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  • दिल्ली में सड़क हादसे: 2025 में 649 मौतें, 1,738 घायल, पैदल यात्री सबसे असुरक्षित

    दिल्ली में सड़क हादसे: 2025 में 649 मौतें, 1,738 घायल, पैदल यात्री सबसे असुरक्षित


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी में सड़क हादसों ने 2025 में चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के जनवरी 2026 के न्यूजलेटर के अनुसार बीते साल 649 लोगों की मौत हुई और 1 738 लोग घायल हुए। इनमें पैदल यात्रियों की संख्या सबसे अधिक रही। आंकड़े बताते हैं कि निजी कारों की चपेट में आने से 92 दोपहिया वाहनों से 75 और भारी वाहनों से 43 पैदल यात्रियों की मौत हुई।

    तेज रफ्तार लापरवाही यातायात नियमों का उल्लंघन और सुरक्षित पारपथों की कमी हादसों के मुख्य कारण हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने 13 जनवरी को दोपहिया वाहनों की जागरूकता रैली का आयोजन किया। इस रैली में 70 पुलिस कर्मियों और 200 से अधिक लोग शामिल हुए। रैली का उद्देश्य दोपहिया वाहन चालकों के बीच सड़क सुरक्षा नियमों और हेलमेट के इस्तेमाल के प्रति जागरूकता फैलाना था। अधिकारियों ने जोर दिया कि आईएसआई प्रमाणित हेलमेट पहनना अनिवार्य है।

    सड़क सुरक्षा सुधारने के लिए सख्ती भी बढ़ाई गई। दिसंबर 2025 में गलत दिशा में वाहन चलाने वालों के खिलाफ 42 945 चालान किए गए जो पिछले साल के 8 854 मामलों से कई गुना अधिक है। इनमें दोपहिया वाहन चालक सबसे आगे थे जिनके खिलाफ 30 224 चालान किए गए। जनवरी 2026 में पहली बार भारतीय न्याय संहिता की धारा 281 के तहत 173 FIR दर्ज की गईं। इस धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर छह महीने तक की कैद या 1 000 रुपये तक का जुर्माना और वाहन ज़ब्त किया जा सकता है।

    ट्रैफिक पुलिस ने कहा कि गलत दिशा में वाहन चलाना सड़क हादसों की बड़ी वजह है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें सतर्क रहें और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाएं। सड़क पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब सबसे बड़ा चुनौती बन चुका है।
    यह आंकड़े और उपाय दर्शाते हैं कि दिल्ली में सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए केवल कानून नहीं बल्कि जागरूकता और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर भी उतना ही जरूरी है

  • युवाओं ने अपनी मेहनत, सोच और नए प्रयोगों से भारत को बना दिया स्टार्टअप का बड़ा केंद्र : ओम बिरला

    युवाओं ने अपनी मेहनत, सोच और नए प्रयोगों से भारत को बना दिया स्टार्टअप का बड़ा केंद्र : ओम बिरला


    भोपाल।
    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आज हमारे नौजवानों ने स्टार्टअप की एक नई दुनिया खड़ी कर दी है। अपनी मेहनत, सोच और नए प्रयोगों के दम पर उन्होंने भारत को स्टार्टअप का बड़ा केंद्र बना दिया है। अब हमारे युवा सिर्फ सपने नहीं देख रहे, बल्कि अपने नए विचारों से दुनिया की समस्याओं का हल भी दे रहे हैं।

    लोकसभा अध्यक्ष बिरला शुक्रवार को मध्य प्रदेश के इंदौर में वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम का प्रारंभ वंदे मातरम्, राष्ट्रगान, पारंपरिक दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ।

    लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वैष्णव ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे समाजहित के कार्यों ने उन्हें इस समारोह में आने के लिए प्रेरित किया। डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं अत्यंत सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें इस प्रतिष्ठित संस्थान में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का प्रगतिशील भविष्य पूरी तरह से युवाओं की ऊर्जा और उनके विजन पर निर्भर करता है।

