Category: National

  • कथावाचक अनिरुद्धाचार्य पर लड़कियों पर अभद्र टिप्पणी के मामले में केस दर्ज

    कथावाचक अनिरुद्धाचार्य पर लड़कियों पर अभद्र टिप्पणी के मामले में केस दर्ज


    मथुरा: कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लड़कियों के चरित्र को लेकर की गई विवादित टिप्पणियों के मामले में CJM कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर परिवाद दर्ज कर दिया है, जिससे अब उनके खिलाफ आधिकारिक केस चलेगा।

    यह मामला अक्टूबर 2025 का है, जब अनिरुद्धाचार्य का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में उन्होंने बेटियों के बारे में आपत्तिजनक बातें कही थीं, जैसे कि आजकल बेटियों की शादी 25 साल में होती है और तब तक वह कई जगह “मुंह मार चुकी” होती हैं। वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा। बाद में उन्होंने सफाई दी और कहा कि वे महिलाओं का सम्मान करते हैं।

    इस मामले में ‘अखिल भारत हिंदू महासभा’ की आगरा जिला अध्यक्ष मीरा राठौर ने याचिका दायर की थी। सीजेएम उत्सव राज गौरव ने याचिका स्वीकार करते हुए परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया।

    अगली सुनवाई 1 जनवरी 2026 को होगी, जिसमें याचिकाकर्ता के बयान दर्ज किए जाएंगे। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत द्वारा फैसला और सजा सुनाई जाएगी।

  • गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: थाईलैंड भागे लूथरा भाइयों के पासपोर्ट रद्द, कार्रवाई की तैयारी

    गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: थाईलैंड भागे लूथरा भाइयों के पासपोर्ट रद्द, कार्रवाई की तैयारी

    नई दिल्‍ली । गोवा के नाइटक्लब में आग लगने से 25 लोगों की मौत के बाद थाईलैंड भागे लूथरा भाइयों पर सख्त ऐक्शन की तैयारी है। दोनों के पासपोर्ट रद्द करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए विदेश मंत्रालय ने उन्हें नोटिस भेजे हैं, जिसमें उन्हें 7 दिनों के अंदर बताना होगा कि उनके पासपोर्ट जब्त क्यों नहीं किए जाने चाहिए। गोवा पुलिस की ओर से मंत्रालय को चिट्ठी लिखी गई थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है। गौरव लूथरा और सौरभ लूथरा उस समय दिल्ली में थे, जब गोवा के अर्पोरा में उनके नाइट क्लब बिर्च बाय रोमियो लेन में आग लगी। इसके कुछ ही घंटे बाद दोंनो इंडिगो फ्लाइट से थाईलैंड के फुकेत भाग गए।

    नाइट क्लब में आग लगने से 5 पर्यटक और 20 स्टाफ मेंबर्स मारे गए थे। गोवा पुलिस ने भाइयों समेत अन्य के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की है, जिसमें हत्या नहीं बल्कि दुर्घटना से मौत और साजिश शामिल हैं। इस बीच, दिल्ली स्थित रिजनल पासपोर्ट ऑफिस (RPO) ने दोनों भाइयों को एक पत्र भेजा है, जिसमें लिखा है कि उन्हें पासपोर्ट एक्ट 1967 के तहत 7 दिनों के भीतर जवाब देना होगा। यह स्पष्ट करना होगा कि उनके पासपोर्ट नंबर Z7678521 (14/03/2024) को जब्त न करने का कारण क्या है।

    दोनों के पासपोर्ट जब्त करने के नोटिस जारी
    मंत्रालय ने गोवा पुलिस के पत्र के जवाब में बताया, ‘मामले की गंभीरता को देखते हुए RPO दिल्ली ने दोनों के पासपोर्ट जब्त करने के नोटिस जारी कर दिए हैं। पासपोर्ट एक्ट की धारा 10(3)(e) के तहत तभी कार्रवाई की जा सकती है जब अपराध संबंधित मामले की सुनवाई भारतीय अदालत में चल रही हो। इसलिए, मामले की जानकारी अदालत से प्राप्त कर RPO दिल्ली को भेजी जाए।’ गोवा पुलिस रविवार को दिल्ली में लूथरा भाइयों के घर भी गई, लेकिन वे पहले ही फरार हो चुके थे। सूत्रों की मानें तो दोनों फुकेत के एक रिसॉर्ट में ठहरे थे, लेकिन वहां से भी निकल गए जब तक अधिकारी पहुंच पाए।

  • कर्नाटक में टीपू जयंती को लेकर फिर सियासी विवाद, कांग्रेस विधायक ने विधानसभा में मनाने की मांग रखी

    कर्नाटक में टीपू जयंती को लेकर फिर सियासी विवाद, कांग्रेस विधायक ने विधानसभा में मनाने की मांग रखी


