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  • कॉमनवेल्थ कॉन्फ्रेंस में 42 देशों के प्रतिनिधि लेंगे हिस्सा, बांग्लादेश-पाकिस्तान ने बनाई दूरी

    कॉमनवेल्थ कॉन्फ्रेंस में 42 देशों के प्रतिनिधि लेंगे हिस्सा, बांग्लादेश-पाकिस्तान ने बनाई दूरी


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) गुरुवार को 28वीं कॉमनवेल्थ कॉन्फ्रेंस (Commonwealth Conference) का उद्घाटन करने जा रहा हैं। इस बार इस कॉन्फ्रेंस में 56 में से 42 देशों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। वहीं भारत (India) से चिढ़े बांग्लादेश और पाकिस्तान (Bangladesh and Pakistan) ने इससे दूरी बना ली है। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला (Lok Sabha Speaker Om Birla) ने कहा कि इस बार सबसे ज्यादा देश इस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने वाले हैं। इस बार ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूके भी इसमें शामिल होंगे।

    बिड़ला ने कहा कि बांग्लादेश से हो सकता है कि कोई भी इस कॉन्फ्रेंस में शामिल ना हो। वहीं पाकिस्तान भी इसमें हिस्सा नहीं लेगा। यह कॉन्फ्रेंस 14 से 16 जनवरी तक संविधान सदन में होगी। इसमें कम से कम 61 अधिकारी और प्रिसाइडिंग ऑफिसर शामिल होंगे। उन्होंने कहा, यह बहुत ही गर्व का विषय है कि इस बार भारत इस कॉन्फ्रेंस की मेजबानी कर रहा है और इसमें सबसे ज्यादा देश शामिल हो रहे हैं।

    इस कॉन्फ्रेंस में सदस्य देशों को बुलाने के लिए सारे प्रोटोकॉल को अपनाया गया है। सभी सदस्य देशों को समय रहते ही इसकी औपचारिक सूचना दे दी गई थी। उन्हें बाकायदा निमंत्रण भेजा गया। इसके अलावा वेबसाइट पर भी सभी देशों का नमंत्रण पत्र अपलोड किया गया है। इतने सारे देशों ने कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने की पुष्टि कर दी लेकिन पाकिस्तान और बांगलादेश की ओर से कोई प्रतिक्रिया ही नहीं दी गई।

    अब इस कॉन्फ्रेंस में केवल दो दिन शेष बचे हैं। ऐसे में अब उनके भाग लेने की कोई संभावना नहीं बची है। बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की भारत के प्रति चिढ़ और ज्यादा बढ़ गई है। वहीं बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूसुफ की अंतरिम सरकार और इस्लामाबाद में खूब गंठ रही है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है और भारत के खिलाफ जहर उगला जा रहा है। बांग्लादेश में भी हालात स्थिर नहीं हैं। कुल मिलाकर बांग्लादेश का हाल भी पाकिस्तान के जैसा हो रहा है। ऐसे में दोनों एक दूसरे को खूब भा रहे हैं लेकिन भारत उन्हें फूटी आंख भी नहीं सुहाता है।

  • महाराणा प्रताप सेना का दावा… अजमेर शरीफ दरगाह पहले था शिव मंदिर, कोर्ट से ASI सर्वे की मांग

    महाराणा प्रताप सेना का दावा… अजमेर शरीफ दरगाह पहले था शिव मंदिर, कोर्ट से ASI सर्वे की मांग


    अजमेर।
    अजमेर जिला अदालत (Ajmer District Court) में एक याचिका दायर कर दावा किया गया है कि अजमेर शरीफ दरगाह (Ajmer Sharif Dargah) मूल रूप से एक शिव मंदिर (Shiva Temple) है। महाराणा प्रताप सेना (Maharana Pratap Army) के अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार द्वारा दाखिल इस याचिका में एएसआई सर्वेक्षण (ASI survey) की मांग की गई है। उनका कहना है कि मंदिर को बदलकर दरगाह बनाया गया था जिसे लेकर वे लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। इससे पहले भी हिंदू सेना ऐसी मांग कर चुकी है।


    महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष ने डाली अर्जी

    अजमेर की अदालत में महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने एक अर्जी दी है। अपनी याचिका में राजवर्धन सिंह ने दावा किया कि अजमेर दरगाह पहले एक शिव मंदिर था जिसे बाद में दरगाह बना दिया गया। उन्होंने कहा कि वह इस बात को लेकर काफी समय से कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले राष्ट्रपति को भी एक प्रार्थना पत्र दिया गया था जिसे आगे की कार्रवाई के लिए राजस्थान के मुख्य सचिव को भेज दिया गया है।


    विष्णु गुप्ता भी कर चुके हैं ऐसा ही दावा

    वकील एपी सिंह ने कहा कि यह जगह भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर था। यह प्राचीन कालीन स्थल है। याचिका अजमेर की जिला अदालत में पेश की गई है। साल 2024 में हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने भी ऐसी ही एक याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया था कि सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह एक मंदिर के ऊपर बनी है। उन्होंने ने भी अदालत से दरगाह को हिंदू मंदिर घोषित करने की मांग की थी।


    पवित्र मुस्लिम स्थलों में शुमार

    बता दें कि अजमेर शरीफ दरगाह को भारत के पवित्र मुस्लिम धर्म स्थलों में गिना जाता है। यह अजमेर का एक मशहूर ऐतिहासिक स्थान है। सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती फारस से 1192 ईस्वी में अजमेर आए थे और 1236 ईस्वी में अपनी मृत्यु तक यहीं रहे। मुगल बादशाह हुमायूं ने उनकी याद में इस दरगाह का निर्माण करवाया था। यहां उनकी मजार मौजूद है। अपने शासन के दौरान मुगल सम्राट अकबर भी हर साल अजमेर की यात्रा पर आता था।

  • मुम्बई में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेश-म्यांमार से आए हजारों मुसलमान…

    मुम्बई में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेश-म्यांमार से आए हजारों मुसलमान…


    मुंबई।
    हाल के दिनों में भारत (India) में घुसपैठियों (Intruders) का मुद्दा काफी गर्म है। असम (Assam ) से लेकर पश्चिम बंगाल (West Bengal) और अन्य सीमावर्ती राज्यों में यही चर्चा में है। एसआईआर (ASI) के जरिए वोटर लिस्ट (Voter list) में सुधार करके घुसपैठियों को बाहर निकालने की कवायद चल रही है। इस बीच मुंबई से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है। इसके मुताबिक मुंबई में बड़ी संख्या में मुसलमान (Muslim) बांग्लादेश और म्यांमार (Bangladesh and Myanmar) से अवैध रूप से लोग आकर बसे हुए हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इन लोगों ने यहां आने के बाद वोटर कार्ड और आधार कार्ड जैसे वैध भारतीय पहचान पत्र बनवा लिए हैं। जिस प्रक्रिया के जरिए इन अवैध प्रवासियों को मुंबई में बसाया जा रहा है, उसे ‘मलवानी पैटर्न’ कहा जाता है।


    कुल 61 इलाके

    रिपोर्ट में बताया गया है कि मुंबई में कुल ऐसे 61 इलाके चिह्नित किए गए हैं, जहां पर अवैध प्रवासी मिले हैं। इस रिपोर्ट के कुल कुल सात हजार से अधिक लोगों से इंटरव्यू किए गए। रिपोर्ट में बताया गया है कि इंटरव्यू में यह सामने आया कि इसमें से 3014 लोगों ने बिना वीजा-पासपोर्ट के ही भारत में एंट्री की। इसमें भी 96 फीसदी लोग मुसलमान हैं जो बांग्लादेश और म्यांमार से भारत में आए हुए हैं। इस रिसर्च को अंजाम देने वाले एक प्रोफेसर ने बताया कि गरीब लोग बांग्लादेश छोड़ देते हैं। वह भारत में आते हैं और यहां आकर जाली दस्तावेज बनवा लेते हैं। यहां पर वो वोटर बन जाते हैं और नगर निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में वोट डालने लगते हैं। ‘ग्रे रेलिजियस नेटवर्क’ के चलते इनकी संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है।


