Category: National

  • आज भी फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं NSA अजीत डोभाल

    आज भी फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं NSA अजीत डोभाल

    नई दिल्‍ली। आज के दौर में जहां मोबाइल फोन और इंटरनेट जीवन की अनिवार्य जरूरत बन चुके हैं, वहीं भारत के सबसे ताकतवर सुरक्षा विशेषज्ञों में से एक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एनएसए (NSA) अजीत डोभाल ने अपनी एक अनूठी आदत से सबको चौंका दिया है। शनिवार को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ के उद्घाटन सत्र में उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए बताया कि वे आज भी मोबाइल फोन और इंटरनेट का उपयोग नहीं करते हैं।

    डोभाल ने कहा, “फोन और इंटरनेट ही संवाद के एकमात्र माध्यम नहीं हैं। संपर्क करने के ऐसे कई अन्य तरीके हैं जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को पता तक नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल विशेष परिस्थितियों में ही फोन का उपयोग करते हैं, जैसे कि विदेश में रहने वाले लोगों या अपने परिवार से बात करने के लिए।

    उन्होंने युवाओं को धैर्य का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि संदेश हमेशा ईमानदारी से संप्रेषित होने चाहिए, न कि प्रोपेगेंडा के माध्यम से।
    कौन हैं अजीत डोभाल?
    अजीत डोभाल भारत के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। 1945 में उत्तराखंड में जन्मे डोभाल केरल कैडर के रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं। उनके नाम कई ऐसी उपलब्धियां दर्ज हैं जो किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती हैं। वे भारत के इतिहास में ‘कीर्ति चक्र’ पाने वाले सबसे युवा पुलिस अधिकारी हैं। सितंबर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक की योजना बनाने और उन्हें सफलतापूर्वक अंजाम देने में उनकी मुख्य भूमिका रही है। डोकलाम विवाद को सुलझाने और पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद को खत्म करने में उन्होंने कड़ा रुख अपनाया।
    पाकिस्तान में 7 साल ‘अंडरकवर’

    अजीत डोभाल का करियर हैरतअंगेज कारनामों से भरा रहा है। कहा जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान में एक ‘अंडरकवर’ एजेंट के रूप में 7 साल बिताए, जहां उन्होंने चरमपंथी समूहों की खुफिया जानकारी इकट्ठा की। इसके बाद उन्होंने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में 6 साल तक काम किया। 1971 से 1999 के बीच उन्होंने इंडियन एयरलाइंस के कम से कम 15 अपहरण मामलों को सुलझाया। 1999 के कुख्यात कंधार कांड (IC-814) में वे मुख्य वार्ताकारों में से एक थे। मिजोरम और पंजाब में आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ उन्होंने जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई।

    युवा नेताओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने भावुक होकर कहा कि भारत ने अपनी आजादी के लिए बहुत भारी कीमत चुकाई है। कई पीढ़ियों ने इसके लिए नुकसान और कठिनाइयां झेली हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे भारत के समृद्ध इतिहास और उसकी उन्नत सभ्यता से प्रेरणा लें और देश के मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों के आधार पर एक शक्तिशाली भारत का निर्माण करें।

  • भारत में 100 करोड़ की 'डिजिटल डकैती' का भंडाफोड़

    भारत में 100 करोड़ की 'डिजिटल डकैती' का भंडाफोड़

    नई दिल्‍ली। दिल्ली पुलिस ने शनिवार को एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इसमें हजारों लोगों को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डरा-धमकाकर लगभग 100 करोड़ रुपये की ठगी की गई। आरोप है कि यह ठगी करने वाला गिरोह खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करता था और कहता था कि उनके मोबाइल नंबर आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में इस्तेमाल हुए हैं। इस सिंडिकेट के तार पाकिस्तान समेत कई देशों तक फैले हुए हैं।
    पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    कैसे दिया जाता था ठगी को अंजाम
    दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (IFSO) विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर 2025 से शुरू हुई इस ठगी में फ्रॉडस्टर्स पीड़ितों को फोन कर पहलगाम हमला और दिल्ली के रेड फोर्ट ब्लास्ट जैसे आतंकी मामलों से उनके फोन नंबरों के जुड़े होने का आरोप लगाते थे। उन्हें तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी जाती थी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था। इस पूरे नेटवर्क का संचालन चीन, नेपाल, कंबोडिया, ताइवान और पाकिस्तान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों द्वारा किया जा रहा था। अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक ताइवान का नागरिक भी शामिल है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिंडिकेट ने अवैध SIMBOX डिवाइसों का इस्तेमाल किया, जो कई SIM कार्ड रखकर अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को भारतीय नंबरों के रूप में दिखाते हैं। ये कॉल्स विदेशों (खासकर कंबोडिया) से आती थीं, लेकिन SIMBOX के जरिए स्थानीय दिखाई देती थीं।

