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  • आतंकवाद पर भारत का करारा संदेश: ऑपरेशन सिंदूर से बदली रणनीति, पाकिस्तान पर राजनाथ का तीखा प्रहार

    आतंकवाद पर भारत का करारा संदेश: ऑपरेशन सिंदूर से बदली रणनीति, पाकिस्तान पर राजनाथ का तीखा प्रहार


    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान भारत की बदलती रणनीति और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख को स्पष्ट करते हुए पाकिस्तान पर जोरदार हमला बोला उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान एक ही समय आजाद हुए थे, लेकिन आज जहां भारत पूरी दुनिया में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बनकर IT हब के रूप में पहचान बना चुका है, वहीं पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र बन गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इसकी सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान द्वारा लगातार आतंकवाद को समर्थन देना है।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवाद केवल एक राष्ट्र-विरोधी गतिविधि नहीं है, बल्कि इसके कई आयाम हैं और इससे प्रभावी तरीके से निपटने के लिए ऑपरेशनल, वैचारिक और राजनीतिक तीनों स्तरों पर एक साथ काम करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा था, जिसने देश की नई ताकत और दृढ़ इच्छाशक्ति को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां आतंकी हमलों के बाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहना पड़ता था, वहीं अब भारत निर्णायक कार्रवाई करने में विश्वास रखता है। ऑपरेशन सिंदूर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसने यह साबित कर दिया कि भारत अब किसी भी चुनौती का जवाब देने में सक्षम है।

    रक्षा मंत्री ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए बताया कि 22 अप्रैल 2025 को निर्दोष पर्यटकों की हत्या के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन केवल 72 घंटे में पूरा कर लिया गया, लेकिन इसके पीछे लंबी और सटीक रणनीतिक तैयारी थी। यदि आवश्यकता पड़ती तो भारत लंबी लड़ाई के लिए भी पूरी तरह तैयार था।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करता। देश की नीति अब पूरी तरह जीरो टॉलरेंस पर आधारित है, जिसके तहत किसी भी प्रकार की आतंकी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऑपरेशन के दौरान मिली परमाणु धमकियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ऐसे दबावों में आने वाला नहीं है और राष्ट्रहित सर्वोपरि है।

    वैश्विक परिदृश्य पर बात करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। यूरोप से लेकर पश्चिम एशिया तक तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तथाकथित न्यू वर्ल्ड ऑर्डर वास्तव में एक ऐसी स्थिति बन गया है जहां कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं दिखाई देती। ऐसे समय में भारत का मजबूत और स्पष्ट रुख न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक संदेश देता है।

    उन्होंने अपने संबोधन के अंत में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह भारत की नई सोच, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। यह दुनिया को यह बताने के लिए पर्याप्त है कि अब भारत हर चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी कीमत पर अपने नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।

  • टेक्नोलॉजी से बदली तस्वीर-गुजरात में हजारों चोरी हुए मोबाइल लौटे, पुलिस ने बनाया रिकॉर्ड

    टेक्नोलॉजी से बदली तस्वीर-गुजरात में हजारों चोरी हुए मोबाइल लौटे, पुलिस ने बनाया रिकॉर्ड

    नई दिल्ली । गुजरात में कानून-व्यवस्था और तकनीकी पुलिसिंग के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है, जहां राज्य पुलिस ने चोरी और गुम हुए मोबाइल फोन को उनके असली मालिकों तक पहुंचाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस प्रदर्शन के चलते गुजरात पुलिस ने देशभर में मोबाइल रिकवरी के मामले में तीसरा स्थान प्राप्त किया है, जो डिजिटल पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    इस अभियान के तहत पुलिस ने हजारों मोबाइल फोन को ट्रैक कर उनके मालिकों को वापस लौटाया है। कुल मिलाकर रिकवरी दर लगभग 46 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है। यह सफलता इस बात का संकेत है कि तकनीक आधारित सिस्टम से अपराध नियंत्रण और नागरिक सहायता को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