    उन्होंने कहा कि यह बदलते और विकसित भारत के निर्माण का कालखंड है। आज दुनिया के सभी देश भारत की ओर देख रहे हैं। हमारे नौजवानों की ताकत दुनिया में बढ़ रही है और हमारे जनसांख्यिकीय विभाजन (Demographic Dividend) पर दुनिया की नज़र है। हमारे नौजवानों ने स्टार्टअप की नई दुनिया शुरू कर दी है, भारत को स्टार्टअप बना दिया और और अपने नवाचार के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं।

    बिरला ने इंदौर की इस शिक्षा और संस्कार की पावन धरती से देशभर के विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपनी भारतीय संस्कृति, अपने मूल्यों और अपनी सोच को साथ लेकर आगे बढ़ें और देश को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने में अपना पूरा योगदान दें। विश्वविद्यालय कैंपस में आपने जो सीखा है, ज्ञानार्जन किया है, उसका सदुपयोग कर नवभारत के निर्माण में जुट जाएं।

    विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पुरुषोत्तमदास पसारी ने विधिवत रूप से समारोह के उद्घाटन की घोषणा की। उन्होंने अपने स्वागत भाषण में मुख्य अतिथि सहित उपस्थित शिक्षकों, अभिभावकों और उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का अभिनंदन किया।

    समारोह के दौरान कुलगुरु प्रो. (डॉ.) योगेश सी. गोस्वामी ने विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने संस्थान की शैक्षणिक यात्रा, बीते वर्ष में किए गए महत्वपूर्ण शोध कार्यों, विद्यार्थियों के प्लेसमेंट के आंकड़ों और संस्थागत विकास की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार विश्वविद्यालय निरंतर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है।

    सफल प्रोफेशनल बनने से पहले बेहतर इंसान बनें

    कार्यक्रम में मौजूद इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और सामाजिक सेवा गतिविधियों की प्रशंसा की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान विद्यार्थियों में स्वावलंबन की भावना विकसित करने का सराहनीय कार्य कर रहा है।

    प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही हर वैश्विक समस्या का एकमात्र स्थायी समाधान है और जीवन में एक सफल प्रोफेशनल बनने से पहले एक बेहतर इंसान बनना अनिवार्य है।

    मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक और उपाधियों से नवाजा

    इस दीक्षांत समारोह में कुल 2008 स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त 32 शोधार्थियों को उनकी पीएचडी की डिग्री सौंपी गई। शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 16 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से नवाजा गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. रूपा शिंदे ने किया और राष्ट्रगान के साथ इस शैक्षणिक उत्सव का समापन हुआ।

    मंत्री सिलावट ने लोकसभा अध्यक्ष का भव्य स्वागत किया

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला साधारण यात्रियों की तरह दिल्ली से ट्रेन में सवार होकर इंदौर पहुंचे। इंदौर पहुंचने पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने सतरंगी दुपटटा एवं पुष्पमाला पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी, जनपद पंचायत सांवेर अध्यक्ष प्रतिनिधि मानसिंह, विश्वजीतसिंह सिसौदिया, जिला उपाध्यक्ष भारतसिंह, दिलीप चौधरी, नगर परिषद अध्यक्ष संदीप चंगेडिया सहित सैकडों नागरिकों ने भी ओम बिरला का पुष्पमालाओं से भव्य स्वागत किया। इसके पश्चात वे उज्जैन रोड स्थित श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।

  • भारत-यूरोपीय संघ मुक्त समझौते से वस्त्र उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा: सीपी राधाकृष्णन

    भारत-यूरोपीय संघ मुक्त समझौते से वस्त्र उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा: सीपी राधाकृष्णन


