Category: National

  • हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष का विवादित ऐलान, चौथे बच्‍चा पैदा करने पर 21 हजार और पांचवे पर देंगे 31 हजार रुपए

    हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष का विवादित ऐलान, चौथे बच्‍चा पैदा करने पर 21 हजार और पांचवे पर देंगे 31 हजार रुपए


    नई दिल्‍ली । हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि हिंदू परिवारों में चौथा बच्चा होने पर उन्हें 21 हजार रुपए और पांचवे बच्चे पर 31 हजार रुपए दिए जाएंगे। पिंकी चौधरी ने इसे हिंदू समाज की जनसंख्या बढ़ाने के प्रयास के रूप में पेश किया और जिहादियों की बढ़ती संख्या का हवाला देते हुए परिवारों से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील की। इस ऐलान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

    चौथे और पांचवे बच्चे पर मिलेगी वित्तीय सहायता
    पिंकी चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा कर हिंदू परिवारों से ज्‍यादा बच्‍चे पैदा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि चौथे बच्चे पर 21,000 रुपए और पांचवे बच्चे पर 31,000 रुपए दिए जाएंगे, साथ ही शिक्षा का भी प्रबंध संगठन करेगा। वीडियो में पिंकी चौधरी ने यह भी कहा कि भारत में कट्टरपंथियों की बढ़ती हुई जनसंख्या और लवजिहाद जैसी घटनाओं से देश पर खतरा बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, हिंदू समाज में जो परिवार केवल एक-दो बच्चे पैदा कर रहे हैं, वह देश के लिए हानिकारक हो सकता है, जबकि मुस्लिम समाज में अधिक बच्चे पैदा किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक रूप से असमर्थ परिवारों को संगठन सहायता प्रदान करेगा।

    पिंकी चौधरी को पहले पुलिस कर चुकी गिरफ्तार

    गाजियाबाद के शालीमार गार्डन इलाके में खुलेआम तलवार और अन्य हथियार बांटने तथा जुलूस निकालकर आपत्तिजनक नारे लगाने के आरोप में हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी उर्फ पिंकी चौधरी और उनके बेटे हर्ष चौधरी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस उपायुक्त ट्रांस हिंडन निमिष पाटिल ने बताया कि सूचना मिलने के बाद 50 वर्षीय पिंकी और 23 वर्षीय हर्ष को 80 फुट रोड से हिरासत में लिया गया था। इससे पहले, 27 दिसंबर की रात को संगठन के 10 अन्य कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा चुका था। पुलिस के अनुसार, आरोपी और उनके साथियों ने कॉलोनी में घर-घर जाकर तलवारें, फरसे और अन्य हथियार बांटे, साथ ही एक जुलूस भी निकाला था, जिसमें मुस्लिम विरोधी भड़काऊ नारे लगाए गए और अपशब्द कहे गए थे।

  • अमित शाह का ममता सरकार पर करारा हमला, आनंदपुर अग्निकांड को बताया भ्रष्टाचार का परिणाम, किया ये बड़ा दावा

    अमित शाह का ममता सरकार पर करारा हमला, आनंदपुर अग्निकांड को बताया भ्रष्टाचार का परिणाम, किया ये बड़ा दावा


    नई दिल्‍ली । पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़े कार्यकर्ता सम्मेलन में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आनंदपुर वेयरहाउस में मोमोज फैक्ट्री में लगी आग को सिर्फ एक हादसा नहीं माना और इसे भ्रष्टाचार और लापरवाही का नतीजा बताया।

    अमित शाह ने अपने भाषण की शुरुआत में इस घटना में मारे गए 25 श्रमिकों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अभी भी 27 लोग लापता हैं और यह घटना सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि ममता सरकार की जिम्मेदारी की कमी और भ्रष्टाचार का प्रतीक है। अमित शाह ने सवाल उठाया कि फैक्ट्री का मालिक कौन था और वह किस राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहा था। उन्होंने यह भी पूछा कि फैक्ट्री के मालिक ने किसके निजी विमान से विदेश यात्रा की और अब तक उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई। केंद्रीय गृह मंत्री ने न्यायिक जांच की मांग करते हुए दोषियों को सख्त सजा देने की भी बात कही।

