Category: National

  • J&K के डोडा क्षेत्र में सुबह-सुबह कांपी धरती, आया 4.6 तीव्रता का भूकंप

    J&K के डोडा क्षेत्र में सुबह-सुबह कांपी धरती, आया 4.6 तीव्रता का भूकंप


    जम्मू।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के डोडा (Doda) क्षेत्र में रविवार की सुबह भूकंप (Earthquake) के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.6 मापी गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismolog) के अनुसार, यह भूकंप सुबह 4 बजकर 32 मिनट पर आया। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।


    महाराष्ट्र के हिंगोली में भूकंप के झटके

    इससे पहले शनिवार सुबह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के हिंगोली जिले में 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके झटके नांदेड और परभणी जिलों के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए। अधिकारियों के अनुसार अभी तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की तत्काल सूचना नहीं है। हालांकि, पांगरा शिंदे गांव में कुछ घरों और सामुदायिक भवनों में दरारें आने की खबर है। हिंगोली के कलेक्टर राहुल गुप्ता ने बताया कि भूकंप सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इसका केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर हिंगोली जिले के वसमत तालुका के शिरली गांव के पास था।


    क्यों आता है भूकंप?

    पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।


    जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?

    भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।


    कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?

    भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

  • नए गठबंधन के मोह से अखिलेश ने मोड़ा मुख, 'पीडीए' के दम पर भाजपा के शुद्धिकरण का किया शंखनाद

    नए गठबंधन के मोह से अखिलेश ने मोड़ा मुख, 'पीडीए' के दम पर भाजपा के शुद्धिकरण का किया शंखनाद

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति के फलक पर आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछा दी है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी किसी भी नए राजनीतिक दल के साथ गठबंधन का प्रयोग नहीं करेगी। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि वर्तमान में जो गठबंधन (इंडिया अलायंस) अस्तित्व में है, वही 2027 की चुनावी जंग में भी पार्टी का आधार बनेगा। अखिलेश के इस बयान ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है, जिनमें छोटे दलों के साथ नए तालमेल की संभावना जताई जा रही थी।

    अनुभवों से ली सीख, पुराने साथियों पर भरोसा
    अखिलेश यादव ने गठबंधन के अपने पुराने और खट्टे-मीठे अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने अलग-अलग समय में कई प्रयोग किए हैं। हमारे पास गठबंधन का लंबा अनुभव है और इसी आधार पर हमने तय किया है कि जो साथी वर्तमान में हमारे साथ खड़े हैं, हम उन्हीं के साथ मजबूती से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बार भाजपा का मुकाबला केवल किसी राजनीतिक गठबंधन से नहीं, बल्कि एक ‘समुदाय’ से होगा। यह समुदाय ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) है, जो भाजपा की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर मतदान करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा की नजर फिलहाल केवल उत्तर प्रदेश पर है और राजस्थान में चुनाव लड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है।

    वोटर लिस्ट में ‘शुद्धिकरण’ पर छिड़ा वाकयुद्ध
    मतदाता सूची में धांधली के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्रों के बजाय शहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर वोट काटने की साजिश रची थी, क्योंकि वहां उसे हार का डर सता रहा था। सपा प्रमुख ने दावा किया कि उनके ‘पीडीए प्रहरियों’ ने हर बूथ पर पैनी नजर रखी, जिससे सत्ता पक्ष की गणित फेल हो गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “भाजपा मतदाता सूची के शुद्धिकरण का दावा कर रही है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि प्रदेश की जनता आने वाले चुनाव में उनकी सरकार का ही पूर्ण शुद्धिकरण कर देगी।” उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे जिला स्तर पर मतदाता सूची का सूक्ष्म विश्लेषण जारी रखें।