    यानी विदेशी कॉल भी भारत की लोकल कॉल जैसी दिखाई देती है। फ्रॉडस्टर्स ने जानबूझकर 2G नेटवर्क का उपयोग किया ताकि रीयल-टाइम ट्रैकिंग मुश्किल हो जाए। SIMBOX में IMEI नंबरों को ओवरराइट और रोटेट किया जाता था, जिससे एक ही नंबर एक दिन में कई शहरों से आता दिखता था, जिससे जांच एजेंसियां भ्रमित हो जाती थीं।
    फॉरेंसिक जांच में 5,000 से ज्यादा कम्प्रोमाइज्ड IMEI नंबर और करीब 20,000 SIM कार्ड इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए। पुलिस ने दिल्ली, मुंबई और मोहाली से 22 SIMBOX डिवाइस, मोबाइल फोन, लैपटॉप, राउटर, CCTV कैमरे, पासपोर्ट और विदेशी SIM कार्ड बरामद किए।
    जांच और गिरफ्तारी
    दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट के डिप्टी कमिश्नर विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर में कई शिकायतें मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया और करीब 25 पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम बनाई गई। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) की मदद से तकनीकी जांच शुरू की गई।

    सबसे पहला SIM बॉक्स इंस्टॉलेशन गॉयला डेयरी, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में ट्रेस किया गया। इसके बाद एक महीने की गोपनीय निगरानी में दिल्ली के चार अलग-अलग इलाकों में सक्रिय ठिकानों का पता चला। छापेमारी में शशि प्रसाद (53) और परविंदर सिंह (38) को गिरफ्तार किया गया, जो कथित तौर पर दिल्ली में पांच जगहों पर इस अवैध इंफ्रास्ट्रक्चर को संभाल रहे थे।

  • नाबालिग को जेल में रखने के मामले में HC ने सरकार को लगाई फटकार, 5 लाख मुआवज़ा देने का आदेश

    नाबालिग को जेल में रखने के मामले में HC ने सरकार को लगाई फटकार, 5 लाख मुआवज़ा देने का आदेश

    पटना। पटना हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते एक नाबालिग को ₹5 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश दिया, जिसे बिहार पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने इस काम को भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसके मौलिक अधिकार का घोर उल्लंघन बताया।

    जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस रितेश कुमार की डिवीजन बेंच ने कहा कि गिरफ्तारी कानून की तय प्रक्रिया की पूरी तरह से अनदेखी करके सिर्फ़ डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DIG) के कहने पर की गई, जबकि नाबालिग को पहले ही चार्जशीट में बरी कर दिया गया।
    हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मुआवज़े की रकम और ₹15,000 का मुक़दमे का खर्च राज्य सरकार देगी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि यह खर्च उन दोषी पुलिस अधिकारियों की सैलरी से वसूला जाना चाहिए, जो प्रशासनिक जांच के बाद ज़िम्मेदार पाए जाएंगे।

    संक्षेप में मामला
    याचिकाकर्ता (एक नाबालिग) ने गैर-कानूनी हिरासत से रिहाई के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) की रिट याचिका दायर की। याचिकाकर्ता का नाम शुरू में ज़मीन विवाद और मारपीट के मामले में FIR में है।
    हालांकि, शुरुआती जांच के दौरान, IO को याचिकाकर्ता सहित दस आरोपियों के खिलाफ़ अपर्याप्त सबूत मिले। नतीजतन, 1 सितंबर, 2025 को चार्जशीट दायर की गई, जिसमें याचिकाकर्ता का नाम आरोपी के तौर पर था, लेकिन उस पर आरोप नहीं लगाए गए। इसलिए उसे ट्रायल के लिए नहीं भेजा गया।

    हालांकि, इसके बाद शिकायतकर्ता ने DIG, कोसी रेंज, सहरसा से संपर्क किया और याचिकाकर्ता-नाबालिग सहित दस आरोपियों को बरी किए जाने की शिकायत की।

    DIG ने एक सुपरविज़न नोट में IO को जांच आगे बढ़ाने का यह मानते हुए निर्देश दिया कि आरोप सच हैं और निर्देश दिया कि बाकी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए।
    DIG के सुपरविज़न नोट को केस डायरी में शामिल किया गया और फिर IO सीधे आरोपी के घर पर छापा मारने गया। उसने मौजूदा याचिकाकर्ता को गिरफ्तार कर लिया, उसकी उम्र 19 साल बताई और उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

    दरअसल, मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के समय भी इस बात पर ध्यान नहीं दिलाया गया कि याचिकाकर्ता का नाम केस में चार्जशीट न किए गए लोगों की लिस्ट में था। यहां तक ​​कि संबंधित मजिस्ट्रेट ने भी मामले के इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया।

    सीधे-सीधे, बिना सोचे-समझे, याचिकाकर्ता को जेल भेज दिया।
    हाईकोर्ट की टिप्पणियां
    बेंच ने पुलिस के काम करने के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई। उसने कहा कि एक बार जब चार्जशीट दायर हो गई, जिसमें याचिकाकर्ता को ट्रायल के लिए नहीं भेजा गया दिखाया गया, तो IO मजिस्ट्रेट के सामने आगे की जांच के लिए आवेदन किए बिना उसे गिरफ्तार नहीं कर सकता।

