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  • भारत की नदी में बहता था हीरा… इतना खजाना कि डच-ब्रिटिश हो गए मालामाल

    भारत की नदी में बहता था हीरा… इतना खजाना कि डच-ब्रिटिश हो गए मालामाल

    नई दिल्‍ली। भारत को सोने की चीड़िया कहा जाता था, पर क्या आपको पता है कि, इसी सोने की चीड़िया जैसे देश में एक ऐसी नदी थी जहां हीरे बहा करते थे. आज हम आपको भारत में बहने वाली हीरों के नदी के बारे में बताएंगे. कहा जाता है ये नदी जहां बहती है वहां समृद्धियों के स्रोत का कभी अंत नहीं हुआ. इस नदी और इसके आस-पास से निकालें हीरे, पूरी दुनिया में सबसे बेहतरीन माने जाते थे.

    हीरे की खानों की वजह से मिला नाम
    यह उपनाम नदी के पानी या बहाव के कारण नहीं बल्कि उसके आसपास के इलाके में हीरे की खानें और खनन के क्षेत्र होने की वजह से यह मिला था. सदियों तक कृष्णा नदी और उसके आसपास के इलाके दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक हीरा उत्पादक क्षेत्र रहे थे. व्यापारी, यात्री और शासक इस क्षेत्र की ओर आकर्षित होते थे. इसने न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया बल्कि भारत के राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव को भी दूर-दराज के देशों तक पहुंचाने का काम करवाया था.
    कृष्णा नदी के किनारे खासतौर पर गोलकोंडा क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से हीरे के लिए प्रसिद्ध था. गोलकोंडा के हीरे अपनी चमक, आकार और शुद्धता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर थे.

    माना जाता है कि कोह-ए-नूर, होप डायमंड और दरिया-ए-नूर जैसे प्रसिद्ध हीरे इसी क्षेत्र से निकले थे. इन हीरों ने भारत को कई शताब्दियों तक दुनिया का प्रमुख हीरा स्रोत बनाए रखा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इसकी ख्याति बढ़ाई थी.

    1,300 किलोमीटर लंबी नदी
    भूगोल की दृष्टि से कृष्णा नदी महाराष्ट्र के महाबलेश्वर के पास पश्चिमी घाट से निकलती है. यह नदी महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से होकर बंगाल की खाड़ी में मिलती है. लगभग 1,300 किलोमीटर लंबी यह नदी कृषि, बस्तियों और व्यापार के लिए उपजाऊ बेसिन प्रदान करती रही है. यही वजह है कि हीरा व्यापार से जुड़े क्षेत्रों की समृद्धि में इसका बड़ा योगदान रहा है.

    गोलकोंडा केवल एक किला या खदान नहीं था बल्कि कृष्णा के ईलाकों से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय हीरा व्यापार केंद्र था. मध्यकाल में यहां से निकले हीरे भारत के पूर्वी तट के बंदरगाहों के जरिए एशिया,

    मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंचते थे. डच, ब्रिटिश और अन्य यूरोपीय व्यापारी इन कीमती पत्थरों तक पहुंच बनाने के लिए प्रतिस्पर्धा करते रहते थे. 18वीं शताब्दी में ब्राजील में हीरे की खोज से पहले तक भारत दुनिया का प्रमुख हीरा स्रोत माना जाता था.
  • छिंदवाड़ा BJP में गुटबाजी: सांसद बंटी साहू और जिलाध्यक्ष शेषराव यादव को प्रदेश अध्यक्ष ने किया भोपाल तलब , खींचतान खत्म करने का अल्टीमेटम

    छिंदवाड़ा BJP में गुटबाजी: सांसद बंटी साहू और जिलाध्यक्ष शेषराव यादव को प्रदेश अध्यक्ष ने किया भोपाल तलब , खींचतान खत्म करने का अल्टीमेटम