    ‘नकली संतों’ की राजनीति पर प्रहार
    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में उतरते हुए अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद उन ‘नकली संतों’ से संघर्ष कर रहे हैं जिन्होंने धर्म का चोला पहनकर राजनीति को दूषित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरों से प्रमाण मांग रहे हैं, उनके पास खुद कोई प्रामाणिक आधार नहीं है। समाजवादी पार्टी वास्तविक संतों का सम्मान करती है और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आशीर्वाद पार्टी के साथ हमेशा रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही इन ‘नकली संतों’ की वास्तविकता पर भी कोई वेब सीरीज सामने आ सकती है।

    सिनेमाई एजेंडे और पड़ोसी राज्यों पर कटाक्ष
    हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए काल्पनिक बातों को फिल्मों के जरिए वास्तविकता बनाकर पेश कर रही है। हालांकि, जनता ने ‘धुरंधर’ का जवाब ‘धुआंधार’ तरीके से देकर यह बता दिया है कि वह अब बहकावे में आने वाली नहीं है। पड़ोसी राज्य बिहार की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ‘डिमोशन’ करते हुए उन्हें धीरे-धीरे रिटायरमेंट की राह दिखा दी है। अखिलेश के इन तेवरों से साफ है कि वे आने वाले समय में केवल चुनावी मैदान में ही नहीं, बल्कि वैचारिक और सामाजिक मोर्चे पर भी भाजपा की घेराबंदी करने के लिए तैयार हैं।

  • एनसीपी मंत्री वीडियो कांड: आरोपी पहुँचा हाईकोर्ट, ट्रांसजेंडर के खिलाफ वसूली और साजिश का लगाया आरोप

    एनसीपी मंत्री वीडियो कांड: आरोपी पहुँचा हाईकोर्ट, ट्रांसजेंडर के खिलाफ वसूली और साजिश का लगाया आरोप


    नई दिल्ली। राजनैतिक गलियारों में हलचल मचाने वाले एनसीपी मंत्री नरहरी जिरवाल से जुड़े कथित आपत्तिजनक वीडियो मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने की गुहार लगाई है। यह याचिका मुंबई के कफ परेड पुलिस स्टेशन में दर्ज उस मामले के विरोध में दायर की गई है, जिसमें आरोपी पर वीडियो लीक करने और छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

    आरोपी और ट्रांसजेंडर के बीच ‘वसूली’ की जंग
    इस पूरे विवाद की जड़ में एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति की शिकायत है, जिसने आरोपी को अपना भाई बताते हुए आरोप लगाया था कि उसने वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे धमकाने की कोशिश की। दूसरी ओर, आरोपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए ट्रांसजेंडर पर ही पलटवार किया है। आरोपी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उसे झूठे मामले में फंसाया जा रहा है और वास्तव में उसे ब्लैकमेल कर वसूली की कोशिश की जा रही थी। उसने अदालत से मांग की है कि ट्रांसजेंडर के खिलाफ आपराधिक साजिश और धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

    वीडियो लीक कांड और मंत्री की भूमिका
    मामले की गंभीरता तब बढ़ी जब एक ऐसा वीडियो सार्वजनिक हुआ जिसमें कथित तौर पर एनसीपी मंत्री एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह वीडियो वास्तविक है या इसके साथ तकनीकी रूप से छेड़छाड़ की गई है। आरोपी का कहना है कि उसे निशाना बनाया जा रहा है, जबकि शिकायतकर्ता का तर्क है कि उसकी निजता और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हुआ है।

    अदालती सुनवाई पर टिकी निगाहें
    फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई का इंतजार है, जिसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि एफआईआर रद्द होगी या जांच का दायरा और बढ़ेगा। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर अपनी प्रक्रिया जारी रखी है। यह मामला न केवल एक मंत्री की छवि से जुड़ा है, बल्कि इसमें साइबर अपराध, ब्लैकमेलिंग और आपसी रंजिश के कई पेचीदा पहलू शामिल हो गए हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला इस विवाद की दिशा तय करेगा।

  • UP Board Result 2026: 10वीं-12वीं का इंतजार खत्म, अप्रैल के आखिरी हफ्ते में आएगा रिजल्ट