    नई दिल्ली।
    उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त समझौता वस्त्र उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा।
    सीपी राधाकृष्णन ने यह बात आज तमिलनाडु के सलेम स्थित भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएचटी) के नवनिर्मित शैक्षणिक भवन का उद्घाटन के अवसर पर कही। इस अवसर पर उन्होंने भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत को तकनीक के साथ जोड़ने और इसे भविष्य के लिए तैयार एक ‘रचनात्मक उद्योग’ बनाने पर जोर दिया।
    उपराष्ट्रपति ने हथकरघा को भविष्य के लिए तैयार रचनात्मक उद्योग में बदलने का आह्वान करते हुए कहा कि आईआईएचटी सलेम स्वदेशी शिल्प कौशल और आधुनिक वस्त्र विज्ञान के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है। पारंपरिक ज्ञान को समकालीन तकनीक के साथ मिलाकर संस्थान ने उत्पादकता बढ़ाई है गुणवत्ता मानकों में सुधार किया है और बाजार-उन्मुख उत्पादन को सक्षम बनाया है।साथ ही हाथ से बुने हुए वस्त्रों की प्रामाणिकता को भी संरक्षित किया है।
    भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वाराणसी के रेशमी ब्रोकेड, बंगाल के जामदानी असम के मूगा रेशम कश्मीर के कानी शॉल आंध्र प्रदेश के वेंकटगिरी और मंगलगीरी बुनाई से लेकर मध्य प्रदेश की माहेश्वरी और चंदेरी साड़ियों तक भारतीय हथकरघा उत्पादों ने अपनी शिल्प कौशल और सांस्कृतिक विरासत के लिए वैश्विक मान्यता अर्जित की है।
    उन्होंने तमिलनाडु की जीवंत बुनाई परंपराओं को भी रेखांकित किया जिनमें चेट्टीनाडु कंडांगी साड़ियां कांचीपुरम रेशम अरानी रेशम थिरुबुवनम रेशम चेन्निमलाई कंबल नागरकोइल वेष्टि तौलिए और मदुरै सुंगुडी साड़ियां शामिल हैं।
    इस क्षेत्र की वृद्धि पर भरोसा जताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सलेम से यूरोपीय संघ को होने वाले वस्त्र निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। अंबूर से चमड़े के निर्यात में भी काफी वृद्धि होने की उम्मीद है।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि 56 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते न केवल वस्त्र क्षेत्र को लाभ पहुंचाएंगे बल्कि चमड़ा और अन्य विनिर्माण उद्योगों जैसे संबद्ध क्षेत्रों के लिए भी विकास के अवसर पैदा करेंगे।
    केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि आईएचटी सलेम में नए अकादमिक ब्लॉक का उद्घाटन केवल एक इमारत का उद्घाटन नहीं है बल्कि बुनकरों को सशक्त बनाने और हथकरघा क्षेत्र का आधुनिकीकरण करने की दृष्टि को सुदृढ़ करने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सादगी परंपरा और प्रौद्योगिकी का संगम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक सामूहिक कदम है।
    इस मौके पर उपराष्ट्रपति ने सलेम स्थित भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान के मेधावी छात्रों को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किए।
    उपराष्ट्रपति ने आईआईएचटी में आयोजित एक प्रदर्शनी का भी दौरा किया जहां देश भर के हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन किया गया था।
    इसका मुख्य उद्देश्य संस्थागत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और शिक्षण अनुसंधान और कौशल विकास के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान छात्रों में नवाचार उद्यमिता और उद्योग-अनुकूल दक्षताओं को बढ़ावा देना है।
    इस भवन में आधुनिक इंटरैक्टिव कक्षाएं एक सुसज्जित पुस्तकालय और डिजिटल पुस्तकालय एक सेमिनार हॉल संकाय कक्ष प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं और एक बोर्ड रूम हैं। साथ ही इसमें 11 भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों के लिए परीक्षा नियंत्रक का कार्यालय और अन्य आवश्यक शैक्षणिक और प्रशासनिक सुविधाएं भी हैं।
    इस अवसर पर पर्यटन राज्य मंत्री आर. राजेंद्रन, सांसद टी.एम. सेल्वगनपति, सांसद एस.आर. शिवलिंगम, विधायक श्री ई. बालासुब्रमण्यम और वस्त्र मंत्रालय में विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना (आईएएस) उपस्थित रहीं।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जैसलमेर एयरबेस पर स्वदेशी ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में भरी उड़ान, 25 मिनट का मिशन पूरा