    छिंदवाड़ा । मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर भाजपा के अंदर गुटबाजी ने गंभीर रूप ले लिया है जिसके कारण पार्टी की एकता पर सवाल उठने लगे हैं। लोकसभा सांसद विवेक ‘बंटी’ साहू और भाजपा जिला अध्यक्ष शेषराव यादव के बीच चल रहे विवाद को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दोनों नेताओं को भोपाल स्थित पार्टी कार्यालय में तलब किया है। यह बैठक भाजपा के शीर्ष नेताओं हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की उपस्थिति में हुई जहां दोनों नेताओं को एक साथ बैठाकर बातचीत कराई गई और भविष्य में पार्टी की एकता बनाए रखने का सख्त अल्टीमेटम दिया गया।

    गुटबाजी की यह समस्या छिंदवाड़ा भाजपा की जिला इकाई में लंबे समय से चल रही है। सांसद बंटी साहू और जिलाध्यक्ष शेषराव यादव के बीच मतभेद सार्वजनिक हो चुके हैं। जानकारी के अनुसार शेषराव यादव की बैठकों में सांसद बंटी साहू शामिल नहीं होते थे और इस दौरान यादव ने साहू के खिलाफ बयानबाजी भी की थी। यह विवाद जिले में जिला कार्यकारिणी गठन पदों के बंटवारे और अन्य संगठनात्मक फैसलों को लेकर और भी गहरा गया था।

    भोपाल में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दोनों नेताओं से कहा कि भाजपा ने छिंदवाड़ा में लंबे संघर्ष के बाद सफलता हासिल की है लेकिन वर्तमान स्थिति पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने दोनों नेताओं से अपील की कि वे पार्टी हित में मतभेदों को भुलाकर एकजुट होकर काम करें क्योंकि पार्टी की छवि और भविष्य की सफलता इसके ऊपर निर्भर है। इस बीच संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने मध्यस्थता करते हुए दोनों नेताओं को चेतावनी दी कि अगर खींचतान तुरंत खत्म नहीं की गई तो पार्टी को इसका भारी नुकसान हो सकता है।

    भा ज पा सूत्रों के अनुसार बैठक सकारात्मक रही और दोनों नेताओं ने पार्टी के निर्देशों का पालन करने का आश्वासन दिया है। हालांकि यह देखना बाकी है कि इस विवाद के समाधान के बाद पार्टी के अंदर का माहौल कैसे बनता है और आगामी चुनावों में पार्टी को इसका कितना लाभ होता है। यह घटनाक्रम भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक चुनौती बनकर सामने आया है क्योंकि छिंदवाड़ा जैसे महत्वपूर्ण जिले में आंतरिक मतभेद पार्टी की भविष्यवाणी और चुनावी रणनीति पर असर डाल सकते हैं।

  • फर्जी मतदान करने वालों से निपटेंगे उद्धव और राज ठाकरे

    फर्जी मतदान करने वालों से निपटेंगे उद्धव और राज ठाकरे


    मुंबई। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत के एक बयान ने मंगलवार को नगर निकाय चुनावों में संभावित हिंसा को लेकर चिंता बढ़ा दी। उन्होंने घोषणा की कि नगर निकाय चुनावों के लिए 15 जनवरी को होने वाले मतदान के दिन उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी और मनसे के कार्यकर्ताओं का एक संयुक्त दस्ता गठित किया जाएगा, जिसका काम दोहरा और फर्जी मतदान करने वालों की पिटाई करना होगा।

    राउत की धमकी मुंबई और अन्य नगर निकायों के चुनावों के लिए प्रचार के दौरान महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे द्वारा की गई सार्वजनिक अपील के बाद आई है।

    भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बढ़ते प्रभाव के बीच मुंबई के गढ़ की रक्षा के लिए मनसे और शिवसेना (UBT) ने गठबंधन किया है।