    UP Board Result 2026: 10वीं-12वीं का इंतजार खत्म, अप्रैल के आखिरी हफ्ते में आएगा रिजल्ट


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) के लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर है। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 का रिजल्ट अब ज्यादा दूर नहीं है। बोर्ड अप्रैल के अंतिम सप्ताह में परिणाम घोषित करने की तैयारी में है।

    25 अप्रैल के बाद कभी भी आ सकता है रिजल्ट
    बोर्ड के अनुसार, 25 अप्रैल के बाद इसी महीने किसी भी दिन हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का रिजल्ट जारी किया जा सकता है। इससे छात्रों को अब लंबे इंतजार से राहत मिलेगी। जो छात्र पहले प्रैक्टिकल परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे, उनकी परीक्षाएं 9 अप्रैल से कराई जा रही हैं। साथ ही, जिन परीक्षकों ने अंक अपलोड नहीं किए थे, उन्हें दोबारा मौका दिया गया था। अब सभी अंकों को वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है।

    रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया तेज
    UP Board के सचिव भगवती सिंह ने रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। बोर्ड ने सभी परीक्षकों को निर्देश दिया है कि प्रैक्टिकल के अंक तुरंत अपलोड किए जाएं, ताकि रिजल्ट में देरी न हो। करीब 34,637 छात्रों के प्रैक्टिकल अंक समय बढ़ाकर अपलोड कराए गए हैं। पहले 652 परीक्षा केंद्रों पर आंतरिक परीक्षकों ने अंक अपलोड नहीं किए थे, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

    जल्द जारी होगा आधिकारिक नोटिस
    रिजल्ट जारी होने से पहले बोर्ड की ओर से आधिकारिक नोटिस जारी किया जाएगा, जिसमें तारीख और समय की जानकारी दी जाएगी। UP Board Result 2026 अब अंतिम चरण में है। सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अप्रैल के आखिरी सप्ताह में रिजल्ट जारी होने की पूरी संभावना है। ऐसे में छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें।

  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए बड़ी राहत, Vaya Vandana Yojana से मिलेगी गारंटीड इनकम

    वरिष्ठ नागरिकों के लिए बड़ी राहत, Vaya Vandana Yojana से मिलेगी गारंटीड इनकम


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसका उद्देश्य देश के वरिष्ठ नागरिकों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक स्थिरता और नियमित आय प्रदान करना है। इस योजना को भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के माध्यम से संचालित किया गया है और यह विशेष रूप से 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों के लिए बनाई गई है।
    वरिष्ठ नागरिकों को मिलती है गारंटीड आय

    इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश करने पर निश्चित दर से रिटर्न मिलता है। निवेशक को मासिक, तिमाही, छमाही या वार्षिक आधार पर पेंशन के रूप में नियमित आय प्राप्त होती है। यह उन बुजुर्गों के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है, जिनके पास रिटायरमेंट के बाद कोई स्थायी आय स्रोत नहीं होता। PMVVY के तहत मिलने वाला रिटर्न पूरी तरह गारंटीड होता है, यानी यह बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता। यही वजह है कि इसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में गिना जाता है।
    निवेश सीमा और अवधि

    इस योजना में अधिकतम निवेश सीमा तय होती है, जिससे पेंशन की राशि भी सीमित रहती है। निवेश करने पर निवेशक को लगभग 10 वर्षों तक निश्चित पेंशन मिलती है। यह अवधि पूरी होने पर मूल निवेश राशि भी वापस मिलने का प्रावधान होता है।
    लोन और निकासी की सुविधा

    PMVVY में निवेश करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को जरूरत पड़ने पर लोन की सुविधा भी मिलती है। इसके अलावा, किसी आपात स्थिति में आंशिक या समय से पहले निकासी का विकल्प भी उपलब्ध होता है, हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें और नियम लागू होते हैं।
    बुजुर्गों के लिए क्यों खास है यह योजना?

    विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती महंगाई और अनिश्चित आर्थिक परिस्थितियों के बीच यह योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक मजबूत आर्थिक सहारा साबित हो सकती है। यह न केवल उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाती है, बल्कि मानसिक रूप से भी सुरक्षा और स्थिरता का एहसास कराती है।
    PMVVY के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया
    यदि कोई पात्र व्यक्ति इस योजना का लाभ लेना चाहता है, तो वह LIC की आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन कर सकता है:
    स्टेप 1: LIC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं

    स्टेप 2: “PM Vaya Vandana Yojana” विकल्प चुनें

    स्टेप 3: “Buy Online” या “Apply Now” पर क्लिक करें

    स्टेप 4: आवश्यक विवरण भरें (नाम, उम्र, मोबाइल नंबर, आधार/PAN)

    स्टेप 5: पेंशन विकल्प चुनें (Monthly/Quarterly/Half-Yearly/Yearly)

    स्टेप 6: निवेश राशि दर्ज करें

    स्टेप 7: ऑनलाइन भुगतान करें (UPI/नेट बैंकिंग/कार्ड)

    स्टेप 8: पॉलिसी डॉक्यूमेंट डाउनलोड करें

    प्रधानमंत्री वय वंदना योजना रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना वरिष्ठ नागरिकों को निश्चित आय, सुरक्षित निवेश और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे उनका जीवन अधिक आत्मनिर्भर और सम्मानजनक बनता है।
  • मियांपुर का नाम बदलकर रविंद्र नगर किए जाने की घोषणा से प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बढ़ी

    मियांपुर का नाम बदलकर रविंद्र नगर किए जाने की घोषणा से प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बढ़ी


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आयोजित एक बड़े प्रशासनिक और विकास कार्यक्रम के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए विकास परियोजनाओं और जनकल्याण योजनाओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। इस अवसर पर जिले में चल रही विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    कार्यक्रम के दौरान सबसे प्रमुख पहल थारू जनजाति के सशक्तिकरण से जुड़ी रही, जिसमें हजारों परिवारों को भूमि का मालिकाना अधिकार प्रदान किया गया। इस कदम से उन परिवारों को कानूनी सुरक्षा और स्थायी आवास का अधिकार मिला है, जो लंबे समय से भूमि संबंधी अनिश्चितता का सामना कर रहे थे। इस प्रक्रिया के तहत हजारों हेक्टेयर भूमि का आवंटन किया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा मिलने की बात कही जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का लक्ष्य हर नागरिक तक उसका अधिकार पहुंचाना और समाज के हर वर्ग को समान अवसर देना है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास की प्रक्रिया में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा रहा है और सभी योजनाएं पारदर्शिता के साथ लागू की जा रही हैं।

    इसी कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए घोषणा की गई कि मियांपुर गांव का नाम बदलकर अब रविंद्र नगर रखा जाएगा। यह निर्णय क्षेत्रीय पहचान और सामाजिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर एक नई पहचान स्थापित करना बताया गया है।

    सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि राज्य में विकास कार्यों को गति देने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू की जा रही हैं और हर जिले को समान रूप से आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इस मौके पर लाभार्थियों को भूमि अधिकार पत्र सौंपे जाने के बाद ग्रामीणों में उत्साह का माहौल देखा गया।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि सरकार का फोकस अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचाने पर है। उन्होंने बताया कि अब योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंच रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों में सुधार हुआ है।

    इस घोषणा के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि नाम परिवर्तन और भूमि अधिकार जैसे फैसले सामाजिक और स्थानीय पहचान पर सीधा प्रभाव डालते हैं।

  • बंगाल चुनाव में भाजपा का बड़ा दांव, महिलाओं को ₹3000 मासिक सहायता और 33 प्रतिशत आरक्षण का वादा

    बंगाल चुनाव में भाजपा का बड़ा दांव, महिलाओं को ₹3000 मासिक सहायता और 33 प्रतिशत आरक्षण का वादा

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है, जहां भारतीय जनता पार्टी ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है। इस घोषणापत्र को ‘संकल्प पत्र’ नाम दिया गया है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कोलकाता में जारी किया। पार्टी ने इसे राज्य के विकास और बदलाव का रोडमैप बताते हुए कई बड़े वादों की घोषणा की है।

