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  • महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ टला एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की तैयारी अंतिम दौर में थी, 8 फरवरी को होना था ऐलान

    महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ टला एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की तैयारी अंतिम दौर में थी, 8 फरवरी को होना था ऐलान


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में फरवरी के पहले हफ्ते एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता था। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों धड़ोंशरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपीके एक होने की पटकथा लगभग तैयार थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक 8 फरवरी 2026 को औपचारिक विलय की घोषणा होनी थी, लेकिन कुछ राजनीतिक और रणनीतिक कारणों से यह प्रक्रिया फिलहाल टाल दी गई।

    बीते कुछ महीनों से चाचा-भतीजे की बढ़ती नजदीकियां महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का केंद्र बनी रहीं। पुणे और बारामती क्षेत्र में स्थानीय निकाय स्तर पर दोनों गुटों के नेताओं का साथ आना इस बात का संकेत माना जा रहा था कि पार्टी में आई टूट स्थायी नहीं रहेगी। इसी बीच बंद कमरे में हुई कई बैठकों ने सियासी हलचल और तेज कर दी थी।

    जिला परिषद चुनाव के बाद ऐलान की रणनीति
    एक रिपोर्ट के अनुसार, विलय को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी। जिला परिषद और नगर निकाय चुनावों के बाद औपचारिक घोषणा की रणनीति तय की गई थी। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि बंटा हुआ जनाधार आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में नुकसान पहुंचा सकता है।

    एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने पुष्टि की कि दोनों गुटों के बीच लगातार संवाद चल रहा था। उन्होंने बताया कि 16 जनवरी को उनके आवास पर अहम बैठक हुई, जिसमें चुनाव साथ लड़ने और संगठनात्मक ढांचे को लेकर अंतिम दौर की चर्चा की गई। इसके अगले दिन 17 जनवरी को शरद पवार के आवास पर भी भविष्य की रणनीति पर मंथन हुआ।

    कैबिनेट फेरबदल पर भी हुई चर्चा
    एनसीपी (एसपी) नेता शशिकांत शिंदे ने भी स्वीकार किया कि विलय को लेकर बातचीत नई नहीं है और दोनों पक्षों की सहमति से आगे बढ़ रही थी। उनके अनुसार, अजित पवार पहले ही संकेत दे चुके थे कि स्थानीय निकाय चुनावों के बाद दोनों गुट साथ आ सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान संभावित कैबिनेट फेरबदल और नए चेहरों को सरकार में शामिल करने पर भी अनौपचारिक चर्चा हुई थी।

    दोनों गुटों ने हाल के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में गठबंधन किया था और 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनावों में भी साथ लड़ने की योजना बनाई गई थी।

    दुर्घटना के बाद रुकी प्रक्रिया
    28 जनवरी 2026 को विमान दुर्घटना में अजित पवार के असामयिक निधन के बाद विलय की आधिकारिक घोषणा पर फिलहाल विराम लग गया। हालांकि शिंदे ने संकेत दिए हैं कि प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और अनुकूल परिस्थितियों में इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विलय होता, तो यह शरद पवार की पार्टी के लिए सरकार में शामिल होने की दिशा में बड़ा कदम साबित होता। फिलहाल एनसीपी (एसपी) महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है, जबकि अजित पवार की एनसीपी सत्तारूढ़ महायुति में शामिल रही है। ऐसे में दोनों गुटों का एक होना राज्य की सत्ता राजनीति के समीकरण पूरी तरह बदल सकता था।

    भले ही 8 फरवरी को होने वाला संभावित ऐलान टल गया हो, लेकिन एनसीपी के दोनों गुटों के एक होने की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में इससे जुड़ा कोई बड़ा फैसला फिर सुर्खियों में आ सकता है।

  • 'मुसलमान रिक्शावाला अगर 5 रुपये मांगे तो उसे 4 रुपये दो', हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर भड़की कांग्रेस

    'मुसलमान रिक्शावाला अगर 5 रुपये मांगे तो उसे 4 रुपये दो', हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर भड़की कांग्रेस

    नई दिल्ली । असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के एक विवादित बयान ने देश की राजनीति में नया बवंडर खड़ा कर दिया है। मुस्लिम समुदाय को लेकर की गई टिप्पणी पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और मुख्यमंत्री पर संविधान की शपथ का उल्लंघन करने तथा समाज में नफरत फैलाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने इस मामले में भाजपा और आरएसएस को भी कटघरे में खड़ा किया है।