    मोबाइल रिकवरी प्रक्रिया में आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म और ट्रैकिंग तकनीक की अहम भूमिका रही है। गुम या चोरी हुए मोबाइल को सिस्टम में ब्लॉक करने के बाद उनकी लोकेशन ट्रेस की गई और फिर उन्हें रिकवर किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस टीमों ने लगातार निगरानी और तेजी से कार्रवाई करते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    राज्य के कई जिलों ने इस अभियान में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। कुछ क्षेत्रों में रिकवरी रेट बेहद प्रभावशाली रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय स्तर पर पुलिस अधिकारियों की सक्रियता और समन्वय ने इस उपलब्धि को संभव बनाया।

    इस सफलता ने यह भी साबित किया है कि डिजिटल टूल्स और डेटा आधारित पुलिसिंग भविष्य की जरूरत बनते जा रहे हैं। इससे न केवल अपराधियों पर नियंत्रण आसान हुआ है, बल्कि आम नागरिकों को भी अपने खोए हुए मोबाइल वापस पाने की नई उम्मीद मिली है।

  • उत्तराखंड में पांच भाइयों की एक साथ शादी, 'जोझोड़े' प्रथा ने बिखेरी सांस्कृतिक चमक।

    उत्तराखंड में पांच भाइयों की एक साथ शादी, 'जोझोड़े' प्रथा ने बिखेरी सांस्कृतिक चमक।


    नई दिल्ली । परंपराओं का अनूठा मिलन: चकराता के एक ही मंडप में पांच भाइयों ने रचाया इतिहास, जब खुद बारात लेकर दूल्हों के द्वार पहुँचीं दुल्हनें उत्तराखंड की हसीन वादियों में बसे चकराता के खरासी गांव ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी गूँज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। आधुनिकता की चकाचौंध के बीच एक संयुक्त परिवार ने अपनी जड़ों और संस्कृति को जिस खूबसूरती से दुनिया के सामने रखा है, वह काबिले तारीफ है। यहाँ एक ही छत के नीचे, एक ही दिन और एक ही मंडप में एक परिवार के पांच भाइयों का विवाह संस्कार संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल पारिवारिक प्रेम और एकजुटता का प्रतीक बना, बल्कि इसने क्षेत्र की उस प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत कर दिया, जो सदियों से इस समाज की पहचान रही है।

    इस विवाह की सबसे चर्चित और आकर्षक कड़ी यहाँ की विशेष ‘जोझोड़े’ परंपरा रही। जहाँ आमतौर पर दूल्हा बारात लेकर वधू के घर जाता है, वहीं इस पारंपरिक रिवाज के अनुसार पांचों दुल्हनें स्वयं गाजे-बाजे और बारातियों के साथ दूल्हों के घर पहुंचीं। नरेंद्र, प्रदीप, प्रीतम, अमित और राहुल नामक पांचों भाइयों ने अपनी जीवनसंगिनियों के साथ देवभूमि की पावन परंपराओं के बीच सात फेरे लिए। जौनसार-बावर क्षेत्र की यह अनूठी प्रथा न केवल महिलाओं के सम्मान को दर्शाती है, बल्कि यह संयुक्त परिवार के भीतर अनुशासन और आपसी तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी पेश करती है।

    आयोजन की सादगी और भव्यता का संगम देखकर हर कोई दंग रह गया। गाँव के बुजुर्गों और मेहमानों का मानना है कि सामूहिक विवाह की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक है। जहाँ एक ओर यह फिजूलखर्ची को रोकता है, वहीं दूसरी ओर यह रिश्तों की मिठास और सामूहिक आनंद को कई गुना बढ़ा देता है। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए दूर-दराज के इलाकों से लोग जमा हुए थे। भाइयों की शादी के इस उत्सव के ठीक अगले दिन परिवार की बेटी का विवाह भी निर्धारित है, जिससे पूरा घर और गाँव खुशियों के दोहरे उल्लास में सराबोर नजर आ रहा है।

    सोशल मीडिया पर इस ‘यूनिक वेडिंग’ की तस्वीरें और वीडियो खूब पसंद किए जा रहे हैं। लोग इसे जौनसारी संस्कृति और लोक-परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बता रहे हैं।

    पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर थिरकते ग्रामीण और रीति-रिवाजों का पालन करते ये पांचों जोड़े यह संदेश दे रहे हैं कि हम चाहे कितने भी आधुनिक हो जाएं, अपनी जड़ों से जुड़कर ही हम वास्तविक गौरव प्राप्त कर सकते हैं। यह सामूहिक विवाह उत्सव लंबे समय तक क्षेत्र के लोगों की यादों में एक प्रेरक गाथा के रूप में जीवित रहेगा।
  • भोजन की थाली में मौत का साया? बेंगलुरु बेकरी कांड के बाद पुलिस ने दर्ज की FIR, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट।

    भोजन की थाली में मौत का साया? बेंगलुरु बेकरी कांड के बाद पुलिस ने दर्ज की FIR, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट।

    नई दिल्ली । बेंगलुरु के मगदी मेन रोड पर स्थित एक नामी बेकरी से रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। एक टैक्सी चालक, जो अपनी दिनभर की थकान मिटाने के लिए नाश्ता करने रुका था, उसे स्वाद के बदले जानलेवा अनुभव मिला।
    पीड़ित दीपू एनके ने जब बेकरी से पनीर टिक्का रोल मंगवाया, तो उन्हें यह अंदाजा भी नहीं था कि उस रोल के अंदर एक मरी हुई छिपकली छिपी है। जैसे ही उन्होंने रोल का पहला बाइट लिया, उन्हें कुछ अजीब महसूस हुआ और गौर से देखने पर उनके होश उड़ गए। यह घटना न केवल बेकरी की साफ-सफाई पर सवाल उठाती है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति उनकी संवेदनहीनता को भी दर्शाती है।

    घटना के कुछ ही देर बाद दीपू की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें लगातार उल्टियां और दस्त होने लगे, जिसके बाद आनन-फानन में उन्हें पास के एक अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया।

    डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर मानते हुए उन्हें अगले 24 घंटों तक मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा। पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने इस गंदगी के बारे में बेकरी कर्मचारियों को बताया, तो उन्होंने अपनी गलती मानने के बजाय बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाया। इतना ही नहीं, बेकरी प्रबंधन ने अस्पताल के खर्च की जिम्मेदारी लेने से भी साफ इनकार कर दिया, जिससे पीड़ित और उनके परिवार को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

    इस गंभीर लापरवाही के खिलाफ अब कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। गोविंदराज नगर पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

    पुलिस मुख्य रूप से लापरवाही और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों को परोसने के बिंदुओं पर जांच कर रही है। हालांकि, जांच में एक तकनीकी बाधा यह आई है कि पीड़ित घबराहट और गिरती सेहत के कारण मौके पर छिपकली की फोटो नहीं ले सके, लेकिन अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट और शुरुआती बयानों के आधार पर पुलिस बेकरी के स्वच्छता मानकों की गहन जांच कर रही है।

    यह मामला उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो बाहर के खाने पर निर्भर रहते हैं। खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी किस कदर किसी की जान जोखिम में डाल सकती है, यह घटना इसका जीता-जागता उदाहरण है।

    स्थानीय प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग से अब यह मांग की जा रही है कि वे बेकरी और अन्य खाद्य केंद्रों की औचक जांच करें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल, पुलिस की जांच जारी है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
  • 55 किमी रेंज वाली स्वदेशी NASM-SR मिसाइल ने समंदर में दिखाया अपना दम।

    55 किमी रेंज वाली स्वदेशी NASM-SR मिसाइल ने समंदर में दिखाया अपना दम।

    नई दिल्ली । भारतीय समुद्री सुरक्षा के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। रक्षा वैज्ञानिकों और नौसेना के साझा प्रयासों ने एक ऐसी स्वदेशी मिसाइल प्रणाली को जन्म दिया है, जो समंदर में दुश्मन की हर चाल को नाकाम करने की क्षमता रखती है। ओडिशा के चांदीपुर परीक्षण रेंज से दागी गई इस ‘Naval Anti-Ship Missile-Short Range’ (NASM-SR) ने अपनी पहली ही उड़ान में यह साबित कर दिया कि भारत अब रक्षा तकनीक के लिए विदेशी निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने की राह पर है। इस परीक्षण की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘सॉल्वो लॉन्च’ मोड रहा, जिसमें एक के बाद एक दो मिसाइलों को अत्यंत कम समय के अंतराल पर दागकर उनकी अचूक मारक क्षमता को परखा गया।

