Category: National
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TVK के प्रस्ताव पर कांग्रेस बोली- राहुल गांधी ही हमारा ‘बूस्ट’
चैन्नई। दक्षिण के चुनावी राज्य तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दरअसल, अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) की ओर से कांग्रेस को गठबंधन का प्रस्ताव मिला है। यह पेशकश विजय के पिता और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक एस.ए. चंद्रशेखर ने की है। तिरुवारूर जिले में एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि कांग्रेस तमिलनाडु में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाश रही है और विजय उसे फिर से ‘पुरानी शान’ दिलाने को तैयार हैं।उन्होंने कहा, “कांग्रेस का एक इतिहास और विरासत रही है। अब वह ढलान पर है लेकिन विजय कांग्रेस को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। यह मौका कांग्रेस को गंवाना नहीं चाहिए।” हालांकि, अभी तक न तो विजय और न ही उनकी पार्टी TVK ने इस प्रस्ताव की आधिकारिक पुष्टि या खंडन किया है।
कांग्रेस बोली- राहुल गांधी ही हमारा ‘बूस्ट’
विजय के पिता के इस बयान पर कांग्रेस की ओर से भी तुरंत प्रतिक्रिया आई।तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई ने इस ऑफर को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तंज़ कसते हुए कहा, “हमारे कार्यकर्ताओं को किसी बाहरी बूस्ट की जरूरत नहीं है। हमारे नेता राहुल गांधी ही हमें ‘बूस्ट, हॉर्लिक्स और बॉर्नविटा’ दे रहे हैं।” बावजूद इसके चंद्रशेखर के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा और तेज कर दी है।
DMK से बढ़ती दूरी?
कांग्रेस का यह बयान सख़्त जरूर है, लेकिन सियासी अटकलें थमी नहीं हैं। कांग्रेस फिलहाल सत्तारूढ़ DMK की सहयोगी है और 2019, 2021 और 2024 के चुनावों में दोनों ने साथ मिलकर जीत हासिल की थी। लेकिन अब कांग्रेस DMK से सत्ता में हिस्सेदारी चाहती है। सूत्रों के हवाले से NDTV की रिपोर्ट में कहा गया है कि कांग्रेस कम से कम छह मंत्री पद मांग रही है, जिस पर DMK अभी तक सहमत नहीं हुई है।
सीट बंटवारे पर भी फंसा पेच
इसके अलावा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे पर भी दोनों दलों में सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस चाहती है कि उसे कम से कम 35 सीटें मिलें लेकिन DMK 19 से ज़्यादा सीटें देने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि कांग्रेस के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने राज्य में DMK गठबंधन के साथ 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि 2021 के विधानसभा चुनावों में 25 में से 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी।TVK का ऑफर क्यों लुभावना?
सूत्रों के अनुसार, TVK ने कांग्रेस को 60 से अधिक सीटें और सरकार बनने की स्थिति में मंत्री पदों का भी संकेत दिया है। यही कारण है कि भले ही सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस इनकार कर रही हो, लेकिन अंदरखाने इस प्रस्ताव पर मंथन जारी है। विश्लेषकों का कहना है कि तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बनते-बिगड़ते देर नहीं लगती। ऐसे में कांग्रेस और विजय की पार्टी के बीच संभावित गठबंधन को पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता। आने वाले दिनों में यह साफ़ होगा कि कांग्रेस DMK के साथ बनी रहती है या किसी नए सियासी रास्ते की ओर बढ़ती है। -

UPI यूजर्स को Payment फेल होने पर मुआवजा के रूप में मिलेगा अतिरिक्त पैसा, जानें क्या है RBI के नियम
नई दिल्ली। आजकल ज्यादातर लोग UPI से पेमेंट करते हैं। दूध, सब्जी, किराया या ऑनलाइन शॉपिंग (Online Shopping) हर जगह लोग गूगल पे (Google Pay), फोन पे (PhonePe) और पेटीएम (Paytm) का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन क्या हो अगर पैसा अकाउंट से कट जाए और सामने वाले तक न पहुंचे, तो सबसे पहले यही डर लगता है कि कहीं पैसा डूब तो नहीं गया। ऐसे मामलों में आरबीआई (RBI) ने साफ नियम बना रखे हैं, जिनके तहत पैसा वापस मिलने के साथ-साथ मुआवजा भी मिल सकता है।
पैसा कट गया लेकिन पेमेंट फेल हो गया, तो क्या होता है?