    रिक्शावाले वाले बयान पर कांग्रेस का तीखा हमला

    कांग्रेस ने गुरुवार (29 जनवरी 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हिमंता बिस्वा सरमा का एक वीडियो साझा किया, जिसमें वे कथित तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं, “अगर कोई मुसलमान रिक्शावाला 5 रुपये मांगे तो उसे 4 रुपये दो… खूब परेशान करो।”
    इस वीडियो को साझा करते हुए कांग्रेस ने कहा कि यह बयान न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि समाज को बांटने वाला और नफरत फैलाने वाला है।

    ‘संविधान और गंगा-जमुनी तहजीब पर हमला’

    कांग्रेस ने अपने बयान में कहा,
    “यह घटिया बयान असम के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाडले हिमंता बिस्वा सरमा का है। वे संविधान की शपथ लेकर उसी की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यह भाजपा-आरएसएस की नफरती सोच का प्रतिबिंब है। यह बयान बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान और हमारी गंगा-जमुनी तहजीब पर सीधा हमला है।”
    पार्टी ने मांग की कि इस बयान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पूरे देश से माफी मांगें।

    ‘मियां’ समुदाय को लेकर पहले भी दे चुके हैं बयान

    यह पहला मौका नहीं है जब असम के मुख्यमंत्री अपने बयानों को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले मंगलवार (27 जनवरी 2026) को डिगबोई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मतदाता सूची के विशेष संशोधन (एसआईआर) को लेकर कहा था कि इस प्रक्रिया से किसी असमिया नागरिक को दिक्कत नहीं हो रही, बल्कि केवल ‘मियां’ (बांग्ला भाषी मुस्लिम) समुदाय को ही परेशानी है।

    ‘बांग्लादेश में वोट दें’ वाले बयान ने बढ़ाया विवाद

    हिमंता बिस्वा सरमा ने यह भी कहा था कि ‘मियां’ समुदाय के लोगों को असम में वोट देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और उन्हें बांग्लादेश में वोट देना चाहिए। उन्होंने कहा,
    “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे असम में वोट न दे सकें। अगर उन्हें दिक्कत हो रही है, तो हमें क्यों चिंता करनी चाहिए?”

    राजनीतिक और सामाजिक असर पर सवाल

    मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि ऐसे बयान सामाजिक सौहार्द, संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं। वहीं, यह मुद्दा आने वाले समय में असम की राजनीति में और तीखा होने के संकेत दे रहा है।

  • मायावती का सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समर्थन, UGC नए नियमों पर रोक को बताया उचित

    मायावती का सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समर्थन, UGC नए नियमों पर रोक को बताया उचित

    जयपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाना उचित निर्णय है। मायावती ने यह भी सुझाव दिया कि अगर नए नियम लागू किए जाते समय सवर्ण समाज को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया जाता और सभी पक्षों की सहमति ली जाती, तो विवाद से बचा जा सकता था। UGC ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए नए नियम लागू किए थे। इन नियमों में विशेष रूप से एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों को लक्षित किया गया, जबकि सामान्य वर्ग के लिए कोई स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान नहीं था।

    इस पर कुछ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि आजादी के 75 सालों में भारत ने जातिविहीन समाज की दिशा में प्रगति की है, क्या हम अब पीछे जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया और 13 जनवरी को लागू हुए नए UGC रेगुलेशंस पर रोक लगा दी। मायावती ने कहा कि नए नियमों के कारण सामाजिक तनाव पैदा हुआ और अगर सभी पक्षों की राय ली जाती और अपरकास्ट/सवर्णों को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व दिया जाता, तो विवाद से बचा जा सकता था। बीएसपी सुप्रीमो ने जोर देकर कहा कि उच्च शिक्षा में समानता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे लागू करते समय सभी वर्गों के अधिकार और न्याय का ध्यान रखना जरूरी है।

