Category: National

  • सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी पर बैंकिंग घोटाले की जांच में CBI-ED को 10 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी पर बैंकिंग घोटाले की जांच में CBI-ED को 10 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी और उनके ग्रुप पर लगे ₹1.5 लाख करोड़ के कथित बैंकिंग और कॉरपोरेट फ्रॉड के आरोपों को गंभीरता से लिया है। शुक्रवार को पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन पर सुनवाई के दौरान अदालत ने CBI और प्रवर्तन निदेशालय से कहा कि वे 10 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। यह मामला देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट धोखाधड़ी के आरोपों में से एक माना जा रहा है।याचिका पूर्व नौकरशाह ई.ए.एस. सरमा की ओर से दायर की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि 2007-08 से अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप ने सार्वजनिक बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए गए कर्ज का गलत इस्तेमाल किया और रकम को समूह की अन्य इकाइयों में डायवर्ट किया।

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि मामले में पहले भी नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अब बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि नोटिस अनिल अंबानी तक विधिवत पहुंचें। अदालत ने जांच एजेंसियों से अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्यौरा मांगा है।याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कॉरपोरेट फ्रॉड है। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI और ED की मौजूदा जांच केवल फ्रॉड के सीमित हिस्से तक सीमित है, जबकि बैंकों के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं की जा रही। भूषण ने बताया कि लोन अप्रूवल प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में भी हेरफेर किया गया।

    ED अब तक इस मामले में ₹10,117 करोड़ की संपत्तियां जब्त कर चुकी है। इसमें मुंबई के पाली हिल स्थित अनिल अंबानी का आवास, रिलायंस समूह की कंपनियों के बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट और अनलिस्टेड निवेश शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस में फंड का गलत इस्तेमाल हुआ जिससे यस बैंक को करीब ₹2,700 करोड़ का नुकसान हुआ।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जांच एजेंसियों की ओर से समय मांगा है। अब सभी की निगाहें 10 दिन बाद दाखिल होने वाली रिपोर्ट पर हैं जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा। यह मामला न केवल कॉर्पोरेट गवर्नेंस बल्कि बैंकिंग निगरानी व्यवस्था पर भी अहम सवाल खड़ा कर रहा है।

  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर अंडमान-निकोबार का नाम बदलने का प्रस्ताव

    नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर अंडमान-निकोबार का नाम बदलने का प्रस्ताव


    नई दिल्ली। में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का नाम बदलने का प्रस्ताव सामने आया है। तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष और पूर्व सांसद के. कविता ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर सिफारिश की है कि इस द्वीप समूह का नाम नेताजी और उनकी वीर सेना के सम्मान में आजाद हिंद रखा जाए।

    कविता ने अपने पत्र में तर्क दिया कि यह कदम आजाद हिंद की उस अंतरिम सरकार की विरासत का सम्मान करेगा जिसने 1943 में इन द्वीपों को ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता से मुक्त कराया था। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भारत का पहला क्षेत्र था जिसे स्वतंत्रता मिली थी और इस कारण इसकी राष्ट्रीय स्मृति बेहद महत्वपूर्ण है।पूर्व सांसद ने कहा कि पिछले कुछ सालों में केंद्र सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद सेना का सम्मान किया है। सरकार ने अंडमान-निकोबार के तीन द्वीपों के नाम बदल दिए हैं लेकिन अभी भी पूरे द्वीप समूह का नाम औपनिवेशक सत्ता के दौरान रखा गया है। उन्होंने कहा कि नाम परिवर्तन के लिए संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया तुरंत शुरू की जानी चाहिए।

    एनडीटीवी से बातचीत में कविता ने कहा कि नेताजी ने अपनी कूटनीति और बलपूर्वक कार्रवाई से अंडमान और निकोबार द्वीपों को अंग्रेजों से मुक्त कराया था। उन्होंने इसे आजाद हिंद का नाम दिया और 1947 से पहले राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। कविता ने बताया कि यह एक राष्ट्रीय स्मृति है जिसे सम्मानित किया जाना चाहिए था लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ।कविता ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री को पत्र इसलिए लिखा गया क्योंकि अंडमान और निकोबार का नाम अंग्रेजों ने रखा था और इसे बदलकर आजाद हिंद रखना एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कदम होगा। उन्होंने कहा कि नेताजी का व्यक्तित्व और उनकी ऊर्जा ऐसे बदलाव के लिए प्रेरक हैं।