अगर UPI ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है और पैसा कट जाता है, तो बैंक या UPI ऐप की जिम्मेदारी होती है कि तय समय के अंदर इस समस्या को सुलझाए। आमतौर पर 1 दिन के अंदर पैसा अपने आप वापस आ जाना चाहिए। कई बार यह प्रोसेस तुरंत हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में देरी भी होती है। यही देरी आगे चलकर आपको Compensation लेने में मदद करती है।
किन मामलों में मिलता है Compensation?
RBI और NPCI के नियमों के अनुसार, अगर बैंक या UPI सर्विस प्रोवाइडर तय समय में फेल ट्रांजैक्शन को ठीक नहीं करता, तो यूजर मुआवजे का हकदार होता है। यह मुआवजा रिफंड से अलग होता है, यानी पहले आपका कटा हुआ पैसा वापस आएगा और फिर उसके बाद अतिरिक्त रकम दी जा सकती है। लेकिन ध्यान दें कि यह नियम तभी लागू होता है जब गलती बैंक, सर्वर या ऐप की तरफ से हो।
कितना Compensation मिल सकता है?
Compensation की रकम ट्रांजैक्शन की देरी पर निर्भर करती है। RBI के नियमों के मुताबिक, अगर तय समय सीमा के बाद भी समस्या हल नहीं होती, तो प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाता है, जो सीधे यूजर को दिया जाता है। हालांकि इसकी रकम बहुत ज्यादा नहीं होती, लेकिन यह यूजर के अधिकार के तौर पर दी जाती है ताकि कंपनियां लापरवाही न करें।
UPI पेमेंट फेल होने पर शिकायत कैसे करें?
अगर आपका पैसा कट गया है और वापस नहीं आया, तो सबसे पहले उसी UPI ऐप में शिकायत दर्ज करें जिससे आपने पेमेंट किया था। ट्रांजैक्शन हिस्ट्री में जाकर फेल पेमेंट चुनें और “Help” या “Report a Problem” ऑप्शन पर क्लिक करें। यहां आपको UTR नंबर या ट्रांजैक्शन ID डालनी होती है, जिससे आपकी शिकायत जल्दी ट्रैक हो सके।
हर फेल ट्रांजैक्शन पर नहीं मिलता मुआवजा
यह समझना जरूरी है कि हर फेल UPI ट्रांजैक्शन पर मुआवजा नहीं मिलता। अगर गलती आपकी तरफ से हुई है, जैसे गलत UPI ID डालना, नेटवर्क खुद बंद हो जाना या ट्रांजैक्शन तुरंत रिवर्स हो जाना, तो ऐसे मामलों में मुआवजा का नियम लागू नहीं होता।
समस्या न सुलझे तो कहां करें शिकायत?