    उन्होंने प्रशासन और विश्वविद्यालयों से अपील की कि सभी नियम पारदर्शी और निष्पक्ष हों ताकि समाज में सामाजिक असंतोष न बढ़े। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह कदम उच्च शिक्षा संस्थानों में संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिहाज से अहम है। वहीं, राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह मामला ध्यानाकर्षक है क्योंकि इसमें देश के सामाजिक संवेदनशील वर्गों के अधिकारों और प्रतिनिधित्व की बहस छिड़ी हुई है। इस फैसले के बाद अब सरकार और UGC को नए नियमों को दोबारा ड्राफ्ट करना होगा, जिसमें सभी वर्गों की भागीदारी और सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। मायावती ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल जाति या धर्म का नहीं है, बल्कि समानता, न्याय और सामाजिक शांति से जुड़ा है।

  • अजित पवार की पत्नी महाराष्ट्र की डिप्टी CM बन सकती हैं; प्रफुल्ल पटेल NCP अध्यक्ष बनने की दिशा में, शरद गुट के साथ विलय की भी चर्चा

    अजित पवार की पत्नी महाराष्ट्र की डिप्टी CM बन सकती हैं; प्रफुल्ल पटेल NCP अध्यक्ष बनने की दिशा में, शरद गुट के साथ विलय की भी चर्चा


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा फेरबदल होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, अजित पवार की पत्नी को राज्य की डिप्टी मुख्यमंत्री बनाए जाने पर विचार चल रहा है। वहीं, प्रफुल्ल पटेल NCP अध्यक्ष बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    इसके अलावा, शरद गुट के साथ NCP के विलय की भी चर्चा जोर पकड़ रही है, जिससे पार्टी का राजनीतिक समीकरण और मजबूत हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से महाराष्ट्र में सत्ता संतुलन और पार्टी की रणनीति दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

    इससे साफ है कि NCP और महाराष्ट्र राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

  • अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार बन सकती हैं महाराष्ट्र की डिप्टी CM, नेताओं ने की अहम मुलाकात

    अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार बन सकती हैं महाराष्ट्र की डिप्टी CM, नेताओं ने की अहम मुलाकात

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद राजनीतिक हलकों में सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाने की अटकलें तेज हो गई हैं। इस सिलसिले में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे और सुनील तटकरे ने सुनेत्रा पवार से अहम मुलाकात की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति में संतुलन बनाए रखने और पार्टी के समन्वय को कायम रखने के उद्देश्य से उठाया जा सकता है।

    सुनेत्रा पवार के लिए डिप्टी सीएम पद पर विचार

    सूत्रों के मुताबिक, सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम पद का प्रस्ताव दिया जा सकता है। संभावना जताई जा रही है कि वह अपने दिवंगत पति अजित पवार की सीट से आगामी चुनाव में हिस्सा लें। इसके साथ ही खबर है कि प्रफुल्ल पटेल को एनसीपी का अध्यक्ष बनाए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय और आगे की चर्चा के लिए वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेंगे। वहीं, इस बैठक में एनसीपी (एसपी) के विलय और संगठनात्मक मुद्दों पर भी बातचीत होने की संभावना है।

    हादसा जिसने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर दिया

    गौरतलब है कि महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का विमान बुधवार को बारामती में क्रैश हो गया, जिसमें उनके साथ कुल पांच लोगों की जान चली गई। हादसे में विमान में मौजूद एक सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और एक महिला क्रू मेंबर भी मारे गए। अजित पवार पुणे में होने वाले जिला परिषद चुनावों के लिए रैलियों को संबोधित करने जा रहे थे।

    सुबह मुंबई से बारामती के लिए रवाना हुए विमान का लैंडिंग के दौरान कंट्रोल गड़बड़ हो गया। चश्मदीदों ने बताया कि विमान लड़खड़ाया और पल भर में क्रैश का शिकार हो गया। क्रैश के बाद विमान आग के गोले में बदल गया और पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल परिवार को शोक में डुबो दिया, बल्कि राज्य की राजनीति में भी भूचाल ला दिया।

    राजनीति में संतुलन और पार्टी नेतृत्व की चुनौती

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस दुखद हादसे के बाद एनसीपी और अन्य सहयोगी दलों के लिए संतुलन बनाए रखना और नेतृत्व संरचना को मजबूत करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में सुनेत्रा पवार का डिप्टी सीएम बनना राजनीतिक स्थिरता और पार्टी की भावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन विवाद हाई कोर्ट तक पहुँचा, अधिकारियों के निलंबन और CBI जांच की मांग