    शिवसेना (UBT) के नेता ने यहां पत्रकारों से कहा, “हमने (शिवसेना-UBT और MNS) एक टीम बनाई है, जो 15 जनवरी को सुबह सात बजे से सक्रिय हो जाएगी। जैसे ही क्षेत्रवार दोहरे मतदाताओं की जानकारी दस्ते को मिलेगी, संयुक्त टीम ऐसे मतदाताओं से उचित तरीके से निपटेगी।” राउत की यह चेतावनी 29 नगर निकायों के चुनावों के लिए जारी जोरदार प्रचार अभियान की पृष्ठभूमि में आई है, जिसमें एक तरफ भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना व दूसरी तरफ मुंबई महानगर क्षेत्र में शिवसेना (उबाठा)-मनसे गठबंधन के बीच तीखी तकरार देखने को मिली है।

    विपक्ष ने राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष फर्जी और दोहरी मतदाता सूची का मुद्दा आक्रामक रूप से उठाया था और मतदाता सूची में कथित विसंगतियों को दूर करने की मांग की थी। राउत से जब दोहरी मतदाता होने का दावा करके व्यक्तियों पर हमला करने के बाद के कानूनी परिणामों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने तर्क दिया कि कानून के दायरे में न आने वालों को पीटना कानून और व्यवस्था की स्थिति भंग करने के बराबर नहीं है। राउत ने पूछा, ‘क्या फर्जी मतदान कानून और व्यवस्था की परिभाषा में आता है?’
  • महाकुंभ से सुर्खियों में आईं हर्षा रिछारिया ने छोड़ा धर्म का रास्ता, बोलीं– मैं सीता नहीं हूं जो अग्नि परीक्षा दूं

    महाकुंभ से सुर्खियों में आईं हर्षा रिछारिया ने छोड़ा धर्म का रास्ता, बोलीं– मैं सीता नहीं हूं जो अग्नि परीक्षा दूं



    नई दिल्ली।
    प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान अचानक सुर्खियों में आईं सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने अब धर्म की राह छोड़ने का ऐलान कर दिया है। हर्षा ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में बताया कि पिछले एक साल में उन्हें लगातार विरोध, मानसिक दबाव और चरित्र हनन का सामना करना पड़ा, जिसने उनके मनोबल को पूरी तरह तोड़ दिया।

    महाकुंभ के दौरान हर्षा ने आध्यात्मिक जीवन अपनाने का संकल्प लिया था और धर्म के रास्ते पर चलने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों को हर कदम पर रोका गया। हर्षा ने कहा,
    “मैं कोई गलत काम नहीं कर रही थी, न चोरी, न अपराध। मैं सिर्फ धर्म के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहती थी, लेकिन हर बार मुझे रोका गया।”

    हर्षा ने यह भी स्पष्ट किया कि उन पर लगे कुछ आरोप पूरी तरह गलत और बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने यह धारणा बना दी कि उन्होंने महाकुंभ के नाम पर करोड़ों रुपये कमाए, जबकि असलियत इसके विपरीत है। हर्षा ने कहा,
    “आज मैं उधारी में हूं। धर्म की राह अपनाने से पहले मैं एक एंकर थी, अच्छा कमा रही थी और खुश थी।”

    उन्होंने यह भी बताया कि जब कोई उनके मनोबल को नहीं तोड़ सका, तो उनके चरित्र पर सवाल उठाए गए। हर्षा ने कहा,
    “एक लड़की को तोड़ने का सबसे आसान तरीका उसका चरित्र हनन करना होता है।”

    अपने बयान में हर्षा ने धर्म और धार्मिक प्रतीकों का जिक्र करते हुए कहा,
    “आप अपना धर्म अपने पास रखिए। मैं मां सीता नहीं हूं जो बार-बार अग्नि परीक्षा दूं। जो परीक्षा मुझे देनी थी, वो मैं दे चुकी हूं।”

    हर्षा ने घोषणा की कि माघ मेले की मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद वे अपने आध्यात्मिक संकल्प को विराम देंगी और अपने पुराने पेशे में लौटेंगी।

    सोशल मीडिया पर यह वीडियो सामने आने के बाद हर्षा के फैसले को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। एक वर्ग इसे उनके आत्मसम्मान और व्यक्तिगत निर्णय के रूप में देख रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे धर्म से पीछे हटना मान रहा है।