    केंद्र सरकार ने इससे पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस की स्मृति में तीन द्वीपों का नाम बदल दिया था। रॉस द्वीप अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप, नील द्वीप अब शहीद द्वीप और हेवलॉक द्वीप अब स्वराज द्वीप के नाम से जाना जाता है। यह परिवर्तन पोर्ट ब्लेयर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ को याद करते हुए किया गया था।अब यह प्रस्ताव आने वाले समय में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के पूरे नाम परिवर्तन की दिशा में एक नया अध्याय साबित हो सकता है।

  • MBBS की सीट के लिए 'खूनी साजिश': खुद का डॉक्टर बनने का जुनून या पागलपन?

    MBBS की सीट के लिए 'खूनी साजिश': खुद का डॉक्टर बनने का जुनून या पागलपन?


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के जौनपुर में एक ऐसी वारदात सामने आई है जिसने इंसानी सोच और सिस्टम की खामियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जौनपुर की यह घटना किसी डार्क थ्रिलर फिल्म की पटकथा जैसी लगती है, लेकिन हकीकत उससे कहीं ज्यादा खौफनाक है। एक छात्र का डॉक्टर बनने का जुनून इस कदर पागलपन में बदला कि उसने मेडिकल की सीट पाने के लिए खुद के ही शरीर को दांव पर लगा दिया। लाइन बाजार थाना क्षेत्र के खलीलपुर गांव में 25 वर्षीय सूरज भास्कर ने सरकारी अस्पताल में डॉक्टर बनने के लिए जो रास्ता चुना, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
    सूरज ने दिव्यांग कोटा (PH Quota) हासिल करने के लिए ग्राइंडर मशीन से अपना ही बायां पैर काटकर शरीर से अलग कर दिया।

    वारदात की क्रोनोलॉजी: साजिश से खुलासे तक
    शुक्रवार रात करीब 12 बजे सूरज ने इस आत्मघाती कदम को अंजाम दिया।
    दवाओं का खेल खुद को दर्द से बचाने के लिए सूरज ने पहले एनेस्थीसिया (सुन्न करने वाला) इंजेक्शन लगाया। जब पैर सुन्न हो गया, तो बिजली से चलने वाली ग्राइंडर मशीन से अपने पंजे को काट डाला।

    गुमराह करने की कोशिश शनिवार सुबह सूचना फैली कि अज्ञात बदमाशों ने सूरज पर जानलेवा हमला कर उसका पैर काट दिया है। पुलिस ने तत्काल ‘हत्या के प्रयास’ का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

    कैसे खुला राज?
    सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता को घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों ने चौंका दिया। खेत में इंजेक्शन के रैपर और दवाइयां मिलीं, जो किसी राह चलते अपराधी के पास होना मुमकिन नहीं था। जब पुलिस ने सूरज की डायरी और कॉल डिटेल्स खंगाली, तो साजिश की परतें खुल गईंडायरी का टारगेट, सूरज ने अपनी डायरी में लिखा था 2026 में किसी भी हाल में MBBS में दाखिला लेना है।

    BHU से ली ‘ट्रेनिंग’
    जांच में पता चला कि सूरज अक्टूबर में वाराणसी (BHU) गया था, जहाँ उसने दिव्यांग सर्टिफिकेट के फायदे और प्रक्रिया की पूरी रेकी की थी।नीट (NEET) में कड़े कॉम्पिटिशन से बचने के लिए उसने खुद को स्थायी रूप से दिव्यांग बनाने का फैसला किया।

    सिस्टम और मानसिक दबाव का आईना
    यह घटना सिर्फ एक क्राइम रिपोर्ट नहीं है, बल्कि उस मानसिक दबाव की चरम सीमा है जो छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान महसूस करते हैं। फिलहाल सूरज अस्पताल में भर्ती है, लेकिन उसका यह कदम उसे कॉलेज की सीट दिलाएगा या जेल की कोठरी, यह पुलिसिया कार्रवाई तय करेगी।पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि सूरज को मेडिकल ग्रेड के इंजेक्शन और ग्राइंडर मशीन किसने मुहैया कराई।

  • RJD में अंदरूनी बगावत: भाई वीरेंद्र ने टिकट कटने पर उठाए तीखे सवाल, कहा- यादव उम्मीदवार ही देना था तो विजय मंडल क्यों हटाए?