    एजेंटों की कारगुजारी

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अवैध प्रवासियों के पास नकली दस्तावेज आता कहां से है। इसमें बताया गया है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में एजेंट्स हैं। यह लोग सात हजार से लेकर 30 हजार रुपए तक में सभी पहचान पत्र मुहैया करा देते हैं। रिसर्च में शामिल प्रोफेसर ने बताया कि अवैध रूप से भारत आने वाला स्थानीय एजेंट से मिलता है। इसके बाद एजेंट एक तय कीमत पर उन्हें वोटर कार्ड से लेकर आधार और पैन कार्ड तक मुहैया कराता है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम पिछले 12-13 साल से काम कर रहा है। इससे अवैध प्रवासियों के लिए भारत में बसना आसान हो जाता है। एक बार वोटर कार्ड मिल जाने के बाद इनके लिए चीजें काफी आसान हो जाता है।


    स्थानीय नेताओं की कारगुजारी

    रिपोर्ट में यह भी बताया कि मुंबई में छह विधानसभा क्षेत्रों, एक लोकसभा सीट और 56 म्यूनिसिपल वार्डों में इन अवैध वोटरों का असर है। इसके मुताबिक जितने लोगों का सर्वे किया गया, उनमें से 73 फीसदी लोगों के पास वोटर कार्ड मौजूद था। अवैध प्रवासियों को बसाने के लिए किसी दलदली इलाके में एक अवैध बस्ती बसाई जाती है। इसके बाद बिना डोम के मस्जिद बनाई जाती है। स्थानीय प्रभावशाली नेता इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाते हैं। इसके बाद नकली दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। फिर स्थानीय वोटर लिस्ट में बदलाव कर दिया जाता है। फिर उनके फंडिंग का इंतजाम किया जाता है।

  • 10 मिनट में मुंबई बंद बनाम खोखली धमकी: बीएमसी चुनाव से पहले राउत और फडणवीस में जुबानी जंग तेज

    10 मिनट में मुंबई बंद बनाम खोखली धमकी: बीएमसी चुनाव से पहले राउत और फडणवीस में जुबानी जंग तेज


    नई दिल्ली । बृहन्मुंबई महानगरपालिका बीएमसी चुनाव 2026 की आहट के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। शिवसेना यूबीटी के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के एक ताजा बयान ने राज्य में सियासी घमासान छेड़ दिया है। राउत ने दावा किया कि ठाकरे परिवार की ताकत आज भी इतनी है कि वे मात्र 10 मिनट के भीतर पूरी मुंबई को ठप कर सकते हैं। इस पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे गीदड़ भभकी करार दिया है।

    संजय राउत ने रविवार को एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान शिवसेना यूबीटी की सांगठनिक शक्ति का प्रदर्शन करते हुए कहा चुनाव में हार-जीत तो चलती रहती है लेकिन ठाकरे परिवार को कभी खत्म नहीं किया जा सकता। हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि हम आज भी 10 मिनट में मुंबई बंद करा सकते हैं। जब तक ठाकरे परिवार सलामत है तब तक मराठी अस्मिता और मुंबई भी सुरक्षित है। राउत का यह बयान उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच बढ़ती नजदीकियों और आगामी निकाय चुनावों में उनके संभावित गठबंधन की खबरों के बीच आया है।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राउत के इस दावे पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि भाजपा ऐसी खोखली धमकियों से डरने वाली नहीं है। 11 जनवरी को एक कार्यक्रम के दौरान फडणवीस ने कहा संजय राउत अपने घर के आसपास का इलाका भी बंद नहीं करा सकते। वह दिन भर सिर्फ सुर्खियों में रहने के लिए ऐसे बयान देते हैं। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि एक दौर था जब स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के एक इशारे पर मुंबई दो घंटे में बंद हो जाती थी, लेकिन अब शिवसेना यूबीटी के पास वैसी ताकत और जनाधार नहीं बचा है।