    महाकुंभ से शुरू हुई हर्षा की यह कहानी अब आस्था, समाज और महिला सम्मान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर नए सवाल खड़े कर रही है।

  • बीकानेर में छात्रा के साथ शर्मनाक वारदात, एक आरोपी फरार, पुलिस ने शुरू की तलाश

    बीकानेर में छात्रा के साथ शर्मनाक वारदात, एक आरोपी फरार, पुलिस ने शुरू की तलाश

    नई दिल्ली। राजस्थान के बीकानेर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। नापासर थाना क्षेत्र में 12वीं कक्षा की छात्रा को दो युवकों ने जबरन कार में बैठा लिया और चलती कार में कई घंटे तक उसके साथ गैंगरेप किया। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरा आरोपी अभी फरार है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह वारदात 6 जनवरी को हुई थी, लेकिन पीड़िता के परिवार ने 11 जनवरी को शिकायत दर्ज कराई।

    स्कूल जाते समय रास्ते से अगवा

    जानकारी के अनुसार छात्रा सुबह घर से स्कूल जाने के लिए निकली थी। इसी दौरान दो युवक कार में आए और उसे जबरन कार में बैठा लिया। आरोपी उसे धमकाते रहे और कई घंटों तक कार में घुमाते हुए बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म करते रहे। डरी हुई छात्रा लगातार मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन आरोपी उसे चुप कराने की कोशिश करते रहे।

    आरोपियों में एक वकील?

    मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि आरोपियों में से एक वकील है, हालांकि पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जब आरोपी कार को पड़ोसी गांव में ले गए, तो ग्रामीणों ने कार से चीख-पुकार सुनी और वाहन रोक लिया। ग्रामीणों के आने से आरोपी घबरा गए और छात्रा को जबरन कार से उतारकर भाग गए।

    ग्रामीणों की सतर्कता से टली बड़ी अनहोनी

    घटना के बाद ग्रामीणों ने तुरंत छात्रा के परिजनों को सूचना दी। परिवार मौके पर पहुंचा और छात्रा को अपने साथ घर ले गया। इसके बाद परिजन पुलिस से संपर्क कर FIR दर्ज कराई। नापासर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस अधिकारी हिमांशु शर्मा ने बताया कि पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से अधिक है, जबकि आरोपियों की उम्र अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    इलाके में फैला गुस्सा और सुरक्षा पर सवाल

    इस घटना के बाद इलाके में भारी गुस्सा है। स्थानीय लोग बेटियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते ग्रामीणों ने हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो हालात और भी गंभीर हो सकते थे। पुलिस अब फरार आरोपी की तलाश में जुटी हुई है और पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

    यह घटना एक बार फिर बेटियों की सुरक्षा और समाज की जागरूकता की जरूरत को सामने लाती है।

  • उत्तर भारत की लड़कियों को पढ़ाई से रोका जाता है, बस घर के काम करवाए जाते हैं, दयानिधि मारन का विवादित बयान

    उत्तर भारत की लड़कियों को पढ़ाई से रोका जाता है, बस घर के काम करवाए जाते हैं, दयानिधि मारन का विवादित बयान


    नई दिल्ली। डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने हाल ही में एक विवादास्पद बयान देकर उत्तर और दक्षिण भारत में महिला शिक्षा और सशक्तिकरण पर बहस छेड़ दी है। चेन्नई के कैद-ए-मिल्लत महिला विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मारन ने कहा कि उत्तर भारत में अक्सर लड़कियों को घर में रोका जाता है और उन्हें केवल घरेलू काम करने के लिए कहा जाता है, जबकि उन्हें पढ़ाई या नौकरी के अवसर नहीं मिलते।

    मारन ने दक्षिण भारत के मॉडल की भी जमकर तारीफ की।

    उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में लड़कियों को पढ़ाई और करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनकी द्रविड़ियन सरकार की सराहना करते हुए बताया कि उनके नेतृत्व में लड़कियों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने भी हिस्सा लिया और छात्राओं को लैपटॉप वितरित किए।