    इस घोषणापत्र में सबसे अधिक फोकस महिलाओं, युवाओं और सरकारी कर्मचारियों पर किया गया है। महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता योजना के तहत हर पात्र महिला को प्रतिमाह तीन हजार रुपये सीधे बैंक खाते में देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही महिलाओं को सरकारी नौकरियों में तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने का भी वादा किया गया है, जिससे उनकी भागीदारी को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

    युवाओं के लिए भी घोषणापत्र में बड़े वादे किए गए हैं। बेरोजगार युवाओं को प्रतिमाह तीन हजार रुपये का भत्ता देने की बात कही गई है, साथ ही आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने का दावा किया गया है। इसके जरिए राज्य में रोजगार संकट को कम करने की रणनीति प्रस्तुत की गई है।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। लड़कियों के लिए केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा की बात कही गई है, जिससे शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाया जा सके। पार्टी का कहना है कि इस कदम से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।

    सरकारी कर्मचारियों के लिए भी बड़ा वादा किया गया है, जिसके तहत सरकार बनने के बाद पैंतालीस दिनों के भीतर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और बकाया महंगाई भत्ते का भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इस घोषणा को कर्मचारियों को साधने की एक बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    इसके अलावा राज्य में समान नागरिक संहिता को लेकर भी बड़ा ऐलान किया गया है। पार्टी ने कहा है कि यदि उन्हें सत्ता मिलती है तो छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इस घोषणा ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

    घोषणापत्र में सीमा सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे को भी प्रमुखता दी गई है। पार्टी ने दावा किया है कि राज्य की सीमाओं को अधिक मजबूत बनाया जाएगा और अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाने का वादा किया गया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणापत्र चुनावी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें विभिन्न वर्गों को सीधे आर्थिक और सामाजिक लाभ का आश्वासन देकर समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई है। वहीं सत्तारूढ़ दल की ओर से इन वादों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है

  • सोनिया गांधी के स्वास्थ्य को लेकर पीएम मोदी ने लिया हालचाल, राहुल गांधी ने दी जानकारी..

    सोनिया गांधी के स्वास्थ्य को लेकर पीएम मोदी ने लिया हालचाल, राहुल गांधी ने दी जानकारी..


    नई दिल्ली। संसद भवन परिसर में उस समय एक सौहार्दपूर्ण और ध्यान खींचने वाला दृश्य सामने आया जब प्रधानमंत्री Narendra Modi और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi एक कार्यक्रम के दौरान आमने सामने आए और उनके बीच लंबी बातचीत हुई। यह मुलाकात महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती से जुड़े कार्यक्रम के दौरान हुई, जिसमें देश के कई प्रमुख नेता मौजूद थे।

    इस मौके पर संसद परिसर का माहौल सामान्य राजनीतिक तनाव से अलग और अधिक सहज दिखाई दिया। दोनों नेताओं को एक साथ बातचीत करते देखा गया, जहां वे कुछ समय तक गंभीर लेकिन शिष्टाचारपूर्ण संवाद में व्यस्त रहे। आमतौर पर तीखी राजनीतिक बहसों के लिए पहचाने जाने वाले इन दोनों नेताओं के बीच इस तरह की सहज बातचीत ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

    सूत्रों के अनुसार बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी से उनकी मां और वरिष्ठ नेता Sonia Gandhi के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। हाल ही में उनके स्वास्थ्य को लेकर कुछ चिंताएं सामने आई थीं, जिसके चलते यह मानवीय संवाद और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राहुल गांधी ने इस दौरान बताया कि उनकी मां की तबीयत में अब सुधार हो रहा है। इस जानकारी पर प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दीं। बातचीत का यह हिस्सा पूरी तरह मानवीय और औपचारिकता से परे सहज भावनाओं से जुड़ा हुआ था।