    फडणवीस ने साल 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को याद दिलाते हुए कहा कि जब एकनाथ शिंदे ने बगावत की थी तब भी यूबीटी नेताओं ने दावा किया था कि शिंदे मुंबई में कदम नहीं रख पाएंगे। उन्होंने कहा इसके बावजूद शिंदे 50 विधायकों के साथ मुंबई आए खुलेआम सड़कों से होते हुए राजभवन गए और सरकार बनाई। राउत के दावे जमीन से कोसों दूर हैं। 2026 के बीएमसी चुनाव को लेकर छिड़ी इस जंग ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में मुंबई की सत्ता पर काबिज होने के लिए राजनीतिक दल पूरी ताकत झोंकने वाले हैं। जहाँ एक ओर राउत कार्ड और ठाकरे परिवार की विरासत का हवाला दे रहे हैं वहीं फडणवीस और महायुति सरकार इसे बदलते वक्त की राजनीति बताकर चुनौती दे रही है।

  • सपा सांसद वीरेंद्र सिंह का विवादित बयान: भगवान राम को बताया समाजवादी, BJP पर माता सीता को वनवास भेजने की चुगली का आरोप

    सपा सांसद वीरेंद्र सिंह का विवादित बयान: भगवान राम को बताया समाजवादी, BJP पर माता सीता को वनवास भेजने की चुगली का आरोप


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी घमासान पैदा हो गया है। चंदौली से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद वीरेंद्र सिंह ने हाल ही में भगवान राम और माता सीता को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सांसद का दावा है कि भगवान राम वनवास के दौरान समाजवादी विचारधारा अपनाते थे और उन्होंने आम लोगों और वनवासियों का समर्थन प्राप्त किया। इसके विपरीत, बीजेपी समर्थक राम को राजा के रूप में पूजते हैं।
    वीरेंद्र सिंह ने अपने बयान में कहा कि बीजेपी समर्थकों ने राम से चुगली कर माता सीता को वनवास भेजवाया। उन्होंने आगे कहा, “भगवान राम भिलनी के बेर खाना पसंद करते थे, झोपड़ी में रहना पसंद करते थे और निषाद समाज से मित्रता करते थे। ऐसे लोगों को सम्मान देना और मित्र बनाना ही समाजवाद की असली पहचान है। हम राम के उस रूप को मानते हैं जो वनवासी और समाजवादी विचारों वाले थे, जबकि भाजपा समर्थक राजा राम के रूप की पूजा करते हैं।”

    सांसद के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नया विवाद पैदा कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान का भी जवाब दिया जिसमें मौर्य ने कहा था कि सपा के कुछ विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं। वीरेंद्र सिंह ने कहा कि मौर्य जैसे बयानों के कारण उन्हें पिछली बार चुनाव जीतने में कठिनाई हुई थी और इस बार भी उनका चुनाव वहीं से होने वाला है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वीरेंद्र सिंह का बयान सपा और बीजेपी के बीच आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकता है। सोशल मीडिया पर भी बयान को लेकर प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। कुछ लोग इसे आलोचना का विषय मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे सपा के समाजवादी दृष्टिकोण के अनुरूप सही ठहराते हुए देख रहे हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान न केवल राजनीतिक बहस को तेज करते हैं, बल्कि आगामी चुनावों में मतदाताओं की राय पर भी असर डाल सकते हैं। चूंकि यह बयान धार्मिक प्रतीकों और राजनीतिक विचारधारा से जुड़ा है, इसलिए इसकी संवेदनशीलता और प्रभाव दोनों ही ज्यादा हैं।