    मारन ने कहा, हम चाहते हैं कि हमारी लड़कियां पढ़ें, शिक्षित बनें और अपने भविष्य में सशक्त हों। वहीं, उत्तर भारत में लड़कियों को केवल घर के कामकाज तक सीमित रखा जाता है।

    उन्होंने तमिलनाडु को भारत का सबसे उन्नत प्रदेश बताते हुए द्रविड़ियन मॉडल की विशेष प्रशंसा की।

    आंकड़े बताते हैं अंतर
    2011 की जनगणना के अनुसार, तमिलनाडु में 7 साल से ऊपर की उम्र की महिला साक्षरता दर 73.44% है। वहीं उत्तर भारत के राज्यों में यह दर कम है:

    उत्तर प्रदेश – 57.18%

    हरियाणा – 65.94%

    राजस्थान – 52.12%

    हिमाचल प्रदेश – 75.93%

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतर सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक कारणों से उत्पन्न होता है।

    राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
    मारन के बयान पर उत्तर और दक्षिण भारत में तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं।

    कुछ लोगों ने इसे विभाजनकारी टिप्पणी कहा, जबकि अन्य ने महिला शिक्षा और समान अवसरों पर बहस को बढ़ावा देने की बात कही। सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस बयान पर बहस तेज हो गई है।

    विश्लेषकों का मानना है कि दयानिधि मारन का बयान केवल विवाद नहीं, बल्कि भारत में महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और सामाजिक समानता के मुद्दों पर नई बहस को जन्म देने वाला कदम है। राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसकी प्रतिक्रियाएं अभी भी सामने आ रही हैं और यह मामला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुका है।

  • अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026: वडोदरा के आसमान में दिखा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भव्य नज़ारा

    अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026: वडोदरा के आसमान में दिखा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भव्य नज़ारा

    नई दिल्ली। वडोदरा का वातावरण मंगलवार को उत्सवमय हो गया, जब गुजरात टूरिज्म, जिला प्रशासन और वडोदरा महानगरपालिका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026 का आयोजन किया गया। इस महोत्सव में देश-विदेश से आए 160 से अधिक पतंगबाजों ने अद्भुत और रंग-बिरंगी पतंगों के साथ अपने कौशल का प्रदर्शन किया, जिससे पूरा आसमान उत्सव की छटा से भर गया। इस अवसर पर वसुधैव कुटुंबकम का दृश्य भी देखने को मिला।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों का जादू

    महज भारत तक सीमित नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, यूके, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड समेत कई देशों के पतंगबाजों ने अनोखे डिजाइन और विविध आकृतियों वाली पतंगों के साथ अपने करतब दिखाए। इसके साथ ही बिहार, राजस्थान, तमिलनाडु सहित भारत के आठ राज्यों से आए पतंगबाजों ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    उत्सव में बड़ी संख्या में दर्शक और मेहमान

    महोत्सव में जनता की भारी भीड़ उमड़ी, जिसमें जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में मेहमानों के लिए वडोदरा की विशेष ऊंझा जलेबी की व्यवस्था की गई, जिसने इस उत्सव को और भी यादगार बना दिया।

    सांसद डॉ. हेमांग जोशी की प्रतिक्रिया

    वडोदरा के सांसद डॉ. हेमांग जोशी ने कहा कि वडोदरा में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव बहुत ही जोरशोर से आयोजित हो रहा है। इस कार्यक्रम में 20 से अधिक देशों के विदेशी मेहमान शामिल हुए। उन्होंने बताया कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए दृष्टि का परिणाम है। उन्होंने कहा कि महोत्सव में वसुधैव कुटुंबकम का दृश्य विशेष रूप से देखने को मिला।