    RJD में अंदरूनी बगावत: भाई वीरेंद्र ने टिकट कटने पर उठाए तीखे सवाल, कहा- यादव उम्मीदवार ही देना था तो विजय मंडल क्यों हटाए?



    नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अंदर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने टिकट वितरण को लेकर पार्टी नेतृत्व पर सीधे सवाल उठाए हैं। पटना से सामने आए एक वीडियो में वे साफ तौर पर नाराज दिखे और पार्टी के फैसलों पर आपत्ति जताई।

    भाई वीरेंद्र ने दिनारा विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि वे और विजय मंडल एक साथ विधायक रहे हैं।

    उन्होंने पूछा कि जब यादव समाज के उम्मीदवार को ही टिकट देना था, तो फिर सिटिंग विधायक विजय मंडल का टिकट क्यों काटा गया? उन्होंने यह भी पूछा कि विजय मंडल में ऐसी क्या कमी थी, जिसके कारण उन्हें दोबारा मौका नहीं मिला।

    उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी के अंदर विजय मंडल का टिकट बचाने के लिए संघर्ष किया था और उनका मानना है कि टिकट कटना गलत फैसला था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने स्थानीय और मजबूत नेताओं को नजरअंदाज कर दूसरे जिलों से आए नेताओं को टिकट दिया, जिससे जमीनी पकड़ कमजोर हुई।

    भाई वीरेंद्र ने कुछ नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा,
    “पार्टी में कुछ लोग सिर्फ नाम के समाजवादी हैं।

    ये एक साथ दो–तीन जिलों की राजनीति करते हैं। जब तक ऐसे लोग टिकट तय करते रहेंगे, तब तक पार्टी को नुकसान होता रहेगा।”

    उनके बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि RJD में अंदरूनी तनाव और असंतोष बढ़ रहा है। पार्टी नेतृत्व ने पहले ही हार के लिए वोट चोरी का आरोप लगाया था, लेकिन अब टिकट वितरण को लेकर उठ रहे सवालों से राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है।

    गौरतलब है कि दिनारा सीट से विजय मंडल 2020 में RJD के टिकट पर विधायक चुने गए थे। उन्होंने LJP के प्रत्याशी राजेंद्र सिंह को 8,228 वोटों से हराया था। लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में RJD ने उनका टिकट काटकर शशि शंकर कुमार उर्फ राजेश यादव को उम्मीदवार बनाया, जिन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

  • हाईकोर्ट में बहस से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला, सीजेआई बोले आंख दिखाओगे तो जवाब भी मिलेगा

    हाईकोर्ट में बहस से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला, सीजेआई बोले आंख दिखाओगे तो जवाब भी मिलेगा


    नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने उस वकील को कड़ी चेतावनी दी है जो हाईकोर्ट में जज से कहासुनी के चलते आपराधिक अवमानना के नोटिस का सामना कर रहे हैं। यह मामला झारखंड हाईकोर्ट से जुड़ा है जहां सुनवाई के दौरान वकील और न्यायाधीश के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अदालत की गरिमा से ऊपर कोई नहीं है और यदि कोई आंख दिखाने की कोशिश करेगा तो न्यायपालिका भी उसी दृढ़ता से जवाब देगी।

    यह पूरा विवाद पिछले साल सोलह अक्तूबर को झारखंड हाईकोर्ट में हुई एक सुनवाई से शुरू हुआ। एडवोकेट महेश तिवारी एक विधवा महिला का पक्ष रख रहे थे जिनका बिजली कनेक्शन एक लाख तीस हजार रुपये से अधिक बकाया होने के कारण काट दिया गया था। सुनवाई के दौरान बहस के तरीके को लेकर न्यायमूर्ति राजेश कुमार ने टिप्पणी की और बाद में राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष से वकील के आचरण पर संज्ञान लेने को कहा।इसी दौरान वकील तिवारी ने न्यायाधीश के प्रति असंतोष जताया और उंगली दिखाते हुए कहा कि वह अपनी शैली में बहस करेंगे और किसी प्रकार के अपमान को स्वीकार नहीं करेंगे। इस घटनाक्रम को न्यायालय की अवमानना मानते हुए झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी कर दिया।