    संसद परिसर में इस तरह की मुलाकातें भले ही सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हों, लेकिन जब देश के दो शीर्ष राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी इस तरह शांति और सहजता के साथ बातचीत करते नजर आते हैं तो यह दृश्य अपने आप में चर्चा का विषय बन जाता है। इस मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में एक सकारात्मक संदेश भी दिया है।

    बातचीत के दौरान दोनों नेताओं की बॉडी लैंग्वेज भी काफी सहज और सामान्य दिखाई दी। न किसी प्रकार की औपचारिक दूरी दिखी और न ही किसी तरह की राजनीतिक टकराव की झलक, बल्कि एक सामान्य शिष्टाचार और मानवीय संवाद का वातावरण नजर आया।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतंत्र में ऐसे क्षण यह दर्शाते हैं कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद संवाद और सम्मान की परंपरा बनी रहती है। संसद जैसे सर्वोच्च मंच पर इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक परिपक्वता का संकेत मानी जाती हैं।

    हालांकि यह मुलाकात संक्षिप्त थी, लेकिन इसने राजनीतिक माहौल में चर्चा जरूर पैदा कर दी है। यह दृश्य इस बात की याद दिलाता है कि सार्वजनिक जीवन में संवाद के रास्ते हमेशा खुले रहते हैं, चाहे राजनीतिक मतभेद कितने भी गहरे क्यों न हों।

  • पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रधानमंत्री की ताबड़तोड़ रैलियों से सियासी माहौल हुआ गर्म और प्रचार अभियान ने पकड़ी रफ्तार

    पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रधानमंत्री की ताबड़तोड़ रैलियों से सियासी माहौल हुआ गर्म और प्रचार अभियान ने पकड़ी रफ्तार


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi राज्य में चुनाव प्रचार को नई गति देने के लिए एक ही दिन में तीन महत्वपूर्ण जनसभाओं को संबोधित कर रहे हैं। इन रैलियों के जरिए भारतीय जनता पार्टी अपने अभियान को मजबूती देने और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

    प्रधानमंत्री की रैलियां पूर्वी बर्धमान, मुर्शिदाबाद और दक्षिण दिनाजपुर जैसे क्षेत्रों में आयोजित की जा रही हैं, जिन्हें राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। इन इलाकों में अलग अलग सामाजिक और जनसंख्या समीकरण हैं, जिन पर सभी राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है। भाजपा इन क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में जुटी है, ताकि सत्तारूढ़ Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली सरकार को कड़ी चुनौती दी जा सके।

    चुनावी कार्यक्रम घोषित होने के बाद से प्रधानमंत्री का यह तीसरा दौरा है, जो इस बात का संकेत है कि पार्टी इस चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है। इससे पहले भी वे राज्य के विभिन्न हिस्सों में जनसभाओं के माध्यम से अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर चुके हैं। लगातार हो रहे ये दौरे चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माने जा रहे हैं।

    अपने पिछले संबोधनों में प्रधानमंत्री ने कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने जनता के सामने एक वैकल्पिक शासन दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए विकास और सुरक्षा से जुड़े वादों पर जोर दिया। इन मुद्दों के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।

    राज्य में इस बार चुनावी मुकाबला बेहद रोचक और कड़ा माना जा रहा है। एक ओर सत्ताधारी दल अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए प्रयासरत है, तो दूसरी ओर विपक्ष पूरी ताकत के साथ सत्ता परिवर्तन की कोशिश में लगा हुआ है। दोनों पक्षों के बीच लगातार बढ़ती बयानबाजी और रैलियों ने चुनावी माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राज्य में मतदान दो चरणों में कराया जाएगा और इसके बाद मतगणना होगी। इस बीच सभी राजनीतिक दल जनसभाओं, रैलियों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचने में जुटे हुए हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनाव में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों का मिश्रण देखने को मिल रहा है, जो परिणामों को प्रभावित कर सकता है। प्रधानमंत्री की सक्रियता और लगातार हो रही रैलियां इस चुनाव को और अधिक महत्वपूर्ण बना रही हैं।
  • आकर्षक वेतन और प्रतिष्ठित पद के लिए आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक, समय रहते करें आवेदन