    इस विवाद ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर सपा और बीजेपी के बीच तनावपूर्ण माहौल पैदा कर दिया है। जनता और राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावों की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं। ऐसे बयान अक्सर चुनावी मोर्चों पर मतदाताओं की सोच को प्रभावित करते हैं और सियासी समीकरण बदल सकते हैं।

    कुल मिलाकर, वीरेंद्र सिंह का बयान यह दर्शाता है कि धार्मिक प्रतीकों और राजनीतिक विचारधारा का मिश्रण भारतीय राजनीति में कितनी तेजी से विवाद पैदा कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और सपा इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं और चुनावी रणनीतियों पर इसका कितना असर पड़ता है।

  • ट्रंप का चौंकाने वाला दावा: खुद को बताया वेनेजुएला का ‘एक्टिंग राष्ट्रपति’, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मचा हड़कंप

    ट्रंप का चौंकाने वाला दावा: खुद को बताया वेनेजुएला का ‘एक्टिंग राष्ट्रपति’, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मचा हड़कंप


    नई दिल्ली । वैश्विक राजनीति के मंच पर सोमवार को उस वक्त एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा की जिसने न केवल राजनयिक गलियारों में हलचल मचा दी है बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संप्रभुता के सिद्धांतों पर भी एक नई बहस छेड़ दी है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने एक विकिपीडिया पेज का स्क्रीनशॉट साझा किया जिसमें उनकी आधिकारिक तस्वीर के साथ उन्हें वर्तमान समय से वेनेजुएला का एक्टिंग प्रेसिडेंट बताया गया है। इस पोस्ट के माध्यम से उन्होंने खुद को अमेरिका के 45वें और 47वें राष्ट्रपति के रूप में भी पेश किया। हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि विकिपीडिया के वास्तविक रिकॉर्ड्स या किसी भी आधिकारिक सार्वजनिक दस्तावेज में ट्रंप को इस पद पर सूचीबद्ध नहीं किया गया है। साझा की गई तस्वीर को विशेषज्ञों द्वारा डॉक्टर्ड यानी एडिट की हुई बताया जा रहा है।

    यह नाटकीय घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ हाल ही में एक बड़े पैमाने की सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस अभियान के दौरान वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क ले जाया गया है जहाँ उन पर नार्को-टेररिज्म मादक पदार्थों के आतंकवाद के गंभीर आरोपों के तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका वेनेजुएला की सत्ता पर तब तक नियंत्रण रखेगा जब तक वहां एक सुरक्षित और समझदारी पूर्ण सत्ता परिवर्तन नहीं हो जाता।

    दूसरी ओर वेनेजुएला के भीतर राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से अलग नजर आ रहा है। वहाँ की वर्तमान उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री डेल्सी रोड्रिग्ज को देश की अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई है। 56 वर्षीय वकील और वरिष्ठ नेता रोड्रिगेज ने नेशनल असेंबली के समक्ष पद की शपथ ली जिसकी अध्यक्षता उनके भाई जॉर्ज रोड्रिगेज कर रहे हैं। ट्रंप के दावे ने अब इस अंतरिम सरकार की वैधता पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह दावा भले ही किसी आधिकारिक कानूनी ढांचे पर आधारित न हो लेकिन यह वेनेजुएला के संसाधनों और वहां की भविष्य की सत्ता पर अमेरिका के सख्त रुख को दर्शाता है। फिलहाल, व्हाइट हाउस या वेनेजुएला की नई अंतरिम सरकार की ओर से इस सोशल मीडिया पोस्ट पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है लेकिन इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता का माहौल जरूर पैदा कर दिया है।

  • रांची: 10 दिन से लापता दो मासूमों का सुराग नहीं, धुर्वा में फूटा जनाक्रोश; SIT के हाथ अब भी खाली