    इस नोटिस को चुनौती देने के लिए वकील सुप्रीम कोर्ट पहुंचे जहां सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अदालत से आदेश केवल यह साबित करने के लिए नहीं मांगे जा सकते कि कोई किसी का कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि यदि कोई माफी मांगना चाहता है तो उसे साफ शब्दों में माफी मांगनी चाहिए और यदि कोई जजों को चुनौती देना चाहता है तो न्यायपालिका भी पूरी ताकत से स्थिति को संभालना जानती है।

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए झारखंड हाईकोर्ट से यह भी कहा कि यदि संबंधित वकील माफी मांग लेते हैं तो उनके प्रति सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है। अदालत ने यह संकेत दिया कि न्यायपालिका का उद्देश्य दंड देना नहीं बल्कि मर्यादा और अनुशासन बनाए रखना है।यह मामला एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि अदालत में असहमति व्यक्त करने का भी एक मर्यादित तरीका होता है। न्यायिक प्रक्रिया में वकीलों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है लेकिन न्यायालय की गरिमा और सम्मान सर्वोपरि है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी न केवल संबंधित वकील के लिए बल्कि पूरे कानूनी समुदाय के लिए एक स्पष्ट संदेश है।

  • रोजगार मेले में पीएम मोदी की बड़ी सौगात: 61 हजार से अधिक युवाओं को मिले नियुक्ति पत्र

    रोजगार मेले में पीएम मोदी की बड़ी सौगात: 61 हजार से अधिक युवाओं को मिले नियुक्ति पत्र

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आयोजित 18वें रोजगार मेले के दौरान देशभर के 61 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नियुक्ति पत्र सौंपे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से युवाओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन इन सभी युवाओं के जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने नियुक्ति पत्रों को “नेशन बिल्डिंग का इनविटेशन लेटर” बताते हुए कहा कि यह विकसित भारत के निर्माण को गति देने का संकल्प है। नियुक्तियां केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संगठनों में की गई हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा, “आज आप सभी सरकारी सेवा में प्रवेश कर रहे हैं। यह सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी का अवसर है।” उन्होंने यह भी कहा कि साल 2026 की शुरुआत युवाओं के जीवन में नई उम्मीदें और नई खुशियां लेकर आई है। बसंत पंचमी और गणतंत्र दिवस के संयोग का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह समय संविधान के प्रति कर्तव्यों को याद करने और राष्ट्र सेवा के लिए खुद को समर्पित करने का है।

    तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी में खुद को अपडेट रखना जरूरी

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बदलते तकनीकी दौर की चुनौतियों और जरूरतों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं और ऐसे में सरकारी सेवाओं में आने वाले युवाओं को खुद को लगातार अपग्रेड करना होगा। पीएम मोदी ने बताया कि iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक करीब डेढ़ करोड़ सरकारी कर्मचारी खुद को नए कौशलों में प्रशिक्षित कर चुके हैं। उन्होंने “नागरिक देवो भव:” को सभी कर्मचारियों के लिए मूल मंत्र बताया।

    रिफॉर्म एक्सप्रेस पर भारत, महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है, जिसका उद्देश्य जीवन और कारोबार-दोनों को आसान बनाना है। उन्होंने बताया कि इस रोजगार मेले में 8 हजार से अधिक बेटियों को भी नियुक्ति पत्र दिए गए हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है। पीएम मोदी ने कहा कि बीते 11 वर्षों में देश के वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी लगभग दोगुनी हो गई है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार कई देशों के साथ ट्रेड और मोबिलिटी एग्रीमेंट कर रही है, जिससे युवाओं के लिए वैश्विक अवसर खुल रहे हैं। डिजिटल मीडिया, क्रिएटर इकोनॉमी और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भारत तेजी से ग्लोबल हब बनता जा रहा है।

  • Cultural Controversy: शंकराचार्य के समर्थन में कांग्रेस ने जारी किया पोस्टर, गुरु का अपमान करने वालों के लिए चेतावनी