    कोर्ट ने कहा:
    “इस मामले में याचिकाकर्ता की आज़ादी छीन ली गई और पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई से उसके जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हुआ। DIG, कोशी रेंज का आरोपों को सच मानकर मामले की जांच करने का निर्देश निर्दोषता की धारणा के सिद्धांतों के खिलाफ है, जो आपराधिक कानून न्यायशास्त्र का मुख्य सिद्धांत है। I.O. ने बिना किसी ठोस सबूत के 16 साल से कम उम्र के छात्र याचिकाकर्ता को गिरफ्तार कर लिया।

    वह इस मामले में ऐसा नहीं कर सकता था।”
    हाईकोर्ट ने इस मामले में क्षेत्राधिकार मजिस्ट्रेट की भूमिका पर भी असंतोष व्यक्त किया। उसने कहा कि जब याचिकाकर्ता को पेश किया गया तो मजिस्ट्रेट यह देखने में विफल रहा कि पिछली रिपोर्ट में उसे ‘चार्जशीटेड नहीं’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया।
    इसके अलावा, उसने कहा कि याचिकाकर्ता के नाबालिग होने के बावजूद (बाद में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने पुष्टि की कि घटना के समय उसकी उम्र 15 साल, 06 महीने और 08 दिन थी), मजिस्ट्रेट ने उसे ऑब्जर्वेशन होम के बजाय जेल भेज दिया क्योंकि उसने बिना सोचे-समझे काम किया।

    कोर्ट ने दुख जताते हुए कहा,
    “जांच एजेंसी द्वारा पावर के गलत इस्तेमाल और याचिकाकर्ता के अधिकार और आज़ादी की रक्षा करने में कोर्ट की नाकामी के कारण उसे अब तक ढाई महीने से ज़्यादा समय तक जेल में रहना पड़ा है”।
    इस पृष्ठभूमि में हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड द्वारा ऑब्जर्वेशन होम/चिल्ड्रन होम से तुरंत रिहा किया जाए। इस संबंध में, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड, मधेपुरा द्वारा तुरंत एक उचित रिहाई आदेश जारी किया जाएगा।

    कोर्ट ने राज्य को आदेश दिया कि वह उस युवा लड़के को एक महीने के अंदर शारीरिक और मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे के तौर पर ₹5 लाख का भुगतान करे। इसके अलावा, उसे मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर ₹15,000 दिए गए।
    कोर्ट ने सक्षम अथॉरिटी/पुलिस महानिदेशक, बिहार को भी निर्देश दिया कि वे इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच करें, जांच के दौरान सामने आने वाले सबूतों के आधार पर उचित कार्रवाई करें, और दोषी अधिकारियों से लागत और मुआवजे की रकम वसूल करें।

    कोर्ट ने आदेश दिया,
    “याचिकाकर्ता को दिए जाने वाला जुर्माना और मुआवजे की रकम जांच पूरी होने के बाद इस आदेश की कॉपी मिलने/सूचित होने की तारीख से छह महीने के अंदर दोषी अधिकारियों से वसूल की जाएगी”। याचिकाकर्ता की ओर से वकील शाश्वत कुमार, अमन आलम और अमरनाथ कुमार पेश हुए।

  • माघ मेला 2026: ‘मेला सेवा एप’ से श्रद्धालुओं को डिजिटल मार्गदर्शन, QR कोड से सीधे प्रशासन से जुड़ाव

    माघ मेला 2026: ‘मेला सेवा एप’ से श्रद्धालुओं को डिजिटल मार्गदर्शन, QR कोड से सीधे प्रशासन से जुड़ाव


    नई दिल्ली। प्रयागराज में आयोजित हो रहे माघ मेला 2026 में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सहज अनुभव को बढ़ाने के लिए मेला प्रशासन ने तकनीकी नवाचारों को लागू किया है। इसी कड़ी में इस वर्ष ‘माघ मेला सेवा एप’ को लॉन्च किया गया, जो मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक डिजिटल सहायक का काम करेगा।

    शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया और इस एप का औपचारिक शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री ने मेला के आगामी प्रमुख स्नान पर्वों की तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने तीर्थयात्रियों को डिजिटल मार्गदर्शन प्रदान करने के उद्देश्य से ‘मेला सेवा एप’ का लोकार्पण किया।

    यह एप श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराएगा। मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि एप का डिज़ाइन इस प्रकार किया गया है कि मेला क्षेत्र के किसी भी हिस्से में मौजूद श्रद्धालु या पर्यटक सीधे अपनी समस्या या सुझाव मेला प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे। इसके लिए मेला क्षेत्र में स्थापित सभी बिजली के खंभों पर QR कोड लगाए गए हैं। श्रद्धालु अपने मोबाइल फोन से इन QR कोड को स्कैन करके ऑनलाइन फॉर्म भरकर अपनी समस्या दर्ज कर सकते हैं।