    यह मिसाइल विशेष रूप से नौसैनिक हेलीकॉप्टरों के लिए तैयार की गई है, जो इसे अत्यंत लचीला और खतरनाक हथियार बनाती है। तकनीकी बारीकियों की बात करें तो यह मिसाइल ‘इमेजिंग इन्फ्रा-रेड’ (IIR) सीकर तकनीक से लैस है। यह आधुनिक तकनीक मिसाइल को अंधेरे या खराब मौसम में भी दुश्मन के जहाज की ऊष्मा (heat) को पहचान कर उस पर सटीक निशाना लगाने की अनुमति देती है।

    लगभग 55 किलोमीटर की मारक दूरी तय करने वाली यह मिसाइल हवा में 0.8 मैक की रफ्तार से दौड़ती है, जो ध्वनि की गति के करीब है। इसका 385 किलोग्राम का वजन और 100 किलोग्राम का शक्तिशाली विस्फोटक वारहेड किसी भी मध्यम श्रेणी के युद्धपोत को पल भर में जलसमाधि देने के लिए पर्याप्त है।

    दुश्मन के लिए यह मिसाइल एक अदृश्य काल की तरह है। इसकी सबसे बड़ी शक्ति इसकी ‘सी-स्किमिंग’ क्षमता है, जिसके तहत यह समुद्र की लहरों से मात्र 5 मीटर ऊपर उड़ती है। इतनी कम ऊंचाई पर उड़ने के कारण यह दुश्मन के शक्तिशाली रडार की नजरों से बच निकलती है और जब तक रडार इसे देख पाता है, तब तक प्रहार हो चुका होता है।

    इसके अलावा, ‘सॉल्वो लॉन्च’ की खूबी इसे और भी घातक बनाती है; यदि दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्टम एक मिसाइल को रोकने की कोशिश भी करे, तो ठीक पीछे आती दूसरी मिसाइल लक्ष्य को भेदने में सफल रहती है। यह रणनीति दुश्मन के सुरक्षा घेरे को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए डिजाइन की गई है।

    भारतीय नौसेना की आक्रमण क्षमताओं में यह इजाफा ‘आत्मनिर्भर भारत’ की एक बड़ी जीत मानी जा रही है। अब तक इस तरह की मिसाइलों के लिए बाहरी देशों पर निर्भर रहने वाली नौसेना के पास अब अपना स्वदेशी विकल्प मौजूद है।

    इसे सीकिंग और अन्य आधुनिक नौसैनिक हेलीकॉप्टरों के बेड़े में शामिल किया जाएगा, जिससे गश्ती और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी। छोटे युद्धपोतों और दुश्मन के रसद जहाजों के लिए यह मिसाइल एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। सफल परीक्षण के बाद अब इसे जल्द ही सेना के बेड़े में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जो हिंद महासागर और उससे परे भारत की धाक को और मजबूत करेगी।

  • होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच भारत-ईरान का बड़ा कूटनीतिक कदम; विदेश मंत्री अराघची ने डॉ. जयशंकर के साथ की रणनीतिक वार्ता।

    होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच भारत-ईरान का बड़ा कूटनीतिक कदम; विदेश मंत्री अराघची ने डॉ. जयशंकर के साथ की रणनीतिक वार्ता।

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की संवेदनशील सुरक्षा स्थिति के बीच ईरान और भारत के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक संवाद हुआ है। ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने बुधवार शाम भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को फोन कर क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय हितों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा की।

    इस बातचीत में मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती सैन्य हलचल और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को रोकने के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारतीय विदेश मंत्री ने इस संवाद की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि दोनों देश मौजूदा संकट की गंभीरता को देखते हुए एक-दूसरे के निरंतर संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक व्यापार मार्ग पर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं।

    ईरानी दूतावास के अनुसार, इस चर्चा में न केवल सुरक्षा मुद्दों बल्कि युद्धविराम की संभावनाओं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसी बीच, ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भारत को लेकर एक सकारात्मक संकेत मिला है। ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व के प्रतिनिधियों का मानना है कि भारत इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने और चल रही जंग को समाप्त करने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

