिना शपथ नहीं ले पाएगा,” कबीर ने कहा।

    22 दिसंबर को नई पार्टी की घोषणा

    कबीर ने बताया कि 22 दिसंबर को वह अपनी नई राजनीतिक पार्टी लॉन्च करेंगे। उनका लक्ष्य चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाना और बंगाल की सियासत में नई शक्ति के रूप में उभरना है।

    टीएमसी का पलटवार

    टीएमसी ने कबीर के दावों को निराधार बताया। प्रदेश महासचिव अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि कबीर की बातें केवल राजनीतिक हताशा का संकेत हैं और उनके पास कोई वास्तविक जनाधार नहीं है। टीएमसी का कहना है कि जनता अपने निर्णय में समर्थ है और किसी भी दावे को सत्ता में बदलने की संभावना कम है।

    राजनीति में नया ताप

    हुमायूं कबीर के दावे और नई पार्टी की घोषणा ने बंगाल की राजनीति में नया ताप ला दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कबीर क्या वास्तव में बंगाल की राजनीति में नई शक्ति के रूप में उभर पाएंगे या टीएमसी का अनुमान सही साबित होगा।

  • हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को दी चुनौती, 2026 विधानसभा चुनाव में नई पार्टी से लड़ेंगे

    हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को दी चुनौती, 2026 विधानसभा चुनाव में नई पार्टी से लड़ेंगे


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल (West Bengal)में बाबरी मस्जिद (Babri Masjid)की नींव रख चुके विधायक हुमायूं कबीर(Humayun Kabir) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(Mamata Banerjee) को चुनौती दी है। उन्होंने बुधवार को कहा है कि वह अगले विधानसभा चुनाव में सीएम बनर्जी की पार्टी के खिलाफ उम्मीदवार उतारने जा रहे हैं। राज्य में 2026 में चुनाव होने हैं। इससे पहले वह दावा कर चुके हैं कि बनर्जी 2026 में सीएम नहीं बन पाएंगी। तृणमूल कांग्रेस ने कबीर को निलंबित कर दिया है।

    मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘मैं 22 दिसंबर को एक नई पार्टी का ऐलान करूंगा। मैं ममता बनर्जी की पार्टी के खिलाफ उम्मीदवारों को उतारूंगा। जो भी मुख्यमंत्री बनेगा, उसे ऐसा करने के लिए हुमायूं कबीर का समर्थन लेना पड़ेगा।’ उन्होंने पहले भी कहा था कि वह अगले चुनाव में पश्चिम बंगाल में किंगमेकर बनकर सामने आएंगे।

    सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को कबीर ने दावा किया कि 2026 में न तो सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और न ही भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा छू पाएगी। कबीर ने कहा कि उनका अनुमान है कि 294 सदस्यीय विधानसभा में कोई भी पार्टी 148 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाएगी।

    उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘चुनाव के बाद मैं किंगमेकर बनूंगा। मेरे समर्थन के बिना कोई भी सरकार नहीं बना सकता।’ कबीर ने कहा, ‘मैंने कहा है कि मैं 135 सीटों पर चुनाव लड़ूंगा। आप देखेंगे कि मैं जो पार्टी बनाऊंगा, वह इतनी सीटें जीतेगी कि जो भी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा, उसे मेरी पार्टी के विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी।’

    TMC ने उड़ाया मजाक
    टीएमसी ने कबीर के इस दावे का मजाक उड़ाया था। सीएम बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी के प्रदेश महासचिव अरूप चक्रवर्ती ने कहा, ‘हुमायूं कबीर दिवास्वप्न देख रहे हैं। सरकार बनाने की बात करने से पहले उन्हें अपनी जमानत बचाने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसे निराधार दावे उनकी राजनीतिक हताशा को ही उजागर करते हैं।’

  • लोकसभा में राहुल गांधी और अमित शाह के बीच तीखी तकरार, गृह मंत्री बोले- इस तरह से नहीं चलेगी संसद

    लोकसभा में राहुल गांधी और अमित शाह के बीच तीखी तकरार, गृह मंत्री बोले- इस तरह से नहीं चलेगी संसद


    नई दिल्ली । लोकसभा(Lok Sabha) में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह(Home Minister Amit Shah) ने बुधवार को विपक्ष पर देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया। इसके साथ ही, उन्होंने नेता विपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi)द्वारा अतीत में हरियाणा विधानसभा चुनाव के संदर्भ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके वोट चोरी के लगाए गए आरोपों पर भी जवाब दिया। इस पर राहुल गांधी और अमित शाह के बीच तीखी तकरार देखने को मिली। राहुल गांधी ने सदन में खड़े होकर अमित शाह को प्रेस कॉन्फ्रेंस पर डिबेट करने का चैलेंज दे दिया। इसके बाद अमित शाह भी भड़क गए और कहा कि संसद इस तरह से नहीं चलेगी। मेरे बोलने का क्रम मैं तय करूंगा।