अगर ऐप और बैंक दोनों से बात करने के बाद भी आपकी समस्या हल नहीं होती, तो आप NPCI या RBI के ऑफिशियल शिकायत पोर्टल पर कंप्लेंट दर्ज करें। दर्ज की गई शिकायतों पर गंभीरता से जांच होती है और सही पाए जाने पर यूजर को उसका पैसा और मुआवजा मिल सकता है।
UPI इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान
UPI पेमेंट करते समय हमेशा सही UPI ID चेक करें, मजबूत इंटरनेट कनेक्शन रखें और पेमेंट पूरा होने तक ऐप बंद न करें। साथ ही, हर ट्रांजैक्शन का स्क्रीनशॉट संभालकर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर शिकायत दर्ज करते समय आपके पास सबूत मौजूद हो। -

“बहुत बड़ी और बहुत अच्छी खबर, लेकिन…” भारत-EU FTA पर शशि थरूर ने जताई अहम चिंता
नई दिल्ली शशि थरूर ने भारत-ईयू में हुए एफटीएम पर कहा कि इसके लागू होने में शायद एक और साल लगेगा। इसलिए, किसी भी शॉर्ट-टर्म फायदे की उम्मीद न करें, लेकिन लंबे समय में यह बहुत अच्छा होना चाहिए।भारत-यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच हुए व्यापार समझौते (FTA) पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी खबर है, बहुत अच्छी खबर है, लेकिन इसमें एक साल लगेगा क्योंकि यूरोपियन यूनियन में 27 सदस्य देश हैं जिन्हें इस समझौते को लागू होने से पहले मंजूरी देनी होगी।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसे में इसके लागू होने में शायद एक और साल लगेगा। इसलिए, किसी भी शॉर्ट-टर्म फायदे की उम्मीद न करें, लेकिन लंबे समय में यह बहुत अच्छा होना चाहिए, और मुझे उम्मीद है कि मैन्युफैक्चरर्स, एक्सपोर्टर्स वगैरह आने वाले बड़े अवसरों के लिए खुद को तैयार करेंगे।
भारत और यूरोप के 27 देशों के साझा बाजार यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में सहमति हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए इस समझौते को ऐतिहासिक करार दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “कल ही भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक बहुत बड़ा समझौता हुआ है। दुनिया के लोग इसकी चर्चा मदर ऑफ ऑल डील्स (अबतक के सबसे बड़े व्यापार समझौते) के रूप में कर रहे हैं।”
उल्लेखनीय है कि ईयू भारत का एक प्रमुख व्यापारिक और आर्थिक भागीदार है। साल 2024-2025 में दोनों के बीच 136 अरब डॉलर के सामान का व्यापार हुआ था। भारत वहां से मुख्य रूप से मशीनें, परिवहन उपकरण और रसायनों का आयात करता है, जबकि भारत की ओर से वहां मशीनें, रसायन, लोहा, एल्मुनियम और तांबा जैसी प्राथमिक धातुएं, खनिज उत्पाद तथा कपड़ा और चमड़े के सामान आदि का निर्यात होता है।
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कीमतें आसमान पर… आम आदमी की पहुंच से दूर हुआ सोना, मांग में भारी गिरावट
नई दिल्ली। कीमतों के रिकॉर्ड स्तर (Record levels Prices) पर पहुंचने और उपभोक्ताओं के खरीद व्यवहार में बदलाव के कारण वर्ष 2025 में भारत (India) की सोने की मांग (Gold Demand) में 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की गुरुवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सोने की कुल मांग 2025 में गिरकर 710.9 टन रह गई, जो 2024 में 802.8 टन थी। परिषद का अनुमान है कि 2026 में देश में सोने की मांग 600 से 700 टन के बीच रह सकती है। हालांकि, कीमतों में भारी उछाल के कारण मूल्य के संदर्भ में सोने की मांग 30 प्रतिशत बढ़कर 7,51,490 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष यह 5,75,930 करोड़ रुपये थी।डब्ल्यूजीसी ने बताया, ‘वर्ष, 2025 की चौथी तिमाही में सोने की मांग पर ऊंची कीमतों और उपभोक्ताओं के बदलते व्यवहार का असर स्पष्ट दिखा। मात्रा के आधार पर इस तिमाही में मांग नौ प्रतिशत गिरकर 241.3 टन रही, लेकिन मूल्य के आधार पर यह 49 प्रतिशत बढ़कर करीब 3,03,470 करोड़ रुपये हो गई।