    इस एप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह डिजिटल शिकायत एवं मार्गदर्शन प्रणाली के जरिए प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच सीधे संवाद की सुविधा प्रदान करता है।

    समस्या दर्ज होते ही संबंधित विभागों की टीम सक्रिय होकर उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित करेगी। इस प्रकार श्रद्धालुओं को अब पारंपरिक पद्धति की तुलना में अधिक तेज, सहज और प्रभावी सेवा प्राप्त होगी।

    माघ मेले में यह पहल पहली बार लागू की गई है और इसे सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल मेला बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। एप के माध्यम से श्रद्धालु न केवल शिकायत दर्ज कर सकेंगे, बल्कि मेले में होने वाली विभिन्न सुविधाओं, मार्गदर्शन, स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी जानकारी भी सीधे प्राप्त कर सकेंगे।

    इस डिजिटल नवाचार से माघ मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के अनुभव को और सहज बनाने के साथ ही प्रशासन की कार्यकुशलता भी बढ़ेगी। QR कोड और मोबाइल एप के माध्यम से श्रद्धालुओं को स्थानिक मार्गदर्शन, हेल्पलाइन संपर्क और शिकायत निवारण जैसी सेवाएं तुरंत उपलब्ध होंगी।

    इस पहल से यह सुनिश्चित होगा कि माघ मेले में पहली बार तकनीक का प्रयोग करते हुए श्रद्धालुओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो और उन्हें एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित मेला अनुभव प्राप्त हो। यह कदम मेला प्रशासन को अधिक पारदर्शी, त्वरित और श्रद्धालु-केंद्रित बनाएगा। माघ मेला सेवा एप श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल मार्गदर्शन, शिकायत समाधान, और त्वरित प्रशासनिक संपर्क का एक नया आयाम खोल रहा है। QR कोड आधारित इस नवाचार से माघ मेला 2026 और अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीकी रूप से आधुनिक बन रहा है।
  • हर-हर महादेव की गूंज, ॐ का उच्चारण और भव्य ड्रोन शो: पीएम मोदी ने सोमनाथ की दिव्यता को किया प्रदर्शित, शौर्य यात्रा में शामिल हुए

    हर-हर महादेव की गूंज, ॐ का उच्चारण और भव्य ड्रोन शो: पीएम मोदी ने सोमनाथ की दिव्यता को किया प्रदर्शित, शौर्य यात्रा में शामिल हुए


    गुजरात सोमनाथ । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी गुजरात यात्रा के दूसरे दिन सोमनाथ मंदिर में दिव्य अनुभव का अनोखा प्रदर्शन किया। शनिवार शाम को पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर के परिसर में हर-हर महादेव की गूंज के साथ प्रवेश किया और उसके बाद पवित्र महाआरती में हिस्सा लिया। इस अवसर पर ॐ का उच्चारण और भव्य ड्रोन शो ने समां बांध दिया, जिसे पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर भी साझा किया।

    सोमनाथ स्वाभिमान पर्व और 1000 साल की यात्रा

    सोमनाथ मंदिर इस समय दो महत्वपूर्ण कारणों से चर्चा में है। एक तरफ, यह वर्ष 1026 में महमूद गजनवी द्वारा मंदिर पर हमले और इसके ध्वस्त होने के 1000 साल पूरे होने का समय है। दूसरी तरफ यह 11 मई 1951 को स्वतंत्र भारत में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ भी है। पीएम मोदी ने इस खास मौके पर इस समारोह को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का नाम दिया।

    सोमनाथ की दिव्यता का उद्घाटन

    पीएम मोदी ने कहा सोमनाथ शाश्वत दिव्यता की एक ज्योति के रूप में खड़ा है। सोमनाथ की पावन धरा से निकला यह प्रकाशपुंज पूरे विश्व को भारत की सांस्कृतिक शक्ति का संदेश दे रहा है। उनके मुताबिक सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि यह हमारे समाज और संस्कृति की हिम्मत और गौरव का प्रतीक है।

    ड्रोन शो और आधुनिक तकनीक का संगम

    पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर परिसर में भव्य ड्रोन शो देखने का अनुभव साझा किया। इस अद्भुत शो में प्राचीन आस्थाओं के साथ आधुनिक तकनीक का तालमेल हर किसी को मंत्रमुग्ध कर गया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का यह प्रकाशपुंज पूरी दुनिया में भारत की सांस्कृतिक शक्ति का संदेश दे रहा है।

    ॐ का महत्व

    सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान पीएम मोदी ने ॐ का विशेष महत्व बताया। उन्होंने कहा, ॐ हमारे वेदों, शास्त्रों पुराणों उपनिषदों और वेदांत का सार है। ॐ ही ध्यान का मूल है, और योग का आधार है। ॐ ही साधना में साध्य है और ॐ ही शब्द ब्रह्म का स्वरूप है। पीएम मोदी ने इस दौरान 1000 सेकंड्स तक सामूहिक रूप से ओंकार नाद का उच्चारण किया जिससे माहौल में अद्भुत ऊर्जा का संचार हुआ।