    अमित शाह के भाषण के दौरान राहुल गांधी को जवाब देने का मौका दिया गया। उन्होंने कहा, ”मेरा कल एक सवाल था कि मुख्य चुनाव आयुक्त को फुल इम्युनिटी दी जाएगी। इसके पीछे की जो सोच थी, वह हमें बताएं। हरियाणा की जो बात थी, इन्होंने एक उदाहरण लिया, वहां पर अनेक उदाहरण हैं। 19 लाख वहां के फेक वोटर्स हैं। एक्चुअली, मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर डिबेट करते हैं। अमित शाह जी, मैं आपको चैलेंज करता हूं कि मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर डिबेट करें।”

    ‘इस तरह से संसद नहीं चलेगी’
    इस पर अमित शाह ने नाराजगी जताते हुए कहा, ”पहली बात मैं साफ करना चाहता हूं कि 30 साल से विधानसभा और संसद में चुनकर आया हूं। मुझे लंबा अनुभव है संसदीय प्रणाली का। विपक्ष के नेता कहते हैं, पहले मेरी बात का जवाब दीजिए, मैं सुनना चाहता हूं।” अमित शाह ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘’मेरे बोलने का क्रम मैं तय करूंगा। इस तरह से संसद नहीं चलेगी। उनकी हर बात का जवाब दूंगा, लेकिन मेरे भाषण का क्रम वो तय नहीं कर सकते, मैं करूंगा, क्योंकि मैं बोल रहा हूं।” इस पर राहुल गांधी ने खड़े होकर कहा कि यह डिफेंसिव जवाब है, यह घबराया हुआ जवाब है और डरा हुआ है। सच्चा जवाब नहीं है।

    ‘मैं उकसावे में नहीं आऊंगा, बल्कि…’
    इस पर अमित शाह ने जवाब दिया कि मैं उनके उकसावे पर नहीं आऊंगा, बल्कि अपने विषय पर बोलूंगा। मैंने इतना ही कहा कि मैं अपने भाषण का क्रम मैं ही तय करूंगा और यह हर वक्ता का अधिकार है। उनका भी है, मेरा भी है। अमित शाह ने चुनाव सुधारों पर चर्चा पर जवाब देते हुए यह भी कहा कि संविधान का अनुच्छेद 327 निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची बनाने का पूर्ण अधिकार देता है। गृह मंत्री ने कहा, ‘‘मैं सदन और देश की जनता को कहना चाहता हूं कि क्या घुसपैठिए तय करेंगे कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कौन होगा।’’ शाह ने कहा कि यह एसआईआर मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि विदेशी नागरिकों को भारत में मतदान करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, 4 मिमी कम हाइट वाले उम्मीदवार भी बन सकते हैं CAPF कमांडर

    दिल्ली हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, 4 मिमी कम हाइट वाले उम्मीदवार भी बन सकते हैं CAPF कमांडर


    नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट(Delhi High Court) ने केंद्रीय सशस्त्र(Central Armed Forces) पुलिस बल (सीएपीएफ) भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में उम्मीदवार को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि महज 0.4 सेंटीमीटर कम लंबाई होने के आधार पर किसी योग्य उम्मीदवार को चयन प्रक्रिया से बाहर करना अनुचित और अवैध है।

    हाईकोर्ट ने कहा कि 164.6 सेंटीमीटर लंबाई को 165 सेंटीमीटर माना जाना चाहिए। जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने कहा कि भर्ती नियमों के मुताबिक, 0.5 सेंटीमीटर से कम का अंतर नजरअंदाज किया जाना चाहिए। वहीं, 0.5 सेंटीमीटर या उससे अधिक होने पर लंबाई को एक मान लिया जाता है। इसलिए उम्मीदवार की 164.6 सेंटीमीटर की लंबाई को सीधे 165 सेंटीमीटर माना जाना चाहिए था।

    बेंच ने अपने आदेश में कहा कि सीएपीएफ भर्ती के लिए मेडिकल जांच टेस्ट को लेकर जारी दिशानिर्देश में भी कहा गया है कि 0.5 सेंटीमीटर से कम लंबाई के अंतर को नजरअंदाज किया जाएगा। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया था कि सीएपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट पद के लिए आवेदन के दौरान उसकी लंबाई 164.6 सेंटीमीटर नापी गई, जिसके कारण उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया।

    हाईकोर्ट ने इसे प्रथम दृष्टया गलत मानते हुए उम्मीदवार को आगे की चयन प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दे दी है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती के अन्य चरणों को उम्मीदवार को स्वयं पास करना होगा, तभी अंतिम नियुक्ति पर निर्णय लिया जाएगा।

    हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया
    इस मामले में याचिका को प्रथम दृष्टया उम्मीदवार के पक्ष में पाते हुए हाईकोर्ट की बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। यह आदेश सीएपीएफ भर्ती प्रक्रिया में मेडिकल मानकों के लागू होने के तरीके पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। भविष्य में कई और अभ्यर्थियों को ऐसे मामलों में बड़ी राहत मिल सकती है।