    आकर्षक वेतन और प्रतिष्ठित पद के लिए आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक, समय रहते करें आवेदन


    नई दिल्ली।
    मानवविज्ञानी पदों पर भर्ती का बड़ा अवसर, सीमित सीटों के लिए जल्द करें आवेदन संघ लोक सेवा आयोग ने संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण में मानवविज्ञानी पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है, जिससे योग्य और इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल दो पदों को भरा जाएगा, जिनमें एक पद सांस्कृतिक मानवविज्ञान विभाग के लिए और दूसरा भौतिक मानवविज्ञान विभाग के लिए निर्धारित किया गया है। सीमित पदों की वजह से इस भर्ती को लेकर उम्मीदवारों के बीच उत्साह के साथ प्रतिस्पर्धा भी तेज हो गई है।
    आवेदन प्रक्रिया निर्धारित तिथि से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवारों को अंतिम तिथि से पहले अपना आवेदन जमा करना अनिवार्य है। यह अवसर विशेष रूप से उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है जो मानवशास्त्र के क्षेत्र में गहरी रुचि रखते हैं और शोध आधारित कार्यों में अपना करियर बनाना चाहते हैं। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जा रहे हैं और उम्मीदवारों को समय सीमा का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

    शैक्षणिक योग्यता के अनुसार उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से मानवशास्त्र विषय में स्नातकोत्तर डिग्री होना आवश्यक है। इसके साथ ही उम्मीदवार की पढ़ाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सांस्कृतिक मानवविज्ञान से संबंधित होना चाहिए। इसके अलावा कम से कम तीन वर्षों का शोध अनुभव भी अनिवार्य रखा गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह पद अनुभवी और विषय विशेषज्ञ उम्मीदवारों के लिए है। यह भर्ती उन अभ्यर्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकती है जो शैक्षणिक अनुसंधान और विश्लेषणात्मक कार्यों में आगे बढ़ना चाहते हैं।

    आयु सीमा के तहत सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु 35 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार आयु में छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए आयोग द्वारा शॉर्टलिस्टिंग, व्यक्तिगत साक्षात्कार और दस्तावेज सत्यापन जैसे चरण निर्धारित किए गए हैं। इन सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले उम्मीदवारों को नियुक्ति प्रदान की जाएगी।

    चयनित अभ्यर्थियों को आकर्षक वेतनमान दिया जाएगा, जो सरकारी सेवा में स्थिरता और सम्मानजनक करियर का अवसर प्रदान करता है। इस पद के लिए वेतनमान निर्धारित स्तर के अनुसार होगा, जिससे उम्मीदवारों को आर्थिक रूप से भी बेहतर अवसर मिलेगा। आवेदन शुल्क भी वर्ग के अनुसार निर्धारित किया गया है, जिसमें सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए मामूली शुल्क रखा गया है, जबकि महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग अभ्यर्थियों को शुल्क में छूट प्रदान की गई है।

    आवेदन प्रक्रिया को सरल रखा गया है ताकि अधिक से अधिक उम्मीदवार इसमें भाग ले सकें। उम्मीदवारों को पहले पंजीकरण करना होगा, इसके बाद आवश्यक जानकारी भरकर संबंधित दस्तावेज अपलोड करने होंगे और अंत में शुल्क का भुगतान कर आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। आवेदन पत्र का प्रिंट सुरक्षित रखना भविष्य के लिए आवश्यक बताया गया है, जिससे आगे की प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    यह भर्ती प्रक्रिया न केवल योग्य उम्मीदवारों को एक प्रतिष्ठित पद प्रदान करने का अवसर देती है, बल्कि मानवविज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय में शोध और अध्ययन को भी नई दिशा देने का काम करेगी। सीमित पदों के कारण उम्मीदवारों को पूरी तैयारी और सावधानी के साथ आवेदन करना होगा।