    शौर्य यात्रा का आयोजन

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी यात्रा की शुरुआत शौर्य यात्रा से की, जो सोमनाथ के शंख सर्किल से शुरू हुई। इस यात्रा में पीएम मोदी ने डमरू बजाया और यात्रा एक किलोमीटर लंबी रही। इसके बाद उन्होंने सोमनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा अर्चना की।

    अगला कदम सार्वजनिक सभा

    इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह 11 बजे सद्भावना ग्राउंड में सार्वजनिक सभा को संबोधित किया जहां उन्होंने अपने संदेशों और विचारों से उपस्थित जनसमूह को प्रेरित किया।

  • मैं नितेश राणे की जुबान काट दूंगा,’ अखिलेश यादव के नेता अबू आजमी के बिगड़े बोल, कहा- बौना सा मंत्री है, नेपाली दिखता है

    मैं नितेश राणे की जुबान काट दूंगा,’ अखिलेश यादव के नेता अबू आजमी के बिगड़े बोल, कहा- बौना सा मंत्री है, नेपाली दिखता है


    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र राज्य अध्यक्ष अबू आजमी ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे पर विवादित टिप्पणी की है। अबू आजमी ने राणे को बौना मंत्री और नेपाली बताते हुए धमकी दी कि अगर उन्हें ताकत मिले तो वह नितेश राणे की जुबान काट देंगे। अबू आजमी का यह बयान नितेश राणे के हालिया हिंदुत्व से जुड़ी टिप्पणियों और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयानबाजी पर आया है। आजमी ने राणे के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा यह बौना मंत्री बोलता है कि मस्जिद में घुसकर मुसलमानों को मारूंगा। क्या हम हिंजड़े हैं क्या हमें मारेगा तू उन्होंने आगे कहा कि अगर उनके पास शक्ति हो तो वह इस बौने मंत्री की जुबान काट डालेंगे और उसे सबक सिखाएंगे।

    नितेश राणे के बयान पर प्रतिक्रिया

    नितेश राणे के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर दिए गए बयान के बाद यह विवाद उठ खड़ा है। राणे ने कहा था कि वह हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के लिए काम कर रहे हैं और किसी भी प्रकार के धर्मनिरपेक्षता या ध्रुवीकरण के लिए नहीं। उन्होंने विशेष रूप से रामनवमी या हनुमान जयंती जैसे धार्मिक जुलूसों में पत्थरबाजी की घटनाओं पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि जब ईद और मुहर्रम शांतिपूर्वक मनाए जा सकते हैं, तो रामनवमी या हनुमान जयंती पर ऐसा क्यों होता है। राणे ने कहा था कि उनका किसी खास समुदाय से विरोध नहीं है, लेकिन जो लोग जिहाद करना चाहते हैं, उनके खिलाफ उनकी आपत्ति स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग वंदे मातरम नहीं बोलते उन्हें पाकिस्तान भेजा जाना चाहिए।

    अबू आजमी की कड़ी प्रतिक्रिया

    अबू आजमी ने नितेश राणे के इस बयान का विरोध करते हुए कहा कि राणे का यह बयान मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़काऊ है। उन्होंने सवाल किया कि अगर राणे इतना बहादुर हैं तो क्यों नहीं मस्जिद में जाकर दिखाते हैं कि वह क्या कर सकते हैं। आजमी ने यह भी कहा कि राणे जैसे लोग यह कहते हैं कि अगर देश में रहना है तो वंदे मातरम बोलना होगा, लेकिन वह यह नहीं समझते कि हमें राम नवमी के दिन पानी लेकर खड़ा रहने का गर्व है।

    सपा नेता की भाषा पर सवाल


    आजमी का बयान, जो कि भारतीय राजनीति में एक नई कड़ी विवाद को जन्म दे सकता है, कई लोगों को आपत्ति दे रहा है। उनकी भाषा और बयानों में हिंसा की ओर इशारा करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे असहिष्णुता की ओर बढ़ने वाला कदम बताया है।

  • दांव पड़ा उल्टाः ऑडी मालिक ने किया बीमा क्लेम लेकिन हो गया खेला, कोर्ट ने लाल किला ब्लास्ट पीड़ितों को फंड देने का सुनाया फैसला

    दांव पड़ा उल्टाः ऑडी मालिक ने किया बीमा क्लेम लेकिन हो गया खेला, कोर्ट ने लाल किला ब्लास्ट पीड़ितों को फंड देने का सुनाया फैसला