    नई दिल्‍ली । कर्नाटक में टीपू की जयंती को लेकर विवाद फिर भड़क गया है। सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायक शिवानंद कशप्पनवार ने 18वीं सदी के मैसुरू शासक की जयंती के आयोजन को लेकर कर्नाटक विधानसभा में ध्यानार्षण प्रस्ताव पेश करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री के रूप में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान सिद्धरमैया ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। हालांकि, इस मुद्दे पर कोडागु समेत विभिन्न स्थानों पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद इस परंपरा पर विराम लगा दिया गया था। कोडागु में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन में पुलिस गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। प्रदर्शनों के बाद टीपू की जयंती बेहद सादगी से मनाई गई और बाद में धीरे-धीरे इसे स्थगित कर दिया गया।

    अब हुंगुंड विधायक ने एक बार फिर इसे तूल दिया है। कशप्पनवर चाहते हैं कि सरकार टीपू की जयंती को प्रायोजित करे, जिस पर विपक्षी भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा ने कहा है कि वह इसका कड़ा विरोध करेगी। कशप्पनवर ने कहा कि उन्होंने टीपू की जयंती के आयोजन को लेकर प्रस्ताव दिया है। हमें राज्य सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता बीएस येदियुरप्पा ने खुद टीपू की तरह पोशाक धारण की और जयंती समारोह में शामिल हुए।

    कांग्रेस विधायक का क्या है तर्क
    कांग्रेस विधायक ने कहा, ‘जब उन्हें जरूरत थी तब उन्होंने इसे मनाया, लेकिन अब वे नहीं चाहते कि टीपू जयंती को मनाया जाए, लेकिन हम चाहते हैं कि इसका आयोजन हो।’ इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने पत्रकारों से कहा, ‘वे चाहे टीपू जयंती मनाए, ओसामा बिन लादेन का जन्मदिन और पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस मनाए। यह उनकी सरकार है। जनता को पता चल जाएगा कि उनका झुकाव किसकी तरफ है।’

    किस तरह की आई प्रतिक्रिया
    कर्नाटक के वक्फ और आवास मंत्री बी जेड जमीर अहमद खान ने कहा कि वह टीपू जयंती का आयोजन करते रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘देश भर में टीपू अनुयायी टीपू जयंती का आयोजन करते आ रहे हैं। हमने भी पिछले महीने इसका आयोजन किया था। सिद्धारमैया इसे विधान सौध के बैंक्वेट हॉल में आयोजित किया करते थे, जिसे अब रोक दिया गया है। जब वहां इसका आयोजन बंद कर दिया गया है, क्या हमें इसे कहीं और आयोजित नहीं करना चाहिए।’

  • हुमायूं कबीर का दावा: 2026 में बनूंगा किंगमेकर, मेरी पार्टी के बिना कोई सरकार नहीं बनेगी

    हुमायूं कबीर का दावा: 2026 में बनूंगा किंगमेकर, मेरी पार्टी के बिना कोई सरकार नहीं बनेगी


    कोलकाता । तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद वह ‘किंगमेकर’ के रूप में उभरेंगे। उन्होंने कहा कि उनके प्रस्तावित नए राजनीतिक दल के समर्थन के बिना कोई सरकार नहीं बन सकती। कबीर ने दावा किया कि 2026 में न तो सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और न ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा छू पाएगी। कबीर ने कहा कि उनका अनुमान है कि 294 सदस्यीय विधानसभा में कोई भी पार्टी 148 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाएगी।

    उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘चुनाव के बाद मैं किंगमेकर बनूंगा। मेरे समर्थन के बिना कोई भी सरकार नहीं बना सकता।’ उन्होंने संकेत दिया कि उनकी नई पार्टी की औपचारिक घोषणा 22 दिसंबर को की जाएगी। कबीर ने कहा, ‘मैंने कहा है कि मैं 135 सीटों पर चुनाव लड़ूंगा। आप देखेंगे कि मैं जो पार्टी बनाऊंगा, वह इतनी सीटें जीतेगी कि जो भी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा, उसे मेरी पार्टी के विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी।’

    यह पूछे जाने पर कि क्या उनके संगठन का नाम ‘नेशनल कंजर्वेटिव पार्टी’ होगा, कबीर ने कहा, ‘मैं बाद में सब कुछ बताऊंगा। आपको 22 दिसंबर के बाद पता चल जाएगा।’ तृणमूल कांग्रेस ने पिछले सप्ताह हुमायूं कबीर को निलंबित कर दिया था।

    हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने उनके दावे का मजाक उड़ाया और कहा कि वह ‘दिवास्वप्न देख रहे हैं।’ तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अरूप चक्रवर्ती ने कहा, ‘हुमायूं कबीर दिवास्वप्न देख रहे हैं। सरकार बनाने की बात करने से पहले उन्हें अपनी जमानत बचाने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसे निराधार दावे उनकी राजनीतिक हताशा को ही उजागर करते हैं।’