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन विवाद हाई कोर्ट तक पहुँचा, अधिकारियों के निलंबन और CBI जांच की मांग

    नई दिल्ली। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और माघ मेला प्रशासन के बीच उत्पन्न विवाद अब इलाहाबाद हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। याचिका में 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दिन घटित घटना की CBI जांच कराने की मांग की गई है। यह मामला धार्मिक भावनाओं, प्रशासनिक हस्तक्षेप और नाबालिगों के अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है।

    अधिवक्ता गौरव द्विवेदी ने मुख्य न्यायमूर्ति के समक्ष लेटर पिटीशन दाखिल की है। याचिकाकर्ता का दावा है कि माघ मेला सनातन धर्म का अत्यंत पवित्र उत्सव है, जिसमें मौनी अमावस्या का संगम स्नान सर्वोच्च धार्मिक महत्व रखता है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जब अपने शिष्यों के साथ पालकी में सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, तब मेला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने उन्हें जबरन पालकी से उतार दिया और पैदल स्नान करने का निर्देश दिया।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि स्वामीजी के साथ चल रहे 11 से 14 वर्ष आयु के नाबालिग बटुकों को हिरासत में लिया गया, उनके साथ कथित मारपीट की गई और उनकी शिखा (चोटी) पकड़कर घसीटा गया। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों के साथ इस प्रकार का व्यवहार जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन) एक्ट का उल्लंघन करता है और यह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

    याचिका में यह भी उल्लेख है कि बटुकों की शिखा खींचना सनातन धर्म की धार्मिक भावनाओं का अपमान है। मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पद और शंकराचार्य नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे, जबकि याचिकाकर्ता का कहना है कि शंकराचार्य की नियुक्ति की मान्य धार्मिक प्रक्रिया अखाड़ों और काशी विद्वत परिषद के माध्यम से होती है। प्रशासन को इस प्रक्रिया या पद की वैधता पर प्रश्न उठाने का अधिकार नहीं है।

    अधिवक्ता ने कोर्ट से मांग की है कि मामले की तुरंत CBI जांच करवाई जाए, मेला और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ निलंबन किया जाए, और नाबालिग बटुकों के साथ मारपीट करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए।

    धार्मिक अधिकारों और नाबालिग सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह याचिका हाई कोर्ट में विचाराधीन है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि प्रशासनिक हस्तक्षेप ने न केवल धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाई, बल्कि छोटे बच्चों के अधिकारों का भी उल्लंघन किया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, प्रशासनिक दखल और बाल सुरक्षा का संगम है और इसका निर्णय पूरे धार्मिक और प्रशासनिक तंत्र के लिए एक मिसाल साबित हो सकता है। कोर्ट से उम्मीद जताई जा रही है कि CBI जांच और अधिकारियों के निलंबन के निर्देश जल्द जारी होंगे।

  • महिला-नेतृत्व वाले विकास पर सरकार का फोकस, ब्लू इकोनॉमी में भारत की बड़ी छलांग: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

    महिला-नेतृत्व वाले विकास पर सरकार का फोकस, ब्लू इकोनॉमी में भारत की बड़ी छलांग: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

    नई दिल्ली | संसद के बजट सत्र की शुरुआत बुधवार, 28 जनवरी से औपचारिक रूप से हो गई। सत्र की शुरुआत संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण से हुई। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने महिला-नेतृत्व वाले विकास, ब्लू इकोनॉमी, आत्मनिर्भर भारत और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।

    ब्लू इकोनॉमी में भारत की मजबूती

    राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन चुका है, जो ब्लू इकोनॉमी में देश की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
    उन्होंने बताया कि दूध उत्पादन में भारत विश्व में अग्रणी है, जो सहकारी आंदोलन की बड़ी सफलता का परिणाम है।

    विकास और न्याय व्यवस्था पर जोर

    राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी न्याय व्यवस्था की असली सफलता इस बात से आंकी जाती है कि वह नागरिकों में सुरक्षा और भरोसे की भावना कितनी मजबूत करती है।
    उन्होंने कहा कि सरकार अविकसित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    ग्रामीण रोजगार और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण

    राष्ट्रपति मुर्मु ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए ‘विकसित भारत जी राम जी’ कानून लागू किया गया है, जिसके तहत गांवों में 125 दिनों के गारंटीड रोजगार का प्रावधान किया गया है।
    उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और लीकेज रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं, जिससे किसानों, पशुपालकों और मछुआरों को नए अवसर मिलेंगे।

    राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद पर सख्त रुख

    राष्ट्रपति ने कहा कि सिंधु जल संधि का निलंबन आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई का हिस्सा है।
    उन्होंने बताया कि मिशन सुदर्शन चक्र के जरिए देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत किया जा रहा है और माओवादी आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों ने निर्णायक कार्रवाई की है।

    महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर भारत

    राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सरकार का मानना है कि देश का विकास तभी संभव है जब सभी को समान अवसर मिलें।
    इसी सोच के साथ भारत आज महिला-नेतृत्व वाले विकास के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है।
    उन्होंने बताया कि सरकार जल्द ही 3 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य हासिल करने जा रही है, जिससे महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी।

    आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया

    राष्ट्रपति ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बने उत्पाद आज वैश्विक बाजारों तक पहुंच रहे हैं।
    स्वदेशी उत्पादों को लेकर देशवासियों में उत्साह बढ़ा है और भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    एआई और डीपफेक पर चेतावनी

    राष्ट्रपति मुर्मु ने एआई के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि डीपफेक, गलत सूचना और फर्जी कंटेंट लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव और जनता के भरोसे के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।
    उन्होंने इस विषय पर गंभीर और सतर्क रहने की जरूरत पर जोर दिया।

    नारी शक्ति की ऐतिहासिक उपलब्धि

    राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार की नीतियों के चलते महिलाएं देश के हर महत्वाकांक्षी क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
    उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) से महिला कैडेट्स का पहला बैच पास आउट हुआ, जो नारी शक्ति की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है।

    युवाओं, स्टार्टअप और सामाजिक सुरक्षा पर फोकस

    राष्ट्रपति ने बताया कि—

    60 हजार युवाओं को सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए प्रशिक्षण दिया गया

    10 लाख युवाओं को एआई के लिए ट्रेन किया जा रहा है

    सोशल सिक्योरिटी योजनाओं का दायरा 25 करोड़ से बढ़कर 95 करोड़ लोगों तक पहुंचा

    मुद्रा योजना के तहत 38 लाख करोड़ रुपये जारी किए गए और 12 करोड़ लोन दिए गए

    पीएम स्वनिधि योजना से 72 लाख लोगों को 16 लाख करोड़ रुपये की मदद मिली

    देश में करीब 2 लाख स्टार्टअप पंजीकृत हैं, जिनमें 20 लाख से अधिक लोग काम कर रहे हैं और लगभग 40 फीसदी स्टार्टअप्स में महिला डायरेक्टर हैं

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत महिला-नेतृत्व वाले विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और ब्लू इकोनॉमी में बड़ी छलांग लगा चुका है।
    सरकार की नीतियों से रोजगार, सुरक्षा, स्टार्टअप और महिला सशक्तीकरण को नई मजबूती मिली है।

  • यूजीसी के नए नियमों पर छात्र राजनीति गरम: NSUI ने मांगी जजों की भागीदारी ABVP ने कहा- भ्रांतियां दूर करे आयोग

    यूजीसी के नए नियमों पर छात्र राजनीति गरम: NSUI ने मांगी जजों की भागीदारी ABVP ने कहा- भ्रांतियां दूर करे आयोग


    नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग UGC द्वारा जारी उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम 2026 को लेकर देश के दो सबसे बड़े छात्र संगठनों NSUI और ABVP ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। जहां दोनों संगठनों ने कैंपस में जाति आधारित भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य का स्वागत किया है वहीं इसके कार्यान्वयन और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल भी उठाए हैं।

    NSUI की मांग कागजी नहीं जवाबदेह बने समिति

    कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया ने नियमों का स्वागत तो किया लेकिन इन्हें अधूरा बताया है। संगठन का कहना है कि भेदभाव विरोधी समितियां विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रभाव से मुक्त होनी चाहिए। रिटायर्ड जजों की एंट्री: NSUI ने मांग की है कि समितियों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए इसमें कार्यरत या सेवानिवृत्त न्यायाधीशोंको शामिल किया जाना चाहिए।