    म्युनिसिपल कमिश्नर अरुण महेश बाबू का संदेश

    वडोदरा महानगरपालिका के म्युनिसिपल कमिश्नर अरुण महेश बाबू ने बताया कि यह कार्यक्रम गुजरात टूरिज्म, जिला प्रशासन और महानगरपालिका के संयुक्त प्रयास से सफल हुआ है। उन्होंने कहा कि विदेशों और भारत के विभिन्न राज्यों से आए लोग वडोदरा की जनता के साथ मिलकर महोत्सव को सफल बनाने में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए वडोदरा की जनता को इस कार्यक्रम की सफलता के लिए बधाई दी।

    उत्सव की खासियत

    इस महोत्सव की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि देश-विदेश के पतंगबाजों और स्थानीय प्रतिभागियों ने मिलकर रंगीन और विविध पतंगों से वडोदरा के आसमान को सजाया। दर्शकों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि यह महोत्सव सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामुदायिक भावना को भी मजबूत करने वाला अवसर साबित हुआ।

  • UP Politics: शिवसेना की एंट्री से सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल की मुश्किलें बढ़ीं, 2027 विधानसभा चुनाव में NDA में नया समीकरण

    UP Politics: शिवसेना की एंट्री से सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल की मुश्किलें बढ़ीं, 2027 विधानसभा चुनाव में NDA में नया समीकरण


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अब गर्म होती दिख रही हैं। एनडीए के घटक दलों में से शिवसेना (शिंदे गुट) ने राज्य में सक्रिय भूमिका निभाने का ऐलान कर दिया है, जिससे सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल (एस) की रणनीति पर असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है। शिवसेना ने साफ किया कि वह बीजेपी के साथ गठबंधन में विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी और कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।

    शिवसेना के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक अभिषेक वर्मा ने कहा कि पार्टी अब यूपी में मजबूत स्थिति में है और इसे और बेहतर किया जाएगा। वर्मा ने स्पष्ट किया कि शिवसेना केवल विधानसभा चुनाव में ही नहीं, बल्कि जिला पंचायत, नगर पंचायत और निकाय चुनावों में भी सक्रिय होगी।

    उन्होंने कहा, “हम बीजेपी को बड़ा मानकर चुनाव लड़ेंगे, और कुछ सीटों पर हमारे उम्मीदवार उतारने की अनुमति भी मिल चुकी है।”

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवसेना की एंट्री यूपी के राजनीतिक परिदृश्य में नई हलचल पैदा करेगी। सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वे पंचायत चुनाव अकेले लड़ेंगे और विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि किस दल की रणनीति प्रभावित होती है और किस सीट पर खेल बदल सकता है।

    उत्तर भारतीयों के साथ महाराष्ट्र में कथित भेदभाव और मारपीट के सवाल पर वर्मा ने स्पष्ट किया कि शिवसेना गुंडागर्दी नहीं करती।

    उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और उद्धव ठाकरे के शिवसेना गुट से जुड़ी हैं। वर्मा ने आगे कहा, “अगर उत्तर भारतीयों से इतनी ही दिक्कत है, तो इसे बॉलीवुड या अन्य सार्वजनिक मंचों पर भी उजागर किया जा सकता है।”

    शिवसेना की सक्रियता से उत्तर प्रदेश में हिंदू वोट बैंक में हलचल और एनडीए के गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर नई रणनीति बन सकती है। बीजेपी के लिए यह चुनौती और अवसर दोनों है, क्योंकि गठबंधन में सीटों का बंटवारा और उम्मीदवार चयन अब और अधिक संवेदनशील मुद्दा बन गया है।

    पार्टी पदाधिकारी ने कहा कि यूपी में संगठन को मजबूत किया जाएगा, स्थानीय नेताओं और युवा कार्यकर्ताओं को जोड़कर पार्टी का नेटवर्क हर जिले में फैलाया जाएगा। यह कदम शिवसेना को सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल के मुकाबले चुनावी मैदान में मजबूती देने के साथ ही बीजेपी के लिए भी नए समीकरण तैयार करेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि 2027 विधानसभा चुनाव में शिवसेना की भागीदारी राज्य में राजनीतिक समीकरण बदल सकती है। अब यह देखना रोचक होगा कि कौन सा दल इस नए मोड़ का फायदा उठाता है और किसकी रणनीति प्रभावित होती है। राजनीतिक हलचल और गठबंधन की राजनीति यूपी के मतदाताओं के लिए भी बेहद दिलचस्प और निर्णायक साबित हो सकती है।