वर्ष 2025 के दौरान आभूषणों की कुल मांग 24 प्रतिशत घटकर 430.5 टन रही, जो 2024 में 563.4 टन थी। हालांकि, मूल्य के लिहाज से यह 12 प्रतिशत बढ़कर 4,54,390 करोड़ रुपये रही, जो इससे पिछले साल 4,04,510 करोड़ रुपये रही थी। शादियों के सीजन के बावजूद ऊंची कीमतों और महंगाई के कारण आभूषणों की बिक्री में 23 प्रतिशत की कमी आई। 2025 में सोने ने 60 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया और 53 बार सर्वकालिक उच्च स्तर को छुआ। इसके विपरीत, निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी है। चौथी तिमाही में निवेश मांग 26 प्रतिशत बढ़कर 96 टन रही, जबकि इसका मूल्य 108 प्रतिशत उछलकर 1,20,700 करोड़ रुपये हो गया।
सोने की वैश्विक मांग 5,000 टन से अधिक हुई
वैश्विक स्तर पर सोने की मांग 2025 में 5,000 टन से अधिक होकर एक नए सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल सोने की मांग 2025 में 5,002 टन के नए ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई, जो पिछले वर्ष 4,961.9 टन थी। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से निवेश मांग में तेज उछाल के कारण हुई, जो 2025 में बढ़कर 2,175.3 टन हो गई जबकि यह 2024 में 1,185.4 टन थी। चालू वित्त वर्ष की अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में उपभोक्ता मांग दो प्रतिशत बढ़कर 1,345.3 टन हो गई जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 1,318.5 टन थी। -

दिल्ली में आज जुटेंगे सभी अरब देश…. वैश्विक तनाव के बीच भारत में लगेगा मुस्लिम देशों का जमावड़ा
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी तनाव के बीच भारत (India) में इस सप्ताह के अंत में मुस्लिम देशों (Muslim Countries) का जमावड़ा लगने जा रहा है। भारत आगामी शनिवार को राजधानी दिल्ली में भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक की मेजबानी करेगा जिसमें अरब लीग के सभी 22 अरब देशों (All 22 Arab countries) के प्रतिनिधि भाग लेंगे। बता दें कि यह बैठक दस साल बाद हो रही है। वहीं यह बात भी अहम है कि यह पहली बार होगा जब भारत इस बैठक की मेजबानी करने जा रहा है।जानकारी के मुताबिक अरब देशों के विदेश मंत्री, राज्य मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और अरब लीग सचिवालय इस बैठक में अपने देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया है कि इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात मिलकर करेंगे। इसमें अरब लीग के सदस्य देशों के विदेश मंत्री और अरब लीग के महासचिव भी भाग लेंगे। वहीं बैठक से पहले शुक्रवार को भारत और अरब वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत भी होगी।
एजेंडे में क्या?
दोनों पक्षों की दूसरी बैठक दस सालों के अंतराल के बाद हो रही है। इससे पहले दोनों पक्षों के बीच पहली बैठक 2016 में बहरीन में हुई थी। पहली बैठक के दौरान मंत्रियों ने सहयोग के पांच प्राथमिक क्षेत्रों-अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति-की पहचान की थी और इन क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों का प्रस्ताव रखा था। वहीं शनिवार को होने वाली बैठक से मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने और भारत-अरब साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ और व्यापक बनाने की अपेक्षा होगी।
अरब लीग में पर्यवेक्षक की भूमिका में भारत
गैरतलब है कि भारत 22 सदस्य देशों वाले पैन-अरब संगठन अरब लीग में पर्यवेक्षक की भूमिका में है। वहीं भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक भारत और अरब देशों के बीच साझेदारी को आगे बढ़ाने वाली सर्वोच्च संस्थागत व्यवस्था है। इस साझेदारी को मार्च 2002 में औपचारिक रूप दिया गया था जब भारत और अरब लीग के बीच संवाद प्रक्रिया को संस्थागत स्वरूप देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।इसके बाद दिसंबर 2008 में तत्कालीन अरब लीग महासचिव अमर मूसा की भारत यात्रा के दौरान अरब-भारत सहयोग मंच की स्थापना के लिए एक सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। 2013 में इसकी संरचनात्मक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से इसमें संशोधन भी किया गया।