    करीब तीन करोड़ रुपये का चंदा मिला
    मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद-शैली की मस्जिद के लिए मिले चंदे की राशि लगभग तीन करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। विधायक के सहयोगियों ने मंगलवार को यह दावा किया। कबीर के अनुसार, स्थल पर 12 दान पेटियां रखी गई थीं। अब तक इन पेटियों से 57 लाख रुपये की गिनती हुई है, जबकि क्यूआर कोड भुगतान के माध्यम से 2.47 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।

  • ओडिशा: मलकानगिरी में महिला की सिर कटी लाश से भड़की हिंसा, दो समुदायों में झड़प, सोशल मीडिया बैन

    ओडिशा: मलकानगिरी में महिला की सिर कटी लाश से भड़की हिंसा, दो समुदायों में झड़प, सोशल मीडिया बैन


    नई दिल्‍ली । ओडिशा सरकार ने मलकानगिरी जिले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और इंटरनेट सेवाओं पर लगी रोक एक बार फिर 18 घंटे के लिए बढ़ा दी है। अब यह प्रतिबंध 10 दिसंबर को दोपहर 12 बजे तक लागू रहेगा। जिले में एक महिला की सिर कटी लाश मिलने के बाद दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद यह कदम उठाया गया है। हिंसा में 163 मकान क्षतिग्रस्त हो गए तथा बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान हुआ।

    अफवाहें और भड़काऊ मैसेज रोकने के लिए राज्य सरकार ने पहले 8 दिसंबर शाम 6 बजे से 9 दिसंबर शाम 6 बजे तक 24 घंटे का पूर्ण इंटरनेट शटडाउन लागू किया था। अब इसे आगे बढ़ाया गया है। गृह विभाग की अधिसूचना में कहा गया है कि कुछ असामाजिक तत्व व्हाट्सएप, फेसबुक और X जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर झूठे, भड़काऊ और उत्तेजक मैसेज प्रसारित कर रहे थे, जिससे सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था को गंभीर खतरा पैदा हो गया था।

    मलकांगिरी कलेक्टर ने सोमवार शाम संवाददाताओं को बताया- दोनों समुदायों के बीच बातचीत के बाद स्थिति अब शांतिपूर्ण है। दोनों पक्षों ने अपने-अपने प्रतिनिधि नामित कर दिए हैं। शांति समिति की बैठक होगी। हमें उम्मीद है कि जल्द ही पूर्ण सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी। प्रारंभिक आकलन के अनुसार हिंसा में 163 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने मृतका के परिजनों को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि मंजूर की है। मृतका के बेटे को तत्काल राहत के रूप में पहले ही 30 हजार रुपये दे दिए गए हैं। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार को ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।

    अभी तक नहीं मिला कटा सिर
    महिला का कटा सिर अभी तक नहीं मिला है। वैज्ञानिक टीम, स्निफर डॉग दस्ता और ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और सिर की तलाश एवं सबूत जुटाने का काम जारी है। हिंसा प्रभावित इलाकों में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और शांति समिति की बैठक के बाद सामान्य जनजीवन जल्द बहाल करने की कोशिश की जाएगी।

    किसकी है लाश और कैसे शुरू हुआ बवाल?
    चार दिसंबर को राखेलगुडा गांव के पास नदी के किनारे से 51 वर्षीय विधवा लेक पदियामी का धड़ बरामद होने के बाद क्षेत्र में तनाव व्याप्त हो गया था। यह झड़प रविवार दोपहर को हुई जब राखेलगुडा गांव के आदिवासियों ने कोरकुंडा सदर थाना क्षेत्र के अंतर्गत बंगाली आबादी के इलाके एमवी-26 गांव पर कथित तौर पर हमला किया।

    पुलिस ने बताया कि भीड़ ने कम से कम एक दर्जन घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया, कुछ वाहनों को नष्ट कर दिया तथा कम से कम चार घरों को आग लगा दी। अधिकारियों ने बताया कि दो गांवों में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है, जबकि समूचे मलकानगिरी में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं।

    मलकानगिरी बंगाली समाज के अध्यक्ष गौरांग कर्मकार के नेतृत्व में हजारों लोगों ने जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और एमवी-26 गांव पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। संगठन ने प्रशासन को दी गई याचिका में कहा कि हमले के दौरान एमवी-26 गांव के अधिकांश निवासी भाग गए हैं।

    बड़ी संख्या में घुसपैठिये जिले में घुस आए
    एक अलग याचिका में जिला आदिवासी समाज महासंघ ने आरोप लगाया कि 1978 से 1980 के बीच बड़ी संख्या में घुसपैठिये जिले में घुस आए थे। उन्होंने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया और स्थानीय आदिवासियों का शोषण किया। इसमें मांग की गई कि पुलिस हत्या के आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करे और महिला का गायब सिर बरामद करे।