    वंदे मातरम् पर अमित शाह का ममता सरकार पर हमला

    अमित शाह ने वंदे मातरम् को लेकर ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में शहीदों के अंतिम शब्द भी वंदे मातरम् रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर इसे पूरे देश में मनाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के राष्ट्रीय प्रतीक का विरोध करने को तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति बताया। केंद्रीय मंत्री ने कहा “वंदे मातरम् का विरोध केवल प्रधानमंत्री का विरोध नहीं है, बल्कि यह बंगाल की अस्मिता और देश के स्वाभिमान का अपमान है।”

    अमित शाह का बंगाल चुनाव को लेकर बड़ा दावा

    अमित शाह ने 2026 विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगले साल अप्रैल के बाद भाजपा की सरकार बनने पर आनंदपुर अग्निकांड जैसे सभी मामले में दोषियों को कानून के तहत सजा दी जाएगी। शाह ने दावा किया कि आगामी चुनाव में तृणमूल कांग्रेस सत्ता से बाहर हो जाएगी और भाजपा का वोट शेयर 50 प्रतिशत से अधिक रहने की संभावना है। उनका कहना था कि भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ राज्य में सरकार बनाएगी और जनता के हितों के खिलाफ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मां, माटी, मानुष नारे पर तंज
    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लोकप्रिय नारे मां, माटी, मानुष का जिक्र करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की स्थिति पर तीखा सवाल उठाया। उन्‍होंने कहा कि आज बंगाल में तीनों ही असुरक्षित हैं। अमित शाह ने कहा, आज बंगाल में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, आम लोग तृणमूल कांग्रेस की कथित सिंडिकेट गतिविधियों से परेशान हैं और अवैध घुसपैठ के कारण राज्य की जमीन और पहचान संकट में है। उन्‍होंने कहा कि जनता अब बदलाव चाहती है और आगामी विधानसभा चुनाव में जनता स्पष्ट जवाब देगी।

  • केस को CBI को सौंपने का निर्णय लेकर फिर…', तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर हमला

    केस को CBI को सौंपने का निर्णय लेकर फिर…', तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर हमला


    नई दिल्ली । आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर हमला किया है. एक्स पर पोस्ट करते हुए शनिवार 31 जनवरी, 2026 को तेजस्वी यादव ने कहा कि नीट छात्रा के दुष्कर्म और हत्या का उद्भेदन करने की बजाय बिहार सरकार ने केस को सीबीआई को सौंपने का निर्णय लेकर फिर साबित कर दिया कि बिहार का प्रशासनिक ढांचा भ्रष्ट, अयोग्य अदक्ष और अनप्रोफेशनल है जो एक बलात्कार और हत्या के केस को भी नहीं सुलझा सकता. पुलिस से अधिक यह बड़बोली एनडीए सरकार के करप्ट और कंप्रोमाइज्ड तंत्र की विफलता है जिनके कर्ता-धर्ता मंत्री-मुख्यमंत्री दिन रात आकाश-पाताल से अपराधियों को पकड़ने की डींगे हांकते हैं.

    उन्होंने कहा नवरुणा कांड जैसे अनेक मामलों में सीबीआई 12-13 वर्षों से आरोपियों को नहीं पकड़ पाई तथा जांच भी बंद कर दी. यही इस मामले में होना है. कहां हैं चुनावों में जंगलराज-जंगलराज चिल्लाने वाले बिहार की ध्वस्त और भ्रष्ट विधि व्यवस्था की जवाबदेही कौन लेगा  क्या फिर सरकार द्वारा हेडलाइन मैनेजमेंट के जरिए ध्यान भटकाने की कोशिशें होंगी

    चरित्र हनन तक की कोशिश: मनोज झा
    उधर बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा नीट छात्रा की मौत के मामले में सीबीआई जांच के आग्रह पर आरजेडी सासंद मनोज कुमार झा ने कहा बिहार में आज के दिन स्थिति ठीक नहीं है. इस घटना में भी चरित्र हनन तक की कोशिश की गई. अब आप छलावरण कर रहे हैं.