  • नौसेना की पहल: लक्षद्वीप में विशाल मेडिकल और सर्जिकल कैंप, कई विशेषज्ञ शामिल

    नौसेना की पहल: लक्षद्वीप में विशाल मेडिकल और सर्जिकल कैंप, कई विशेषज्ञ शामिल

    नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र बल न केवल देश की रक्षा करते हैं, बल्कि अब नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसी कड़ी में नौसेना ने लक्षद्वीप में बहु-विशेषज्ञ मेगा मेडिकल एवं सर्जिकल शिविर आयोजित किया है। इस पहल के अंतर्गत कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी समेत अनेक सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं में परामर्श, जांच और उपचार प्रदान किया जा रहा है।

    उद्घाटन और आयोजन स्थल

    13 जनवरी को कवरत्ती स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने इस शिविर का औपचारिक उद्घाटन किया। शिविर 17 जनवरी तक चलेगा और लक्षद्वीप के पांच द्वीप-अमीनी, एंड्रॉथ, अगत्ती, कवरत्ती और मिनिकॉय-में विस्तारित किया गया है।

    स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार यह विशाल पैमाने का चिकित्सा शिविर दूरदराज के नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शिविर में व्यापक स्वास्थ्य जांच, शीघ्र निदान, समय पर चिकित्सकीय परामर्श, जरूरी उपचार और निशुल्क दवाओं का वितरण द्वीपवासियों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित करेगा।

    बहु-विशेषज्ञ सेवाएं और मोतियाबिंद ऑपरेशन

    शिविर में कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी समेत बुनियादी और सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं की व्यवस्था है। कवरत्ती में नेत्र विज्ञान टीम मोतियाबिंद रोगियों के ऑपरेशन कर रही है, जबकि मरीजों को चश्मे, आई ड्रॉप्स और दवाएं भी प्रदान की जा रही हैं।

    सरकारी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों के अनुरूप

    यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के उद्देश्यों के अनुरूप है। शिविर ‘वन अर्थ, वन हेल्थ’ के वैश्विक स्वास्थ्य दर्शन के अनुसार उपचारात्मक, निवारक और प्रोत्साहक स्वास्थ्य सेवाओं का समन्वय प्रस्तुत करता है।

    नौसेना प्रमुख के विचार

    एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि यह पहल तीन दृष्टियों से अनूठी है-समन्वय, जिसमें तीनों सशस्त्र सेवाएं और स्थानीय प्रशासन मिलकर कार्य कर रहे हैं; विस्तार, जिसमें कई विशेषज्ञ शामिल हैं; और पैमाना, जिसमें बड़ी संख्या में चिकित्सा स्टाफ तैनात है। इससे नागरिक सैन्य सहयोग और अंतर-सेवा समन्वय मजबूत होता है।

    आधुनिक सुविधाओं और सहयोगी स्टाफ

    शिविर में देशभर के विभिन्न रक्षा चिकित्सा प्रतिष्ठानों से 29 मेडिकल अधिकारी, 2 नर्सिंग अधिकारी और 42 पैरामेडिकल कर्मी तैनात हैं। साथ ही जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं को आधुनिक उपकरण, स्टोर और दवाओं से सपोर्ट किया गया है।

    यह बहु-विशेषज्ञ मेडिकल शिविर भारतीय नौसेना और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं की सेवा-भावना, जिम्मेदारी और लक्षद्वीप के लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है।

  • दिल्ली एयरपोर्ट पर 6 दिन तक उड़ानें प्रभावित, गणतंत्र दिवस सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत एयरस्पेस बंद

    दिल्ली एयरपोर्ट पर 6 दिन तक उड़ानें प्रभावित, गणतंत्र दिवस सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत एयरस्पेस बंद