    उन्होंने वर्तमान संकट को ‘दमन और आत्मरक्षा’ के बीच का संघर्ष करार देते हुए बढ़ते मानवीय नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ईरान का मानना है कि वैश्विक समुदाय को अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है और भारत जैसे प्रभावशाली राष्ट्र इस दिशा में मध्यस्थता कर सकते हैं।

    दूसरी ओर, सैन्य मोर्चे पर ईरान का रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की नौसेना ने अमेरिका को कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की है। ईरानी सैन्य अधिकारियों का दावा है कि यदि अमेरिका ने कोई भी नई सैन्य गलती की, तो ईरान अपनी ‘आश्चर्यजनक रणनीतियों’ और नव विकसित रक्षा क्षमताओं का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा।

    इसके साथ ही, ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर वह अपना नियंत्रण किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगा। ईरानी संसद में दिए गए बयानों के अनुसार, देश के पास मिसाइलों और उन्नत ड्रोनों का इतना विशाल भंडार है कि वह किसी भी लंबे संघर्ष का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।

    कूटनीतिक स्तर पर यह भी खुलासा हुआ है कि तनाव के बावजूद पर्दे के पीछे कुछ वार्ताओं के रास्ते खुले हुए हैं। खबर है कि कुछ पड़ोसी देशों के माध्यम से अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष संवाद की प्रक्रिया जारी है, जिसका प्रबंधन ईरानी संसद के अध्यक्ष द्वारा किया जा रहा है।

    हालांकि, जमीन पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरान के कड़े सैन्य तेवर और भारत के साथ बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता यह दर्शाती है कि आने वाले दिन पश्चिम एशिया की भू-राजनीति के लिए अत्यंत निर्णायक होने वाले हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज मार्ग की सुरक्षा अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आ गई है।

  • राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात में राघव चड्ढा को याद दिलाया गया पार्टी का सख्त प्रोटोकॉल।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात में राघव चड्ढा को याद दिलाया गया पार्टी का सख्त प्रोटोकॉल।


    नई दिल्ली । राजनीतिक गलियारों में अपनी अलग पहचान रखने वाले राघव चड्ढा ने जैसे ही एक नए राजनीतिक दल के साथ अपनी पारी शुरू की, उन्हें संगठन की गहराई और वहां के कड़े नियमों का अहसास पहले ही दिन हो गया। भारतीय राजनीति में कैडर आधारित व्यवस्था के लिए विख्यात भारतीय जनता पार्टी ने अपने इस नए सदस्य को स्पष्ट कर दिया है कि यहाँ व्यक्तिगत संबंधों से ऊपर पद की मर्यादा होती है।

    हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान जब राघव चड्ढा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुखातिब हुए, तो उन्होंने अनजाने में उन्हें उनके नाम से संबोधित कर दिया। पार्टी के भीतर इस तरह का संबोधन प्रोटोकॉल के खिलाफ माना जाता है, जिसके तुरंत बाद वहां मौजूद वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उन्हें शिष्टाचार के अनकहे लेकिन अनिवार्य नियमों की जानकारी दी।

    भाजपा जैसी विचारधारा आधारित पार्टी में अनुशासन का स्तर काफी ऊंचा रहता है, जहाँ जनसंघ के समय से ही पद की गरिमा को व्यक्तिगत पहचान से ऊपर रखा गया है। राघव चड्ढा और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के बीच हुई इस मुलाकात में जब राघव ने बार-बार अध्यक्ष का नाम लिया, तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इसे तुरंत सुधारने की सलाह दी।

    उन्हें विनम्रतापूर्वक समझाया गया कि बातचीत के दौरान ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष जी’ कहकर संबोधित करना ही पार्टी की संस्कृति का हिस्सा है। यह वाकया उस समय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम देखते हैं कि वर्तमान अध्यक्ष उम्र और अनुभव में कई नेताओं से छोटे होने के बावजूद संगठन के सर्वोच्च पद पर आसीन हैं, और पार्टी ने स्पष्ट निर्देश जारी कर रखे हैं कि प्रोटोकॉल में कोई ढील नहीं दी जाएगी।