    Cultural Controversy: शंकराचार्य के समर्थन में कांग्रेस ने जारी किया पोस्टर, गुरु का अपमान करने वालों के लिए चेतावनी

    नई दिल्ली। प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद के बाद सियासत तेज हो गई है। इस मामले में अब कांग्रेस पार्टी खुलकर शंकराचार्य के समर्थन में आ गई है। लखनऊ स्थित कांग्रेस पार्टी कार्यालय के बाहर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए हैं, जिनमें मौनी अमावस्या के दिन उनके बटुकों के साथ हुई कथित मारपीट को दर्शाया गया है। पोस्टर में स्पष्ट शब्दों में लिखा गया है- “जो गुरु या वेदाचार्य का अपमान करेगा, वह भयानक नरक में गिरेगा।”

    युवा कांग्रेस नेता ने लगाया होर्डिंग, पुलिस प्रशासन पर उठाए सवाल

    कांग्रेस कार्यालय के बाहर लगाए गए इस होर्डिंग को भारतीय युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और अयोध्या विधानसभा क्षेत्र से जुड़े नेता शरद शुक्ला ने लगवाया है। पोस्टर में मौनी अमावस्या स्नान पर्व के लिए जाते समय शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ हुए कथित विवाद को दर्शाया गया है। एक ओर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तस्वीर है, तो दूसरी ओर बटुकों की शिखा खींचे जाने और हाथ जोड़कर प्रार्थना करते दृश्य को दिखाया गया है।

    पोस्टर में श्रीरामचरितमानस की चौपाई- “जाको प्रभु दारुण दुख देही, ताकी मति पहले हर लेही”- का उल्लेख करते हुए पूरे प्रकरण पर सवाल खड़े किए गए हैं। इसके माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि धार्मिक गुरुओं और परंपराओं के अपमान से समाज में गलत संदेश जाता है।

    धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप, विपक्ष का सरकार पर निशाना

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शंकराचार्य और उनके बटुकों के साथ हुआ व्यवहार धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पार्टी ने इस मुद्दे को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों और सम्मान से जुड़ा मामला बताया है। इससे पहले समाजवादी पार्टी के कार्यालय के बाहर भी इसी तरह के पोस्टर लगाए जा चुके हैं।

    राजनीतिक गलियारों में यह साफ माना जा रहा है कि सपा और कांग्रेस दोनों ही दल इस विवाद में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में खुलकर सामने आ चुके हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

  • मिर्जापुर धर्मांतरण रैकेट, मोबाइल फोल्डर से खुला भयानक सच, आरोपी विदेश भागने की फिराक में

    मिर्जापुर धर्मांतरण रैकेट, मोबाइल फोल्डर से खुला भयानक सच, आरोपी विदेश भागने की फिराक में



    नई दिल्ली। मिर्जापुर धर्मांतरण मामले में पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है और अब तक इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो आरोपी अभी फरार हैं। फरार आरोपियों में इमरान और लकी अली खान शामिल हैं, जिनके देश छोड़कर भागने की तैयारी की सूचना पुलिस को मिली है। इसके बाद पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट और नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ा दी है और कुल पांच टीमों को अलग-अलग दिशाओं में तैनात किया गया है ताकि आरोपियों की धरपकड़ हो सके।

    पुलिस को जानकारी मिली है कि इमरान और लकी के पास दुबई जाने का पासपोर्ट मौजूद है। इमरान पहले भी दुबई जा चुका है, इसलिए पुलिस को आशंका है कि वह विदेश भागने की कोशिश कर सकता है। आरोपियों की मूवमेंट और प्लानिंग से जुड़े अहम संकेत फोन कॉल्स और सर्विलांस के दौरान मिले हैं।

    कैसे हुआ मामला खुलासा?
    इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक महिला ने 1090 महिला हेल्पलाइन पर शिकायत की।

    शिकायत के बाद पुलिस ने एक आरोपी मोहम्मद शेख अली को पूछताछ के लिए बुलाया। शुरुआती पूछताछ में उसने आरोपों से इनकार किया, लेकिन जब उसका मोबाइल जांचा गया तो पासवर्ड-प्रोटेक्टेड फोल्डर मिला।