    सरकार की नीयत साफ: विजय कुमार सिन्हा

    बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा, “सरकार की नीयत साफ है. हमने ईमानदारी से जांच करने का प्रयास किया. पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं था इसलिए मामले की सीबीआई से जांच कराने का फैसला लिया गया. पूरी तरह से न्याय मिले, ये सरकार सुनिश्चित कर रही है. वहीं सांसद पप्पू यादव ने कहा है कि देर से उठाया सही कदम पर इस मामले में तत्काल उच्च न्यायालय की निगरानी में इसकी जांच होनी चाहिए! अपने एक्स पोस्ट में पप्पू यादव लिखते हैं इस मामले में कई बड़े-बड़े को बचाने के लिए घृणित स्तर तक खेल चला है इसमें सबको बेनकाब करना जरूरी है! मनीष के पीछे कौन है DGP साहब?

  • नीट छात्रा हत्याकांड की CBI जांच, नीतीश सरकार ने सिफारिश भेजी, गृह मंत्री सम्राट चौधरी का ट्वीट

    नीट छात्रा हत्याकांड की CBI जांच, नीतीश सरकार ने सिफारिश भेजी, गृह मंत्री सम्राट चौधरी का ट्वीट


    नई दिल्ली । बिहार सरकार ने पटना के चित्रगुप्त नगर में नीट छात्रा से हुई दरिंदगी मामले की जांच सीबीआई से करने का आग्रह किया है। शनिवार को उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारत सरकार से पटना में हुए नीट छात्रा की हत्या के मामले कांड संख्या- 14/26 को सीबीआई से जांच का आग्रह किया है। घटना का पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से उद्भेदन निश्चित किया जाए।

    इस मामले में 17 दिनों की जांच के बाद बिहार पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है। इधर मृत छात्रा के परिजनों ने एसआईटी की जांच पर सवाल उठाया है। कहा है कि पुलिस सही दिशा में जांच नहीं कर रही है। शुक्रवार को पीड़िता की मां की डीजीपी विनय कुमार के साथ मुलाकात हुई थी। डीजीपी आवास से निकलने के बाद वे काफी गुस्से में दिखीं। यहां तक कह दिया कि पुलिस बिक गई है। यहां उनकी बेटी को न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।

    मीडिया कर्मियों से मां, भाई और मामा ने बताया कि डीजीपी ने कहा है कि रेप नहीं हुआ था, छात्रा ने आत्महत्या कर ली थी, यह बात मान जाइए। उन्हें गृह मंत्री सम्राट चौधरी से मिलने के लिए कहा गया। पीड़ित परिवार के वकील ने भी बताया कि पुलिस की जांच से परिवार के लोग संतुष्ट नहीं है। ये बातें तब सामने आईं जब एफएसएल की जांच रिपोर्ट में मृत छात्रा के अंतःवस्त्र से पुरुष स्पर्म के अवशेष पाए गए। एसआईटी बड़े पैमाने पर डीएनए टेस्ट की कार्रवाई कर रही है। परिजनों समेत 30 से अधिक लोगों के ब्लड सैंपल अबतक लिए जा चुके हैं। छात्रा के शव के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप की संभावना से इनकार नहीं किया गया। उसके शरीर पर खरोंच के भी निशान पाए गए।

    शुक्रवार की शाम सम्राट चौधरी ने डीजीपी और मुख्य सचिव को आवास पर तलब किया और जांच से संबधित जानकारी ली। उन्होंने सभी पदाधिकारियों को जांच में पूरी पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया। उसके बाद यह मामला जांच के लिए सीबीआई को सुपुर्द कर देने का निर्णय लिया गया। अब सीबीआई फ्रेश केस दर्ज कर मामले की जांच करेगी। हालांकि, परिजनों ने कभी सीबीआई जांच की लिखित मांग नहीं किया।

  • यूपी पुलिस वरिष्ठ अधिकारियों को खुश करना के लिए कर रही हाफ एनकाउंटर, हाईकोर्ट ने DGP को किया तलब

    यूपी पुलिस वरिष्ठ अधिकारियों को खुश करना के लिए कर रही हाफ एनकाउंटर, हाईकोर्ट ने DGP को किया तलब


    नई दिल्ली । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में कथित हाफ एनकाउंटर की बढ़ती घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने आरोपियों के पैरों में गोली मारकर बाद में उसे मुठभेड़ बताने की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि दंड देने का अधिकार केवल न्यायालयों के पास है, पुलिस के पास नहीं. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस द्वारा न्यायिक अधिकार क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण अस्वीकार्य है, क्योंकि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां शासन कानून के तहत चलता है.