    संगठन के भीतर यह नियम केवल नए सदस्यों के लिए ही नहीं, बल्कि उन पुराने दिग्गजों के लिए भी है जिनके अध्यक्ष के साथ बेहद करीबी या पुराने संबंध रहे हैं। पार्टी का मानना है कि यदि पद का सम्मान कम होता है, तो संगठन की शक्ति पर भी उसका असर पड़ता है।

    इसलिए, आधिकारिक चर्चाओं के दौरान निजी संबंधों को किनारे रखकर केवल पद के अनुरूप सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग करना अनिवार्य है। राघव चड्ढा के लिए यह अनुभव काफी अलग था, क्योंकि वे एक ऐसी राजनीतिक पृष्ठभूमि से आए हैं जहाँ कार्यशैली और संबोधन के तरीके काफी भिन्न रहे हैं। इस छोटी सी घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा में शामिल होने का अर्थ केवल विचारधारा अपनाना नहीं, बल्कि उसकी सख्त अनुशासन व्यवस्था का हिस्सा बनना भी है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के अनुशासन के जरिए पार्टी अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को एक सूत्र में पिरोकर रखती है। राघव चड्ढा को मिला यह सबक यह भी दर्शाता है कि पार्टी अपने हर सदस्य से पद की गरिमा बनाए रखने की उम्मीद करती है, चाहे वह कितना ही अनुभवी या चर्चित चेहरा क्यों न हो।

    आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राघव चड्ढा पार्टी के इस नए सांचे में खुद को कितनी जल्दी और कितनी सहजता से ढाल पाते हैं। फिलहाल, ‘नाम नहीं, पद का सम्मान’ के इस सिद्धांत ने स्पष्ट कर दिया है कि यहाँ संगठन ही सर्वोपरि है।

  • तेज, सटीक और घातक कार्रवाई: 22 मिनट में खत्म हुआ आतंकियों का नेटवर्क

    तेज, सटीक और घातक कार्रवाई: 22 मिनट में खत्म हुआ आतंकियों का नेटवर्क

    नई दिल्ली । भारतीय सेना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर साझा किए गए नए वीडियो ने न केवल सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति का भी संदेश दिया है। महज 22 मिनट में अंजाम दिए गए इस ऑपरेशन ने आतंकियों के पूरे कमांड ढांचे को हिलाकर रख दिया।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए आधिकारिक पोस्ट में सेना ने साफ शब्दों में कहा कि जब मानवता की सीमाएं पार होती हैं तो प्रतिक्रिया भी उतनी ही निर्णायक होती है। यह संदेश न केवल चेतावनी है बल्कि उन ताकतों के लिए संकेत भी है जो भारत की शांति और सुरक्षा को चुनौती देने की कोशिश करते हैं।

    सेना के अनुसार, इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी गति और सटीकता रही। बेहद कम समय में कई लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाते हुए आतंकियों के नेटवर्क को गहरा नुकसान पहुंचाया गया। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे आधुनिक तकनीक और सटीक रणनीति के साथ अलग-अलग टारगेट्स पर समन्वित तरीके से कार्रवाई की गई। इससे यह साफ होता है कि ऑपरेशन की योजना बेहद बारीकी से बनाई गई थी और उसे उसी स्तर की दक्षता के साथ लागू किया गया।

    इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आतंकियों के नेतृत्व तंत्र को खत्म करना था, जिसे सेना ने सफलतापूर्वक पूरा किया। कमांड स्ट्रक्चर पर सीधे प्रहार से आतंकियों की गतिविधियों को गंभीर झटका लगा है। इस तरह की कार्रवाई यह दिखाती है कि भारतीय सेना न केवल रक्षात्मक बल्कि आक्रामक रणनीति में भी पूरी तरह सक्षम है।

    नए वीडियो के सामने आने के बाद लोगों में इस ऑपरेशन को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ऑपरेशन भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति को और मजबूत करेंगे। यह भी संकेत मिलता है कि सेना अब तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत हो चुकी है, जिससे कम समय में बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के जरिए भारतीय सेना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि देश के खिलाफ किसी भी साजिश का जवाब तुरंत और प्रभावी तरीके से दिया जाएगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता न केवल सैन्य ताकत का प्रदर्शन है बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में पूरी तरह अडिग है और हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

  • PM मोदी अगले माह जाएंगे यूरोप दौरे पर… रास्ते में कुछ समय UAE में रुकेंगे!