    नई दिल्ली । दिल्ली एयरपोर्ट पर अगले कुछ दिनों में हवाई यात्रियों के लिए एक और मुश्किलें आ सकती हैं क्योंकि गणतंत्र दिवस की सुरक्षा तैयारियों के चलते दिल्ली के ऊपर एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा। इस एयरस्पेस बंद के कारण 21 जनवरी से शुरू होकर 6 दिन तक उड़ानों में देरी और रद्द होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सरकार ने मंगलवार को एक नोटिस टू एयरमेन जारी किया है जिसके तहत दिल्ली एयरस्पेस रोज़ाना सुबह 10:20 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक बंद रहेगा। लगभग 2 घंटे 25 मिनट के इस बंद के दौरान हजारों उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं खासकर कनेक्टिंग फ्लाइट्स में रुकावटें आ सकती हैं। यह अस्थायी एयरस्पेस बंद गणतंत्र दिवस के सुरक्षा प्रोटोकॉल और ड्रेस रिहर्सल के तहत होता है, जिसमें परेड, वायुसेना का फ्लाईपास्ट, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, और सैन्य साजो-सामान का प्रदर्शन होता है। इस दौरान होने वाली हवाई गतिविधियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एयरस्पेस बंद किया जाता है।

    उड़ानों पर प्रभाव और बदलाव

    एविएशन एनालिटिक्स कंपनी सिरियम के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में 600 से अधिक उड़ानों पर असर पड़ने की संभावना है। यह समय दिल्ली एयरपोर्ट के सबसे व्यस्त स्लॉट्स में से एक होता है, जब यात्री विभिन्न घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचते हैं। इसलिए, उड़ानों के रद्द होने, री-शेड्यूलिंग और ऑपरेशनल रुकावटों से हजारों यात्रियों की यात्रा प्रभावित हो सकती है। कम समय में सूचना मिलने की वजह से एयरलाइंस को अपने शेड्यूल में बदलाव करने में परेशानी हो सकती है, और यात्रियों को वैकल्पिक रूट्स, टिकट रिफंड और री-शेड्यूलिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे एयरलाइंस पर अतिरिक्त खर्च का बोझ भी पड़ेगा।

    क्यों किया जा रहा है एयरस्पेस बंद

    गणतंत्र दिवस के दौरान दिल्ली में होने वाले फ्लाईपास्ट और सुरक्षा प्रोटोकॉल को देखते हुए, दिल्ली के ऊपर एयरस्पेस को अस्थायी रूप से बंद किया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया कर्तव्य पथ पर होने वाली सैन्य परेड, वायुसेना के फ्लाईपास्ट और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को सुरक्षित बनाने के लिए की जाती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि उड़ानें पूरी तरह से रद्द हो जाएंगी। ज्यादातर उड़ानों के समय में बदलाव किया जाएगा, और यात्रियों को अन्य उड़ानों में समायोजित किया जाएगा।

    यात्रियों के लिए सुझाव

    अगर आपकी फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट से तय तारीख और समय पर आ रही या जा रही है, तो यह जरूरी है कि आप अपनी कॉन्टैक्ट डिटेल्स जैसे मोबाइल नंबर और ईमेल एयरलाइंस के रिकॉर्ड में अपडेट रखें ताकि किसी भी बदलाव या कैंसलेशन की स्थिति में एयरलाइंस आपसे तुरंत संपर्क कर सके। अगर उड़ान रद्द होती है तो एयरलाइंस आमतौर पर यात्रियों को वैकल्पिक फ्लाइट या रिफंड का विकल्प देती है। हालांकि अंतिम समय में टिकट के बदलाव या नई बुकिंग में हवाई किराया पहले की तुलना में अधिक हो सकता है। ऐसे में यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे उपलब्ध वैकल्पिक फ्लाइट्स को प्राथमिकता दें और यात्रा से पहले एयरलाइंस की अद्यतन जानकारी जरूर जांच लें।