    हाईकोर्ट ने राज्य के डीजीपी और गृह सचिव से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि क्या पुलिस अधिकारियों को आरोपियों के पैरों या शरीर के अन्य हिस्सों में गोली मारने के संबंध में कोई मौखिक या लिखित निर्देश जारी किए गए हैं. अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे मुठभेड़अब एक नियमित घटना बनते जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों को खुश करना या आरोपियों को सबक सिखाना हो सकता है.

    इन घटनाओं में किसी भी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई- हाईकोर्ट

    कोर्ट ने यह भी कहा कि उसके सामने अक्सर ऐसे मामले आते हैं, जिनमें मामूली अपराधों में भी पुलिस अंधाधुंध गोलीबारी कर घटनाओं को मुठभेड़ का रूप दे देती है. यह टिप्पणी अदालत ने मिर्जापुर के राजू उर्फ राजकुमार और दो अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की जो अलग-अलग पुलिस मुठभेड़ों में घायल हुए थे. अदालत ने नोट किया कि इन घटनाओं में किसी भी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई, जिससे बल प्रयोग की आवश्यकता और अनुपातिकता पर सवाल उठते हैं.

    एक मामले में अदालत ने पहले राज्य सरकार से पूछा था कि क्या कथित मुठभेड़ को लेकर एफआईआर दर्ज हुई और क्या घायल का बयान मजिस्ट्रेट या चिकित्सा अधिकारी के सामने दर्ज किया गया. राज्य की ओर से बताया गया कि एफआईआर तो दर्ज हुई, लेकिन घायल का बयान न तो मजिस्ट्रेट और न ही किसी डॉक्टर के समक्ष दर्ज किया गया. साथ ही यह भी जानकारी दी गई कि पहले एक सब-इंस्पेक्टर को जांच सौंपी गई थी, जिसे बाद में एक इंस्पेक्टर को स्थानांतरित कर दिया गया.

    स्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ में हुई सुनवाई

    दलीलों पर गौर करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मुठभेड़ संबंधी दिशानिर्देशों का पालन होता नहीं दिख रहा है. यह सुनवाई जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ में हुई.

  • योगमाया मंदिर में पूजा गुरुद्वारे में मत्था टेक विकास योजनाओं के साथ महरौली दौरे पर सीएम रेखा गुप्ता

    योगमाया मंदिर में पूजा गुरुद्वारे में मत्था टेक विकास योजनाओं के साथ महरौली दौरे पर सीएम रेखा गुप्ता


    नई दिल्ली में शनिवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महरौली विधानसभा क्षेत्र के विकास को नई गति देते हुए 135 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ते हुए सिद्धपीठ माता योगमाया मंदिर में पूजा अर्चना की और गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर जी में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महरौली दौरे के दौरान कहा कि विकसित दिल्ली का सपना तभी साकार होगा जब हर विधानसभा हर कॉलोनी और हर घर तक विकास पहुंचे। उन्होंने कहा कि महरौली अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ अब आधुनिक सुविधाओं की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। विकास योजनाओं के माध्यम से स्वच्छता आधारभूत ढांचे और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि महरौली की ऐतिहासिक भव्यता को सुरक्षित रखते हुए उसे इक्कीसवीं सदी की आधुनिक आवश्यकताओं से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विरासत का संरक्षण और भविष्य का निर्माण दोनों साथ साथ किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियों को सशक्त और सुव्यवस्थित महरौली मिल सके।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व सरकारों ने दिल्ली को केवल विज्ञापनों में चमकाने का काम किया। महरौली की विरासत स्थानीय जरूरतें और नागरिकों की अपेक्षाएं लंबे समय तक उपेक्षित रहीं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की राजनीति सत्ता केंद्रित नहीं बल्कि सेवा सुशासन और विकास पर आधारित है।

    रेखा गुप्ता ने कहा कि जिन परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया है उनका उद्देश्य स्वच्छता सुनिश्चित करना आधारभूत ढांचे को मजबूत करना और नागरिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन योजनाओं का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचेगा।कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने प्राचीन सिद्धपीठ माता योगमाया मंदिर में दर्शन कर पूजा की। उन्होंने कहा कि माता योगमाया शक्ति संरक्षण और धर्म की दिव्य चेतना हैं जिनकी कृपा से यह क्षेत्र सदियों से आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने माता से प्रार्थना की कि हर परिवार के जीवन में सुख स्वास्थ्य और मंगल बना रहे।