    PM मोदी अगले माह जाएंगे यूरोप दौरे पर… रास्ते में कुछ समय UAE में रुकेंगे!


    दुबई।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अगले महीने संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates.- UAE) की एक संक्षिप्त यात्रा कर सकते हैं। अपनी आगामी यूरोप यात्रा (Europe trip) के दौरान पीएम मोदी बीच रास्ते में कुछ समय के लिए यूएई में रुकेंगे, जहां उनकी यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (President Sheikh Mohammed bin Zayed Al Nahyan.- MBZ) के साथ द्विपक्षीय वार्ता होने की उम्मीद है। वर्तमान में इस यात्रा की रूपरेखा तैयार की जा रही है और अभी तक इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।


    यूरोप दौरे के बीच यूएई में पड़ाव

    प्रधानमंत्री मोदी 15 से 20 मई तक चार यूरोपीय देशों- नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड और इटली की अहम यात्रा पर रहेंगे। इस दौरे का मुख्य आकर्षण ओस्लो (नॉर्वे) में होने वाला ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ होगा। इस साल की शुरुआत में यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दिए जाने के बाद पीएम मोदी की यह पहली यूरोप यात्रा होगी।


    संकट के बीच निरंतर उच्च-स्तरीय वार्ताएं

    पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बावजूद दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय दौरों का सिलसिला लगातार जारी है। अगर पीएम मोदी यूएई पहुंचते हैं, तो यह इसी कड़ी का नवीनतम हिस्सा होगा। इससे पहले यूएई के राष्ट्रपति (MBZ) एक दिवसीय यात्रा पर भारत आए थे, जहां उन्होंने पीएम मोदी के साथ वार्ता की।

    मार्च में ईरान युद्ध के बीच, यूएई की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम अल-हाशिमी ने भारत का दौरा किया। अप्रैल (11-12) में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूएई का दौरा किया। उन्होंने राष्ट्रपति MBZ से मुलाकात कर पीएम मोदी का एक निजी संदेश उन्हें सौंपा। इसके अलावा, उन्होंने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा की।

    पिछले सप्ताह ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने यूएई जाकर राष्ट्रपति MBZ से मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों पर अहम चर्चा हुई।


    तेजी से बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक संबंध

    पिछले एक दशक में भारत और यूएई के संबंधों में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। दोनों देशों ने आर्थिक, सुरक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी साझेदारी को काफी मजबूत किया है। वर्ष 2021 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ा दिया था। यूएई भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में से एक है। 2025 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 100 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों देशों का लक्ष्य 2032 तक इस व्यापार को दोगुना करना है। यूएई ऊर्जा, बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत में सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में से एक बन गया है।


    ऊर्जा क्षेत्र में गहराता सहयोग (एलएनजी और ओपेक)

    ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से दोनों देशों के बीच हाल ही में कई बड़े कदम उठाए गए हैं। जनवरी में यूएई के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान 10 साल का तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आपूर्ति समझौता हुआ था। इसके तहत, यूएई 2028 से शुरू होकर अगले 10 वर्षों तक भारत को $3 बिलियन तक की एलएनजी की आपूर्ति करेगा।

    यूएई ने तेल निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) से बाहर निकलने का फैसला किया है। इसके बाद यह उम्मीद की जा रही है कि यूएई अपने तेल उत्पादन में भारी वृद्धि करेगा, जिससे भारत और यूएई के बीच ऊर्जा संबंध और अधिक मजबूत होंगे। संक्षेप में कहें तो, पीएम मोदी की यह संभावित यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश न केवल व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं, बल्कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक-दूसरे के मजबूत रणनीतिक साझेदार भी बने हुए हैं।

  • दिल्ली MCD में बीजेपी का दबदबा: प्रवेश वाही बने मेयर, डॉ. मोनिका पंत डिप्टी मेयर चुनी गईं