    जिला आदिवासी समाज महासंघ, मलकानगिरी के बैनर तले आदिवासियों ने एक याचिका में अवैध घुसपैठियों और महिला की हत्या करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत सरकार ने 1964 में मलकानगिरी जिले के 215 गांवों और नवरंगपुर जिले के उमरकोट और रायगढ़ के 65 गांवों में प्रवासी बंगाली परिवारों को बसाया था। ये बंगाली पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए थे।

  • कोई राजनीतिक दल नहीं दे रहा हुमायूं कबीर का साथ, TMC ने विधानसभा में भी दूरी बनाने का फैसला लिया"

    कोई राजनीतिक दल नहीं दे रहा हुमायूं कबीर का साथ, TMC ने विधानसभा में भी दूरी बनाने का फैसला लिया"


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले विधायक हुमायूं कबीर को खास राजनीतिक समर्थन नहीं मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें पहले ही निलंबित कर दिया है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और लेफ्ट ने भी उनसे किनारा किया है। यहां तक कि सांसद असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने भी दूरी बनाने का फैसला किया है।

    विधायक बने रहने का फैसला करने के बावजूद, कबीर ने सोमवार को दोहराया कि वह इस महीने के अंत में एक नया राजनीतिक दल बनाने की योजना पर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने दावा किया, ‘मैंने अभी तक कांग्रेस से बात नहीं की है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने उनके साथ बातचीत की जिम्मेदारी ली है। अगले विधानसभा चुनाव के लिए मुर्शिदाबाद में कांग्रेस और वाम दलों के साथ सीट के बंटवारे की प्रबल संभावना है।’

    भाजपा बोली- जिन्ना की भाषा बोल रहे
    भाजपा विधायक और बंगाल में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि कबीर की बयानबाजी को ‘मुहम्मद अली जिन्ना की भाषा’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह ‘बंगाली हिंदुओं के लिए सीधी चुनौती’ है।

    उन्होंने आरोप लगाया, ‘हमने स्पष्ट रूप से कहा है कि आप अपनी जमीन पर, अपने समुदाय के धन से, कानूनी तौर पर मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे बनाएं। लेकिन रेजिनगर में जो हुआ वह धार्मिक आस्था नहीं थी। यह राज्य के संरक्षण में कट्टरपंथियों का शक्ति प्रदर्शन था।’

    शुभेंदु ने कबीर पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, ‘हुमायूं कबीर अब जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह हुसैन सुहरावर्दी और मुहम्मद अली जिन्ना की भाषा से अलग नहीं है। यह एक चुनौती है, एक युद्धघोष है, यह सह-अस्तित्व की भाषा नहीं है।’

    सीट बदलेगी TMC?
    टीएमसी ने विधानसभा के अंदर भी कबीर से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है। टीएमसी नेताओं ने कहा कि सदन में उनके बैठने की व्यवस्था बदली जाएगी। सूत्रों के अनुसार, पार्टी सूत्रों ने बताया कि विधायक बने रहने के उनके फैसले के बाद, तृणमूल कांग्रेस विधायक दल ने सत्तारूढ़ दल के सदस्यों से दूर रखने के लिए कबीर की सीट भाजपा सदस्यों की सीट के पास करने की पहल की है। इससे पहले, कबीर को उनके पूर्व मंत्री पद के कारण सत्ता पक्ष की सीट के पास अगली पंक्ति में सीट दी गई थी।

    तृणमूल कांग्रेस के मुख्य सचेतक निर्मल घोष ने कहा कि पार्टी स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है। उन्होंने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘निलंबित विधायकों को विधानसभा में बैठने की व्यवस्था पर फैसला अगले कुछ दिन में लिया जाएगा।’ पश्चिम बंगाल विधानसभा के कार्यकाल की समाप्ति से पहले सदन का शीतकालीन सत्र और अंतरिम बजट सत्र की बैठक होने की उम्मीद है।

    AIMIM ने क्या कहा
    हुमायूं कबीर ने खुद को पश्चिम बंगाल का ओवैसी बताया था। साथ ही खबरें थीं कि वह AIMIM के साथ गठबंधन भी करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि इस संबंध में ओवैसी से बात हुई है। हालांकि, AIMIM ने विधायक कबीर के साथ चुनावी गठजोड़ से सोमवार को इनकार किया और उनके प्रस्तावों को ‘राजनीतिक रूप से संदिग्ध और वैचारिक रूप से असंगत’ बताया।

    पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद असीम वकार ने कहा, ‘सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कबीर को अधिकारी के राजनीतिक तंत्र का हिस्सा माना जाता है। और यह सर्वविदित है कि अधिकारी भाजपा के राष्ट्रीय स्तरीय नेतृत्व के मुख्य रणनीतिक ढांचे के भीतर काम करते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘मुस्लिम समुदाय राष्ट्र निर्माण में विश्वास रखता है, उसे तोड़ने में नहीं। वह देश को मजबूत करने वाली ताकतों के साथ खड़ा है और अशांति और विभाजन पैदा करने वालों को नकारता है।’

    कांग्रेस ने निकाली सद्भावना यात्रा
    शनिवार को कांग्रेस ने आरोप लगाया कि टीएमसी और भाजपा, दोनों ही, उस जिले में धार्मिक आशंकाओं का फायदा उठा रहे हैं जहां ऐतिहासिक रूप से साम्प्रदायिक तनाव देखा गया है। कोलकाता में कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एक मस्जिद से मंदिर तक ‘सद्भावना रैली’ निकाली और लोगों से अपील की कि वे बाबरी मस्जिद ढहाये जाने के बाद पैदा हुए साम्प्रदायिक भय के माहौल की वापसी को खारिज करें।

    प्रदेश कांग्रेस प्रमुख शुभंकर सरकार ने कहा, ‘मंदिर और मस्जिद लोगों को ना तो रोजगार देंगे और ना ही भोजन। विभाजन की राजनीति बंद होनी चाहिए।’ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीपीएम ने भी कबीर के फैसले से दूरी बनाई है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

  • एयरलाइंस पर आरोप: देर से सूचना देकर मुनाफा, नियमों की उड़ाई धज्जियाँ"

    एयरलाइंस पर आरोप: देर से सूचना देकर मुनाफा, नियमों की उड़ाई धज्जियाँ"


    नई दिल्‍ली । एयरपोर्ट पहुंचने पर आपको अचानक जानकारी दी जाती है कि आपकी फ्लाइट पूर्व निर्धारित समय से देरी से उड़ान भरेगी तो समझ लें कि विमान कंपनी आपके साथ ही नहीं, बल्कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के नियमों से भी खिलावाड़ कर रही है।
    इस मनमानी के पीछे कंपनियां मुनाफे और पैसा बचाने का खेल खेलती हैं। बीते कुछ दिनों में इंडिगो समेत अन्य विमानन कंपनियों ने उड़ान सेवा देरी से शुरू होने पर यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं से बचने और कमाई बढ़ाने के लिए उड़ान सेवा रद्द होने और देरी से उड़ान भरने की तय समय पर जानकारी नहीं दी है। कई विमानन कंपनियों पर आरोप है कि वह डीजीसीए के नियमों से बचने के लिए गलत व देरी से जानकारी दे रही हैं। विमानन कंपनियां रिफंड, भोजन व होटल की लागत से बचने के लिए यात्रियों को योजनाबद्ध तरीके से देरी से जानकारी देने का तरीका अपना रही हैं। विमानन कंपनियां एक योजनाबद्ध तरीका अपनाकर यात्रियों को फंसाती हैं, जिससे उन्हें 100 फीसदी रिफंड या अन्य सुविधाएं न देनी पड़ें। बीते सात दिनों में इंडिगो से जुड़े यात्रियों ने शिकायत की है कि उन्हें समय पर फ्लाइट के देरी से उड़ान भरने की जानकारी दी गई।

    कंपनियों द्वारा अपनाए जा रहे तरीके
    – ऐप और पोर्टल पर फ्लाइट को ऑनटाइम दिखाया जाता है, जिससे यात्री समय पर एयरपोर्ट पहुंचे और एयरलाइन को खाने-पीने की व्यवस्था नहीं करनी पड़े
    – एयरपोर्ट पहुंचने पर तय समय से चंद मिनट पहले बताया जाता है कि उड़ान 2 घंटे की देरी। उड़ान में दो घंटे की देरी पर खाने-पीने की सुविधा देनी होती है, लेकिन कंपनियां इससे बचना चाहती हैं
    – दो घंटे के बाद फिर बताया जाता है कि अभी फ्लाइट दो घंटों ओर देरी से उड़ान भरेगी
    – चार घंटे के बाद फ्लाइट को रद्द किया जाता है। ऐसी स्थिति में कई यात्री खुद टिकट कैंसिल कर देते हैं। यात्रियों द्वारा कैंसिल कराए जाने वाले टिकट पर कंपनी शुल्क काटती है

    यात्रियों के लिए अनिवार्य सुविधाएं
    – 2 घंटे तक देरी:- पीने का पानी
    – 2 से 4 घंटे की देरी:- चाय/कॉफी व हल्का नाश्ता
    – 4 घंटे से अधिक की देरी:- भोजन
    – ओवरनाइट डिले:- होटल व ट्रांसफर की सुविधा
    – 6 घंटे से ज्यादा की अपेक्षित देरी:- वैकल्पिक फ्लाइट का विकल्प या पूरा रिफंड