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जैसलमेर एयरबेस पर स्वदेशी ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में भरी उड़ान, 25 मिनट का मिशन पूरा

    जैसलमेर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार 27 फरवरी 2026 को राजस्थान के जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर HAL Prachand प्रचंड में उड़ान भरकर भारतीय वायुसेना की क्षमताओं का अनुभव किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह उड़ान राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराने वाली रही। राष्ट्रपति इससे पहले वर्ष 2023 में सुखोई Su-30MKI और 2025 में डसॉल्ट राफेल में भी उड़ान भर चुकी हैं।

    यह मिशन दो एलसीएच लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर के फॉर्मेशन में संचालित किया गया। राष्ट्रपति ने पहले विमान में ग्रुप कैप्टन नयन शांतिलाल बहुआ के साथ उड़ान भरी जबकि दूसरे विमान में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और ग्रुप कैप्टन ए. महेंद्र सवार थे। लगभग 25 मिनट तक चले इस मिशन में राष्ट्रपति ने गडिसर झील और जैसलमेर किले के ऊपर से उड़ान भरी। अभ्यास के दौरान एक टैंक लक्ष्य पर आक्रमण का प्रदर्शन भी किया गया।

    उड़ान के बाद राष्ट्रपति ने आगंतुक पुस्तिका में लिखा भारत के स्वदेशी रूप से विकसित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरना मेरे लिए एक समृद्ध अनुभव रहा है। इस उड़ान ने मुझे राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराया है। मैं भारतीय वायु सेना और वायु सेना स्टेशन जैसलमेर की पूरी टीम को इस उड़ान के सफल आयोजन के लिए बधाई देती हूं।

    राष्ट्रपति शाम को जैसलमेर में आयोजित भारतीय वायु सेना के वायु शक्ति अभ्यास का भी अवलोकन करेंगी। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार स्वदेशी रक्षा उपकरणों के साथ राष्ट्रपति की यह उड़ान आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश की बढ़ती सामरिक क्षमता का प्रतीक है।

  • जामनगर में अर्जुन तेंदुलकर के प्री वेडिंग फंक्शन शुरू, नीता मुकेश अंबानी ने की मेजबानी, भावुक हुए सचिन

    जामनगर में अर्जुन तेंदुलकर के प्री वेडिंग फंक्शन शुरू, नीता मुकेश अंबानी ने की मेजबानी, भावुक हुए सचिन


    नई दिल्ली। दिग्गज क्रिकेटर Sachin Tendulkar के बेटे अर्जुन तेंदुलकर की शादी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। अर्जुन जल्द ही अपनी मंगेतर सानिया चंडोक के साथ विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं। शादी से पहले जामनगर में प्री वेडिंग समारोह आयोजित किया गया जिसकी मेजबानी देश के जाने माने उद्योगपति Mukesh Ambani और Nita Ambani ने अपने निवास पर की। इस खास मौके पर दोनों परिवारों के करीबी सदस्य और मित्र मौजूद रहे।

    अर्जुन और सानिया की शादी 5 मार्च को मुंबई में आयोजित की जाएगी लेकिन उससे पहले जामनगर में हुए इस आयोजन की झलकियां सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। समारोह में सचिन अपनी पत्नी अंजलि और बेटे अर्जुन के साथ पहुंचे। दुल्हन बनने जा रहीं सानिया चंडोक का परिवार भी इस खास अवसर पर शामिल हुआ।

    कार्यक्रम के दौरान नीता अंबानी ने स्वागत भाषण देते हुए नवयुगल को नए जीवन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जामनगर को अपने परिवार के लिए बेहद खास स्थान बताया और कहा कि यहां कई यादगार पारिवारिक अवसर जुड़े रहे हैं। अंबानी परिवार ने पूरे स्नेह और गर्मजोशी के साथ मेहमानों का स्वागत किया। समारोह में Anant Ambani और Radhika Merchant के साथ ही Akash Ambani और Shloka Mehta भी मौजूद रहे।