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रेलवे ने तत्काल बुकिंग के नियमों में किया बदलाव… कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ी
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने तत्काल टिकट बुकिंग की प्रक्रिया (Tatkal Ticket Booking Process) को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए अपनी तकनीक और नियमों को पूरी तरह अपडेट कर दिया है। पिछले कई वर्षों से यात्रियों की शिकायत थी कि बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही सेकंड में टिकट खत्म हो जाते हैं। रेलवे का दावा है कि नए सिस्टम (New Systems) से अब वास्तविक यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।नए नियमों के तहत अब केवल पूरी तरह सत्यापित IRCTC अकाउंट से ही तत्काल टिकट बुक किए जा सकेंगे। अब यात्रियों को अपना IRCTC अकाउंट आधार कार्ड से लिंक करना होगा। बिना वेरिफिकेशन वाले या अधूरे प्रोफाइल वाले अकाउंट्स को तत्काल विंडो के दौरान ब्लॉक कर दिया जाएगा। बुकिंग के समय यात्री को वही पहचान विवरण देना होगा जो उसके आधार या सरकारी आईडी से जुड़ा है। इससे फर्जी नामों से टिकट बुक करने और उन्हें ऊंचे दामों पर बेचने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
रेलवे ने इस बार तकनीक के मोर्चे पर भी बड़े बदलाव किए हैं। बुकिंग के शुरुआती मिनटों में ऑटो-फिल टूल्स और स्क्रिप्ट्स को रोकने के लिए ‘सोफिस्टिकेटेड टेक्निकल फिल्टर्स’ लगाए गए हैं। इससे अब सॉफ्टवेयर के जरिए पलक झपकते ही टिकट उड़ा लेना मुमकिन नहीं होगा। यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत पेमेंट फेल होने की रहती थी। नए सिस्टम में पेमेंट गेटवे को और अधिक फास्ट और सुरक्षित बनाया गया है, जिससे आखिरी स्टेप पर टिकट कैंसिल होने का डर कम होगा।
तत्काल विंडो खुलते ही शुरुआती समय में एजेंटों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। उनके लिए नए प्रतिबंध और ट्रैकिंग टूल्स लागू किए गए हैं ताकि आम जनता को प्राथमिकता मिल सके।
यात्रियों के लिए क्या बदला?
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यदि आपका प्रोफाइल पहले से अपडेटेड और आधार से लिंक है, तो आपको कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना पिछले वर्षों के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे बुकिंग समय से पहले अपना इंटरनेट कनेक्शन और प्रोफाइल की स्थिति जांच लें।2026 के ये नए नियम रेलवे बुकिंग में पारदर्शिता बहाल करने और सिस्टम पर लोगों का भरोसा फिर से जगाने की एक कोशिश है। तकनीकी सुधार और अनिवार्य पहचान सत्यापन के माध्यम से रेलवे ने दलालों और सॉफ्टवेयर के अवैध इस्तेमाल पर सीधा हमला किया है।
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Survey : 45 फीसदी भारतीयों ने मोदी सरकार से की अमेरिका पर टैरिफ लगाने की अपील
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका (India and America) में जल्द ही बड़ी ट्रेड डील (Big Trade Deal) होने के आसार हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (Indian Foreign Minister S. Jaishankar) की आगामी अमेरिका यात्रा के दौरान डील पर बड़ा फैसला आ सकता है। इसी बीच एक सर्वे से पता चला है कि भारतीय चाहते हैं कि भारत सरकार टैरिफ का जवाब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को टैरिफ से ही दे।एक सर्वे के अनुसार, उत्तर देने वाले करीब 45 फीसदी लोगों ने मोदी सरकार से जवाबी टैरिफ लगाने की अपील की है। सर्वे से पता चला है कि सिर्फ 6 प्रतिशत ही मानते हैं कि भारत सरकार को ट्रंप की मांगों को स्वीकार कर लेना चाहिए। जबकि, 34 फीसद उत्तरदाता जीएसटी में कमी और ऐसे ही उपाय करने के पक्ष में हैं।