    प्रतिनिधित्व की शर्त: संगठन के अनुसार समिति में एससी एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों और शिक्षकों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य होना चाहिए। प्रशासन पर निशाना ने आशंका जताई कि स्पष्ट संरचना के अभाव में ये समितियां विश्वविद्यालय प्रशासन की कठपुतली बन सकती हैं जिससे न्याय का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। जवाबदेही: संगठन ने मांग की है कि आरक्षण नीतियों और रिक्त पदों NFS के कारण खाली के मामले में दोषियों की जवाबदेही तय की जाए।

    ABVP का रुख संवाद और स्पष्टता की जरूरत

    वहीं आरएसएस समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने यूजीसी के नियमों में अस्पष्टता और शब्दावली को लेकर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि नियमों को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रांतियां पैदा हो रही हैं। भ्रांतियों का निवारण: ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि यूजीसी को तत्काल अधिसूचना के उन उपबंधों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए जिनकी शब्दावली को लेकर समाज में भ्रम है। कोर्ट में पक्ष: चूंकि यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है इसलिए ABVP ने मांग की है कि यूजीसी को शीघ्र हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। मान अधिकार: परिषद का कहना है कि सभी संस्थानों को लोकतांत्रिक भावना का सम्मान करना चाहिए ताकि हर छात्र को समान अधिकार मिलें और कैंपस भेदभाव-मुक्त हो।

    क्या है UGC विनियम 2026
    यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति लिंग या अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें प्रत्येक संस्थान में एक प्रभावी निवारण तंत्र बनाने और समता को बढ़ावा देने के प्रावधान शामिल हैं। नों ही संगठनों का एक सुर में कहना है कि कैंपस में भेदभाव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। हालांकि NSUI जहां संरचनात्मक बदलाव और न्यायिक हस्तक्षेप पर जोर दे रहा है वहीं ABVP वैधानिक स्पष्टता और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग कर रहा है।
  • कर्नाटक कांग्रेस में कलह की गूंज: सिद्धारमैया की रैली में लगे डीके-डीके के नारे मुख्यमंत्री ने मंच से खोया आपाzz

    कर्नाटक कांग्रेस में कलह की गूंज: सिद्धारमैया की रैली में लगे डीके-डीके के नारे मुख्यमंत्री ने मंच से खोया आपाzz


    नई दिल्ली । कर्नाटक की सियासत में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच की अंदरूनी खींचतान मंगलवार को एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर नुमाया हो गई। बेंगलुरु में आयोजित एक विरोध रैली के दौरान मुख्यमंत्री उस वक्त बेहद असहज हो गए और अपना आपा खो बैठे जब उनके भाषण से ठीक पहले पार्टी कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने अपने चहेते नेता डीके शिवकुमार के पक्ष में जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।

    रैली का मंजर: जब सिद्धारमैया पर भारी पड़े डीके के नारे

    मंगलवार 27 जनवरी को बेंगलुरु में कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एक बड़ी रैली बुलाई थी। मंच पर दिग्गज नेताओं की मौजूदगी थी लेकिन माहौल तब बिगड़ गया जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पोडियम की ओर बढ़े: नारेबाजी की गूंज: जैसे ही सिद्धारमैया अपनी कुर्सी से उठे यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने “डीके डीके” के नारे लगाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते ये शोर इतना बढ़ा कि मुख्यमंत्री का भाषण शुरू होना मुश्किल हो गया।

    आपा खो बैठे सीएम: नारेबाजी से चिढ़कर सिद्धारमैया ने पहले शांति की अपील की लेकिन जब हंगामा नहीं थमा तो उन्होंने गुस्से में चिल्लाकर पूछा ये कौन है जो DK DK चिल्ला रहा है मंच से चेतावनी: स्थिति बिगड़ती देख मंच संचालक को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने यूथ कांग्रेस के नेताओं को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाते हुए कहा “हम जानते हैं आप कौन हैं शांति से मुख्यमंत्री की बात सुनिए।”

    मुद्दा पीछे छूटा गुटबाजी आई सामने

    यह रैली असल में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह नया मिशन लाने के प्रस्ताव के विरोध में थी। रैली में डीके शिवकुमार रणदीप सुरजेवाला और कई मंत्री भी मौजूद थे लेकिन नेतृत्व संघर्ष की छाया ने असल मुद्दे को गौण कर दिया। राजनीतिक गलियारों की चर्चा: विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल नारेबाजी नहीं थी बल्कि कर्नाटक कांग्रेस के भीतर चल रहे शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा है। कई विधायक और एमएलसी खुले तौर पर डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की लॉबिंग कर रहे हैं।