    नई दिल्ली । एक शख्स ने सेकंड हैंड ऑडी कार के चोरी होने का दावा करते हुए इंश्योरेंस क्लेम का आवेदन किया लेकिन अदालत ने उसे राहत देने के बजाय 50 हजार रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया। यह मामला कुछ खास था क्योंकि अदालत ने पाया कि इस दावे में एक बड़ा धोखाधड़ी का मामला था जिसमें ऑटो डीलर, वादी और इंश्योरेंस कंपनी के कर्मचारियों के बीच साजिश थी। अदालत का मानना था कि इस मामले में बीमा पॉलिसी के तहत चोरी की गई ऑडी कार का दावा पूरी तरह से अवैध था और यह स्थिति दिल्ली में हुए पिछले साल के लाल किले के बम धमाके से जुड़ी हुई थी।

    क्या था पूरा मामला

    दिलबाग सोलंकी ने दावा किया था कि उसने 2020 में गुलशाद और इतखाब हुसैन से 29 लाख रुपये में एक सेकंड हैंड ऑडी कार खरीदी थी और इस पर उसने नैशनल इंश्योरेंस कंपनी से इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। इसके बाद 22 जनवरी 2021 को कार चोरी हो गई और पुलिस ने इस मामले में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल की जिसे अदालत ने मंजूर भी कर लिया। हालांकि इंश्योरेंस कंपनी ने यह दावा खारिज कर दिया यह कहते हुए कि कार के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य छुपाए गए थे और पॉलिसी में धोखाधड़ी की गई थी। इंश्योरेंस कंपनी ने यह तर्क भी दिया कि इस कार की हालत पहले खराब थी, यह गिरवी रखी हुई थी और कोविड लॉकडाउन के दौरान इसे रांची से दिल्ली ले जाने के किसी सबूत के बिना इसे संदिग्ध तरीके से ट्रांसफर किया गया था। इसके अलावा पॉलिसी पर वादी के साइन भी नहीं थे जो इसे अमान्य बनाता था।

    लाल किले बम धमाका और इसकी कड़ी

    अदालत ने इस मामले को लाल किले पर हुए बम धमाके से जोड़ते हुए कहा कि कुछ गाड़ियां, जिन्हें कार डीलरों के जरिए नकली नामों से खरीदी गई थीं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की साजिश थी। यह गाड़ियां दिल्ली में विस्फोट करने के लिए इस्तेमाल की जानी थीं लेकिन जांच एजेंसियों ने इस साजिश को विफल कर दिया। अदालत ने यह भी कहा कि जिस गाड़ी का दावा किया जा रहा था, वह कभी दिल्ली में दिखी ही नहीं, और चोरी होने का दावा दिल्ली में किया गया था।

    कोर्ट का आदेश

    अदालत ने इस मामले में गाड़ी मालिक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और इंश्योरेंस कंपनी के दावे को खारिज कर दिया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इस धोखाधड़ी के मामले में संबंधित पक्षों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • Census 2027: डिजिटल जनगणना से बदलेगा भारत का राजनीतिक, आर्थिक और नीतिगत भविष्य, हर घर–हर व्यक्ति का बनेगा रिकॉर्ड

    Census 2027: डिजिटल जनगणना से बदलेगा भारत का राजनीतिक, आर्थिक और नीतिगत भविष्य, हर घर–हर व्यक्ति का बनेगा रिकॉर्ड


    नई दिल्ली।
    भारत एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा है। अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रही Census 2027 न सिर्फ देश की 16वीं जनगणना होगी, बल्कि यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना के रूप में दर्ज होगी। इस बार गिनती केवल आबादी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर घर, हर व्यक्ति और हर इलाके का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जो आने वाले वर्षों में देश की राजनीति, नीतियों और विकास की दिशा तय करेगा।

    इस ऐतिहासिक जनगणना में करीब 30 लाख (3 मिलियन) एंयूरेटर मैदान में उतरेंगे, जो Android और iOS आधारित मोबाइल ऐप के जरिए डेटा एकत्र करेंगे।

    पहली बार नागरिकों को सेल्फ-एंयूरेशन की सुविधा भी दी जाएगी, जिसमें लोग 15 दिन के भीतर खुद अपने परिवार और घर से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इससे न केवल प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि डेटा की सटीकता और पारदर्शिता भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ेगी।

    डिजिटल जनगणना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित न रहकर सही लोगों तक पहुंचेंगी। अब यह साफ तौर पर पता चलेगा कि किस जिले, गांव या शहरी वार्ड में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है। इससे संसाधनों का बेहतर बंटवारा होगा और योजनाओं की प्रभावशीलता जमीन पर दिखाई देगी।

    Census 2027 का असर केवल सामाजिक नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर भी बेहद गहरा होगा। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी GDP अनुमानों के साथ जब जनगणना के आंकड़े जुड़ेंगे, तब यह स्पष्ट हो सकेगा कि आर्थिक विकास का असली लाभ आम नागरिक तक पहुंच रहा है या नहीं।

    यह डेटा सरकार को यह समझने में मदद करेगा कि किन क्षेत्रों में योजनाएं सफल रहीं और कहां सुधार की जरूरत है।

    राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह जनगणना बेहद निर्णायक साबित हो सकती है। इसके आधार पर भविष्य में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों के पुनर्निर्धारण (डिलिमिटेशन) का रास्ता साफ होगा। दक्षिण और पश्चिमी राज्यों में जन्म दर नियंत्रण की वजह से जनसंख्या स्थिर है, जबकि उत्तर, मध्य और पूर्वी राज्यों में आबादी तेजी से बढ़ी है। नए आंकड़ों के बाद संसदीय सीटों का संतुलन बदल सकता है, जिससे राजनीतिक शक्ति का केंद्र भी प्रभावित होगा। इसका सीधा असर चुनावी रणनीतियों, प्रतिनिधित्व और नीति निर्माण पर पड़ेगा।

    Census 2027 में केवल जनसंख्या नहीं, बल्कि घर की स्थिति, भाषा, धर्म, शिक्षा स्तर, रोजगार, व्यापार गतिविधियां, प्रवास, जन्म और मृत्यु दर जैसी अहम जानकारियां भी जुटाई जाएंगी।

    यह डेटा गांव से लेकर शहर और वार्ड स्तर तक उपलब्ध होगा, जिससे योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान पहले से कहीं ज्यादा सटीक हो सकेगी। स्कूल, अस्पताल, सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं की योजना इसी डेटा के आधार पर बनाई जा सकेगी।

    हालांकि, इतनी बड़ी डिजिटल कवायद के साथ चुनौतियां भी कम नहीं हैं। ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और स्मार्टफोन की उपलब्धता, तकनीकी प्रशिक्षण, डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता जैसे मुद्दे सरकार के सामने बड़ी परीक्षा होंगे। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि डिजिटल प्रक्रिया के कारण कोई वर्ग या क्षेत्र पीछे न छूट जाए।

    इसके बावजूद, विशेषज्ञ मानते हैं कि Census 2027 भारत के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। यह न केवल देश की सामाजिक विविधता और आर्थिक ताकत को सामने लाएगी, बल्कि नीति निर्माताओं को ठोस और विश्वसनीय डेटा देगी, जिसके आधार पर भविष्य की योजनाएं बनाई जा सकेंगी।

    कुल मिलाकर, Census 2027 सिर्फ आंकड़ों की गिनती नहीं, बल्कि भारत की असली तस्वीर सामने लाने की कवायद है। हर घर और हर व्यक्ति की जानकारी जब डिजिटल रूप में दर्ज होगी, तब नीतियां ज्यादा सटीक, न्यायसंगत और असरदार बनेंगी। यह जनगणना भारत की राजनीति, विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देगी, जहां हर नागरिक की मौजूदगी नीति निर्माण में स्पष्ट रूप से नजर आएगी।

  • दिल्ली में बुजुर्ग NRI दंपति से डिजिटल ठगी: ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 14 करोड़ रुपये की ठगी

    दिल्ली में बुजुर्ग NRI दंपति से डिजिटल ठगी: ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 14 करोड़ रुपये की ठगी

    नई दिल्ली । डिजिटल ठगी के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जिसमें बुजुर्ग NRI दंपति को 18 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर ठगी का शिकार बनाया गया। यह मामला साइबर ठगी की गंभीरता को सामने लाता है। पीड़िता इंद्रा तनेजा और उनके पति ओम तनेजा ने बताया कि उन्हें 24 दिसंबर 2025 को खुद को TRAI अधिकारी बताने वाले ठग का फोन आया। कॉलर ने आरोप लगाया कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आपत्तिजनक कॉल्स और मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।ठगों ने दंपति को डराने के लिए लगातार दबाव बनाया और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया। इसके चलते 77 वर्षीय महिला ने 8 अलग-अलग ट्रांजेक्शन में 14 करोड़ रुपये RTGS के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए। कॉलर ने हर बार नए बहाने और कानूनी तर्क प्रस्तुत किए, जिससे दंपति मानसिक रूप से दबाव में रहे और उन्होंने ठगों की मांगें मान ली।

    पीड़ित दंपति के अनुसार, वे 2015-16 में अमेरिका से रिटायर होकर भारत लौटे थे और समाज सेवा में जुड़े हुए हैं। उनके खातों में इतनी बड़ी राशि का अचानक ट्रांसफर होना, ठगों की योजनाबद्ध साजिश को उजागर करता है। इंद्रा तनेजा ने बताया कि ठगों ने उन्हें बार-बार फोन कर धमकाया और कानून का हवाला देते हुए डराया।10 जनवरी 2026 (शनिवार) को पीड़ित दंपति ने दक्षिण दिल्ली जिले के सीआर पार्क थाने में शिकायत दर्ज कराई और 1930 साइबर हेल्पलाइन पर भी मामला दर्ज कराया। दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने इस मामले में FIR दर्ज कर गहन जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि जांच में इस बात की पुष्टि की जा रही है कि किस तरह ठगों ने डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर दंपति को निशाना बनाया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की साइबर ठगी के मामले डिजिटल अरेस्ट और सरकारी पदों का डर दिखाकर किए जाते हैं, जिससे पीड़ित मानसिक दबाव में आकर बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते हैं। पुलिस और साइबर सुरक्षा अधिकारी लगातार इस प्रकार के मामलों को रोकने और आम लोगों को सतर्क करने के लिए अभियान चला रहे हैं।दिल्ली पुलिस ने दंपति को सलाह दी है कि वे अपने बैंक खाते और ट्रांजेक्शन के विवरण को सुरक्षित रखें और किसी भी संदिग्ध कॉल पर विश्वास न करें। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल ठगी सिर्फ तकनीकी मामलों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मानसिक दबाव और डर के जरिये भी बड़े आर्थिक नुकसान कर सकती है।