    इस खास शाम का सबसे भावुक पल तब आया जब सचिन तेंदुलकर ने अपने बेटे के लिए मंच से संबोधन दिया। उन्होंने अंबानी परिवार के आतिथ्य के लिए आभार जताते हुए कहा कि इससे बेहतर आशीर्वाद देने वाले लोग और जगह मिलना मुश्किल है। अपने बेटे के बारे में बात करते हुए सचिन भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि जब बेटा किसी लड़की को घर लाकर परिवार से मिलवाता है तब एहसास होता है कि वह बड़ा हो गया है। यह पल उनके लिए गर्व और भावनाओं से भरा हुआ था।

    सचिन ने आगे कहा कि अर्जुन और सानिया एक दूसरे से बेहद प्यार करते हैं और उन्हें इस बात की खुशी है कि उनके बेटे ने जीवनसाथी के रूप में एक खास और समझदार साथी चुना है। समारोह में मौजूद मेहमानों ने तालियों के साथ इस पल का स्वागत किया।

    सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में समारोह की भव्यता साफ नजर आ रही है। नीता अंबानी पारंपरिक साड़ी और हीरलूम ज्वेलरी में दिखीं जबकि सानिया सिल्वर साड़ी में सादगी और गरिमा के साथ नजर आईं। सचिन और अर्जुन कढ़ाईदार बंदगला में बेहद आकर्षक लग रहे थे।

    बताया जा रहा है कि इससे पहले सचिन तेंदुलकर ने प्रधानमंत्री को भी बेटे की शादी का व्यक्तिगत निमंत्रण दिया था जिससे इस शादी को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं। अब सभी की नजरें 5 मार्च को होने वाली भव्य शादी पर टिकी हैं जहां खेल और उद्योग जगत की कई बड़ी हस्तियां शामिल हो सकती हैं।

  • 1 मार्च से सख्ती: सिम कार्ड के बिना नहीं चलेंगे WhatsApp और Telegram? सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से किया इनकार

    1 मार्च से सख्ती: सिम कार्ड के बिना नहीं चलेंगे WhatsApp और Telegram? सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से किया इनकार

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सिम बाइंडिंग नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। 1 मार्च से लागू होने जा रहे इन नए प्रावधानों के तहत यदि मोबाइल फोन में वह सक्रिय सिम कार्ड मौजूद नहीं है जिससे मैसेजिंग ऐप रजिस्टर है तो WhatsApp Telegram और Signal जैसे ऐप्स का उपयोग सीमित या बंद हो सकता है। सरकार का कहना है कि यह कदम साइबर फ्रॉड फर्जी नंबरों और डिजिटल धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा पहले की नीति के तहत सिम बाइंडिंग नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी।

    क्या होगा बड़ा बदलाव? नए नियमों के अनुसार:

    जिस सिम से अकाउंट रजिस्टर है उसका मोबाइल में सक्रिय रहना जरूरी होगा। यदि सिम मौजूद नहीं है तो ऐप की सेवाएं बाधित हो सकती हैं। WhatsApp Web या कंप्यूटर लॉगिन हर 6 घंटे में स्वतः लॉगआउट हो जाएगा। दोबारा उपयोग के लिए QR कोड स्कैन करना होगा। भारत में करोड़ों यूजर्स एक ही नंबर से कई डिवाइस पर WhatsApp चलाते हैं। ऐसे में जिन यूजर्स ने अलग अलग डिवाइस पर अकाउंट एक्टिव कर रखा है या जो बार बार सिम बदलते रहते हैं वे सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं।

    छोटे कारोबारियों पर असर

    विशेषज्ञों का अनुमान है कि 60–80% तक छोटे व्यवसाय जो WhatsApp आधारित संचार और ऑर्डर मैनेजमेंट पर निर्भर हैं उन्हें शुरुआती दिनों में ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर वे बिजनेस जो एक नंबर को कई सिस्टम पर चलाते हैं उन्हें हर कुछ घंटों में दोबारा लॉगिन की प्रक्रिया अपनानी होगी।