    फोल्डर खोलते ही पुलिस के होश उड़ गए, क्योंकि उसमें 50 से अधिक महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो थे। इनमें घूमने-फिरने, यात्राओं और निकाह से जुड़ी तस्वीरें भी शामिल थीं। इसी फोल्डर के आधार पर पुलिस ने पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया और कई जिमों पर छापेमारी की।

    अमीर महिलाओं को बनाते थे निशाना
    पुलिस के अनुसार यह रैकेट KGN 1, KGN 2.0, KGN 3, आयरन फायर और फिटनेस क्लब जैसे जिमों के जरिए चलाया जा रहा था।

    आरोपियों का निशाना अमीर घरों की महिलाएं थीं। गैंग के सदस्य पहले महिला को जिम ट्रेनिंग का लालच देते, फिर नंबर एक्सचेंज करके दोस्ती बढ़ाते और घूमने-फिरने के बहाने उन्हें अलग-अलग जगहों पर ले जाते थे।

    जांच में यह भी सामने आया कि कुछ महिलाओं को फ्री जिम ट्रेनिंग का ऑफर दिया जाता था और ट्रेनिंग के दौरान उनकी तस्वीरें ली जाती थीं। इसके बाद उन्हें बुर्का पहनाकर मिर्जापुर के बाजार, मंदिर, मजार और अन्य जगहों पर ले जाया जाता था और धीरे-धीरे धर्मांतरण की तरफ प्रभावित किया जाता था।

    यौन शोषण और ब्लैकमेल
    पुलिस का दावा है कि यौन शोषण के बाद महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो सुरक्षित रखे जाते थे और फिर उनसे पैसे की मांग की जाती थी। पैसे न देने पर धर्मांतरण का दबाव बनाया जाता था। डर के कारण कुछ महिलाओं ने पैसे दिए, जबकि कई का धर्मांतरण कर दिया गया।

    गैंग की संरचना और गिरफ्तारी
    पुलिस ने बताया कि गैंग एक समय में एक ही महिला पर काम करता था। यदि वह महिला एक जिम में फंसती नहीं थी तो उसे दूसरे और फिर तीसरे जिम में भेजा जाता था। जिम संचालक आपस में महिलाओं की तस्वीरें शेयर कर उन्हें “टारगेट” बताते थे।

    अब तक गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद शेख अली, फैजल खान, जहीर और शादाब शामिल हैं। शादाब जीआरपी में सिपाही था, जिसे पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया।

    एसएसपी सोमेन वर्मा ने बताया कि शुरुआती शिकायत के बाद ठोस सबूत नहीं मिले थे, लेकिन मोबाइल फोल्डर मिलने के बाद पूरा रैकेट उजागर हो गया। जांच में महिलाओं से जुड़े कई डिजिटल और भौतिक सबूत भी बरामद हुए हैं, जिनमें महिलाओं को घुमाने-फिरने में इस्तेमाल की गई गाड़ियां भी शामिल हैं।

  • अब DDA फ्लैट निवासियों को राहत, हर बुधवार साइट-लेवल शिकायत निवारण शुरू

    अब DDA फ्लैट निवासियों को राहत, हर बुधवार साइट-लेवल शिकायत निवारण शुरू



    नई दिल्ली। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने फ्लैट निवासियों को बड़ी राहत दी है। अब DDA के फ्लैट्स में रहने वाले लोगों को रोज़मर्रा की समस्याओं के लिए DDA ऑफिस के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्राधिकरण ने हर बुधवार साइट-लेवल जनसुनवाई शुरू करने का फैसला लिया है, जिसमें साइट इंजीनियर सीधे शिकायत सुनकर समाधान करेंगे।

    हर बुधवार 2:30 से 4 बजे तक जनसुनवाई
    DDA के हाउसिंग डिप्टी डायरेक्टर चिन्मय चक्रवर्ती ने 19 जनवरी को एक आधिकारिक सर्कुलर जारी किया है। सर्कुलर के अनुसार यह जनसुनवाई हर बुधवार दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक होगी।

    पानी, बिजली, सीवर, मरम्मत सहित सभी शिकायतों का समाधान
    जनसुनवाई में फ्लैट्स से जुड़ी सभी बुनियादी और तकनीकी समस्याओं पर सुनवाई होगी, जिनमें शामिल हैं