  • सोमनाथ मंदिर: 1000 साल पहले तोड़ा गया, फिर पुनर्निर्माण से स्थापित हुआ भारतीय गौरव का प्रतीक

    सोमनाथ मंदिर: 1000 साल पहले तोड़ा गया, फिर पुनर्निर्माण से स्थापित हुआ भारतीय गौरव का प्रतीक


    गुजरात । मैं सोमनाथ हूं, वो मंदिर जहां भगवान शिव के दर्शन से पूरा संसार शिवमय हो जाता है। आज का दिन मेरे लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि ठीक 1000 साल पहले आज के दिन ही मुझे पहली बार तोड़ा गया था। यह वह दिन था जब मुस्लिम आक्रांता महमूद गजनवी ने इस पवित्र स्थल पर हमला किया और मुझसे जुड़ी हर उस चीज को लूटा, जो मेरे गौरव का प्रतीक था। रक्त रंजित मुझसे जुड़े हर टुकड़े को लूटने के बाद, मुझे नष्ट कर दिया गया। इसके बाद के शताब्दियों में कई मुस्लिम शासकों ने मुझे बार-बार लूटा और हर बार मेरी संरचना को तोड़ा, लेकिन भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बाद, मुझे पुनर्निर्मित किया गया और फिर से जगमगाया।

    सोमनाथ का ऐतिहासिक महत्व

    सोमनाथ मंदिर को भगवान शिव का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। शास्त्रों में इसे सबसे पहले स्थान पर रखा गया है, सौराष्ट्रे सोमनाथं च इस मंदिर का निर्माण चंद्रदेव ने स्वयं सोने से किया था फिर सूर्यदेव ने चांदी से और बाद में भगवान श्रीकृष्ण ने लकड़ी से इसे सुंदर रूप दिया। सोलंकी राजपूत शासकों ने इस मंदिर को पत्थर से भव्य रूप प्रदान किया जो इसे आज के रूप में देख सकते हैं। सोमनाथ मंदिर की किवदंती चंद्रदेव के साथ जुड़ी हुई है जो भगवान शिव की तपस्या करने के लिए यहां आए थे। यही कारण है कि यह मंदिर चंद्र से जुड़ा एकमात्र शिव तीर्थ माना जाता है।

    महमूद गजनवी द्वारा हमले

    सोमनाथ मंदिर की सबसे दुखद घटना 1025 ईस्वी की है, जब महमूद गजनवी ने इस मंदिर पर हमला किया और इसे लूटकर नष्ट कर दिया। गजनवी ने मंदिर के चंदन द्वार को लूटकर अफगानिस्तान के गजनी में मस्जिद में स्थापित कर दिया था। कई बार लूटने और तोड़ने के बावजूद मंदिर का आंतरिक गर्भगृह हमेशा शांति से बना रहा। स्वतंत्रता के बाद 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ का दौरा किया और गजनवी द्वारा लूटे गए चंदन द्वार को वापस लाकर मंदिर में स्थापित किया।

    मंदिर की अद्भुत वास्तुकला

    सोमनाथ मंदिर को चालुक्य शैली में बनाया गया है, और इसका शिखर 155 फीट ऊंचा है। मंदिर में सोने का कलश और विशाल मंडपम हैं जो इसे और भी भव्य बनाते हैं। बाणस्तंभ जो एक दिशासूचक स्तंभ है इसे मंदिर परिसर में देखा जा सकता है। इस स्तंभ पर समुद्र की दिशा में बने तीर का निशान भी स्पष्ट रूप से दिखता है। इस पर संस्कृत में लिखा है, आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव पर्यंत, अबाधित ज्योर्तिमार्ग यानी यहां से दक्षिण ध्रुव तक कोई भूमि नहीं है।

    समुद्र और शिव की कृपा

    सोमनाथ मंदिर अरब सागर के किनारे स्थित है, लेकिन एक अद्भुत बात यह है कि समुद्र की लहरें कभी भी मंदिर के गर्भगृह तक नहीं पहुंच पाई हैं। स्थानीय पंडितों के अनुसार यह भगवान शिव की कृपा का प्रतीक है। माना जाता है कि समुद्र महादेव की मर्यादा को कभी नहीं लांघता जिससे मंदिर सुरक्षित रहता है।