    नेतृत्व परिवर्तन पर क्या है स्थिति

    यद्यपि सिद्धारमैया बार-बार दावा कर रहे हैं कि वे अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करेंगे और उन्हें आलाकमान का पूरा समर्थन प्राप्त है लेकिन मंगलवार की घटना ने साफ कर दिया कि पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा डीके शिवकुमार के लिए बेताब है। हालांकि डीके शिवकुमार ने आधिकारिक तौर पर यही कहा है कि वे हाईकमान के हर फैसले को स्वीकार करेंगे पर उनके समर्थकों का उत्साह सिद्धारमैया की राह में रोड़े अटका रहा है।

  • अकीरा नंदन AI फिल्म केस: दिल्ली हाई कोर्ट का कड़ा रुख फर्जी सामग्री 72 घंटे में हटाने का आदेश

    अकीरा नंदन AI फिल्म केस: दिल्ली हाई कोर्ट का कड़ा रुख फर्जी सामग्री 72 घंटे में हटाने का आदेश


    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI के बढ़ते दुरुपयोग और डीपफेक तकनीक पर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने आंध्र प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री और सुपरस्टार पवन कल्याण के बेटे अकीरा नंदन की तस्वीर और नाम का इस्तेमाल कर बनाई गई AI फिल्म के प्रसारण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी की निजता और व्यक्तित्व के अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    क्या है पूरा मामला

    अकीरा नंदन अकीरा देसाई की ओर से दायर याचिका में संभवमी स्टूडियोज एलएलपी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे बिना अनुमति फिल्म: स्टूडियो ने अकीरा की अनुमति के बिना उनकी इमेज का उपयोग कर लगभग एक घंटे की फिल्म बनाई और उसे यूट्यूब पर दुनिया की पहली ग्लोबल एआई फिल्म बताकर पोस्ट कर दिया। मनगढ़ंत सीन: याचिका में दावा किया गया कि फिल्म में AI के जरिए अकीरा के फर्जी रोमांटिक सीन दिखाए गए हैं जिससे उनकी प्रतिष्ठा और सामाजिक छवि को गहरा नुकसान पहुंचा है।अधिकारों का हनन: अकीरा के व्यक्तित्व आवाज और नाम का कमर्शियल उपयोग उनकी निजता के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

    दिल्ली हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ

    मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति तुषार राव गडेला की पीठ ने कहा एआई टूल्स का उपयोग करके किसी व्यक्ति को उसकी अनुमति के बिना मुख्य भूमिका में दिखाना और मनगढ़ंत सामग्री पेश करना उसके व्यक्तित्व के अधिकारों का उल्लंघन है। यदि इस पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो याचिकाकर्ता को ऐसी क्षति हो सकती है जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी।

    अदालत का आदेश और टेक कंपनियों को निर्देश

    अदालत ने अकीरा के पक्ष में अंतरिम आदेश जारी करते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं: ब्रॉडकास्ट पर रोक: विवादित फिल्म के सर्कुलेशन और ब्रॉडकास्ट पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध। मेटा को निर्देश कोर्ट ने मेटा प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वह उल्लंघन करने वाले सभी URL की पहचान करे। 2 घंटे की डेडलाइन: संबंधित प्लेटफॉर्म्स को 72 घंटे के भीतर इस सामग्री को हटाने का आदेश दिया गया है। यदि स्टूडियो सामग्री नहीं हटाता है तो मेटा खुद इसे ब्लॉक/डिलीट करेगा। अगली सुनवाई: इस गंभीर विषय पर अब अगली सुनवाई 5 फरवरी 2026 को होगी।

    व्यक्तित्व अधिकार क्या हैं

    यह कानूनी अधिकार किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को अपने नाम छवि आवाज या व्यक्तित्व की अन्य विशेषताओं को व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल होने से रोकने की शक्ति देता है। हाल के दिनों में अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर जैसे सितारों ने भी अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए कोर्ट से आदेश प्राप्त किए हैं।