    यह है नियम
    अगर विमानन कंपनी अपनी तरफ से विमान सेवा रद्द होने पर टिकट रद्द करेगी तो उसे 100 फीसदी रिफंड देना पड़ता है। इसके साथ ही होटल खाने का पूरा खर्च उठाना पड़ता है, जिसका बोझ कंपनी पर पड़ता है। अगर यात्री खुद टिकट रद्द करता है तो कंपनी उससे टिकट रद्द करने का शुल्क काटती है।

    उड़ान में देरी से जुड़े नियम जानने जरूरी
    इस वर्ष मार्च में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लोकसभा में उड़ान सेवा देरी से शुरू होने पर यात्रियों को विमानन कंपनियों द्वारा दी जाने वाली अनिवार्य सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार देरी से उड़ान सेवा संचालित होने के मामले में आवश्यक कार्रवाई करती है। साथ ही, जानकारी दी कि कितने देरी में यात्रियों को क्या सुविधाएं देनी अनिवार्य हैं।

  • देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी 2027 की जनगणना, जानें इसके फायदे-नुकसान

    देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी 2027 की जनगणना, जानें इसके फायदे-नुकसान


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में जनगणना 2027 (Census 2027) में आयोजित की जाएगी और यह पहली बार पूरी तरह डिजिटल (First time All digital) रूप से होगी। गृह मंत्रालय ने मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में इसकी पुष्टि की। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय (Minister of State for Home Nityanand Rai.) ने कहा कि डेटा कलेक्शन मोबाइल ऐप (Data Collection Mobile App) के माध्यम से किया जाएगा। यह कदम भारत को अमेरिका, ब्रिटेन, घाना और केन्या जैसे देशों की श्रेणी में ला खड़ा करता है, जहां डिजिटल या हाइब्रिड जनगणनाएं पहले ही हो चुकी हैं। लेकिन 1.4 अरब से अधिक आबादी वाले इस विविध देश में यह महत्वाकांक्षी प्रयास उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। आइए जानते हैं कि यह डिजिटल जनगणना क्या है, कैसे काम करेगी, इसके फायदे-नुकसान क्या हैं, और इससे जुड़ी चिंताएं।


    जनगणना में क्यों हुई देरी और अब क्या नया है?

    भारत में जनगणना हर दशक में होती है, जो जनसांख्यिकीय, सामाजिक, आर्थिक और अब जाति-आधारित डेटा एकत्र करती है। 1872 में पहली गैर-समकालीन जनगणना हुई थी। स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना 1951 में हुई। 2011 की आखिरी पूर्ण जनगणना के बाद 2021 वाली कोविड-19 महामारी के कारण टल गई। उसके बाद चुनाव, प्रशासनिक देरी और सीमाओं को फ्रीज करने की समयसीमा बढ़ने से यह 2027 तक खिसक गई।


    2027 जनगणना भारत की 16वीं जनगणना होगी, जो दो चरणों में होगी:

    चरण 1: घर सूचीकरण और हाउस मैपिंग – अप्रैल से सितंबर 2026 तक।
    चरण 2: जनसंख्या गणना – फरवरी-मार्च 2027 (बर्फीले क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान)।


    नए पहलू:

    पूरी तरह डिजिटल: पारंपरिक कागजी फॉर्म के बजाय गणनाकारक (इनुमरेटर) अपने स्मार्टफोन (एंड्रॉयड/आईओएस) पर ऐप इस्तेमाल करेंगे। नागरिक वेब पोर्टल के जरिए स्व-गणना (सेल्फ-इनुमरेशन) कर सकेंगे।
    जाति गणना: स्वतंत्र भारत में पहली बार एससी/एसटी के अलावा अन्य जातियों का डेटा एकत्र होगा। आखिरी पूर्ण जाति गणना 1931 में हुई थी।

    भाषाई समावेशिता: ऐप 16 भाषाओं में उपलब्ध होगा।
    हाइब्रिड फॉर्मेट: कनेक्टिविटी की समस्या वाले क्षेत्रों में कागजी फॉर्म का बैकअप भी होगा।
    यह जनगणना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत सीमांकन (डिलिमिटेशन), आरक्षण नीतियों, एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस) और महिलाओं के 33% आरक्षण के लिए आधार बनेगी।


    मोबाइल ऐप से डेटा कलेक्शन, वेब पोर्टल से स्वंय गणना

    लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया- यह निर्णय लिया गया है कि जनगणना 2027 डिजिटल माध्यम से की जाएगी। डेटा मोबाइल ऐप के जरिए एकत्र किया जाएगा। जनता वेब पोर्टल के माध्यम से भी स्वयं-जनगणना कर सकेंगी।