    दिल्ली MCD में बीजेपी का दबदबा: प्रवेश वाही बने मेयर, डॉ. मोनिका पंत डिप्टी मेयर चुनी गईं


    नई दिल्ली:
    दिल्ली नगर निगम (MCD) के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एकतरफा जीत दर्ज करते हुए सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाई है। रोहिणी ईस्ट से तीन बार के पार्षद प्रवेश वाही को दिल्ली का नया मेयर चुना गया, जबकि आनंद विहार की पार्षद डॉ. मोनिका पंत डिप्टी मेयर निर्वाचित हुईं। आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रक्रिया से दूर रहने के कारण मुकाबला काफी आसान हो गया।

    मेयर पद के लिए हुए मतदान में प्रवेश वाही को कुल 156 वोट मिले। उन्हें इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के 14 पार्षदों का भी समर्थन मिला। वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार हाजी ज़राफ़ को सिर्फ 9 वोट ही प्राप्त हुए। डिप्टी मेयर पद पर भी बीजेपी की जीत उतनी ही मजबूत रही। आनंद विहार से पार्षद डॉ. मोनिका पंत को 156 वोट मिले और वे निर्वाचित हुईं। चुनाव से पहले दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के नेतृत्व में पार्टी कार्यालय में बैठक कर सांसदों और पार्षदों को वोटिंग प्रक्रिया की जानकारी दी गई थी। इसके अलावा स्थायी समिति के लिए भी चुनाव हुए, जिसमें बीजेपी के जय भगवान यादव और मनीष चड्ढा के साथ आम आदमी पार्टी की पार्षद जलज चौधरी को शामिल किया गया।

    प्रवेश वाही का राजनीतिक सफर
    प्रवेश वाही नगर निगम की राजनीति में लंबे अनुभव वाले नेता हैं। वे रोहिणी-ईस्ट वार्ड से तीसरी बार पार्षद चुने गए हैं। उनका राजनीतिक करियर 1980 के दशक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी से जुड़कर शुरू हुआ था। वे 2007 में पहली बार पार्षद बने और इसके बाद 2012 और 2022 में भी जीत हासिल की। लगभग दो दशक के अनुभव के दौरान वे उत्तर दिल्ली नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष और रोहिणी ज़ोन के चेयरमैन जैसे पदों पर भी कार्य कर चुके हैं। 2004 से 2007 के बीच वे मंडल अध्यक्ष भी रहे। संगठन और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए ही पार्टी ने उन्हें मेयर की जिम्मेदारी सौंपी।

    डॉ. मोनिका पंत की प्रोफाइल
    डिप्टी मेयर बनीं डॉ. मोनिका पंत पेशे से मेडिकल प्रैक्टिशनर हैं और उनकी पहचान एक शिक्षित व साफ छवि वाली नेता के रूप में है। उन्होंने 2001 में इंडियन बोर्ड ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन से एमडी (A.M.) की डिग्री प्राप्त की। 48 वर्षीय पंत आनंद विहार वार्ड से पार्षद हैं और 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की थी। वे दिल्ली बीजेपी महिला मोर्चा की महामंत्री भी रह चुकी हैं। उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास लगभग 13.96 करोड़ रुपये की संपत्ति है और उन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उनके पति आशीष पंत चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं।

    स्टैंडिंग कमेटी में नई टीम
    मेयर और डिप्टी मेयर के साथ एमसीडी की अहम स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों का भी चयन किया गया। बीजेपी की ओर से बेगमपुर के पार्षद जय भगवान यादव और पहाड़गंज के मनीष चड्ढा शामिल हुए, जबकि आम आदमी पार्टी की ओर से शालीमार बाग की पार्षद जलज चौधरी को जगह मिली।

    इस चुनाव में बीजेपी की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती साफ दिखाई दी। आम आदमी पार्टी के चुनाव से बाहर रहने के फैसले ने पार्टी की राह और आसान कर दी, जबकि कांग्रेस को बेहद कम समर्थन मिला। अब नए नेतृत्व के सामने दिल्ली में सफाई व्यवस्था सुधारने और निगम प्रशासन को मजबूत बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।