भारत और ईयू में हुई बड़ी डीलभारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को एफटीए पर वार्ता के समापन की घोषणा की थी। इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया जा रहा है। इस समझौते के तहत भारत के 93 प्रतिशत निर्यात को 27 देशों वाले यूरोपीय संघ में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि यूरोपीय संघ से लग्जरी कारों और वाइन का आयात सस्ता हो जाएगा।करीब दो दशक तक चली बातचीत के बाद हुए इस समझौते से भारत और यूरोपीय संघ के बीच लगभग दो अरब लोगों का साझा बाजार बनेगा। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, और यूरोपीय संघ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक इकाई है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि यूरोपीय संघ (EU) के साथ किया गया मुक्त व्यापार समझौता (FTA) महत्वाकांक्षी भारत के लिए है और इससे देश के विनिर्माताओं के लिए नए बाजार खुलेंगे। उन्होंने उद्योग जगत से इस अवसर का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया। -

मौसम के बदलते मिजाज के बीच नए पश्चिमी विक्षोभ की दस्तक…MP समेत इन राज्यों में 3 दिन बारिश का अलर्ट
नई दिल्ली। भारत मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India.) में एक नए पश्चिमी विक्षोभ (New western disturbance) के प्रभाव की चेतावनी जारी की है, जो 30 जनवरी की रात से प्रभावी हो सकता है। इसके अलावा, 2 फरवरी से एक और ताजा पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने की संभावना है। इसके कारण 31 जनवरी से 3 फरवरी तक पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र (Western Himalayan Region) में छिटपुट से भारी बारिश/बर्फबारी हो सकती है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में 31 जनवरी और 1 फरवरी को ऐसा ही मौसम रहेगा। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में 1-2 फरवरी को गरज-चमक, बिजली के साथ बारिश/बर्फबारी हो सकती है। राजस्थान में 31 जनवरी से 3 फरवरी तक छिटपुट हल्की बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना है। मध्य प्रदेश में 1-2 फरवरी, छत्तीसगढ़ में 2 फरवरी को हल्की बारिश संभव है। उत्तराखंड में 30 जनवरी को पाला पड़ने की स्थिति बनी रह सकती है।न्यूनतम तापमान में बदलाव की भविष्यवाणी के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में अगले दो दिनों तक कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होगा। इसके बाद अगले तीन दिनों में 3-5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी और फिर दो दिनों में 2-4 डिग्री की गिरावट संभावित है। मध्य भारत में अगले 24 घंटों में 2-3 डिग्री की बढ़ोतरी, फिर दो दिनों में गिरावट और उसके बाद स्थिरता रहेगी। महाराष्ट्र में अगले चार दिनों में 2-4 डिग्री की बढ़ोतरी और गुजरात में अगले दो दिनों में 3-5 डिग्री की बढ़ोतरी, फिर तीन दिनों में गिरावट और बाद में फिर बढ़ोतरी का अनुमान है। देश के अन्य हिस्सों में न्यूनतम तापमान में खास बदलाव नहीं होगा।
घने कोहरे की मार से अभी राहत नहीं
घने कोहरे और शीतलहर की चेतावनी भी जारी है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में 31 जनवरी तक सुबह-रात के समय घना कोहरा रहेगा। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान में 31 जनवरी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 फरवरी तक घना से बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। 30-31 जनवरी को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ में शीतलहर चल सकती है। मछुआरों को 29 जनवरी से 3 फरवरी तक बंगाल की खाड़ी (दक्षिण तमिलनाडु, पश्चिमी श्रीलंका तट, मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र) और अरब सागर (गुजरात तट के पास) में न जाने की सलाह दी गई है। कुल मिलाकर, उत्तर भारत में सर्दी फिर से जोर पकड़ सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है। -