    इसके बाद मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर जी पहुंचकर गुरु साहिब को नमन किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की कृपा से समाज में सेवा समर्पण और समानता की भावना निरंतर बढ़ती रहे। उन्होंने इस अवसर पर सप्तम पातशाह गुरु हर राय साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व की सभी को शुभकामनाएं भी दीं।मुख्यमंत्री के इस दौरे को महरौली के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जिससे क्षेत्र में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार हुआ है।

  • महाबली सतपाल सिंह का योगदान: खिलाड़ी के रूप में पदक और कोच के रूप में दुनिया के मुक़ाबलों में भारत का नाम रोशन करने वाले पहलवान तैयार किए

    महाबली सतपाल सिंह का योगदान: खिलाड़ी के रूप में पदक और कोच के रूप में दुनिया के मुक़ाबलों में भारत का नाम रोशन करने वाले पहलवान तैयार किए


    नई दिल्ली। में भारतीय कुश्ती के दिग्गज सतपाल सिंह का नाम आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में उनका योगदान अभूतपूर्व रहा है। सतपाल सिंह ने न केवल एक पहलवान के रूप में अपनी असाधारण क्षमता का प्रदर्शन करते हुए देश का प्रतिनिधित्व किया बल्कि पेशेवर खिलाड़ी के रूप में संन्यास लेने के बाद अपने कोचिंग करियर में सुशील कुमार योगेश्वर दत्त, रवि कुमार दहिया और अमित कुमार दहिया जैसे विश्वस्तरीय पहलवान तैयार किए।

    सतपाल सिंह का जन्म 1 फरवरी 1955 को दिल्ली में हुआ। उन्होंने हनुमान अखाड़ा में कोच गुरु हनुमान के मार्गदर्शन में कुश्ती के दाव पेंच सीखे। 16 साल तक राष्ट्रीय चैंपियन बने रहने वाले सतपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता 19 साल की उम्र में 1974 में क्राइस्टचर्च कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने के साथ मिली। इसके बाद 1978 एलबर्टा और 1982 ब्रिसबेन कॉमनवेल्थ गेम्स में भी रजत पदक जीता। एशियन गेम्स में 1974 तेहरान में कांस्य, 1978 बैंकॉक में रजत और 1982 नई दिल्ली में हैवीवेट स्वर्ण पदक उनके करियर की विशेष उपलब्धियां हैं। 1980 के समर ओलंपिक्स में पुरुष फ्रीस्टाइल 100 किग्रा में उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया।

    सतपाल पारंपरिक कुश्ती में भी माहिर रहे। भारत कुमार, रुस्तम-ए-हिंद, भारत केसरी, महाभारत केसरी, रुस्तम-ए-जमान और हिंद केसरी सहित कई राष्ट्रीय खिताब उन्होंने अपने नाम किए। उन्हें महाबली सतपाल के नाम से भी जाना जाता है।खिलाड़ी जीवन से संन्यास के बाद सतपाल सिंह 1988 से दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में कोचिंग कर रहे हैं। उनके प्रशिक्षण केंद्र को देश में कुश्ती का हब माना जाता है। उन्होंने सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त, रवि कुमार दहिया और अमित कुमार दहिया जैसे पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय मंचों के लिए तैयार किया।भारतीय कुश्ती में योगदान के लिए सतपाल सिंह को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 1974 में अर्जुन पुरस्कार, 1983 में पद्मश्री, 2009 में द्रोणाचार्य सम्मान और 2015 में पद्मभूषण उनकी असाधारण उपलब्धियों की पुष्टि करते हैं।

    70 साल की उम्र में भी सतपाल सिंह सक्रिय हैं और लगातार नए पहलवानों को प्रशिक्षित कर देश का नाम रोशन करने में जुटे हैं। उनके अनुशासन, मेहनत और कुश्ती के प्रति समर्पण ने उन्हें खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में प्रेरक बना दिया है।

  • Budget 2026: इतिहास में एक ऐसा साल, जब बजट से पहले हलवा सेरेमनी परंपरा टूटी थी, जानें क्‍या थी वजह?

    Budget 2026: इतिहास में एक ऐसा साल, जब बजट से पहले हलवा सेरेमनी परंपरा टूटी थी, जानें क्‍या थी वजह?