    रांची: 10 दिन से लापता दो मासूमों का सुराग नहीं, धुर्वा में फूटा जनाक्रोश; SIT के हाथ अब भी खाली


    रांची । झारखंड की राजधानी रांची का धुर्वा इलाका इन दिनों एक गहरे गम और गुस्से की लहर में डूबा हुआ है। महज चार और पांच साल की उम्र के दो मासूम भाई-बहन, अंश और अंशिका, पिछले 10 दिनों से लापता हैं, लेकिन पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। प्रशासन की इस विफलता से स्थानीय लोगों का सब्र जवाब दे गया, जिसके परिणामस्वरूप रविवार को पूरा धुर्वा क्षेत्र बंद रहा और सड़कों पर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।

    घटना की शुरुआत 2 जनवरी 2026 को हुई थी, जब ये दोनों मासूम अपने घर के पास ही एक किराने की दुकान से सामान लेने निकले थे। खेलकूद की उम्र में दुकान तक गए ये बच्चे वापस घर नहीं लौटे। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन जब बच्चों का पता नहीं चला तो 3 जनवरी को धुर्वा थाने में औपचारिक रूप से गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। देखते ही देखते 10 दिन बीत गए लेकिन पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। बच्चों की सुरक्षित बरामदगी न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने रविवार को 12 घंटे के बंद का आह्वान किया, जिससे इलाके का आम जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया।

    इस बंद का नेतृत्व राष्ट्रीय जनता दल आरजेडी के प्रदेश महासचिव कैलाश यादव द्वारा गठित एक विशेष समिति ने किया। प्रदर्शनकारियों ने मौसीबाड़ी और धुर्वा गोल चक्कर जैसे प्रमुख स्थानों पर टायर जलाकर सड़कों को जाम कर दिया। सुबह से ही प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण घंटों तक यातायात बाधित रहा जिससे राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कैलाश यादव ने कहा कि यह उन माता-पिता के लिए असहनीय पीड़ा का समय है जिनका हर पल अपने बच्चों की वापसी के इंतज़ार में बीत रहा है।

    प्रशासनिक स्तर पर, रांची पुलिस ने बच्चों की तलाश के लिए 40 पुलिसकर्मियों की एक विशेष जांच टीम SIT का गठन किया है। हालांकि, इतने बड़े कार्यबल के बावजूद अब तक कोई ठोस जानकारी हाथ न लगना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। शनिवार की शाम को भी स्थानीय निवासियों ने मौसीबाड़ी से बिरसा चौक तक एक विशाल मशाल जुलूस निकालकर सो रहे प्रशासन को जगाने की कोशिश की थी। वर्तमान में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति को हिरासत में भी लिया है। पूरा इलाका अब बस एक ही दुआ और मांग कर रहा है अंश और अंशिका की सुरक्षित वापसी।

  • पश्चिम बंगाल: हुगली में नाबालिग से दरिंदगी, TMC नेता समेत दो गिरफ्तार; सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

    पश्चिम बंगाल: हुगली में नाबालिग से दरिंदगी, TMC नेता समेत दो गिरफ्तार; सुरक्षा पर फिर उठे सवाल


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है जहाँ एक बंद पड़ी फैक्ट्री के भीतर 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया। इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं बल्कि राज्य की सियासत में भी उबाल ला दिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस TMC का स्थानीय युवा नेता बताया जा रहा है।

    पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह वीभत्स घटना गुरुवार शाम की है जब उत्तरपाड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बंद पड़ी हिंद मोटर फैक्ट्री के परिसर में पीड़िता अपनी एक सहेली के साथ गई थी। आरोप है कि वहाँ आरोपियों ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर नाबालिग को बंधक बनाया और उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जांच शुरू की गई। शनिवार को पुलिस ने बताया कि इस मामले में पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपांकर अधिकारी उर्फ सोनाई और एक अन्य नाबालिग के रूप में हुई है।