    उन्होंने कहा कि जनगणना में प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी उस स्थान पर जुटाई जाती है, जहां वे गणना अवधि के दौरान पाए जाते हैं। इसके साथ ही जन्म स्थान, अंतिम निवास, मौजूदा स्थान पर रहने की अवधि और प्रवास के कारण से संबंधित विस्तृत प्रश्न भी शामिल होंगे। सरकार फील्ड वर्क शुरू होने से पहले प्रश्नावली को आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित करेगी।

    डिजिटल जनगणना के फायदेः तेज और अधिक सटीक जनगणना की उम्मीद
    डिजिटल तरीकों से भारत उन बड़ी समस्याओं को दूर कर सकता है, जो वर्षों से कागज आधारित प्रक्रिया को धीमा और त्रुटिपूर्ण बनाती रही हैं।
    प्रारंभिक आंकड़े 10 दिनों में
    अंतिम आंकड़े 6-9 महीनों में
    (2011 की जनगणना के आंकड़े अंतिम रूप पाने में कई साल लगे थे)

    तेज उपलब्ध डेटा का उपयोग 2029 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन, योजनाओं, फंड आवंटन, और जनकल्याण कार्यक्रमों की सटीक योजना में सीधे किया जा सकेगा। जियो-टैगिंग, ऐप के अंदर सत्यापन सुविधाएं और स्वयं-जनगणना से ग्रामीण इलाकों, प्रवासी आबादी और कागजी प्रक्रिया में होने वाली अंडर-काउंटिंग में महत्वपूर्ण कमी आने की उम्मीद है।


    लागत में कमी और रोजगार सृजन

    सरकार को लाखों टैबलेट खरीदने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि गणनाकर्मी अपने ही स्मार्टफोन का उपयोग करेंगे।
    कुल बजट: 14,618 करोड़ रुपये
    लगभग 2.4 करोड़ मानव-दिवस का अस्थायी रोजगार सृजन।
    नुकसान: जोखिम भी कम नहीं


    1. डिजिटल डिवाइड की चुनौती

    देश में लगभग 65% आबादी ऑनलाइन है, लेकिन पूर्वोत्तर, पहाड़ी राज्यों और सुदूर ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की गति और उपलब्धता सीमित है। इससे सबसे गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के छूट जाने का खतरा बढ़ जाता है।


    2. डिजिटल साक्षरता की कमी

    जनगणना के लिए तैनात तीन मिलियन से अधिक शिक्षक-आधारित गणनाकर्मियों को नई तकनीक पर गहन प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी।
    बुजुर्गों, महिलाओं और प्रवासी मजदूरों में ऐप-आधारित बातचीत के प्रति संकोच और अनिच्छा देखी जा सकती है।


    3. साइबर सुरक्षा और गोपनीयता

    जाति, प्रवास इतिहास और व्यक्तिगत सूचनाएं यदि निजी स्मार्टफोन पर स्टोर होकर मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से भेजी जाएंगी, तो डेटा लीक और साइबर हमलों का जोखिम बना रहेगा। सरकार को एन्क्रिप्शन और सुरक्षित सर्वर आर्किटेक्चर पर विशेष ध्यान देना होगा।


    4. अफ्रीकी देशों का अनुभव भी चेतावनी

    घाना, नाइजीरिया और केन्या में डिजिटल जनगणनाओं के दौरान नेटवर्क बाधाएं, डेटा अपलोड की समस्याएं, उच्च त्रुटि दर और जनता का प्रतिरोध देखने को मिला। भारत को इन अनुभवों से सीखने की जरूरत होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना ‘भविष्य में कदम रखने जैसी’ है, लेकिन ‘जोखिम भरा एक्सपेरिमेंट’ भी है। पहुंच, गोपनीयता और साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। ऑफलाइन सिंक और रीयल-टाइम सपोर्ट से चुनौतियां हल हो सकती हैं। सरकार ने राज्यों के साथ अंतर-राज्य परिषद बैठकें बढ़ाने का वादा किया है।

  • भीड़ त्रासदी 2025: वेंकटेश्वर मंदिर से प्रयागराज तक, 129 मौतें, प्रशासन और जनता की चूक जारी

    भीड़ त्रासदी 2025: वेंकटेश्वर मंदिर से प्रयागराज तक, 129 मौतें, प्रशासन और जनता की चूक जारी

    2025 भारत के लिए बेहद दुखद साल बन गया, जब देश में आठ भीषण भगदड़ की घटनाओं में 129 लोगों की जान गई। यह घटनाएं प्रशासन और आम जनता की सुरक्षा और अनुशासन की कमी को उजागर करती हैं।

    साल 2025 की प्रमुख भगदड़ घटनाएं:

    9 जनवरी – आंध्र प्रदेश, तिरुमाला हिल्स (वेंकटेश्वर मंदिर)

    वैकुंठ द्वार दर्शन के टिकट के लिए लाइन में भगदड़

    6 मौतें, कई घायल

    29 जनवरी – प्रयागराज (महाकुंभ)