    पीने के पानी की आपूर्ति में बाधा

    सीवर, ड्रेनेज और गंदे पानी की निकासी

    फ्लैट्स की मरम्मत और नियमित मेंटेनेंस

    इलेक्ट्रिकल और स्ट्रक्चरल समस्याएं

    हाउसिंग स्कीम से जुड़े लंबित मामले

    फ्लैट की पोज़िशन, अलॉटमेंट और हैंडओवर से संबंधित शिकायतें

    जमीनी स्तर पर समाधान, पारदर्शिता और जवाबदेही
    DDA अधिकारियों का कहना है कि इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य समस्याओं का समाधान जमीनी स्तर पर और कम समय में करना है। साइट इंजीनियरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शिकायतों को केवल दर्ज न करें, बल्कि समाधान की स्पष्ट समय-सीमा तय करते हुए कार्रवाई शुरू करें। अब तक फ्लैट निवासियों को अलग-अलग विभागों के बीच भटकना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत वे सीधे अपने साइट के जिम्मेदार इंजीनियर से संपर्क कर सकेंगे, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।

  • सिरसपुर मर्डर केस, अलाव ताप रहे नाबालिग पर 'मौत का वार' दिल्ली पुलिस ने 4 घंटे के 'मिडनाइट ऑपरेशन' में कातिलों को दबोचा

    सिरसपुर मर्डर केस, अलाव ताप रहे नाबालिग पर 'मौत का वार' दिल्ली पुलिस ने 4 घंटे के 'मिडनाइट ऑपरेशन' में कातिलों को दबोचा



    नई दिल्ली। देश की राजधानी के आउटर-नॉर्थ जिले (नरेला) से एक रूह कपा देने वाली वारदात सामने आई है। जहाँ राणा पार्क में दोस्तों के साथ अलाव ताप रहे एक नाबालिग लड़के की सरेआम चाकू मारकर हत्या कर दी गई। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने अपनी पेशेवर कार्यकुशलता का परिचय देते हुए महज़ 240 मिनट (4 घंटे) के भीतर कातिलों को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है।

    वारदात: अलाव की गर्मी के बीच बिछी लाश
    हाड़ कंपाने वाली ठंड में मृतक अपने कुछ दोस्तों के साथ नरेला के राणा पार्क में आग (अलाव) जलाकर बैठा था।

    माहौल सामान्य था, तभी अचानक रात के अंधेरे को चीरते हुए 6-7 हमलावर वहाँ पहुंचे। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, हमलावरों ने नाबालिग को घेर लिया और ताबड़तोड़ चाकुओं से हमला कर दिया। चश्मदीदों के अनुसार, हमला इतना अचानक और हिंसक था कि पीड़ित को संभलने तक का मौका नहीं मिला। शोर सुनकर जब तक लोग मदद के लिए दौड़ते, आरोपी मौके से फरार हो चुके थे।

    पुलिस का ‘एक्शन मोड’: CCTV बना सबसे बड़ा गवाह
    घटना की सूचना मिलते ही आउटर-नॉर्थ जिले की पुलिस टीम मौके पर पहुँची। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कई टीमें गठित की गईं। पुलिस ने इलाके के एग्जिट पॉइंट्स पर लगे CCTV कैमरों को खंगाला।

    फुटेज में हमलावरों के चेहरे और भागने की दिशा साफ नजर आई।बीट अधिकारियों ने फुटेज के आधार पर स्थानीय स्तर पर पहचान शुरू की।पुलिस ने मात्र 4 घंटे के अंदर घेराबंदी करके संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर आरोपियों को दबोच लिया।

    वजह: ‘पुरानी रंजिश’ का खूनी अंजाम
    शुरुआती पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इस कत्ल की पटकथा पुरानी रंजिश के चलते लिखी गई थी। हमलावरों और मृतक के बीच पहले से ही किसी बात को लेकर विवाद चल रहा था, जिसका बदला लेने के लिए आरोपियों ने पार्क में घेराबंदी की और इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया।जहां इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली की सड़कों पर नाबालिगों के बीच बढ़ते ‘गैंग कल्चर’ और गुस्से पर चिंता बढ़ा दी है, वहीं दिल्ली पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने अपराधियों को यह कड़ा संदेश दिया है कि वे कानून की नजरों से ज्यादा देर तक बच नहीं सकते।