    नई दिल्ली। देश का आम बजट 2026 कल यानी 1 फरवरी, रविवार को संसद में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए पेश करेंगी। हर साल बजट से पहले हलवा सेरेमनी की खास परंपरा निभाई जाती है, लेकिन इतिहास में ऐसा एक साल भी आया जब यह रस्म नहीं हो सकी।

    हलवा सेरेमनी क्या होती है?
    हर साल बजट के ड्राफ्ट तैयार होने के बाद, नॉर्थ ब्लॉक में हलवा सेरेमनी का आयोजन होता है। इस दौरान बड़ी कढ़ाही में हलवा बनाया जाता है और वित्त मंत्री इसे मंत्रालय के कर्मचारियों और अधिकारियों में बांटती हैं। यह सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि बजट प्रक्रिया की शुभ शुरुआत का प्रतीक भी है।

    इतिहास और लंबी परंपरा
    आजादी के बाद से यह रस्म लगातार निभाई जाती रही है। हर सरकार ने इसे बनाए रखा है। यही वजह है कि जब किसी साल यह परंपरा टूटी, तो वह घटना इतिहास में यादगार बन गई।

    कब और क्यों टूटी यह परंपरा?
    साल 2022 में दशकों पुरानी हलवा सेरेमनी पहली बार नहीं हुई। इसका कारण कोरोना महामारी की तीसरी लहर थी। संक्रमण तेजी से फैल रहा था और बड़े समूह में इकट्ठा होना खतरनाक माना गया। इसलिए वित्त मंत्रालय ने फैसला किया कि नॉर्थ ब्लॉक में सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को इकट्ठा करना सुरक्षित नहीं होगा, और हलवा सेरेमनी रद्द करनी पड़ी। हालांकि सीधे हलवा नहीं परोसा गया, लेकिन परंपरा की भावना बनी रही। बजट से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों को मिठाई उनके घर या ऑफिस पर भेजी गई। इस तरह सुरक्षा और परंपरा दोनों का संतुलन रखा गया।

    हलवा सेरेमनी का और भी महत्व

    हलवा सेरेमनी केवल मिठाई बांटने तक सीमित नहीं है। इसके साथ ही बजट की गोपनीय प्रक्रिया की शुरुआत भी होती है। समारोह के बाद अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह अलग-थलग हो जाते हैं। मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग बंद हो जाता है। अधिकारी नॉर्थ ब्लॉक में ही रहते हैं, उनके लिए खाने-पीने और अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। यह सुनिश्चित किया जाता है कि बजट की कोई जानकारी लीक न हो। इस प्रकार हलवा सेरेमनी मिठास का प्रतीक होने के साथ-साथ बजट की गंभीरता और गोपनीयता का संकेत भी बन जाती है।

  • असम चुनाव से पहले कांग्रेस निकालेगी मेगा यात्रा, राहुल नहीं गौरव गोगोई संभालेंगे कमान

    असम चुनाव से पहले कांग्रेस निकालेगी मेगा यात्रा, राहुल नहीं गौरव गोगोई संभालेंगे कमान


    गुवाहाटी । असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस राज्य में अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर रही है। पार्टी ने फरवरी में एक बड़ी मेगा यात्रा आयोजित करने का योजना बनाई है। सूत्रों के मुताबिक इस यात्रा का नेतृत्व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई करेंगे, जबकि राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अलग-अलग चरणों में इसमें शामिल होंगे।

    यात्रा हाइब्रिड मोड में होगी, जिसमें बस यात्रा, पदयात्रा, नुक्कड़ सभाएं और बड़े जनसमूह के कार्यक्रम शामिल होंगे। पार्टी का उद्देश्य सीधे जनता से संवाद करना और राज्य में सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करना है। यात्रा की सटीक तारीख और नाम को अंतिम रूप दिया जा रहा है, और संभावना है कि संसद सत्र समाप्त होने के बाद इसकी शुरुआत की जाएगी।

    कांग्रेस पूरी ताकत झोंक रही

    असम में कांग्रेस चुनाव से पहले पूरी ताकत झोंक रही है। संगठन को मजबूत करने और चुनावी बढ़त हासिल करने के लिए कई वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। गौरव गोगोई, जो प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ लोकसभा में उपनेता भी हैं, को चुनावी चेहरा बनाया जा रहा है। पार्टी इस कदम से भाजपा के लगातार हमलों का सामना करना चाहती है, खासकर राहुल गांधी पर गमछा विवाद के बाद।