    मौनी अमावस्या पर लाखों श्रद्धालु घाट पर

    30 मौतें, 60 घायल

    15 फरवरी – प्रयागराज (नई दिल्ली रेलवे स्टेशन)

    प्लेटफॉर्म पर अफरातफरी

    18 मौतें, 4 बच्चे शामिल

    3 मई – गोवा (शिरगाओ, लैराई देवी जात्रा मंदिर)

    बिजली का झटका और भगदड़

    6 मौतें, 70 घायल

    4 जून – बेंगलुरु (IPL जश्न)

    3 लाख से अधिक लोग जुटे, नियंत्रण न होने से भगदड़

    11 मौतें, 50+ घायल

    27 जुलाई – उत्तराखंड (हरिद्वार, मनसा देवी मंदिर)

    अफवाह फैलने से भगदड़

    9 मौतें, 30+ घायल

    27 सितंबर – तमिलनाडु (करूर, विजय रैली)

    भारी भीड़ और देर से आगमन

    41 मौतें, 50+ घायल

    1 नवंबर – आंध्र प्रदेश (वेंकटेश्वर मंदिर, श्रीकाकुलम)

    एकादशी पर भारी भीड़

    9 मौतें (8 महिलाएं, 1 बच्चा)

    भगदड़ के मुख्य कारण:

    भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की कमी

    संकरे रास्ते और अनुचित एंट्री-एग्जिट प्लान

    आयोजकों और श्रद्धालुओं द्वारा सुरक्षा नियमों की अनदेखी

    अफवाह फैलना और अचानक हलचल

    तकनीकी निगरानी की कमी (CCTV, क्राउड सेंसर)

    सार्वजनिक जगहों पर अनुशासन की कमी

    विशेषज्ञों के अनुसार, हर घटना प्रशासन और आम जनता के लिए चेतावनी है: भीड़ को संभावित खतरे के रूप में देखना और अनुशासन अपनाना अनिवार्य है।

    क्या प्रशासन और लोग सतर्क हुए?

    लगातार हादसों के बावजूद सुरक्षा उपाय अभी भी अपूर्ण हैं।

    बड़े आयोजनों में फुल-प्रूफ सुरक्षा और तकनीकी निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता।

    आम जनता और आयोजकों में सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाना जरूरी।

    2025 की ये घटनाएं स्पष्ट संदेश देती हैं कि भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा पर गंभीर ध्यान न दिया गया तो अनगिनत जानें हर साल जोखिम में रहेंगी।

  • नीतीश के कायल बने ओवैसी के विधायक, बिहार में AIMIM-जेडीयू की सियासत में फिर गर्मा सकती है हवा

    नीतीश के कायल बने ओवैसी के विधायक, बिहार में AIMIM-जेडीयू की सियासत में फिर गर्मा सकती है हवा

    बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा हो गई है। AIMIM के विधायक मुर्शीद आलम ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना राजनीतिक गुरु बताया है। मुर्शीद आलम का कहना है कि 2014 में नीतीश कुमार ने उन्हें जेडीयू में राजनीति की राह दिखाई और उन्होंने अपनी सियासी उन्नति में मुख्यमंत्री का योगदान कभी नहीं भुलाया। जोकीहाट सीट से चुने गए इस विधायक ने हाल ही में नीतीश से मुलाकात कर अपने क्षेत्र के लिए दो नए महाविद्यालय और एक अतिरिक्त अंचल की मांग भी रखी।

    सियासी अर्थ और संभावनाएं
    मुर्शीद आलम की तारीफ और उनके नीतीश कुमार के करीब आने से सियासत में अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या AIMIM के विधायक जेडीयू के साथ किसी राजनीतिक समीकरण में शामिल हो सकते हैं। हालांकि AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने मुलाकात को केवल सीमांचल के मुद्दों तक सीमित बताते हुए राजनीतिक अर्थ न निकालने की अपील की। बावजूद इसके, पिछली बार AIMIM के कई विधायक जेडीयू या आरजेडी में शामिल हो चुके हैं, जिससे संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं बढ़ गई हैं।

    जेडीयू और बीजेपी का परिदृश्य
    2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने 85 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि सहयोगी बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या AIMIM के विधायकों को जेडीयू में शामिल कर अपनी संख्या बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

    AIMIM के साथ सियासी समीकरण पर सवाल
    मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र से चुने गए AIMIM के पांचों विधायक – मुर्शीद आलम, अख्तरुल ईमान, गुलाम सर्वर, सरवर आलम और मोहम्मद तौसीफ आलम – की नीतीश कुमार के साथ बढ़ती नजदीकियां बिहार की सियासत में नए समीकरण खड़े कर सकती हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या AIMIM और जेडीयू के बीच कोई नया ‘खेला’ सामने आएगा।