    दीपांकर अधिकारी इलाके में टीएमसी का सक्रिय युवा चेहरा माना जाता है। वहीं दूसरा आरोपी कथित तौर पर पीड़िता का पूर्व परिचित बताया जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है और गिरफ्तार आरोपियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। भाजपा की वरिष्ठ नेता और विधायक अग्निमित्रा पॉल ने ममता बनर्जी सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि बंगाल में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। पॉल ने दुख जताते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि एक महिला मुख्यमंत्री के शासन में इस तरह की आपराधिक गतिविधियां आम हो गई हैं।
    उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग की है।दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले में खुद को कानून के साथ खड़ा बताया है। स्थानीय टीएमसी नेता निताई दासगुप्ता ने स्वीकार किया कि गिरफ्तार आरोपी उनकी पार्टी का सदस्य है लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी किसी भी तरह के अपराध का समर्थन नहीं करती। उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से आरोपी को तुरंत निष्कासित करने की मांग की है। टीएमसी नेता अजय शंकर ने भी दोहराया कि कानून अपना काम करेगा और जो भी दोषी होगा उसे कड़ी सजा भुगतनी होगी। फिलहाल पुलिस अन्य फरार संदिग्धों की तलाश में जुटी है और इलाके में तनाव को देखते हुए सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

  • BMC चुनाव से ठीक पहले बीजेपी की बढ़ी टेंशन, अपनों के बयानों से बिगड़ सकते हैं सियासी समीकरण

    BMC चुनाव से ठीक पहले बीजेपी की बढ़ी टेंशन, अपनों के बयानों से बिगड़ सकते हैं सियासी समीकरण


    नई दिल्ली । एशिया के सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के चुनाव से ठीक 48 घंटे पहले सियासी माहौल अचानक गरमा गया है। 15 जनवरी 2026 को होने वाले मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी के लिए हालात आसान नहीं दिख रहे। वजह विपक्ष नहीं, बल्कि पार्टी के अपने नेताओं के बयान हैं, जिन्होंने मुंबई की पहचान और मराठी अस्मिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    चुनावी प्रचार के दौरान बीजेपी की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई के बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी। अन्नामलाई ने कहा कि मुंबई सिर्फ महाराष्ट्र का नहीं, बल्कि एक इंटरनेशनल शहर है। उन्होंने मुंबई के 75 हजार करोड़ रुपये के बजट की तुलना चेन्नई और बेंगलुरु से करते हुए इसे वैश्विक शहर बताया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब बीएमसी चुनाव में मराठी अस्मिता एक संवेदनशील और निर्णायक मुद्दा बना हुआ है।अन्नामलाई के बयान को महाराष्ट्र में कई राजनीतिक दलों ने मराठी पहचान पर हमला करार दिया। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मनसे के अध्यक्ष राज ठाकरे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे मुंबई को महाराष्ट्र से अलग दिखाने की कोशिश बताया। राज ठाकरे के अलावा शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और बीजेपी पर मराठी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।

    इसी बीच उत्तर प्रदेश के जौनपुर से बीजेपी के पूर्व सांसद कृपाशंकर सिंह के एक बयान ने आग में घी डालने का काम किया। चुनाव प्रचार के दौरान सिंह ने कहा कि मीरा-भाईंदर का मेयर उत्तर भारतीय होना चाहिए और इतने हिंदी भाषी पार्षद चुने जाने चाहिए कि महानगर पालिका में उत्तर भारतीय मेयर बने। इस बयान ने भी स्थानीय राजनीति में भूचाल ला दिया।शिवसेना उद्धव गुट और मनसे ने इन बयानों को मुद्दा बनाते हुए बीजेपी की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। मनसे नेता अविनाश जाधव ने कहा कि बीजेपी मराठी लोगों का वोट सिर्फ सत्ता हासिल करने के लिए चाहती है, जबकि असल में पार्टी की नीति उत्तर भारतीय राजनीति को बढ़ावा देने की है। शिवसेना नेताओं ने भी प्रचार में इसे मराठी मानुष के अपमान के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया है।