    अमित शाह का हमला
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान असम की जनसांख्यिकी बदल गई। शाह ने करेनग चापोरी में आयोजित ‘मिसिंग युवा महोत्सव’ में जनता से अपील की कि भाजपा को वोट दें ताकि राज्य को अवैध घुसपैठ से मुक्त किया जा सके।

    घुसपैठ और भूमि सुधार

    अमित शाह ने बताया कि कांग्रेस शासन के दौरान घुसपैठियों की संख्या बढ़कर 64 लाख हो गई और सात जिलों में वे बहुसंख्यक बन गए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार और असम की भाजपा सरकारें अब इस प्रवृत्ति को पलटने के लिए काम कर रही हैं। इसके तहत 1.26 लाख एकड़ अतिक्रमित भूमि को घुसपैठियों से मुक्त कराया गया है। शाह ने यह भी कहा कि अवैध प्रवासियों के खिलाफ लड़ाई में मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के हाथ मजबूत करने के लिए भाजपा को तीसरी बार सत्ता में लाना जरूरी है।

  • असम CM का बयान मुस्लिम-विरोधी AIMPLB ने की SC और राष्ट्रपति से संज्ञान लेने की मांग

    असम CM का बयान मुस्लिम-विरोधी AIMPLB ने की SC और राष्ट्रपति से संज्ञान लेने की मांग

    नई दिल्ली। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड AIMPLB ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के हालिया बयान को मुस्लिम-विरोधी और असंवैधानिक करार दिया है। बोर्ड ने शुक्रवार को मांग की कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले का स्वतः संज्ञान ले। शर्मा ने अपने बयान में कहा था कि असम में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान “मियां” समुदाय के लोग परेशान हैं और उन्हें मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस दौरान उन्होंने बांग्लाभाषी मुसलमानों के लिए ‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल किया।

    AIMPLB ने किया गंभीर आरोप

    बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान मुस्लिम-विरोधी और अत्यंत विभाजनकारी है। उन्होंने चेताया कि नफरत भरी भाषा और उकसावे का प्रयोग अब राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता जा रहा है। इलियास ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और असम के मुख्यमंत्री लगातार मुसलमानों को निशाना बनाकर भड़काऊ और असंवैधानिक बयान दे रहे हैं।

    CJI और राष्ट्रपति से अपील

    बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से तुरंत स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। उनका कहना है कि एक मुख्यमंत्री के रूप में शर्मा ने संविधान की रक्षा की शपथ ली है, लेकिन उनके बयान खुले तौर पर किसी विशेष समुदाय के खिलाफ भेदभाव, उत्पीड़न और मताधिकार से वंचित करने का संकेत देते हैं। AIMPLB ने CJI और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी संवैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

    सेक्युलर दलों और नागरिकों से आग्रह

    AIMPLB ने सभी सेक्युलर राजनीतिक पार्टियों, सिविल सोसाइटी समूहों और न्याय पसंद नागरिकों से संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में एकजुट होने का आग्रह किया है।

    मुख्यमंत्री का बयान

    हिमंत शर्मा ने बुधवार को कहा कि असम में “बांग्लादेशी मियां” रहते हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान ऐसे “विदेशियों” के खिलाफ पांच लाख से अधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं। शर्मा ने शिवसागर जिले के डेमो में कहा कि “अज्ञात लोग” अब यहां से चले गए हैं और अपर असम के कुछ जिलों में ऐसे लोग रहते हैं, जहां पांच साल पहले कोई संदिग्ध नहीं था।

    उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेशी मियां असम में बस गए हैं। यदि इनमें से किसी को एसआर नोटिस नहीं मिलता, तो इसका मतलब है कि राज्य में कोई विदेशी नहीं है। भाजपा कार्यकर्ता ऐसे संदिग्ध लोगों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कर रहे हैं, और सरकार या निर्वाचन आयोग इसकी जांच करेगा। शर्मा ने कहा कि यदि शिकायतें दर्ज नहीं की जातीं, तो लोग सवाल उठाएंगे कि विदेशियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।