नागालैंड की जुको घाटी में भीषण आग…3 दिन में मणिपुर की सर्वोच्च चोटी माउंट ईसो तक पहुंची
काहिमा। नागालैंड (Nagaland) की ज़ुको घाटी (Dzuko Valley) में पिछले तीन दिनों से लगी भीषण जंगल की आग (Massive forest fire.) अब मणिपुर (Manipur) की सबसे ऊंची चोटी माउंट ईसो (Highest peak Mount Iso) तक फैल गई है, जिससे इस जैव-विविधता संपन्न क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। सॉन्ग-सॉन्ग यूथ एंड स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (SSYSO) के स्वयंसेवक और आसपास के गांवों के निवासी आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाके में आग की तीव्रता प्रयासों पर भारी पड़ रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि युवा स्वयंसेवकों के लगातार प्रयासों के बावजूद आग तेजी से आगे बढ़ रही है।राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की गई है। हालांकि, कई स्थानीय नेताओं ने मणिपुर के राज्यपाल से अपील की है कि आग पर काबू पाने के लिए तत्काल विशेषज्ञ टीमों को तैनात किया जाए। SSYSO के एक सदस्य ने कहा, “स्थिति भयावह है। हमें उचित संसाधनों और उपकरणों के साथ सरकारी हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है। हमारे सीमित साधन आग से निपटने के लिए बहुत पर्याप्त नहीं है।” पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि आग पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह मणिपुर के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुँचा सकती है और पूरे क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ सकती है।
2020 और 2021 में भी लगी थी भीषण आग
यह पहली बार नहीं है जब ज़ुको घाटी और माउंट ईसो क्षेत्र को ऐसी तबाही का सामना करना पड़ा है। दिसंबर 2020 और जनवरी 2021 के बीच भी एक भीषण आग ने इस क्षेत्र की वनस्पतियों के एक बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उस समय तेज हवाओं ने आग बुझाने के प्रयासों में काफी बाधा डाली थी। मणिपुर के सेनापति जिले और नागालैंड के कोहिमा जिले की सीमा पर 2,452 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ज़ुको घाटी अपनी अनूठी जैव-विविधता के लिए जानी जाती है, जिसमें दुर्लभ ‘ज़ुको लिली’ भी शामिल है। यह क्षेत्र पूर्वोत्तर हिमालय में एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक गलियारे के रूप में भी काम करता है।
2024 में मणिपुर में लगभग 17.8 हजार हेक्टेयर वन नष्ट
आधिकारिक स्रोतों के अनुसार, मणिपुर हाल के वर्षों में भारत के सबसे अधिक आग की चपेट में आने वाले राज्यों में से एक बनकर उभरा है। अप्रैल 2025 की शुरुआत में, राज्य में मात्र सात दिनों के भीतर जंगल की आग की 1,424 घटनाएं दर्ज की गईं, जो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद देश में तीसरे स्थान पर थीं। अकेले 2024 में, मणिपुर ने लगभग 17.8 हजार हेक्टेयर प्राकृतिक वन खो दिए, जिससे वातावरण में अनुमानित 91 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन हुआ।
90 प्रतिशत जंगल की आग मानवीय कारणों से
विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग 90 प्रतिशत जंगल की आग मानवीय कारणों से लगती है, जो अक्सर वन क्षेत्रों के किनारे रहने वाले समुदायों द्वारा भूमि साफ करने जैसे उद्देश्यों के लिए लगाई जाती है। पारंपरिक ‘झूम खेती’ ने भी इस समस्या को बढ़ाया है। इस पहाड़ी इलाके के दुर्गम होने और तेज हवाओं के कारण आग बुझाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। स्वयंसेवकों ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमों को हवाई सहायता के साथ तैनात करने की अपील की है। चूंकि प्रभावित क्षेत्र मणिपुर-नागालैंड सीमा पर स्थित है, इसलिए स्थानीय समुदायों ने इस बात पर जोर दिया है कि आग को नियंत्रित करने के लिए दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच समन्वित कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