    बढ़ते विवाद के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कई चुनावी सभाओं में दोहराया कि बीजेपी ने कभी मराठी अस्मिता से समझौता नहीं किया है और न ही भविष्य में करेगी। सीएम फडणवीस ने कहा कि बीजेपी ही मराठी मानुष, मराठी माटी और महाराष्ट्र की संस्कृति की सच्ची आवाज है।हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदान से ठीक पहले इस तरह के बयान बीजेपी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। बीएमसी जैसे बड़े नगर निगम में स्थानीय पहचान और भावनाएं हमेशा निर्णायक भूमिका निभाती रही हैं। ऐसे में अपनों के बयान चुनावी समीकरणों को अंतिम समय में बदल सकते हैं और इसका सीधा असर मतदान पर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • Lohri 2026 Items: लोहरी की आग में अर्पित करें ये 4 खास चीजें, सुख-समृद्धि में होगी वृद्धि

    Lohri 2026 Items: लोहरी की आग में अर्पित करें ये 4 खास चीजें, सुख-समृद्धि में होगी वृद्धि

    नई दिल्ली। भारत के प्रमुख लोक पर्वों में शामिल लोहड़ी इस वर्ष 13 जनवरी 2026 को पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। खासतौर पर उत्तर भारत, पंजाब, हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में इस पर्व का विशेष महत्व है। लोहड़ी रबी फसलों की कटाई की शुरुआत, ठंड के मौसम के समापन और बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन किसान अच्छी फसल के लिए ईश्वर का आभार प्रकट करते हैं और आने वाले साल में समृद्धि की कामना करते हैं।

    लोहड़ी की रात और अग्नि पूजा का महत्व
    लोहड़ी की रात को पवित्र अग्नि प्रज्वलित कर उसकी परिक्रमा करने की परंपरा है। मान्यता है कि अग्नि में अर्पित की गई सामग्री के माध्यम से अग्निदेव और सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं। श्रद्धालु अग्नि के चारों ओर घूमते हुए सुख-शांति, स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। यह पर्व सामाजिक एकता और पारिवारिक मेल-मिलाप का भी प्रतीक है।

    लोहड़ी की पवित्र अग्नि में क्या अर्पित करना होता है शुभ
    लोहड़ी के अवसर पर अग्नि में कुछ विशेष चीजें अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। माना जाता है कि इन वस्तुओं का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है।

    तिल: नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक
    लोहड़ी की अग्नि में तिल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तिल पापों का नाश करता है और जीवन से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। साथ ही तिल वातावरण को भी शुद्ध करता है, जिससे घर और परिवार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    गुड़: रिश्तों में मिठास और सौहार्द
    गुड़ को मिठास और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। लोहड़ी की अग्नि में गुड़ डालने से पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों में मधुरता आती है। मान्यता है कि इससे आपसी मतभेद दूर होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

    मूंगफली: अच्छी फसल और समृद्धि की कामना
    मूंगफली को अन्न का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से किसानों के लिए लोहड़ी के दिन अग्नि में मूंगफली अर्पित करना बेहद शुभ माना गया है। ऐसा करने से आने वाले वर्ष में अच्छी फसल और आर्थिक समृद्धि की संभावना बढ़ती है।

    रेवड़ी: खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा
    लोहड़ी के पर्व पर रेवड़ी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि अग्नि में रेवड़ी अर्पित करने से बुरी शक्तियों का नाश होता है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

    आस्था और परंपरा का संगम
    लोहड़ी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। अग्नि में अर्पित की जाने वाली ये चार चीजें जीवन में खुशहाली, समृद्धि और सकारात्मकता लाने का प्रतीक मानी जाती हैं।