    सिर्फ WhatsApp नहीं व्यापक असर

    यह बदलाव केवल एक ऐप तक सीमित नहीं है। Telegram Signal और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म भी इसके दायरे में बताए जा रहे हैं। यानी यह डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम में एक बड़ा नीतिगत परिवर्तन साबित हो सकता है। फिलहाल सरकार अपने फैसले पर अडिग नजर आ रही है। 1 मार्च की डेडलाइन को लेकर टेक कंपनियों और करोड़ों यूजर्स की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नियमों का क्रियान्वयन किस स्तर पर और किस सख्ती से किया जाता है और आम यूजर्स के डिजिटल अनुभव में कितना बदलाव आता है।

  • होली खेलने से पहले करें त्वचा की सही तैयारी वरना रंग छोड़ सकते हैं जिद्दी दाग

    होली खेलने से पहले करें त्वचा की सही तैयारी वरना रंग छोड़ सकते हैं जिद्दी दाग


    नई दिल्ली/वाराणसी। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली रंगभरी एकादशी के अवसर पर शिवनगरी काशी भक्ति और रंगों के अनोखे संगम में डूब जाती है। होली से ठीक चार दिन पहले पड़ने वाला यह पर्व काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को विशेष स्वरूप देता है। मान्यता है कि इस दिन बाबा विश्वनाथ माता पार्वती को उनके मायके से काशी लेकर आते हैं और इसी उपलक्ष्य में पूरा शहर उत्सव में सराबोर हो उठता है।

    पौराणिक परंपरा के अनुसार रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव माता गौरा के साथ गौना बारात लेकर काशी पहुंचते हैं। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के कारण काशीवासी इस दिन बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती का भव्य स्वागत करते हैं। शहर की गलियों से लेकर प्रमुख मंदिरों तक नमः पार्वती पतये हर हर महादेव के जयकारों की गूंज सुनाई देती है। जहां अन्य स्थानों पर होली की केवल तैयारियां होती हैं वहीं काशी में इस दिन से विधिवत रंगोत्सव की शुरुआत मानी जाती है। भक्त बाबा और माता से अनुमति लेकर गुलाल अबीर और फूलों की वर्षा के साथ होली खेलना आरंभ करते हैं।

    श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में इस अवसर पर विशेष आयोजन होता है। बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती का भव्य डोला निकाला जाता है जो संकरी गलियों से गुजरते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन देता है। पूरा क्षेत्र रंगों और फूलों से भर जाता है। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र के अनुसार मंदिर परिसर में बेरिकेडिंग की जाएगी और स्पर्श दर्शन की व्यवस्था नहीं रहेगी ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    इस वर्ष एक विशेष आकर्षण मथुरा ब्रज की रास परंपरा का समावेश भी है। ब्रज के रसिया और रंग खेलने वाले कलाकार काशी पहुंचेंगे और यहां रास रचाएंगे जिससे उत्सव का उल्लास और भी बढ़ जाएगा। यह सांस्कृतिक संगम काशी की आध्यात्मिक गरिमा को नए रंगों से सजा देगा।

    स्थानीय निवासी प्रभुनाथ त्रिपाठी बताते हैं कि काशीवासी देवी देवताओं के साथ मिलकर बाबा और माता के आगमन की खुशी मनाते हैं। यह परंपरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। इस दिन भक्त रंग अर्पित कर होली खेलने की अनुमति मांगते हैं और मान्यता है कि भगवान शिव माता पार्वती को उनके ससुराल का भ्रमण भी कराते हैं।

    धार्मिक दृष्टि से रंगभरी एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन शिव पार्वती की पूजा करने से मनचाहा जीवनसाथी मिलने और दांपत्य जीवन में सुख समृद्धि आने की मान्यता है। काशी के छोटे बड़े सभी मंदिरों को सजाया जाता है दीप जलाए जाते हैं और पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास से भर उठता है। रंगभरी एकादशी काशी की उस जीवंत परंपरा का प्रतीक है जहां आस्था रंगों से मिलकर अनोखा उत्सव रचती है।

  • अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों के लिए बड़ी खुशखबरी, रेलवे में मिलेगा रोजगार और द्वितीय करियर का अवसर

    अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों के लिए बड़ी खुशखबरी, रेलवे में मिलेगा रोजगार और द्वितीय करियर का अवसर


    नई दिल्ली। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने वाले जवानों और देश के पहले बैच के अग्निवीरों के लिए खुशखबरी है। सरकार और रेलवे ने मिलकर एक ऐसा सहयोग का ढांचा तैयार किया है जो सैन्य सेवा समाप्त होने के बाद जवानों को नागरिक जीवन में सम्मानजनक और स्थिर रोजगार यानी द्वितीय करियर उपलब्ध कराएगा।

    रेल मंत्रालय ने अपने नीतिगत ढांचे में बदलाव करते हुए पूर्व सैनिकों और पूर्व अग्निवीरों के लिए विशेष क्षैतिज आरक्षण लागू किया है। इसके तहत लेवल 1 के पदों में पूर्व सैनिकों को 20% और पूर्व अग्निवीरों को 10% कोटा मिलेगा। वहीं लेवल 2 और उससे ऊपर के पदों में पूर्व सैनिकों के लिए 10% और पूर्व अग्निवीरों के लिए 5% पद आरक्षित रहेंगे।

    आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 और 2025 की रेलवे भर्ती अधिसूचनाओं में पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए कुल 14 788 पद आरक्षित किए गए हैं। इनमें 6 485 पद लेवल 1 के हैं और 8 303 पद लेवल 2 या उससे ऊपर के श्रेणी के हैं। यह भर्ती रेलवे भर्ती बोर्ड और रेलवे भर्ती केंद्रों के माध्यम से आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं द्वारा की जाएगी।

    रेलवे की यह पहल विशेष रूप से 2026 बैच के अग्निवीरों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें सीधा लाभ मिलेगा। इससे सेना छोड़ने के बाद उनके लिए स्थिर नौकरी का अवसर सुनिश्चित होगा और वे नागरिक जीवन में आत्मनिर्भर बन सकेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम केवल रोजगार देने तक सीमित नहीं है बल्कि देश के जवानों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूत करता है।

    रेलवे की ओर से यह भी कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और प्रतियोगी परीक्षा आधारित होगी। आरक्षित पदों के तहत चयनित उम्मीदवारों को न केवल स्थिर रोजगार मिलेगा बल्कि वे रेलवे के विभिन्न विभागों में तकनीकी और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभाल सकेंगे।

    इस निर्णय के बाद अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों में उत्साह का माहौल है। कई युवा जवानों ने कहा कि यह न केवल उनके भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करता है बल्कि सेना में सेवा देने के बाद उन्हें नई दिशा और सम्मान भी प्रदान करता है।

    रेल मंत्रालय और भारतीय सेना की इस साझेदारी का उद्देश्य सैनिकों को सिर्फ सम्मान देना नहीं है बल्कि उन्हें स्थिर और सम्मानजनक जीवनयापन का अवसर देना भी है। इस पहल को देशभर में सेवा के बाद रोजगार की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

  • यूपी में सरकारी कर्मचारियों को होली का तोहफा, CM योगी ने फरवरी का वेतन पहले देने का किया ऐलान

    यूपी में सरकारी कर्मचारियों को होली का तोहफा, CM योगी ने फरवरी का वेतन पहले देने का किया ऐलान


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने होली के पावन अवसर को देखते हुए प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों संविदाकर्मियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि फरवरी माह का वेतन और पेंशन होली से पहले यानी 28 फरवरी तक अनिवार्य रूप से भुगतान कर दिया जाए।

    इस आदेश का दायरा केवल नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। इसमें आउटसोर्सिंग कर्मी संविदाकर्मी और सफाईकर्मी भी शामिल हैं। वित्त विभाग ने इस संबंध में औपचारिक शासनादेश जारी कर दिया है जिसमें साफ कहा गया है कि किसी भी कर्मचारी के वेतन या पेंशन में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है कि भुगतान प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होगी। समय पर वेतन वितरण सुनिश्चित करने के लिए आगामी शनिवार को भी कार्यदिवस घोषित किया गया है। यह कदम प्रदेश सरकार की ओर से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को त्योहार से पहले वित्तीय सुरक्षा देने की पहल है।

    जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीधे लाभान्वित करेगी। वेतन और पेंशन समय पर मिलने से न केवल कर्मचारियों में उत्साह बढ़ेगा बल्कि होली के त्योहार की तैयारियों में भी मदद मिलेगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक अड़चन की स्थिति में तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम राज्य सरकार की कर्मचारी-केंद्रित नीतियों का हिस्सा है जिसमें सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय स्थिरता और मनोबल बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इससे प्रदेश में सरकारी सेवाओं के सुचारू संचालन को भी बल मिलेगा।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार का यह प्रयास है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को त्योहार के अवसर पर अतिरिक्त सुविधा मिले और वे अपने परिवार के साथ उत्साहपूर्वक होली मना सकें। इस पहल को लेकर कर्मचारियों में प्रसन्नता का माहौल देखा जा रहा है।

  • चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी और शिवराज सिंह सहित नेताओं ने किया बलिदान दिवस पर याद

    चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी और शिवराज सिंह सहित नेताओं ने किया बलिदान दिवस पर याद


    नई दिल्ली । देश के महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि आज 27 फरवरी को बलिदान दिवस के रूप में मनाई जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आजाद का बलिदान और त्याग हमेशा देशवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया जिसके लिए वे सदैव स्मरणीय रहेंगे।

    पीएम मोदी के अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा मां भारती के अमर सपूत महान क्रांतिकारी वीर हुतात्मा चंद्रशेखर आजाद जी के बलिदान दिवस पर उनके चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उनके ओजस्वी विचार और तेजस्वी जीवन जन जन को राष्ट्र और समाज की उन्नति एवं सेवा के लिए सदैव प्रेरित करते रहेंगे। मातृभूमि का कण कण आपका अनंत काल तक ऋणी रहेगा।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में चंद्रशेखर आजाद को याद करते हुए कहा दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे आजाद ही रहे हैं आजाद ही रहेंगे। मातृभूमि की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। उनका त्याग और तेजस्वी व्यक्तित्व युगों युगों तक राष्ट्र सेवा एवं मां भारती के प्रति बलिदान की प्रेरणा देता रहेगा।

    इतिहास में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद अब प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में चंद्रशेखर आजाद और अंग्रेजों के बीच लंबी मुठभेड़ हुई। जब उनकी गोलियों का स्टॉक समाप्त हो गया तो उन्होंने अंतिम गोली खुद को मारकर अपना बलिदान दे दिया। उनके इस अदम्य साहस और देशभक्ति के कारण हर साल इस दिन को बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

    चंद्रशेखर आजाद का जीवन स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा का प्रतीक है। उनके त्याग और साहस ने आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए प्रेरित किया। उनके बलिदान को याद कर देशवासियों में आज भी देशभक्ति की भावना जागृत होती है। नेता और नागरिक समान रूप से उन्हें याद करते हुए उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश देते हैं।

    आजाद की पुण्यतिथि पर सभी नेताओं ने यह संदेश दिया कि मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर करना सर्वोच्च बलिदान है। उनका जीवन यह सिखाता है कि स्वतंत्रता और देशभक्ति केवल शब्द नहीं बल्कि कर्म और समर्पण का नाम है। चंद्रशेखर आजाद हमेशा स्मरणीय रहेंगे और उनके बलिदान की कहानी हर दिल में जीवित रहेगी।